Market Trend : निफ्टी के 24000 के ऊपर टिके रहने तक हर गिरावट में करें खरीदारी, आईटी और ऑटो सेक्टर के ये दो शेयर कर सकते हैं कमाल

Market Trend : मिले-जुले ग्लोबल संकेतों के बीच,14 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ खुले और निफ्टी 24,100 के नीचे कारोबार कर रहा है। 9.50 बजे के आसपास सेंसेक्स 462.88 अंक या 0.60 प्रतिशत गिरकर 77,153.52 पर और निफ्टी 118.00 अंक या 0.49 प्रतिशत गिरकर 24,093.00 पर कारोबार कर रहा है। लगभग 908 शेयरों में बढ़त देखने को मिल रही है। वहीं, 1363 शेयरों में गिरावट आई है और 165 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। निफ्टी पर बढ़त बनाने वाले प्रमुख शेयरों में हिंडाल्को,ONGC,TCS,इंफोसिस और विप्रो शामिल हैं। जबकि गिरावट वाले शेयरों में HCL टेक,श्रीराम फाइनेंस,इंटरग्लोब एविएशन,बजाज फाइनेंस और L&T शामिल हैं।

निफ्टी व्यू

बाजार की चाल पर बात करते हुए manasjaiswal.com के Technical Analyst मानस जायसवाल ने कहा कि कल गिरावट के साथ हुई ओपनिंग के बाद निफ्टी बैंक निफ्टी दोनों ने ही 20 डे मूविंग एवरेज पे सपोर्ट लिया और वहां पर बाइंग इंटरेस्ट देखने को मिला है। ऐसे में बाजार की ओवरऑल ट्रेंड अभी भी पॉजिटिव लग रहा है। निफ्टी जब तक 24,000 के ऊपर ट्रेड करता रहेगा तब तक हर गिरावट में खरीदारी करेंगे और 24,500 के आपको टारगेट सेट करके चलना चाहिए।

बैंक निफ्टी व्यू

बैंक निफ्टी की जहां तक बात है,ये जब तक 57,400 के ऊपर ट्रेड करता रहेगा,यहां पर भी पॉजिटिव ट्रेंड बना रहेगा। उम्मीद कि यहां पर आउट परफॉर्मेंस देखने को मिलेगा और बहुत ही जल्द ही यह इंडेक्स 58,900 को ब्रेक करके 59,000 की तरफ जाने की कोशिश करेगा। दोनों ही इंडाइससेस के ट्रेंड पॉजिटिव है और डिप पर खरीदारी करने की राय रहेगी।

मानस जायसवाल के पसंदीदा शेयर

मानस जायसवाल की पहली रिकमेंडेशन बजाज ऑटो है, जहां पर इंट्राडे चार्ट पर इनवर्स पैटर्न का ब्रेकआउट देखने को मिला है। बजाज ऑटो में 10,240 रुपए के स्टॉप लॉस से खरीदारी करने की राय रहेगी। इसमें 10,700 तक के टारगेट्स पॉसिबल है।

इनकी दूसरा रेमेंडेशन टाटा एलेक्सी है। अब ऐसा लग रहा है कि इस स्टॉक ने 3600 रुपए के आसपास एक बॉटम बना लिया है। इसमें हायर टॉप फायर बॉटम्स का कंफर्मेशन है। स्टॉक 10 डे मूविंग एवरेज के ऊपर निकला है। टाटा एलेक्सी में 3765 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ खरीदारी करेंगे। इसमें 3975 रुपए तक के टारगेट्स पॉसिबल है।

 

Market view : बाजार में गिरावट पर खरीदारी की रणनीति करेगी काम, आज इन दो शेयरों में हो सकती है अच्छी कमाई

 

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अब बिना कोयले और पानी के 24 घंटे में बनेगी बिजली, लद्दाख के पहाड़ों में ONGC ने कर दिखाया चमत्कार! दूसरा जियोथर्मल वेल खोदा गया

India’s first pilot geothermal power plant: भारत को रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ी कामयाबी मिली है। सरकारी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) ने लद्दाख की पुगा घाटी में अपने दूसरे जियोथर्मल वेल की ड्रिलिंग का काम पूरा कर लिया है। यह सफलता भारत के पहले पायलट जियोथर्मल पावर प्लांट को विकसित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और मजबूत कदम है।

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक ओएनजीसी की अनुसंधान और विकास शाखा ओएनजीसी एनर्जी सेंटर ने 14000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर करीब एक महीने के भीतर 1000 मीटर की गहराई तक इस दूसरे कुएं की ड्रिलिंग की है। कंपनी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि इस बार की ड्रिलिंग में पहले अभियान के मुकाबले समय और लागत दोनों में काफी सुधार आया है।

आइए विस्तार से जानते हैं कि यह पूरा प्रोजेक्ट क्या है और इससे लद्दाख और पूरे देश को कैसे बिना कोयले और पानी के 24 घंटे बिजली मिलेगी।

पहले कुएं की सफलता पर टिकी है इस दूसरे वेल की नींव

ओएनजीसी का यह दूसरा कुआं पुगा में खोदे गए पहले जियोथर्मल वेल की शानदार सफलता पर आधारित है। पुगा में कंपनी के पहले कुएं से पानी के बॉयलिंग पॉइंट से भी अधिक तापमान पर भाप पैदा हुई थी। पहले कुएं से निकले इस बेहद हाई टेंप्रेचर ने यह साबित कर दिया था कि लद्दाख के इस क्षेत्र में भू-तापीय (Geothermal) संसाधनों की अपार क्षमता मौजूद है।

1 मेगावाट का लगेगा पहला पायलट प्लांट, 24 घंटे मिलेगी बिजली

ONGC के मुताबिक यह दूसरा कुआं भारत के पहले 1-मेगावाट इलेक्ट्रिक पायलट जियोथर्मल पावर प्लांट के विकास में बेहद मददगार साबित होगा। यह सफलता देश में जियोथर्मल एनर्जी के व्यावसायिक इस्तेमाल का रास्ता साफ कर सकती है। इस परियोजना के अगले चरण में 1-मेगावाट का पायलट पावर प्लांट स्थापित करने की योजना है। दीर्घकालिक योजना के तहत इन भू-तापीय संसाधनों का विकास किया जाएगा ताकि लद्दाख जैसे सुदूर क्षेत्र को चौबीसों घंटे भरोसेमंद और निरंतर बेसलोड बिजली जी जा सके।

क्या है जियोथर्मल एनर्जी और क्यों है यह सौर-पवन ऊर्जा से बेहतर?

जियोथर्मल ऊर्जा बिजली पैदा करने और हीटिंग देने के लिए पृथ्वी की सतह के नीचे से निकलने वाली प्राकृतिक गर्मी का इस्तेमाल करती है। सौर और पवन ऊर्जा के उलट इसपर मौसम की स्थितियों का असर नहीं पड़ता। जियोथर्मल एनर्जी पूरी तरह से कम-कार्बन उत्सर्जन वाली ऊर्जा है जो बिना किसी रुकावट के चौबीसों घंटे बिजली की आपूर्ति कर सकती है।

भारत का सबसे भरोसेमंद क्षेत्र है पूर्वी लद्दाख का पुगा

पूर्वी लद्दाख में स्थित पुगा जियोथर्मल क्षेत्र को लंबे समय से भारत का सबसे प्रॉमिसिंग (उम्मीद से भरा) भू-तापीय संसाधन माना जाता रहा है। हालांकि इस क्षेत्र में दशकों से रुक-रुक कर खोज का काम किया जा रहा था लेकिन तकनीकी और आर्थिक चुनौतियों के कारण देश में अब तक व्यावसायिक रूप से भू-तापीय बिजली उत्पादन शुरू नहीं हो पाया था। अब ONGC के इस प्रयास से इसे नई रफ्तार मिली है।

2030 तक का भारत का महा-लक्ष्य

भारत इस समय सौर, पवन और जलविद्युत से आगे बढ़कर अपने रिन्यूएबल एनर्जी मिक्स में विविधता लाने का प्रयास कर रहा है। देश ने साल 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म-ईंधन आधारित बिजली क्षमता स्थापित करने का बड़ा लक्ष्य रखा है। लद्दाख का यह जियोथर्मल प्रोजेक्ट इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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