Weather Update : भारत में Monsoon ने पकड़ी रफ्तार, गुजरात-असम में बाढ़ का कहर, 17 राज्यों के लिए IMD का अलर्ट

mansoon update

देशभर में दक्षिण-पश्चिम मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि दो सक्रिय निम्न दबाव (लो-प्रेशर) सिस्टम और एक पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से अगले कुछ दिनों तक देश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश, आंधी और तेज हवाएं चलने की संभावना है। इस बीच गुजरात और असम में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है, जबकि दिल्ली समेत 17 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

ALSO READ: Pralhad joshi : कितने पढ़े-लिखे हैं देश के नए शिक्षा मंत्री प्रहलाद और मोदी सरकार ने उन्हें ही क्यों सौंपी शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी, क्या हैं चुनौतियां

सक्रिय मौसम प्रणालियों से तेज हुआ मानसून

 

मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में एक निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। वहीं, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में एक और लो-प्रेशर सिस्टम विकसित हुआ है, जो पश्चिम बंगाल और उत्तरी ओडिशा के तटीय क्षेत्रों तक फैला हुआ है। अगले दो दिनों में इसके और मजबूत होने की संभावना है।

 

इसके अलावा, मध्य और ऊपरी क्षोभमंडल में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ भी उत्तर भारत में बारिश की गतिविधियों को बढ़ा रहा है। इन सभी मौसम प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से देश के बड़े हिस्से में तेज बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर जारी रहने की संभावना है।

 

दिल्ली समेत उत्तर भारत में भारी बारिश की चेतावनी

 

आईएमडी ने दिल्ली के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। राजधानी में 64.5 मिमी से 115.5 मिमी तक बारिश, गरज-चमक और 70 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। अधिकतम तापमान लगभग 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। लोगों को भारी बारिश के दौरान गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। उत्तराखंड के बागेश्वर, पिथौरागढ़, नैनीताल, चमोली, अल्मोड़ा, रुद्रप्रयाग, ऊधम सिंह नगर, पौड़ी गढ़वाल और चंपावत जिलों में भी भारी बारिश और 60 किमी प्रति घंटे तक तेज हवाओं की चेतावनी जारी की गई है।

 

हिमाचल प्रदेश के चंबा, कांगड़ा, मंडी, शिमला, सिरमौर, हमीरपुर, सोलन, बिलासपुर और कुल्लू में अगले दो दिनों तक व्यापक बारिश होने की संभावना है।

 

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा, रामबन, जम्मू, पुंछ, कुलगाम, उधमपुर, कठुआ, डोडा, अनंतनाग, गांदरबल और कुपवाड़ा जिलों में भी येलो अलर्ट जारी किया गया है।

 

गुजरात और असम में बाढ़ से हालात गंभीर

लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण गुजरात में बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। अब तक 40,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। बारिश से जुड़ी घटनाओं में पांच लोगों की मौत हो चुकी है। एहतियात के तौर पर अहमदाबाद में स्कूल, कॉलेज और आंगनबाड़ी केंद्र बंद कर दिए गए हैं। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों के लिए रेड अलर्ट जारी करते हुए 204.5 मिमी से अधिक बारिश की चेतावनी दी है।

 

असम में बाढ़ का संकट लगातार गहराता जा रहा है। पिछले 24 घंटे में 14 और लोगों की मौत के बाद राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 61 हो गई है। 12 जिलों में 7.05 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। उफनती नदियों के कारण घर, सड़कें और कृषि भूमि जलमग्न हो गई हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।

 

इन राज्यों में भी भारी बारिश का अलर्ट

आईएमडी के अनुसार, गुजरात और हिमालयी राज्यों के अलावा कोंकण-गोवा, मध्य महाराष्ट्र, ओडिशा और राजस्थान में भी भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। इन क्षेत्रों में 115.6 मिमी से 204.4 मिमी तक वर्षा दर्ज की जा सकती है। इसके अलावा असम, मेघालय, गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल, हरियाणा, पंजाब, झारखंड, केरल, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा तथा तटीय और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भी भारी बारिश, आंधी और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है।

Weather Update : भारत में Monsoon ने पकड़ी रफ्तार, गुजरात-असम में बाढ़ का कहर, 17 राज्यों के लिए IMD का अलर्ट

mansoon update

देशभर में दक्षिण-पश्चिम मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि दो सक्रिय निम्न दबाव (लो-प्रेशर) सिस्टम और एक पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से अगले कुछ दिनों तक देश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश, आंधी और तेज हवाएं चलने की संभावना है। इस बीच गुजरात और असम में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है, जबकि दिल्ली समेत 17 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

ALSO READ: Pralhad joshi : कितने पढ़े-लिखे हैं देश के नए शिक्षा मंत्री प्रहलाद और मोदी सरकार ने उन्हें ही क्यों सौंपी शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी, क्या हैं चुनौतियां

सक्रिय मौसम प्रणालियों से तेज हुआ मानसून

 

मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में एक निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। वहीं, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में एक और लो-प्रेशर सिस्टम विकसित हुआ है, जो पश्चिम बंगाल और उत्तरी ओडिशा के तटीय क्षेत्रों तक फैला हुआ है। अगले दो दिनों में इसके और मजबूत होने की संभावना है।

 

इसके अलावा, मध्य और ऊपरी क्षोभमंडल में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ भी उत्तर भारत में बारिश की गतिविधियों को बढ़ा रहा है। इन सभी मौसम प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से देश के बड़े हिस्से में तेज बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर जारी रहने की संभावना है।

 

दिल्ली समेत उत्तर भारत में भारी बारिश की चेतावनी

 

आईएमडी ने दिल्ली के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। राजधानी में 64.5 मिमी से 115.5 मिमी तक बारिश, गरज-चमक और 70 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। अधिकतम तापमान लगभग 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। लोगों को भारी बारिश के दौरान गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। उत्तराखंड के बागेश्वर, पिथौरागढ़, नैनीताल, चमोली, अल्मोड़ा, रुद्रप्रयाग, ऊधम सिंह नगर, पौड़ी गढ़वाल और चंपावत जिलों में भी भारी बारिश और 60 किमी प्रति घंटे तक तेज हवाओं की चेतावनी जारी की गई है।

 

हिमाचल प्रदेश के चंबा, कांगड़ा, मंडी, शिमला, सिरमौर, हमीरपुर, सोलन, बिलासपुर और कुल्लू में अगले दो दिनों तक व्यापक बारिश होने की संभावना है।

 

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा, रामबन, जम्मू, पुंछ, कुलगाम, उधमपुर, कठुआ, डोडा, अनंतनाग, गांदरबल और कुपवाड़ा जिलों में भी येलो अलर्ट जारी किया गया है।

 

गुजरात और असम में बाढ़ से हालात गंभीर

लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण गुजरात में बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। अब तक 40,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। बारिश से जुड़ी घटनाओं में पांच लोगों की मौत हो चुकी है। एहतियात के तौर पर अहमदाबाद में स्कूल, कॉलेज और आंगनबाड़ी केंद्र बंद कर दिए गए हैं। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों के लिए रेड अलर्ट जारी करते हुए 204.5 मिमी से अधिक बारिश की चेतावनी दी है।

 

असम में बाढ़ का संकट लगातार गहराता जा रहा है। पिछले 24 घंटे में 14 और लोगों की मौत के बाद राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 61 हो गई है। 12 जिलों में 7.05 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। उफनती नदियों के कारण घर, सड़कें और कृषि भूमि जलमग्न हो गई हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।

 

इन राज्यों में भी भारी बारिश का अलर्ट

आईएमडी के अनुसार, गुजरात और हिमालयी राज्यों के अलावा कोंकण-गोवा, मध्य महाराष्ट्र, ओडिशा और राजस्थान में भी भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। इन क्षेत्रों में 115.6 मिमी से 204.4 मिमी तक वर्षा दर्ज की जा सकती है। इसके अलावा असम, मेघालय, गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल, हरियाणा, पंजाब, झारखंड, केरल, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा तथा तटीय और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भी भारी बारिश, आंधी और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है।

Pralhad joshi : कितने पढ़े-लिखे हैं देश के नए शिक्षा मंत्री प्रहलाद और मोदी सरकार ने उन्हें ही क्यों सौंपी शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी, क्या हैं चुनौतियां

केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी को अब शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 2026 के NEET विवाद और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के प्रबंधन को लेकर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार करने के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया है। आइए जानते हैं उनकी शिक्षा, शुरुआती जीवन और राजनीतिक सफर के बारे में।

साल 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगातार दूसरी बार सरकार बनने के बाद 30 मई, 2019 को प्रह्लाद जोशी को पहली बार कैबिनेट में जगह मिली और उन्हें संसदीय कार्य मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। वे मोदी सरकार में कोयला मंत्री भी रहे और इसके बाद वर्तमान में मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में प्रह्लाद जोशी उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के साथ नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और अब उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।  

ALSO READ: NEET विवाद के बीच प्रह्लाद जोशी बने नए शिक्षा मंत्री, पदभार संभालते ही कही बड़ी बात

प्रह्लाद जोशी की शैक्षणिक योग्यता

प्रह्लाद जोशी ने बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री हासिल की है। उन्होंने कर्नाटक के हुब्बली स्थित के.एस. आर्ट्स कॉलेज से स्नातक किया, जो कर्नाटक यूनिवर्सिटी, धारवाड़ से संबद्ध है। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा रेलवे स्कूल से प्राप्त की, जबकि आगे की स्कूली पढ़ाई हुब्बली के न्यू इंग्लिश स्कूल से पूरी की।

 

शुरुआती जीवन

 

प्रह्लाद जोशी का जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुरा (पूर्व में बीजापुर) में हुआ था। उनका परिवार साधारण पृष्ठभूमि से जुड़ा था। उनके पिता भारतीय रेलवे में कार्यरत थे। कर्नाटक में ही उन्होंने अपनी अधिकांश शिक्षा पूरी की और बाद में कला संकाय से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। युवा अवस्था में ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े और बाद में संगठनात्मक एवं राजनीतिक गतिविधियों के माध्यम से सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया।

 

राजनीतिक सफर

प्रह्लाद जोशी वर्ष 2004 से लगातार धारवाड़ लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वह लगातार पांच बार लोकसभा सांसद चुने जा चुके हैं और कर्नाटक भाजपा के सबसे अनुभवी नेताओं में उनकी गिनती होती है।

 

अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं, जिनमें शामिल हैं—

 

भाजपा कर्नाटक इकाई के प्रदेश अध्यक्ष

  • केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री
  • केंद्रीय कोयला मंत्री
  • केंद्रीय खान मंत्री
  • केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री
  • केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री

क्यों सौंपी गई शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी?

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 2026 NEET विवाद और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के प्रबंधन को लेकर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार करने के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। प्रह्लाद जोशी अपने मौजूदा मंत्रालयों की जिम्मेदारियों के साथ-साथ अब शिक्षा मंत्रालय का भी नेतृत्व करेंगे। पदभार संभालने के बाद उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का पूरा प्रयास करेंगे और भारत की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में पूरी निष्ठा से कार्य करेंगे। 

माना जा रहा है कि सरकार ने प्रह्लाद जोशी के लंबे राजनीतिक अनुभव और संगठन में काम करने की क्षमता को देखते हुए उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें राष्ट्रीय शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू करना, उच्च शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना, परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और डिजिटल शिक्षा को मजबूत करना होगा। 

NEET विवाद के बीच प्रह्लाद जोशी बने नए शिक्षा मंत्री, पदभार संभालते ही कही बड़ी बात

छात्रों के विरोध प्रदर्शन और नीट (NEET) पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के  इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शनिवार को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाल लिया। पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने कहा कि वह 'पूर्ण विनम्रता और कर्तव्य भावना' के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे।

 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा। पदभार संभालने के बाद जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने उन पर भरोसा जताते हुए एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने इसके लिए पीएम मोदी का आभार व्यक्त किया और कहा कि वह उनके मार्गदर्शन में पूरी ईमानदारी से काम करेंगे तथा शिक्षा मंत्रालय से जुड़ी अपेक्षाओं पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे।

 

63 वर्षीय प्रह्लाद जोशी ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने पिछले चार से पांच वर्षों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और शिक्षा क्षेत्र में कई बड़े सुधार किए। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा व्यवस्था के तहत देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है।

 

जोशी ने कहा, “पिछले चार-पांच वर्षों में धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू किया और शिक्षा क्षेत्र में कई अहम पहल की गईं। नई शिक्षा व्यवस्था के तहत देश ने महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है।”

 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में वह अपनी पूरी क्षमता और समर्पण के साथ नई जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे। प्रह्लाद जोशी अपने मौजूदा मंत्रालयों—उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय—का कार्यभार भी संभालते रहेंगे। वह कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं।

 

धर्मेंद्र प्रधान ने नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों के लगातार विरोध प्रदर्शन के बीच इस्तीफा दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए अपने इस्तीफे में उन्होंने कहा कि उन्होंने छात्रों के हित और यह सुनिश्चित करने के लिए कि आंदोलन का दुरुपयोग “राष्ट्रविरोधी ताकतें” न कर सकें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपा है।

 

प्रधान ने अपने पत्र में कहा, “जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में जो स्थिति बनी है, उसका फायदा राष्ट्रविरोधी ताकतों को नहीं उठाने दिया जाना चाहिए। देश की एकता बनी रहनी चाहिए और भारत के प्रत्येक छात्र का भविष्य कानूनी उलझनों में नहीं फंसना चाहिए। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए मैंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा भेज दिया है।”

 

उधर, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों व आयोजकों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने के आश्वासन के बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा 49 दिनों का आंदोलन समाप्त करने का ऐलान कर दिया।

 

यह फैसला सीजेपी प्रतिनिधिमंडल और सरकार के बीच हुई तीन दौर की वार्ता के बाद लिया गया। इन बैठकों में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह भी शामिल रहे। सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि संगठन ने सरकार के आश्वासनों पर भरोसा जताते हुए आंदोलन समाप्त किया है और उम्मीद है कि तय समयसीमा के भीतर सभी सहमत शर्तों को लागू किया जाएगा।

प्रहलाद जोशी संभालेंगे धर्मेंद्र प्रधान की जिम्मेदारी, जानिए कौन हैं देश के नए शिक्षा मंत्री?

Pralhad Joshi appointed as country's Education Minister

Pralhad Joshi : धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिला है। धर्मेंद्र प्रधान के स्थान पर अब प्रहलाद जोशी ने शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल ली है। प्रहलाद जोशी अभी अपने पहले से संभाल रहे विभागों के साथ शिक्षा मंत्रालय का काम भी देखेंगे। प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें उनके मौजूदा मंत्रालयों के साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपने का आदेश जारी किया है। प्रहलाद जोशी लंबे समय से भाजपा के साथ जुड़े हुए हैं और पार्टी में कई अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।

 

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिला है। धर्मेंद्र प्रधान के स्थान पर अब प्रहलाद जोशी ने शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल ली है। प्रहलाद जोशी अभी अपने पहले से संभाल रहे विभागों के साथ शिक्षा मंत्रालय का काम भी देखेंगे। प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें उनके मौजूदा मंत्रालयों के साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपने का आदेश जारी किया है। 

ALSO READ: हम कॉकरोच हैं, आसानी से नहीं निकलेंगे! शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद CJP चीफ दीपके का बयान, 49 दिन चले आंदोलन का अंत

कौन हैं प्रहलाद जोशी?

प्रहलाद जोशी का जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुरा में हुआ था। प्रहलाद जोशी ने कर्नाटक के हुबली स्थित केएस आर्ट्स कॉलेज से बैचलर ऑफ आर्ट्स यानी बीए की पढ़ाई की है। प्रहलाद जोशी भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। कर्नाटक के धारवाड़ से सांसद प्रहलाद जोशी 2004 से लगातार लोकसभा सदस्य हैं।

ALSO READ: आखिर धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे में इतना वक्त क्यों लगा? पूरे मामले की इनसाइड स्टोरी

प्रहलाद जोशी 1995 से 1998 तक भाजपा धारवाड़ जिला इकाई के अध्यक्ष रहे। इसके बाद 1998 से 2003 तक भाजपा धारवाड़ जिला इकाई के महासचिव रहे। वर्ष 2006 से 2013 तक भाजपा कर्नाटक प्रदेश के महासचिव रहे और भाजपा कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली।

 

नई जिम्मेदारी पर क्या बोले प्रहलाद जोशी? 

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने वाले प्रल्हाद जोशी ने प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि वह पूरी निष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे और प्रधानमंत्री की उम्मीदों पर खरा उतरेंगे। 

ALSO READ: CJP का आंदोलन खत्म, साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉकरोचों का ऐलान, सभी प्रदर्शनकारी घर जाएं

इस्तीफे के बाद क्‍या बोले धर्मेंद्र प्रधान? 

इससे पहले आज शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा दे दिया। धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर जानकारी दी। प्रधान ने कहा कि मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूं। प्रधान ने कहा कि युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना हम सभी के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन का नैतिक संकल्प रहा।

पटना में तेज प्रताप यादव गिरफ्तार, जानिए पुलिस ने क्‍यों लिया यह एक्शन?

police took Tej Pratap Yadav into custody

Tej Pratap Yadav arrested : बिहार की राजधानी पटना में आज हुए छात्रों के प्रदर्शन में जनशक्ति जनता दल (JJD) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को शनिवार देर शाम पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। अपने सोशल मीडिया पोस्ट में तेज प्रताप यादव ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को बिहार आने का न्‍योता दिया था और आंदोलन का समर्थन करने की बात कही थी। पुलिस के इस कदम से बिहार में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। तेज प्रताप यादव को हिरासत में लेने के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा।

ALSO READ: हम कॉकरोच हैं, आसानी से नहीं निकलेंगे! शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद CJP चीफ दीपके का बयान, 49 दिन चले आंदोलन का अंत

बिहार की राजधानी पटना में आज हुए छात्रों के प्रदर्शन में जनशक्ति जनता दल (JJD) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को शनिवार देर शाम पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। अपने सोशल मीडिया पोस्ट में तेज प्रताप यादव ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को बिहार आने का न्‍योता दिया था और आंदोलन का समर्थन करने की बात कही थी।


पुलिस के इस कदम से बिहार में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। तेज प्रताप यादव को हिरासत में लेने के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा। हिरासत में लिए जाने से कुछ घंटे पहले तेज प्रताप यादव छात्रों के आंदोलन में शामिल हुए थे।

ALSO READ: आखिर धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे में इतना वक्त क्यों लगा? पूरे मामले की इनसाइड स्टोरी

यादव ने आंदोलन के समर्थन में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और बाद में सोशल मीडिया पर एक लंबा संदेश भी साझा किया। खबरों के अनुसार, तेज प्रताप यादव को पटना से सटे नौबतपुर ले जाया गया है। हालांकि तेज प्रताप यादव को हिरासत में लिए जाने के मामले में पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

हम कॉकरोच हैं, आसानी से नहीं निकलेंगे! शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद CJP चीफ दीपके का बयान, 49 दिन चले आंदोलन का अंत

CJP protest ends Abhijeet Dipke

CJP protest ends Abhijeet Dipke: जंतर-मंतर पर 49 दिनों से चल रहे उग्र छात्र आंदोलन ने शनिवार को देश की राजनीति में भूचाल ला दिया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार द्वारा 1-1 करोड़ के मुआवजे की मांग स्वीकार करने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने आंदोलन खत्म करने का ऐलान कर दिया। लेकिन असली सनसनी तब फैली जब आंदोलन के सूत्रधार और सीजेपी चीफ अभिजीत दीपके ने हुंकार भरते हुए कहा— 'हम कॉकरोच हैं, एक बार जहां घुस जाते हैं, वहां से निकलते नहीं!'

 

देश के इतिहास में छात्रों और युवाओं का ऐसा अप्रत्याशित और सनसनीखेज आंदोलन शायद ही पहले कभी देखा गया हो। नीट (NEET) पेपर लीक विवाद को लेकर जंतर-मंतर पर शुरू हुआ प्रदर्शन शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की सबसे बड़ी खबर के साथ समाप्त हो गया। सरकार और आंदोलनकारियों के बीच हुई मैराथन बैठकों के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने अपना आंदोलन आधिकारिक रूप से वापस ले लिया है। ALSO READ: CJP का आंदोलन खत्म, साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉकरोचों का ऐलान, सभी प्रदर्शनकारी घर जाएं

'हम कॉकरोच हैं…', धमाकेदार बयान

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की खबर आते ही पूरे देश में हलचल मच गई। इस ऐतिहासिक मोड़ पर सीजेपी (CJP) के संस्थापक और आंदोलन का मुख्य चेहरा बने अभिजीत दीपके ने मीडिया को संबोधित करते हुए एक बेहद तीखा और सनसनीखेज बयान दिया। 
 

दीपके ने कहा कि यह जीत किसी एक व्यक्ति की नहीं बल्कि सामूहिक संघर्ष की है। लेकिन सरकार यह न समझे कि सब खत्म हो गया… हमारी दो और मांगें और हैं, हम ऐसे ही नहीं जाएंगे। हम कॉकरोच हैं, एक बार जहां घुस जाते हैं, वहां से निकलते नहीं! उनके इस बयान ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक सनसनी फैला दी है। ALSO READ: Rahul Gandhi : राहुल गांधी का मोदी सरकार पर निशाना, बोले- क्या छात्र फिर कभी देख पाएगा? CJP प्रदर्शन में पैलेटगन के इस्तेमाल का आरोप

सोशल मीडिया से खड़ा हुआ 'कॉकरोच आंदोलन'

अभिजीत दीपके वही चेहरा हैं जिन्होंने सबसे पहले सोशल मीडिया पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम से एक अकाउंट बनाया था। देखते ही देखते लाखों युवा इस पेज से जुड़े और यह सोशल मीडिया ट्रेंड जंतर-मंतर की सड़कों पर एक जन-आंदोलन बनकर उतर आया। आंदोलन में मिली इस अभूतपूर्व सफलता के बाद दीपके ने 'एक्स' (Twitter) पर एक साधारण सा पोस्ट लिखा— 'सोने जा रहा हूं। कुछ देर में आप लोगों से मिलता हूं।'

केन्द्र सरकार ने घुटने टेके

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों और सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई अहम वार्ता में संगठन की सभी प्रमुख मांगों पर सहमति बन गई। नीट पेपर लीक के बाद मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को केंद्र सरकार 1-1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देगी। 20 जुलाई को आयोजित 'संसद चलो' मार्च के दौरान पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारी छात्रों और युवाओं पर दर्ज की गई सभी प्राथमिकियों (FIR) को सरकार तत्काल प्रभाव से रद्द करेगी। ALSO READ: 26 दिन बाद खत्म हुआ सोनम वांगचुक का अनशन, CJP का प्रदर्शन जारी

व्यक्तित्व की राजनीति से दूर रहने की अपील

अपनी प्रतिक्रिया में अभिजीत दीपके ने समर्थकों और आम जनता से अपील की कि वे इस जीत को किसी एक व्यक्ति के इर्द-गिर्द केंद्रित करने के बजाय युवाओं के 'कलेक्टिव एक्शन' (सामूहिक प्रयास) के रूप में देखें। सरकार से मिले लिखित आश्वासन और मुआवजे की घोषणा के बाद जंतर-मंतर से सभी प्रदर्शनकारियों को घर लौटने का निर्देश दे दिया गया है। हालांकि, सीजेपी का साफ संदेश है कि व्यवस्था में किसी भी गड़बड़ी पर यह 'कॉकरोच ब्रिगेड' फिर से दस्तक देने में देर नहीं लगाएगी।

आखिर धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे में इतना वक्त क्यों लगा? पूरे मामले की इनसाइड स्टोरी

Dharmendra Pradhan resignation: नीट (NEET) पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर 6 जून 2026 को शुरू हुआ कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी (CJP) इस आंदोलन शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे और अन्य मांगों को मान लिए जाने के बाद खत्म हो गया है। केन्द्रीय मंत्रियों- जेपी नड्‍डा और जितेन्द्र सिंह के साथ हुई तीसरे राउंड के बैठक के बाद सीजेपी ने भी प्रोटेस्ट को खत्म करने और सभी साथियों से घर लौटने का ऐलान कर दिया। लेकिन, सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि शिक्षा मंत्री प्रधान के इस्तीफे में इतनी देर क्यों हुई? क्या पेपर लीक की घटना के बाद नीट परीक्षा रद्द करने की घोषणा के साथ ही उनका इस्तीफा नहीं हो जाना चाहिए था?  

इस आश्वासन से भी नहीं मिली राहत

दरअसल, मोदी सरकार को इस बात का बिलकुल भी इल्म नहीं था कि आंदोलन इतना बड़ा हो जाएगा। उसने पूरे मामले को बहुत ही हलके में लिया। लेकिन, जैसे-जैसे आंदोलन उग्र हुआ तो सरकार को समझ में आ गया ‍कि अब मामला हाथ से निकलता दिख रहा है। अब तक इस मुद्दे पर चुप्पी साधे बैठे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को खुद आकर वीडियो जारी कर प्रदर्शनकारी छात्रों को संबोधित करना पड़ा। फिर भी बात नहीं बनी और अंतत: सरकार को प्रधान के इस्तीफे की प्रदर्शनकारियों की मांग के आगे झुकना पड़ा। हालांकि सरकार ने सख्त नकल विरोधी कानून लाने की बात कही जिसमें 10 करोड़ जुर्माना और 10 की सजा देने की बात कही गई, लेकिन फिर भी बात नहीं बनी। ALSO READ: शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का अंतत: इस्तीफा, प्रदर्शनकारियों को भी लिखा खत

पुलिस लाठीचार्ज ने बढ़ाया असंतोष 

छात्रों और युवा संगठनों द्वारा 20 जुलाई को निकाले गए संसद मार्च और उस दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के बाद मामला बेहद संवेदनशील हो गया था। विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत पूरे विपक्ष ने संसद से लेकर सड़क तक मोर्चा खोलते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत इस्तीफे की मांग की थी। 'No Justice, No Rest' के नारों के बीच सरकार पर चौतरफा दबाव बन रहा था।

प्रधान की जवाबदेही पर सवाल

जंतर-मंतर से लेकर देश भर के विश्वविद्यालयों तक फैल रहे असंतोष और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा छात्रों को दिए गए सीधे आश्वासन के बाद, बैकचैनल वार्ताएं तेज हो गई थीं। सूत्रों का कहना है कि विपक्ष को किसी बड़े राजनीतिक विजय (Political Victory) का श्रेय न मिले, इसलिए सरकार किसी भी इस्तीफे की प्रक्रिया या संगठनात्मक बदलाव को सीधे तौर पर आंदोलन के दबाव में हुआ फैसला नहीं दिखाना चाहती थी। हालांकि एक राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में हुई इतनी बड़ी प्रशासनिक चूक के बाद शिक्षा मंत्रालय के प्रमुख होने के नाते उनकी नैतिक जवाबदेही पर सीधे सवाल खड़े हुए। ALSO READ: 1997 में पेपर लीक पर लाठियां खाने वाले धर्मेंद्र प्रधान आज खुद घिरे, पुलिस पिटाई में आए थे फ्रैक्चर

 

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा बार-बार कराई जा रही परीक्षाओं (NEET, UGC-NET आदि) में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों के चलते NTA की विश्वसनीयता खत्म हो चुकी थी। NTA के 47 अधिकारियों-कर्मचारियों को बर्खास्त करने के बावजूद शिक्षा मंत्रालय के शीर्ष नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर सवाल बने रहे। राहुल गांधी और प्रमुख विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार को संसद के अंदर और बाहर पूरी तरह घेरा। विपक्ष ने स्पष्ट मांग रखी कि जब तक शिक्षा मंत्री नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन और विरोध जारी रहेगा।

वांगचुक की भूख हड़ताल ने बढ़ाया दबाव

जब सोनम वांगचुक जैसे प्रमुख चेहरे भी इस आंदोलन के समर्थन में अनशन पर बैठे, तो सरकार पर भारी दबाव बन गया। सरकार द्वारा 'एंटी-पेपर लीक कानून' लागू करने के बावजूद छात्रों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। ऐसे में राजनीतिक साख बचाने और युवाओं के बीच बिगड़ी छवि को सुधारने के लिए केंद्रीय नेतृत्व को कड़ा कदम उठाने का फैसला लेना पड़ा। संसद मार्च और उग्र छात्र आंदोलन ने निस्संदेह केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय को बैकफुट पर ला दिया था। फिलहाल आंदोलन के समाप्त होने की घोषणा से सरकार ने राहत की सांस जरूर ली है। 

अमेरिकी कोर्ट का ट्रंप को बड़ा झटका, H-1B Visa पर भारी शुल्क लगाने के फैसले पर जारी रहेगी रोक

H-1B Visa Donald Trump: डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को अमेरिकी न्याय प्रणाली से एक और बड़ा झटका लगा है। अमेरिका की एक संघीय अपीलीय अदालत ने उच्च कौशल वाले विदेशी पेशेवरों (विशेषकर आईटी कर्मचारियों) के लिए एच-1बी (H-1B) वीजा पर एक लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 83 लाख रुपए) का भारी-भरकम शुल्क लगाने के फैसले पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत के इस निर्णय से भारतीय टेक पेशेवरों और अमेरिकी टेक कंपनियों को बड़ी राहत मिली है।

 

अमेरिका में उच्च कुशल विदेशी कर्मचारियों, विशेषकर भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर आई है। बोस्टन स्थित ‘फर्स्ट सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स’ की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें एच-1बी (H-1B) वीजा पर 1,00,000 डॉलर का शुल्क लगाने के फैसले को रद्द करने वाले पिछले आदेश पर स्टे (रोक) लगाने की मांग की गई थी। ALSO READ: ट्रंप का बड़ा फैसला! जेनेरिक दवाओं पर 200% टैरिफ से भारत की फार्मा इंडस्ट्री को कितना होगा नुकसान?

क्या है पूरा मामला?

ट्रंप प्रशासन ने अपने कार्यकाल के दौरान विदेशी पेशेवरों पर निर्भरता कम करने और स्थानीय अमेरिकी नागरिकों को रोजगार में प्राथमिकता देने का तर्क देते हुए एच-1बी वीजा पर 1,00,000 डॉलर का अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, इस फैसले को अमेरिका की विभिन्न तकनीकी कंपनियों और व्यापारिक संगठनों ने अदालत में चुनौती दी थी।

 

इसके बाद, अमेरिकी जिला न्यायाधीश लियो टी. सोरोकिन ने 8 जून को दिए अपने आदेश में इस शुल्क को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया था। सोरोकिन के फैसले के खिलाफ ट्रंप प्रशासन ने संघीय अपीलीय अदालत का दरवाजा खटखटाया था और मांग की थी कि निचली अदालत के आदेश पर तुरंत रोक लगाई जाए। ALSO READ: ट्रंप का सनसनीखेज दावा: चीन ने 22 करोड़ अमेरिकी वोटर्स का डेटा चुराया, जल्द सामने आएंगे खुफिया दस्तावेज

अपीलीय अदालत का सख्त रुख

‘फर्स्ट सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स’ की तीन सदस्यीय पीठ ने सरकार की इस याचिका को खारिज करते हुए निचली अदालत (जिला अदालत) के फैसले को बरकरार रखा। पीठ का मानना है कि इस तरह का अत्यधिक शुल्क लगाने से प्रशासनिक शक्तियों का उल्लंघन होता है और यह अमेरिकी टेक उद्योग व अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

भारतीय पेशेवरों और टेक कंपनियों को राहत

एच-1बी वीजा अमेरिका की प्रौद्योगिकी (IT) कंपनियों द्वारा भारत और चीन जैसे देशों से उच्च योग्य और कुशल कर्मचारियों को नौकरी पर रखने के लिए बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है। प्रतिवर्ष जारी होने वाले कुल एच-1बी वीजा में से लगभग 70% से अधिक हिस्सेदारी भारतीय पेशेवरों की होती है।

 

यदि 1,00,000 डॉलर का यह शुल्क लागू हो जाता, तो अमेरिकी कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारियों को स्पॉन्सर करना बेहद महंगा हो जाता, जिससे भारतीय आईटी पेशेवरों के अमेरिका जाकर काम करने के सपनों पर पानी फिर सकता था। अदालत के इस फैसले से टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इन्फोसिस, विप्रो जैसी भारतीय कंपनियों के साथ-साथ गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न जैसी अमेरिकी दिग्गज कंपनियों ने भी राहत की सांस ली है।

 

CJP का आंदोलन खत्म, साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉकरोचों का ऐलान, सभी प्रदर्शनकारी घर जाएं

CJP protest ended: स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्‍डा और केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी (CJP) ने शनिवार को प्रदर्शन खत्म करने का ऐलान कर दिया है। सीजेपी के प्रतिनिधियों ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के अलावा सरकार ने हमारी सभी मांगें मान ली हैं। 

 

शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि सरकार ने हमारी सभी मांगें मान ली हैं। मंगलवार तक हमें लिखित गारंटी देगी सरकार। सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सभी केस वापस लेगी। साथ पीड़ित परिवारों को मुआवजा भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी तुरंत अपने घर चले जाएं।

 

केन्द्रीय मंत्री जेपी नड्‍डा ने भी इस दौरान कहा कि सीजेपी की मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई है। सरकार ने केस रद्द करने की मांग मान ली है साथ ही पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की बात भी सरकार ने मांग ली है। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएंगी। 

धरना स्थल पर जश्न का माहौल

नीट प्रश्न पत्र लीक विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शनिवार को जंतर-मंतर स्थित विरोध प्रदर्शन स्थल पर जश्न का माहौल देखने को मिला। प्रदर्शनकारी नाचते-गाते, तिरंगा लहराते और ‘वंदे मातरम’ का उद्घोष करते नजर आए।