Metal Stocks : मेटल स्टॉक्स में गिरावट का डर, राकेश अरोड़ा बोले- अब तेजी आते ही करें मुनाफावसूली

Metal Stocks : अगर हाल के दिनों में मेटल शेयरों में तेजी देखकर आप खरीदारी का प्लान बना रहे हैं, तो थोड़ा रुक जाइए। GoIndiaStocks.com के फाउंडर राकेश अरोड़ा का मानना है कि मेटल स्टॉक्स के अच्छे दिन खत्म होने की कगार पर हैं। उनका कहना है कि फिलहाल मेटल शेयरों में नई खरीदारी करने के बजाय मुनाफा वसूलने पर विचार करना चाहिए।

उनके मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही (Q1FY27) के नतीजे मेटल कंपनियों के लिए अच्छे रह सकते हैं। लेकिन बाजार पहले ही इसकी उम्मीद लगा चुका है। यानी अच्छी खबर का असर काफी हद तक शेयरों की कीमतों में दिख चुका है। आने वाले महीनों में कमोडिटी की कीमतें नरम पड़ सकती हैं। ऐसे में कंपनियों की कमाई के अनुमान भी घटाए जा सकते हैं।

Q1 नतीजों से पहले आ सकती है थोड़ी तेजी

राकेश अरोड़ा का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में मेटल शेयर 20% से 30% तक टूटे थे। इसलिए मजबूत जून तिमाही नतीजों से पहले इनमें थोड़ी तेजी या रिकवरी देखने को मिल सकती है। हालांकि, उन्हें नहीं लगता कि ये शेयर इतनी जल्दी अपने पुराने हाई पर पहुंच जाएंगे।

एल्युमिनियम कंपनियों को लेकर सबसे ज्यादा चिंता

राकेश अरोड़ा की सबसे बड़ी चिंता एल्युमिनियम सेक्टर को लेकर है। उनका कहना है कि कई ब्रोकरेज और एनालिस्ट अब भी अपने अनुमान में एल्युमिनियम का भाव करीब 3,200 डॉलर प्रति टन मान रहे हैं। लेकिन उनकी राय इससे अलग है।

उन्हें लगता है कि मिडिल ईस्ट और इंडोनेशिया से नई सप्लाई आने वाली है। इससे बाजार में एल्युमिनियम की उपलब्धता बढ़ेगी। ऐसे में कीमत घटकर करीब 2,600 डॉलर प्रति टन तक आ सकती है। अगर ऐसा हुआ, तो एल्युमिनियम कंपनियों की कमाई के अनुमान घटाने पड़ेंगे। इसका सीधा असर शेयरों पर भी दिख सकता है।

स्टील सेक्टर पर भी बहुत भरोसा नहीं

राकेश अरोड़ा स्टील सेक्टर को लेकर भी ज्यादा उत्साहित नहीं हैं। उनका कहना है कि अप्रैल-जून तिमाही में स्टील कंपनियों के नतीजे अच्छे आ सकते हैं। Vedanta जैसी कंपनियां भी मजबूत प्रदर्शन कर सकती हैं। लेकिन स्टील की कीमतें अब अपना पीक देख चुकी हैं।

एक तरफ चीन से स्टील का निर्यात बढ़ रहा है। दूसरी तरफ भारत की कंपनियां तेजी से उत्पादन क्षमता बढ़ा रही हैं। इससे बाजार में सप्लाई ज्यादा हो सकती है। अगर सप्लाई बढ़ी, तो कंपनियों के मार्जिन पर दबाव आएगा।

इसी वजह से उनका मानना है कि स्टील शेयरों में अभी और गिरावट आ सकती है। हालांकि, वैल्यूएशन के लिहाज से ये एल्युमिनियम कंपनियों के मुकाबले सस्ते जरूर हैं।

वेदांता के आयरन और स्टील को लेकर क्या कहा?

हाल ही में Vedanta के डीमर्जर के बाद बने Vedanta Iron & Steel के कारोबार पर भी राकेश अरोड़ा ने अपनी राय रखी। उनका कहना है कि आयरन और स्टील कारोबार में होने वाले विस्तार का फायदा शेयर पहले ही कीमत में जोड़ चुका है। इसलिए यहां बहुत ज्यादा तेजी की गुंजाइश नहीं बची है।

वहीं, ग्रुप के ऑयल एंड गैस कारोबार में उन्हें कुछ वैल्यू नजर आती है। लेकिन, रेगुलेटरी चिंताओं की वजह से यह फिलहाल हाई-रिस्क निवेश है। यह वैल्यू ट्रैप भी साबित हो सकता है।

कॉपर सेक्टर पर भी दी चेतावनी

राकेश अरोड़ा मानते हैं कि लंबे समय में कॉपर की मांग अच्छी रह सकती है। लेकिन फिलहाल उन्हें कॉपर कंपनियों के शेयर महंगे लग रहे हैं।

उनका कहना है कि बाजार रिसाइकल्ड कॉपर की बढ़ती सप्लाई को गंभीरता से नहीं ले रहा। अगर रिसाइकल्ड कॉपर की उपलब्धता बढ़ती रही, तो कॉपर की कीमतों पर दबाव आ सकता है।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

राकेश अरोड़ा की सलाह है कि अगर मजबूत जून तिमाही नतीजों की वजह से मेटल शेयरों में तेजी आती है, तो उसे नई खरीदारी का संकेत मत मानिए। उनके मुताबिक, यह तेजी मुनाफावसूली का मौका हो सकती है।

हालांकि, उन्होंने एक बात और कही। अगर अमेरिकी डॉलर लगातार कमजोर होता है, तो वैश्विक कमोडिटी कीमतों को सहारा मिल सकता है। ऐसे में बेस मेटल्स का आउटलुक बेहतर हो सकता है। यही एक बड़ा फैक्टर है, जो उनके मौजूदा नजरिए को बदल सकता है।

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Govt Cooperative Insurance Company: देश में जल्द लॉन्च होगी सरकारी सहकारी जीवन बीमा कंपनी, जानिए किसे होगा फायदा

Cooperative Life Insurance Company Explainer: देश के करोड़ों आम लोगों, किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए इंश्योरेंस सेक्टर से जुड़ा एक बहुत बड़ा अपडेट आया है। केंद्र सरकार जल्द ही सहकारी क्षेत्र में एक नई लाइफ इंश्योरेंस कंपनी शुरू करने जा रही है।

इस ऐतिहासिक कदम का उद्देश्य देश के सुदूर इलाकों, छोटे शहरों और गांवों तक किफायती जीवन बीमा की पहुंच को बढ़ाना है। आइए आपको बताते हैं कि सरकार की इस नई पहल कैसे काम करेगी और इससे सीधे आपको या आम पॉलिसीधारकों को क्या-क्या फायदे होने वाले हैं।

सहकारी जीवन बीमा कंपनी क्या है और इसकी घोषणा क्यों हुई?

केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस के मौके पर इस बड़ी योजना का ऐलान किया। अभी तक देश के सहकारिता आंदोलन का दायरा मुख्य रूप से डेयरी, चीनी, बीज और खाद जैसे पारंपरिक क्षेत्रों तक ही सीमित था।

अब सरकार इस पूरे इकोसिस्टम को वित्तीय सेवाओं से जोड़ने जा रही है। सरकार का मानना है कि सहकारी मॉडल के जरिए इंश्योरेंस बिजनेस में उतरने से देश के आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी जीवन बीमा सुरक्षा चक्र के दायरे में लाया जा सकेगा, वह भी बेहद किफायती प्रीमियम पर।

फर्टिलाइजर सेक्टर की दिग्गज सहकारी संस्था ‘इफको’ (IFFCO) पहले से ही एक जापानी पार्टनर के साथ मिलकर जनरल इंश्योरेंस के क्षेत्र में काम कर रही है। अब इसी सफलता को दोहराते हुए ‘लाइफ इंश्योरेंस’ के लिए एक पूरी तरह से नई सहकारी कंपनी खड़ी की जाएगी।

किसे और कैसे होगा इसका सीधा फायदा?

भारत में इस समय लगभग 8.5 लाख सहकारी समितियां हैं, जिनसे 30 करोड़ से अधिक सदस्य जुड़े हुए हैं। यह दुनिया का सबसे बड़ा सहकारी नेटवर्क है। नई बीमा कंपनी से इन लोगों को निम्नलिखित फायदे मिलेंगे:

कम प्रीमियम पर लाइफ इंश्योरेंस: सहकारी कंपनियों का मुख्य उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि अपने सदस्यों को सेवा देना होता है। इसलिए, प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियों के मुकाबले यहां लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम काफी कम होने की उम्मीद है।

गांवों और किसानों को सीधा लाभ: देश के करोड़ों किसान जो प्राइमरी एग्रीकल्चर कोऑपरेटिव सोसाइटीज (PACS) से जुड़े हैं, वे अब सीधे अपने नजदीकी सहकारी केंद्र से ही जीवन बीमा पॉलिसी खरीद और क्लेम कर सकेंगे। उन्हें बड़े शहरों या बैंकों के चक्कर नहीं काटने होंगे।

भरोसा और पारदर्शिता: सरकारी देखरेख और राष्ट्रीय डेटाबेस के जरिए संचालित होने के कारण इस कंपनी में आम लोगों का भरोसा निजी कंपनियों से कहीं ज्यादा मजबूत होगा।

डिजिटल बदलाव: अब 50,000 ई-पैक से मिलेगी मदद

इस वित्तीय समावेशन को जमीन पर उतारने के लिए सरकार बुनियादी ढांचे को पूरी तरह डिजिटल बना रही है। इसके तहत देश की 50,000 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) को अपग्रेड करके e-PACS में बदल दिया गया है।

भविष्य में ये डिजिटल e-PACS केंद्र केवल खाद-बीज देने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) की तरह काम करेंगे, जहां से ग्रामीण लोग अपनी जीवन बीमा पॉलिसी का प्रीमियम जमा कर सकेंगे और क्लेम की प्रक्रिया भी पूरी कर सकेंगे।

सहकारी क्षेत्र से जुड़े कुछ अन्य बड़े ऐलान

बीमा कंपनी के अलावा, सरकार ने इस सेक्टर को मजबूत करने के लिए कई और बड़ी घोषणाएं की हैं:

  1. भरत टैक्सी: सहकारी क्षेत्र की इस टैक्सी पहल को अगले दो वर्षों में देश के 500 शहरों तक बढ़ाया जाएगा।
  2. त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी: सहकारिता के क्षेत्र में प्रोफेशनल्स और मैनपावर की कमी को दूर करने के लिए आनंद (गुजरात) में ‘Tribhuvan Sahkari University’ की स्थापना की जा रही है।
  3. अनाज भंडारण क्षमता: देश में अनाज की बर्बादी रोकने के लिए 75,000 टन क्षमता वाले 135 गोदामों को ट्रांसफर किया गया है और 85 नए गोदामों का उद्घाटन हुआ है।
  4. सहकार वन प्रोजेक्ट: अमूल और NCCF मिलकर पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए ‘सहकार वन’ परियोजनाओं पर काम शुरू कर रहे हैं।

कुल मिलाकर साल 2047 तक भारत को ‘विकसित भारत’ बनाने के लक्ष्य में यह नई सहकारी जीवन बीमा कंपनी मील का पत्थर साबित हो सकती है। आम आदमी के लिहाज से देखें तो आने वाले समय में आपको लाइफ इंश्योरेंस के लिए एक नया, सुरक्षित और बेहद सस्ता सरकारी विकल्प मिलने जा रहा है।

बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा 91 वर्ष के हुए:धर्मशाला-लद्दाख में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, पीएम मोदी का बधाई संदेश- विश्व शांति के लिए उनकी प्रतिबद्धता सराहनीय

विश्व प्रसिद्ध बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा सोमवार को 91 वर्ष के हो गए हैं। इस विशेष अवसर पर हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला स्थित उनके अस्थायी निवास स्थान के मुख्य तिब्बती मंदिर ‘त्सुगलाखंग प्रांगण’ में एक भव्य समारोह आयोजित किया गया। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) और स्थानीय तिब्बती समुदाय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में देश-विदेश से आए सैकड़ों बौद्ध अनुयायियों, पर्यटकों और स्थानीय भारतीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। दलाई लामा के बारे में जानें- नोबेल शांति पुरस्कार मिल चुका है जन्म: 6 जुलाई 1935 को पूर्वोत्तर तिब्बत के ताकत्सेर गांव में हुआ। भारत आगमन: वर्ष 1959 में तिब्बत पर चीनी आक्रमण के बाद वे भारत आए और तब से धर्मशाला को अपना निवास स्थान बनाकर विश्व को शांति का संदेश दे रहे हैं। वैश्विक सम्मान: विश्व शांति और अहिंसा के प्रति उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए उन्हें वर्ष 1989 में प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी दीर्घायु की शुभकामनाएं दलाई लामा के जन्मदिन पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (ट्विटर) पर पोस्ट कर उन्हें बधाई दी। पीएम मोदी ने लिखा कि दलाई लामा को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। शांति और सद्भाव का उनका संदेश दुनिया भर के लोगों के लिए एक मार्गदर्शक शक्ति रहा है। उनकी नैतिक और आध्यात्मिक शक्ति तथा वैश्विक कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सराहनीय है। मैं उनके लंबे और स्वस्थ जीवन की कामना करता हूं।” राष्ट्रगान और विशेष प्रार्थना से हुई कार्यक्रम की शुरुआत धर्मशाला में आयोजित इस समारोह में कांगड़ा के उपायुक्त (डीसी) हेमराज बैरवा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत भारत और तिब्बत के राष्ट्रगान के साथ की गई। इसके बाद दलाई लामा की लंबी उम्र और उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया और केक काटा गया। मुख्य अतिथि का संबोधन: दलाई लामा शांति और करुणा के जीवंत प्रतीक मुख्य अतिथि डीसी हेमराज बैरवा ने राज्य सरकार की ओर से शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दलाई लामा केवल एक वैश्विक आध्यात्मिक गुरु नहीं, बल्कि संघर्ष और विभाजन से त्रस्त इस आधुनिक विश्व में शांति, करुणा और सार्वभौमिक उत्तरदायित्व के जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि असली सुख भौतिकता में नहीं, बल्कि दयालु हृदय और क्षमा में है। इसके साथ ही डीसी ने क्षेत्र के पर्यटन और अर्थव्यवस्था में तिब्बती समुदाय के योगदान की सराहना की। सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और आधिकारिक संदेशों का वाचन समारोह के दौरान तिब्बती स्कूलों और ‘तिब्बती प्रदर्शन कला संस्थान’ के कलाकारों ने अपनी पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर समां बांधा। इस मौके पर निर्वासित तिब्बती संसद के उपाध्यक्ष खेनपो सोनम टेनफेल और कार्यवाहक सिक्योंग त्सेग्याल चुक्या द्रानी ने क्रमशः संसद और काशाग (कैबिनेट) का आधिकारिक संदेश पढ़ा। इसके अतिरिक्त, उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सीटीए के कई सिविल सेवकों को भी सम्मानित किया गया।

बारिश में इन किलों की खूबसूरती देखकर भूल जाएंगे हिल स्टेशन, जरूर बनाएं ट्रिप का प्लान!

बारिश का मौसम आते ही महाराष्ट्र के पहाड़, घाटियां और ऐतिहासिक किले हरियाली से भर जानते हैं। मानसून में इन किलों की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है और बादलों, झरनों व ठंडी हवाओं के बीच ट्रेकिंग का एक्सपीरियंस बेहद यादगार बन जाता है। अगर आप नेचर और एडवेंचर का आनंद एक साथ लेना चाहते हैं, तो ये किले आपके लिए बेहतरीन ऑप्शन हैं:

1. सिंहगढ़ किला, पुणे

पुणे में सिंहगढ़ किले का समय, प्रवेश शुल्क, टिकट की कीमत; सिंहगढ़ किले के खुलने और बंद होने का समय, छुट्टियां और फोन नंबर

सिंहगढ़ किला पुणे से लगभग 30 किलोमीटर दूर है और महाराष्ट्र के सबसे पॉपुलर ट्रेकिंग डेस्टिनेशन में से एक माना जाता है। यह किला छत्रपति शिवाजी महाराज और तानाजी मालुसरे के शौर्य से जुड़ा हुआ है। बारिश के मौसम में यहां चारों तरफ घनी हरियाली, ठंडी हवाएं और बादलों से घिरी पहाड़ियां देखने को मिलती हैं, जो पूरे माहौल को बेहद खूबसूरत बना देती हैं।

यहां तक पहुंचने के लिए ट्रेक बहुत कठिन नहीं है, इसलिए परिवार और नए ट्रेकर्स भी आसानी से आ सकते हैं। रास्ते में छोटे-छोटे झरने जर्नी को और भी रोमांचक बना देते हैं। किले की ऊंचाई से पुणे शहर और आसपास की घाटियों का नजारा बेहद अट्रैक्टिव दिखाई देता है। सुबह जल्दी या शाम के समय यहां का मौसम सबसे ज्यादा सुहावना रहता है। दुकानों पर मिलने वाला पिठला-भाकरी, कांदा भजी और गर्म चाय इस ट्रिप का स्वाद और बढ़ा देते हैं।

2. रायगढ़ किला, महाड

File:Raigarh fort.jpg - Wikimedia Commons

रायगढ़ किला मराठा साम्राज्य की राजधानी रहा है और इसे छत्रपति शिवाजी महाराज के सबसे महत्वपूर्ण किलों में गिना जाता है। मानसून के दौरान यह पूरा इलाका बादलों से ढक जाता है और हर तरफ फैली हरियाली इसे किसी स्वर्ग जैसा बना देती है। ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां से घाटियों और पहाड़ों का नजारा बेहद शानदार दिखाई देता है।

यहां ट्रेकिंग के अलावा रोपवे की सुविधा भी अवेलेबल है, जिससे बुजुर्ग और बच्चे भी आसानी से किले तक पहुंच सकते हैं। किले के अंदर राजमहल, दरबार, बाजार और शिवाजी महाराज की समाधि देखने को मिलती है। बारिश के मौसम में किले के आसपास बहते झरने इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं और फोटोग्राफी के लिए भी यह जगह शानदार मानी जाती है।

3. हरिश्चंद्रगढ़ किला, अहिल्यानगर

महाराष्ट्र में हरिश्चंद्रगढ़ किला

हरिश्चंद्रगढ़ महाराष्ट्र के सबसे पुराने और रोमांचक किलों में से एक है। यह अपनी ऊंची पहाड़ियों, घने जंगलों और फेमस कोकणकडा के लिए जाना जाता है। मानसून के दौरान यहां बादल इतने करीब आ जाते हैं कि कई बार पूरा किला धुंध में छिप जाता है। चारों तरफ फैली हरियाली और झरने इसे नेचर लवर के लिए किसी जन्नत से कम नहीं बनाते।

यह ट्रेक थोड़ा चुनौतीपूर्ण माना जाता है, इसलिए यहां जाने से पहले अच्छी तैयारी करना जरूरी है। किले के पास प्राचीन मंदिर और गुफाएं भी देखने लायक हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहां का व्यू बेहद मनमोहक होता है और मानसून में बादलों का समुद्र जैसा नजारा देखने को मिलता है।

4. टिकोना किला, कामशेत

टिकोना किला: त्रिकोणीय पहाड़ी किले के लिए एक संपूर्ण मार्गदर्शिका

टिकोना किला अपनी ट्राइएंगुलर शेप के कारण काफी पॉपुलर है। यह किला पवना झील के पास है और मानसून के समय इसकी सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है। बारिश में यहां की पहाड़ियां, हरियाली और बादलों से घिरी जगह टूरिस्ट को अपनी ओर अट्रैक्ट करता है।

यह ट्रेक आसान है, इसलिए नए ट्रेकर्स के लिए भी अच्छा ऑप्शन माना जाता है। किले की चोटी से पवना झील और आसपास की घाटियों का दृश्य बेहद अट्रैक्टिव दिखाई देता है। रास्ते में छोटे झरने और पत्थरों के बीच से गुजरने वाला ट्रेक रोमांच को और बढ़ा देता है।

5. राजगढ़ किला, पुणे

File:Rajgad Fort in Pune, Maharashtra.jpg - Wikimedia Commons

राजगढ़ किला कई वर्षों तक छत्रपति शिवाजी महाराज की राजधानी रहा था। यह किला अपने विशाल क्षेत्र, मजबूत किलेबंदी और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। मानसून के दौरान यहां हर तरफ हरियाली फैल जाती है और बादलों के बीच से दिखाई देने वाले पहाड़ बेहद आकर्षक लगते हैं।

यह ट्रेक थोड़ा लंबा है, लेकिन ऊपर पहुंचने के बाद दिखाई देने वाला व्यू सारी थकान भुला देता है। किले के अलग-अलग जगहों से घाटियों और पर्वतों का नजारा बहुत शानदार दिखाई देता है। एडवेंचर पसंद करने वाले लोगों के लिए यह जगह किसी सपने से कम नहीं है।

6. लोहागढ़ किला, लोनावला

लौहगढ़ फोर्ट में ऐसा क्या है? कितनी हसीन हैं इसकी वादियां जो कपल के लिए है फेवरेट, कैसा है यहां का मौसम, दिल्ली से कैसे जाएं - News18 हिंदी

लोहागढ़ किला मानसून ट्रेकिंग के लिए सबसे पसंदीदा जगहों में से एक है। लोनावला के पास यह किला बारिश के मौसम में पूरी तरह हरियाली से ढक जाता है। बादलों के बीच से गुजरते रास्ते, छोटे-छोटे झरने और ठंडी हवाएं यहां आने वाले हर टूरिस्ट को मंत्रमुग्ध कर देती हैं।

यह ट्रेक आसान माना जाता है, इसलिए परिवार, बच्चे और पहली बार ट्रेकिंग करने वाले लोग भी आराम से यहां जा सकते हैं। किले का पॉपुलर ‘विंचूकाटा’ हिस्सा और ऊपर से दिखने वाला नटुरेल सीन मानसून में बेहद शानदार लगता है। फोटोग्राफी और नेचर लवर के लिए यह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं है।

बारिश वाली सैर पर जाने से पहले ये तैयारी जरूर करें

लोहगढ़ किला, लोनावला: एक संपूर्ण गाइड

बारिश के मौसम में ट्रेकिंग का आनंद तभी मिलता है, जब सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा जाए। हमेशा अच्छी पकड़ वाले ट्रेकिंग जूते पहनें ताकि फिसलन वाले रास्तों पर बैलेंस बना रहे। मौसम देखकर ट्रिप की प्लानिंग बनाएं। अपने साथ रेनकोट, अतिरिक्त कपड़े, पानी, हल्का भोजन, प्राथमिक उपचार किट और मोबाइल के लिए वाटरप्रूफ कवर जरूर रखें। झरनों, तेज बहते पानी और खतरनाक चट्टानों के बहुत करीब जाने से बचें। साथ ही जिस जगह पर जाएं उसे साफ-सुथरा छोड़कर लौटें।

बारिश के मौसम में अगर आप ट्रेकिंग का आनंद लेना चाहते हैं, तो ये सभी किले आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होने चाहिए। बस सही तैयारी और जरूरी सावधानियों के साथ ट्रैवल करें, ताकि आपका सफर सेफ और यादगार बन सके। यकीन मानिए, इन किलों की मानसूनी वादियां और बादलों से घिरे नज़ारे आपको बार-बार यहां आने के लिए मजबूर कर देंगे।

कौन से हैं भारत के वो 2 एयरपोर्ट, जिनकी डिजाइन और खूबसूरती ने ग्लोबल लिस्ट में बनाई जगह?

2026 की “World’s Most Beautiful Airports” लिस्ट में भारत ने एक बार फिर अपनी खास पहचान बनाई है। इस बार भारत के दो एयरपोर्ट टर्मिनल इस सूची में शामिल किए गए हैं, जो दुनिया के कई बड़े देशों जैसे चीन, जर्मनी, अमेरिका और कंबोडिया के बेहतरीन एयरपोर्ट्स के साथ खड़े हैं। यह लिस्ट बताती है कि अब एयरपोर्ट सिर्फ यात्रा करने की जगह नहीं रहे, बल्कि इन्हें सुंदर डिजाइन और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से भी बनाया जा रहा है। आज के समय में एयरपोर्ट्स में आधुनिक तकनीक के साथ-साथ प्राकृतिक थीम और लोकल संस्कृति का भी ध्यान रखा जा रहा है।

भारत के इन दोनों एयरपोर्ट्स की खासियत यह है कि ये न सिर्फ देखने में सुंदर हैं, बल्कि यात्रियों को एक अलग और आरामदायक अनुभव भी देते हैं, जिससे देश की आधुनिक सोच और संस्कृति दोनों दुनिया के सामने आती हैं।

गुवाहाटी एयरपोर्ट

गुवाहाटी के लोकप्रिया गोपीनाथ बोरदोलोई इंटरनेशनल एयरपोर्ट का टर्मिनल 2 पूरी तरह से प्राकृतिक थीम पर बनाया गया है। इसका डिजाइन बांस ऑर्किड फूल से प्रेरित है, जो उत्तर-पूर्व भारत की खास पहचान है। अंदर जाते ही यह जगह एक प्राकृतिक दुनिया जैसी महसूस होती है। यहां “स्काई फॉरेस्ट” जैसी हरियाली, ऊंची छतें और स्थानीय कला देखने को मिलती है, जो यात्रियों को असम की संस्कृति से जोड़ती है।

नवी मुंबई एयरपोर्ट

नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट का टर्मिनल 1 बेहद आधुनिक और भविष्यवादी डिजाइन में बनाया गया है। इसकी छत कमल के फूल की पंखुड़ियों जैसी दिखती है। यह डिजाइन सिर्फ सुंदरता के लिए नहीं है, बल्कि प्राकृतिक रोशनी और हवा को बेहतर तरीके से अंदर लाने में भी मदद करता है, जिससे ऊर्जा की खपत कम होती है। अंदर की सजावट में डिजिटल आर्ट और कमल पैटर्न का खास इस्तेमाल किया गया है।

दुनिया के टॉप 7 खूबसूरत एयरपोर्ट्स

इस लिस्ट में भारत के अलावा चीन, जर्मनी, कंबोडिया और अमेरिका के एयरपोर्ट भी शामिल हैं। इनमें शामिल हैं—

  • Guangzhou Baiyun International Airport (China)
  • Frankfurt Airport (Germany)
  • Techo International Airport (Cambodia)
  • Pittsburgh International Airport (USA)
  • San Diego International Airport (USA)
  • Guwahati Airport Terminal 2 (India)
  • Navi Mumbai Airport Terminal 1 (India)

क्या है इस साल की खास बात?

इस साल की रैंकिंग में साफ दिख रहा है कि अब एयरपोर्ट डिजाइन में प्रकृति, पर्यावरण और आधुनिक तकनीक का मेल तेजी से बढ़ रहा है। भारत के दोनों एयरपोर्ट इस बदलाव का बेहतरीन उदाहरण हैं, जो देश की संस्कृति और आधुनिक सोच को दुनिया के सामने पेश करते हैं।

भारत को मिलने जा रही पहली हाइड्रोजन ट्रेन कैसी है? जानें इसकी खासियत समेत सबकुछ

India First Hydrogen Train: भारत के रेलवे इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है, जहां देश अपनी पहली हाइड्रोजन ट्रेन के साथ हरित परिवहन की दिशा में एक नया कदम बढ़ाएगा। इस अत्याधुनिक ट्रेन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी महीने 17 जुलाई करेंगे, जिसकी तैयारियां तेजी से शुरू हो चुकी हैं। यह ट्रेन जींद–सोनीपत रेल ट्रैक पर संचालित होगी, जिसे पर्यावरण के लिए बहुत अनुकुल माना जा रहा है। इसके साथ ही, अमृत भारत योजना के तहत बने जींद स्टेशन का भी उद्घाटन संभव है।

क्या है खासियत?

हाइड्रोजन से चलने वाली इस ट्रेन की खासियत यह है कि इससे प्रदूषण नहीं होता, और यह ट्रेन सिर्फ पानी और गर्मी छोड़ेगी। इसके अलावा, इस ट्रेन में कुल 10 कोच और 1200-किलोवाट का इंजन है। जानकारी के अनुसार, शुरुआत में यह ट्रेन 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी।

किस-किस देश में चल रही यह ट्रेन?

भारत इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने वाले चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा। अभी सिर्फ जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका के पास यह टेक्नोलॉजी है।

रविवार को हुई समीक्षा बैठक

रविवार को पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में देर शाम हरियाणा विधानसभा के उपाध्यक्ष डॉ. कृष्ण लाल मिड्डा ने जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इस बैठक में उपायुक्त डॉ. विशाली शर्मा, अतिरिक्त उपायुक्त प्रदीप कुमार, सभी एसडीएम, नगर निगम और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में प्रधानमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम से जुड़ी विभागवार जिम्मेदारियों की समीक्षा की गई और समयबद्ध तरीके से सभी कार्य पूरे करने के निर्देश दिए गए।

यह पूरे जिले के लिए गौरव का विषय” 

डॉ. कृष्ण लाल मिड्डा ने अधिकारियों से कहा कि, “17 जुलाई को प्रधानमंत्री का प्रस्तावित दौरा पूरे जिले के लिए गौरव का विषय है। सभी विभाग अपनी जिम्मेदारी पूरी गंभीरता से निभाएं और तैयारियों में किसी भी प्रकार की कमी न रहने दें। प्रत्येक अधिकारी यह सोचकर कार्य करे कि उसका विभाग इस आयोजन को सफल बनाने में अपनी सर्वोत्तम भूमिका निभाए।

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वर्ल्ड अपडेट्स:फ्रांस के लालिक म्यूजियम में 40 करोड़ रुपए की चोरी, नकाबपोश बदमाश 20 क्रिस्टल ज्वेलरी लेकर फरार

फ्रांस के लालिक म्यूजियम से रविवार तड़के करीब 40 लाख यूरो (करीब 40 करोड़ रुपए) के आभूषण चोरी हो गए। घटना जर्मनी सीमा से सटे विंगन-सुर-मोडेर कस्बे की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुबह करीब 5:30 बजे कई नकाबपोश बदमाश संग्रहालय का दरवाजा तोड़कर अंदर घुसे। उन्होंने छह डिस्प्ले केस तोड़े और करीब 20 क्रिस्टल आभूषण लेकर फरार हो गए। चोरी हुए आभूषण क्रिस्टल के बने थे और उनमें कीमती रत्न नहीं जड़े थे। इसलिए एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन्हें पिघलाकर या दोबारा बेच पाना आसान नहीं होगा। लालिक म्यूजियम की शुरुआत 2011 में हुई थी। यह प्रसिद्ध फ्रांसीसी ज्वेलर और ग्लास कलाकार रेने लालिक तथा उनके उत्तराधिकारियों की कला को समर्पित है। संग्रहालय में 650 से अधिक आर्ट नोवो, आर्ट डेको और आधुनिक क्रिस्टल कला की कलाकृतियां प्रदर्शित हैं। चोरी के बाद संग्रहालय को कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया गया है। इससे पहले पिछले साल अक्टूबर में पेरिस के लूव्र म्यूजियम से फ्रांस के क्राउन ज्वेल्स के आठ दुर्लभ आभूषण चोरी हुए थे। उनकी कीमत करीब 8.8 करोड़ यूरो आंकी गई थी। इसी दौरान डेनिस डिडेरो हाउस ऑफ एनलाइटनमेंट से करीब 2,000 दुर्लभ सिक्के और नेशनल म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री से 15 लाख यूरो कीमत के छह दुर्लभ सोने के नगेट भी चोरी हुए थे। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… ब्रिटेन में विदेशी फंडिंग पर शिकंजा:चुनावी उम्मीदवारों को हर बड़े चंदे का स्रोत बताना होगा
ब्रिटेन ने सोमवार को विदेशी राजनीतिक चंदे पर नियम और सख्त कर दिए। सरकार का कहना है कि इसका मकसद विदेशी पैसे के जरिए चुनावों को प्रभावित होने से रोकना और राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ाना है। यह जानकारी ब्रिटिश सरकार के बयान में दी गई है। नए नियमों के तहत अब चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को उम्मीदवार घोषित होने से पहले मिले 2,230 पाउंड से अधिक के सभी चंदों की जानकारी देनी होगी। साथ ही यह भी साबित करना होगा कि यह रकम वैध स्रोतों से आई है। हाउसिंग मंत्री स्टीव रीड ने कहा कि विदेशी दानदाताओं के लिए कड़े मानक लागू कर और उम्मीदवारों से फंडिंग का स्रोत साबित कराने की व्यवस्था कर सरकार चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता की रक्षा कर रही है। नियमों के मुताबिक विदेश से आकर ब्रिटेन में बसे लोग अब तभी एक लाख पाउंड या उससे अधिक का राजनीतिक चंदा दे सकेंगे, जब वे कम से कम एक साल तक स्थायी रूप से ब्रिटेन में रह चुके हों। इसके अलावा कंपनियों से मिलने वाले राजनीतिक चंदे का आकलन अब उनके राजस्व के बजाय कर चुकाने के बाद हुए वास्तविक मुनाफे के आधार पर किया जाएगा। ये नए नियम मार्च में घोषित प्रावधानों के बाद लागू किए गए हैं। तब सरकार ने विदेश में रहने वाले ब्रिटिश नागरिकों के राजनीतिक चंदे की सीमा एक लाख पाउंड प्रति वर्ष तय की थी। लोगो विवाद में मॉली टी पर भारी पड़ा लुई वितों: चीनी अदालत ने $15 लाख हर्जाना और माफी का आदेश दिया
चीन की लोकप्रिय बबल टी चेन मॉली टी को फ्रांसीसी लग्जरी ब्रांड लुई वितों (Louis Vuitton) के ट्रेडमार्क उल्लंघन के मामले में 1.03 करोड़ युआन (करीब 11 लाख पाउंड या 15 लाख डॉलर) हर्जाना भरने का आदेश दिया गया है। अदालत ने माना कि कंपनी का लोगो लुई वितों के मशहूर चार-पंखुड़ी वाले मोनोग्राम ट्रेडमार्क की नकल करता है। इस फैसले के बाद चीन में कॉपीराइट और बौद्धिक संपदा अधिकारों को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई। चाइना डेली के अनुसार, शंघाई के पूर्व में स्थित सूझोउ की अदालत ने गुरुवार को मॉली टी को विवादित लोगो का इस्तेमाल तुरंत बंद करने, सार्वजनिक माफी मांगने और लुई वितों को 1.03 करोड़ युआन का हर्जाना देने का आदेश दिया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मॉली टी और उससे जुड़ी कंपनियों ने कई ट्रेडमार्क पंजीकरण के लिए आवेदन किए थे, लेकिन चीन के राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा प्रशासन ने अधिकांश आवेदन खारिज कर दिए। केवल “मॉली टी” नाम वाले चीनी अक्षरों का ट्रेडमार्क ही पंजीकृत हो सका। इस मामले से जुड़ा एक हैशटैग चीनी सोशल मीडिया पर 40 करोड़ से ज्यादा बार देखा जा चुका है और इस पर हजारों टिप्पणियां आई हैं। कई यूजर्स ने मॉली टी का समर्थन करते हुए कहा कि पश्चिमी लग्जरी ब्रांडों के कई डिजाइन भी चीनी कलाकृतियों से प्रेरित रहे हैं। वीबो पर एक यूजर ने लिखा कि वह समर्थन जताने के लिए रोज मॉली टी पिएगा। वहीं कई सोशल मीडिया यूजर्स ने अदालत के फैसले को सही ठहराया। उनका कहना था कि लुई वितों ने संबंधित ट्रेडमार्क पहले ही पंजीकृत करा रखा है, इसलिए कानून के मुताबिक उसकी सुरक्षा का अधिकार उसी के पास है। ‌‌BBC ने इस मामले पर प्रतिक्रिया के लिए मॉली टी और लुई वितों दोनों से संपर्क किया है, लेकिन खबर लिखे जाने तक किसी की ओर से कोई बयान नहीं आया। NATO सम्मेलन से पहले रूस का बड़ा हमला:कीव में 9 की मौत
यूक्रेन की राजधानी कीव पर रूस ने एक सप्ताह में दूसरी बार बड़ा मिसाइल हमला किया है। सोमवार तड़के हुए हमले में कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 46 लोग घायल हुए हैं। घायलों में कम से कम पांच बच्चे शामिल हैं। यह हमला तुर्किये में होने वाले NATO शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हुआ है। सम्मेलन के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात होने की उम्मीद है। रविवार को हमले से कुछ घंटे पहले राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा था कि खुफिया जानकारी के अनुसार रूस कीव पर एक और बड़े हमले की तैयारी कर रहा है। यूक्रेन ने आरोप लगाया है कि रूस ने जानबूझकर रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया। वहीं रूस का कहना है कि उसने हाल में रूसी क्षेत्र के बिजलीघरों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर यूक्रेनी हमलों के जवाब में सैन्य और ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया। NATO बैठक से पहले जेलेंस्की ने सहयोगी देशों से यूक्रेन को लंबी दूरी की मिसाइलों की आपूर्ति में देरी नहीं करने की अपील की।

Crude Oil Price: क्रूड को लेकर आई बड़ी खबर, उत्पादन बढ़ाएगा OPEC+, $71 के पास आया ब्रेंट का भाव

Crude Oil Price:  OPEC+ के अगस्त से अपने प्रोडक्शन टारगेट को और बढ़ाने पर सहमत होने के बाद सोमवार को तेल की कीमतों में थोड़ी गिरावट आई। होर्मुज स्ट्रेट के ज़रिए बड़े प्रोड्यूसर्स से क्रूड एक्सपोर्ट में रिकवरी से भी ग्लोबल सप्लाई में बढ़ोतरी का इशारा मिला, जिससे कीमतों पर असर पड़ा।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स शुक्रवार को 0.45% बढ़कर बंद होने के बाद 24 सेंट या 0.33% गिरकर $71.88 प्रति बैरल पर आ गया। इस बीच, US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 11 सेंट या 0.16% गिरकर $68.58 प्रति बैरल पर आ गया। WTI शुक्रवार को सेटल नहीं हुआ क्योंकि शनिवार को इंडिपेंडेंस डे की छुट्टी से पहले US मार्केट बंद रहे।

क्रूड ऑयल की कीमतों पर क्या असर पड़ रहा है?

पिछले कुछ हफ़्तों में गिरावट देखने के बाद पिछले हफ़्ते दोनों बेंचमार्क क्रूड कॉन्ट्रैक्ट में ज़्यादा बदलाव नहीं हुआ, क्योंकि इन्वेस्टर्स होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग के भविष्य पर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत पर करीब से नज़र रख रहे थे, साथ ही गल्फ़ ऑयल एक्सपोर्ट में रिकवरी पर भी नज़र रख रहे थे।

इस बीच, पेट्रोलियम एक्सपोर्ट करने वाले देशों के संगठन (OPEC) और रूस समेत उसके सहयोगी, रविवार को अगस्त से प्रोडक्शन टारगेट को और 188,000 बैरल प्रति दिन बढ़ाने पर सहमत हुए, जून और जुलाई के लिए इसी तरह की बढ़ोतरी की घोषणा के बाद।

हालांकि, प्लान की गई प्रोडक्शन बढ़ोतरी का ज़्यादातर हिस्सा कागज़ों पर ही रहा है। ईरान से जुड़े US-इज़राइली झगड़े ने होर्मुज स्ट्रेट से टैंकर ट्रैफिक में रुकावट डाली, जिससे सऊदी अरब, कुवैत और इराक जैसे OPEC के मुख्य प्रोड्यूसर प्रभावित हुए, और उनकी प्रोडक्शन बढ़ाने की क्षमता सीमित हो गई।

रॉयटर्स के एक सर्वे के मुताबिक, जून में OPEC का तेल प्रोडक्शन पिछले महीने की तुलना में 3.3 मिलियन बैरल प्रति दिन बढ़कर 19.43 मिलियन बैरल प्रति दिन हो गया, जो दो दशकों से ज़्यादा समय में अपने सबसे निचले लेवल से उबर रहा है।

इस बीच, डेटा से पता चला कि गल्फ़ ऑयल एक्सपोर्ट मई से 3 मिलियन बैरल से ज़्यादा बढ़कर जून में 10 मिलियन bpd से ज़्यादा हो गया, हालांकि वॉल्यूम युद्ध से पहले के लेवल से लगभग 40% कम रहा।

अलग से, रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि रूस के पश्चिमी पोर्ट से क्रूड शिपमेंट जून में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया और जुलाई में भी इसी लेवल पर रहने की उम्मीद है। यह बढ़ोतरी यूक्रेन के ड्रोन हमलों के बाद हुई है, जिसमें रूसी रिफाइनरियों को नुकसान पहुंचा था, जिससे मॉस्को को क्रूड एक्सपोर्ट बढ़ाना पड़ा।

Commodity Cornor: इंटरनेशनल मार्केट में चढ़े चीनी के दाम, सोने-चांदी की कीमतों में रिकवरी, क्रूड फिसला

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

100 साल बाद खुला अंटार्कटिका के ‘खूनी झरने’ का राज! बर्फ की गहराइयों में छिपे उस खौफनाक सच से वैज्ञानिकों ने उठाया पर्दा

Antarctica Blood Falls Red Water Mystery: अंटार्कटिका महाद्वीप की जमी हुई सुन्न कर देने वाली बर्फ के बीच एक ऐसी जगह भी है, जहां से पानी नहीं, बल्कि खौफनाक ‘खून’ जैसी लाल धार बहती है। दूर से देखने पर ऐसा लगता है मानो सफेद बर्फ का सीना चीरकर कोई गहरा जख्म उबल रहा हो। साल 1911 में जब इंसानों ने पहली बार इस रहस्यमयी ‘खूनी झरने’ को देखा, तो उनके होश उड़ गए।

आखिर माइनस डिग्री तापमान में  जहां सब कुछ जम जाता है, वहां यह लाल खौफनाक पानी कैसे और क्यों बह रहा है? 100 से भी ज्यादा सालों तक वैज्ञानिक इस डरावने राज को सुलझाने के लिए भटकते रहे, लेकिन अब जाकर बर्फ की गहराइयों में छिपा वो असली सच सामने आ गया है जिसने सबको चौंका दिया है।

‘अंटार्कटिक साइंस’ जर्नल में छपी एक बेहद चौंकाने वाली नई रिसर्च ने इस खूनी पहेली के आखिरी हिस्से को बेपर्दा कर दिया है। वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला है कि टेलर ग्लेशियर के नीचे सदियों से कैद यह हैरान करने वाला लाल पानी आखिर किस अदृश्य ताकत के दबाव में आकर अचानक सतह पर उबलने लगता है। क्या यह कुदरत का कोई खौफनाक करिश्मा है या इसके पीछे कोई गहरा वैज्ञानिक खेल? आइए इस रहस्य की परतों को खोलते हुए समझते हैं इस अद्भुत घटना के पीछे की पूरी कहानी।

क्या है अंटार्कटिका का ‘खूनी झरना’?

यह अनोखा झरना पूर्वी अंटार्कटिका के मैकमर्डो ड्राई वैली (McMurdo Dry Valleys) में टेलर ग्लेशियर के किनारे पर स्थित है, जो पृथ्वी के सबसे ठंडे और सूखे क्षेत्रों में से एक है। इस रहस्यमयी झरने को सबसे पहले साल 1911 में ब्रिटिश टेरा नोवा अभियान के दौरान ऑस्ट्रेलियाई भूवैज्ञानिक थॉमस ग्रिफ़िथ टेलर ने देखा था, जिनके नाम पर इस ग्लेशियर का नाम रखा गया।

शुरुआती दौर में खोजकर्ताओं का मानना था कि पानी का यह गाढ़ा लाल रंग किसी खास तरह के लाल शैवाल के कारण है। लेकिन दशकों के वैज्ञानिक शोध के बाद यह साफ हो गया कि यह रंग ग्लेशियर के नीचे बहने वाले आयरन-युक्त नमकीन पानी की वजह से है।

क्यों लाल होता है इस झरने का पानी?

ग्लेशियर के नीचे छिपा यह पानी आम पानी नहीं है, बल्कि यह एक प्राचीन और अत्यधिक नमकीन घोल। करीब 15 लाख साल पहले जब ग्लेशियर आगे बढ़ रहे थे, तब समुद्र का यह पानी लगभग 400 मीटर गहरी बर्फ के नीचे कैद हो गया था।

जमने से रोकता है नमक: पानी में नमक की भारी मात्रा होने के कारण यह बेहद कम तापमान (-10°C से भी नीचे) में भी बर्फ नहीं बनता और लिक्विड फॉर्म में रहता है।

ऑक्सीजन से रिएक्शन: इस प्राचीन पानी में आयरन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। जैसे ही यह आयरन-युक्त पानी ग्लेशियर की दरारों से बाहर निकलकर हवा के संपर्क में आता है, तो हवा में मौजूद ऑक्सीजन के साथ इसका रिएक्शन हो जाता है। आसान भाषा में कहें तो जैसे लोहे में जंग लगने पर वह लाल-भूरा हो जाता है, ठीक वैसे ही यह पानी हवा लगते ही गहरे लाल रंग में बदल जाता है।

नई रिसर्च में क्या आया सामने?

अब तक वैज्ञानिक यह तो जानते थे कि पानी लाल क्यों है, लेकिन यह पानी इतनी भारी बर्फ को चीरकर अचानक बाहर कैसे आता है, यह एक पहेली थी। इस नई स्टडी ने पहेली के इसी आखिरी हिस्से को सुलझाया है।

वैज्ञानिकों ने साल 2018 में इस झरने से पानी निकलने की घटना का मिलान ग्लेशियर में हुए बदलावों से किया। उन्होंने पाया कि जब झरने से लाल पानी बाहर निकला, ठीक उसी समय ग्लेशियर की सतह में लगभग 15 मिलीमीटर की मामूली गिरावट आई थी और ग्लेशियर की रफ्तार भी कुछ समय के लिए धीमी हो गई थी। इससे यह साबित होता है कि ग्लेशियर की बर्फ में होने वाली मामूली हलचल से नीचे का दबाव कम होता है और वह दबा हुआ पानी नेटवर्क चैनलों के जरिए ऊपर चढ़कर सतह पर आ जाता है।

क्यों खास है यह नई खोज?

इससे पहले किए गए रडार सर्वे में टेलर ग्लेशियर के नीचे दबाव वाले चैनलों का पता चला था, जिससे यह समझना आसान हुआ था कि दुनिया के सबसे ठंडे ग्लेशियर के अंदर पानी तरल रूप में कैसे बह सकता है। अब यह नई खोज सीधे तौर पर ग्लेशियर की मूवमेंट और पानी के बाहर आने के संबंध को प्रमाणित करती है। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि ग्लेशियरों के नीचे पानी कैसे व्यवहार करता है।

Viral Video: मनाली की वादियों में बदली जिंदगी! पहाड़ों में शिफ्ट होते ही हर महीने ₹30,000 की बचत, कॉरपोरेट कपल का वीडियो वायरल

Viral News: दिल्ली, मुंबई, गुरुग्राम या बेंगलुरु जैसे महंगे शहरों की भागदौड़ छोड़कर एक कॉरपोरेट कपल ने जब हिमाचल प्रदेश के मनाली में बसने का फैसला किया, तो उनका मकसद पैसे बचाना नहीं बल्कि सुकून भरी जिंदगी जीना था। लेकिन इस फैसले ने उनकी जिंदगी के साथ-साथ बैंक बैलेंस भी बदल दिया। अब यह कपल हर महीने 30,000 रुपये से ज्यादा की बचत कर रहा है। अंजलि और नमन ने इंस्टाग्राम पर @anjali.aur.naman नाम से अपने अकाउंट के जरिए अपनी जिंदगी में हए बदलाव को लेकर जानकारी दी है।

दोनों रिमोट कॉरपोरेट जॉब करते हैं। उन्होंने बताया कि वे शहर छोड़कर मनाली इसलिए आए ताकि प्रकृति के बीच शांत और संतुलित जीवन जी सकें। उनका कहना है कि पैसे बचाना उनका उद्देश्य नहीं था। लेकिन यह अपने आप होने लगा।

किराए में हुई सबसे बड़ी बचत

शहरों में जहां वे हर महीने ₹45,000 किराया देते थे। वहीं, मनाली में उन्हें सिर्फ ₹28,000 में बेहतर घर मिल गया। यानी केवल किराए में ही ₹17,000 की मासिक बचत होने लगी। रिमोट वर्क की वजह से रोज ऑफिस जाने की जरूरत नहीं रही। इससे हर महीने करीब ₹3,000 का यात्रा खर्च बचने लगा।

कपल ने क्या कहा?

वीडियो में अंजलि कहती हैं, “हमने बिना कोशिश किए ही हर महीने 30,000 रुपये से ज्यादा बचाना शुरू कर दिया। हाय, हम अंजलि और नमन हैं। मनाली में रहने वाला एक कॉर्पोरेट कपल जो रिमोट वर्क करता है। हम यहां पैसे बचाने के लिए नहीं आए थे। बल्कि अपनी कॉर्पोरेट नौकरी करते हुए ‘स्लो ट्रैवल’ (आराम से यात्रा) का अनुभव करने आए थे।”

इसके बाद वह बताती हैं कि हिमालय के इस शहर में बसने के बाद उनके खर्च कैसे बदले। सबसे बड़ी बचत किराए में हुई, जो शहर में 45,000 रुपये से घटकर मनाली में 28,000 रुपये हो गया। इससे उनके रहने का मासिक खर्च 17,000 रुपये कम हो गया।

रिमोट वर्क से किराए का खर्च समाप्त

रिमोट वर्क की वजह से रोजाना आने-जाने का खर्च भी खत्म हो गया। इससे हर महीने लगभग 3,000 रुपये की बचत हुई। इसके अलावा ऑफिस डिनर, कॉफी के लिए बाहर जाना और स्नैक ब्रेक जैसे आम खर्च भी तेजी से कम हुए। इससे उनके महीने के बजट में 7,500 रुपये की और कमी आई।

हालांकि, सबसे बड़ी हैरानी की बात वीकेंड पर घूमने-फिरने के खर्च का खत्म होना था। शहर में रहते हुए यह कपल तेज-तर्रार शहरी जिंदगी से दूर छोटी-छोटी यात्राओं पर हर महीने लगभग 5,000 से 6,000 रुपये खर्च करता था। मनाली आने के बाद उन्हें ऐसे ब्रेक की योजना बनाने की जरूरत महसूस नहीं हुई, क्योंकि प्रकृति और शांत माहौल उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं।

‘पैसे बचाने नहीं, जिंदगी बदलने आए थे’

अंजलि का कहना है, “हमने रिमोट वर्क इसलिए नहीं चुना कि पैसे बचेंगे। बल्कि इसलिए चुना क्योंकि हम अलग तरीके से जीना चाहते थे। बचत तो बस एक बोनस बन गई।”

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सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस

इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोग महानगरों में बढ़ते खर्च, रिमोट वर्क के फायदे और छोटे शहरों में बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर चर्चा कर रहे हैं। कई लोग अब यह मानने लगे हैं कि अगर नौकरी रिमोट हो, तो छोटे शहरों में रहकर बेहतर जीवन और बड़ी बचत दोनों संभव हैं।

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