आंख फड़कने को समझा अपशगुन, 3 दिन तक खुद पर करता रहा ये खतरनाक काम, फिर जो हुआ चौंका देगा!

आज भी दुनिया के कई हिस्सों में लोग छोटी-छोटी सेहत से जुड़ी समस्याओं को अंधविश्वास और पुरानी मान्यताओं से जोड़ लेते हैं। आंख फड़कना भी ऐसी ही एक आम स्थिति है, जिसे अक्सर लोग शुभ या अशुभ संकेत मानकर नजरअंदाज या गलत तरीके से समझ लेते हैं। लेकिन हाल ही में चीन से सामने आई एक घटना ने यह साफ कर दिया कि ऐसी मान्यताओं और इंटरनेट पर मिली बिना जांची-परखी सलाह पर भरोसा करना कितना खतरनाक साबित हो सकता है। एक व्यक्ति ने आंख फड़कने की समस्या को हल्के में लेने के बजाय ऑनलाइन उपाय अपनाए, जो धीरे-धीरे उसकी सेहत के लिए गंभीर बन गए।

यह मामला न सिर्फ अंधविश्वास पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि बिना विशेषज्ञ की सलाह के किसी भी स्वास्थ्य समस्या का इलाज करने की कोशिश कितनी बड़ी गलती हो सकती है।

चीन में व्यक्ति की आंख फड़कने की शुरुआत

चीन के हुबेई प्रांत के वुहान शहर में रहने वाले एक व्यक्ति ले की दाहिनी आंख कई दिनों तक लगातार फड़कती रही। शुरुआत में उसने इसे सामान्य समस्या समझा, लेकिन बाद में चिंता बढ़ गई। वहां की मान्यता के अनुसार दाहिनी आंख का फड़कना परेशानी का संकेत माना जाता है, जिससे वह और डर गया।

गलत सलाह ने बढ़ाई परेशानी

डॉक्टर के पास जाने के बजाय उसने इंटरनेट पर समाधान ढूंढना शुरू किया। वहां उसे गलत सलाह मिली कि आंख के आसपास हल्की चोट लगाने से फड़कना बंद हो सकता है। बिना सोचे-समझे उसने यह तरीका अपनाया और तीन दिन तक ऐसा करता रहा।

हालत बिगड़ी, नजर पर पड़ा असर

कुछ समय बाद आंख का फड़कना तो बंद हो गया, लेकिन उसकी आंख की रोशनी धुंधली होने लगी। धीरे-धीरे देखने में परेशानी बढ़ गई और हालत गंभीर हो गई, जिसके बाद उसे अस्पताल जाना पड़ा।

डॉक्टरों की जांच में बड़ा खुलासा

जांच में पता चला कि उसकी रेटिना अपनी जगह से हट गई थी, जिसे रेटिनल डिटैचमेंट कहा जाता है। यह एक गंभीर स्थिति होती है, जिसमें समय पर इलाज न मिले तो आंख की रोशनी भी जा सकती है। डॉक्टरों ने तुरंत सर्जरी कर उसकी हालत संभाली।

विशेषज्ञों की चेतावनी

डॉक्टरों का कहना है कि आंख फड़कना आमतौर पर तनाव, नींद की कमी, ज्यादा स्क्रीन टाइम या थकान की वजह से होता है। यह किसी शुभ-अशुभ का संकेत नहीं है। आराम और सही दिनचर्या से यह समस्या खुद ठीक हो जाती है।

Ram Mandir Chanda Chori: चढ़ावे के सोने को बना दिया बिस्कुट और फिर… राम मंदिर चंदा चोरी मामले में सनसनीखेज खुलासा

Ram Mandir Chanda Chori Case: अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान में कथित गड़बड़ी की जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) इस बात की जांच कर रही है कि क्या मंदिर से कथित तौर पर चोरी किए गए सोने के आभूषणों को पहचान मिटाने के लिए उसे गलाकर सोने के बिस्किट (Gold Biscuits) में बदल दिया गया। फिलहाल, SIT इस पूरे मामले की कई पहलुओं से जांच कर रही है। यह अभी संदेह और जांच का विषय है कि कथित तौर पर चोरी किए गए सोने को वास्तव में गलाकर बिस्किट बनाया गया था या नहीं।

अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। ‘इंडिया टुडे’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जांचकर्ताओं को शक है कि आरोपियों ने चोरी किए गए सोने और चांदी के गहनों को पिघला दिया होगा ताकि उनकी पहचान मिटाई जा सके। कई बार छापेमारी और तलाशी के बाद भी सोने-चांदी के गायब गहने नहीं मिले, जिसके बाद जांच की दिशा में तेजी आई है।

मंदिर के इंचार्ज से पूछताछ तेज

जांच के सिलसिले में राम मंदिर गए SIT अधिकारियों ने मंदिर के इंचार्ज KD बाबू से गहनों और अन्य कीमती चढ़ावे के रखरखाव, उनकी इन्वेंट्री, स्टोरेज और देखभाल के बारे में पूछताछ की। रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच टीम ने गहनों और अन्य कीमती दान का रिकॉर्ड मांगा है। साथ ही सरकारी कंपनी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (Mint) के साथ हुए लेन-देन का रिकॉर्ड भी मांगा है।

जांचकर्ताओं ने अभी तक के जांच में पाया है कि ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ की तिमाही बैठकों में ज्यादातर ध्यान कैश दान और रेवेन्यू पर होता था। जबकि सोने, चांदी और अन्य कीमती चढ़ावे की डिटेल्स इन्वेंट्री बनाए रखने या उसकी समीक्षा करने पर बहुत कम ध्यान दिया जाता था। ‘इंडिया टुडे’ ने सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है।

आभूषण नहीं मिले, इसलिए SIT ने बदली जांच की दिशा

जांच एजेंसियों को लगातार छापेमारी और तलाशी के बावजूद कथित तौर पर गायब सोने-चांदी के आभूषण नहीं मिले। इसके बाद स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को शक है कि आरोपियों ने आभूषणों को पिघलाकर उनकी पहचान खत्म कर दी, जिससे उन्हें बरामद करना मुश्किल हो जाए।

मंदिर प्रशासन से मांगे गए रिकॉर्ड

जांच के दौरान SIT ने राम मंदिर पहुंचकर मंदिर प्रभारी केडी बाबू से पूछताछ की। अधिकारियों ने आभूषणों के रखरखाव, स्टोरेज, इन्वेंट्री और श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए कीमती दान से जुड़े सभी रिकॉर्ड मांगे। इसके साथ ही सरकारी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (Mint) के साथ हुए लेन-देन का ब्यौरा भी जांच के दायरे में लिया गया है।

7 जून को सामने आया थआ मामला

राम मंदिर में कथित दान गबन का मामला 7 जून को सामने आया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT का गठन किया। प्रारंभिक जांच के आधार पर 25 जून को FIR दर्ज की गई। मंदिर में दान गिनने के काम से जुड़े 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

चंपत राय ने खुद को बताया व्हिसलब्लोअर

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि कथित गड़बड़ी का सबसे पहले पता उन्होंने ही लगाया था। उन्होंने दावा किया कि चोरी पकड़ने के लिए उन्होंने मंदिर परिसर में सीक्रेट CCTV कैमरे लगवाए थे। उन्हीं कैमरों की फुटेज से कथित चोरी का खुलासा हुआ।

‘मुझे मेरे ही लोगों ने धोखा दिया’

पुलिस पूछताछ के दौरान चंपत राय ने कहा कि उनका दान के कथित गबन से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा, “मुझे मेरे ही भरोसेमंद लोगों ने धोखा दिया। चोरी पकड़ने के लिए छिपे हुए कैमरे मैंने ही लगवाए थे।”

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग

कांग्रेस ने मांग की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राम मंदिर में दान और चढ़ावे की कथित चोरी की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच का आदेश दें। पणजी में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है, क्योंकि मंदिर में दान के मैनेजमेंट को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने BJP को भारत के मंदिरों पर आक्रमणकारियों द्वारा किए गए अतीत के कथित लूटपाट संबंधी उसके अक्सर दिए जाने वाले बयानों की भी याद दिलाई।

वेणुगोपाल ने पूर्व केंद्रीय गृह सचिव के उन दावों का भी जिक्र किया, जिनमें कहा गया था कि मंदिर में दान किए गए एक किलोग्राम सोने का सही हिसाब-किताब नहीं रखा गया था। इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, “यह किसी आम आदमी का आरोप नहीं है। यह आरोप केंद्र सरकार के एक सेवानिवृत्त गृह सचिव ने लगाया है। अयोध्या राम मंदिर में जो कुछ हो रहा है, वह हम सभी के लिए बहुत दुखद है। यह देश के सभी आस्था रखने वालों के लिए दुखद है।”

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वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस के लोग आस्था के कारण ईश्वर में विश्वास करते हैं। लेकिन BJP के लोग ईश्वर में विश्वास नहीं करते और वे लोगों को बांटने और मंदिर को लूटने के मकसद से धर्म की बात करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या मंदिर में हुई चोरी के लिए विश्व हिंदू परिषद (VHP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पूरी तरह जिम्मेदार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर को लूटने वालों को केंद्र और उत्तर प्रदेश की सरकारें बचा रही हैं।

चीन हो या पाकिस्तान… अब दुश्मन का गेम ओवर! भारत बना रहा ‘100 किमी की चक्रव्यूह’ दीवार

भारत सरकार ने हाल ही में लगभग ₹52,000 करोड़ के रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी है। पहली नजर में यह सामान्य सैन्य खरीद लग सकती है। लेकिन गहराई से देखने पर पता चलता है कि इस बार भारत का ध्यान महंगे लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों की बजाय उन हथियारों पर है, जो किसी भी युद्ध के शुरुआती घंटों में सबसे अधिक काम आएंगे। जब डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने मिलिट्री खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी, तो पहली नजर में यह लिस्ट खरीद का एक और आम दौर लगी। लेकिन बारीकी से देखने पर एक साफ पैटर्न दिखता है।

भारत की ₹52,000 करोड़ की यह रक्षा खरीद केवल नए हथियार खरीदने की योजना नहीं है। बल्कि भविष्य के युद्धों की बदलती रणनीति के अनुसार सेना को तैयार करने का बड़ा कदम है। अब लक्ष्य केवल शक्तिशाली हथियार रखना नहीं। बल्कि ऐसी आधुनिक और नेटवर्क आधारित सेना बनाना है जो ड्रोन, मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक हमलों और कई मोर्चों पर एक साथ होने वाले खतरों का प्रभावी ढंग से सामना कर सके।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ से मिला बड़ा सबक

कुछ महीने पहले हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान की ओर से ड्रोन, मिसाइल और रॉकेट जैसे कई हवाई खतरों का सामना भारत की एयर डिफेंस सिस्टम ने सफलतापूर्वक किया। इस अभियान ने भारतीय सेना को यह एहसास कराया कि भविष्य के युद्ध केवल लड़ाकू विमानों या लंबी दूरी की मिसाइलों से नहीं जीते जाएंगे। बल्कि ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और स्मार्ट हथियार निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

अब छोटे लेकिन स्मार्ट हथियारों पर फोकस

भारत अब ऐसे हथियार खरीद रहा है जो सीमा पर तैनात सैनिकों को तुरंत जवाब देने की क्षमता देंगे। इनमें शामिल हैं-

एंटी-ड्रोन इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम

शोल्डर-फायर्ड एंटी-टैंक मिसाइलें

शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम

कामिकाज़े ड्रोन

हाई एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट (HAPS)

इनका उद्देश्य दुश्मन के ड्रोन, टैंक, हेलीकॉप्टर और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों को तुरंत रोकना है।

पाकिस्तान और चीन…दो अलग-अलग चुनौतियां

भारत को पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान और उत्तरी सीमा पर चीन जैसी दो अलग-अलग सैन्य चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। पाकिस्तान की ओर से ड्रोन, टैंक, तोपखाने और घुसपैठ का खतरा रहता है। चीन के साथ ऊंचाई वाले इलाकों में निगरानी, लंबी दूरी की रॉकेट सिस्टम और आधुनिक ड्रोन बड़ी चुनौती हैं। इसी वजह से भारत तीनों सेनाओं थल, वायु और नौसेना को एक साथ मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

ड्रोन बन गए हैं सबसे बड़ा खतरा

आज के युद्ध में छोटे और सस्ते ड्रोन भी बड़े सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। एक ड्रोन को गिराने के लिए करोड़ों रुपये की मिसाइल चलाना आर्थिक रूप से सही नहीं माना जाता। इसलिए दुनिया भर की सेनाएं अब इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम अपना रही हैं, जो ड्रोन के संचार और नेविगेशन को जाम करके उन्हें निष्क्रिय कर देते हैं। भारत भी इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

‘सुदर्शन चक्र’ बनेगा भारत की सुरक्षा ढाल

सरकार एक राष्ट्रीय एयर डिफेंस सिस्टम ‘सुदर्शन चक्र’ विकसित कर रही है। इसका उद्देश्य बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल, ड्रोन और अन्य हवाई खतरों से पूरे देश की सुरक्षा करना है। इसमें लंबी दूरी की S-400, मध्यम दूरी की MR-SAM, छोटी दूरी की मिसाइलें और एंटी-ड्रोन सिस्टम मिलकर कई स्तरों वाली सुरक्षा प्रदान करेंगे।

आकाश तरंग सिस्टम क्या है?

आकाश तरंग एंटी-यूएवी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम मिसाइल चलाकर ड्रोन को नष्ट नहीं करता, बल्कि उसकी रेडियो और जीपीएस सिग्नल को जाम कर देता है। इससे ड्रोन अपना नियंत्रण खो देता है, वापस लौट जाता है या दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है। भविष्य के युद्धों में यह भारत की पहली सुरक्षा पंक्ति माना जा रहा है।

MR-SAM की ताकत

मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (MR-SAM) लगभग 70 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, ड्रोन और क्रूज़ मिसाइलों को निशाना बना सकती है। यह भारत की बहु-स्तरीय एयर डिफेंस सिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा है और रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

इन सबको मिलाकर देखें तो खरीद की यह लिस्ट यह भी दिखाती है कि आधुनिक युद्ध के बारे में भारत की समझ कैसे बदल रही है। मिलिट्री प्लानर्स का मानना ​​है कि भविष्य के युद्ध का फैसला सिर्फ सैकड़ों किलोमीटर दूर उड़ने वाले फाइटर जेट या महाद्वीपों के बीच मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों से नहीं होगा। इसका फैसला सैकड़ों सस्ते ड्रोन, सटीक निशाना लगाने वाली मिसाइलों, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, बिना पायलट वाले विमानों और टैक्टिकल लेवल पर स्मार्ट हथियार लिए सैनिकों से भी होगा।

कम दूरी के हथियार क्यों जरूरी हैं?

एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर जेट और पनडुब्बी जैसे बड़े प्लेटफॉर्म राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बने हुए हैं। हालांकि, कई मिलिट्री एनालिस्ट का तर्क है कि भविष्य की टैक्टिकल लड़ाइयों का नतीजा तय करने वाले हथियार छोटे, सस्ते और आसानी से तैनात किए जा सकने वाले होंगे। आधुनिक एंटी-टैंक मिसाइल से लैस एक सैनिक करोड़ों रुपये की बख्तरबंद गाड़ी को नष्ट कर सकता है।

सस्ते ड्रोन का एक झुंड एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम को महंगी इंटरसेप्टर मिसाइलें इस्तेमाल करने पर मजबूर कर सकता है। इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर उपकरण बिना एक भी गोली चलाए ड्रोन को बेकार कर सकते हैं। पोर्टेबल एयर डिफेंस मिसाइलें दुश्मन के विमानों को युद्ध के मैदान में आजादी से काम करने से रोक सकती हैं। इससे पता चलता है कि DAC की कई मंजूरियां सैकड़ों किलोमीटर के बजाय कुछ 10 किलोमीटर के दायरे में काम करने वाले सिस्टम पर क्यों केंद्रित हैं।

सिर्फ रणनीतिक क्षमताओं में निवेश करने के बजाय भारत उस चीज को भी मजबूत कर रहा है जिसे मिलिट्री प्लानर अक्सर ‘टैक्टिकल एज’ (युद्ध के मैदान में बढ़त) कहते हैं। भारत की मिलिट्री प्लानिंग अनोखी है क्योंकि उसे दो बिल्कुल अलग तरह के ऑपरेशनल माहौल के लिए तैयारी करनी होती है। पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान एक तेजी से बदलने वाला युद्ध का मैदान बनाता है, जिसमें बख्तरबंद गाड़ियां, तोपखाने, ड्रोन और सीमा पार से घुसपैठ जैसी चीजें शामिल हैं।

वहीं, उत्तरी सीमा पर चीन की चुनौती ऊंचाई वाले इलाकों में युद्ध, एडवांस्ड सर्विलांस क्षमताएं, लंबी दूरी की रॉकेट आर्टिलरी और तेजी से बेहतर हो रहे बिना पायलट वाले सिस्टम से जुड़ी है। हालांकि इलाके बहुत अलग हैं, लेकिन दोनों मोर्चों पर एक जरूरत समान है। लगातार निगरानी, ​​तेजी से टारगेट का पता लगाना और हवाई खतरों से कई स्तरों पर सुरक्षा। यही वजह है कि DAC की मंजूरी में एक साथ कई क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

BLA का दावा- हमले में 30 पाकिस्तानी जवान मारे गए:विस्फोटकों से भरी गाड़ी कैंप में घुसाकर उड़ाई; पाकिस्तान ने दावे की पुष्टि नहीं की

बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने दावा किया है कि उसने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के ग्वादर जिले के जिवानी इलाके में पाकिस्तान कोस्ट गार्ड्स के कैंप पर हमला किया है। BLA के मुताबिक, 3 जुलाई की शाम करीब 6:32 बजे उसके मजीद ब्रिगेड के एक हमलावर ने विस्फोटकों से भरी गाड़ी को कैंप में घुसाकर विस्फोट कर दिया। संगठन का दावा है कि इस हमले में 30 से ज्यादा गार्ड्स मारे गए और दर्जनों घायल हुए हैं। हालांकि, पाकिस्तान सरकार या सेना ने अब तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। कई सुरक्षाकर्मी मलबे में दबे हो सकते हैं BLA ने दावा किया कि विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि पाकिस्तान कोस्ट गार्ड्स का कैंप पूरी तरह तबाह हो गया। संगठन के मुताबिक, धमाके के तुरंत बाद उसके फतेह स्क्वाड के लड़ाकों ने कैंप पर हमला किया और बच गए सुरक्षाकर्मियों को नजदीक से निशाना बनाया। BLA ने कहा कि मलबे में कई सुरक्षाकर्मी दबे हो सकते हैं, इसलिए मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। BLA के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। हमलावर की पहचान अत्ताउल्लाह बलोच के रूप में हुई BLA ने अपने बयान में दावा किया कि हमलावर की पहचान अत्ताउल्लाह बलोच उर्फ अजमल के रूप में हुई है, जिसे संगठन ने अपने मजीद ब्रिगेड का सदस्य बताया। BLA का कहना है कि वह इस ऑपरेशन से जुड़ी अधिक जानकारी और वीडियो अपने आधिकारिक चैनलों के जरिए जारी करेगा। BLA बलूचिस्तान की आजादी के लिए लड़ रहा बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) एक संगठन है जो पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की स्वतंत्रता के लिए लड़ रहा है। इसकी स्थापना 2000 के दशक की शुरुआत में हुई और इसे कई देशों द्वारा आतंकी संगठन भी घोषित किया गया है। BLA का दावा है कि बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों का शोषण हो रहा है और बलूच लोगों के अधिकार छीन लिए गए हैं। यह संगठन पाकिस्तानी सेना, सरकार और चीनी प्रोजेक्ट्स जैसे CPEC को निशाना बनाता रहा है। BLA अपनी गुरिल्ला शैली के लिए जाना जाता है। यानी पहाड़ी इलाकों में छिपकर सेना पर हमला करना और तुरंत वापस लौट जाना। CPEC का अहम केंद्र है ग्वादर ग्वादर जिला पाकिस्तान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण डीप-सी पोर्ट का केंद्र है और हाल के सालों में उग्रवादी गतिविधियों का प्रमुख निशाना रहा है। यह इलाका चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) का अहम हिस्सा है। अरबों डॉलर की इस बुनियादी ढांचा परियोजना को बलूचिस्तान में सक्रिय अलगाववादी संगठनों की ओर से लगातार सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। —————– ये खबर भी पढ़ें… PoK में प्रदर्शन, लोग बोले- हम पाकिस्तान का हिस्सा नहीं:₹1 करोड़ का इनामी शौकत नवाज गिरफ्तार; JAAC के 600 से ज्यादा नेता-कार्यकर्ता हिरासत में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन तेज हो गए हैं। रावलकोट के ईदगाह ग्राउंड में हजारों लोग जुटे। उन्हेंने कहा कि PoK पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है। यह आंदोलन जम्मू-कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) की अगुआई में चल रहा है। पूरी खबर पढ़ें…

BLA का दावा- हमले में 30 पाकिस्तानी जवान मारे:कैंप में विस्फोटकों से भरी गाड़ी से ब्लास्ट किया; पाकिस्तान सरकार ने पुष्टि नहीं की

बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने दावा किया है कि उसने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के ग्वादर जिले के जिवानी इलाके में पाकिस्तान कोस्ट गार्ड्स के कैंप पर हमला किया है। BLA के मुताबिक, 3 जुलाई की शाम करीब 6:32 बजे उसके मजीद ब्रिगेड के एक हमलावर ने विस्फोटकों से भरी गाड़ी को कैंप में घुसाकर विस्फोट कर दिया। संगठन का दावा है कि इस हमले में 30 से ज्यादा गार्ड्स मारे गए और दर्जनों घायल हुए हैं। हालांकि, पाकिस्तान सरकार या सेना ने अब तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। कई सुरक्षाकर्मी मलबे में दबे हो सकते हैं BLA ने दावा किया कि विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि पाकिस्तान कोस्ट गार्ड्स का कैंप पूरी तरह तबाह हो गया। संगठन के मुताबिक, धमाके के तुरंत बाद उसके फतेह स्क्वाड के लड़ाकों ने कैंप पर हमला किया और बच गए सुरक्षाकर्मियों को नजदीक से निशाना बनाया। BLA ने कहा कि मलबे में कई सुरक्षाकर्मी दबे हो सकते हैं, इसलिए मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। BLA के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। हमलावर की पहचान अत्ताउल्लाह बलोच के रूप में हुई BLA ने अपने बयान में दावा किया कि हमलावर की पहचान अत्ताउल्लाह बलोच उर्फ अजमल के रूप में हुई है, जिसे संगठन ने अपने मजीद ब्रिगेड का सदस्य बताया। BLA का कहना है कि वह इस ऑपरेशन से जुड़ी अधिक जानकारी और वीडियो अपने आधिकारिक चैनलों के जरिए जारी करेगा। BLA बलूचिस्तान की आजादी के लिए लड़ रहा बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) एक संगठन है जो पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की स्वतंत्रता के लिए लड़ रहा है। इसकी स्थापना 2000 के दशक की शुरुआत में हुई और इसे कई देशों द्वारा आतंकी संगठन भी घोषित किया गया है। BLA का दावा है कि बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों का शोषण हो रहा है और बलूच लोगों के अधिकार छीन लिए गए हैं। यह संगठन पाकिस्तानी सेना, सरकार और चीनी प्रोजेक्ट्स जैसे CPEC को निशाना बनाता रहा है। BLA अपनी गुरिल्ला शैली के लिए जाना जाता है। यानी पहाड़ी इलाकों में छिपकर सेना पर हमला करना और तुरंत वापस लौट जाना। CPEC का अहम केंद्र है ग्वादर ग्वादर जिला पाकिस्तान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण डीप-सी पोर्ट का केंद्र है और हाल के सालों में उग्रवादी गतिविधियों का प्रमुख निशाना रहा है। यह इलाका चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) का अहम हिस्सा है। अरबों डॉलर की इस बुनियादी ढांचा परियोजना को बलूचिस्तान में सक्रिय अलगाववादी संगठनों की ओर से लगातार सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। —————– ये खबर भी पढ़ें… PoK में प्रदर्शन, लोग बोले- हम पाकिस्तान का हिस्सा नहीं:₹1 करोड़ का इनामी शौकत नवाज गिरफ्तार; JAAC के 600 से ज्यादा नेता-कार्यकर्ता हिरासत में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन तेज हो गए हैं। रावलकोट के ईदगाह ग्राउंड में हजारों लोग जुटे। उन्हेंने कहा कि PoK पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है। यह आंदोलन जम्मू-कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) की अगुआई में चल रहा है। पूरी खबर पढ़ें…

न्यूयार्क में UN मुख्यालय के बाहर तिब्बती कार्यकर्ता का आत्मदाह:चीन की बर्बरता के खिलाफ उठाया कदम, धर्मशाला में आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र (UN) मुख्यालय के बाहर तिब्बती मूल के एक अमेरिकी कार्यकर्ता द्वारा आत्मदाह करने का एक बेहद स्तब्ध करने वाला मामला सामने आया है। इस समाचार के बाद हिमाचल के धर्मशाला में शोक की लहर है। यहां उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। मृतक की पहचान लोबसांग पाल्डेन (लोबगा रंगजेन) के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, लोबगा ने यह आत्मघाती कदम तिब्बत में चीन की बढ़ती दमनकारी नीतियों और हाल ही में बीजिंग द्वारा लागू किए गए ‘जातीय एकता और प्रगति’ कानून के कड़े विरोध में उठाया। इस घटना के बाद से ही दुनिया भर में निर्वासित जीवन जी रहे तिब्बतियों में शोक और आक्रोश की लहर है। तिब्बती ध्वज और पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे थे लोबगा प्रत्यक्षदर्शियों और रिपोर्टों के अनुसार, जब लोबगा रंगजेन संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर पहुंचे, तो उन्होंने तिब्बत की पारंपरिक पोशाक ‘चुपा’ पहनी हुई थी। उनके एक हाथ में तिब्बत का राष्ट्रीय ध्वज था। उन्होंने वहां चीन विरोधी नारे लगाए और खुद को आग के हवाले कर दिया। आत्मदाह से ठीक पहले जारी किया भावुक वीडियो संदेश कदम उठाने से ठीक पहले लोबगा ने एक वीडियो संदेश जारी किया था, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में उन्होंने दुनिया भर के तिब्बतियों से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि तिब्बत की स्वतंत्रता और हमारे मौलिक अधिकारों के लिए संघर्ष को तेज करना होगा। कोई भी राष्ट्रीय लक्ष्य बिना कड़े प्रयासों के हासिल नहीं होता। हम सभी को क्षेत्र, संप्रदाय और व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं से ऊपर उठकर देश हित में अपना सर्वोच्च योगदान देना होगा।” धर्मशाला में शोक: केंद्रीय तिब्बती प्रशासन ने आयोजित की प्रार्थना सभा इस दुखद घटना की खबर जैसे ही हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला पहुंची, वहां माहौल गमगीन हो गया। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (CTA) के सिक्योंग हॉल में दिवंगत आत्मा की शांति के लिए एक विशेष और भव्य प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। इस सभा में प्रशासन के शीर्ष नेतृत्व, बौद्ध भिक्षुओं और सभी सरकारी कर्मचारियों ने भाग लेकर लोबगा को श्रद्धांजलि दी। “चीन के कठोर कानूनों ने उठाया कदम उठाने पर मजबूर किया” — सिक्योंग पेनपा त्सेरिंग केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के सिक्योंग (राष्ट्रपति) पेनपा त्सेरिंग ने घटना पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि चीन द्वारा तिब्बत में थोपे जा रहे कठोर और अमानवीय कानूनों ने ही लोबगा को यह आत्मघाती कदम उठाने के लिए विवश किया है। हालांकि, हम तिब्बती प्रशासन की ओर से सभी नागरिकों से पुरजोर अपील करते हैं कि वे इस तरह आत्मदाह का रास्ता न चुनें।” इसी कड़ी में सीटीए के धर्म और संस्कृति मंत्री ने भी मानव जीवन को अनमोल बताते हुए कहा कि तिब्बत के इस लंबे और ऐतिहासिक संघर्ष को जिंदा रखने के लिए युवाओं के जीवन को बचाना और जीवित रहकर लड़ना सबसे ज्यादा आवश्यक है। 2009 से अब तक 157 तिब्बती दे चुके हैं जान उल्लेखनीय है कि तिब्बत की आजादी, मानवाधिकारों की बहाली और तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा की वतन वापसी की मांग को लेकर आत्मदाह का यह कोई पहला मामला नहीं है। वर्ष 2009 से लेकर अब तक तिब्बत के भीतर और दुनिया के अलग-अलग कोनों में कुल 157 तिब्बती नागरिक न्याय की गुहार लगाते हुए आत्मदाह कर अपने प्राणों की आहुति दे चुके हैं।

सिर्फ 0.25 एकड़ में ड्रैगन फ्रूट उगा 5 लाख की कमाई! मुंबई में टाइल्स लगाने का काम छोड़ लक्ष्मण ने खेती को यूं बनाया मुनाफे का सौदा

ओडिशा के बलांगीर जिले में रहने वाले लक्ष्मण डांसना ने यह साबित कर दिया है कि बड़ी कमाई के लिए बड़ी जमीन नहीं, बल्कि सही सोच और मेहनत जरूरी होती है। कभी मुंबई में टाइल लगाने का काम करने वाले लक्ष्मण आज अपने गांव लौटकर खेती से अच्छी आमदनी कमा रहे हैं। उन्होंने सिर्फ एक चौथाई एकड़ जमीन पर ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की और इसे एक सफल बिजनेस मॉडल में बदल दिया। शुरुआत में उन्होंने सब्जियों की खेती भी की, लेकिन सीमित कमाई के कारण उन्होंने कुछ नया करने का फैसला किया।

सही जानकारी, धैर्य और लगातार सीखने की आदत ने उनकी जिंदगी बदल दी। आज उनकी यह छोटी सी खेती उन्हें हर साल करीब 7.5 लाख रुपये की स्थिर आय दे रही है, जो कई लोगों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी है।

पहले टाइल वर्कर, फिर बने स्मार्ट किसान

लक्ष्मण पहले मुंबई में टाइल लगाने का काम करते थे। कई साल बाहर काम करने के बाद जब वे अपने गांव लौटे, तो उन्होंने तय किया कि अब परिवार के पास रहकर भी अच्छी कमाई करनी है। यही सोच उन्हें खेती की तरफ ले आई।

सब्जियों से शुरू, फिर आया बड़ा आइडिया

शुरुआत में उन्होंने छोटी जमीन पर सब्जियों की खेती की, लेकिन इससे ज्यादा फायदा नहीं हुआ। ज्यादातर उपज घर में ही इस्तेमाल हो जाती थी, जिससे कमाई सीमित रह गई। इसके बाद उन्होंने कुछ नया करने की ठानी।

ड्रैगन फ्रूट ने बदल दी किस्मत

एक दिन उन्हें ड्रैगन फ्रूट खेती का वीडियो मिला, जिसने उनकी सोच बदल दी। उन्होंने तुरंत खेती शुरू नहीं की, बल्कि पहले कई साल तक रिसर्च की, किसानों से मिले और सफल फार्म देखने गए।

छोटी जमीन से लाखों की कमाई

पूरी तैयारी के बाद उन्होंने अपनी छोटी सी जमीन पर ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की। मेहनत और सही प्लानिंग का नतीजा यह हुआ कि आज वही जमीन उन्हें हर साल लाखों की स्थिर आय दे रही है।

Snake News: चीन में कोबरा ने किसान को डसा, घबराई पत्नी ने किया टीवी वाला इलाज, खुद भी हो गई शिकार!

Samsung Galaxy S27 Ultra के फीचर्स लीक, 200MP कैमरा और 7000mAh बैटरी के साथ करेगा धमाकेदार एंट्री, जानें कीमत

Samsung Galaxy S27 Ultra अगले साल यानी 2027 में लॉन्च हो सकता है, जिसको लेकर काफी समय से लीक्स और अफवाहें सामने आ रही हैं। माना जा रहा है कि यह डिवाइस Samsung Galaxy S27 और Samsung Galaxy S27 Plus के साथ आएगा। हालांकि, इसके बारे में बहुत ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन इसके लीक डिटेल्स से काफी कुछ पता चला है। अब आइए इसके अनुमानित फीचर्स और कीमते के बारे में डिटेल में जानते हैं।

Samsung Galaxy S27 Ultra के स्पेसिफिकेशन्स और कैमरा

Samsung Galaxy S27 Ultra में 120Hz रिफ्रेश रेट वाला 6.9-इंच का AMOLED 2X डिस्प्ले हो सकता है। अनुमान है कि यह डिवाइस आने वाले Qualcomm Snapdragon 8 Elite Gen 6 प्रोसेसर से लैस होगा, जिसमें 12GB RAM और 256GB इंटरनल स्टोरेज मिलेगी।

चीन के मशहूर टिप्सटर ‘डिजिटल चैट स्टेशन’ के लीक्स के अनुसार, यह प्रोसेसर 2nm प्रोसेस पर बनाया जाएगा। यह भी कहा जा रहा है कि फोन की मोटाई 7.9mm होगी और इसमें Galaxy S Pen का सपोर्ट भी मिलेगा। अफवाहें हैं कि फोन में 7000mAh की सिलिकॉन-कार्बन बैटरी होगी, जो कम से कम 65W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करेगी।

कैमरे की बात करें तो Samsung Galaxy S27 Ultra में पीछे की तरफ चार कैमरों का सेटअप हो सकता है, जिसमें ऑप्टिकल इमेज स्टेबलाइजेशन (OIS) वाला 200MP का मेन कैमरा, 50MP का टेलीफोटो कैमरा, 50MP का अल्ट्रा-वाइड एंगल कैमरा और 10MP का टेलीफोटो कैमरा शामिल हो सकता है। इसके अलावा, सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए, इस फोन में 12MP का फ्रंट कैमरा मिल सकता है।

भारत में Samsung Galaxy S27 Ultra के लॉन्च टाइमलाइन और कीमत

Samsung Galaxy S27 Ultra फरवरी 2027 की शुरुआत में लॉन्च हो सकता है। इसके अलावा, लीक से पता चलता है कि इसके 12GB RAM और 256GB इंटरनल स्टोरेज वाले वेरिएंट की कीमत ₹1,41,999 से ₹1,46,999 के बीच हो सकती है।

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Snake News: चीन में कोबरा ने किसान को डसा, घबराई पत्नी ने किया टीवी वाला इलाज, खुद भी हो गई शिकार!

दक्षिण-पश्चिम चीन के युन्नान प्रांत में खेत में काम कर रहे एक किसान को अचानक कोबरा ने काट लिया, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। सांप के काटते ही किसान की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी और उसे चक्कर, कमजोरी और शरीर में सुन्नपन महसूस होने लगा। घटना के बाद परिवार के लोग घबरा गए और तुरंत मदद की कोशिश करने लगे। यह मामला इसलिए भी चर्चा में आ गया क्योंकि इसके बाद जो हुआ उसने सबको चौंका दिया। सांप के जहर से बचाव को लेकर अक्सर लोग गलत जानकारी पर भरोसा कर लेते हैं, और यही इस घटना में भी देखने को मिला। डॉक्टरों ने बाद में साफ किया कि ऐसी स्थिति में तुरंत मेडिकल मदद लेना ही सबसे सुरक्षित तरीका होता है, वरना जहर तेजी से शरीर में फैल सकता है।

पत्नी ने टीवी देखकर किया खतरनाक इलाज

घबराई हुई पत्नी ने तुरंत वही किया जो उसने टीवी पर देखा था उसने अपने पति के घाव से जहर चूसने की कोशिश की। उसे लगा कि इससे जान बच जाएगी, लेकिन यही फैसला उसके लिए भी भारी पड़ गया।

दोनों को अस्पताल ले जाना पड़ा

कुछ ही घंटों बाद पत्नी के मुंह, जीभ और चेहरे में सुन्नपन शुरू हो गया। हालत बिगड़ने पर परिवार ने उसे भी अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने बताया कि दोनों को कोबरा के जहर से हल्का जहर चढ़ गया था और एंटी-वेनम देकर इलाज किया गया।

ये गलती कभी न करें

डॉक्टरों ने साफ कहा कि सांप के जहर को मुंह से चूसना बेहद खतरनाक है। मुंह की नसों के जरिए जहर सीधे शरीर में पहुंच सकता है। साथ ही घाव को काटना, जलाना या बर्फ लगाना भी नुकसानदायक हो सकता है।

सांप काटने पर क्या करें?

डॉक्टरों के अनुसार, ऐसे समय में तुरंत अस्पताल जाएं और मरीज को कम से कम हिलाएं। सांप का रंग, आकार और निशान याद रखना या फोटो लेना इलाज में मदद कर सकता है।

सोशल मीडिया पर चर्चा में मामला

यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। लोग इसे “टीवी ड्रामा वाली गलती” बता रहे हैं, जबकि कई लोगों ने पत्नी की चिंता और प्यार की भी तारीफ की है।

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Maatrubhumi: ‘मातृभूमि’ के सर्टिफिकेशन विवाद की खबरें गलत, सलमान खान फिल्म्स ने पोस्ट शेयर कर रूमर्स पर लगाया फुलस्टॉप

Maatrubhumi: एक दिन पहले ऐसी खबरें आई थीं कि सलमान खान की फिल्म ‘मातृभूमि’ – जो भारतीय सेना और चीनी सैनिकों के बीच 2020 में हुई गलवान घाटी की झड़प पर आधारित है – सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ फ़िल्म सर्टिफ़िकेशन (CBFC) में सर्टिफ़िकेशन की प्रक्रिया से गुज़र रही है। सलमान खान फिल्म्स ने इन दावों को “पूरी तरह से बेबुनियाद” बताते हुए खारिज कर दिया।

प्रोडक्शन हाउस ने इंस्टाग्राम पर एक आधिकारिक बयान जारी किया। इसमें कहा गया, “ऐसे सभी दावे गलत हैं जिनमें कहा गया है कि ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ को CBFC से जुड़ी किसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है या इसके सर्टिफ़िकेशन को रोक दिया गया है। फिल्म को अभी तक सर्टिफ़िकेशन के लिए CBFC के पास जमा ही नहीं किया गया है। इसलिए, ऐसी खबरें पूरी तरह से बेबुनियाद हैं।”

बयान के आखिर में कहा गया, “हम मीडिया संस्थानों और लोगों से अनुरोध करते हैं कि वे बिना पुष्टि की गई जानकारी न फैलाएं। फिल्म से जुड़ी कोई भी आधिकारिक जानकारी केवल सलमान खान फिल्म्स के आधिकारिक चैनलों के माध्यम से ही साझा की जाएगी।”

सूत्रों ने NDTV को कन्फर्म किया है कि ‘मातृभूमि’ फ़िल्म अभी सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ फ़िल्म सर्टिफ़िकेशन (Censor Board) की मंज़ूरी की प्रक्रिया से गुज़र रही है। अंदरूनी सूत्रों ने बताया, “सेंसर बोर्ड से मंज़ूरी मिलने की प्रक्रिया चल रही है, इसलिए इसमें अभी समय लग रहा है। इसे रोका नहीं गया है।” यह फ़िल्म पहले ईद से ठीक पहले 17 अप्रैल को रिलीज़ होने वाली थी। हालांकि, रिलीज़ की तारीख़ आगे बढ़ा दी गई थी और अब इसके अगस्त में रिलीज़ होने की उम्मीद है।

ताज़ा जानकारी के मुताबिक, ऐसा लगता है कि यह फ़िल्म अगस्त में रिलीज़ नहीं हो पाएगी। ‘मातृभूमि’ का निर्देशन अपूर्व लाखिया ने किया है और इसे सलमान खान फिल्म्स बैनर के तहत सलमा खान ने प्रोड्यूस किया है। पहले इस फ़िल्म का नाम ‘बैटल ऑफ़ गलवान’ था और इसमें चित्रांगदा सिंह भी हैं।

रिलीज़ से पहले ही, चीन में कुछ लोगों ने इस फ़िल्म की आलोचना की थी। ऑनलाइन टीज़र आने के बाद, चीनी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म वीबो पर कई यूज़र्स ने फ़िल्म पर गलवान घाटी झड़प से जुड़ी घटनाओं को गलत तरीके से दिखाने का आरोप लगाया। जनवरी में, विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत में फ़िल्म बनाने से जुड़े मामलों को “संबंधित अधिकारी” देखते हैं और इस तरह के प्रोजेक्ट्स में विदेश मंत्रालय की “कोई भूमिका” नहीं होती है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से उन खबरों पर टिप्पणी करने को कहा गया जिनमें दावा किया गया था कि मंत्रालय ने छह साल पहले गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प पर आधारित फिल्म पर “आपत्ति जताई” है। उन्होंने कहा, “हमें पता है कि इस तरह की फिल्म बनाने की योजना है। जैसा कि आप जानते हैं, भारत में फिल्म निर्माण से जुड़े मामलों को संबंधित अधिकारी देखते हैं। और जहां तक ​​हमारी बात है, विदेश मंत्रालय की ऐसी फिल्मों या प्रोजेक्ट्स में कोई भूमिका नहीं होती है।”

सूत्रों ने बताया, “हाल ही में फिल्म का नाम ‘बैटल ऑफ गलवान’ से बदलकर ‘मातृभूमि’ कर दिया गया है। उसी के अनुसार बदलाव किए जा रहे हैं। संभावना है कि फिल्म की रिलीज में और देरी हो सकती है। इसके अगस्त में स्वतंत्रता दिवस के आसपास रिलीज होने की उम्मीद है।”

फिल्म के मेकर्स ने 27 दिसंबर, 2025 को सलमान खान के 60वें जन्मदिन पर फिल्म का टीज़र जारी किया था। फिल्म में सलमान खान 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू का किरदार निभा रहे हैं। उन्होंने बॉर्डर पर डिसइंगेजमेंट एग्रीमेंट लागू करते समय हुई झड़प के दौरान भारतीय सैनिकों का नेतृत्व किया था। ‘मातृभूमि’ में अभिलाष चौधरी और अंकुर भाटिया भी अहम भूमिकाओं में नज़र आएंगे और इस फिल्म का संगीत हिमेश रेशमिया ने दिया है।