बिना बारिश कैसे बह गए पुल और गांव? नेपाल बाढ़ पर बड़ा खुलासा, जानिए चीन-नेपाल बॉर्डर पर क्या हुआ था!

Nepal Flash Flood: नेपाल की भोटकोशी नदी में आई अचानक और भीषण बाढ़ ने काफी तबाही मचाई है। इस आपदा को लेकर नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि तिब्बती क्षेत्र में आए भूकंप की वजह से संभवतः हिमस्खलन हुआ, जिसने आगे चलकर इस विनाशकारी बाढ़ का रूप ले लिया। शुरुआती जानकारियों के आधार पर माना जा रहा है कि भूकंप के झटकों की वजह से पहले हिमस्खलन हुआ और उसके बाद भोटकोशी नदी का जलस्तर अचानक बेकाबू हो गया।

तिब्बत में आया था 4.4 तीव्रता का भूकंप

यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के आंकड़ों के मुताबिक गोसाईंकुंड से करीब 47 किलोमीटर उत्तर में स्थित तिब्बती क्षेत्र में सुबह करीब 8:37 बजे 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। इस भूकंप, हिमस्खलन और नदी में आई अचानक बाढ़ के बीच के संबंधों को लेकर अब एक्सपर्ट अपनी जांच कर रहे हैं।

बर्फ गिरने से रुका था ल्हेन्दे नदी का प्रवाह

काठमांडू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और जलवायु शोधकर्ता रिजान भक्त कायस्थ के शुरुआती आकलन के मुताबिक एक बड़े हिमस्खलन की वजह से ल्हेन्दे नदी का रास्ता अवरुद्ध हो गया था। इससे भारी मात्रा में पानी इकट्ठा होता गया और जैसे ही यह रुकावट या प्राकृतिक बांध टूटा, पानी का एक बहुत बड़ा सैलाब नीचे की ओर बहा और भोटकोशी नदी में भीषण बाढ़ आ गई। कायस्थ ने बताया कि नेपाल की ओर से गिरे बर्फ के पहाड़ ने ल्हेन्दे नदी को रोक दिया था जबकि उसी समय के आसपास तिब्बत की तरफ भूकंप भी महसूस किया गया था। अधिकारी अब इस बात की कड़ियां जोड़ रहे हैं कि क्या भूकंप ने ही इस हिमस्खलन को उकसाया था।

2025 में भी घटी थी ऐसी ही घटना

भोटकोशी नदी में इस तरह की अचानक बाढ़ की घटना पहली बार नहीं हुई है। इससे पहले 8 जुलाई 2025 को भी नदी में इसी तरह का अचानक उफान आया था। उस समय जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग ने पुष्टि की थी कि रसुवा में नेपाल-चीन सीमा के पास ल्हेन्दे नदी में हिमनद झील के फटने की वजह से बाढ़ की स्थिति पैदा हुई थी।

31 लोगों की मौत, सैकड़ों लापता और भारी तबाही

बागमती प्रांत की स्थानीय पुलिस के मुताबिक इस भीषण बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 31 हो चुकी है जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर खोज और बचाव अभियान चलाए जा रहे हैं। पानी के अचानक और तेज बहाव ने भोटकोशी नदी के किनारे बसे कई गांवों और बस्तियों को पूरी तरह तबाह कर दिया है।

जलविद्युत परियोजनाओं को पहुंचा बड़ा नुकसान

इस प्राकृतिक आपदा का सबसे बड़ा असर इलाके के इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक बाढ़ की वजह से इस क्षेत्र की कम से कम एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं। जारी राहत और बचाव कार्यों के बीच इस स्तर की तबाही ने नदी के तटीय इलाकों में रहने वाले समुदायों और अहम इंन्फ्रा स्ट्रक्चर की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

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Nepal Flash Flood: नेपाल में सैलाब के बीच कैलाश मानसरोवर जा रहे 400 लोगों के साथ क्या हुआ?

Nepal Flash Flood: नेपाल और चीन सीमा से सटे इलाकों में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। नेपाल के रसुवा जिले में स्थित भोटे कोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से सीमावर्ती गांव और बस्तियां पानी के तेज बहाव में बह गईं। इस आपदा में कई लोगों की जान जाने की खबर है जबकि कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए तिब्बत की ओर जा रहे करीब 400 श्रद्धालु रसुवागढ़ी क्षेत्र में लापता या संपर्क से बाहर हो गए हैं। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने के साथ-साथ लापता लोगों की तलाश में जुट गया है।

93 नेपाली नागरिकों सहित 390 से अधिक यात्री फंसे

काठमांडू स्थित ‘टच कैलाश ट्रेवल्स एंड टूर्स’ के प्रबंध निदेशक बासु कुमार अधिकारी के मुताबिक बुधवार 26 अगस्त को कुल 390 यात्रियों को सीमा पार करना था। इनमें 93 नेपाली नागरिक भी शामिल थे। ये सभी श्रद्धालु अलग-अलग ट्रेवल एजेंसियों के माध्यम से यात्रा पर निकले थे। उन्होंने बताया कि दोपहर 3 बजे तक इनमें से कुछ ही लोगों से संपर्क हो पाया था जबकि अधिकांश श्रद्धालुओं के बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।

लापता यात्रियों में सम्राट टूर्स एंड ट्रेवल्स के 71, लीफ हॉलीडेज के 55, काठमांडू हॉलीडेज के 17, कैलाश जर्नी के 31, एक्सप्लोर वेकेशन के 7, ट्रेकर्स सोसाइटी के 92, रिचा टूर्स के 12, फिशटेल टूर एंड ट्रेवल्स के 27, हिमालयन ग्लेशियर के 62 और अल्पाइन इको ट्रेक के 16 ग्राहक शामिल हैं। ट्रेकिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ नेपाल के अध्यक्ष सागर पांडे ने बताया कि लापता श्रद्धालुओं से संपर्क साधने और उनकी स्थिति का आकलन करने के लिए लगातार कोशिश की जा रही है।

भोटे कोशी नदी में अचानक उछाल से 19 लोगों की मौत

नेपाल पुलिस के प्रवक्ता अबी नारायण काफ्ले ने एएफपी को बताया कि तिब्बत की ओर से अचानक आए पानी के तेज बहाव की वजह से सुबह करीब 9 बजे रसुवा जिले की भोटे कोशी नदी में भीषण बाढ़ आ गई। इस बाढ़ ने टिमुरे और स्याप्रु बेसी इलाकों में जबरदस्त तबाही मचाई है। पुलिस प्रवक्ता के मुताबित अब तक 19 शव बरामद किए जा चुके हैं। बचाव और राहत के काम चल रहे हैं।

बाढ़ के असर के कारण पुलिस बल के कई जवान भी संपर्क से बाहर हो गए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने मंत्रिपरिषद के साथ एक अहम बैठक की अध्यक्षता की और प्रभावित क्षेत्रों में खोज व बचाव अभियानों में तेजी लाने के निर्देश जारी किए।

भारत ने जताया दुख, हर संभव मदद का दिया आश्वासन

नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात कर इस त्रासदी में हुई जनहानि पर संवेदना प्रकट की। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री से बात की है और भारत इस कठिन घड़ी में नेपाल के भाइयों और बहनों के साथ एकजुटता से खड़ा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है और दोनों देशों की टीमें राहत व बचाव कार्यों में आपस में गहरा समन्वय बना रही हैं।

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Nepal Flash Flood: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ चीन से किए गए एकतरफा प्यार का नतीजा! लोकल पत्रकार ने किया सनसनीखेज दावा

Nepal Flash Flood: नेपाल और चीन के सीमावर्ती इलाकों में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। तिब्बत की तरफ से आई इस अचानक बाढ़ ने नेपाल के सीमावर्ती गांवों में भारी तबाही मचाई है। इस भीषण आपदा के बीच नेपाल के एक प्रमुख पत्रकार ने बीजिंग पर समय रहते अर्ली वार्निंग न देने का आरोप लगाते हुए कड़ा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया है कि आखिर काठमांडू को चीन के साथ अपने संबंधों में इस एकतरफा प्यार का खामियाजा क्यों भुगतना पड़ रहा है।

नेपाली पत्रकार का बीजिंग पर सीधा निशाना

विदेश और सामरिक मामलों के वरिष्ठ नेपाली पत्रकार परशुराम काफ्ले ने बीजिंग द्वारा पूर्व चेतावनी न दिए जाने पर अप्रत्यक्ष लेकिन बेहद तीखा हमला बोला है। उन्होंने चीन का नाम लिए बिना उसे नेपाल का उत्तरी पड़ोसी कहकर संबोधित किया और आरोप लगाया कि समय पर अलर्ट न भेजकर उसने नेपाल की स्थिति को गंभीर रूप से कमजोर किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए काफ्ले ने लिखा कि ‘नेपाल अपने पड़ोसियों की जायज सुरक्षा चिंताओं का लगातार समाधान करता रहा है। हालांकि बेहद दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि हमारे उत्तरी पड़ोसी ने हमें काफी नुकसान पहुंचाया है। इतनी बड़ी आपदा की समय पर पूर्व चेतावनी न देकर उन्होंने हमारे यहां बड़े पैमाने पर जन-धन की हानि की वजह तैयार की।’

एकतरफा प्यार की कीमत अकेला नेपाल क्यों चुकाए?

अपनी पोस्ट में काफ्ले ने नेपाल और चीन के बीच के इस द्विपक्षीय रिश्ते के स्वरूप पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चीनी क्षेत्र से उत्पन्न होने वाले संकटों का सामना नेपाल को बार-बार करना पड़ता है जबकि काठमांडू बीजिंग की हर छोटी-बड़ी मांग और चिंताओं का ख्याल रखता है। काफ्ले ने आगे लिखा कि ‘हम लगातार उनके क्षेत्र (चीन) से शुरू होने वाले संकटों का सामना करते आ रहे हैं जबकि हम उनकी सभी जरूरतों और अनावश्यक-आवश्यक चिंताओं को पूरा करते रहते हैं। आखिर इस एकतरफा प्यार की कीमत अकेले नेपाल को ही क्यों चुकानी पड़े?’

सीमा पर भारी तबाही, भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ा

यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब बुधवार सुबह तिब्बत सीमा से लगे नेपाल के रसुवा जिले में अचानक विनाशकारी बाढ़ आ गई। तिब्बती क्षेत्र से अचानक पानी के भारी सैलाब ने करीब सुबह 9 बजे नेपाल की भोटेकोशी नदी में प्रवेश किया। इस जल प्रलय के चलते सीमावर्ती टिमुरे और स्याप्रु बेसी इलाकों में तबाही देखने को मिली। नदी के तेज बहाव ने कई रिहायशी बस्तियों, इंफ्रास्ट्रक्चर, गाड़ियों और सड़कों को अपनी चपेट में ले लिया और भारी नुकसान पहुंचाया।

सेना और पुलिस के साथ युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन

आपदा की गंभीरता को देखते हुए नेपाल सरकार ने तुरंत राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने प्रभावित इलाकों में तुरंत राहत कार्य चलाने और खोज अभियान को गति देने के निर्देश दिए हैं। आधिकारिक बयानों के मुताबिक प्रभावित बस्तियों में राहत पहुंचाने और लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि नुकसान का आकलन अभी किया जा रहा है और हताहतों व मौतों की सटीक संख्या अभी स्पष्ट होना बाकी है।

क्रॉस-बॉर्डर अर्ली वार्निंग सिस्टम पर उठे सवाल

इस भीषण बाढ़ ने दो पड़ोसी देशों के बीच सीमा पार सूचना साझा करने के तंत्रकी पोल खोलकर रख दी है। संवेदनशील और आपदा-संभावित सीमावर्ती क्षेत्रों में अचानक जलस्तर बढ़ने जैसी आपदाओं की जानकारी साझा करना बेहद जरूरी माना जाता है। इस घटना ने काठमांडू और बीजिंग के बीच कूटनीतिक और सामरिक विश्वास पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

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नेपाल में कुदरत के कहर के बीच पीएम मोदी ने बालेन शाह से बात कर दिया मदद का भरोसा

नेपाल में कुदरत के कहर के बीच पीएम मोदी ने बालेन शाह से बात कर दिया मदद का भरोसा

Modi Balen Shah Telephonic Conversation

Modi Balen Shah Telephonic Conversation on Flood Tragedy: नेपाल में कुदरत का भयानक कहर जारी है। भीषण बारिश के बाद आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। संकट की इस कठिन घड़ी में भारत अपने पड़ोसी मित्र देश नेपाल की ओर पूरी मजबूती से मदद का हाथ बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से टेलीफोन पर बात कर स्थिति का जायजा लिया और शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की।

नेपाल में भीषण बारिश और बाढ़ के कारण मची तबाही के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बात कर एकजुटता व्यक्त की है। पीएम मोदी ने इस प्राकृतिक आपदा में लोगों की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया और नेपाल को संकट की इस घड़ी में हरसंभव सहायता प्रदान करने का भरोसा दिया। उल्लेखनीय है कि नेपाल में भीषण बाढ़ के चलते 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है, जबकि 400 पर्यटक लापता हैं। इनमें 133 भारतीय भी शामिल हैं।


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नेपाल के साथ खड़ा है भारत : पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया और आधिकारिक बातचीत में इस बात को रेखांकित किया कि भारत और नेपाल के बीच सिर्फ सीमाएं नहीं, बल्कि गहरी सांस्कृतिक और भाईचारे की भावना जुड़ी हुई है। पीएम मोदी ने कहा कि इस कठिन समय में भारत के लोग नेपाल के अपने भाइयों और बहनों के साथ एकजुटता से खड़े हैं। उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह को आश्वस्त किया कि भारत सरकार संकट के इस समय में नेपाल को राहत सामग्री, बचाव कार्य और किसी भी प्रकार की आपातकालीन सहायता के लिए पूरी तरह तैयार है।


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राहत और बचाव में मदद का आश्वासन

नेपाल के कई हिस्से भारी बारिश और उफनती नदियों के कारण पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं, जिससे बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत नेपाल की जरूरतों के आधार पर तुरंत मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री भेजने के लिए तत्पर है। गौरतलब है कि जब भी पड़ोसी देशों पर ऐसी प्राकृतिक आपदा आती है, तो भारत 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी प्रथम) की नीति के तहत सबसे पहले मदद का हाथ बढ़ाता है।

Bihar Flood Risk: नेपाल में आई बाढ़ से बिहार में हाई अलर्ट, जानें- क्यों रखी जा रही है बारीकी से नजर

Bihar Flood Risk: उत्तरी नेपाल के रसुवा जिले में अचानक आई जबरदस्त बाढ़ के कारण बिहार में खास सतर्कता बरती जा रही है, क्योंकि नेपाल में गंडक नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में अचानक बाढ़ की स्थिति बन गई है और पानी के बहाव में अचानक तेजी आने की आशंका है। हालांकि, अभी तक बाढ़ के सटीक कारण का पता नहीं चल पाया है, लेकिन पिछले साल इसी नदी में आई ऐसी ही अचानक बाढ़ का कारण बाद में एक ग्लेशियर झील का पानी निकलना बताया गया था।

नेपाल पर्यटन बोर्ड को ताजा जानकारी के अनुसार, नेपाल के नुवाकोट और धाडिंग जिलों में भोटे कोशी नदी में अचानक आई बाढ़ के बाद कम से कम 105 भारतीय लापता हैं।

बता दें कि बुधवार को नेपाल में आई जबरदस्त बाढ़ में कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई। वहीं, चीन के सरकारी मीडिया ने बताया कि दोनों देशों की सीमा पर चीन की तरफ तिब्बत के एक व्यापारिक केंद्र पर मडस्लाइड (कीचड़ और मलबे का बहाव) हुआ, जिसकी चपेट में आने से “काफ़ी लोग हताहत” हुए हैं।

बिहार में क्यों बढ़ाई गई निगरानी?

नेपाल में बाढ़ के हालात को देखते हुए बिहार के अधिकारियों ने गंडक नदी में पानी का स्तर बढ़ने की आशंका के चलते हाई अलर्ट जारी किया है।

बिहार प्रशासन ने पश्चिमी चंपारण के बगहा इलाके, खासकर वाल्मीकिनगर बैराज के आसपास निगरानी बढ़ा दी है। उन्हें चिंता है कि नेपाल से बहकर आने वाला अतिरिक्त पानी दो से तीन घंटे में गंडक नदी तक पहुंच सकता है।

गंडक नदी के किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को भी सावधानी बरतने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

बता दें कि भोटे कोशी नदी तिब्बत से निकलती है और नेपाल की त्रिशूली नदी में मिलती है, जो आगे चलकर भारत में गंडक नदी के रूप में प्रवेश करती है।

न्यूज एजेंसी ANI ने बिहार में आपदा प्रबंधन अधिकारियों के हवाले से बताया कि गंडक नदी के किनारे बसे जिलों में बाढ़ की संभावित स्थिति से निपटने के लिए सभी जरूरी तैयारियां की जा रही हैं।

ANI ने अधिकारियों के हवाले से बताया, “नेपाल के रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा, लमजुंग और तनहुं जिलों (गंडक कैचमेंट एरिया) और दोलखा और सिंधुपालचोक जिलों (कोसी कैचमेंट एरिया) में अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) का ज्यादा खतरा होने का अनुमान है।”

फरक्का बैराज क्यों एक नया विवाद का मुद्दा बन गया है?

जैसे-जैसे गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है और राज्य में बाढ़ का खतरा गहराता जा रहा है, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पश्चिम बंगाल के अपने समकक्ष सुवेंदु अधिकारी से फरक्का बैराज के सभी गेट खोलने का आग्रह किया है। उनका तर्क है कि बहाव बढ़ने से पूर्वी राज्य में बाढ़ का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।

यह अनुरोध ऐसे समय में आया है जब 1996 की भारत-बांग्लादेश गंगा जल बंटवारा संधि—जो फरक्का में नदी के कम बहाव वाले मौसम में पानी के बंटवारे को नियंत्रित करती है—इस साल दिसंबर में अपनी 30 साल की अवधि पूरी करने के बाद समाप्त होने वाली है। पटना लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि बांग्लादेश के साथ भविष्य में पानी के बंटवारे की किसी भी व्यवस्था में उसके हितों का ध्यान रखा जाए।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्य को आश्वासन दिया है कि नवीनीकरण प्रक्रिया के दौरान फरक्का बैराज और भारत-बांग्लादेश जल बंटवारा संधि को लेकर उसकी चिंताओं पर विचार किया जाएगा।

पटना की सबसे बड़ी चिंता क्या है?

हालांकि, अभी सबसे बड़ी चिंता गंगा नदी के जलस्तर का बढ़ना है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल राज्य में सामान्य से कम बारिश होने के बावजूद, पटना और बक्सर समेत बिहार के कुछ हिस्सों में नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया है।

पटना के लिए अभी जरूरी है कि बैराज से और पानी छोड़ा जाए ताकि ऊपरी हिस्से (अपस्ट्रीम) का दबाव कम हो सके। हालांकि, बैराज से जुड़ा कोई भी फैसला पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के साथ पानी के बंटवारे को लेकर भारत की प्रतिबद्धताओं पर भी असर डाल सकता है।

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चक दे गर्ल्स ने उठाई महिला हॉकी लीग को बचाने के लिए आवाज

हॉकी विश्वकप में अपना सबसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के करीब खड़ी भारतीय महिला हॉकी टीम ने गुहार लगाई है कि महिला हॉकी लीग को बंद ना किया जाए और उसे चलते रहने दिया जाए। गौरतलब है कि ऐसी खबरें आ रही थी कि यह लीग व्यवसायिक कारणों के चलते बंद की जा सकती है।

गौरतलब है कि भारतीय महिला हॉकी टीम 1974 के बाद विश्वकप के दूसरे दौर में प्रवेश कर चुकी है। हालांकि खिताब जीतने की आशा धूमिल हो चुकी हैं लेकिन टीम ने बड़ी टीमों को बराबरी पर रोका है। पहले मैच में चीन के खिलाफ 2-2 की बराबरी और फिर ऑस्ट्रेलिया से 0-0 की बराबरी। टीम नीदरलैंड्स से भी सिर्फ 2 गोल से हारी।

वहीं टीम ने पहली बार दक्षिण अफ्रीका को ना केवल हराया बल्कि विश्वकप की सबसे बड़ी जीत अर्जित की। यह सब भारत ने तब किया जब दल में 11 युवा खिलाड़ी थे और अपना पहला विश्वकप खेल रहे थे।

मिडफील्डर नेहा ने कहा  “मुझे लगता है कि हमने भारत में लड़कियों को हॉकी स्टिक पकड़ने के लिए प्रेरित करने की पूरी कोशिश की है। लोग अपने बच्चों को अलग-अलग खेल खेलना पसंद करते हैं, लेकिन इससे उन्हें उम्मीद मिलनी चाहिए।”

“पिछले दो सालों में, महिलाओं के लिए HIL से हमें बहुत फायदा हुआ है। जूनियर और सीनियर नेशनल्स में इस लेवल का कॉम्पिटिशन नहीं होता है। महिलाओं के HIL ने हमें बलजीत, साक्षी और रुतुजा जैसे खिलाड़ी दिए हैं, जो इस वर्ल्ड कप टीम का हिस्सा हैं। आने वाले खिलाड़ियों के लिए भी, हमें इस लीग की ज़रूरत है। इसे बंद नहीं किया जाना चाहिए।”

नवनीत कौर ने कहा “हम पिछले दो साल से HIL खेल रहे हैं और उससे हमें कॉन्फिडेंस मिला है। हमने इंटरनेशनल हॉकी के कुछ सबसे बड़े नामों के साथ खेला है और उनके साथ ड्रेसिंग रूम शेयर करने के बाद, डर और झिझक खत्म हो गई। इससे हमें सेल्फ-बिलीफ मिला। हम अक्सर बात करते हैं कि वे हमारी तरह हैं और हम उन्हें हरा सकते हैं क्योंकि हम उनके साथ खेले हैं।” नवनीत ने टीमों और कॉर्पोरेट हाउस से भी लीग को सपोर्ट करने की अपील की, ऐसे समय में जब इसका भविष्य खतरे में है। हमने सुना है कि कुछ टीमें विमेंस HIL से हट रही हैं, लेकिन ऐसे समय में जब हमारा परफॉर्मेंस ग्राफ ऊपर जा रहा है, हम उनसे रिक्वेस्ट करना चाहते हैं कि वे हमें सपोर्ट करें। यह विमेंस हॉकी और आने वाले प्लेयर्स के लिए एक बड़ा झटका होगा।”

तिब्बत की बाढ़ से नेपाल की भोटेकोशी नदी उफान पर:कई जिलों में चेतावनी जारी, सीमा चौकी के 9 जवान लापता

चीन के तिब्बत क्षेत्र से आई बाढ़ मंगलवार को नेपाल के रसुवा जिले में पहुंच गई। इसके चलते भोटेकोशी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। बाढ़ के बीच रसुवा के टिमुरे बॉर्डर आउटपोस्ट में तैनात 9 पुलिसकर्मी लापता हो गए हैं। प्रशासन ने त्रिशूली नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। लोगों से नदी किनारे न जाने की अपील प्राधिकरण के कार्यकारी प्रमुख धर्मराज उप्रेती ने कहा कि तिब्बत से बाढ़ आने की सूचना मिलते ही प्रभावित इलाकों को अलर्ट भेज दिया गया था। बाढ़ के बाद टिमुरे स्थित बॉर्डर आउटपोस्ट (BOP) में तैनात 9 सशस्त्र पुलिसकर्मी लापता बताए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार जवानों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। हालांकि चौकी पर मौजूद 25 से 30 अन्य लोग सुरक्षित हैं। भोटेकोशी और त्रिशूली नदियां नेपाल के उत्तरी इलाकों से होकर बहती हैं। तिब्बत में भारी बारिश या अचानक आई बाढ़ का असर इन नदियों के जरिए नेपाल के कई जिलों तक पहुंच सकता है। खबर अपडेट हो रही है…..

तिब्बत की बाढ़ से नेपाल की भोटेकोशी नदी उफान पर:9 पुलिसकर्मी लापता, 5 जिलों में हाई अलर्ट; लोगों को सुरक्षित जगह जाने की सलाह

चीन के तिब्बत से आई अचानक बाढ़ का पानी नेपाल के रसुवा जिले में पहुंच गया है। इससे भोटेकोशी नदी का पानी तेजी से बढ़ गया और आसपास के इलाकों में नुकसान की खबर है। खतरे को देखते हुए त्रिशूली नदी के किनारे बसे रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन में हाई अलर्ट जारी किया गया है। रसुवा के टिमुरे बॉर्डर पोस्ट पर तैनात 9 पुलिसकर्मी लापता हो गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, बाढ़ के बाद से इनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। हालांकि, बॉर्डर पोस्ट पर मौजूद 25 से 30 दूसरे लोग सुरक्षित बताए जा रहे हैं। नदी किनारे रहने वाले लोगों से सावधान रहने और पानी बढ़ने पर तुरंत सुरक्षित जगह जाने को कहा गया है। मुग्लिन समेत त्रिशूली नदी के आसपास के लोगों को नदी के पास न जाने की सलाह दी गई है। PM बालेन ने सेना तैनात करने के आदेश दिए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने रसुवा के बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत के लिए नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को तैनात करने के निर्देश दिए हैं। प्रभावित इलाकों में दूसरे जिलों से भी अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी भेजे गए हैं। शाह ने कहा कि राहत और बचाव का काम तेजी से चल रहा है। आपदा प्रबंधन एजेंसी के साथ मेडिकल टीमें, स्काउट्स और रेड क्रॉस की टीमें मिलकर काम कर रही हैं। प्रभावित इलाकों में अतिरिक्त एंबुलेंस और मेडिकल स्टाफ भी भेजा जा रहा है। बालेन ने नदी किनारे के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित जगह पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री ने हाई लेवल बैठक बुलाई बालेन शाह के मुताबिक प्राइवेट हेलीकॉप्टर कंपनियों से भी विमानों को स्टैंडबाय पर रखने के लिए कहा गया है। वहीं कुछ हेलीकॉप्टर पहले ही प्रभावित इलाकों में तैनात किए जा चुके हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्थिति का जायजा लेने और आगे जरूरी कदम उठाने के लिए एक उच्च-स्तरीय बैठक भी बुलाई गई है। नेपाल में आई बाढ़ से जुड़ी 3 फुटेज भोटेकोशी में पिछले साल भी आई थी बाढ़ भोटेकोशी नदी तिब्बत से निकलकर नेपाल में आती है और आगे जाकर सुनकोशी नदी में मिल जाती है। यही सुनकोशी नदी आगे चलकर सप्तकोशी (कोशी) नदी बनती है, जो भारत के बिहार में प्रवेश करती है। पिछले साल भी भोटेकोशी में आई बाढ़ से नेपास को बड़ा नुकसान हुआ था। उस हादसे में 9 लोगों की जान गई थी, जबकि 24 लोग लापता हो गए थे। नेपाल और चीन को जोड़ने वाला फ्रेंडशिप ब्रिज भी बाढ़ में बह गया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच सड़क संपर्क और व्यापार कई महीनों तक प्रभावित रहा। ————————— यह भी पढ़ें…… इस्लामाबाद के सरकारी अस्पताल में आग; 15 बच्चे जिंदा जले:सिर्फ 1 को बचाया जा सका; AC कंप्रेसर फटा, फिर पूरे वार्ड में आग फैली पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के एक अस्पताल में बुधवार को आग लगने से 15 नवजात बच्चों की मौत हो गई। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Sensex डे-हाई से 286 प्वाइंट्स नीचे तो Nifty की पूरी बढ़त गायब, 5 वजहों से दोनों तरफ भाग रहा मार्केट

Share Market volatile: शुरुआती कारोबार में आज मार्केट में रौनक दिखी लेकिन ऊपरी स्तर पर इसमें बिकवाली का दबाव दिखा। घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो सेंसेक्स डे-हाई से 286 प्वाइंट्स नीचे आ गया तो निफ्टी ने पूरी बढ़त गंवा दी। ब्रोडर लेवल पर बात करें तो रौनक बनी हुई है और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में करीब आधे फीसदी की बढ़त है। अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 11:10 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 131.04 प्वाइंट्स यानी 0.17% की बढ़त के साथ 77,787.13 और निफ्टी 10.70 प्वाइंट्स यानी 0.04% की गिरावट के साथ 24,323.85 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 330.75 प्वाइंट्स चढ़कर 77,986.84 तक पहुंचा था जिससे यह फिर 285.66 प्वाइंट्स गिरकर 77,701.18 तक आ गया तो दूसरी तरफ निफ्टी भी 44.05 प्वाइंट्स उछलकर 24,378.60 तक पहुंचा था जिससे यह 84.35 प्वाइंट्स टूटकर 24,294.25 तक आ गया था।

Share Market Volatile: ये है वजह

सेक्टरवाइज मिला-जुला रुझान

मार्केट को आज सरकारी बैंकों से अच्छा सपोर्ट मिल रहा है जिसका निफ्टी इंडेक्स 1% से अधिक मजबूत हुआ है तो दूसरी तरफ आईटी और ऑटो सेक्टर में बिकवाली से दबाव बना है लेकिन निफ्टी इंडेक्स में आधे फीसदी से कम गिरावट है।

India VIX में नरमी

मार्केट की घबराहट को मापने वाले वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया विक्स में नरमी से मार्केट को सपोर्ट मिला। फिलहाल यह 2.39% की गिरावट के साथ 10.81 पर है। इसके अधिक होने का मतलब शॉर्ट टर्म में वोलैटिलिटी बढ़ने की आशंका और कम होने का मतलब शॉर्ट टर्म में उठा-पटक कम होने की संभावना है।

कच्चे तेल की नरमी

वैश्विक ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 2% टूटकर प्रति बैरल $86 के नीचे आ गया जिससे मार्केट को सपोर्ट मिला है।

ईरान पर अमेरिका की सख्ती

अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर शिकंसा कसना तेज कर दिया और ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों को भी चेतावनी दी। इससे मार्केट पर दबाव बना है।

अधिकतर एशियाई बाजारों में रौनक

घरेलू स्टॉक मार्केट को आज अधिकतर एशियाई बाजारों में रौनक से सपोर्ट मिला। ताइवान के ताइवान वेटेड में डेढ़ फीसदी और दक्षिण कोरिया के कोस्पी में 1% की तेजी है तो जापान के निक्केई 225, हॉन्ग कॉन्ग के हैंग सैंग, चीन के शंघाई कंपोजिट और थाईलैंड के सेट कंपोजिट में आधे-आधे फीसदी से अधिक की बढ़त है तो इंडोनेशिया का जकार्ता कंपोजिट फिलहाल फ्लैट है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।