Eetha Teaser: ‘ईथा’ फिल्म में श्रद्धा कपूर का अवतार देख फैंस हुए दीवाने! बॉक्स ऑफिस पर यश की ‘टॉक्सिक’से होगी टक्कर

Eetha Teaser: बॉलीवुड एक्ट्रेस श्रद्धा कपूर इन दिनों अपनी नई बायोपिक फिल्म ‘ईथा’ को लेकर चर्चा में है। ‘ईथा’ में एक्ट्रेस एक अलग और दमदार किरदार में नजर आने वाली हैं। फिल्म का पहला टीजर जारी कर दिया गया है, जिसे फैंस काफी पसंद कर रहे हैं। श्रद्धा इस फिल्म में मशहूर लावणी कलाकार विठाबाई नारायणगांवकर की भूमिका निभाती हुए नजर आ रही हैं। टीजर में उनका नया अंदाज और फिल्म की भव्य झलक दर्शकों को काफी पसंद आ रही है। फैंस बेसब्री से इसके ट्रेलर और फिल्म का इंतजार कर रहे हैं। शानदार दृश्यों और बड़े स्तर पर बनी इस फिल्म ने रिलीज से पहले ही लोगों के बीच एक्साईटमेंट बढ़ा दी है।

सोशल मीडिया पर छाई श्रद्धा

फिल्म ईथा के टीजर में मशहूर लोक कलाकार विठाबाई नारायणगांवकर की मेहनत, संघर्ष और अपने काम के प्रति उनके जुनून को दिखाया गया है। वीडियो में दिखाया गया है कि वह कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित रहती हैं। बच्चे को जन्म देने की पीड़ा सहने के बाद भी उनका मंच पर लौटकर प्रस्तुति देना लोगों को इमोशनल कर रहा है। वहीं, श्रद्धा कपूर का पारंपरिक मराठी लुक भी दर्शकों को काफी पसंद आ रहा है और सोशल मीडिया पर उनके इस नए अंदाज की खूब चर्चा हो रही है।

कब रिलीज होगी फिल्म

फिल्म ‘ईथा’ 26 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। इसकी रिलीज के साथ ही अभिनेता यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोनअप्स’ भी बड़े पर्दे पर आने वाली है। ऐसे में दोनों फिल्मों के बीच बॉक्स ऑफिस पर कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है। ईथा का टीजर सामने आने के बाद दर्शकों के बीच फिल्म को लेकर उत्साह बढ़ गया है। फिल्म ईथा में श्रद्धा कपूर के साथ रणदीप हुड्डा, अनंत जोशी और कई अन्य कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। इस फिल्म का निर्माण दिनेश विजान की प्रोडक्शन कंपनी मैडॉक फिल्म्स के सहयोग से किया जा रहा है।

फिल्म का संगीत मशहूर संगीतकार जोड़ी अजय-अतुल ने तैयार किया है। श्रद्धा कपूर की पिछली फिल्म साल 2024 में रिलीज हुई स्त्री 2 थी। अब दर्शकों को उनकी नई फिल्म ईथा का बेसब्री से इंतजार है।

फैंस ने किया कमेंट

एक फैन ने कमेंट किया, “श्रद्धा कपूर दो साल बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रही हैं और टीजर देखकर लग रहा है कि इंतजार पूरी तरह सफल रहा। विठाबाई नारायणगांवकर के किरदार में उनका पहला लुक बेहद शानदार है।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “2026 में अब तक देखा गया यह सबसे बेहतरीन टीजर है।” वहीं एक और यूजर ने कहा, “टीजर काफी भव्य और प्रभावशाली नजर आ रहा है। श्रद्धा कपूर की स्क्रीन प्रेजेंस कमाल की है और उनके डांस सीक्वेंस देखने लायक हैं।”

एक यूजर ने लिखा, “अब तक सामने आई झलकियों में ईथा में श्रद्धा कपूर की स्क्रीन प्रेजेंस बेहद दमदार नजर आ रही है। मुझे लगता है कि टॉक्सिक की रिलीज फिर आगे बढ़ सकती है।” एक और यूजर ने लिखा, “श्रद्धा कपूर ईथा के साथ शानदार वापसी करती दिख रही हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या टॉक्सिक को उसी समय रिलीज करना सही फैसला होगा?”

Rani Durgavati: रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस: इतिहास की वीर नायिका को नमन

An image featuring Rani Durgavati, the brave ruler of Gondwana and a symbol of self-respect and patriotism

Gondwana Queen Rani Durgavati: भारतीय इतिहास में अनेक वीर योद्धाओं और वीरांगनाओं ने अपने साहस, त्याग और देशभक्ति से अमिट छाप छोड़ी है। ऐसी ही महान वीरांगनाओं में रानी दुर्गावती का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने न केवल अपने राज्य की रक्षा के लिए शत्रुओं का डटकर सामना किया, बल्कि मातृभूमि और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपने प्राणों का भी बलिदान दे दिया।ALSO READ: Sanjay Gandhi: पुण्यतिथि विशेष: संजय गांधी कौन थे, जानें राजनीति में उनका योगदान

रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस हमें उनके अदम्य साहस, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रप्रेम की याद दिलाता है। आज भी उनका जीवन देश की महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।

 

आइए, उनके इस शौर्य दिवस पर जानते हैं मध्य प्रदेश के गोंडवाना साम्राज्य की इस महान रानी की वीरता और बलिदान की अमर गाथा…

 

चंदेल राजवंश की बेटी, गोंडवाना की रानी

रानी दुर्गावती का जन्म 5 अक्टूबर 1524 को कालिंजर के राजा कीर्तिसिंह चंदेल के यहां हुआ था। उनका विवाह गोंडवाना साम्राज्य के राजा संग्राम शाह के पुत्र दलपत शाह से हुआ था। विवाह के कुछ वर्षों बाद ही राजा दलपत शाह का असमय निधन हो गया। उस समय उनका बेटा नारायण केवल 5 वर्ष का था। ऐसे कठिन समय में रानी ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने छोटे बेटे को सिंहासन पर बैठाकर खुद गोंडवाना की कमान संभाली और जबलपुर को अपना केंद्र बनाकर शासन किया।

 

एक कुशल और न्यायप्रिय शासिका

रानी दुर्गावती केवल युद्ध कौशल में ही माहिर नहीं थीं, बल्कि एक बेहद दूरदर्शी शासिका भी थीं। उनके शासनकाल में गोंडवाना बेहद समृद्धशाली बना:

 

* धार्मिक सहिष्णुता: वे हिंदू धर्म की अनुयायी थीं, लेकिन उन्होंने अपने राज्य में जैन और अन्य संप्रदायों के विकास के लिए भी खुलकर दान दिया।

 

* जल संरक्षण: उन्होंने अपने राज्य में पानी की कमी को दूर करने के लिए कई तालाबों का निर्माण कराया, जिनमें जबलपुर का प्रसिद्ध 'चेरीताल' और 'आधारताल' आज भी उनके नाम की गवाही देते हैं।

 

* मजबूत सेना: उन्होंने एक विशाल और अनुशासित सेना तैयार की, जिसमें 20,000 से अधिक घुड़सवार, हजारों हाथी और बड़ी संख्या में पैदल सैनिक शामिल थे।ALSO READ: रानी दुर्गावती के बलिदान की कहानी की 3 खास बातें

 

अकबर की सेना से ऐतिहासिक टकराव

गोंडवाना की समृद्धि और एक महिला के बढ़ते प्रभाव को देखकर मुगल सम्राट अकबर विचलित हो उठा। उसने अपने सिपहसालार आसफ खान को एक विशाल सेना के साथ गोंडवाना पर आक्रमण करने के लिए भेजा। मुगल सेना आधुनिक हथियारों और तोपों से लैस थी, जबकि रानी की सेना संख्या में कम थी। इसके बावजूद रानी दुर्गावती ने खुद युद्ध का नेतृत्व किया।
 

 

1. नरई नाला का मोर्चा

रानी ने जबलपुर के पास 'नरई नाला' नामक स्थान पर मोर्चा संभाला, जो एक तरफ पहाड़ों और दूसरी तरफ उफनती नदी से घिरा था। इस रणनीतिक बढ़त के कारण मुगलों को भारी नुकसान हुआ और वे पीछे हटने पर मजबूर हो गए।

 

2. रात के हमले का प्रस्ताव

रानी मुगलों को संभलने का मौका नहीं देना चाहती थीं। उन्होंने रात में ही मुगल कैंप पर हमला करने की योजना बनाई, लेकिन उनके सेनापतियों ने रात में युद्ध करने से मना कर दिया। यह देरी भारी पड़ी और अगली सुबह आसफ खान ने बड़ी तोपें मंगवा लीं।

 

3 अंतिम सांस तक संघर्ष (24 जून 1564)

अगले दिन भयंकर युद्ध हुआ। रानी का बेटा वीर नारायण घायल हो गया, लेकिन रानी लड़ती रहीं। तभी एक तीर रानी की आंख में और दूसरा उनकी गर्दन में आकर लगा। रानी ने होश खोने से पहले स्थिति को भांप लिया।

 

4 बलिदान (अमर शहादत)

जब रानी को लगा कि वे चारों तरफ से घिर चुकी हैं और बंदी बना ली जाएंगी, तो उन्होंने अपने वफादार सैनिक से खुद पर तलवार चलाने को कहा। सैनिक के मना करने पर रानी ने अपनी ही कटार अपनी छाती में घोंपकर मातृभूमि के लिए प्राण त्याग दिए।

 

मुगल सेना से घिर जाने पर अपनी अंतिम सांसों के दौरान रानी दुर्गावती के शब्द थे- 'जब तक जीवित हूं, कलंक का टीका नहीं लगाऊंगी। अपमानजनक जीवन जीने से अच्छा है गरिमा के साथ मर जाना।'

 

5. विरासत और सम्मान

रानी दुर्गावती का यह सर्वोच्च बलिदान भारतीय महिलाओं के आत्मसम्मान और वीरता का प्रतीक बन गया। जबलपुर के पास स्थित 'बरेला' में आज भी उनकी समाधि बनी हुई है, जहां लोग श्रद्धासुमन अर्पित करने जाते हैं।

 

उनके सम्मान में मध्य प्रदेश सरकार ने जबलपुर विश्वविद्यालय का नाम बदलकर 'रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय' किया। देश उनके बलिदान दिवस पर इस महान वीरांगना के शौर्य, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति को शत-शत नमन करता है।

 

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Ram Mandir Daan Chori Case: एसआईटी ने सरकार को सौंपी राम मंदिर में कथित चंदा चोरी की रिपोर्ट, जानें- बड़ी बातें

Ayodhya Ram temple donation case: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में श्री राम मंदिर के लिए मिले चंदे में कथित हेराफेरी के आरोपों की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने मंगलवार (23 जून) को यूपी सरकार को अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट सौंप दी। लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत ने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) संजय प्रसाद को यह शुरुआती रिपोर्ट सौंपी। उन्होंने बताया कि स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच अभी भी चल रही है। मामले में अभी जानकारी जुटाई जा रही है।

अयोध्या राम मंदिर में मिले चंदे के गलत इस्तेमाल के आरोपों के बाद मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को SIT का गठन किया था। SIT द्वारा शुरुआती रिपोर्ट सौंपने के बाद, पंत ने PTI वीडियो को बताया कि SIT अगले 10 से 15 दिनों के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने की कोशिश कर रही है। पंत ने कहा, “अब तक सामने आई जानकारी और हमारे पास मौजूद तथ्यों के आधार पर हमने आज पहली रिपोर्ट सौंपी है। यह केवल शुरुआती रिपोर्ट है और अंतिम रिपोर्ट कुछ समय बाद सौंपी जाएगी।”

उन्होंने कहा कि रिपोर्ट गोपनीय है। उन्हें इस चरण में मीडिया के साथ जांच के नतीजों का विवरण साझा करने की अनुमति नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि क्या टीम आगे की जांच के लिए अयोध्या लौटेगी क्योंकि सौंपी गई रिपोर्ट केवल शुरुआती थी? इस पर पंत ने PTI से कहा, “बिल्कुल, हम जरूरत के हिसाब से ऐसा करेंगे।”

अखिलेश यादव ने उठाया था मामला

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 7 जून को उन रिपोर्टों का हवाला दिया था जिनमें दावा किया गया था कि राम मंदिर में दिए गए चंदे में से करोड़ों रुपये गायब हैं। उन्होंने अदालतों से इस मामले का संज्ञान लेने का आग्रह किया था। यादव ने SIT जांच पर रोज़ाना जानकारी देने की मांग की थी। साथ ही आरोप लगाया था कि एजेंसी पर जनता का भरोसा कम हो गया है, जिसे उन्होंने BJP सरकार के तहत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का नतीजा बताया था।

मंदिर से जुड़े लोगों को जांच पूरी होने तक अयोध्या न छोड़ने का निर्देश

राम मंदिर के दान में कथित हेराफेरी की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों को जांच पूरी होने तक अयोध्या नहीं छोड़ने के निर्देश दिए। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने रविवार को लखनऊ रवाना होने से पहले यह निर्देश दिए। सूत्रों ने बताया कि ट्रस्ट के पदाधिकारियों और जांच से जुड़े अन्य लोगों से पूछताछ सहित रोजाना की जांच रिपोर्ट डिजिटल रूप में सुरक्षित की जा रही हैं। सूत्रों ने बताया कि एसआईटी अपनी जांच रिपोर्ट रोजाना मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज रही है।

सूत्रों के मुताबिक, सबसे बड़ी कथित अनियमितता कुंभ मेले के दौरान सामने आई, जब करीब दो महीने की अवधि में रोजाना लगभग 10 लाख श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे थे। दान पेटियां दो घंटे के भीतर ही नोटों से भर जाती थीं। यही वजह है कि एसआईटी इस दान की निगरानी एवं हिसाब-किताब की गहराई से जांच कर रही है। सूत्रों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में भगवान राम को चढ़ाए गए सोने, चांदी के आभूषणों, हीरे और अन्य कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी सामने आई है।

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Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर एक साथ बनेंगे 3 शुभ योग, जानें सही तारीख, पूजा का मुहूर्त और विधि

Nirjala Ekadashi 2026: ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो लोग पूरे साल एकादशी का व्रत नहीं कर पाते हैं, वे अगर इस एक एकादशी का व्रत कर लें तो उन्हें सभी 24 एकादशियों के व्रत का फल मिल जाता है। इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पांडु पुत्र भीम ने भी इस एकादशी का व्रत किया था।

निर्जला एकादशी का व्रत करने वाले भक्त अन्न के साथ-साथ जल का त्याग भी करते हैं। जैसा कि इस एकादशी का नाम है, यह व्रत निर्जला किया जाता है और इसकी शुरुआत एकादशी तिथि पर सुबह व्रत का संकल्प के साथ होती है। इसके बाद पूरे दिन व्रत करते हैं, रात्रि जागरण करने के बाद अगले दिन हरि वासर के बाद व्रत का पारण करते हैं और उसके बाद अन्न-जल ग्रहण करते हैं। जून के महीने में जब भीषण गर्मी पड़ती है, तब यह व्रत किया जाता है। इसलिए इसे सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। इस साल यह व्रत 25 जून को किया जाएगा। इस दिन गुरुवार है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है, साथ ही 3 अन्य शुभ योगों का भी निर्माण हो रहा है।

निर्जला एकादशी व्रत की तारीख

एकादशी तिथि 24 जून की शाम 6:14 बजे से शुरू होकर 25 जून की रात 8:10 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर व्रत और पूजा 25 जून को की जाएगी। संयोग से यह व्रत बृहस्पतिवार के दिन पड़ रहा है, जो भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।

एकादशी व्रत पारण

व्रत रखने वाले श्रद्धालु अगले दिन यानी 26 जून 2026 को अपने व्रत का पारण करेंगे। पारण करने के लिए शुभ समय 5 बजकर 25 मिनट से लेकर 8 बजकर 13 मिनट तक है। धार्मिक परंपराओं के मुताबिक, निर्धारित पारणा अवधि के अंदर ही उपवास तोड़ना शुभ मान जाता है।

निर्जला एकादशी पर बन रहे ये तीन शुभ योग

रवि योग : 25 जून सुबह 5:25 से शाम 4:29 बजे तक।

शिव योग : 24 जून सुबह 10:24 से 25 जून सुबह 10:54 बजे तक।

सिद्ध योग : 25 जून सुबह 10:55 से 26 जून सुबह 11:39 बजे तक।

निर्जला एकादशी व्रत पूजा विधि

  • इस व्रत में एकादशी तिथि के सूर्योदय से अगले दिन द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक जल और भोजन ग्रहण नहीं किया जाता है।
  • एकादशी के दिन सुबह स्नान के बाद सर्वप्रथम भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा करें।
  • इसके बाद भगवान का ध्यान करते हुए “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
  • इस दिन भक्ति भाव से कथा सुनना और भगवान का कीर्तन करना चाहिए।
  • इस दिन व्रती को चाहिए कि वह जल से कलश भरे व सफेद वस्त्र को उस पर ढककर रखें और उस पर चीनी तथा दक्षिणा रखकर ब्राह्मण को दान दें।
  • इसके बाद दान, पुण्य आदि कर इस व्रत का विधान पूर्ण होता है।

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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: SIT का सख्त आदेश…जांच पूरी होने तक अयोध्या न छोड़ें ट्रस्ट के लोग

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे विवाद की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने ट्रस्ट और मंदिर से जुड़े अधिकारियों को फिलहाल अयोध्या छोड़कर कहीं न जाने के निर्देश दिए हैं। मंदिर से जुड़े सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान चढ़ावे में मिले सोने, चांदी और अन्य कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड और दस्तावेजों में कुछ गड़बड़ियां सामने आई हैं। जांचकर्ताओं को इन चीजों के डॉक्यूमेंटेशन में कई गड़बड़ियां मिली हैं, जिनकी अब विस्तार से जांच की जा रही है।

सोना-चांदी और हीरों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी

तीन सदस्यीय एसआईटी ने रविवार को लखनऊ लौटने से पहले यह निर्देश जारी किया। सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान सबसे अहम मुद्दों में से एक भगवान राम को भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों, हीरों और अन्य कीमती रत्नों के रिकॉर्ड से जुड़ा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन चढ़ावों का सही तरीके से हिसाब-किताब रखा गया था या नहीं।

सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान चढ़ावे के रूप में मिले सोने, चांदी और अन्य कीमती वस्तुओं के रिकॉर्ड और हिसाब-किताब में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि पूछताछ के दौरान मंदिर ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारी इन कीमती वस्तुओं की सूची, उनके रखरखाव और लेखा-जोखा से जुड़े सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। सूत्रों का यह भी दावा है कि जनवरी और फरवरी 2025 में आयोजित महाकुंभ के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हो सकती हैं। उस समय मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी थी और रोजाना लाखों भक्त दर्शन के लिए पहुंच रहे थे।

 CMO को रोज भेजी जा रही रिपोर्ट

जानकारी के मुताबिक, दो महीने से अधिक समय तक प्रतिदिन करीब 10 लाख श्रद्धालु मंदिर आए। इस दौरान दान-पात्र कुछ ही घंटों में नोटों से भर जाते थे। इसी वजह से दान में मिली राशि और अन्य चढ़ावों की निगरानी तथा उनके हिसाब-किताब की प्रक्रिया एसआईटी जांच का प्रमुख विषय बन गई है।

मंदिर से जुड़े सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के अधिकारियों और जांच से जुड़े अन्य लोगों से पूछताछ के आधार पर तैयार की गई दैनिक जांच रिपोर्ट को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा गया है। इन रिपोर्टों को अंतिम रूप देने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा जाएगा।

सूत्रों ने बताया कि एसआईटी अपनी जांच की प्रगति रिपोर्ट रोजाना मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) को भेज रही थी। उन्होंने यह भी कहा कि जांच केवल कथित फंड गबन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मंदिर ट्रस्ट द्वारा विभिन्न चरणों में की गई जमीन की खरीद और निर्माण सामग्री की खरीद प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है। जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि मंदिर ट्रस्ट ने जिन जमीनों की खरीद की, उनकी कीमत बाजार दरों की तुलना में कहीं अधिक तो नहीं थी। इन सभी पहलुओं की विस्तृत जांच के बाद एसआईटी अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।

बढ़ा विवाद

समाजवादी पार्टी  सहित कई राजनीतिक दलों ने इस मामले को जोरदार तरीके से उठाया था। अयोध्या राम मंदिर में मिले दान के कथित दुरुपयोग के आरोपों के बाद मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। इस तीन सदस्यीय एसआईटी में लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया है। सरकार ने इस टीम को आरोपों की निष्पक्ष और विस्तृत जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि मामले से जुड़े सभी तथ्यों को सामने लाया जा सके और जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई की जा सके।

Rudraprayag: 24 घंटे बाद भी नहीं निकला समाधान, नगरासू गुरुद्वारा पर निहंग सिखों का कब्जा…कर्णप्रयाग में इंटरनेट बंद

बीते मंगलवार को चमोली जिले के कर्णप्रयाग में निहंग सिखों और स्थानीय युवकों के बीच हुए विवाद के बाद तनाव लगातार बना हुआ है। जानकारी के अनुसार शनिवार देर शाम पंजाब से आये कुछ निहंग सिखों ने कर्णप्रयाग से आगे, रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू गुरुद्वारा पर कब्जा कर लिया है और वहां एक सेवादार को बंधक बना लिया है। वहीं नगरासू स्थित गुरुद्वारे में चल रहे निहंग सिख विवाद का 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकल पाया है। गुरुद्वारे की छत पर चढ़े निहंग सिख अब भी अपने रुख पर कायम हैं, जिससे प्रशासन, गुरुद्वारा प्रबंधन और स्थानीय लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

अलर्ट मोड में प्रशासन 

जानकारी के अनुसार, छत पर डटे निहंग सिख 16 जून को कर्णप्रयाग में हुई घटना के बाद जेल भेजे गए तीन निहंग सिखों की रिहाई और उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी कर रहे हैं। इस बीच क्षेत्र में इंटरनेट सेवाओं को रोक दिया गया है और ITBP के साथ ही PAC की टुकड़ी तैनात की गई है। वहीं कर्णप्रयाग, जहां झगड़े की शुरुआत हुई थी। वहां प्रशासन ने धारा 163 लागू कर दी है, जो एक जगह पर लोगों के इक्कठा होने को प्रतिबंधित करती है।

लग रहे हैं कई आरोप

वहीं मामले को लेकर गुरुद्वारा संचालक बेहंत सिंह ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस कर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि छत पर चढ़े लोग वास्तविक और मान्यता प्राप्त निहंग सिख नहीं हैं। उनका कहना है क‍ि असली निहंग सिख किसी पंजीकृत संगठन अथवा समिति से जुड़े होते हैं, जबकि यहां मौजूद लोगों का किसी अधिकृत संस्था से संबंध नहीं है।

बढा था विवाद

उत्तराखंड में हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग पर एक मामूली विवाद ने अचानक हिंसक रूप ले लिया। पार्किंग को लेकर शुरू हुई कहासुनी निहंग सिखों और स्थानीय लोगों के बीच तलवारबाजी तक पहुंच गई, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बन गया। इस घटना में एक तीर्थयात्री समेत कुल पांच लोग घायल हो गए। घायलों में से एक की हालत गंभीर होने पर उसे एयरलिफ्ट कर देहरादून के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। घायलों की पहचान कर्णप्रयाग निवासी प्रकाश रावत (26), सुदर्शन कंडारी (55), गजपाल सिंह (50) और हरेंद्र सिंह (42) के रूप में हुई है। वहीं पांचवां घायल मनप्रीत सिंह (21) है, जो पंजाब के मोहाली का रहने वाला है। सभी घायलों का इलाज चल रहा है। हेमकुंड साहिब यात्रा इस वर्ष 23 मई से शुरू हुई थी।

इस घटना के बाद स्थानीय जिलाधिकारी (डीएम) विशाल मिश्रा और पुलिस अधीक्षक (एसपी) हालात को सामान्य करने और तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं। सुरक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह मामला संवेदनशील है, क्योंकि इसका असर पंजाब और उत्तराखंड के बीच संबंधों पर भी पड़ सकता है। वहीं, हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन एन.एस. बिंद्रा ने बुधवार को कहा कि कृपाण सिख धर्म में एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। उन्होंने बताया कि यह कमजोर लोगों की रक्षा करने, अन्याय और उत्पीड़न का सामना कर रहे लोगों की मदद करने तथा धर्म के मार्ग पर चलने के सिख कर्तव्य का प्रतीक माना जाता है। एन.एस. बिंद्रा ने कहा कि मंगलवार को हुई घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण थी। उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान सिखों को उनके धर्म के पालन और अभ्यास के हिस्से के रूप में कृपाण रखने का अधिकार देता है। हालांकि, हेमकुंड साहिब यात्रा पर आने वाले युवा श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे बिना किसी जरूरी कारण के तलवारें साथ न रखें।

Gurudwara Clash Nihang Sikh: रुद्रप्रयाग के गुरुद्वारे में भारी बवाल! मैनेजमेंट को बंधक बनाकर छत पर चढ़े निहंग सिख, लहरा रहे हथियार

Gurudwara Clash Nihang Sikh: उत्तराखंड में रुदप्रयाग जिले के नगरासू स्थित एक गुरुद्वारे में कुछ निहंग सिख श्रद्धालुओं ने जमकर हंगामा किया। इतना ही नहीं मैनेजमेंट को बंधक बनाते हुए गुरुद्वारे की छत पर चढ़ गए। आरोप है कि पंजाब से आए कुछ निहंग सिख श्रद्धालुओं ने रुद्रप्रयाग के नगरासू गुरुद्वारे पर हंगामा करने के बाद डायरेक्ट कब्जा कर लिया। उन्होंने वहां मौजूद एक सेवादार को बंधक बना लिया। ‘न्यूज 18’ की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुद्वारे की छत पर खड़े कुछ लोग हथियार लहराते भी नजर आए, जिससे इलाके में चिंता का माहौल है।

पुलिस ने बताया कि इस घटना में शामिल निहंग श्रद्धालु 16 जून को कर्णप्रयाग बाजार में एक घटना के बाद गिरफ्तार किए गए निहंगों को छोड़े जाने की मांग कर रहे थे। पुलिस के मुताबिक, निहंग गुरुद्वारे के मैनेजमेंट को भी अपने साथ ले गए और उनके पास भाला, तलवार, कुल्हाड़ी और कृपाण जैसे हथियार हैं।

भारी संख्या में पुलिस बल तैनात

पुलिस ने बताया कि मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है। निहंग श्रद्धालुओं से बात कर उन्हें नीचे आने के लिए मनाने के प्रयास जारी हैं। रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक (SP) मौके पर स्थिति को नियंत्रित करने में जुटे हुए हैं।

श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारे में 16 जून को मत्था टेककर वापस आ रहे कुछ निहंग सिखों का कर्णप्रयाग बाजार में कृष्णा पैलेस होटल के पास वाहन खड़ा करने को लेकर स्थानीय लोगों से विवाद हो गया था। इसके बाद उन्होंने कथित रूप से तलवार से हमला कर चार लोगों को घायल कर दिया।

8 से 10 निहंग सिख गुरुद्वारे में मौजूद

पुलिस के मुताबिक, झड़प में एक सिख श्रद्धालु भी चोटिल हुआ था। घटना के संबंध में पंजाब के मोहाली जिले के रहने वाले चार सिख श्रद्धालुओं को गिरफ्तार भी किया गया था। जानकारी के अनुसार, शनिवार को पंजाब से आए कुछ निहंग सिखों ने कर्णप्रयाग की घटना में एकतरफा कार्रवाई के विरोध में रविवार को प्रस्तावित धरना प्रदर्शन में शामिल होने के लिए नगरासू गुरुद्वारे के प्रबंधकों से सहयोग की अपील की थी।

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निहंगो ने अपेक्षा के अनुरूप सहयोग न मिलने पर शनिवार शाम को नगरासू गुरुद्वारे में हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान तोड़फोड़ के बाद मैनेजमेंट को लेकर गुरुद्वारे की छत पर चढ़े तथा नारेबाजी करने लगे। रिपोर्ट के मुताबिक, 8 से 10 निहंग सिख गुरुद्वारे में मौजूद है। वे गुरुद्वारे के छत पर खड़े होकर हथियार लहरा रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि निहंग सिखों की शिकायत ये है कि गुरुद्वारा मैनेजमेंट ने कर्णप्रयाग की घटना पर खुलकर निहांगो का स्टैंड नहीं लिया।

Ram Mandir Daan Chori: दान पेटी से बैंक तक… राम मंदिर में कैसे होती है हर 1 रुपये की गिनती और निगरानी?

अयोध्या के राम मंदिर में कथित दान घोटाले की जांच के बीच लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर मंदिर में आने वाले करोड़ों रुपये, सोना-चांदी और कीमती सामान की गिनती और निगरानी कैसे होती है।

हर दिन एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और बड़ी मात्रा में नकद, सोना, चांदी और दूसरी कीमती वस्तुएं दान करते हैं। इन सभी दानों को सुरक्षित रखने और उनका हिसाब-किताब रखने के लिए एक बेहद सख्त और कई लेवल की व्यवस्था बनाई गई है।

35 दान पेटियों से शुरू होती है प्रक्रिया

मंदिर परिसर में कुल 35 बड़ी स्टील की दान पेटियां लगाई गई हैं। इन पर 24 घंटे CCTV कैमरों से निगरानी रखी जाती है।

इन दान पेटियों में डबल-लॉक सिस्टम होता है, यानी किसी एक व्यक्ति के पास इन्हें खोलने का अधिकार नहीं होता। जब कोई पेटी भर जाती है, तो ट्रस्ट के अधिकारी और बैंक प्रतिनिधि की मौजूदगी में उसे खोला जाता है।

इसके बाद दान की रकम और अन्य सामग्री को विशेष सुरक्षा वाले सीलबंद बैग में रखकर सेंट्रल काउंटिंग रूम में भेजा जाता है।

दो शिफ्ट में होती है गिनती

उच्च सुरक्षा वाले काउंटिंग रूम में सुबह से रात तक दो शिफ्ट में काम चलता है। इस प्रक्रिया में करीब 40 पेशेवर कैश टेलर, नेशनलाइज बैंकों के अधिकारी और ऑडिटर शामिल रहते हैं।

पहली शिफ्ट में:

  • नोटों को मूल्य के हिसाब से अलग किया जाता है।
  • मुड़े-तुड़े नोट सीधे किए जाते हैं।
  • खराब या कटे-फटे नोटों को अलग रखा जाता है।

दूसरी शिफ्ट में:

  • नोटों को हाई-स्पीड कैश काउंटिंग मशीनों से गिना जाता है।
  • नकली नोटों की जांच की जाती है।
  • पूरी प्रक्रिया कैमरों की निगरानी में होती है।
  • सोना-चांदी का अलग हिसाब

नकदी के अलावा श्रद्धालुओं की ओर से दान किए गए सोने के आभूषण, चांदी के सिक्के और दूसरी कीमती चीजों की जांच अलग टीम करती है।

सरकार की मान्यता प्राप्त मूल्यांकन विशेषज्ञ (Appraisers) इन वस्तुओं का वजन और मूल्य दर्ज करते हैं। इसके बाद उन्हें मंदिर के सुरक्षित अंडरग्राउंड वॉल्ट (तिजोरी) में रखा जाता है।

बैंक में जमा होने से पहले कई लेवल की जांच

दिनभर की गिनती पूरी होने के बाद नकद राशि का मिलान किया जाता है।

  • मशीनों के रिकॉर्ड और वास्तविक नकदी का आंकड़ा मिलाया जाता है।
  • सभी रिकॉर्ड की जांच होती है।
  • ट्रस्ट और वित्तीय एजेंसियों के प्रतिनिधि दस्तावेजों पर संयुक्त हस्ताक्षर करते हैं।

इसके बाद रकम को सुरक्षा व्यवस्था के बीच बैंक पहुंचाया जाता है और मंदिर ट्रस्ट के आधिकारिक खातों में जमा किया जाता है।

डिजिटल रसीद मिलने के बाद ही होता है अंतिम रिकॉर्ड

बैंक से डिजिटल रसीद मिलने के बाद ही राशि को ट्रस्ट के केंद्रीय लेखा-जोखा (Accounting System) में स्थायी रूप से दर्ज किया जाता है।

जांच एजेंसियां क्या देख रही हैं?

SIT अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इतनी कड़ी सुरक्षा और कई स्तरों की निगरानी के बावजूद अगर कोई गड़बड़ी हुई है तो वो किस चरण में हुई। जांच का मुख्य फोकस यह है कि कहीं मानवीय लापरवाही, रिकॉर्ड में हेरफेर या निगरानी की किसी कमजोरी का फायदा तो नहीं उठाया गया।

फिलहाल जांच जारी है और एजेंसियां पूरी वित्तीय प्रक्रिया की बारीकी से समीक्षा कर रही हैं।

राम मंदिर दान घोटाले में बड़ी कार्रवाई की तैयारी? चंपत राय के करीबी टिन्नू यादव की हो सकती है गिरफ्तारी!

 

राम मंदिर दान घोटाले में बड़ी कार्रवाई की तैयारी? चंपत राय के करीबी टिन्नू यादव की हो सकती है गिरफ्तारी!

अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित दान चोरी मामले में बड़ी कार्रवाई की तैयारी की खबरें सामने आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी माने जाने वाले रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव पर कानूनी शिकंजा कस सकता है।

सूत्रों का कहना है कि मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) टिन्नू यादव, दान की गिनती में शामिल कर्मचारियों और कुछ बैंक अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर सकती है। बताया जा रहा है कि उनके खिलाफ केस दर्ज होने की संभावना है और आगे चलकर गिरफ्तारी भी हो सकती है।

पत्नी ने आरोपों को बताया साजिश

टिन्नू यादव की पत्नी पूनम यादव ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे उनके पति की छवि खराब करने की साजिश बताया है।

उन्होंने कहा कि उनके परिवार को पिछले कई दिनों से मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा है और बिना किसी ठोस सबूत के तरह-तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं।

पूनम यादव के मुताबिक, उनके पास मौजूद संपत्तियों और घर को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं, वे पूरी तरह गलत हैं। उन्होंने कहा कि उनका घर 2008 में खरीदा गया था और 2015 में बनाया गया था, जब राम मंदिर पर फैसला भी नहीं आया था।

क्या चंपत राय ट्रस्ट से हट सकते हैं?

सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय समेत ट्रस्ट के कुछ अन्य पदाधिकारी स्वेच्छा से अपनी जिम्मेदारियों से अलग होने पर विचार कर सकते हैं। इसमें ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा और गोपाल राव का नाम भी शामिल बताया जा रहा है।

इसके अलावा, जिन पदाधिकारियों की कथित लापरवाही के कारण दान चोरी का मामला सामने आया, उन्हें ट्रस्ट से हटाया जा सकता है।

क्या है पूरा मामला?

राम मंदिर दान चोरी मामला उन आरोपों से जुड़ा है जिनमें दावा किया गया है कि श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए सोने, चांदी और हीरे के आभूषणों को कथित तौर पर नकली वस्तुओं से बदल दिया गया। साथ ही नकदी में भी गड़बड़ी और चोरी के आरोप लगे हैं।

जांच एजेंसियां दान के रिकॉर्ड, आभूषणों के रखरखाव और वित्तीय लेन-देन में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही हैं। देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक से जुड़े होने के कारण इस मामले ने व्यापक जनचर्चा और पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और अधिकारियों की ओर से अभी अंतिम निष्कर्ष या आधिकारिक आरोप तय नहीं किए गए हैं। इसलिए जांच पूरी होने तक सभी आरोपों को कथित माना जा रहा है।

महाराष्ट्र के परभणी में बड़ा हादसा, हनुमान मंदिर की छत गिरने से मलबे में दबे 20 से 25 लोग

महाराष्ट्र के परभणी जिले के मानवत तालुका स्थित यशवाड़ी देवस्थान में बड़ा हादसा हो गया। मंदिर के गर्भगृह के सामने बन रहे सभामंडप का छत अचानक भरभराकर गिर गया, जिसके मलबे में 20 से 25 श्रद्धालुओं के दबे होने की आशंका है। हादसे के बाद प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंच गए हैं और बचाव कार्य जारी है। मलबे में फंसे श्रद्धालुओं को बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है।

कई लोगों हुए घायल 

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, शनिवार होने के कारण हनुमान मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की काफी भीड़ थी। बड़ी संख्या में लोग दर्शन करने पहुंचे थे। इसी दौरान निर्माणाधीन सभा भवन की छत का एक हिस्सा और उसे सहारा देने वाला एक खंभा अचानक गिर गया। हादसे के समय नीचे कई श्रद्धालु मौजूद थे, जो मलबे की चपेट में आ गए। घटना के बाद मंदिर परिसर में अफरा-तफरी मच गई और लोगों ने तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया।

हॉल गिरने की वजह अभी साफ नहीं

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस हादसे में कम से कम 8 से 10 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। सभी घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद बचाव दल और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंच गए और मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया। शुरुआती खबरों में कुछ लोगों की मौत की आशंका जताई गई थी, लेकिन खबर लिखे जाने तक प्रशासन ने किसी भी मौत की आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी।

बताया जा रहा है कि मंदिर परिसर में बन रहे इस सभा भवन का निर्माण कार्य पिछले कई दिनों से चल रहा था। हादसे के बाद निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल राहत और बचाव अभियान जारी है। अधिकारियों का कहना है कि हॉल गिरने की असली वजह की जांच की जा रही है। साथ ही, मलबे में फंसे लोगों और घायलों की सही संख्या का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।