CJP Protest Live Updates: NEET पेपर लीक पर संसद से सड़क तक संग्राम, जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज के दावों पर गरम हुई राजनीति

dimple yadav protest

देश में NEET परीक्षा में हुई कथित धांधली और पेपर लीक के मुद्दे पर राजनीति गरमा गई है। मानसून सत्र के पहले ही दिन इस मुद्दे की गूंज संसद के दोनों सदनों से लेकर दिल्ली की सड़कों तक सुनाई दी। ALSO READ: LIVE: जंतर मंतर से संसद भवन तक पहुंचे प्रदर्शनकारी, दिल्ली पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले
 

एक तरफ राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हज़ारों की संख्या में छात्र और सीजेपी (CJP – Cockroach Janata Party) के कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं, तो दूसरी ओर संसद भवन के भीतर विपक्षी सांसदों ने सरकार को घेरते हुए जमकर हंगामा किया। 
 

राज्यसभा में खड़गे बोले: “बच्चों की आवाज दबा रही सरकार, जंतर-मंतर पर हुआ लाठीचार्ज”

राज्यसभा की कार्रवाई शुरू होते ही विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने जंतर-मंतर पर जारी छात्र प्रदर्शन और पुलिस की कथित कार्रवाई का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा, यह देश के लाखों बच्चों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। जंतर-मंतर पर हजारों छात्र अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन वहां उन पर लाठीचार्ज किया गया। सरकार अपनी ताकत और बल प्रयोग से युवाओं की आवाज दबाने और उन्हें खदेड़ने की कोशिश कर रही है।
 

खड़गे के इस बयान के बाद उच्च सदन में भारी हंगामा हुआ, जिसके चलते पीठासीन अधिकारी ने सदन की कार्यवाही दोपहर तक के लिए स्थगित कर दी।
 

रणदीप सुरजेवाला का हमला: “NEET पर जवाब दे सरकार”

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि देश इस वक्त बेहद नाजुक और विकट परिस्थिति में खड़ा है।

उन्होंने तीखे सवाल दागते हुए कहा:

NEET परीक्षा पर जवाबदेही: लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले NEET पेपर लीक कांड पर सरकार पहले अपना रुख स्पष्ट करे। 

आस्था और दान पर चर्चा: राम मंदिर मामले में दान और जमीनों के लेन-देन को लेकर जो सवाल उठे हैं, उस पर संसद में पारदर्शी चर्चा होनी चाहिए। 

संसदीय प्राथमिकताएं: जब तक सरकार NEET और राम मंदिर से जुड़े इन गंभीर विषयों पर जवाब नहीं देती, तब तक किसी भी अन्य विधेयक पर चर्चा नहीं होनी चाहिए।

 

क्या बोलीं डिंपल यादव

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने कहा, “हम चाहते हैं कि छात्रों की बात सुनी जाए…देश भर में किसान हों, पर्यावरण का मुद्दा हो या युवा हो, हर कोई परेशान है लेकिन सरकार कोई भी बात सुनने को तैयार नहीं है…छात्र बस निष्पक्ष परीक्षा चाहते हैं….”

CJP Protest Live Updates: जानिए जंतर-मंतर पर अचानक कैसे बेकाबू हुआ प्रदर्शन? ग्राउंड से पढ़ें पूरी रिपोर्ट

CJP Protest Live Updates

देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर भारी हंगामे और तनाव का केंद्र बन गया है। सीजेपी (CJP) द्वारा आयोजित प्रदर्शन के दौरान आज अचानक स्थिति उस वक्त बेकाबू हो गई, जब प्रदर्शनकारी संसद मार्ग की ओर बढ़ने की कोशिश करने लगे।

 

पुलिस की कड़ी घेराबंदी और वॉटर कैनन (पानी की बौछार) की गाड़ियों की तैनाती के बावजूद माहौल देखते ही देखते तनावपूर्ण हो गया। आखिर ऐसा क्या हुआ कि शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुआ यह प्रदर्शन अचानक हिंसक धक्का-मुक्की में बदल गया? आइए जानते हैं जंतर-मंतर से सीधी ग्राउंड रिपोर्ट।

1. अचानक कैसे बिगड़े हालात? (Inside Story)

प्रत्यक्षदर्शियों और ग्राउंड रिपोर्टर्स के मुताबिक, सुबह 10 बजे तक प्रदर्शन बिल्कुल शांतिपूर्ण चल रहा था। प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां लेकर अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी कर रहे थे।

 

लेकिन दोपहर में माहौल तब बदला जब:

  • बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश : कुछ युवा कार्यकर्ताओं के समूह ने पुलिस द्वारा लगाए गए दूसरे स्तर (Level-2) के बैरिकेड्स को पार करने का प्रयास किया।
  • अतिरिक्त बल की तैनाती : स्थिति को हाथ से निकलता देख दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने तुरंत मोर्चा संभाला।
  • धक्का-मुक्की और हिरासत : पुलिस द्वारा रोके जाने पर कार्यकर्ताओं और सुरक्षाबलों के बीच तीखी झड़प हुई, जिसके बाद कई प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया।

 

2. दिल्ली पुलिस का एक्शन और सुरक्षा इंतजाम

जंतर-मंतर और आसपास के पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है:

 

“कानून-व्यवस्था को बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है। प्रदर्शनकारियों को तय दायरे में रहने की अनुमति दी गई थी, लेकिन जब संसद भवन की ओर जाने वाले रास्ते को तोड़ने की कोशिश की गई, तो सुरक्षा के लिहाज से त्वरित कदम उठाने पड़े।”

 

ड्रोन से निगरानी : जंतर-मंतर और कनेक्टिंग रूट्स पर ड्रोन कैमरों के जरिए चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है।

वाटर कैनन और आंसू गैस: किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए वाटर कैनन की गाड़ियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

 

ट्रैफिक एडवाइजरी : इन रास्तों पर जाने से बचें

अगर आप आज सेंट्रल दिल्ली या लुटियंस दिल्ली की तरफ जा रहे हैं, तो इन रास्तों का ध्यान रखें, क्योंकि यहाँ भारी ट्रैफिक जाम देखने को मिल रहा है:

  • टॉलस्टॉय मार्ग (Tolstoy Marg)
  • संसद मार्ग (Sansad Marg)
  • जनपथ (Janpath)
  • कनेक्टिंग इनर सर्कल (Connaught Place Inner Circle)

 

विकल्प (Alternate Route) : ट्रैफिक पुलिस ने यात्रियों को मिंटो रोड, बाराखंभा रोड और केजी मार्ग का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।

 

4. क्या हैं CJP और प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें?

सीजेपी (CJP) का यह प्रदर्शन लंबे समय से लंबित कुछ नीतिगत मामलों और हालिया विवादों को लेकर आयोजित किया गया था। संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि वे सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए आए थे।

 

उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं:

  • नागरिक अधिकारों की सुरक्षा : सामाजिक और कानूनी न्याय की व्यवस्था को मजबूत करना।
  • संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता : जमीनी स्तर पर मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकना।
  • तत्काल सुनवाई : सरकार के प्रतिनिधियों द्वारा एक ज्ञापन स्वीकार कर उनकी चिंताओं पर बातचीत करना।

5. अब आगे क्या? (Current Status)

फिलहाल जंतर-मंतर पर तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। पुलिस हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं को नजदीकी थानों में ले गई है, जबकि बाकी प्रदर्शनकारियों को तय स्थल पर ही सीमित रहने को कहा गया है। प्रशासन लगातार आयोजकों से बातचीत कर शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील कर रहा है।

 

यह रिपोर्ट जंतर-मंतर पर मौजूद ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग टीम, दिल्ली पुलिस के आधिकारिक बयानों और ट्रैफिक पुलिस की एडवाइजरी के आधार पर तैयार की गई है। स्थिति के अनुसार खबर को समय-समय पर अपडेट किया जा रहा है।

पीएम मोदी का राहुल गांधी पर तंज, मैं 56 साल के युवा की बात नहीं कर रहा

PM Modi in parliament before monsoon session

मानसून सत्र के लिए संसद पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया से बातचीत में अच्छे मानसून सत्र की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि एक महीने में भारत ने कई सिद्धियां हासिल की। भारतीय युवाओं ने देश का नाम रोशन किया। युवाओं ने अंतरिक्ष में एक नई उड़ान भरी। इस दौरान उन्होंने राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा कि मैं 56 साल के नौजवान का नाम नहीं ले रहा। ALSO READ: सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने के लिए रखीं 3 शर्तें, संसद मार्च से पहले आंदोलन में आया बड़ा मोड़

 

पीएम ने गिनाई पिछले 1 माह की उपलब्धियां

पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 1 महीने में देश ने अनेक सिद्धियां प्राप्त की हैं। देशवासी गर्व से भर जाएं, इस प्रकार की सिद्धियों का सिलसिला चला है। चाहे राष्ट्रीय हो, अंतरराष्ट्रीय हो और अब तो अंतरिक्ष भी… एक प्रकार से भारत के लिए गर्व के पल रहे हैं। पिछ्ले वर्ष मानसून सत्र से ठीक पहले भारतीय नागरिक अंतरराष्‍ट्रीय स्पेस स्टेशन पर पहुंचा था और परसो ही भारत के एक युवा स्टार्ट अप ने बहुत बड़ी सिद्धि प्राप्त की है। ये संयोग नहीं, बल्कि एक बड़ा मजबूत संदेश है कि हमारे देश के युवाओं की क्षमता और उनकी आकांक्षा अंतरिक्ष जितनी असीम है।

 

उन्होंने कहा कि रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार होकर आज देश चल पड़ा है। उसी का नतीजा है कि भारत के नौजवान इतना बड़ा साहस कर पाते हैं और सफल भी हो रहे हैं। पिछले दिनों राजस्थान में बहुत बड़ी ऑयल रिफाइनरी देश को समर्पित की गई। कुछ सप्ताह पहले देश का तीसरा सेमीकंडक्टर प्लांट देश को समर्पित किया गया। अभी कुछ दिन पहले ग्रीन हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन देश को समर्पित की गई है। विश्व के बहुत कम देश ऐसे हैं, जिसके पास ये सुविधा है। लेकिन भारत ने जो हाइड्रोजन ट्रेन देशवासियों को समर्पित की है, वो सबसे ताकतवर इंजन वाली और सबसे लंबी है। ALSO READ: आज से मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र, UCC बिल पेश करेगी सरकार, जानें बिल का खास बातें?

 

स्काईरूट के बहाने राहुल पर तंज

स्काईरूट एयरोस्पेस का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, इसमें जो नौजवान काम कर रहे हैं, उनकी एवरेज उम्र सिर्फ 28 साल है। ऐसे नौजवानों ने ये काम करके दिखाया है। मैं किसी 56 साल के नौजवान की बात नहीं कर रहा हूं।

 

उर्जा संकट पर क्या बोले पीएम मोदी?

पीएम मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया के युद्ध के कारण भारत जैसे देश जो ऊर्जा के लिए औरों पर निर्भर हैं, उनके लिए ये एक बहुत बड़ा संकट का कारण रहा। पेट्रोल, डीजल, LPG, फ़र्टिलाइज़र जैसे हर क्षेत्र में अनेक बाधाएं और संकट आए। उसके बावजूद भी भारत 7.7% के growth से दुनिया की मेजर इकॉनमी में सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाला देश रहा। ये भारत के सामर्थ्य का परिचायक रहा है।

 

क्या है मानसून और मानसून सत्र में समानता

उन्होंने कहा कि मानसून हो या और मानसून सत्र, अगर दोनों ही pro active हो, तो बहुत ही productive होते हैं। और दोनों productive होते हैं, तो देश का कल्याण होता है, जीव मात्र का कल्याण होता है। इसलिए हम यही प्रार्थना करते हैं कि मानसून भी pro active रहे और मानसून सत्र भी productive रहे।

शेयर बाजार में हाहाकार: अमेरिका-ईरान युद्ध से सेंसेक्स 500 अंक से ज्यादा टूटा, कच्चा तेल 90 डॉलर के पार

share market

Share Market 20 July : अमेरिका ईरान युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी की वजह से हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बड़ी गिरावट के साथ हुई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लाल निशान में खुले। ALSO READ: अमेरिका-ईरान तनाव और महंगे कच्चे तेल के बीच भी चढ़ा बाजार, अब अगले हफ्ते इन फैक्टर्स पर रहेगी निवेशकों की नजर

 

शुरुआती कारोबार में BSE का सेंसेक्स 500 अंकों से ज्यादा गिरकर खुला। 0.7 फीसदी गिरकर 77,591 के निचले स्तर पर आ गया। निफ्टी 50 भी 144 अंक टूटकर 24,190 के स्तर पर खुला।

 

इन सेक्टर्स में दिखा सबसे ज्यादा दबाव

 

बाजार में सबसे ज्यादा नुकसान बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर के शेयर को हुआ। एसबीआई, यश बैंक आदि कंपनियों के अच्छे रिजल्ट के बाद भी निफ्टी बैंक इंडेक्स में 2 फीसदी से ज्यादा की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। HDFC, Axis, यश बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयरों में भारी गिरावट आई। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स भी 1 फीसदी से ज्यादा नीचे फिसल गया।

 

कच्चा तेल 90 डॉलर प्रति बैरल पार

अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में तेजी। ब्रेट क्रूड के दाम 90.20 डॉलर प्रति बैरल हुए। WTI क्रूड 84.35 डॉलर प्रति बैरल पर जा पहुंचा। इंडियन बास्केट में भी क्रूड की कीमत 81.42 डॉलर प्रति बैरल हुई।

झाबुआ के किसानों से ऑनलाइन मिले सीएम डॉ. मोहन यादव, कहा- अन्नदाता के साथ खड़ी सरकार

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भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने झाबुआ में बलराम कृषि महोत्सव के अंतर्गत किसानों से ऑनलाइन चर्चा की। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को लाभकारी बनाने तथा आधुनिक एवं प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उल्लेखनीय है कि “कृषक कल्याण वर्ष” के अंतर्गत प्रदेश में “बलराम कृषि महोत्सव-2026 मनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर से इसकी शुरूआत की। अगला बलराम कृषि महोत्सव 21 जुलाई को आलीराजपुर में, 23 जुलाई को बड़वानी, 25 जुलाई को खरगौन में, 27 जुलाई को बुरहानपुर में और 30 जुलाई को खण्डवा में आयोजित किया जायेगा।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मौसम विभाग द्वारा इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा की संभावना व्यक्त की गई है। ऐसी स्थिति में उन्होंने प्रशासन को पूरी तैयारी के साथ किसानों की सहायता के लिए तत्पर रहने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि किसानों को तीन लाख रुपये तक का कृषि ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। किसानों को मात्र पांच रुपये में बिजली कनेक्शन दिए जा रहे हैं तथा डेयरी विकास के लिए 40 लाख रुपये तक की योजना में 33 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान किया गया है।

 

प्राकृतिक खेती पर फोकस-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन  यादव ने किसानों से आह्वान किया कि वे आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक सलाह, प्राकृतिक खेती और जल संरक्षण के सिद्धांतों को अपनाकर कृषि को अधिक लाभकारी बनाएं। केंद्र और राज्य सरकार किसान हितों की रक्षा तथा कृषि विकास के लिए हर संभव सहयोग देने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “प्राकृतिक खेती” के विजन को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत झाबुआ जिले में 50 कृषि सखियों का चयन किया गया है। जिले में वर्तमान में लगभग 3,125 एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती की जा रही है तथा किसानों की प्राकृतिक खेती का प्रमाणीकरण भी कराया गया है। उन्होंने कहा कि “एक जिला-एक उत्पाद” योजना के माध्यम से कड़कनाथ को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वर्ष 2025 में जिले में कड़कनाथ पालन से एक हजार से अधिक नए हितग्राही जोड़े गए हैं।

 

रोजगार एवं औद्योगिक विकास को मिलेगी नई गति-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कृषि के साथ पशुपालन किसानों की नियमित आय का मजबूत आधार बन सकता है। पशुपालन विभाग की हितग्राहीमूलक योजनाओं के माध्यम से डेयरी, बकरी पालन, मुर्गी पालन सहित अन्य गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। उन्होंने मत्स्य पालन क्षेत्र का उल्लेख करते हुए बताया कि जिले में 760 से अधिक तालाबों का विकास किया गया है, जिनमें लगभग तीन हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मत्स्य पालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नगदी फसल के रूप में कपास उत्पादन को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। खरीफ-2026 में अब तक जिले में 23 हजार 230 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बोवनी हो चुकी है, जो पिछले वर्ष के 19 हजार 888 हेक्टेयर की तुलना में लगभग 16 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि धार जिले के बदनावर स्थित पीएम मित्रा पार्क से झाबुआ के कपास उत्पादक किसानों को “खेत से कारखाने” तक की सुविधा मिलेगी, जिससे किसानों की आय, रोजगार एवं औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।

 

झाबुआ का टमाटर बना प्रदेश की पहचान-मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने पेटलावद में स्थापित टमाटर प्रसंस्करण इकाई का उल्लेख करते हुए कहा कि जिले में 2,812 हेक्टेयर क्षेत्र में टमाटर की खेती की जा रही है तथा लगभग 1.68 लाख मीट्रिक टन उत्पादन हो रहा है। यहां टमाटर उत्पादक किसानों का क्लस्टर विकसित किया गया है तथा टमाटर सॉस और केचअप का उत्पादन किया जा रहा है। इसके अलावा 12 सोलर ड्रायर यूनिट स्थापित कर टमाटर का डिहाइड्रेशन भी किया जा रहा है। झाबुआ का टमाटर राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा तथा दिल्ली सहित देश के विभिन्न राज्यों में भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि नर्मदा-झाबुआ-पेटलावद-थांदला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना पूर्ण होने पर लगभग 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित होगा तथा करीब 50 हजार किसानों को लाभ मिलेगा। इससे जल संरक्षण, सिंचाई दक्षता एवं कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा कम पानी में अधिक उत्पादन संभव हो सकेगा।

 

महोत्सव की गतिविधियां-बलराम कृषि महोत्सव में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत बीजों, नवीन कृषि यंत्रों, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, फसल विविधीकरण, जल संरक्षण तथा शासन की किसान हितैषी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है जिससे खेती अधिक लाभकारी, टिकाऊ एवं समृद्ध बन सके। महोत्सव में कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले उत्कृष्ट किसानों का सम्मान भी किया जा रहा है। साथ ही विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को लाभ वितरण, कृषि यंत्रों एवं उन्नत तकनीकों का प्रदर्शन तथा किसानों को तकनीकी साहित्य भी उपलब्ध कराया जा रहा है। महोत्सव में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता, कृषि अभियांत्रिकी तथा अन्य संबंधित विभागों द्वारा आकर्षक प्रदर्शनी लगाई गई है। किसानों को विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों से सीधे संवाद का और अपनी समस्याओं के समाधान किया जा रहा है। साथ ही उन्हें नवीन तकनीकों एवं बाजार आधारित कृषि मॉडल की जानकारी भी मिलेगी। किसानों को डिजिटल कृषि सेवाओं, ऑनलाइन कृषि परामर्श, मौसम आधारित खेती, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, ड्रोन तकनीक, स्मार्ट सिंचाई, उन्नत कृषि यंत्रों तथा आधुनिक कृषि प्रबंधन प्रणालियों की जानकारी मिल रही है। किसानों को बदलती जलवायु के अनुरूप खेती की नई पद्धतियों एवं जोखिम प्रबंधन के उपायों से भी अवगत कराया जा रहा है।

 

13 नवम्बर तक होंगे आयोजन

कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य, सहकारिता, एमएसएमई, राजस्व, ऊर्जा सहित 16 विभागों को एक मंच पर लाकर किसानों के समग्र विकास का अभियान है। किसानों की आय बढ़ाने के लिये रोडमैप तैयार किया गया है। यह महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराने, प्रसंस्करण, विपणन और रोजगार से जोड़ने का व्यापक अभियान है। प्रदेश के सभी जिलों में आगामी 13 नवम्बर तक अनेक आयोजन होंगे और खेती-किसानी पर आधारित गतिविधियां आयोजित की जायेंगी।

 

6 प्रमुख कृषि संकल्प-बलराम कृषि महोत्सव में कृषि विभाग के साथ उद्यानिकी, पशुपालन, सहकारिता, कृषि अभियांत्रिकी, ग्रामीण विकास तथा अन्य संबंधित विभागों की सक्रिय भागीदारी है। महोत्सव के माध्यम से किसानों को 6 प्रमुख कृषि संकल्पों से जोड़ा गया है।

 

– प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा।

– जल संरक्षण एवं “हर खेत को पानी” की दिशा में प्रयास।

– कृषि यंत्रीकरण एवं आधुनिक तकनीकों का विस्तार।

– फसल विविधीकरण एवं मूल्य संवर्धन।

– किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) तथा कृषि उद्यमिता को प्रोत्साहन।

– शासन की किसान कल्याणकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ किसानों तक पहुंचाना।

दतिया उपचुनाव में जीतू पटवारी ने लगाया गले तो आशुतोष तिवारी ने मंच से ही मांग लिए बीजेपी के लिए वोट

मध्य प्रदेश की हाईप्रोफाइल दतिया विधानसभा उपचुनाव के रण में राजनीतिक सरगर्मियों के बीच लोकतंत्र की एक बेहद खूबसूरत और दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। विधानसभा के  चिरूला गांव में चुनावी जनसंपर्क के दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी का न सिर्फ आमना-सामना हुआ, बल्कि दोनों नेताओं ने बेहद गर्मजोशी से एक-दूसरे को गले भी लगाया। इस दौरान मंच से हुई हंसी-ठिठोली और अनोखे सियासी संवाद का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

 

क्या है पूरा मामला?- दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी चिरूला गांव में कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर घनश्याम सिंह के समर्थन में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान वहां से भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी का काफिला भी चुनाव प्रचार करते हुए गुजर रहा था। आशुतोष तिवारी को दूर से ही अभिवादन कर निकलते देख जीतू पटवारी ने मंच के माइक से ही उन्हें आवाज लगा दी। जीतू पटवारी ने आशुतोष तिवारी को आवाज लगाते हुए कहा कि अरे पास में आकर मिलो ना, दूर से क्यों जा रहे हो यार? ऐसे नहीं चलेगा। आशुतोष भैया, अगर इतनी दूर से जाओगे तो कैसे चलेगा>

 

पटवारी के बुलाने पर बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी मुस्कुराते हुए सीधे कांग्रेस के मंच के पास पहुंच गए। जीतू पटवारी ने बड़े भाई की तरह गर्मजोशी से उन्हें गले लगाया। इसके बाद आशुतोष तिवारी ने सीधे जीतू पटवारी के हाथ से माइक ले लिया और कांग्रेस की ही सभा में मौजूद जनता को संबोधित कर दिया।

 

आशुतोष तिवारी ने मंच से कहा हमारी विचारधारा भले ही अलग-अलग है, लेकिन हमारे परिवार के रिश्ते बहुत पुराने हैं और मित्र के नाते हैं। आप सबसे मैं भी प्रार्थना करता हूँ कि आपका आशीर्वाद भारतीय जनता पार्टी को मिले। मैं हाथ जोड़कर और सिर झुकाकर आपके आशीर्वाद की अपेक्षा करता हूँ। कांग्रेस के मंच से बीजेपी प्रत्याशी द्वारा वोट मांगने की इस हिम्मत को देखकर वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए। 

 

जैसे ही आशुतोष तिवारी ने अपनी बात खत्म की, जीतू पटवारी ने दोबारा माइक संभाला और जनता के मजे लेते हुए तंज कसा। पटवारी ने हंसते हुए कहा मैंने अभी यहां जनता से पूछा था कि चुनाव लड़ने से पहले आशुतोष भैया को कभी यहां देखा है? इस पर एक भी हाथ नहीं उठा, इन्हें यहां कोई नहीं जानता। इस पर आशुतोष ने पलटकर मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि यह मेरा घर है और फिर वे वहां से आगे बढ़ गए। 

 

सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने के लिए रखीं 3 शर्तें, संसद मार्च से पहले आंदोलन में आया बड़ा मोड़

sonam wangchuk hunger strike

संसद के मानसून सत्र के पहले दिन प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च से पहले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया है। वांगचुक अपना अनशन समाप्त करने के लिए राजी है लेकिन उन्होंने इसके लिए 3 शर्ते रखी है। ALSO READ: क्‍या अनशन खत्‍म करेंगे सोनम वांगचुक, अस्पताल में ही चलेगा इलाज, अनशन को लेकर क्‍या बोली पत्‍नी?

 

क्या है सोनम वांगचुक की 3 शर्ते?

समर्थकों को लिखे पत्र में सोनम वांगचुक ने कहा कि आप में से कई लोगों ने पूछा है कि मैं अपना अनशन कब समाप्त करूंगा। जैसा कि मैंने पहले अपने समर्थकों से कहा था, मैं 20 जुलाई को अपना अनशन समाप्त कर दूंगा, यदि—

 

(क) सरकार शिक्षा व्यवस्था की हालिया विफलताओं (जैसे पेपर लीक आदि) की जिम्मेदारी स्वीकार करे।

 

(ख) यदि मैं और CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) का नेतृत्व संसद पहुंच जाएं, जहां विभिन्न राजनीतिक दलों के माननीय सांसद और नेता हमें यह आश्वासन दें कि वे इस मुद्दे को संसद में अवश्य उठाएंगे।

 

(ग) यदि मेरी स्वास्थ्य स्थिति या अन्य कारणों से यह संभव न हो, तो विभिन्न राजनीतिक दलों के माननीय सांसद और नेता इस अस्पताल में आकर मुझे ऊपर दिया गया आश्वासन दें। ALSO READ: Sonam Wangchuk News : 20 जुलाई को आजादी का दूसरा आंदोलन, सोनम का X पर पोस्ट, पत्नी की हाईकोर्ट में याचिका

 

पत्र के अंत में वांगचुक ने लिखा, सफदरजंग अस्पताल में कथित अवैध हिरासत से, जहां मेरी आवागमन की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सभी प्रकार के संचार के अधिकार पर प्रतिबंध लगाया गया है।

दिल्ली हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

दिल्ली हाईकोर्ट ने रविवार को वांगचुक को निजी अस्पताल स्थानांतरित करने की मांग पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि उनकी मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सरकार द्वारा उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराना मनमाना नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने यह भी माना कि डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं और उपचार उनकी सहमति से किया जा रहा है।

संसद मार्च पर अभिजीत दिपके का बड़ा बयान

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने कहा कि भारत के इतिहास का सबसे बड़ा मार्च होने जा रहा है। पिछले 10-12 सालों से इस देश में लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिशें की जा रही हैं। जंतर-मंतर पर एक महीने तक बैठकर आप लोगों ने लोकतंत्र को फिर से जिंदा किया है। देश भर से लोग आ रहे हैं। जब मैं अमेरिका में था, तो लोग मुझसे कहते थे कि कोई भी सड़कों पर नहीं उतरेगा कि यह सिर्फ सोशल मीडिया पर एक ट्रेंड बनकर रह जाएगा। आज जंतर-मंतर की ओर जाने वाली चारों सड़कों को देखिए; वे पूरी तरह से भरी हुई हैं… संसद जाने से हमें कोई नहीं रोक सकता।

LIVE: CJP संसद मार्च पर अड़ी, दिल्ली में धारा 163 लागू

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Latest News Today Live Updates in Hindi : संसद का मानसून सत्र आज से शुरू हो रहा है। दिल्ली पुलिस द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने के बाद भी कॉकरोच जनता पार्टी संसद मार्च पर अड़ी। दिल्ली में धारा 163 लागू। पल पल की जानकारी…

जम्मू-कश्मीर: कल रात से हो रही लगातार बारिश की वजह से रियासी ज़िले में चिनाब नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया है और नदी का पानी कई निचले इलाकों में बहने लगा है।कांग्रेस के लोकसभा सांसद विपक्ष के फ्लोर लीडर्स की बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी लेने के लिए संसद में कांग्रेस संसदीय दल (CPP) के दफ्तर में सुबह 10.30 बजे मिलेंगे।

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने कहा, 'भारत के इतिहास का सबसे बड़ा मार्च होने जा रहा है। पिछले 10-12 सालों से इस देश में लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिशें की जा रही हैं। जंतर-मंतर पर एक महीने तक बैठकर आप लोगों ने लोकतंत्र को फिर से ज़िंदा किया है। देश भर से लोग आ रहे हैं। जब मैं अमेरिका में था, तो लोग मुझसे कहते थे कि कोई भी सड़कों पर नहीं उतरेगा कि यह सिर्फ सोशल मीडिया पर एक ट्रेंड बनकर रह जाएगा। आज जंतर-मंतर की ओर जाने वाली चारों सड़कों को देखिए; वे पूरी तरह से भरी हुई हैं… संसद जाने से हमें कोई नहीं रोक सकता।'

-संसद के मानसून सत्र और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च से पहले राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

-पुलिस हाई अलर्ट पर है। 5000 से ज्यादा पुलिस और पैरामिलिट्री जवानों को तैनात किया गया है।

-संसद, इंडिया गेट और VVIP इलाकों के आस-पास के संवेदनशील क्षेत्रों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

-दिल्ली पुलिस ने इलाके में BNSS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है। 5 या उससे ज्यादा लोगों के इकट्टा होने पर रोक।

कमजोर हो सकती है दुनिया की सबसे असरदार पर्यावरण नीति ‘ईटीएस’

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टिम शाउएनबेर्ग

यूरोपीय आयोग ने यूरोप के 'एमिशन ट्रेडिंग सिस्टम' (ईटीएस) को पहले से कमजोर करने का प्रस्ताव रखा है। कार्बन की कीमत तय करने और कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन घटाने की यह व्यवस्था दुनिया के लिए एक मॉडल मानी जाती है।

 

यूरोप का कार्बन मार्केट शायद ही कभी सुर्खियों में आता है, लेकिन आज यह दुनिया की सबसे असरदार पर्यावरण नीतियों में से एक बन चुका है। यूरोपीय संघ साल 2050 तक कार्बन-न्यूट्रल (शून्य कार्बन उत्सर्जन वाला समूह) बनना चाहता है और उसका कार्बन मार्केट इस बड़े लक्ष्य को हासिल करने का सबसे मुख्य हथियार है। ALSO READ: जर्मन पुलिस को ज्यादा अधिकार दिए जाने पर क्यों मचा है बवाल

 

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए 2040 का अंतरिम लक्ष्य बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए ईयू का कार्बन मार्केट उसका सबसे प्रमुख साधन है। यूरोपीय आयोग ने शुक्रवार को यूरोपीय उत्सर्जन व्यापार प्रणाली (यूरोपियन एमिशन ट्रेडिंग सिस्टम- ईटीएस) के अगले संशोधन के लिए एक संशोधन प्रस्तावित किया है। प्रस्ताव के अनुसार, यूरोपीय उद्योगों के कुछ हिस्सों को 2038 तक जलवायु को नुकसान पहुंचाने वाली ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन जारी रखने की अनुमति दी जाएगी, और उन्हें इन उत्सर्जनों के लिए भुगतान भी नहीं करना होगा। यह अवधि पहले निर्धारित समय-सीमा से चार वर्ष अधिक है। यह छूट इस्पात (स्टील) और सीमेंट निर्माण जैसे क्षेत्रों पर लागू होगी।

 

संशोधित नियमों के तहत, यूरोपीय संघ उन कंपनियों को 80 फीसदी निःशुल्क उत्सर्जन परमिट अग्रिम रूप से देगा, जिन्होंने अपने संचालन को कम-कार्बन बनाने (डीकार्बोनाइजेशन) में निवेश करने की योजना प्रस्तुत की है। बाकी के 20 फीसदी परमिट तभी दिए जाएंगे, जब कंपनियां इन निवेश योजनाओं को वास्तव में लागू कर देंगी। यूरोपीय संघ के सदस्य देश और यूरोपीय सांसद अगले एक वर्ष के दौरान इस संशोधन पर बातचीत करेंगे और इसके अंतिम स्वरूप पर निर्णय लेंगे।

 

उद्योग जगत के कई बड़े खिलाड़ी एक और ज्यादा मजबूत सिस्टम की उम्मीद कर रहे हैं। इनमें यूरोप के स्टील सेक्टर के वे हिस्से भी शामिल हैं जिन्होंने पहले ही पर्यावरण के अनुकूल उत्पादन में निवेश कर दिया है। लेकिन असल में यह उत्सर्जन व्यापार (एमिशन ट्रेडिंग) क्या है और यह कितनी अच्छी तरह काम करता है?

 

एमिशन ट्रेडिंग सिस्टम 'ईटीएस' क्या है?

एमिशन ट्रेडिंग सिस्टम (ईटीएस) प्रदूषण की कीमत तय करता है। इस स्कीम के तहत, कंपनियों को उन ग्रीनहाउस गैसों के लिए परमिट लेना जरूरी होता है जिनका वे उत्सर्जन करती हैं।

 

यूरोप के इस सिस्टम में हवाई यात्रा (एविएशन), तेल रिफाइनरियां, कोयले से चलने वाले बिजली घर, स्टील और सीमेंट के कारखाने, कांच और कागज का उत्पादन, साथ ही केमिकल इंडस्ट्री के कुछ हिस्से और शिपिंग शामिल हैं। ये सभी सेक्टर मिलकर यूरोपीय संघ के कुल उत्सर्जन के 40 फीसदी हिस्से के लिए जिम्मेदार हैं। इस नियम के दायरे में लगभग 10,000 औद्योगिक इकाइयां, फैक्ट्रियां और बिजली संयंत्र आते हैं।

 

इसका आइडिया बहुत सीधा है: कोई कंपनी जितना ज्यादा प्रदूषण फैलाएगी, उसे उतना ही ज्यादा भुगतान करना होगा। यूरोपीय संघ उत्सर्जन की कुल सीमा तय कर देता है और सीमित संख्या में अलाउंस (परमिट) जारी करता है। हर एक परमिट के तहत, कंपनी को निश्चित मात्रा में ग्रीनहाउस गैसें छोड़ने की इजाजत मिलती है। इन परमिट को कार्बन मार्केट में शेयर की तरह खरीदा-बेचा जा सकता है।

 

इससे कार्बन की कीमत तय हो जाती है, जिसका मकसद कंपनियों को जल्द से जल्द अपना उत्सर्जन घटाने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस यूरोपीय सिस्टम से जो भी कमाई होती है, उसका इस्तेमाल ज्यादा स्वच्छ और ग्रीन इकोनॉमी (पर्यावरण के अनुकूल अर्थव्यवस्था) की तरफ बढ़ने के लिए किया जाता है। जलवायु से जुड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए, हर साल उत्सर्जन की इस अधिकतम सीमा को घटाया जाता है। मौजूदा नियमों के मुताबिक, इसमें हर साल 4।3 फीसदी की कटौती की जाती है। ALSO READ: टैक्स चोरी रोक कर अरबों यूरो कमाना चाहती है जर्मन सरकार

 

यह सिस्टम कहां काम करता है और कहां कमजोर पड़ जाता है?

यूरोपीय संघ की पर्यावरण संस्था ‘यूरोपियन एनवायरनमेंट एजेंसी' के मुताबिक, इस सिस्टम के सबसे बेहतरीन नतीजे बिजली और ऊर्जा क्षेत्र में देखने को मिले हैं। इस योजना के दायरे में आने वाली सभी फैक्ट्रियों और औद्योगिक ठिकानों से होने वाला उत्सर्जन साल 2005 से 2024 के बीच 51 फीसदी तक कम हो गया है। यहां तक कि सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाली स्टील इंडस्ट्री भी अब इस स्कीम के शुरू होने से, पहले की तुलना में लगभग 20 फीसदी कम कार्बन का उत्सर्जन कर रही है।

 

हालांकि, एविएशन सेक्टर की कहानी कुछ अलग ही है। गैर-सरकारी संगठन ‘कार्बन मार्केट वॉच' के मुताबिक, इस सेक्टर में उत्सर्जन लगातार बढ़ रहा है, क्योंकि यह ईटीएस सिस्टम विमानन क्षेत्र से पर्यावरण को पहुंचने वाले कुल नुकसान के सिर्फ बहुत छोटे हिस्से को ही कवर करता है। इस सिस्टम का जो सबसे बड़ा और असरदार हथियार है, वही इसकी सबसे मुख्य कमजोरी भी है: वह है उत्सर्जन के परमिट मुफ्त में बांटना यानी फ्री अलाउंस।

 

इन्हें एक अस्थायी कदम के रूप में शुरू किया गया था, ताकि बदलाव के इस दौर में उद्योगों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके। लेकिन ईटीएस सिस्टम शुरू होने के दो दशक बाद भी ये मुफ्त परमिट बड़े पैमाने पर बांटे जा रहे हैं। ‘कार्बन मार्केट वॉच' के मुताबिक, उद्योगों से होने वाले कुल उत्सर्जन का करीब 90 फीसदी हिस्सा आज भी इन मुफ्त परमिटों (फ्री अलाउंस) के दायरे में आता है। इसका सीधा मतलब यह है कि उद्योगों को अपने कुल सीओ2 उत्सर्जन के सिर्फ बहुत छोटे हिस्से के लिए ही पूरी कीमत चुकानी पड़ती है।

 

मौजूदा योजना इन मुफ्त परमिटों को धीरे-धीरे पूरी तरह खत्म करने की है, लेकिन उद्योगों के संगठन इस कदम का कड़ा विरोध कर रहे हैं। कार्बन मार्केट वॉच में ईयू पॉलिसी हेड विजनैंड स्टोफ्स ने कहा, “अगर सीधे शब्दों में कहें, तो बड़ी तेल और पेट्रोकेमिकल कंपनियां इसके खिलाफ सबसे ज्यादा लॉबिंग कर रही हैं। उनका साथ कुछ ऐसे बड़े मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर भी दे रहे हैं, जो मुख्य रूप से कोयले पर निर्भर हैं।” स्टोफ्स का कहना है कि कुछ कंपनियों को जरूरत से ज्यादा अलाउंस मिलते हैं और वे बाकी बचे हुए अलाउंस बेच देती हैं, जिससे उन्हें मुनाफा होता है। ALSO READ: बांग्लादेशी शिक्षा मंत्री का इस्तीफा क्यों मांगा जा रहा है?

 

ईयू का कार्बन मार्केट: क्या इस ग्लोबल ब्लूप्रिंट में काफी कमियां हैं?

वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, दुनिया भर में अब 35 से ज्यादा एमिशन ट्रेडिंग सिस्टम काम कर रहे हैं। स्टोफ्स का कहना है कि इसकी एक वजह यह है कि यूरोपीय संघ ने इस दिशा में सबसे पहले कदम उठाए थे और उसका सिस्टम दूसरे देशों के लिए एक ब्लूप्रिंट बन गया। एक और चीज है, यूरोपीय संघ का ‘कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म' (सीबीएएम), जो बाहर से आने वाले कुछ खास सामानों पर कार्बन टैक्स लगाता है। इसका मकसद यह पक्का करना है कि जिन देशों में पर्यावरण के नियम ढीले हैं, वहां से आने वाला सामान यूरोप के सख्त नियमों के तहत बने सामानों के मुकाबले बाजार में अनुचित फायदा न उठा सके।

 

स्टोफ्स ने कहा, “सीबीएएम की शुरुआत की वजह से दुनिया भर में एमिशन ट्रेडिंग सिस्टम को अपनाने में काफी तेजी आई है। इंडोनेशिया, फिलीपींस, भारत और तुर्की, ये सभी देश या तो पहले ही ऐसा सिस्टम बना चुके हैं या बहुत ही तेजी से इस पर काम कर रहे हैं। वे इसे ‘ब्रसेल्स इफेक्ट' के रूप में देखते हैं। इसका मतलब है, यूरोपीय संघ के कानूनों की वह ताकत, जिससे वे यूरोप की सीमाओं से बहुत दूर तक के नियमों और नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा, “हम कार्बन की कीमत तय करते हैं। दूसरे देश भी ऐसा ही कर रहे हैं और हमें इसी की जरूरत है। अगर हर कोई कार्बन की कीमत तय करता है, तो किसी को भी प्रतिस्पर्धा में नुकसान नहीं होगा। बल्कि, हमारे पास जलवायु परिवर्तन से जुड़ी समस्या को हल करने का मौका होगा।”

 

दूसरे देश भी यूरोप की कुछ गलतियों को दोहरा सकते हैं। स्टोफ्स तुर्की और दक्षिण कोरिया का उदाहरण देते हैं। यूरोपीय सिस्टम के शुरुआती सालों की तरह वहां की कंपनियां विदेशों में प्रोजेक्ट के जरिए अपने उत्सर्जन के कुछ हिस्सों की भरपाई कर सकती हैं या कर सकती थीं। ऑफसेटिंग से कंपनियों को उत्सर्जन जारी रखने की सुविधा मिलती है और इसके बदले में कहीं और चल रहे प्रोजेक्ट, जैसे पेड़ लगाने की योजनाओं को पैसा दे सकती हैं। लेकिन पर्यावरण संगठनों का तर्क है कि यह तरीका अक्सर पारदर्शी नहीं होता और इससे हमेशा उत्सर्जन में वास्तविक तौर पर कमी नहीं आती है।

 

विश्व बैंक का एक विश्लेषण भी इस बारे में बड़ा सबक देता है। इसमें पाया गया कि न्यूजीलैंड के ‘एमिशन ट्रेडिंग सिस्टम' से वहां कार्बन डाइऑक्साइड से होने वाले प्रदूषण पर कोई खास असर नहीं पड़ा। इसकी एक सबसे बड़ी वजह यह थी कि कृषि क्षेत्र, जो न्यूजीलैंड के कुल राष्ट्रीय प्रदूषण के लगभग आधे हिस्से के लिए जिम्मेदार है, उसे इस पूरे सिस्टम से बाहर रखा गया था। ALSO READ: एआई प्रेमियों से बिछड़ने के गम में डूबे चीन के यूजर

 

ब्रसेल्स में लड़ाई

यूरोप के कार्बन मार्केट का अगला दौर कैसा होगा, इसकी लड़ाई अभी ब्रसेल्स में चल रही है। हाल ही में लिखे एक पत्र में, स्वीडन की ईयू मामलों की मंत्री जेसिका रोजेनक्रांत्स ने कहा, “इंडस्ट्रियल ट्रांजिशन (उद्योगों के पर्यावरण के अनुकूल बदलाव) के लिए निवेश को बढ़ावा देने के मकसद से, लीनियर रिडक्शन फैक्टर यानी प्रदूषण की तय सीमा में हर साल की जाने वाली कटौती को काफी ऊंचे स्तर पर बनाए रखना सबसे जरूरी बात है।” उन्होंने यह भी मांग की कि कचरा जलाने से होने वाले उत्सर्जन को भी कार्बन प्राइसिंग के दायरे में लाया जाए।

 

इसके उलट, कुछ व्यावसायिक घराने इसका बिल्कुल उल्टा चाहते हैं। वे दबाव बना रहे हैं कि इस योजना के मुख्य हिस्सों को या तो टाल दिया जाए या फिर कमजोर कर दिया जाए। उनकी मांगों में मुफ्त परमिट (फ्री अलाउंस) को खत्म करने की रफ्तार को धीमा करना और 2040 के लिए यूरोपीय संघ की जलवायु रणनीति को थोड़ा नरम बनाना शामिल है। लॉबी ग्रुप ‘बिजनेसयूरोप' का तर्क है कि महंगाई, भू-राजनीतिक टकराव, वैश्विक व्यापार पर लगी पाबंदियां, सेना और रक्षा पर होने वाला भारी खर्च और यूरोप की कमजोर अर्थव्यवस्था पहले से ही उद्योगों को भारी दबाव में डाल रही है। उनका कहना है कि ऐसे में कार्बन की कीमतों में और बढ़ोतरी होने से उन सेक्टर पर बोझ बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा जो पहले से ही महंगाई और इन भू-राजनीतिक विवादों की मार झेल रहे हैं।

 

यूरोपीय संसद के सबसे बड़े राजनीतिक गुट, कंजर्वेटिव ईवीपी के पर्यावरण नीति प्रवक्ता का तर्क है कि मुफ्त अलाउंस बंद करने की समय-सीमा को साल 2039 के बाद तक आगे बढ़ा दिया जाना चाहिए। हालांकि, वे यह भी कहते हैं कि कंपनियों को ये मुफ्त परमिट केवल कुछ खास शर्तों के पूरा होने पर ही मिलने चाहिए। प्रवक्ता ने कहा, “कंपनियां अपने फ्री अलाउंस का फायदा उठाकर यूरोप से बाहर निवेश करें, यह अब बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सबसे सही तरीका यह होगा कि इन्हें उसी खास जगह पर निवेश करने की शर्त से जोड़ दिया जाए जहां वे काम कर रही हैं। इस तरह, हम नौकरियां भी सुरक्षित रख पाएंगे और साथ ही एक औद्योगिक केंद्र के रूप में यूरोप को ज्यादा मजबूत बना सकेंगे।”

 

इस राजनीतिक लड़ाई के नतीजे पहले ही सामने आ चुके हैं। इमारतों और सड़क परिवहन में इस्तेमाल होने वाले ईंधन के लिए यूरोप का दूसरा ‘एमिशन ट्रेडिंग सिस्टम' असल में 2027 में शुरू होना था। राजनीतिक दबाव के कारण इसे 2028 तक टाल दिया गया। जर्मन एनवायरनमेंट एजेंसी (यूबीए) ने और देरी या नियमों को कमजोर करने के खिलाफ चेतावनी दी है। एजेंसी का कहना है कि अगर ईयू को अपने जलवायु लक्ष्यों को हासिल करना है, तो फ्री अलाउंस को सीमित करना और एक मजबूत कार्बन बाजार बनाए रखना बहुत जरूरी है।

Top News 20 July: संसद का मानसून सत्र, CJP का संसद मार्च, स्पेन बना फीफा वर्ल्ड चैंपियन

top news 20 july

Top News 20 July : संसद का मानसून सत्र आज से शुरू हो रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी का संसद मार्च आज, दिल्ली पुलिस ने नहीं दी अनुमति। ट्रंप ने रिपब्लिकन सांसदों से रूस पर प्रस्तावित प्रतिबंध विधेयक में ईरान को भी शामिल करने की मांग की है। स्पेन ने 16 साल बाद फीफा वर्ल्ड कप जीता। इंग्लैंड ने तीसरे वनडे में भारत और 27 रनों से हराया। 20 जुलाई की बड़ी खबरें : 

 

आज से संसद का मानसून सत्र

संसद का मानसून सत्र आज से शुरू हो रहा है। चढ़ावा चोरी, नीट परीक्षा आदि मामलों पर संसद में हंगामा हो सकता है। राष्ट्रगीत का अपमान करने वालों के खिलाफ कड़े प्रावधान वाला 'वंदे मातरम बिल' समेत पांच नए विधेयक भी इस सत्र में पेश होने जा रहे हैं। DMK ने परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पर सरकार को समर्थन देने के संकेत दिए।

 

CJP का संसद मार्च

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर धरना दे रहे कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े प्रदर्शनकारी आज संसद मार्च करेंगे। दिल्ली पुलिस ने मार्च की अनुमति नहीं दी है। राष्‍ट्रीय राजधानी में धारा 163 लागू। लिहाजा, जंतर-मंतर के चारों तरफ बैरिकेडिंग कर दी गई है।  

 

रूस पर शिकंजे वाले बिल में ईरान भी!

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रिपब्लिकन सांसदों से रूस पर प्रस्तावित प्रतिबंध विधेयक में ईरान को भी शामिल करने की मांग की है। यह विधेयक रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले शीर्ष देशों पर भारी आयात शुल्क लगाने का प्रावधान करता है। इनमें भारत भी शामिल है।

 

स्पेन ने 16 साल बाद फीफा वर्ल्ड कप जीता

स्पेन ने अर्जेंटीना के 1-0  से हराकर दूसरी बार फीफा वर्ल्ड कप का खिताब जीत लिया। टीम ने न्यूयॉर्क के न्यू जर्सी स्टेडियम में खेले गए फाइनल में 2022 की चैंपियन अर्जेंटीना को 1-0 से हराया। स्पेन के लिए एक्स्ट्रा टाइम में फेरन टोरेस ने गोल किया। स्पेन ने इससे पहले 2010 में फीफा विश्‍व कप जीता था। फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 में सबसे ज्यादा गोल फ्रांस के किलियन एम्बाप्पे ने किए। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 10 गोल और 4 असिस्ट के साथ गोल्डन बूट अपने नाम किया। ALSO READ: स्पेन ने अर्जेंटीना का सपना तोड़ा, 1-0 से जीतकर दूसरी बार बना FIFA वर्ल्ड कप चैंपियन; फेरन टोरेस ने किया विजयी गोल

 

27 रनों से जीता इंग्लैंड

इंग्लैंड ने लॉर्ड्स के एतिहासिक मैदान पर भारत के खिलाफ 27 रनों से जीत पाकर 3 मैचों की सीरीज को 2-1 से अपने नाम कर लिया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने 3 विकेट खोकर 387 रन बनाए। इसके जवाब में भारत की टीम रोहित शर्मा के शतक के बावजूद 360 रन ही बना सकी। ALSO READ: स्पेन ने अर्जेंटीना का सपना तोड़ा, 1-0 से जीतकर दूसरी बार बना FIFA वर्ल्ड कप चैंपियन; फेरन टोरेस ने किया विजयी गोल