पार्टनर से नहीं कर पा रहे ब्रेकअप, नो टेंशन… कंपनी हायर कर रही ‘चीफ ब्रेकअप ऑफिसर’, मिलेगी ₹2.8 लाख सैलरी

अब तक आपने सुना होगा कि लोग अपने एकतरफा प्यार को पाने के लिए ‘लव गुरु’ की मदद लिया करते थे, लेकिन अब तो मार्केट में ‘चीफ ब्रेकअप ऑफिसर’ भी आ गया, जो आपका रिश्ता खत्म कराने में मदद करेगा!

23 हजार की सैलरी और 6 दिन काम, हैदराबाद की इंजीनियर का सोशल मीडिया पर छलका दर्द

इन दिनों सोशल मीडिया पर हैदराबाद की एक युवा सिविल इंजीनियर की पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है।हैदराबाद की एक युवा सिविल इंजीनियर ने छह दिन काम करने वाली नौकरी को लेकर अपना अनुभव शेयर किया है। उन्होंने बताया कि लगातार लंबे समय तक काम करने से वह मानसिक रूप से काफी थक गई हैं। उन्होंने कहा कि अब वह अच्छी वर्क-लाइफ बैलेंस वाली नौकरी के लिए कम वेतन पर भी काम करने को तैयार हैं। उनकी इस पोस्ट पर बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी राय और एक्सपीरिएंश भी शेयर किए। उनके इस पोस्ट पर कई लोगों ने अपने एक्सपीरिएंश भी शेयर किए और उन्हें बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस वाली नई नौकरी तलाशने की सलाह दी।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

अपनी Reddit पोस्ट में 25 वर्षीय इंजीनियर ने बताया कि, उन्होंने साल 2023 में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी और फिलहाल हैदराबाद की एक बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि नौकरी मिलने की खुशी जरूर है, लेकिन हफ्ते में छह दिन काम करने के कारण उनकी पर्सनल जिंदगी काफी प्रभावित हुई है। पोस्ट पर आए यूजर्स के सवालों का जवाब देते हुए इंजीनियर ने बताया कि उनकी मौजूदा मासिक सैलरी 23,000 रुपए है। उन्होंने ये जानकारी कमेंट सेक्शन में शेयर की।

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6 दिन के काम से थक जाती हूं

उन्होंने लिखा, “मैं 6 दिन के वर्क वीक से दिमागी तौर पर थक गई हूं।” उन्होंने बताया कि जब तक वह घर पहुंचती हैं, तब तक उनके पास घर के कामों, अपने परिवार के साथ समय बिताने या बस आराम करने के लिए बहुत कम एनर्जी बचती है। “जब तक मैं घर पहुंचती हूं, मुझमें घर के बेसिक काम करने, अपने परिवार के साथ समय बिताने या अपनी शाम का मजा लेने की भी एनर्जी नहीं बचती। संडे ज्यादातर हफ्ते की थकान से उबरने में बीतता है और इससे पहले कि मुझे पता चले, फिर से सोमवार आ जाता है।”

दूसरी नौकरी की तलाश में

इंजीनियर ने कहा कि वह अब दूसरी नौकरी की तलाश कर रही हैं और अगर उन्हें हफ्ते में पांच दिन काम करने वाली नौकरी का ऑफर मिलता है, तो वह सैलरी में कटौती भी स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, “हम इंसान हैं, मशीन नहीं जो किसी का एम्पायर बढ़ाएं। यह कब रुकेगा? लगभग सभी देश हफ्ते में 5 दिन काम करने का नियम अपना रहे हैं।”

लोगों ने किया कमेंट

इस पोस्ट के वायरल होने के बाद कई लोगों ने उनकी कम सैलरी और काम के दबाव को लेकर चिंता जताई। कई यूजर्स ने उनसे उनकी आर्थिक स्थिति और खर्चों के बारे में भी सवाल पूछे। एक यूजर ने लिखा, “मुझे तुम पर बहुत गर्व है, दोस्त। इस देश ने तुम्हें फेल कर दिया है। तुम इससे कहीं ज्यादा डिजर्व करते हो। प्लीज इसे समझो। या तो किसी भी तरह स्विच करो या यह देश छोड़ दो। कोई दूसरा ऑप्शन नहीं है।”

एक व्यक्ति ने कमेंट किया, “मुझे तुम पर बहुत गर्व है OP, प्लीज नई नौकरियों के लिए अप्लाई करो और बेहतर मौके के लिए प्रार्थना करो। हफ्ते में 6 दिन के लिए 23k बहुत ज्यादा है। मैं प्रार्थना करता हूं कि तुम्हें हर दिन काफी ताकत मिले और तुम हर रात अच्छी नींद सो सको। मैं बस तुम्हारे लिए प्रार्थना कर सकता हूं। ऑल द बेस्ट।” एक और यूजर ने लिखा, “मैं भी कुछ ऐसी ही स्थिति में हूं, IT में 6 दिन, आने वाले महीनों में अपस्किल करूंगा और नौकरी छोड़ दूंगा।”

जेवर में 6,785 करोड़ का बड़ा निवेश! इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की ओर बढ़ा उत्तर प्रदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जेवर में 6,785 करोड़ रुपये के निवेश से अंबर एंटरप्राइजेज एवं कोरिया सर्किट्स के ज्वाइंट वेंचर ‘एसेंट के सर्किट्स’ का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग प्लांट क्षेत्र में रोजगार व नए उद्योगों को गति प्रदान करेगा। उन्होंने यूपी के प्रोजेक्ट्स को त्वरित स्वीकृति मिलने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी व केंद्रीय मंत्रियों का आभार भी प्रकट किया। सीएम ने कहा कि कभी जंगलराज के लिए जाना जाने वाला जेवर क्षेत्र अब मंगलराज की पहचान बना है। 

 

मुख्यमंत्री शनिवार को गौतम बुद्ध नगर के जेवर में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के भूमिपूजन एवं शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि 6,785 करोड़ रुपये से अधिक का यह निवेश क्षेत्र में नए रोजगार के अवसर पैदा करेगा और कई एंकर यूनिट्स की स्थापना में योगदान देगा। यह प्रदेश के औद्योगिक विकास को भी नई गति देगा। उत्तर प्रदेश पहले ही एमएसएमई का सबसे बड़ा हब है, जहां लगभग 96 लाख इकाइयां कार्यरत हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की प्रेरणा से शुरू हुई 'वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट' योजना ने प्रदेश के उत्पादों को देश व दुनिया में नई पहचान दिलाई है।

 

देश के 55 प्रतिशत मोबाइल नोएडा-ग्रेटर नोएडा में बन रहे

मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम मोदी जी के विजन का ही परिणाम है कि उत्तर प्रदेश आज मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। देश में बनने वाले 55 प्रतिशत मोबाइल फोन नोएडा-ग्रेटर नोएडा में निर्मित हो रहे हैं, जबकि इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का भी 55 से 60 प्रतिशत उत्पादन यहीं हो रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अंबर ग्रुप और कोरिया सर्किट का यह संयुक्त उपक्रम इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम साबित होगा और उत्तर प्रदेश के माध्यम से भारत को नई उड़ान देगा।

 

केंद्र से यूपी के प्रोजेक्ट्स को मिलती है त्वरित स्वीकृति

सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश से संबंधित किसी प्रस्ताव को केंद्र सरकार में आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार को फोन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। प्रस्ताव केंद्र सरकार तक पहुंचते ही सूचना मिल जाती है कि उसे अंतिम स्वीकृति प्रदान कर दी गई है और आप कार्य को आगे बढ़ाएं। ऐसा बहुत कम ही देखने को मिलता है। जब अपनत्व का भाव हो, देश के प्रति जज्बा हो, तब ये चीजें देखने को मिलती हैं। मैं इस स्वीकृति के लिए पीएम मोदी जी व केंद्रीय मंत्रियों का आभार प्रकट करता हूं।

 

कोरिया से उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक व आत्मीय संबंध

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश का कोरिया से बहुत पुराना संबंध है। इतिहास में यह मान्यता है कि कोरिया की रानी क्वीन हो वस्तुत: अयोध्या की राजकुमारी रत्ना थीं, जो जलमार्ग से कोरिया पहुंची थीं। कोरिया की प्रथम महिला के उत्तर प्रदेश आगमन पर अयोध्या में एक पार्क का निर्माण कराया गया था। कोरिया के राजदूत भी अयोध्या आए थे और उस ऐतिहासिक संबंध को स्मरण करते हुए भावुक हुए थे। यही आत्मीय संबंध भारत व कोरिया को और अधिक निकट लाता है। कोरिया इस बात का उदाहरण है कि आक्रामक रणनीति, अनुशासन और समर्पण के बल पर कोई देश इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बन सकता है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत भी उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है और देश की अर्थव्यवस्था नए प्रतिमान स्थापित कर रही है।

 

हर नागरिक के कर्तव्य से साकार होगा विकसित भारत का सपना

मुख्यमंत्री ने कहा कि मोदी जी का लक्ष्य वर्ष 2047 तक भारत को विकसित, आत्मनिर्भर और खुशहाल राष्ट्र बनाना है। इस संकल्प की शुरुआत प्रदेश, जनपद, नगर, गांव और प्रत्येक नागरिक से होती है। प्रधानमंत्री जी ने भी नागरिक कर्तव्य पर विशेष बल दिया है। यदि प्रत्येक नागरिक अपने क्षेत्र में पूरी निष्ठा से कार्य करेगा तो विकसित भारत का सपना निश्चित रूप से साकार होगा। इस प्रकार के निवेश उत्तर प्रदेश को नई पहचान दिलाते हैं, युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराते हैं, नए स्टार्टअप्स के लिए मंच तैयार करते हैं, निर्यात क्षमता को मजबूत करते हैं और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को गति प्रदान करते हैं।

 

जंगलराज नहीं, अब मंगलराज बना जेवर की पहचान

मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी जंगलराज के रूप में पहचाना जाने वाला जेवर आज आक्रामक रणनीति और मोदी जी के प्रेरणादायी नेतृत्व के कारण मंगलराज का प्रतीक बन चुका है। आज जब वह जेवर एयरपोर्ट पर उतरे तो उन्हें मोदी जी के कर कमलों से मिले शानदार एयरपोर्ट की सौगात दिखाई दी। अब यहां से कमर्शियल फ्लाइट्स भी शुरू हो चुकी हैं और लगातार निवेश के नए प्रस्ताव प्राप्त हो रहे हैं।

 

निवेशकों की पहली पसंद बना उत्तर प्रदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय था जब उत्तर प्रदेश पहचान के संकट से जूझ रहा था, लेकिन आज प्रदेश अपनी नई पहचान के साथ देश-दुनिया के निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। कानून व्यवस्था में सुधार, सेक्टोरल पॉलिसियों और 75 हजार एकड़ के विशाल लैंड बैंक के कारण हर क्षेत्र के निवेशकों के लिए उत्तर प्रदेश सबसे उपयुक्त बन चुका है। सरकार प्रत्येक क्षेत्र के लिए स्पष्ट नीति लेकर आई है। कोई भी निवेशक इन नीतियों के दायरे में आकर निवेश कर सकता है। सरकार समय पर इंसेंटिव देती है, सिंगल विंडो प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराती है और बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के निवेश की पूरी प्रक्रिया संपन्न होती है। इसका परिणाम यह है कि प्रदेश के युवाओं को तेजी से रोजगार मिल रहा है।

 

कानपुर व झांसी के बीच बन रही इंडस्ट्रियल सिटी

सीएम योगी ने कहा कि राज्य सरकार कानपुर व झांसी के बीच 56 हजार एकड़ क्षेत्र में बीडा के रूप में एक बड़े इंडस्ट्रियल सिटी का निर्माण कर रही है। इस परियोजना के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति का प्रस्ताव भारत सरकार के पास भेजा गया था। प्रस्ताव जब केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव जी के पास गया तो उन्होंने तत्काल सभी कार्यों को समय-सीमा में पूरा करते हुए इसकी स्वीकृति दी और फोन करके अवगत भी कराया। केंद्र व राज्य सरकार के बीच इसी प्रकार का समन्वय और त्वरित निर्णय देश के विकास को नई गति प्रदान करता है। मैं विश्वास करता हूं कि इस परियोजना को भी हम समय-सीमा में पूरा कर प्रधानमंत्री जी के विजन को आगे बढ़ाने का काम करेंगे।

 

सेमीकंडक्टर दुनिया की सबसे बड़ी ताकत

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दिनों उत्तर भारत की पहली सेमीकंडक्टर यूनिट के शिलान्यास कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव जी का सानिध्य उत्तर प्रदेश की जनता को प्राप्त हुआ था। सेमीकंडक्टर आज दुनिया की सबसे बड़ी ताकत है और भारत को इसी ताकत का केंद्रबिंदु बनना है। इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट हब के रूप में देश को स्थापित करने की दिशा में उत्तर प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। मोदी जी का विजन है कि भारत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट हब के रूप में अपनी पहचान स्थापित करे। जो चीजें विभिन्न देशों से आयात होती हैं, वे भारत में बनें और दुनिया को निर्यात हों।

 

इस अवसर पर केंद्रीय रेलवे, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव,  यूपी के मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, प्रभारी मंत्री ब्रजेश सिंह, सांसद महेश शर्मा, सुरेंद्र सिंह नागर, विधायक धीरेंद्र सिंह, तेजपाल सिंह नागर, भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर, नगर अध्यक्ष महेश चौहान, अंबर ग्रुप के कार्यकारी अध्यक्ष जसवीर सिंह, मैनेजिंग डायरेक्टर दलजीत सिंह, सीईओ कोरिया सर्किट चो यांग-हो आदि मौजूद रहे। Edited by : Sudhir Sharma

Women T20I WC: भारत के लिए करो या मरो का मैच, सामने अविजित ऑस्ट्रेलिया

AUSvsIND भारतीय क्रिकेट टीम रविवार को लंदन के मशहूर लॉर्ड्स में अपने आखिरी विमेंस T20 वर्ल्ड कप 2026 ग्रुप एक मैच में नंबर 1 ऑस्ट्रेलिया से भिड़ेगी, जिसमें सेमीफाइनल में जगह पक्की होगी। ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम ने अपने चारों मैच शानदार तरीके से जीतकर महिलाT20 वर्ल्ड कप 2026 सेमीफाइनल में लगभग जगह पक्की कर ली है।

ऑस्ट्रेलिया विमेंस टीम का नेट रन रेट (एनआरआर) 4.724 है, जो इंडिया के 2.268 से दोगुने से भी ज़्यादा है। हालांकि ऑस्ट्रेलिया आगे बढ़ने की मज़बूत स्थिति में है, लेकिन बंगलादेश के ख़िलाफ़ दक्षिण अफ़्रीका की बड़ी जीत के साथ एक बहुत बड़ी हार भी एनआरआर को काम में ला सकती है।

ऐसा है सेमीफाइनल का समीकरण 

भारत, जो दुनिया की नंबर 3 टीम है, ग्रुप एक स्टैंडिंग में पाकिस्तान, नीदरलैंड्स और बंगलादेश पर जीत के बाद चार मैचों में छह पॉइंट्स के साथ दूसरे नंबर पर है, जबकि उसे दक्षिण अफ़्रीका से एकमात्र हार मिली है। इंडियन विमेंस क्रिकेट टीम की ऑस्ट्रेलिया पर जीत से सेमीफ़ाइनल में जगह लगभग पक्की हो जाएगी, चाहे बंगलादेश बनाम दक्षिण अफ़्रीका का रिज़ल्ट कुछ भी हो।

अगर इंडिया हार जाता है, तो हरमनप्रीत कौर की टीम को रेस में बने रहने के लिए दिन में पहले साउथ अफ़्रीका को हराने के लिए बांग्लादेश की ज़रूरत होगी। इंडिया का बेहतर नेट रन रेट भी उन्हें प्रोटियाज़ ( 0.734) और बांग्लादेश (-0.849) पर काफ़ी बढ़त देता है।

यह मैच लॉर्ड्स में इंडिया का पहला विमेंस टी20 इंटरनेशनल मैच भी होगा। ऑस्ट्रेलिया ने पहले भी इस मशहूर जगह पर एक महिला टी20 खेला है, लेकिन 2023 में इंग्लैंड के खिलाफ हार गई थी। ऑस्ट्रेलिया पूरे टूर्नामेंट में ऐसी टीम लग रही थी जिसे हराना मुश्किल होगा, उसने चारों मैचों में शानदार जीत दर्ज की। फिर भी, उनका कोई भी खिलाड़ी अभी टूर्नामेंट के टॉप 10 रन बनाने वालों या विकेट लेने वालों में शामिल नहीं है, जो छह बार की चैंपियन टीम की गहराई और हरफनमौला ताकत को दिखाता है।

भारत के लिए, उप-कप्तान स्मृति मंधाना चार पारियों में 167 रन बनाकर सबसे सफल बैट्समैन रही हैं, जबकि बाएं हाथ की स्पिनर श्री चरणी 12 विकेट लेकर टूर्नामेंट में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वालों में टॉप पर हैं।

ऑस्ट्रेलिया की तरफ से सबसे ज़्यादा योगदान देने वालों में एलिस पेरी रही हैं, जिन्होंने 127 रन बनाए हैं, और सोफी मोलिनक्स ने छह विकेट लिए हैं। भारत को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हाल की मुलाकातों से भी कॉन्फिडेंस मिलेगा। उन्होंने इस साल की शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया में टी20 सीरीज़ जीतने से पहले 2025 विमेंस वनडे वर्ल्ड कप के सेमीफ़ाइनल में ऑस्ट्रेलियाई टीम को बाहर कर दिया था।

ऑस्ट्रेलिया का पलड़ा भारत पर भारी

महिला टी 20 इंटरनेशनल मैचों में ऑस्ट्रेलिया का पलड़ा भारत पर भारी है, उन्होंने अपने 37 मैचों में से 27 जीते हैं। भारत ने नौ मैच जीते हैं जबकि एक मैच टाई रहा। ऑस्ट्रेलिया महिला टी20 वर्ल्ड कप हेड-टू-हेड में 5-1 से आगे है, जिसमें 2020 फ़ाइनल और 2023 सेमीफ़ाइनल में जीत शामिल हैं। स्मृति मंधाना ने विमेंस टी 20 वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया पर भारत की एकमात्र जीत में 83 रन बनाए थे, जो वेस्ट इंडीज़ में हुए 2018 एडिशन के ग्रुप स्टेज के दौरान मिली थी।

टीम इस प्रकार हैं:

भारत: हरमनप्रीत कौर (कप्तान), स्मृति मंधाना (उप-कप्तान), यास्तिका भाटिया (विकेटकीपर), ऋचा घोष (विकेटकीपर), जेमिमा रोड्रिग्स, भारती फुलमाली, शेफाली वर्मा, दीप्ति शर्मा, क्रांति गौड़, रेणुका सिंह ठाकुर, प्रेमा रावत, अरुंधति रेड्डी, नंदनी शर्मा, श्री चरणी, राधा यादव।

ऑस्ट्रेलिया: सोफी मोलिनी (कप्तान), फीबी लिचफील्ड, बेथ मूनी (विकेटकीपर), जॉर्जिया वोल, ताहलिया मैकग्रा (उप-कप्तान), एशले गार्डनर, किम गार्थ, लूसी हैमिल्टन, ग्रेस हैरिस, अलाना किंग, एलिसे पेरी, एनाबेल सदरलैंड, निकोला कैरी, मेगन शट, जॉर्जिया वेयरहैम।

समय: शाम 7:00 बजे

बॉलीवुड फ़िल्में जोड़ रही हैं भारत और लैटिन अमेरिका को

Bollywood in Latin America: अपने आप को हर क्षेत्र में बाकी दुनिया से श्रेष्ठ समझने का गर्व करने वाले यूरोप-अमेरिका के फ़िल्म समीक्षक भारतीय फ़िल्मों को गंभरता से नहीं लेते— बहुत अतिरंजित और छिछली मान कर टाल देते हैं। लेकिन, इधर कुछ समय से देखने में आ रहा है कि मुख्यतः लैटिन अमेरिकी देशों की आम जनता भारतीय फ़िल्मों की रसिक बन रही है।

 

मैक्सिको, ब्राज़ील, कोलंबिया, अर्जेंटीना और चिली जैसे दोशों में— जो वास्तव में स्पेनिश भाषी देश हैं— लाखों लोग स्पेनी सबटाइटल वाली भारतीय, मुख्यतः हिंदी फ़िल्में बड़े चाव से देखने लगे हैं। उन्हें अमेरिकन शो या अपने ही देशों के फ़िल्मी ड्रामों से अधिक बॉलीवुड लुभाने लगा है। भारतीय कथावस्तु (कंटेन्ट) वाली फ़िल्में इन देशों में नेटफ्लिक्स पर कई-कई सप्ताहों तक पहले नंबर पर रहती हैं। लगातार दो साल से यही हो रहा है। ब्राज़ील के साओ पाउलो शहर में कोई लड़की टिकटॉक पर बॉलीवुड डांस करने लगती है, तो कोलंबिया की राजधानी बोगोटा में कोई लड़का हिंदी में “आई लव यू” कहना सीखने लगता है। मेक्सिको सिटी में कोई परिवार किसी बॉलीवुड सीन से इतना भाव-विह्वल हो जाता है कि बार-बार रोने-सिसकने लगता है!

भारत से लैटिन अमेरिका 15,000 किलोमीटर दूर है

प्रश्न यह है कि ज़्यादातर लैटिन अमेरिकी लोगों ने 15,000 किलोमीटर दूर की जिन भारतीय फ़िल्मों को कभी देखा-सुना ही नहीं था, वे फ़िल्में उनके देशों में इतनी लोकप्रिय कैसे हो गईं? मुंबई में रची-बनी कहानी देखकर कोलंबिया में लोग बहुत भावुक क्यों हो जाते हैं? यह कोई सामान्य बात नहीं हो सकती! दुनिया “ग्लोबल कंटेंट” की बात करती है। लैटिन अमेरिका में मुख्यतः हॉलीवुड की, कोरियन ड्रामा की या फिर स्पेनिश फ़िल्में चलती रही हैं।

 

भारत और उसकी फ़िल्में पश्चिमी देशों में चर्चा का विषय कभी होती ही नहीं थीं। लेकिन, 2021 और 2024 के बीच हवा का रुख बदला! हुआ यह है कि भारतीय फ़िल्में लैटिन अमेरिकी देशों में नेटफ्लिक्स के “टॉप 10 चार्ट” पर पहुँचने लगीं। एक या दो बार नहीं, लगातार— हफ़्ते-दर-हफ़्ते! RRR, बाहुबली, बैटमैन सीरीज़, स्कैम 1992 और दिल्ली क्राइम जैसी फ़िल्में लोग सिर्फ़ देख ही नहीं रहे थे, उनके बारे में खूब बातें भी कर रहे थे; अनजान लोगों को इन फ़िल्मों के बारे में ऑनलाइन बता रहे थे। अतः दर्शकों की बढ़ती हुई संख्या को देख कर, नेटफ्लिक्स ने पहले से कहीं अधिक और तेज़ी से भारतीय फ़िल्में दिखाना शुरू कर दिया। स्वाभाविक है कि उसके चार्ट में सबसे अधिक बॉलीवुड की हिंदी फ़िल्में ही हुआ करती हैं।

भारत में हर साल 1500 से ज़्यादा फ़िल्में

वैसे तो, भारत में हमेशा ही फ़िल्में बनती रही हैं— दुनिया के किसी भी देश से अधिक; हिंदी में ही नहीं, तमिल, तेलुगु, मलयालम, बंगला आदि में भी— हर साल 1500 से ज़्यादा फ़िल्में। लेकिन, उनके दर्शक स्वयं भारतवासी और विदेशों में रहने वाले प्रवासी भारतीय ही हुआ करते थे। ये फ़िल्में प्यार-मोहब्बत, जोश-ख़रोश, मार-धाड़, गीत-संगीत, नाच-गाने, रोने-धोने और भावुकता से भरपूर होती हैं। मानवीयता, कर्तव्यबोध, परिवार के प्रति समर्पण और न्याय की विजय जैसे मूल्यों की भी कमी नहीं होती। कहानियाँ ऐसी कि हीरो हर असंभव को संभव बना देता है। विलेन को वही प्रतिफल मिलता है, जिसके वह लायक है। यूरोपीय और अमेरिकी समीक्षक इसे बहुत घिसा-पिटा, पुरातनपंथी और उबाऊ बताते हैं, जबकि स्पेनिश भाषी लैटिन अमेरिकी दर्शक उनमें अपनी ही छवि प्रतिबिंबित होती देखते हैं।

 

भारतीय या बॉलीवुड फ़िल्मों में अब भी कोई मौलिक नवीनता भले न मिले, तब भी उन्हें जिस तरह से गीत-संगीत, नाच-गानों और अंतर्मन झकझोर देने या मन मोह लेने वाले अभिनयों से सजा कर पेश किया जाता है, वह दुनिया में सबसे अलग और अनूठा है। इसीलिए, भारत से बाहर वास्तव में अब तक केवल दो प्रकार के दर्शक ही इन फ़िल्मों को देख रहे थे— विदेश में रहने वाले भारतीय और अफ्रीका तथा मध्य-पूर्व के कुछ ऐसे हिस्सों के लोग, जिनके बीच बॉलीवुड ने 1960 के दशक से अपनी पैठ बना ली थी। लैटिन अमेरिका में लगभग कुछ भी नहीं था। वहां बदलाव आया है नेटफ्लिक्स की बलिहारी से।

नेटफ्लिक्स को हॉलीवुड महंगा पड़ रहा था

नेटफ्लिक्स ने 2016 और 2020 के बीच नए देशों में तेज़ी से अपना विस्तार किया। उसे ऐसे कंटेंट (कथावस्तु) वाली फ़िल्मों की ज़रूरत थी, जो बहुत सस्ती, तेज़ी से सुलभ और ग्लोबल (वैश्विक) रुचि की हों— हॉलीवुड उसे बहुत महंगा पड़ रहा था। हर देश में स्थानीय पसंद को ध्यान में रख कर फ़िल्में बनाने में काफ़ी समय लगता। दूसरी ओर, भारत में ठीक-ठाक बनी हज़ारों तैयार फ़िल्में हर समय उपलब्ध थीं। वे लैटिन अमेरिकी देशों के लोगों के दिलो-दिमाग को छूने की दृष्टि से भी न केवल दिलचस्प थीं, हॉलीवुड फ़िल्मों की लाइसेंसिंग फ़ीस की अपेक्षा बहुत सस्ती भी थीं।

 

अतः नेटफ्लिक्स ने थोक के भाव में भारतीय फ़िल्में ख़रीदना शुरू किया। पहले तो यह एक प्रयोग-भर ही था। कुछ चुनी हुई फ़िल्में ही ख़रीदी गईं। लेकिन, बाद में जो कुछ हुआ, वह पूरी तरह अनपेक्षित था। वे लैटिन अमेरिकी दर्शक, जो देर रात ऑनलाइन नेटफ्लिक्स ब्राउज़ कर रहे थे, उन्होंने स्क्रीन पर भारतीय फ़िल्मों के नाम देखते ही— जिज्ञासा या उत्सुकता-वश— उन पर क्लिक करना शुरू कर दिया। उन्हें कुछ भी पता नहीं था। बस, क्लिक किया और फ़िल्म देखने में खो गए।

 

दर्शकों की संख्या बढ़ती ही गई

समय के साथ, भारतीय फ़िल्मों के लैटिन अमेरिकी दर्शकों की संख्या तेज़ी से बढ़ती ही गई। नेटफ्लिक्स उनकी संख्या और पसंद आदि दर्ज करने लगा। उसका “एल्गोरिदम” लैटिन अमेरिकी यूज़रों को भारतीय फ़िल्में देखने की सलाह देने लगा। हर दिन ढेर सारे क्लिक होने लगे। भारतीय फ़िल्मों से जुड़ने का कारण धाँसू फ़िल्मी “एक्शन” नहीं होते। गीत-संगीत या नाच-गाने भी उतने बड़े कारण नहीं होते, जितने बड़े— भारतीयों के समान ही— लैटिन अमेरिकियों के भी अपने पारंपरिक पारिवारिक रिश्ते होते हैं। वे भी अपने प्रियजनों के लिए सब कुछ करने की उत्कट कामना और दृढ़ निश्चय की प्रबल भावना से ओत-प्रोत होते हैं।

 

इस रुझान पर शोध करने वालों ने पाया कि भारतीय फ़िल्मों के लैटिन अमेरिकी दर्शकों की टिप्पणियों में जो एक बात-बार-बार मिलती है, वह है 50 लाख की जनसंख्या वाले मेक्सिको के गुआदालाख़ारा शहर की एक महिला का यह कहना कि “भारतीय पारिवारिवाक ड्रामा देखना स्क्रीन पर अपने ही परिवार को देखने जैसा लगा।” ब्राज़ील के शहर रियो दे जनेइरो के एक आदमी ने बताया कि एक हिंदी फ़िल्म में माँ की भूमिका उसे अपनी माँ की इतनी याद दिलाने लगी, कि फ़िल्म ख़त्म होते ही उसने अपनी माँ को फ़ोन किया। कोई फ़िल्म— वह भी बहुत दूर के देश भारत की कोई फिल्म ऐसा भी जुड़ाव प्रेरित कर सकती है— मनोरंजन की दुनिया में किसी ने कभी इसकी कल्पना ही नहीं की होगी। यह तो दो सर्वथा पृथक संस्कृतियों के सदियों बाद मिलन जैसा है। 

भारतीय फ़िल्मों का भावुकता पक्ष

भारतीय सिनेमा सदा से बहुत भावप्रवण रहा है। एक-दूसरे के सामने रोना-धोना, जब शब्द काफी न लगें तो गाने लगना और परिवार के भले के लिए जान देना उसकी पहचान रहा है। हॉलीवुड में इसे पुरातन, अतिरंजित और भावुकता-भरा माना जाता है। लेकिन, लैटिन अमेरिका में भावुकता-भरी कहानी सुनाना-सुनाना दुर्बलता नहीं है। लैटिन अमेरिकन सोप ऑपेरा, जो दशकों से टेलीविज़न पर छाए हुए हैं, ठीक इसी ढर्रे पर बने होते हैं— परम प्रेम, परम धोखा, परम त्याग— और अंत में सब- कुछ भुला कर पुनर्मिलन! लैटिन अमेरिकी दर्शकों ने जब पहली बार भारतीय फ़िल्में देखीं, तो उनमें घुली भावुकता उन्हें पूरी तरह से स्वाभाविक लगी। ऐसी कहानियों के वे आदी थे।

 

अधिकतर हॉलीवुड फ़िल्मों और सीरीज़ों में परिवार बहुत जटिलता-भरे होते हैं — माता है तो पिता नहीं, पिता है तो माता नहीं। भाई-बहन हैं तो उनमें पटती नहीं। हीरो घर से भाग जाता है। आदमी से ज्यादा कुत्ते-बिल्ली की पूछताछ है। भारतीय सिनेमा में परिवार ही हर चीज़ का केंद्र है। हीरो घर से भागता नहीं, घर बचाने के लिए लड़ता है। मां को पवित्र माना जाता है, पिता का आदर-सम्मना किया जाता है— भले ही माता-पिता किसी मामले में ग़लत ही क्यों न हों। भाई एक-दूसरे के लिए जान की बाज़ी लगा देते हैं। बहनों की हर क़ीमत पर रक्षा की जाती है। 

परिवार के प्रति समर्पण बार-बार खींचता है

यही सब लैटिन अमेरिकी संस्कृति का भी अंग है। परिवार के प्रति निष्ठा वहां भी सबसे मूल्यवान सामाजिक गुणों में से एक है। मेक्सिको सिटी में एक मीडिया रिसर्च ग्रुप के 2023 के अध्ययन में पाया गया कि लैटिन अमेरिकी दर्शकों ने, खासकर परिवार के प्रति समर्पण को वह मुख्य कारण बताया, जिससे प्रभावित होकर वे भारतीय फ़िल्मों के पास बार-बार वापस आते हैं।

 

लैटिन अमेरिकी फ़िल्म प्रेमियों को यह बात भी बहुत सुहाती है कि भारतीय फ़िल्मों में दीन-हीन और अभागे, या छोटे-मोटे गांवों के ग़रीब लड़के भी अपने कामों से कई बार कथा-कहानी बन जाते हैं। कोई लड़की अपने समाज को चुनौती देती है और जीत जाती है। कोई ईमानदार आदमी भ्रष्ट व्यवस्था से अकेले ही लड़ बैठता है और एक उदाहरण बन जाता है। दूसरी ओर, लैटिन अमेरिका में सामाजिक असामानता कहीं ज़्यादा और सरकारी विभागों पर लोगों का विश्वास उतना ही कम है।

 

हिंदी फिल्मों का हीरो जब एक भ्रष्ट राजनेता से कहता है कि वह उसे आगे बढ़ने से रोक नहीं सकता, तब कोलंबिया और मेक्सिको में यह सीन देख रहे लगों को लगता है कि वे वास्तव में कुछ ऐसा देख रहे हैं, जिसे वे अपने देशों में भी वास्विकता बनते देखना चाहते हैं।

भारतीय सभ्यता-संस्कृति का भी प्रचार हो रहा है

नेटफ्लिक्स, लैटिन अमेरिकी देशों में भारतीय फ़िल्में दिखा कर निश्चित रूप से खूब कमाई कर रहा है। पर, उसकी कमाई के बहाने से इन देशों में पहली बार भारत की सभ्यता और संस्कृति का प्रचार भी हो रहा है। वहां के दर्शकों की पसंद को जानने के लिए नेटफ्लिक्स ने जो “एल्गोरिदम” बनाया है, वह उन्हें बताया करता है कि किस फ़िल्म के दर्शक को आगे क्या पसंद आ सकता है। अगली बार, स्क्रीन पर उसी प्रकार की फ़िल्मों के नाम और नमूने, नए सुझाव के तौर पर दिखाई पड़ते हैं। दर्शक को बस केवल चुनना होता है।

 

उदाहरण के लिए, चिली की राजधानी सांतियागो में यदि किसी ने अभी-अभी एक मैक्सिकन ड्रामा देखा था, तो उसे अगली सुबह अपनी प्रथम पसंद के तौर पर नेटफ्लिक्स की किसी भारतीय फिल्म का नाम मिल सकता है। उसने न तो उस फ़िल्म को कभी खोजा था और न कभी उसका नाम सुना था, लेकिन उसने तब भी क्लिक किया और फ़िल्म चालू हो गई। नेटफ्लिक्स के एल्गोरिदम ने ही दर्शकों को भारतीय सिनेमा तक पहुंचाया और उससे परिचित कराया। इन नव-परिचितों ने टिकटॉक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया के माध्य से अपने मित्रों-परिचितों को अपना अनुभव बताया। इस तरह, एक के बाद एक, अनेक लैटिन अमेरिकी भारतीय फ़िल्मों के रसिया बनते गए।

भाषा कोई बाधा नहीं

सबसे बड़ा कमाल तो यह है कि भारतीय फ़िल्मों की लोकप्रियता में भाषा कोई बाधा नहीं बनी। लैटिन अमेरिकी दर्शक स्पेनिश सबटाइटल के साथ भारतीय, विशेषकर हिंदी फ़िल्में घंटों देखने के आदी हो गए लगते हैं। उनकी जो पीढ़ी सबटाइटल के साथ विदेशी फ़िल्में देखकर बड़ी हुई है, उसके लिए यदि कहानी अच्छी है, तो भाषा मायने नहीं रखती। मायने रखती है दर्शक की अपनी संवेदनशीलता।

 

नेटफ्लिक्स ने भारतीय फ़िल्मों को अब “फ़िलर” (खाली जगह भरने की युक्ति) मानना छोड़ दिया है। एक रणनिति के तौर पर अब उसने— विशेषकर लैटिन अमेरिकी दर्शकों को ध्यान में रखकर—मौलिक किस्म की फ़िल्मों की सीरीज़ दिखाना शुरू किया है। ऐसी कहानियों वाली फिल्मों को चुना जाने लगा है, जो भारतीय और लैटिन अमेरिकी संस्कृतियों को जोड़ती हों। घिसी-पिटी परंपराओं को नकारती हों। फ़िल्मों की स्पेनी सबटाइटलों की गुणवत्ता को और अधिक सुधारने के लिए ऐसे अनुवादकों पर ख़र्च किया जा रहा है, जो न केवल स्पेन की स्पेनिश समझते हैं, अपितु मेक्सिकन, कोलंबियन और ब्राज़ीलियन लहज़े वाली स्पेनिश की विशेषताओं से भी सुपरिचित हैं।

नेटफ्लिक्स ने प्रयोग किया, परिदृश्य तेज़ी से बदला

भारतीय फिल्म निर्माताओं ने दशकों तक पश्चिमी देशों में— विशेषकर अमेरिका और ब्रिटेन में— पैर जमाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बहुत थोड़ी ही सफलता मिली। लैटिन अमेरिका उनके ध्यान में नहीं था। लेकिन, जब नेटफ्लिक्स ने यही प्रयोग किया, तो परिदृश्य तेज़ी से बदल गया। भारतीय फ़िल्मी सितारों ने स्पेनिश भाषा में इंटरव्यू तक देना शुरू कर दिया। नेटफ्लिक्स ने इसके लिए पहले लैटिन अमेरिकी सोशल मीडिया प्रेमियों के बीच अपनी पहुँच बनाई। उदाहरण के लिए, लैटिन अमेरिकी दर्शकों के लिए RRR के अभिनेता राम चरण की स्पेनी भाषा में एक छोटी-सी “वीडियो ग्रीटिंग” पोस्ट की। उस पर कुछ ही घंटों में लाखों लोगों की प्रतिक्रिय मिली।

 

नेटफ्लिक्स की इस अनोखी सफलता से पता चलता है कि भारतीय सिनेमा के लैटिन अमेरिकी रसिया निष्क्रिय उपभोक्ता नहीं हैं। वे यूट्यूब (YouTube) चैनलों पर बॉलीवुड फिल्मों की समीक्षा तक करने लगे हैं। हिंदी फिल्मों पर चर्चा करने वाली लाखों “फैन कम्युनिटीज़” बन गई हैं, जिन में लैटिन अमेरिका के हर देश के सदस्य हैं। अर्जेंटीना में एक महिला ने अपने शहर में “बॉलीवुड डांस क्लास” शुरू की है। वह सोच रही थी कि बहुत हुआ तो शायद 10-20 लोग सीखने आयेंगे, लेकिन पहले महीने में ही 200 से ज़्यादा लोगों ने आवेदन किया। ब्राज़ील में कुछ विश्वविद्यालयों के छात्र हिंदी सीख रहे हैं, क्योंकि वे हिंदी फ़िल्में को बिना सबटाइटल के हिंदी में ही देखना चाहते हैं।

भारतीय रेस्त्रां वालों का धंधा भी बढ़ा

लैटिन अमेरिकी देशों के बड़े शहरों में भारतीय रेस्त्रां भी पहली बार ग्राहकों की संख्या में अच्छी- खासी बढ़ोतरी देख रहे हैं। नए ग्राहक, नेटफ्लिक्स पर की किसी भारतीय फ़िल्म में दिखाई पड़े व्यंजनों को जानने और आज़माने के लिए आते रहते हैं। कहा जा सकता है कि नेटफ्लिक्स द्वारा लैटिन अमेरिका में दिखाई जा रही भारतीय फ़िल्मों के माध्यम से वहाँ के समाजों में एक नया सांस्कृतिक बदलाव आ रहा है।

 

मार्च 2023 में, तेलुगु फ़िल्म RRR के गाने “नाटु—नाटु” को ऑस्कर पुरस्कार मिलना लैटिन अमेरिका में लाखों लोगों ने लाइव देखा; इसलिए कि वे इस फ़िल्म और गाने को पहले से ही देख-सुन और शेयर कर चुके थे, खूब नाच-गा चुके थे। ऐसा लगता था, मानो कथा-कहानियों की रसिक दुनिया की दो महान संस्कृतियां एक-दूसरे को ढूँढ रही थीं, और अब उनका मिलन हो रहा है।
 

जानकार कहते हैं कि भारत से हज़ारों किलोमीटर दूर, स्पेनिश भाषी लैटिन अमेरिकी देशों में भारतीय — बल्कि मुख्यतः हिंदी सिनेमा देखने की लहर— इसलिए नहीं पैदा हो गई कि भारतीय फिल्में हर दृष्टि से परिपूर्ण या असाधारण होती हैं। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि दो संसकृतियों ने एक-दूसरे की कथा-कहानियों को देखा-सुना, जाना-पहचाना और पाया कि उनके बीच कई समानताएँ हैं। एक बार जब ऐसी जान-पहचान जड़ पकड़ लेती है, तो कोई एल्गोरिदम इसे रोक नहीं सकता। हो सकता है कि लैटिन अमेरिका पर बॉलीवुड का जादू अभी लंबे समय तक चले।

भारत में बुलेट ट्रेन का मेगा प्लान, जेवर एयरपोर्ट से सूरत-वडोदरा तक बदलेगी विकास की तस्वीर

भारत में बुलेट ट्रेन नेटवर्क को बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन (NHSRCL) ने करीब 4,000 किलोमीटर लंबे सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया है। इन परियोजनाओं के लिए पुल, सुरंग, एलिवेटेड ट्रैक और स्टेशनों का एक समान डिजाइन तैयार किया जाएगा। खास बात ये है कि नई बुलेट ट्रेन लाइनें भारतीय इंजीनियरिंग मानकों पर आधारित होंगी और इन्हें 350 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन गति के अनुरूप विकसित किया जाएगा। सरकार इसे ‘मेक इन इंडिया’ के तहत रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

सात प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में से चार की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को मंजूरी मिल चुकी है। वहीं बाकी तीन मार्गों पर सर्वे का काम जारी है। इसके साथ ही रूट की जांच और जमीन की तकनीकी पड़ताल का काम भी तेजी से किया जा रहा है, ताकि परियोजनाओं को तय समय पर आगे बढ़ाया जा सके। प्रस्तावित सात नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल मार्ग भी शामिल है। इस परियोजना की सबसे खास बात नोएडा के जेवर एयरपोर्ट के नीचे बनने वाला भूमिगत स्टेशन होगा। इस स्टेशन को मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए करीब 9.4 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जाएगी, जिसे इस परियोजना की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग चुनौतियों में से एक माना जा रहा है।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत 508 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग पर 12 स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। इस हाई-स्पीड रेल लाइन से महाराष्ट्र और गुजरात के कई प्रमुख शहर आपस में जुड़ेंगे। माना जा रहा है कि इस परियोजना से स्टेशनों के आसपास तेजी से शहरी विकास होगा और निवेश के नए अवसर बढ़ेंगे। खासकर सूरत और वडोदरा जैसे शहरों में बेहतर कनेक्टिविटी के कारण रियल एस्टेट बाजार को बड़ा फायदा मिल सकता है और आने वाले समय में यहां संपत्तियों की कीमतों में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

बुलेट ट्रेन परियोजना से बोइसर, वापी और अहमदाबाद जैसे क्षेत्रों के विकास को भी नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण इन इलाकों में उद्योग, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउस और नए आवासीय प्रोजेक्ट तेजी से बढ़ सकते हैं। वहीं अहमदाबाद का साबरमती स्टेशन बुलेट ट्रेन, मेट्रो और रेलवे को जोड़ने वाला बड़ा ट्रांसपोर्ट हब बनेगा, जिससे आसपास के क्षेत्र में व्यापार, होटल और रियल एस्टेट सेक्टर को भी बड़ा फायदा मिलने की संभावना है।

सरकारी स्कूलों में बड़ा बदलाव! योगी सरकार ने गुणवत्ता सुधार के लिए तेज की अकादमिक टीम की तैनाती

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार विद्यालयी शिक्षा में गुणवत्ता आधारित परिवर्तन की दिशा में मानव संसाधनों का सबसे व्यापक अकादमिक ढांचा तैयार कर रही है। प्रदेश सरकार का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में स्थायी बदलाव केवल विद्यालय भवनों, स्मार्ट क्लास या आधारभूत सुविधाओं से नहीं, बल्कि प्रशिक्षित, सक्षम और जवाबदेह शैक्षणिक नेतृत्व से संभव है।

इसी नीति के अनुरूप एआरपी (अकादमिक रिसोर्स पर्सन), जिला समन्वयक (निपुण), स्टेट रिसोर्स ग्रुप (एसआरजी), ईसीसीई एजुकेटर तथा विशेष शिक्षकों की नियुक्तियों को मिशन मोड में आगे बढ़ाया गया है। अधिकांश जनपदों में चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, जबकि कई श्रेणियों में नियुक्तियां पूरी कर विद्यालयों तक अकादमिक सहयोग तंत्र को मजबूत बनाया जा चुका है। इससे राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, निपुण भारत मिशन और प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा के लक्ष्यों को धरातल पर उतारने की दिशा में प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है।

 

एआरपी बन रहे शिक्षा सुधार की नई ताकत

विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एआरपी व्यवस्था को शिक्षा सुधार का प्रमुख आधार बनाया है। एआरपी अब केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं रहेंगे। वे शिक्षकों को शैक्षणिक सहयोग, कक्षा शिक्षण में सुधार, सीखने के स्तर का विश्लेषण और विद्यालयों का सतत अकादमिक मार्गदर्शन भी करेंगे। वर्तमान प्रगति के अनुसार वाराणसी ने 100 प्रतिशत एआरपी उपलब्धता हासिल कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। देवरिया और हाथरस 98 प्रतिशत, बस्ती एवं कौशाम्बी 95 प्रतिशत, अलीगढ़ तथा सिद्धार्थनगर 94 प्रतिशत और कुशीनगर 93 प्रतिशत उपलब्धता के साथ अग्रणी जिलों में शामिल हैं। वहीं अधिकांश जिलों में रिक्तियां तेजी से भरी जा रही हैं, जिससे विद्यालयों का अकादमिक सपोर्ट सिस्टम लगातार मजबूत हो रहा है।

 

निपुण भारत मिशन को मिलेगा मजबूत संस्थागत आधार

बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक दक्षता सुनिश्चित करने के लिए सरकार जिला समन्वयक (निपुण) की नियुक्तियों को तेजी से पूरा कर रही है। 39 जनपदों में चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि शेष जिलों में इंटरव्यू, दस्तावेज सत्यापन, वित्तीय मूल्यांकन तथा अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं अंतिम चरण में हैं। इन अधिकारियों के माध्यम से निपुण भारत मिशन के क्रियान्वयन, शिक्षक प्रशिक्षण, डाटा आधारित अनुश्रवण, सीखने के परिणामों के मूल्यांकन तथा शैक्षणिक योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग को नई गति मिलेगी।

 

एसआरजी और विशेष शिक्षक देंगे गुणवत्ता सुधार को नई धार

राज्य स्तर पर शिक्षक प्रशिक्षण, शैक्षणिक नवाचार और अकादमिक नेतृत्व को मजबूत बनाने के लिए एसआरजी व्यवस्था का भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में एसआरजी के रिक्त पदों को शीघ्रता से भरने की प्रक्रिया जारी है। इसके साथ ही विशेष शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित कर समावेशी शिक्षा को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि दिव्यांग बच्चों सहित प्रत्येक विद्यार्थी तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा समान रूप से पहुंच सके।

 

ईसीसीई एजुकेटर नियुक्तियों से मजबूत होगी बुनियादी शिक्षा

नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप बुनियादी शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए ईसीसीई एजुकेटर की नियुक्तियां भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं। पहले चरण में अनेक जनपदों में बड़ी संख्या में एजुकेटर कार्यभार ग्रहण कर चुके हैं, जबकि दूसरे चरण में कई जिलों में नियुक्तियां पूरी हो चुकी हैं। अन्य जनपदों में तकनीकी मूल्यांकन, कार्यादेश, दस्तावेज सत्यापन, मेरिट सूची, विज्ञापन और निविदा प्रक्रियाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। इससे आंगनबाड़ी केंद्रों और विद्यालयों के बीच शैक्षणिक समन्वय मजबूत होगा तथा बच्चों को प्रारंभिक अवस्था से ही गुणवत्तापूर्ण सीखने का वातावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा।

 

मानव संसाधनों के जरिए शिक्षा व्यवस्था में संस्थागत परिवर्तन

योगी सरकार शिक्षा सुधार को अल्पकालिक कार्यक्रम न मानते हुए दीर्घकालिक संस्थागत परिवर्तन के रूप में आगे बढ़ा रही है। एआरपी, निपुण जिला समन्वयक, एसआरजी, ईसीसीई एजुकेटर और विशेष शिक्षकों की व्यापक तैनाती से विद्यालयों में अकादमिक नेतृत्व मजबूत होगा, शिक्षकों की क्षमता संवर्धित होगी, सीखने के परिणामों की नियमित निगरानी होगी और प्रत्येक स्तर पर जवाबदेह शैक्षणिक व्यवस्था विकसित होगी। मजबूत मानव संसाधन, डाटा आधारित अनुश्रवण, सतत प्रशिक्षण और परिणाम आधारित कार्यसंस्कृति के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता में व्यापक सुधार की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। Edited by : Sudhir Sharma

कल का मौसम 28 जून: IMD ने इन 25 राज्यों में भारी बारिश और आंधी-तूफान का अलर्ट दिया, दिल्ली से यूपी बिहार तक ऐसा मौसम

देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून अपनी पूरी रफ्तार पकड़ चुका है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 28 जून के लिए देश के करीब 25 राज्यों में भारी बारिश, आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली चमकने का बड़ा अलर्ट जारी किया है. एक तरफ जहां कई राज्यों में मूसलाधार बारिश आफत बनकर बरसने वाली है, वहीं उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में अभी भी लू का प्रकोप बना रहेगा.

वर्तमान में मानसून की उत्तरी सीमा सूरत, इंदौर, मांडला, डालटनगंज और मोतिहारी से होकर गुजर रही है. मौसम विभाग के अनुसार, अगले 3-4 दिनों के भीतर मानसून के गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार के शेष हिस्सों, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ और इलाकों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां बेहद अनुकूल हैं.

बेहद भारी बारिश का रेड अलर्ट: असम, मेघालय और बंगाल में मूसलाधार आफत

मौसम विभाग ने 28 जून को देश के पूर्वोत्तर और पहाड़ी इलाकों में बेहद भारी बारिश की चेतावनी जारी की है:

  • * असम और मेघालय: इन दोनों राज्यों के कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने और अलग-अलग हिस्सों में बेहद भारी बारिश होने का रेड अलर्ट है.
  • * उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम: इस क्षेत्र में भी कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा के साथ अलग-अलग पॉकेट्स में अत्यंत भारी बारिश होने की प्रबल आशंका है.
  • * अरुणाचल प्रदेश और केरल-माहे: इन क्षेत्रों के अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान लगाया गया है.

बिहार समेत इन राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी

आईएमडी के ताजा बुलेटिन के अनुसार, 28 जून को देश के कई हिस्सों में भारी बारिश दर्ज की जा सकती है. प्रभावित होने वाले प्रमुख राज्य इस प्रकार हैं:

  • * पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत: बिहार और ओड़िशा के अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है. इसके साथ ही नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी भारी वर्षा का अलर्ट है.
  • * मध्य और पश्चिमी भारत: छत्तीसगढ़, विदर्भ और कोंकण व गोवा के अलग-अलग इलाकों में भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है.
  • * दक्षिण भारत: तटीय कर्नाटक, तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल, लक्षद्वीप और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश का अनुमान है. इसके अलावा तटीय कर्नाटक में तेज सतही हवाएं भी चल सकती हैं.

आंधी-तूफान और थंडरस्कॉल: दिल्ली-NCR से राजस्थान-यूपी तक अलर्ट

मौसम विभाग ने बारिश के साथ-साथ कई राज्यों में तेज रफ्तार आंधी और बिजली गिरने की चेतावनी दी है:

* अंडमान और निकोबार में थंडरस्कॉल: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में अलग-अलग स्थानों पर 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाओं के साथ थंडरस्कॉल आने की आशंका है.

* 40-50 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी और बिजली: पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, गांगेय पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओड़िशा, पूर्वी राजस्थान, केरल व माहे, कोंकण व गोवा, लक्षद्वीप और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में अलग-अलग जगहों पर 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, आंधी आने और बिजली कड़कने की संभावना है.

* 30-40 किमी/घंटे की हवाएं: उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम राजस्थान, तेलंगाना, तटीय कर्नाटक और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम में 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं. वहीं पंजाब, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की आशंका है.

दिल्ली-एनसीआर, यूपी और बिहार में लू का कहर

जहां एक तरफ मानसून आगे बढ़ रहा है, वहीं उत्तर और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों को अभी भीषण गर्मी झेलनी होगी:

* उत्तर प्रदेश: यूपी में अभी राहत नहीं है. पूरे उत्तर प्रदेश (पूर्वी और पश्चिमी यूपी) के अलग-अलग इलाकों में लू से लेकर भीषण लू की स्थिति बने रहने की गंभीर चेतावनी दी गई है.

* दिल्ली और बिहार: दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और बिहार के अलग-अलग पॉकेट्स में 28 जून को लू (Heat Wave) चलने की संभावना जताई गई है.

हालांकि, मौसम विभाग का अनुमान है कि 28 जून के बाद पूर्वी भारत में तापमान में 2-4°C की गिरावट आएगी, जबकि उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में 30 जून के बाद तापमान 4-6°C तक गिर सकता है, जिससे लोगों को गर्मी से बड़ी राहत मिलेगी.

समुद्र में जाने से बचें: मछुआरों के लिए रेड वार्निंग

मौसम प्रणालियों के सक्रिय होने के कारण समुद्र में बेहद खतरनाक स्थिति रहने वाली है, इसलिए मछुआरों को इन क्षेत्रों में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है:

* अरब सागर: सोमालिया तट और दक्षिण-पश्चिम व मध्य अरब सागर के हिस्सों में 45-55 किमी प्रति घंटे से लेकर 65 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलेंगी. इसके अलावा दक्षिण कोंकण, गोवा, कर्नाटक व केरल तट और लक्षद्वीप क्षेत्र में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी.

* बंगाल की खाड़ी: मन्नार की खाड़ी, कोमोरिन क्षेत्र, दक्षिण-पश्चिम व दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी, मध्य बंगाल की खाड़ी, तटीय आंध्र प्रदेश और अंडमान सागर में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका है.

Guru Purnima 2026: गुरु को समर्पित होती है साल की ये पूर्णिमा तिथि, जानें गुरु पूर्णिमा की सही तारीख, मुहूर्त और महत्व

Guru Purnima 2026: हिंदी कैलेंडर में पूरे साल में 12 पूर्णिमा तिथियां आती हैं। पूर्णिमा तिथि माता लक्ष्मी को समर्पित है, लेकिन इस दिन भगवान सत्यनारायण और चंद्र देव की भी पूजा की जाती है। पूरे साल में आने वाली सभी पूर्णिमा तिथियों में आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि गुरु को समर्पित की गई है। इस दिन अपने आराध्य के साथ-साथ गुरु का भी सम्मान करने की प्राचीन परंपरा है। यह दिन पूरे देश में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, गुरु पूर्णिमा आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को मनाई जाती है, जो आमतौर पर जून और जुलाई के बीच आती है। यह त्योहार भारत, नेपाल और भूटान में हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म के लोग मनाते हैं। हिंदू अपने गुरुओं की पूजा करते हैं, बौद्ध इसे भगवान बुद्ध को समर्पित करते हैं। वहीं, जैन धर्म के अनुयायी अपने आध्यात्मिक गुरुओं का सम्मान करते हैं।

गुरु पूर्णिमा 2026 कब है?

गुरु पूर्णिमा बुधवार, 29 जुलाई, 2026 को है

पूर्णिमा तिथि शुरू – 28 जुलाई, 2026 को शाम 06:18 बजे

पूर्णिमा तिथि खत्म – 29 जुलाई, 2026 को रात 08:05 बजे

गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह महाभारत के रचयिता और वेदों को इकट्ठा करने वाले महर्षि वेद व्यास की जयंती है। इससे इस मौके का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व और बढ़ जाता है।

गुरु पूर्णिमा कैसे मनाई जाती है?

गुरु पूर्णिमा को बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है। सुबह जल्दी उठें और घर की साफ-सफाई करें, स्नान करके साफ कपड़े पहनें, अपने माता-पिता और बड़ों का आशीर्वाद लें और सूर्य भगवान को जल यानी अर्घ्य अर्पित करें। इस दिन भक्त मंदिरों, आश्रमों और मठों में आशीर्वाद लेने जाते हैं। कई लोग व्रत भी रखते हैं और अपने गुरुओं को समर्पित भजन और श्लोक पढ़ते हैं।

गुरु पूर्णिमा पूजा विधि

सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें, क्योंकि वे ज्ञान और बुद्धि के देवता हैं। अगर, आपने किसी गुरु से दीक्षा ली है, तो गुरु मंत्र का जाप करें। अपने आध्यात्मिक या जीवन के गुरु से मिलकर उनका आशीर्वाद लें।

गणेश मंत्र

ॐ गं गणपतये नमः

ॐ वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ, निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा…

गुरु पूर्णिमा का महत्व

हिंदू धर्म में पूर्णिमा का दिन बहुत शुभ माना जाता है, इस दिन लोग भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा करते हैं। साल में 12 पूर्णिमा आती हैं, लेकिन गुरु पूर्णिमा खास है, क्योंकि यह दिन गुरु के सम्मान के लिए समर्पित होता है।

Yogini Ekadashi 2026 Date: ये होगी आषाढ़ मास की पहली एकादशी, जानें योगिनी एकादशी व्रत की तारीख, पूजा मुहूर्त और विधि

International MSME Day: सीएम डॉ. मोहन यादव ने की बड़ी घोषणाएं, युवा वर्ष के रूप में मनाया जाएगा साल 2027, जनवरी में भोपाल में होगी GIS

भोपाल। मध्यप्रदेश में मोहन सरकार साल 2027 को 'युवा वर्ष' के रूप में मनाएगी। दूसरी ओर, 'ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट' (GIS) भी जनवरी में भोपाल में आयोजित की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ये घोषणाएं अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस-2026 पर भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित 'सशक्त उ‌द्यमी-समृद्ध मध्यप्रदेश समिट' में कीं। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के सफल उद्यमियों की विकास गाथा पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंगल क्लिक से 760 से अधिक ईकाइयों को प्रोत्सान राशि दी। उन्होंने प्रदेश के 137 स्टार्टअप्स को 1.5 करोड़ की सहायता राशि भी दी। मध्यप्रदेश निवेश प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत वृहद उद्योगों को 1274 करोड़ की वित्तीय सहायता दी गई।

उद्यमियों को उद्योग स्थापना के लिए भूमि आवंटन पत्र और लोन स्वीकृति पत्र दिए गए। देवास, पांढुर्ना, टीकमगढ़, उज्जैन को एमएसएमई भवन की सौगात मिली। मंदसौर में मुल्तानपुरा औद्योगिक क्षेत्र में 288 भू-खंड, मंडला में 165 भू-खंड, जबलपुर में 61 भू-खंड, बैतूल में 50 भू-खंड, कटनी के नवीन औद्योगिक क्षेत्र में 68 भू-खंड, नीमच के सरगना औद्योगिक क्षेत्र में 127 भू-खंड, खरगोन के डाबरिया औद्योगिक क्षेत्र में 103 भू-खंड दिए गए। प्ले एंड प्लग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और एमएसएमई विभाग के बीच स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए एमओयू भी साइन किए गए। समिट में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कटनी और मंडला के उद्यमियों से संवाद भी किया।

इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 4 लाख 41 हजार से अधिक एमएसएमई यूनिट्स की कमान माताओं-बहनों के हाथों में है। गत वर्षों के मुकाबले वर्ष 2024 से 2026 के बीच एमएसएमई में नारी शक्ति का प्रतिनिधित्व 59 प्रतिशत बढ़ा है। राज्य सरकार ने प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए 16 कलस्टर का निर्माण किया है और 14 नए कलस्टर पर काम चल रहा है। राज्य को ओडीओपी में उल्लेखनीय सफलता मिली है। वर्ष 2025-26 में मध्यप्रदेश के 20 उत्पादों को जीआई टैग मिले हैं।

राज्य सरकार सभी की कठिनाई को समझते हुए विकास की धारा में सरलता, सुचिता और अपने पारदर्शी निर्णयों के बूते आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लिए विकसित मध्यप्रदेश का निर्माण करना भी आवश्यक है। राज्य सरकार ने आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) को भोपाल में आयोजित करने का निर्णय लिया है। साथ ही वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में घोषित किया है। इस पूरे वर्ष में एग्रीकल्चर सेक्टर को आधुनिक तरीके से नई ऊंचाई पर लेकर जाएंगे। कृषक कल्याण वर्ष में किसानों को शून्य ब्याज दर पर लोन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को लोन चुकाने के लिए नई सौगात दी है। किसान जिस तारीख को लोन लेंगे, उसके 12 माह की अवधि में लोन भर सकेंगे। इसके लिए 31 मार्च की बाध्यता खत्म कर दी गई है। राज्य सरकार वर्ष 2027 को युवा कल्याण वर्ष के रूप में मनाएगी। सरकार गरीब, अन्नदाता, युवा और नारी कल्याण के लिए कार्य कर रही है। राज्य सरकार ने वर्ष 2024 को गरीब कल्याण, वर्ष 2025 को उद्योग एवं रोजगार वर्ष के रूप में कार्य किया।

 

एमपी में तेजी से बढ़ रहा विदेशी निवेश-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में 200 से अधिक सांदीपनि विद्यालय खोले जा रहे हैं, ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। मध्यप्रदेश सबसे युवा प्रदेश है। स्वर्णिम मध्यप्रदेश के लिए युवा पीढ़ी को सभी सुविधाएं मिलनी चाहिए। राज्य में विदेशी निवेश भी तेजी से बढ़ता जा रहा है। अब तक जो एमओयू हुए उनमें से 9 हजार 300 करोड़ का निवेश धरातल पर आया है। कनाडा की मैकमैन कंपनी आगर मालवा, यूके की दो बड़ी कंपनियां पीथमपुर, जापान, चीन, आयरलैंड और दक्षिण कोरियाई कंपनियां प्रदेश में निवेश कर रही है। उन्होंने कहा कि कपास पर मंडी शुल्क घटाकर आधा करने की मांग 25 साल से की जा रही थी। ऐसा नहीं होने से हमारे कपास उत्पादक किसान महाराष्ट्र और अन्य पड़ोसी राज्यों में अपनी उपज बेचने को मजबूर थे। राज्य सरकार ने प्रदेश कपास उत्पादक किसानों को मंडी शुल्क कम कर सौगात दी है। इसी प्रकार से अरहर (तुअर) दाल के साथ भी यही परेशानी थी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक जिले के रेवेन्यू का मॉडल तैयार करने पर काम करेगी। जिले की अनुकूलता के आधार पर व्यापार-व्यवसाय को प्रोत्साहन देते हुए जिले को समृद्धि मिले।

 

उद्योग विकास में एमपी ने हासिल कीं नई उंचाइयां-कार्यक्रम में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री चेतन्य काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने उद्योग विकास के क्षेत्र में नई ऊंचाई हासिल कीं हैं। जब नेतृत्व में दृष्टि हो तो एमएमएमई विभाग का बजट 1100 करोड़ से बढ़कर 2100 करोड़ हो जाता है। राज्य सरकार ने विभाग का बजट बढ़ाकर सीधे तौर पर उद्यमियों को लाभ दिया है। उद्योग स्थापित करने के लिए सबसे पहले भूमि की आवश्यकता होती है और मध्यप्रदेश में पर्याप्त लैंड बैंक उपलब्ध है। पिछले एक साल में लगभग 1200 भूखंड उद्योग स्थापित करने के लिए आवंटित किए गए हैं। आगामी डेढ़ साल में 3000 और भूखंड आवंटित किए जाएंगे। 

 

जमीन पर दिखने लगा निवेश-मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि मध्यप्रदेश की विकास यात्रा में 49 प्रतिशत निर्यात एमएसएमई सेक्टर से आता है। राज्य में जीआईएस के दौरान मिले निवेश प्रस्तावों में से 9 लाख करोड़ का निवेश जमीन पर दिखाई देने लगा है। निवेश से जीडीपी को गति मिलती है। मध्यप्रदेश ने एमएसएमई उत्पादों के निर्यात में एक वर्ष में 4 स्थानों की छलांग लगाई है। इस मामले में देश में मध्यप्रदेश का नंबर अब 11वां है। मध्यप्रदेश वह राज्य है, जिसने भारत सरकार द्वारा तय 23 सुधारों को शत प्रतिशत लागू किया और देश में टॉप अचीवर बना। राज्य में पहली बार जनविश्वास बिल पारित किया गया। लगभग 900 से अधिक गैर-जरूरी कानूनों को शिथिल किया गया और 100 से अधिक ऐसे कानून को पेनाल्टी में बदला, जिनमें सजा का प्रावधान था। पिछले एक साल में 8500 कंपनियों को बैंक लोन स्वीकृति मिली है। अब कृषि उत्पाद बाहर न जाकर मध्यप्रदेश में प्रोसेस्ड होंगे। वहीं, प्रमुख सचिव एमएसएमई राघवेंद्र कुमार ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले ढाई साल में एमएसएमई और उद्योग विभाग के अंतर्गत 11 हजार 500 करोड़ से अधिक राशि निवेश प्रोत्साहन सहायता के रूप में दी है।

आज अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस पर 235 करोड़ रुपए की राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से 750 से अधिक ईकाईयों को वितरित की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में विभाग ने 31 मई तक की सभी देनदारियों का भुगतान कर दिया है। राज्य सरकार प्रोडक्शन बढ़ाने पर जोर दे रही है, इसके साथ ही गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया गया है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 में लगभग 30 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे, इनमें से करीब 30 प्रतिशत निवेश को धरातल पर उतारने के लिए कार्य किया जा रहा है। बाबई-मोहासा और धार के पीएम मित्रा पार्क में विकास कार्य तेजी से जारी हैं। एमएसएमई विभाग के अंतर्गत प्रदेश में 185 से अधिक औद्योगिक क्षेत्र संचालित किए हैं और 30 नए क्षेत्रों को विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में वर्किंग वुमन हॉस्टल भी बनाए जा रहे हैं। दिसंबर 2023 में स्टार्टअप की संख्या 4800 के आसपास थी, जो अब 7500 से अधिक हो गए हैं। इनका नेतृत्व 50 प्रतिशत के अधिक बेटियां कर रही हैं।

 

उद्यमियों ने सुनाई अपनी-अपनी कहानी

उद्यमी डॉ. पीयूष कुमार सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश सिर्फ उद्योग स्थापित करने नहीं, बल्कि उद्योग को आगे बढ़ाने वाला राज्य है। किसी भी उद्योग की स्थापना के दौरान अनेक प्रक्रियाएं पूरी करनी पड़ती हैं। राज्य सरकार के प्रयासों से उद्योग अनुकूल वातावरण निर्मित हुआ है। मध्यप्रदेश की औद्योगिक नीतियां बहुत पारदर्शी हैं। राज्य सरकार की ओर से हमें मिला सहयोग सफलता की पूंजी है। हमारी कंपनी राज्य में 200 करोड़ का निवेश कर चुकी है। हमारी कंपनी एक ऐसी दुर्लभ बीमारी की दवा बना रही है, जो विश्व में कभी उपलब्ध नहीं है। आर्यवृत अभियांत्रिकी के प्रोपराइटर राजेश मिश्रा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि राज्य सरकार ने प्रत्येक विभाग में निवेश प्रोत्साहन सहायता प्रदान करने की व्यवस्था की है। मध्यप्रदेश में एमएसएमई सेक्टर में आगे बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में सरकार ने 31 मई 2026 तक की सभी देनदारियां क्लियर की हैं। यह उद्यमियों और निवेशकों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।