पाकिस्तान-तुर्किये-सऊदी अरब के नए रक्षा समझौते पर भारत की नजर, MEA बोला- राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए उठाएंगे जरूरी कदम

भारत ने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए नए संयुक्त रक्षा समझौते के प्रभावों का आकलन शुरू कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि भारत इस समझौते के राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता पर पड़ने वाले असर की समीक्षा कर रहा है। साथ ही भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।

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पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने 7 अगस्त को मक्का में मक्का संयुक्त रक्षा समझौते (Makkah Joint Defence Agreement) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की बैठक के बाद हुआ। यह समझौता पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच पिछले साल हुए द्विपक्षीय पारस्परिक रक्षा समझौते को आगे बढ़ाता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के नजरिए से कर रहे आकलन

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से नियमित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जब इस त्रिपक्षीय रक्षा समझौते को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि भारत पश्चिम एशिया संघर्ष से जुड़े सभी घटनाक्रमों पर करीबी नजर रख रहा है। जायसवाल ने कहा कि भारत इस विशेष समझौते के प्रभावों की समीक्षा कर रहा है। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय शांति और स्थिरता से जुड़े पहलुओं को भी ध्यान में रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

 

पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौते पर पहले भी चिंता जता चुका है भारत

 

सितंबर 2025 में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच पारस्परिक रक्षा समझौता होने के बाद भी भारत सरकार ने कहा था कि वह देश के राष्ट्रीय हितों की रक्षा और सभी क्षेत्रों में व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी। जानकारों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की पृष्ठभूमि में सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच बढ़ती सैन्य नजदीकी को लेकर नई दिल्ली में चिंता है।

 

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये की ओर से शुक्रवार को जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि मक्का संयुक्त रक्षा समझौता तीनों देशों के साझा रणनीतिक हितों और लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग पर आधारित है। इसका उद्देश्य सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करना और क्षेत्र में शांति, सुरक्षा एवं स्थिरता को बढ़ावा देना है।

 

समझौते के तहत तीनों देशों के बीच सामूहिक प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करने की बात कही गई है। समझौते में यह भी प्रावधान है कि तीनों में से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला सभी तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसके अलावा रक्षा सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों को मजबूत करने का भी प्रावधान किया गया है।

 

PoK में मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर पाकिस्तान पर निशाना

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पाकिस्तान के बलूचिस्तान की कथित 'आजादी' को लेकर आयोजित कार्यक्रमों और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में हुए हिंसक प्रदर्शनों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान को मानवाधिकार उल्लंघन और अत्याचारों के लिए जवाबदेह ठहराने की अपील की। जायसवाल ने कहा कि भारत दुनिया के विभिन्न हिस्सों में हो रहे घटनाक्रमों पर नजर रखता है, लेकिन पाकिस्तान के PoK और अन्य हिस्सों में हुए मानवाधिकार उल्लंघनों को भी दुनिया के सामने रखना जरूरी है।

 

उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान में लोगों के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन हुआ है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान को उसके कथित दुराचार, दुर्व्यवहार और मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए जवाबदेह ठहराना चाहिए। जायसवाल के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में PoK में स्थानीय विधानसभा चुनावों से जुड़े बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। उन्होंने दावा किया कि इन प्रदर्शनों के दौरान जनता के असंतोष का जवाब गोलीबारी, ब्लैकआउट और दमन के जरिए दिया गया। उनके अनुसार, हिंसा में 90 से ज्यादा लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए।

 

पाकिस्तान को लेकर भारत की नीति में बदलाव नहीं

पाकिस्तान के संदर्भ में भारत की नीति को लेकर पूछे गए सवाल पर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत की स्थिति पहले जैसी ही है। उन्होंने सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह स्पष्ट है कि सीमा पार आतंकवाद के लिए कौन सा देश जिम्मेदार है और आतंकवाद का केंद्र कहां है। उन्होंने कहा कि सीमा पार आतंकवाद रोकने के लिए कार्रवाई की जिम्मेदारी भी संबंधित देश पर ही है।