सोनम वांगचुक के समर्थन में उतरे कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा, सांसदी छोड़ने की दी चेतावनी, जंतर-मंतर लाठीचार्ज का भी विरोध

sonam wangchuk hunger strike

भोपाल। नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में कांग्रेस नेताओं ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर केंद्र सरकार को जमकर घेरा। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतंत्र और छात्रों की आवाज़ पर हमला बताते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने जंतर-मंतर की घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन उपवास समाप्त हो, यह सुनिश्चित करना संसद, सरकार और न्यायपालिका सभी की सामूहिक ज़िम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि वांगचुक को कोई नुकसान पहुंचता है, तो यह पूरे देश की सामूहिक विफलता होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो “कम से कम मैं सांसद बने रहना बिल्कुल पसंद नहीं करूंगा,” जिससे उन्होंने अपने सांसद पद से इस्तीफा देने की मंशा भी जताई।

 

वहीं, पूर्व मंत्री और कांग्रेस  विधायक सचिन यादव ने विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश तानाशाही और हिटलरशाही की ओर बढ़ रहा है। सत्ता के संरक्षण में चल रहे माफियाओं ने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा देने की मांग की।

 

सचिन यादव ने कहा कि जंतर-मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज करना, आंसू गैस के गोले दागना और उनकी आवाज़ को दबाने का प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि छात्रों की आवाज़ दबाने की यह कार्रवाई आने वाले समय में सरकार को राजनीतिक रूप से भारी पड़ेगी।

 

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और सरकार को दमनकारी रवैया छोड़कर छात्रों की मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार करना चाहिए।

 

CJP का दावा- अभिजीत दिपके, गीतांजलि, शबाना आजमी और प्रकाश राज वाले ट्रक पर पुलिस ने किया हमला

cjp protest and delhi police

CJP Protest : कॉकरोच जनता पार्टी ने मंगलवार को दावा किया कि पुलिस ने उस ट्रक पर हमला किया, जिसमें CJP के फांउडर अभिजीत दिपके, सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि, शबाना आजमी और प्रकाश राज मौजूद थे। ALSO READ: जब Gen-Z सड़कों पर उतरी, हिल गईं सरकारें! 5 साल में 5 देशों में गिरी सरकारें, कहीं राष्ट्रपति भागे तो कहीं PM ने छोड़ी कुर्सी

 

कॉकरोच इज बैक नामक सोशल मीडिया अकाउंट से एक्स पर पोस्ट में कहा गया, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके, गीतांजलि जी (सोनम सर की पत्नी), शबाना आजमी और प्रकाश राज सभी इसी ट्रक में मौजूद थे, जिस पर पुलिस ने कथित तौर पर बर्बरतापूर्वक हमला किया।

 

 उन्होंने ट्रक को रास्ता दिखाने में मदद कर रहे एक प्रदर्शनकारी को घसीट लिया और उसे पीटने के लिए उसका पीछा किया। पुलिस को लगा कि हम डर जाएंगे, लेकिन वे गलत हैं। लड़ेंगे, जीतेंगे!

CJP का कहना है कि प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की गई और कई लोगों को चोटें आईं। पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने छात्रों को पुलिस की पिटाई से नहीं बचा पाने पर माफी भी मांगी है। ALSO READ: अभिजीत दिपके ने छात्रों से मांगी माफी, बोले- आपको पुलिस की हिंसा से नहीं बचा सका


मारपीट के आरोपों पर क्या बोलीं दिल्ली पुलिस? 

पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर भरोसा न करने और केवल आधिकारिक जानकारी पर ध्यान देने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर गीतांजलि नाम की 12 साल की लड़की के साथ मारपीट, बाल खींचने और सिर में चोट लगने, और साथ ही लगभग 40 से 50 अन्य लोगों के सिर फूटने के दावों वाली पोस्ट के ज़रिए गलत जानकारी फैलाई जा रही है। यह जानकारी गलत है। पोस्ट में किए जा रहे दावे सच नहीं हैं। ALSO READ: 118 पुलिसकर्मी घायल, 60 प्रदर्शनकारियों को भी चोट, बैरिकेड तोड़े, पथराव किया, CJP के प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने क्या कहा

 

पुलिस ने जंतर मंतर से संसद तक प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ अब तक कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन, पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन और अन्य पुलिस स्टेशनों में 5 FIR दर्ज की हैं। अभी और FIR दर्ज होने की संभावना है। CCTV फुटेज की मदद से आरोपियों की पहचान की जा रही है।

मध्यप्रदेश में गुरु पूर्णिमा पर होंगे सांदीपनि विद्यालयों के लोकार्पण,CM डॉ. मोहन यादव ने दिए निर्देश

भोपाल। मध्यप्रदेश में मोहन सरकार गुरु पूर्णिमा महोत्सव के तौर पर पूरे प्रदेश में मनाने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि गुरुजन सदैव पूजनीय है, वंदनीय हैं। गुरु ही हमें 'गु' (अज्ञान के अंधकार) से 'रु' (ज्ञान-विज्ञान की रश्मि/प्रकाश) की ओर ले जाते हैं। गुरु पूर्णिमा अपने गुरुजनों की सेवा, वंदना और उनका शुभाशीष पाने का प्रमुख उत्सव है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति – 2020 के उद्देश्यों को बढ़ावा देते हुए पुरातन भारतीय ज्ञान परम्परा तथा भारतीय गुरु-शिष्य परम्परा के आदर्शों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। उन्होंने कहा कि आने वाली गुरु पूर्णिमा पर प्रदेशव्यापी 'महर्षि सांदीपनि श्रृद्धा पर्व' का आयोजन किया जाये। इसमें स्कूल शिक्षा, जनजातीय कार्य, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा विभाग के साथ-साथ निजी शिक्षण संस्थानों तथा खेल, नाटक, चित्रकला, संगीत एवं अन्य कला संस्थानों की भी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाए।

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अभी प्रदेश में गुरु पूर्णिमा पखवाड़ा चल रहा है। प्रदेश में जितने भी सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण होना शेष है, उनका लोकार्पण गुरु पूर्णिमा से पहले करा लिया जाए। महर्षि सांदीपनि योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के गुरु थे। उन्होंने तत्समय अमीर और गरीब सभी छात्रों को पढ़ाकर राष्ट्र भक्ति का परिचय दिया। वहीं देश में गुरुकुल शिक्षा पद्धति को व्यवस्थित करने में प्रभावी योगदान दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि महर्षि सांदीपनि के जीवन चरित्र एवं गुरुकुल शिक्षा पद्धति के प्रसार में उनके वैशिष्ट्य और योगदान पर केंद्रित एक लघु पुस्तिका (10-20 पृष्ठों की) का प्रकाशन कराएं और सभी विद्यालयों में वितरित करायें। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्‍थाओं में गुरु पूजन आयोजन किया जाये। इसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष विद्यालयों में मनाये जाने वाले मित्रता दिवस पर श्रीकृष्ण-सुदामा के जीवन चरित्र के बारे में बताया जाए। 

 

गुरु पूर्णिमा को जनभागीदारी का उत्सव बनाएं-बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि गुरु पूर्णिमा को 'महर्षि सांदीपनि श्रद्धा पर्व' के रूप में मनाकर व्यापक एवं गरिमामय आयोजन किया जाए, जिससे नई पीढ़ी भारतीय ज्ञान परम्परा और गुरु-शिष्य परम्परा के आदर्शों से प्रेरित हो सके। उन्होंने कहा कि इसे जनभागीदारी का उत्सव बनाया जाए, जिससे विद्यार्थियों और युवाओं में अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति आस्था सुदृढ़ हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शासकीय विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के साथ-साथ निजी विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों को भी इस आयोजन से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा को सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक जन-आंदोलन का स्वरूप दिया जाए, ताकि गुरु-शिष्य परम्परा का संदेश समाज के प्रत्येक वर्ग तक प्रभावी ढंग से पहुंचे और इसे नई पीढ़ी तक सशक्त रूप से पहुंचाया जा सके। बैठक में आयोजन की रूपरेखा, कार्यक्रमों के स्वरूप तथा विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

 

गुरु पूर्णिमा (29 जुलाई) के दिन शैक्षणिक संस्थाओं में होने वाले कार्यक्रमों में सर्वप्रथम मां सरस्वती की प्रतिमा-चित्र पर माल्यार्पण, सरस्वती वंदना, गुरुजनों का स्वागत-सत्कार-सम्मान, व्याख्यान-उद्बोधन, छात्र-शिक्षक संवाद, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं अन्य प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी शैक्षणिक संस्‍थान विद्यालय, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय में विभिन्न गतिविधियों के आयोजन के लिए दिशा निर्देश जारी किए जा रहे हैं। सभी शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विश्‍वविद्यालयों में साहित्‍यिक एवं सांस्‍कृतिक कार्यक्रम विद्यार्थियों द्वारा ही किए जायें, ऐसे निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि गुरु पूर्णिमा और महर्षि सांदीपनि श्रद्धा पर्व के आयोजन से समाज की भी सक्रिय सहभागिता के प्रयास किए जा रहे हैं।

अभिजीत दिपके ने छात्रों से मांगी माफी, बोले- आपको पुलिस की हिंसा से नहीं बचा सका

abhijeet dipke at jantar mantar

CJP Protest : कॉकरोच जनता पार्टी के जंतर मंतर से संसद तक मार्च के दौरान पुलिस द्वारा छात्र प्रदर्शनकारियों से मारपीट से सीजेपी नेता अभिजीत दीपके बेहद दुखी है। उन्होंने पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा महिलाओं की पिटाई से उन्हें नहीं बचा पाने पर माफी भी मांगी। ALSO READ: जब Gen-Z सड़कों पर उतरी, हिल गईं सरकारें! 5 साल में 5 देशों में गिरी सरकारें, कहीं राष्ट्रपति भागे तो कहीं PM ने छोड़ी कुर्सी

 

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, मैं अपने सभी समर्थकों से, विशेषकर उन युवा महिलाओं से, जिनके साथ पुरुष पुलिसकर्मियों ने बेहद क्रूरता से मारपीट की, दिल से क्षमा मांगता हूं।

 

दिपके ने कहा कि हमें इससे बेहतर करना चाहिए था। मुझे आपको उन अमानवीय कार्रवाइयों से बचाने के लिए और बेहतर प्रयास करना चाहिए था, जिन्हें हम दिल्ली पुलिस द्वारा किया गया मानते हैं। ALSO READ: CJP protest Photos : CJP के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की 10 तस्वीरें, देखें पूरे दिन क्या हुआ

 

उन्होंने कहा कि एक मंत्री, धर्मेंद्र प्रधान, को बचाने के लिए सरकार अनेक और युवा छात्रों को पीड़ा झेलने देने के लिए तैयार थी। शिक्षा और जवाबदेही की मांग करने वाले किसी भी व्यक्ति को हिंसा का सामना नहीं करना चाहिए। यदि आप इस कार्रवाई में घायल हुए हैं और यह संदेश पढ़ रहे हैं, तो कृपया मुझे डायरेक्ट मैसेज (DM) करें।

 

सीजेपी नेता ने कहा कि मैं आपसे व्यक्तिगत रूप से बात करना चाहता हूं और आपसे क्षमा मांगना चाहता हूं। 

यह घटना हमारे संकल्प को कमजोर नहीं करेगी। हम न्याय, जवाबदेही और हर छात्र की आवाज़ सुने जाने के अधिकार के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे।

 

इस बीच दिल्ली पुलिस ने दावा किया कि सोशल मीडिया पर गीतांजलि नाम की 12 साल की लड़की के साथ मारपीट, बाल खींचने और सिर में चोट लगने, और साथ ही लगभग 40 से 50 अन्य लोगों के सिर फूटने के दावों वाली पोस्ट के ज़रिए गलत जानकारी फैलाई जा रही है। यह जानकारी गलत है। पोस्ट में किए जा रहे दावे सच नहीं हैं।

मध्यप्रदेश विधानसभा में आज UCC पर चर्चा, बोले सीएम डॉ. मोहन यादव, मुस्लिम बहनों को मिलेगी हलाला जैसी कई परेशानियों से राहत

cm mohan yadav

मध्यप्रदेश विधानसभा में आज UCC विधेयक पर चर्चा होगी। सोमवार से शुरु हुए विधानसभा सत्र में सरकार ने UCC विधेयक को पेश किया। सदन में  विधेयक पेश होने के बाद यूसीसी की सबसे बड़ा फायदा मुस्लिम बहनों को होगा। उन्हें हलाला सहित जीवन की कई परेशानियों से मुक्ति मिलेगी। इसके अलावा उन्होंने पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों से जुड़ी योजना पर भी चर्चा की। 

 

मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने मध्यप्रदेश की धरती है। यहां राम-रहीम-रॉबिन सबके लिए एक कानून का होना आवश्यक है। इस कानून का अध्यादेश विधानसभा के पटल पर प्रस्तुत हुआ है। हम उम्मीद करते हैं कि विधानसभा के इस वर्षाकालीन सत्र में इसे कानून का रूप दें और भविष्य में सबको लाभांवित करें। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता में जो समान कानून की बात कही गई है, उसमें बड़ी संख्या में मुस्लिम बहनों को-मुस्लिम महिलाओं को लाभ मिलने वाला है।

उन्हें हलाला जैसी परेशानियों से मुक्ति मिलने वाली है। यही वजह है कि जब समान नागरिक संहिता के लिए सुझाव आए तो बड़ी संख्या में मुस्लिम बहनों ने उसका समर्थन किया है। सीएम डॉ. यादव ने कहा कि हम एक देश-एक विधान-एक प्रधान और एक व्यवस्था की राह पर चलने वाले लोग हैं। मैंने आज विपक्ष से भी कहा है कि आप और हम सब मिलकर प्रदेश की बेहतरी के लिए एकजुटता के साथ आगे बढ़ें। 

 

अपराधी को न मिले बचने का मौका

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने पुलिस भर्ती की मंजूरी दी है। 8 साल पहले सब इंस्पेक्टर की भर्ती हुई थी। पुलिस का काम बेहतर तरीके से संचालित होना चाहिए, सभी प्रकार के अपराधों पर लगाम लगनी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने नशे के खिलाफ अभिया़न चलाने की बात कही है। हम इस पर योजना बना रहे हैं। मध्यप्रदेश की पुलिस देश की बाकी पुलिस से बेहतर स्थिति में है। लेकिन, उसकी दक्षता को और निखारना है।

उन्होंने कहा कि अपराधी कोई भी हो, उसे बचने का मौका नहीं मिलना चाहिए। हमने कुछ दिन पहले सीएम हाउस में राज्य के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बैठक कर प्रमोशन और भर्ती सहित कई विषयों पर चर्चा की थी। हमारे नक्सलवादी इलाकों से अब जब नक्सली समाप्त हो गए हैं, तो वहां विकास कैसे हो, इस पर चर्चा की। मुझे संतोष है कि सभी विभागों में जो प्रमोशन हुए हैं, उनमें सबसे ज्यादा पुलिस विभाग में हुए हैं। उन्होंने कहा कि और भी भर्तियां निकाल रहे हैं। हम साल प्रमोशन की व्यवस्था कर रहे हैं।

Top News 21 July: जंतर-मंतर पर CJP का प्रदर्शन जारी, सिक्किम में सुरंग हादसा

top news 21 july

Top News 21 July : जंतर मंतर पर डटे कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनकारी, सोमवार को सीजेपी के प्रदर्शन में 118 पुलिसकर्मी घायल, 60 प्रदर्शनकारियों को भी चोट, संसद में आज भी हंगामे के आसार, सिक्किम के नामची में सुरंग हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई। 21 जुलाई की बड़ी खबरें :  

 

जंतर मंतर पर CJP का प्रदर्शन

20 जुलाई को संसद मार्च खत्म होने के बाद भी जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन जारी। तेज बारिश की वजह से कई प्रदर्शनकारियों ने मंच के नीचे बिताई रात। प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ ही पीएम मोदी के इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं। ALSO READ: जब Gen-Z सड़कों पर उतरी, हिल गईं सरकारें! 5 साल में 4 देशों में गिरी सरकारें, कहीं राष्ट्रपति भागे तो कहीं PM ने छोड़ी कुर्सी

 

118 पुलिसकर्मी घायल, 60 प्रदर्शनकारियों को भी चोट

दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोमवार को CJP के प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस का दावा है कि प्रदर्शनकारियों ने 15 से 20 सरकारी वाहनों समेत अन्य सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। 118 पुलिसकर्मी घायल, 60 प्रदर्शनकारियों को भी चोट। मामले में करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। प्रदर्शनकारियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अन्य संबंधित कानूनों के तहत एफआईआर दर्ज की जा रही है। ALSO READ: 118 पुलिसकर्मी घायल, 60 प्रदर्शनकारियों को भी चोट, बैरिकेड तोड़े, पथराव किया, CJP के प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने क्या कहा

 

संसद सत्र का दूसरा दिन

संसद के मानसून सत्र का दूसरा दिन भी हंगामेदार रहने के आसार। भारी हंगामे की वजह से सत्र के पहले दिन भी कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ था। AAP सांसद संजय सिंह ने राज्यसभा में कामकाज रोकने का नोटिस दिया है। इसमें NEET-UG प्रश्न पत्र लीक, सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की विफलता, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई और सोनम वांगचुक की सेहत पर चर्चा करने की मांग की गई है।

 

नामची में सुरंग हादसा, 7 की मौत

सिक्किम के नामची जिले में निर्माणाधीन समरदुंग (झोलुंगे) सुरंग में हुए हादसे से हड़कंप मच गया। सुरंग के भीतर मीथेन गैस रिसाव और उसके बाद हुए भूस्खलन के कारण 7 लोगों की मौत हो गई। कई मजदूरों के सुरंग में फंसे होने की आशंका है। जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी के कारण राहत अभियान बेहद कठिन बना हुआ है। टनल से मजदूरों का निकालने का अभियान जारी है। ALSO READ: सिक्किम टनल हादसा: मीथेन गैस रिसाव और भूस्खलन से 7 की मौत, कई मजदूरों के फंसे होने की आशंका

 

सैनिकों के बलिदान की बड़ी कीमत चुकाएगा ईरान

अमेरिकी सैनिकों की मौत पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बेहद नाराज हैं उन्होंने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि अब अमेरिकी सैनिकों की हत्या का बदला ईरान को कई गुना ज्यादा कीमत चुकाकर भुगतना होगा। उन्होंने इस संबंध में अपने शीर्ष रक्षा अधिकारियों को कड़े निर्देश भी जारी कर दिए हैं। 

LIVE: जंतर मंतर पर डटे प्रदर्शनकारी, बारिश की वजह से मंच के नीचे बिताई रात

delhi jantar mantar

Latest News Today Live Updates in Hindi : जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन मंगलवार को भी जारी है। अभिजीत दिपके की पार्टी ने मांगा पीएम मोदी का इस्तीफा। पल पल की जानकारी…

सिक्किम के नामची जिले में निर्माणाधीन समरदुंग (झोलुंगे) सुरंग में हुए हादसे से हड़कंप मच गया। सुरंग के भीतर मीथेन गैस रिसाव और उसके बाद हुए भूस्खलन के कारण 7 लोगों की मौत हो गई। कई मजदूरों के सुरंग में फंसे होने की आशंका है। टनल से मजदूरों का निकालने का अभियान जारी है।

AAP सांसद संजय सिंह ने राज्यसभा में कामकाज रोकने का नोटिस दिया है। इसमें NEET-UG प्रश्न पत्र लीक, सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की विफलता, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई और सोनम वांगचुक की सेहत पर चर्चा करने की मांग की गई है।

 

जंतर मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन जारी। बारिश की वजह से रातभर मंच के नीचे डटे रहे प्रदर्शनकारी। कॉकरोच जनता पार्टी अब शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ ही पीएम नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की भी मांग कर रही है।

शंभू बॉर्डर (पंजाब-हरियाणा बॉर्डर) पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। भारत-अमेरिका FTA के विरोध में किसानों के आज दिल्ली तक एक दिन के मार्च से पहले पुलिस ने बैरिकेडिंग कर दी है।

सिक्किम टनल हादसा: मीथेन गैस रिसाव और भूस्खलन से 7 की मौत, कई मजदूरों के फंसे होने की आशंका

namchi tunnel accident

सिक्किम के नामची जिले में निर्माणाधीन समरदुंग (झोलुंगे) सुरंग में हुए हादसे से हड़कंप मच गया। सुरंग के भीतर मीथेन गैस रिसाव और उसके बाद हुए भूस्खलन के कारण 7 लोगों की मौत हो गई। कई मजदूरों के सुरंग में फंसे होने की आशंका है। टनल से मजदूरों का निकालने का अभियान जारी है। ALSO READ: सिक्किम में निर्माणाधीन सुरंग में बड़ा हादसा, भूस्खलन के बाद 27 मजदूर फंसे

 

तीस्ता स्टेज-6 हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट के तहत इस टनल का निर्माण किया जा रही है। इसका निर्माण पटेल इंजीनियरिंग, NHPC की परियोजना के लिए कर रही है। मीडिया खबरों के अनुसार, टनल में अभी भी 27 मजदूर फंसे हुए हैं। इनमें से 21 कर्मचारी पटेल इंजीनियरिंग के है, जबकि 6 NHPC के बताए जा रहे हैं। हालांकि प्रशासन ने सुरंग में फंसे हुए लोगों की संख्‍या की पुष्‍टि नहीं की है। 

 

भूस्खलन होने के बाद टनल के भीतर जाने वाला रास्ता मलबा गिरने से बंद हो गया है। सूचना और जनसंपर्क विभाग ने एक बयान में कहा कि मृतकों के शवों को सिंगटम जिला अस्पताल, एसटीएनएम अस्पताल (गंगटोक) और नामची जिला अस्पताल ले जाया गया है। NDRF, SDRF, जिला पुलिस और फायर सर्विस की टीमों को तुरंत मौके पर भेजा गया। पश्चिम बंगाल से भी एक विशेष रेस्क्यू टीम बुलाई गई है।

 

 

जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी के कारण राहत अभियान बेहद कठिन बना हुआ है। कई बचावकर्मियों की हालात गैस के कारण खराब हो गई है। टनल के अंदर मीथेन गैस होने की संभावना है।

दिल्ली में छात्रों पर बर्बरता से लाठीचार्ज, पीएम मोदी चुप

CJP Protest : Delhi police lathicharge at jantar mantar

ओंकार सिंह जनौटी

बिना नेम प्लेट वाले सुरक्षाकर्मियों ने दिल्ली में संसद की तरफ मार्च कर बढ़ रहे युवाओं पर लाठीचार्ज किया है। युवा, मोदी सरकार से शिक्षा तंत्र में सुधार और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। ALSO READ: कमजोर हो सकती है दुनिया की सबसे असरदार पर्यावरण नीति 'ईटीएस'

 

नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की अगुवाई में हो रहे छात्र आंदोलन पर दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स ने लाठीचार्ज किया है। सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही कई तस्वीरों और वीडियोज में लहूलुहान युवा दिखाई पड़ रहे हैं। सड़क पर बिखरी कई चप्पलों के बीच हेल्मेट और कवच पहले सुरक्षाकर्मी उन छात्रों को पीट रहे हैं जो बिल्कुल निहत्थे थे। कुछ वीडियोज में सुरक्षाकर्मी भीड़ से अलग युवाओं को ताकत के बर्बर इस्तेमाल के साथ घसीटते भी दिख रहे हैं। नीले रंग की वर्दी में लाठीचार्ज करने वाले कई सुरक्षाकर्मियों की ड्रेस में कोई नेम प्लेट भी नहीं थी।

 

सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने प्रशासन पर “शांतिपूर्ण प्रदर्शकारियों” को “बर्बर तरीके से दबाने” के आरोप लगाए हैं। वहीं केंद्र सरकार के अधीन आने वाली दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारी, उन इलाकों में दाखिल होने की कोशिश कर रहे थे, जहां जाने की अनुमति उन्हें नहीं थी। सीजेपी के अगुवाई में देश भर से बड़ी संख्या में लोग दिल्ली पहुंचे हैं। सीजेपी ने सोमवार से शुरू होने वाले संसद के मॉनसून सत्र के दौरान “संसद चलो” का आह्वान किया था। दिल्ली पुलिस युवाओं को संसद पहुंचने से रोकने की कोशिश करती रही।

 

अलग अलग समाचार एजेंसियों और स्थानीय मीडिया के मुताबिक, कुछ जगहों पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी दागे और जमकर लाठीचार्ज भी किया। मार्च के दौरान कई युवाओं के पीठ पर बैग था और हाथ में भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा। ALSO READ: चैट जीपीटी के ज्यादा इस्तेमाल से दिमाग कमजोर होने का डर

 

नरेंद्र मोदी की राजनीतिक छवि पर गहरा बट्टा

छात्र व सामाजिक कार्यकर्ता, भारत के शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे हैं। आमरण अनशन के साथ दिल्ली के जंतर मंतर में इस आंदोलन की शुरुआत करने वाले वैज्ञानिक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ, जिस तरह से दिल्ली पुलिस ने व्यवहार किया, उससे भी यह आंदोलन और तेज हुआ है।

 

सोमवार के मार्च के दौरान राजधानी नई दिल्ली में प्रधान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे भी गूंजते रहे। करीब 21 दिन से जारी इस आंदोलन को लेकर अब तक भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोई बयान नहीं दिया है। पीएम मोदी की यही चुप्पी अब लोगों को चुभ रही है।

 

असल में अब तक मोदी अपनी एक मजबूत राजनीतिक प्रशासक वाली छवि बचाने में सफल होते रहे हैं, लेकिन यह पहला मौका है जब यह छवि तितर बितर होती नजर आ रही है।  बीजेपी शासित कई राज्यों के राम मंदिर समेत तमाम मंदिरों में चढ़ावे की चोरी के मामले सामने आ रहे हैं। दूसरी तरफ बीजेपी शासित राज्यों में भ्रष्टाचार और परिवारवाद के गंभीर मामले सामने आ रहे हैं। इन मुद्दों पर नरेंद्र मोदी चुप हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी। उल्टा, शिकायत करने वालों या दूसरे दलों के लोगों के खिलाफ ईडी या पुलिस की कार्रवाइयां किसी से छुपी नहीं हैं।

 

सोमवार को मार्च में शामिल एक योग शिक्षिका, ज्योति राजपूत ने समाचार एजेंसी एपी से कहा, “यह सड़ा हुआ सिस्टम कार्रवाई करने से इनकार करता है। ये छात्रों का दर्द नहीं देख सकता है, और इसीलिए कई लोग इस आंदोलन से जुड़ रहे हैं।” ALSO READ: बांग्लादेशी शिक्षा मंत्री का इस्तीफा क्यों मांगा जा रहा है?

 

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की युवाओं को कॉकरोच कहने वाली टिप्पणी, नीट पेपर लीक और उसके बाद कई छात्रों की आत्महत्या से उपजा यह प्रदर्शन अब सरकार के खिलाफ एक बड़े आक्रोश की शक्ल ले रहा है। नई दिल्ली में मार्च कर रही 26 साल की एक छात्रा स्नेहा के मुताबिक, “मैंने इस सरकार के लिए वोट दिया, तो अब मुझे लगता है कि वह हमारे सवालों का जवाब देने के लिए जवाबदेह है।”

 

सोमवार को संसद मार्च शुरू होने और युवाओं के काफी हद तक संसद के करीब पहुंचने के बाद बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और भारत के स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने छात्रों से धरना प्रदर्शन खत्म करने की अपील की। नड्डा ने सीजेपी के दो नेताओं से मुलाकात की और फिर हालात का सामान्य बनाने में मदद करने की अपील करते हुए इस आंदोलन को खत्म करने की अपील की।

 

वहीं सीजेपी के नेताओं ने नड्डा के सामने तीन स्पष्ट मांगें रखी हैं। ये मांगे हैं: सोनम वांगचुक की तुरंत रिहाई, धमेंद्र प्रधान का इस्तीफा और नीट परीक्षा के चलते आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा।

 

सीपीजे के नेताओं के मुताबिक, सरकार ने अब तक कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया है। वहीं सीजेपी के नेताओं का यह भी कहना है कि दिल्ली पुलिस की सोमवार को की गई कार्रवाई के बाद, जंतर मंतर पर उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।

जब Gen-Z सड़कों पर उतरी, हिल गईं सरकारें! 5 साल में 4 देशों में गिरी सरकारें, कहीं राष्ट्रपति भागे तो कहीं PM ने छोड़ी कुर्सी

Student Protests

Student Protests: कभी छात्रों को केवल विश्वविद्यालयों की राजनीति तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब दुनिया के कई देशों में वही छात्र सत्ता परिवर्तन की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं। पिछले पांच वर्षों में नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, केन्या, सर्बिया समेत कई देशों में छात्र और जेन-जी आंदोलनों ने सरकारों को झुकाया या सत्ता परिवर्तन का रास्ता बनाया। जानिए इन आंदोलनों का इतिहास, कारण और वैश्विक असर।

नेपाल में तो देखते ही देखते सत्ता Gen-Z के हाथों में आ गई। श्रीलंका में राष्ट्रपति को देश छोड़ना पड़ा, बांग्लादेश में 15 साल पुरानी सरकार गिर गई, केन्या में सरकार को टैक्स कानून वापस लेना पड़ा और सर्बिया में छात्रों के दबाव में प्रधानमंत्री ने इस्तीफा दे दिया। सवाल है—क्या दुनिया एक नए 'स्टूडेंट स्प्रिंग' के दौर में प्रवेश कर चुकी है?

छात्र राजनीति से जनक्रांति तक

युवा किसी देश का भविष्य ही नहीं, वर्तमान की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति भी होते हैं।”नेल्सन मंडेला

विश्व इतिहास गवाह है कि जब भी युवाओं ने संगठित होकर व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई, राजनीति की दिशा बदल गई। 1968 का पेरिस छात्र आंदोलन, चीन का तियानआनमेन आंदोलन, दक्षिण अफ्रीका का सोवेटो विद्रोह और अरब स्प्रिंग—इन सभी में छात्रों की निर्णायक भूमिका रही।

1968 के फ्रांसीसी छात्र आंदोलन के दौरान पूरे देश में हड़ताल और प्रदर्शन फैल गए थे। उस समय राष्ट्रपति चार्ल्स डी गॉल ने स्वीकार किया था कि देश गंभीर राजनीतिक संकट में है। हालांकि उनकी सरकार तत्काल नहीं गिरी, लेकिन आंदोलन के बाद उन्हें समय से पहले चुनाव कराने पड़े और अगले वर्ष इस्तीफा देना पड़ा। यह उदाहरण बताता है कि छात्र आंदोलनों का प्रभाव केवल विश्वविद्यालय परिसरों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी बदल सकता है।

लेकिन 2022 के बाद जो बदलाव दिखा है, वह अलग है। इस बार आंदोलनों का नेतृत्व किसी राजनीतिक दल ने नहीं, बल्कि जेन-जी (1997-2012 के बीच जन्मी पीढ़ी) ने किया। सोशल मीडिया पर संगठित, विकेंद्रीकृत और बिना किसी एक नेता के चलने वाले इन आंदोलनों ने कई देशों की राजनीति बदल दी। विशेषज्ञ इसे “डिजिटल सिविल रेजिस्टेंस” का नया मॉडल मान रहे हैं।

पिछले पांच वर्षों में जहां छात्रों ने सत्ता को चुनौती दी

1. श्रीलंका (2022): आर्थिक संकट से सत्ता परिवर्तन
2022 में श्रीलंका गहरे आर्थिक संकट में डूब गया। ईंधन, दवाइयों और खाद्य पदार्थों की भारी कमी हो गई। विश्वविद्यालयों के छात्रों और युवाओं ने “अरगलया” (संघर्ष) आंदोलन शुरू किया।
क्या हुआ?

  • राष्ट्रपति भवन पर प्रदर्शनकारियों का कब्जा।
  • राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे देश छोड़कर भागे।
  • अंततः उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।
  • दशकों से प्रभावशाली राजपक्षे परिवार की राजनीतिक पकड़ कमजोर हुई।

यह आंदोलन आज भी दुनिया के सबसे सफल शांतिपूर्ण जनआंदोलनों में गिना जाता है।

2. बांग्लादेश (2024): छात्रों ने गिराई 15 साल पुरानी सरकार
2024 में सरकारी नौकरियों में आरक्षण (कोटा) नीति के खिलाफ शुरू हुआ छात्र आंदोलन जल्द ही भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और लोकतांत्रिक अधिकारों के व्यापक आंदोलन में बदल गया।
परिणाम

  • व्यापक हिंसा और सैकड़ों लोगों की मौत।
  • प्रधानमंत्री शेख हसीना को पद छोड़ना पड़ा।
  • अंतरिम सरकार का गठन हुआ।
  • नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को अंतरिम प्रशासन की जिम्मेदारी सौंपी गई।

यह आंदोलन पूरी तरह सोशल मीडिया आधारित नेटवर्किंग, छात्र संगठनों और विकेंद्रीकृत नेतृत्व पर आधारित था।

3. केन्या (2024): टैक्स कानून वापस
केन्या में सरकार नया वित्त विधेयक (Finance Bill) लाई, जिसमें टैक्स बढ़ाने का प्रस्ताव था।

युवाओं ने क्या किया?

  • TikTok, X और Instagram के जरिए आंदोलन संगठित हुआ।
  • लाखों युवा संसद के बाहर जुटे।
  • संसद भवन में घुसने तक की नौबत आई।

नतीजा

  • सरकार ने पूरा वित्त विधेयक वापस लिया।
  • राष्ट्रपति विलियम रुटो को कई फैसले बदलने पड़े।

हालांकि सरकार नहीं गिरी, लेकिन यह दुनिया का पहला बड़ा उदाहरण बना जहां सोशल मीडिया आधारित जेन-जी आंदोलन ने आर्थिक नीति पलटवा दी।

4. सर्बिया (2024-25) : छात्रों ने प्रधानमंत्री का इस्तीफा कराया
नवी साद रेलवे स्टेशन हादसे में 15 लोगों की मौत के बाद छात्रों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन शुरू किया।
आंदोलन धीरे-धीरे राष्ट्रीय अभियान बन गया।

परिणाम

  • लाखों लोग सड़कों पर उतरे।
  • प्रधानमंत्री मिलोस वुचेविच ने इस्तीफा दिया।
  • सरकार पर व्यापक सुधारों का दबाव बना।

छात्रों की सबसे बड़ी ताकत उनका गैर-राजनीतिक और विकेंद्रीकृत संगठन माना गया।
 
5. नेपाल (2025–26) : जेन-ज़ी आंदोलन से उभरा नया नेतृत्व
 
नेपाल में 2025 में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध, भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और बेरोज़गारी के खिलाफ शुरू हुआ Gen Z आंदोलन जल्द ही राष्ट्रीय जनआंदोलन में बदल गया। इसकी अगुवाई किसी एक राजनीतिक दल ने नहीं, बल्कि छात्रों और युवाओं के विकेंद्रीकृत नेटवर्क ने की।
 
क्या हुआ? 

  • विश्वविद्यालयों के छात्रों और युवाओं ने देशव्यापी प्रदर्शन शुरू किए।
  • सोशल मीडिया प्रतिबंध के विरोध ने भ्रष्टाचार और सुशासन के मुद्दों को भी आंदोलन का हिस्सा बना दिया।
  • व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा और अंतरिम व्यवस्था बनी। 

परिणाम 

  • 2026 के आम चुनाव में युवा मतदाताओं ने पारंपरिक दलों के बजाय बदलाव का समर्थन किया।
  • काठमांडू के लोकप्रिय पूर्व मेयर बालेंद्र “बालेन” शाह (Balen Shah), जिन्हें Gen Z का चेहरा माना जाता है, भारी जनसमर्थन के साथ नेपाल के प्रधानमंत्री बने।
  • नेपाल का उदाहरण बताता है कि छात्र और युवा आंदोलन हमेशा सीधे सत्ता नहीं बदलते, लेकिन वे राजनीतिक नेतृत्व बदलने की ज़मीन तैयार कर सकते हैं। यहाँ सड़कों पर शुरू हुई युवा असंतोष की लहर अंततः लोकतांत्रिक चुनावों के जरिए नए नेतृत्व के उदय में बदल गई।

इन आंदोलनों में क्या समानता थी?

जेन-जी आंदोलनों की सबसे बड़ी वजह आर्थिक असुरक्षा, सत्ता से दूरी और भ्रष्टाचार के प्रति बढ़ता असंतोष है।”जर्नल ऑफ डेमोक्रेसी, 2026,

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इन सभी आंदोलनों में पांच समान तत्व दिखाई देते हैं—

1. कोई बड़ा नेता नहीं
पारंपरिक आंदोलनों की तरह यहां कोई एक चेहरा नहीं था। आंदोलन ऑनलाइन नेटवर्क के जरिए चलता रहा।

2. सोशल मीडिया बना मुख्य हथियार
WhatsApp, Telegram, TikTok, Instagram और X पर मिनटों में लाखों लोगों को संगठित किया गया।

3. भ्रष्टाचार मुख्य मुद्दा
लगभग हर देश में युवाओं का सबसे बड़ा आरोप था कि पुरानी राजनीतिक व्यवस्था भ्रष्ट हो चुकी है।

4. बेरोजगारी और महंगाई
महंगाई, रोजगार संकट और भविष्य की अनिश्चितता ने युवाओं में असंतोष बढ़ाया।

5. राजनीति से निराशा
जेन-जी खुद को पारंपरिक राजनीतिक दलों से जुड़ा हुआ नहीं मानती। इसलिए उनके आंदोलन अधिक स्वस्फूर्त और वैचारिक रूप से विविध रहे।

इतिहास बताता है, छात्र हमेशा बदलाव की धुरी रहे हैं

भारत का 1974 जेपी आंदोलन: जब छात्रों ने राजनीति की दिशा बदल दी

भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में 1974 का बिहार छात्र आंदोलन एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है। उस समय देश महँगाई, बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अक्षमता से जूझ रहा था। बिहार में छात्रों ने पहले स्थानीय मुद्दों पर आंदोलन शुरू किया। जल्द ही यह आंदोलन राज्य सरकार के विरोध से आगे बढ़कर व्यापक राजनीतिक असंतोष का प्रतीक बन गया।

इसी दौर में स्वतंत्रता सेनानी और समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण (जेपी) सक्रिय राजनीति में लौटे। उन्होंने छात्रों का नेतृत्व स्वीकार किया और संपूर्ण क्रांति” का आह्वान किया। उनका तर्क था कि केवल सरकार बदलने से समस्या का समाधान नहीं होगा; राजनीति, प्रशासन, शिक्षा और समाज—सभी में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। उनके गांधी मैदान, पटना के भाषण ने आंदोलन को राष्ट्रीय पहचान दिलाई।

1974 और 1975 के दौरान आंदोलन बिहार से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया। इसी बीच इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के चुनाव को अमान्य ठहराया, जिससे राजनीतिक संकट और गहरा गया। बढ़ते विरोध और अस्थिरता के बीच 25 जून 1975 को देश में आपातकाल घोषित किया गया। प्रेस पर सेंसरशिप लगी, विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार किया गया और नागरिक स्वतंत्रताओं पर व्यापक प्रतिबंध लगाए गए।

जब मार्च 1977 में आम चुनाव हुए तो जनता ने पहली बार केंद्र में कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया और जनता पार्टी की सरकार बनी। इतिहासकारों का सामान्य आकलन है कि 1974 का छात्र आंदोलन, जेपी का नेतृत्व, आपातकाल का अनुभव और विपक्ष की एकजुटता—इन सभी ने मिलकर 1977 के सत्ता परिवर्तन की पृष्ठभूमि तैयार की।

यही कारण है कि भारत का जेपी आंदोलन केवल एक छात्र आंदोलन नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक चेतना के पुनर्जागरण का अध्याय माना जाता है।
 

'मंडल बनाम कमंडल' की राजनीति

अगस्त 1990 में तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह द्वारा मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने (अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC को सरकारी नौकरियों में 27% आरक्षण देने) की घोषणा के बाद देशव्यापी आंदोलन छिड़ गया। विशेषकर उत्तर भारत के सवर्ण छात्रों ने इसका हिंसक विरोध किया। इस आंदोलन ने भारतीय राजनीति और समाज को हमेशा के लिए बदल दिया। इसने सामाजिक न्याय को मजबूत किया, लेकिन साथ ही जातिगत ध्रुवीकरण और आरक्षण की राजनीति को भी गहरा कर दिया। इसी दौरान, राजनीतिक संतुलन साधने के लिए भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने 'सोमनाथ से अयोध्या राम रथ यात्रा' शुरू कर दी (इसे राजनीति में 'मंडल बनाम कमंडल' का दौर कहा जाता है)। बिहार में आडवाणी की गिरफ्तारी के बाद भाजपा ने वीपी सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया, जिससे सरकार गिर गई।

Student Protests

क्या हर आंदोलन सरकार बदल देता है?

नहीं। राजनीति विज्ञान के विशेषज्ञ मानते हैं कि सफल आंदोलन के लिए केवल जनसमर्थन पर्याप्त नहीं होता। हार्वर्ड के प्रोफेसर एरिका चेनोवेथ (Erica Chenoweth) और मैथ्यू सेबुल के अनुसार “1990 से 2020 के बीच जिन अहिंसक आंदोलनों में युवाओं की बड़ी भागीदारी रही, उनके सफल होने की संभावना अन्य आंदोलनों की तुलना में दो गुना से अधिक रही।”

उनका शोध यह भी बताता है कि जेन-जी आंदोलन भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और राजनीतिक जवाबदेही जैसे मुद्दों पर सबसे तेजी से संगठित होते हैं, लेकिन इनकी सबसे बड़ी चुनौती आंदोलन की ऊर्जा को संस्थागत और चुनावी राजनीति में बदलना होती है।

सत्ता परिवर्तन अक्सर इन परिस्थितियों में संभव होता है—

  • आर्थिक संकट गहरा हो।
  • सरकार की वैधता कमजोर पड़ जाए।
  • सुरक्षा तंत्र पूरी तरह सरकार के साथ न रहे।
  • विपक्ष या वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध हो।
  • आंदोलन लंबी अवधि तक शांतिपूर्ण और संगठित बना रहे।

यही कारण है कि कई देशों में आंदोलन नीति परिवर्तन तक सीमित रहते हैं, जबकि कुछ में सत्ता परिवर्तन हो जाता है।

लेकिन सत्ता बदलना और शासन चलाना अलग बात है
हालिया अनुभव यह भी बताते हैं कि सरकार गिराने के बाद सबसे बड़ी चुनौती शासन चलाने की होती है।

श्रीलंका, बांग्लादेश और अन्य देशों में नई सरकारों को आर्थिक संकट, राजनीतिक ध्रुवीकरण और संस्थागत सुधार जैसी कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कई विश्लेषकों का मानना है कि आंदोलन को चुनावी और संस्थागत राजनीति में बदलना सबसे कठिन चरण होता है।

क्या यह नई वैश्विक राजनीतिक लहर है?

राजनीतिक वैज्ञानिकों का मानना है कि 21वीं सदी के छात्र आंदोलन विचारधारा (Ideology) की बजाय 'गवर्नेंस' (सुशासन) के मुद्दों पर केंद्रित हैं। यही कारण है कि श्रीलंका, बांग्लादेश, केन्या और सर्बिया जैसे देशों में युवाओं ने पारंपरिक राजनीतिक दलों के बजाय डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्वयं को संगठित किया।

हार्वर्ड कैनेडी स्कूल और काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस जैसे संस्थानों के शोध बताते हैं कि जेन-जी की राजनीति पहले की पीढ़ियों से अलग है। यह वैचारिक पहचान की बजाय भ्रष्टाचार, जवाबदेही, रोजगार, महंगाई और सुशासन जैसे मुद्दों पर तेजी से संगठित होती है। इसकी सबसे बड़ी ताकत डिजिटल नेटवर्क है और सबसे बड़ी कमजोरी स्थायी नेतृत्व का अभाव।

विश्वविद्यालय अब सिर्फ शिक्षा के नहीं, राजनीति की भी प्रयोगशाला बन रहे हैं

इतिहास बताता है कि हर छात्र आंदोलन सरकार नहीं गिराता, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि जब किसी देश के विश्वविद्यालयों में भविष्य को लेकर बेचैनी बढ़ने लगती है, तो उसकी गूंज देर-सबेर संसद और सत्ता के गलियारों तक जरूर पहुंचती है।

श्रीलंका से लेकर सर्बिया तक की घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि 21वीं सदी में राजनीतिक बदलाव की सबसे बड़ी प्रयोगशाला शायद अब संसद नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय परिसर और डिजिटल प्लेटफॉर्म बनते जा रहे हैं। Gen Z ने यह साबित किया है कि आज की राजनीति केवल चुनावी रैलियों से नहीं, बल्कि मोबाइल स्क्रीन, सोशल मीडिया नेटवर्क और कैंपस की बहसों से भी तय हो सकती है।

हालांकि इतिहास यह भी सिखाता है कि किसी सरकार को बदलना अपेक्षाकृत आसान है, लेकिन एक बेहतर और जवाबदेह व्यवस्था खड़ी करना कहीं अधिक कठिन। आने वाले वर्षों में सबसे बड़ा प्रश्न यही होगा—क्या Gen Z केवल सत्ता परिवर्तन की ताकत बनकर उभरेगी, या वही पीढ़ी भविष्य की नई राजनीतिक व्यवस्था की भी निर्माता बनेगी?