मानसून में खुला जन्नत का दरवाजा देखिये हरियाली की चादर ओढे, इंडिया के स्कॉटलैंड और स्विट्ज़रलैंड!

मानसून का मौसम भारत की खूबसूरती को एक अलग ही रंग दे देता है। बादलों से ढकी पहाड़ियां, हरे-भरे जंगल और गिरते झरने कई जगहों को यूरोप जैसा बना देते हैं। भारत में ऐसी कई जगहें हैं जहां का नजारा देखकर लगता है जैसे हम किसी विदेशी देश में आ गए हों। यहां का मौसम, प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण हर ट्रैवलर को अट्रैक्ट करता है। आइये जानते है उन जगहों के बारे में भारत का स्वर्ग है मानसून सीजन में:

कूनूर, तमिलनाडु — शांत पहाड़ी जगह

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कूनूर ऊटी से ज्यादा शांत और नेचुरल जगह है जहां चाय बागानों के बीच सुकून मिलता है। मॉनसून में यहां की हरियाली बहुत गहरी और ताज़गी भरी लगती है। यह जगह कम भीड़ और ज्यादा नेचर के लिए जानी जाती है। होटल ₹1,500 से ₹5,000 प्रति रात और खाना ₹400 से ₹1,000 प्रति दिन होता है। डॉल्फिन नोज व्यू यहां का सबसे खूबसूरत पॉइंट है।

महाबलेश्वर, महाराष्ट्र — स्विस जैसा नज़ारा

Sanskar

महाबलेश्वर झरनों, घाटियों और स्ट्रॉबेरी फार्म के लिए बहुत मशहूर है। मॉनसून में यहां हरियाली और बढ़ जाती है और पूरा इलाका बहुत सुंदर लगने लगता है। यह जगह फैमिली और कपल ट्रिप दोनों के लिए बेस्ट है। रिसॉर्ट ₹2,000 से ₹8,000 प्रति रात और खाना ₹500 से ₹1,500 प्रति दिन होता है। एलेफैंट्स हेड पॉइंट यहां का सबसे पॉपुलर व्यू है।

लैंसडाउन, उत्तराखंड — शांत और साफ हवा

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लैंसडाउन भीड़ से दूर एक शांत और साफ हवा वाली जगह है। मॉनसून में यहां की हरियाली और बादल इसे बहुत खूबसूरत बना देते हैं। यह जगह सेना से जुड़ी होने के कारण काफी साफ और व्यवस्थित रहती है। होटल ₹1,200 से ₹5,000 प्रति रात और खाना ₹300 से ₹1,000 प्रति दिन होता है। आर्मी म्यूजियम और ट्रेकिंग यहां के मेन अट्रैक्शन हैं।

तवांग, अरुणाचल प्रदेश — पहाड़ों का जादू

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तवांग ऊंचाई पर स्थित एक बेहद खूबसूरत जगह है जहां बर्फीले पहाड़ और बौद्ध संस्कृति देखने को मिलती है। मॉनसून में यहां बादलों के बीच का माहौल बहुत रहस्यमय और शांत लगता है। यह जगह एडवेंचर और स्पिरिचुअल ट्रैवल दोनों के लिए खास है। होटल ₹2,500 से ₹9,000 प्रति रात और खाना ₹600 से ₹1,800 प्रति दिन होता है। तवांग मोनेस्ट्री और सेला पास यहां के मेन अट्रैक्शन हैं।

कूर्ग, कर्नाटक — स्कॉटलैंड की फीलिंग

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कूर्ग को भारत का स्कॉटलैंड कहा जाता है क्योंकि यहां कॉफी के बागान, धुंध से ढके पहाड़ और झरनों का बेहद सुंदर नजारा मिलता है। मॉनसून में यह जगह और भी हरी-भरी हो जाती है और बादलों के बीच घूमना एक अलग ही एक्सपीरियंस देता है। यहां की ठंडी हवा और शांत माहौल मन को सुकून देता है। ठहरने के लिए होमस्टे और रिसॉर्ट ₹2,000 से ₹8,000 प्रति रात में मिल जाते हैं और खाने का खर्च लगभग ₹500 से ₹1,500 प्रति दिन होता है। यहां कूर्गी खाना और ताज़ी कॉफी का स्वाद जरूर लेना चाहिए।

मुन्नार, केरल — मिनी स्विट्जरलैंड

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मुन्नार अपनी चाय बागानों से ढकी पहाड़ियों और ठंडी हवा के लिए जाना जाता है। मॉनसून में बादलों के बीच चलना और हरियाली का नजारा इसे बेहद खास बना देता है। यहां की घाटियां और धुंध भरा मौसम बहुत रोमांटिक फील देता है। होटल और रिसॉर्ट ₹1,500 से ₹7,000 प्रति रात में मिल जाते हैं और खाने का खर्च ₹400 से ₹1,200 प्रति दिन होता है। यहां चाय म्यूजियम और एलेफैंट सफारी का एक्सपीरियंस लेना बहुत यादगार होता है।

ऊटी, तमिलनाडु — इंग्लिश गार्डन जैसी फीलिंग

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ऊटी अपनी झील, बॉटनिकल गार्डन और टॉय ट्रेन के लिए मशहूर है। मॉनसून में यहां की हरियाली और ठंडी हवा इसे और भी खूबसूरत बना देती है। यहां ब्रिटिश समय की झलक आज भी देखने को मिलती है। ठहरने का खर्च ₹1,800 से ₹6,000 प्रति रात और खाने का खर्च ₹400 से ₹1,200 प्रति दिन होता है। यह जगह फैमिली ट्रिप और रोड जर्नी के लिए बहुत पॉपुलर है।

शिलांग, मेघालय — ईस्ट का स्कॉटलैंड

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शिलांग में झरने, पहाड़ और धुंध भरे रास्ते इसे यूरोप जैसा फील देते हैं। मॉनसून में यहां का मौसम बहुत फिल्मी और रहस्यमय लगता है। हर तरफ हरियाली और पानी की आवाजें मन को रोक लेती हैं। यहां ठहरने का खर्च ₹1,500 से ₹6,500 प्रति रात और खाने का ₹400 से ₹1,000 प्रति दिन होता है। एलिफैंट फॉल्स और उमियम लेक यहां के मेन अट्रैक्शन हैं।

कसौली, हिमाचल प्रदेश — शांत हिल स्टेशन

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कसौली एक छोटा लेकिन बहुत शांत हिल स्टेशन है जहां मॉनसून में बादल और हरियाली बहुत सुंदर लगती है। यहां की सड़कों पर हल्की बारिश और ठंडी हवा एक रोमांटिक माहौल बनाती है। यह जगह भीड़ से दूर सुकून चाहने वालों के लिए परफेक्ट है। होटल ₹2,000 से ₹7,000 प्रति रात और खाना ₹500 से ₹1,200 प्रति दिन होता है। सनसेट पॉइंट और ट्रेल्स यहां बहुत फेमस हैं।

पांडिचेरी — फ्रेंच रिवेरा फील

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पांडिचेरी में फ्रेंच आर्किटेक्चर और समुद्र का मेल इसे यूरोप जैसा बनाता है। मॉनसून में बीच और कैफे का माहौल बहुत खूबसूरत लगता है। यहां की गलियों में साइकिल चलाना और समुद्र किनारे घूमना बहुत खास एक्सपीरियंस है। ठहरने का खर्च ₹2,500 से ₹10,000 प्रति रात और खाने का ₹600 से ₹2,000 प्रति दिन होता है। कैफे हॉपिंग और बीच वॉक यहां बहुत पॉपुलर हैं।

भारत के ये सभी मानसून डेस्टिनेशन ट्रैवलर को हरियाली, बादल और झरनों का अनोखा एक्सपीरियंस कराते हैं। ये जगहें सिर्फ घूमने के लिए नहीं, बल्कि सुकून और यादगार पलों के लिए भी बेहतरीन हैं। अगर आप नेचर और शांति पसंद करते हैं तो ये ट्रिप आपके लिए परफेक्ट है। यदि आपको भी कभी मौका मिले तो अगली बार अपनी ट्रिप की प्लानिंग में इन जगहों को जरूर शामिल करें, क्योंकि यहां का एक्सपीरियंस हमेशा याद रहने वाला होता है।

Vaibhav Sooryavanshi: इंग्लैंड सीरीज में नहीं होगा वैभव सूर्यवंशी का डेब्यू? BCCI ने दिया ये बड़ा संकेत

वैभव सूर्यवंशी टीम इंडिया के लिए पहला मैच कब खेलेंगे? भारतीय क्रिकेट फैंस के बीच ये मिलियन डॉलर का सवाल बना हुआ है। अब भारत और इंग्लैंड का दूसरा टी20 मैच 4 जुलाई को मैंचेस्टर में खेला जाएगा। इन सबके बीच BCCI के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने टीम मैनेजमेंट के उस फैसले का समर्थन किया है, जिसमें वैभव सूर्यवंशी को अभी तक इंटरनेशनस क्रिकेट में पदार्पण का मौका नहीं दिया गया है। उनका कहना है कि जब सही समय आएगा, तब वैभव को जरूर मौका मिलेगा।

भारतीय क्रिकेट टीम के गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल ने प्रेस कांफ्रेंस की और मीडिया के सवालों का जवाब दिया। उन्होंने भी साफतौर पर इस बात का संकेत दे दिया है कि अभी भी वैभव सूर्यवंशी को डेब्यू का मौका शायद नहीं मिलेगा और टीम इंडिया संजू सैमसन को बैक करेगी।

वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू पर BCCI ने तोड़ी चुप्पी

15 साल के वैभव सूर्यवंशी को आईपीएल 2026 में शानदार प्रदर्शन के बाद पहली बार भारतीय टीम में जगह मिली थी। उन्होंने पूरे सीजन में 237.30 के स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा था। हालांकि, टीम में चुने जाने के बावजूद उन्हें अब तक अंतिम एकादश में खेलने का मौका नहीं मिला है। आयरलैंड के खिलाफ सीरीज और इंग्लैंड के खिलाफ बारिश से प्रभावित पहले टी20 मैच में भी वह बाहर बैठे रहे। टीम प्रबंधन फिलहाल टॉप ऑर्डर में संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा और ईशान किशन की मौजूदा जोड़ी पर ही भरोसा जता रहा है।

भारतीय टीम प्रबंधन का कहना है कि वह उस टीम संयोजन में कोई बदलाव नहीं करना चाहता, जिसने भारत को 2026 का टी20 विश्व कप जिताया था। इसी वजह से युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को अभी इंतजार करने के लिए कहा गया है। हालांकि, कप्तान श्रेयस अय्यर और मुख्य कोच गौतम गंभीर के इस फैसले की कई लोग आलोचना भी कर रहे हैं। इस मामले पर भारतीय क्रिकेट बोर्ड के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने कहा कि वैभव बेहद प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं और उन्होंने आईपीएल में अपने प्रदर्शन से यह साबित भी किया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने टीम प्रबंधन और कोच के खिलाफ कई टिप्पणियां देखी हैं, लेकिन अंतिम फैसला कप्तान और कोच ही लेते हैं। राजीव शुक्ला ने कहा कि टीम मैनेजमेंट लगातार हालात पर नजर रखे हुए है। जैसे ही सही मौका मिलेगा, वैभव सूर्यवंशी को भारतीय टीम की ओर से खेलने का अवसर जरूर दिया जाएगा।

भारतीय क्रिकेट बोर्ड के एक अधिकारी ने कहा कि टीम चयन को लेकर टीम मैनेजमेंट की आलोचना करना सही नहीं है। उनका कहना है कि युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को कब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मौका देना है, इसका फैसला ड्रेसिंग रूम में मौजूद कप्तान, कोच और टीम प्रबंधन पर ही छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा, “ऐसे फैसले टीम प्रबंधन बेहतर तरीके से ले सकता है। इसलिए इस मुद्दे पर बेवजह की चर्चा और आलोचना करने की कोई जरूरत नहीं है।”

कल का मौसम 4 जुलाई: राजस्थान-MP से यूपी-बिहार, बंगाल तक मौसम का रौद्र रूप, IMD ने इन 25 से ज्यादा जगहों पर भारी बारिश का अलर्ट दिया

देश भर में दक्षिण-पश्चिम मानसून अपने पूरे शबाब पर आ चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक मानसून की उत्तरी सीमा इस समय जामनगर, उदयपुर, अजमेर, झुंझुनू, हिसार और बठिंडा से होकर गुजर रही है। उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे उत्तरी ओडिशा व पश्चिम बंगाल के तटों पर एक कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय है। इसके साथ ही समुद्र तल पर दक्षिण गुजरात से कर्नाटक तट तक ऑफ-शोर ट्रफ और मध्य क्षोभमंडल में पश्चिमी विक्षोभ बना हुआ है। इन मजबूत मौसमी प्रणालियों के असर की वजह से मौसम विभाग ने 4 जुलाई को देश के 25 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भारी से अत्यंत भारी बारिश और गरज-चमक के साथ तेज अंधड़ का ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी किया है।

5 राज्यों में अत्यंत भारी बारिश का रेड अलर्ट

मौसम विभाग के मुताबिक 4 जुलाई को देश के पांच प्रमुख राज्यों में मानसून का सबसे रौद्र रूप देखने को मिल सकता है। यहां छिटपुट स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की प्रबल आशंका है-

  • गुजरात (गुजरात क्षेत्र, सौराष्ट्र और कच्छ)
  • कोंकण और गोवा
  • मध्य महाराष्ट्र
  • ओडिशा
  • पश्चिमी मध्य प्रदेश

इन राज्यों में होगी बहुत भारी बारिश

आईएमडी के पूर्वानुमान के मुताबिक 4 जुलाई को कुछ राज्यों में मूसलाधार यानी बहुत भारी बारिश दर्ज की जाएगी:

  • पूर्वी राजस्थान
  • पूर्वी मध्य प्रदेश
  • विदर्भ
  • तेलंगाना
  • तटीय कर्नाटक

उत्तर-पश्चिम भारत: यूपी-राजस्थान में आंधी और बिजली का अलर्ट

उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी और पहाड़ी इलाकों में कल मौसम का मिजाज काफी बदला हुआ रहेगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 4 जुलाई को अलग-अलग स्थानों पर गरज-चमक और बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है। 4 से 7 जुलाई के दौरान यहां छिटपुट से लेकर बिखरी हुई बारिश होने का अनुमान है। पूर्वी राजस्थान में 4 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी जबकि पश्चिमी राजस्थान में भारी बारिश का अलर्ट है। इसके साथ ही पूर्वी राजस्थान में 40-50 किमी प्रति घंटे और पश्चिमी राजस्थान में 4-9 जुलाई के दौरान 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से धूलभरी हवाएं और अंधड़ चलने की आशंका है।

जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और पंजाब-हरियाणा में 4 जुलाई को गरज-चमक के साथ 40-50 किमी प्रति घंटे (झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने का अलर्ट है। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 3-5 जुलाई के दौरान छिटपुट से बिखरी हुई बारिश होगी। हिमाचल प्रदेश में 4 जुलाई को छिटपुट बारिश होगी जबकि उत्तराखंड में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश के साथ बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है।

मध्य और पूर्वी भारत: मध्य प्रदेश-बिहार में तेज अंधड़ की चेतावनी

मध्य प्रदेश के दोनों हिस्सों (पूर्वी व पश्चिमी) और विदर्भ में 4 जुलाई को भारी से अत्यंत भारी बारिश के साथ ही 30-40 किमी प्रति घंटे (झोंके 50 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से तेज आंधी चलने और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है। छत्तीसगढ़ में 4 जुलाई को छिटपुट स्थानों पर भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। बिहार में 3-9 जुलाई तक छिटपुट बारिश का दौर रहेगा लेकिन 4 जुलाई को राज्य में 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली कड़कने का अलर्ट है। झारखंड में 4 जुलाई को मध्यम से तीव्र बिजली गिरने की गतिविधि और तेज हवाएं चलने का अनुमान है।

गंगीय पश्चिम बंगाल में 4 जुलाई को भारी बारिश होगी। इसके साथ ही उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और गंगीय पश्चिम बंगाल में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से अंधड़ चलने की चेतावनी है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भारी बारिश के साथ 30-40 किमी प्रति घंटे की हवाएं चलेंगी।

उत्तर-पूर्व भारत: असम-मेघालय सहित सातों राज्यों में भारी वर्षा

उत्तर-पूर्व के राज्यों में मानसूनी हवाएं लगातार नमी ला रही हैं। असम और मेघालय में 4 जुलाई को भारी बारिश का अनुमान है। साथ ही 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है। नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा इन चारों राज्यों में 4 जुलाई को अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश के साथ ही गरज-चमक और बिजली गिरने की प्रबल संभावना है। अरुणाचल प्रदेश में 4 जुलाई को छिटपुट स्थानों पर बिजली गिरने और आंधी-तूफान की चेतावनी दी गई है।

दक्षिण भारत: कर्नाटक में मजबूत सतही हवाएं और मूसलाधार बारिश

तटीय कर्नाटक में बहुत भारी बारिश और आंतरिक कर्नाटक (उत्तरी व दक्षिणी) में भारी बारिश का अलर्ट है। इसके अलावा पूरे कर्नाटक में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से धूलभरी आंधी चलेगी और तटीय व आंतरिक हिस्सों में तेज सतही हवाएं चलने की चेतावनी है। केरल, माहे और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में 4 जुलाई को भारी बारिश होगी। तमिलनाडु में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं। तटीय आंध्र प्रदेश में भारी बारिश होगी। रायलसीमा और लक्षद्वीप में 4 जुलाई को तेज सतही हवाएं चलेंगी जबकि तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से अंधड़ चलने का अलर्ट है।

समंदर में जाने वाले मछुआरों के लिए रेड वॉर्निंग

खराब मौसम और तूफानी हवाओं को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों को समंदर में न उतरने की सख्त हिदायत दी है-

अरब सागर: सोमालिया तट, ओमान तट, दक्षिण-पश्चिम अरब सागर और मध्य व उत्तरी अरब सागर में 45-55 किमी प्रति घंटे (झोंके 65 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से डरावनी हवाएं चलेंगी। इसके अलावा गुजरात, कोंकण, गोवा, कर्नाटक और केरल के तटों तथा लक्षद्वीप क्षेत्र में 40-50 किमी प्रति घंटे (झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से तूफानी मौसम रहेगा।

बंगाल की खाड़ी: मध्य और उससे सटे दक्षिणी बंगाल की खाड़ी, दक्षिण श्रीलंका और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में 45-55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। वहीं गंगीय पश्चिम बंगाल, ओडिशा, उत्तरी और दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तटों, उत्तरी व मध्य बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में 40-50 किमी प्रति घंटे (झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से ऊंची लहरें और तूफानी मौसम रहने का अनुमान है।

वैभव सूर्यवंशी को मौका क्यों नहीं दे रहे गौतम गंभीर? इस क्रिकेटर ने टीम मैनेजमेंट को दी बड़ी सलाह

भारतीय की टी20 क्रिकेट टीम इस समय इंग्लैंड दौरे पर है। बीते दिनों आयरैंड के हाथों सीरीज गंवाने के बाद टीम इंडिया, इंग्लैंड से पांच मैचों की टी20 सीरीज खेल रही है। वहीं इस सीरीज के पहले मैच में भी भारतीय क्रिकेट फैंस के टीम इंडिया के उभरते खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी का इंतजार था। आयरलैंड सीरीज के बाद इस मैच में वैभव के डेब्यू का इंजतार कर रहे फैंस के हाथों निराशा लगी। वहीं अब वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू को लेकर एक दिग्गज क्रिकेटर ने टीम के हेड कोच गौतम गंभीर को बड़ा सलाह दी है।

पार्थिव पटेल ने कही ये बात

भारत के पूर्व विकेटकीपर और बल्लेबाज पार्थिव पटेल ने टीम मैनेजमैंट को सलाह दी है कि वैभव सूर्यवंशी को साफ तौर पर बताया जाए कि उन्हें अभी प्लेइंग इलेवन में मौका क्यों नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि 15 वर्षीय खिलाड़ी को यह समझाना जरूरी है कि उसे धैर्य रखने की जरूरत है और सही समय आने पर ही मौका मिलेगा। वैभव सूर्यवंशी को आईपीएल 2026 में शानदार प्रदर्शन के बाद आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के लिए भारतीय टीम में चुना गया था। हालांकि, अब तक उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला है। वे बेलफास्ट में खेले गए तीनों मुकाबलों और इंग्लैंड के खिलाफ डरहम में खेले गए पहले टी20 मैच में भी बेंच पर ही बैठे रहे। यह मुकाबला पहली पारी के बाद बारिश की वजह से रद्द हो गया था।

वैभव सूर्यवंशी को बताई जाए ये बात

जियोस्टार से बातचीत में पार्थिव पटेल ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि मौजूदा टी20 सीरीज के दौरान वैभव सूर्यवंशी को खेलने का मौका जरूर मिलेगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि टीम प्रबंधन और कोचिंग स्टाफ को वैभव से साफ-साफ बात करनी चाहिए और उन्हें उनकी भूमिका के बारे में पूरी जानकारी देनी चाहिए। पार्थिव पटेल ने कहा, “मुझे लगता है कि इस सीरीज में किसी न किसी मैच में वैभव सूर्यवंशी को मौका मिलेगा। लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि कोचिंग स्टाफ खिलाड़ी से खुलकर बात करे और उसे साफ बताए कि टीम की क्या योजना है और उससे क्या उम्मीद की जा रही है।”

पार्थिव पटेल ने आगे कहा कि वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा खिलाड़ी के साथ बहुत सोच-समझकर व्यवहार करना चाहिए। अगर टीम मैनेजमेंट उन्हें कुछ समय तक प्लेइंग इलेवन में मौका नहीं देना चाहता, तब भी इसकी वजह उन्हें साफ तौर पर बतानी चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर आप उन्हें अभी नहीं खिला रहे हैं, तो भी उनसे खुलकर बात करना जरूरी है। वह सिर्फ 15 साल के हैं। उन्हें धैर्य रखना सिखाना होगा और समझाना होगा कि भारतीय टीम में जगह बनाना आसान नहीं होता। यहां कई ऐसे खिलाड़ी होते हैं जिन्होंने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया होता है। इसलिए सही समय का इंतजार करना भी खिलाड़ी के विकास का अहम हिस्सा है।”

क्या दूसरे T-20i मैच में होगा वैभव बनाम आर्चर का मुकाबला?

पहले टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में भारत जीत से महरूम रह गया। लेकिन इस मैच में भारत और इंग्लैंड को कई सबक मिल गए। भारत को यह सबक मिल गया कि शीर्ष क्रम आउट ऑफ फॉर्म है। वहीं इंग्लैंड को यह समझ आ गया कि तेज गेंदबाजी में धार कम है। ऐसे में अब सबकी निगाहें वैभव सूर्यवंशी बनाम जोफ्रा आर्चर के मुकाबले पर टिकी है लेकिन शायद शनिवार को भी क्रिकेट प्रेमी को निराशा हाथ लग सकती है।

गौरतलब है कि इंडियन प्रीमियर लीग में वैभव सूर्यवंशी और जोफ्रा आर्चर दोनों ही राजस्थान रॉयल्स की टीम से खेलते हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों में शामिल जोफ्रा आर्चर को भारत के खिलाफ पहले टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच से आराम दिया गया है। उनको शायद दूसरे टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में भी मौका नहीं मिलेगा और अंतिम तीन टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में ही वह इंग्लैंड का हिस्सा बनेंगे। उनको कार्यभार प्रबंधन के तहत बैंच पर बैठाया गया है।हालांकि पहले टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में इंग्लैंड की गेंदबाजी अपेक्षाअनुसार नहीं रही थी तो उनको दूसरे मैच में मौका मिल सकता है।

पूरी सीरीज से पहले सबसे बड़ी चर्चा 15 वर्षीय विस्फोटक बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर है। पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्करने साफ कहा है कि अगर भारत को इंग्लैंड को चौंकाना है तो वैभव को टी20 में मौका देना चाहिए।गावस्कर का मानना है कि युवा खिलाड़ी को सिर्फ इसलिए बाहर नहीं बैठाया जाना चाहिए क्योंकि वह नया है। उनके मुताबिक वैभव को ओपनिंग या नंबर-3 पर उतारकर इंग्लैंड के गेंदबाजों पर शुरुआत से दबाव बनाया जा सकता है।

हालांकि की ओर से सहायक कोच रयान टेन डोशेट ने संकेत दिए हैं कि वैभव को अपनी बारी का इंतजार करना होगा। ऐसे में प्लेइंग इलेवन को लेकर सबसे बड़ा सस्पेंस इसी युवा बल्लेबाज पर टिका हुआ है।लेकिन संजू सैमसन की लगातार 3 विफलता के कारण टीम प्रबंधन अपनी सोच बदलने पर मजबूर हो सकता है।

भारत की टी20 विश्व कप में खिताबी जीत के सूत्रधार रहे सैमसन को कम से कम एक साल तक मौका दिया जा सकता था लेकिन अब जबकि भारतीय क्रिकेट को सूर्यवंशी के रूप में एक असाधारण प्रतिभाशाली क्रिकेटर मिल गया है।ऐसे में सैमसन के लिये गलती की कोई गुंजाइश नहीं रह गई है और टी20 विश्व कप का शानदार प्रदर्शन भी टीम में उनकी जगह की गारंटी नहीं हो सकता।अभिषेक शर्मा ने पिछले तीन मैचों में से दो में 49 और 59 रन बना लिये हैं जिससे सारा दबाव अब सैमसन पर है।

बारिश के कारण रद्द हुए पहले मैच में सैमसन ने सात गेंद में एक रन बनाया था और एक बार भी नहीं लगा कि वह आक्रामक खेलने के मूड में हैं । सीम लेती पिचों पर तकनीक के मामले में उनकी कमजोरी सामने आती है।राजस्थान के टोंक के रहने वाले आयरलैंड के गुमनाम से तेज गेंदबाज जय मूंदड़ा ने उनकी कमजोरी का फायदा उठाकर उनका विकेट लिया।टीम प्रबंधन 15 वर्ष के सूर्यवंशी को लेकर कोई हड़बड़ी नहीं करना चाहता लेकिन अगले कुछ मैचों में उन्हें नहीं उतारा गया तो इस फैसले पर सवाल उठने तय हैं।

धरती के वो अनछुए कोने खामोश वादियां गूंजते राज, जहां नहीं पड़े इंसानी कदम आज तक!

दुनिया में कुछ ऐसी जगहें भी हैं, जिन्हें देखकर पहली नजर में यकीन करना मुश्किल हो जाता है। कहीं झील के बीच तैरते हुए द्वीप हैं, तो कहीं ऐसी नदी जिसका पानी हमेशा उबलता रहता है। कुछ जगहें विज्ञान के लिए भी आज तक रहस्य बनी हुई हैं। आइए जानते हैं दुनिया की ऐसी 5 अद्भुत जगहों के बारे में, जिन्हें अपनी जिंदगी में एक बार जरूर देखना चाहिए:

1. लोकटक झील, भारत – दुनिया की तैरती झील का अनोखा नज़ारा

लोकटक झील: भारत के मणिपुर में एक तैरता हुआ स्वर्ग

मणिपुर में लोकटक झील भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झीलों में से एक है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत इसके ‘फुमदी’ हैं। फुमदी मिट्टी, घास, पेड़-पौधों और जैविक पदार्थों से बने तैरते हुए छोटे-छोटे द्वीप होते हैं, जो पानी की सतह पर लगातार अपनी जगह बदलते रहते हैं। यही कारण है कि यह झील दुनिया की सबसे अनोखी झीलों में गिनी जाती है। यहां केइबुल लामजाओ नेशनल पार्क दुनिया का इकलौता तैरता हुआ नातिरोनल पार्क है, जहां दुर्लभ संगाई हिरण पाया जाता है। झील में बोटिंग, फोटोग्राफी, बर्ड वॉचिंग और सूर्योदय-सूर्यास्त का नजारा टूरिस्ट को मंत्रमुग्ध कर देता है। यहां ठहरने के लिए होमस्टे, कॉटेज और होटल उपलब्ध हैं, जिनका खर्च लगभग ₹1,500 से ₹5,000 प्रति रात होता है, जबकि खाने का खर्च ₹400 से ₹1,000 प्रतिदिन तक आता है।

2. डोर टू हेल, तुर्कमेनिस्तान – 50 साल से जलता रहस्यमयी गड्ढा

The 'Gates of Hell' could soon be extinguished in Turkmenistan due to its ecological damage | World News | Sky News

तुर्कमेनिस्तान के कराकुम रेगिस्तान में स्थित डोर टू हेल दुनिया के सबसे रहस्यमय टूरिस्ट डेस्टिनेशन में से एक है। यह एक विशाल गैस क्रेटर है, जिसमें 1971 से लगातार आग जल रही है। माना जाता है कि नेचुरल गैस की खुदाई के दौरान जमीन धंस गई थी और गैस के रिसाव को रोकने के लिए उसमें आग लगा दी गई, लेकिन वह आज तक नहीं बुझी। रात के समय यह गड्ढा चमकते हुए आग के समुद्र जैसा दिखाई देता है। इसका व्यास लगभग 70 मीटर और गहराई करीब 30 मीटर है। यहां होटल बहुत कम हैं, इसलिए ज्यादातर टूरिस्ट रेगिस्तान में कैंपिंग का एक्सपीरियंस लेते हैं। कैंप और टूर पैकेज का खर्च लगभग ₹8,000 से ₹20,000 तक हो सकता है, जबकि खाने का खर्च ₹1,000 से ₹2,500 प्रतिदिन रहता है।

3. सलार दे उयुनी, बोलिविया – दुनिया का सबसे बड़ा नटुरेल आईना

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बोलिविया का सलार दे उयुनी दुनिया का सबसे बड़ा नमक का मैदान है, जो लगभग 10,500 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। बारिश के मौसम में इसकी सतह पर पानी की एक पतली परत जम जाती है, जिससे पूरी जमीन एक विशाल आईने की तरह आसमान का लुक दिखाने लगती है। ऐसा लगता है जैसे लोग बादलों के ऊपर चल रहे हों। यही वजह है कि इसे दुनिया की सबसे फोटोजेनिक जगहों में गिना जाता है। यहां सूर्योदय और सूर्यास्त का व्यू बेहद शानदार होता है। टूरिस्ट जीप सफारी, फोटोग्राफी और नमक से बने होटलों में ठहरने का एक्सपीरियंस लेते हैं। यहां रहने का खर्च लगभग ₹3,000 से ₹10,000 प्रति रात और खाने का खर्च ₹800 से ₹2,000 प्रतिदिन हो सकता है।

4. रेसट्रैक प्लाया, अमेरिका – अपने आप चलने वाले पत्थरों का रहस्य

mystery of moving stone in California death valley | वो घाटी जहां अपने आप चलते हैं पत्थर

अमेरिका के डेथ वैली नेशनल पार्क में स्थित रेसट्रैक प्लाया एक सूखी झील का मैदान है, जो अपने चलने वाले पत्थरों के लिए पूरी दुनिया में पॉपुलर है। यहां बड़े-बड़े पत्थर बिना किसी इंसान या जानवर की मदद के अपनी जगह बदलते हुए दिखाई देते हैं और पीछे लंबी लकीरें छोड़ जाते हैं। कई वर्षों तक यह एक रहस्य बना रहा, लेकिन बारिश, बर्फ की पतली परत और तेज हवा मिलकर इन पत्थरों को धीरे-धीरे खिसकाती हैं। यहां का सुनसान और विशाल रेगिस्तानी इलाका एडवेंचर पसंद लोगों को खूब अट्रैक्ट करता है। यहां ठहरने के लिए डेथ वैली के आसपास होटल अवेलेबल हैं, जिनका खर्च लगभग ₹8,000 से ₹20,000 प्रति रात होता है, जबकि खाने का खर्च ₹1,500 से ₹3,000 प्रतिदिन तक हो सकता है।

5. शनाय-टिम्पिशका, पेरू – उबलती नदी का रहस्य

दुनिया की एकमात्र उबलती नदी, शनाय-टिम्पिश्का नदी, जिसे "अमेज़न की उबलती नदी" भी कहा जाता है, पेरू में स्थित है। इसका पानी 45°C (113°F) से लेकर लगभग ...

पेरू के अमेजन वर्षावन में स्थित शनाय-टिम्पिशका को दुनिया की सबसे रहस्यमयी नदियों में गिना जाता है। यह नदी कई स्थानों पर इतनी गर्म हो जाती है कि इसका टेम्परेचर 80 से 100 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। माना जाता है कि इसमें गिरने वाला कोई भी छोटा जीव कुछ ही मिनटों में मर सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि धरती के अंदर Geothermal एनर्जी के कारण यह पानी इतना गर्म रहता है। यहां जाने के लिए गाइड के साथ यात्रा करना सबसे सुरक्षित माना जाता है। आसपास इको-लॉज और जंगल रिसॉर्ट उपलब्ध हैं, जिनका खर्च लगभग ₹4,000 से ₹12,000 प्रति रात होता है, जबकि खाने का खर्च ₹800 से ₹2,000 प्रतिदिन तक हो सकता है।

इन पांचों जगहों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये नेचर के ऐसे अजूबे हैं, जिन्हें देखकर पहली नजर में यकीन करना मुश्किल हो जाता है। अगर आप भी टिपिकल टूरिस्ट डेस्टिनेशन से हटकर कुछ अनोखा और यादगार एक्सपीरियंस चाहते हैं, तो ये डेस्टिनेशन आपकी ट्रैवल बकेट लिस्ट में जरूर होने चाहिए।

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बारिश का मौसम जहां एक तरफ गर्मी से राहत और ठंडी हवाओं का एहसास कराता है, वहीं दूसरी तरफ यह त्वचा के लिए कई तरह की परेशानियां भी लेकर आता है। इस दौरान हवा में नमी (humidity) का स्तर काफी बढ़ जाता है, जिससे स्किन पर ऑयल का उत्पादन ज्यादा होने लगता है। अतिरिक्त तेल और गंदगी मिलकर स्किन के पोर्स को बंद कर देते हैं, जिसके कारण पिंपल्स, एक्ने, रैशेज और एलर्जी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं। कई लोगों को इस मौसम में त्वचा पर खुजली और जलन की शिकायत भी होने लगती है, जिससे स्किन डल और अनइवन दिखने लगती है।

यही वजह है कि मॉनसून में सामान्य स्किन केयर रूटीन को और भी ज्यादा ध्यान से फॉलो करना जरूरी हो जाता है। सही देखभाल और हल्के प्राकृतिक उपाय अपनाकर इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है और त्वचा को हेल्दी रखा जा सकता है।

देसी नुस्खा जो सालों से है फेमस

स्किन केयर प्रोडक्ट्स के बीच आज भी एक पुराना घरेलू उपाय काफी लोकप्रिय है हल्दी और चंदन का फेस पैक। भारतीय घरों में इसे पीढ़ियों से इस्तेमाल किया जा रहा है क्योंकि यह त्वचा को शांत और साफ रखने में मदद कर सकता है।

हल्दी क्यों फायदेमंद मानी जाती है?

हल्दी में करक्यूमिन नाम का तत्व होता है, जिसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। यह स्किन पर:

  • पिंपल्स की सूजन कम कर सकता है
  • लालपन (redness) को शांत कर सकता है
  • त्वचा को बाहरी नुकसान से बचाने में मदद कर सकता है
  • स्किन टोन को थोड़ा बेहतर दिखा सकता है

चंदन के फायदे क्या हैं?

चंदन को उसकी ठंडक देने वाली प्रकृति और खुशबू के लिए जाना जाता है। यह:

  • त्वचा की जलन को शांत कर सकता है
  • एक्स्ट्रा ऑयल कम करने में मदद कर सकता है
  • स्किन को फ्रेश और रिलैक्स महसूस कराता है
  • गर्म और नमी वाले मौसम में राहत देता है

घर पर ऐसे बनाएं फेस पैक

इस फेस पैक को बनाना बेहद आसान है:

सामग्री:

  • 1 चम्मच चंदन पाउडर
  • हल्दी की एक चुटकी
  • गुलाब जल (पेस्ट बनाने के लिए)

कैसे लगाएं:

सभी चीजों को मिलाकर स्मूद पेस्ट बनाएं, चेहरे पर लगाएं, सूखने के बाद धो लें और हल्का मॉइश्चराइजर लगाएं।

कितनी बार इस्तेमाल करें?

इस फेस पैक का इस्तेमाल हफ्ते में 1 बार करना पर्याप्त माना जाता है। साथ ही नियमित सफाई और मॉइश्चराइजिंग भी जरूरी है।

हर किसी के लिए नहीं है यह नुस्खा

हालांकि यह प्राकृतिक उपाय है, लेकिन हर स्किन पर सूट नहीं करता। अगर स्किन सेंसिटिव है तो पहले पैच टेस्ट जरूर करें। जलन, लालपन या खुजली होने पर तुरंत इस्तेमाल बंद कर दें।

क्या यह सच में एक्ने ठीक कर सकता है?

हल्दी और चंदन स्किन को शांत जरूर कर सकते हैं, लेकिन गंभीर एक्ने के लिए वैज्ञानिक रूप से यह पूरा इलाज नहीं माना जाता। लगातार या गंभीर पिंपल्स होने पर डॉक्टर से सलाह लेना सबसे सही होता है।

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अब होटल की जरूरत नहीं पड़ेगी चलता-फिरता घर है ये ट्रैवलिंग वैन, घर जैसे सफर का ले पूरा मजा!

ट्रैवलिंग वैन आज के समय में घूमने का एक बहुत ही आरामदायक और पॉपुलर तरीका बन चुकी है। इसमें सफर के साथ-साथ रहने, खाने और आराम करने की पूरी सुविधा मिलती है। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन ऑप्शन है जो रोड ट्रिप और एडवेंचर पसंद करते हैं। ट्रैवलिंग वैन को जरूरत और बजट के हिसाब से अलग-अलग तरह से डिजाइन किया जाता है। आइए जानते हैं ट्रैवलिंग वैन के बारे में, जो आज के समय में घूमने का एक बहुत ही आरामदायक और नया तरीका बन चुकी है:

ट्रैवलिंग वैन क्या होती है

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ट्रैवलिंग वैन एक ऐसी गाड़ी होती है जिसे ट्रैवल करने और उसी में रहने दोनों के लिए डिजाइन किया जाता है। इसमें आप चलते-फिरते सफर भी करते हैं और उसी में सोने, खाने और आराम करने की फैसिलिटी मिलती है, इसलिए इसे “मोबाइल होम” भी कहा जाता है। यह लंबे रोड ट्रिप, फैमिली ट्रिप और एडवेंचर ट्रैवल के लिए एक बहुत ही आरामदायक ऑप्शन माना जाता है क्योंकि इसमें होटल की जरूरत नहीं पड़ती। भारत में इसे “ट्रैवलिंग वैन” या “हाउस ऑन व्हील्स” भी कहा जाता है। यह कॉन्सेप्ट पहले यूरोप और अमेरिका में काफी पॉपुलर था, लेकिन अब भारत में भी धीरे-धीरे इसका ट्रेंड बढ़ रहा है और लोग इसे लग्जरी रोड ट्रिप के लिए पसंद करने लगे हैं।

ट्रैवलिंग वैन की जरूरत

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ट्रैवलिंग वैन अलग-अलग प्रकार की होती हैं, जो जरूरत और बजट के हिसाब से बनाई जाती हैं। इनमें बेसिक कैम्पर वैन होती है जिसमें सिर्फ जरूरी फैसिलिटी जैसे बेड और छोटा किचन होता है, जबकि लग्जरी मोटरहोम पूरी तरह एक चलता-फिरता घर होता है जिसमें बेडरूम, किचन, बाथरूम, एसी और टीवी जैसी सुविधाएँ मिलती हैं। वहीं ऑफ-रोड कैम्पर वैन पहाड़ों और खराब रास्तों के लिए बनाई जाती है, और पॉप-अप रूफ वैन में छत ऊपर उठ जाती है जिससे अंदर खड़े होकर आराम किया जा सकता है। इसके अलावा मिनी कैम्पर वैन भी होती है जो छोटी होती है और कम लोगों के लिए उपयोग की जाती है।

कैसे बनाई जाती है

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ट्रैवलिंग वैन आमतौर पर बड़ी वैन या बस को पूरी तरह मॉडिफाई करके बनाई जाती है। पहले गाड़ी के अंदर का पूरा हिस्सा खाली किया जाता है, फिर उसमें मजबूत लेकिन हल्के मटेरियल जैसे लकड़ी, फाइबर, एल्युमिनियम और प्लास्टिक पैनल्स का इस्तेमाल करके नया इंटीरियर बनाया जाता है। इसके साथ इलेक्ट्रिकल सिस्टम, बैटरी बैकअप, सोलर पैनल, पानी की पाइपलाइन और वेंटिलेशन सिस्टम भी फिट किया जाता है ताकि यह पूरी तरह एक चलता-फिरता घर बन सके।

ट्रैवलिंग वैन का डिजाइन

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इसका डिजाइन बहुत स्मार्ट तरीके से किया जाता है ताकि कम जगह में ज्यादा फैसिलिटी मिल सकें। आगे ड्राइविंग केबिन होता है, बीच में मल्टीपर्पज़ एरिया होता है जिसे सोफा या बेड में बदला जा सकता है, और पीछे किचन या स्टोरेज बनाया जाता है। दीवारों और छत में इंसुलेशन लगाया जाता है ताकि गर्मी, ठंड और बारिश का असर अंदर न आए और सफर आरामदायक बना रहे।

किचन सेटअप

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किचन को बहुत कॉम्पैक्ट लेकिन पूरी तरह फंक्शनल बनाया जाता है। इसमें छोटा गैस स्टोव या इंडक्शन प्लेट, सिंक, मिनी फ्रिज, स्टोरेज कैबिनेट और कभी-कभी माइक्रोवेव या कॉफी मशीन भी होती है। किचन को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि सफर के दौरान भी सेफ तरीके से खाना बनाया जा सके और गैस या इलेक्ट्रिक सिस्टम से कोई खतरा न हो।

सोने और आराम की सुविधा

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ट्रैवलिंग वैन में आरामदायक बेड या कन्वर्टिबल सोफा होता है जिसे जरूरत के अनुसार बदला जा सकता है। इसके अलावा वेंटिलेशन के लिए खिड़कियां, फैन या एसी लगाया जाता है। कुछ लग्जरी वैन में टीवी, म्यूजिक सिस्टम और छोटे स्टोरेज कैबिनेट भी होते हैं ताकि सफर और भी आरामदायक बन सके।

पानी की व्यवस्था

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इसमें साफ पानी के लिए फ्रेश वाटर टैंक लगाया जाता है जो आमतौर पर गाड़ी के नीचे या पीछे फिट किया जाता है। यह पाइपलाइन के जरिए किचन, सिंक और कभी-कभी बाथरूम से जुड़ा होता है। पानी का प्रेशर बनाए रखने के लिए पंप सिस्टम भी लगाया जाता है ताकि उपयोग में कोई परेशानी न हो।

वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम

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इस्तेमाल किए गए पानी और वेस्ट के लिए ग्रे वाटर और ब्लैक वाटर टैंक लगाए जाते हैं। ये टैंक पूरी तरह सील और सेफ होते हैं और गाड़ी के नीचे फिट किए जाते हैं। इन्हें समय-समय पर खाली करना पड़ता है जो तय किए गए डिस्पोजल पॉइंट या कैंपिंग साइट पर किया जाता है, ताकि सफर साफ और इको-फ्रेंडली रहे।

खर्च कितना आता है

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ट्रैवलिंग वैन का खर्च उसकी डिजाइन, साइज और लग्जरी सुविधाओं पर निर्भर करता है। बेसिक वैन लगभग ₹5 लाख से ₹15 लाख में बन सकती है, मिड-रेंज वैन ₹15 लाख से ₹40 लाख तक जाती है, जबकि हाई-एंड लग्जरी RV का खर्च ₹50 लाख से ₹1 करोड़ या उससे भी ज्यादा हो सकता है। इसमें सोलर सिस्टम, एसी और लग्जरी इंटीरियर जोड़ने से खर्च और बढ़ जाता है।

ट्रैवलिंग वैन और टेंट लगाना

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ट्रैवलिंग वैन के साथ आप कही भी टेंट लगा सकते है, वैन के अंदर जगह सीमित होती है और बाहर खुली हवा में बैठने, खाने या आराम करने के लिए एक्स्ट्रा स्पेस मिल जाता है। यह खासकर नेचर ट्रिप, जंगल, पहाड़ या झील किनारे कैंपिंग में बहुत उपयोगी होता है। टेंट लगाने से आप दिन में आउटडोर एंजॉय कर सकते हैं और रात में जरूरत पड़ने पर उसमें सो भी सकते हैं, जिससे जर्नी और भी एडवेंचर बन जाती है।

ऐसे लगाएं टेंट

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ट्रैवलिंग वैन के साथ टेंट लगाना बहुत आसान होता है। सबसे पहले एक सेफ और सपाट जगह चुनी जाती है, फिर वैन के पीछे या साइड में टेंट खोलकर उसकी बेस शीट (ग्राउंड कवर) बिछाई जाती है। इसके बाद टेंट की रॉड्स या पोल्स को जोड़कर उसका फ्रेम बनाया जाता है। फिर रस्सियों और पेग्स की मदद से टेंट को कसकर बांधा जाता है। अंत में वैन के साथ टेंट का कनेक्शन सही तरीके से सेट किया जाता है ताकि अंदर-बाहर आसानी से आना-जाना हो सके।

ट्रैवलिंग वैन का बहुत फायदा होता है, इसमें होटल बुकिंग की जरूरत नहीं होती और आप अपनी मर्जी से कहीं भी रुक सकते हैं। यह फैमिली ट्रिप, एडवेंचर रोड ट्रिप, नेचर ट्रैवल और लंबी ट्रिप के लिए एक बेहतरीन ऑप्शन है। यह सफर को सिर्फ ट्रिप नहीं बल्कि एक यादगार एक्सपीरियंस बना देती है जहां आराम, आज़ादी और रोमांच तीनों एक साथ मिलते हैं। तो आप भी अपनी अगली ट्रिप के लिए ट्रैवलिंग वैन का इस्तेमाल करके एक यादगार सफर का एक्सपीरियंस कर सकते हैं।

अमरनाथ यात्रा 2026: बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहला जत्था रवाना, PM मोदी ने श्रद्धालुओं को दिए 5 संकल्प

amarnath yatra

Amarnath Yatra 2026 : पहलगाम और बालटाल के लिए अमरनाथ यात्रियों का पहला जत्था पवित्र गुफा के लिए निकला। हर हर महादेव और बम बम भोले के जयकारों के साथ बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए निकले श्रद्धालु। यात्रा के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अमरनाथ यात्रियों को पत्र लिखकर कहा कि शिवभक्तों की यह यात्रा हर तरह से सुरक्षित और मंगलमय हो। उन्होंने यात्रा पर जा रहे श्रद्धालुओं को 5 संकल्प लेने को कहा। ALSO READ: Top News 3 July: अमरनाथ यात्रा के लिए उमड़ा आस्था का सैलाब, उत्तर भारत को गर्मी से राहत

 

पीएम मोदी ने पत्र में कहा कि जम्मू-कश्मीर में पवित्र अमरनाथ यात्रा में सम्मिलित होना, अपने आप में बहुत बड़ा सौभाग्य होता है। ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन हुई प्रथम पूजा के साथ ही भक्तों के लिए बाबा बर्फानी के दर्शन का क्रम शुरू हो जाता है। देश के कोने-कोने में श्रद्धालु इस पावन यात्रा में सम्मिलित होने के लिए तत्पर रहते हैं। हर वर्ष बाबा बर्फानी के प्रत्यक्ष दर्शन का यह अवसर, लाखों शिवभक्तों के लिए जीवन का एक अत्यंत शुभ और अविस्मरणीय अनुभव होता है। मैं इस वर्ष, यात्रा के इस अवसर पर आप सभी शिवभक्तों को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।

 

बाबा अमरनाथ के दर्शन की यह यात्रा, भारत की आध्यात्मिक यात्रा परंपरा का एक शाश्वत अध्याय है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष पूरे विश्व से सनातन संस्कृति को मानने वाले लाखों श्रद्धालु इस यात्रा में सम्मिलित होने के लिए जम्मू-कश्मीर पहुंचते हैं। अलग-अलग प्रांतों से, अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले और विविध परंपराओं को मानने वाले लोग, महादेव के दर्शन का संकल्प लेकर इस यात्रा को पूरा करते हैं।

पीएम मोदी ने इन लोगों का अभिनंदन किया

प्रधानमंत्री ने पत्र में कहा कि बीते कई दशकों से, श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड और जम्मू-कश्मीर सरकार बहुत कुशलता और सेवा भाव से यात्रा का प्रबंधन करते आ रहे हैं। इसके साथ ही, यात्रा को सुरक्षित संपन्न कराने में हमारे प्रशासन और सुरक्षाबलों की भी बहुत बड़ी भूमिका रहती है। इस वर्ष भी हजारों साथी इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। मैं इस अवसर पर भारतीय सेना, सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस, आईटीबीपी, बीएसएफ, एनडीआरएफ, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े चिकित्सकों और कर्मियों, प्रशासन के अधिकारियों, सफाई मित्रों तथा मठों की सेवा में जुड़े हर साथी का हृदय से अभिनंदन करता हूं। इन दो महीनों के दौरान, बाबा बर्फानी के पवित्र धाम में भारत की विविधता में एकता का अद्भुत स्वरूप भी देखने को मिलता है।

बाबा बर्फानी के धाम की यह यात्रा, हमें जम्मू-कश्मीर के आतिथ्य भाव और देशभर से आए भक्तों के समर्पण का भी दर्शन कराती है। यात्रा के हर आयोजन में, जम्मू-कश्मीर के हजारों स्थानीय नागरिक श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत करते हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले असंख्य भक्त भी, पवित्र गुफा यात्रा मार्गों पर भंडारों और लंगरों का संचालन करते हैं। निःस्वार्थ सेवा की यह भावना, हमारी सनातन संस्कृति और 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' के आदर्श की सजीव अभिव्यक्ति है।

 

अमरनाथ यात्रियों के लिए 5 संकल्प 

पहला संकल्प – हम अमरनाथ यात्रा के दौरान स्वच्छता के नियमों का पालन करें और पूरे यात्रा मार्ग में स्वच्छता बनाए रखने में अपना योगदान दें।

 

दूसरा संकल्प – हम प्रशासन के सभी आदेशों, यातायात के नियमों और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पूरी निष्ठा से पालन करें। यात्रा के दौरान बारिश की वजह से फिसलन और ठंड का विशेष ध्यान रखें।

 

तीसरा संकल्प – हम 'वोकल फॉर लोकल' की भावना से यात्रा के खर्चों का कम से कम 10 प्रतिशत उपयोग स्थानीय उत्पादों को खरीदने में करें। इससे जम्मू-कश्मीर के परिवारों और युवाओं की आजीविका को भी बल मिलेगा।

 

चौथा संकल्प – हम बाबा अमरनाथ यात्रा के समापन दिवस, अर्थात रक्षाबंधन के अवसर पर अपने भाई या बहन को एक पौधा भेंट करें और 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान को आगे बढ़ाएं।

 

पांचवां संकल्प – हम राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ पूरे वर्ष अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करें और विकसित भारत के निर्माण में अपना सक्रिय योगदान दें। मुझे विश्वास है कि बाबा अमरनाथ की दर्शन यात्रा, सनातन धर्म की आस्था, भारत की सांस्कृतिक एकता और सेवा की परंपरा का एक भव्य महोत्सव बनकर पूर्ण होगी।

 

उन्होंने कहा कि मेरी कामना है, बाबा अमरनाथ की असीम कृपा हम सभी पर बनी रहे। आपकी यात्रा सुरक्षित हो, मंगलमय हो और आपके जीवन में नई ऊर्जा, नई चेतना तथा नई आध्यात्मिक शक्ति का संचार हो।

 

बाबा बर्फानी हम सभी को अपने कर्तव्यों के प्रति और अधिक समर्पित बनाएं, ताकि हम मिलकर विकसित भारत के संकल्प को सिद्ध कर सकें।

International Plastic Bag Free Day: इंटरनेशनल प्लास्टिक बैग फ्री डे कब और क्यों मनाया जाता है?

Image caption: A photo conveying the message of International Plastic Bag Free Day and providing information on tackling the serious issue of plastic pollution

antarrashtriya plastic bag mukt divas kab manaya jata hai: प्रत्येक वर्ष 3 जुलाई को दुनिया भर में 'इंटरनेशनल प्लास्टिक बैग फ्री डे' यानी अंतरराष्ट्रीय प्लास्टिक बैग मुक्त दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मकसद बहुत सीधा और साफ है, सिंगल-यूज़ (एक बार इस्तेमाल होने वाले) प्लास्टिक बैग के हानिकारक प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक करना और उन्हें कपड़े या जूट के थैलों जैसे सुरक्षित विकल्पों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

  • कब और कैसे हुई इसकी शुरुआत?
  • यह दिन क्यों मनाया जाता है? जानें इसके पीछे की बड़ी वजहें…
  • पर्यावरण को प्लास्टिक प्रदूषण से बचाना
  • समुद्री और वन्य जीवों की सुरक्षा
  • मानव स्वास्थ्य की रक्षा
  • ड्रेनेज सिस्टम का ब्लॉक होना
  • हम इस मुहिम में क्या योगदान दे सकते हैं?

 

 

आइए जानते हैं कि इस खास दिन की शुरुआत कब हुई और इसे मनाने की ज़रूरत क्यों पड़ी:

 

कब और कैसे हुई इसकी शुरुआत?

इंटरनेशनल प्लास्टिक बैग फ्री डे की शुरुआत साल 2008 में हुई थी। इसे 'ज़ीरो वेस्ट यूरोप' (Zero Waste Europe) के एक सदस्य 'रीज़ेरो' (Rezero) द्वारा शुरू किया गया था। शुरुआत में यह अभियान सिर्फ यूरोप के कुछ देशों तक सीमित था। लेकिन धीरे-धीरे, जैसे-जैसे दुनिया को प्लास्टिक से होने वाले नुकसान का अहसास हुआ, यह एक वैश्विक (Global) आंदोलन बन गया। अब हर साल 3 जुलाई को दुनिया के दर्जनों देश मिलकर इस मुहिम का हिस्सा बनते हैं।

 

यह दिन क्यों मनाया जाता है? जानें इसके पीछे की बड़ी वजहें…

प्लास्टिक बैग हमारे लिए कुछ मिनटों की सुविधा तो लाते हैं, लेकिन यह हमारी धरती के लिए सैकड़ों सालों का सिरदर्द बन जाते हैं। इस दिन को मनाने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

 

1. पर्यावरण को प्लास्टिक प्रदूषण से बचाना

प्लास्टिक बैग 'नॉन-बायोडिग्रेडेबल' (Non-biodegradable) होते हैं, यानी ये प्राकृतिक रूप से कभी नष्ट नहीं होते। एक साधारण प्लास्टिक बैग को पूरी तरह से टूटने या गलने में 100 से 500 साल का समय लग सकता है। तब तक यह मिट्टी और पानी में मिलकर जहरीले सूक्ष्म कणों (Microplastics) में बदल जाता है, जो प्रकृति को नुकसान पहुंचाते हैं।

 

2. समुद्री और वन्य जीवों की सुरक्षा

हर साल लाखों टन प्लास्टिक कचरा समुद्र में पहुंचता है। समुद्री जीव- जैसे कछुए, मछलियां और व्हेल्स अक्सर प्लास्टिक बैग को खाना समझकर निगल लेते हैं, जिससे उनके पेट में ब्लॉक हो जाता है और दम घुटने से उनकी मौत हो जाती है। ठीक इसी तरह, शहरों में लावारिस घूमने वाले पशु- जैसे गाय कचरे के ढेर से प्लास्टिक बैग खा लेते हैं, जो उनके लिए जानलेवा साबित होता है।

 

3. मानव स्वास्थ्य की रक्षा

जब प्लास्टिक बैग मिट्टी में दबे रहते हैं, तो इनसे निकलने वाले हानिकारक केमिकल्स जमीन के अंदर के पानी (Groundwater) में मिल जाते हैं। जब पशु या मछलियां इसे अनजाने में खाते हैं, तो यह फूड चेन (खाद्य श्रृंखला) के जरिए इंसानों के शरीर तक पहुंच जाता है, जिससे कैंसर और हार्मोनल असंतुलन जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।

 

4. ड्रेनेज सिस्टम का ब्लॉक होना

शहरी इलाकों में प्लास्टिक बैग्स का सबसे बड़ा साइड-इफेक्ट यह दिखता है कि ये नालियों और सीवर पाइपों में फंस जाते हैं। बारिश के मौसम में इसकी वजह से सड़कों पर पानी भर जाता है और बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो जाती है।

 

हम इस मुहिम में क्या योगदान दे सकते हैं?

बदलाव हमेशा घर से शुरू होता है। इस दिन को सार्थक बनाने के लिए हम अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ये छोटे बदलाव कर सकते हैं:

 

'नो' कहना सीखें: जब भी आप सब्जी या राशन लेने जाएं, तो दुकानदार से प्लास्टिक बैग लेने से साफ मना करें।

 

विकल्प अपनाएं: हमेशा अपनी गाड़ी में या जेब में एक कपड़े या जूट का थैला साथ रखें।

 

जागरूकता फैलाएं: अपने परिवार और दोस्तों को भी प्लास्टिक के नुकसान बताएं और उन्हें भी थैला इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करें।

 

एक कड़वा सच: एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में हर मिनट लगभग 20 लाख प्लास्टिक बैग्स का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि उनका औसत उपयोग समय सिर्फ 12 मिनट होता है। इस 12 मिनट की सुविधा के लिए हम अपनी धरती को सदियों का नुकसान पहुंचा रहे हैं।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।