7वें दिन भी नहीं मिला अद्वैत, 4500 फीट ऊंची पहाड़ियों में जारी सर्च ऑपरेशन, CDR और मेंटल हेल्‍थ की भी होगी जांच

7वें दिन भी नहीं मिला अद्वैत, 4500 फीट ऊंची पहाड़ियों में जारी सर्च ऑपरेशन, CDR और मेंटल हेल्‍थ की भी होगी जांच

Advait

बेंगलुरु के नेलामंगला स्थित करीब 4500 फीट ऊंची शिवगंगे पहाड़ियों में ट्रेकिंग के दौरान लापता हुए इंदौर के 31 वर्षीय अद्वैत उपाध्याय का सातवें दिन भी कोई सुराग नहीं मिल सका है। अद्वैत की लगातार तलाश जारी है। सर्च ऑपरेशन में 100 से ज्‍यादा पुलिसकर्मी और SDRF के कर्मचारी लगे हुए हैं।

इस बीच पुलिस ने अद्वैत के फोन की सीडीआर यानी कॉल डिटेल और मैसेज भी खंगालना शुरू कर दिया है। उन सारी बातों को टटोला जा रहा है, जिनमें उसकी दोस्‍तों, रिश्‍तेदारों और अन्‍य परिचितों से बात हो रही थी। मंगेतर के साथ उसके अन्य महिला मित्रों और परिचितों से हुए संपर्कों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। यहां तक कि उसकी मानसिक स्‍थिति को लेकर भी जांच पड़ताल की जा रही है।

कहीं पहाड़ी में फंसा तो नहीं : अब पुलिस ड्रोन के जरिए पहाड़ी के उन हिस्सों को भी खंगाल रही है, जहां रेस्क्यू टीमों का सीधे पहुंचना मुश्किल है। चप्पे-चप्पे की निगरानी कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कहीं अद्वैत किसी दुर्गम हिस्से में फंसा तो नहीं है। DSP उमा रानी के साथ कई टीमें अद्वैत की तलाश और मामले की जांच में जुटी हैं।

महिला मित्रों की चैट खंगाल रही पुलिस : बेंगलुरु पुलिस ने रेस्क्यू ऑपरेशन के साथ जांच का दायरा भी बढ़ा दिया है। शांताला ड्रॉप के पास अद्वैत का मोबाइल और ड्रोन मिलने के बाद पुलिस उसकी मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), SIM कनेक्शन, मंगेतर और महिला मित्रों से संपर्क के साथ ड्रोन की खरीद से जुड़ी जानकारी जुटा रही है। पुलिस तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को जोड़कर अद्वैत के लापता होने से पहले और बाद की पूरी टाइमलाइन तैयार कर रही है।

क्‍या अद्वैत के नाम दूसरा SIM जारी हुआ था : अद्वैत का मोबाइल शांताला ड्रॉप के पास मिला है। पुलिस मोबाइल की लोकेशन, कॉल डिटेल और उसमें मौजूद डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही है। इसके साथ ही टेलीकॉम कंपनियों से यह जानकारी भी जुटाई जा रही है कि अद्वैत के नाम पर इस SIM के अलावा कोई दूसरा SIM जारी हुआ था या नहीं। पुलिस यह भी जांच रही है कि उसके नाम पर किसी दूसरे नंबर का कनेक्शन तो नहीं था या किसी अन्य व्यक्ति के नाम से जारी SIM का इस्तेमाल अद्वैत कर रहा था। इस पड़ताल का उद्देश्य उन संपर्कों तक पहुंचना है, जिनकी जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।

बैग और स्वेटर मिला : बता दें कि रविवार को तलाशी अभियान के दौरान अद्वैत उपाध्याय का बैग और स्वेटर मिला था। अब पुलिस उसकी डिजिटल गतविधियों के आधार पर डिजिटल मूवमेंट की टाइमलाइन देख रही है। साथ ही पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि फोन बंद होने से कुछ समय पहले तक चालू था। ऐसे में सवाल है कि क्या उसका फोन किसी दूसरे के हाथ तो नहीं लग गया है।

अद्वैत की एक फोटो भी मिली : जांच के दौरान बेंगलुरु पुलिस को अद्वैत की एक फोटो मिली है, जिसे एक पर्यटक ने खींची थी। अद्वैत लापता तब हुआ है, जब वह 7 अगस्त को ट्रेकिंग के लिए शिवगंगे की पहाड़ियों पर गया था। उसके लैपटॉप की सर्च हिस्ट्री बहुत कुछ बयां कर रही हैं। 4 अगस्त को भी पहाड़ी पर जाने की संभावना है। ऐसे में पुलिस उसकी डिजिटल गतिविधियों को खंगाल रही है।

एआई सर्च ने बढ़ाया सस्पेंस : बता दें कि अद्वेत ने एएआई से यह भी सवाल किया था कि पहाड़ी से गिरने के बाद इंसान जीवित कितनी देर तक रह सकता है। उसके शरीर पर क्या प्रभाव पड़ेगा। ऐसे में संभावना है कि वह खुद भी नुकसान पहुंचा सकता है। पुलिस की जांच में ये सारे बिंदु हैं। इसके साथ ही पुलिस उसके कॉल डिटेल्स की जांच भी कर रही है। आखिर अद्वैत ने लापता होने से पहले किन-किन लोगों से बात की थी। उसके निजी संपर्कों और रिश्तों की जानकारी भी जुटा रही है।

उत्तराखंड में बन रही देश की 5वीं साइंस सिटी, विज्ञान-तकनीक के क्षेत्र में बदलेगी राज्य की तस्वीर

उत्तराखंड में बन रही देश की 5वीं साइंस सिटी, विज्ञान-तकनीक के क्षेत्र में बदलेगी राज्य की तस्वीर

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उत्तराखंड में देश की 5वीं साइंस सिटी का निर्माण तेज गति से किया जा रहा है। इससे उत्तराखंड को विज्ञान, नवाचार और तकनीकी क्षेत्र में नई वैश्विक पहचान मिलेगी। 

 

सीएम धामी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि हमारी सरकार विज्ञान, नवाचार और नई तकनीक को बढ़ावा देने के लिए कृत संकल्पित है। इसी दिशा में देहरादून में देश की पांचवीं साइंस सिटी का निर्माण तेज गति से किया जा रहा है।

 

यह साइंस सिटी विद्यार्थियों और युवाओं के लिए विज्ञान एवं तकनीक की नई संभावनाओं से परिचित होने का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगी। यहां छात्रों को रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्पेस टेक्नोलॉजी, आधुनिक विज्ञान और नवाचार से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से सीखने और अपनी रचनात्मक क्षमता को विकसित करने का अवसर मिलेगा।

गौरतलब है कि राज्य सरकार ने उत्तराखंड की पहली 'विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति' लागू की है। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि 'जॉब क्रिएटर' बनाना है।

मानसून का बदलता पैटर्न बढ़ा रहा भारत का जलवायु संकट

मानसून का बदलता पैटर्न बढ़ा रहा भारत का जलवायु संकट

monsoon changing pattern

मुरली कृष्णन

पीढ़ियों से भारत में जीवन और मानसून की लय साथ चलती आई है। लेकिन अब मानसून का मिजाज बदल रहा है। कहीं लंबा सूखा, तो कहीं बादल फटना और बाढ़ की घटनाएं ना सिर्फ जलवायु परिवर्तन, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था को भी बिगाड़ रहे हैं। ALSO READ: जलवायु परिवर्तन का संकट झेलने लगा यूरोप

 

आमतौर पर भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून जून के महीने में दस्तक देता है और सितंबर आते-आते विदा लेने लगता है। देश की सालाना बारिश काफी हद तक इस मानसून पर ही निर्भर है।

 

हालांकि, मानसून के आने का समय और बारिश की तीव्रता पहले भी बदलती रही है, लेकिन एक तय पैटर्न रहता था। इसी के हिसाब से किसान, शहर और कारोबारी अपनी तैयारियां करते थे। अब मानसून का यह पुराना पैटर्न बदल रहा है।

 

जुलाई के अंत से लेकर अब तक भारत के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश, बाढ़, भूस्खलन और बिजली गिरने से 100 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।

 

इस साल पूर्वोत्तर राज्य असम इस मानसून की बलि चढ़ा है। यहां बाढ़ से 1।2 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। दूसरी तरफ, केरल, जम्मू-कश्मीर, बिहार और झारखंड में भी जान माल का भारी नुकसान हुआ है।

 

यहां दिक्कत ज्यादा बारिश की नहीं है, बल्कि बारिश के पैटर्न की है, जो अब बिल्कुल बदल चुका है। लंबे समय तक सूखा पड़ने के बाद जब अचानक कुछ ही घंटों में तेज बारिश होती है, तो नदियां उफान पर आ जाती हैं, शहरों के ड्रेनेज सिस्टम जवाब दे देते हैं और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है।

 

मौसम में हो रही उठापटक को अल नीनो ने और गंभीर बना दिया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि लगातार बदल रहे मौसम की एक बड़ी वजह बदलती जलवायु है। ALSO READ: शार्क बता रही है तूफानों का पता

 

ये नए दौर का मानसून है?

यूके के नेशनल सेंटर फॉर एटमॉस्फेरिक साइंस एण्ड यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के वरिष्ठ शोध वैज्ञानिक अक्षय देवरस भारतीय मानसून के बारे में कहते हैं कि वह “पूरी तरह एक अलग दौर” में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने डीडब्ल्यू से कहा, “तेज बारिश और थमी हुई बारिश, दोनों ही हमेशा से मानसून का हिस्सा रहे हैं। अब फर्क बस इतना है कि इनकी तीव्रता बढ़ रही है।”

 

उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे वातावरण गर्म होता है, हवा में नमी जमा होती है। इससे बारिश कई गुना तेज और गंभीर हो जाती है।

 

जलवायु वैज्ञानिक और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पूर्व सचिव, माधवन नायर राजीवन का कहना है कि मानसून के मिजाज में बदलाव साफ नजर आ रहा है। उनका कहना है कि मानसून के पूरे सीजन में होने वाली कुल बारिश अभी भी लगभग पहले जितनी ही है। लेकिन बारिश कब होती है, कितनी तेजी से होती है और किस इलाके में कितनी बारिश होती है, इसमें साफ बदलाव नजर आ रहा है।

 

उन्होंने डीडब्ल्यू से कहा, “भारतीय मानसून का मिजाज पहले से काफी बदल गया है। अब कम समय में ज्यादा बारिश होने लगी है, लंबा सूखा पड़ने लगा है और मानसून की बारिश कब, कितनी और किस इलाके में होगी, इसमें भी काफी बदलाव देखने को मिल रहा है।”

 

उनका मानना है कि यह सिर्फ मौसम में होने वाले उतार-चढ़ाव की वजह से नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा, “यह मानसून के पूरे सिस्टम में हो रहे एक बड़े बदलाव का संकेत है।” ALSO READ: क्या स्वस्थ रहने के लिए 8 घंटे सोना सच में जरूरी है?

 

गांव और शहर दोनों खतरे में

भारत के किसान आज भी खेती के लिए  काफी हद तक मानसून पर निर्भर है। लंबे समय में बारिश ना हो, तो बुवाई में देरी हो सकती है और मिट्टी में नमी कम हो सकती है। दूसरी तरफ, एकदम से आने वाली तेज बारिश फसलों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।

 

यह मुसीबत बस गांवों तक ही सीमित नहीं है। निर्माण के चलते कंक्रीट का जंगल फैलता जा रहा है और जमीन तक बारिश का पानी पहुंच नहीं पा रहा है।

 

एक और बड़ी समस्या यह भी है कि कई हफ्तों तक सूखा पड़ने के बाद मिट्टी सख्त हो जाती है और पानी को सोख नहीं पाती। ऐसे में जब तेज बारिश होती है, तो पानी जमीन के अंदर जाने के बजाय बाढ़ का रूप ले लेता है।

 

बारिश की दिक्कतों से निपटने के लिए भारत क्या कर रहा है

देओरस ने डीडब्ल्यू से कहा, “सबसे बड़ा खतरा कम समय में होने वाली बेहद तेज बारिश है।” उनका कहना है कि भारत का बुनियादी ढांचा इस खतरे को झेलने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है। उनके मुताबिक, शहरों की जल निकास प्रणाली और बाढ़ से निपटने वाली व्यवस्था आज भी पुराने पैटर्न पर बनी है। जबकि अब असल मुसीबत कुछ ही घंटों में पूरे शहरों को डूबा देने वाली बारिश है।

 

उन्होंने कहा कि अब सटीक तरीके से मौसम का अंदाजा लगाया जा सकता है। लेकिन इसका फायदा तभी होगा, जब प्रशासन समय रहते उस चेतावनी पर कार्रवाई भी करे।

 

उनका कहना है कि “तुरंत, सटीक फैसले” लेना जरूरी है, जैसे भारी बारिश से पहले स्कूलों के समय में बदलाव करना, लोगों की आवाजाही पर रोक लगाना या खतरे वाले इलाकों को बंद कर देना। पर्यावरण कानून विशेषज्ञ और लीगल इनिशिएटिव फॉर फॉरेस्ट एंड एनवायरनमेंट के मैनेजिंग ट्रस्टी ऋत्विक दत्ता का कहना है कि समस्या सिर्फ बिगड़ते मौसम तक ही सीमित नहीं है।

 

उन्होंने डीडब्ल्यू से कहा, “अब विज्ञान भी साफ कहता है कि जलवायु परिवर्तन से बारिश का पैटर्न अनियमित हो रहा है। मानसून के दौरान कुछ ही दिनों में बहुत ज्यादा बारिश होती है और उसके बाद लंबे समय तक सूखा पड़ जाता है।” उन्होंने आगे कहा कि समस्या इसलिए और बढ़ रही है क्योंकि भारत में निर्माण से जुड़े फैसले लेते समय जलवायु परिवर्तन को ध्यान में नहीं रखा जाता।

 

पुणे का उदाहरण देते हुए दत्ता समझाते हैं जैसे राज्य सरकार और द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट की एक स्टडी के मुताबिक साल 2030 तक पुणे में बारिश करीब 37 फीसदी बढ़ सकती है। इसके बावजूद शहर की विकास योजनाओं में इस अनुमान को ठीक से शामिल नहीं किया गया है। यहां तक कि नदी किनारे बन रहे रिवरफ्रंट में भी इस खतरे को पर्याप्त तवज्जो नहीं दिया गया है।

 

दत्ता ने कहा, “जलवायु परिवर्तन की वजह से बांध, तटबंध और सड़कें बड़े नुकसान का शिकार हो सकती हैं। फिर भी हम जलवायु परिवर्तन को सिर्फ कांफ्रेंस और वर्कशॉप तक ही सीमित किए हुए हैं।”

 

दत्ता मानते हैं, “हम पर्यावरण को अपने खिलाफ इस्तेमाल कर रहे हैं।” दत्ता का कहना है कि भारत में पर्यावरण परियोजनाओं को मंजूरी देते समय जलवायु परिवर्तन के असर को ध्यान में रखना जरूरी नहीं माना जाता है। जाहिर है कि यह एक बड़ी समस्या है और प्रशासन का रवैया दिखाती है।

 

पिछले मानसून हजारों मारे गए

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में जिन 334 दिनों पर नजर रखी गई, उनमें से 331 दिन यानी करीब 99 फीसदी दिनों में भारत के किसी ना किसी हिस्से में चरम मौसम की घटनाएं देखने को मिलीं।

 

इसमें 4,000 से भी ज्यादा लोगों की जान गई, जिसमें करीब 3,000 मौतें मानसून के दौरान हुईं। लगभग 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगातार आठ महीनों तक चरम मौसमी घटनाएं दर्ज की गई।

 

इस संस्था की डायरेक्टर जनरल सुनीता नारायण का कहना है कि अब जलवायु परिवर्तन को देश की विकास रणनीति का अहम हिस्सा बनाना होगा।

 

उन्होंने डीडब्ल्यू से कहा, “जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की बात नहीं है। भीषण गर्मी, तेज बारिश और विनाशकारी मौसमी घटनाओं के रूप में यह अब हमारे सामने खड़ा है।” उन्होंने आगे कहा, “अब चुनौती जलवायु परिवर्तन को साबित करना नहीं है, बल्कि असली चुनौती अपनी अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे को इस तरह बदलना है कि हम इसके असर का सामना कर सकें।”

 

वह मानती हैं, “अब शहरों, सड़कों, ड्रेनेज सिस्टम को पुराने पैटर्न के हिसाब से नहीं बनाया जा सकता।” देश में होने वाला हर निवेश इस सोच के साथ किया जाना चाहिए कि आने वाले समय में मौसम और बिगड़ सकता है।

 

उनका मानना है कि भारत को हर बाढ़ को अलग आपदा मानने से बचना होगा। अब ऐसी योजना बनाने की जरूरत है, जो भविष्य की भीषण मौसमी घटनाओं के अनुसार हो।
 

गंभीर मौसमी घटनाओं से कैसे बचें

भारत मौसम के एक बिल्कुल नए पैटर्न का सामना कर रहा है। पूरे देश में बारिश कम हो सकती है, लेकिन कुछ इलाकों में बाढ़ के हालात बन सकते हैं। दूसरी तरफ कई हफ्तों से बारिश का इंतजार करने वाले किसानों की फसलें कुछ ही घंटों के अंदर तेज बारिश से बर्बाद हो सकती है। तेज बारिश शहरों की पूरी व्यवस्था को भी चरमरा सकती है।

 

जलवायु वैज्ञानिक और पूर्व सरकारी अधिकारी राजीवन ने कहा, “अब सिर्फ इन बदलावों को दर्ज करने और उन पर चर्चा करने से काम नहीं चलेगा। हमें ऐसी ठोस योजनाएं लागू करनी होंगी, जो बदलते मौसम के असर से निपट सकें।”

 

अब शहरों में बाढ़ से निपटने की बेहतर व्यवस्था, खेती के तरीकों में बदलाव, पानी को जमा करने की मजबूत प्रणाली और ऐसा बुनियादी ढांचा तैयार करना होगा, जो अचानक आने वाली बेहद तेज बारिश को थाम सके।

 

भारत मानसून या अल नीनो को नियंत्रित नहीं कर सकता और ना ही अकेले ग्लोबल वार्मिंग को रोक सकता है। लेकिन यह जरूर तय कर सकता है कि उसका हर निर्माण, हर प्रणाली और हर योजना भविष्य के मौसम को ध्यान में रखकर तैयार की जाए।

हल्द्वानी में मंच के ‘शुद्धिकरण’ पर भड़के खरगे, राज्यसभा में बोले- Untouchability Act के तहत केस दर्ज हो

हल्द्वानी में मंच के ‘शुद्धिकरण’ पर भड़के खरगे, राज्यसभा में बोले- Untouchability Act के तहत केस दर्ज हो

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हल्द्वानी में कांग्रेस की सभा के बाद मंच के शुद्धिकरण को लेकर राज्यसभा में हंगामा हुआ। मल्लिकार्जुन खरगे ने इसे लोकतंत्र और संविधान का अपमान बताते हुए Untouchability Act के तहत केस दर्ज कर कार्रवाई की मांग की। ALSO READ: खड़गे की रैली के बाद मंच के ‘शुद्धिकरण’ पर बवाल, नाराज कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप

क्या लोकतंत्र में ऐसा होता है?

राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि मैं हल्द्वानी में था, जहां मैंने रामलीला मैदान में एक जनसभा को संबोधित किया। वहां लाखों लोग मौजूद थे। उस समय मैंने किसी समुदाय या धर्म का नाम नहीं लिया, मैंने केवल सरकार से जुड़े मुद्दों को दोहराया। लेकिन मेरे भाषण के बाद, भाजपा के लोगों ने उस मंच को 'शुद्ध' करने के लिए वहां हवन किया। क्या लोकतंत्र में ऐसा होता है? आप संविधान की रक्षा कैसे कर रहे हैं?

 

उन्होंने कहा कि मैं विपक्ष का नेता हूं। मेरी मांग है कि हल्द्वानी में जिन लोगों ने स्टेज का शुद्धिकरण किया, उन पर Untouchability Act के तहत केस दर्ज हो और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए।

भाजपा ऐसे कृत्यों का समर्थन नहीं करती

भाजपा के पूर्व राष्‍ट्रीय अध्यक्ष केंद्रीय मंत्री जेपी नड्‍डा ने घटना को दुखदाई बताते हुए कहा कि हल्दवानी की घटना गंभीर विषय है। भाजपा ऐसे कृत्यों का समर्थन नहीं करती। उन्होंने कहा कि खरगे के आरोपों की जांच होगी। इसके बाद सभापति ने सरकार से मामले की जांच कराने को कहा। उन्होंने कहा कि जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी।

 

क्या है मामला?

गौरतलब है कि 8 अगस्त को उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस की विजय शंखनाद सभा आयोजन किया गया था। इसमें कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जन खरगे, प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य शामिल हुए जो दलित वर्ग से आते हैं।

 

कार्यक्रम के बाद हिंदू संगठन श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास ने इस मैदान का शुद्धिकरण किया। इस दौरान उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा-पाठ और यज्ञ किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की रैली में मंच से इस्लामिक नारे लगाए गए। इस वजह से यहां की धार्मिक पवित्रता प्रभावित हुई। 

राम मंदिर को मिलने वाला है पहला CEO! 16 उम्मीदवारों के इंटरव्यू पूरे, अब 3 नाम होंगे शॉर्टलिस्ट

राम मंदिर को मिलने वाला है पहला CEO! 16 उम्मीदवारों के इंटरव्यू पूरे, अब 3 नाम होंगे शॉर्टलिस्ट

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श्री राम जन्मभूमि मंदिर में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के पद के चयन के लिए दो दिवसीय साक्षात्कार की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है। इस पद के लिए कुल 18 अभ्यर्थियों को आमंत्रित किया गया था, जिनमें से 16 उम्मीदवारों ने साक्षात्कार में भाग लिया। अब इनमें से केवल 3 अंतिम नामों को शॉर्टलिस्ट किया जाएगा, जिन पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पुनर्विचार कर मंदिर के पहले CEO के नाम की घोषणा करेगा। ALSO READ: UP में अग्निवीरों की बंपर भर्ती, 6 बड़े शहरों में रैलियों की तैयारी शुरू, 17 अगस्त से अप्रैल 2027 तक चलेगा अभियान!

 

​साक्षात्कार प्रक्रिया और समय सारणी

​स्थान व समय: राम मंदिर परिसर स्थित ग्रीन हाउस में प्रतिदिन प्रातः 11:30 बजे से सायं 06:00 बजे तक साक्षात्कार आयोजित किए गए।

​साक्षात्कार अवधि: प्रत्येक प्रत्याशी के साक्षात्कार में लगभग 40 से 50 मिनट का समय लगा।

​प्रक्रिया का विवरण: पहले दिन 8 अधिकारियों को आमंत्रित किया गया था (जिन्हें 3 पूर्व IAS, 4 पूर्व सेना अधिकारी व पूर्व IPS शामिल थे)। पहले दिन केवल 5 उम्मीदवारों के ही साक्षात्कार हो सके, जिसके बाद शेष अभ्यर्थियों को दूसरे दिन अवसर दिया गया।

 

परीक्षार्थियों से पूछे गए प्रमुख प्रश्न

​साक्षात्कार के दौरान उम्मीदवारों की प्रशासनिक दक्षता के साथ-साथ उनकी धार्मिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को परखने पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रमुख सवाल निम्नलिखित विषयों से जुड़े रहे:

सनातन आस्था व परंपराएं: हिंदू धार्मिक परंपराओं, रीति-रिवाजों और सनातन आस्था से जुड़े विषय।

​व्यक्तिगत जीवनशैली: शाकाहारी होने, जनेऊ धारण करने जैसे व्यक्तिगत नियम।

​प्रशासनिक व धार्मिक कार्य: धार्मिक कार्यों के प्रबंधन का अनुभव और भगवान श्री राम के चरित्र व आदर्शों पर आधारित प्रश्न। ALSO READ: योगी सरकार का भूमाफियाओं पर बड़ा एक्शन, 2 लाख एकड़ जमीन कराई कब्जामुक्त, अब बनेगा यूपी का बड़ा ‘लैंडबैंक’

 

​दौड़ में शामिल प्रमुख चेहरे

​पूर्व IPS राजेश पांडेय: यूपी पुलिस के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट (80 से अधिक एनकाउंटर), UP ATS व STF के संस्थापक सदस्य तथा फोन ट्रैकिंग प्रणाली की शुरुआत करने वाले अधिकारी। 1990 के दशक में कुख्यात गैंगस्टर श्रीप्रकाश शुक्ला का एनकाउंटर करने वाली टीम के सदस्य रहे। इन्होंने 2005 के अयोध्या मंदिर आतंकी हमले, 2006 वाराणसी दशाश्वमेध घाट धमाके और लखनऊ-फैजाबाद कोर्ट ब्लास्ट की जांच का नेतृत्व भी किया है।

​पूर्व IAS दिनेश चंद्र: चार जनपदों के जिलाधिकारी (जौनपुर सहित) रह चुके हैं। प्रशासनिक सेवा में बेदाग व ईमानदार छवि के लिए जाने जाते हैं।

​पूर्व IAS योगेश्वर राम मिश्रा: PCS से प्रमोटेड अधिकारी, जो अयोध्या, वाराणसी और बाराबंकी के जिलाधिकारी के रूप में सेवाएं दे चुके हैं।

अन्य प्रमुख प्रत्याशी: सेना से सेवानिवृत्त बबिता सिंह तथा अयोध्या में CO पद से सेवानिवृत्त प्रमोद कांत मिश्रा भी साक्षात्कार में शामिल हुए। ALSO READ: उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर 2017 के बाद क्या बदला?

 

​चयन प्रक्रिया एवं कार्यकाल

अंतिम चयन: साक्षात्कार में शामिल 16 कैंडीडेट्स में से शीर्ष 3 नामों को शॉर्टलिस्ट किया जाएगा। इसके बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट इन तीन नामों में से किसी एक पर अपनी मुहर लगाएगा, जो मंदिर के पहले CEO बनेंगे।

​कार्यकाल: नियुक्त होने वाले CEO का कार्यकाल 3 वर्ष का होगा। तीन वर्ष पूर्ण होने पर उनके कार्य प्रदर्शन (Performance) के आधार पर सेवा का नवीनीकरण (Renewal) किया जाएगा।

खड़गे की रैली के बाद मंच के ‘शुद्धिकरण’ पर बवाल, नाराज कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप

खड़गे की रैली के बाद मंच के ‘शुद्धिकरण’ पर बवाल, नाराज कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप

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उत्तराखंड के हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद मंच का हिन्दू संगठनों ने शुद्धिकरण किया। इस पर कांग्रेस पार्टी ने कड़ी आपत्ति जताई है और आरोपियों पर कार्रवाई की मांग की। पार्टी ने इस मामले में भाजपा पर कई गंभीर आरोप लगाए। ALSO READ: बिना प्याज-लहसुन की मछली शाकाहारी? संजय निषाद के बयान पर नेहा सिंह राठौर का तंज, मुंबई में घर को लेकर भी बवाल

 

क्या है मामला?

गौरतलब है कि 8 अगस्त को उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस की विजय शंखनाद सभा आयोजन किया गया था। इसमें कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जन खरगे, प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य शामिल हुए जो दलित वर्ग से आते हैं।

 

कार्यक्रम के बाद हिंदू संगठन श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास ने इस मैदान का शुद्धिकरण किया। इस दौरान उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा-पाठ और यज्ञ किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की रैली में मंच से इस्लामिक नारे लगाए गए। इस वजह से यहां की धार्मिक पवित्रता प्रभावित हुई। ALSO READ: मनमोहन सिंह के अपमान के लिए खुद को भी माफ कर लें मोदी, कोयला घोटाले में क्लीन चिट के बाद सोनिया गांधी का तीखा तंज

खरगे ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा में हल्दवानी में शुद्धिकरण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हल्दवानी में मेरा अपमान किया है। इस पर जेपी नड्‍डा ने घटना को दुखदाई बताते हुए कहा कि भाजपा ऐसी घटना का समर्थन नहीं करती। 

क्या बोले उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष?

उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खरगे ने जिस मंच से जनता को संबोधित किया, उसी मंच का BJP से जुड़े लोगों द्वारा ‘शुद्धिकरण’ किया जाना बेहद आहत करने वाला और निंदनीय है। यह घटना BJP की जातिगत भेदभाव और संकीर्ण मानसिकता को दर्शाती है, समाज में द्वेष और विभाजन को बढ़ावा देती है। 

 

उन्होंने कहा कि नैनीताल के एसएसपी से आग्रह है कि इस मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच करें और यदि कानून का उल्लंघन हुआ है तो दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई सुनिश्चित करें। जातिगत भेदभाव का लोकतांत्रिक भारत में कोई स्थान नहीं है। हम लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से ऐसी ओछी मानसिकता का पुरजोर विरोध करते हैं।

ऋषिकेश में प्रदर्शन

इस बीच भाजपा सरकार द्वारा सरकारी मशीनरी के कथित दुरुपयोग, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जी के अपमान एवं नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ अभद्रता के विरोध में परवादून जिला कांग्रेस के अंतर्गत ऋषिकेश महानगर कांग्रेस एवं डोईवाला नगर कांग्रेस द्वारा भाजपा सरकार का पुतला दहन कर जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया गया।

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लद्दाख के लेह में 5.5 तीव्रता का भूकंप, सुबह-सुबह कांपी धरती; घरों से बाहर निकले लोग

लद्दाख के लेह में 5.5 तीव्रता का भूकंप, सुबह-सुबह कांपी धरती; घरों से बाहर निकले लोग

earthquake in leh

लद्दाख के लेह में आज सुबह भूकंप के तेज झटकों से हड़कंप मच गया। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.5 मापी गई। भूकंप की वजह से लोग घरों से बाहर निकल आए। हालांकि, भूकंप से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है। ALSO READ: सूर्य ग्रहण से पहले कोलंबिया में 7.4 तीव्रता का भूकंप, 250 की मौत और 3000 लापता; 21 आफ्टरशॉक से दहशत

 

नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, भूकंप सुबह करीब 6:05 बजे आया और इसका केंद्र जमीन के 10 किलोमीटर नीचे था। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.5 मापी गई। झटके महसूस होने के बाद लोगों में कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बना। 

भूकंप के झटके इतने तेज थे कि लोग नींद से जाग गए। आफ्टरशॉक्स के डर से लोग अभी घर में नहीं जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

 

कैसे आता है भूकंप?

हमारी धरती मुख्य तौर पर 4 परतों से बनी हुई है- इनर कोर, आउटर कोर, मैन्टलऔर क्रस्ट। क्रस्ट और ऊपरी मैन्टल को लिथोस्फेयर कहते हैं। ये 50 किलोमीटर की मोटी परत वर्गों में बंटी हुई है जिन्हें टैकटोनिक प्लेट्स कहा जाता है। ये टैकटोनिक प्लेट्स अपनी जगह से हिलती रहती हैं। लेकिन जब ये बहुत ज्यादा हिल जाती हैं तो भूकंप आ जाता है। ये प्लेट्स क्षैतिज और उर्ध्वाधर दोनों ही तरह से अपनी जगह से हिल सकती हैं। इसके बाद वे अपनी जगह तलाशती हैं और ऐसे में एक प्लेट, दूसरी के नीचे आ जाती है।

 

कैसे मापी जाती है भूकंप की तीव्रता?

भूकंप की तीव्रता मापने के लिए रिक्टर स्केल का पैमाना इस्तेमाल किया जाता है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। भूकंप की तरंगों को रिक्टर स्केल 1 से 9 तक के आधार पर मापता है। रिक्टर स्केल पैमाने को सन् 1935 में कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलाजी में कार्यरत वैज्ञानिक चार्ल्स रिक्टर ने बेनो गुटेनबर्ग के सहयोग से खोजा था।

 

इस स्केल के अंतर्गत प्रति स्केल भूकंप की तीव्रता 10 गुना बढ़ जाती है और भूकंप के दौरान जो ऊर्जा निकलती है, वह प्रति स्केल 32 गुना बढ़ जाती है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि 3 रिक्टर स्केल पर भूकंप की जो तीव्रता थी, वह 4 स्केल पर 3 रिक्टर स्केल का 10 गुना बढ़ जाएगी। रिक्टर स्केल पर भूकंप की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 8 रिक्टर पैमाने पर आया भूकंप 60 लाख टन विस्फोटक से निकलने वाली ऊर्जा उत्पन्न कर सकता है।

 

बिना प्याज-लहसुन की मछली शाकाहारी? संजय निषाद के बयान पर नेहा सिंह राठौर का तंज, मुंबई में घर को लेकर भी बवाल

बिना प्याज-लहसुन की मछली शाकाहारी? संजय निषाद के बयान पर नेहा सिंह राठौर का तंज, मुंबई में घर को लेकर भी बवाल

sanjay nishad and neha singh rathore on 'vegiterian fish'

उत्तर प्रदेश सरकार मंत्री संजय निषाद ने कहा कि बिना प्याज-लहसुन के मछली खाई जाए तो वह शाकाहारी है। उनके बयान पर नेहा सिंह राठौर ने सवाल उठाया। वहीं मुंबई में खान-पान की आदतों के आधार पर घर देने को लेकर विवाद छिड़ा है। ALSO READ: 'लुंगी वाला' बयान पर संसद में बवाल, सुष्मिता देव को उपसभापति ने लगाई फटकार, सदन में जमकर हंगामा

 

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने कहा है कि अगर बिना लहसुन प्याज के मछली खाया जाए तो वह शाकाहारी है। संजय निषाद का यह बयान सावन के महीने में आया है, जब हिंदू समाज के ज्यादातर लोग नॉनवेज तो दूर लहसुन प्याज खाने से भी परहेज करते हैं। 

 

लोक गायिका नेहा सिंह राठौर ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए तो क्या मंत्रीजी मछली को शुद्ध घी में फ्राई करके सेंधा नमक डालकर व्रत में भी खा सकते हैं?

हालांकि बाद में संजय निषाद ने मामले पर सफाई देते हुए कहा, 'हम लोग मजाकियां अंदाज में कहते रहते हैं कि लोग ऐसा कहते हैं, निश्चित रूप से हम मछली खाने वाले लोग हैं… नेताओं को, इनका भोजन, इनकी मछली, इनको रहने दीजिए…' ALSO READ: फुटपाथ चोरी हो गया साहब! भोपाल में पुलिस से शिकायत, FIR लिखने की मांग

 

सिर्फ 'शाकाहारी' लोगों को ही मिलेगा घर?

मुंबई के टार्देव इलाके में 6.5 करोड़ रुपये के एक अपार्टमेंट की लिस्टिंग पर खड़ा हुआ बड़ा विवाद। मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया यूजर्स ने कहा कि यह इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि मुंबई की बहुसांस्कृतिक और सर्वसमावेशी पहचान किस तरह खान-पान के आधार पर भेदभाव की ओर बढ़ रही है, जहां आवासीय सोसाइटी में मांसाहारी भोजन के सेवन पर रोक लगाई जा रही है।


इससे पहले भी फिल्म अभिनेता सैफ अली खान और इमरान हाशमी समेत कई दिग्गजों को आवासीय सोसाइटियां घर देने से इनकार कर चुकी है।

उसने मेरे मुंह में AK-47 ठूंस दी थी, कैसे पाकिस्तानी कैप्टन क़मर ने फ्लाइट लेफ्टिनेंट के. नचिकेता की बचाई जान

उसने मेरे मुंह में AK-47 ठूंस दी थी, कैसे  पाकिस्तानी कैप्टन क़मर ने फ्लाइट लेफ्टिनेंट के. नचिकेता की बचाई जान

Story of Operation Safed Sagar

Story of Operation Safed Sagar: 1999 का कारगिल युद्ध केवल 18,000 फीट की बर्फीली चोटियों पर लड़ी गई जमीनी जंग की गाथा नहीं है। यह भारतीय वायुसेना के 'ऑपरेशन सफेद सागर' (Operation Safed Sagar) के उन जांबाजों की भी कहानी है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में आसमान से दुश्मन के ठिकानों को तबाह किया।
उसी युद्ध के मैदान में एक ऐसी अभूतपूर्व और दिल दहला देने वाली घटना घटी, जहाँ मौत के मुँह में खड़े भारतीय पायलट की जान एक दुश्मन सैन्य अधिकारी के मानवीय निर्णय ने बचाई।

27 मई 1999 : जब MiG-27 का इंजन हुआ ठप

27 मई 1999 को कारगिल के मुंथु ढालो (Munthu Dhalo) क्षेत्र में 17वें स्क्वाड्रन के 26 वर्षीय युवा फाइटर पायलट फ्लाइट लेफ्टिनेंट के. नचिकेता अपने MiG-27 लड़ाकू विमान से दुश्मन के रसद ठिकानों पर रॉकेट बरसा रहे थे।

अटैक रन के तुरंत बाद उनके विमान के इंजन में अचानक 'फ्लेमआउट' (इंजन का बंद होना) हो गया। विमान तेजी से नीचे गिरने लगा। नचिकेता ने हवा में ही इंजन को री-लाइट (दोबारा चालू) करने के कई प्रयास किए, लेकिन बर्फीले पहाड़ कॉकपिट की ओर तेजी से बढ़ रहे थे।

जब मैंने देखा कि पहाड़ मेरे कॉकपिट की तरफ तेजी से आ रहे हैं, तो मेरे पास इजेक्ट करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।” ग्रुप कैप्टन के. नचिकेता (सेवानिवृत्त)

Story of Operation Safed Sagar

15,000 फीट की ऊँचाई पर नचिकेता ने इजेक्शन सीट का हैंडल खींचा। इजेक्ट होने के कुछ ही सेकंड बाद उनका जेट पहाड़ से टकराकर एक भयंकर आग के गोले में तब्दील हो गया।

“Mission First, Men Always”: स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा का सर्वोच्च बलिदान

जब नचिकेता का विमान क्रैश हुआ, तब उनके साथी स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा अपने MiG-21 से उस क्षेत्र में टोही मिशन पर थे। नचिकेता की इजेक्शन लोकेशन ट्रेस करने के लिए अजय आहूजा ने खतरा उठाकर उस बर्फीली घाटी के ऊपर अपने विमान को मोड़ा।

भारतीय सैन्य परंपरा का मूलमंत्र है—“Mission First, Men Always” (मिशन सबसे पहले, साथी हमेशा साथ)।
इसी भावना के साथ अजय आहूजा ने अपने साथी को अकेला छोड़ने के बजाय उसकी लोकेशन को मार्क करना जारी रखा। इसी दौरान उनका विमान दुश्मन की कंधे पर रखकर दागी जाने वाली 'स्टिंगर' सर्फेस-टू-एयर मिसाइल (SAM) का शिकार हो गया। वे सुरक्षित इजेक्ट कर गए, लेकिन पाकिस्तानी सैनिकों के हाथों पकड़े जाने के बाद उन्होंने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दे दिया।

दुश्मन के इलाके में उतरना और AK-47 की नली

पैराशूट से सुरक्षित उतरने के बाद नचिकेता का सामना एक खौफनाक हकीकत से हुआ—वे दुश्मन के कब्जे वाले क्षेत्र में अकेले थे। उनके पास केवल उनकी 9mm सर्विस पिस्टल और 16 राउंड गोलियां थीं।

कुछ ही देर में पाकिस्तानी सेना की 5th Northern Light Infantry (NLI) के 5-6 सैनिकों ने उन्हें घेर लिया और गोलीबारी शुरू कर दी। नचिकेता ने अपनी पिस्टल से जवाबी फायरिंग की, लेकिन 8 गोलियां तुरंत खत्म हो गईं। जब वे दूसरी मैगजीन लोड करने की कोशिश कर रहे थे, तभी एक अत्यधिक उत्तेजित पाकिस्तानी जवान दौड़ता हुआ उनके बिल्कुल करीब पहुँच गया।

Story of Operation Safed Sagar

उसी क्षण मौत उनके सामने खड़ी थी। उस जवान ने गुस्से में अपनी AK-47 राइफल की नली नचिकेता के मुँह में ठूंस दी। नचिकेता केवल उस सैनिक की ट्रिगर पर रखी उंगली को देख रहे थे—बस एक सेकंड की देरी और उनका जीवन समाप्त हो जाता।

कैप्टन क़मर की समय पर एंट्री और जान की रक्षा

ठीक उसी सेकंड, परिस्थितियों ने एक अप्रत्याशित मोड़ लिया। 5th NLI के कैप्टन क़मर दौड़ते हुए वहाँ पहुँचे और उन्होंने चिल्लाकर अपने जवान को रोका: रुक जाओ! गोली मत चलाना!”

ग्रुप कैप्टन के. नचिकेता (सेवानिवृत्त) ने स्वयं मीडिया साक्षात्कारों और आधिकारिक संस्मरणों (जैसे स्वप्निल पांडेय की पुस्तक Wings of Valor) में पुष्टि की है कि 5th Northern Light Infantry (NLI) के कैप्टन क़मर ने अपनी जान जोखिम में डालकर उत्तेजित पाकिस्तानी जवानों को उन्हें गोली मारने से रोका था।

कैप्टन क़मर ने नचिकेता को उस उत्तेजित जवान से पीछे हटाया और एक युद्धबंदी (POW) सैन्य अधिकारी के रूप में सुरक्षा दी। कैप्टन क़मर ने नचिकेता को प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) भी उपलब्ध कराई।

उस दिन मौत मेरे दरवाजे पर दो बार आई—पहली बार दुर्घटनाग्रस्त होते MiG-27 के रूप में और दूसरी बार AK-47 की नली के रूप में। अगर कैप्टन क़मर एक सेकंड भी देर से आते, तो मैं जीवित नहीं बचता।” के. नचिकेता

बाद में जब भारतीय सेना ने उस पूरे क्षेत्र को वापस अपने नियंत्रण में लिया, तो जानकारी मिली कि कैप्टन क़मर युद्ध के दौरान मारे गए थे। भारतीय सैन्य खुफिया को कैप्टन क़मर की डायरी का एक अंश भी मिला था। नचिकेता आज भी एक दुश्मन अधिकारी के उस मानवीय विवेक को अत्यंत सम्मान से याद करते हैं।

युद्धबंदी जीवन और भारत वापसी

नचिकेता को 8 दिनों तक रावलपिंडी और इस्लामाबाद में युद्धबंदी बनाकर रखा गया, जहाँ उन्होंने कठिन मानसिक और शारीरिक यातनाओं का सामना किया। भारत सरकार, अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस (ICRC) और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कड़े कूटनीतिक दबाव के बाद 3 जून 1999 को नचिकेता को अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते सकुशल भारत वापस लाया गया।

इजेक्शन के दौरान रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट (Compression Spine Injury) के कारण नचिकेता बाद में फाइटर कॉकपिट से भारतीय वायुसेना की ट्रांसपोर्ट स्ट्रीम में चले गए और देश की सेवा जारी रखी।

'ऑपरेशन सफेद सागर' की यह कहानी युद्ध की बर्बरता के बीच वीरता, सर्वस्व बलिदान और इंसानियत का अमर प्रतीक है—जहाँ एक तरफ स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा ने “Mission First, Men Always” के मूलमंत्र को चरितार्थ करते हुए प्राण न्योछावर कर दिए, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान के सैन्य अधिकारी कैप्टन क़मर का एक सही फैसला इतिहास में इंसानियत की मिसाल बन गया।