8th Pay Commission पर केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बिग अपडेट! सैलरी में 70% से ज्यादा बढ़ोतरी का प्रस्ताव, जानें HRA और DA का ये नया गणित

8th Pay Commission Salary Hike Proposals: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आठवें वेतन आयोग को लेकर एक बेहद जबरदस्त खबर आ रही है। विभिन्न कर्मचारी संगठनों और यूनियनों की ओर से सौंपे गए नए प्रस्तावों के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि आठवें वेतन आयोग के लागू होने से कर्मचारियों की सैलरी में 70% से ज्यादा की भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

यह अनुमानित बढ़ोतरी सिर्फ फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर नहीं है। बल्कि, बेसिक पे में संशोधन, हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) में बढ़ोतरी और डियरनेस अलाउंस (DA) के मर्जर के संयुक्त प्रभाव के कारण यह आंकड़ा 70% के पार जा रहा है। आइए समझते हैं कि इस नए प्रस्ताव का पूरा गणित क्या है और लेवल-1 के कर्मचारियों की सैलरी पर इसका क्या असर पड़ेगा।

लेवल-1 कर्मचारियों की सैलरी ₹37080 से बढ़कर हो जाएगी ₹63500

ऑल इंडिया नेशनल पब्लिक सेक्टर एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) सहित कई प्रमुख कर्मचारी यूनियनों ने सरकार को जो प्रस्ताव भेजे हैं, उनके अनुसार एक्स-कैटेगरी (X-Category) के शहरों में काम करने वाले लेवल-1 कर्मचारियों की मौजूदा सैलरी करीब ₹37080 से बढ़ाकर लगभग ₹63500 करने की सिफारिश की गई है। यह सीधे तौर पर 71% तक की कुल बढ़ोतरी को दर्शाता है।

आपको बता दें कि ये आंकड़े कर्मचारी यूनियनों द्वारा की गई सिफारिशों और प्रस्तावों पर आधारित हैं। यह सरकार या आठवें वेतन आयोग का अंतिम फैसला नहीं है। अंतिम निर्णय वेतन आयोग की रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद केंद्र सरकार द्वारा ही लिया जाएगा।

70% से ज्यादा सैलरी बढ़ने की मुख्य वजहें क्या हैं?

सिर्फ बेसिक पे बढ़ने से सैलरी इतनी ज्यादा नहीं भागती, बल्कि बेसिक पे के साथ जुड़े अन्य भत्ते भी ऑटोमैटिकली बढ़ जाते हैं। यूनियनों ने ये मांगें रखी हैं:

DA का बेसिक पे में विलय: कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि नए पे-स्केल को तय करने और लागू करने से पहले महंगाई भत्ते (DA) को बेसिक पे में मर्ज किया जाए। इससे सैलरी का आधार काफी बड़ा हो जाएगा।

हायर ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA): मासिक भत्ते को सीधे बढ़ाने के लिए ऊंचे ट्रांसपोर्ट अलाउंस की सिफारिश की गई है।

HRA दरों में संशोधन: शहरों की कैटेगरी के हिसाब से हाउस रेंट अलाउंस बढ़ाने का प्रस्ताव है।

HRA में बड़े बदलाव की तैयारी: X, Y और Z शहरों का नया ढांचा

केंद्र सरकार ने रहने के खर्च और आबादी के हिसाब से शहरों को तीन श्रेणियों- X, Y और Z में बांटा है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद और पुणे जैसे बड़े महानगर X कैटेगरी में आते हैं, जहाँ रहने का खर्च सबसे ज्यादा है।

वर्तमान में HRA की दरें 30%, 20% और 10% हैं। यूनियनों ने आठवें वेतन आयोग के तहत इसे बढ़ाकर 36%, 24% और 12% करने का प्रस्ताव रखा है।

कितनी बढ़ सकती है सैलरी?

8th Pay Commission पर केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बिग अपडेट! सैलरी में 70% से ज्यादा बढ़ोतरी का प्रस्ताव, जानें HRA और DA का ये नया गणित

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

प्रोजेक्शंस और अनुमानों के अनुसार एक्सपर्ट्स का मानना है कि, ‘70% से अधिक की अनुमानित वृद्धि केवल फिटमेंट फैक्टर पर नहीं, बल्कि कई मान्यताओं के संयोजन पर आधारित है। हालांकि संशोधित बेसिक पे मुख्य ड्राइवर है, लेकिन चूंकि HRA और ट्रांसपोर्ट अलाउंस जैसे घटक सीधे बेसिक पे से जुड़े होते हैं, इसलिए बेस बढ़ते ही पूरी सैलरी का पैकेज काफी बड़ा दिखने लगता है।’

वैसे ये सभी बातें इस पर निर्भर करेंगी कि अंतिम फिटमेंट फैक्टर क्या रहता है और सरकार अलाउंस के इस नए स्ट्रक्चर को किस तरह स्वीकार करती है। जब तक आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट नहीं सौंपता, इसे एक मजबूत उम्मीद या संकेतक के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

ओडिशा में यूनियनों की बैठकें समाप्त होने और पश्चिम बंगाल में नए दौर की चर्चाएं शुरू होने के साथ ही, कर्मचारियों के बीच इस 70% सैलरी हाईक के फॉर्मूले पर बहस और तेज हो गई है।

8th Pay Commission: फिटमेंट फैक्टर पर एक्सपर्ट्स का बड़ा खुलासा, सिर्फ भत्ते बढ़ने से नहीं चलेगा काम; जानिए सैलरी बढ़ाने का असली गणित

8th CPC Fitment Factor Calculator: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। ओडिशा के भुवनेश्वर में चल रही दो दिवसीय क्षेत्रीय बैठकों (6-7 जुलाई) के बाद अब पूरा फोकस इस बात पर टिक गया है कि इस बार कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने के लिए कौन सा फॉर्मूला अपनाया जाएगा। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा पेंच फंसा है ‘फिटमेंट फैक्टर’ पर, जिसे लेकर कर्मचारी यूनियनों और सरकार के बीच अंदरखाने बहस जारी है।

आसान भाषा में कहें तो फिटमेंट फैक्टर ही वह ‘जादुई नंबर’ है जो तय करता है कि आने वाले 10 सालों में सरकारी कर्मचारियों की जेब में कितनी सैलरी आएगी। आइए समझते हैं कि एक्सपर्ट्स इस बार किस नंबर की उम्मीद कर रहे हैं और क्यों केवल भत्तों के भरोसे रहने से कर्मचारियों का बड़ा नुकसान हो सकता है।

क्या है यह फिटमेंट फैक्टर और क्यों अड़े हैं कर्मचारी?

इसे बहुत ही सरल तरीके से समझें तो फिटमेंट फैक्टर एक ‘सैलरी मल्टीप्लायर’ है। पुराने वेतन आयोग की बेसिक सैलरी को इस नंबर से गुणा करके नए वेतन आयोग की न्यूनतम बेसिक सैलरी तय की जाती है।

7वें वेतन आयोग का उदाहरण: पिछले वेतन आयोग में सरकार ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया था। इसके कारण कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹7000 से बढ़कर सीधे ₹18000 हो गई थी।

8वें वेतन आयोग की स्थिति: आयोग का गठन हुए 8 महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन सरकार ने अभी तक इस नंबर को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं। जूनियर लेवल के कर्मचारियों की मांग है कि इस मल्टीप्लायर को इस बार और बड़ा रखा जाए ताकि महंगाई के इस दौर में उन्हें एक बेहतर सैलरी हाइक मिल सके।

एक्सपर्ट्स की दो राय: 1.90 से लेकर 2.86 तक का अनुमान

8वें वेतन आयोग में यह नंबर कितना तय होगा, इसे लेकर देश के बड़े फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के बीच दो अलग-अलग गणित चल रहे हैं:

बैंकबाजार के एक्सपर्ट के मुताबिक, फिलहाल फिटमेंट फैक्टर की रेंज 2.28 से 2.86 के बीच रहने की उम्मीद है। अंतिम फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार बढ़ती महंगाई और कर्मचारियों की उम्मीदों के बीच कैसे तालमेल बैठाती है।

एक और एक्सपर्ट का मानना है कि देश की वित्तीय स्थिति और बजटीय सीमाओं को देखते हुए सरकार इस नंबर को 1.90 से 2.10 के दायरे में सीमित रख सकती है। उनके अनुसार, वित्तीय दबाव के कारण इस नंबर का 2.3 से पार जाना थोड़ा मुश्किल लग रहा है।

सिर्फ भत्ते बढ़ने से क्यों नहीं बनेगी बात?

आम तौर पर यह माना जाता है कि अगर सरकार फिटमेंट फैक्टर को थोड़ा कम भी रखती है, तो वह हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस या डियरनेस अलाउंस (DA) बढ़ाकर कर्मचारियों को खुश कर सकती है। लेकिन एक्सपर्ट्स ने इस सोच के पीछे का एक बड़ा कड़वा सच उजागर किया है।

गणित बहुत सीधा है आपका मिलने वाला HRA, महंगाई भत्ता (DA) या रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन ये सभी चीजें आपकी रिवाइज्ड बेसिक सैलरी के आधार पर तय होती हैं। अगर फिटमेंट फैक्टर कम रहेगा, तो आपकी बेसिक सैलरी की नींव ही कमजोर रह जाएगी। जब बुनियादी सैलरी ही कम बढ़ेगी, तो उस पर कैलकुलेट होने वाले भत्तों की रकम भी आनुपातिक रूप से छोटी ही रहेगी। इसलिए, भत्ते कभी भी एक कमजोर फिटमेंट फैक्टर की भरपाई नहीं कर सकते।

सैलरी का पूरा स्ट्रक्चर: किस पर कितना असर?

अगर आप सोच रहे हैं कि इस फैसले से आपकी टेक-होम सैलरी पर क्या असर पड़ेगा। समझे सैलरी कंपोनेंट 8वें वेतन आयोग में इसका गणित

फिटमेंट फैक्टर- नए वेतन ढांचे की नींव है; यह तय करेगा कि न्यूनतम बेसिक पे कितनी बढ़ेगी।

हाउस रेंट अलाउंस (HRA)- नए बेसिक पे पर ही कैलकुलेट होगा, यानी फिटमेंट फैक्टर अच्छा तो HRA भी तगड़ा।

पेंशन लाभ- रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन भी बेसिक पे के रिवीजन से लिंक है, पेंशनर्स के लिए भी यह नंबर अहम है।

सरकारी खजाना- आयोग को कर्मचारियों की खुशहाली के साथ-साथ देश के वित्तीय बजट का भी ध्यान रखना होगा।

अब आगे क्या होने वाला है?

भुवनेश्वर की दो दिवसीय बैठक खत्म होने के बाद, अब 8वें वेतन आयोग की टीम 9-10 जुलाई को कोलकाता में राज्य और केंद्र के कर्मचारी संगठनों व पेंशनर्स के साथ सीधा संवाद करेगी। आने वाले महीनों में देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसी ही क्षेत्रीय बैठकें होंगी। आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट मध्य-2027 तक सरकार को सौंपनी है, जिसके बाद ही कर्मचारियों की अंतिम सैलरी और पेंशनर्स के भाग्य का फैसला होगा।

8th Pay Commission: पेंशनर्स के लिए बड़ी खुशखबरी! न्यूनतम पेंशन 67% और उम्र के साथ 100% हाइक की मांग, देखें पूरी लिस्ट

8th Pay Commission Pension Revision Demands: केंद्र सरकार के कर्मचारियों के साथ-साथ देश के करीब 65 लाख रिटायर्ड पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी एक बेहद महत्वपूर्ण खबर आ रही है। आयोग इस समय विभिन्न राज्यों का दौरा करके कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और हितधारकों से मुलाकात कर सुझाव जुटा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले इस आयोग के कार्यक्षेत्र में 31 दिसंबर 2025 या उससे पहले रिटायर होने वाले पेंशनर्स की पेंशन की समीक्षा करना भी शामिल है। अलग-अलग कर्मचारी संगठनों ने आयोग के सामने पेंशन को लेकर कई बड़ी और क्रांतिकारी मांगें रखी हैं। आइए समझते हैं कि पेंशनर्स के लिए क्या-क्या मुख्य मांगें की गई हैं और इन्हें कब तक लागू किया जा सकता है।

प्रमुख कर्मचारी संगठनों की क्या हैं मांगें?

नेशनल काउंसिल फॉर जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM), महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गनाइजेशन और ऑल इंडिया डिफेंस एंप्लॉयीज फेडरेशन (AIDEF) जैसे बड़े संगठनों ने आयोग को अपनी विस्तृत मांगें सौंपी हैं:

NC-JCM: संशोधित वेतन के साथ पेंशन का स्ट्रक्चरल अलाइनमेंट किया जाए।

महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गनाइजेशन: पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली, यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) में सुधार और इसे DA से जोड़ा जाए।

AIDEF: नए रिवाइज्ड पे-स्ट्रक्चर के आधार पर सभी पेंशनर्स के लिए एक समान पेंशन लागू की जाए।

पेंशन रिवीजन से जुड़ी 5 सबसे बड़ी मांगें

हितधारकों और कर्मचारी यूनियनों द्वारा उठाई गई प्रमुख मांगें नीचे दी गई हैं:

  1. न्यूनतम पेंशन में बंपर बढ़ोतरी: पेंशनर्स के लिए न्यूनतम पेंशन को आखिरी बार मिले वेतन या आखिरी 10 महीनों के औसत वेतन का 67% किया जाए।
  2. फिटमेंट फैक्टर और डीआर में सुधार: पेंशन कैलकुलेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले फिटमेंट फैक्टर को संशोधित किया जाए और डियरनेस रिलीफ (DR) के ढांचे की समीक्षा करके इसे पेंशन लाभों में जोड़ा जाए।
  3. फैमिली पेंशन और ग्रेच्युटी: फैमिली पेंशन के दायरे को बढ़ाया जाए, ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा में बढ़ोतरी हो और पेंशन कम्यूटेशन यानी पेंशन की एकमुश्त रकम के नियमों में सुधार किया जाए।
  4. पेंशन स्कीम चुनने की आजादी: रिटायर्ड कर्मचारियों को उनकी सुविधा के अनुसार पुरानी पेंशन योजना (OPS), नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) या यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) में से किसी एक को चुनने का विकल्प दिया जाए।
  5. उम्र बढ़ने के साथ बढ़ेगी पेंशन: जैसे-जैसे पेंशनभोगी की उम्र बढ़े, उसकी पेंशन में भी आनुपातिक बढ़ोतरी की जाए। 90 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए इसे आखिरी वेतन का 100% करने का प्रस्ताव है।

उम्र के हिसाब से कितनी पेंशन बढ़ाने की है मांग?

संगठनों ने बढ़ती उम्र के साथ पेंशनर्स की चिकित्सा और अन्य जरूरतों को देखते हुए इस प्रकार पेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है:

उम्र के हिसाब से कितनी पेंशन बढ़ाने की है मांग?

आयोग का अगला शेड्यूल और देशव्यापी बैठकें

8वें वेतन आयोग ने अप्रैल, मई और जून में कई राज्यों का दौरा किया है। जुलाई में भी बैठकों का दौर जारी है:

भुवनेश्वर (ओडिशा): 6 और 7 जुलाई को आयोग यहां हितधारकों के साथ अहम चर्चा कर रहा है। इसके लिए रजिस्ट्रेशन 15 जून को ही बंद हो चुके थे।

कोलकाता (पश्चिम बंगाल): इसके बाद आयोग 9 और 10 जुलाई को कोलकाता का दौरा करेगा।

मुंबई दौरा: आयोग ने मुंबई में सेंट्रल रेलवे जोन के तहत विभिन्न रेलवे विभागों का दौरा करने की इच्छा भी जताई है, ताकि कर्मचारियों की कामकाजी परिस्थितियों को करीब से समझा जा सके।

कब तक लागू होंगी 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें?

आमतौर पर वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने में गठन के बाद से करीब 18 महीने का समय लगता है, जो मध्य-2027 (फरवरी या अप्रैल 2027) के आसपास पूरा होगा।

रिपोर्ट सौंपने के बाद, पिछले ट्रेंड्स बताते हैं कि केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने और इसे पूरी तरह लागू होने में 2 से 3 साल का समय लग जाता है। इसका मतलब है कि 2027 में घोषित होने वाली वेतन और पेंशन बढ़ोतरी साल 2029 या 2030 तक पूरी तरह से जमीन पर लागू हो पाएगी।

EPFO 3.0: पीएफ खाताधारकों के लिए बड़ी खुशखबरी! अब सिर्फ 3 दिन में बैंक खाते में आएगा पैसा, EPFO ने बदला ये नियम

EPFO New Claim Settlement Rule: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने करोड़ों पीएफ खाताधारकों को अब तक का सबसे बड़ा तोहफा दिया है। EPFO ने एक नया ऐतिहासिक फ्रेमवर्क पेश किया है, जिसके तहत अब योग्य पीएफ निकासी दावों का निपटारा महज 3 दिनों के भीतर कर दिया जाएगा। हाल के वर्षों में क्लेम सेटलमेंट प्रक्रिया में इसे ईपीएफओ का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव माना जा रहा है।

इस नए नियम से न केवल पीएफ का पैसा निकालने में लगने वाला समय बेहद कम हो जाएगा, बल्कि पूरी प्रक्रिया ग्राहकों के लिए आसान और पारदर्शी हो जाएगी। आइए जानते हैं कि इस नए नियम का फायदा आपको कैसे मिलेगा और इसके लिए क्या शर्तें हैं।

क्या है ईपीएफओ का 3-दिन वाला नया नियम?

अब तक पीएफ का पैसा निकालने के लिए कर्मचारियों को कई दिनों या हफ्तों तक इंतजार करना पड़ता था, क्योंकि मैनुअल वेरिफिकेशन और कागजी प्रक्रियाओं में काफी समय जाया होता था। लेकिन अब नए नियम के तहत सभी पात्र क्लेम सिर्फ 3 दिन में सेटल होंगे।

देरी होने पर अधिकारियों को लगेगा जुर्माना: ईपीएफओ ने इस पूरी व्यवस्था में जवाबदेही तय करने के लिए सख्त रुख अपनाया है। अगर कोई अधिकारी बिना किसी ठोस वजह के पीएफ क्लेम को 20 दिनों से ज्यादा समय तक लटका कर रखता है, तो उस पर 12% दंडात्मक ब्याज लगाया जा सकता है।

ऑटो-सेटलमेंट की लिमिट बढ़कर हुई ₹5 लाख

ईपीएफओ ने अपने डिजिटल रिफॉर्म्स को आगे बढ़ाते हुए बिना किसी इंसानी दखल के क्लेम पास करने वाले ‘ऑटो-सेटलमेंट मैकेनिज्म’ का दायरा बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है:

  1. पहले ऑटो-सेटलमेंट के जरिए केवल ₹1 लाख तक के एडवांस क्लेम ही ऑटोमैटिक पास होते थे।
  2. अब सरकार ने इस लिमिट को बढ़ाकर सीधे ₹5 लाख कर दिया है।
  3. इस फैसले से अब पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा एडवांस क्लेम बिना किसी कागजी झंझट और देरी के तुरंत पास हो रहे हैं, जिससे क्लेम रिजेक्ट होने की गुंजाइश भी काफी कम हो गई है।

EPFO 3.0: भविष्य में UPI और ATM से भी निकलेगा PF का पैसा!

यह नया रिफॉर्म ईपीएफओ के बड़े डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का हिस्सा है, जिसे EPFO 3.0 नाम दिया गया है। इस पहल के तहत संगठन कई और आधुनिक डिजिटल सेवाओं पर काम कर रहा है। आने वाले समय में ईपीएफओ खाताधारकों को UPI के जरिए पीएफ विड्रॉल और ATM से लिंक करके सीधे पैसे निकालने जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं देने की तैयारी में है।

3 दिन में पैसा पाने के लिए कर्मचारियों को क्या करना होगा?

अगर आप भी किसी मेडिकल इमरजेंसी, शादी, पढ़ाई या घर बनाने के लिए पीएफ खाते से एडवांस या पूरा पैसा निकालना चाहते हैं, तो 3 दिन में फंड ट्रांसफर के लिए आपके अकाउंट में ये 5 चीजें अपडेटेड होनी चाहिए:

  • आपका UAN पूरी तरह एक्टिव होना चाहिए।
  • यूएएन के साथ आपकी सरकारी पहचान (ID) लिंक होनी चाहिए।
  • आपका पैन (PAN) कार्ड और चालू बैंक अकाउंट डिटेल्स (IFSC कोड के साथ) अपडेटेड हों।
  • आपकी KYC प्रक्रिया पूरी तरह कंप्लीट हो।
  • ईपीएफओ पोर्टल पर रजिस्टर्ड आपका मोबाइल नंबर चालू हो ताकि ओटीपी (OTP) वेरिफिकेशन आसानी से हो सके।

ध्यान दें कि पीएफ कटौती के मुख्य ढांचे में कोई बदलाव नहीं हुआ है। कर्मचारी और कंपनी दोनों का योगदान पहले की तरह बेसिक सैलरी का 12-12% ही रहेगा। पूरा फोकस केवल सर्विस को फास्ट और डिजिटल बनाने पर है।

8th Pay Commission: ₹18000 से बढ़कर ₹69000 हो जाएगी बेसिक सैलरी! जानिए इस डिमांड के पीछे का पूरा कैलकुलेशन

8th Pay Commission: ₹18000 से बढ़कर ₹69000 हो जाएगी बेसिक सैलरी! जानिए इस डिमांड के पीछे का पूरा कैलकुलेशन

8th Pay Commission Minimum Basic Pay: आठवें वेतन आयोग के गठन की सुगबुगाहट के बीच केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी को लेकर एक बड़ी मांग चर्चा में है। कर्मचारी संगठनों ने सरकारी कर्मचारियों की मौजूदा न्यूनतम बेसिक सैलरी को ₹18,000 से बढ़ाकर सीधे ₹69,000 करने का प्रस्ताव रखा है।

हालांकि, सोशल मीडिया पर इस तेजी के पीछे सिर्फ 3.833 के फिटमेंट फैक्टर की चर्चा हो रही है, लेकिन असल में इस ₹69,000 की मांग के पीछे एक बहुत बड़ा इकोनॉमिक कैलकुलेशन है। नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) की स्टाफ साइड ने सरकार को सौंपे ज्ञापन में न्यूनतम वेतन तय करने के पूरे फॉर्मूले को ही बदलने का सुझाव दिया है। आइए समझते हैं कि इस ₹69,000 की मांग के पीछे का पूरा गणित क्या है।

क्यों उठी फॉर्मूला बदलने की मांग?

कर्मचारी संगठनों (NC-JCM) का तर्क है कि 7वें वेतन आयोग का पुराना फॉर्मूला आज के समय में बढ़ती महंगाई और जीवन यापन की वास्तविक लागत को नहीं दर्शाता है। इसलिए, उन्होंने ‘नीड-बेस्ड लिविंग वेज’ की गणना के लिए परिवार के आकार, खान-पान, मकान और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई से जुड़े खर्चों के मानकों में बड़े बदलाव किए हैं।

1. 3 के बजाय 5 यूनिट का परिवार

₹69,000 की मांग के पीछे सबसे बड़ा बदलाव परिवार के आकार को लेकर है:

पुराना नियम (7th Pay Commission): इसमें केवल 3 यूनिट का परिवार माना जाता था, जिसमें कर्मचारी, उसकी पत्नी/पति और दो बच्चे शामिल थे।

नया प्रस्ताव (8th Pay Commission): कर्मचारी पक्ष ने इसे बढ़ाकर 5 यूनिट का परिवार करने का प्रस्ताव दिया है। इसमें पहली बार कर्मचारी के आश्रित माता-पिता और सास-ससुर को भी शामिल करने की मांग की गई है।

नए फॉर्मूले के तहत परिवार का गणित:

  • कर्मचारी: 1 यूनिट
  • जीवनसाथी: 1 यूनिट (पहले इसे 0.8 यूनिट माना जाता था)
  • दो बच्चे: 0.8 यूनिट प्रति बच्चा (कुल 1.6 यूनिट)
  • आश्रित माता-पिता/सास-ससुर: 0.8 यूनिट
  • कुल जोड़: 5.2 यूनिट (जिसे वेतन गणना के लिए राउंड ऑफ करके 5 यूनिट माना गया है)।

2. खाने-पीने और रहन-सहन के खर्चों में बदलाव

परिवार के आकार के अलावा, रोजमर्रा के खर्चों को लेकर भी नया कैलकुलेशन दिया गया है:

कैलोरी इनटेक: इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की ताजा सिफारिशों के आधार पर अब प्रति दिन 3,490 कैलोरी के हिसाब से भोजन और कपड़ों का खर्च तय करने की मांग है।

घर का खर्च: मकान के खर्च को पुराने फॉर्मूले के 3% से बढ़ाकर सीधे 7.5% करने का प्रस्ताव है।

बिजली-पानी: ईंधन, बिजली और पानी के खर्च को कुल लागत का 20% तय किया गया है।

स्किल डेवलपमेंट: बच्चों की पढ़ाई और कौशल विकास के खर्च को 25% पर आंका गया है।

सामाजिक जिम्मेदारी: शादी-ब्याह, त्योहार, मनोरंजन और सामाजिक दायित्वों के लिए अतिरिक्त 5% खर्च जोड़ा गया है।

कैसे निकल कर आया 3.833 का फिटमेंट फैक्टर?

इन सभी नए और संशोधित खर्चों को जोड़ने के बाद, NC-JCM ने गणना की है कि एक केंद्रीय कर्मचारी की न्यूनतम मासिक बेसिक सैलरी कम से कम ₹69,000 होनी चाहिए।

फिटमेंट फैक्टर का गणित: चूंकि अभी न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 है, इसलिए ₹18,000 से ₹69,000 तक पहुंचने के लिए 3.833 का फिटमेंट फैक्टर निकल कर आता है (यानी 18,000×3.833=69,000 लगभग)।

पेंशनर्स पर भी असर: कर्मचारी संगठनों ने सिफारिश की है कि पेंशन को रिवाइज करते समय भी इसी 3.833 के फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

यह मांग हाल के महीनों में चर्चा में रहे 2 से 2.5 के फिटमेंट फैक्टर की तुलना में काफी अधिक है। हालांकि, सरकार ने अभी तक इस आंकड़े पर अपनी कोई सहमति या पसंदीदा नंबर नहीं बताया है।

आगे क्या होगा?

यह ध्यान रखना जरूरी है कि ₹69,000 की न्यूनतम सैलरी और 3.833 का फिटमेंट फैक्टर अभी केवल कर्मचारी यूनियनों द्वारा रखा गया एक प्रस्ताव है। 8वां वेतन आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने से पहले सभी कर्मचारी संगठनों, विभिन्न मंत्रालयों और अन्य हितधारकों के अभ्यावेदनों की जांच करेगा। इसके बाद आयोग अपनी अंतिम सिफारिशें सरकार को सौंपेगा और अंतिम फैसला केंद्र सरकार का होगा।

अगर वेतन आयोग इस नए फॉर्मूले को आंशिक रूप से भी स्वीकार करता है, तो इसका असर केवल शुरुआती सैलरी पर नहीं बल्कि पूरे पे-मैट्रिक्स पर पड़ेगा। इसके चलते सभी स्तरों के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी, भत्ते और पेंशन में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

Central Government Employees DA: केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज को 7वें पे कमीशन के तहत डीए मिलेगा या 8वें के तहत?

Central Government Employees DA: आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने में अभी वक्त लगेगा। इस बीच केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज की नजरें डीए में अगले संशोधन पर लगी हैं, जिसका समय आ चुका है। लेबर ब्यूरो की तरफ से रिलीज नए इंडस्ट्रियल वर्कर्स के लिए कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के डेटा से पता चलता है कि इस साल मई में इंडेक्स 150.8 पर चला गया। यह अप्रैल में 149.9 था। मई तक के इनफ्लेशन के डेटा के आधार पर जुलाई से डीए में करीब 3 फीसदी वृद्धि हो सकती है।

नया पे स्केल अगले साल के अंत तक होगा लागू

आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें अगले साल के अंत तक लागू होने की उम्मीद है। हालांकि, वेतन में वृद्धि जनवरी 2026 से लागू की जा सकती है। इसका मतलब है कि एंप्लॉयीज को 18-24 महीने का एरियर मिलेगा। जुलाई 2026 के डीए का कैलकुलेशन सातवें वेतन आयोग के तहत होने की उम्मीद है। इसका मतलब है कि इस साल जनवरी से जून पीरियड का डीए का कोई एरियर बकाया नहीं रहेगा।

नए पे स्केल लागू होने के बाद डीए का एरियर मिलेगा

एंप्लॉयी यूनियन के एक सूत्र ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि जुलाई 2026 के बाद 7वें वेतन आयोग के तहत डीए में होने वाली वृद्धि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद एरियर्स हो जाएंगी। इसका मतलब है कि अगर एंप्लॉयीज का सातवें वेतन आयोग के तहत जुलाई 2026 में डीए बढ़ता है और बाद में 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होती हैं तो सरकार को पहले से हो चुके डीए के पेमेंट और रिवाइज्ड पे स्केल पर आधारित डीए के बीच के फर्क का पेमेंट बतौर एरियर करना होगा।

साल में दो बार होता है डीए में संशोधन

एक साल में दो बार केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज के डीए में संशोधन होता है। यह 1 जनवरी और 1 जुलाई से लागू होता है। हालांकि, इसका ऐलान कुछ महीने की देर से होता है, लेकिन एंप्लॉयी को पहले की तारीख से रिवाइज्ड डीए का पेमेंट होता है। जुलाई 2026 के डीए का ऐलान इस साल अक्तूबर में दीवाली के करीब होने की उम्मीद है। अगर डीए 3 फीसदी बढ़ता है तो एंप्लॉयीज को मिल चुके डीए और 8वें वेतन आयोग की सिफारिश के आधार पर संसोधित डीए के बीच का फर्क बतौर एरियर मिलेगा।

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डीए 58 से बढ़कर 60 फीसदी हो चुका है

हालांकि, जब तक सरकार लागू होने की तारीख, फिटमेंट फैक्टर, पे मैट्रिक्स और डीए ट्रांजिशन फॉर्मूला का ऐलान नहीं कर देती है, एंप्लॉयीज को इस बारे में तस्वीर साफ होने का इंतजार करना होगा। बीते 12 महीनों के एवरेज सीपीआई-आईडब्ल्यू डेटा पर डीए का कैलकुलेशन होता है। इससे पहले केंद्र सरकार ने डीए 2 फीसदी बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इससे डीए 58 फीसदी से बढ़कर 60 फीसदी हो गया।

8th Pay Commission: फैमिली यूनिट में माता-पिता को शामिल करने की मांग, इससे बढ़ेगा मिनिमम बेसिक पे

8th Pay Commission: केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज ने 8वें वेतन आयोग से फैमिली यूनिट के प्रस्तावित विस्तार में माता-पिता (आश्रित सास-ससुर सहित) को शामिल करने की मांग की है। इससे एंप्लॉयी की फैमिली की यूनिट्स तीन से बढ़कर पांच हो जाएगी। इससे पहले के वेतन आयोग ने जरूरत आधारित मिनिमम वेजेज के कैलकुलेशन के लिए एंप्लॉयी की फैमिली के तीन यूनिट्स तक पर विचार किया था। इनमें गवर्नमेंट एंप्लॉयी (1 यूनिट), पत्नी/पति (0.8 यूनिट) और दो बच्चे (0.6X2=1.2 यूनिट्स) शामिल थे।

एंप्लॉयीज के अलग-अलग लेवल के पे में काफी फर्क

एंप्लॉयीज एसोसिएशंस और यूनियंस का कहना है कि नए वेतन आयोग को जरूरत आधारित वेजेज के कैलकुलेशन के लिए माता-पिता सहित फैमिली यूनिट्स पर विचार करना चाहिए। अगर यह मांग मान ली जाती है तो केंद्र सरकार के हर लेवल के एंप्लॉयीज का बेसिक पे काफी बढ़ जाएगा। यूनियंस की दलील है कि एंप्लॉयीज के अलग-अलग लेवल के बीच पे के मामले में बड़ा फर्क है।

एंप्लॉयीज की फैमिली यूनिट की संख्या बढ़ाने की मांग

एंप्लॉयीज यूनियंस के मुताबिक, लेवल 1 के लिए मिनिमम बेसिक पे प्रति माह 18,000 रुपये है। लेवल 18 के एंप्लॉयीज के लिए बेसिक पे 2.5 लाख रुपये प्रति माह है। एंप्लॉयीज का प्रतिनिधित्व करने वाली नेशनल काउंसिल-ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JMC) की दलील है कि फैमिली यूनिट्स 5 मानी जानी चाहिए। इसमें एंप्लॉयी एक यूनिट, पत्नी/पति 1 यूनिट (0.8 यूनिट से बढ़ाकर 1), दो तक बच्चे (0.8 यूनिटX2 = 1.6 यूनिट), पेरेंट्स (आश्रित माता-पिता सहित) 0.8 यूनिट्स शामिल होने चाहिए।

आश्रित सास-ससुर भी फैमिली में शामिल होने चाहिए 

अगर 8वां वेतन आयोग माता-पिता को 0.8 यूनिट्स मान लेता है और पत्नी/पति का यूनिट 0.2 बढ़ा देता है तो कुल फैमिली यूनिट्स बढ़कर 5.2 हो जाएगी। एनसी-जेसीएम की मांग है कि मिनिमम पे तय करने के लिए फैमिली यूनिट्स पर विचार के दौरान सास-ससुर को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। फूड एंड क्लॉदिंग के लिए 3490 Kcal के ICMR की सिफारिश मानी जानी चाहिए। हाउसिंग को मौजूदा 3 फीसदी से बढ़ाकर 7.5 फीसदी किया जाना चाहिए।

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5 यूनिट के लिए मिनिमम 69,000 पे का कैलकुलेशन

फ्यूल, इलेक्ट्रिसिटी, वाटर चार्जेज ओवरऑल कॉस्ट का 20 फीसदी होना चाहिए। स्किल डेवलपमेंट 25 फीसदी होना चाहिए। एडिशनल एक्सपेंसेज 5 फीसदी होने चाहिए। NC-JCM की ड्राफ्टिंग कमेटी ने अपने ज्ञापन में कहा है कि एनसी-जेसीएम ने जिस मिनिमम पे का कैलकुलेशन किया है, वह 5 यूनिट फैमिली के लिए 69,000 रुपये है। इसके हिसाब से एंप्लॉयीज और पेंशनर्स के लिए फिटमेंट फॉर्मूला 3.83 होगा।

8th Pay Commission Updates: क्या केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज की सैलरी 283 फीसदी बढ़ने जा रही है?

आठवां वेतन आयोग केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज और पेंशनर्स के वेतन वृद्धि के बारे में अपनी सिफारिशें देने के लिए देशभर में अलग-अलग पक्षों के विचार जानने की कोशिश कर रहा है। एंप्लॉयीज यूनियंस 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे है। अगर यह मांग मान ली जाती है तो मिनिमम बेसिक पे 283 फीसदी बढ़ जाएगा। यह 18,000 रुपये से बढ़कर करीब 68,940 रुपये हो जाएगा। नए पे स्केल का फायदा केंद्र सरकार के करीब 50 लाख एंप्लॉयीज और 70 लाख पेंशनर्स को मिलेगा।

एंप्लॉयीज यूनियंस ने बताई अपनी मांगें

कनफेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एंप्लॉयीज एंड वर्कर्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल में 8वें वेतन आयोग को एक व्यापक मेमोरेंडम सौंपा है। इसमें मिनिमम बेसिक पे 69,000 रुपये करने, 3.83 फिटमेंट फैक्टर, ओल्ड पेंशन स्कीम फिर से लागू करने और ज्यादा हाउस रेंट अलाउन्स (HRA) की मांग की गई है।

7वें वेतन आयोग ने 2.57 फिटमेंट फैक्टर माना था

फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज और पेंशनर्स के पे में संशोधन करने के लिए होता है। रिवाइज्ड बेसिक सैलरी तय करने के लिए फिटमेंट फैक्टर के आधार पर एंप्लॉयीज के मौजूदा बेसिक पे में बदलाव किया जाता है। एंप्लॉयीज यूनियंस ने 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। अगर यह लागू हुआ तो मिनिमम बेसिक पे करीब 69,000 रुपये हो जाएगा। 7वें वेतन आयोग ने 2.57 फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल किया था।

इस महीने भुवनेश्वर और कोलकाता में बैठक

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर यूनियंस के प्रस्ताव मान लिए जाते हैं तो रिवाइज्ड बेसिक सैलरी का कैलकुलेशन मौजूदा बेसिक पे में 3.83 से गुणा कर किया जाएगा। हालांकि, 8वां वेतन आयोग कितना फिटमेंट फैक्टर रखता है, अभी इस बारे में कहना मुश्किल है। आयोग देश के अलग-अलग शहरों में एंप्लॉयीज के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर रहा है। 22-23 जून को लखनऊ की बैठक के बाद 6-7 जुलाई को भुवनेश्वर और 9-10 जुलाई को कोलकाता में बैठक होने वाली है।

सातवें आयोग ने मिनिमम बेसिक पे 18000 किया था

कुछ एंप्लॉयीज यूनियंस ने मिनिमम बेसिक पे बढ़ाकर 55,000 रुपये करने की मांग की है। उनका कहना है कि बीते कुछ सालों में कॉस्ट ऑफ लिविंग काफी बढ़ी है। खासकर हेल्थकेयर और एजुकेशन पर होने वाला खर्च काफी बढ़ा है। ऐसे में 18000 रुपये का मौजूदा न्यूनतम बेसिक पे पर्याप्त नहीं रह गया है। इससे पहले के वेतन आयोग ने मिनिमम बेसिक पे करीब ढ़ाई गुना कर दिया था। 7वें वेतन आयोग ने मिनिमम बेसिक पे को 7000 से बढ़ाकर 18,000 रुपये कर दिया था। यह 10 साल पहले की बात है।

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अगले साल के मध्य में आयोग सौंप सकता है रिपोर्ट

अनुमान है कि 8वां वेतन आयोग अगले साल के मध्य में अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंप देगा। इसके बाद केंद्र सरकार इस रिपोर्ट पर व्यापक विचार करेगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतिम फैसला लेने से पहले केंद्र सरकार अपनी वित्तीय स्थिति का भी ध्यान रखेगी। सरकार ने पिछले साल जीएसटी के रेट्स में कमी किए हैं। इस साल अमेरिका-ईरान में लड़ाई की वजह से क्रूड में उछाल आया था। इससे सरकार का इंपोर्ट बिल काफी बढ़ गया था।

8th Pay Commission extends deadline: 8वें वेतन आयोग ने अब 31 जुलाई की आखिरी डेडलाइन फिक्स की, सैलरी और भत्तों पर आया लेटेस्ट अपडेट!

केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की सैलरी, भत्तों और पेंशन को लेकर आठवें केंद्रीय वेतन आयोग से एक बड़ा अपडेट सामने आया है। वेतन आयोग ने विभिन्न श्रेणियों के सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों और पेंशन ढांचे पर केंद्र शासित प्रदेशों, केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों से सिफारिशें और जरूरी डेटा लेने की आखिरी तारीख को एक बार फिर आगे बढ़ा दिया है। अब इसके लिए 31 जुलाई की डेडलाइन तय की गई है।

15 जून से बढ़ाकर 31 जुलाई की गई आखिरी तारीख

इससे पहले आठवें वेतन आयोग ने अपने आधिकारिक ऑनलाइन वेब पोर्टल के माध्यम से सुझाव और मेमोरेंडम जमा करने की अंतिम तिथि 15 जून निर्धारित की थी। वेतन आयोग द्वारा जारी किए गए एक सर्कुलर के मुताबिक चूंकि कई मंत्रालय, विभाग और केंद्र शासित प्रदेश तय समय सीमा के भीतर आवश्यक डेटा जमा करने का काम पूरा नहीं कर पाए थे, इसलिए यह निर्णय लिया गया है कि डेटा कलेक्शन पोर्टल के माध्यम से डेटा जमा करने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 31 जुलाई, 2026 कर दिया जाए।

सिर्फ ऑनलाइन स्वीकार होंगे मेमोरेंडम

आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी मंत्रालयों और विभागों को अपने मेमोरेंडम विशेष रूप से आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ही जमा करने होंगे। आयोग ने साफ कहा है कि किसी भी तरह की हार्ड कॉपी स्वीकार नहीं की जाएगी। फिजिकल सबमिशन मान्य नहीं होंगे। ईमेल के जरिए भेजे गए सुझावों पर भी आयोग विचार नहीं कर सकता है।

अगले 10 वर्षों के लिए तैयार की जा रही हैं सिफारिशें

समय सीमा बढ़ाए जाने पर ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन के अध्यक्ष मनजीत सिंह पटेल का भी रिएक्शन सामने आया है। उन्होंने कहा कि जब पूरी स्पीड से काम चल रहा होता है तो आयोग के लिए भी समय सीमा को बार-बार आगे बढ़ाना आसान फैसला नहीं होता। उन्होंने कहा कि आठवें वेतन आयोग को देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और दूसरे हितधारकों की असल जरूरतों का विश्लेषण करने के लिए मंत्रालयों, विभागों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय स्वायत्त निकायों से संबंधित डेटा की जरूरत होती है। इसी डेटा के आधार पर आयोग अगले 10 वर्षों के लिए निष्पक्ष, व्यावहारिक और दूरदर्शी सिफारिशें पेश की जा सकेंगी।

लखनऊ, भुवनेश्वर और कोलकाता का दौरा करेगा वेतन आयोग

इस बीच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के चल रहे परामर्श दौरों के क्रम में आठवें वेतन आयोग ने अपने अगले दौर के दौरों का भी ऐलान कर दिया है। आयोग लखनऊ, भुवनेश्वर और कोलकाता के दौरे करेगा। भुवनेश्वपर में बैठक 6-7 जुलाई और कोलकाता में 9-10 जुलाई को तय की गई है।

आयोग से मिलने और अपॉइंटमेंट लेने के लिए केंद्रीय सरकारी संगठनों, संस्थानों, कर्मचारी संघों और यूनियनों को आयोग की वेबसाइट के माध्यम से एक ऑनलाइन अनुरोध जमा करना होगा।

इन राज्यों में पहले ही हो चुका है परामर्श

आठवां वेतन आयोग लगातार अलग अलग क्षेत्रों के हितधारकों के साथ बैठकें कर रहा है। हाल ही में आयोग ने उत्तर प्रदेश, दिल्ली, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हैदराबाद (तेलंगाना) और महाराष्ट्र में हितधारकों के साथ चर्चा की है। इससे पहले, आयोग ने 26 अप्रैल को उत्तराखंड के कर्मचारी संघों के साथ अपनी पहली बातचीत की थी।

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग के सामने रखी जाएंगी ये 5 बड़ी शर्तें, नए पे स्केल के इंतजार में बैठे कर्मचारियों के लिए आया अपडेट

8th Pay Commission: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, पेंशन और सेवा से जुड़े सुधारों को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। भारत सरकार का आठवां केंद्रीय वेतन आयोग देशव्यापी दौरों और हितधारकों से बातचीत के अपने अजेंडे के तहत 6 और 7 जुलाई को ओडिशा का दौरा करने जा रहा है। वित्त मंत्रालय की एक ऑफिशियल नोटिस के मुताबिक आयोग ने उन सभी केंद्र सरकार के संगठनों, संस्थानों, एसोसिएशनों और यूनियनों को ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेने के लिए आमंत्रित किया है जो भुवनेश्वर दौरे के दौरान इस पैनल से बातचीत करने में रुचि रखते हैं। इस बीच कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर् के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में 8वें वेतन आयोग से मुलाकात की और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 69000 रुपये सैलरी की मांग करते हुए एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है।

क्या है फिटमेंट फैक्टर का पूरा गणित?

यूनियन ने नए पे स्केल के तहत 3.83 फिटमेंट फैक्टर को लागू करने की जोरदार मांग की है। फिटमेंट फैक्टर वह मल्टीप्लायर है जिसका इस्तेमाल नया वेतन आयोग लागू होने पर कर्मचारियों के मूल वेतन को संशोधित करने के लिए किया जाता है। यूनियन के इस प्रस्ताव के तहत अगर 3.83 का फिटमेंट फैक्टर मंजूर हो जाता है तो वर्तमान न्यूनतम मूल वेतन 18000 से बढ़कर सीधे लगभग 69000 रुपये हो जाएगा।

वेतन आयोग के सामने रखी गईं ये 5 बड़ी शर्तें

कर्मचारी संगठन ने वेतन आयोग के सामने न्यूनतम वेतन और फिटमेंट फैक्टर के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण शर्तें और मांगें रखी हैं-

1- ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) की बहाली

प्रतिनिधित्व कर रहे कर्मचारी संगठन ने वर्तमान व्यवस्था को हटाकर पुरानी पेंशन योजना को फिर से बहाल करने की बड़ी मांग सामने रखी है।

2- हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में भारी बढ़ोतरी

शहरों की कैटिगरी के आधार पर हाउस रेंट अलाउंस की दरों को बढ़ाकर 40%, 35% और 30% करने की मांग की गई है। इसके साथ ही हाउस बिल्डिंग एडवांस और कंप्यूटर लोन जैसे कल्याणकारी एडवांस को भी दोबारा शुरू करने की बात कही गई है।

3- वेतन विसंगतियों को दूर करना और फाइनेंशियल अपग्रेडेशन

वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए पे लेवल्स का रेशनलाइजेशन किया जाए। इसके अलावा कर्मचारियों के पूरे सर्विस पीरियडके दौरान पांच फाइनेंशियल अपग्रेडेशन दिए जाएं।

4- स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार

कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से CGHS और ECHS के तहत व्यापक स्वास्थ्य देखभाल कवरेज के विस्तार की मांग रखी गई है।

5- संविदा और आकस्मिक कर्मचारियों के लिए नीतियां

सामाजिक सुरक्षा को और व्यापक बनाने के साथ-साथ संविदात्मक और आकस्मिक श्रमिकों के लिए नियमितीकरण नीतियों को लागू करने की मांग की गई है।

1 करोड़ से अधिक कर्मचारियों-पेंशनभोगियों पर पड़ेगा असर

8वां वेतन आयोग वर्तमान में देश भर के हितधारकों से लगातार फीडबैक और सुझाव जुटा रहा है। इस पैनल द्वारा दी जाने वाली सिफारिशों का सीधा असर देश के लगभग 50 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारियों और करीब 65 लाख पेंशनभोगियों के भविष्य पर पड़ेगा।