D-Mart Share Price: Q2 में अच्छे बिजनेस के बावजूद शेयर 6% तक फिसला, क्या अभी भी खरीदने लायक है स्टॉक

दिग्गज निवेशक राधाकिशन दमानी की कंपनी एवेन्यू सुपरमार्ट्स के शेयरों में 5 अक्टूबर को दिन में 6 प्रतिशत तक की गिरावट दिखाई दी। BSE पर शेयर 3,574.40 रुपये के लो तक गया। जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही में कंपनी का बिजनेस अच्छा रहने के बावजूद शेयर में बिकवाली का दबाव है। कंपनी D-Mart सुपरमार्केट चेन की ओनर है। शनिवार को इसने शेयर बाजारों को बताया कि सितंबर 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन बेसिस पर ऑपरेशंस से रेवेन्यू सालाना आधार पर 18.4 प्रतिशत बढ़कर 19,206.18 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले यह 16,218.79 करोड़ रुपये था।

एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक, तिमाही आधार पर कंपनी का रेवेन्यू सितंबर 2026 तिमाही में 4.7 प्रतिशत बढ़ा। जून तिमाही में यह 18,343.49 करोड़ रुपये था। एवेन्यू सुपरमार्ट्स ने यह भी बताया कि 30 सितंबर 2026 तक इसके D-Mart स्टोर्स की कुल संख्या 518 थी। इस आंकड़े में महाराष्ट्र के नवी मुंबई स्थित सानपाड़ा का स्टोर भी शामिल है। यह स्टोर रीकंस्ट्रक्शन के कारण फिलहाल ग्राहकों के लिए बंद है।

D-Mart के स्टोर महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR), तमिलनाडु, पंजाब और राजस्थान में हैं। इन स्टोर्स में रोजमर्रा के घरेलू सामान और व्यक्तिगत इस्तेमाल के प्रोडक्ट्स समेत कई तरह के सामान मिलते हैं।

Avenue Supermarts का शेयर 6 महीनों में 17 प्रतिशत कमजोर

एवेन्यू सुपरमार्ट्स का मार्केट कैप 2.35 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। यह BSE 100 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर 3 महीनों में 9 प्रतिशत और 6 महीनों में 17 प्रतिशत गिरा है। 2 साल में 24 प्रतिशत नीचे आया है। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 4,642 रुपये और एडजस्टेड लो 3,528.65 रुपये है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 74.48 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

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शेयर पर ब्रोकरेज की राय

D-Mart के शेयर को ट्रैक करने वाले 32 एनालिस्ट्स में से 10 ने ‘बाय’ रेटिंग दी है। 13 ने ‘होल्ड’ और 9 ने ‘सेल’ की सलाह दी है। ब्रोकरेज फर्म CLSA ने एवेन्यू सुपरमार्ट्स के शेयर के लिए 5,723 रुपये के प्राइस टारगेट के साथ ‘हाई कन्विक्शन आउटपरफॉर्म’ रेटिंग दी है। बर्नस्टीन ने 5,000 रुपये के प्राइस टारगेट के साथ ‘आउटपरफॉर्म’ रेटिंग दी है। ब्रोकरेज ने कहा कि निवेशक आगे चलकर बिल-कट ग्रोथ और कंपनी के ग्रॉस मार्जिन प्रोफाइल पर नजर रखेंगे। यह भी उम्मीद जताई कि कंपनी FY27 में भी FY26 जैसी ही स्टोर खोलने की रफ्तार बरकरार रखेगी और सितंबर 2026 तिमाही के मार्जिन उम्मीद से बेहतर होंगे।

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एक आश्रम में हुई घटना का विश्लेषण

प्रेमानंद महाराज के शिष्यों का माधुकरी माँगना भी सोशल मीडिया का ग्लैमर बन गया। पिछले कुछ वर्षों में प्रेमानंद महाराज की लोकप्रियता को बढ़ाने और उनकी मार्केटिंग करने के जितने प्रयास हुए वैसा ब्रज में पहले कभी नहीं देखा गया। यह ब्रज की भक्ति परंपरा के अनुकूल नहीं था। परिणामतः केलि कुंज की आलोचनाएं भी होने लगी।

वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम में हुई घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। एक नौजवान भक्त की ऐसी रहस्यमय मृत्यु समाज और पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण है। इसकी जाँच हो रही है। पर इससे ज़्यादा चिंता की बात यह है कि कुछ सनातन धर्म विरोधी लोग इस दुर्घटना के लिए प्रेमानंद महाराज को ज़िम्मेदार ठहराकर उनपर कीचड़ उछाल रहे हैं। इस विषय में जो बात मैं आगे कहने जा रहा हूँ वो ऐसे आलोचकों को मेरा निष्पक्ष जवाब है। पर इसके साथ ही मैं उन बातों को भी यहाँ रखूँगा जिनको लेकर प्रेमानंद महाराज के चाहने वालों में भी लंबे समय से मंथन चल रहा है।

भक्तों को लगता है कि महाराज अपने चेलों के जाल में उलझ गए हैं। वे चेले जो महाराज की तपस्या को सोशल मीडिया पर वायरल करवाने की धुन में ब्रज के रसिक संतों की रहनी और आचरण को भूल बैठे हैं। आरोप है कि ऐसे चेले संपत्ति बनाने, कालोनियाँ बनाने और अपने-अपने साम्राज्य स्थापित करने में जुटे हैं।

प्रेमानंद महाराज एक लंबे अरसे से वृंदावन में रहकर तपस्वी का जीवन जी रहे थे। वे भीषण गर्मी के दिनों में भी घंटों यमुना जी की तपती रेत में पड़े रहकर भजन किया करते थे। प्रायः वे वृन्दावन की कँटीली झाड़ियों के बीच बैठ कर भी भजन करते थे। उन्होंने बरसों तक न भला खाया, न भला पहना। हम वृंदावनवासी जानते हैं कि वे वृन्दावन की गलियों में भिक्षा माँगकर रोटी खाते थे। 7-8 बरस पहले तक उनका नाम भी कोई नहीं जानता था। उनके दैन्य और तपस्या की प्रशंसा हर ब्रजवासी करता आया है। वे भी ब्रजवासियों के प्रति भारी श्रद्धा का भाव रखते हैं।

अब से कुछ वर्ष पहले तक यमुना किनारे एक बगीची में, अपने चंद शिष्यों के बीच वे प्रवचन किया करते थे। धीरे-धीरे उनके प्रवचन की लोकप्रियता बढ़ने लगी। देखते ही देखते लगभग हजार भक्त हर प्रातः उनका प्रवचन सुनने आने लगे। उस दौर में मैं भी प्रायः उनका प्रवचन सुनने उस बगीची में जाता था। धीरे-धीरे इस भीड़ में ऐसे युवाओं की संख्या बढ़ने लगी जो आईआईटी – आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़ कर देश विदेश में अपनी लाखों की नौकरी छोड़ कर आ गए और प्रेमानंद महाराज के शिष्य बन कर पीली चादर ओढ़ ली।

इन्हीं शिष्यों में कुछ ऐसे शिष्य भी थे जिन्होंने महाराज के प्रति अपने गहरे प्रेम को प्रदर्शित करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेना शुरू किया। पूरी दुनिया में उन्हें इतना प्रचारित कर दिया कि विराट कोहली से लेकर तमाम जानी-मानी हस्तियां  उनके दर्शन को आने लगी। महाराज की मार्केटिंग इस कदर की गई कि उनके दर्शन के लिए आधी रात से हज़ारों की भीड़ जमा होने लगी। इस भीड़ के कारण वृंदावन की यातायात व्यवस्था भी बाधित हुई। महाराज जब रात में सड़क पर पैदल निकलते तो हज़ारों लोग उनके दर्शन को खड़े रहते।

फिर तो वहाँ पैसे की वर्षा होने लगी। अब संपत्तियां खरीदने व बड़े-बड़े आश्रम बनाने की होड़ लग गई। यमुना की खादर में अवैध रूप से कॉलोनी बनाने के आरोप भी इन्हीं शिष्यों पर लगे। महाराज के दर्शन के लिए एडवांस टोकन मिलने लगे और भारी तामझाम का एक सुनियोजित आडंबर रच दिया गया।

इतना ही नहीं प्रेमानंद महाराज के कुछ वर्ष पहले ही बने शिष्य भी अब सोशल मीडिया पर अपनी मार्केटिंग करवाने लगे। किसी को शिव का स्वरूप बताया जाने लगा तो किसी को ब्रह्म ऋषि। सैंकड़ों सालों से ब्रज के संत घर-घर रोटी माँग कर प्रसाद पाते थे। इसे माधुकरी कहते हैं। ब्रज में ये संतों का सामान्य शिष्टाचार है।

पर किसी ने भी कभी इसे प्रचारित कर सेलिब्रिटी बनने की कोशिश नहीं की। प्रेमानंद महाराज के शिष्यों का माधुकरी माँगना भी सोशल मीडिया का ग्लैमर बन गया। पिछले कुछ वर्षों में प्रेमानंद महाराज की लोकप्रियता को बढ़ाने और उनकी मार्केटिंग करने के जितने प्रयास हुए वैसा ब्रज में पहले कभी नहीं देखा गया। यह ब्रज की भक्ति परंपरा के अनुकूल नहीं था। परिणामतः केलि कुंज की आलोचनाएं भी होने लगी। इसी सबके बीच महाराज के शिष्यों में सत्ता और संपत्ति को लेकर गुटबाजी और झगड़े शुरू हो गए।

इस सब से विचलित हो कर प्रेमानंद महाराज वृंदावन के अपने नए बने आश्रमों को छोड़ कर यमुना के उस पार बेल वन में चले गए। वहाँ जो बृजवासी गांव वाले रहते हैं वे परेशान हैं क्योंकि रात भर महाराज के दर्शनार्थी आते हैं। ब्रजवासी बच्चे घर से निकल जाए तो भीड़ में खो जाते हैं। सारे रास्ते जाम हो जाते हैं। अब वहाँ भी चेलों द्वारा कालोनियां बनाने का खेल चालू हो गया है। महाराज के प्रति श्रद्धा रखने वाले हम जैसे लाखों भक्त हैं। उनके शिष्य रसिक दुलारी शरण की मृत्यु से उस श्रद्धा में कोई कमी नहीं आई है। पर इतना अवश्य है कि अब समय आ गया है कि जब प्रेमानंद महाराज शिष्यों के बनाये इस आडंबर के जाल से निकल कर अपने मूल स्वरूप में लौट आएँ।

जहाँ तक रसिक दुलारी शरण की मृत्यु का प्रश्न है तो सच्चाई तो पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगी। पर इतना अवश्य है कि युवा साधकों के बीच ऐसी दुर्घटना होना कोई नई बात नहीं है। साधना की प्रारंभिक अवस्था में अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण न रख पाने के कारण कई युवा साधक अपने लिंग को हानि पहुँचा देते हैं। ये उनकी नासमझी या उत्साह के अतिरेक में उठाया गया एक मूर्खतापूर्ण कदम होता है। इन्द्रियों पर नियंत्रण, मन पर नियंत्रण होने के बाद होता है। अगर मन वास्तव में भगवत भक्ति में रम जाए तो हमारी सभी इंद्रियाँ स्वयं ही शांत हो जाती हैं।

इस तरह के जबरन किए गए प्रयासों से इन्द्रियों पर नियंत्रण नहीं होता ये हर साधक को जानना चाहिए। इस घटना का जो भी परिणाम हो इससे प्रेमानंद महाराज की प्रतिष्ठा में कोई आंच नहीं आएगी। पर उनके इर्द-गिर्द जमा शिष्यों को इससे सबक लेकर आत्मवालोकन करना चाहिए।

1 दिन में आधा दर्जन गोल्ड मेडल! तीरंदाजों से लेकर महिला ह़ॉकी टीम ने जीता खिताब

Asian Games

शुक्रवार का दिन कुछ ऐसा था जैसा भारतीय खेलों में कभी-कभी ही देखने को मिलता है – अविश्वसनीय, रोमांचक और जिसे एक ही हेडलाइन में समेटना मुश्किल हो। एक पहलवान था जो 9-2 से पिछड़ने के बावजूद गोल्ड मेडल जीतने में कामयाब रहा, तीन बॉक्सर जिन्होंने रिंग में गोल्ड मेडल की झड़ी लगा दी, तीरंदाज जिन्होंने आखिरकार दक्षिण कोरिया को हरा दिया, और सबसे बड़ी बात, महिला हॉकी टीम जिसने एशियाई खेलों का खिताब फिर से जीतने के लिए 44 साल का लंबा इंतज़ार खत्म किया।

भारत 16 स्वर्ण, 25 रजत और 35 कांस्य सहित 76 पदक जीतकर पदक तालिका में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। सबसे खास पल शाम को आया जब भारत ने महिला हॉकी फ़ाइनल में चीन को 1-0 से हराया और एशियाई खेलों के खिताब के लिए 44 साल का इंतज़ार खत्म किया। लालरेम्सियामी ने अपने 200वें इंटरनेशनल मैच में 10वें मिनट में एकमात्र गोल किया, लेकिन उसके बाद असली मेहनत गोलकीपर सविता पूनिया और मज़बूत डिफेंस को करनी पड़ी।

चीन ने पेनल्टी कॉर्नर, पेनल्टी स्ट्रोक और आखिरी मिनटों में गोलकीपर को हटाकर एक अतिरिक्त आउटफील्ड खिलाड़ी के साथ भारत पर दबाव बनाया। लेकिन भारत टस से मस नहीं हुआ। फ़ाइनल की सीटी बजने पर न सिर्फ़ गोल्ड मेडल मिला, बल्कि लॉस एंजेलिस 2028 ओलंपिक के लिए सीधे क्वालिफिकेशन भी हासिल हुआ।

अगर हॉकी ने शाम को रोमांच पैदा किया, तो सुजीत कलकल ने दोपहर में मुश्किल हालात से शानदार वापसी की। पुरुषों के 65 किग्रा फ्रीस्टाइल फ़ाइनल में भारतीय पहलवान सुजीत कलकल ताजिकिस्तान के अब्दुलमज़िद कुदिएव के खिलाफ़ 2-9 से पिछड़ रहे थे और ऐसा लग रहा था कि जीतना लगभग नामुमकिन है। लेकिन उन्होंने ज़बरदस्त वापसी की और दूसरे हाफ में चार बार प्रतिद्वंद्वी को गिराकर 10-9 से जीत हासिल की।

भारत को इन खेलों का पहला रेसलिंग गोल्ड दिलाया। इससे पहले, सुजीत ने सेमीफ़ाइनल में मौजूदा ओलंपिक चैंपियन जापान के कोटारो कियोका को क्राइटेरिया के आधार पर (3-3 स्कोर रहने पर) चौंकाते हुए हराया था। उन्होंने आखिरी समय में हुए हमले का डटकर सामना किया और गोल्ड मेडल के मुक़ाबले में जगह बनाई।

बॉक्सिंग रिंग में भी भारत का प्रदर्शन शानदार रहा। लवलीना बोरगोहेन ने महिलाओं के 75किग्रा फ़ाइनल में चीन की बाओ ज़ी यी को सर्वसम्मति से हराकर अपना पहला एशियाई खेलों का गोल्ड मेडल जीता। 2014 में मैरी कॉम की जीत के बाद एशियाई खेलों में महिलाओं की बॉक्सिंग में भारत का यह पहला गोल्ड मेडल था।

इसके बाद परवीन हुड्डा ने महिलाओं के 65 किग्रा फ़ाइनल में चीनी ताइपे की चेन निएन-चिन को 3-2 के करीबी ‘स्प्लिट-डिसीजन’ से हराया। फिर अंकुश पंघाल ने पुरुषों के 80 किग्रा फ़ाइनल में दक्षिण कोरिया के किम मिन सियोंग को हराकर बॉक्सिंग में भारत की हैट्रिक पूरी की।

और फिर तीरंदाज़ों की बारी आई। अंकिता भकत, कीर्ति और कुमकुम मोहोद ने दक्षिण कोरिया को हराकर महिलाओं के रिकर्व टीम इवेंट में भारत का पहला एशियाई खेलों का गोल्ड मेडल जीता। गोल्ड के बाद पुरुषों की रिकर्व टीम को सिल्वर मेडल मिला, जो दक्षिण कोरिया से हार गई थी। इसके अलावा, धीरज बोम्मादेवरा और कुमकुम मोहोद की मिक्स्ड टीम को भी सिल्वर मेडल मिला, क्योंकि फ़ाइनल में चीन की टीम जीत गई।

सेलिंग में नेत्रा कुमानन ने एक और ब्रॉन्ज़ मेडल दिलाया, जबकि सेपक टकरा के पुरुषों के क्वाड्रेंट इवेंट में जापान से सेमीफ़ाइनल में हारने के बावजूद भारत ने अपना पहला मेडल पक्का किया।

प्रणवी उर्स ने गोल्फ़ में भी भारत की चर्चा बनाए रखी; उन्होंने फ़ोर-अंडर 68 का स्कोर करके 15-अंडर पार तक पहुँचते हुए फ़ाइनल राउंड में बढ़त बना ली। जब हॉकी खिलाड़ी गले में गोल्ड मेडल पहनकर मैदान से बाहर निकले, तब तक भारत के लिए यह दिन यादगार बन चुका था – इसमें इतिहास, निराशा, वापसी और ऐसे पल भी थे जब स्कोरबोर्ड ने खेल को बेवजह मुश्किल बनाने की ठान ली थी। हालाँकि, शुक्रवार का दिन भारत के नाम रहा।

सेना के जवानों ने सेलिंग में दिलाया एतिहासिक सिल्वर मेडल, महिलाओं ने ब्रॉंज

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भारतीय जोड़ी मनु फ्रांसिस और प्रिंस कुरिसिंकल नोबल ने गुरुवार को एशियाई खेलों की सेलिंग प्रतियोगिता में पुरुष स्किफ की नौवीं रेस में रजत पदक जीता।हर्षिता तोमर और शीतल वर्मा की टीम ने महिलाओं की स्किफ सेलिंग स्पर्धा में कांस्य पदक जीता।

भारतीय जोड़ी ने नौ रेस में 24 नेट अंक और 28 कुल अंकों के साथ प्रतियोगिता समाप्त की और चीन से आगे रही। चीन दूसरी रेस, छठी रेस और आठवीं रेस में तीन बार अयोग्य घोषित किया गया।जापान ने 11 नेट अंक और 14 कुल अंकों के साथ स्वर्ण पदक जीता जबकि हांगकांग ने 15 नेट अंक और 18 कुल अंकों के साथ रजत पदक हासिल किया।

इससे पहले 31 वर्षीय फ्रांसिस और 30 वर्षीय नोबल ने नौ रेस के बाद कुल 23 अंक जुटाए और दूसरे स्थान पर रहे। दोनों भारतीय खिलाड़ी जो एर्नाकुलम के रहने वाले और रिश्ते में भाई हैं। चीन की जोड़ी ने 16 अंक के साथ स्वर्ण पदक जीता। इस स्पर्धा में सबसे कम कुल अंक हासिल करने वाली टीम विजेता बनती है।

चीन की टीम में वेन जैडिंग और लियू तियान शामिल थे।पुरुष स्किफ सेलिंग में प्रत्येक रेस में हासिल किए गए स्थान के आधार पर अंक दिए जाते हैं। पहला स्थान हासिल करने वाले खिलाड़ी को एक अंक मिलता है और कुल अंक सबसे कम होने पर जीत दर्ज होती है। स्किफ छोटी और हल्की नौकाएं होती हैं।

हांगकांग चीन के अकिरा ल्यूक साकाई और रसेल आयल्सवर्थ ने 24 अंक के साथ कांस्य पदक जीता।भारतीय जोड़ी ने तीसरी रेस जीती जबकि पहली, पांचवीं और नौवीं रेस में दूसरा स्थान हासिल किया। दूसरी ओर चीन ने चार रेस में पहला स्थान हासिल करके शीर्ष स्थान सुनिश्चित किया।

केरल में 2018 की विनाशकारी बाढ़ के दौरान जान गंवाने वाले मछुआरे के बेटे नोबल ने कहा कि अपने पहले एशियाई खेलों में पदक जीतना विशेष एहसास है।दोनों मुंबई स्थित आर्मी यॉटिंग नोड में प्रशिक्षण लेते हैं।फ्रांसिस के लिए यह मिश्रित भावनाओं वाला दिन रहा क्योंकि उन्हें लगा कि वे स्वर्ण पदक जीत सकते थे।

महिला स्किफ स्पर्धा में भारत की हर्षिता तोमर और शीतल वर्मा की जोड़ी 26 अंक के साथ चौथे और अंतिम स्थान पर रही। जापान ने 11 अंक के साथ इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता जबकि हांगकांग चीन 16 अंक के साथ दूसरे और चीन 23 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहा।भारतीय जोड़ी नौ में से किसी भी रेस में जीत दर्ज नहीं कर सकी। हालांकि उसने तीसरी और चौथी रेस में दूसरा स्थान हासिल किया।