लखनऊ में शहीद पथ पर बनेगा नया एलिवेटेड कॉरिडोर, नितिन गडकरी ने दिए डीपीआर बनाने के निर्देश

new elevated corridor will be built on Shaheed Path in Lucknow

– योगी सरकार की कानून व्यवस्था और विकास मॉडल की सड़क एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने की सराहना

– रक्षामंत्री राजनाथ सिंह बोले- योगी जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों पर

– शहीद पथ पर एयरपोर्ट से आउटर रिंग रोड तक बनेगा 23 किमी लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर

– केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने गिनाईं यूपी में भावी योजनाएं

Uttar Pradesh News : लखनऊ में बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए शहीद पथ पर बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट साकार होने जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के कहने पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लखनऊ एयरपोर्ट से आउटर रिंग रोड तक लगभग 23 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण के लिए डीपीआर तैयार करने के निर्देश दे दिए हैं। नितिन गडकरी ने कहा कि इस वर्ष दिसंबर तक भूमि पूजन कर परियोजना का निर्माण कार्य शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा। दोनों वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों ने योगी सरकार की कार्यशैली की खुलकर सराहना की। 

 

सोमवार को लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4,850 करोड़ रुपए से अधिक की 3 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। 

 

शहीदपथ पर वाहन चालकों को जाम से मिलेगी राहत

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में केंद्र सरकार थी, तब उनके सड़क परिवहन मंत्री रहते हुए शहीद पथ का शिलान्यास हुआ था। आज यही शहीद पथ लखनऊ की लाइफलाइन बन चुका है। लगातार बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए अब इसके ऊपर एलिवेटेड रोड बनाना समय की आवश्यकता है, जिससे वाहन चालकों को जाम से राहत मिलेगी। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में इसी कॉरिडोर पर मेट्रो भी संचालित की जाए, ताकि लोगों को तेज और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध हो सके।

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तीन लेयर फ्लाईओवर बनेगा दुनिया के आकर्षण का केंद्र

नितिन गडकरी ने कहा कि लखनऊ में प्रस्तावित तीन लेयर एलिवेटेड फ्लाईओवर विश्व स्तर पर आकर्षण का केंद्र बनेगा। इस परियोजना में आधुनिक मास रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम की भी व्यवस्था की जाएगी, जिससे सड़क और सार्वजनिक परिवहन दोनों को मजबूती मिलेगी। किसी भी राज्य के विकास की नींव मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर होती है। पानी, बिजली, परिवहन और संचार व्यवस्था बेहतर होने से उद्योग, व्यापार और निवेश बढ़ता है, जिससे रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और गरीबी व बेरोजगारी कम होती है।

 

लखनऊ-सीतापुर सिक्स लेन हाईवे सहित कई परियोजनाओं को मिली मंजूरी

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि लखनऊ से सीतापुर तक प्रस्तावित छह लेन राजमार्ग को भी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने तत्काल स्वीकृति दे दी है और जल्द ही इस परियोजना पर काम शुरू होने की उम्मीद है। वहीं नितिन गडकरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 50 से 60 हजार करोड़ रुपए की नई सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।

अगले दो वर्षों में प्रदेश में लगभग पांच लाख करोड़ रुपए के विकास कार्य पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है। नितिन गडकरी ने कहा कि लखनऊ के किसान पथ पर सर्विस रोड बनाई जाएगी। इसके अलावा अयोध्या-गोंडा बाईपास, आनंदनगर-महराजगंज बाईपास, पडरौना-तमकुही बाईपास तथा दादरी-लालकुआं छह लेन एलिवेटेड रोड जैसी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई है।

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रक्षा मंत्री और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने मुख्यमंत्री योगी की सराहना की

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश का विकास पूरे देश में चर्चा का विषय है। किसी भी प्रदेश के विकास की पहली शर्त मजबूत कानून व्यवस्था होती है और योगी सरकार ने यह स्थापित करके दिखाया है। लखनऊ के विकास से जुड़े हर प्रस्ताव को मुख्यमंत्री ने प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया और आने वाले समय में लखनऊ के आसपास बड़े उद्योग स्थापित होंगे।

 

यूपी में सीएम योगी ने समाप्त किया गुंडाराजः नितिन गडकरी

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था मजबूत कर लोगों का विश्वास जीता और गुंडाराज को समाप्त किया। किसी भी देश और राज्य के विकास में चार बातें महत्वपूर्ण होती हैं।

सबसे पहली आवश्यकता मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर की होती है। इंफ्रास्ट्रक्चर के चार प्रमुख आधार हैं वाटर, पावर, ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन, जहां ये चारों व्यवस्थाएं मजबूत होती हैं, वहां व्यापार, उद्योग और कारोबार तेजी से बढ़ते हैं।

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इसके साथ ही पूंजी निवेश आता है। जहां व्यापार, उद्योग और निवेश बढ़ता है, वहां रोजगार का सृजन होता है और जहां रोजगार का निर्माण होता है, वहां गरीबी, भुखमरी और बेरोजगारी स्वतः दूर हो जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में तेजी से विकास हुआ है। 

योगी के नेतृत्व में सबसे बड़ा जल संरक्षण अभियान, देश के 27% अमृत सरोवर यूपी में

amrit sarovar uttar pradesh: उत्तर प्रदेश ने जल संरक्षण के क्षेत्र में ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसने पूरे देश के लिए एक नया मॉडल तैयार कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर रिकॉर्ड 20 हजार अमृत सरोवर बनाए जा चुके हैं और पिछले पांच वर्षों में करीब पौने दो लाख तालाबों का निर्माण व जीर्णोद्धार किया गया है। अमृत सरोवरों के निर्माण में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर है और पूरे देश के कुल अमृत सरोवरों में करीब 27 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले उत्तर प्रदेश की है।

 

पिछले पांच वित्तीय वर्षों में जल संबंधी कार्यों पर 16 हजार करोड़ रुपए से अधिक का काम किया गया, जिससे प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर बदल रही है। जल संरक्षण की इस व्यापक मुहिम का असर अब खेती, भूजल स्तर, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है।

 

जल संरक्षण बढ़ाने के लिए पहले मनरेगा के तहत कुल 266 अनुमन्य कार्यों में से 78 कार्य जल संरक्षण से संबंधित रहे। वहीं, अब वीबी-जीराम-जी के तहत कुल 318 अनुमन्य कार्य हैं, जिनमें से 107 कार्य जल सुरक्षा एवं जल संरक्षण से संबंधित हैं। इनमें चेक डैम का निर्माण, सोक पिट का निर्माण, रुफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर, तालाब का निर्माण, जलाशयों का पुनरोद्धार, बांधों का निर्माण, मेड़बन्दी, पौधारोपण शामिल हैं।

yogi adityanath in rampur

उत्तर प्रदेश ने अन्य राज्यों को काफी पीछे छोड़ा

जल संरक्षण के मामले में उत्तर प्रदेश ने अन्य राज्यों को काफी पीछे छोड़ दिया है। अमृत सरोवरों के निर्माण में दूसरे स्थान पर मध्य प्रदेश है, जिसकी तुलना में उत्तर प्रदेश लगभग तीन गुना आगे है। यह उपलब्धि केवल सरकारी निर्माण कार्य तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव-गांव में जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन को जनभागीदारी से जोड़ने का परिणाम है।

हर गांव में जल संरक्षण बना जन आंदोलन

योगी सरकार ने अमृत सरोवर योजना को केवल एक निर्माण परियोजना नहीं रहने दिया, बल्कि इसे जनभागीदारी का अभियान बनाया। गांवों में पुराने तालाबों का पुनर्जीवन, नए जलाशयों का निर्माण, वर्षा जल संचयन और जल स्रोतों के संरक्षण को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बढ़ी और जल संकट से जूझ रहे इलाकों को स्थायी समाधान मिलने लगा।

खेती, भूजल और पर्यावरण को मिल रहा बड़ा सहारा

अमृत सरोवरों और तालाबों के निर्माण का सबसे बड़ा लाभ कृषि क्षेत्र को मिला है। सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसानों को राहत मिली है और भूजल स्तर में व्यापक सुधार आया है। जलाशयों के आसपास हरियाली बढ़ी है, जैव विविधता को बढ़ावा मिला है और स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण को नई मजबूती मिली है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला नया आधार

जल संरक्षण अभियान का सकारात्मक प्रभाव ग्रामीण आजीविका पर भी पड़ा है। अमृत सरोवरों में मत्स्य पालन, पशुपालन, सिंचाई और अन्य आजीविका गतिविधियों के नए अवसर विकसित हुए हैं। वीबी-जीराम-जी के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिला, जबकि जल उपलब्धता बढ़ने से कृषि उत्पादन और किसानों की आय में भी काफी वृद्धि हुई है।

जल संरक्षण में राष्ट्रीय मॉडल बना उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश ने जल संरक्षण को विकास, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़कर एक ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसे देश के अन्य राज्यों द्वारा भी अपनाया जा रहा है। अमृत सरोवरों, तालाबों के पुनर्जीवन और व्यापक जल संरक्षण कार्यों ने यह साबित किया है कि सुनियोजित नीति, जनभागीदारी और प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से जल संकट का स्थायी समाधान संभव है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश आज जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरा है।

मुख्यमंत्री योगी बोले- वनों से ही नदियां रहेंगी सदानीरा, एक वृक्ष करता है हजारों लीटर जल का अवशोषण

Chief Minister Yogi Adityanath explained importance of tree plantation

– ताल रिंग रोड के किनारे सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया पौधारोपण

– वृक्षों के अंधाधुंध कटान से हो सकता है जल और खाद्यान्न संकट

– पर्यावरण असंतुलन से वर्षा चक्र का अंतर बढ़ता है

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी नागरिकों को पौधारोपण की महत्ता समझाते हुए कहा कि एक वृक्ष अपने भीतर हजारों लीटर जल का अवशोषण करके रखता है। नदियां वहीं सदानीरा होती हैं, जहां वन या अधिक संख्या में वृक्ष होते हैं। यदि वृक्षों की अंधाधुंध कटान होगी तो जल की कमी से खाद्यान्न संकट खड़ा हो सकता है। 

 

मुख्यमंत्री रविवार को पौधारोपण महायज्ञ 2026 के अंतर्गत आरकेबीके के समीप ताल रिंग रोड के किनारे मौलश्री का पौधा लगाने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पर्यावरण असंतुलन से वर्षा चक्र का अंतर बढ़ता है और इसका प्रतिकूल असर अन्नदाता किसान के लिए संकट पैदा करता है। बड़े पैमाने पर पेड़ों के कटान से पेयजल का संकट और सूखे की स्थिति बनती है।

पर्यावरण संतुलन रखने के लिए अपने दायित्व का निवर्हन करने को हर नागरिक को ‘एक पेड़ मां के नाम’ थीम को समर्पित पौधारोपण महाभियान से जुड़ना होगा। हर व्यक्ति को पौधा लगाने के साथ ही उसकी सुरक्षा का संकल्प भी लेना होगा। 

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सीएम योगी ने कहा कि इस वर्ष एक ही दिन में सरकार ने 35 करोड़ पौधारोपण करने का लक्ष्य तय किया है। लक्ष्य बड़ा भले हो, लेकिन यूपी जैसे राज्य जहां 57 लाख से अधिक नर्सरियां हैं, के लिए यह मुश्किल नहीं है। पौधारोपण महाभियान में औषधीय, फलदार, छायादार, इमारती हर तरह के पौधे लगाए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार ने हर वर्ष पौधारोपण के बड़े अभियान को आगे बढ़ाया है और पौधों की सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की है।

इसी का परिणाम है कि सर्वे में वनाच्छादन का विस्तार स्पष्ट दिखाई देता है। कृतज्ञता ज्ञापन भारतीय संस्कृति की पहचान है। व्यापक पौधारोपण के जरिये हम प्रकृति के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित कर वर्तमान और भावी पीढ़ी के भविष्य को उज्ज्वल बना सकते हैं।

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ताल रिंग रोड के किनारे पौधारोपण करने के बाद मुख्यमंत्री ने रामगढ़ताल की खूबसूरती को निहारा और सेल्फी भी ली। इस अवसर पर सांसद रविकिशन शुक्ल, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय, महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता, पूर्व महानगर अध्यक्ष राजेश गुप्ता सहित कई पार्षद भी उपस्थित रहे।

पौधारोपण महाभियान धरती माता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का महायज्ञ : योगी आदित्यनाथ

Chief Minister Yogi stated that mega plantation drive is grand undertaking to express gratitude towards Mother Earth

– मुख्यमंत्री ने गोरखपुर से किया 1 दिन में 35 करोड़ पौधारोपण के लक्ष्य वाले पौधारोपण महायज्ञ 2026 का शुभारंभ

– 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत सीएम ने गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर रोपे पवित्र त्रिवेणी (नीम, पीपल, बरगद) के पौधे

– मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास की रफ्तार के साथ वनाच्छादन का विस्तार, सैकड़ों टन कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण करता है एक पेड़

– आरकेबीके के पास ताल रिंग रोड के किनारे भी मुख्यमंत्री ने किया पौधारोपण, लगाया मौलश्री का पौधा

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार सुबह गोरखपुर से एक दिन में 35 करोड़ रिकॉर्ड पौधारोपण के लक्ष्य वाले प्रदेशव्यापी पौधारोपण महायज्ञ 2026 का शुभारंभ किया। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत उन्होंने गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर भगवानपुर टोल प्लाजा के समीप पवित्र त्रिवेणी (नीम, पीपल, बरगद) के पौधे लगाए और सेल्फी भी ली। इसके बाद गीडा सेक्टर-28 में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पौधारोपण महाभियान धरती माता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का महायज्ञ है। विगत नौ वर्षों में प्रदेश में भौतिक विकास की रफ्तार तेज होने के साथ ही वनाच्छादन का भी विस्तार हुआ है। गोरखनाथ मंदिर लौटते समय सीएम ने आरकेबीके के पास ताल रिंग रोड के किनारे भी मौलश्री का पौधा रोपित किया।

 

जनसभा में सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद से यूपी के इंफ्रास्ट्रक्चर का वृहद विस्तार हुआ है। एक्सप्रेसवे, हाईवे के साथ बड़े पैमाने पर सड़कों का जाल बिछा है। नए-नए उद्योग लगे हैं। शहरीकरण का दायरा बढ़ा है और नई-नई कॉलोनियां विकसित हुई हैं। भौतिक विकास में तेज योगदान देने वाले इस राज्य ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति संकल्पित प्रयासों से वनाच्छादन के विस्तार में भी सफलता प्राप्त की है।

एक पेड़ सैकड़ों टन कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण करता है। 9 वर्षों में यूपी का वनाच्छादन बढ़ने से 6 करोड़ 37 लाख 74 हजार 130 टन कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण तथा 4 करोड़ 63 लाख 90 हजार 130 टन ऑक्सीजन का उत्सर्जन हुआ।

 

'माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्या:'

मुख्यमंत्री ने पौधारोपण महाभियान को धरती माता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का महायज्ञ बताया और इसमें हर व्यक्ति की तरफ से योगदान दिए जाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि धरती माता हम सबको अच्छा वातावरण देती हैं। आगे बढ़ने का अवसर, पेट भरने को अन्न, अच्छे-अच्छे फल, पीने के लिए जल देने के साथ घर की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करती हैं।

धरती माता के बारे में हमारे ऋषियों ने संकल्प भाव से कहा है- 'माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्या:', अर्थात यह धरती हमारी माता हैं और हम सब इसके पुत्र हैं। एक पुत्र के रूप में धरती माता के प्रति उत्तरदायित्व का निर्वहन करने के लिए ही प्रधानमंत्री मोदी जी ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ का आह्वान किया है।  यह आने वाली पीढ़ी के भविष्य को सुंदर बनाने का राष्ट्रीय कर्तव्य है। 

 

धरती माता की आरोग्यता का भी रखें ध्यान

सीएम योगी ने पौधारोपण की थीम ‘एक पेड़ मां के नाम’ को बहुत सुंदर बताते हुए कहा कि मां हर व्यक्ति, हर जीव के लिए दुनिया का सबसे सुंदर उपहार है। हम खुद के स्वास्थ्य की चिंता करते हैं, लेकिन सबकुछ देने वाली धरती माता के स्वास्थ्य की परवाह नहीं करते। खुद की आरोग्यता के लिए हम सभी को धरती माता की आरोग्यता का भी ध्यान रखना होगा।

अनंतकाल तक जीवसृष्टि बनी रहे, इसके लिए पौधारोपण अत्यंत आवश्यक है। मोदी के आह्वान पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर इस वर्ष 5 करोड़ पौधे लगाए गए। गत वर्ष 35 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। 9 वर्ष में अब तक प्रदेश में 242 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं।

Chief Minister Yogi stated that mega plantation drive is grand undertaking to express gratitude towards Mother Earth

मौसम चक्र में परिवर्तन से कृषि उत्पादन पर असर

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण पर मंडरा रहे संकट का प्रभाव मौसम चक्र पर भी पड़ा है। बारिश करीब एक महीना विलंब से शुरू हुई है। जो बीज 15 जून तक लग जाना चाहिए था, उसे 15 जुलाई को लगाएंगे तो उत्पादन में 25 से 30 प्रतिशत तक अंतर पड़ेगा।

पर्यावरण असंतुलन से कभी प्रचंड गर्मी पड़ रही है तो कभी सर्दी। लगातार ग्लोबल वार्मिंग की चेतावनी दी जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि आने वाले समय में समुद्र के किनारे बहुत सारे शहर डूबने की स्थिति में होंगे तो कहीं भीषण जल संकट होगा।

 

मानवता को चुकानी पड़ रही प्रकृति से खिलवाड़ की कीमत

मुख्यमंत्री ने कहा कि सर्दियों के मौसम में बहुत सारे शहर ऐसे हैं, जहां गैस चैंबर जैसी स्थिति बन जाती है। वहां अलर्ट जारी करना पड़ता है कि बुजुर्ग, बीमार और बच्चे घर से बाहर न निकलें, जरूरी हो तो मास्क लगाकर निकलें। आखिर यह स्थिति पैदा ही क्यों हुई? क्योंकि प्रकृति के साथ खिलवाड़ किया गया। अंधाधुंध पेड़ काटे गए, जल दोहन किया गया लेकिन जल संरक्षण के लिए कोई प्रयास नहीं हुआ। तालाबों पर अवैध कब्जे हो गए। अपने स्वार्थ के लिए लोगों ने प्रकृति के साथ जो खिलवाड़ किया है, आज उसकी कीमत विश्व मानवता को चुकानी पड़ रही है। 

 

पर्यावरण अनुकूल एलईडी लाइट से बचे 100 करोड़ रुपए

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में जब डबल इंजन की भाजपा सरकार बनी तब हैलोजन लाइटों को हटाकर उसकी जगह पर्यावरण अनुकूल एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाने का अभियान शुरू किया गया। प्रदेश में 16 लाख एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाई गईं, इससे प्रदेश सरकार को 100 करोड रुपए की बचत हुई।

साथ ही हैलोजन में जलकर मरने वाले कीड़े-मकोड़ों की भयंकर बदबू से भी मुक्ति मिली। सरकार नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है। पीएम सूर्य घर बिजली योजना से लोगों के बिजली बिल आधे हो रहे हैं। ग्रीन एनर्जी का नया स्रोत लोगों को उपलब्ध कराया गया है।

 

उज्जवला योजना ने दी धुएं से मुक्ति

मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम मोदी के विजन से उज्जवला योजना के तहत 10 करोड़ परिवारों को निशुल्क एलपीजी कनेक्शन बांटे गए, जो कांग्रेस सरकार में ब्लैक में मिलते थे। 10 करोड़ परिवारों में माताओं-बहनों को चूल्हे के धुएं से मुक्ति मिली। अकेले उत्तर प्रदेश में 2 करोड़ परिवारों को यह लाभ मिला है। इंटरनेशनल सोलर अलायंस के अध्यक्ष के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने दुनिया से इसके बारे में आह्वान किया है। अयोध्या प्रदेश की पहली सोलर सिटी बनी है। वहां समस्त स्ट्रीट लाइट में सोलर एनर्जी का इस्तेमाल किया जाता है।

 

पौधा लगाकर देखभाल भी करें

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें न सिर्फ पौधे लगाने हैं, बल्कि उनकी उचित देखभाल भी करनी है। जिन किसानों ने अपने खेत में पेड़ लगाए हैं, उन्हें कार्बन क्रेडिट फाइनेंस स्कीम के अंतर्गत पैसा भी प्राप्त होता है। मुख्यमंत्री ने हर व्यक्ति से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का हिस्सा बनने की अपील करते हुए कहा कि अपने पूर्वजों व परिजनों की स्मृति में और परिवार के सदस्यों के नाम से एक पौधा अवश्य लगाएं।

 

’हरित गाथा’ लघु फिल्म और ‘वानिकी कैलेंडर’ का विमोचन

पौधारोपण महायज्ञ 2026 के अवसर पर आयोजित जनसभा के मंच से मुख्यमंत्री ने ‘उत्तर प्रदेश के नौ वर्ष की हरित गाथा’ लघु फिल्म और ‘वानिकी कैलेंडर’ का विमोचन किया। लघु फिल्म में यूपी में पिछले नौ सालों में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों और हासिल उपलब्धियों को दर्शाया गया है, जबकि वानिकी कैलेंडर में वर्ष 2026-27 के लिए वन विभाग की कार्ययोजना का उल्लेख है। 

 

सीएम ने किया पौध वितरण, किसानों को सौंपे प्रमाण-पत्र

कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना की लाभार्थी गीता देवी, मधुरा, इशरावती, शीला, कालिंदी को घर के सामने रोपने के लिए सहजन के पौधे भेंट किए। उन्होंने कार्बन क्रेडिट फाइनेंस योजना के अंतर्गत 700 से अधिक पौधारोपण करने वाले नरपति (कैम्पियरगंज गोरखपुर), 650 से अधिक पौधारोपण करने वाले अशफाक खान (देसही देवरिया),  800 पौधारोपण करने वाली रंजना देवी (हाटा कुशीनगर) और 850 पौधे लगाने के लिए अरविंद कुमार (पडरौना कुशीनगर) को कार्बन क्रेडिट के लिए मिलने वाली राशि का प्रमाण-पत्र सौंपा। 

 

सीएम योगी के मार्गदर्शन में यूपी में बढ़ी हरियाली : वनमंत्री

कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने कहा कि सीएम योगी के मार्गदर्शन में यूपी में हरियाली बढ़ी है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया देहरादून की रिपोर्ट के अनुसार देश में ग्रीनरी वृद्धि के मामले में उत्तर प्रदेश प्रगति करते हुए दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।

आज का पौधारोपण पूर्ण होते ही यूपी में पिछले 10 सालों में पौधारोपण की कुल संख्या 275 करोड़ हो जाएगी। इस बार के पौधारोपण महाभियान में 30 प्रतिशत फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं। गोरखपुर में मुख्यमंत्री द्वारा घोषित वानिकी विश्वविद्यालय के निर्माण की शुरुआत जल्द ही की जाएगी।

 

पीएम मोदी-सीएम योगी पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद संवेदनशील : रविकिशन

इस मौके पर सांसद रविकिशन शुक्ल ने कहा कि पीएम मोदी और सीएम योगी पर्यावरण संरक्षण को लेकर बेहद संवेदनशील हैं। वे सदैव लोगों को पौधारोपण के लिए प्रेरित करते रहते हैं। इसी विजन के अनुरूप पर्यावरण संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री ने एक दिन में 35 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में यूपी का इतना विराट विकास हुआ है, जितना कोई सोच भी नहीं सकता।

 

नौ वर्ष में हुआ सौ वर्ष से अधिक का विकास : प्रदीप शुक्ल

सहजनवा के विधायक प्रदीप शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में सहजनवा विधानसभा का अभूतपूर्व विकास हो रहा है। उन्होंने नौ वर्षों में जितना विकास किया, वह सौ वर्षों में भी नहीं हो पाता। प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील कुमार चौधरी ने भी मुख्यमंत्री का स्वागत किया।

 

इस अवसर पर प्रदेश सरकार के मत्स्य विभाग के मंत्री संजय निषाद, राज्यसभा सदस्य संगीता यादव, एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, श्रीराम चौहान, राजेश त्रिपाठी, विपिन सिंह, डॉ. विमलेश पासवान, महेंद्रपाल सिंह, सरवन निषाद, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, पौधारोपण महायज्ञ के लिए गोरखपुर के नोडल अधिकारी सुहास एलवाई, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय, जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, पूर्व जिलाध्यक्ष युधिष्ठिर सिंह, ब्लॉक प्रमुख दिलीप यादव आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

योगी सरकार का नकली दवा माफिया पर सबसे बड़ा प्रहार, आगरा में जालसाज सिंडिकेट की कमर टूटी

Yogi government's biggest crackdown on spurious drug mafia

– एफएसडीए आयुक्त के नेतृत्व में 15 ड्रग इंस्पेक्टरों की टीम ने 13 फर्मों पर मारे एक साथ छापे, अंतरराज्यीय नेटवर्क का हुआ खुलासा

– सरकारी अस्पतालों की जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी, नकली दवाएं, फर्जी बिलिंग और री-लेबलिंग का संगठित नेटवर्क बेनकाब

– बड़ी कार्रवाई के दौरान 14 संचालकों पर 3 नई एफआईआर, अब तक 58 थोक लाइसेंस निरस्त/निलंबित

– अब तक हुई कार्रवाई में कुल 9 मुकदमे दर्ज और 3.63 करोड़ रुपए की दवाएं जब्त

– एफएसडीए अब अवैध वसूली करने वालों पर भी कस रहा शिकंजा

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर नकली और अवैध दवा कारोबार के खिलाफ चल रहे प्रदेशव्यापी अभियान में उत्तर प्रदेश के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने आगरा में अब तक की सबसे बड़ी और सबसे निर्णायक कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपए के संगठित दवा सिंडिकेट की परतें खोल दी हैं। एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के नेतृत्व में 15 ड्रग इंस्पेक्टरों की विशेष टीमों ने एक साथ कई स्थानों पर छापेमारी कर नकली दवाओं, सरकारी अस्पतालों की जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी, फर्जी बिलिंग, अवैध री-लेबलिंग, फिजीशियन सैंपलों की बिक्री और अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा किया।

कार्रवाई के बाद 14 संचालकों के खिलाफ तीन नई एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई है। इसके साथ ही पूरे अभियान में दर्ज मुकदमों की संख्या 9 और निरस्त अथवा निलंबित थोक लाइसेंसों की संख्या 58 पहुंच गई है।

 

15 ड्रग इंस्पेक्टरों ने एक साथ मारे छापे

आयुक्त डॉ रोशन जैकब के नेतृत्व में गठित 15 औषधि निरीक्षकों की टीमों ने आगरा के कम्बूटोला, मुबारक महल, जूता बाजार (शू मार्केट), कृष्णा कॉम्प्लेक्स, नवबिया मार्केट और कोतवाली क्षेत्र में एक साथ कार्रवाई की। जिन 13 फर्मों पर छापेमारी हुई उनमें मोहन ट्रेडर्स (कम्बूटोला), मनी मेडिकल (मुबारक महल), नीलकंठ (कृष्णा कॉम्प्लेक्स), वंश फार्मा (कम्बूटोला), प्रशांत मेडिकल (कम्बूटोला), पोरवाल मेडकेयर (शू मार्केट), एपी फार्मा, एचएमजी ड्रग हाउस (मुबारक महल), डॉली ड्रग हाउस (कम्बूटोला), मनु फार्मा (कोतवाली के सामने), आरडीएम फार्मास्युटिकल्स (नवबिया मार्केट), इनाया फार्मा (कम्बूटोला) और नूर फार्मा (कम्बूटोला) शामिल हैं।

कार्रवाई के दौरान मोहन ट्रेडर्स और मनी मेडिकल के परिसरों को पूरी तरह सील कर दिया गया, जबकि नीलकंठ, कृष्णा कॉम्प्लेक्स स्थित प्रतिष्ठान और मनु फार्मा पर औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम की धारा 22(1)(d) के तहत रोक लगा दी गई। टीम ने मौके से 35 संदिग्ध दवाओं के नमूने लेकर जांच के लिए लैब भेज दिए।

 

विभोर मेडिकल एजेंसी से खुला नकली दवाओं का अंतरराज्यीय नेटवर्क

एफएसडीए की ताजा जांच टोरेंट फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड की Chymoral Forte और Shelcal के नकली होने संबंधी शिकायत से शुरू हुई। 7 नवंबर 2025 को अंशिका फार्मा के मालिक मनोज गुप्ता की जांच में पता चला कि उन्होंने Chymoral Forte की खेप विभोर मेडिकल एजेंसी से खरीदकर पाल ब्रदर्स (कोलकाता) को बेची थी। विभोर मेडिकल एजेंसी के प्रो. संजीव कुमार गुप्ता के यहां जांच में खरीद के बिल फर्जी मिले।

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उन्होंने दवाएं गुप्ता मेडिकल एजेंसी (गोरखपुर) और हर्षित ट्रेडर्स (आगरा) से खरीदने का दावा किया, लेकिन दोनों फर्मों ने इससे इनकार कर दिया। वहीं वरदान मेडिकल एजेंसी में “ESI SUPPLY NOT FOR SALE” अंकित दवाएं मिलीं और लैब जांच में Chymoral Forte अधोमानक तथा ACILOC नकली पाई गई, जिसकी टोरेंट फार्मा ने भी पुष्टि की। पूछताछ में अंकुर अग्रवाल ने स्वीकार किया कि उसने नकली दवाएं संजीव कुमार गुप्ता से बिना वैध बिल के खरीदी थीं।

जांच में विभोर मेडिकल एजेंसी, वरदान मेडिकल एजेंसी, हर्षित ट्रेडर्स, गुप्ता मेडिकल एजेंसी और पाल ब्रदर्स का अंतरराज्यीय सिंडिकेट सामने आने पर संजीव कुमार गुप्ता, अंकुर अग्रवाल, प्रियंका बंसल, अरुण कुमार गुप्ता और पाल ब्रदर्स के खिलाफ बीएनएस की धाराओं 276, 277, 278, 316 और 318 में एफआईआर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

 

अस्पताल की दवाओं की री-लेबलिंग से लेकर फर्जी बिलिंग तक, कई परतों में खुला सिंडिकेट

एफएसडीए की जांच में अस्पताल और सरकारी आपूर्ति की जीवनरक्षक दवाओं की री-लेबलिंग, फर्जी बिलिंग और नकली दवाओं के संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ। 21 मई को युग फार्मा के प्रो. सचिन गुप्ता के यहां बिना कोल्ड-चेन रखे इंसुलिन इंजेक्शन और री-लेबलिंग मिली। पूछताछ में दवाओं की सप्लाई शारदा फार्मा के शिवम गुप्ता और आरएमडी फार्मा के राजेश गुप्ता तक पहुंची, जिसके बाद तीनों फर्में सील कर दी गईं। बाद में शारदा फार्मा के सीसीटीवी में नबील खान और सोनू बघेल संदिग्ध दवाएं हटाते दिखे।

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एसटीएफ गाजियाबाद की पूछताछ में खुलासा हुआ कि वे मोहित गुप्ता (महादेव फार्मा) से अस्पताल व सरकारी आपूर्ति की दवाएं बिना बिल खरीदकर उन पर लगी 'Not for Sale' पहचान हटाकर फर्जी लेबल और नई एमआरपी के साथ बाजार में बेचते थे। इस मामले में सचिन गुप्ता, शिवम गुप्ता, नितिन गुप्ता, राजेश गुप्ता, मोहित गुप्ता और हितेन्द्र अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर की प्रक्रिया शुरू हुई। वहीं 1 से 3 जुलाई की जांच में वी.ए. मेडिकोज में Jardiance, Telma-H, Thyrox और Gluconorm PG-2 जैसी दवाओं की री-लेबलिंग, नकली Telma-H और फर्जी खरीद बिल मिले।

शोभित अग्रवाल ने दवाएं लाइसेंस निरस्त हो चुके हर्षित ट्रेडर्स से लेने की बात स्वीकार की, जबकि जांच में वरदान मेडिकल एजेंसी के पुराने बिलों से करीब 1.88 करोड़ रुपए की फर्जी बिलिंग, अंकुर अग्रवाल द्वारा संजीव गुप्ता (विभोर मेडिकल एजेंसी) से बिना बिल नकली दवाएं खरीदने और सबूत मिटाने के प्रयास का खुलासा हुआ। साथ ही मोहित बंसल (रुद्रा एंटरप्राइजेज) और प्रवीण अग्रवाल (श्री भगवती मेडिकल एजेंसी, मथुरा) द्वारा फर्जी बिल, UP-80 EL-0069 वाहन व ऑटो-रिक्शा के जरिए नकली दवाओं को वैध दिखाने का खेल सामने आया।

इसके आधार पर वी.ए. मेडिकोज, शोभित अग्रवाल, प्रमोद अग्रवाल, अंकुर अग्रवाल, संजीव गुप्ता, मोहित बंसल और प्रवीण अग्रवाल समेत संबंधित आरोपियों के खिलाफ संगठित अपराध की धाराओं में एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई शुरू कर दी गई।

 

 3.63 करोड़ रुपए की अवैध दवाएं जब्त, कई राज्यों तक फैले नेटवर्क की परतें खुलीं

एफएसडीए आयुक्त डॉ रोशन जैकब के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आगरा में नकली और अवैध दवा कारोबार के खिलाफ मई 2026 से लगातार चलाए जा रहे विशेष अभियान में अब तक 3.63 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की नकली, अवैध तथा सरकारी और डिफेंस सप्लाई की दवाएं जब्त की जा चुकी हैं। यह अभियान केवल छापेमारी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सिंडिकेट की आर्थिक और आपराधिक श्रृंखला को तोड़ने पर केंद्रित है।

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उन्होंने बताया कि पूरे अभियान के दौरान अनियमितताओं और अवैध कारोबार में संलिप्तता पाए जाने पर अब तक 58 थोक दवा फर्मों के लाइसेंस निरस्त अथवा निलंबित किए जा चुके हैं। इस सिंडिकेट के खिलाफ पहले ही 6 नामजद एफआईआर दर्ज की जा चुकी थीं। अब 10 जुलाई की कार्रवाई के आधार पर तीन नई एफआईआर दर्ज कराने के लिए आगरा के कोतवाली फव्वारा थाने में तहरीर दी गई है। इसके साथ ही पूरे अभियान में दर्ज मुकदमों की संख्या बढ़कर 9 हो जाएगी।

आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नकली दवाओं, अवैध री-लेबलिंग, फिजिशियन सैंपलों की कालाबाजारी और अंतरजनपदीय मूवमेंट पर लगातार निगरानी रखी जाए। इसके अलावा विभाग को ड्रग एसोसिएशनों द्वारा कुछ दवा व्यापारियों से कथित अवैध वसूली की शिकायतें भी मिली हैं। आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि जांच में किसी व्यापारी के आर्थिक शोषण की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ एक्सटॉर्शन का मुकदमा दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

योगी सरकार में पर्यावरणीय बदलाव की नई इबारत, जल से जंगल तक विकास की नई पहचान

new chapter of environmental change in Yogi government

– जल, जंगल, जमीन और जैव विविधता संरक्षण में उत्तर प्रदेश बना मिसाल

– सुरक्षित पेयजल और स्वच्छ नदियों से बदली पर्यावरण संरक्षण की तस्वीर

– वृक्षारोपण, वेटलैंड संरक्षण और अमृत सरोवर से मजबूत हुआ हरित उत्तर प्रदेश

– बुंदेलखंड जल क्रांति, स्वच्छ हवा और नगर वनों ने बढ़ाई पर्यावरणीय मजबूती

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश ने पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन का नया अध्याय लिखा है। पिछले नौ वर्षों में योगी सरकार ने सुरक्षित पेयजल, नदियों के पुनर्जीवन, वनीकरण, आर्द्रभूमि संरक्षण, जल संरक्षण, स्वच्छ वायु, वन्यजीव सुरक्षा और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में अनेक महत्वाकांक्षी योजनाएं लागू कर प्रदेश की पर्यावरणीय तस्वीर बदलने का प्रयास किया है। इसका उद्देश्य केवल प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण नहीं, बल्कि लोगों के जीवन स्तर, स्वास्थ्य और आजीविका को भी बेहतर बनाना रहा है।
 

आर्सेनिक-फ्लोराइड मुक्त पेयजल से लाखों लोगों को मिला सुरक्षित जीवन

बलिया, गाजीपुर, मऊ, वाराणसी, चंदौली, सोनभद्र सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पहले भूजल प्राकृतिक रूप से आर्सेनिक और फ्लोराइड से प्रदूषित था। लाखों लोग असुरक्षित हैंडपंपों का पानी पीने को मजबूर थे, जिससे आर्सेनिकोसिस, कंकाल फ्लोरोसिस, श्वसन संबंधी बीमारियों और कैंसर जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ गया था।

योगी सरकार ने जल जीवन मिशन और राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन के माध्यम से सतही जल आधारित पाइप पेयजल योजनाओं का व्यापक विस्तार किया। गहरे जलस्रोतो के उपयोग तथा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से हजारों गांवों को सुरक्षित नल जल उपलब्ध कराया गया, जिससे आर्सेनिक और फ्लोराइड जनित बीमारियों के खतरे में उल्लेखनीय कमी आई है। 
 

नमामि गंगे और 'एक जिला-एक नदी' अभियान से नदियों में लौटी स्वच्छता

नमामि गंगे मिशन के अंतर्गत गंगा नदी को स्वच्छ बनाने की दिशा में बड़े स्तर पर कार्य हुए हैं। कानपुर के सीसामऊ नाले से प्रतिदिन गंगा में गिरने वाले लगभग 140 एमएलडी गंदे पानी को रोककर आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों तक पहुंचाया गया।

वाराणसी, प्रयागराज और कानपुर सहित अनेक शहरों में सीवेज उपचार क्षमता बढ़ाई गई तथा औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण को मजबूत किया गया, जिससे गंगा जल की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। सरकार के एक जिला एक नदी अभियान ने गोमती, हिंडन, तमसा, सोत और अन्य छोटी नदियों के पुनर्जीवन को नई गति दी।  

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240 करोड़ से अधिक पौधरोपण से बढ़ा हरित आवरण

अतिक्रमण हटाने, गाद निकालने, सीवरेज नेटवर्क विकसित करने और एसटीपी स्थापित करने से अनेक नदियों का प्राकृतिक प्रवाह फिर से बहाल हुआ। इससे भूजल पुनर्भरण और सिंचाई व्यवस्था को भी मजबूती मिली। वहीं हरित उत्तर प्रदेश के संकल्प के तहत वर्ष 2017 से 2026 के बीच 240 करोड़ से अधिक पौधरोपण कर प्रदेश ने देश में नई पहचान बनाई।

स्थानीय प्रजातियों के पौधों को बढ़ावा देने, नदी किनारे वृक्षारोपण, नगर वन, मियावाकी वन और सैटेलाइट आधारित निगरानी जैसी व्यवस्थाओं ने हरित आवरण बढ़ाने के साथ जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने की क्षमता भी मजबूत की।

 

रामसर वेटलैंड और अमृत सरोवर अभियान से जल संरक्षण को मिली नई ताकत

आर्द्रभूमियों के संरक्षण में भी उल्लेखनीय सफलता मिली है। नवाबगंज, सांडी, समसपुर, सुर सरोवर और सुरहा ताल जैसी प्रमुख वेटलैंड्स का पुनरुद्धार किया गया। सुरहा ताल को भारत के 100वें रामसर स्थल का दर्जा मिलना प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि रही।

इन प्रयासों से प्रवासी पक्षियों के आवास सुरक्षित हुए और जैव विविधता को नई मजबूती मिली। मिशन अमृत सरोवर के तहत लगभग 69 हजार तालाबों और पारंपरिक जल निकायों का पुनर्जीवन किया गया। तालाबों की खुदाई, गाद निकालने, जल भंडारण क्षमता बढ़ाने और रिचार्ज संरचनाओं के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल संरक्षण और सिंचाई की व्यवस्था को नया आधार मिला।

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बुंदेलखंड में जल क्रांति और ऊसर भूमि सुधार से किसानों को मिला नया संबल

बुंदेलखंड जैसे सूखा प्रभावित क्षेत्र में जल संरक्षण को लेकर विशेष अभियान चलाया गया। चेक डैम, तालाबों के पुनरुद्धार, वाटरशेड विकास, सिंचाई परियोजनाओं और केन-बेतवा लिंक परियोजना के माध्यम से जल उपलब्धता बढ़ाने के प्रयास हुए।

इससे खेती को नई मजबूती मिली और पलायन की समस्या में कमी आने की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आए। प्रदेश में ऊसर और क्षारीय भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए वैज्ञानिक भूमि सुधार कार्यक्रम संचालित किए गए। जिप्सम, जल निकासी और आधुनिक मृदा सुधार तकनीकों के माध्यम से लाखों हेक्टेयर अनुपजाऊ भूमि को खेती योग्य बनाया गया, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में सहायता मिली।

 

एयरशेड मॉडल, नगर वन और ग्रीन बेल्ट से स्वच्छ हवा की दिशा में बड़ी पहल

स्वच्छ हवा के लिए सरकार ने एयरशेड आधारित रणनीति अपनाई। जिग-जैग तकनीक वाले ईंट भट्ठों को बढ़ावा दिया गया, औद्योगिक उत्सर्जन की निगरानी को मजबूत किया गया तथा उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबंधन परियोजना (यूपी कैम्प) लागू की गई।

इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन और रियल टाइम एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग जैसे कदमों से वायु प्रदूषण नियंत्रण को नई दिशा मिली। लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद और कानपुर जैसे शहरों में नगर वन, जैव विविधता पार्क और ग्रीन बेल्ट विकसित किए गए। इन पहलों से शहरी हरित क्षेत्र बढ़ा, हीट आइलैंड प्रभाव कम करने में मदद मिली और नागरिकों को बेहतर पर्यावरण उपलब्ध हुआ।

 

दुधवा, रानीपुर और चंद्रप्रभा में वन्यजीव संरक्षण को मिली नई गति

वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में दुधवा लैंडस्केप और तराई क्षेत्र में आवास संरक्षण, हाथी रिजर्व, वन्यजीव गलियारों की बहाली, सोलर फेंसिंग और त्वरित प्रतिक्रिया दलों की स्थापना जैसे कदम उठाए गए। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने में मदद मिली।

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बुंदेलखंड में रानीपुर टाइगर रिजर्व की स्थापना ने जैव विविधता संरक्षण को नई मजबूती दी। वहीं चंद्रप्रभा सहित अन्य वन क्षेत्रों में प्राकृतिक पुनर्जनन, मिट्टी एवं नमी संरक्षण तथा वन बहाली कार्यक्रमों के माध्यम से खराब हो चुके वन क्षेत्रों को पुनर्जीवित किया गया।

 

प्लास्टिक मुक्त तीर्थस्थलों और जैव विविधता संरक्षण से पर्यावरण को मजबूती

अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज जैसे प्रमुख धार्मिक नगरों में सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रभावी रोक लगाने, कचरा प्रबंधन को मजबूत करने और स्वच्छता ढांचे का विस्तार करने से धार्मिक पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण का बेहतर संतुलन स्थापित हुआ।
 

सारस, गंगा डॉल्फिन, मीठे पानी के कछुओं और अन्य दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण के लिए विशेष कार्यक्रम संचालित किए गए। स्वच्छ नदियों, बेहतर आर्द्रभूमि प्रबंधन और आवास संरक्षण के माध्यम से प्रदेश की जैव विविधता को नई ऊर्जा मिली। गोरखपुर में स्थापित जटायु संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र गिद्धों की घटती आबादी को पुनर्जीवित करने की दिशा में देश की महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरा है। आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से संकटग्रस्त गिद्ध प्रजातियों के संरक्षण का कार्य किया जा रहा है।

 

सौर ऊर्जा, जैविक खेती और स्वच्छ ऊर्जा से सतत विकास को बढ़ावा

सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा आधारित पेयजल और सिंचाई योजनाओं का विस्तार कर स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा दिया गया। इससे डीजल पर निर्भरता कम हुई और दूरदराज गांवों में जलापूर्ति अधिक विश्वसनीय बनी। गंगा कॉरिडोर के किनारे जैविक और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित कर रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में कमी लाने तथा नदी प्रदूषण को रोकने की दिशा में भी प्रभावी प्रयास किए गए।

इससे मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिला। इसके साथ ही स्वच्छ भारत मिशन और शहरी विकास कार्यक्रमों के अंतर्गत वैज्ञानिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, कचरे के पृथक्करण, आधुनिक प्रोसेसिंग प्लांट और पुराने लैंडफिल के उपचार जैसे कार्यों को गति दी गई। इससे शहरों में स्वच्छता व्यवस्था मजबूत हुई और पर्यावरणीय प्रदूषण को कम करने में सफलता मिली।

UP Mega Infrastructure Plan: लखनऊ समेत इन 6 जिलों की बदलेगी तस्वीर, आउटर रिंग रोड और नमो भारत कॉरिडोर को मिली मंजूरी

UP Mega Infrastructure Plan: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्टेट कैपिटल रीजन (SCR) में विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर की गाड़ी तेजी से दौड़ाने की तैयारी कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और उसके आसपास के जिले को स्टेट कैपिटल रीजन (SCR) के विकास को बड़ा बढ़ावा मिलने जा रहा है। राज्य सरकार ने एससीआर के लिए कई महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इनमें 300 किलोमीटर लंबी आउटर रिंग रोड, 187 किलोमीटर का नमो भारत कॉरिडोर, 151 किलोमीटर की रिंग रेल और औद्योगिक क्लस्टर जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।

इन योजनाओं के लागू होने से क्षेत्र में परिवहन, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। पूरे एससीआर को कवर करने वाली आउटर रिंग रोड के अलावा कई अहम परियोजनाओं को विभागीय स्तर पर सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। आवास विभाग की दो दिन चली बैठक में इन परियोजनाओं पर सहमति बनी है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने इन प्रस्तावों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी थी। इस पर मुख्यमंत्री की सहमति मिलने के बाद इन पर क्रियांवयन शुरू होगा।

300 KM आउटर रिंग रोड से छह जिलों को फायदा

स्टेट कैपिटल रीजन (SCR) में यूपी के 6 जिले शामिल हैं। उनमें लखनऊ, रायबरेली, बाराबंकी, सीतापुर, उन्नाव और हरदोई शामिल है। प्रस्तावित आउटर रिंग रोड लखनऊ, रायबरेली, बाराबंकी, सीतापुर, उन्नाव और हरदोई को जोड़ते हुए लगभग 300 किलोमीटर लंबी होगी। यह परियोजना राजधानी के ट्रैफिक दबाव को कम करने और आसपास के जिलों के बीच तेज कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएगी।

पहला चरण: 105 किमी सड़क का निर्माण, अनुमानित लागत 2,100 करोड़ रुपये

दूसरा चरण: 195 किमी सड़क, अनुमानित लागत 3,900 करोड़ रुपये

187 KM नमो भारत कॉरिडोर

हाई स्पीड रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) के तहत प्रस्तावित 187 किलोमीटर लंबा नमो भारत कॉरिडोर कानपुर के न्यायगंज से अयोध्या तक बनाया जाएगा। इसकी अनुमानित लागत 32,000 करोड़ रुपये बताई गई है।

दो चरणों में पूरा होगा प्रोजेक्ट

पहला चरण: न्यायगंज से अमौसी तक 67 किलोमीटर

दूसरा चरण: अमौसी से अयोध्या तक

कॉरिडोर पर कुल 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं। इनमें न्यायगंज, उन्नाव, बशीरतगंज, नवाबगंज, बांगर, अमौसी, सुशांत गोल्फ सिटी, जुग्गौर, बरेल, सफदरगंज, भिटरिया और अयोध्या शामिल हैं।

रिंग रेल परियोजना भी होगी विकसित

एससीआर क्षेत्र में 151 किलोमीटर लंबी रिंग रेल परियोजना भी प्रस्तावित है। इससे लखनऊ और आसपास के जिलों के बीच रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

पहला चरण: पहले चरण में 63 किलोमीटर

सेकंड चरण: दूसरे चरण में 88 किलोमीटर रेल लाइन विकसित की जाएगी।

औद्योगिक विकास को मिलेगा बढ़ावा

  • सरकार ने बहराइच (रायबरेली) और संडीला (हरदोई) में औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने की भी मंजूरी दी है।
  • बहराइच क्षेत्र में पहले चरण में 12,500 करोड़ रुपये और दूसरे चरण में 13,500 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है।
  • संडीला में फूड प्रोसेसिंग, केमिकल, पैकेजिंग, टेक्सटाइल और लॉजिस्टिक्स उद्योगों के विकास के लिए हजारों करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।
  • इसके अलावा लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे कॉरिडोर के दोनों ओर आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक विकास किया जाएगा।

300 किमी आउटर रिंग रोड और रिंग रेल

बाराबंकी, सीतापुर, उन्नाव और हरदोई को जोड़ने वाले 300 किलोमीटर लंबे आउटर रिंग रोड को मंजूरी दी गई है:-

पहला चरण: 105 किलोमीटर सड़क का निर्माण 2100 करोड़ रुपये की लागत से होगा।

दूसरा चरण: 195 किलोमीटर हिस्से के लिए 3,900 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

रिंग रेल परियोजना: एससीआर क्षेत्र के चारों ओर 151 किलोमीटर लंबी रिंग रेल परियोजना के पहले चरण में 63 किलोमीटर और दूसरे चरण में 88 किलोमीटर रेल लाइन विकसित की जाएगी।

औद्योगिक निवेश और रोजगार के नए अवसर

इससे जुड़े अहम बैठक में औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए बछरावां को स्पेशल इनवेस्टमेंट रीजन और संडीला को विस्तारित औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने का फैसला लिया गया है:-

बछरावां (रायबरेली): पहले चरण में 12,500 करोड़ और दूसरे चरण में 13,500 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।

संडीला (हरदोई): फूड प्रोसेसिंग, पेय पदार्थ, केमिकल, पैकेजिंग, टेक्सटाइल और लॉजिस्टिक्स उद्योगों के लिए पहले चरण में 6,250 करोड़ और दूसरे चरण में 5,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रीय विकास परियोजनाएं

एक्सप्रेसवे डेवलपमेंट: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे कॉरिडोर के ओरिएंटेड डेवलपमेंट के तहत एक्सप्रेसवे के दोनों ओर आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक विकास किया जाएगा।

लॉजिस्टिक्स हब: दुबग्गा-वरुण विहार क्षेत्र में इंटीग्रेटेड एग्री-ट्रेड, फूड चेन और लॉजिस्टिक्स हब बनेगा।

आध्यात्मिक केंद्र: नैमिषारण्य को आध्यात्मिक-आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करने की 750 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी।

अस्पताल और ट्रांसपोर्ट नगर: सीतापुर में मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल तथा उन्नाव और गोसाईंगंज में नए ट्रांसपोर्ट नगर विकसित करने के प्रस्तावों पर सहमति बनी है।

इन जिलों को होगा सीधा फायदा

लखनऊ

रायबरेली

बाराबंकी

सीतापुर

उन्नाव

हरदोई

क्या होगा असर?

इन परियोजनाओं के पूरा होने से राजधानी क्षेत्र में ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी। यात्रा का समय घटेगा। औद्योगिक निवेश बढ़ेगा और हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। साथ ही लखनऊ और आसपास के जिलों का समग्र आर्थिक और शहरी विकास तेज होने की उम्मीद है।

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CM योगी का ऐलान: भदरसा बनेगा ‘भारत नगर’, मां ज्वाला जी के नाम पर होगी नई नगर पंचायत

CM Yogi Adityanath: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को घोषणा की कि अयोध्या जिले में हाल ही में बनी खिलौनी-सुचितगंज नगर पंचायत का नाम बदलकर ‘मां ज्वाला जी’ के नाम पर रखा जाएगा, जबकि भदरसा नगर का नाम अब ‘भरत नगर’ होगा। बता दें कि उन्होंने यह घोषणा बिकापुर में एक जनसभा को संबोधित करने के दौरान कही।

सीएम योगी ने कहा कि खिलौनी-सुचिंतागंज का नाम बदलने की मांग स्थानीय बीजेपी विधायक अमित सिंह चौहान ने की थी। उन्होंने अनुरोध किया है कि खिलौनी-सुचिंतागंज नगर पंचायत का नाम मां ज्वाला जी के नाम पर रखा जाए। इसलिए मैं घोषणा करता हूं कि इस नगर पंचायत को मां ज्वाला जी नगर पंचायत के नाम से जाना जाए।”

इस दौरान योगी आदित्यनाथ ने यह भी घोषणा की कि भदरसा का नाम अब बदलकर भारत नगर रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि भरत कुंड से जुड़े इलाके की पहचान भी अब भारत नगर के नाम से होगी।

सीएम योगी ने समाजवादी पार्टी पर साधा निशाना

अपने संबोधन के दौरान समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “आपने हाल ही में भदरसा में समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधियों का व्यवहार देखा है। यह उनके असली चरित्र को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भदरसा अब ‘भरत नगर’ के नाम से जाना जाएगा।”

बता दें कि भदरसा 2024 में एक नाबालिग के साथ रेप की घटना के कारण चर्चा में रहा था, जिसमें सपा नेता मोइद खान को गिरफ्तार किया गया था। लेकिन बाद में अदालत ने उन्हें रिहा कर दिया, जबकि कथित अनियमितताओं के कारण उनके शॉपिंग कॉम्प्लेक्स को बुलडोजर से गिरा दिया गया था।

नया नाम राम के छोटे भाई को सम्मान देता है

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि नया नाम भगवान राम के छोटे भाई भरत को सम्मान देता है, जिनकी भक्ति और त्याग हमेशा एक मिसाल बनी रहेगी।

आदित्यनाथ ने कहा, “भरत ने भगवान राम के आदेश का पूरी निष्ठा से पालन करते हुए 14 साल भरत कुंड के पास बिताए, जबकि भगवान राम की ‘पादुकाएं’ प्रतीकात्मक रूप से अयोध्या पर शासन कर रही थीं। दुनिया में कहीं भी भरत जैसा भाई मिलना मुश्किल है।”

उन्होंने कहा कि अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत को पूरे देश में पहचाना जाता है और बताया कि नया नाम ‘भरत नगर’ अब नगर पंचायत के तौर पर और विकसित किया जाएगा।

वहीं, इससे पहले 6 जुलाई को उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने घोषणा की थी कि शाहजहांपुर की जलालाबाद तहसील का नाम बदलकर भगवान परशुराम पुरी कर दिया जाएगा। इसके अलावा जून में, आदित्यनाथ ने घोषणा की थी कि कुशीनगर के फाजिल नगर का नाम पावागढ़ रखा जाएगा। बता दें कि इन सबसे पहले इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज और फैजाबाद जिले का नाम बदलकर अयोध्या किया जा चुका है।

432 करोड़ की परियोजनाओं का किया उद्घाटन

बता दें कि योगी आदित्यनाथ बीकापुर में 432 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 217 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने सहावल ब्लॉक में उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री मुन्ना सिंह चौहान की प्रतिमा का भी अनावरण किया।

अपने भाषण में स्थानीय जन प्रतिनिधियों की तारीफ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सक्रिय विधायकों ने बिकापुर, मिल्कीपुर, रुदौली और गोसाईंगंज सहित पूरे अयोध्या जिले में विकास की गति को तेज किया है।

एक दिन पहले हुई भारी बारिश का जिक्र करते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि उन्हें पक्का नहीं था कि कार्यक्रम हो पाएगा या नहीं, लेकिन खराब मौसम के बावजूद लोगों की भारी संख्या मौजूदगी एक गर्व की बात है। उन्होंने कहा, “बारिश के बावजूद लोगों में जो उत्साह दिखा, वह अयोध्या की भावना को दर्शाता है।”

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यूपी में 10 हजार युवाओं की होगी भर्ती, प्रोजेक्ट गंगा से गांव में होगी 20 हजार से एक लाख तक की इनकम, जानिए पूरी स्कीम

Project Ganga Scheme Explained: उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों की तस्वीर बदलने और गांवों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए योगी आदित्यनाथ की सरकार ने एक बड़ी पहल की है। राज्य सरकार एक महत्वाकांक्षी योजना प्रोजेक्ट गंगा लेकर आ रही है। सरकार का दावा है कि प्रोजेक्ट गंगा उत्तर प्रदेश के ग्रामीण डिजिटल भविष्य की आधारशिला बनने जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की 57000 ग्राम पंचायतों, गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों तक हाई-स्पीड फाइबर ब्रॉडबैंड इंटरनेट पहुंचाकर डिजिटल असमानता को पूरी तरह खत्म करना है।

इस परियोजना के जरिए गांवों को शहरों जैसी आधुनिक डिजिटल सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, ई-गवर्नेस, स्मार्ट कृषि, डिजिटल भुगतान और रोजगार के नए अवसरों का द्वार खुलेगा। अब ग्रामीणों को सरकारी सेवाओं, बैंकिंग और विभिन्न प्रमाणपत्रों के लिए शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इस योजना के तहत 8 से 10 हजार युवाओं की भर्ती की जाएगी। इनकी मासिक आमदनी 1 लाख रुपये तक हो सकती है।

प्रोजेक्ट गंगा की प्रमुख विशेषताएं और बड़े माइलस्टोन

प्रोजेक्ट गंगा के सभी प्रमुख माइलस्टोन पूरे कर लिए गए हैं और सरकार व पार्टनर्स ने इसकी तैयारियों को तेज कर दिया है। इस योजना की मुख्य बातें यहां नीचे दी गई हैं-

10 हजार युवाओं को रोजगार: डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर के रूप में 8000 से 10000 युवाओं की भर्ती की जाएगी। युवाओं को अपने ही गांव में डिजिटल सेवा केंद्र स्थापित करने का सुनहरा अवसर मिलेगा।

₹20 हजार से ₹1 लाख तक की इनकम: शुरुआत में डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर के रूप में काम करने वाले युवाओं की मासिक आय करीब 20000 रुपये होगी। जैसे-जैसे ग्राहकों की संख्या बढ़ेगी यह आमदनी बढ़कर 1 लाख रुपये प्रतिमाह तक पहुंच सकती है।

महिलाओं की 50% भागीदारी: महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए गंगा प्रोजेक्ट के अंतर्गत बनने वाले डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी महिलाओं की सुनिश्चित की गई है। इससे ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकेंगी।

ब्याज मुक्त लोन: अपने गांव या घर में इंटरनेट उद्यम शुरू करने के लिए सरकार मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत युवाओं को 5 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त लोन उपलब्ध करा रही है।

पहले चरण में 21 जिले शामिल, नेपाल सीमा को प्राथमिकता

यह परियोजना चरणबद्ध तरीके से पूरे उत्तर प्रदेश में लागू की जाएगी। योजना के पहले चरण में राज्य के 21 जिलों को शामिल किया गया है। इसमें नेपाल सीमा से सटे श्रावस्ती, बहराइच और बलरामपुर जैसे सीमावर्ती जिलों को प्राथमिकता दी जाएगी। अगले 2 से 3 वर्षों में इस परियोजना का विस्तार पूरे उत्तर प्रदेश में कर दिया जाएगा। इस योजना से प्रदेश की सभी 57 हजार ग्राम पंचायतों और करीब 20 लाख परिवारों को सीधे तौर पर डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ा जाएगा। इसके माध्यम से पूरे प्रदेश में 1 लाख से अधिक रोजगार सृजन की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है।

गांवों में रुकगा पलायन, मिलेंगे फ्रीलांसिंग और रिमोट वर्क के अवसर

हाई-स्पीड इंटरनेट और फ्री वाई-फाई की उपलब्धता से ग्रामीण यूपी में डिजिटल क्रांति आएगी। इससे युवाओं को बड़े फायदे मिलेंगे। गांवों में ही ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी होने से युवाओं को फ्रीलांसिंग, रिमोट वर्क, ऑनलाइन वोकेशनल ट्रेनिंग और डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं मिलेंगी। हाई-स्पीड इंटरनेट की मदद से अब गांवों के युवाओं को कोडिंग सीखने, फ्रीलांसिंग करने या अपना खुद का टेक-स्टार्टअप शुरू करने के लिए दिल्ली या नोएडा जैसे बड़े शहरों में पलायन नहीं करना पड़ेगा। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को आसानी से जोड़ने के लिए सरकार बेहद किफायती दरों पर इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराएगी।

साइबर सिक्योरिटी और स्मार्ट कनेक्टिविटी पर विशेष फोकस

इस प्रोजेक्ट का टारगेट सिर्फ इंटरनेट पहुंचाना ही नहीं है बल्कि गांवों को भविष्य की डिजिटल तकनीकों के लिए तैयार करना है। योजना के तहत सीसीटीवी आधारित सुरक्षा समाधान, साइबर सिक्योरिटी सेवाएं और विभिन्न संस्थानों की डिजिटल कनेक्टिविटी को बेहद मजबूत किया जाएगा। साइबर सुरक्षा, सीसीटीवी और स्मार्ट कनेक्टिविटी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि ग्रामीण डेटा और परिसर पूरी तरह सुरक्षित रहें।

हिंदुजा समूह की कंपनी है नॉलेज पार्टनर

इस विशाल और महत्वाकांक्षी डिजिटल परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए सरकार ने मजबूत साझेदारी की है। दिग्गज हिंदुजा समूह की ब्रॉडबैंड इकाई वनओटीटी इंटरटेनमेंट लिमिटेड इस पूरे प्रोजेक्ट में नॉलेज पार्टनर और इम्प्लीमेंटेशन एनैबलर के रूप में शामिल है।

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CM योगी का तंज, सपा अध्यक्ष भी भगवा पहनकर कांवड़ यात्रा में शामिल होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं

Chief Minister Yogi Adityanath News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में अब धार्मिक आस्था का सम्मान किया जा रहा है। अयोध्या से सरयू का जल लेकर भदेश्वरनाथ धाम जाने वाले कांवड़ यात्रियों पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की जाती है, जबकि पहले कांवड़ यात्रा और अन्य धार्मिक आयोजनों पर रोक लगाई जाती थी। आज श्रद्धालुओं का उत्साह और आस्था देखकर लगता है कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष भी भगवा वस्त्र पहनकर कांवड़ यात्रा में शामिल होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। विपक्ष को हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ाने, जय श्रीराम बोलने वालों पर कार्रवाई कराने, परशुरामपुर दंगे और धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाने वाली घटनाओं के लिए जनता से माफी मांगनी चाहिए।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को बस्ती के हर्रैया व कप्तानगंज विधानसभा क्षेत्र में 504 करोड़ रुपए से अधिक लागत की 77 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/ शिलान्यास किया। इसके अलावा विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाणपत्र/ स्वीकृतिपत्र और सहायता सामग्री का वितरित किया।

सपा के जिला अध्यक्ष का सीएम योगी ने सुनाया किस्सा

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले सरकारी धन कब्रिस्तानों की बाउंड्रीवाल बनाने और अवैध कब्जों पर खर्च होता था, जबकि आज वही धन धार्मिक स्थलों के पुनरुद्धार और विकास में लगाया जा रहा है। उस समय वक्फ बोर्ड के नाम पर गरीबों, दलितों और वंचितों की जमीनों पर कब्जे किए जाते थे और समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी तथा कांग्रेस के शासन में यह आम बात थी। एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जब वह गोरखपुर के सांसद थे, तब समाजवादी पार्टी के एक जिला अध्यक्ष स्वयं उनके पास शिकायत लेकर आए थे कि उनके घर के पास कब्रिस्तान के नाम पर जबरन कब्जा किया जा रहा है। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को भेजकर कब्जा हटवाया और उनकी जमीन बचाई। उस समय सपा सरकार को केवल कब्रिस्तान दिखाई देता था, आम जनता नहीं।

सपा के शासन में शिक्षा व्यवस्था नकल संस्कृति की शिकार थी

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले विकास योजनाएं कागजों तक सीमित रहती थीं, जबकि आज शिलान्यास और लोकार्पण की परियोजनाएं धरातल पर दिखाई देती हैं। उन्होंने हर्रैया में बन रहे मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां प्री-प्राइमरी से 12वीं तक आधुनिक शिक्षा एक ही परिसर में उपलब्ध होगी। प्रत्येक विद्यालय पर 27 से 30 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जहां स्मार्ट क्लास, आधुनिक भवन, फर्नीचर और सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

 

समाजवादी पार्टी के शासन में शिक्षा व्यवस्था नकल संस्कृति की शिकार थी और युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो गया था। किसानों को सुविधाएं नहीं मिलती थीं, गरीबों को योजनाओं का लाभ नहीं मिलता था और बिजली व्यवस्था इतनी खराब थी कि बस्ती में लोग बिजली के तारों पर कपड़े सुखाते थे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जनता बिजली संकट से जूझ रही थी जबकि सैफई में फिल्मी कलाकारों के कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे।

राम मंदिर को लेकर विपक्ष कहता था कि खून की नदियां बहेंगी

मुख्यमंत्री ने कहा कि हनुमानगढ़ी की पवित्र सीढ़ियों पर नमाज पढ़वाने का काम इन्हीं लोगों ने किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों ने हर प्रमुख धर्मस्थल को विवादित बनाने का प्रयास किया और अयोध्या में भी लगातार विवाद खड़ा करने की राजनीति की। एक समय ऐसा था जब अयोध्या में कोई जय श्रीराम का उद्घोष कर देता था तो उसके खिलाफ लाठी और गोली चलती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर निर्माण का विरोध करने वाले कहते थे कि यदि मंदिर बना तो खून की नदियां बहेंगी। लेकिन हमने कहा था कि एक मच्छर भी नहीं मरेगा और आज पूरा देश देख रहा है कि राम मंदिर का भव्य निर्माण हुआ, प्राण प्रतिष्ठा भी संपन्न हुई और कहीं कोई अशांति नहीं हुई। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को कोई नहीं रोक पाया और यह करोड़ों रामभक्तों की आस्था, विश्वास और संकल्प की जीत है।

सीएम ने दुर्योधन के शासन से की सपा सरकार की तुलना  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में प्रदेश में यह कहावत प्रचलित हो गई थी, देख सपाई, बिटिया घबराई। उस समय महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा खतरे में थी और कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी थी। जब सरकार ही बहन-बेटियों की सुरक्षा के लिए खतरा बन जाए तो उसकी तुलना दुर्योधन के शासन से ही की जा सकती है। पहले बस्ती सहित प्रदेश में दुर्गा पूजा, होली, रामनवमी जैसे पर्वों पर दंगे होते थे। परशुरामपुर दंगे का उल्लेख करते हुए कहा कि दलितों और गरीबों की बस्तियां जला दी गईं, लेकिन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। उस समय वे गोरखपुर से आकर पीड़ितों के बीच उनका दर्द बांटने आए थे। उन्होंने दावा किया कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में कोई बड़ा सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ और सभी त्योहार शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुए हैं। अब अपराधी कानून से डरते हैं।

करीब 1500 मंदिरों का पुनरुद्धार कराया

सीएम योगी ने कहा कि मखौड़ा धाम वही पावन भूमि है, जहां महाराजा दशरथ ने पुत्रेष्टि यज्ञ किया था और उसके फलस्वरूप भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अवतार लिया। मखौड़ा धाम, बाबा भदेश्वरनाथ धाम, तपसी धाम तथा महान साहित्यकार आचार्य रामचंद्र शुक्ल की जन्मस्थली इस क्षेत्र की गौरवशाली पहचान हैं। जनता जब अच्छे जनप्रतिनिधियों का चुनाव करती है, तभी विकास धरातल पर दिखाई देता है। मखौड़ा धाम, भदेश्वरनाथ धाम और तपसी धाम का तेजी से विकास कराया जा रहा है। कर्ण मंदिर विवाद का समाधान होने के बाद वहां भी सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू किया जा रहा है। 

 

सीएम योगी ने कहा कि 84 कोसी परिक्रमा का मार्ग मखौड़ा धाम से शुरू होता है और इसे श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ अयोध्या रिंग रोड के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। योगी ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की सरकारें 84 कोसी, 14 कोसी और पंचकोसी परिक्रमा तक रोकती थीं, जबकि भाजपा सरकार धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए तीर्थ स्थलों का विकास कर रही है। प्रदेश में लगभग 1500 मंदिरों का पुनरुद्धार कराया जा चुका है और सरकार बदलने के साथ परिणाम भी बदल गए हैं। भाजपा सरकार विरासत और विकास को साथ लेकर चल रही है।

 

विकसित भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को पूरा करने के लिए विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित बस्ती का निर्माण किया जा रहा है। बस्ती में मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, कृषि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, मखौड़ा धाम और भदेश्वरनाथ धाम सहित अनेक विकास परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि हर्रैया और बस्ती में पिछले नौ वर्षों में जितना विकास हुआ, उतना आजादी के बाद कभी नहीं हुआ।

 

इस अवसर पर प्रदेश सरकार में मंत्री सूर्य प्रताप शाही, विधायक अजय सिंह, क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय, जिला अध्यक्ष विवेकानंद मिश्र, विधायक दूध राम, विधान परिषद सदस्य सुभाष यदुवंश, जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चौधरी, गो सेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश शुक्ल, पूर्व विधायक चंद्र प्रकाश शुक्ला, दयाराम चौधरी, रवि सोनकर आदि मौजूद रहे।