पेपर लीक वाले नकल माफिया मिट्टी में मिला दिए जाएंगे : योगी आदित्यनाथ

Chief Minister Yogi Adityanath's major statement regarding paper leak case

– फतेहपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया 489 करोड़ रुपए से अधिक की 125 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास

– मुख्यमंत्री योगी ने कहा, छात्रों का भविष्य अंधकारमय करने वाला नकल माफिया कांग्रेस व सपा की विरासत

– दोषियों को कम से कम 10 वर्ष की सजा और 10 करोड़ रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान होगा

– छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाली सपा व कांग्रेस आज बहा रही हैं घड़ियाली आंस

– प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार नकल माफिया के खिलाफ ला रही सख्त कानून

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस व समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पेपर लीक वाला नकल माफिया इन्हीं दलों की विरासत है, जिसे मिट्टी में मिला दिया जाएगा। छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के लिए केवल दो ही जगह हैं- जेल या जहन्नुम। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार नकल माफिया के खिलाफ ऐसा सख्त कानून ला रही है, जिसके तहत दोषियों को कम से कम 10 वर्ष की सजा और 10 करोड़ रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान होगा।

 

मुख्यमंत्री शनिवार को फतेहपुर सदर और अयाह-शाह विधानसभा क्षेत्रों के लिए 489 करोड़ रुपए से अधिक लागत की 125 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम स्थल पर मुख्यमंत्री के पहुंचते ही 'जय श्रीराम', 'मोदी-योगी जिंदाबाद'  के नारों से पूरा परिसर गूंज उठा। मुख्यमंत्री ने विकास परियोजनाओं की प्रदर्शनी का अवलोकन किया, विभिन्न स्टॉल्स पर लोगों से बातचीत की तथा बच्चों को गोद में लेकर दुलार किया, उन्हें तिलक लगाया और खिलौने भेंट किए।

 

कोई नहीं रोक सकता नकल माफिया को मिट्टी में मिलने से

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन्होंने युवाओं का शोषण किया, छात्रों के सामने अंधकारमय जीवन खड़ा किया, पूरी की पूरी पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया, वही समाजवादी पार्टी और कांग्रेस आज घड़ियाली आंसू बहाने का काम कर रही हैं।

हम प्रधानमंत्री जी के आभारी हैं, जिन्होंने छात्रों के भविष्य को देखते हुए पिछले तीन दिनों में बड़े-बड़े निर्णय लिए हैं। ये नकल माफिया मिट्टी में मिलेंगे, कोई रोक नहीं सकता इन माफिया को मिट्टी में मिलने से। ये नकल माफिया कांग्रेस व सपा की विरासत हैं। इन्होंने ही माफिया को पाला-पोसा और संरक्षण दिया था।

 

पेपर लीक पर पीएम मोदी जी ने उठाए कड़े कदम

मुख्यमंत्री ने कहा कि नीट परीक्षा समय सीमा के भीतर कराई गई, ताकि छात्रों का पूरा वर्ष खराब न हो,  और निर्धारित समय सीमा में उसका परिणाम भी घोषित कर दिया गया। कुछ माफिया ने प्रश्नपत्र लीक कराया था, उनकी गिरफ्तारी हुई और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के तमाम अधिकारियों को बर्खास्त किया गया।

कुछ लोगों की गिरफ्तारी हुई है, उनकी संपत्तियां जब्त होंगी और उन्हें सजा मिलेगी। ये छात्रों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखकर पीएम मोदी जी द्वारा उठाए गए कड़े कदम हैं। मैं उनका हृदय से स्वागत करता हूं, अभिनंदन करता हूं और आभार व्यक्त करता हूं।

 

सीएम ने कहा कि पीएम मोदी जी ने छात्रों व युवाओं के लिए पिछले 12 वर्षों में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। डिजिटल इंडिया, प्रधानमंत्री स्टार्टअप योजना और प्रधानमंत्री स्टैंडअप योजना के माध्यम से भारत के नौजवानों में आशा की नई किरण जगाई। राष्ट्रीय शिक्षा नीति देकर नौजवानों को वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने का अवसर दिया। आज भारत के नौजवानों को दुनिया में सम्मान मिलता है।

मोदी जी ने युवाओं को एक वर्ष में 12 लाख सरकारी नौकरियां दीं और गत 12 वर्षों में करोड़ों युवाओं को रोजगार के अवसर देकर उनके जीवन को उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर किया है। आज जब युवाओं के मन में कुछ कसक थी, तब पीएम स्वयं सामने आए, युवाओं के साथ संवाद किया और संसद में सख्त कानून लाने के लिए कैबिनेट से नए अधिनियम के मसौदे को पारित कराया, यह अभिनंदनीय है।

 

माफिया पर नकेल कसी और दीं 9 लाख से ज्यादा सरकारी नौकरियां

मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं यूपी के नौजवानों से कहना चाहता हूं कि जिसने छात्रों व युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया,  उस माफिया के लिए दो ही जगह होंगी- जेल या जहन्नुम। माफिया के बाप-दादा की कमाई गई संपत्ति भी जब्त कर ली जाएगी। हमने माफियाओं पर सख्ती से लगाम कसी है।

ऐसा न किया होता तो हम 9 लाख से अधिक नौजवानों को सरकारी नौकरी नहीं दे पाते। पहले राज्य में बड़ा निवेश नहीं आता था, क्योंकि हर जगह कोई न कोई गुंडा या माफिया हावी था। सपा शासन में एक ही नारा गूंजता था- “देख सपाई, बिटिया घबराई।” लेकिन अब ऐसा नहीं है।

 

भाजपा की जमीन पर था पूर्व सपा विधायक का कब्जा

सीएम ने कहा कि सपा के एजेंडे में विकास कभी नहीं था और न है। सपा के लोग अब बेरोजगारों की तरह घूम रहे हैं, क्योंकि ठेके, पट्टे और अवैध जमीनों पर कब्जे का उनका धंधा चौपट हो चुका है। इसलिए वे हताश-निराश बैठे हुए हैं। पहले वे किसी भी खाली जमीन या प्लॉट पर कब्जा कर लेते थे। भाजपा ने 1990 में लखनऊ में एक कार्यालय के लिए जमीन ली थी।

जब कार्यकर्ताओं ने चंदा इकट्ठा कर कार्यालय निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई तो पता चला कि उस जमीन पर भी सपा के एक पूर्व विधायक ने कब्जा कर रखा था। कल हमने बुलडोजर भेजकर उस कब्जे को हटवाया है। यही इनका धंधा था। खेत बोता कोई और था, लेकिन फसल काटने ये लोग पहुंच जाते थे।

 

अन्नदाता किसानों के चेहरों पर मुस्कान

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज गरीब को मुफ्त राशन व आवास की सुविधा मिल रही है। आयुष्मान भारत योजना के तहत 5 लाख रुपए तक की स्वास्थ्य सुविधा मिल रही है और गरीब के घर में रसोई गैस का चूल्हा पहुंचा है। किसानों के लिए मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना है।

केवल किसान ही नहीं, बल्कि सह-किसान और उसके परिवार को भी इसका लाभ मिलता है। दुर्भाग्य से कोई आपदा आ जाए, तो किसान के परिवार को बिना किसी सिफारिश के 5 लाख रुपए की सहायता प्राप्त हो जाती है। किसानों के निजी ट्यूबवेल के बिजली बिल का भुगतान सरकार कर रही है।

 

यूपी की विकास यात्रा में सहभागी बना फतेहपुर

सीएम ने कहा कि अब फतेहपुर आकांक्षी जिला नहीं रहा, बल्कि उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा का सहभागी बना है और मोदी जी के ‘विकसित भारत’ संकल्प का सारथी बनकर आगे बढ़ रहा है। मां गंगा व मां यमुना के दोआब में स्थित यह पावन धरा प्राचीन काल से ऋषि-मुनियों की तपस्थली और आस्था का केंद्र रही है।

खजुहा की बावन इमली 52 स्वाधीनता सेनानियों के सामूहिक बलिदान की गवाह है। यह धरती निर्भीक पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी और राष्ट्रकवि सोहन लाल द्विवेदी जैसी महान विभूतियों की जन्मस्थली रही है। ऐसी पावन धरा को मेरा कोटि-कोटि नमन।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज फतेहपुर में सड़क, पुल, फ्लाईओवर, बिजली, अस्पताल, कंपोजिट विद्यालय और मेडिकल कॉलेज जैसी विकास परियोजनाएं धरातल पर दिखाई दे रही हैं। जिस जिले ने अमर शहीद जोधा सिंह अटैया और ठाकुर दरियाव सिंह जैसे महान सपूत दिए, उसी फतेहपुर को उनकी स्मृति में मेडिकल कॉलेज देने का सौभाग्य हमारी सरकार को मिला, जो आज जिले की स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र बन चुका है।

 

सपा के एजेंडे में था सिर्फ सैफई का विकास

सीएम ने कहा कि फतेहपुर में बेहतरीन कनेक्टिविटी विकसित हुई है और औद्योगिक क्षेत्र भी तेजी से आकार ले रहा है। जिले में अपार संभावनाएं पहले भी थीं, लेकिन अब उन्हें सही मंच मिला है। एफपीओ, ओडीओपी व प्राकृतिक खेती के माध्यम से फतेहपुर नई पहचान बना रहा है।

यहां के युवा देशभर में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं। 2017 से पहले यह सब संभव नहीं था, क्योंकि तब सरकार की प्राथमिकता में युवा, किसान व विकास नहीं था। तब एजेंडे में था सैफई का विकास हो, बाकी सब भाड़ में जाएं।

 

इस अवसर पर प्रभारी मंत्री फतेहपुर अजीत पाल, मंत्री कृष्णा पासवान, राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग की अध्यक्ष साध्वी निरंजन ज्योति, बीजेपी के क्षेत्रीय अध्यक्ष राम किशोर साहू, विधायक विकास गुप्ता, राजेन्द्र सिंह पटेल, जय कुमार सिंह जैकी, विधान परिषद सदस्य अविनाश सिंह चौहान व जिला पंचायत अध्यक्ष अभय प्रताप सिंह आदि उपस्थित रहे।

 

लाभार्थियों को वितरित किए स्वीकृति पत्र, चेक व आयुष्मान कार्ड

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र, चेक, आयुष्मान कार्ड एवं अन्य सामग्री वितरित की। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अंतर्गत नेहा व श्रेयांश को स्वीकृति पत्र प्रदान किए गए। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ज्ञान देवी को आवास की चाबी सौंपी गई, जबकि मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत संगीता देवी को भी आवास की चाबी प्रदान की गई।

ग्रामीण उद्यमी योजना के तहत सत्येंद्र बाबू विमल को लाभ प्रदान किया गया। मिनी नंदिनी योजना के अंतर्गत कोमल को, ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत सुनीता को और अनुदान के तहत शांति देवी व भानुमती को चेक दिए गए।

इसी प्रकार जयचंद व शिवदेवी को आयुष्मान कार्ड, ओडीओपी के अंतर्गत ब्रजेश कुमार तथा मुख्यमंत्री युवा उद्यमी अभियान के तहत अभिषेक कुमार को चेक प्रदान किए गए। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के अंतर्गत निशा यादव को सिलाई कार्य से संबंधित टूलकिट दी गई।

अमेरिका-ईरान तनाव और महंगे तेल ने डुबोया बाजार! एक हफ्ते में सेंसेक्स 2092 अंक टूटा, जानें अगले सप्ताह कैसी रहेगी चाल

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Share Market Weekly Review : अमेरिका ईरान युद्ध, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, रुपए की कमजोरी और ट्रंप टैरिफ की वजह से भारतीय शेयर बाजार के लिए यह हफ्ता काफी निराशाजनक रहा। इस हफ्ते सेंसेक्स में 2092 अंकों की गिरावट रही तो निफ्टी भी 567 अंक गिर गया। पांचों कारोबारी दिन बाजार लाल निशान में रहा। जानिए मार्केट ट्रेड और निवेशकों के लिए कैसा रहेगा आने वाला सप्ताह। ALSO READ: Share Bazaar लगातार 5वें दिन टूटा, Sensex 332 अंक फिसला, Nifty भी आया 23800 के नीचे

 

कैसी रही सेंसेक्स और निफ्टी की चाल

हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को सेंसेक्स 443 अंकों गिरकर के साथ 77,709 पर था तो निफ्टी 51 अंकों की गिरावट के साथ 24,239 पर बंद हुआ। मंगलवार को सेंसेक्स 238 अंकों की गिरावट के साथ 77,470 पर जा पहुंचा तो निफ्टी 51 अंक गिरकर 24,188 पर आ गया। बुधवार को सेंसेक्स 715 अंक गिरकर के साथ 76,755 पर था तो निफ्टी 191 अंकों की गिरावट के साथ 24,000 के मनौवैज्ञानिक स्तर के नीचे बंद हुआ।

 

गुरुवार को सेंसेक्स 364 अंक गिरकर के साथ 76,391 पर था तो निफ्टी 127 अंकों की गिरावट के साथ 23,870 पर बंद हुआ। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भी शेयर बाजार लाल निशान में बंद हुआ। सेंसेक्स 332 अंक गिरकर के साथ 76,060 जा पहुंचा तो निफ्टी 102 अंकों की गिरावट के साथ 23,767 पर बंद हुआ। ALSO READ: Share Bazaar में चौथे दिन भी गिरावट, Sensex 364 अंक लुढ़का, Nifty भी 24000 के नीचे

 

इन फैक्टर्स से तय हुई बाजार की चाल

बाजार विशेषज्ञ योगेश बागौरा ने बताया कि अमेरिका ईरान युद्ध, ट्रंप टैरिफ, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, सीजेपी प्रोटेस्ट की वजह से शेयर बाजार में निवेशकों ने जमकर बिकवाली की। बाजार को एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक और यश बैंक के नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं लगे। 200 प्रतिशत ट्रंप टैरिफ की धमकी से फॉर्मा कंपनियां दबाव में रही तो एक्सपोर्ट पर 10 फीसदी टैरिफ लगाकर ट्रंप ने शेयर बाजार में निवेशकों की दहशत को और बढ़ा दिया।  

 

कैसा रहेगा अगला हफ्ता?

बागौरा ने कहा कि यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के प्रवेश द्वार बाब अल-मंदेब स्ट्रेट पर सऊदी अरब से जुड़े जहाजों की नाकेबंदी का ऐलान किया है। इस कदम से वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर गंभीर संकट मंडराने लगा है। भारत, चीन, पाकिस्तान समेत एशियाई देशों पर इसका बुरा असर पड़ेगा। इससे पेट्रोल डीजल और गैस पर दबाव बढ़ेगा। महंगाई बढ़ने का भी खतरा है। इस वजह से आने वाले समय में रिजर्व बैंक रेट ऑफ इंटरेस्ट भी बढ़ा सकता है। 

 

उन्होंने कहा कि बाजार में निफ्टी को नीचे में 23400 से 23500 के स्तर पर मजबूत सपोर्ट है। ऊपर में 24200-24300 पर मजबूत रेजिस्टेंस बना हुआ है।

 

अस्वीकरण : यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें।

धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी CJP का धरना जारी, क्या है उनकी 2 अन्य बड़ी मांगें

Dharmendra Pradhan Resigns : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। प्रधान के इस्तीफे की खबर से जंतर मं‍तर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों में हर्ष की लहर दौड़ गई। हालांकि इस्तीफे के बाद भी जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का धरना जारी है। सीजेपी का कहना है कि उनकी 2 अन्य मांगें भी पूरी होनी चाहिए। ALSO READ: शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का अंतत: इस्तीफा, प्रदर्शनकारियों को भी लिखा खत

 

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है और यह इस्तीफा इस बात का गवाह है कि अगर आप लोग डरेंगे नहीं, अगर आप लोग इस सरकार के आगे नहीं झुकेंगे, तो हम किसी का भी इस्तीफा ले सकते हैं।

 

उन्होंने कहा कि डरने की कोई जरूरत नहीं है। यह लोकतंत्र है। उन्होंने इस्तीफा दे दिया है, लेकिन हमारी दो और मांगें हैं। धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है लेकिन जिन बच्चों ने सुसाइड किया है, उनके परिवारों को एक करोड़ रुपए का मुआवजा मिलना चाहिए। दूसरा, ये पुलिस वाले गुंडे जिन्होंने 20 तारीख को एक्शन लिया। उसके लिए पुलिस अधिकारियों पर एक्शन होना चाहिए। याद रखना कॉकरोच से पंगा मत लेना। ALSO READ: भारतीय Gen-Z का क्रिएटिव प्रोटेस्‍ट बनाम दुनिया के हिंसक आंदोलन, क्‍यों दुनियाभर में सराहे जा रहे हैं भारतीय Gen-Z

इस्तीफे पर युवाओं से क्या बोले धर्मेन्द्र प्रधान?

धर्मेन्द्र प्रधान ने युवाओं को लिखे अपने पत्र में कहा कि युवाओं की आकांक्षाओं का सम्मान करते हुए उन्होंने अपना इस्तीफा दिया है। उन्होंने कहा कि पिछले 10 दिनों से मेरा मन दुखी है। मैं जिम्मेदारी से भाग नहीं रहा था। 

 

उन्होंने पत्र में कहा कि यह पक्का करने के लिए कि जंतर-मंतर और पूरे देश में जो हालात हैं, उनसे देश विरोधी तत्वों को फायदा न हो, देश एकजुट रहे, भारत में छात्र कानूनी पचड़ों में न उलझें और अपनी पढ़ाई और अपने करियर पर ध्यान दें, मैंने प्रधानमंत्री को अपना त्यागपत्र भेज दिया है। 

गौरतलब है कि पेपर लीक मामले में कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ता पिछले 36 दिनों से धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर 26 दिन धरने पर थे। मानसून के पहले 5 दिन विपक्ष भी धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा रहा। इस वजह से संसद के दोनों सदनों में कार्यवाही ठप रही।

शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का अंतत: इस्तीफा, प्रदर्शनकारियों को भी लिखा खत

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। कॉकरोच जनता पार्टी ने इस्तीफे का स्वागत करते हुए कहा कि लोकतंत्र की जीत हुई। ALSO READ: भारतीय Gen-Z का क्रिएटिव प्रोटेस्‍ट बनाम दुनिया के हिंसक आंदोलन, क्‍यों दुनियाभर में सराहे जा रहे हैं भारतीय Gen-Z

 

प्रधानमंत्री को भेजे गए इस्तीफे में धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि युवाओं की आकांक्षाओं का सम्मान करते हुए उन्होंने अपना इस्तीफा दिया है। उन्होंने कहा कि पिछले 10 दिनों से मेरा मन दुखी है। मैं जिम्मेदारी से भाग नहीं रहा था। 

उन्होंने पत्र में कहा कि यह पक्का करने के लिए कि जंतर-मंतर और पूरे देश में जो हालात हैं, उनसे देश विरोधी तत्वों को फायदा न हो, देश एकजुट रहे, भारत में छात्र कानूनी पचड़ों में न उलझें और अपनी पढ़ाई और अपने करियर पर ध्यान दें, मैंने प्रधानमंत्री को अपना त्यागपत्र भेज दिया है। ALSO READ: NEET पेपर लीक विवाद पर आमिर खान की बेटी इरा खान ने तोड़ी चुप्पी, बताया क्यों रहीं इतने दिनों तक खामोश

 

कॉकरोच जनता पार्टी एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि मैने पहले ही कहा था कि युवाओं का शांतिपूर्ण संघर्ष जाया नहीं जाएगा, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की खबर से प्रदर्शनकारियों में जश्न का माहौल है। 

गौरतलब है कि पेपर लीक मामले में कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ता पिछले 36 दिनों से धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर 26 दिन धरने पर थे। मानसून के पहले 5 दिन विपक्ष भी धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा रहा। इस वजह से संसद के दोनों सदनों में कार्यवाही ठप रही।

भारतीय Gen-Z का क्रिएटिव प्रोटेस्‍ट बनाम दुनिया के हिंसक आंदोलन, क्‍यों दुनियाभर में सराहे जा रहे हैं भारतीय Gen-Z

Gen-Z

जब दुनिया के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों की आग में गाड़ियां जलती हैं, टायर फूंके जाते हैं और सड़कों पर हिंसक टकराव आम बात हो जाते हैं, तब भारत की Gen-Z (नया युवा वर्ग) विरोध जताने का एक बिल्कुल ही अलग और अनोखा रास्ता चुनती है।

पत्थर और लाठी की बजाय ये युवा मीम्स, सोशल मीडिया ट्रेंड्स, नुक्कड़ नाटकों, व्यंग्य, स्टैंड-अप कॉमेडी और कलात्मक पोस्टर्स को अपना हथियार बनाते हैं। यही वजह है कि आज हिंसा के धुएं से घिरी दुनिया में, भारतीय युवाओं का यह शांत, रचनात्मक और बौद्धिक प्रोटेस्‍ट पूरी दुनिया में सराहा जा रहा है और आकर्षण का केंद्र बन गया है। भारत के इस Gen-Z प्रोटेस्‍ट ने पूरी दुनिया के इंटरनेट पर कब्‍जा जमा लिया है। लोग न सिर्फ सराह रहे हैं, बल्‍कि प्रोटेस्‍ट के तरीकों से लौटपोट भी हैं। भारत का यह Gen-Z पीएम मोदी को मितरों से फ्रेंड्स पर ले आया है। जानते हैं श्रीलंका, नेपाल और बांग्‍लादेश के Gen-Z आंदोलनों से कैसे अलग है भारत का Gen-Z प्रोटेस्‍ट।

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भारत के प्रोटेस्‍ट को लोग रात रातभर Gen-Z छात्रों के मीम्‍स देख रहे हैं। उनके प्रदर्शन का यह अंदाज न तो पुलिस को समझ में आ रहा है और न ही सरकार को। ऐसे भयंकर माहौल में भी Gen-Z छात्रों की मासूमियत और क्रिएटिविटी लोगों को हंसा-हंसाकर लौटपोट कर रही है। लोगों की इंस्‍टाग्राम फीड में सिर्फ Gen-Z प्रोटेस्‍ट की रील्‍स आ रही हैं। कई बच्‍चे सोशल मीडिया में जमकर पापुलर हो गए हैं।

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इन युवाओं ने साबित कर दिया कि अपनी मांगें मनवाने के लिए भारी-भरकम भाषणों से ज्यादा असरदार एक सही जगह पर फिट बैठता 'मीम' हो सकता है। अगर यह कहा जाए कि सटायर और ह्यूमर का सही इस्‍तेमाल सिस्‍टम के खिलाफ किसी ने किया है तो वे आज के Gen-Z हैं।

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भारत का प्रोटेस्‍ट न सिर्फ विरोध करने का क्रिएटिव तरीका है, बल्कि एक नया ग्लोबल ट्रेंड है— जहां गुस्सा भी है, तो कला के साथ और बदलाव की मांग भी है, खास बात है कि इसमें किसी तरह की व्यवस्था को, सरकारी संपत्‍ति को नुकसान नहीं पहुंच रहा है।

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दिल जीता और हंसाया भी : ध्‍यान से नजर डालें तो भारत के जेंजी प्रोटेस्‍ट और नेपाल, बांग्‍लादेश के जेंजी प्रोटेस्‍ट में बहुत बडा फर्क है। भारत के जेंजी अहिंसक और क्रिएटिव माने जा रहे हैं, जबकि पिछले कुछ सालों में नेपाल, श्रीलंका और बांग्‍लादेश में हुए जेंसी प्रोटेस्‍ट हिंसक और अराजक माने जाते हैं। भारतीय बच्‍चे जिस तरीके से अपना विरोध कर रहे हैं, उसने सबका न सिर्फ दिल जीत लिया है, बल्‍कि हंसा-हंसाकर लौटपोट भी कर दिया है।

सोशल मीडिया को बनाया हथियार : भारत के Gen-Z प्रोटेस्‍ट में बच्‍चों ने सोशल मीडिया को अपना हथियार बनाया है। इंस्‍टा रील्‍स, फेसबुक पोस्‍ट, शॉर्ट्स, मीम्‍स, म्‍यूजिक, जोक, स्‍लोगन, सटायर और कार्टून का सहारा लिया जा रहा है। जबकि बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका में हुए प्रदर्शनों में बडी मात्रा में सरकारी संपत्‍ति को नुकसान पहुंचाया गया। वाहन जलाए गए, सामान और दुकानें लूट ली गईं। हिंसा हुई और कुछ लोगों की जानें भी चली गईं। जबकि भारत में ऐसा कुछ नहीं हुआ। न हिंसा और अराजकता। बल्‍कि इसके उलट छात्रों ने उन पुलिसकर्मियों को फूल बांटे जिन्‍होंने बच्‍चों के साथ मारपीट की।

बता दें कि भारत से लेकर बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका तक हर जगह युवा सड़कों पर उतरे हैं, लेकिन उनके प्रदर्शन के तौर-तरीके, तेवर और परिणाम काफी अलग रहे हैं। भारतीय 'जेन-जी' के प्रदर्शनों को जहां उनकी रचनात्मकता (Creativity) और लोकतांत्रिक दायरे में रहकर विरोध जताने के लिए सराहा जा रहा है, वहीं नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका के आंदोलन बेहद आक्रामक, हिंसक और तख्तापलट में तब्दील होने वाले रहे हैं।

अहिंसक- क्रिएटिव बनाम हिंसक और अराजक : भारतीय युवा अपने विरोध प्रदर्शनों में कला, संगीत, मीम्स, डिजिटल कैंपेन, नुक्कड़ नाटक और सांकेतिक विरोध का भरपूर इस्तेमाल करते हैं। विरोध जंतर-मंतर या निर्धारित स्थलों पर संवैधानिक सीमाओं के भीतर, संवाद और लोकतांत्रिक दबाव बनाने की मंशा से किया जाता है। यहां नारेबाज़ी के साथ-साथ पढ़ाई की किताबें लेकर बैठना या रचनात्मक तख्तियां दिखाना आम है।

पड़ोसी देशों का हिंसक और आक्रामक स्वरूप : बांग्लादेश और नेपाल में आंदोलन हिंसक संघर्ष में बदल गए। सुरक्षा बलों के साथ तीखी झड़पें हुईं, पुलिस की गोलीबारी में दर्जनों युवाओं की मौतें हुईं, जिसके बाद भीड़ का गुस्सा बेकाबू हो गया।  नेपाल में संसद भवन और मंत्रियों के आवासों पर हमले हुए, तो वहीं श्रीलंका में प्रदर्शनकारियों ने सीधे राष्ट्रपति भवन पर कब्जा कर लिया और स्विमिंग पूल में तैरते नजर आए। 

विरोध के मुख्य मुद्दे और उत्प्रेरक (Triggers) भारत: भारत में हालिया जेन-जी प्रदर्शन (जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं, नीट और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर जंतर-मंतर या अन्य जगहों पर हुए छात्र आंदोलन) मुख्य रूप से व्यवस्था में पारदर्शिता, पेपर लीक, रोजगार और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर हैं। यहाँ विरोध का दायरा विशिष्ट नीतिगत सुधारों और लोकतांत्रिक अधिकारों के दायरे में रहता है।

नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका: इन देशों में विरोध का दायरा बहुत व्यापक और मूल सत्ता के खिलाफ था।

बांग्लादेश (2024): सरकारी नौकरियों में अत्यधिक आरक्षण नीति और दमनकारी शासन के खिलाफ युवा सड़कों पर उतरे थे, जो बाद में पूरी सत्ता के खात्मे पर जाकर रुका।

नेपाल (2025): भ्रष्टाचार, वीआईपी संस्कृति, भाई-भतीजावाद और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ गुस्सा इस कदर भड़का कि सीधे संसद को घेर लिया गया।

श्रीलंका (2022): आर्थिक दिवालियापन, खाने-पीने की चीजों व ईंधन की भारी किल्लत और राजपक्षे परिवार के लंबे भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता भूखी-प्यासी सड़कों पर उतरी थी।

राजनीतिक परिणाम और प्रभाव : यहां के जेन-जी आंदोलनों का उद्देश्य पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था या सरकार को उखाड़ फेंकना नहीं, बल्कि सरकारों और संस्थाओं को उनकी जिम्मेदारी याद दिलाना, नीतियां बदलवाना और पारदर्शी तंत्र की मांग करना होता है। सरकारें भी संवाद और प्रशासनिक कदमों के जरिए इनका समाधान निकालने का प्रयास करती हैं

पड़ोसी देश (तख्तापलट): बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता छोड़कर देश छोड़ना पड़ा, नेपाल में के.पी. शर्मा ओली की सरकार गिर गई, और श्रीलंका में गोटबाया राजपक्षे को इस्तीफा देना पड़ा। इन देशों में जेन-जी के विद्रोह सीधे तौर पर सत्ता परिवर्तन (Regime Change) का जरिया बने।

राहुल गांधी ने छात्रों की 3 मांगें गिनाईं, बोले- धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करें, पीएम मोदी देश से माफी मांगें

Rahul Gandhi Press Conference

नीट पेपर लीक समेत मुद्दों को लेकर सरकार पर हमलावर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष नेता राहुल गांधी ने प्रेस वार्ता की। उन्होंने कहा- जो हमारे छात्र हैं, जो अनशन पर थे, उनसे मेरी बात हुई। छात्रों की तीन मांगें हैं, जिन पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी भारत का पास्ट है और पास्ट कभी फ्यूचर से नहीं लड़ सकता। ALSO READ: राहुल गांधी ने छात्रों की 3 मांगें गिनाईं, बोले- धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करें, पीएम मोदी देश से माफी मांगें

 

क्या है छात्रों की मांगें?

पहला: राहुल गांधी ने कहा कि इस भ्रष्ट और अयोग्य शिक्षा मंत्री को बर्खास्त किया जाना चाहिए। मोदी सरकार के मंत्रिमंडल के भीतर श्री प्रधान को किसी अन्य मंत्रालय में भेजने को लेकर कुछ चर्चा चल रही है। यह भारत के छात्रों को स्वीकार्य नहीं है, और यह किसी को भी स्वीकार्य नहीं है। 

 

कारण यह है कि प्रधान भ्रष्टाचार के प्रतीक हैं और इस बात के प्रतीक हैं कि भारत के बच्चों के साथ क्या हुआ। वह इस देश की सबसे मूल्यवान चीज़ — हमारे छात्रों और उनके भविष्य — की बर्बादी के प्रतीक हैं। धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त किया जाना चाहिए।

 

दूसरा: उन्होंने कहा कि जिन लोगों (आयोजकों और इसे लागू करने वालों) ने छात्रों पर हमला किया, उन्हें दंडित किया जाना चाहिए और उनके लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

 

तीसरा: कांग्रेस नेता ने कहा कि इस पूरी मशीनरी के पीछे के मुख्य नेता, नरेंद्र मोदी को छात्रों और इस देश के भविष्य के साथ जो उन्होंने किया है, उसके लिए माफ़ी मांगनी चाहिए। ALSO READ: CJP संस्थापक अभिजीत दीपके टाइफाइड की चपेट में, फिर भी जारी रखेंगे अपना आंदोलन

उन्होंने छात्रों से कहा कि मुझे आप पर गर्व है। आप भारत की सबसे बड़ी ताकत हैं, और मुझे आप में से हर एक पर गर्व है जो यहां खड़े हैं और इस (मोदी) सरकार का विरोध कर रहे हैं। यह सरकार संविधान पर हमला कर रही है, संविधान को नष्ट कर रही है, हमारे संस्थानों पर हमला कर रही है और हमारे भविष्य को बर्बाद कर रही है।

क्या बोलीं छात्र नेता नेहा? 

इस अवसर पर आइसा नेता नेहा ने कहा, आज राहुल गांधी जी के साथ हमने जो चर्चा की, वह सार्थक रही। देश में शिक्षा व्यवस्था को टेकओवर कर और उसपर चर्चा न करके युवाओं की आकांक्षाओं को ख़त्म किया जा रहा है, लेकिन आज जो बातचीत हुई, वह शानदार रही। 

उन्होंने कहा कि हमारे कुछ साथियों ने लचर शिक्षा व्यवस्था को लेकर आज 'बिहार बंद' का ऐलान किया था, लेकिन उससे पहले ही बिहार पुलिस ने उन्हें और बाकी स्टूडेंट्स को हिरासत में ले लिया। छात्रों की जो तीन मांग राहुल गांधी जी ने रखी हैं, वो जायज हैं और उनसे कोई समझौता नहीं हो सकता।

CJP संस्थापक अभिजीत दीपके टाइफाइड की चपेट में, फिर भी जारी रखेंगे अपना आंदोलन

abhijeet dipke diagnosed with typhoid

जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बीच पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके बीमार हो गए। जांच में पता चला कि उन्हें टाइफाइड हो गया है। इसके बाद उन्होंने एक वीडियो जारी कर अपने समर्थकों से कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक लड़ाई जारी रहेगी। ALSO READ: 'मेट्रो, इंटरनेट और खाना बंद करा दिया, पेपर लीक नहीं रोक पाए', जंतर-मंतर प्रदर्शन के बीच राहुल गांधी का मोदी सरकार पर बड़ा हमला

 

सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, टाइफाइड हो गया है, लेकिन जब तक धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक जारी रहेगी लड़ाई नहीं देते, यह लड़ाई जारी रहेगी!

 

उन्होंने कहा कि जैसा की आप सभी को पता था कि पिछले कुछ दिनों से मेरी तबियत खराब चल रही थी। जांच रिपोर्ट आ गई है और मुझे टाइफाइड है। मेरा इलाज जारी है। रोज सुबह शाम में आईवी (Intravenous) लग रही है।

 

दीपके ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर जोर देते हुए आगे कहा कि मैं सभी कॉकरोच से जुड़ने वाले लोगों का धन्यवाद करना चाहूंगा, जो देशभर में शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट कर रहे हैं। इस आंदोलन को आप सभी ने सफल बना दिया है और मैं आश्वस्त हूं कि अगर इसी तरह शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट जारी रहा तो धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा जरूर होगा।

दीपके के स्वास्थ्य संबंधी मुख्य अपडेट्स:

बीमारी के लक्षण: दीपके को बीते कुछ दिनों से तेज बुखार, बॉडी पेन (शरीर में दर्द) और पाचन संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
जांच में पुष्टि: डॉक्टरों द्वारा दिए गए परामर्श के बाद कराए गए ब्लड टेस्ट में टाइफाइड की पुष्टि हुई है।
आंदोलन पर प्रभाव: शारीरिक रूप से बेहद कमजोर होने के बावजूद दीपके ने स्पष्ट किया कि डॉक्टरों की सलाह पर दवाइयां लेने के साथ-साथ वे अपने जारी अभियानों और विरोध-प्रदर्शनों को रोकेंगे नहीं।

टाइफाइड क्या है?

टाइफाइड एक गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण है, जो टाइफाइड बुखार/ 'साल्मोनेला टाइफी नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यह मुख्य रूप से दूषित पानी और भोजन के सेवन से फैलता है, और यह शरीर के अंदर प्रमुख रूप से आंतों, खून और अन्य अंगों को प्रभावित करता है। टाइफाइड एक संक्रामक बीमारी है, जो अगर सही समय पर इलाज न किया जाए, तो गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। ALSO READ: दिल्ली में आज 18 मेट्रो स्टेशन बंद, जंतर-मंतर प्रदर्शन के बीच DMRC का बड़ा फैसला

 

टाइफाइड के कारण: 

1. दूषित पानी और भोजन:

टाइफाइड मुख्य रूप से दूषित पानी और खाने से फैलता है। जब व्यक्ति दूषित पानी या अस्वच्छ भोजन खाता है, तो बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।

 

2. संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना:

टाइफाइड से पीड़ित व्यक्ति के मल और मूत्र में बैक्टीरिया होते हैं। अगर किसी स्वस्थ व्यक्ति ने संक्रमित व्यक्ति के मल या मूत्र से संपर्क किया हो, तो यह संक्रमण फैल सकता है।

 

3. स्वच्छता की कमी: अगर हाथ धोने की आदत न हो, खासकर खाना खाने से पहले, तो संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

 

4. स्वास्थ्य सेवाओं की कमी: खराब जल आपूर्ति और अस्वच्छ शौचालय की स्थिति टाइफाइड के फैलने का प्रमुख कारण हो सकती है। ALSO READ: '11 किलो वजन घटा, ऑर्गन्स और ब्रेन को नुकसान हुआ', अनशन पर उठे सवालों से भड़के सोनम वांगचुक, बोले- क्या मुझे कैरेक्टर सर्टिफिकेट लेना होगा?

 

टाइफाइड के लक्षण

टाइफाइड के लक्षण आमतौर पर 1 से 3 सप्ताह के बीच दिखने लगते हैं, और इनकी गंभीरता बढ़ सकती है यदि समय पर इलाज न किया जाए। कुछ सामान्य लक्षण हैं:

 

1. बुखार: टाइफाइड का सबसे सामान्य लक्षण लगातार बुखार है, जो धीरे-धीरे बढ़ता है और उच्चतम स्तर तक पहुंच सकता है। बुखार 39-40°C तक जा सकता है।

 

2. पेट दर्द: पेट में तेज दर्द और ऐंठन महसूस हो सकती है, खासकर पेट के निचले हिस्से में।

 

3. कमजोरी और थकान: टाइफाइड के कारण शरीर में अत्यधिक कमजोरी और थकान महसूस होती है, जिससे सामान्य कार्यों को करना मुश्किल हो सकता है।

 

4. दस्त और कब्ज: कुछ मरीजों को दस्त और कुछ को कब्ज की समस्या हो सकती है।

 

5. सिर दर्द और मिचली: सिर दर्द, उल्टी, और मिचली की समस्या भी आमतौर पर टाइफाइड के लक्षण होते हैं।

 

6. लाल या पीले रंग का पेट: कुछ मामलों में पेट पर लाल या पीले चकत्ते हो सकते हैं।

 

7. बेहोशी या भ्रम: गंभीर मामलों में, रोगी को भ्रम, चक्कर, या बेहोशी का सामना करना पड़ सकता है।

 

टाइफाइड का उपचार

टाइफाइड का इलाज मुख्य रूप से एंटीबायोटिक्स के माध्यम से किया जाता है, लेकिन यह इलाज डॉक्टर की निगरानी में होना चाहिए। उपचार में शामिल कुछ सामान्य कदम हैं:

 

1. एंटीबायोटिक्स : टाइफाइड का इलाज मुख्य रूप से एंटीबायोटिक्स जैसे *सीफोटेक्साइम, सीफ्रेड, एज़िथ्रोमाइसिन* या *क्लोरम्फेनीकोल* के जरिए किया जाता है। डॉक्टर लक्षणों और बैक्टीरिया के प्रकार के अनुसार उचित एंटीबायोटिक निर्धारित करेंगे।

 

2. हाइड्रेशन : टाइफाइड में बुखार, दस्त और उल्टी के कारण शरीर में पानी की कमी हो सकती है, इसलिए हाइड्रेशन बेहद जरूरी है। तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाना और ऑरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ORS घोल) लेना मददगार हो सकता है।

 

3. आहार : हल्का और सुपाच्य भोजन जैसे खिचड़ी, दही, ताजे फल और सब्जियां खाएं। तैलीय और भारी भोजन से बचें।

 

4. बुखार को नियंत्रित करना : इसे नियंत्रित करने के लिए बुखार को कम करने वाली दवाइयां दी जाती हैं।

 

5. कृत्रिम चिकित्सा : गंभीर मामलों में, अस्पताल में इलाज की आवश्यकता हो सकती है, जिसमें फ्लूइड्स, पोषण, और मॉनिटरिंग शामिल है।

 

6. टीका : टाइफाइड से बचाव के लिए टीका उपलब्ध है। यदि आप उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में यात्रा करने जा रहे हैं, तो टीकाकरण करवाना अच्छा हो सकता है।

गुजरात में 5 वेदर सिस्टम सक्रिय; अहमदाबाद और कच्छ समेत 4 जिलों में रेड अलर्ट, 24 घंटे में कहां कितनी हुई बारिश?

gujarat rain

गुजरात में मानसून के और भी अधिक सक्रिय होने के साथ, अब बारिश का एक और जोरदार दौर शुरू होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, वर्तमान में एक साथ 5 वर्षा प्रणालियां सक्रिय होने के कारण पूरे गुजरात में भारी व्यापक वर्षा की भविष्यवाणी की गई है। आने वाले घंटों और दिनों में राज्य के कई जिलों में भारी बारिश हो सकती है। स्थिति को ध्यान में रखते हुए, मौसम विभाग ने जिलावार रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किए हैं, और लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।

 

अहमदाबाद, कच्छ, बोटाद और भावनगर में रेड अलर्ट

मौसम विभाग की भविष्यवाणी के अनुसार अहमदाबाद, कच्छ, बोटाद और भावनगर जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। निचले इलाकों में जलजमाव, नदी-नालों में जलस्तर बढ़ने के साथ-साथ यातायात प्रभावित होने की संभावना को देखते हुए स्थानीय प्रशासन को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

 

उत्तर गुजरात में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट

बनासकांठा, पाटन और मेहसाणा जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। साथ ही गांधीनगर, साबरकांठा और अरावली जिलों में भी ऑरेंज अलर्ट दिया गया है। उत्तर गुजरात के इन क्षेत्रों में भारी बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।

 

पूरे सौराष्ट्र में बरसेंगे बादल: कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट

सौराष्ट्र में भी बारिश का जोर बढ़ने की संभावना है। सुरेंद्रनगर, मोरबी और राजकोट जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। जबकि जामनगर, देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, जूनागढ़, गिर सोमनाथ और अमरेली जिलों में भी ऑरेंज अलर्ट दिया गया है, जहां भारी बारिश होने की संभावना है।

 

मध्य गुजरात में ऑरेंज अलर्ट

मध्य गुजरात में आणंद, वडोदरा, छोटाउदयपुर, भरूच और नर्मदा जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जहां स्थानीय स्तर पर जलजमाव की स्थिति पैदा हो सकती है। दक्षिण और पूर्व गुजरात के दाहोद, महीसागर, खेड़ा, पंचमहल, सूरत, तापी, नवसारी, वलसाड और डांग जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है, जहां हल्की से मध्यम और कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना है।

 

नागरिकों के लिए विशेष सावधानी के निर्देश

मौसम विभाग ने बताया है कि राज्य में सक्रिय हुई 5 वर्षा प्रणालियों के कारण आने वाले दिनों में भी बारिश का माहौल बना रह सकता है। भारी बारिश की संभावना को ध्यान में रखते हुए, लोगों को नदी-नालों और जलाशयों के पास न जाने, निचले इलाकों में सावधानी बरतने और आधिकारिक अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है। किसानों, वाहन चालकों और आम नागरिकों के लिए आवश्यक सावधानी बरतना अनिवार्य है।

 

24 घंटे में कहां कितनी हुई बारिश?

राज्य में मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने से पिछले 24 घंटों के दौरान कुल 265 तालुकों में बारिश दर्ज की गई है, जिसमें सबसे अधिक बारिश सांतलपुर में 15 इंच, राधनपुर में 13.46 इंच, भाभर में 11.30 इंच और दियोदर में 10.83 इंच दर्ज की गई है; इसके अलावा महमदाबाद में 8.39 इंच, दांतीवाड़ा में 7.09 इंच, थानगढ़ में 7.09 इंच, वांकानेर में 6.96 इंच, सुईगाम में 6.81 इंच, ओगड़ में 5.98 इंच, देहगाम में 5.71 इंच, थराद में 5.12 इंच, सोजित्रा में 5.12 इंच, डीसा में 5.04 इंच, कठलाल में 5 इंच, वासो में 4.96 इंच, रापर में 4.96 इंच, महुधा में 4.92 इंच, धनसुरा में 4.92 इंच, खेड़ा में 4.76 इंच, मातर में 4.72 इंच, खेरालू में 4.72 इंच, हडाद में 4.45 इंच और नडियाद में 1.31 इंच बारिश दर्ज की गई है।

‘मेट्रो, इंटरनेट और खाना बंद करा दिया, पेपर लीक नहीं रोक पाए’, जंतर-मंतर प्रदर्शन के बीच राहुल गांधी का मोदी सरकार पर बड़ा हमला

rahul gandhi attacks modi on CJP Protest

जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के खिलाफ मोदी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर नाराजगी जताते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि मोदीजी मेट्रो, रास्ते, दुकानें, इंटरनेट और खाना तो बंद करा दिया पर वे पेपर लीक बंद नहीं करा पाए। ALSO READ: '11 किलो वजन घटा, ऑर्गन्स और ब्रेन को नुकसान हुआ', अनशन पर उठे सवालों से भड़के सोनम वांगचुक, बोले- क्या मुझे कैरेक्टर सर्टिफिकेट लेना होगा?

 

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा- मेट्रो बंद करो। रास्ते बंद करो। दुकानें बंद करो। Internet बंद करो। खाना बंद करो। अपना हक मांग रहे छात्रों के खिलाफ सरकार ने ये क्रूर कदम उठाए। बस एक चीज बंद नहीं कर पाए, मोदी जी – पेपर लीक।

गौरतलब है कि जंतर मंतर पर प्रदर्शन में भारी भीड़ उमड़ने की आशंका को देखते हुए यहां 6 लेयर सुरक्षा व्यवस्था की है। पुलिस और अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात की गई है। बैरिकेड्स को हेवी ड्यूटी चेन से जोड़ा गया है और वेल्डिंग की गई है।

 

DMRC ने शनिवार को भी दिल्ली में 7:30 बजे से लेकर अगले आदेश तक 18 मेट्रो स्टेशन बंद किए गए हैं। हालांकि राजीव चौक, मंडी हाउस और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट मेट्रो स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा उपलब्ध रहेगी। ALSO READ: दिल्ली में आज 18 मेट्रो स्टेशन बंद, जंतर-मंतर प्रदर्शन के बीच DMRC का बड़ा फैसला

 

इधर सीजेपी और उसके समर्थकों का दावा है कि धरनास्थल के आसपास इंटरनेट बाधित है। खाना लेकर जंतर मंतर की ओर आ रहे डिलिवरी बॉयज को भी रोका जा रहा है।

कांवड़ यात्रा में हर श्रद्धालु की सुरक्षा, सुविधा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता : योगी

Kanwar Yatra CM Yogi Adityanath: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगामी श्रावण मास, कांवड़ यात्रा और विभिन्न पर्वों के दृष्टिगत अधिकारियों को आगाह करते हुए कहा कि आस्था के इस महापर्व में प्रत्येक श्रद्धालु की सुरक्षा, सुविधा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता है। कांवड़ यात्रा के दौरान कानून व्यवस्था, यातायात, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता, खाद्य सुरक्षा और जनसुविधाओं की ऐसी व्यवस्था दिखाई देनी चाहिए, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि सौहार्द बिगाड़ने, अफवाह फैलाने, मिलावट, ओवररेटिंग, अव्यवस्था या अराजकता पैदा करने का प्रयास करने वाले तत्वों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए और प्रशासन पूरे आयोजन के दौरान पूरी सजगता तथा संवेदनशीलता के साथ कार्य करे।

 

इन्हीं व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए शुक्रवार देर शाम मुख्यमंत्री ने शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। प्रदेश के सभी पुलिस आयुक्तों, मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों से संवाद करते हुए उन्होंने श्रावण मास के दौरान आयोजित होने वाली कांवड़ यात्रा, श्रावणी शिवरात्रि, चेहल्लुम, स्वतंत्रता दिवस, बरावफात और रक्षाबंधन को लेकर कानून व्यवस्था, सुरक्षा, चिकित्सा, स्वच्छता, यातायात, आपदा प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं की तैयारियों का विस्तृत जायजा लिया। बैठक में अपर मुख्य सचिव, गृह ने तैयारियों की जानकारी दी, जबकि मंडलायुक्त मेरठ और एडीजी जोन मेरठ ने कांवड़ यात्रा प्रबंधन का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। 

पूरे प्रदेश में समान व्यवस्था लागू करने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने मेरठ जोन की तैयारियों और कार्ययोजना को प्रदेश के अन्य सभी पुलिस जोनों के साथ साझा करने के निर्देश दिए, ताकि पूरे प्रदेश में एक समान और प्रभावी व्यवस्था लागू की जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ यात्रा अब प्रदेश के किसी एक हिस्से तक सीमित आयोजन नहीं रह गई है। रुहेलखंड, ब्रज, बुंदेलखंड, अवध, पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित पूरे प्रदेश में लाखों श्रद्धालु इसमें भाग लेते हैं। ऐसे में प्रत्येक जनपद में व्यवस्थाओं का स्तर समान होना चाहिए। स्थानीय प्रशासन कांवड़ संघों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखे, शिविर संचालकों का सत्यापन समय से पूरा करे और सभी तैयारियों की अग्रिम समीक्षा कर किसी भी प्रकार की कमी को पहले ही दूर कर लिया जाए। कांवड़ की निर्धारित ऊंचाई का पालन सुनिश्चित कराने के लिए हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और उत्तराखंड के अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित किया जाए तथा वहां के कांवड़ संघों से भी नियमित संवाद रखा जाए।

 

उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा मार्ग श्रद्धालुओं की सुविधा के अनुरूप पूरी तरह तैयार होने चाहिए। जहां कहीं सड़कें क्षतिग्रस्त हैं, उनकी मरम्मत तत्काल पूरी कराई जाए। मार्गों पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता, पेयजल, शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहें। स्वास्थ्य विभाग पूरी तैयारी के साथ रहे। चिकित्सा शिविर प्रभावी ढंग से संचालित हों तथा एंटी वेनम और एंटी रैबीज इंजेक्शन सहित आवश्यक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। प्रमुख घाटों पर महिलाओं के लिए चेंजिंग रूम बनाए जाएं तथा सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली के माध्यम से भजन-संगीत के साथ आवश्यक सूचनाओं का नियमित प्रसारण किया जाए।

खाद्य सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने खाद्य सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। कांवड़ यात्रा मार्ग पर मांस एवं मदिरा की दुकानें बंद रखी जाएं। खाद्य पदार्थों में मिलावट, गंदगी और ओवररेटिंग की शिकायत किसी भी दशा में नहीं मिलनी चाहिए। अधिकारी नियमित निरीक्षण करें और दोषियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई करें। प्रत्येक दुकान पर संचालक का नाम स्पष्ट रूप से प्रदर्शित रहे। डीजे की ध्वनि निर्धारित मानकों के अनुरूप हो तथा कानफोड़ू आवाज किसी भी परिस्थिति में स्वीकार न की जाए। 

 

उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाने, संवेदनशील स्थलों पर सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से सतत निगरानी रखने तथा संदिग्ध व्यक्तियों पर विशेष नजर बनाए रखने के निर्देश दिए। सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक और फर्जी सूचनाओं का तत्काल खंडन किया जाए तथा अफवाह फैलाकर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

 

उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश की कुछ नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है। ऐसे में घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए। संभावित बाढ़ और कटान वाले क्षेत्रों में पहले से सभी आवश्यक तैयारियां पूरी रहें तथा स्थानीय प्रशासन लगातार निगरानी बनाए रखे। वीआईपी आवागमन से जुड़े कार्यक्रमों की पूर्व जानकारी उपलब्ध रहे, जिससे आम श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित न हो।

अधिकारी जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद बनाए रखें

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से जनप्रतिनिधियों के साथ सतत संवाद बनाए रखने को कहा। अगले दो से तीन दिनों के भीतर स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर समसामयिक विषयों और शासन के आगामी कार्यक्रमों की जानकारी साझा की जाए तथा उनके सुझावों के अनुरूप स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाया जाए। बैठक में प्रशासनिक कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने राजस्व वादों के समयबद्ध निस्तारण पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि चकबंदी से जुड़ी जनसमस्याओं का समाधान पूरी निष्पक्षता और मेरिट के आधार पर किया जाए। ऐसे विवाद किसी भी स्थिति में सामाजिक सौहार्द प्रभावित करने का कारण नहीं बनने चाहिए।

 

कुछ जनपदों से कोटेदारों के उत्पीड़न की प्राप्त शिकायतों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि जिला पूर्ति अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का पूरी ईमानदारी से निर्वहन करें। यदि किसी अधिकारी के विरुद्ध भ्रष्टाचार की पुष्टि होती है तो तत्काल निलंबन के साथ खुली विजिलेंस जांच कराकर विधिक और विभागीय कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने पावर कॉरपोरेशन के सभी डिस्कॉम को ओवर बिलिंग की शिकायतों का तत्काल समाधान करने के निर्देश देते हुए कहा कि तकनीकी खामियों का बोझ आम उपभोक्ता पर नहीं पड़ना चाहिए। प्रत्येक उपभोक्ता से उसके वास्तविक विद्युत उपभोग के अनुरूप ही बिजली का बिल लिया जाए और इस व्यवस्था का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।