अयोध्या कांड में जीजा-साले निकले महाचोर, दान चोरी में अब होगी ED और IT की एंट्री

Ayodhya Ram Mandir donation theft

Ayodhya Ram Mandir donation theft: अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामले में अयोध्या पुलिस की जांच में एक ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने आस्था के केंद्र पर लगे इस दाग को और गहरा कर दिया है। पुलिस के मुताबिक, मंदिर में सबसे बड़ी चोरी साल 2025 की शुरुआत में आयोजित हुए कुंभ मेले के दौरान हुई, जब देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं के चढ़ावे से रामजी का खजाना लबालब था। इस महाघोटाले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) और इनकम टैक्स (IT) विभाग की एंट्री होने जा रही है, क्योंकि चोरी के पैसों से आधे दर्जन से ज्यादा प्रॉपर्टी खरीदने और कंबलों में नोटों की गड्डियां छिपाने की बात सामने आई है।

 

पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी पहले से ही छोटी-मोटी चोरियां कर रहे थे। लेकिन साल 2025 की शुरुआत में जब कुंभ मेले के दौरान अयोध्या में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा और दान में भारी उछाल आया, तो आरोपियों की नीयत पूरी तरह डोल गई। उन्होंने इस सुनहरे मौके का फायदा उठाकर आपस में साठगांठ की और करोड़ों रुपए के चढ़ावे पर हाथ साफ कर दिया। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी पर बागेश्वर बाबा का विस्फोटक दावा, कहा- अगर उनकी पर्ची खोल दी तो….

जीजा-साले ने खरीदीं आधा दर्जन संपत्तियां

इस खेल के सबसे बड़े आरोपी रिश्ते में जीजा-साले हैं। गिरफ्तार आरोपी लवकुश मिश्रा और उसके जीजा अनुकल्प मिश्रा ने मिलकर सबसे ज्यादा कैश उड़ाया। पाप की इस कमाई से उन्होंने देखते ही देखते आधे दर्जन से अधिक अवैध संपत्तियां खरीद लीं, जिसे पुलिस ने ट्रैक कर लिया है।

 

मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला के भाई अभिषेक के एक योग केंद्र पर जब पुलिस ने रेड मारी, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारियों की आंखें फटी रह गईं। वहां रखे चार बड़े बक्सों में नोटों की गड्डियों को बड़ी चालाकी से कंबलों के अंदर छिपाकर रखा गया था। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि इनमें से एक बक्से पर बाकायदा 'राम राज्य कोष' लिखा हुआ था। ALSO READ: चढ़ावा चोरी के आरोपियों को झटका, अयोध्या का कोई वकील नहीं करेगा पैरवी

चंपत राय के ड्राइवर के घर भी मिला कैश

इस पूरे स्कैम का सबसे सनसनीखेज पहलू है आरोपी टिन्नू यादव की गिरफ्तारी। टिन्नू यादव कोई और नहीं, बल्कि राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का निजी ड्राइवर था। ड्राइवर होने के नाते उसकी पहुंच बहुत अंदर तक थी और उसी के पास नोटों की गिनती वाले अति-सुरक्षित कमरे की एक चाबी रहती थी। टिन्नू के घर से भी पुलिस को भारी मात्रा में कैश मिला है।

अब ED और IT कसेंगे शिकंजा

यह मामला अब सिर्फ स्थानीय पुलिस तक सीमित नहीं रहा। पुलिस अब इस पूरे मनी ट्रेल (पैसों के लेन-देन के रास्ते) की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) को पत्र लिख रही है, जबकि अवैध संपत्तियों की जांच के लिए इनकम टैक्स विभाग की मदद ली जा रही है। यही नहीं, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के कुछ कर्मचारी भी पुलिस के रडार पर हैं, क्योंकि तिजोरी की चाबी रखने वाले बैंक स्टाफ की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी चोरी मुमकिन ही नहीं थी। आरोपियों के खातों में उनकी वैध कमाई से कई गुना ज्यादा का लेन-देन मिला है। इस मामले में अब तक की सबसे बड़ी रिकवरी 89 लाख रुपए की हुई है। ALSO READ: अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की खुलती जा रहीं परतें, SIT ने सौंपी रिपोर्ट, चंपत की भूमिका संदिग्ध

क्या है अयोध्या से जुड़ा यह पूरा मामला? 

अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और उद्घाटन के बाद से ही देश-विदेश से हर दिन लाखों श्रद्धालु यहां आ रहे हैं। इस वजह से मंदिर के दानपात्रों और काउंटरों पर हर महीने करोड़ों रुपए का नकद और चेक के माध्यम से दान आता है। इन पैसों को गिनने के लिए मंदिर परिसर में एक स्पेशल काउंटिंग रूम बनाया गया है, जहां बैंक के अधिकारी और ट्रस्ट के भरोसेमंद लोग मौजूद रहते हैं। यह पूरा मामला तब सामने आया जब मंदिर ट्रस्ट को ऑडिट और रूटीन चेकिंग के दौरान दान में आई रकम और बैंक में जमा हुई राशि के आंकड़ों में बड़ा अंतर (मिसमैच) नजर आया।

 

इसके बाद ट्रस्ट ने आंतरिक स्तर पर जांच शुरू की। पुलिस में औपचारिक FIR दर्ज होने से पहले ही ट्रस्ट ने मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला की निशानदेही पर 89 लाख रुपए की भारी-भरकम राशि बरामद कर ली थी। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए टिन्नू यादव (ड्राइवर), लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और अविनाश शुक्ला समेत कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में ट्रस्ट महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा भी हो चुका है।

 

Ram Mandir Donation Scam: कुंभ में लूटा गया सबसे ज्यादा राम मंदिर का चढ़ावा! जीजा-साले की जोड़ी ने उड़ाई बड़ी रकम

Ram Mandir Donation Scam: राम मंदिर के लिए मिले दान की चोरी के मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। अयोध्या पुलिस की जांच में पता चला है कि मंदिर में सबसे ज्यादा चोरी 2025 की शुरुआत में कुंभ मेले के दौरान हुई थी। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में से कुछ कुंभ से पहले भी छोटी-मोटी चोरियों में शामिल थे। लेकिन कुंभ के दौरान मंदिर में चढ़ावे और दान में भारी बढ़ोतरी हुई थी। पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने इसका फायदा उठाया और मिलीभगत करके एक बड़ी चोरी को अंजाम दिया।

फिलहाल इस मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अब तक कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव (जिन्हें टिन्नू यादव भी कहा जाता है) शामिल हैं। इन सभी से मंगलवार को कई घंटों तक पूछताछ की गई।

वहीं, पुलिस का दावा है कि पूरी साजिश सभी आठों आरोपियों ने मिलकर रची थी।

जीजा-साले की जोड़ी ने सबसे ज्यादा कैश चुराया

जांच में सामने आया है कि जीजा-साले की जोड़ी, लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा ने सबसे ज्यादा रकम चुराई थी। पुलिस के मुताबिक, इस जोड़ी ने चोरी के पैसों से प्रॉपर्टी भी खरीदी। अब तक पुलिस ने इन दोनों से जुड़ी आधी दर्जन से ज्यादा प्रॉपर्टी का पता लगाया है।

पैसे के लेन-देन की जांच के लिए, अयोध्या पुलिस अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के साथ मिलकर आरोपी की संपत्ति और बैंक ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है। अधिकारी मनी ट्रेल (पैसे के लेन-देन) की विस्तृत जांच के लिए एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) से भी संपर्क करने की योजना बना रहे हैं। वहीं, जांच के दौरान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी शक के घेरे में आ गई है।

ऐसा इसलिए क्योंकि, राम मंदिर में नकद चढ़ावे की गिनती SBI की देखरेख में होती है, जो इस काम के लिए एक प्राइवेट एजेंसी को नियुक्त करता है। मंदिर में आने वाले दान को चार दान-पेटियों में जमा किया जाता है और इसकी गिनती 14 लोगों की एक टीम करती है, जिसमें बैंक के 11 कर्मचारी और मंदिर ट्रस्ट के तीन सदस्य शामिल होते हैं।

इस बीच, पुलिस ने बताया कि इस मामले में सबसे ज्यादा नकद राशि आरोपी अविनाश शुक्ला से जुड़ी कौशालपुरी की एक जगह से बरामद की गई थी। यह जगह उसके भाई अभिषेक से जुड़े एक योग केंद्र की है।

योग सेंटर चलाने वाली सीमा तिवारी ने बताया कि पुलिस ने 5 जून को सेंटर की तलाशी ली और भारी मात्रा में कैश बरामद किया। उन्होंने कहा कि वहां अभिषेक के चार बक्से रखे हुए थे, जिनमें कंबल के अंदर पैसे छिपाकर रखे गए थे। एक बक्से पर “राम राज्य कोष” लिखा हुआ था।

सीमा तिवारी के मुताबिक, जब अभिषेक से छापेमारी और कैश के बारे में पूछताछ की गई, तो उसने दावा किया कि उसका भाई अविनाश शुक्ला ड्रग्स के धंधे में शामिल है और इसी वजह से छापेमारी हुई।

आरोपियों के घरों से कैश बरामद

वहीं, जांच अब सभी आरोपियों के घरों तक भी पहुंच गई है। पुलिस ने तीन दिन पहले तलाशी ली और टिन्नू यादव के घर से कैश बरामद किया, जो पहले ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का ड्राइवर रह चुका है।

सूत्रों ने बताया कि जांचकर्ताओं को पता चला कि मंदिर में मिले दान की गिनती वाले कमरे की एक चाबी कथित तौर पर टिन्नू यादव के पास थी, जबकि दूसरी चाबी बैंक स्टाफ के पास रहती थी। सूत्रों ने आगे बताया कि बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से फंड का कथित तौर पर गबन किया गया और इसमें शामिल लोगों के बीच पैसे आपस में बांट लिए गए।

इसके साथ ही, पुलिस ने सभी आरोपियों की चल और अचल संपत्ति से जुड़े बैंक दस्तावेज और रिकॉर्ड भी इकट्ठा किए हैं।

जांचकर्ताओं के अनुसार, पिछले एक साल के उनके वित्तीय रिकॉर्ड की जांच से कथित तौर पर ऐसे लेन-देन का पता चला है जो उनकी ज्ञात आय से कहीं ज़्यादा थे। जांचकर्ताओं ने बताया कि, इस मामले में सबसे ज्यादा कैश की बरामदगी 89 लाख रुपये की हुई, जो आरोपी अविनाश शुक्ला द्वारा कथित तौर पर जगह बताने के बाद की गई। पुलिस ने बताया कि इस मामले में FIR दर्ज होने से पहले ही मंदिर ट्रस्ट ने यह रकम बरामद कर ली थी।

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अयोध्या दान प्रकरण में एसआईटी जांच की समय सीमा बढ़ाई, 15 जुलाई तक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश

Deadline extended for SIT probe into Ayodhya pilgrimage site donation matter

Donation controversy in Ayodhya : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या तीर्थ क्षेत्र में दान प्रकरण की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) की समय-सीमा 15 जुलाई तक बढ़ा दी है। मामले के विभिन्न पहलुओं की गहन छानबीन के लिए एसआईटी ने मुख्यमंत्री से अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया था, जिसे स्वीकार करते हुए उन्होंने एसआईटी को आगामी 15 जुलाई तक अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

 

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी का गठन करने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि एसआईटी इस प्रकरण में हर पहलू की सघनता और निष्पक्षता से जांच करते हुए दूध का दूध और पानी का पानी करेगी।

दोषियों को किसी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। गत 23 जून को एसआईटी के प्रमुख सदस्य लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने अपना प्रारंभिक प्रतिवेदन गृह विभाग को सौंपा था, जिसमें कठोर संस्तुतियां की गई थीं।

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इन संस्तुतियों के आधार पर गत 25 जून को ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में पहली एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें 8 नामजद व अन्य अज्ञात व्यक्तियों को अभियुक्त बनाया गया था। सभी नामजद अभियुक्त गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

Ram Mandir Donation Row: ‘भगवान श्री राम के दर्शन करना चाहते थे, लेकिन…’; अयोध्या में कांग्रेस नेता अजय राय हाउस अरेस्ट, पुलिस को दी चेतावनी

Ram Mandir Donation Row: उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान के कथित गबन को लेकर जारी विवाद के बीच कांग्रेस का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल मंगलवार (30 जून) को अयोध्या में राम मंदिर में पूजा-अर्चना करेगा। लेकिन, इस बीच, कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय को अयोध्या के एक होटल में नजरबंद कर दिया गया है।

पार्टी की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय करेंगे। इसमें पार्टी के सांसद किशोरी लाल शर्मा (अमेठी), राकेश राठौर (सीतापुर), उज्ज्वल रमण सिंह (प्रयागराज) और तनुज पुनिया (बाराबंकी) शामिल होंगे।

प्रतिनिधिमंडल के साथ बाराबंकी के पूर्व सांसद एस.पी. गौतम, विधान परिषद के पूर्व सदस्य दीपक सिंह, महाराजगंज के पूर्व विधायक वीरेंद्र चौधरी और बाराबंकी की पूर्व विधायक मीता गौतम भी मौजूद रहेंगी। पार्टी ने प्रस्तावित यात्रा कार्यक्रम की जानकारी स्थानीय प्रशासन को दे दी है। इस बीच, कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय को अयोध्या के एक होटल में नजरबंद कर दिया गया। पार्टी ने देर रात एक बयान में इसकी पुष्टि की है।

‘अयोध्या नहीं छोड़ेंगे’

अजय राय ने मंगलवार को दावा किया कि जब तक उन्हें राम मंदिर जाने की इजाजत नहीं मिलती तब तक अयोध्‍या नहीं छोड़ेंगे। अयोध्‍या से अजय राय ने मंगलवार को फोन पर पीटीआई से बातचीत में कहा, “मंगलवार के कार्यक्रम के लिए अयोध्या पहुंचते ही पुलिस ने उन्हें तुरंत ‘हाउस अरेस्ट’ (नजरबंद) कर लिया।” हालांकि, उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें राम मंदिर जाने की इजाजत नहीं मिलती, वे अयोध्या नहीं छोड़ेंगे।

राय ने एक अतिथि गृह से पीटीआई फोन पर बातचीत में पूछा, “यह कैसी सरकार है जो हमारे राम मंदिर जाने से डरती है।” राय ने कहा कि उन्हें मंगलवार के कार्यक्रम के लिए मंदिर शहर पहुंचने के तुरंत बाद सोमवार आधी रात को एक अतिथि गृह में ले जाया गया था। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, “आधी रात को मुझे मेरे होटल से आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय के अतिथि गृह में ले जाया गया और अभी मुझे वहीं रखा गया है।”

उनकी पत्नी ने उनके ठिकाने को लेकर चिंता जताई थी। राय यह पक्का नहीं बता पाए कि उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया है या नजरबंद किया गया है। उन्होंने अंदेशा जताते हुए कहा, “मुझे लगता है कि उन्होंने मुझे गिरफ़्तार कर लिया है, वरना वे मुझे आधी रात को इस अतिथि गृह में क्यों लाते और यहां क्यों रोककर रखते?” राय ने कहा, ‘‘मेरे दल के कई सदस्य जो आज के कार्यक्रम के लिए अलग-अलग क्षेत्रों से आ रहे थे, उन्हें रोका गया, गिरफ्तार किया गया या उनके घरों में ही रोक दिया गया।’’

कौन-कौन नेता शामिल?

इस दल में शामिल अन्य कांग्रेस नेताओं में सांसद किशोरी लाल शर्मा (अमेठी), राकेश राठौर (सीतापुर), उज्ज्वल रमन सिंह (प्रयागराज) और तनुज पुनिया (बाराबंकी) के अलावा अन्य लोग भी शामिल थे। अजय राय ने इस बीच मंगलवार को भारतीय युवक कांग्रेस के X पर एक पोस्ट को साझा किया जिसमें कहा गया कि आज कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल प्रभु श्री राम के दर्शन के लिए अयोध्या जा रहा था, लेकिन भाजपा सरकार ने उप्र कांग्रेस अध्यक्ष अजय रा जी समेत प्रतिनिधिमंडल को हाउस अरेस्ट कर लिया।

पोस्‍ट में सवाल उठाया गया है कि आखिर प्रभु श्री राम के भक्तों से इतना डर क्यों? जय श्री राम। अयोध्या में राम मंदिर दान में कथित गबन का मामला आने के बाद इसके पहले भी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने 18 जून को अयोध्या की यात्रा करके दर्शन पूजन किया था। अयोध्या में दान में गबन का मामला सात जून को समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए उठाया और न्यायिक हस्तक्षेप पर जोर दिया था।

हालांकि, इस मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर यूपी के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने एक तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया जिसकी रिपोर्ट के आधार पर आठ आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

‘भगवान श्री राम के दर्शन करना चाहते थे, लेकिन…’

अजय राय ने कहा, “आज हम सभी भगवान श्री राम के दर्शन करना चाहते थे, लेकिन बीजेपी सरकार ने हमें गिरफ़्तार कर लिया है और आचार्य नरेंद्र देव कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस में बंद कर दिया है। उन्होंने हमारे सभी साथियों को भी नजरबंद कर दिया है। हम प्रार्थना करते हैं कि भगवान राम बीजेपी और आरएसएस के लोगों को सद्बुद्धि दें, जो उनके नाम का इस्तेमाल करके सत्ता में आए हैं, ताकि वे इस पवित्र शहर में हो रहे घोटालों को रोकें। हमारी सामूहिक मांग है कि पुलिस रिमांड लेकर उन निचले स्तर के कर्मचारियों से पूछताछ करे जिन्हें जेल भेजा गया है।”

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यूपी कांग्रेस प्रमुख ने आगे कहा, “इसके अलावा, इसमें शामिल हाई-प्रोफ़ाइल लोगों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज होनी चाहिए, जिनमें निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र (जो पांच साल तक प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव रहे), अनिल मिश्र (जो इस भ्रष्टाचार और चोरी में सीधे तौर पर शामिल हैं), गोपाल राय, चंपत राय, बंसल और गोविंद देव गिरी शामिल हैं। उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए और उनके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए।”

‘हम उन हाथों को काट देंगे जो…’: सिंधु जल विवाद पर पाकिस्तान ने फिर दी गीदड़भभकी

पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने भारत के खिलाफ एक बार फिर भड़काऊ बयान दिया है। इस बार उन्होंने कहा कि जो भी पाकिस्तान के हिस्से के पानी पर दावा करेगा, उसके “हाथ काट दिए जाएंगे।” बता दें कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है।

गौरतलब है कि साल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय नागरिक की मौत के बाद भारत ने इस संधि को फिलहाल स्थगित रखने का फैसला किया था।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मलिक ने भारत पर पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने का आरोप लगाया और कहा कि पाकिस्तान अपने हिस्से के पानी में किसी भी तरह की रुकावट बर्दाश्त नहीं करेगा।

‘डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मलिक ने कहा, “एक पड़ोसी देश के प्रधानमंत्री एक नल को कंट्रोल कर रहे हैं। उनका कहना है कि वह पाकिस्तान में पानी की एक बूंद भी नहीं बहने देंगे।”

उन्होंने बताया कि पाकिस्तान की 40-50 प्रतिशत आबादी अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर है। उन्होंने कहा, “कोई बाहरी ताकत देश की खाद्य सुरक्षा, 50% रोजगार और 25% अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण करने की कोशिश कर रहा है।”

मंत्री ने दावा किया कि पाकिस्तान ने “पहले ही साफ कर दिया है कि जो कोई भी उसे पानी से वंचित करने की कोशिश करेगा, उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।”

उन्होंने ने कहा, ” लेकिन यह सिर्फ पानी का नहीं, बल्कि न्याय का भी सवाल है। हम अपनी रक्षा करेंगे… ऐसा नहीं है कि हमने बस इसकी घोषणा की है, बल्कि हमने साबित किया है कि अगर कोई हमारे हिस्से के पानी पर हाथ भी डालेगा, तो हम वह हाथ काट देंगे।”

मलिक ने कहा कि दुनिया में दूसरी जगहों पर, बिना किसी संधि के भी पानी बहता रहता है, जो सिर्फ एक कन्वेंशन (समझौते) से नियंत्रित होता है।

उन्होंने आगे कहा, “क्या अब हर ‘अपर रिपेरियन’ (नदी के ऊपरी हिस्से वाले देश) को ‘लोअर रिपेरियन’ (नदी के निचले हिस्से वाले देश) की ओर पानी का बहाव रोकने का अधिकार है?… लेकिन हमारे पास तो संधि भी है। तो फिर यहां पानी कैसे रोका जा सकता है? यही बात हम कल रखेंगे।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि “संधि मौजूद है” और साथ ही यह भी कहा कि मंगलवार का सम्मेलन मुख्य रूप से न्याय और अधिकारों के बारे में था।

उन्होंने ने कहा, “यह तय किया जाएगा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न्याय क्या है। यह तय किया जाएगा कि क्या दुनिया भर में नदी के निचले इलाकों में रहने वाले बच्चों को पानी का अधिकार है।”

पाकिस्तान ने जल संधि का बचाव किया

उसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में, पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने भी जोर देकर कहा कि सिंधु जल संधि कानूनी रूप से बाध्यकारी है और इसे एकतरफा तौर पर निलंबित, रद्द या उसमें संशोधन नहीं किया जा सकता। उन्होंने दावा किया कि “कानूनी रूप से लागू संधि” के तहत पाकिस्तान के लोगों का सिंधु जलमार्गों पर अधिकार है, जो अभी भी प्रभावी है।

‘डॉन’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, “कानूनी तौर पर पाकिस्तान के रुख को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन मिला है, क्योंकि IWT को एकतरफा तौर पर रद्द, समाप्त या उसमें संशोधन नहीं किया जा सकता है।”

मंत्री ने दावा किया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और रक्षा बलों के प्रमुख तथा सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने कई बार कहा है कि “पानी हमारी जीवन रेखा के साथ-साथ हमारी ‘रेड लाइन’ (अति-महत्वपूर्ण सीमा) भी है”।

संधि

सीमापार से आए इन बयानों के कुछ हफ्तों बाद केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सी.आर. पाटिल ने मीडिया को दिए एक विशेष इंटरव्यू में कहा था कि भारत अगले डेढ़ से दो वर्षों के भीतर सिंधु जल में अपने हिस्से का पूरा उपयोग करने की योजना बना रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट कहा था कि भारत के हिस्से का एक भी बूंद पानी पाकिस्तान की ओर नहीं जाने दिया जाएगा।

भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान अपनी जमीन से संचालित सीमा पार आतंकवाद के ढांचे को खत्म करने के लिए ठोस और सत्यापन योग्य कदम नहीं उठाता, तब तक यह संधि स्थगित ही रहेगी।

बता दें की यह संधि 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई थी और तब से भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी प्रणाली और उसकी सहायक नदियों के पानी के बंटवारे और उपयोग को नियंत्रित करती आ रही है।

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Ram Mandir Donation Scam: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय से 3 घंटे से ज्यादा पूछताछ, गबन के आरोपों में अपनी भूमिका से किया इनकार

Ram Temple Donation Scam: अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले चंदे में कथित चोरी की जांच तेज हो गई है। पुलिस ने सोमवार (29 जून) को ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के पूर्व महासचिव चंपत राय का बयान तीन घंटे से ज्यादा समय तक दर्ज किया। ‘न्यूज 18’ के मुताबिक पूछताछ के दौरान राय ने कथित घोटाले में किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया। उन्होंने जांचकर्ताओं से कहा कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि मंदिर का चंदा संभालने वाले कर्मचारी ऐसा अपराध कर सकते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, जांचकर्ताओं ने मंदिर के चंदे के मैनेजमेंट में कथित अनियमितताओं को लेकर राय से विस्तार से पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय ने कहा कि कथित गबन में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने हैरानी जताई कि ट्रस्ट के साथ काम करने वाले लोग ऐसे घोटाले में शामिल हो सकते हैं।

अनिल मिश्रा और गोपाल राव को भी नोटिस

पुलिस ने चल रही जांच के तहत ट्रस्ट के सदस्यों अनिल मिश्रा और गोपाल राव को भी सवाल-जवाब के लिए नोटिस जारी किए हैं। इस बीच, ट्रस्ट ने अपनी बैठक 6 जुलाई को करने का फैसला किया है। इस बैठक में राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर फैसला लिए जाने की उम्मीद है।

यह मामला तब सामने आया जब राम मंदिर में मिले चंदे में बड़े पैमाने पर गबन के आरोप लगे। इसके बाद FIR दर्ज की गई। राम भक्तों द्वारा दान किए गए कैश और कीमती सामान की गिनती में शामिल आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों की पहचान अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर यादव उर्फ़ टिन्नू यादव के तौर पर हुई है।

आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत

उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान के कथित गबन मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को सोमवार को स्थानीय अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। विशेष अभियोजन अधिकारी उमेश दुबे ने बताया कि पिछली न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से स्पेशल एंटी-करप्शन कोर्ट के विशेष जज रजत वर्मा के समक्ष पेश किया गया।

उन्होंने बताया कि पुलिस ने आरोपियों की हिरासत के लिए कोई आवेदन नहीं दिया। इससे पहले, एक विशेष अदालत ने उन्हें सोमवार तक तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था। अदालत ने सोमवार को मामले की सुनवाई के बाद आरोपियों की न्यायिक हिरासत 14 दिन और बढ़ा दी।

आरोपियों को नहीं मिल रहे हैं वकील

अयोध्या में वकीलों ने सोमवार को राम मंदिर में दान के कथित गबन मामले में गिरफ्तार आरोपियों की अदालत में पैरवी नहीं करने का फैसला किया है। यह फैसला बार एसोसिएशन फैजाबाद की एक बैठक में लिया गया।

सोमवार को बार एसोसिएशन की बैठक में वकीलों ने यह भी तय किया कि अगर उसका कोई सदस्य राम मंदिर मामले के आरोपियों का मामला अदालत में लड़ने की कोशिश करता है, तो उस पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

बार एसोसिएशन की बैठक में वकीलों ने जोरदार मांग की है कि मंदिर प्रबंधन से जुड़े रहे चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अयोध्या छोड़ देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ये तीनों तीन दिन के भीतर शहर से बाहर नहीं गए, तो पूरे अयोध्या शहर की घेराबंदी कर दी जाएगी और किसी को भी अंदर आने की इजाज़त नहीं दी जाएगी।

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बैठक के बाद फैजाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका शरण मिश्र ने पत्रकारों को बताया कि सर्वसम्मति से यह फैसला किया गया कि एसोसिएशन का कोई भी वकील आरोपियों की ओर से पेश नहीं होगा। उन्होंने कहा, “अगर कोई वकील फिर भी आरोपियों का मुकदमा लड़ना चाहता है, तो उसे पहले एक आवेदन देना होगा और प्रति आरोपी पांच लाख रुपये बार एसोसिएशन में योगदान के तौर पर जमा करने होंगे। इस राशि का इस्तेमाल एसोसिएशन मामले में मुकदमा चलाने के लिए करेगी।”

राम मंदिर चंदा मामले के आरोपी का पक्ष रखने वाले वकील पर ₹5 लाख का लगेगा जुर्माना! चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अयोध्या छोड़ने की मांग

Ram Temple Donation Row: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में वकीलों ने सोमवार (29 जून) को राम मंदिर में दान के कथित गबन मामले में गिरफ्तार आरोपियों की अदालत में पैरवी नहीं करने का फैसला किया है। यह ऐलान बार एसोसिएशन फैजाबाद की एक बैठक के बाद किया गया। सोमवार को बार एसोसिएशन की बैठक में वकीलों ने यह भी तय किया कि अगर उसका कोई सदस्य राम मंदिर मामले के आरोपियों का मामला अदालत में लड़ने की कोशिश करता है, तो उस पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

बार एसोसिएशन की बैठक में वकीलों ने जोरदार मांग की है कि मंदिर मैनेजमेंट से जुड़े रहे चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अयोध्या छोड़ देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर ये तीनों तीन दिन के भीतर शहर से बाहर नहीं गए, तो पूरे अयोध्या शहर की घेराबंदी कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी को भी अयोध्या के अंदर आने की इजाज़त नहीं दी जाएगी।

अयोध्या बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा ने कहा, “कोई भी वकील आरोपियों का पक्ष नहीं रखेगा। अगर कोई वकील उनका पक्ष रखता है, तो उसे एसोसिएशन के कंट्रीब्यूशन फंड में प्रति नाम 5 लाख रुपये जमा करने होंगे।”

चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अयोध्या छोड़ने की मांग

उन्होंने न्यूज एजेंसी ANI से आगे कहा, “चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए CrPC की धारा 173 के तहत कार्रवाई शुरू की जाएगी। CBI जांच की मांग की जाएगी। जरूरत पड़ने पर अयोध्या एडवोकेट्स एसोसिएशन अपने खर्च पर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएगी।”

अयोध्या के वकीलों ने राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन के मामले में गिरफ़्तार आरोपियों का मुकदमा न लड़ने के अपने एक ऐतिहासिक फैसले को दोहराया। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने 2005 में भी ऐसा ही फैसला लिया था, जब राम जन्मभूमि परिसर पर आतंकवादी हमले के आरोपियों को फैज़ाबाद कोर्ट में पेश किया गया था।

‘सभी की भावनाएं आहत हुई हैं’

बार एसोसिएशन के सचिव शैलेंद्र जायसवाल ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, “मंदिर के चढ़ावे की चोरी से हम सभी की भावनाएं आहत हुई हैं। फैजाबाद के वकील गिरफ्तार आरोपियों की ओर से मुकदमा नहीं लड़ने पर सहमत हो गए हैं। इस मामले में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और बार की आम सभा ने फैसला लिया है। इसके बाद आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।”

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वहीं, कालिका मिश्रा ने रविवार को कहा था कि राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले के आरोपियों का मुकदमा नहीं लड़ने का अंतिम निर्णय सोमवार को प्रस्तावित संगठन की आम बैठक में लिया जाएगा। उन्होंने बताया था कि साल 2005 में भी अयोध्या के वकीलों ने ऐसा ही निर्णय लिया था जब राम जन्मभूमि परिसर पर हुए आतंकवादी हमले के आरोपियों की पैरवी नहीं करने का फैसला किया गया था।

8 आरोपी गिरफ्तार

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आठ आरोपियों अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, राम शंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर उर्फ टिन्नू यादव को गिरफ्तार किया गया है। उन्हें 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। रविवार को पुलिस टीमों ने सभी आठ आरोपियों के घरों पर एक साथ तलाशी भी ली।

आरोपियों ने मीडिया से बनाई दूरी

पीटीआई ने बार-बार चंपत राय और अनिल मिश्रा से संपर्क करने की कोशिश की। लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो सकी। हालांकि, अनिल मिश्रा के बेटे रवि मिश्रा ने पीटीआई से कहा कि उनके पिता दोषी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि एसआईटी की जांच चल रही है और इससे सच सामने आएगा।

रवि ने कहा, “मेरे पिता को मंदिर की जिम्मेदारी दी गई है और वह वहां दिन-रात काम कर रहे हैं।” जब उनसे पूछा गया कि क्या परिवार में राम मंदिर में फंड के गबन के बारे में कोई चर्चा हुई, तो रवि ने कहा, “हम घर पर मंदिर के मामलों पर चर्चा नहीं करते, हम सिर्फ़ परिवार के मामलों पर बात करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं अपने पिता को अच्छी तरह जानता हूं, वह कभी ऐसी चीजों में शामिल नहीं होंगे। अगर कोई उन पर आरोप लगा रहा है, तो लगाने दें, हम क्या कर सकते हैं, हम हर किसी के मुंह पर ताला तो नहीं लगा सकते।”

मीडिया कवरेज पर रोक

इस बीच, सोमवार सुबह राम मंदिर के मुख्य एंट्री गेट के बाहर मीडिया कवरेज पर रोक लगा दी गई। मंदिर परिसर के बाहर तैनात एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि राम मंदिर के एंट्री गेट पर तैनात पुलिस बल को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की ओर से आदेश दिया गया था कि किसी भी मीडियाकर्मी को राम मंदिर में प्रवेश करने वाले श्रद्धालुओं फिल्मिंग करने या उनसे बातचीत करने की अनुमति नहीं है।

फार्महाउस, स्कॉर्पियो और 65 लाख का घर….कौन है अनुकल्प मिश्रा? जिसपर है राम मंदिर चढ़ावे में घपला करने का आरोप

Ram Mandir Donation Theft Case: राम मंदिर चढ़ावा विवाद में एक और नया मामला सामने आया है। पुलिस अब अनुकल्प मिश्रा की संपत्ति और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है। जांचकर्ताओं को शक है कि भक्तों के चढ़ावे की कथित चोरी में वह मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक था। अधिकारी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या अनुकल्प की संपत्ति में हुई बढ़ोतरी और हाल की खरीदारी के लिए मंदिर के दान का पैसा इस्तेमाल किया गया था। गौरतलब है कि इस वित्तीय जांच का मकसद आरोपी से जुड़े संदिग्ध पैसों के लेन-देन का पता लगाना है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अनुकल्प मंदिर में नकद दान की गिनती करने वाली आउटसोर्स टीम का हिस्सा था और कथित तौर पर उसने इस साजिश में मुख्य भूमिका निभाई थी।

फार्महाउस, मकान और एसयूवी की जांच जारी

जांचकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि अनुकल्प ने आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से अपने साले लवकुश मिश्रा को भी उसी नकदी गिनती टीम में शामिल करवाया था। ये दोनों इस मामले में अब तक गिरफ्तार किए गए आठ लोगों में शामिल हैं।

बता दें कि जांच के सिलसिले में पुलिस अयोध्या जिले में अनुकल्प के पैतृक गांव बसावा गई।अधिकारियों ने पाया कि उसका घर आस-पास के घरों की तुलना में काफी आलीशान था। गांव वालों ने जांचकर्ताओं को बताया कि पिछले कुछ सालों में परिवार की आर्थिक स्थिति काफी बेहतर हुई है।

पुलिस इस बाद की पुष्टि करने में जुटी है कि क्या अनुकल्प ने हाल ही में गांव के बाहरी इलाके में एक फार्महाउस बनवाया था और पिछले साल अयोध्या में एक घर खरीदा था, जिसकी कीमत कथित तौर पर लगभग 65 लाख रुपये थी। साथ ही उन दावों की भी जांच की जा रही है वह महिंद्रा स्कॉर्पियो SUV खरीदने की प्रक्रिया में था।

जांच का एक अहम हिस्सा 30 अप्रैल को अनुकल्प द्वारा अपने गांव में कथित तौर पर आयोजित सात दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम भी है। पुलिस इस कार्यक्रम में हुए खर्च और इस्तेमाल किए गए फंड के स्रोत की पुष्टि कर रही है, क्योंकि राम मंदिर प्रतिष्ठान से जुड़े वरिष्ठ लोगों और स्थानीय जन प्रतिनिधियों सहित कई प्रमुख हस्तियां इस कार्यक्रम में शामिल हुई थीं।

वित्तीय रिकॉर्ड की जांच जारी

जांचकर्ता लवकुश मिश्रा के वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच कर रहे हैं। आरोप है कि वह अनुकल्प मिश्रा की सिफारिश पर राम मंदिर में दान गिनने वाली टीम में शामिल हुआ था। इसके अलावा, पुलिस उन दावों की भी जांच कर रही है कि लवकुश ने हाल ही में 1 लाख रुपये से ज्यादा की मोटरसाइकिल खरीदी थी, जबकि बताया जाता है कि वह किराए के मकान में रहता है।

अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार किए गए सभी आठ आरोपियों के बैंक अकाउंट, प्रॉपर्टी के रिकॉर्ड, निवेश, संपत्ति और खर्च करने के तरीकों की जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या ये उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से ज्यादा हैं।

जांच करने वालों ने कहा कि यह कवायद इस बात का पता लगाने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा है कि क्या कथित तौर पर दान की चोरी से मिली रकम को चल या अचल संपत्ति में निवेश किया गया था। पुलिस ने संकेत दिया है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

जांचकर्ताओं के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया इस बात का पता लगाने के लिए की जा रही है कि क्या कथित दान चोरी से मिले पैसे को चल या अचल संपत्तियों में लगाया गया था। पुलिस ने यह भी संकेत दिया है कि जांच आगे बढ़ने पर और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

अब तक आठ आरोपी गिरफ्तार

मामले में गिरफ्तार किए गए आठ लोगों में राम शंकर यादव उर्फ ​​टीनू यादव, मनीष यादव, सुभाष श्रीवास्तव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडे और रमाशंकर मिश्रा शामिल हैं।

जांचकर्ताओं के अनुसार, राम शंकर यादव (उर्फ टिन्नू) राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी सहयोगी और पूर्व ड्राइवर रहे हैं। मनीष यादव, टिन्नू का भतीजा बताया जाता है और वह दान गिनने के काम में शामिल था।

सुभाष श्रीवास्तव बैंक के पूर्व कर्मचारी हैं जिन्होंने कैश की गिनती की देखरेख की थी, जबकि अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडे और रमाशंकर मिश्रा उस टीम का हिस्सा थे जो मंदिर के दान और कीमती सामान का काम संभालते थे।

पुलिस ने बताया कि राम मंदिर के दान (जिसमें कैश और कीमती सामान शामिल था) की कथित चोरी और हेराफेरी के मामले में FIR दर्ज होने के बाद इन आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांचकर्ताओं ने कहा कि जांच जारी है और आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

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Ram Mandir Donation Case: राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने दिया इस्तीफा, अनिल मिश्रा ने भी छोड़ा पद

Ram Mandir Donation Case: राम मंदिर चढ़ावा विवाद में एक बड़ी खबर सामने आ रही है। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इस्तीफा दे दिया है। जानकारी के मुताबिक, अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद उनपर इस्तीफे का दबाव था। वहीं चंपत राय के अलावा ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने भी इस्तीफा दे दिया है।

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Who is Champat Rai: प्रोफेसर से राम मंदिर ट्रस्ट के पावरफुल सेक्रेटरी बनने तक, जानें चंदा चोरी विवाद के बाद इस्तीफा देने वाले चंपत राय की पूरी कहानी

Ram Mandir Donation Theft Controversy: अयोध्या राम मंदिर से जुड़ी एक बड़ी खबर आई है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक, राम मंदिर दान चोरी विवाद के तूल पकड़ने के बाद उन्होंने यह बड़ा कदम उठाया है।

इस विवाद को लेकर अयोध्या में विश्व हिंदू परिषद (VHP) की एक बेहद महत्वपूर्ण और हाई-लेवल बैठक हुई, जिसके ठीक बाद चंपत राय के इस्तीफे की खबर आई। वीएचपी इस पूरे विवाद से संगठन की छवि को हो रहे नुकसान को लेकर बेहद चिंतित थी। आइए जानते हैं चंपत राय के इस्तीफे के पीछे की पूरी कहानी और एक केमिस्ट्री टीचर से राम मंदिर ट्रस्ट के सबसे ताकतवर पद तक पहुंचने का उनका पूरा सफरनामा।

क्यों देना पड़ा चंपत राय को इस्तीफा?

सूत्रों के अनुसार, अयोध्या में दान विवाद को लेकर FIR दर्ज होने से ठीक पहले वीएचपी की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा, निर्माण प्रभारी गोपाल राव के साथ-साथ वीएचपी के महासचिव बजरंग लाल बागरा और केंद्रीय संगठनात्मक सचिव मिलिंद परांडे समेत कई बड़े पदाधिकारी शामिल हुए थे।

इस बैठक में एसआईटी जांच और दान विवाद से उपजे हालातों पर गंभीर चर्चा हुई। चूंकि चंपत राय वीएचपी और राम मंदिर आंदोलन का एक बेहद प्रभावशाली चेहरा रहे हैं, इसलिए उनके इर्द-गिर्द खड़े हुए इस विवाद से संगठन की साख पर आंच आ रही थी। मामले में आरोपी टीनू यादव को चंपत राय का करीबी बताया जा रहा है, जबकि अन्य आरोपी लवकुश और अनुकल्प, अनिल मिश्रा के करीबी माने जा रहे हैं। इसी दबाव के बीच चंपत राय ने पद छोड़ने का फैसला किया।

कौन हैं चंपत राय? केमिस्ट्री टीचर से ट्रस्ट के महासचिव बनने का सफर

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव होने के साथ-साथ चंपत राय विश्व हिंदू परिषद (VHP) के उपाध्यक्ष भी हैं। राम मंदिर आंदोलन के सबसे मुखर चेहरों में शामिल चंपत राय की पृष्ठभूमि काफी दिलचस्प रही है।

चंपत राय का जन्म वर्ष 1946 में उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में हुआ था। वह बचपन के दिनों से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा से प्रभावित थे और संघ से जुड़ गए थे। उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र को चुना और बिजनौर के धामपुर में स्थित आश्रम डिग्री कॉलेज में केमिस्ट्री के प्रोफेसर बन गए।

साल 1975 में जब देश में आपातकाल लागू हुआ, तब चंपत राय को 1977 में उनके कॉलेज से ही गिरफ्तार कर लिया गया था। राम जन्मभूमि आंदोलन और संघ की गतिविधियों से जुड़ाव के कारण उन्हें 18 महीने तक जेल की सलाखों के पीछे गुजारने पड़े थे। जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने वापस कॉलेज जाने के बजाय पूरी तरह समाज सेवा और संगठन को अपना जीवन समर्पित कर दिया और साल 1980 में आधिकारिक रूप से वीएचपी में शामिल हो गए।

शंकराचार्य ने भी की थी हटाने की मांग, खड़ा हुआ था विवाद

यह पहली बार नहीं है जब चंपत राय विवादों या चर्चाओं में रहे हैं। राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के समय भी वह तब विवादों में आए थे जब उत्तर पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उन्हें महासचिव पद से हटाने की मांग की थी।

शंकराचार्य का तर्क था कि चंपत राय ‘रामानंदी’ संप्रदाय से नहीं आते हैं, इसलिए वह इस धार्मिक ट्रस्ट के प्रमुख या महासचिव पद पर रहने के योग्य नहीं हैं। उन्होंने ट्रस्ट पर रामानंदी संप्रदाय की अनदेखी करने का भी आरोप लगाया था।

चंपत राय के इस्तीफे के बाद अब राम मंदिर ट्रस्ट के नए महासचिव को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। एसआईटी (SIT) इस समय दान चोरी मामले की बारीकी से जांच कर रही है और आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल केस में कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।