Gold Silver Price: MCX पर सोने के दाम फिर गिरे, चांदी ₹4,191 हुई और सस्ती, अब क्या हो निवेश रणनीति

Gold Silver Price: देश में सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है। इसकी मुख्य वजह हाजिर बाजार (स्पॉट मार्केट) में कमजोर मांग और बिकवाली का दबाव है। कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की बढ़ती कीमतों और इस चिंता के कारण कि अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं, कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ रहा है।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी के वायदा भाव में 4,191 रुपये (यानी 2.1%) की गिरावट आई और यह 1.95 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। इसमें 5,856 लॉट का कारोबार हुआ। वहीं, दिसंबर डिलीवरी वाले सोने के वायदा भाव में 1,230 रुपये (यानी 0.86%) की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इसमें 1,670 लॉट का कारोबार हुआ।

PTI के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चांदी 1.01% गिरकर 54.01 डॉलर प्रति औंस पर आ गई, जबकि न्यूयॉर्क में सोने के वायदा भाव 0.26% की गिरावट के साथ 4,014.23 डॉलर प्रति औंस पर रहे।

कीमतों में दबाव क्यों?

‘लेमन’ (Lemonn) के रिसर्च हेड गौरव गर्ग के अनुसार, कीमती धातुओं पर दबाव की वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। इससे महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं और ऐसी उम्मीदें भी प्रबल हो गई हैं कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है।

ऊंची ब्याज दरें सोने और चांदी पर दबाव डाल सकती हैं, क्योंकि इनसे कोई ब्याज आय नहीं मिलती है। ऐसे में, ब्याज देने वाली अन्य संपत्तियों की तुलना में सोने और चांदी का आकर्षण कम हो सकता है।

गर्ग ने बताया कि निवेशक अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27-28 अक्टूबर को होने वाली बैठक पर नजर रखे हुए हैं, ताकि ब्याज दरों के भविष्य को लेकर कोई संकेत मिल सके।

उन्होंने आगे कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सऊदी अरब के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों के बाद वैश्विक आपूर्ति में रुकावट की आशंकाओं के चलते भी कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है।

घरेलू बाजार में कीमतों को क्या दे रहा सहारा

भारत में, त्योहारों और शादियों के सीजन में होने वाली खरीदारी सोने और चांदी की खपत को सहारा दे सकती है, भले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार की हलचल कीमतों को प्रभावित करती रहे। एस्पेक्ट बुलियन एंड रिफाइनरी के CEO दर्शन देसाई ने कहा, “वैश्विक आर्थिक संकेतों के कारण आने वाले समय में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, लेकिन लंबे समय के नजरिए से सोना और चांदी अभी भी मूल्य सुरक्षित रखने के भरोसेमंद साधन बने हुए हैं।”

देसाई ने कहा कि डॉलर और ब्याज दरों के रुझान, साथ ही वैश्विक अनिश्चितताएं, बुलियन बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, घरेलू मांग खपत को सहारा दे सकती है, लेकिन इससे कीमतों में अल्पकालिक गिरावट को पूरी तरह रोकना मुश्किल हो सकता है।

किन बातों पर रखें नजर

घरेलू बुलियन की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कीमतों, रुपये-डॉलर विनिमय दर और स्थानीय मांग से प्रभावित होती हैं। रुपये में कमजोरी आने से आयातित कीमती धातुओं की लागत बढ़ सकती है, जिससे वैश्विक स्तर पर कीमतें घटने के बावजूद घरेलू कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं।

खुदरा खरीदारों के लिए, MCX वायदा (फ्यूचर्स) कीमतों में बदलाव का सीधा असर आभूषणों की कीमतों पर नहीं पड़ता है। आभूषणों की कीमतें शुद्धता, लागू करों, मेकिंग चार्ज और डीलर मार्जिन जैसे कारकों पर भी निर्भर करती हैं।

इसलिए, निवेशकों को अपने निवेश की अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखते हुए वैश्विक बुलियन कीमतों, मुद्रा के उतार-चढ़ाव और फेडरल रिजर्व के नीतिगत संकेतों पर नजर रखनी चाहिए।

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Gold silver prices today: घरेलू बाजार में गिरे दाम, अब निवेश के लिए किन लेवल्स पर रखें नजर

Gold Silver price: मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MCX) पर सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई की चिंताओं को बढ़ा दिया है, जिससे यह उम्मीद भी मजबूत बढ़ गई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व लंबे समय तक सख्त मौद्रिक नीति बनाए रख सकता है।

MCX पर दिसंबर के लिए सोने के वायदा (futures) 0.35% गिरकर 1.46 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहे थे, जबकि चांदी के वायदा 1.20% गिरकर 2.08 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए।

यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता बढ़ी हुई है, ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं हैं और अमेरिकी ब्याज दरों के भविष्य को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। हाल के सत्रों में दोनों कीमती धातुएं दबाव में रही हैं। निवेशक कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी डॉलर और फेडरल रिजर्व के अगले नीतिगत कदमों पर नजर रखे हुए हैं।

सोने और चांदी की कीमतें क्यों गिर रही हैं?

  1. क्रूड में उछाल

कच्चे तेल की ऊंची कीमतें परिवहन, विनिर्माण (manufacturing) और अन्य लागतों को बढ़ा सकती हैं, जिससे महंगाई को लेकर चिंताएं पैदा होती हैं। इससे केंद्रीय बैंकों, खासकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के लिए अपनी मौद्रिक नीति को आसान बनाना मुश्किल हो सकता है।

PL कैपिटल में कमोडिटीज के प्रमुख आशीष राजोदिया ने बताया कि ईरान के साथ संभावित शांति समझौते को लेकर जो शुरुआती उम्मीदें थीं, वे समझौते से जुड़ी खबरों पर विवाद होने के बाद खत्म हो गईं। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी आ गई।

पश्चिम एशिया में तनाव और शिपिंग मार्गों (shipping routes) को लेकर खतरों के कारण आपूर्ति संबंधी चिंताएं बनी हुई हैं, जिससे तेल बाजार में उतार-चढ़ाव (volatility) अधिक है। अगर कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदें सोने और चांदी पर दबाव डाल सकती हैं।

2. फेडरल रिजर्व की बैठक

इधर 27-28 अक्टूबर को होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक कीमती धातुओं के लिए एक और अहम कारक है। हालांकि बाजार को काफी हद तक उम्मीद है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक अक्टूबर की बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रखेगा, लेकिन साल के अंत तक दरों में बढ़ोतरी की संभावना चिंता का विषय बनी हुई है।

ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर सोने पर दबाव डालती हैं, क्योंकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता है। जब ब्याज देने वाली संपत्तियों (assets) पर रिटर्न (yields) बढ़ता है, तो सोना अपने पास रखने की ‘अवसर लागत’ (opportunity cost) भी बढ़ जाती है। चांदी पर भी दबाव आ सकता है, क्योंकि निवेशक ब्याज दरों और आर्थिक विकास के भविष्य का फिर से आकलन कर रहे हैं। रिद्धि-सिद्धि बुलियंस लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर और इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष, पृथ्वीराज कोठारी ने कहा कि तेल की कीमतों के कारण बढ़ती महंगाई की चिंता और फेड (Fed) के नीतिगत फैसलों को लेकर उम्मीदों की वजह से सोना और चांदी दबाव में हैं।

3. डॉलर और बॉन्ड यील्ड

अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड में होने वाले बदलाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित करते हैं। डॉलर मजबूत होने से अन्य मुद्राओं का इस्तेमाल करने वाले खरीदारों के लिए सोना और चांदी महंगे हो सकते हैं, जिससे इनकी मांग कम हो सकती है। बॉन्ड यील्ड बढ़ने से भी सोना कम आकर्षक हो सकता है, क्योंकि इससे कोई रिटर्न (ब्याज) नहीं मिलता है।

निवेशक अमेरिका के आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर भी नजर रखे हुए हैं, जिसमें ‘पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर’ (PCE) रिपोर्ट भी शामिल है। इससे ब्याज दरों की दिशा के बारे में संकेत मिल सकते हैं।

भारतीय खरीदारों के लिए, रुपया-डॉलर एक्सचेंज रेट एक और अहम कारक है। रुपया कमजोर होने से आयातित सोने और चांदी की घरेलू लागत बढ़ सकती है, भले ही अंतरराष्ट्रीय कीमतें स्थिर हों या गिर रही हों।

अब किन लेवल्स पर रखें नजर

कोठारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें 4,080 डॉलर से 4,200 डॉलर प्रति औंस के ‘सपोर्ट जोन’ में बनी हुई हैं। अगर कीमत 4,200 डॉलर प्रति औंस के ऊपर बनी रहती है, तो यह 4,400 डॉलर प्रति औंस तक जा सकती है। वहीं, अगर यह सपोर्ट जोन टूटता है, तो सोने की कीमत गिरकर 3,950 डॉलर प्रति औंस तक आ सकती है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी के लिए 57 डॉलर प्रति औंस का स्तर एक अहम सपोर्ट है। इसमें 54 डॉलर से 55.50 डॉलर प्रति औंस तक की गिरावट की संभावना बनी हुई है, जबकि 59 डॉलर प्रति औंस के ऊपर टिके रहने पर यह 62 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है।

घरेलू वायदा बाजार (फ्यूचर्स) के लिए, Giottus.com के CEO विक्रम सुब्बुराज ने MCX पर दिसंबर के सोने के लिए 1.45 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम को एक अहम सपोर्ट स्तर बताया है। अगर कीमत 1.47 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के ऊपर आती है, तो यह निकट भविष्य में बाजार के स्थिर होने का संकेत हो सकता है। चांदी के लिए, उन्होंने 2.08 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास सपोर्ट बताया है और कहा कि अगर कीमत 2.13 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के ऊपर बनी रहती है, तो रिकवरी की संभावनाएं और मजबूत होंगी। ये स्तर बाजार के प्रतिभागियों के तकनीकी आकलन हैं, न कि तय मूल्य लक्ष्य। बाजार की स्थितियों में बदलाव के साथ इनमें भी बदलाव आ सकता है।

क्या फेस्टिव सीजन में दिखेगी तेजी

अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद, देश में त्योहारों और शादियों के सीजन की मांग सोने की कीमतों को कुछ सहारा दे सकती है। हालांकि, ऊंची कीमतें और कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव ग्राहकों को खरीदारी के समय और मात्रा को लेकर सतर्क रख सकते हैं।

एस्पेक्ट बुलियन एंड रिफाइनरी के सीईओ दर्शन देसाई ने कहा कि हाल ही में कीमतों में आई गिरावट (करेक्शन) से कुछ खरीदारी को बढ़ावा मिला है, हालांकि ग्राहक अभी भी कीमतों को लेकर काफी सतर्क हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले सप्ताह में वैश्विक आर्थिक आंकड़े, फेडरल रिजर्व के संकेत और करेंसी (मुद्रा) में उतार-चढ़ाव बुलियन (सोने-चांदी) बाजार के लिए अहम कारक होंगे।

हालांकि, घरेलू मांग शायद अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगातार आ रही कमजोरी की भरपाई करने के लिए काफी न हो, खासकर तब जब कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहें और अमेरिका की मौद्रिक नीति के और सख्त होने की उम्मीदें कायम रहें।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।