ईरान में खामेनेई के जनाजे से पहले खुफिया रिपोर्ट लीक, एडवांस में तैयार हुईं 3000 कब्रें! ऐसा क्या होने जा रहा?

ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई और उनके परिवार के सदस्यों अंतिम विदाई की रस्में उनकी मौत के करीब चार महीने बाद शुक्रवार को शुरू हुईं हैं। अंतिम विदाई की रस्में तीन जुलाई से 9 जुलाई तक चलेगा। वहीं मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के अधिकारी पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के प्रस्तावित एक सप्ताह लंबे अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी भीड़ को संभालने की तैयारी कर रहे हैं। अधिकारियों को आशंका है कि भगदड़ या भीड़ से जुड़ी घटनाओं में 1,500 से 3,000 लोगों की जान जा सकती है या कई लोग घायल हो सकते हैं।

3000 लोगों के मरने की जताई आशंका 

जर्मन अखबार वेल्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी रेड क्रिसेंट और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संगठन ने पहले उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा अरेफ को एक गोपनीय पत्र भेजा था। इसमें चेतावनी दी गई थी कि अंतिम यात्रा के दौरान सबसे खराब स्थिति में 1,500 से 3,000 लोगों की मौत हो सकती है।

अधिकारियों ने दिए गए ये निर्देश 

रिपोर्ट के मुताबिक, आपातकालीन सेवाओं से जुड़े अधिकारियों ने किसी भी बड़ी दुर्घटना से निपटने के लिए विस्तृत तैयारी की है। उन्हें आशंका है कि अंतिम संस्कार में लाखों लोगों की भीड़ और तेज गर्मी के कारण भगदड़ मच सकती है या भीड़ से जुड़े गंभीर हादसे हो सकते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तेहरान नगर निगम के एक कर्मचारी ने बताया कि बेहश्त-ए ज़हरा कब्रिस्तान में पहले से ही हजारों अतिरिक्त कब्रें तैयार कर ली गई हैं। कर्मचारी के अनुसार, अधिकारियों को 3,000 तक शवों के अंतिम संस्कार की तैयारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। उनका कहना था कि इतनी बड़ी भीड़ और भीषण गर्मी में क्या स्थिति बनेगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।

मौत के करीब चार महीने बाद हो रहा अंतिम संस्कार

रिपोर्ट के अनुसार, किसी बड़े हादसे की स्थिति से निपटने के लिए अधिकारियों ने शवों की पहचान और लापता लोगों की तलाश के लिए एक विशेष टीम भी बनाई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान के  सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की 28 फरवरी को ईरान-इजराइल युद्ध के पहले दिन हुए एक इजराइली हमले में मौत हो गई थी। इस हमले में उनके परिवार के कई सदस्य और कुछ वरिष्ठ अधिकारी भी मारे गए थे। उस समय उनकी उम्र 86 वर्ष थी। रिपोर्ट के मुताबिक, अंतिम संस्कार का कार्यक्रम एक सप्ताह तक चलेगा। खामेनेई का ताबूत तीन दिन तक तेहरान में रखा जाएगा। इसके बाद मंगलवार को उसे पवित्र शहर कोम ले जाया जाएगा। बुधवार को इराक में अंतिम यात्रा निकाली जाएगी और गुरुवार को उन्हें उत्तर-पूर्वी ईरान के उनके पैतृक शहर मशहद में दफनाया जाएगा।

पहले भी हुआ है ये हादसा 

साल 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में कासिम सुलेमानी की मौत के बाद उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए पूरे ईरान में लाखों लोग सड़कों पर उतर आए थे। 7 जनवरी 2020 को उनके गृहनगर केरमान में अंतिम यात्रा के दौरान भारी भीड़ के बीच भगदड़ मच गई, जिसमें कम से कम 56 लोगों की मौत हो गई और 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इस हादसे के बाद अधिकारियों को अंतिम संस्कार की प्रक्रिया कुछ घंटों के लिए रोकनी पड़ी, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और इलाके को सुरक्षित बनाया जा सके। WELT की रिपोर्ट के मुताबिक, अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में भी लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना है। इसी वजह से ईरानी अधिकारी पहले से पूरी तैयारी कर रहे हैं, ताकि 2020 जैसी कोई दुखद घटना दोबारा न हो।

न्यूयार्क में UN मुख्यालय के बाहर तिब्बती कार्यकर्ता का आत्मदाह:चीन की बर्बरता के खिलाफ उठाया कदम, धर्मशाला में आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र (UN) मुख्यालय के बाहर तिब्बती मूल के एक अमेरिकी कार्यकर्ता द्वारा आत्मदाह करने का एक बेहद स्तब्ध करने वाला मामला सामने आया है। इस समाचार के बाद हिमाचल के धर्मशाला में शोक की लहर है। यहां उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। मृतक की पहचान लोबसांग पाल्डेन (लोबगा रंगजेन) के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, लोबगा ने यह आत्मघाती कदम तिब्बत में चीन की बढ़ती दमनकारी नीतियों और हाल ही में बीजिंग द्वारा लागू किए गए ‘जातीय एकता और प्रगति’ कानून के कड़े विरोध में उठाया। इस घटना के बाद से ही दुनिया भर में निर्वासित जीवन जी रहे तिब्बतियों में शोक और आक्रोश की लहर है। तिब्बती ध्वज और पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे थे लोबगा प्रत्यक्षदर्शियों और रिपोर्टों के अनुसार, जब लोबगा रंगजेन संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर पहुंचे, तो उन्होंने तिब्बत की पारंपरिक पोशाक ‘चुपा’ पहनी हुई थी। उनके एक हाथ में तिब्बत का राष्ट्रीय ध्वज था। उन्होंने वहां चीन विरोधी नारे लगाए और खुद को आग के हवाले कर दिया। आत्मदाह से ठीक पहले जारी किया भावुक वीडियो संदेश कदम उठाने से ठीक पहले लोबगा ने एक वीडियो संदेश जारी किया था, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में उन्होंने दुनिया भर के तिब्बतियों से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि तिब्बत की स्वतंत्रता और हमारे मौलिक अधिकारों के लिए संघर्ष को तेज करना होगा। कोई भी राष्ट्रीय लक्ष्य बिना कड़े प्रयासों के हासिल नहीं होता। हम सभी को क्षेत्र, संप्रदाय और व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं से ऊपर उठकर देश हित में अपना सर्वोच्च योगदान देना होगा।” धर्मशाला में शोक: केंद्रीय तिब्बती प्रशासन ने आयोजित की प्रार्थना सभा इस दुखद घटना की खबर जैसे ही हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला पहुंची, वहां माहौल गमगीन हो गया। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (CTA) के सिक्योंग हॉल में दिवंगत आत्मा की शांति के लिए एक विशेष और भव्य प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। इस सभा में प्रशासन के शीर्ष नेतृत्व, बौद्ध भिक्षुओं और सभी सरकारी कर्मचारियों ने भाग लेकर लोबगा को श्रद्धांजलि दी। “चीन के कठोर कानूनों ने उठाया कदम उठाने पर मजबूर किया” — सिक्योंग पेनपा त्सेरिंग केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के सिक्योंग (राष्ट्रपति) पेनपा त्सेरिंग ने घटना पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि चीन द्वारा तिब्बत में थोपे जा रहे कठोर और अमानवीय कानूनों ने ही लोबगा को यह आत्मघाती कदम उठाने के लिए विवश किया है। हालांकि, हम तिब्बती प्रशासन की ओर से सभी नागरिकों से पुरजोर अपील करते हैं कि वे इस तरह आत्मदाह का रास्ता न चुनें।” इसी कड़ी में सीटीए के धर्म और संस्कृति मंत्री ने भी मानव जीवन को अनमोल बताते हुए कहा कि तिब्बत के इस लंबे और ऐतिहासिक संघर्ष को जिंदा रखने के लिए युवाओं के जीवन को बचाना और जीवित रहकर लड़ना सबसे ज्यादा आवश्यक है। 2009 से अब तक 157 तिब्बती दे चुके हैं जान उल्लेखनीय है कि तिब्बत की आजादी, मानवाधिकारों की बहाली और तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा की वतन वापसी की मांग को लेकर आत्मदाह का यह कोई पहला मामला नहीं है। वर्ष 2009 से लेकर अब तक तिब्बत के भीतर और दुनिया के अलग-अलग कोनों में कुल 157 तिब्बती नागरिक न्याय की गुहार लगाते हुए आत्मदाह कर अपने प्राणों की आहुति दे चुके हैं।

Sawan 2026: 30 जुलाई से शुरू होगा भगवान शिव का प्रिय महीना सावन, मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए इस माह में जरूर करें तुलसी की मंजरी का उपाय

Sawan 2026: हिंदू धर्म में सावन के महीने को बहुत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस माह का विशेष स्थान है। यह भगवान शिव का प्रिय माह है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दौरान श्रद्धालु कई तरह के धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-पाठ करते हैं। माना जाता है कि सावन में सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं, सुख-शांति और समृद्धि प्राप्त होती है तथा भगवान शिव की कृपा बनी रहती है।

सावन 2026 के करीब आते ही देशभर के शिवभक्त व्रत, पूजा, कांवड़ यात्रा और धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारियों में जुट जाएंगे। यह पूरा महीना भगवान शिव की भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर माना जाता है। इस माह में तुलसी का पौधा लगाना और उसमें मंजरी आना बहुत शुभ माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, सावन में तुलसी का पौधा लगाने से सारी नेगेटिविटी दूर हो जाती है।

मां लक्ष्मी की कृपा का संकेत है तुलसी में मंजरी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी पर मंजरी आना अत्यंत शुभ संकेत माना जाता है। यह इस बात का प्रतीक है कि मां लक्ष्मी की कृपा आपके घर पर बनी हुई है और जल्द ही कोई शुभ समाचार मिल सकता है।

तुलसी की मंजरी करें श्री हरि को अर्पित

सावन के महीने में अक्सर घर में लगी तुलसी में मंजरी आने लगती है। तुलसी में मंजरी आना शुभ संकेत माना जाता है। यह भगवान विष्णु को भी प्रिय है। इसलिए सावन में इसके ये उपाय जरूर करने चाहिए

  • तुलसी की मंजरी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। यदि तुलसी पर मंजरी आ जाए, तो उसे तोड़कर भगवान विष्णु या लड्डू गोपाल को अर्पित करना चाहिए। इससे आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।
  • मंजरी को कभी भी शिवलिंग पर न चढ़ाएं, क्योंकि शास्त्रों में इसे वर्जित माना गया है।
  • यदि मंजरी सूख जाए, तो इसे फेंकने के बजाय गमले की मिट्टी में डाल दें। इससे नए तुलसी के पौधे उगेंगे, जिससे घर में हरियाली और बरकत बनी रहती है।

घर में तुलसी लगाने के नियम

तुलसी का पौधा घर में लगाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। बहुत से लोग सावन में घर में तुलसी का पौधा लगाते हैं। आइए जानें इसे लगाने के नियम

  • तुलसी का पौधा हमेशा घर की उत्तर या पूर्व दिशा में लगाना चाहिए।
  • तुलसी की पूजा करना अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि के लिए फलदायी है।
  • बारिश के मौसम में नमी के कारण मिट्टी में पानी रुक सकता है, जिससे जड़ें सड़ सकती हैं। अतः तुलसी के गमले में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखें।

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अयातुल्ला खामेनेई का अंतिम संस्कार शुरू, लाखों लोगों के आने की उम्मीद, जानें 6 दिन का पूरा कार्यक्रम

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को अधिकारी “सदी का अंतिम संस्कार” बता रहे हैं। सरकार के अनुसार, इस ऐतिहासिक आयोजन में करीब 1.2 करोड़ से लेकर 2 करोड़ (20 मिलियन) लोगों के शामिल होने की संभावना है, जिससे यह देश के इतिहास का सबसे बड़ा सार्वजनिक शोक समारोह बन गया है। राजधानी तेहरान से शुरू हुए इस छह दिवसीय कार्यक्रम में भारी भीड़ उमड़ रही है और कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। इसी बीच यह भी सामने आया है कि खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई सुरक्षा कारणों से अंतिम संस्कार समारोह में शामिल नहीं होंगे, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

अभूतपूर्व तैयारियां और कड़ी सुरक्षा

इस बार की तैयारियां किसी भी सरकारी कार्यक्रम से कहीं ज्यादा बड़ी बताई जा रही हैं। पूरे आयोजन की जिम्मेदारी इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) की प्रमुख इकाई “मोहम्मद रसुलोल्लाह कोर” संभाल रही है। तेहरान से लेकर अन्य शहरों तक सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है और हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

दुनिया भर की नजरें

तेहरान में होने वाला यह आयोजन सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि बड़ा राजनीतिक मंच भी बन गया है। दर्जनों देशों से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्री और संसद अध्यक्ष जैसे नेता शामिल हो रहे हैं। करीब 800 विदेशी पत्रकार इस पूरे कार्यक्रम की कवरेज कर रहे हैं, जिससे इसकी वैश्विक अहमियत और बढ़ गई है।

भीड़ प्रबंधन और दर्शन की व्यवस्था

अधिकारियों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था की है। खामेनेई का पार्थिव शरीर ऊंचे मंच पर रखा गया है, जहां लोग 15-20 मिनट के भीतर दर्शन कर बाहर निकल रहे हैं। जमकारान मस्जिद जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर जनाजे की नमाज और अन्य रस्में भी आयोजित की जा रही हैं।

छह दिनों का पूरा कार्यक्रम

अंतिम संस्कार कई शहरों में चरणबद्ध तरीके से हो रहा है:

  • 4–6 जुलाई: तेहरान में अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि
  • 7 जुलाई: कोम में धार्मिक कार्यक्रम
  • 8 जुलाई: इराक के नजफ और कर्बला में जुलूस
  • 9 जुलाई: मशहद में अंतिम दफन

इसके बाद पूरे देश में 40 दिनों तक शोक और श्रद्धांजलि कार्यक्रम चलेंगे।

प्रतीकात्मक संदेश

आयोजन का नारा “We Must Rise” रखा गया है, जिसे मुट्ठी भींचे हाथ के प्रतीक के साथ जोड़ा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ अंतिम विदाई नहीं, बल्कि ईरान की राजनीतिक ताकत और शिया दुनिया में उसके प्रभाव का प्रदर्शन भी है।

वैश्विक शोक और ऐतिहासिक भीड़

तेहरान की सड़कें लाखों लोगों से भर चुकी हैं। काले कपड़ों में उमड़ी भीड़, ट्रैफिक जाम और सुरक्षा घेराबंदी ने पूरे शहर को शोक के विशाल मंच में बदल दिया है। यह आयोजन न सिर्फ ईरान बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक ऐतिहासिक और भू-राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घटना बन चुका है।

खामेनेई के अंतिम संस्कार में बेटे मुजतबा नहीं पहुंचे:100 से ज्यादा देशों के नेता शामिल; रूस, चीन, भारत ने टॉप लीडर्स नहीं भेजे

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम विदाई की रस्में शुरू हो गई हैं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान समेत देश की टॉप लीडरशिप शुक्रवार को तेहरान में खामेनेई को श्रद्धांजलि देने पहुंचा था। इस दौरान सुरक्षा वजहों से अयातुल्लाह अली खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई शामिल नहीं हुए। अंतिम संस्कार के कार्यक्रमों में 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। हालांकि रूस, चीन, भारत और तुर्किये जैसे देशों के टॉप लीडर्स ने इससे दूरी बरती। ईरान की तरफ से न्योता भेजे जाने के बावजूद इन्होंने अपने निचले स्तर के प्रतिनिधियों को भेजा। हालांकि पाकिस्तान, इराक, आर्मेनिया, ताजिकिस्तान, जॉर्जिया जैसे देशों के टॉप लीडर्स समारोह में पहुंचे। वहीं, भारत की तरफ से आधिकारिक तौर पर विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन शामिल हुए। खामेनेई की अंतिम यात्रा की 5 तस्वीरें… पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

थाइलैंड में बच्चे ने 10 बौद्ध भिक्षुओं को कुचला, VIDEO:बिना इजाजत पिता का पिकअप ट्रक चला रहा था, 10 किमी चलाने के बाद कंट्रोल खोया

थाईलैंड के मुकदाहन शहर में गुरुवार को एक बच्चे ने पिकअप ट्रक से बौद्ध भिक्षुओं के जुलूस को कुचल दिया। जिसमें कम से कम 10 भिक्षुओं की मौत हो गई और 5 गंभीर रूप से घायल है। पुलिस के मुताबिक, 11 साल का एक लड़का अपने माता-पिता का पिकअप ट्रक बिना इजाजत लेकर निकला था। करीब 10 किलोमीटर चलाने के बाद उसने वाहन से नियंत्रण खो दिया और तीर्थयात्रा पर निकले भिक्षुओं के जुलूस में जा घुसा। यह हादसा स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 11 बजे हुआ। भिक्षुओं का समूह सड़क किनारे एक लाइन में पैदल चल रहा था। स्थानीय रेस्क्यू संगठन की ओर से जारी CCTV फुटेज में पिकअप ट्रक तेज रफ्तार में जुलूस को टक्कर मारता नजर आया। 35 भिक्षु और पांच श्रद्धालु तीर्थयात्रा पर निकले थे थाईलैंड की 93% से ज्यादा आबादी बौद्ध धर्म को मानती है। सार्वजनिक धार्मिक यात्राएं और जुलूस आम बात हैं। मुकदाहन के गवर्नर वोरायन बुन्नारात के मुताबिक, गुरुवार को कुल 35 बौद्ध भिक्षु और पांच आम श्रद्धालु एक मंदिर से दूसरे मंदिर तक पैदल तीर्थयात्रा कर रहे थे। यात्रा शुरू होने के कुछ ही समय बाद यह हादसा हो गया। अधिकारियों के अनुसार, पांच भिक्षुओं की मौत मौके पर हुई, जबकि अन्य ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। कई घायलों का इलाज चल रहा है। मुकदाहन अस्पताल ने घायलों के इलाज के लिए लोगों से तत्काल रक्तदान की अपील भी की है। बच्चे के परिजनों ने पुलिस को पिकअप ट्रक न होने की सूचना दी पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि लड़का घर पर अकेला था। वह उस दिन अस्वस्थ होने के कारण स्कूल नहीं गया था। इसी दौरान उसने अपने माता-पिता का पिकअप ट्रक बिना अनुमति ले लिया। जब परिजनों को पिकअप घर पर नहीं मिली तो उन्होंने पुलिस को इसकी सूचना दी। पुलिस ने हादसे के बाद वाहन को जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। पुलिस ने अभी तक कोई केस दर्ज नहीं किया प्रांतीय पुलिस प्रमुख मेजर जनरल पैरोज थाइफुत्सा ने कहा कि लड़का नाबालिग है। फिलहाल उससे पूछताछ नहीं हो सकी है क्योंकि वह सदमे में है और बयान देने की स्थिति में नहीं है। इसी वजह से अभी तक कोई आरोप तय नहीं किया गया है। पुलिस पूरे मामले की कानूनी प्रक्रिया और हादसे की परिस्थितियों की जांच कर रही है। बाद में BBC से बातचीत में पुलिस प्रमुख ने कहा कि लड़के की देखभाल उसके अभिभावकों, डॉक्टर और अन्य अधिकारियों की टीम कर रही है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक वह विशेष जरूरतों वाला बच्चा हो सकता है, हालांकि इस बारे में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। थाईलैंड दुनिया के सबसे ज्यादा सड़क हादसों वाले देशों में शामिल है। WHO के मुताबिक, हर साल सड़क दुर्घटनाओं में करीब 18 हजार लोगों की मौत होती है। हालांकि इस मामले में हादसे की वास्तविक वजह का पता पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।

Ram Mandir: राम मंदिर दान विवाद के बीच ट्रस्ट के इस बैठक पर टिकी सबकी नजर, जानें पूरा समीकरण

करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र अयोध्या का राम मंदिर चढ़ावे को लेकर उठे सवालों ने देश की राजनीति और धार्मिक जगत में हलचल मचा दी है। आरोप हैं कि राम मंदिर के दानपात्र में चढ़ाए गए करोड़ों रुपये के चंदे में गड़बड़ी हुई। अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान के इस्तेमाल को लेकर उठे सवालों के बीच 6 जुलाई को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक होने जा रही है। इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने की पेशकश की है। माना जा रहा है कि इस बैठक में ट्रस्ट के आगे के कामकाज और भविष्य को लेकर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। क्योंकि ट्रस्ट की व्यवस्था ऐसी है कि कुछ स्थायी ट्रस्टियों के पास ही फैसले लेने का सबसे ज्यादा अधिकार होता है।

ट्रस्ट की शुरुआत कैसे हुई?

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन फरवरी 2020 में किया गया था। यह ट्रस्ट अयोध्या जमीन विवाद पर नवंबर 2019 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बनाया गया। अदालत ने केंद्र सरकार को राम मंदिर के निर्माण और उसके संचालन के लिए एक ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया था। नई दिल्ली में हुई पहली बैठक में महंत नृत्य गोपाल दास को ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया गया। विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष चंपत राय को महासचिव और गोविंद गिरि महाराज को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व प्रधान सचिव और पूर्व आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्र को मंदिर निर्माण समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

ट्रस्ट में कौन-कौन सदस्य हैं?

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कुल 10 स्थायी ट्रस्टी हैं। हालांकि, ट्रस्टी विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद एक पद अभी खाली है।

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  • महंत नृत्य गोपाल दास: वे ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं और राम जन्मभूमि आंदोलन के सबसे वरिष्ठ संतों में गिने जाते हैं। उनकी तबीयत ठीक नहीं है और वे अस्पताल में भर्ती हैं। ऐसे में संभावना है कि 6 जुलाई की बैठक में वे शामिल नहीं हो पाएंगे।
  • चंपत राय: वे विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष और ट्रस्ट के महासचिव हैं। अगस्त 2020 में मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद से ट्रस्ट के रोज़मर्रा के कामकाज और कई अहम फैसलों में उनकी प्रमुख भूमिका रही है।
  • डॉ. अनिल मिश्र: अयोध्या के होम्योपैथी डॉक्टर और ट्रस्ट के शुरुआती सदस्यों में से एक हैं। वे मंदिर से जुड़े प्रशासनिक कामकाज की जिम्मेदारी संभालते हैं।
  • गोविंद गिरि महाराज: पुणे के प्रसिद्ध संत हैं। वे ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष हैं और ट्रस्ट के आर्थिक व वित्तीय मामलों की देखरेख करते हैं।
  • स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती: प्रयागराज स्थित ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हैं। वे ट्रस्ट से जुड़े प्रमुख धार्मिक नेताओं में शामिल हैं।
  • स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ जी महाराज: कर्नाटक के उडुपी स्थित पेजावर मठ के प्रमुख हैं और मध्व परंपरा के प्रमुख संतों में गिने जाते हैं।
  • युगपुरुष परमानंद गिरि महाराज: हरिद्वार के संत और आध्यात्मिक गुरु हैं। वे भी ट्रस्ट के महत्वपूर्ण सदस्यों में शामिल हैं।
  • महंत दिनेंद्र दास: वे अयोध्या के निर्मोही अखाड़े के वरिष्ठ संत हैं। राम जन्मभूमि विवाद के दौरान वे इस मामले के प्रमुख पक्षकारों में शामिल रहे थे।
  • कृष्ण मोहन: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े कार्यकर्ता हैं। उन्हें ट्रस्ट में कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद सदस्य बनाया गया। कामेश्वर चौपाल उन लोगों में शामिल थे जिन्होंने 1989 में प्रस्तावित राम मंदिर की पहली ईंट रखी थी।
  • खाली पद: अयोध्या के पूर्व शाही परिवार से जुड़े ट्रस्टी विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद ट्रस्ट में उनका पद अभी तक खाली है।

किसे वोट देने का अधिकार है और किसे नहीं?

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में सिर्फ स्थायी ट्रस्टियों को ही वोट देने का अधिकार है। सरकारी प्रतिनिधियों सहित पांच पदेन सदस्य बैठकों में शामिल तो होते हैं, लेकिन उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं है। इसलिए वे मतदान के जरिए किसी फैसले को बदल या प्रभावित नहीं कर सकते। यही वजह है कि ट्रस्ट के बड़े फैसलों का अधिकार स्थायी ट्रस्टियों के पास ही होता है। नए ट्रस्टी को शामिल करना हो या ट्रस्ट के कामकाज में कोई बड़ा बदलाव करना हो, इसके लिए स्थायी ट्रस्टियों के बहुमत की मंजूरी जरूरी होती है।

क्या चंपत राय और अनिल मिश्र पद छोड़ने के बाद भी ट्रस्ट में रह सकते हैं?

हां, ऐसा हो सकता है। ट्रस्ट से जुड़े लोगों के अनुसार, स्थायी ट्रस्टी को हटाने का कोई नियम नहीं है। अगर चंपत राय महासचिव का पद छोड़ देते हैं और अनिल मिश्र अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियां छोड़ देते हैं, तब भी वे ट्रस्ट के स्थायी सदस्य बने रहेंगे। वे तभी ट्रस्ट से बाहर होंगे, जब खुद अपना इस्तीफा देंगे। इसी वजह से 6 जुलाई की बैठक को काफी अहम माना जा रहा है। ट्रस्ट में एक स्थायी पद पहले से खाली है और अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की तबीयत खराब होने के कारण उनके बैठक में शामिल होने की संभावना भी कम है। ऐसे में बैठक में वोट देने वाले सक्रिय सदस्यों की संख्या सीमित रह सकती है।

आमंत्रित सदस्य कौन हैं और उनकी क्या भूमिका होती है?

ट्रस्ट में कुछ आमंत्रित सदस्य भी हैं। ये लोग बैठकों में शामिल होते हैं और अपनी राय रखते हैं, लेकिन उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं होता। इनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ पदाधिकारी सुरेश ‘भैयाजी’ जोशी और विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारी दिनेश चंद्र शामिल हैं। इसके अलावा कर्नाटक से विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारी गोपाल नागरकट्टे भी आमंत्रित सदस्य हैं। वे जनवरी 2021 से राम मंदिर के निर्माण और दूसरे सिविल कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। हालांकि, आमंत्रित सदस्य चर्चा में हिस्सा ले सकते हैं और अपने सुझाव दे सकते हैं, लेकिन ट्रस्ट के किसी भी फैसले पर वोट नहीं दे सकते।

अमरनाथ यात्रा 2026: बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहला जत्था रवाना, PM मोदी ने श्रद्धालुओं को दिए 5 संकल्प

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Amarnath Yatra 2026 : पहलगाम और बालटाल के लिए अमरनाथ यात्रियों का पहला जत्था पवित्र गुफा के लिए निकला। हर हर महादेव और बम बम भोले के जयकारों के साथ बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए निकले श्रद्धालु। यात्रा के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अमरनाथ यात्रियों को पत्र लिखकर कहा कि शिवभक्तों की यह यात्रा हर तरह से सुरक्षित और मंगलमय हो। उन्होंने यात्रा पर जा रहे श्रद्धालुओं को 5 संकल्प लेने को कहा। ALSO READ: Top News 3 July: अमरनाथ यात्रा के लिए उमड़ा आस्था का सैलाब, उत्तर भारत को गर्मी से राहत

 

पीएम मोदी ने पत्र में कहा कि जम्मू-कश्मीर में पवित्र अमरनाथ यात्रा में सम्मिलित होना, अपने आप में बहुत बड़ा सौभाग्य होता है। ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन हुई प्रथम पूजा के साथ ही भक्तों के लिए बाबा बर्फानी के दर्शन का क्रम शुरू हो जाता है। देश के कोने-कोने में श्रद्धालु इस पावन यात्रा में सम्मिलित होने के लिए तत्पर रहते हैं। हर वर्ष बाबा बर्फानी के प्रत्यक्ष दर्शन का यह अवसर, लाखों शिवभक्तों के लिए जीवन का एक अत्यंत शुभ और अविस्मरणीय अनुभव होता है। मैं इस वर्ष, यात्रा के इस अवसर पर आप सभी शिवभक्तों को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।

 

बाबा अमरनाथ के दर्शन की यह यात्रा, भारत की आध्यात्मिक यात्रा परंपरा का एक शाश्वत अध्याय है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष पूरे विश्व से सनातन संस्कृति को मानने वाले लाखों श्रद्धालु इस यात्रा में सम्मिलित होने के लिए जम्मू-कश्मीर पहुंचते हैं। अलग-अलग प्रांतों से, अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले और विविध परंपराओं को मानने वाले लोग, महादेव के दर्शन का संकल्प लेकर इस यात्रा को पूरा करते हैं।

पीएम मोदी ने इन लोगों का अभिनंदन किया

प्रधानमंत्री ने पत्र में कहा कि बीते कई दशकों से, श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड और जम्मू-कश्मीर सरकार बहुत कुशलता और सेवा भाव से यात्रा का प्रबंधन करते आ रहे हैं। इसके साथ ही, यात्रा को सुरक्षित संपन्न कराने में हमारे प्रशासन और सुरक्षाबलों की भी बहुत बड़ी भूमिका रहती है। इस वर्ष भी हजारों साथी इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। मैं इस अवसर पर भारतीय सेना, सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस, आईटीबीपी, बीएसएफ, एनडीआरएफ, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े चिकित्सकों और कर्मियों, प्रशासन के अधिकारियों, सफाई मित्रों तथा मठों की सेवा में जुड़े हर साथी का हृदय से अभिनंदन करता हूं। इन दो महीनों के दौरान, बाबा बर्फानी के पवित्र धाम में भारत की विविधता में एकता का अद्भुत स्वरूप भी देखने को मिलता है।

बाबा बर्फानी के धाम की यह यात्रा, हमें जम्मू-कश्मीर के आतिथ्य भाव और देशभर से आए भक्तों के समर्पण का भी दर्शन कराती है। यात्रा के हर आयोजन में, जम्मू-कश्मीर के हजारों स्थानीय नागरिक श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत करते हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले असंख्य भक्त भी, पवित्र गुफा यात्रा मार्गों पर भंडारों और लंगरों का संचालन करते हैं। निःस्वार्थ सेवा की यह भावना, हमारी सनातन संस्कृति और 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' के आदर्श की सजीव अभिव्यक्ति है।

 

अमरनाथ यात्रियों के लिए 5 संकल्प 

पहला संकल्प – हम अमरनाथ यात्रा के दौरान स्वच्छता के नियमों का पालन करें और पूरे यात्रा मार्ग में स्वच्छता बनाए रखने में अपना योगदान दें।

 

दूसरा संकल्प – हम प्रशासन के सभी आदेशों, यातायात के नियमों और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पूरी निष्ठा से पालन करें। यात्रा के दौरान बारिश की वजह से फिसलन और ठंड का विशेष ध्यान रखें।

 

तीसरा संकल्प – हम 'वोकल फॉर लोकल' की भावना से यात्रा के खर्चों का कम से कम 10 प्रतिशत उपयोग स्थानीय उत्पादों को खरीदने में करें। इससे जम्मू-कश्मीर के परिवारों और युवाओं की आजीविका को भी बल मिलेगा।

 

चौथा संकल्प – हम बाबा अमरनाथ यात्रा के समापन दिवस, अर्थात रक्षाबंधन के अवसर पर अपने भाई या बहन को एक पौधा भेंट करें और 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान को आगे बढ़ाएं।

 

पांचवां संकल्प – हम राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ पूरे वर्ष अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करें और विकसित भारत के निर्माण में अपना सक्रिय योगदान दें। मुझे विश्वास है कि बाबा अमरनाथ की दर्शन यात्रा, सनातन धर्म की आस्था, भारत की सांस्कृतिक एकता और सेवा की परंपरा का एक भव्य महोत्सव बनकर पूर्ण होगी।

 

उन्होंने कहा कि मेरी कामना है, बाबा अमरनाथ की असीम कृपा हम सभी पर बनी रहे। आपकी यात्रा सुरक्षित हो, मंगलमय हो और आपके जीवन में नई ऊर्जा, नई चेतना तथा नई आध्यात्मिक शक्ति का संचार हो।

 

बाबा बर्फानी हम सभी को अपने कर्तव्यों के प्रति और अधिक समर्पित बनाएं, ताकि हम मिलकर विकसित भारत के संकल्प को सिद्ध कर सकें।

Top News 3 July: अमरनाथ यात्रा के लिए उमड़ा आस्था का सैलाब, उत्तर भारत को गर्मी से राहत

top news 3 july

Top News 3 July : कड़ी सुरक्षा के बीच अमरनाथ यात्रा शुरू। उत्तर भारत को गर्मी से राहत। हार्मुज पर ईरान की सख्त चेतावनी। वेनेजुएला में भूंकप के 8 दिन बाद मलबे से जिंदा निकला गार्ड। पुर्तगाल और स्पेन फीफा विश्व कप के अगले दौर में। 3 जुलाई की बड़ी खबरें :

 

अमरनाथ यात्रा शुरू

पहलगाम और बालटाल के लिए अमरनाथ यात्रियों का पहला जत्था पवित्र गुफा के लिए निकला। हर हर महादेव और बम बम भोले के जयकारों के साथ बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए निकले श्रद्धालु। यात्रा के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। 

 

उत्तर भारत को गर्मी से राहत

जम्मू-कश्मीर में लगातार दूसरे दिन बादल फटने से कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति। उत्तराखंड में खराब मौसम के कारण बदरीनाथ हाईवे साढ़े 11 घंटे बंद रहा। बारिश से पंजाब, हरियाणा और उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों को भीषण गर्मी से राहत मिली।

 

हार्मुज पर ईरान की सख्त चेतावनी

ईरान के सैन्य कमान ने तेल टैंकरों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि हार्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले सभी जहाजों को उसके बताए रास्तों का ही इस्तेमाल करना होगा। अगर कोई जहाज इन नियमों को नहीं मानता है, तो उसे कठोर कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

 

8 दिन बाद मलबे से जिंदा निकला सुरक्षा गार्ड

नेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के 8 दिन बाद 43 वर्षीय सुरक्षा गार्ड हर्नान अल्बर्टो गिल फ्लोरेस को मलबे से जिंदा निकाला गया। भूकंप में अब तक 2,295 लोगों की मौत, 11 हजार से अधिक लोग घायल हुए हैं और राहत-बचाव कार्य जारी है। 

 

पुर्तगाल और स्पेन अगले दौर में

पुर्तगाल ने क्रोएशिया को 2-1 से हराकर फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ 16 में प्रवेश किया। क्रिस्टियानो रोनाल्डो और गोंजालो रामोस ने पुर्तगाल के लिए दागे गोल। ऑस्ट्रिया को 3-0 से हराकर स्पेन भी अगले दौर में पहुंचा। आज स्विट्‍जरलैंड का मुकाबला अल्जिरिया से होगा वहीं अंतिम 16 में पहुंचने के लिए ऑस्ट्रेलिया की भिडंत इजिप्ट होगी।

अयोध्या कांड में जीजा-साले निकले महाचोर, दान चोरी में अब होगी ED और IT की एंट्री

Ayodhya Ram Mandir donation theft

Ayodhya Ram Mandir donation theft: अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामले में अयोध्या पुलिस की जांच में एक ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने आस्था के केंद्र पर लगे इस दाग को और गहरा कर दिया है। पुलिस के मुताबिक, मंदिर में सबसे बड़ी चोरी साल 2025 की शुरुआत में आयोजित हुए कुंभ मेले के दौरान हुई, जब देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं के चढ़ावे से रामजी का खजाना लबालब था। इस महाघोटाले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) और इनकम टैक्स (IT) विभाग की एंट्री होने जा रही है, क्योंकि चोरी के पैसों से आधे दर्जन से ज्यादा प्रॉपर्टी खरीदने और कंबलों में नोटों की गड्डियां छिपाने की बात सामने आई है।

 

पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी पहले से ही छोटी-मोटी चोरियां कर रहे थे। लेकिन साल 2025 की शुरुआत में जब कुंभ मेले के दौरान अयोध्या में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा और दान में भारी उछाल आया, तो आरोपियों की नीयत पूरी तरह डोल गई। उन्होंने इस सुनहरे मौके का फायदा उठाकर आपस में साठगांठ की और करोड़ों रुपए के चढ़ावे पर हाथ साफ कर दिया। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी पर बागेश्वर बाबा का विस्फोटक दावा, कहा- अगर उनकी पर्ची खोल दी तो….

जीजा-साले ने खरीदीं आधा दर्जन संपत्तियां

इस खेल के सबसे बड़े आरोपी रिश्ते में जीजा-साले हैं। गिरफ्तार आरोपी लवकुश मिश्रा और उसके जीजा अनुकल्प मिश्रा ने मिलकर सबसे ज्यादा कैश उड़ाया। पाप की इस कमाई से उन्होंने देखते ही देखते आधे दर्जन से अधिक अवैध संपत्तियां खरीद लीं, जिसे पुलिस ने ट्रैक कर लिया है।

 

मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला के भाई अभिषेक के एक योग केंद्र पर जब पुलिस ने रेड मारी, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारियों की आंखें फटी रह गईं। वहां रखे चार बड़े बक्सों में नोटों की गड्डियों को बड़ी चालाकी से कंबलों के अंदर छिपाकर रखा गया था। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि इनमें से एक बक्से पर बाकायदा 'राम राज्य कोष' लिखा हुआ था। ALSO READ: चढ़ावा चोरी के आरोपियों को झटका, अयोध्या का कोई वकील नहीं करेगा पैरवी

चंपत राय के ड्राइवर के घर भी मिला कैश

इस पूरे स्कैम का सबसे सनसनीखेज पहलू है आरोपी टिन्नू यादव की गिरफ्तारी। टिन्नू यादव कोई और नहीं, बल्कि राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का निजी ड्राइवर था। ड्राइवर होने के नाते उसकी पहुंच बहुत अंदर तक थी और उसी के पास नोटों की गिनती वाले अति-सुरक्षित कमरे की एक चाबी रहती थी। टिन्नू के घर से भी पुलिस को भारी मात्रा में कैश मिला है।

अब ED और IT कसेंगे शिकंजा

यह मामला अब सिर्फ स्थानीय पुलिस तक सीमित नहीं रहा। पुलिस अब इस पूरे मनी ट्रेल (पैसों के लेन-देन के रास्ते) की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) को पत्र लिख रही है, जबकि अवैध संपत्तियों की जांच के लिए इनकम टैक्स विभाग की मदद ली जा रही है। यही नहीं, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के कुछ कर्मचारी भी पुलिस के रडार पर हैं, क्योंकि तिजोरी की चाबी रखने वाले बैंक स्टाफ की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी चोरी मुमकिन ही नहीं थी। आरोपियों के खातों में उनकी वैध कमाई से कई गुना ज्यादा का लेन-देन मिला है। इस मामले में अब तक की सबसे बड़ी रिकवरी 89 लाख रुपए की हुई है। ALSO READ: अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की खुलती जा रहीं परतें, SIT ने सौंपी रिपोर्ट, चंपत की भूमिका संदिग्ध

क्या है अयोध्या से जुड़ा यह पूरा मामला? 

अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और उद्घाटन के बाद से ही देश-विदेश से हर दिन लाखों श्रद्धालु यहां आ रहे हैं। इस वजह से मंदिर के दानपात्रों और काउंटरों पर हर महीने करोड़ों रुपए का नकद और चेक के माध्यम से दान आता है। इन पैसों को गिनने के लिए मंदिर परिसर में एक स्पेशल काउंटिंग रूम बनाया गया है, जहां बैंक के अधिकारी और ट्रस्ट के भरोसेमंद लोग मौजूद रहते हैं। यह पूरा मामला तब सामने आया जब मंदिर ट्रस्ट को ऑडिट और रूटीन चेकिंग के दौरान दान में आई रकम और बैंक में जमा हुई राशि के आंकड़ों में बड़ा अंतर (मिसमैच) नजर आया।

 

इसके बाद ट्रस्ट ने आंतरिक स्तर पर जांच शुरू की। पुलिस में औपचारिक FIR दर्ज होने से पहले ही ट्रस्ट ने मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला की निशानदेही पर 89 लाख रुपए की भारी-भरकम राशि बरामद कर ली थी। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए टिन्नू यादव (ड्राइवर), लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और अविनाश शुक्ला समेत कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में ट्रस्ट महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा भी हो चुका है।