72 घंटे में बैरियर लेक टूटने का खतरा! नेपाल में बाढ़ की तबाही के बीच चीन से आया ये खतरनाक अलर्ट

Nepal Flash Flood: नेपाल में भीषण बाढ़ और तबाही के बीच अब एक नया और बड़ा खतरा मंडराने लगा है। हिमालयी सीमा पार ऊपरी हिस्से में बनी एक बैरियर लेक (प्राकृतिक रुकावट से बनी झील) के टूटने की आशंका ने दोनों देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। चीनी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यह झील अगले 72 घंटों के भीतर फूट सकती है। इससे क्षेत्र में राहत और बचाव कार्यों में गंभीर बाधा आ सकती है और बाढ़ का संकट और अधिक गहरा सकता है।

558 लोग तिब्बत की तरफ लापता, ग्यिरोंग में तबाही के बाद गांव खाली कराए गए

नेपाल सीमा से सटे तिब्बती क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हुए भूस्खलन और मिट्टी-चट्टानों के ढहने से भयंकर तबाही हुई है। चीनी सरकारी ब्रॉडकास्टर सीसीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल सीमा के तिब्बती हिस्से में कम से कम 558 लोग लापता हैं। यह तबाही ग्यिरोंग के पास ल्हेन्दे नदी में अचानक आए पानी के भयानक सैलाब के बाद हुई है। इसमें कम से कम तीन लोगों की मौत हो चुकी है जबकि दो ग्रामीणों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने खतरे वाले इलाकों में बसे गांवों को खाली करा दिया है।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने जानकारी दी है कि नेपाल की तरफ भी लगभग 100 चीनी नागरिक लापता हैं। तिब्बत से शुरू हुआ यह उफान भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों के जरिए आगे बढ़ा। इसने नेपाल में बड़ी तबाही मचाई है। नेपाल में इस आपदा की वजह से कम से कम 359 लोगों की जान जा चुकी है और सैकड़ों लोग लापता हैं। कई मकान, सड़कें और जलविद्युत परियोजनाएं पानी के बहाव में बह गई हैं।

72 घंटे में बैरियर लेक टूटने की चेतावनी, झील में भरा 20 लाख घन मीटर पानी

चीनी अधिकारियों के मुताबिक आपदा स्थल के उत्तर-पूर्व में छोचेन खोला और पुरेपू त्सांगपो नदियों के संगम पर बनी बैरियर लेक अब सबसे बड़ा खतरा बन गई है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने इस झील की निगरानी बढ़ा दी है। सीसीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार तक इस झील में अनुमानित 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था और यह पहले से ही ओवरफ्लो हो रही है।

अधिकारियों ने आगाह किया है कि अगले तीन दिनों में इस झील में और 30 लाख घन मीटर पानी बहकर आने की संभावना है। इससे 72 घंटों के भीतर इसके टूटने की पूरी आशंका है।

राहत कार्य के लिए बीजिंग और चेंगदू से टीमें रवाना, ग्यिरोंग कस्बे में बिजली बहाल

आपदा की भयावहता को देखते हुए चीन सरकार ने बड़े पैमाने पर राहत और बचाव कार्य शुरू किए हैं। स्थानीय पुलिस और सशस्त्र बलों की मदद के लिए बीजिंग और चेंगदू से फायर एंड रेस्क्यू टीमों को तुरंत मौके पर भेजा गया है। सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक ग्यिरोंग कस्बे के मध्य शहरी इलाकों में बिजली और संचार सुविधाएं बहाल कर दी गई हैं। हालांकि पोर्टसे संपर्क अभी भी पूरी तरह कटा हुआ है, जिसे बहाल करने की कोशिश की जा रही है।

2025 में भी घटी थी ऐसी ही घटना

हिमालयी क्षेत्र में इस तरह की अचानक आई भीषण बाढ़ कोई पहली घटना नहीं है। ठीक एक साल पहले अगस्त 2025 में भी तिब्बत में एक ग्लेशियर झील ओवरफ्लो हो गई थी। उस घटना में नौ लोगों की मौत हो गई थी और नेपाल, चीन को जोड़ने वाले एक प्रमुख पुल सहित कई जरूरी इंफ्रा को भारी नुकसान पहुंचा था।

2030 तक EV सेक्टर में आएंगी 5 करोड़ नौकरियां, 20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचेगा मार्केट! नितिन गडकरी का बड़ा दावा

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बाजार 2030 तक 20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इसके साथ ही इस सेक्टर में 5 करोड़ नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।

PTI की रिपोर्ट के अनुसार, CII-ITC सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट की ओर से आयोजित एक समिट को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि भारत में अभी 57 लाख इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर्ड हैं और ऑटोमोबाइल बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी करीब 7 प्रतिशत है।

उन्होंने कहा, “2030 तक भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मार्केट 20 लाख करोड़ रुपये का हो जाएगा। इससे 2030 तक पांच करोड़ नौकरियां भी पैदा होंगी।”

इस दौरान गडकरी ने भारत की दो सबसे बड़ी टू-व्हीलर बनाने वाली कंपनियों, बजाज ऑटो और हीरो मोटोकॉर्प की एक्सपोर्ट क्षमता का भी जिक्र किया और कहा कि वे अपने बनाए गए वाहनों में से 50 प्रतिशत से ज्यादा का एक्सपोर्ट करती हैं।

भारत को और ज्यादा इलेक्ट्रिक बसों की जरूरत

गडकरी ने कहा कि भारत में हर साल एक लाख इलेक्ट्रिक बसों की मांग है, लेकिन देश के मैन्युफैक्चरर अभी साल में सिर्फ 50,000-60,000 EV बसें ही बनाते हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य अगले पांच सालों में भारत के ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को दुनिया में सबसे बड़ा बनाना है। उन्होंने यह भी कहा कि देश के पास ट्रेंड मैनपावर और कॉम्पिटिटिव व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं हैं।

गडकरी ने आगे कहा, “अगले पांच सालों में हमारा लक्ष्य भारत के ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को दुनिया में नंबर 1 बनाना है… यह मुश्किल है, लेकिन नामुमकिन नहीं।”

उन्होंने कहा कि भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर का आकार काफी बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर का पद संभाला था, तब इस सेक्टर की वैल्यू 14 लाख करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 22 लाख करोड़ रुपये हो गई है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अभी US के ऑटोमोबाइल सेक्टर की वैल्यू 78 लाख करोड़ रुपये है, इसके बाद चीन 47 लाख करोड़ रुपये के साथ दूसरे और भारत 23 लाख करोड़ रुपये के साथ तीसरे स्थान पर है।

फॉसिल फ्यूल के इंपोर्ट और लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने पर जोर

गडकरी ने कहा कि भारत फॉसिल फ्यूल के इंपोर्ट पर 22 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है, जिससे प्रदूषण भी बढ़ता है।

उन्होंने कहा, “हम अच्छे हाईवे बना रहे हैं… अच्छे रास्ते और उनके विकल्प तैयार कर रहे हैं, और बायो-फ्यूल ही भविष्य है।”

लॉजिस्टिक्स लागत के बारे में गडकरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य इसे घटाकर 8% तक लाना है। उनका तर्क है कि लॉजिस्टिक्स लागत कम होने से ग्लोबल मार्केट में भारत की कॉम्पिटिटिवनेस (प्रतिस्पर्धा क्षमता) बेहतर होगी।

गडकरी ने कहा कि IIT चेन्नई, IIT कानपुर और IIM बैंगलोर की हालिया रिपोर्ट से पता चला है कि एक्सप्रेसवे और इकोनॉमिक कॉरिडोर बनने से भारत की लॉजिस्टिक्स लागत 16% से घटकर 10% हो गई है।

उन्होंने कहा, “सरकार का लक्ष्य लॉजिस्टिक्स लागत को घटाकर 8% करना है, जिससे भारत को ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनने में मदद मिलेगी।”

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संस्कृत दिवस 2026: दुनिया की प्राचीन भाषा के 5 रहस्य

संस्कृत दिवस 2026: दुनिया की प्राचीन भाषा के 5 रहस्य

Sanskrit Language

संस्कृत को विश्व की पहली भाषा और वह भी पहली व्याकरणबद्ध भाषा माना जाता है। कहते हैं कि इसी भाषा के कारण देश और दुनिया की अन्य भाषाओं का जन्म हुआ। विश्व संस्कृत दिवस के अवसर पर जानिए दुनिया की सबसे प्राचीन, वैज्ञानिक और समृद्ध भाषाओं में से एक 'संस्कृत' से जुड़े 5 अद्भुत रहस्य:- 

 

कंप्यूटर और AI के लिए सबसे उपयुक्त भाषा: नासा (NASA) के शोध के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) और प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (NLP) के लिए संस्कृत दुनिया की सबसे स्पष्ट और सटीक भाषा है, क्योंकि इसमें व्याकरण के नियम पूरी तरह से स्पष्ट और गणितीय हैं।

 

अद्भुत शब्द भंडार और एक शब्द के अनेक पर्यायवाची: संस्कृत में केवल एक ही वस्तु या भाव के लिए सैकड़ों शब्द उपलब्ध हैं। उदाहरण के लिए, संस्कृत में 'पानी' (जल) के लिए 70 से अधिक और 'हाथी' के लिए 100 से भी अधिक पर्यायवाची शब्द हैं।

 

स्मरण शक्ति और स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव: अनुसंधान से पता चला है कि संस्कृत के मंत्रों और अक्षरों का उच्चारण करने से गले और मस्तिष्क में विशेष कंपन (vibrations) उत्पन्न होते हैं। यह तंत्रिका तंत्र को सक्रिय कर ध्यान केंद्रित करने और स्मरण शक्ति (Memory Power) बढ़ाने में मदद करता है।

 

अद्वितीय व्याकरणिक संरचना (अव्यय शब्द क्रम): संस्कृत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें वाक्यों में शब्दों का क्रम (word order) बदलने से वाक्य का अर्थ नहीं बदलता। जैसे- “रामः गृहं गच्छति” और “गच्छति गृहं रामः” दोनों का अर्थ एक ही रहता है, जो किसी अन्य भाषा में संभव नहीं है।

 

संसार की अधिकांश भाषाओं की जननी: संस्कृत को इंडो-यूरोपीय भाषा परिवार की मूल भाषाओं में से एक माना जाता है। अंग्रेजी, जर्मन, लैटिन, रूसी और सभी भारतीय भाषाओं के अनगिनत शब्द (जैसे- Mother/मातृ, Brother/भ्रातृ, Geometry/ज्यामिति) सीधे संस्कृत से विकसित हुए हैं।

Video: तिब्बत में ईशा फाउंडेशन के 80 श्रद्धालु भी लापता, इनके बारे में बात करते हुए भावुक हुए सद्गुरु! बोले- हमें भी जाने दो

Nepal flood videos: तिब्बत और नेपाल की सीमा पर आई भीषण बाढ़ पर आध्यात्मिक गुरु एवं ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने गहरा दुख जताते हुए स्थिति को बेहद गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि जिस स्तर पर तबाही हुई है, उसे देखते हुए अभी नुकसान का सही आंकड़ा सामने आना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि उनके संगठन से जुड़ा कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया एक समूह बाढ़ की चपेट में आया, जिसमें 80 लोग शामिल थे। नेपाल में हुई त्रासदी पर बोलते हुए सद्गुरु भावुक हो गए। तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित गैर-लाभकारी संगठन ईशा फाउंडेशन ने दावा किया कि उसके 77 सदस्य लापता हैं जो आव्रजन केंद्र पर थे।

सद्गुरु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो पोस्ट कर बताया कि वह खुद घटनास्थल तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन सभी फोन और टेलीकम्युनिकेशन सेवाएं बंद हैं। भूस्खलन की वजह से रास्ते भी बाधित हैं। ऐसे में प्रभावित इलाके में संपर्क करना बेहद मुश्किल हो गया है। वह भारतीय, चीनी और अमेरिकी दूतावासों के जरिए वहां पहुंचने की अनुमति लेने की कोशिश कर रहे हैं ताकि राहत और बचाव के काम में मदद की जा सके।

सद्गुरु ने क्या बताया?

सद्गुरु ने कहा, “हमारे ग्रुप में से एक एस3 ग्रुप जिससे हम सागर में मिले थे। फिर दोबारा तब मिले जब हम ऊपर ट्रेकिंग कर रहे थे। वे नीचे आ रहे थे। इस ग्रुप में 80 लोग शामिल थे जिनमें 34 पुरुष और 46 महिलाएं थीं। इनमें से 22 लोग अमेरिका, 12 कनाडा, 11 ऑस्ट्रेलिया, 9 यूनाइटेड किंगडम, 4 जर्मनी, 3 फ्रांस, 3 नेपाल, 2 नीदरलैंड, 2 न्यूजीलैंड, 2 सिंगापुर और 2 स्पेन से थे। फिनलैंड, हंगरी, इजरायल, लिथुआनिया, फिलीपींस, पुर्तगाल, रूस और दक्षिण अफ्रीका से एक-एक व्यक्ति ग्रुप में शामिल था।”

सद्गुरु ने आगे बताया कि समूह जब वापसी के दौरान इमिग्रेशन सेंटर पहुंचा, तब तक सब कुछ सामान्य था। बुधवार सुबह करीब 9:05 बजे समूह के लीडर ने संदेश भेजकर बताया था कि वे इमिग्रेशन सेंटर पहुंच चुके हैं। इसके कुछ ही मिनट बाद करीब 9:14 बजे अचानक यह भयावह आपदा आई। इसके बाद समूह के सदस्यों से संपर्क टूट गया। सद्गुरु ने कहा कि उनके नेपाल के फोन नंबर भी सक्रिय नहीं हुए, जिससे चिंता और बढ़ गई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईशा फाउंडेशन से जुड़े 77 तीर्थयात्री और तीन स्वयंसेवक लापता बताए जा रहे हैं।

शहर का एक हिस्सा पानी और मलबे में बह गया

उन्होंने कहा कि जिस जगह यह घटना हुई, वहां इमारतें और शहर का एक हिस्सा तक पानी और मलबे में बह गया। इसलिए फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि कितने लोग सुरक्षित हैं और कितने लापता हैं। उन्होंने बताया कि उनके समूह के साथ वॉलंटियर और एक डॉक्टर भी मौजूद थे। कई नेपाली गाइड भी यात्रा दल के साथ थे और उनके परिवार प्रभावित इलाके में रहते हैं। ऐसे में सिर्फ तीर्थयात्रियों की ही नहीं, बल्कि स्थानीय परिवारों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।समाचार

सद्गुरु ने कहा कि अलग-अलग रिपोर्टों में नेपाल की तरफ सैकड़ों लोगों के लापता होने की बात सामने आ रही है। जबकि तिब्बत की तरफ भी बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। ताजा अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक, नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में मिलाकर सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं। मृतकों की संख्या 160 से अधिक हो चुकी है।

बाढ़ से पहले भूकंप आया था?

शुरुआत में कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि बाढ़ से पहले भूकंप आया था। न्यूज एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि बाद में वैज्ञानिक विश्लेषण में संकेत मिले कि आपदा की वजह हिमालयी क्षेत्र में बर्फ और चट्टान के बड़े हिस्से का खिसकना या ग्लेशियर से जुड़ी घटना हो सकती है। इसके बाद नदी में अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा पहुंचा। फिर देखते ही देखते तेज फ्लैश फ्लड ने तबाही मचा दी।

पानी की रफ्तार इतनी तेज थी कि रास्ते, पुल, मकान और दूसरी प्रॉपर्टी इसकी चपेट में आ गईं। राहत एवं बचाव दल के लिए भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। कई जगहों पर सड़कें टूटने और पानी का स्तर बढ़ने के कारण पहुंचना मुश्किल है।

लापता लोगों के परिजन परेशान

सद्गुरु ने कहा कि इस मुश्किल समय में सबसे बड़ी चिंता लापता लोगों के परिवारों की है। उन्होंने बताया कि संबंधित देशों के दूतावासों को घटना की जानकारी दी गई है। प्रभावित परिवारों तक भी संदेश पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि वह और उनकी टीम हरसंभव तरीके से मदद करने की कोशिश कर रहे हैं।

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उनका कहना है कि इस समय सबसे जरूरी काम है कि किसी भी तरह प्रभावित क्षेत्र तक पहुंच बनाई जाए और वहां मौजूद लोगों की स्थिति का पता लगाया जाए। न्यूज एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय जल्द ही राज्य सचिवालय में मंत्रियों और अधिकारियों के साथ नेपाल में फंसे तमिल लोगों को बचाने के लिए एक इमरजेंसी बैठक करेंगे।

Ankit Balyan Shot Dead: मशहूर हरियाणवी गायक को जिम के बाहर मार दी गईं 15 गोलियां, कौन थे अंकित बालियान?

Ankit Balyan Shot Dead: मशहूर यूट्यूबर और हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान की बुधवार (26 अगस्त) शाम उत्तर प्रदेश के शामली जिले में एक जिम के बाहर कुछ अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस सूत्रों ने बताया कि शामली के शहर कोतवाली इलाके में शाम को अंकित बालियान जब जिम से बाहर निकले, तभी कुछ अज्ञात हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी। इससे उनकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि सिंगर पर करीब 15 से 18 राउंड फायरिंग की गई।

पुलिस अधीक्षक (SP) नरेंद्र प्रताप सिंह ने पत्रकारों को बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। फिर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस की टीमें बनाई गई हैं। हत्या के पीछे की वजह का अभी तक पता नहीं चल पाया है। पुलिस के मुताबिक, हमलावर दो मोटरसाइकिलों पर आए और बालियान पर कई राउंड गोलियां चलाईं। इस दौरान उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

अंकित बालियान की हत्या कैसे हुई?

मौके पर मौजूद एक शख्स ने घटनाक्रम के बारे में बताया कि बालियान जिम में कसरत करने के बाद जैसे ही बाहर निकले उनपर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो गई। चश्मदीद ने कहा, “अंकित एक्सरसाइज के बाद जिम से बाहर आए थे। फायरिंग शुरू होते ही हम बाहर भागे और उन्हें गोली लगने से घायल पाया।

अंकित पिछले एक साल से रोज इस जिम में आ रहे थे। वह शाम करीब 4 से 4:15 बजे के बीच जिम पहुंचे थे। कम से कम 10 से 15 राउंड फायरिंग हुई। हमने चार लोगों को भागते हुए देखा। आरोपी पैदल थे और उनके हाथों में पिस्तौल थी।” इस बयान से पता चलता है कि हमलावर हथियारों से लैस थे। गोलीबारी के तुरंत बाद वे मौके से भाग गए।

हत्या के पीछे की असल वजह अभी साफ नहीं है। पुलिस सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है। उम्मीद है कि जांच आगे बढ़ने पर हत्या से जुड़ी परिस्थितियों का पता चल जाएगा। जांचकर्ता हमलावरों की पहचान करने और घटनाक्रम को समझने के लिए CCTV फुटेज की जांच कर रहे हैं। वे यह पता लगाने की भी कोशिश कर रहे हैं कि हमलावर कहां से आए थे। वे मौके तक कैसे पहुंचे और भागने के लिए उन्होंने किस रास्ते का इस्तेमाल किया।

अखिलेश का बीजेपी पर हमला

समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस वारदात को लेकर राज्य की भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई वाली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश का पूरा जाट समुदाय इसे खुद पर प्रहार मानकर आक्रोशित है। सपा प्रमुख ने बालियान की हत्या को बेहद निंदनीय बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति शून्य पर पहुंच गई है। उन्होंने हत्या की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के पहलू से भी जांच किए जाने की मांग की।

उन्होंने देर रात X पर कहा, “उप्र की कानून-व्यवस्था को शून्य करते हुए जिस प्रकार शामली में लोकप्रिय गायक अंकित बालियान की 18 राउंड गोलियां चलाकर बेरहमी से हत्या की गई है उससे पूरे क्षेत्र में भय व्याप्त हो गया है।”

यादव ने इसी पोस्ट में आगे कहा, ”मृतक की दुखी मां के द्वारा अपने बेटे के शव को गोद में रखकर सड़क पर ही शोकाकुल होने का समाचार हृदयविदारक है। जाट समाज ने हमलावारों की गिरफ्तारी को लेकर सड़क पर ही अपनी मांग बुलंद की है। उत्तर प्रदेश का समस्त जाट समुदाय इसे अपने ऊपर प्रहार मानकर आक्रोशित है।” उन्होंने कहा, ”इस हत्याकांड की जांच राजनीतिक प्रतिद्वंदिता के दृष्टिकोण से भी किये जाने की मांग उठ रही है। बेहद निंदनीय!”

पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे बालियान?

यह अटकलें भी लगाई जा रही थीं कि अंकित बालियान आगामी पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। हालांकि, अधिकारियों या उनके सहयोगियों की ओर से तत्काल इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, और न ही यह स्पष्ट हो सका कि क्या यह उनकी हत्या की वजह हो सकती है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि गोलीबारी की सूचना मिलने के बाद पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुंची। उन्होंने कहा, “शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और मामले की जांच की जा रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें गठित की गई हैं।”

पुलिस के अनुसार, हमलावर दो मोटरसाइकिलों पर आए और बालियान पर कई गोलियां चलाईं जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि हमलावरों की पहचान के लिए इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की जा रही है।

कौन थे अंकित बालियान?

हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान के यूट्यूब चैनल के 3.66 लाख से अधिक सब्सक्राइबर थे। वह अपने वीडियो में विभिन्न सहयोगियों के साथ गायक और कलाकार के रूप में नजर आते थे। उनके कई वीडियो में बंदूक, हथियार और SUV का इस्तेमाल दिखाया गया था। संगीत के अलावा बालियान ने हरियाणवी पॉप वीडियो, पॉडकास्ट और जमीनी स्तर के व्लॉग के जरिए अपनी मजबूत डिजिटल मौजूदगी बनाई थी।

उनका कंटेंट अक्सर क्षेत्रीय गर्व, देसी पहचान, ग्रामीण जीवन और युवा संस्कृति पर केंद्रित होता था। उनके कई गानों में बंदूक संस्कृति, स्थानीय राजनीति और बहादुरी जैसे विषय शामिल थे। एक गायक और क्रिएटर के तौर पर बालियान ने मासूम शर्मा, राजू पंजाबी और आशु ट्विंकल जैसे हरियाणवी कलाकारों के साथ भी काम किया।

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बालियान ने राजनीतिक पॉडकास्ट और स्थानीय व्लॉगिंग में भी हाथ आजमाया। उत्तर प्रदेश तथा हरियाणा के राजनेताओं और समुदाय के प्रमुख लोगों के इंटरव्यू लिए। उनके लोकप्रिय गानों में ‘भारी कोर्ट में गोली मारेंगे मेरी जान’, ‘112 NE’, ‘गोली के बारूद’, ‘जाट जाटनी’, ‘अगला जनम जाट’, ‘संविधान’, ‘मोदी बरगा रुतबा’, ‘जाट धर्मेंद्र की तरिया’, ‘एक खटोला जेल के भीतर’, ‘वेट’, ‘सिस्टम’ और ‘राइफलें’ शामिल थे।

Nepal-China Border Floods: नेपाल-चीन बॉर्डर पर अचानक आई बाढ़ में अब तक 160 लोगों की मौत, 133 भारतीय समेत 750 से अधिक लापता

Nepal-China Border Floods Update: तिब्बत की सीमा के पास मध्य नेपाल के जिलों में बुधवार (27 अगस्त) सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। अचानक आई बाढ़ में करीब 160 लोगों की मौत हो गई तथा 133 भारतीय नागरिक समेत 750 से अधिक लोग लापता हैं। बाढ़ से शहरों और गांवों में तबाही हुई। कई महत्वपूर्ण पुल बह गए। कम से कम एक दर्जन हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट तबाह हो गईं। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत इलाके में भूकंप आया। उसके तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ आने की खबर मिली, जिससे पता चलता है कि भूकंप के झटकों की वजह से हिमनद फटा होगा और उसी से बाढ़ आई होगी।

अधिकारियों ने बताया कि भोटे कोशी नदी में बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ा, जिससे तिब्बत से लगे रसुवा और धादिंग जिले प्रभावित हुए। नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित लेंडे नदी में पानी बढ़ने और चट्टानें खिसकने के कारण रसुवा जिले के सीमावर्ती शहर तिमुरे में भोटे कोशी के जरिए त्रिशूली नदी में भीषण बाढ़ आ गई। इसके बाद बाढ़ का पानी नदी के रास्ते नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी पूर्व जैसे अन्य जिलों में फैल गया तथा राजधानी काठमांडू से लगभग 70 से 200 किलोमीटर दूर तक के इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया।

500 लोग लापता

नेपाल सरकार ने कहा कि करीब 500 लोग लापता हैं। जबकि चीन के सरकारी सीजीटीएन न्यूज चैनल ने बताया कि सीमा के चीनी हिस्से में तीन लोगों की मौत हुई और 265 लोग लापता हैं। प्रभावित इलाकों के वीडियो में कीचड़, चट्टानों और मलबे से भरा पानी तेज रफ्तार से सीमावर्ती क्षेत्र में बहता दिखाई दिया। तेज बहाव को इमारतों और वाहनों की ओर बढ़ते देख लोग भागते नजर आए।

सामने आए खौफनाक वीडियो

एक वीडियो में चार मंजिला इमारत को तेज बहाव में बहते देखा गया। जबकि एक अन्य वीडियो में रसुवा में एक कार बाढ़ के तेज पानी में बहती नजर आई। एक और वीडियो में पानी के जबरदस्त दबाव से एक लंबा पुल दो हिस्सों में टूटता दिखाई दिया। एक अन्य वीडियो में तेज बहाव के कारण पुल ढहते और बहते नजर आए। धादिंग जिले के एक वीडियो में बाढ़ का पानी एक पुल से टकराया, जिसके बाद वह ढहकर बह गया। एक अन्य वीडियो में कीचड़ भरा पानी तेजी से एक पुल को अपनी चपेट में लेता और करीब 30 सेकंड में उसे बहाकर ले जाता नजर आया।

133 भारतीय लापता

अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित इलाकों के अलग-अलग हिस्सों से लगभग 100 लोगों को बचाया गया है। इनमें से 30 लोगों का इलाज काठमांडू के त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में चल रहा है। अधिकारियों ने बताया कि लापता हुए करीब 500 लोगों में कम से कम 133 भारतीय और 37 अप्रवासी भारतीय (NRI) शामिल हैं। इनमें से कम से कम 50 भारतीय कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री हैं। गैर-लाभकारी संस्था ईशा फाउंडेशन ने बताया कि उसके 77 सदस्य लापता हैं, जो एक आव्रजन केंद्र पर मौजूद थे। उन्होंने बताया कि 495 लोग सुरक्षित लौट आए हैं। बाद में नेपाल सरकार ने कहा कि इस आव्रजन केंद्र के कर्मचारियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।

तमिलनाडु के अधिकारियों ने बताया कि लापता 37 पर्यटक तंजावुर के रहने वाले हैं। भारतीयों और अप्रवासी भारतीयों के अलावा लापता हुए बाकी पर्यटक दो दर्जन से ज्यादा देशों से हैं, जिनमें अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड शामिल हैं। इसके अलावा, विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने प्रतिनिधि सभा को बताया कि अलग-अलग जगहों पर 80 सुरक्षाकर्मी लापता हो गए हैं, जिनमें नेपाल सेना के 44 जवान भी शामिल हैं।

भारत ने मदद के लिए बढ़ाया हाथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के अपने समकक्ष बालेंद्र शाह से फोन पर बात की। उन्हें हालात से निपटने के लिए हरसंभव मानवीय मदद का भरोसा दिलाया। नई दिल्ली ने पड़ोसी देश को राहत सामग्री की पहली खेप भेज दी है। काठमांडू में भारतीय दूतावास ने अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों की मदद और जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए।

X पर एक पोस्ट में कहा गया है कि लोग +977 985 131 6807 या +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं। भारतीय दूतावास ने X पर एक और पोस्ट में कहा कि नेपाल में अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों के शीघ्र बचाव और उन्हें राहत पहुंचाने के लिए वह नेपाल सरकार के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है। साथ ही, नेपाल सरकार के साथ समन्वय कर बचाव और राहत कार्यों को और मजबूत किया जा रहा है।

टोल-फ्री नंबर जारी

नेपाल पर्यटन बोर्ड ने भी मदद के लिए टोल-फ्री आपातकालीन नंबर 1234, हॉटलाइन 1144 और पर्यटक पुलिस का नंबर 9851289445 जारी किया है। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने भी हेल्पलाइन नंबर 0086 185 1428 4905 जारी किया है, जिस पर व्हाट्सऐप के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश और केरलम समेत कई अन्य भारतीय राज्यों ने भी हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं क्योंकि उन्हें आशंका है कि नेपाल में फंसे लोगों में उनके राज्य के निवासी भी हो सकते हैं।

19 पुल बह गए

‘काठमांडू पोस्ट’ के अनुसार, भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ से नुवाकोट के बेत्रावती को रसुवा के रसुवागढ़ी सीमा चौकी से जोड़ने वाली 42 किलोमीटर लंबी सड़क बह गई। सरकार ने बाद में बताया कि बुधवार को अचानक आई बाढ़ में 19 पुल बह गए। हालात का जायजा लेने के लिए नेपाल के प्रधानमंत्री शाह की अध्यक्षता में हुई एक आपात बैठक के बाद प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य के लिए नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को तैनात किया गया।

खोज और बचाव अभियान जारी

सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक, शाह ने जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना और उनके परिवारों के प्रति सहानुभूति जताई। साथ ही इन दुखद घटनाओं में घायल हुए लोगों के जल्द ठीक होने की कामना की। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित लोगों को हर जरूरी मदद देने का निर्देश दिया। नेपाल सेना ने अचानक आई बाढ़ के बाद खोज और बचाव अभियान चलाने के लिए 12 हेलीकॉप्टर तैनात किए।

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नेपाल सेना के एक बयान के अनुसार, रसुवा जिले के स्याफ्रुबेसी से छह, मैलुंग से दो और धुंचे से चार लोगों को बचाया गया। बयान में कहा गया कि आपात चिकित्सा बचाव दल से लैस सेना का एक एमआई-17 हेलीकॉप्टर भी त्रिशूली के जिला अस्पताल की ओर भेजा गया है। प्रधानमंत्री शाह ने बाढ़ प्रभावित देश में बचाव एवं राहत कार्यों के लिए हरसंभव मानवीय सहायता की पेशकश करने और एकजुटता व्यक्त करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का देर शाम आभार व्यक्त किया।

नेपाल में तबाही, पानी बिहार क्यों पहुंचेगा:36 फाटक खोले, त्रिशूली-भोटेकोशी का पानी किन जिलों तक पहुंचेगा, समझिए पूरा कनेक्शन

बिहार से करीब 300 किलोमीटर दूर नेपाल में तिब्बत से आई अचानक बाढ़ ने तबाही मचा दी है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के पानी ने रसुवा, टिमुरे और स्याब्रुबेसी इलाके को तहस-नहस कर दिया है। गांव के गांव बह गए, बाजार तबाह हो गए, पुल टूट गए और सड़कें कट गईं। नेपाल में आई तबाही पर बिहार सरकार अलर्ट है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से गृह मंत्री अमित शाह ने बात की है और NDRF की टीम को सीमावर्ती जिलों में तैनात कर दिया है। नेपाल में आई तबाही से बिहार को खतरा क्यों, क्या यहां भी तबाही मचेगी, समझेंगे; बूझे की नाही में…। सवाल-1: नेपाल के रसुवा में बाढ़ और तबाही कैसे आई है? जवाबः 26 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिले में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में अचानक बहुत तेज पानी आया। पानी तिब्बत की तरफ से आया और कुछ ही समय में घर, सड़क, पुल और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बहा ले गया। उस समय रसुवा में ऐसी भारी स्थानीय बारिश की सूचना नहीं थी, इसलिए सामान्य बारिश से आई बाढ़ की संभावना कम मानी जा रही है। कैसे हुआ? कितना नुकसान? नेपाल पुलिस के मुताबिक, अब तक 95 लोगों के मौत की खबर है। नेपाल के पर्यटन विभाग के मुताबिक 500 से ज्यादा लोगों का पता नहीं चल रहा है। इनमें 133 भारतीय समेत 300 से ज्यादा विदेशी पर्यटक हैं। सवाल-2: भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई तबाही से बिहार को खतरा क्यों? जवाबः नेपाल में आई तबाही से बिहार के खतरों को समझने के लिए भोट कोशी और त्रिशूली नदियों के तंत्रों को समझना होगा… त्रिशूली नदी के पानी से 5 जिलों को खतरा रसुवा नेपाल का उत्तरी, हिमालयी जिला है और चीन के तिब्बत से लगा है। टिमुरे/रसुवागढ़ी और स्याब्रुबेसी इसी क्षेत्र में हैं। यहां की नदियां ऊंचे हिमालय से निकलकर बहुत तेज ढाल वाले एरिया में नीचे उतरती हैं। इसी क्षेत्र में त्रिशूली नदी का डिस्चार्ज अचानक बढ़ता है तो पानी तेजी से नीचे आता है। भोटेकोशी से कोसी इलाके में खतरा भोटेकोशी नेपाल के उत्तरी हिस्से में चीन-तिब्बत सीमा से निकलने वाली हिमालयी नदी है। यह सिंधुपालचोक क्षेत्र से होकर बहती है। हालांकि, अबकी बार 2008 वाले हालात नहीं सवाल-3: कितना नुकसान हो सकता है, बिहार सरकार क्या कर रही है? जवाबः अभी नुकसान का आकलन करना जल्दीबाजी होगी। गंडक और कोसी बेसिन की नदियों में पानी बढ़ना चालू है। लेकिन गति सामान्य है। CM सम्राट चौधरी ने मुख्य सचिव, आपदा प्रबंधन और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। डिप्टी CM और जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि लोग सतर्क रहें, घबराएं नहीं। अगले 24 घंटे अलर्ट रहने की जरूरत है। समस्या पहले से बड़ी है, लेकिन फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। गंडक नदी पर दबाव बढ़ने की आशंका है। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से बाढ़ राहत के लिए अतिरिक्त टीमों की तैनाती की गई है। राहत एवं बचाव के लिए जरूरी सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है। सरकार अलर्ट, बोली-डरे नहीं सवाल-4ः नेपाल की नदियों से बिहार में क्यों आती है बाढ़? जवाबः नेपाल बिहार से करीब 400 फीट ऊंचाई (समुंद्र तल से) पर स्थित है। नेपाल में भारी बारिश होती है तो पानी ऊपर से नीचे की तरफ नेचुरल ग्रेविटी के कारण आता है। नेपाल में कोई बड़ा डैम नहीं है। जिससे पानी को कंट्रोल किया जा सके। नेपाल हिमालय पर बसा है। इसका करीब 75% हिस्सा पहाड़ी क्षेत्र है। कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला बलान, महानंदा और अधवारा नदियों का समूह यहां से निकलता है। नेपाल में बारिश होने पर पानी इन्हीं नदियों के रास्ते गंगा नदी तक पहुंचता है। 129 साल से चल रही हाई डैम बनाने की बात उत्तर बिहार को बाढ़ से मुक्ति दिलाने के लिए 1897 से ही भारत और नेपाल की सरकारों के बीच सप्तकोशी नदी पर बांध की बात चल रही है। इसे लेकर आजादी से पहले और बाद में दोनों देशों की सरकारों के बीच कई बार वार्ताएं हुईं। आखिरकार 1991 में दोनों देशों के बीच इसे लेकर एक समझौता भी हुआ। 2004 में इस प्रस्तावित बांध की संभावनाओं को तलाशने के लिए नेपाल के धरान में एक संयुक्त परियोजना कार्यालय भी बना है। मगर 129 साल से अधिक समय बीतने के बावजूद आज तक नेपाल के बराह क्षेत्र से 1.6 किमी उत्तर की दिशा में प्रस्तावित इस बांध के निर्माण को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। 21 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बैठक की। इसके बाद वित्त मंत्री ने कोसी-मेची परियोजना के पहले चरण की राशि जारी करने और दूसरे चरण की तकनीकी मंजूरी देने का निर्देश जल शक्ति मंत्रालय को दिया है। CM सम्राट चौधरी ने कहा कि बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए कोसी नदी पर उच्च बांध की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट जल्द बनेगी। JDU नेता संजय झा ने बताया, ‘नेपाल में हाई डैम का निर्माण एकमात्र समाधान है, जिसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) 2028 तक बन जाएगी।’

नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर बाढ़ से 160 मौतें, 844 लापता:33 शव 150km दूर मिले; भूकंप नहीं, पहाड़ खिसकने से आया 5.2 तीव्रता जैसा झटका

नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर बुधवार सुबह अचानक आई बाढ़ में 160 लोगों की मौत हो गई। नेपाल में 157 और तिब्बत में 3 लोगों की जान गई, जबकि 844 लोग अब भी लापता हैं। बाढ़ में 19 पुल, करीब 40 किलोमीटर सड़कें और 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट तबाह हो गए। बाढ़ का पानी करीब 30 फीट तक ऊपर आ गया था। तेज बहाव में घर, गाड़ियां और सरकारी ढांचे बह गए। शुरुआत में माना जा रहा था कि बाढ़ से पहले भूकंप आया था, लेकिन अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक चीन की तरफ ल्हेंदे नदी में पहाड़ का बड़ा हिस्सा खिसककर गिरा था। इसी लैंडस्लाइड से 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा झटका महसूस हुआ। इसके बाद ल्हेंदे नदी से पानी और मलबे का सैलाब भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में पहुंचा, जिससे बाढ़ आई। बहाव इतना तेज था कि लोगों और मलबे को करीब 150 किलोमीटर दूर चितवन तक बहा ले गया, जहां अब तक 33 शव बरामद किए गए हैं। राहतकर्मी खराब मौसम और टूटे रास्तों के बीच मलबे में दबे लोगों की तलाश कर रहे हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे कई श्रद्धालु भी बाढ़ की चपेट में आ गए। नेपाल में लापता लोगों में 466 विदेशी और 113 नेपाली शामिल हैं, जिनमें 133 भारतीय और 37 NRI भी हैं। भास्कर नॉलेजः कैसे आई बाढ़, कितना असर और भारत पर इम्पैक्ट बाढ़ की वजह को लेकर 3 आशंकाएं 1. लैंडस्लाइड से नदी का रास्ता रुका: यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) की जांच में पता चला कि नेपाल-तिब्बत सीमा पर चीन की ल्हेंदे नदी में पहाड़ का बड़ा हिस्सा खिसककर गिरा। इससे नदी का बहाव रुका और पानी-मलबा जमा होने के बाद अचानक तेज बहाव आया। इस घटना से 5.2 तीव्रता के भूकंप जितनी ऊर्जा पैदा हुई थी। ल्हेंदे का पानी भोटेकोशी नदी में पहुंच गया, जिससे बाढ़ आ गई। 2. भूकंप से ग्लेशियल फटने की आशंका: नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद में बताया कि सुबह 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया और करीब तीन मिनट बाद फ्लैश फ्लड की सूचना मिली। इससे आशंका जताई जा रही है कि भूकंप के झटकों से ग्लेशियल आउटबर्स्ट हुआ होगा। 3. ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट: एक संभावना यह भी है कि बर्फ और मलबे से नदी का रास्ता रुकने के बाद अस्थायी झील बनी और उसका पानी अचानक बाहर निकला। विशेषज्ञ अभी यह जांच रहे हैं कि क्या इस घटना में ग्लेशियल झील भी फूटी थी। बारिश को फिलहाल वजह नहीं माना जा रहा है, क्योंकि नेपाल के जल विज्ञान एवं मौसम विभाग के मुताबिक बाढ़ से पहले रसुवा में भारी बारिश नहीं हुई थी। नदी किनारे रहने वालों को खतरा बरकरार नेपाल के फ्लड फोरकास्टिंग डिविजन ने चेतावनी दी है कि भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के इलाकों में खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। चीन की ओर नदी के रास्ते में बनी झील अभी पूरी तरह खाली नहीं हुई है। लोगों से नदी के आसपास जाने से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की गई है। नेपाल में पिछले साल भी भोटेकोशी नदी में विनाशकारी बाढ़ आई थी, जिसमें 11 लोगों की मौत हुई थी। नेपाल-चीन को जोड़ने वाला मितेरी पुल भी बह गया था। भारत में कहां-कितना असर होगा भारत में इसका असर मुख्य रूप से बिहार की गंडक नदी और उससे जुड़ी छोटी-बड़ी नदियों में दिखने की आशंका है। नेपाल से करीब 3 मीटर ऊंची फ्लड वेव आने का अलर्ट है। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में खास सतर्कता बरती जा रही है। सीतामढ़ी और शिवहर पर भी नजर है। नेपाल का पानी त्रिशूली नदी से होते हुए गंडक तक पहुंचेगा। इसके बाद बिहार के निचले इलाकों में पानी बढ़ सकता है। यूपी के महाराजगंज और कुशीनगर में भी अलर्ट जारी किया गया है। खबर से जुड़े पल-पल की अपडेट्स के लिए नीचे दिए ब्लॉग से गुजर जाइए…

हर 1,000 व्यूज पर ₹60! इस चीनी प्लेटफॉर्म ने क्रिएटर्स का खींचा ध्यान, YouTube को देगा कड़ी टक्कर

चीनी वीडियो-शेयरिंग प्लेटफॉर्म Bilibili अपने घरेलू बाजार से बाहर तेजी से विस्तार कर रहा है। ऐसे में एक खास कमाई के आंकड़े ने दुनिया भर के क्रिएटर्स का ध्यान अपनी ओर खींचा है। X पर RT की एक पोस्ट के अनुसार, Bilibili क्रिएटर्स को हर 1,000 व्यूज के लिए लगभग $0.70 (करीब 60 रुपये) का भुगतान कर रहा है। अगर यह दावा सही है, तो यह कदम प्लेटफॉर्म को कंटेंट क्रिएटर्स को आकर्षित करने में मदद कर सकता है क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर YouTube को टक्कर दे रहा है। हालांकि, कंपनी ने खुद इस पेमेंट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

Bilibili की रिपोर्टेड पेमेंट

यह जानकारी RT के जरिए सामने आई, जिसने Bilibili के क्रिएटर प्रोग्राम पर चर्चा करते हुए यह आंकड़ा बताया। अगर यह सही है, तो एक मिलियन व्यूज पाने वाले क्रिएटर्स टैक्स और प्लेटफॉर्म के किसी भी एडजस्टमेंट से पहले लगभग $700 कमा सकते हैं। हालांकि, Bilibili के ऑफिशियल क्रिएटर प्रोग्राम डॉक्यूमेंटेशन में किसी तय CPM या RPM का जिक्र नहीं है।

इसके बजाय, प्लेटफॉर्म का कहना है कि कमाई ऑडियंस की लोकेशन, एडवर्टाइजर की डिमांड, कंटेंट कैटेगरी और मॉनेटाइजेशन प्रोडक्ट्स जैसी चीजों के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। इसमें यह भी बताया गया है कि अनुमानित रेवेन्यू को इनवैलिड ट्रैफिक, रिफंड, फ्रॉड का पता लगाने, टैक्स और पॉलिसी लागू करने के आधार पर एडजस्ट किया जा सकता है।

मॉनेटाइजेशन के लिए जरूरी शर्तें

Bilibili के क्रिएटर प्रोग्राम की पॉलिसी के अनुसार, मॉनेटाइजेशन के लिए अप्लाई करने से पहले क्रिएटर्स के पास कम से कम 100 सब्सक्राइबर और 2,000 वैलिड पब्लिक व्यूज होने चाहिए। हालांकि, इन शर्तों को पूरा करने के बाद भी मोनेटाइजेशन मिलना तय नहीं है। क्योंकि प्लेटफॉर्म हर चैनल की जांच करता है। इसमें कंटेंट ओरिजिनल है या नहीं, कॉपीराइट नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन तो नहीं हुआ और अकाउंट की स्थिति जैसी चीजें देखी जाती हैं।

यह प्लेटफॉर्म खरीदे गए व्यूज, फेक सब्सक्राइबर, ऑटोमेटेड एंगेजमेंट और दूसरे तरह के बनावटी ट्रैफिक पर भी रोक लगाता है। इसके अलावा, क्रिएटर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके द्वारा अपलोड किए गए सभी कंटेंट के मालिकाना हक उनके पास हों या उन्हें उस कंटेंट से कमाई करने की अनुमति मिली हो।

Bilibili का ग्लोबल विस्तार जारी है

यह पेमेंट की जानकारी तब सामने आई है जब Bilibili अपने इंटरनेशनल प्लान को तेजी से आगे बढ़ा रही है। सेमाफोर (Semafor) की एक पुरानी रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने अपना इंटरनेशनल ऐप फिर से लॉन्च किया है। इसके अलावा, वह इंग्लिश भाषा की वेबसाइट बना रही है और अमेरिका, यूरोप, जापान और लैटिन अमेरिका जैसे मार्केट में कम्युनिटी मैनेजर की भर्ती शुरू कर दी है।

बता दें कि Bilibili खुद को ऐसे क्रिएटर्स के लिए एक डेस्टिनेशन के तौर पर भी पेश कर रही है, जो नए ऑडियंस तक पहुंचना चाहते हैं और साथ ही कमाई का नए जरिया बनाना चाहते हैं। विज्ञापन के अलावा, कंपनी एक मार्केटप्लेस भी बना रही है जो स्पॉन्सरशिप के मौकों के लिए क्रिएटर्स को ब्रांड्स से जोड़ेगा।

हालांकि, प्रति 1,000 व्यूज पर $0.70 के पेमेंट की जानकारी ने काफी दिलचस्पी पैदा की है, लेकिन क्रिएटर्स को यह ध्यान रखना चाहिए कि Bilibili ने अभी तक आधिकारिक तौर पर स्टैंडर्ड पेमेंट रेट की पुष्टि नहीं की है। फिलहाल, प्लेटफॉर्म की पब्लिश्ड पॉलिसी में सिर्फ यह बताया गया है कि कमाई कई बातों पर निर्भर करेगी और जैसे-जैसे इसका ग्लोबल क्रिएटर इकोसिस्टम विकसित होगा, इसमें बदलाव हो सकता है।

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Sugar Price: भाव में आ सकती है नरमी, सरकार ने विदेश भेजी जाने वाली चीनी को घरेलू बाजार में बेचने की मंजूरी दी

भारत में चीनी की कमी को देखते हुए रिफाइनर करीब 3.5 लाख टन चीनी घरेलू बाजार में बेच सकते हैं। यह चीनी पहले विदेश भेजी जानी थी। ब्लूमबर्ग ने सूत्रों के हवाले से बताया कि सरकार ने इसकी मंजूरी दे दी है।

यह स्टॉक करीब एक हफ्ते के भीतर घरेलू बाजार में आ सकता है। इतनी चीनी देश की करीब पांच दिन की कुल खपत के बराबर है। इससे हाल में तेजी से बढ़ी चीनी की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।

इस साल चीनी की कमी क्यों हुई?

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक है। लेकिन इस साल उत्पादन उम्मीद से कम रहने का अनुमान है। कई प्रमुख गन्ना उत्पादक इलाकों में बारिश सामान्य नहीं रही। फसलों में बीमारी का असर भी पड़ा है।

दूसरी तरफ अब देश में त्योहारी सीजन शुरू हो रहा है। अगस्त के आखिर से जनवरी तक चीनी की खपत आमतौर पर काफी बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर पैकेज्ड फूड तक में चीनी की मांग बढ़ती है। यानी इस समय बाजार में चीनी की जरूरत बढ़ रही है और सप्लाई पर दबाव है।

सरकार ने दो बड़े फैसले लिए

सरकार ने हाल में चीनी की सप्लाई बढ़ाने के लिए दो कदम उठाए हैं। पहला, 10 लाख टन चीनी के ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की अनुमति दी गई है।

दूसरा, रिफाइनर्स को कुछ ऐसी रिफाइंड चीनी घरेलू बाजार में बेचने की इजाजत दी गई है, जिसे पहले एक्सपोर्ट के लिए रखा गया था। अब इसी फैसले के तहत करीब 3.5 लाख टन चीनी घरेलू बाजार में आ सकती है।

चीनी के दाम में पहले ही आई नरमी

सरकार के कदम का असर कीमतों पर दिखने लगा है। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रकाश नाइकनावरे के मुताबिक, देश में एक्स-मिल चीनी की औसत कीमत पिछले हफ्ते ₹67 प्रति किलो तक पहुंच गई थी।

अब कीमत घटकर करीब ₹54 से ₹55 प्रति किलो रह गई है। 20 अगस्त को ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की घोषणा के बाद बाजार में राहत देखने को मिली है। नाइकनावरे का कहना है कि सरकार के समय पर उठाए गए कदमों से कीमतों में और नरमी आ सकती है। इससे त्योहारी सीजन में ग्राहकों को राहत मिलेगी।

कितना इंपोर्ट हो सकता है?

सरकार ने भले ही 10 लाख टन ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की अनुमति दी है, लेकिन पूरा कोटा इस्तेमाल होने की संभावना कम है। Bloomberg ने पांच ट्रेडर्स, एनालिस्ट्स और मिलर्स से बातचीत के आधार पर अनुमान लगाया है कि अक्टूबर के अंत तक करीब 3 लाख से 6 लाख टन चीनी का इंपोर्ट हो सकता है।

घरेलू कीमतों में नरमी आने से मिलर्स और रिफाइनर्स के लिए ज्यादा चीनी इंपोर्ट करने का फायदा कम हो गया है। इसलिए पूरा 10 लाख टन कोटा इस्तेमाल होने की संभावना कम बताई जा रही है।

ब्राजील से चीनी आने तक मिलेगी राहत

जानकारों के मुताबिक, घरेलू बाजार में एक्सपोर्ट वाली चीनी उतारने से फिलहाल राहत मिल सकती है। बाद में भारत को इंपोर्ट की जरूरत फिर भी पड़ेगी। इसका मकसद घरेलू बाजार में सप्लाई बनाए रखना है, जब तक ब्राजील से चीनी की खेप भारत पहुंचना शुरू नहीं हो जाती।

भारत में रिफाइनर्स को Advance Authorisation के तहत कच्ची चीनी ड्यूटी फ्री इंपोर्ट करने की अनुमति भी है। हालांकि, प्रोसेसिंग के बाद इस चीनी को तय नियमों के तहत एक्सपोर्ट करना होता है।

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