सौरव जोशी के E20 फ्यूल वाले वायरल वीडियो के बाद मर्सिडीज-बेंज इंडिया ने जारी किया बयान, कस्टमर्स को बताईं ये जरूरी बातें

सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में, मर्सिडीज-बेंज इंडिया के ऑफिशियल हैंडल ने कहा कि “सभी मर्सिडीज-बेंज पेट्रोल BS VI गाड़ियां E20 फ्यूल के साथ पूरी तरह से इस्तेमाल के लायक हैं और संबंधित अधिकारियों ने इसे सर्टिफाइड भी किया है।” भारत के पॉपुलर डेली व्लॉगर सौरव जोशी ने हाल ही में YouTube पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने दावा किया कि उनकी मर्सिडीज-बेंज लग्जरी गाड़ी का माइलेज सिर्फ दो दिनों में 17 से घटकर 5 हो गया।

उन्होंने कहा कि उनकी गाड़ी की एफिशिएंसी सिर्फ 48 घंटों में बहुत ज़्यादा गिर गई है। जोशी ने अपने दर्शकों से कहा, “कल मैंने आपको दिखाया था कि हमारी कार का माइलेज 17 से सीधे 9 पर आ गया था।” उन्होंने आगे कहा, “और क्या आपको पता है कि आज यह कितना हो गया है? आज यह पाच पर पहुंच गया है… इसे देखिए, यह पांच का माइलेज दिखा रहा है।”

जोशी ने इसके लिए लोकल फिलिंग स्टेशनों पर मिलने वाले फ्यूल को ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, “एथेनॉल की वजह से ही ऐसा हुआ है।” व्लॉगर ने बताया कि पहले पेट्रोल की एक फुल टैंक से गाड़ी लगभग 800 किलोमीटर तक चलती थी, लेकिन अब रिफिलिंग के बाद अनुमानित रेंज सिर्फ 480 किलोमीटर ही दिखाती है। उन्होंने कहा कि रेंज में आई इस भारी कमी की वजह से उन्हें जर्मन SUV के पेट्रोल इंजन में संभावित मैकेनिकल खराबी की चिंता हो रही है।

उन्होंने कहा, “पता नहीं यह कार कब खराब हो जाए… आजकल पेट्रोल भरवाने में भी बहुत डर लगता है।” जोशी ने यह भी बताया कि उनके पास G-Wagon (एक और मर्सिडीज SUV) का इलेक्ट्रिक वर्जन है, जिससे उन्हें इथेनॉल से जुड़ी चिंताओं की कोई फिक्र नहीं रहती। जोशी का वीडियो ऑनलाइन वायरल होने के कुछ ही समय बाद मर्सिडीज-बेंज इंडिया ने ग्राहकों के लिए एक एडवाइजरी जारी की। हालांकि इस बयान में जोशी का नाम नहीं लिया गया, लेकिन इसमें E20 पेट्रोल को लेकर उनकी चिंताओं का जिक्र किया गया।

जर्मन कार कंपनी ने कहा, “मर्सिडीज़-बेंज के लिए ग्राहकों की सुरक्षा, गाड़ी की भरोसेमंदता और परफॉर्मेंस सबसे जरूरी हैं। मर्सिडीज-बेंज की सभी पेट्रोल BS VI गाड़ियां E20 फ्यूल के साथ इस्तेमाल के लिए पूरी तरह से सही हैं और संबंधित अधिकारियों ने उन्हें इसके लिए सर्टिफाई भी किया है।”

“हम ग्राहकों की किसी भी तकनीकी सवाल में मदद करने के लिए तैयार हैं। मर्सिडीज-बेंज सस्टेनेबल मोबिलिटी (पर्यावरण के अनुकूल परिवहन) के लिए प्रतिबद्ध है।”E20 फ्यूल एक मिला-जुला मोटर फ्यूल है जिसमें 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल होता है। भारत में E20 फ्यूल को बढ़ावा देने का मुद्दा विवादित हो गया है क्योंकि ऐसे दावे किए जा रहे हैं कि इससे पुरानी गाड़ियों (जो इसके लिए नहीं बनी हैं) के इंजन खराब हो सकते हैं और माइलेज भी कम हो सकता है।

हालांकि, शुक्रवार को सरकार ने इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल प्रोग्राम का बचाव किया। सरकार ने इंजन खराब होने और माइलेज कम होने की चिंताओं के बीच कहा कि इस स्कीम से चीनी अर्थव्यवस्था को मदद मिली है, किसानों की आय बढ़ी है और 2014-15 से देश के ₹1.90 लाख करोड़ से ज़्यादा विदेशी मुद्रा की बचत हुई है।

मुख्यमंत्री योगी बोले- वनों से ही नदियां रहेंगी सदानीरा, एक वृक्ष करता है हजारों लीटर जल का अवशोषण

Chief Minister Yogi Adityanath explained importance of tree plantation

– ताल रिंग रोड के किनारे सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया पौधारोपण

– वृक्षों के अंधाधुंध कटान से हो सकता है जल और खाद्यान्न संकट

– पर्यावरण असंतुलन से वर्षा चक्र का अंतर बढ़ता है

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी नागरिकों को पौधारोपण की महत्ता समझाते हुए कहा कि एक वृक्ष अपने भीतर हजारों लीटर जल का अवशोषण करके रखता है। नदियां वहीं सदानीरा होती हैं, जहां वन या अधिक संख्या में वृक्ष होते हैं। यदि वृक्षों की अंधाधुंध कटान होगी तो जल की कमी से खाद्यान्न संकट खड़ा हो सकता है। 

 

मुख्यमंत्री रविवार को पौधारोपण महायज्ञ 2026 के अंतर्गत आरकेबीके के समीप ताल रिंग रोड के किनारे मौलश्री का पौधा लगाने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पर्यावरण असंतुलन से वर्षा चक्र का अंतर बढ़ता है और इसका प्रतिकूल असर अन्नदाता किसान के लिए संकट पैदा करता है। बड़े पैमाने पर पेड़ों के कटान से पेयजल का संकट और सूखे की स्थिति बनती है।

पर्यावरण संतुलन रखने के लिए अपने दायित्व का निवर्हन करने को हर नागरिक को ‘एक पेड़ मां के नाम’ थीम को समर्पित पौधारोपण महाभियान से जुड़ना होगा। हर व्यक्ति को पौधा लगाने के साथ ही उसकी सुरक्षा का संकल्प भी लेना होगा। 

ALSO READ: पौधारोपण महाभियान धरती माता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का महायज्ञ : योगी आदित्यनाथ

सीएम योगी ने कहा कि इस वर्ष एक ही दिन में सरकार ने 35 करोड़ पौधारोपण करने का लक्ष्य तय किया है। लक्ष्य बड़ा भले हो, लेकिन यूपी जैसे राज्य जहां 57 लाख से अधिक नर्सरियां हैं, के लिए यह मुश्किल नहीं है। पौधारोपण महाभियान में औषधीय, फलदार, छायादार, इमारती हर तरह के पौधे लगाए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार ने हर वर्ष पौधारोपण के बड़े अभियान को आगे बढ़ाया है और पौधों की सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की है।

इसी का परिणाम है कि सर्वे में वनाच्छादन का विस्तार स्पष्ट दिखाई देता है। कृतज्ञता ज्ञापन भारतीय संस्कृति की पहचान है। व्यापक पौधारोपण के जरिये हम प्रकृति के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित कर वर्तमान और भावी पीढ़ी के भविष्य को उज्ज्वल बना सकते हैं।

ALSO READ: मुख्यमंत्री योगी ने विपक्ष पर किया जोरदार प्रहार, बोले- रामभक्तों के खून से सना है सपा का इतिहास

ताल रिंग रोड के किनारे पौधारोपण करने के बाद मुख्यमंत्री ने रामगढ़ताल की खूबसूरती को निहारा और सेल्फी भी ली। इस अवसर पर सांसद रविकिशन शुक्ल, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय, महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता, पूर्व महानगर अध्यक्ष राजेश गुप्ता सहित कई पार्षद भी उपस्थित रहे।

सूखे में भी चमकी किस्मत! कम पानी, कम खर्च… फिर भी बंपर कमाई, सहजन की खेती ने किसान की बदल दी तकदीर

महाराष्ट्र के किसान संदीप कदम के लिए कई सालों तक खेती करना आसान नहीं रहा। सूखा, बढ़ती खेती की लागत और मौसम की मार की वजह से उन्हें लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा था। लेकिन एक छोटे से फैसले ने उनकी किस्मत बदल दी। घाटे वाली फसलों की जगह उन्होंने अपने खेत में सिर्फ 40 सहजन (मुनगा) के पेड़ लगाए और इसके बाद उनकी खेती की तस्वीर बदल गई।

30Stades की रिपोर्ट के अनुसार, बार-बार फसल खराब होने के बाद संदीप ने अपने परिवार की खेती को नए तरीके से करने का फैसला किया। महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित सांगोला क्षेत्र में कम पानी और कम खर्च में होने वाली फसल की तलाश के दौरान उन्होंने सहजन की खेती शुरू की। हालांकि शुरुआत में उन्हें यह भरोसा नहीं था कि यह प्रयोग सफल होगा, लेकिन उनका यह फैसला आगे चलकर उनके लिए बेहद फायदेमंद साबित हुआ। लेकिन यह फैसला भी उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। संदीप कदम ने बताया कि अनार की खेती में भी उन्हें लगातार नुकसान हुआ। बेमौसम बारिश की वजह से फसल में बैक्टीरियल ब्लाइट और विल्ट जैसी बीमारियां फैलने लगीं। इन बीमारियों से बचाने के लिए बार-बार दवाओं का छिड़काव करना पड़ता था, जिससे खेती का खर्च लगातार बढ़ता गया। आखिरकार उन्हें किसी नई फसल की तलाश करनी पड़ी।

लगातार हो रहे नुकसान के बाद संदीप ने खेती का तरीका बदलने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि सांगोला इलाके में भूजल का स्तर पहले से ही कम है और बारिश का कोई भरोसा नहीं रहता। इसलिए उन्हें ऐसी फसल चाहिए थी जो कम पानी में भी अच्छी तरह उग सके और जिसमें दवाओं व देखभाल पर ज्यादा खर्च न आए। इसी दौरान उन्हें सहजन की खेती का विकल्प मिला और उन्होंने इसे अपनाने का फैसला किया।

सहजन की खेती क्यों चुनी?

संदीप कदम की तलाश आखिरकार सहजन (मुनगा) की खेती पर जाकर खत्म हुई। सहजन एक ऐसी फसल है, जिसका इस्तेमाल भारत के कई हिस्सों में सब्जी, सांभर, दाल और दूसरी कई डिश बनाने में किया जाता है। स्वाद के साथ-साथ यह पोषक तत्वों से भी भरपूर होती है। सबसे बड़ी बात यह है कि दूसरी कई बागवानी फसलों के मुकाबले सहजन को बहुत कम पानी की जरूरत होती है। यही वजह है कि यह सूखा प्रभावित इलाकों के लिए एक अच्छा विकल्प माना जाता है। इन खूबियों ने संदीप को सहजन की खेती शुरू करने के लिए प्रेरित किया।

संदीप ने एक साथ पूरी खेती बदलने का जोखिम नहीं लिया। उन्होंने पहले छोटे स्तर पर इसकी शुरुआत की। साल 2010 में उन्होंने तमिलनाडु से ओडीसी (ODC) किस्म के बीज मंगवाए और अपने अनार के बाग में खाली पड़ी जगह पर सिर्फ 40 सहजन के पेड़ लगाए।

40 पौधों से शुरु हुआ सफर 

संदीप कदम ने एक साथ पूरी खेती बदलने की बजाय पहले छोटे स्तर पर सहजन की खेती शुरू की। साल 2010 में उन्होंने तमिलनाडु से ओडीसी (ODC) किस्म के बीज मंगवाए और अपने अनार के बाग की खाली जगह में सिर्फ 40 सहजन के पौधे लगाए। संदीप बताते हैं, “सिर्फ 40 पौधों से मुझे करीब 40 हजार रुपये की कमाई हुई। इससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ा और मुझे लगा कि सूखा प्रभावित इलाकों के किसानों के लिए सहजन की खेती एक अच्छा विकल्प बन सकती है।” जैसे-जैसे पौधे बड़े हुए, हर पेड़ से सालाना औसतन करीब 60 किलो सहजन मिलने लगा।

पहले प्रयोग की सफलता के बाद संदीप ने दिसंबर 2012 में एक एकड़ जमीन पर बड़े पैमाने पर सहजन की खेती शुरू की। इसके लिए उन्होंने अपनी पहली फसल से तैयार किए गए बीजों का इस्तेमाल किया। उन्होंने करीब 680 पौधे लगाए। पौधों की कतारों के बीच 10 फीट और एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच करीब 6 फीट की दूरी रखी गई। इसके बाद मई में पहली व्यावसायिक फसल तैयार हुई, जिसमें हर पौधे से औसतन करीब 25 किलो सहजन मिला।

25 लाख की आमदनी 

आज संदीप कदम के खेत में हर साल करीब 4.2 लाख किलो (420 टन) सहजन का उत्पादन होता है। बाजार में मौसम के अनुसार सहजन की कीमत 40 से 100 रुपये प्रति किलो तक रहती है, लेकिन उन्हें औसतन 60 रुपये प्रति किलो का भाव मिल जाता है। संदीप अपनी फसल का निर्यात दुबई भी करते हैं। इसके अलावा उनके पास खरीदारों का अच्छा नेटवर्क है, जिससे उन्हें बेहतर दाम मिलते हैं और उनकी कमाई लगातार बनी रहती है। सहजन की खेती पर उनका सालाना खर्च करीब 1.5 लाख रुपये प्रति एकड़ आता है, जबकि एक एकड़ से करीब 25 लाख रुपये की आमदनी होती है। इस तरह उन्हें लगभग 23.5 लाख रुपये प्रति एकड़ का मुनाफा मिलता है।

पौधारोपण महाभियान धरती माता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का महायज्ञ : योगी आदित्यनाथ

Chief Minister Yogi stated that mega plantation drive is grand undertaking to express gratitude towards Mother Earth

– मुख्यमंत्री ने गोरखपुर से किया 1 दिन में 35 करोड़ पौधारोपण के लक्ष्य वाले पौधारोपण महायज्ञ 2026 का शुभारंभ

– 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत सीएम ने गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर रोपे पवित्र त्रिवेणी (नीम, पीपल, बरगद) के पौधे

– मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास की रफ्तार के साथ वनाच्छादन का विस्तार, सैकड़ों टन कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण करता है एक पेड़

– आरकेबीके के पास ताल रिंग रोड के किनारे भी मुख्यमंत्री ने किया पौधारोपण, लगाया मौलश्री का पौधा

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार सुबह गोरखपुर से एक दिन में 35 करोड़ रिकॉर्ड पौधारोपण के लक्ष्य वाले प्रदेशव्यापी पौधारोपण महायज्ञ 2026 का शुभारंभ किया। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत उन्होंने गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर भगवानपुर टोल प्लाजा के समीप पवित्र त्रिवेणी (नीम, पीपल, बरगद) के पौधे लगाए और सेल्फी भी ली। इसके बाद गीडा सेक्टर-28 में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पौधारोपण महाभियान धरती माता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का महायज्ञ है। विगत नौ वर्षों में प्रदेश में भौतिक विकास की रफ्तार तेज होने के साथ ही वनाच्छादन का भी विस्तार हुआ है। गोरखनाथ मंदिर लौटते समय सीएम ने आरकेबीके के पास ताल रिंग रोड के किनारे भी मौलश्री का पौधा रोपित किया।

 

जनसभा में सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद से यूपी के इंफ्रास्ट्रक्चर का वृहद विस्तार हुआ है। एक्सप्रेसवे, हाईवे के साथ बड़े पैमाने पर सड़कों का जाल बिछा है। नए-नए उद्योग लगे हैं। शहरीकरण का दायरा बढ़ा है और नई-नई कॉलोनियां विकसित हुई हैं। भौतिक विकास में तेज योगदान देने वाले इस राज्य ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति संकल्पित प्रयासों से वनाच्छादन के विस्तार में भी सफलता प्राप्त की है।

एक पेड़ सैकड़ों टन कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण करता है। 9 वर्षों में यूपी का वनाच्छादन बढ़ने से 6 करोड़ 37 लाख 74 हजार 130 टन कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण तथा 4 करोड़ 63 लाख 90 हजार 130 टन ऑक्सीजन का उत्सर्जन हुआ।

 

'माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्या:'

मुख्यमंत्री ने पौधारोपण महाभियान को धरती माता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का महायज्ञ बताया और इसमें हर व्यक्ति की तरफ से योगदान दिए जाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि धरती माता हम सबको अच्छा वातावरण देती हैं। आगे बढ़ने का अवसर, पेट भरने को अन्न, अच्छे-अच्छे फल, पीने के लिए जल देने के साथ घर की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करती हैं।

धरती माता के बारे में हमारे ऋषियों ने संकल्प भाव से कहा है- 'माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्या:', अर्थात यह धरती हमारी माता हैं और हम सब इसके पुत्र हैं। एक पुत्र के रूप में धरती माता के प्रति उत्तरदायित्व का निर्वहन करने के लिए ही प्रधानमंत्री मोदी जी ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ का आह्वान किया है।  यह आने वाली पीढ़ी के भविष्य को सुंदर बनाने का राष्ट्रीय कर्तव्य है। 

 

धरती माता की आरोग्यता का भी रखें ध्यान

सीएम योगी ने पौधारोपण की थीम ‘एक पेड़ मां के नाम’ को बहुत सुंदर बताते हुए कहा कि मां हर व्यक्ति, हर जीव के लिए दुनिया का सबसे सुंदर उपहार है। हम खुद के स्वास्थ्य की चिंता करते हैं, लेकिन सबकुछ देने वाली धरती माता के स्वास्थ्य की परवाह नहीं करते। खुद की आरोग्यता के लिए हम सभी को धरती माता की आरोग्यता का भी ध्यान रखना होगा।

अनंतकाल तक जीवसृष्टि बनी रहे, इसके लिए पौधारोपण अत्यंत आवश्यक है। मोदी के आह्वान पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर इस वर्ष 5 करोड़ पौधे लगाए गए। गत वर्ष 35 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। 9 वर्ष में अब तक प्रदेश में 242 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं।

Chief Minister Yogi stated that mega plantation drive is grand undertaking to express gratitude towards Mother Earth

मौसम चक्र में परिवर्तन से कृषि उत्पादन पर असर

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण पर मंडरा रहे संकट का प्रभाव मौसम चक्र पर भी पड़ा है। बारिश करीब एक महीना विलंब से शुरू हुई है। जो बीज 15 जून तक लग जाना चाहिए था, उसे 15 जुलाई को लगाएंगे तो उत्पादन में 25 से 30 प्रतिशत तक अंतर पड़ेगा।

पर्यावरण असंतुलन से कभी प्रचंड गर्मी पड़ रही है तो कभी सर्दी। लगातार ग्लोबल वार्मिंग की चेतावनी दी जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि आने वाले समय में समुद्र के किनारे बहुत सारे शहर डूबने की स्थिति में होंगे तो कहीं भीषण जल संकट होगा।

 

मानवता को चुकानी पड़ रही प्रकृति से खिलवाड़ की कीमत

मुख्यमंत्री ने कहा कि सर्दियों के मौसम में बहुत सारे शहर ऐसे हैं, जहां गैस चैंबर जैसी स्थिति बन जाती है। वहां अलर्ट जारी करना पड़ता है कि बुजुर्ग, बीमार और बच्चे घर से बाहर न निकलें, जरूरी हो तो मास्क लगाकर निकलें। आखिर यह स्थिति पैदा ही क्यों हुई? क्योंकि प्रकृति के साथ खिलवाड़ किया गया। अंधाधुंध पेड़ काटे गए, जल दोहन किया गया लेकिन जल संरक्षण के लिए कोई प्रयास नहीं हुआ। तालाबों पर अवैध कब्जे हो गए। अपने स्वार्थ के लिए लोगों ने प्रकृति के साथ जो खिलवाड़ किया है, आज उसकी कीमत विश्व मानवता को चुकानी पड़ रही है। 

 

पर्यावरण अनुकूल एलईडी लाइट से बचे 100 करोड़ रुपए

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में जब डबल इंजन की भाजपा सरकार बनी तब हैलोजन लाइटों को हटाकर उसकी जगह पर्यावरण अनुकूल एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाने का अभियान शुरू किया गया। प्रदेश में 16 लाख एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाई गईं, इससे प्रदेश सरकार को 100 करोड रुपए की बचत हुई।

साथ ही हैलोजन में जलकर मरने वाले कीड़े-मकोड़ों की भयंकर बदबू से भी मुक्ति मिली। सरकार नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है। पीएम सूर्य घर बिजली योजना से लोगों के बिजली बिल आधे हो रहे हैं। ग्रीन एनर्जी का नया स्रोत लोगों को उपलब्ध कराया गया है।

 

उज्जवला योजना ने दी धुएं से मुक्ति

मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम मोदी के विजन से उज्जवला योजना के तहत 10 करोड़ परिवारों को निशुल्क एलपीजी कनेक्शन बांटे गए, जो कांग्रेस सरकार में ब्लैक में मिलते थे। 10 करोड़ परिवारों में माताओं-बहनों को चूल्हे के धुएं से मुक्ति मिली। अकेले उत्तर प्रदेश में 2 करोड़ परिवारों को यह लाभ मिला है। इंटरनेशनल सोलर अलायंस के अध्यक्ष के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने दुनिया से इसके बारे में आह्वान किया है। अयोध्या प्रदेश की पहली सोलर सिटी बनी है। वहां समस्त स्ट्रीट लाइट में सोलर एनर्जी का इस्तेमाल किया जाता है।

 

पौधा लगाकर देखभाल भी करें

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें न सिर्फ पौधे लगाने हैं, बल्कि उनकी उचित देखभाल भी करनी है। जिन किसानों ने अपने खेत में पेड़ लगाए हैं, उन्हें कार्बन क्रेडिट फाइनेंस स्कीम के अंतर्गत पैसा भी प्राप्त होता है। मुख्यमंत्री ने हर व्यक्ति से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का हिस्सा बनने की अपील करते हुए कहा कि अपने पूर्वजों व परिजनों की स्मृति में और परिवार के सदस्यों के नाम से एक पौधा अवश्य लगाएं।

 

’हरित गाथा’ लघु फिल्म और ‘वानिकी कैलेंडर’ का विमोचन

पौधारोपण महायज्ञ 2026 के अवसर पर आयोजित जनसभा के मंच से मुख्यमंत्री ने ‘उत्तर प्रदेश के नौ वर्ष की हरित गाथा’ लघु फिल्म और ‘वानिकी कैलेंडर’ का विमोचन किया। लघु फिल्म में यूपी में पिछले नौ सालों में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों और हासिल उपलब्धियों को दर्शाया गया है, जबकि वानिकी कैलेंडर में वर्ष 2026-27 के लिए वन विभाग की कार्ययोजना का उल्लेख है। 

 

सीएम ने किया पौध वितरण, किसानों को सौंपे प्रमाण-पत्र

कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना की लाभार्थी गीता देवी, मधुरा, इशरावती, शीला, कालिंदी को घर के सामने रोपने के लिए सहजन के पौधे भेंट किए। उन्होंने कार्बन क्रेडिट फाइनेंस योजना के अंतर्गत 700 से अधिक पौधारोपण करने वाले नरपति (कैम्पियरगंज गोरखपुर), 650 से अधिक पौधारोपण करने वाले अशफाक खान (देसही देवरिया),  800 पौधारोपण करने वाली रंजना देवी (हाटा कुशीनगर) और 850 पौधे लगाने के लिए अरविंद कुमार (पडरौना कुशीनगर) को कार्बन क्रेडिट के लिए मिलने वाली राशि का प्रमाण-पत्र सौंपा। 

 

सीएम योगी के मार्गदर्शन में यूपी में बढ़ी हरियाली : वनमंत्री

कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने कहा कि सीएम योगी के मार्गदर्शन में यूपी में हरियाली बढ़ी है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया देहरादून की रिपोर्ट के अनुसार देश में ग्रीनरी वृद्धि के मामले में उत्तर प्रदेश प्रगति करते हुए दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।

आज का पौधारोपण पूर्ण होते ही यूपी में पिछले 10 सालों में पौधारोपण की कुल संख्या 275 करोड़ हो जाएगी। इस बार के पौधारोपण महाभियान में 30 प्रतिशत फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं। गोरखपुर में मुख्यमंत्री द्वारा घोषित वानिकी विश्वविद्यालय के निर्माण की शुरुआत जल्द ही की जाएगी।

 

पीएम मोदी-सीएम योगी पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद संवेदनशील : रविकिशन

इस मौके पर सांसद रविकिशन शुक्ल ने कहा कि पीएम मोदी और सीएम योगी पर्यावरण संरक्षण को लेकर बेहद संवेदनशील हैं। वे सदैव लोगों को पौधारोपण के लिए प्रेरित करते रहते हैं। इसी विजन के अनुरूप पर्यावरण संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री ने एक दिन में 35 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में यूपी का इतना विराट विकास हुआ है, जितना कोई सोच भी नहीं सकता।

 

नौ वर्ष में हुआ सौ वर्ष से अधिक का विकास : प्रदीप शुक्ल

सहजनवा के विधायक प्रदीप शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में सहजनवा विधानसभा का अभूतपूर्व विकास हो रहा है। उन्होंने नौ वर्षों में जितना विकास किया, वह सौ वर्षों में भी नहीं हो पाता। प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील कुमार चौधरी ने भी मुख्यमंत्री का स्वागत किया।

 

इस अवसर पर प्रदेश सरकार के मत्स्य विभाग के मंत्री संजय निषाद, राज्यसभा सदस्य संगीता यादव, एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, श्रीराम चौहान, राजेश त्रिपाठी, विपिन सिंह, डॉ. विमलेश पासवान, महेंद्रपाल सिंह, सरवन निषाद, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, पौधारोपण महायज्ञ के लिए गोरखपुर के नोडल अधिकारी सुहास एलवाई, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय, जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, पूर्व जिलाध्यक्ष युधिष्ठिर सिंह, ब्लॉक प्रमुख दिलीप यादव आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

Kashmir Cloudburst : अनंतनाग में बादल फटने से मची तबाही, घरों में घुसा पानी; फसलें और सेब के बाग बर्बाद

दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के चिटरगुल स्थित नाला चोटीहाल (Nala Chotihall) क्षेत्र में रविवार को बादल फटने (क्लाउडबर्स्ट) के बाद अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ने भारी तबाही मचा दी। इस प्राकृतिक आपदा में कृषि भूमि, सेब के बाग, धान की फसलें और कई रिहायशी इलाकों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। घटना के तुरंत बाद जिला प्रशासन ने राहत एवं बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा। टीमें नुकसान का आकलन करने के साथ राहत कार्य और आवश्यक एहतियाती कदम उठा रही हैं। प्रशासन ने बताया कि प्रभावित इलाकों में आपातकालीन टीमें तैनात कर दी गई हैं और नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए आवश्यक कदम भी उठाए जा रहे हैं।

ALSO READ: Monsoon Alert : 15 राज्यों में भारी बारिश और तूफान का अलर्ट, 70 Kmph की रफ्तार से चलेंगी हवाएं; IMD ने अपनी चेतावनी में क्या कहा

स्थानीय लोगों के अनुसार, अचानक आई बाढ़ का पानी कई घरों में घुस गया, जिससे लोगों को रातों-रात अपने घर छोड़ने पड़े। धान के खेत जलमग्न हो गए और सेब के बागों को भारी नुकसान पहुंचा है। ग्रामीणों ने सरकार से जल्द नुकसान का सर्वे कर उचित मुआवजा देने की मांग की है।

 

भारी बारिश के बाद आई बाढ़ ने किसानों की आजीविका पर गहरा असर डाला है। उन्होंने कहा कि सेब के बाग और धान की फसल लगभग पूरी तरह बर्बाद हो गई है। उन्होंने सरकार से फसलों और पेड़ों के नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देने की अपील की।

ALSO READ: Iran-US Conflict : ईरान का जॉर्डन स्थित अमेरिकी बेस पर हमला करने का दावा, UAE, बहरीन और कतर में भी मिसाइल अलर्ट

पहाड़ों से तेज बहाव के साथ पानी नीचे आया और चिटरगुल अपर में बहने वाले नाले का रास्ता बदल गया। इससे आसपास के खेतों, बागों और मकानों को भारी नुकसान हुआ। उन्होंने बताया कि कई परिवारों को तत्काल घर खाली कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। लोगों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से निष्पक्ष सर्वे कर जल्द मुआवजा देने की मांग की है।

 

इस घटना से पूरे इलाके में दहशत फैल गई। आधी रात तक लोग अपने घर छोड़कर सड़कों और मस्जिदों में शरण लेने को मजबूर हो गए क्योंकि बाढ़ का पानी लगातार घरों में घुस रहा था। उन्होंने संबंधित विभागों से बागवानी, कृषि भूमि, पशुधन और सड़क को हुए नुकसान का तत्काल निरीक्षण कर राहत पैकेज जारी करने की मांग की।

योगी सरकार में पर्यावरणीय बदलाव की नई इबारत, जल से जंगल तक विकास की नई पहचान

new chapter of environmental change in Yogi government

– जल, जंगल, जमीन और जैव विविधता संरक्षण में उत्तर प्रदेश बना मिसाल

– सुरक्षित पेयजल और स्वच्छ नदियों से बदली पर्यावरण संरक्षण की तस्वीर

– वृक्षारोपण, वेटलैंड संरक्षण और अमृत सरोवर से मजबूत हुआ हरित उत्तर प्रदेश

– बुंदेलखंड जल क्रांति, स्वच्छ हवा और नगर वनों ने बढ़ाई पर्यावरणीय मजबूती

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश ने पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन का नया अध्याय लिखा है। पिछले नौ वर्षों में योगी सरकार ने सुरक्षित पेयजल, नदियों के पुनर्जीवन, वनीकरण, आर्द्रभूमि संरक्षण, जल संरक्षण, स्वच्छ वायु, वन्यजीव सुरक्षा और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में अनेक महत्वाकांक्षी योजनाएं लागू कर प्रदेश की पर्यावरणीय तस्वीर बदलने का प्रयास किया है। इसका उद्देश्य केवल प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण नहीं, बल्कि लोगों के जीवन स्तर, स्वास्थ्य और आजीविका को भी बेहतर बनाना रहा है।
 

आर्सेनिक-फ्लोराइड मुक्त पेयजल से लाखों लोगों को मिला सुरक्षित जीवन

बलिया, गाजीपुर, मऊ, वाराणसी, चंदौली, सोनभद्र सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पहले भूजल प्राकृतिक रूप से आर्सेनिक और फ्लोराइड से प्रदूषित था। लाखों लोग असुरक्षित हैंडपंपों का पानी पीने को मजबूर थे, जिससे आर्सेनिकोसिस, कंकाल फ्लोरोसिस, श्वसन संबंधी बीमारियों और कैंसर जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ गया था।

योगी सरकार ने जल जीवन मिशन और राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन के माध्यम से सतही जल आधारित पाइप पेयजल योजनाओं का व्यापक विस्तार किया। गहरे जलस्रोतो के उपयोग तथा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से हजारों गांवों को सुरक्षित नल जल उपलब्ध कराया गया, जिससे आर्सेनिक और फ्लोराइड जनित बीमारियों के खतरे में उल्लेखनीय कमी आई है। 
 

नमामि गंगे और 'एक जिला-एक नदी' अभियान से नदियों में लौटी स्वच्छता

नमामि गंगे मिशन के अंतर्गत गंगा नदी को स्वच्छ बनाने की दिशा में बड़े स्तर पर कार्य हुए हैं। कानपुर के सीसामऊ नाले से प्रतिदिन गंगा में गिरने वाले लगभग 140 एमएलडी गंदे पानी को रोककर आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों तक पहुंचाया गया।

वाराणसी, प्रयागराज और कानपुर सहित अनेक शहरों में सीवेज उपचार क्षमता बढ़ाई गई तथा औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण को मजबूत किया गया, जिससे गंगा जल की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। सरकार के एक जिला एक नदी अभियान ने गोमती, हिंडन, तमसा, सोत और अन्य छोटी नदियों के पुनर्जीवन को नई गति दी।  

ALSO READ: गांव के होनहारों को अफसर बनाने के लिए योगी सरकार का मेगा प्लान

240 करोड़ से अधिक पौधरोपण से बढ़ा हरित आवरण

अतिक्रमण हटाने, गाद निकालने, सीवरेज नेटवर्क विकसित करने और एसटीपी स्थापित करने से अनेक नदियों का प्राकृतिक प्रवाह फिर से बहाल हुआ। इससे भूजल पुनर्भरण और सिंचाई व्यवस्था को भी मजबूती मिली। वहीं हरित उत्तर प्रदेश के संकल्प के तहत वर्ष 2017 से 2026 के बीच 240 करोड़ से अधिक पौधरोपण कर प्रदेश ने देश में नई पहचान बनाई।

स्थानीय प्रजातियों के पौधों को बढ़ावा देने, नदी किनारे वृक्षारोपण, नगर वन, मियावाकी वन और सैटेलाइट आधारित निगरानी जैसी व्यवस्थाओं ने हरित आवरण बढ़ाने के साथ जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने की क्षमता भी मजबूत की।

 

रामसर वेटलैंड और अमृत सरोवर अभियान से जल संरक्षण को मिली नई ताकत

आर्द्रभूमियों के संरक्षण में भी उल्लेखनीय सफलता मिली है। नवाबगंज, सांडी, समसपुर, सुर सरोवर और सुरहा ताल जैसी प्रमुख वेटलैंड्स का पुनरुद्धार किया गया। सुरहा ताल को भारत के 100वें रामसर स्थल का दर्जा मिलना प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि रही।

इन प्रयासों से प्रवासी पक्षियों के आवास सुरक्षित हुए और जैव विविधता को नई मजबूती मिली। मिशन अमृत सरोवर के तहत लगभग 69 हजार तालाबों और पारंपरिक जल निकायों का पुनर्जीवन किया गया। तालाबों की खुदाई, गाद निकालने, जल भंडारण क्षमता बढ़ाने और रिचार्ज संरचनाओं के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल संरक्षण और सिंचाई की व्यवस्था को नया आधार मिला।

ALSO READ: जो युवाओं का रोजगार खा गए, वे अयोध्या-मथुरा-काशी के बारे में क्या सोचते : योगी आदित्यनाथ

बुंदेलखंड में जल क्रांति और ऊसर भूमि सुधार से किसानों को मिला नया संबल

बुंदेलखंड जैसे सूखा प्रभावित क्षेत्र में जल संरक्षण को लेकर विशेष अभियान चलाया गया। चेक डैम, तालाबों के पुनरुद्धार, वाटरशेड विकास, सिंचाई परियोजनाओं और केन-बेतवा लिंक परियोजना के माध्यम से जल उपलब्धता बढ़ाने के प्रयास हुए।

इससे खेती को नई मजबूती मिली और पलायन की समस्या में कमी आने की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आए। प्रदेश में ऊसर और क्षारीय भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए वैज्ञानिक भूमि सुधार कार्यक्रम संचालित किए गए। जिप्सम, जल निकासी और आधुनिक मृदा सुधार तकनीकों के माध्यम से लाखों हेक्टेयर अनुपजाऊ भूमि को खेती योग्य बनाया गया, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में सहायता मिली।

 

एयरशेड मॉडल, नगर वन और ग्रीन बेल्ट से स्वच्छ हवा की दिशा में बड़ी पहल

स्वच्छ हवा के लिए सरकार ने एयरशेड आधारित रणनीति अपनाई। जिग-जैग तकनीक वाले ईंट भट्ठों को बढ़ावा दिया गया, औद्योगिक उत्सर्जन की निगरानी को मजबूत किया गया तथा उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबंधन परियोजना (यूपी कैम्प) लागू की गई।

इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन और रियल टाइम एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग जैसे कदमों से वायु प्रदूषण नियंत्रण को नई दिशा मिली। लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद और कानपुर जैसे शहरों में नगर वन, जैव विविधता पार्क और ग्रीन बेल्ट विकसित किए गए। इन पहलों से शहरी हरित क्षेत्र बढ़ा, हीट आइलैंड प्रभाव कम करने में मदद मिली और नागरिकों को बेहतर पर्यावरण उपलब्ध हुआ।

 

दुधवा, रानीपुर और चंद्रप्रभा में वन्यजीव संरक्षण को मिली नई गति

वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में दुधवा लैंडस्केप और तराई क्षेत्र में आवास संरक्षण, हाथी रिजर्व, वन्यजीव गलियारों की बहाली, सोलर फेंसिंग और त्वरित प्रतिक्रिया दलों की स्थापना जैसे कदम उठाए गए। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने में मदद मिली।

ALSO READ: मुख्यमंत्री योगी करेंगे पौधारोपण महायज्ञ का शुभारंभ, गोरखपुर में लगाए जाएंगे 55 लाख से ज्‍यादा पौधे

बुंदेलखंड में रानीपुर टाइगर रिजर्व की स्थापना ने जैव विविधता संरक्षण को नई मजबूती दी। वहीं चंद्रप्रभा सहित अन्य वन क्षेत्रों में प्राकृतिक पुनर्जनन, मिट्टी एवं नमी संरक्षण तथा वन बहाली कार्यक्रमों के माध्यम से खराब हो चुके वन क्षेत्रों को पुनर्जीवित किया गया।

 

प्लास्टिक मुक्त तीर्थस्थलों और जैव विविधता संरक्षण से पर्यावरण को मजबूती

अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज जैसे प्रमुख धार्मिक नगरों में सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रभावी रोक लगाने, कचरा प्रबंधन को मजबूत करने और स्वच्छता ढांचे का विस्तार करने से धार्मिक पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण का बेहतर संतुलन स्थापित हुआ।
 

सारस, गंगा डॉल्फिन, मीठे पानी के कछुओं और अन्य दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण के लिए विशेष कार्यक्रम संचालित किए गए। स्वच्छ नदियों, बेहतर आर्द्रभूमि प्रबंधन और आवास संरक्षण के माध्यम से प्रदेश की जैव विविधता को नई ऊर्जा मिली। गोरखपुर में स्थापित जटायु संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र गिद्धों की घटती आबादी को पुनर्जीवित करने की दिशा में देश की महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरा है। आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से संकटग्रस्त गिद्ध प्रजातियों के संरक्षण का कार्य किया जा रहा है।

 

सौर ऊर्जा, जैविक खेती और स्वच्छ ऊर्जा से सतत विकास को बढ़ावा

सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा आधारित पेयजल और सिंचाई योजनाओं का विस्तार कर स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा दिया गया। इससे डीजल पर निर्भरता कम हुई और दूरदराज गांवों में जलापूर्ति अधिक विश्वसनीय बनी। गंगा कॉरिडोर के किनारे जैविक और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित कर रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में कमी लाने तथा नदी प्रदूषण को रोकने की दिशा में भी प्रभावी प्रयास किए गए।

इससे मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिला। इसके साथ ही स्वच्छ भारत मिशन और शहरी विकास कार्यक्रमों के अंतर्गत वैज्ञानिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, कचरे के पृथक्करण, आधुनिक प्रोसेसिंग प्लांट और पुराने लैंडफिल के उपचार जैसे कार्यों को गति दी गई। इससे शहरों में स्वच्छता व्यवस्था मजबूत हुई और पर्यावरणीय प्रदूषण को कम करने में सफलता मिली।

यूपी में 10 हजार युवाओं की होगी भर्ती, प्रोजेक्ट गंगा से गांव में होगी 20 हजार से एक लाख तक की इनकम, जानिए पूरी स्कीम

Project Ganga Scheme Explained: उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों की तस्वीर बदलने और गांवों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए योगी आदित्यनाथ की सरकार ने एक बड़ी पहल की है। राज्य सरकार एक महत्वाकांक्षी योजना प्रोजेक्ट गंगा लेकर आ रही है। सरकार का दावा है कि प्रोजेक्ट गंगा उत्तर प्रदेश के ग्रामीण डिजिटल भविष्य की आधारशिला बनने जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की 57000 ग्राम पंचायतों, गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों तक हाई-स्पीड फाइबर ब्रॉडबैंड इंटरनेट पहुंचाकर डिजिटल असमानता को पूरी तरह खत्म करना है।

इस परियोजना के जरिए गांवों को शहरों जैसी आधुनिक डिजिटल सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, ई-गवर्नेस, स्मार्ट कृषि, डिजिटल भुगतान और रोजगार के नए अवसरों का द्वार खुलेगा। अब ग्रामीणों को सरकारी सेवाओं, बैंकिंग और विभिन्न प्रमाणपत्रों के लिए शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इस योजना के तहत 8 से 10 हजार युवाओं की भर्ती की जाएगी। इनकी मासिक आमदनी 1 लाख रुपये तक हो सकती है।

प्रोजेक्ट गंगा की प्रमुख विशेषताएं और बड़े माइलस्टोन

प्रोजेक्ट गंगा के सभी प्रमुख माइलस्टोन पूरे कर लिए गए हैं और सरकार व पार्टनर्स ने इसकी तैयारियों को तेज कर दिया है। इस योजना की मुख्य बातें यहां नीचे दी गई हैं-

10 हजार युवाओं को रोजगार: डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर के रूप में 8000 से 10000 युवाओं की भर्ती की जाएगी। युवाओं को अपने ही गांव में डिजिटल सेवा केंद्र स्थापित करने का सुनहरा अवसर मिलेगा।

₹20 हजार से ₹1 लाख तक की इनकम: शुरुआत में डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर के रूप में काम करने वाले युवाओं की मासिक आय करीब 20000 रुपये होगी। जैसे-जैसे ग्राहकों की संख्या बढ़ेगी यह आमदनी बढ़कर 1 लाख रुपये प्रतिमाह तक पहुंच सकती है।

महिलाओं की 50% भागीदारी: महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए गंगा प्रोजेक्ट के अंतर्गत बनने वाले डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी महिलाओं की सुनिश्चित की गई है। इससे ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकेंगी।

ब्याज मुक्त लोन: अपने गांव या घर में इंटरनेट उद्यम शुरू करने के लिए सरकार मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत युवाओं को 5 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त लोन उपलब्ध करा रही है।

पहले चरण में 21 जिले शामिल, नेपाल सीमा को प्राथमिकता

यह परियोजना चरणबद्ध तरीके से पूरे उत्तर प्रदेश में लागू की जाएगी। योजना के पहले चरण में राज्य के 21 जिलों को शामिल किया गया है। इसमें नेपाल सीमा से सटे श्रावस्ती, बहराइच और बलरामपुर जैसे सीमावर्ती जिलों को प्राथमिकता दी जाएगी। अगले 2 से 3 वर्षों में इस परियोजना का विस्तार पूरे उत्तर प्रदेश में कर दिया जाएगा। इस योजना से प्रदेश की सभी 57 हजार ग्राम पंचायतों और करीब 20 लाख परिवारों को सीधे तौर पर डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ा जाएगा। इसके माध्यम से पूरे प्रदेश में 1 लाख से अधिक रोजगार सृजन की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है।

गांवों में रुकगा पलायन, मिलेंगे फ्रीलांसिंग और रिमोट वर्क के अवसर

हाई-स्पीड इंटरनेट और फ्री वाई-फाई की उपलब्धता से ग्रामीण यूपी में डिजिटल क्रांति आएगी। इससे युवाओं को बड़े फायदे मिलेंगे। गांवों में ही ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी होने से युवाओं को फ्रीलांसिंग, रिमोट वर्क, ऑनलाइन वोकेशनल ट्रेनिंग और डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं मिलेंगी। हाई-स्पीड इंटरनेट की मदद से अब गांवों के युवाओं को कोडिंग सीखने, फ्रीलांसिंग करने या अपना खुद का टेक-स्टार्टअप शुरू करने के लिए दिल्ली या नोएडा जैसे बड़े शहरों में पलायन नहीं करना पड़ेगा। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को आसानी से जोड़ने के लिए सरकार बेहद किफायती दरों पर इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराएगी।

साइबर सिक्योरिटी और स्मार्ट कनेक्टिविटी पर विशेष फोकस

इस प्रोजेक्ट का टारगेट सिर्फ इंटरनेट पहुंचाना ही नहीं है बल्कि गांवों को भविष्य की डिजिटल तकनीकों के लिए तैयार करना है। योजना के तहत सीसीटीवी आधारित सुरक्षा समाधान, साइबर सिक्योरिटी सेवाएं और विभिन्न संस्थानों की डिजिटल कनेक्टिविटी को बेहद मजबूत किया जाएगा। साइबर सुरक्षा, सीसीटीवी और स्मार्ट कनेक्टिविटी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि ग्रामीण डेटा और परिसर पूरी तरह सुरक्षित रहें।

हिंदुजा समूह की कंपनी है नॉलेज पार्टनर

इस विशाल और महत्वाकांक्षी डिजिटल परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए सरकार ने मजबूत साझेदारी की है। दिग्गज हिंदुजा समूह की ब्रॉडबैंड इकाई वनओटीटी इंटरटेनमेंट लिमिटेड इस पूरे प्रोजेक्ट में नॉलेज पार्टनर और इम्प्लीमेंटेशन एनैबलर के रूप में शामिल है।

यह भी पढ़ें: Farm Loan Waiver: महाराष्ट्र में बदले किसानों की कर्जमाफी के नियम, 2 लाख की लिमिट खत्म, जानें अब किसे मिलेगा फायदा

Farm Loan Waiver: महाराष्ट्र में बदले किसानों की कर्जमाफी के नियम, 2 लाख की लिमिट खत्म, जानें अब किसे मिलेगा फायदा

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के किसानों को एक बहुत बड़ी राहत देते हुए अपनी कृषि कर्जमाफी योजना के नियमों में बदलाव करने का ऐलान किया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को विधानसभा में घोषणा की कि सरकार की नई कर्जमाफी योजना से उस शर्त को पूरी तरह हटा दिया गया है जिसके तहत बकाया कर्ज की सीमा 2 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए थी। विपक्ष द्वारा लाए गए अंतिम सप्ताह प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री (जिनके पास वित्त मंत्रालय का प्रभार भी है) ने बताया कि 2 लाख रुपये की इस ऊपरी सीमा के हटने से उन हजारों किसानों को सीधा फायदा होगा जो पहले इस शर्त के कारण योजना से बाहर हो गए थे।

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक इस नई योजना का नाम पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर कृषि कर्जमाफी योजना है। आइए विस्तार से जानते हैं कि सरकार के इस फैसले से अब किन-किन किसानों को लाभ मिलेगा और योजना के नए नियम क्या हैं।

अब 2026-27 तक का बकाया कर्ज होगा माफ

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कर्जमाफी के दायरे को बढ़ाते हुए एक और बड़ी राहत की घोषणा की है। पहले यह योजना सिर्फ वित्तीय वर्ष 2025-26 तक के बकाया कर्ज पर लागू होने वाली थी। अब इस समयसीमा को बढ़ाकर वित्तीय वर्ष 2026-27 तक के बकाया लोन के लिए विस्तारित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री के मुताबिक राज्य में किसी भी सरकार द्वारा लिया गया यह ऐसा पहला फैसला है।

56 लाख किसानों को मिलेगा 36000 करोड़ रुपये का फायदा

इस योजना की आलोचनाओं को खारिज करते हुए वित्त मंत्री फडणवीस ने आंकड़े सदन के सामने रखे। विपक्ष के इस आरोप को उन्होंने खारिज कर दिया कि सिर्फ 12000-13000 करोड़ रुपये ही बांटे जाएंगे और 36 लाख किसान छूट जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस ऐतिहासिक योजना के तहत राज्य के करीब 56 लाख किसानों को 36000 करोड़ रुपये की कर्जमाफी सहायता का लाभ मिलेगा। इस योजना को अंतिम रूप देने से पहले बैंकिंग क्षेत्र के प्रतिनिधियों से सलाह ली गई थी। राज्य सरकार कृषि क्षेत्र को अपनी समग्र सहायता के हिस्से के रूप में पहले वर्ष में ₹20000 करोड़, दूसरे वर्ष में ₹22000 करोड़ और उसके बाद ₹25000 करोड़ खर्च करने का प्रस्ताव रखती है।

पुरानी कर्जमाफी योजनाओं से कैसे अलग है यह नियम?

मुख्यमंत्री ने साल 2019 की पुरानी ‘महात्मा ज्योतिराव फुले कर्जमाफी योजना’ का उदाहरण देते हुए मौजूदा बदलाव को समझाया। महात्मा फुले योजना में पात्रता की सीमा 2 लाख रुपये के ओवरड्यू लोन तक ही सीमित थी। अगर किसी किसान का बकाया इस सीमा से महज 1 रुपये भी ज्यादा होता था तो उसे योजना से पूरी तरह बाहर कर दिया जाता था। उस योजना से लगभग 32 लाख किसानों को लाभ मिला था।

सत्ताधारी गठबंधन के विधायकों की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए सीएम ने ₹50000 के पुनर्भुगतान से जुड़ी शर्त को हटाने से इनकार कर दिया क्योंकि इससे खजाने पर ₹4000-5000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ता। हालांकि उन्होंने बड़ी घोषणा की कि महात्मा फुले कर्जमाफी योजना के तहत आने वाले किसानों को भी अब 2 लाख रुपये तक का कर्जमाफी लाभ मिलेगा। देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जिसने 2017, 2020 और अब 2026 में बड़े पैमाने पर कृषि कर्जमाफी को लागू किया है।

कुछ लाभार्थियों को योजना से बाहर रखने पर क्या बोले CM?

नियमित कर्जमाफी से कर्जदारों में पुनर्भुगतान में देरी करने की प्रवृत्ति बढ़ने और सहकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति कमजोर होने की बात मुख्यमंत्री ने स्वीकार की। उन्होंने बताया कि सरकार ने कर्जमाफी के लाभार्थियों को भविष्य की योजनाओं से बाहर रखने के सुझाव पर विचार किया था लेकिन अंततः किसानों की मदद करने और बैंकिंग प्रणाली की सुरक्षा के बीच एक संतुलन बनाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि लाभार्थियों को बाहर रखने का फैसला कोई ऐसा नहीं है कि पहली बार लिया जा रहा हो। साल 2017 की कर्जमाफी के लाभार्थियों को 2019 की महात्मा फुले योजना से बाहर रखा गया था। ठीक इसी तरह साल 2008 की राष्ट्रीय कृषि कर्जमाफी योजना के दायरे में आए किसानों को महाराष्ट्र सरकार की 2009 की योजना से बाहर रखा गया था।

किसानों को संकट और साहूकारों से बचाना है मकसद: फडणवीस

योजना का बचाव करते हुए देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि संकटग्रस्त किसानों को फिर से संस्थागत ऋण (बैंकों से लोन) प्राप्त करने में मदद करने के लिए यह योजना बेहद जरूरी थी। उन्होंने कहा कि कर्जमाफी के कारण आज तक कोई भी किसान अमीर नहीं बना है लेकिन किसानों को निजी साहूकारों के चंगुल में फंसने से बचाने के लिए ऐसे कदम उठाना बेहद आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार चाहती तो इस फैसले को टाल सकती थी क्योंकि राज्य में साल 2029 तक कोई चुनाव नहीं हैं लेकिन किसानों के वित्तीय संकट को देखते हुए सरकार ने चुनाव की परवाह किए बिना इस योजना की घोषणा की।

सीएम ने कहा कि राज्य सरकार पहले से ही किसानों को सालाना करीब ₹25000 करोड़ की बिजली सब्सिडी दे रही है। इसके साथ ही कृषि विभाग की विभिन्न सब्सिडी योजनाओं का कुल परिव्यय लगभग ₹95000 करोड़ रुपये है।

यह भी पढ़ें: India-UK FTA : 15 जुलाई से लागू होगा भारत-UK के बीच FTA, ब्रिटेन से इंपोर्ट होने वाली कारों पर नोटिफिकेशन जारी

CM योगी का तंज, सपा अध्यक्ष भी भगवा पहनकर कांवड़ यात्रा में शामिल होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं

Chief Minister Yogi Adityanath News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में अब धार्मिक आस्था का सम्मान किया जा रहा है। अयोध्या से सरयू का जल लेकर भदेश्वरनाथ धाम जाने वाले कांवड़ यात्रियों पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की जाती है, जबकि पहले कांवड़ यात्रा और अन्य धार्मिक आयोजनों पर रोक लगाई जाती थी। आज श्रद्धालुओं का उत्साह और आस्था देखकर लगता है कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष भी भगवा वस्त्र पहनकर कांवड़ यात्रा में शामिल होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। विपक्ष को हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ाने, जय श्रीराम बोलने वालों पर कार्रवाई कराने, परशुरामपुर दंगे और धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाने वाली घटनाओं के लिए जनता से माफी मांगनी चाहिए।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को बस्ती के हर्रैया व कप्तानगंज विधानसभा क्षेत्र में 504 करोड़ रुपए से अधिक लागत की 77 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/ शिलान्यास किया। इसके अलावा विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाणपत्र/ स्वीकृतिपत्र और सहायता सामग्री का वितरित किया।

सपा के जिला अध्यक्ष का सीएम योगी ने सुनाया किस्सा

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले सरकारी धन कब्रिस्तानों की बाउंड्रीवाल बनाने और अवैध कब्जों पर खर्च होता था, जबकि आज वही धन धार्मिक स्थलों के पुनरुद्धार और विकास में लगाया जा रहा है। उस समय वक्फ बोर्ड के नाम पर गरीबों, दलितों और वंचितों की जमीनों पर कब्जे किए जाते थे और समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी तथा कांग्रेस के शासन में यह आम बात थी। एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जब वह गोरखपुर के सांसद थे, तब समाजवादी पार्टी के एक जिला अध्यक्ष स्वयं उनके पास शिकायत लेकर आए थे कि उनके घर के पास कब्रिस्तान के नाम पर जबरन कब्जा किया जा रहा है। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को भेजकर कब्जा हटवाया और उनकी जमीन बचाई। उस समय सपा सरकार को केवल कब्रिस्तान दिखाई देता था, आम जनता नहीं।

सपा के शासन में शिक्षा व्यवस्था नकल संस्कृति की शिकार थी

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले विकास योजनाएं कागजों तक सीमित रहती थीं, जबकि आज शिलान्यास और लोकार्पण की परियोजनाएं धरातल पर दिखाई देती हैं। उन्होंने हर्रैया में बन रहे मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां प्री-प्राइमरी से 12वीं तक आधुनिक शिक्षा एक ही परिसर में उपलब्ध होगी। प्रत्येक विद्यालय पर 27 से 30 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जहां स्मार्ट क्लास, आधुनिक भवन, फर्नीचर और सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

 

समाजवादी पार्टी के शासन में शिक्षा व्यवस्था नकल संस्कृति की शिकार थी और युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो गया था। किसानों को सुविधाएं नहीं मिलती थीं, गरीबों को योजनाओं का लाभ नहीं मिलता था और बिजली व्यवस्था इतनी खराब थी कि बस्ती में लोग बिजली के तारों पर कपड़े सुखाते थे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जनता बिजली संकट से जूझ रही थी जबकि सैफई में फिल्मी कलाकारों के कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे।

राम मंदिर को लेकर विपक्ष कहता था कि खून की नदियां बहेंगी

मुख्यमंत्री ने कहा कि हनुमानगढ़ी की पवित्र सीढ़ियों पर नमाज पढ़वाने का काम इन्हीं लोगों ने किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों ने हर प्रमुख धर्मस्थल को विवादित बनाने का प्रयास किया और अयोध्या में भी लगातार विवाद खड़ा करने की राजनीति की। एक समय ऐसा था जब अयोध्या में कोई जय श्रीराम का उद्घोष कर देता था तो उसके खिलाफ लाठी और गोली चलती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर निर्माण का विरोध करने वाले कहते थे कि यदि मंदिर बना तो खून की नदियां बहेंगी। लेकिन हमने कहा था कि एक मच्छर भी नहीं मरेगा और आज पूरा देश देख रहा है कि राम मंदिर का भव्य निर्माण हुआ, प्राण प्रतिष्ठा भी संपन्न हुई और कहीं कोई अशांति नहीं हुई। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को कोई नहीं रोक पाया और यह करोड़ों रामभक्तों की आस्था, विश्वास और संकल्प की जीत है।

सीएम ने दुर्योधन के शासन से की सपा सरकार की तुलना  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में प्रदेश में यह कहावत प्रचलित हो गई थी, देख सपाई, बिटिया घबराई। उस समय महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा खतरे में थी और कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी थी। जब सरकार ही बहन-बेटियों की सुरक्षा के लिए खतरा बन जाए तो उसकी तुलना दुर्योधन के शासन से ही की जा सकती है। पहले बस्ती सहित प्रदेश में दुर्गा पूजा, होली, रामनवमी जैसे पर्वों पर दंगे होते थे। परशुरामपुर दंगे का उल्लेख करते हुए कहा कि दलितों और गरीबों की बस्तियां जला दी गईं, लेकिन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। उस समय वे गोरखपुर से आकर पीड़ितों के बीच उनका दर्द बांटने आए थे। उन्होंने दावा किया कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में कोई बड़ा सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ और सभी त्योहार शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुए हैं। अब अपराधी कानून से डरते हैं।

करीब 1500 मंदिरों का पुनरुद्धार कराया

सीएम योगी ने कहा कि मखौड़ा धाम वही पावन भूमि है, जहां महाराजा दशरथ ने पुत्रेष्टि यज्ञ किया था और उसके फलस्वरूप भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अवतार लिया। मखौड़ा धाम, बाबा भदेश्वरनाथ धाम, तपसी धाम तथा महान साहित्यकार आचार्य रामचंद्र शुक्ल की जन्मस्थली इस क्षेत्र की गौरवशाली पहचान हैं। जनता जब अच्छे जनप्रतिनिधियों का चुनाव करती है, तभी विकास धरातल पर दिखाई देता है। मखौड़ा धाम, भदेश्वरनाथ धाम और तपसी धाम का तेजी से विकास कराया जा रहा है। कर्ण मंदिर विवाद का समाधान होने के बाद वहां भी सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू किया जा रहा है। 

 

सीएम योगी ने कहा कि 84 कोसी परिक्रमा का मार्ग मखौड़ा धाम से शुरू होता है और इसे श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ अयोध्या रिंग रोड के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। योगी ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की सरकारें 84 कोसी, 14 कोसी और पंचकोसी परिक्रमा तक रोकती थीं, जबकि भाजपा सरकार धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए तीर्थ स्थलों का विकास कर रही है। प्रदेश में लगभग 1500 मंदिरों का पुनरुद्धार कराया जा चुका है और सरकार बदलने के साथ परिणाम भी बदल गए हैं। भाजपा सरकार विरासत और विकास को साथ लेकर चल रही है।

 

विकसित भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को पूरा करने के लिए विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित बस्ती का निर्माण किया जा रहा है। बस्ती में मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, कृषि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, मखौड़ा धाम और भदेश्वरनाथ धाम सहित अनेक विकास परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि हर्रैया और बस्ती में पिछले नौ वर्षों में जितना विकास हुआ, उतना आजादी के बाद कभी नहीं हुआ।

 

इस अवसर पर प्रदेश सरकार में मंत्री सूर्य प्रताप शाही, विधायक अजय सिंह, क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय, जिला अध्यक्ष विवेकानंद मिश्र, विधायक दूध राम, विधान परिषद सदस्य सुभाष यदुवंश, जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चौधरी, गो सेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश शुक्ल, पूर्व विधायक चंद्र प्रकाश शुक्ला, दयाराम चौधरी, रवि सोनकर आदि मौजूद रहे।

PM Kisan Samman Nidhi की 24वीं किस्त कब आएगी खाते में, पूरा करें यह काम नहीं तो अटक जाएगा आपका पैसा

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM Kisan Samman Nidhi) के तहत केंद्र सरकार हर वर्ष 6000 रुपए प्रति किसान को मदद करती है। इस योजना की अभी तक 23 किस्त जारी हो चुकी हैं। हालांकि पिछले महीने जारी हुई पीएम किसान की 23वीं किस्त के पैसे कुछ किसानों के बैंक अकाउंट में नहीं पहुंचे हैं। अगर आप भी किसान हैं तो आप यह गलती नहीं करें। आपकी जरा सी गलती की वजह से उनकी किस्त अटक जाती है। पीएम किसान योजना का लाभ लेने के लिए ई-केवाईसी जरूरी कर दी गई है। अगर किसानों की ई-केवाईसी पूरी नहीं है, तो उनकी किस्त अटक सकती है।

ALSO READ: Amarnath Yatra 2026 : 5 दिन में बाबा बर्फानी 'अंतर्ध्यान', बड़ी चेतावनी तो नहीं, अमरनाथ गुफा में कैसे बनता है बर्फ का शिवलिंग? क्या है विज्ञान और आस्था का सबसे बड़ा रहस्य

कब आएगी 24वीं किस्त

पीएम किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त पिछले महीने जून मे जारी हुई है। ऐसे में अब अगली किस्त चार महीने बाद सितंबर-अक्टूबर में जारी हो सकती है। हालांकि अभी तक सरकार की तरफ से इस किस्त को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

 

क्या है किस्त रुकने का कारण 

किस्त रुकने की सबसे कारणों में ई-केवाईसी (e-KYC) पूरी न होना, बैंक खाते की जानकारी में गलती, आधार से जुड़ी जानकारी में अंतर या भूमि रिकॉर्ड का सत्यापन पूरा न होना शामिल है। 23वीं किस्त की तरह आपकी 24वीं किस्त न अटके, तो सबसे पहले आपको अपनी गलती सुधारनी होगी। इसके लिए आपको पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वहां पर आपको ऊपर दिए गए सभी कारणों को चेक करना होगा। अगर कोई भी जानकारी गलत दिखाई दे रही है तो आपको उसे जल्द सुधारना पड़ेगा।