Maatrubhumi: ‘मातृभूमि’ के सर्टिफिकेशन विवाद की खबरें गलत, सलमान खान फिल्म्स ने पोस्ट शेयर कर रूमर्स पर लगाया फुलस्टॉप

Maatrubhumi: एक दिन पहले ऐसी खबरें आई थीं कि सलमान खान की फिल्म ‘मातृभूमि’ – जो भारतीय सेना और चीनी सैनिकों के बीच 2020 में हुई गलवान घाटी की झड़प पर आधारित है – सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ फ़िल्म सर्टिफ़िकेशन (CBFC) में सर्टिफ़िकेशन की प्रक्रिया से गुज़र रही है। सलमान खान फिल्म्स ने इन दावों को “पूरी तरह से बेबुनियाद” बताते हुए खारिज कर दिया।

प्रोडक्शन हाउस ने इंस्टाग्राम पर एक आधिकारिक बयान जारी किया। इसमें कहा गया, “ऐसे सभी दावे गलत हैं जिनमें कहा गया है कि ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ को CBFC से जुड़ी किसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है या इसके सर्टिफ़िकेशन को रोक दिया गया है। फिल्म को अभी तक सर्टिफ़िकेशन के लिए CBFC के पास जमा ही नहीं किया गया है। इसलिए, ऐसी खबरें पूरी तरह से बेबुनियाद हैं।”

बयान के आखिर में कहा गया, “हम मीडिया संस्थानों और लोगों से अनुरोध करते हैं कि वे बिना पुष्टि की गई जानकारी न फैलाएं। फिल्म से जुड़ी कोई भी आधिकारिक जानकारी केवल सलमान खान फिल्म्स के आधिकारिक चैनलों के माध्यम से ही साझा की जाएगी।”

सूत्रों ने NDTV को कन्फर्म किया है कि ‘मातृभूमि’ फ़िल्म अभी सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ फ़िल्म सर्टिफ़िकेशन (Censor Board) की मंज़ूरी की प्रक्रिया से गुज़र रही है। अंदरूनी सूत्रों ने बताया, “सेंसर बोर्ड से मंज़ूरी मिलने की प्रक्रिया चल रही है, इसलिए इसमें अभी समय लग रहा है। इसे रोका नहीं गया है।” यह फ़िल्म पहले ईद से ठीक पहले 17 अप्रैल को रिलीज़ होने वाली थी। हालांकि, रिलीज़ की तारीख़ आगे बढ़ा दी गई थी और अब इसके अगस्त में रिलीज़ होने की उम्मीद है।

ताज़ा जानकारी के मुताबिक, ऐसा लगता है कि यह फ़िल्म अगस्त में रिलीज़ नहीं हो पाएगी। ‘मातृभूमि’ का निर्देशन अपूर्व लाखिया ने किया है और इसे सलमान खान फिल्म्स बैनर के तहत सलमा खान ने प्रोड्यूस किया है। पहले इस फ़िल्म का नाम ‘बैटल ऑफ़ गलवान’ था और इसमें चित्रांगदा सिंह भी हैं।

रिलीज़ से पहले ही, चीन में कुछ लोगों ने इस फ़िल्म की आलोचना की थी। ऑनलाइन टीज़र आने के बाद, चीनी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म वीबो पर कई यूज़र्स ने फ़िल्म पर गलवान घाटी झड़प से जुड़ी घटनाओं को गलत तरीके से दिखाने का आरोप लगाया। जनवरी में, विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत में फ़िल्म बनाने से जुड़े मामलों को “संबंधित अधिकारी” देखते हैं और इस तरह के प्रोजेक्ट्स में विदेश मंत्रालय की “कोई भूमिका” नहीं होती है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से उन खबरों पर टिप्पणी करने को कहा गया जिनमें दावा किया गया था कि मंत्रालय ने छह साल पहले गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प पर आधारित फिल्म पर “आपत्ति जताई” है। उन्होंने कहा, “हमें पता है कि इस तरह की फिल्म बनाने की योजना है। जैसा कि आप जानते हैं, भारत में फिल्म निर्माण से जुड़े मामलों को संबंधित अधिकारी देखते हैं। और जहां तक ​​हमारी बात है, विदेश मंत्रालय की ऐसी फिल्मों या प्रोजेक्ट्स में कोई भूमिका नहीं होती है।”

सूत्रों ने बताया, “हाल ही में फिल्म का नाम ‘बैटल ऑफ गलवान’ से बदलकर ‘मातृभूमि’ कर दिया गया है। उसी के अनुसार बदलाव किए जा रहे हैं। संभावना है कि फिल्म की रिलीज में और देरी हो सकती है। इसके अगस्त में स्वतंत्रता दिवस के आसपास रिलीज होने की उम्मीद है।”

फिल्म के मेकर्स ने 27 दिसंबर, 2025 को सलमान खान के 60वें जन्मदिन पर फिल्म का टीज़र जारी किया था। फिल्म में सलमान खान 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू का किरदार निभा रहे हैं। उन्होंने बॉर्डर पर डिसइंगेजमेंट एग्रीमेंट लागू करते समय हुई झड़प के दौरान भारतीय सैनिकों का नेतृत्व किया था। ‘मातृभूमि’ में अभिलाष चौधरी और अंकुर भाटिया भी अहम भूमिकाओं में नज़र आएंगे और इस फिल्म का संगीत हिमेश रेशमिया ने दिया है।

Cockroaches removal tips: मानसून में कॉकरोच का आतंक खत्म करेंगे ये 5 घरेलू उपाय, किचन रहेगा साफ

बारिश का मौसम अपने साथ ठंडक तो लाता है, लेकिन नमी बढ़ते ही घरों में कॉकरोच और दूसरे कीड़े-मकौड़ों की परेशानी भी बढ़ जाती है। खासकर किचन में इनका दिखना चिंता की वजह बन जाता है, क्योंकि ये खाने-पीने की चीजों को दूषित कर सकते हैं। ऐसे में हर बार केमिकल स्प्रे का इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है। घर में मौजूद कुछ आसान चीजों की मदद से भी कॉकरोच को दूर रखा जा सकता है। अगर आप भी मानसून में इस समस्या से परेशान हैं, तो कुछ सरल घरेलू उपाय अपनाकर किचन को साफ-सुथरा और कॉकरोच मुक्त रखने में मदद मिल सकती है।

बारिश में क्यों बढ़ जाते हैं कॉकरोच?

मानसून के दौरान नालियों, सीलन और नमी की वजह से कॉकरोच तेजी से घरों में घुसने लगते हैं। खासकर किचन में खाना और पानी आसानी से मिलने के कारण ये सबसे ज्यादा वहीं दिखाई देते हैं।

आटा और बोरिक पाउडर का आसान उपाय

एक कटोरी आटे में 2 चम्मच चीनी, 1 चम्मच हल्दी और 2 चम्मच बोरिक पाउडर मिलाकर पेस्ट तैयार करें। इसे किचन के कोनों, स्लैब के किनारों, दीवारों की दरारों और उन जगहों पर लगाएं, जहां से कॉकरोच आते हैं। इसकी गंध और मिश्रण कॉकरोच को दूर रखने में मदद कर सकता है।

नीम का स्प्रे करेगा कमाल

नीम का तेल या नीम का पानी एक स्प्रे बोतल में भर लें और किचन समेत घर के कोनों में छिड़काव करें। नीम की तेज खुशबू और प्राकृतिक गुण कॉकरोच के साथ कई दूसरे कीड़ों को भी दूर रखने में मदद करते हैं।

तेजपत्ता भी है असरदार

कुछ तेजपत्तों को पीसकर गर्म पानी में मिला लें। इस मिश्रण को ठंडा होने के बाद घर के उन हिस्सों में स्प्रे करें, जहां कॉकरोच ज्यादा नजर आते हैं। तेजपत्ते की महक इन्हें दूर रखने का प्राकृतिक तरीका मानी जाती है।

लौंग की खुशबू से भागेंगे कॉकरोच

लौंग को हल्का पीसकर किचन और घर के कोनों में छिड़क दें। इसकी तेज सुगंध कॉकरोच को पसंद नहीं होती, इसलिए वे इन जगहों से दूर रहने लगते हैं। इससे अन्य छोटे कीड़े-मकौड़ों की समस्या भी कम हो सकती है।

साफ-सफाई है सबसे बड़ा बचाव

अगर आप चाहते हैं कि कॉकरोच बार-बार घर में न आएं, तो किचन को हमेशा साफ रखें। रातभर जूठे बर्तन सिंक में न छोड़ें, खाने की चीजों को ढककर रखें और डस्टबिन को नियमित रूप से खाली व साफ करें। छोटी-छोटी सफाई की आदतें कॉकरोच की समस्या को काफी हद तक कम कर सकती हैं।

तेज धूप और पसीने में भी स्टाइलिश दिखना हुआ आसान, ट्राई करें ये कूल और सिंपल हेयर स्टाइल्स

घर की ‘एनर्जी’ बदल देंगी ये खास धूप, जानें किस धुएं में छिपा है क्या राज

Incense that purifies the home and fosters positivity. An image showing the traditional practice of burning incense

Burning incense at home: हिंदू परंपरा में घर के भीतर धूप और दीप प्रज्वलित करना केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि एक गहरा विज्ञान है। हमारे पूर्वज जानते थे कि खास जड़ी-बूटियों को जलाने से निकलने वाला धुआं घर की नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर सकारात्मकता का संचार करता है। वास्तु दोष, पितृ दोष और गृह-कलह जैसी समस्याओं को जड़ से खत्म करने के लिए 'धूप' देना सबसे सरल और असरदार तरीका है।

 

1. गुग्गुल और लोबान: पारलौकिक और दैवीय कृपा

2. कपूर: दोषों का काल

3. गुड़-घी का देसी नुस्खा: ऑक्सीजन और शांति का स्रोत

4. षोडशांग और दशांग धूप: रोगों से सुरक्षा का कवच

5. धूप देने से क्या-क्या मिलेंगे फायदे?

6. धूप देने के खास नियम (न करें ये गलतियां):

 

आइए जानते हैं, घर को स्वर्ग बनाने वाली धूप के अलग-अलग प्रकार और उनके लाभ:

 

1. गुग्गुल और लोबान: पारलौकिक और दैवीय कृपा

गुग्गुल: इसकी मीठी सुगंध तनाव को कम करती है। अक्सर इसे गुरुवार और रविवार को जलाया जाता है ताकि घर की वायु शुद्ध रहे।

 

लोबान: इसे जलाने से मानसिक शक्ति बढ़ती है, लेकिन इसके नियम कड़े होते हैं। माना जाता है कि यह सूक्ष्म शक्तियों को आकर्षित करता है, इसलिए इसे विशेषज्ञों की सलाह पर ही जलाएं।

 

2. कपूर: दोषों का काल

कपूर जलाना अक्षय पुण्य का काम माना गया है। वैज्ञानिक रूप से इसकी गंध बैक्टीरिया और वायरस का नाश करती है। जिस घर में नियमित कपूर जलता है, वहां पितृ दोष या वास्तु दोष टिक नहीं पाते।

 

3. षोडशांग और दशांग धूप: रोगों से सुरक्षा का कवच

षोडशांग धूप: यह सबसे खास मानी गई है। इसमें चंदन, कपूर, जटामांसी और गुग्गुल जैसी 16 आयुर्वेदिक वस्तुओं का मिश्रण होता है। इसे उपले पर जलाने से घर में आकस्मिक दुर्घटनाओं और बीमारियों का भय कम होता है।

 

दशांग धूप: यह 10 विशेष सामग्रियों (जैसे गुड़, राल, जटामांसी) से बनती है। इसकी खुशबू घर के सदस्यों के बीच शांति और सामंजस्य बनाए रखती है।

 

4. गुड़-घी का देसी नुस्खा: ऑक्सीजन और शांति का स्रोत

अगर आप कुछ खास नहीं कर सकते, तो जलते हुए कंडे (उपले) पर बराबर मात्रा में गुड़ और घी रखें। यह मिश्रण वातावरण में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाता है और आपके दिमाग के तनाव को तुरंत शांत कर देता है।

 

5. धूप देने से क्या-क्या मिलेंगे फायदे?

वास्तु सुधार: घर के कोनों में दबी नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकल जाती है।

 

मानसिक सेहत: घर के सदस्यों का मन शांत रहता है और बीमारियां दूर रहती हैं।

 

दैवीय आशीर्वाद: धूप से देवता और पितृ प्रसन्न होते हैं, जिससे जीवन की बाधाएं स्वतः समाप्त होने लगती हैं।

 

6. धूप देने के खास नियम (न करें ये गलतियां):

कब दें धूप? यदि रोजाना संभव न हो, तो अमावस्या, पूर्णिमा, तेरस और चौदस को सुबह-शाम धूप जरूर दें। याद रखें, सुबह की धूप देवताओं के लिए और शाम की पितरों के लिए होती है।

 

सही दिशा: धूप देने का सबसे श्रेष्ठ स्थान ईशान कोण (North-East) है। कोशिश करें कि इसका धुआं घर के हर कमरे में पहुंचे।

 

शांति का माहौल: जब धूप का धुआं घर में फैल रहा हो, तब तेज संगीत न बजाएं और कम से कम बात करें। यह समय आत्म-चिंतन और शांति का है।

 

पवित्रता: हमेशा स्नान के बाद और घर की साफ-सफाई करने के बाद ही धूप प्रज्वलित करें।

 

संक्षेप में कहा जाए तो 'धूप' केवल धुआं नहीं, बल्कि आपके घर की 'एनर्जी' को रिचार्ज करने का प्राचीन माध्यम है। आज ही अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार धूप का चयन करें और घर में खुशहाली का अनुभव करें।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

 

खामेनेई के अंतिम संस्कार में बेटे मुजतबा नहीं पहुंचे:100 से ज्यादा देशों के नेता शामिल; रूस, चीन, भारत ने टॉप लीडर्स नहीं भेजे

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम विदाई की रस्में शुरू हो गई हैं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान समेत देश की टॉप लीडरशिप शुक्रवार को तेहरान में खामेनेई को श्रद्धांजलि देने पहुंचा था। इस दौरान सुरक्षा वजहों से अयातुल्लाह अली खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई शामिल नहीं हुए। अंतिम संस्कार के कार्यक्रमों में 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। हालांकि रूस, चीन, भारत और तुर्किये जैसे देशों के टॉप लीडर्स ने इससे दूरी बरती। ईरान की तरफ से न्योता भेजे जाने के बावजूद इन्होंने अपने निचले स्तर के प्रतिनिधियों को भेजा। हालांकि पाकिस्तान, इराक, आर्मेनिया, ताजिकिस्तान, जॉर्जिया जैसे देशों के टॉप लीडर्स समारोह में पहुंचे। वहीं, भारत की तरफ से आधिकारिक तौर पर विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन शामिल हुए। खामेनेई की अंतिम यात्रा की 5 तस्वीरें… पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

E20 Petrol: क्या सच में एथेनॉल वाले पेट्रोल से कम हो जाता है गाड़ी का माइलेज और खराब होता है इंजन? इस डिटेल FAQ में हर सवाल का जवाब

देश में इस समय एथेनॉल और E20 पेट्रोल की काफी चर्चा हो रही है। E20 फ्यूल का मतलब है ऐसा पेट्रोल जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत साधारण पेट्रोल मिला होता है। देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर कई तरह की अफवाहें और भ्रामक दावे सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। कोई कह रहा है कि E20 पेट्रोल से इंजन खराब हो जाता है, तो कोई दावा कर रहा है कि इससे गाड़ी का माइलेज बहुत कम हो जाता है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि E20 बनाने में हजारों लीटर पानी बर्बाद होता है।

वहीं इन दावों पर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने विस्तृत जानकारी जारी करते हुए कहा है कि ये बातें पूरी तरह गलत, बेबुनियाद और वैज्ञानिक तथ्यों से परे हैं। मंत्रालय ने ऑटोमोबाइल अनुसंधान संस्थानों और वाहन उद्योग से जुड़ी कई रिपोर्टों का हवाला देते हुए इन अफवाहों को खारिज किया है।

  • E20 पेट्रोल क्या है और इसकी इतनी चर्चा क्यों हो रही है?

E20 पेट्रोल ऐसा ईंधन है, जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल मिलाया जाता है। इथेनॉल एक जैव ईंधन (बायोफ्यूल) है, जिसे गन्ना, मक्का और अतिरिक्त चावल जैसी कृषि फसलों से तैयार किया जाता है। सरकार का कहना है कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, वाहनों से होने वाले प्रदूषण को घटाना और देश में जैव ईंधन के उत्पादन को बढ़ावा देना है।

भारत ने दिसंबर 2025 तक पूरे देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य हासिल कर लिया, जबकि यह लक्ष्य पहले 2030 तक पूरा करना था। इसके बाद सोशल मीडिया पर ई20 पेट्रोल को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि इसका गाड़ी के इंजन, माइलेज, वारंटी और लंबे समय तक वाहन के प्रदर्शन पर क्या असर पड़ेगा।

  • क्या E20 पेट्रोल से इंजन खराब होता है या माइलेज कम हो जाता है?

केंद्र सरकार ने उन दावों को गलत बताया है, जिनमें कहा जा रहा है कि E20 पेट्रोल से इंजन खराब हो जाता है या गाड़ी का माइलेज बहुत कम हो जाता है। सरकार ने बताया कि इस विषय पर ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई), इंडियन ऑयल, भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (देहरादून) और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) ने मिलकर अध्ययन किया था। इसमें अलग-अलग तरह के वाहनों पर E20 पेट्रोल की जांच की गई।

स्टडी के अनुसार, कारों पर 40,000 किलोमीटर और दोपहिया वाहनों पर 20,000 किलोमीटर तक किए गए टेस्च में इंजन की एफिशिएंसी, गाड़ी स्टार्ट होने या धातु और प्लास्टिक के पुर्जों पर कोई बड़ी समस्या नहीं मिली। हालांकि, कुछ पुराने मॉडल की गाड़ियों में रबर के कुछ हिस्सों और गैस्केट को पहले बदलने की जरूरत पड़ सकती है।

केंद्र सरकार का कहना है कि ई20 पेट्रोल, सामान्य पेट्रोल की तुलना में कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन जैसे प्रदूषकों का उत्सर्जन कम करता है। सरकार के अनुसार, इथेनॉल की ऑक्टेन क्षमता अधिक होने के कारण ई20 के लिए तैयार किए गए वाहनों में इंजन की नॉकिंग कम होती है, गाड़ी की रफ्तार बेहतर होती है और ड्राइविंग का अनुभव भी अच्छा रहता है।

माइलेज को लेकर सरकार ने कहा है कि E20 पेट्रोल से बहुत ज्यादा माइलेज घटने की बातें सही नहीं हैं। मंत्रालय के मुताबिक, किसी भी गाड़ी का माइलेज सिर्फ ईंधन पर नहीं, बल्कि चलाने के तरीके, टायर में सही हवा, समय पर सर्विस और एयर कंडीशनर के इस्तेमाल जैसी कई बातों पर निर्भर करता है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी कहा कि रेसिंग कारों में लंबे समय से इथेनॉल का इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि इससे गाड़ी का प्रदर्शन बेहतर होता है और इंजन की नॉकिंग कम होती है। उन्होंने माना कि माइलेज में हल्की कमी आ सकती है, लेकिन इसके बारे में पहले से ही साफ जानकारी दी गई है।

  • क्या E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से गाड़ी का बीमा या वारंटी खत्म हो जाएगी?

केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से गाड़ी का बीमा या कंपनी की वारंटी खत्म नहीं होती। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, बीमा कंपनियों और वाहन बनाने वाली कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि अगर वाहन कंपनी के तय मानकों के अनुसार ई20 पेट्रोल के लिए उपयुक्त है, तो इस ईंधन के इस्तेमाल से बीमा या वारंटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार ने सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) का भी हवाला दिया है। सियाम के अनुसार, ई20 पेट्रोल के अनुकूल वाहनों पर कंपनी की वारंटी पहले की तरह लागू रहेगी और ग्राहकों को किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

  • क्या इथेनॉल बनाने में बहुत ज़्यादा पानी का इस्तेमाल होता है?

सरकार का कहना है कि एक लीटर इथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी लगने का दावा सही नहीं है। सरकार के मुताबिक, धान की खेती में इस्तेमाल होने वाले पूरे पानी को इथेनॉल उत्पादन से जोड़ना गलत है, क्योंकि धान और गेहूं की खेती सबसे पहले देश की खाद्य जरूरतों को पूरा करने के लिए की जाती है। जब जरूरत से ज्यादा चावल बच जाता है, तभी उसका इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में किया जाता है।

सरकार का यही कहना गन्ने के मामले में भी है। उसके अनुसार, पहले देश में चीनी की जरूरत पूरी की जाती है और उसके बाद ही अतिरिक्त गन्ने या उससे बने कच्चे माल का उपयोग इथेनॉल बनाने के लिए किया जाता है।

सरकार ने यह भी बताया कि अब इथेनॉल बनाने में मक्के को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है, क्योंकि मक्का उगाने में धान के मुकाबले काफी कम पानी लगता है। फिलहाल इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल में मक्के की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है।

सरकार के अनुसार, इथेनॉल बनाने की प्रक्रिया के दौरान एक लीटर इथेनॉल तैयार करने में आमतौर पर केवल 3 से 5 लीटर पानी की जरूरत होती है। इसके अलावा कई आधुनिक कारखानों में पानी को दोबारा इस्तेमाल करने की तकनीक अपनाई जाती है, जिससे पानी की खपत और भी कम हो जाती है।

  • EBP प्रोग्राम से क्या फायदे हुए हैं?

सरकार का कहना है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) योजना से देश को आर्थिक और पर्यावरण दोनों स्तर पर बड़े फायदे हुए हैं। सरकार के मुताबिक, साल 2014-15 के बाद इस योजना की वजह से 1.90 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई गई है। साथ ही किसानों को 1.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है।

सरकार के अनुसार, इस योजना से करीब 930 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का उत्सर्जन कम हुआ है और 310 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा कच्चे तेल की जगह इथेनॉल का इस्तेमाल किया गया है। इससे पेट्रोलियम पर देश की निर्भरता घटाने में भी मदद मिली है।

सरकार ने यह भी बताया कि इथेनॉल उत्पादन की सालाना क्षमता 2013-14 में करीब 38 करोड़ लीटर थी, जो अब बढ़कर लगभग 2,000 करोड़ लीटर हो गई है। सरकार का कहना है कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत से ज्यादा इथेनॉल मिलाने का फैसला तभी लिया जाएगा, जब वैज्ञानिक जांच, परीक्षण और वाहन कंपनियों से चर्चा के बाद संबंधित विशेषज्ञ संस्था की मंजूरी मिल जाएगी।

सरकार जल्द नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम का कर सकती है ऐलान, जानिए क्या है पूरा प्लान

सरकार नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम का ऐलान कर सकती है। मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने यह बताया। इस बारे में आधिकारिक घोषणा दो हफ्ते के अंदर हो सकती है। सूत्रों ने बताया कि इस स्कीम के तहत 1,000 टन से ज्यादा सोना आने की उम्मीद है।

नई स्कीम में ज्वेलर्स होंगे कलेक्शन पार्टनर्स

देशभर के ज्वेलर्स को नई स्कीम में बतौर ‘कलेक्शन पार्टनर्स’ शामिल किया जा सकता है। उन्हें परिवारों से गोल्ड डिपॉजिट लेने की इजाजत होगी। पहले सिर्फ बैंकों को इसकी इजाजत थी। ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) ने कहा, “प्रस्तावित फ्रेमवर्क के तहत नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम में बतौर कलेक्शन पार्टनर्स शामिल किया जा सकता है।”

गोल्ड के इंपोर्ट में कमी लाने में मिल सकती है मदद

देश में ज्वेलर्स से जुड़ी संस्थाओं ने सरकार से गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम में बदलाव करने की गुजारिश की है। गोल्ड का इंपोर्ट घटाने के लिए उनका जोर ऐसे सॉल्यूशंस पर है, जिसका खराब असर इस सेक्टर से जुड़े लोगों की रोजीरोटी पर नहीं पड़े। अगर देश में परिवारों में रखा 5 फीसदी सोना भी मॉनेटाइज होता है तो इससे 90 अरब डॉलर की लिक्विडिटी मुमकिन हो सकती है।

पीएम मोदी ने की थी सोना नहीं खरीदने की अपील

हाल में प्रधानमंत्री ने देश के लोगों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील की थी। इंडिया दुनिया में सोने की सबसे ज्यादा खपत वाले देशों में शामिल है। भारत में ज्वेलरी के साथ ही सुरक्षित निवेश के लिए लोग सोना खरीदते हैं। ज्वेलरी के खरीदने से सोने का ज्यादा इस्तेमाल नहीं हो पाता है। इसलिए गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम के जरिए काफी सोना आ सकता है।

2015 में हुई थी गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम की शुरुआत

सरकार ने 2015 में गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम (GMS) की शुरुआत की थी। इसका मकसद सोने के इंपोर्ट में कमी लाकर करेंट अकाउंट डेफिसिट को घटाना था। इनवेस्टर्स को फिजिकल गोल्ड खरीदने की जगह गोल्ड स्कीम का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। इनवेस्टर्स अपना सोना बैंक लॉकर्स में डिपॉजिट कर 2.25 से 2.5 फीसदी इंटरेस्ट कमा सकते हैं। विड्रॉल के समय इनवेस्टर्स के पास फिजिकल गोल्ड या उसके बराबर पैसा वापस लेने की इजाजत थी।

पुरानी स्कीम में 10 सालों में सिर्फ 38 टन सोना आया

स्कीम की शुरुआत के 10 साल बाद तक सिर्फ 38 टन सोना ही आ सका। यह इंडिया में परिवारों के पास रखे कुल सोना का बहुत कम हिस्सा है। इंडिया में परिवारों के पास 25,000 टन सोना होने का अनुमान है। सरकार ने स्कीम में मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म डिपॉजिट रोक दी थी। इस स्कीम में इनवेस्टर्स को इंटरेस्ट का पेमेंट सरकार करती है। इस वजह से यह स्कीम सरकार के लिए नुकसानदेह रही।

पुरानी स्कीम में सरकार को उठाना पड़ा लॉस

ट्रेडबुल्स सिक्योरिटीज के भाविक पटेल ने कहा, “आखिर में सरकार को इस स्कीम में लॉस उठाना पड़ा। सरकार को सोने की कीमतों में आए तेजी का बोझ उठाना पड़ता था। साथ ही उसे इनवेस्टर्स को सालाना 2 फीसदी इंटरेस्ट चुकाना पड़ता था।” यह स्कीम हेज्ड (Hedged) नहीं थी, जिससे विड्रॉल के समय सरकार को सोने की कीमतों में हुई वृद्धि का बोझ उठाना पड़ता था।

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इन वजहों से असफल रही पुरानी स्कीम

इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि स्ट्रक्चरल वजहों से गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम विफल रही। AIJGF ने कहा कि इस स्कीम में दिलचस्पी दिखाने के लिए बैंकों को किसी तरह के इनसेंटिव की व्यवस्था नहीं थी। नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम से गोल्ड के इंपोर्ट पर निर्भरता में कमी आ सकीत है। साथ ही घरों में बेकार पड़े सोने का इस्तेमाल इकोनॉमी के हित में हो सकेगा।

Gold Price Today: चीन क्यों धड़ाधड़ खरीदने लगा सोना जबकि भारत में गोल्ड पर्चेज की रफ्तार पर लगा ब्रेक! अंदर की खबर ये है

भारत में सोने की डिमांड में कमी आने का सीजन शुरू हो चुका है। कीमतें 3 महीने के निचले स्तर से रिकवर हुई हैं, जिससे महंगे दाम पर खरीदी से बचा जा रहा है। हालांकि खरीद एकदम ठंडी भी नहीं है। रॉयटर्स के मुताबिक, ज्वेलर्स खरीदी कर रहे हैं लेकिन अस्थिर कीमतों को लेकर सावधान भी हैं। निकट अवधि में कोई बड़ा त्योहार भी नहीं है और न ही शादी का सीजन। लिहाजा गोल्ड की कम डिमांड वाला दौर शुरू हो गया है। वहीं दूसरी ओर चीन में डिमांड बढ़ी है।

हाल ही में मंगलवार को देश में सोने की कीमत 1,40,450 रुपये प्रति 10 ग्राम तक गिर गई थी, जो 27 मार्च के बाद का सबसे निचला स्तर था। लेकिन अब रिबाउंड देखने को मिला है। MCX पर 3 जुलाई को सोने का वायदा भाव 148069 रुपये प्रति 10 ग्राम के हाई तक गया। रॉयटर्स के मुताबिक, जून महीने में सोने की कीमत लगभग 8.4 प्रतिशत कमजोर हुई। मार्च महीने के बाद पहली बार किसी महीने में सोने में गिरावट देखी गई।

अंतरराष्ट्रीय कीमतें

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव की बात करें तो यह पिछले 5 हफ्तों में पहली बार बढ़त की ओर बढ़ रहा है। हाजिर सोने की कीमत 4,184.75 डॉलर प्रति औंस है। वहीं अगस्त में डिलीवरी वाला US गोल्ड फ्यूचर्स 4,197.20 डॉलर प्रति औंस पर है। अमेरिका में नौकरियों का डेटा उम्मीद से कमजोर रहने से फेडरल रिजर्व द्वारा निकट अवधि में बेंचमार्क ब्याज दरें बढ़ाए जाने को लेकर चिंता कम हुई है। इससे सोने की कीमत को बल मिला। अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट के ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स का कहना है कि जून में नॉन-फार्म पेरोल में 57,000 नौकरियां बढ़ीं।

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चीन में 2 डॉलर प्रति डिस्काउंट पर ट्रेडिंग

चीन में इस हफ्ते सोना अंतरराष्ट्रीय कीमत के मुकाबले कभी समान भाव पर तो कभी 2 डॉलर प्रति औंस तक सस्ते में बिक रहा था। पिछले हफ्ते यह 3 से 7 डॉलर प्रति औंस तक डिस्काउंट पर बिक रहा था। डिस्काउंट कम होना इस बात का संकेत है कि खरीदार पहले की तुलना में थोड़ा ज्यादा सक्रिय हुए हैं, इसलिए विक्रेताओं को ज्यादा छूट देने की जरूरत नहीं पड़ी।

Nagabandham-The Secret Treasure Review: मंदिरों के रहस्य, रायल सीन्स और रोंगटे खड़े कर देने वाली मैथोलॉजिकल एक्शन फिल्म है ‘नागबंधम’

फिल्म- ‘नागबंधम – द सीक्रेट ट्रेजर’

कलाकार- विराट कर्णा, नभा नतेश, महेश मांजरेकर, जगपति बाबू, मुरली शर्मा, रामचंद्र राजू, अनसूया भारद्वाज, सरन्या पोनवन्नन, ऋषभ साहनी, दक्षा नागरकर

निर्देशक- अभिषेक नामा

रेटिंग- 3/5

Nagabandham-The Secret Treasure Review: भारतीय सिनेमा में जब भी पौराणिक रहस्य, प्राचीन मंदिरों की अनकही कहानियां और बड़े स्तर पर रचे गए रोमांच की बात होती है, दर्शकों की उम्मीदें अपने आप बढ़ जाती हैं। ‘नागबंधम – द सीक्रेट ट्रेजर’ ऐसी ही एक फिल्म है जो दर्शकों को एक ऐसे संसार में लेकर जाती है जहां रहस्य, इतिहास, सनातन परंपराएं और छिपी हुई शक्तियां एक साथ जीवंत होती नजर आती हैं।

यह फिल्म सिर्फ खजाने की तलाश की कहानी नहीं है, बल्कि सनातन परंपराओं से जुड़े उन रहस्यों की यात्रा है, जिनके बारे में अक्सर केवल कथाएं सुनने को मिलती हैं।यह कहानियां अब तक फिल्मों में नजर नहीं आती थी।

फिल्म की कहानी

फिल्म की कहानी रहस्य के साथ शुरू होती है और धीरे-धीरे अपने बड़े कैनवास को दर्शकों के सामने खोलती है। एक तरफ अतीत में छिपे ऐसे रहस्य हैं, जो वर्षों से दुनिया से दूर हैं, तो दूसरी ओर वर्तमान में कुछ ऐसे लोग हैं जिनकी जिंदगी इन रहस्यों से अनजाने में जुड़ जाती है। रुद्र की जिंदगी अचानक एक दर्दनाक मोड़ लेती है, जहां परिवार पर हुए हमले के बाद उसके सामने ऐसे सवाल खड़े हो जाते हैं, जिनके जवाब सामान्य दुनिया में नहीं बल्कि सदियों पुराने इतिहास में छिपे हैं। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, नागबंधम, ब्रह्मकमल और प्राचीन मंदिरों के रहस्य धीरे-धीरे खुलते जाते हैं। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह सिर्फ एक खजाने की खोज तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उसे धार्मिक मान्यताओं, इतिहास और रहस्यमयी घटनाओं से जोड़कर एक बड़े अनुभव में बदल देती है।

निर्देशन

निर्देशक अभिषेक नामा ने फिल्म को केवल कहानी के स्तर पर नहीं बल्कि विजुअल स्केल पर भी बड़ा बनाने का प्रयास किया है। फिल्म के कई दृश्य ऐसे हैं जो थिएटर के बड़े पर्दे पर प्रभाव छोड़ते हैं। खास तौर से विशाल मंदिर, राजसी महलों जैसे सेट्स, गुफाओं की रहस्यमयी दुनिया और ऐतिहासिक वातावरण फिल्म को एक अलग पहचान देते हैं। सेट डिज़ाइन और आर्ट डायरेक्शन उल्लेखनीय है फिल्म की सिनेमैटोग्राफी इसकी बड़ी ताकत बनकर सामने आती है। कैमरा कई दृश्यों को भव्यता के साथ प्रस्तुत करता है। एक्शन दृश्यों को बड़े स्तर पर डिजाइन किया गया है और कई सीक्वेंस दर्शकों को चौंकाने की क्षमता रखते हैं। खासकर युद्ध और संघर्ष वाले दृश्य काफी प्रभावी बन पड़े हैं।

परफॉर्मेंस

रुद्र के किरदार में विराट कर्णा पूरी फिल्म का मजबूत केंद्र दिखाई देते हैं। एक्शन दृश्यों में उनका आत्मविश्वास और भावनात्मक दृश्यों में उनकी संवेदनशीलता दोनों प्रभाव छोड़ती हैं। विशेष रूप से उनके नागा रूप वाले दृश्य आकर्षक लगते हैं। पार्वती के रूप में नभा नतेश अपने किरदार में सहज दिखाई देती हैं और स्क्रीन पर अच्छा प्रभाव छोड़ती हैं। जगपति बाबू अपने अनुभव के साथ किरदार में गंभीरता लेकर आते हैं और उनकी स्क्रीन प्रेजेंस हमेशा की तरह मजबूत है। महेश मांजरेकर अपने सीमित दृश्यों में भी प्रभाव पैदा करने में सफल रहते हैं। मुरली शर्मा एक बार फिर अपने संतुलित और स्वाभाविक अभिनय से किरदार को मजबूती देते हैं। रामचंद्र राजू अपने नकारात्मक किरदार में प्रभावी दिखाई देते हैं और कहानी में खतरे का एहसास बनाए रखते हैं।

ऋषभ साहनी फिल्म में एक सरप्राइज पैकेज साबित होते हैं। उनकी बॉडी लैंग्वेज, आक्रामकता और स्क्रीन प्रेजेंस विरोधी किरदार को दमदार बनाती है। अनसूया भारद्वाज, सरन्या पोनवन्नन और दक्षा नागरकर भी अपने-अपने हिस्से में अच्छा योगदान देती हैं।

‘नागबंधम – द सीक्रेट ट्रेजर’ सिर्फ एक एडवेंचर फिल्म नहीं बल्कि रहस्य, इतिहास, सनातन परंपराओं और बड़े पैमाने पर प्रस्तुत किए गए सीन संसार का मिक्चर है। फिल्म की भव्यता, विशाल सेट्स, रहस्य से भरी कहानी, हैरतअंगेज एक्शन और कलाकारों का प्रभावी अभिनय इसे एक अलग अनुभव बनाते हैं। यदि आपको प्राचीन मंदिरों के रहस्य, छिपे खजानों की कहानियां और बड़े कैनवास पर बनी विजुअली शानदार फिल्में पसंद हैं, तो ‘नागबंधम’ थिएटर में देखनी चाहिए।

Maatrubhumi: सलमान खान की ‘मातृभूमि’ पर मंडराया खतरा, टाइटल बदलने के बावजूद सेंसर बोर्ड ने रिलीज पर लगाई रोक

Maatrubhumi: सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ फ़िल्म सर्टिफ़िकेशन (CBFC) ने सलमान खान की फ़िल्म ‘मातृभूमि’ (जिसका पहले नाम ‘बैटल ऑफ़ गलवान’ था) के लिए क्लीयरेंस सर्टिफ़िकेट को अगले आदेश तक रोक दिया है। भारतीय सेना और चीनी सैनिकों के बीच 2020 में हुई गलवान घाटी की झड़प पर आधारित यह फ़िल्म पहले ईद से ठीक पहले 17 अप्रैल को रिलीज़ होने वाली थी। हालांकि, रिलीज़ की तारीख़ को आगे बढ़ा दिया गया था और इसके अगस्त में रिलीज़ होने की उम्मीद थी।

NDTV के अनुसार, फ़िल्म अगस्त की तारीख़ पर रिलीज नहीं हो पाएगी। ‘मातृभूमि’ का निर्देशन अपूर्व लाखिया ने किया है और इसे सलमान खान फ़िल्म्स बैनर के तहत सलमा खान ने प्रोड्यूस किया है। इसमें चित्रांगदा सिंह भी हैं। फिल्म रिलीज होने से पहले ही चीन में कुछ वर्गों ने इसकी आलोचना की है।

टीजर ऑनलाइन प्रसारित होने के बाद, चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो पर कई उपयोगकर्ताओं ने फिल्म पर गलवान घाटी संघर्ष से संबंधित घटनाओं को गलत तरीके से प्रस्तुत करने का आरोप लगाया। जनवरी में, विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत में फिल्म निर्माण से संबंधित मामलों का निपटारा “संबंधित अधिकारियों” द्वारा किया जाता है, और विदेश मंत्रालय की इस या इसी तरह की परियोजनाओं में “कोई भूमिका नहीं” है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से उन खबरों पर टिप्पणी करने को कहा गया, जिनमें दावा किया गया था कि मंत्रालय ने छह साल पहले गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प पर आधारित फिल्म पर “आपत्ति जताई” है। उन्होंने कहा, “हमें पता है कि इस तरह की फिल्म बनाने की योजना है। जैसा कि आप जानते हैं, भारत में फिल्म निर्माण से जुड़े मामलों को संबंधित अधिकारी देखते हैं। और जहां तक ​​हमारी बात है, विदेश मंत्रालय की ऐसी फिल्मों या प्रोजेक्ट्स में कोई भूमिका नहीं होती है।”

सूत्रों ने बताया, “हाल ही में फिल्म का टाइटल ‘बैटल ऑफ गलवान’ से बदलकर ‘मातृभूमि’ कर दिया गया है। उसी के अनुसार बदलाव किए जा रहे हैं। संभावना है कि फिल्म की रिलीज में और देरी हो सकती है। इसे अगस्त में स्वतंत्रता दिवस के आसपास रिलीज किए जाने की उम्मीद है।”

फिल्म के निर्माताओं ने सलमान खान के 60वें जन्मदिन के मौके पर 27 दिसंबर, 2025 को फिल्म का टीज़र जारी किया था। इस फ़िल्म में सलमान खान 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफ़िसर कर्नल संतोष बाबू का किरदार निभा रहे हैं। उन्होंने बॉर्डर पर डिसइंगेजमेंट एग्रीमेंट लागू करते समय हुई झड़प के दौरान भारतीय सैनिकों का नेतृत्व किया था।

‘मातृभूमि’ में अभिलाष चौधरी और अंकुर भाटिया भी अहम भूमिकाओं में नज़र आएंगे। इस फ़िल्म का संगीत हिमेश रेशमिया ने दिया है। सलमान खान को आख़िरी बार ए.आर. मुरुगाडोस की फ़िल्म ‘सिकंदर’ में देखा गया था, जिसमें रश्मिका मंदाना भी हैं।

ऐप से बंद हुआ ई रिक्शा तो रोने लगा ये मुस्लिम ड्राइवर, इसके बाद बाइक पर बैठे लड़के ने किया दिल जीतने वाला काम

सोशल मीडिया पर वायरल ये इंस्टा रील लोगों का ध्यान तेजी से खींच रही है, जिसमें एक ई-रिक्शा ड्राइवर बीच सड़क पर अचानक वाहन बंद होने के बाद परेशान और भावुक नजर आता है। ये छोटा-सा वीडियो अब बड़ी बहस का कारण बन चुका है, क्योंकि इसमें मजाक के नाम पर एक मेहनत करने वाले ड्राइवर की रोजी-रोटी पर असर पड़ता दिख रहा है। कई यूजर्स इसे सिर्फ प्रैंक नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही मान रहे हैं, जो सड़क पर खतरनाक स्थिति भी पैदा कर सकती है। यही वजह है कि यह रील सोशल मीडिया पर लगातार शेयर की जा रही है और लोग इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

वायरल वीडियो

सोशल मीडिया पर वायरल इस इंस्टा रील में एक ई-रिक्शा ड्राइवर का दर्द साफ झलकता है, जो बीच सड़क पर अचानक अपना वाहन बंद होने से परेशान है। एक बाइक सवार युवक उसके पास आकर पूछता है, “अंकल आप रो क्यों रहे हो…”, जिस पर ड्राइवर बताता है कि किसी ने उसके चीनी ऐप से उसकी तिर्री बंद कर दी, जिससे उसकी रोज़ी-रोटी और आज की कमाई का नुकसान हो गया। यह वीडियो लोगों के बीच चिंता और गुस्से का कारण बन गया है क्योंकि इसमें “प्रैंक” के नाम पर ड्राइवर की कमाई और सुरक्षा दोनों से खिलवाड़ होता दिख रहा है।

क्या है पूरा मामला?

वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि कुछ लोग एक मोबाइल ऐप के जरिए ई-रिक्शा को बीच सड़क पर रोक देते हैं। यह सब “मजाक” या प्रैंक के नाम पर किया जा रहा है, लेकिन इसका असर ड्राइवर की रोजी-रोटी पर पड़ रहा है। कई लोग इसे खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना हरकत बता रहे हैं।

BAT-BMS App क्या है?

BAT-BMS एक असली बैटरी मैनेजमेंट ऐप है, जिसे Shenzhen Grenergy Technology ने बनाया है। इसका काम बैटरी की चार्जिंग, वोल्टेज, तापमान और हेल्थ को मॉनिटर करना होता है। ये आमतौर पर बैटरी सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, न कि किसी वाहन को रोकने के लिए।

कैसे किया जा रहा है प्रैंक”?

वायरल क्लिप्स में लोग ई-रिक्शा के पास जाकर Bluetooth के जरिए बैटरी सिस्टम से कनेक्ट करते हैं। कुछ ही सेकंड में वाहन की पावर बंद हो जाती है। यह कोई बड़ा हैक नहीं है, बल्कि उन बैटरी सिस्टम की कमजोरी का फायदा है जिनमें सुरक्षा पासवर्ड नहीं होता।

कौन से वाहन हैं ज्यादा खतरे में?

यह समस्या हर ई-रिक्शा में नहीं होती। खतरा केवल उन्हीं वाहनों में है जिनमें:

  • Bluetooth-enabled lithium battery लगी हो
  • BMS सिस्टम अनसिक्योर्ड हो
  • और 10–15 मीटर के अंदर कनेक्शन संभव हो

पुराने lead-acid बैटरी वाले ई-रिक्शा इस समस्या से सुरक्षित रहते हैं।

ड्राइवरों पर असर और बढ़ता खतरा

इस तरह के प्रैंक से ई-रिक्शा ड्राइवर बीच सड़क पर फंस जाते हैं, जिससे उनकी कमाई रुक जाती है और ट्रैफिक में भी खतरा पैदा होता है। यह सिर्फ मजाक नहीं बल्कि एक गंभीर सुरक्षा और आर्थिक समस्या बनता जा रहा है।

जिम्मेदारी और जरूरी सुधार

इस पूरे मामले में जिम्मेदारी कंपनियों और डीलरों की है। जरूरी है कि बैटरी सिस्टम को मजबूत पासवर्ड और सिक्योरिटी फीचर्स के साथ बेचा जाए, ताकि ऐसे गलत इस्तेमाल को रोका जा सके और ड्राइवरों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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