Top News : साल का आखिरी सूर्य ग्रहण आज, जुकरबर्ग की AI चेतावनी, पान मसाला की पैकेजिंग पर बड़ा फैसला

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Top News 12 August : आज 2026 का आखिरी सूर्य ग्रहण है। तुर्की में अमेरिकी राष्‍ट्रपति ने किया था गुप्त सैन्य विमान का इस्तेमाल। AI पर मेटा के मार्क जुकरबर्ग ने अमेरिका को दी चेतावनी। FSSAI ने पान मसाला की प्लास्टिक पैकेजिंग पर रोक लगाई। आज की बड़ी खबरें : 

 

साल का आखिरी सूर्य ग्रहण

12 अगस्त को साल का आखिरी सूर्य ग्रहण है। यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण यानी एक खग्रास ग्रहण होगा। इसकी शुरुआत 12 अगस्त को भारतीय समयानुसार रात 09 बजकर 4 मिनट होगी और समापन 13 अगस्त की सुबह 4 बजकर 25 मिनट होगी। इस सूर्य ग्रहण को दुनिया के कई हिस्सों में देखा जा सकेगा लेकिन यह भारत में नहीं दिखाई देगा। इसलिए भारत में इसका सूतकाल मान्य नहीं है। ALSO READ: Solar eclipse 2026: सबसे दुर्लभ सूर्यग्रहण, छा जाएगा इन देशों में दिन में अंधेरा, भारत पर क्या होगा असर?

 

देश के कई राज्यों में मानसून सक्रिय

देश के कई राज्यों में मानसून सक्रिय है। नदियां उफान पर है और सड़कों पर पानी भरा हुआ है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, मध्यप्रदेश, राजस्थान, ओडिशा के साथ ही पहाड़ी और पूर्वोत्तर के राज्यों में आज भी भारी बारिश की संभावना है। बंगाल की खाड़ी में उत्तर पश्चिम हिस्से में एक कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है।

 

AI पर जुकरबर्ग की अमेरिका को चेतावनी

Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में अमेरिका के चीन से पिछड़ने के खतरे को लेकर चेतावनी दी है। जुकरबर्ग ने कहा कि जो देश एडवांस्ड AI के विकास और उसके इस्तेमाल में नेतृत्व करेगा, वह भविष्य में वैश्विक भू-राजनीतिक शक्ति संतुलन को प्रभावित करेगा। ALSO READ: चीन की AI रफ्तार से क्यों बढ़ी टेंशन, मार्क जुकरबर्ग ने दी बड़ी चेतावनी, अमेरिका को क्या दी सलाह
 

तुर्की में ईरान के निशाने पर थे अमेरिकी राष्ट्रपति?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक ऐसा ही विस्फोटक खुलासा हुआ है जिसने वाशिंगटन से लेकर तेहरान तक सनसनी फैला दी है। कैमरों के सामने पुरानी 'बेबी ब्लू' एयरफोर्स वन में सवार हुए डोनाल्ड ट्रंप, लेकिन गंतव्य तक किसी बेहद गुप्त तीसरे सैन्य विमान से पहुंचे। ALSO READ: जब ईरानी हमले के डर से ट्रंप ने बदले 3 प्लेन : तुर्की में ईरान के निशाने पर थे अमेरिकी राष्ट्रपति? कैटरिंग ट्रक के पीछे छिपे सबसे बड़े सीक्रेट ऑपरेशन की पूरी कहानी

 

पान मसाला की प्लास्टिक पैकेजिंग पर रोक

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पान मसाला की पैकेजिंग को लेकर नए नियम जारी किए हैं। इनके तहत पान मसाला निर्माताओं को प्लास्टिक मुक्त कागज, पेपरबोर्ड, सेलुलोज या अन्य प्राकृतिक रूप से प्राप्त सामग्री का इस्तेमाल करना होगा। इसके अलावा पैकेजिंग के लिए टिन या ग्लास के कंटेनर भी इस्तेमाल किए जा सकेंगे। ALSO READ: पान मसाला की प्लास्टिक पैकेजिंग पर रोक, FSSAI ने तय किए नए पैकेजिंग नियम

 

जब ईरानी हमले के डर से ट्रंप ने बदले 3 प्लेन : तुर्की में ईरान के निशाने पर थे अमेरिकी राष्ट्रपति? कैटरिंग ट्रक के पीछे छिपे सबसे बड़े सीक्रेट ऑपरेशन की पूरी कहानी

US Secret Operation

US Secret Operations: कैमरों के सामने पुरानी 'बेबी ब्लू' एयरफोर्स वन में सवार हुए डोनाल्ड ट्रंप, लेकिन गंतव्य तक पहुंचे किसी बेहद गुप्त तीसरे सैन्य विमान से—पढ़िए अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा में हुए अब तक के सबसे असाधारण और सनसनीखेज हेरफेर की अंदरूनी परतें।

1. कैमरों का धोखा और एयरफोर्स वन की 'शैडो' फ्लाइट

वैश्विक कूटनीति और खुफिया रणनीति के इतिहास में कुछ ऐसी घटनाएं दर्ज होती हैं जो किसी हॉलीवुड सस्पेंस थ्रिलर फिल्म की पटकथा से भी अधिक हैरतअंगेज होती हैं। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक ऐसा ही विस्फोटक खुलासा हुआ है जिसने वाशिंगटन से लेकर तेहरान तक सनसनी फैला दी है।

घटनाक्रम की शुरुआत तुर्की की राजधानी अंकारा से हुई, जहां डोनाल्ड ट्रंप नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे थे। सम्मेलन के समापन के बाद ट्रंप को ब्रिटेन के लिए रवाना होना था। वैश्विक मीडिया के कैमरे अंकारा एयरपोर्ट के रनवे पर तैनात थे। दुनिया की नजरों के सामने डोनाल्ड ट्रंप अपने परिचित और ऐतिहासिक नीले रंग वाले पारंपरिक अमेरिकी राष्ट्रपति विमान—'बेबी ब्लू एयरफोर्स वन' (Boeing VC-25A) में चढ़ते हुए दिखाई दिए।

पत्रकारों, फोटोग्राफरों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को पूरी तरह यही विश्वास था कि अमेरिकी राष्ट्रपति इसी विशालकाय और भव्य विमान से ब्रिटेन के लिए उड़ान भर रहे हैं। प्रेसब्रीफिंग में भी इसी आधिकारिक यात्रा योजना की पुष्टि की गई थी। खुद ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रूथ सोशल' (Truth Social) पर लिखा था कि वे तुर्की से यूके जाने के लिए पुराने दिनों की यादों को ताजा करते हुए अपने पारंपरिक 'बेबी ब्लू' एयरफोर्स वन का ही उपयोग कर रहे हैं। लेकिन यह तो महज एक रचा हुआ दृश्य था—असली खेल तो पर्दे के पीछे शुरू होना था।

2. हवाई अड्डे का कैटरिंग ट्रक और 'ऑपरेशन सीक्रेट शिफ्ट'

जैसे ही ट्रंप बेबी ब्लू एयरफोर्स वन के भीतर दाखिल हुए और विमान के दरवाजे बंद हुए, मीडिया का ध्यान रनवे की औपचारिकताओं पर केंद्रित हो गया। लेकिन विमान के भीतर प्रवेश करते ही पेंटागन और सीक्रेट सर्विस के अधिकारियों ने अति-गोपनीय सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू कर दिया।

अंकारा एयरपोर्ट के एक सुनसान और मीडिया की नजरों से दूर बने हिस्से में एक साधारण एयरपोर्ट कैटरिंग ट्रक (वह ट्रक जिससे विमानों के भीतर खाना और रसद पहुंचाया जाता है) को एयरफोर्स वन की पिछली सर्विस एंट्री से जोड़ा गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बेहद खामोशी से, बिना किसी तड़क-भड़क या आधिकारिक काफिले के, उस कैटरिंग ट्रक के कंटेनर में उतारा गया।

कैटरिंग ट्रक रणनीति का रहस्य : रनवे पर खड़े किसी भी निगरानी उपग्रह, ईरानी ड्रोन या स्थानीय सर्विलांस नेटवर्क के लिए कैटरिंग ट्रक की आवाजाही पूरी तरह सामान्य एयरपोर्ट गतिविधि मानी जाती है। सुरक्षा एजेंसियों ने इसी अंधबिंदु (Blind Spot) का फायदा उठाकर राष्ट्रपति को मुख्य विमान से बाहर निकाला।

उस कैटरिंग ट्रक के जरिए ट्रंप को एयरपोर्ट के दूसरी तरफ मुस्तैद खड़े एक छोटे अमेरिकी सैन्य विमान—C-32A (Boeing 757 का विशेष सैन्य रूपांतरण) में चुपके से शिफ्ट कर दिया गया। जब तक मीडिया और दुनिया सोच रही थी कि ट्रंप विशालकाय एयरफोर्स वन में आराम कर रहे हैं, तब तक ट्रंप C-32A विमान में सवार होकर वायुमंडल की ऊंचाइयों में उड़ चुके थे।

3. ईरान का डर और भौगोलिक संवेदनशीलता : सुरक्षा एजेंसियों के हाथ-पांव क्यों फूले?

इस हैरतअंगेज सीक्रेट ऑपरेशन के पीछे सबसे मुख्य और प्राथमिक कारण था—ईरान से बढ़ता सैन्य तनाव और सीधी सीमा निकटता। तुर्की की पूर्वी सीमा सीधे ईरान से सटी हुई है। जिस समय ट्रंप तुर्की में मौजूद थे, उस समय मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिका और ईरान के बीच स्थिति अत्यधिक विस्फोटक और नाजुक बनी हुई थी।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों (CIA और DIA) को इनपुट्स मिले थे कि ईरानी रिपब्लिकन गार्ड्स (IRGC) या उनके समर्थित प्रॉक्सी समूह राष्ट्रपति के विमान के फ्लाइट पाथ (Flight Path) और रडार सिग्नेचर की निगरानी कर सकते हैं।

  • रडार सिग्नेचर और डिकॉय (Decoy) रणनीति : एयरफोर्स वन (Boeing 747 आधारित VC-25A) का अपना एक विशिष्ट रडार और थर्मल सिग्नेचर होता है जिसे ट्रैक करना आसान होता है। यदि किसी हमलावर को राष्ट्रपति के सटीक लोकेशन और फ्लाइट कोड की जानकारी हो, तो मैनपैड्स (MANPADS) या सतह से हवा में मार करने वाली लंबी दूरी की मिसाइलों से खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
  • विमान बदलकर भ्रम पैदा करना : सीक्रेट सर्विस ने तीन अलग-अलग विमानों का इस्तेमाल करके एक त्रिकोणीय सुरक्षा घेरा तैयार किया। यदि कोई दुश्मन एयरफोर्स वन को ट्रैक कर रहा था, तो वे वास्तव में केवल डिकॉय विमान का पीछा कर रहे थे, जबकि राष्ट्रपति एक पूरी तरह अलग, छोटे और गैर-पारंपरिक सैन्य विमान C-32A में सुरक्षित सफर कर रहे थे।

4. तीन प्लेन और दो अलग-अलग लैंडिंग : RAF मिल्डनहाल पर रचा गया ड्रामा

इस पूरे ऑपरेशन में कुल तीन विमानों की भूमिका रही:

US Secret Operation

रात करीब 10:20 बजे अमेरिकी वायुसेना का C-32A विमान ब्रिटेन के RAF मिल्डनहाल एयरबेस पर उतरा। डोनाल्ड ट्रंप बिना किसी मीडिया कवरेज के चुपचाप उतरे और सुरक्षित ठिकाने पर पहुंचा दिए गए। इसके कुछ मिनटों बाद पुराना 'बेबी ब्लू' एयरफोर्स वन रनवे पर उतरा, जिसमें से व्हाइट हाउस का मीडिया दल बाहर निकला। बाहर से देखने पर सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन हकीकत में इतिहास का सबसे बड़ा डिकॉय ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा हो चुका था।

5. कतर से मिले नए लग्जरी प्लेन पर क्यों उठे गंभीर सवाल?

इस खुलासे के बाद एक और बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—कतर द्वारा अमेरिका को भेंट में दिए गए नए बोइंग 747-8 विमान की सुरक्षा पर संशय।

ट्रंप ने कतर से मिले इस बेहद आधुनिक और लग्जरी विमान से अपनी अंतरराष्ट्रीय यात्रा की शुरुआत की थी। यह इस विमान की पहली विदेशी उड़ान थी। लेकिन तुर्की से ब्रिटेन जाने के दौरान ट्रंप ने इस नए विमान का उपयोग नहीं किया। इसके दो मुख्य कारण सामने आ रहे हैं:

  1. सुरक्षा ऑडिट और टेस्टिग : यद्यपि विमान कतर से मिला था, लेकिन राष्ट्रपति के स्थायी उपयोग के लिए इसके संचार (Communication) और एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम का पेंटागन द्वारा पूर्ण परीक्षण किया जाना बाकी था। अति-संवेदनशील ईरानी तनाव के बीच पेंटागन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता था।
  2. विमान का विशाल आकार : नया बोइंग 747-8 आकार में अत्यधिक विशाल है, जिससे तुर्की जैसे संवेदनशील इलाके में इसे गुप्त रखना असंभव था। इसलिए C-32A जैसे छोटे और फुर्तीले विमान को वरीयता दी गई।

6. पेंटागन का मौन और व्हाइट हाउस का आधिकारिक बयान

इस गोपनीय उड़ान की खबर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में लीक होने के बाद हड़कंप मच गया। जब व्हाइट हाउस और पेंटागन से प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उनके उत्तर बेहद नपे-तुले रहे:

व्हाइट हाउस का आधिकारिक रुख: हम राष्ट्रपति की सुरक्षा से जुड़ी परिचालन संबंधी (Operational) विशिष्ट जानकारियों पर टिप्पणी नहीं करते। हालांकि, कतर से मिले नए विमान और सभी राष्ट्रपतीय उड़ानों के लिए उच्चतम स्तर के सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू हैं। राष्ट्रपति की सुरक्षा सर्वोपरि है।”

दूसरी ओर, पेंटागन ने इस पूरे मामले पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। हालांकि, सेवानिवृत्त अमेरिकी सैन्य अधिकारियों और खुफिया विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रिपोर्ट सटीक है, तो यह दर्शाता है कि ईरान की तरफ से खतरे का स्तर बेहद गंभीर था और अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां राष्ट्रपति को किसी भी तरह के सर्विलांस या टारगेटेड हमले से बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार थीं।

7. आधुनिक इतिहास का सबसे चालाक डिकॉय ऑपरेशन

ट्रंप की सीक्रेट फ्लाइट का यह खुलासा न केवल अमेरिकी राष्ट्रपति की बहुस्तरीय सुरक्षा परत (Multi-layered Security Protocol) को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि वैश्विक कूटनीति के पीछे भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) कितने खौफनाक मोड़ ले सकते हैं।

कैमरों के सामने खड़ा चमकता हुआ विशालकाय एयरफोर्स वन एक छलावा मात्र था, मीडिया दल एक अनजाने डिकॉय का हिस्सा था, और कैटरिंग ट्रक के अंधेरे से होकर निकला C-32A विमान अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा की नई ढाल बना। ईरान और अमेरिका के बीच पर्दे के पीछे चल रही इस शह और मात की जंग में, तुर्की के आसमान पर खेला गया यह 3-प्लेन गेम इतिहास के सबसे सनसनीखेज सुरक्षा ऑपरेशनों में दर्ज हो चुका है।

12 अगस्त 2026 सूर्य ग्रहण का भारत पर प्रभाव और दान का महत्व

सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026

12 अगस्त 2026 को रात 9:04 बजे से 13 अगस्त की देर रात 1:28 बजे तक पूर्ण सूर्य ग्रहण लगेगा, जिस का समापन लगभग 4 बजे तक रहेगा, यह ग्रहण भारत में नहीं दृश्य होगा

इसलिए भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा और कोई धार्मिक प्रभाव नहीं पड़ेगा,
यह एक खगोलीय घटना है, इसलिए इसका पूर्ण प्रभाव देश दुनिया ,प्राकृतिक, सरकारी और न्यायिक व्यवस्था पर पड़ेगा


सूर्य आत्मा, सत्ता, शासन का प्रतिनिधित्व करता है

1- इस लिये न्यायिक व्यवस्था से लेकर शासन सत्ता प्रभावित रहेगी, शीर्ष पर बैठे लोगों को चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा,
2- वही जलतत्व राशि कर्क में यह ग्रहण लगेगा जो प्राकृतिक आपदाओं खासकर जल संबंधी समस्याएं, भूकंप की संभावनाओं को बढ़ाएगा
क्योंकि आजाद भारत की कुंडली देखी जाए तो वृष लग्न और कर्क राशि विद्यमान है
कर्क में ही ग्रहण होने के कारण इसका सीधा प्रभाव भारत की व्यवस्थाओं, प्रकृति और आर्थिक पक्ष पर पड़ेगा
हालांकि मुख्य रूप से यह ग्रहण यूरोप (स्पेन, आइसलैंड, पुर्तगाल) और ग्रीनलैंड में दिखाई देगा

साल का यह आखिरी सूर्य ग्रहण बुद्ध के नक्षत्र अश्लेषा में घटित होगा इसलिए भारतीय बाजार और अर्थव्यवस्था में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा


अचानक से बड़े बदलाव की संभावना भी बनती दिख रही है

ग्रहण के सकारात्मक परिणाम मुंह को ग्रहण करने के लिए 13 तारीख सुबह स्नान ध्यान के बाद दान अवश्य करें गेहूं गुड मिश्रित अनाज , का दान करना श्रेष्ठ है
वही 13 तारीख सूर्य दर्शन कर सूर्य मित्रों का जाप करना भी श्रेष्ठ रहेगा

चीन की AI रफ्तार से क्यों बढ़ी टेंशन, मार्क जुकरबर्ग ने दी बड़ी चेतावनी, अमेरिका को क्या दी सलाह

mark zukarburg

Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में अमेरिका के चीन से पिछड़ने के खतरे को लेकर चेतावनी दी है। जुकरबर्ग ने कहा कि जो देश एडवांस्ड AI के विकास और उसके इस्तेमाल में नेतृत्व करेगा, वह भविष्य में वैश्विक भू-राजनीतिक शक्ति संतुलन को प्रभावित करेगा। उन्होंने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों से AI की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच ऊर्जा क्षमता और डेटा सेंटर जैसे भौतिक बुनियादी ढांचे को तेजी से विकसित करने की जरूरत बताई।

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जुकरबर्ग ने एक नोट में कहा कि एडवांस्ड AI के विकास और तैनाती में नेतृत्व करने वाले देश भविष्य में लोकतांत्रिक मूल्यों, समृद्धि और सुरक्षा की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

 

AI इंफ्रास्ट्रक्चर में चीन की तेज रफ्तार

 

मार्क जुकरबर्ग के मुताबिक, AI के लिए जरूरी सिलिकॉन डिजाइन के मामले में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को बढ़त हासिल है, लेकिन ऊर्जा क्षमता और फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की गति में वे चीन से पीछे हैं। जुकरबर्ग ने कहा कि चीन हर दो सप्ताह में 1 गीगावाट से अधिक परमाणु ऊर्जा क्षमता को ऑनलाइन ला रहा है। ऐसे में अमेरिका को प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए ऊर्जा उत्पादन क्षमता के साथ-साथ डेटा सेंटर का निर्माण भी तेज करना होगा।

 

उन्होंने कहा कि AI की अगली पीढ़ी के मॉडल और उत्पाद विकसित करने के लिए तेजी बेहद जरूरी है, क्योंकि AI संभवतः इतिहास का सबसे प्रतिस्पर्धी उद्योग है और इसमें होने वाले नए इनोवेशन कुछ ही महीनों में दूसरे देशों और कंपनियों द्वारा अपना लिए जाते हैं।

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AI मॉडल रिलीज में देरी से अमेरिका को नुकसान का खतरा

 

जुकरबर्ग ने AI मॉडल की रिलीज को धीमा करने वाली नीतियों को लेकर भी आगाह किया। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका में AI मॉडल जारी करने की प्रक्रिया में एक महीने की भी देरी होती है, तो इससे अमेरिकी AI नेतृत्व को बड़ा जोखिम हो सकता है और विदेशी AI मॉडल को आगे निकलने का मौका मिल सकता है।

 

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जब AI की नई क्षमताएं सामने आएं तो अमेरिकी सरकार के पास महत्वपूर्ण सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त जानकारी और संसाधन होने चाहिए। इससे जरूरत पड़ने पर अमेरिका को एडवांस्ड AI सिस्टम के इस्तेमाल में कुछ समय की रणनीतिक बढ़त भी मिल सकती है।

 

'AI पर नियंत्रण नहीं, लोगों तक पहुंच जरूरी'

 

जुकरबर्ग ने एडवांस्ड AI और सुपरइंटेलिजेंस को कुछ चुनिंदा कंपनियों या विशेषज्ञों तक सीमित रखने के बजाय व्यापक रूप से लोगों तक पहुंचाने की वकालत की है।

 

उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे AI आधारित इंटेलिजेंस अधिक उपलब्ध होगी, सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होगा कि इसका इस्तेमाल किस दिशा में किया जाए। कुछ लोगों का मानना है कि सुपरइंटेलिजेंस या इसे नियंत्रित करने वाले विशेषज्ञों को मानवता के लिए सबसे अच्छा निर्णय लेना चाहिए। हालांकि, जुकरबर्ग इस विचार से असहमत हैं।

 

उनके मुताबिक, लोकतंत्र और अर्थव्यवस्था के इतिहास से पता चलता है कि लोगों के लिए 'सबसे अच्छा जीवन' क्या है, इसका कोई एक सार्वभौमिक जवाब नहीं है। इसलिए लोगों को खुद तय करने का अधिकार होना चाहिए कि उनके जीवन में क्या महत्वपूर्ण है।

 

जुकरबर्ग ने कहा कि सुपरइंटेलिजेंस को व्यापक रूप से उपलब्ध कराना ही इस सवाल का बेहतर जवाब हो सकता है। उनका मानना है कि सुपरकंप्यूटर और इंटरनेट की शक्ति जिस तरह लोगों के हाथों और डेस्क तक पहुंची, उसी तरह सुपरइंटेलिजेंस को भी केंद्रीकृत करने के बजाय व्यापक रूप से वितरित किया जाना चाहिए।

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AI से नौकरियां खत्म होने की आशंकाओं पर क्या बोले जुकरबर्ग?

 

मार्क जुकरबर्ग ने AI और रोजगार को लेकर चल रही बहस पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि हर नई तकनीक अपने साथ अवसरों के साथ चुनौतियां भी लेकर आती है। उनके मुताबिक, सुपरइंटेलिजेंस इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकों में से एक हो सकती है।

 

उन्होंने AI को लेकर अत्यधिक नकारात्मक और विनाशकारी भविष्य की आशंकाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कोई मानता है कि AI अधिकांश नौकरियां खत्म कर देगा और इंसानों की प्रासंगिकता को काफी कम कर देगा, तो वह ऐसे भविष्य के निर्माण को तेजी से आगे बढ़ाने की कोशिश क्यों करेगा।

 

जुकरबर्ग ने यह भी कहा कि AI इतना खतरनाक है कि इससे बचने का एकमात्र रास्ता सत्ता को कुछ लोगों के हाथों में बेहद केंद्रित करना है- यह विचार अपने आप में समस्याग्रस्त है। उनके मुताबिक, इतिहास में यह उम्मीद करना कि कोई पूर्ण सत्ता मानवता के लिए अच्छे और सुरक्षित फैसले करेगी, हमेशा सकारात्मक परिणाम नहीं देता।

पान मसाला की प्लास्टिक पैकेजिंग पर रोक, FSSAI ने तय किए नए पैकेजिंग नियम

पान मसाला की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक पर अब रोक लगा दी गई है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पान मसाला की पैकेजिंग को लेकर नए नियम जारी किए हैं। इनके तहत पान मसाला निर्माताओं को प्लास्टिक मुक्त कागज, पेपरबोर्ड, सेलुलोज या अन्य प्राकृतिक रूप से प्राप्त सामग्री का इस्तेमाल करना होगा। इसके अलावा पैकेजिंग के लिए टिन या ग्लास के कंटेनर भी इस्तेमाल किए जा सकेंगे।

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FSSAI ने पान मसाला के लिए निर्धारित पैकेजिंग सामग्री की सूची में प्लास्टिक के साथ-साथ एल्युमिनियम फॉयल और मेटलाइज्ड लेयर को भी अनुमति प्राप्त विकल्पों से बाहर कर दिया है।

 

10 अगस्त को जारी हुआ नोटिफिकेशन

 

नए प्रावधानों को Food Safety and Standards (Packaging) Amendment Regulations, 2026 के तहत अधिसूचित किया गया है। यह अधिसूचना सोमवार, 10 अगस्त को भारत के राजपत्र (Gazette of India) में प्रकाशित हुई। इसके साथ ही Food Safety and Standards (Packaging) Regulations, 2018 में संशोधन किया गया है। संशोधन के तहत Schedule 4 में पान मसाला को एक नई एंट्री के रूप में शामिल किया गया है। यह शेड्यूल पैकेजिंग में इस्तेमाल की जाने वाली सुझाई गई सामग्री की सूची से संबंधित है।

 

किन चीजों से नहीं हो सकेगी पान मसाला की पैकेजिंग?

 

FSSAI के नए नियमों के मुताबिक पान मसाला की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाला पेपर, पेपरबोर्ड, सेलुलोज या अन्य प्राकृतिक सामग्री पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त होनी चाहिए।

 

पैकेजिंग में निम्न सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा:

 

  • पॉलीएथिलीन (Polyethylene)
  • पॉलीप्रोपाइलीन (Polypropylene)
  • पॉलीएस्टर (Polyester)
  • पॉलीविनाइल क्लोराइड यानी PVC
  • अन्य सिंथेटिक पॉलिमर
  • कॉपॉलिमर
  • लैमिनेट
  • एल्युमिनियम फॉयल
  • मेटलाइज्ड लेयर

 

इसका मतलब है कि केवल ऊपर से पेपर की पैकेजिंग कर देना पर्याप्त नहीं होगा। अगर उसके अंदर प्लास्टिक या मेटलाइज्ड लेयर का इस्तेमाल किया गया है, तो ऐसी पैकेजिंग नए मानकों के अनुरूप नहीं मानी जाएगी।

 

टिन और ग्लास के कंटेनर भी होंगे मान्य

 

FSSAI ने पान मसाला निर्माताओं को पैकेजिंग के लिए टिन और ग्लास कंटेनर इस्तेमाल करने की अनुमति भी दी है। इन्हें नए नियमों में स्पष्ट रूप से स्वीकार्य पैकेजिंग विकल्पों के तौर पर शामिल किया गया है।

 

प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट नियम भी लागू होंगे

 

संशोधन में यह भी कहा गया है कि Plastic Waste Management Rules, 2016 के कुछ प्रावधान पान मसाला की पैकेजिंग पर भी लागू होंगे। ये नियम Environment (Protection) Act, 1986 के तहत बनाए गए हैं।

 

सरकार ने 60 दिन तक मांगी थी आपत्तियां और सुझाव

 

FSSAI ने अंतिम नियम जारी करने से पहले प्रस्तावित बदलावों पर सार्वजनिक परामर्श की प्रक्रिया पूरी की। प्राधिकरण ने 28 अप्रैल 2026 को Food Safety and Standards (Packaging) Amendment Regulations, 2026 का ड्राफ्ट जारी किया था।

 

लोगों और प्रभावित पक्षों से इस ड्राफ्ट पर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए थे। इसके लिए 60 दिनों का समय दिया गया था। FSSAI के मुताबिक, जनता से प्राप्त आपत्तियों और सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम संशोधन अधिसूचित किया गया।

 

पान मसाला पर बैन नहीं, सिर्फ पैकेजिंग के नियम बदले

 

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि FSSAI की नई अधिसूचना पान मसाला उत्पाद पर प्रतिबंध नहीं लगाती है। यह मुख्य रूप से उसकी पैकेजिंग से संबंधित नियमन है। नए नियमों का उद्देश्य पान मसाला की पैकेजिंग को प्लास्टिक आधारित सामग्री से दूर करना है। अब निर्माताओं को ऐसी पैकेजिंग सामग्री का इस्तेमाल करना होगा, जिसमें प्लास्टिक, सिंथेटिक पॉलिमर, कॉपॉलिमर, लैमिनेट, एल्युमिनियम फॉयल या मेटलाइज्ड लेयर न हो।

 

ये नियम भारत के राजपत्र में प्रकाशित होने के साथ ही प्रभावी हो गए हैं और अब Food Safety and Standards (Packaging) Regulations, 2018 के संशोधित प्रावधानों का हिस्सा हैं।

पाकिस्तान-तुर्किये-सऊदी अरब के नए रक्षा समझौते पर भारत की नजर, MEA बोला- राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए उठाएंगे जरूरी कदम

भारत ने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए नए संयुक्त रक्षा समझौते के प्रभावों का आकलन शुरू कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि भारत इस समझौते के राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता पर पड़ने वाले असर की समीक्षा कर रहा है। साथ ही भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।

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पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने 7 अगस्त को मक्का में मक्का संयुक्त रक्षा समझौते (Makkah Joint Defence Agreement) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की बैठक के बाद हुआ। यह समझौता पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच पिछले साल हुए द्विपक्षीय पारस्परिक रक्षा समझौते को आगे बढ़ाता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के नजरिए से कर रहे आकलन

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से नियमित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जब इस त्रिपक्षीय रक्षा समझौते को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि भारत पश्चिम एशिया संघर्ष से जुड़े सभी घटनाक्रमों पर करीबी नजर रख रहा है। जायसवाल ने कहा कि भारत इस विशेष समझौते के प्रभावों की समीक्षा कर रहा है। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय शांति और स्थिरता से जुड़े पहलुओं को भी ध्यान में रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

 

पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौते पर पहले भी चिंता जता चुका है भारत

 

सितंबर 2025 में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच पारस्परिक रक्षा समझौता होने के बाद भी भारत सरकार ने कहा था कि वह देश के राष्ट्रीय हितों की रक्षा और सभी क्षेत्रों में व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी। जानकारों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की पृष्ठभूमि में सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच बढ़ती सैन्य नजदीकी को लेकर नई दिल्ली में चिंता है।

 

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये की ओर से शुक्रवार को जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि मक्का संयुक्त रक्षा समझौता तीनों देशों के साझा रणनीतिक हितों और लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग पर आधारित है। इसका उद्देश्य सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करना और क्षेत्र में शांति, सुरक्षा एवं स्थिरता को बढ़ावा देना है।

 

समझौते के तहत तीनों देशों के बीच सामूहिक प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करने की बात कही गई है। समझौते में यह भी प्रावधान है कि तीनों में से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला सभी तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसके अलावा रक्षा सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों को मजबूत करने का भी प्रावधान किया गया है।

 

PoK में मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर पाकिस्तान पर निशाना

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पाकिस्तान के बलूचिस्तान की कथित 'आजादी' को लेकर आयोजित कार्यक्रमों और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में हुए हिंसक प्रदर्शनों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान को मानवाधिकार उल्लंघन और अत्याचारों के लिए जवाबदेह ठहराने की अपील की। जायसवाल ने कहा कि भारत दुनिया के विभिन्न हिस्सों में हो रहे घटनाक्रमों पर नजर रखता है, लेकिन पाकिस्तान के PoK और अन्य हिस्सों में हुए मानवाधिकार उल्लंघनों को भी दुनिया के सामने रखना जरूरी है।

 

उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान में लोगों के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन हुआ है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान को उसके कथित दुराचार, दुर्व्यवहार और मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए जवाबदेह ठहराना चाहिए। जायसवाल के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में PoK में स्थानीय विधानसभा चुनावों से जुड़े बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। उन्होंने दावा किया कि इन प्रदर्शनों के दौरान जनता के असंतोष का जवाब गोलीबारी, ब्लैकआउट और दमन के जरिए दिया गया। उनके अनुसार, हिंसा में 90 से ज्यादा लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए।

 

पाकिस्तान को लेकर भारत की नीति में बदलाव नहीं

पाकिस्तान के संदर्भ में भारत की नीति को लेकर पूछे गए सवाल पर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत की स्थिति पहले जैसी ही है। उन्होंने सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह स्पष्ट है कि सीमा पार आतंकवाद के लिए कौन सा देश जिम्मेदार है और आतंकवाद का केंद्र कहां है। उन्होंने कहा कि सीमा पार आतंकवाद रोकने के लिए कार्रवाई की जिम्मेदारी भी संबंधित देश पर ही है।

पूर्वी यूपी की बदली तस्वीर, युवा शक्ति से अर्थव्यवस्था को मिली रफ्तार, तीन गुना से ज्यादा बढ़ी प्रति व्यक्ति आय- सीएम योगी

CM Yogi Adityanath

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश अपनी युवा शक्ति के बल पर तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है। यहां के लोगों, खास तौर पर युवाओं में कभी प्रतिभा और परिश्रम की कमी नहीं रही। उन्हें जब भी अवसर मिला, अपनी क्षमता का लोहा मनवाया। पिछले नौ वर्षों में प्रदेश अपनी अर्थव्यवस्था को तीन गुना करने में सफल रहा है। इस दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय तीन गुना से अधिक हुई है। पूरा विश्वास है कि अगले तीन वर्षों के भीतर उत्तर प्रदेश वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

 

युवाओं पर किसी तरह का लांछन लगाना उचित नहीं

मुख्यमंत्री मंगलवार को गोरखपुर में न्यूज-18 इंडिया के ‘बदलता पूर्वी उत्तर प्रदेश’ कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि युवाओं पर किसी तरह का लांछन लगाना उचित नहीं है। यदि पहले प्रदेश के युवाओं की प्रतिभा और क्षमता का योगदान विकास में नहीं लिया जा सका तो इसमें युवाओं की कमी नहीं थी, बल्कि यह उस सिस्टम की कमी थी, जो उनकी प्रतिभा का उपयोग नहीं कर पा रहा था। कमी उन लोगों में थी, जो युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्लेटफॉर्म और अवसर उपलब्ध नहीं करा सके। जब युवाओं को प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने वाली सरकार आई तो हर क्षेत्र में उनके लिए अवसर तैयार किए गए। इसका परिणाम है कि आज प्रदेश का युवा हर जगह अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहा है।

 

प्रतिभा में कमी नहीं थी, प्लेटफार्म नहीं दे सकीं पूर्व सरकारें

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय पूर्वी उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में लोग रजिस्टर्ड श्रमिक के रूप में मॉरीशस, फिजी समेत विभिन्न देशों में गए। आज उन्हीं लोगों के वंशज कई देशों में नेतृत्वकारी भूमिकाओं में हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश में कभी प्रतिभा की कमी नहीं थी, बल्कि उचित प्लेटफॉर्म नहीं मिलने की समस्या थी। इस क्षेत्र को कभी अपेक्षित प्रोत्साहन नहीं मिला। गुलामी के दौरान उपेक्षा का दंश झेलना समझा जा सकता है। लेकिन, आजादी के बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश के विकास को लेकर ऐसी कोई मजबूरी नहीं थी। पिछले नौ वर्षों में अकेले गोरखपुर में हुए निवेश से 50 हजार युवाओं को रोजगार मिला है।

 

यूपी देश में सबसे बड़ी युवा आबादी वाला राज्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी युवा आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। प्रदेश की करीब 56 से 60 फीसदी आबादी युवा है। यह युवा शक्ति प्रतिभाशाली और ऊर्जावान है। इसे जब भी सही प्लेटफॉर्म मिला, इसने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। सरकार युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, आधुनिक तकनीक की स्किलिंग, रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए अलग-अलग स्तर पर काम कर रही है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए भी ऐसी व्यवस्था तैयार की गई है, जिससे आर्थिक या दूसरे कारण तैयारी में बाधा न बनें। कोई भी युवा मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग से जुड़ सकता है। इसमें वर्चुअल के साथ फिजिकल माध्यम से भी तैयारी की व्यवस्था की गई है। यूपीएससी, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, नीट और आईआईटी-जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी इसमें कराई जा रही है। जिलाधिकारी, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सहित विभिन्न पदों पर जिलों में तैनात अधिकारी भी अभ्युदय कोचिंग से जुड़े युवाओं को कम से कम एक घंटे का समय देते हैं।

 

युवाओं की स्किलिंग के लिए प्रतिबद्ध है सरकार

सीएम योगी ने कहा कि आज युवाओं की सबसे बड़ी आवश्यकता स्किलिंग की है। इसके लिए स्किल डेवलपमेंट सेंटर विकसित किए गए हैं। हर जिले में कम से कम दो आईटीआई को हब एंड स्पोक मॉडल पर आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए आगे बढ़ाया गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन टेक्नोलॉजी, स्पेस टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स, 3डी प्रिंटिंग और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) जैसे आधुनिक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। युवाओं को केवल प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र देने तक यह व्यवस्था सीमित नहीं है। उनके लिए कैंपस सिलेक्शन की भी व्यवस्था की गई है। कोई युवा नौकरी के बजाय स्वयं अपना कारोबार शुरू करना चाहता है तो उसके लिए भी अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पीएम इंटर्नशिप और सीएम इंटर्नशिप जैसी योजनाओं के साथ मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के माध्यम से प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया गया है।

 

नौ साल में पूर्वी यूपी को मिले पांच नए विश्वविद्यालय

सीएम ने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश ने पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में और पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश की डबल इंजन सरकार में बड़े बदलाव देखे हैं। वास्तविक बदलाव वह है, जिसकी चर्चा आम लोग करने लगें और जो आम नागरिक के जीवन में दिखाई दे। स्वतंत्र भारत में पूर्वी उत्तर प्रदेश में काशी व प्रयागराज को छोड़कर कोई विश्वविद्यालय नहीं था। हमारी सरकार में गोरखपुर में आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना की गई। आजमगढ़ में महाराजा सुहेलदेव के नाम पर, बलरामपुर में मां पाटेश्वरी के नाम पर और मिर्जापुर में मां विंध्यवासिनी के नाम पर नए विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई। हाल में भदोही में काशी नरेश विश्वविद्यालय की स्थापना हुई है। इस तरह महज नौ वर्षों के भीतर पूर्वी उत्तर प्रदेश में सरकार की ओर से पांच नए विश्वविद्यालय स्थापित किए गए हैं।

 

अब युवा बाहर नहीं जाते, उद्योग यहां आते हैं

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश समेत राज्य के युवाओं का रोजगार के लिए बाहर जाना कम होने का असर दूसरे राज्यों के उद्योगों पर पड़ा है। अब महाराष्ट्र, पंजाब, गुजरात, कर्नाटक व तमिलनाडु के उद्यमी उनके पास आते हैं और उत्तर प्रदेश में निवेश करने की इच्छा जताते हैं। कारण पूछने पर उनका जवाब होता है कि पहले यूपी से मैनपावर आ जाती थी, अब यहां के लोगों ने बाहर जाना बंद कर दिया है। इसलिए उन्हें वहां उद्योग चलाने में मुश्किल हो रही है। वे अब यूपी में ही उद्योग लगाना चाहते हैं।

 

बेसिक शिक्षा में बदली स्कूलों की तस्वीर

मुख्यमंत्री ने बेसिक शिक्षा में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले यहां स्कूलों में ड्रॉपआउट रेट 19 फीसदी से अधिक था। इसकी बड़ी वजह विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की कमी थी। कई जगह स्कूलों के भवन नहीं थे। जहां भवन थे, वहां बालक और बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय नहीं थे। पेयजल, खेल के मैदान, बेहतर फर्श और फर्नीचर जैसी सुविधाओं का भी अभाव था। विद्यालयों में बालक व बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय, पेयजल, डिजिटल लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लास और फर्नीचर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। सरकार ने बच्चों को सुविधाएं उपलब्ध कराने में जाति-पाति का कोई भेद नहीं किया। प्रत्येक बच्चे को दो यूनिफॉर्म, बैग, किताबें, जूते, मोजे और स्वेटर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा परिषद के 1.36 लाख विद्यालयों में ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से यह बदलाव आया है। स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं में सुधार का असर बच्चों की उपस्थिति पर भी पड़ा है। ड्रॉपआउट रेट भी 19 से अब घटकर 3 फीसदी तक पहुंच गया है।

 

माध्यमिक शिक्षा में भी उल्लेखनीय सुधार

सीएम योगी ने माध्यमिक शिक्षा में हुए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि पुराने विद्यालयों और इंटर कॉलेजों ने शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन समय के साथ उनके भवन जर्जर हो गए थे और उनमें आवश्यक सुविधाओं की कमी हो गई थी। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट अलंकार के माध्यम से माध्यमिक स्तर के विद्यालयों की स्थिति सुधारने का काम किया गया। सभी राजकीय इंटर कॉलेजों और सरकार से सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों के लिए विशेष धनराशि की व्यवस्था की गई। इसके माध्यम से इन विद्यालयों के भवनों का निर्माण और पुनर्निर्माण कराया गया। आज इन विद्यालयों में लैब व क्लासरूम समेत शिक्षा के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं को भी नए सिरे से विकसित किया गया है।

 

पूर्वी उत्तर प्रदेश से शुरू होती थी ‘माफिया’ शब्द की चर्चा

पूर्वी उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की पुरानी स्थिति का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने कहा कि एक समय 'माफिया' शब्द की चर्चा पूर्वी उत्तर प्रदेश से ही शुरू होती थी। माफिया और मच्छर इस क्षेत्र की त्रासदी बन चुके थे। माफिया जनता का खून चूसता था और मच्छर बीमारियां पैदा करता था। पूर्वी उत्तर प्रदेश में सक्रिय दुर्दांत माफिया केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं थे, बल्कि उनके अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन भी थे। ये माफिया राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन चुके थे। पूर्वी उत्तर प्रदेश सदियों तक उपेक्षा का शिकार रहा। बीमारी, बाढ़, अराजकता और गुंडागर्दी जैसी समस्याओं से यह क्षेत्र मुगल और ब्रिटिश काल से लेकर आजादी के बाद तक जूझता रहा। बीमारी और बेगारी के कारण यहां से बड़े पैमाने पर लोगों को पलायन करना पड़ा। उन्होंने सवाल किया कि 1947 के बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश की उपेक्षा क्यों हुई? शिक्षा-स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करने से तत्कालीन सरकारों को किसने रोका?

 

बीमारियों का शिकार बनते थे मासूम पूर्वी उत्तर प्रदेश में

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय पूर्वी उत्तर प्रदेशमें बीमारी ही नियति बन गई थी। कभी मलेरिया, कभी इंसेफेलाइटिस तो कभी डेंगू, अलग-अलग क्षेत्रों में मासूम बच्चों को अपनी चपेट में ले लेते थे। जुलाई से नवंबर तक का समय बीमारियों के चलते हर परिवार के लिए भय और दहशत लेकर आता था। जिस समाज में बचपन असमय काल कवलित हो जाए, उसके भविष्य की कल्पना की जा सकती है। बाढ़ आती थी और अपने पीछे बीमारियां छोड़ जाती थी। मासूम बच्चों की सुधि लेने वाला कोई नहीं था।

 

दो साल में निकाला इंसेफेलाइटिस का समाधान

मुख्यमंत्री ने कहा कि इंसेफेलाइटिस के खिलाफ उन्होंने 18-19 वर्षों तक लड़ाई लड़ी। सांसद रहते हुए इस मुद्दे को सड़क से संसद तक उठाया और मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला तो दो वर्ष के भीतर इस बीमारी का समाधान निकाल दिया। अब पूर्वी उत्तर प्रदेश इंसेफेलाइटिस से मुक्त है और कभी बीमारी की त्रासदी झेलने वाला यह क्षेत्र मेडिकल सुविधाओं के बड़े केंद्र के रूप में उभरा है।  

Kanpur : SBI लॉकर में रखे थे 50 लाख के गहने, 23 साल बाद खुला तो सब गायब

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उत्तरप्रदेश के कानपुर में बैंक लॉकर से करीब 50 लाख रुपये कीमत के सोने के गहने और अन्य कीमती सामान गायब होने का मामला सामने आया है। महिला का आरोप है कि उसने वर्षों पहले बैंक के लॉकर में लाखों रुपये के गहने और अन्य कीमती सामान सुरक्षित रखे थे, लेकिन जब लंबे समय बाद वह लॉकर खोलने पहुंची तो वह पूरी तरह खाली मिला। मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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महिला के मुताबिक, उसने वर्ष 2003 में कानपुर के स्वरूप नगर स्थित तत्कालीन स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर (SBT) की शाखा में लॉकर लिया था। उसने इसमें करीब 50 लाख रुपये मूल्य के सोने के आभूषण और अन्य कीमती सामान रखे थे। बाद में स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर का भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में विलय हो गया। वर्ष 2017 में एसबीटी का स्वतंत्र अस्तित्व समाप्त हो गया और उसकी सेवाएं एसबीआई का हिस्सा बन गईं।

 

महिला ने बताया कि पति की मृत्यु के बाद वह कानपुर से लखनऊ चली गई और नियमित रूप से बैंक शाखा नहीं जा सकी। हालांकि, उसके बैंक खाते से लॉकर का शुल्क लगातार कटता रहा। इससे उसे लगा कि लॉकर अभी भी सक्रिय है और उसमें रखा सामान सुरक्षित है।

 

हाल ही में जब महिला लॉकर खोलने बैंक पहुंची तो विलय के बाद पुराने रिकॉर्ड तत्काल उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई। बैंक की ओर से संबंधित रिकॉर्ड तलाशने और उसका सत्यापन करने के बाद महिला को लॉकर खोलने की अनुमति दी गई। लेकिन लॉकर खुलते ही महिला के होश उड़ गए। लॉकर के अंदर कोई गहना या कीमती सामान मौजूद नहीं था।

 

इसके बाद महिला ने पुलिस से शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि लॉकर में रखे उसके करीब 50 लाख रुपये के गहने और अन्य सामान गायब हैं। शिकायत के आधार पर स्वरूप नगर थाने में शाखा प्रबंधक और बैंक के अन्य कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

लॉकर किसने खोला? रिकॉर्ड और CCTV खंगाल रही पुलिस

 

प्रारंभिक जांच में पुलिस को बैंक के रिकॉर्ड में ऐसे एंट्री मिली हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि संबंधित लॉकर को पहले भी एक्सेस किया गया था। अब जांच टीम बैंक के लॉकर एक्सेस रजिस्टर, रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि लॉकर को पहले कब और किसने खोला था। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि लॉकर से सामान गायब होने के पीछे बैंक रिकॉर्ड में किसी तरह की गड़बड़ी या सुरक्षा में चूक तो नहीं हुई।  फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस लॉकर तक पहुंच रखने वाले लोगों और बैंक के रिकॉर्ड की जांच के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि महिला के कीमती सामान आखिरकार कैसे गायब हुए।

CM पुष्करसिंह धामी का ऐलान, जल्द शुरू होगी मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना-2026, प्रतियोगी परीक्षाओं की फ्री ऑनलाइन कोचिंग मिलेगी

उत्तराखंड के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार की महत्वपूर्ण पहल ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना-2026’ अब धरातल पर उतरने जा रही है। योजना को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही अनुमोदन प्रदान कर चुके हैं। योजना का शीघ्र ही मुख्यमंत्री द्वारा विधिवत शुभारंभ किया जाएगा।

 

युवाओं को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन एवं अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने तथा इस दिशा में एक समर्पित योजना शुरू करने का निर्णय लिया गया था। इसी निर्णय के क्रम में मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना-2026 को स्वीकृति दी गई है।

 

योजना के तहत राज्य के विश्वविद्यालयों तथा शासकीय एवं अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी।

 

इसमें सिविल सर्विसेज (UPSC/PSC), रक्षा सेवाओं (CDS), बैंकिंग, रेलवे, SSC सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं तथा प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश और पात्रता निर्धारण के लिए आयोजित होने वाली CAT, MAT, GATE, NET और CSIR-NET जैसी परीक्षाओं की तैयारी शामिल है।

 

योजना के माध्यम से राज्य के युवाओं को घर बैठे गुणवत्तापूर्ण कोचिंग और मार्गदर्शन उपलब्ध हो सकेगा। विशेष रूप से दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों के लिए यह पहल महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण महंगी कोचिंग का लाभ नहीं उठा पाने वाले विद्यार्थियों को भी प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी का अवसर मिलेगा।

 

मुख्यमंत्री धामी द्वारा योजना के विधिवत शुभारंभ के लिए जल्द ही तिथि निर्धारित की जाएगी। शुभारंभ के साथ ही योजना के तहत विद्यार्थियों को ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की प्रक्रिया प्रारंभ होगी।

कंधों पर कांवड़, दिल में मम्मी-पापा की लंबी उम्र की चाह, नन्ही महक और अनन्या की कहानी, 11 लीटर गंगाजल के साथ हरिद्वार से मेरठ तक की यात्रा

kanwar yatra

कंधे नन्हे हैं, लेकिन हौसला किसी बड़े कांवड़िये से कम नहीं। उम्र महज छह साल और संकल्प मम्मी-पापा की लंबी उम्र का। इसी संकल्प के साथ मेरठ की सगी बहनें महक और अनन्या हरिद्वार से 11 लीटर जल वाली कांवड़ उठाकर एक सप्ताह से पैदल चल रही थीं। सोमवार को दोनों बहनें कांवड़ लेकर मेरठ पहुंचीं तो रास्ते में जिसने भी उन्हें देखा, उनकी आस्था और हौसले को प्रणाम किए बिना नहीं रह सका। मंगलवार को उन्होंने अपनी मम्मी और पापा की लंबी उम्र के लिए जलाभिषेक किया। 
 

महक और अनन्या ने बताया कि उन्होंने बाबा भोलेनाथ से अपने मम्मी-पापा की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना की है। इसी मनोकामना को लेकर दोनों ने हरिद्वार से कांवड़ उठाई। नन्हे कंधों पर कांवड़ का भार था, लेकिन चेहरे पर थकान से ज्यादा उत्साह नजर आया। नन्ही बहनों की यह कांवड़ यात्रा केवल आस्था की कहानी नहीं, बल्कि माता-पिता के प्रति उनके निश्छल प्रेम की भी मिसाल बन गई है।
 

एक सप्ताह पहले हरिद्वार से शुरू हुई दोनों बहनों की यात्रा सोमवार को मेरठ पहुंच तो कई जगह लोगों ने दोनों को देखकर उनका उत्साह बढ़ाया और आशीर्वाद दिया। महक और अनन्या भी पूरे उत्साह के साथ बोल बम के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ती रहीं। कांवड़ से लाए गए जल को शिवलिंग पर अर्पित करते समय उनकी सबसे बड़ी प्रार्थना यही थी कि उनके मम्मी-पापा हमेशा स्वस्थ रहें और उनकी उम्र लंबी हो।