दक्षिण चीन सागर पर 2016 के अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता फैसले की 10वीं वर्षगांठ पर जापान समेत 14 देशों द्वारा चीन के समुद्री दावों को खारिज किए जाने के बाद बीजिंग ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। चीन ने रविवार को बीजिंग स्थित जापानी दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया और कहा कि दक्षिण चीन सागर पर उसकी संप्रभुता कभी नहीं बदली है। अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, फिलीपींस, कनाडा, जर्मनी, इटली, न्यूजीलैंड समेत कुल 14 देशों ने संयुक्त बयान जारी कर 12 जुलाई 2016 को द हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायाधिकरण (PCA) के फैसले को अंतिम और कानूनी रूप से बाध्यकारी बताया। बयान में कहा गया कि चीन के ‘नाइन-डैश लाइन’ दावों का संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत कोई कानूनी आधार नहीं है। चीन के विदेश मंत्रालय ने जापान पर क्षेत्रीय मामलों में हस्तक्षेप और दक्षिण चीन सागर में शांति व स्थिरता को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि जापान इस विवाद का पक्षकार नहीं है और उसे इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए। जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने कहा कि चीन द्वारा 2016 के फैसले को अस्वीकार करना विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और अंतरराष्ट्रीय कानून के शासन के विपरीत है। चीन ने इस टिप्पणी को खारिज करते हुए जापान पर ऐतिहासिक विस्तारवाद की मानसिकता का भी आरोप लगाया। इस बीच, 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ ने भी 2016 के फैसले को शांतिपूर्ण विवाद समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय बताया। चीन ने यूरोपीय संघ की टिप्पणी पर भी आपत्ति जताई। चीन लगातार 2016 के मध्यस्थता फैसले को “अवैध, अमान्य और गैर-बाध्यकारी” बताता रहा है। उसका कहना है कि न्यायाधिकरण को इस मामले में अधिकार क्षेत्र प्राप्त नहीं था और दक्षिण चीन सागर पर उसके ऐतिहासिक अधिकार बरकरार हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… जेलेंस्की ने एक साल बाद प्रधानमंत्री स्विरीदेंको को हटाया, पूरी सरकार ने दिया इस्तीफा
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने प्रधानमंत्री यूलिया स्विरीदेंको को महज एक साल के कार्यकाल के बाद बदलने का फैसला किया है। उनकी घोषणा के बाद यूक्रेन के कानून के तहत पूरी सरकार ने इस्तीफा दे दिया। जेलेंस्की ने यह स्पष्ट नहीं किया कि नया प्रधानमंत्री कौन होगा या स्विरीदेंको की नई भूमिका क्या होगी। यूलिया स्विरीदेंको को अमेरिका में यूक्रेन का अगला राजदूत बनाए जाने की भी चर्चा है, हालांकि सरकार की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। राष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों के शीर्ष नेतृत्व में भी बदलाव किए जाएंगे। यूक्रेन के कानून के अनुसार, प्रधानमंत्री का इस्तीफा संसद की मंजूरी के बाद प्रभावी होता है। इसके साथ ही पूरी सरकार स्वतः भंग हो जाती है और नए मंत्रिमंडल के गठन की प्रक्रिया शुरू होती है। यूक्रेनी सांसदों के अनुसार, नए प्रधानमंत्री की दौड़ में पूर्व प्रधानमंत्री एवं मौजूदा ऊर्जा मंत्री डेनिस श्मीहाल, रक्षा मंत्री मिखाइलो फेदोरोव और सरकारी ऊर्जा कंपनी नाफ्टोगाज़ के प्रमुख सेरही कोरेत्स्की के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं। पेरिस के सिनेगॉग के बाहर ‘मिलिट्री-ग्रेड’ हथियार मिलने से हड़कंप: 300 लोगों को निकाला
फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक सिनेगॉग के पास संदिग्ध वाहन से असॉल्ट राइफल और पिस्तौल मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। पुलिस ने एहतियातन करीब 300 लोगों को आसपास के इलाके से सुरक्षित निकाला और राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी अभियोजन कार्यालय (PNAT) ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक, शनिवार शाम एक चोरी का वाहन संदिग्ध अवस्था में मिला। तलाशी के दौरान उसमें से एक असॉल्ट राइफल और एक पिस्तौल बरामद हुई। बम निरोधक दस्ते की जांच में कोई विस्फोटक नहीं मिला। गृह मंत्री लॉरां नुनेज ने बरामद असॉल्ट राइफल को “मिलिट्री-ग्रेड” हथियार बताया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी। सिनेमा, रेस्तरां और अन्य इमारतों से लगभग 300 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। अभी तक किसी संदिग्ध की गिरफ्तारी नहीं हुई है और हमले के संभावित उद्देश्य की जांच जारी है। गाजा युद्ध शुरू होने के बाद से फ्रांस में यहूदी विरोधी घटनाओं में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। गृह मंत्री के अनुसार, इस वर्ष यहूदी समुदाय को निशाना बनाने वाली तीन साजिशों को पहले ही विफल किया जा चुका है। पिछले वर्ष देश में 1,320 यहूदी विरोधी घटनाएं दर्ज हुई थीं। स्पेन के जंगलों में लगी भीषण आग: झुलसी 93 वर्षीय ब्रिटिश महिला की मौत, मृतकों की संख्या 13 हुई
स्पेन के अल्मेरिया प्रांत में लगी भीषण जंगल की आग में झुलसी 93 वर्षीय ब्रिटिश महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके साथ ही इस हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। यह आग गुरुवार को अल्मेरिया प्रांत के लॉस गालार्डोस इलाके में भड़की थी। अब तक 7,000 हेक्टेयर (करीब 17,300 एकड़) से अधिक क्षेत्र जल चुका है। अधिकारियों के मुताबिक यह स्पेन के इतिहास की सबसे घातक जंगल की आग की घटनाओं में से एक है। स्पेन की फोरेंसिक एजेंसी (CID) ने बताया कि दो और लोगों के लापता होने की सूचना मिलने के बाद लापता लोगों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। एजेंसी फ्रांस, ब्रिटेन और बेल्जियम के अधिकारियों के साथ मिलकर लापता लोगों की पहचान और डीएनए मिलान की प्रक्रिया चला रही है। बेल्जियम सरकार का कहना है कि मृतकों में उसके तीन नागरिक भी हो सकते हैं।
अमेरिका ने ईरान पर सीजफायर खत्म होने के बाद तीसरे दौर की एयरस्ट्राइक शुरू कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि अमेरिका ने ईरान के मिसाइल ठिकानों और एयर डिफेंस सिस्टम पर कई हमले किए हैं। इसके अलावा होर्मुज के आसपास मौजूद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की कई बोट को भी निशाना बनाया गया। इससे पहले अमेरिका ने बुधवार और गुरुवार को भी एयरस्ट्राइक की थी।
ईरान की नई चेतावनी
इससे पहले ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद पहली बार संदेश जारी किया। उन्होंने कहा- ‘मैं अपने पिता के बेगुनाह खून का बदला जरूर लूंगा, यही हमारे देश की भी इच्छा है।’
फिर शुरू हुआ हमलों का दौर
रविवार को ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में कई नए मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया। इन हमलों में कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने की बात कही गई। इसके अलावा कतर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से भी हमलों की खबरें सामने आई हैं, जिससे पूरे इलाके में तनाव और बढ़ गया है। ईरान की राजधानी तेहरान का दावा है कि विस्फोटक ड्रोन से कुवैत में पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम, गोला-बारूद के भंडार और अमेरिकी रडार स्टेशन को निशाना बनाया गया। वहीं एक अन्य हमले में बहरीन में अमेरिकी संचार और रडार सुविधाओं पर हमला करने का भी दावा किया गया है।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने यह भी दावा किया है कि उसने जॉर्डन के प्रिंस हसन एयर बेस पर मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इस बीच कतर की सेना ने दावा किया कि उसने देश को निशाना बनाकर दागी गई मिसाइल को बीच रास्ते में ही रोक दिया। वहीं बहरीन में एयर रेड सायरन बजाए गए और लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने भी कहा कि उसका एयर डिफेंस सिस्टम ईरान की ओर से आने वाली मिसाइलों और ड्रोन को रोकने की कार्रवाई कर रहा है। इस दौरान कई जगहों पर धमाकों की आवाजें भी सुनी गईं।
हमले के बाद एक भारतीय लापता
ओमान तट के पास एक व्यापारी जहाज ‘GFS गैलेक्सी’ पर हमला हुआ। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने रविवार को बताया कि इस जहाज पर 11 भारतीय नागरिक सवार थे। इनमें से 10 को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि एक भारतीय अब भी लापता है। भारत ने हमले की कड़ी निंदा की है।

Sheikh Hamad bin Khalifa Al Thani : कतर के 'फादर अमीर' शेख हमद बिन खलीफा अल थानी का रविवार को यानी आज 74 साल की उम्र में निधन हो गया। इसकी घोषणा कतर की सर्वोच्च सरकारी संस्था 'अमीरी दीवान' ने की है। 'फादर अमीर' शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर भारत सरकार ने 13 जुलाई को एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। इस दौरान राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कतर के 'फादर अमीर' शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर दुख जताया है। उन्होंने इसे अत्यंत पीड़ादायक बताया है।
कतर के 'फादर अमीर' शेख हमद बिन खलीफा अल थानी का रविवार को यानी आज 74 साल की उम्र में निधन हो गया। इसकी घोषणा कतर की सर्वोच्च सरकारी संस्था 'अमीरी दीवान' ने की है। 'फादर अमीर' शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर भारत सरकार ने 13 जुलाई को एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। इस दौरान राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कतर के 'फादर अमीर' शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर दुख जताया है। उन्होंने इसे अत्यंत पीड़ादायक बताया है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, हम (भारत) कतर के फादर अमीर, शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हैं। वह एक दूरदर्शी नेता थे, जिनके नेतृत्व में कतर ने विकास और समृद्धि के नए आयाम हासिल किए।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, हम उन्हें एक सच्चे मित्र के रूप में भी याद करते हैं, जिनसे मुझे फरवरी 2024 में अपनी कतर यात्रा के दौरान मिलने का सम्मान प्राप्त हुआ था। शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करते हुए उन्होंने आगे लिखा, मैं कतर के अमीर महामहिम शेख तमीम बिन हमद अल थानी, पूरे शाही परिवार और कतर की जनता के प्रति अपनी हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त करता हूं।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि शेख हमद, कतर के मौजूदा अमीर के पिता थे। संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू के कतर जाने की संभावना है। वे भारत सरकार की ओर से कतर सरकार को शोक संवेदना प्रकट करेंगे। शेख हमद ने 1995 से 2013 तक कतर पर शासन किया। उन्हें देश के आधुनिक विकास का प्रमुख शिल्पकार माना जाता है।
उनके शासनकाल में कतर ने आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की पहचान और प्रभाव काफी बढ़ा। उन्होंने 2013 में सत्ता छोड़ दी और अपने बेटे शेख तमीम बिन हमद अल थानी को सत्ता सौंप दी जो उस समय 33 साल के थे।
अमेरिका ने शनिवार देर रात ईरान पर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, न्यूक्लियर सिटी बुशहर समेत असालुयेह, बंदर-ए-देयर, जास्क और चाबहार के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। ईरानी मीडिया ने इन इलाकों में धमाकों की पुष्टि की है। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट में साइप्रस के झंडे वाले कंटेनर जहाज पर हमले के जवाब में की गई। CENTCOM के मुताबिक, हमले में जहाज में आग लग गई, इंजन क्षतिग्रस्त हुआ और चालक दल का एक सदस्य लापता है। वहीं, ईरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। विदेश मंत्रालय के सलाहकार अली सफारी ने कहा कि अमेरिकी हमलों का जवाब दिया जाएगा। साथ ही ईरान ने ऐलान किया कि अमेरिकी दखल खत्म होने तक होर्मुज स्ट्रेट बंद रहेगा। मिडिल ईस्ट के हालात से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लाग से गुजर जाइए…
India Protest Wrong Map Dhaka Seminar: बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित हुआ। इस सेमीनार में एक ऐसा वाकया हुआ जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। दरअसल भारत के नक्शे के साथ छेड़छाड़ का एक गंभीर मामला सामने आया है। सेमिनार में जम्मू-कश्मीर (J&K) को पाकिस्तान का हिस्सा दिखाए जाने पर वहां मौजूद भारतीय उच्चायोग की सचिव पूजा कुमारी झा ने तुरंत कड़े शब्दों में इस पर अपना विरोध दर्ज कराया।
भारतीय राजनयिक ने मंच से कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है, और इस तरह के गलत नक्शों को बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जा सकता।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद ढाका में ‘बांग्लादेश इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एंड स्ट्रेटेजिक स्टडीज’ (BIISS) द्वारा आयोजित एक विदेश मामलों के सेमिनार के दौरान शुरू हुआ। सेमिनार में बांग्लादेश के पूर्व राजदूत तारिक ए. करीम अपना मुख्य भाषण दे रहे थे। भाषण के दौरान स्क्रीन पर एक स्लाइड दिखाई गई, जिसमें भारत के नक्शे में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को पाकिस्तान के क्षेत्र में दिखाया गया था।
दर्शक दीर्घा में मौजूद भारतीय उच्चायोग की अधिकारी पूजा कुमारी झा ने जैसे ही इस गलत नक्शे को देखा, उन्होंने तुरंत हस्तक्षेप किया। पूजा झा ने कहा, ‘यहां दिखाया गया भारत का नक्शा पूरी तरह गलत है। जम्मू-कश्मीर भारत का एक अभिन्न और अटूट हिस्सा है, और मेरा मानना है कि यहां प्रस्तुत नक्शा सही नहीं है।’
India’s Second Secretary at the @ihcdhaka Puja Jha, objected on the spot after an incorrect map of Jammu & Kashmir as part of Pakistan was displayed during a foreign policy seminar in Bangladesh.
She said that J&K is an integral and inalienable part of India and that the map was… pic.twitter.com/G3MReBRgEZ
— Abhishek Jha (@abhishekjha157) July 10, 2026
पूर्व राजदूत ने दी सफाई
भारत की कड़ी आपत्ति के बाद, पूर्व राजदूत तारिक ए. करीम ने इस पर सफाई देने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि इस नक्शे का इस्तेमाल केवल ‘प्रस्तुतीकरण के उद्देश्य’ से किया गया था और इसका इरादा वास्तविक अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को प्रदर्शित करना या प्रोजेक्ट करना नहीं था।
नेपाल एयरलाइंस भी कर चुकी है ऐसी ही बड़ी गलती
अंतरराष्ट्रीय मंचों या विज्ञापनों में भारत के गलत नक्शे को दिखाए जाने का यह कोई पहला मामला नहीं है। कुछ महीने पहले नेपाल की राष्ट्रीय विमानन कंपनी, नेपाल एयरलाइंस कॉरपोरेशन (NAC) को भी ऐसी ही एक हरकत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी विरोध का सामना करना पड़ा था।
नेपाल एयरलाइंस ने अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर एक प्रमोशनल रूट मैप और विज्ञापन शेयर किया था। इस ग्राफिक में एयरलाइंस ने भारत के केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत के बजाय पाकिस्तान के क्षेत्र के रूप में रंग दिया था।
#BoycottNepalAirlines हुआ था ट्रेंड
यह इमेज सोशल मीडिया पर देखते ही देखते वायरल हो गई थी। भारतीय यूजर्स ने इसे नेपाल एयरलाइंस की ‘नक्शा आक्रामकता’ करार दिया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर #BoycottNepalAirlines ट्रेंड करने लगा था और भारतीय विदेश मंत्रालय से इस पर कड़ा राजनयिक विरोध दर्ज कराने की मांग की गई थी। बाद में नेपाल एयरलाइंस को इस बड़ी चूक के लिए सार्वजनिक रूप से औपचारिक माफी मांगनी पड़ी थी।
Indus Waters Treaty Legal points: भारत और पाकिस्तान के बीच साल 1960 से चले आ रहे सिंधु जल समझौते को लेकर खड़े हुए विवाद के बीच कानूनी मोर्चे पर भारत का पक्ष मजबूत है। इसे लेकर विदेश मंत्रालय (MEA) के पूर्व अतिरिक्त सचिव और कानूनी सलाहकार डॉ. विष्णु दत्त शर्मा ने एक डिटेल्ड लीगल एनालिसिस किया है।
पीटीआई पर मौजूद इस एनालिसिस से साफ है कि अगर पाकिस्तान इस समझौते के नियमों का उल्लंघन कर एकतरफा कोई कदम उठाता है तो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत भारत के पास उसे करारा जवाब देने का एक बड़ा कानूनी ब्रह्मास्त्र मौजूद है। यहां नीचे 15 पॉइंट में समझिए कि इस समझौते का कानूनी ढांचा क्या है और पाकिस्तान इसमें कैसे मुंह की खाएगा-
1- सिंधु नदी प्रणाली का विशाल दायरा
सिंधु नदी लगभग 1800 मील लंबी है। इसकी पश्चिमी सहायक नदियां (काबुल, कुर्रम) 700 मील से अधिक लंबी हैं जबकि पूर्वी सहायक नदियां (झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास, सतलुज) कुल मिलाकर 2800 मील से अधिक लंबी हैं। यह पूरा सिस्टम 450000 वर्ग मील क्षेत्र को कवर करता है। ये इसे दुनिया की सबसे बड़े नदी प्रणालियों में से एक बनाता है। इसका अधिकांश हिस्सा भारत और पाकिस्तान में स्थित है।
2- बंटवारे के बाद विवाद और दिल्ली समझौता
अगस्त 1947 में भारत के विभाजन के साथ ही सिंधु जल विवाद भी पैदा हो गया। दोनों देशों के बीच पानी के नियमन को लेकर पहला समझौता 4 मई 1948 को हुआ। इसे ‘इंटर-डोमिनियन एग्रीमेंट’ या ‘दिल्ली समझौता’ कहा जाता है। इसमें यह माना गया था कि पश्चिम पंजाब (पाकिस्तान) पूर्वी पंजाब (भारत) के पानी पर अधिकार के रूप में कोई दावा नहीं कर सकता। हालांकि पाकिस्तान ने बाद में 23 अगस्त 1950 को इस समझौते को मानने से इनकार कर दिया था।
3- वर्ल्ड बैंक की एंट्री और 1960 की संधि
1951 में टेनेसी वैली अथॉरिटी के पूर्व अध्यक्ष डेविड लिलिएंटथल ने वर्ल्ड बैंक की मदद से दोनों देशों को संयुक्त रूप से सिंधु बेसिन विकसित करने का प्रस्ताव दिया। वर्ल्ड बैंक के तत्कालीन अध्यक्ष यूजीन ब्लैक ने 6 सितंबर 1951 को दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को पत्र लिखकर इसका प्रस्ताव दिया। इसे दोनों ने स्वीकार किया। बेहद उतार-चढ़ाव और टूटने की कगार पर पहुंचने के बावजूद आखिरकार 1960 में इस संधि पर हस्ताक्षर हो सके।
4- संधि की कानूनी संरचना और वर्ल्ड बैंक की भूमिका
सिंधु जल समझौते पर 19 सितंबर 1960 को कराची में हस्ताक्षर किए गए थे। यह 12 जनवरी 1961 को लागू हुआ लेकिन इसे 1 अप्रैल 1960 से ही लागू माना गया। इस संधि में 12 अनुच्छेदों के तहत कुल 79 पैराग्राफ और 8 एनेक्सचर शामिल हैं। वर्ल्ड बैंक ने सिर्फ विशिष्ट अनुच्छेदों (Articles V, X) और एनेक्सचर (F, G, H) के उद्देश्यों के लिए इस पर हस्ताक्षर किए थे।
5- नदियों का आवंटन और कानूनी मिसाल
इस संधि के तहत पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास, सतलुज) का पानी भारत को और पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) का पानी कुछ अपवादों को छोड़कर पाकिस्तान को आवंटित किया गया है। इस दस्तावेज में स्पष्ट लिखा है कि इस संधि की किसी भी बात को कानून का कोई सामान्य सिद्धांत या मिसाल नहीं माना जाएगा।
6- संधि का मुख्य उद्देश्य: सद्भावना और सहयोग
संधि की प्रस्तावना में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि भारत और पाकिस्तान सरकार सिंधु नदी प्रणाली के पानी का पूर्ण और संतोषजनक उपयोग करने की समान इच्छा रखती हैं। इसके तहत दोनों देशों को सद्भावना, मित्रता और सहयोग की भावना के साथ एक-दूसरे के अधिकारों और दायित्वों को तय करना था और भविष्य में उठने वाले किसी भी सवाल का निपटारा करना था।
विवाद निपटारे का त्रि-स्तरीय तंत्र
7- स्थायी सिंधु आयोग
संधि के तहत विवादों और मतभेदों के निपटारे के लिए एक स्थायी सिंधु आयोग का गठन किया गया है। इसमें दोनों देशों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। इसकी भूमिका मुख्य रूप से प्रशासनिक और परामर्शी होती है।
8- संधि में सवाल, मतभेद और विवाद में अंतर
अनुच्छेद IX विवाद निपटान ढांचे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह किसी मुद्दे को तीन श्रेणियों में बांटता है, सवाल, मतभेद और विवाद, किसी भी सवाल की जांच सबसे पहले आयोग करता है। अगर आयोग में सहमति नहीं बनती तो उसे मतभेद माना जाता है। फिर इसे एक निष्पक्ष विशेषज्ञ के पास भेजा जाता है। कोई मुद्दा विवाद तभी बनता है जब वह निष्पक्ष विशेषज्ञ के अधिकार क्षेत्र से बाहर हो या विशेषज्ञ खुद आयोग को इसकी जानकारी दे।
9- मध्यस्थता अदालत के लिए कड़ी शर्तें
कोई भी मतभेद विवाद की श्रेणी में तभी आ सकता है जब आयोग के दोनों कमिश्नर इस पर सहमत हों। जब विवाद खड़ा हो जाता है तो आयोग दोनों सरकारों को रिपोर्ट करता है। इसके बाद मध्यस्थों की मदद ली जा सकती है। किसी मध्यस्थता अदालत का गठन सिर्फ दोनों देशों की आपसी सहमति या बातचीत और मध्यस्थता के पूरी तरह विफल होने के बाद ही किया जा सकता है।
पाकिस्तान क्यों खाएगा मुंह की? भारत का कानूनी पक्ष
10- एकतरफा अदालत जाने का कोई अधिकार नहीं
एनेक्सचर G (मध्यस्थता अदालत) की शुरुआती भाषा बेहद महत्वपूर्ण है। इसमें लिखा है कि, ‘अगर आवश्यकता पैदा होती है तो…’ इसका मतलब यह है कि यह चरण तभी आएगा जब सभी आवश्यक शर्तें पूरी होंगी। कोई भी पक्ष अपनी मर्जी से किसी भी सवाल को सीधे मध्यस्थता अदालत में नहीं घसीट सकता। इसके लिए पहले आपसी बातचीत और निष्पक्ष विशेषज्ञ के चरणों से गुजरना अनिवार्य है।
11- एकतरफा कदम पूरी तरह अवैध
कोई भी कमिश्नर मतभेद को निष्पक्ष विशेषज्ञ के पास ले जाने के लिए एकतरफा पहल तो कर सकता है लेकिन किसी मतभेद को विवाद घोषित करने या मध्यस्थता अदालत की प्रक्रिया को एकतरफा शुरू करने का कोई प्रावधान इस संधि में नहीं है। द्विपक्षीय संधियों में हमेशा आपसी निर्धारण का प्रावधान होता है और यही बात सिंधु जल समझौते पर भी लागू होती है।
12- पाकिस्तान की एकतरफा जिद संधि का उल्लंघन
अगर संधि के नियमों के तहत कोई विवाद आधिकारिक रूप से खड़ा ही नहीं हुआ है और उसके बिना ही पाकिस्तान मध्यस्थता अदालत गठित करने के लिए एकतरफा प्रक्रिया शुरू करता है तो यह संधि का सीधा उल्लंघन माना जाएगा और यह पूरी तरह से अवैध होगा। ऐसे में भारत के पास इसके खिलाफ सुधारात्मक कदम उठाने के कानूनी विकल्प मौजूद हैं।
13- वियना कन्वेंशन का कानूनी आधार
अंतरराष्ट्रीय कानून में जब कोई एक पक्ष संधि के किसी महत्वपूर्ण हिस्से का उल्लंघन करता है तो वियना कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ ट्रीटीज 1969 को जरूरी डॉक्यूमेंट के रूप में देखा जाता है। हालांकि भारत और पाकिस्तान दोनों ही इस कन्वेंशन के पक्षकार नहीं हैं और सिंधु जल समझौता इससे पहले का है लेकिन इसके नियम अंतरराष्ट्रीय प्रथागत कानून को दर्शाते हैं।
14- मटेरियल ब्रीच का नियम
वियना कन्वेंशन का अनुच्छेद 60 संधि के उल्लंघन के परिणामों को स्पष्ट करता है। इसके तहत संधि के उद्देश्य या प्रयोजन को पूरा करने के लिए आवश्यक किसी भी प्रावधान का उल्लंघन करना मटेरियल ब्रीच यानी गंभीर उल्लंघन माना जाता है। यह भारत के लिए एक मजबूत कानूनी आधार तैयार करता है।
15- आतंकवाद के कारण भारत सस्पेंड कर सकता है संधि
डॉ विष्णु दत्त शर्मा के निष्कर्ष के मुताबिक इस पूरी संधि की मूल भावना सद्भावना और मित्रता पर आधारित है। ऐसे में यह दलील दी जा सकती है कि पाकिस्तान द्वारा लगातार सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देना संधि के तहत उसके दायित्वों को पूरा करने में विफलता है। ऐसे में पाकिस्तान की ओर से किया जा रहा यह कृत्य एक मटेरियल ब्रीच का रूप लेता है। इस आधार पर भारत को अंतरराष्ट्रीय प्रथागत कानून के तहत यह पूरा अधिकार है कि वह सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दे। अगर पाकिस्तान जरूरी प्रक्रियाओं को दरकिनार कर भारत को एकतरफा मध्यस्थता अदालत में खींचने की कोशिश करता है तो वह खुद अपनी ही चाल में फंसकर मुंह की खाएगा।
Indonesia’s highest civilian honour- Bintang Adipurna: इंडोनेशिया के आधिकारिक दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बहुत बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिला है। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने मंगलवार को घोषणा की कि इंडोनेशिया ने पीएम नरेंद्र मोदी को रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया के सर्वोच्च सम्मान बिंतंग आदिपूर्ण (Bintang Adipurna) से सम्मानित किया है। यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रधानमंत्री मोदी को दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों और जुड़ाव के लिए दिया गया है। इस ऐतिहासिक सम्मान के साथ ही भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा, तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में कई बड़े और दूरगामी समझौतों पर भी मुहर लगी है।
क्या है Bintang Adipurna सम्मान? जानें इसका इतिहास और क्यों दिया जाता है
एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक Bintang Republik Indonesia (स्टार ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया) यहां का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। इसे रिपब्लिक और वहां के लोगों के प्रति उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए नागरिकों और सैन्य कर्मियों दोनों को दिया जाता है। इस सर्वोच्च सम्मान को आधिकारिक तौर पर साल 1959 में स्थापित किया गया था।
क्यों दिया जाता है: यह इंडोनेशिया गणराज्य द्वारा प्रदान किए जाने वाले नागरिक और सैन्य सम्मान का सर्वोच्च शिखर है। यह प्रतिष्ठित सम्मान उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने इंडोनेशियाई राष्ट्र की अखंडता, निरंतरता, व्यवहार्यता और समृद्धि को सुरक्षित रखने के लिए असाधारण सेवा, समर्पण और महानता का प्रदर्शन किया हो।
पीएम मोदी ने जताया आभार
जकार्ता पहुंचने पर मिले बेहद गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने जकार्ता के राष्ट्रपति भवन इस्ताना मरदेका में अपनी अगवानी की कुछ झलकियां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी साझा कीं। पीएम मोदी ने X पर लिखा कि इस्ताना मरदेका में गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए धन्यवाद!
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस दौरे को लेकर कहा कि यह यात्रा भारत-इंडोनेशिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। विदेश मंत्रालय ने X पर एक पोस्ट में कहा कि यह यात्रा प्राथमिक क्षेत्रों में सहयोग के नए रास्ते खोलेगी, साथ ही दोनों देशों को बांधने वाले गहरे विश्वास, साझा मूल्यों और स्थायी मित्रता को और मजबूत करेगी।
इस दौरे से निकलेंगे बड़े नतीजे, इन 5 बड़े समझौतों पर लगी मुहर
एएनआई को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पीएम मोदी की इस इंडोनेशिया यात्रा के बेहद बड़े और ऐतिहासिक परिणाम सामने आने वाले हैं:
1- भारत के इलेक्शन मॉडल को मिला सपोर्ट
भारत के चुनाव प्रबंधन मॉडल को यहां एक बड़ा सपोर्ट हासिल हुआ है। इसी क्रम में भारत अब इंडोनेशिया की खास जरूरतों के मुताबिक वहां के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) डेवलप करने में मदद करेगा।
2- भारतीय अस्त्र (Astra) मिसाइल खरीदेगा इंडोनेशिया
ऑपरेशन सिंदूर में भारत की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल क्षमता की अचूक सफलता साबित होने के बाद इंडोनेशिया ने अब भारत की अस्त्र मिसाइलों को आयात करने का बड़ा फैसला किया है। इसके साथ ही इंडोनेशिया अपने ब्रह्मोस मिसाइल के इन्वेंट्री बेस को भी बढ़ा रहा है। इस क्रम में भारत इंडोनेशिया को और अधिक मिसाइल बैटरियों के साथ सहयोग करेगा।
3- क्रिटिकल मिनरल सप्लाय चेन और स्टील में निवेश
क्रिटिकल मिनरल की सप्लाय चेन को मजबूत करने के लिए भारत अब इंडोनेशिया में स्टील, निकेल और रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स के निर्माण में बड़ा निवेश करेगा।
4- साबांग पोर्ट (Sabang Port) का संयुक्त विकास
रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण डील के तहत भारत और इंडोनेशिया मिलकर संयुक्त रूप से साबांग पोर्ट का विकास करेंगे। यह बंदरगाह स्ट्रेट ऑफ मलक्का के ठीक सामने है। ये भारत के ग्रेट निकोबार पोर्ट प्रोजेक्ट से सिर्फ 100 मील की दूरी पर है।
सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान में तनाव अपने चरम पर है। भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाक के खिलाफ सख्त एक्शन लेते हुए सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था। इस मामले पर पाकिस्तान कई बार गीदड़भभकी दे चुका है। अब पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी ने जहर उगला है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेता बिलावल भुट्टो जरदारी ने भारत पर सिंधु नदी के पानी को “हथियार” की तरह इस्तेमाल करने का फिर वही पुराना राग अलापा है। भारत को गीदड़ भभकी देते हुए बिलावल ने कहा कि, “पाकिस्तान कभी भी सिंधु नदी पर अपने अधिकारों से समझौता नहीं करेगा। हम हर फ्रंट पर तैयार हैं।”
बिलावल ने भारत के खिलाफ फिर उगला जहर
बिलावल ने कहा किस पाकिस्तान हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है और सिंधु नदी के पानी पर अपने अधिकारों की रक्षा करेगा। हम इस मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेंगे।” वहीं, पिछले सप्ताह भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि पाकिस्तान की ओर से सीमा पार आतंकवाद को लगातार समर्थन दिए जाने के कारण सिंधु जल संधि फिलहाल स्थगित रहेगी।
पाकिस्तान पहले भी दे चुका है धमकी
बता दें कि, सिंधु जल समझौता, वर्ष 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई थी। यह समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी प्रणाली के पानी के बंटवारे के नियम तय करता है। पिछले सप्ताह इस्लामाबाद में आयोजित एक सेमिनार में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने भारत के संधि को स्थगित रखने के फैसले पर यही पुराना राग अलापा था। उन्होंने कहा कि यह समझौता अब भी पूरी तरह वैध और लागू है। वहीं, बिलावल भुट्टो जरदारी ने भी इसी रुख का समर्थन करते हुए भारत पर निशाना साधने की कोशिश की है।
बता दें कि, यह पहले मौका नहीं है जब भारत के खिलाफ बिलावल भुट्टो की बौखलाहट सामने आई है। इससे पहले बिलावल भुट्टो ने कहा था कि अगर भारत सिंधु जल संधि को स्थगित रखता है और उसपर बांध बनाता है तो भारत के खिलाफ युद्ध होगा।
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में रविवार को जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के शांतिपूर्ण प्रदर्शन रैली पर पाकिस्तानी फोर्स ने गोलियां चला दीं। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, JAAC ने दावा किया कि अब्बासपुर के सरदार गुलाम हुसैन खान स्पोर्ट्स स्टेडियम में करीब 40 हजार लोग जुटे थे। संगठन का आरोप है कि डुडियाल के AMB इलाके में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने बिना उकसावे के गोलीबारी की, जिसमें कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए। हालांकि, घायलों की आधिकारिक संख्या या पाकिस्तान प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। JAAC का कहना है कि यह प्रदर्शन इस्लामाबाद सरकार के खिलाफ है। साथ ही, यह आंदोलन JAAC के नेताओं और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी, प्रशासनिक विफलताओं और बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर चल रहा है। संगठन ने गिरफ्तार नेताओं और कार्यकर्ताओं की तुरंत रिहाई की मांग की है। पाकिस्तानी सेना की फायरिंग की 2 फोटो… कई इलाकों से पहुंचे लोग, विदेश में भी प्रदर्शन रिपोर्ट के अनुसार, डेरा इस्माइल खान में चल रहे धरना स्थल पर भी कई अलग-अलग इलाकों से लोगों के काफिले लगातार पहुंचते रहे। प्रदर्शन में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की भी बड़ी भागीदारी बताई गई। JAAC ने कहा कि रावलाकोट और चक की महिलाएं भी सड़कों पर उतरकर आंदोलन का नेतृत्व कर रही हैं। संगठन का दावा है कि प्रदर्शनकारी प्रशासन के दबाव के बावजूद पीछे नहीं हटे। वहीं, JAAC की अपील पर न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में रहने वाले कश्मीरी समुदाय ने भी प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने JAAC के कोर कमेटी सदस्य शौकत नवाज मीर की गिरफ्तारी का विरोध किया और उनकी रिहाई की मांग की। JAAC का कहना है कि शौकत नवाज मीर की गिरफ्तारी के बाद पूरे PoJK में तनाव बढ़ गया है। संगठन ने सोशल मीडिया पर ‘रीलिज शौकत मीर’ अभियान चलाया, जिसके तहत लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की। प्रदर्शन के दौरान ‘लॉन्ग लिव कश्मीर’ और ‘लॉन्ग लिव द पीपल’ जैसे नारे लगाए गए। प्रदर्शन करने वाले संगठन JAAC के बारे में जानिए 5 लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य JAAC ने सोशल मीडिया पर PoK के 10 जिलों की अनुमानित आबादी का आंकड़ा साझा किया। संगठन के मुताबिक, यदि प्रत्येक जिले से 50 हजार लोग प्रदर्शन में शामिल हों तो कुल संख्या पांच लाख तक पहुंच सकती है।
संगठन ने लोगों से सफेद झंडे के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने और अनुशासन बनाए रखने की अपील की। उसका कहना है कि उद्देश्य दुनिया को यह संदेश देना है कि प्रदर्शन केवल बुनियादी अधिकारों की मांग के लिए है। पिछले महीने हिंसा में 30 की मौत हुई थी 8 जून को PoK में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़पों में 30 लोगों की मौत हो गई, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक यह हिंसा जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) और क्षेत्रीय सरकार के बीच चल रहे विवाद के दौरान हुई। रिपोर्ट के अनुसार मृतकों में 4 पुलिसकर्मी शामिल हैं। वहीं 23 सुरक्षाकर्मी और करीब 50 प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। पुलिस ने अब तक 30 लोगों को गिरफ्तार किया है। PoK में JAAC और सरकार के बीच विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को लेकर विवाद चल रहा है। ये सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में जाकर बसे थे। JAAC इन सीटों को खत्म करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहा है। भारत ने इंटरनेशनल कम्युनिटी से दखल देने की मांग की थी PoK में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर भारत ने पाकिस्तान पर फेक न्यूज और फेक वीडियो फैलाने का आरोप लगाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस मामले में पाकिस्तान की तरफ से लगातार झूठी खबरें और वीडियो फैलाने का पैटर्न देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह अपनी नाकामियों को छिपाने और मानवाधिकार उल्लंघन से ध्यान हटाने की हताश कोशिश है। रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पुलिस की बर्बरता की खबरें सामने आ रही हैं, जिनमें कई लोगों की मौत हुई है और कई घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत को उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान के गलत कामों और मानवाधिकार उल्लंघन के लिए उसे जवाबदेह ठहराएगा। JAAC पर बैन लगा, जिसके बाद हिंसा भड़की सरकार ने 5 जून को JAAC पर आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद से इलाके में तनाव लगातार बढ़ रहा है। रविवार को JAAC के कार्यकर्ता संगठन के एक सदस्य की मौत के विरोध में अस्पताल के शवगृह के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। सदस्य की मौत कथित तौर पर पुलिस फायरिंग में हुई थी। पुलिस जब प्रदर्शनकारियों को हटाने पहुंची, तभी झड़प शुरू हो गई और हिंसा फैल गई। रावलकोट के कमिश्नर सरदार वहीद खान ने रॉयटर्स से कहा कि प्रदर्शनकारियों की गोलीबारी में चार पुलिसकर्मियों और एक राहगीर की मौत हुई। उन्होंने दावा किया कि इसके जवाब में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में छह प्रदर्शनकारी मारे गए। पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक पुलिस का आरोप है कि JAAC से जुड़े लोगों ने सुरक्षाकर्मियों पर शॉटगन और अन्य हथियारों से हमला किया। पुलिस ने घटना को आतंकवादी कार्रवाई करार देते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। PoK में 27 जुलाई को चुनाव गिलगित-बाल्टिस्तान के बाद 27 जुलाई को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे। PoK की विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं। इनमें से 45 सीटों पर सीधे चुनाव होता है, जबकि 8 सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और धार्मिक विद्वानों के लिए आरक्षित हैं। PoK में विधानसभा का कार्यकाल पांच साल का होता है। इससे पहले 2021 में PoK विधानसभा चुनाव में इमरान खान की पार्टी (PTI) ने 45 में से 25 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। इसके बाद सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी प्रधानमंत्री बने। हालांकि अप्रैल 2022 में इमरान खान की सरकार गिर गई। इसका असर वहां की राजनीति पर भी पड़ा। मई 2022 में सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद PTI ने ही सरदार तनवीर इलियास को नया प्रधानमंत्री बनाया। लेकिन अप्रैल 2023 में PoK की उच्च अदालत ने उन्हें अदालत की अवमानना के मामले में अयोग्य घोषित कर दिया। इसके बाद उनका पद चला गया और एक बार फिर नया प्रधानमंत्री चुनना पड़ा। इसके बाद PTI के ही चौधरी अनवरुल हक प्रधानमंत्री बने। लेकिन कुछ ही समय बाद उन्होंने इमरान खान और PTI से दूरी बना ली और खुद को स्वतंत्र नेता के रूप में स्थापित किया। चौधरी अनवरुल हक को भी नवंबर 2025 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटा दिया गया था, और अब वहां पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के फैसल मुमताज राठौर नए प्रधानमंत्री हैं। ————————— पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव से भारत नाराज:कहा- इससे अवैध कब्जा वैध नहीं होगा; 7 जून को 24 सीटों पर वोटिंग भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में 7 जून को होने वाले विधानसभा चुनावों का कड़ा विरोध किया है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि पाकिस्तान जिस क्षेत्र पर अवैध और जबरन कब्जा किए हुए है, वहां चुनाव कराने की उसकी योजना पूरी तरह अस्वीकार्य है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
Khamenei Funeral News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में उमड़ी भारी भीड़ पर हैरानी जताई है। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि ईरान के लोग खामेनेई को पसंद नहीं करते। लेकिन अंतिम यात्रा में लाखों लोगों की मौजूदगी देखकर वे चौंक गए। एक अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्हें ईरान के अंदर बिल्कुल अलग प्रतिक्रिया की उम्मीद थी। एक्सियोस (Axios) से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि वह तेहरान में अंतिम संस्कार की रस्मों पर बारीकी से नजर रखे हुए थे।
अंतिम संस्कार के वीडियो के बारे में पूछे जाने पर न्यूज वेबसाइट Axios से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “मैं हैरान था। मुझे लगा था कि लोग उससे नफरत करते हैं।” यह टिप्पणी तब आई जब खामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्मों के लिए तेहरान में लाखों लोग जमा हुए। खामेनेई 28 फरवरी को अमेरिकी-इजरायली हवाई हमले में मारे गए थे। अंतिम संस्कार का कार्यक्रम पूरे सप्ताह चलेगा। अंत में मशहद में उन्हें दफनाया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह भी संभव है कि लोगों के आंसू नकली हों।
‘हम चाहें तो सभी नेताओं को निशाना बना सकते थे’
ट्रंप ने दावा किया कि खामेनेई के अंतिम संस्कार में ईरान के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। अमेरिका चाहे तो उन्हें निशाना बना सकता था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया क्योंकि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत जारी रखना चाहता है। उनके मुताबिक, “वे सभी एक जगह मौजूद हैं। एक ही वार में हम सबको खत्म कर सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि फिर बातचीत करने के लिए कोई नहीं बचेगा।”
‘ईरान समझौता करना चाहता है’
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान अमेरिका के साथ समझौता करने के लिए उत्सुक है। उनके अनुसार, दोनों देशों ने अंतिम संस्कार की अवधि तक बातचीत और सैन्य कार्रवाई को अस्थायी रूप से रोकने पर सहमति बनाई है। उन्होंने कहा, “वे समझौता करने के लिए बेताब हैं। हमने अंतिम संस्कार के लिए उन्हें एक सप्ताह का समय दिया क्योंकि हम ऐसा करना उचित समझते हैं।”
तेहरान में उमड़ा जनसैलाब
4 जुलाई से शुरू हुए अंतिम संस्कार में तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। श्रद्धांजलि देने आए लोगों ने खामेनेई की तस्वीरें हाथों में ली थी। इस दौरान अमेरिका तथा इजरायल के खिलाफ नारे लगाए। उनके ताबूत को राष्ट्रीय ध्वज में लपेटकर सार्वजनिक दर्शन के लिए रखा गया।
9 जुलाई को होगा अंतिम संस्कार
अंतिम संस्कार की रस्में ईरान के कई शहरों में जारी रहेंगी। इसके बाद 9 जुलाई को खामेनेई को मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। भारत में सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि आयतुल्ला हकीम इलाही के अनुसार, सुरक्षा कारणों और संभावित हमलों के खतरे को देखते हुए मोजतबा खामेनेई के अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने की संभावना कम है।
खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत से कौन गया?
केंद्रीय मंत्री पवित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम में शुक्रवार को हिस्सा लिया। दोनों ने भारत सरकार एवं देश की जनता की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। पिछले तीन दशक से ईरान का नेतृत्व कर रहे खामेनेई की 28 फरवरी को तेहरान पर अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों के पहले दिन मृत्यु हो गई थी।
विदेश राज्य मंत्री मार्गेरिटा ने X पर प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय के हैंडल को टैग करते हुए पोस्ट किया, “माननीय बिहार के राज्यपाल और मैंने तेहरान में ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व किया। भारत सरकार और देश की जनता की ओर से अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।”
उन्होंने समारोह की कुछ तस्वीरें भी शेयर कीं। बिहार लोकभवन ने X पर एक पोस्ट में कहा कि राज्यपाल ने पश्चिम एशिया में हालिया संघर्ष में जान गंवाने वालों के परिजनों के प्रति भी गहरी संवेदना व्यक्त की। बिहार के लोकभवन ने राज्यपाल हसनैन के हैंडल को टैग करते हुए कहा, “विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा के साथ आज तेहरान में अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व किया। हालिया संघर्ष में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के प्रति भी गहरी संवेदना व्यक्त की।”
लोकभवन ने समारोह की कुछ तस्वीरें भी शेयर कीं। भारत स्थित ईरानी दूतावास ने भी X पर एक पोस्ट जारी करके हसनैन और मार्गेरिटा के श्रद्धांजलि अर्पित करने का वीडियो शेयर किया। यह श्रद्धांजलि उस सभागार में दी गई, जहां खामेनेई के लिए शोक समारोह आयोजित किया गया था।
विपक्षी नेता भी पहुंचे तेहरान
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम में कांग्रेस पार्टी का प्रतिनिधित्व किया। साथ ही पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) प्रमुख महबूबा मुफ्ती और भारत से गए सिख, हिंदू, मुस्लिम और ईसाई धर्मगुरुओं ने भी दिवंगत ईरानी नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से उनकी साप्ताहिक प्रेस वार्ता में पूछा गया कि खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व किसने किया, क्योंकि इसमें कई लोग शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा, “जहां तक भारत सरकार का सवाल है, हमने इस संबंध में प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। हमारी ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा आज तेहरान में ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।”
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विदेश मंत्रालय ने दो जुलाई को जारी अपने बयान में कहा था, “इस कार्यक्रम में भारत का उच्चस्तरीय प्रतिनिधित्व दोनों देशों के बीच सभ्यतागत संबंधों तथा लोगों के बीच संपर्क के महत्व को रेखांकित करता है, जो राजनीतिक और आर्थिक संबंधों के लिए मजबूत आधार प्रदान करता है।” खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम पांच, छह और सात जुलाई को तेहरान और कोम में आयोजित किए जाएंगे। जबकि उन्हें नौ जुलाई को मशहद शहर में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

