Advit Jewels IPO Listing: बढ़ गई पोर्टफोलियो की चमक, ₹138 के शेयरों से मिला करीब 37% का लिस्टिंग गेन

Advit Jewels IPO Listing: 100% हाथ से गहने बनाने वाली यानी हर पीस मास्टरपीस बनाने वाली अद्वित ज्वेल्स के शेयरों की आज घरेलू मार्केट में धांसू एंट्री हुई। इसके आईपीओ को भी निवेशकों का जबरदस्त रिस्पांस मिला था और ओवरऑल इसे 212 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹138 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE पर इसकी ₹187.00 और NSE पर ₹188.90 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को करीब 37% का लिस्टिंग गेन (Advit Jewels Listing Gain) मिला। लिस्टिंग के बाद शेयर और ऊपर चढ़े। उछलकर BSE पर यह ₹190.00 (Advit Jewels Share Price) पर पहुंच गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 37.68% मुनाफे में हैं।

Advit Jewels IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

अद्वित ज्वैल्स का ₹165 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 23-25 जून तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 212.63 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 174.98 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 536.38 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 95.30 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 1,19,68,000 नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹65.00 करोड़ वर्किंग कैपिटल की बढ़ी हुई जरूरतों और ₹65.00 करोड़ कर्ज हल्का करने और बाकी पैसे आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Advit Jewels के बारे में

अद्वित ज्वेल्स जयपुर की एक ज्वेलरी कंपनी है जो “Rambhajo” ब्रांड नाम के तहत कुंदन, पोलकी, डायमंड और स्टडेड (रत्न जड़े) जैसे हाथ से बनी बेहतरीन ज्वेलरी बनाने में माहिर है। यह मुख्य रूप से बी2बी मॉडल पर काम करती है लेकिन खास ऑर्डर पर बनने वाली ज्वेलरी के लिए बी2सी सर्विसेज भी देती है। चूंकि इसकी ज्वेलरी पूरी तरह हाथ से बनाई जाती है, जिससे हर पीस एक मास्टरपीस होता है। वित्त वर्ष 2025 में इसकी कुल कमाई का 81.63% हिस्सा बी2बी सेगमेंट से और 18.37% हिस्सा बी2सी सेगमेंट से आया। इसकी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट जयपुर में है, जो 3डी प्रिंटर और कास्टिंग यूनिट जैसी आधुनिक मशीनों से लैस है। इससे सोना पिघलाने से लेकर पॉलिशिंग और क्वालिटी चेक तक की पूरी प्रक्रिया इन-हाउस यानी कंपनी के अंदर ही पूरी की जा सकती है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2023-25 में कंपनी का शुद्ध मुनाफा 56% के CAGR से ₹25.37 करोड़ और रेवेन्यू 63% के सीएजीआर (कंपाउंड एनुअरल ग्रोथ रेट) से बढ़कर ₹124.94 करोड़ पर पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष 2026 के अप्रैल-दिसंबर 2025 में कंपनी को ₹25.44 करोड़ का शुद्ध मुनाफा और ₹123.80 करोड़ का टोटल इनकम हासिल हुआ था। दिसंबर 2025 के आखिरी में कंपनी पर ₹64.92 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹51.64 करोड़ पड़े थे।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Share Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

Share Market Live Update: वॉल स्ट्रीट की रात भर की रैली जारी रहने के बाद, ग्लोबल मार्केट से मिले-जुले संकेतों को देखते हुए, बुधवार को भारतीय स्टॉक मार्केट के सुस्त नोट पर खुलने की उम्मीद है। शुरुआती ट्रेड में एशियाई इक्विटी में मिला-जुला कारोबार हुआ, जबकि US मार्केट बढ़त के साथ बंद हुए, जो जियोपॉलिटिकल और मैक्रोइकोनॉमिक अनिश्चितताओं के बावजूद लगातार उम्मीद को दिखाता है।

मंगलवार को, घरेलू बेंचमार्क बिकवाली के दबाव के बीच नीचे बंद हुए, जिसमें निफ्टी 50 23,900 के निशान से नीचे फिसल गया। BSE सेंसेक्स 249.70 पॉइंट या 0.33% गिरकर 76,478.67 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 80.50 पॉइंट या 0.34% गिरकर 23,865.75 पर बंद हुआ।

पुनरोद्धार की उम्मीदों के बीच कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज के शेयरों में तेजी,लेकिन एक्सपर्ट्स को इसकी सफलता को लेकर शक, जानिए क्यों

Calcutta Stock Exchange Revival : वेस्ट बंगाल सरकार ने एक सदी पुराने कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज (CSE) को फिर से शुरू करने का इरादा ज़ाहिर किया है। इसके बाद अनलिस्टेड शेयर प्लेटफॉर्म्स पर कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज के शेयरों में ज़बरदस्त तेज़ी आई है। हालांकि,मार्केट एक्सपर्ट्स को इस एक्सचेंज के फिर से चालू होने की संभावना पर अभी भी शक है। एक्सचेंज के अनलिस्टेड शेयरों की कीमत 21 जून को लगभग 1,500 रुपये थी। 30 जून तक बढ़कर यह लगभग 1,800 रुपये पर पहुंच गई। कुछ प्लेटफॉर्म पर इस शेयर की कीमत 2,000 रुपये के करीब भी बताई जा रही है। हालांकि,इसका ट्रेडिंग वॉल्यूम बहुत कम है।

एक्सचेंज की प्रति शेयर बुक वैल्यू 3,000 रुपये से ज़्यादा है। बता दें कि 22 जून को पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री डॉ. स्वपन दासगुप्ता ने राज्य के बजट में CSE को फिर से शुरू करने की घोषणा की थी।

उम्मीद है कि राज्य सरकार के प्रस्ताव के बाद,CSE के अधिकारी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (SEBI)के पास जमा किए गए एक्सचेंज के वॉलंटरी एग्जिट (स्वेच्छा से बाहर निकलने) के आवेदन को वापस ले लेंगे। एक्सचेंज ने फरवरी 2025 में वॉलंटरी एग्जिट के लिए आवेदन किया था,जिसके बाद SEBI ने एग्जिट प्रोसेस के तहत एक वैल्यूअर नियुक्त किया था। हालांकि,इस आवेदन पर अभी कोई अंतिम आदेश जारी नहीं किया गया है।

यह तेजी सरकार के रिवाइवल प्रपोजल को लेकर बनी उम्मीद दिखाती है। हालांकि,बाजार के जानकारों का कहना है कि किसी भी रिवाइवल के लिए SEBI की मंज़ूरी और बड़ी रेगुलेटरी,टेक्नोलॉजिकल और कमर्शियल दिक्कतों से पार पाने की जरूरत होगी।

क्या हैं बड़ी चुनौतियां?

बाजार जानकारों का कहना है कि आज किसी स्टॉक एक्सचेंज को फिर से शुरू करने के लिए सिर्फ़ रेगुलेटरी मंज़ूरी से कहीं ज्यादा की ज़रूरत होती है। कम से कम 100 करोड़ रुपये की नेट वर्थ की शर्त पूरी करने के अलावा,एक आधुनिक एक्सचेंज के लिए एडवांस्ड टेक्नोलॉजी प्लेटफ़ॉर्म,सर्विलांस सिस्टम, साइबर सिक्योरिटी क्षमताएं,क्लियरिंग और सेटलमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर और खास तौर पर ट्रेंड स्टाफ़ की ज़रूरत होती है।

हालांकि कम से कम पूंजी की शर्त को पूरा करना शायद सबसे बड़ी बाधा न हो,लेकिन क्लियरिंग कॉरपोरेशन बनाना या क्लियरिंग की व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती है। मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार,CSE ने पहले देश के प्रमुख क्लियरिंग कॉरपोरेशन के साथ क्लियरिंग व्यवस्थाओं पर करार करने का प्रयास किया था,लेकिन वह कोशिश सफल नहीं हो पाई।

हालांकि,सबसे बड़ी बाधा लिक्विडिटी यानी अलग-अलग प्राइस लेवल पर पर्याप्त खरीदारों और विक्रेताओं की मौजूदगी है,ताकि आसानी से और कुशलता से ट्रेडिंग हो सके।

बाजार जानकारों का कहना है कि मजबूत टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर होने के बावजूद,कुछ मौजूदा एक्सचेंज भी ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बड़े इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर और ब्रोकर आम तौर पर ऐसे एक्सचेंज को पसंद करते हैं जहां लिक्विडिटी सबसे ज़्यादा होती है। इसके चलते किसी दोबारा शुरू किए गए एक्सचेंज के लिए बड़ी ट्रेडिंग एक्टिविटी को आकर्षित करना मुश्किल हो सकता है।

ANMI के नेशनल प्रेसिडेंट कमलेश श्रॉफ का कहना है कि भारत के कैपिटल मार्केट अब टेक्नोलॉजी और लिक्विडिटी पर आधारित इकोसिस्टम बन गए हैं। भले ही कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज की विरासत सम्मान के काबिल है,लेकिन इसे फिर से शुरू करने का आधार पुरानी शान के बजाय भविष्य की ज़रूरतें होनी चाहिए। अगर यह SME फाइनेंसिंग,रीजनल एंटरप्रेन्योरशिप,नए एसेट क्लास या मार्केट इनोवेशन के क्षेत्र में अपनी खास जगह बना पाता है,तो यह भारत की विकास यात्रा में अहम योगदान दे सकता है।

CSE के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO माधव रेड्डी कहते हैं कि इस एक्सचेंज को फिर से सफल बनाने के लिए,उसे एक ऐसा आकर्षक वैल्यू प्रपोज़िशन देना होगा जो अनोखा हो,किफायती हो और मौजूदा प्लेयर्स से काफी अलग हो। अगर इसमें साफ़ तौर पर कोई अलग औक खास बात नहीं होगी,तो इसके सफल पुनरुद्धार की संभावनाएं सीमित ही रहेंगी।

इसे बंद करना भी साबित हुआ मुश्किल

अजीब बात यह है कि इस एक्सचेंज को बंद करना भी उसे फिर से शुरू करने जितना ही मुश्किल साबित हुआ है। CSE ने इस साल की शुरुआत में SEBI की एग्जिट पॉलिसी के तहत स्वेच्छा से बाहर निकलने(वॉलंटरी एग्जिट)के लिए आवेदन किया था और इसके बाद रेगुलेटर ने एक वैल्यूअर नियुक्त किया। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि SEBI की 2012 की एग्जिट पॉलिसी के तहत,जो स्टॉक एक्सचेंज स्वेच्छा से बाहर निकलना चाहता है,उसे एग्जिट प्रोसेस पूरी होने से पहले ब्रोकर्स की ओर से आए दावों और देनदारियों का निपटारा करना होगा। मार्केट एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि ये देनदारियां कुछ सौ करोड़ रुपये तक हो सकती हैं।

एक्सर्ट्स आगे कहते हैं कि हालांकि SEBI कुछ रेगुलेटरी बकाया राशि माफ़ कर सकता है,लेकिन कानूनी जुर्माने सरकारी बकाया राशि के दायरे में आते हैं और उन्हें अकेले SEBI माफ़ नहीं कर सकता। इससे एग्ज़िट की प्रक्रिया और भी जटिल हो जाती है।

फिलहाल,CSE के अनलिस्टेड शेयरों में तेजी राज्य के रिवाइवल प्रपोज़ल को लेकर बनी उम्मीद दिखाती है,लेकिन जानकारों का कहना है कि एक्सचेंज का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या वह NSE और BSE के दबदबे वाले बाजार में लिक्विडिटी लाने में सक्षम एक अलग बिजनेस प्लेटफ़ॉर्म बना पाता है या नहीं।

क्यों बंद हुआ CSE?

1923 में स्थापित कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज में अप्रैल 2013 के बाद से इक्विटी ट्रेडिंग नहीं हुई है। SEBI ने मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों के लिए ज़रूरी नियमों का पालन न करने के कारण इस एक्सचेंज पर ट्रेडिंग रोक दी थी। रेगुलेटर ने इसका कारण ऑपरेशनल और रेगुलेटरी नियमों का पालन न करना बताया था। साथ ही,CSE काट्रेडिंग वॉल्यूम धीरे-धीरे NSE और BSE की ओर शिफ्ट हो गया,क्योंकि ये दोनों एक्सचेंज बेहतर टेक्नोलॉजी,देश भर में कनेक्टिविटी और काफी ज़्यादा लिक्विडिटी की सुविधा देते हैं।

जब ब्रोकर्स और इन्वेस्टर्स ने ऐसे एक्सचेंज को प्राथमिकता दी जहां बेहतर मार्केट और कीमतों का सही पता लगाने की सुविधा थी,तो CSE में ट्रेडिंग लगभग खत्म हो गई। हालांकि एक्सचेंज ने कानूनी रास्ते अपनाए और बाद में SEBI के एग्जिट फ्रेमवर्क के तहत स्वेच्छा से बाहर निकलने की कोशिश की। एक दशक से भी ज़्यादा समय से यहां कोई एक्टिव इक्विटी ट्रेडिंग नहीं हुई है।

 

 

 

Market Outlook : लाल निशान में बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 1 जुलाई को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Sensex में 300 अंकों का उछाल, Nifty भी 24000 के पार, निवेशकों पर डेढ़ लाख करोड़ रुपये की बारिश

Stock Market Rally: कच्चे तेल की नरमी और एक कारोबारी दिन पहले की तेज गिरावट के बाद निचले स्तर पर खरीदारी के चलते आज शुरुआती कारोबार में मार्केट में रौनक दिखी। चूंकि आज निफ्टी के साथ-साथ बैंक निफ्टी समेत एनएसई के अन्य इंडेक्स के डेरिवेटिव्स और स्टॉक्स के F&O (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) की भी मंथली एक्सपायरी है तो मार्केट में तेज हलचल दिख रही है। घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो सेंसेक्स और निफ्टी ग्रीन और रेड जोन में झूलने लगे। ब्रोडर लेवल पर मिडकैप में थोड़ा दबाव है लेकिन स्मॉलकैप स्पेस में रौनक दिख रही है। निफ्टी मिडकैप 100 में हल्की गिरावट है तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 में आधे फीसदी से थोड़ी ही कम बढ़त है।

सेक्टरवाइज मार्केट पर ऑटो, आईटी और मेटल सेक्टर दबाव बना रहे हैं जिनके निफ्टी इंडेक्स में फिलहाल आधे फीसदी से अधिक की गिरावट है। हालांकि दूसरी तरफ पीएसयू बैंक, प्राइलेट बैंक और रियल्टी स्टॉक्स इसे ऊपर लाने की कोशिश में तो है लेकिन इनके निफ्टी इंडेक्स में आधे फीसदी से भी कम बढ़त है।

ओवरऑल इस रस्साकसी में आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप डेढ़ लाख करोड़ रुपये से अधिक बढ़ गया यानी निवेशकों की दौलत में डेढ़ लाख करोड़ से अधिक का इजाफा हुआ है। इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 09:16 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 240.82 प्वाइंट्स यानी 0.31% के उछाल के साथ 76,969.19 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 62.75 प्वाइंट्स यानी 0.26% के उछाल के साथ 24,009.00 पर है। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 308.99 प्वाइंट्स चढ़कर 77,037.36 तक तो निफ्टी भी 89.30 प्वाइंट्स उछलकर 24,035.55 तक पहुंच गया।

₹1.73 लाख करोड़ बढ़ी निवेशकों की दौलत

एक कारोबारी दिन पहले यानी 29 जून 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,72,74,146.70 करोड़ था। आज यानी 30 जून 2026 को यह बढ़कर ₹4,74,47,694.61 करोड़ पर पहुंच गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹1,73,547.91 करोड़ का इजाफा हुआ है।

Sensex के 12 स्टॉक्स ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें फिलहाल 12 स्टॉक्स ग्रीन जोन में हैं। सबसे अधिक तेजी फिलहाल मारुति, एक्सिस बैंक और सन फार्मा में है। वहीं दूसरी तरफ सबसे अधिक गिरावट इंफोसिस, टाटा स्टील और जोमैटो की एटर्नल में है। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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57 शेयर एक साल के हाई पर

बीएसई पर आज फिलहाल 2371 शेयरों की ट्रेडिंग हो रही है। इसमें 1528 शेयर फिलहाल मजबूत हैं तो 691 में गिरावट है जबकि 152 में कोई बदलाव नहीं दिख रहा। इसके अलावा 57 शेयर एक साल के हाई और 18 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए। वहीं 42 शेयर अपर सर्किट पर पहुंच गए तो 48 शेयर लोअर सर्किट पर आ गए।

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स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

आज इंट्रा-डे में इन स्टॉक्स पर रखें नजर

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Watch: 30 जून को फोकस में रहेंगे ये 10 स्टॉक्स, दिख सकती है बड़ी हलचल

Stocks to Watch: शेयर बाजार में मंगलवार, 30 जून को कई कंपनियों के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है। कुछ कंपनियों ने बड़े ऑर्डर हासिल किए हैं, तो कुछ ने फंड जुटाने, डिविडेंड, अधिग्रहण और मैनेजमेंट से जुड़े अहम ऐलान किए हैं। इससे इन 10 शेयरों में हलचल दिख सकती है।

HDFC Bank और Axis Bank

प्राइवेट सेक्टर के Axis Bank के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) पुनीत शर्मा ने इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक, पुनीत HDFC Bank अपने अगले CFO बन सकते हैं। वह मौजूदा CFO श्रीनिवासन वैद्यनाथन की जगह ले सकते हैं।

BSE

स्टॉक एक्सचेंज BSE 1 जनवरी 2027 से अपने इंटरनेशनल मार्केट डेटा बिजनेस को खुद संभालेगी। अभी यह काम Deutsche Börse AG करती है। इससे विदेशी ग्राहकों को BSE की सेवाएं सीधे मिलेंगी और कंपनी को अपने ग्लोबल मार्केट डेटा कारोबार पर ज्यादा नियंत्रण मिलेगा।

Sterling & Wilson Renewable Energy

रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी Sterling & Wilson Renewable Energy को विदेश में करीब 56 करोड़ डॉलर का ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर उसकी 50:50 जॉइंट वेंचर कंपनी को मिस्र के West Minya Solar Project के लिए मिला है।

Afcons Infrastructure

इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Afcons Infrastructure ने FY26 के लिए प्रस्तावित 2 रुपये प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड की रिकॉर्ड डेट 23 जुलाई 2026 तय की है। कंपनी की 50वीं AGM 30 जुलाई को होगी। शेयरधारकों की मंजूरी मिलने पर डिविडेंड का भुगतान 28 अगस्त 2026 तक कर दिया जाएगा।

RITES

सरकारी इंजीनियरिंग कंपनी RITES ने Container Corporation of India (CONCOR) के साथ एक समझौता (MoU) किया है। इसके तहत दोनों कंपनियां लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी (PMC) सेवाओं में साथ मिलकर काम करेंगी।

Bandhan Bank

प्राइवेट सेक्टर के बैंक Bandhan Bank ने बताया कि उसके चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) और की मैनेजेरियल पर्सन राजीव मंत्री ने इस्तीफा दे दिया है। बैंक को उनका इस्तीफा 29 जून 2026 को मिला।

Yes Bank

प्राइवेट सेक्टर के बैंक Yes Bank के बोर्ड ने 7,500 करोड़ रुपये तक के योग्य सिक्योरिटीज जारी कर फंड जुटाने और 8,500 करोड़ रुपये तक के डेट सिक्योरिटीज जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके लिए शेयरधारकों और नियामकीय मंजूरी की जरूरत होगी।

Jagsonpal Pharmaceuticals

फार्मा कंपनी Jagsonpal Pharmaceuticals ने Aequitas Healthcare Pvt. Ltd. में 85% हिस्सेदारी खरीदने के लिए शेयर परचेज एग्रीमेंट (SPA) किया है। इस अधिग्रहण से कंपनी घरेलू दवा बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहती है।

Juniper Hotels

होटल कंपनी Juniper Hotels ने बताया कि उसके चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) तरुण जेटली ने इस्तीफा दे दिया है। वह 15 जुलाई 2026 से अपने पद से हट जाएंगे।

SJVN

सरकारी पावर कंपनी SJVN ने Gujarat Urja Vikas Nigam Ltd (GUVNL) के साथ तीन जलविद्युत परियोजनाओं से ग्रीन पावर सप्लाई के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) पर हस्ताक्षर किए हैं। हिमाचल प्रदेश की धौलासिद्ध (66 मेगावाट), लुहरी स्टेज-I (210 मेगावाट) और सुन्नी डैम (382 मेगावाट) परियोजनाओं की कुल क्षमता 658 मेगावाट होगी।

Axis Bank के CFO पुनीत शर्मा ने दिया इस्तीफा, HDFC Bank के बन सकते हैं नए CFO

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