क्यों अलग माना जा रहा है जेन-ज़ी का यह छात्र आंदोलन और कहां चूकी मोदी सरकार?

Gen Z student protest in Delhi

Gen Z student protest in Delhi: दिल्ली में छात्रों के 'संसद मार्च' की शुरुआत परीक्षा में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की मांग से हुई थी। लेकिन समय के साथ यह प्रदर्शन केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा। प्रदर्शन में शामिल कई छात्र इसे सरकारी जवाबदेही, संस्थागत भरोसे और युवाओं के भविष्य से जुड़े व्यापक सवालों से जोड़कर देख रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारत में नागरिकता कानून, किसान आंदोलन और महिला पहलवानों के प्रदर्शन जैसे कई बड़े आंदोलन हुए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि मौजूदा छात्र आंदोलन को अलग क्यों माना जा रहा है?

1. मुद्दा केवल शिक्षा मंत्री तक सीमित नहीं रहा

शुरुआत में प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जिम्मेदारी तय करने और इस्तीफे की मांग कर रहे थे। लेकिन अब प्रदर्शन में शामिल कई छात्र सरकार की समग्र शिक्षा नीति और परीक्षा प्रणाली को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भी सवाल उठा रहे हैं।

 

राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग मानता है कि जब किसी मंत्री का सार्वजनिक रूप से बचाव किया जाता है, तो उस विभाग से जुड़े विवाद केवल मंत्रालय तक सीमित नहीं रहते बल्कि सरकार की व्यापक राजनीतिक जवाबदेही का हिस्सा बन जाते हैं। वहीं सरकार का कहना रहा है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कई कदम उठाए गए हैं और अनियमितताओं पर कार्रवाई की जा रही है। ALSO READ: छात्रों के बाद किसान आंदोलन की तैयारी, शंभु और खनौरी बॉर्डर बंद, भारी सुरक्षा बल तैनात

2. नेतृत्व से अधिक नेटवर्क आधारित आंदोलन

इस आंदोलन की एक खास बात यह भी है कि इसका संचालन किसी एक राजनीतिक दल, छात्र संगठन या प्रमुख चेहरे तक सीमित दिखाई नहीं देता। सोशल मीडिया के जरिए अलग-अलग शहरों के छात्र एक-दूसरे से जुड़े और विरोध प्रदर्शनों का समन्वय करते दिखे। ऐसे विकेंद्रीकृत आंदोलनों को पारंपरिक राजनीतिक ढांचे से अलग माना जाता है क्योंकि इनमें निर्णय लेने का केंद्र स्पष्ट नहीं होता।

3. साझा मुद्दों ने व्यापक समर्थन की कोशिश की

प्रदर्शन का मुख्य फोकस परीक्षा प्रणाली, रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दों पर रहा है। ये ऐसे विषय हैं जिनका असर अलग-अलग राज्यों, जातियों और सामाजिक समूहों के युवाओं पर पड़ता है।

 

इसी वजह से आंदोलन को किसी एक पहचान आधारित राजनीति के दायरे में रखना अपेक्षाकृत कठिन माना जा रहा है। हालांकि सरकार समर्थक कुछ समूहों ने आंदोलन की मंशा और राजनीतिक पृष्ठभूमि पर सवाल भी उठाए हैं। ALSO READ: सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने के लिए रखीं 3 शर्तें, संसद मार्च से पहले आंदोलन में आया बड़ा मोड़

4. संस्थानों पर भरोसे का सवाल

प्रदर्शन में शामिल कई छात्रों का कहना है कि उन्हें अदालतों, जांच एजेंसियों और अन्य संस्थागत प्रक्रियाओं से अपेक्षित राहत नहीं मिली। इसी वजह से उन्होंने सार्वजनिक विरोध को अपनी बात रखने का प्रभावी माध्यम माना।

हालांकि न्यायपालिका और अन्य संस्थाएं समय-समय पर ऐसे मामलों में सुनवाई और हस्तक्षेप करती रही हैं। इसलिए यह धारणा सभी पक्षों द्वारा समान रूप से स्वीकार नहीं की जाती।

5. जवाबदेही की मांग आंदोलन का केंद्रीय विषय

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग यह रही है कि बार-बार सामने आने वाले पेपर लीक और भर्ती संबंधी विवादों के लिए स्पष्ट जिम्मेदारी तय की जाए।
 

विश्लेषकों का कहना है कि यह आंदोलन केवल किसी एक परीक्षा या भर्ती प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी संस्थानों की विश्वसनीयता और युवाओं के भविष्य से जुड़े व्यापक सवाल उठा रहा है।

6. सरकार की प्रतिक्रिया पर बहस

सरकार की ओर से अब तक प्रशासनिक कदम, जांच और कुछ मामलों में कार्रवाई की जानकारी दी गई है। दूसरी ओर प्रदर्शनकारी इसे अपर्याप्त बताते हुए लगातार विरोध जारी रखे हुए हैं।
 

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार सरकार के सामने चुनौती केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने की नहीं, बल्कि युवाओं के बीच भरोसा कायम रखने की भी है। आने वाले समय में सरकार बातचीत, नीति सुधार या प्रशासनिक कार्रवाई—किस रास्ते को प्राथमिकता देती है, इस पर भी नजर रहेगी।

7. युवाओं की राजनीतिक भागीदारी का नया संकेत?

इस आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू शायद इसका सामाजिक और पीढ़ीगत स्वरूप है। बड़ी संख्या में ऐसे छात्र इसमें शामिल हैं जो पहली बार किसी सार्वजनिक आंदोलन का हिस्सा बने हैं।

 

दुनिया के कई देशों में हाल के वर्षों में छात्रों और युवाओं ने जलवायु परिवर्तन, आर्थिक संकट, शिक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों जैसे मुद्दों पर बड़े आंदोलनों का नेतृत्व किया है। भारत में भी कुछ विश्लेषक इस प्रदर्शन को उसी व्यापक वैश्विक प्रवृत्ति के संदर्भ में देख रहे हैं, हालांकि इसकी दिशा और राजनीतिक प्रभाव का आकलन अभी जल्दबाजी होगा।
 

दिल्ली का यह छात्र आंदोलन फिलहाल केवल परीक्षा प्रणाली के विरोध तक सीमित नहीं दिखाई देता। यह युवाओं की आकांक्षाओं, रोजगार, शिक्षा और सरकारी जवाबदेही से जुड़े व्यापक प्रश्नों को सामने ला रहा है।

 

हालांकि यह कहना अभी जल्द होगा कि इसका दीर्घकालिक राजनीतिक असर क्या होगा। लेकिन इतना स्पष्ट है कि इस आंदोलन ने युवाओं की चिंताओं और सार्वजनिक संस्थानों में भरोसे के सवाल को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। आने वाले समय में सरकार की प्रतिक्रिया और आंदोलन की दिशा, दोनों ही इसके महत्व को तय करेंगे।

सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल शिफ्ट करने का कोर्ट का आदेश, इलाज के लिए बनेगी डॉक्टरों की टीम

sonam wangchuk hunger strike

Sonam Wangchuk Medanta Hospital shift: कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे प्रसिद्ध पर्यावरणविद व सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के मामले में मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से गुड़गांव स्थित मेदांता अस्पताल में शिफ्ट करने का निर्देश दिया है।

 

इसके साथ ही कोर्ट ने उनके समुचित इलाज के लिए डॉक्टरों की एक विशेष टीम गठित करने का भी आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि उन्हें मेदांता अस्पताल भेजने में कोई आपत्ति नहीं है और वहीं उनका आगे का उपचार किया जाएगा।  ALSO READ: सोनम वांगचुक के समर्थन में उतरे कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा, सांसदी छोड़ने की दी चेतावनी, जंतर-मंतर लाठीचार्ज का भी विरोध

पत्नी गीतांजलि की याचिका पर आया निर्णय

यह फैसला सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए आया है। गीतांजलि ने आरोप लगाया था कि उनके पति को इलाज के नाम पर जबरन सफदरजंग अस्पताल में हिरासत में रखा गया है। उन्होंने अदालत से मांग की थी कि वांगचुक को उनकी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति दी जाए।

 

उल्लेखनीय है कि सोनम वांगचुक कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थन में 28 जून से बेमियादी अनशन पर थे। अनशन के 20वें दिन (18 जुलाई) गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए पुलिस ने उन्हें जंतर-मंतर से उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया था। ALSO READ: सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने के लिए रखीं 3 शर्तें, संसद मार्च से पहले आंदोलन में आया बड़ा मोड़

सफदरजंग RDA का कड़ा रुख

सोनम वांगचुक को उनकी इच्छा के विरुद्ध सफदरजंग अस्पताल में रखे जाने पर रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA) ने तीखा विरोध जताया है। RDA ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर मांग की है कि डॉक्टरी सलाह के खिलाफ अस्पताल से छुट्टी लेने के वांगचुक के अधिकार की रक्षा की जाए।

 

डॉक्टरों ने अपने पत्र में कहा कि किसी मरीज को उसकी मर्जी के खिलाफ रखना मेडिकल पेशे की नैतिकता और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। अस्पताल में अत्यधिक पुलिस बल की तैनाती से अन्य मरीजों और डॉक्टरों को भारी असुविधा हो रही है। डॉक्टरों ने गैर-चिकित्सकीय उद्देश्यों और राजनीतिक हितों के लिए अस्पताल के इस्तेमाल पर भी गंभीर आपत्ति जताई है। इतना ही नहीं एसोसिएशन ने जंतर-मंतर पर हुए लाठीचार्ज की निष्पक्ष जांच कराने और जवाबदेही तय करने की मांग की है।

कैसी है वांगचुक की स्थिति

सफदरजंग अस्पताल द्वारा जारी ताज़ा मेडिकल बुलेटिन के अनुसार सोनम वांगचुक की हालत फिलहाल स्थिर बनी हुई है। जांच में ब्लड शुगर, पोटेशियम और ल्यूकोसाइट के स्तर में कमी पाई गई है, जिसके चलते उन्हें निरंतर निगरानी की आवश्यकता है। वांगचुक लगातार अनशन के कारण गंभीर डिहाइड्रेशन से जूझ रहे हैं। हालांकि वे ओआरएस और ओरल पोटेशियम ले रहे हैं, लेकिन नसों के जरिए ग्लूकोज(IV Fluids) दिए जाने वाले इलाज की डॉक्टरी सलाह को उन्होंने स्वीकार नहीं किया है।

 

गुजरात में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 28 IAS अधिकारियों के हुए तबादले, नई नियुक्तियां घोषित

गुजरात सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा राज्य के प्रशासनिक तंत्र में बड़ा फेरबदल करते हुए 28 IAS अधिकारियों के तबादले के आदेश जारी किए गए हैं। 21 जुलाई, 2026 को जारी इस आदेश के अनुसार महानगर पालिकाओं, जिला पंचायतों, राज्य के निगमों तथा DGVCL और UGVCL जैसी बिजली कंपनियों में महत्वपूर्ण पदों पर नए अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। इन तबादलों से राज्य के सचिवालय से लेकर जिला स्तर तक के प्रशासनिक ढांचे में नई ऊर्जा का संचार होगा।

 

प्रभाव जोशी की GIDC के संयुक्त MD के रूप में नियुक्ति

आदेश के अनुसार जूनागढ़ नगर निगम के नगर आयुक्त प्रभाव जोशी का तबादला उद्योग एवं खान विभाग के तहत किया गया है और उन्हें गुजरात औद्योगिक विकास निगम (GIDC) का संयुक्त प्रबंध निदेशक (Joint MD) नियुक्त किया गया है। उनकी जगह आई. आर. वाला को जूनागढ़ नगर निगम का नया नगर आयुक्त बनाया गया है।

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पोरबंदर और सूरत नगर निगम में नए अधिकारी

पोरबंदर नगर निगम के नगर आयुक्त एचजे प्रजापति का तबादला करके उन्हें अमरेली का जिला विकास अधिकारी (DDO) बनाया गया है, जबकि सूरत शहरी विकास प्राधिकरण (SUDA) के सीईओ सुथार राज रमेशचंद्र को पोरबंदर का नया नगर आयुक्त नियुक्त किया गया है। इसके अतिरिक्त, दाहोद के DDO स्मित संतोष लोढ़ा का तबादला सूरत नगर निगम में उप नगर आयुक्त (DMC) के पद पर किया गया है और दाहोद के DDO के रूप में हिरेन जितेंद्रभाई बारोट को पदस्थ किया गया है।

 

DGVCL के प्रबंध निदेशक के रूप में KJ राठौड़ की नियुक्ति

ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जाने वाली दक्षिण गुजरात विज कंपनी लिमिटेड (DGVCL), सूरत के प्रबंध निदेशक (MD) के रूप में केजे राठौड़ की नियुक्ति की गई है, जो इससे पहले गांधीनगर में कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) के निदेशक के रूप में कार्यरत थे। DGVCL के MD का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे सुथार राज रमेशचंद्र को अब पोरबंदर के नगर आयुक्त की पूर्णकालिक जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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UGVCL के MD के रूप में गौरांग मकवाणा की नियमित नियुक्ति

गुजरात एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (GEDA) के निदेशक और उत्तर गुजरात विज कंपनी लिमिटेड (UGVCL) का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे गौरांगभाई एच. मकवाणा को अब UGVCL का नियमित प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया है। गौरांग मकवाणा के स्थान पर डीके पटेल को GEDA का नया निदेशक बनाया गया है।

मेडिकल कॉर्पोरेशन और गांधीनगर DDO स्तर पर बदलाव

गुजरात मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड के MD डीके ब्रह्मभट्ट का तबादला कर उन्हें गांधीनगर का जिला विकास अधिकारी (DDO) नियुक्त किया गया है। उनके स्थान पर गुजरात मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन के नए MD के रूप में MP पंड्या की नियुक्ति की गई है, जिससे स्वास्थ्य क्षेत्र में आपूर्ति कार्यों में तेजी आएगी।

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गुजरात अर्बन लाइवलीहुड मिशन और PGVCL में नियुक्तियां

गुजरात स्टेट सोशल वेलफेयर बोर्ड के अध्यक्ष महेश शांतिलाल जानी का तबादला करके उन्हें मिशन डायरेक्टर, गुजरात अर्बन लाइवलीहुड मिशन (GULM) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे पहले PGVCL के MD के रूप में कार्यरत केपी जोशी को अब देवभूमि द्वारका का DDO बनाया गया है और उनकी जगह एम. डी. चुडासमा को PGVCL का नया MD नियुक्त किया गया है।

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अन्य क्षेत्रीय आयुक्तों और विभिन्न निगमों में तबादले

इस फेरबदल में क्षेत्रीय आयुक्त के रूप में RN कुचारा को राजकोट और सीए गांधी को वडोदरा में पदस्थ किया गया है। डांग के DDO के रूप में केएस झाला, D-SAG के सीईओ के रूप में एमके जोशी, गुजरात अनारक्षित शैक्षणिक एवं आर्थिक विकास निगम के MD के रूप में एके जोशी और अनुसूचित जाति विकास निगम के MD के रूप में BH पटेल की नियुक्ति की गई है। इसके साथ ही कई अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर स्वतंत्र जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

योगी कैबिनेट ने दी नई इलेक्ट्रिक बसों की खरीद को मंजूरी, उत्‍तर प्रदेश रोडवेज के बेड़े में शामिल होंगी 250 बसें

Yogi Cabinet approves purchase of new electric buses

– सरकार ने किया 400 करोड़ का प्रावधान, यूपीएसआरटीसी वहन करेगा 25.50 करोड़ रुपए का खर्च

– 425.50 करोड़ रुपए की लागत से खरीदी जाएंगी ई-बसें, 50 व 41 सीटर की होगी क्षमता

– नई बसों की खरीद में उत्तर प्रदेश के मैन्युफैक्चरर्स को दी जाएगी प्राथमिकता 

– एनसीआर के पर्यावरण मानकों का होगा पालन, रोजगार को भी मिलेगा बढ़ावा

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) के बस बेड़े को बढ़ाने के लिए नई इलेक्ट्रिक बसों की खरीद से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। इस पर कुल 425.50 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इस निर्णय के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में 400 करोड़ रुपए के प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त 25.50 करोड़ रुपए का खर्च यूपीएसआरटीसी वहन करेगा। इसी के साथ 250 नई इलेक्ट्रिक बसों की खरीद का रास्ता साफ हो गया है।

 

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि कैबिनेट फैसले के मुताबिक रोडवेज बेड़े में 100 इलेक्ट्रिक बसें (12 मीटर, 3×2 टाइप-II, 50 सीटर) व 150 इलेक्ट्रिक बसें (12 मीटर, 2×2 टाइप-III, 41 सीटर) शामिल की जाएंगी। इन बसों के संचालन से प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, पर्यावरण अनुकूल और यात्री सुविधाओं के अनुरूप बनाया जाएगा।

 

प्रदेश के मैन्युफैक्चरर्स को मिलेगी प्राथमिकता

नई इलेक्ट्रिक बसों की खरीद पर कुल 425.50 करोड़ रुपए का व्यय अनुमानित है। इसमें 400 करोड़ रुपए राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जाएंगे, जबकि शेष 25.50 करोड़ रुपए की व्यवस्था उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम अपने संसाधनों से करेगा। योगी सरकार ने बसों की खरीद में उत्तर प्रदेश के मैन्युफैक्चरर्स को प्राथमिकता देने का भी निर्णय लिया है, जिससे प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

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एनसीआर में सीएक्यूएम निर्देश का होगा पालन

1 नवंबर 2026 से सीएक्यूएम के निर्देशों के मुताबिक दिल्ली में केवल सीएनजी, इलेक्ट्रिक और बीएस-6 श्रेणी के वाहनों को प्रवेश की अनुमति होगी। ऐसे में नई इलेक्ट्रिक बसों की खरीद से उत्तर प्रदेश रोडवेज इन मानकों का समयबद्ध अनुपालन करेगा और एनसीआर क्षेत्र में बस संचालन निर्बाध रहेगा। योगी सरकार का ये फैसला राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में लागू होने वाले पर्यावरणीय मानकों को देखते हुए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

सुविधाओं के साथ प्रदूषण में कमी लाने का लक्ष्य

योगी सरकार इन इलेक्ट्रिक बसों के जरिए प्रदेश के प्रमुख धार्मिक, पर्यटन व शहरी क्षेत्रों में यात्रियों को स्वच्छ, सुरक्षित, आधुनिक परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराएगी। इससे डीजल आधारित बसों पर निर्भरता कम होगी, वायु प्रदूषण में कमी आएगी व पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

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प्रदेश में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

नई बसों के संचालन से परिवहन निगम के बेड़े का विस्तार होगा, जिससे चालकों, परिचालकों व तकनीकी रख-रखाव से जुड़े कुशल-अकुशल कर्मियों के लिए नए रोजगार अवसर सृजित होंगे। इसके अलावा बस संचालन से जुड़े ढाबों, रेस्टोरेंट, अन्य यात्री सुविधाओं से संबंधित व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे अप्रत्यक्ष रोजगार में वृद्धि होगी।

छात्रों पर लाठीचार्ज पर गरमाई सियासत, राहुल से अखिलेश तक विपक्षी नेताओं से मोदी सरकार से पूछा सवाल

protest from sansad to jantar mantar

जंतर मंतर से सांसदों के संसद मार्च पर दिल्ली पुलिस के लाठीचार्ज पर सियासी बवाल मचा हुआ है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने इस मामले मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। किसी ने पीएम मोदी से माफी की मांग की तो किसी ने सवाल किया कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा क्यों नहीं देते। ALSO READ: जब Gen-Z सड़कों पर उतरी, हिल गईं सरकारें! 5 साल में 5 देशों में गिरी सरकारें, कहीं राष्ट्रपति भागे तो कहीं PM ने छोड़ी कुर्सी

 

मोदी ने माफी तक नहीं मांगी

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि कल जो हुआ, उसके लिए मोदी जी ने माफ़ी तक नहीं मांगी है। युवा शिक्षा और परीक्षा प्रणाली के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। पूरा देश जानता है कि शिक्षा और परीक्षा प्रणाली को दीमक ने खोखला कर दिया है। प्रधानमंत्री चुप क्यों हैं? उन्हें छात्रों से माफी मांगनी चाहिए और उन्हें ये सब बंद करवाना चाहिए। ALSO READ: सोनम वांगचुक के समर्थन में उतरे कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा, सांसदी छोड़ने की दी चेतावनी, जंतर-मंतर लाठीचार्ज का भी विरोध

 

धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा क्यों नहीं देते?

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि छात्रों पर लाठीचार्ज करना गलत है। उन्होंने सवाल किया कि नीट पेपर लीक पर चर्चा क्यों नहीं? धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा क्यों नहीं देते? उन्होंने कहा कि भाजपा अपने साथियों पर इस्तीफे का दबाव नहीं बना पा रही है ताकि वे लोग दबे और कुचले राज़ न खोल दें। कोई कल्पना नहीं कर सकता है कि आजादी के बाद कोई सरकार इस तरह का व्यवहार युवाओं के साथ करेगी। यह लोकतंत्र में कभी स्वीकार नहीं हो सकता है।

 

आंसुओं पर भी दया नहीं आई

सपा सांसद डिंपल यादव ने कहा कि बच्चे ये बताने चाहते थे कि सरकार का सिस्टम बीमार पड़ गया है और उनके हित के बारे में नहीं सोच रहा है। लेकिन उन बच्चों को लाठियां खानी पड़ी। ये इतनी निर्मम सरकार है और बच्चों ने इतना आंसू बहाए हैं सरकार को इनके आंसुओं पर भी दया नहीं आ रही है। ये शिक्षा मंत्री को अभी भी पद से हटा नहीं रहे हैं..हमें इन्हें वोट के माध्यम से हटाना है एक यही हमारे पास हथियार है। ALSO READ: Dimple Yadav : CJP के प्रदर्शन में पुलिस की लाठीचार्ज पर भड़कीं डिंपल यादव, बताया काला दिवस, प्रदर्शनकारियों को पिलाया पानी

 

क्या बोले ओवैसी?

AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि कल जो कुछ हुआ है वह इस सरकार का लगातार एक जैसा व्यवहार है। यह सब इतने दिनों से चल रहा है। आपको पहले से ही बातचीत करनी चाहिए थी। यह पूर्ण रूप से अव्यवस्था है।

 

एक छात्र की हालत गंभीर

AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सिर्फ एक छात्र की हालत गंभीर है और उसे आरएमएल अस्पताल में कराया गया है। सभी घायल छात्रों और पुलिसकर्मियों को छुट्टी दे दी गई है। सोशल मीडिया पर आई खबरों के मुताबिक 110 लोग घायल हुए थे। हमारे पास पक्के आंकड़े नहीं हैं। इसके बाद हम पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन जाएंगे ताकि यह पता चल सके कि कितनी FIR दर्ज की गई हैं और कितने छात्रों को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया है।

योगी सरकार की योजना से बदली किस्मत, डेयरी से सालाना हो रही 20 लाख की कमाई*

  • गोसेवी परिवार के लिए मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना साबित हुई टर्निंग प्वाइंट
  • सीएम योगी के गो संरक्षण मिशन का बड़े पैमाने पर अनुसरण कर समृद्ध बन रहे यूपी का युवा
  • प्रतापगढ़ के युवक की सफलता युवाओं के लिए बनी प्रेरणादायक, अब ए2 दूध के उत्पाद के कारोबार की कर रहा तैयारी
  • योगी सरकार में स्वदेशी नस्ल की गायों के संरक्षण और संवर्धन को मिल रहा बढ़ावा
  • पिता ने एक घायल गाय की सेवा की, बेटे को मिली आधुनिक डेयरी की प्रेरणा, आज 25 गोवंश बने आय का जरिया

     

लखनऊ, 20 जुलाई : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना ग्रामीण युवाओं के लिए सिर्फ सरकारी योजना नहीं, बल्कि जिंदगी बदलने का माध्यम बन रही है। प्रतापगढ़ के सांड़वा चंडिका गांव निवासी शिवम सिंह इसकी जीवंत मिसाल हैं। पांच वर्ष पहले उनके पिता को एक घायल देसी गाय मिली थी। परिवार ने उसकी सेवा-भाव से देखभाल शुरू की और यही गोसेवा आगे चलकर सफलता का आधार बन गई। बाद में योगी सरकार की मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना का लाभ मिला, आधुनिक डेयरी स्थापित हुई और आज उसी सफर ने परिवार को सालाना 20 लाख रुपये से अधिक आय, 25 गोवंश और गांव के अन्य लोगों को भी रोजगार देने वाले डेयरी उद्यमी के रूप में पहचान दिलाई है।

 

गोसेवा से शुरू हुआ सफर, योजना ने दी नई उड़ान

 

शिवम बताते हैं कि उनके पिता राकेश सिंह को रास्ते में एक घायल देसी गाय मिली, जिसे घर लाकर उसकी सेवा की। उसी गाय की देखभाल करते-करते पिता-पुत्र दोनों का लगाव गोपालन से बढ़ता गया। धीरे-धीरे गोवंश की संख्या बढ़ती गई और देखते ही देखते यह 25 तक पहुंच गई। इसी दौरान उन्हें यूट्यूब पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना की जानकारी मिली।

 

योगी सरकार की योजना इस तरह ला रही बदलाव

 

मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना के लिए उन्होंने आवेदन किया। चयन होने के बाद उन्हें पांच लाख का ऋण मिला। शिवम राजस्थान से साहीवाल और गिर नस्ल की 10 उत्कृष्ट गायें लेकर आए। अभी उनकी डेयरी से प्रतिदिन लगभग 110 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है, जिससे उनकी वार्षिक आय 20 लाख रुपये के ऊपर पहुंच गई है। शिवम ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की योजना का लाभ लेकर वे अपने कारोबार को और आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके साथ ही वे अपने गांव और आसपास के लोगों को रोजगार भी देंगे। 

 

अब ए2 दूध के उत्पाद और नस्ल सुधार पर फोकस

 

शिवम ने शुरुआत से ही अपनी डेयरी में बेहतर तकनीक का उपयोग किया है, जिससे अच्छी नस्ल की बछियाओं का जन्म हो रहा है और स्वदेशी नस्ल की गाय के संरक्षण एवं संवर्धन को बढ़ावा मिल रहा है। अब उनका लक्ष्य शुद्ध ए2 दूध से घी और अन्य मूल्यवर्धित दुग्ध उत्पाद तैयार कर बाजार में अपनी अलग पहचान बनाना है। साथ ही वे उच्च गुणवत्ता वाली देसी नस्लों के ब्रीड डेवलपमेंट पर बड़े स्तर पर काम करना चाहते हैं।

 

युवाओं के लिए बन रहा प्रेरक मॉडल

 

शिवम सिंह की कहानी बताती है कि सेवा भाव, आधुनिक तकनीक और सरकार की सही योजना का साथ मिल जाए तो ग्रामीण युवा अपने गांव में रहकर भी बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं। एक घायल देशी गाय से शुरू हुआ यह सफर आज आत्मनिर्भरता, रोजगार सृजन और ग्रामीण समृद्धि का ऐसा मॉडल बन चुका है, जो प्रदेश के अन्य युवाओं को भी पशुपालन और डेयरी उद्यमिता की ओर प्रेरित कर रहा है।

 

वडोदरा-भरूच हाईवे पर आज से नया टोल टैक्स लागू, जा‍निए कार, बस और ट्रक पर कितना लगेगा टोल?

New toll tax applicable on Vadodara-Bharuch highway from today

वडोदरा से भरूच और दहेगाम के बीच यात्रा करने वाले वाहन चालकों की जेब पर अब अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। भारतमाला परियोजना के तहत दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (NE-4) पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा आज से टोल टैक्स में 5 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। इस बदलाव के बाद अब कार और वैन के लिए 5 रुपए, एलसीवी (LCV) के लिए 10 रुपए, बस और ट्रक के लिए 20 रुपए तथा थ्री-एक्सल वाहनों के लिए 25 रुपए तक की टोल वृद्धि लागू हो गई है।

 

इन 4 टोल प्लाजा पर लागू हुईं नई दरें

वडोदरा जिले से गुजरने वाले इस एक्सप्रेसवे पर स्थित मुख्य चार टोल प्लाजा से गुजरते समय अब वाहन चालकों को अधिक राशि चुकानी होगी। इनमें दोड़का, फाजिलपुर, समियाला और सांपा टोल प्लाजा शामिल हैं। इन सभी स्थानों पर आज से ही वाहन श्रेणी के अनुसार नई दरें लागू कर दी गई हैं।

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वाहनों के अनुसार नई टोल दरों का विवरण

नए संशोधन के अनुसार :

कार, जीप और वैन : दोड़का में 210 रुपए (पहले 205 रुपए), फाजिलपुर में 200 रुपए (पहले 195 रुपए), समियाला में 130 रुपए (पहले 125 रुपए) हो गए हैं, जबकि सांपा में पुरानी दर 90 रुपए ही बरकरार रखी गई है।

 

एलसीवी (LCV) वाहन : दोड़का में 340 रुपए, फाजिलपुर में 320 रुपए, समियाला में 210 रुपए और सांपा में 115 रुपए वसूले जाएंगे।

 

बस और ट्रक : दोड़का में दर बढ़कर 685 रुपए, फाजिलपुर में 670 रुपए, समियाला में 440 रुपए और सांपा में 240 रुपए हो गई है।

 

थ्री-एक्सल वाहन : दोड़का में 670 रुपए, फाजिलपुर में 635 रुपए, समियाला में 480 रुपए और सांपा में 265 रुपए की नई दर लागू की गई है।

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महज 3 महीने में ही राहत का अंत

उल्लेखनीय है कि इस एक्सप्रेसवे पर महज 3 महीने पहले ही वाहन चालकों को बड़ी राहत देते हुए टोल दरों में 20 से 30 प्रतिशत की कटौती की गई थी। हालांकि यह राहत अल्पकालिक साबित हुई और अब फिर से 5 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी गई है।

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अक्टूबर 2024 में टोल वसूली शुरू होने के बाद से इस रूट पर वाहनों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है, जिससे वडोदरा और भरूच के बीच नियमित यात्रा करने वाले लोगों को अब दैनिक आधार पर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा।

बाढ़ हो या सूखा, हर नागरिक की सुरक्षा-सुविधा सुनिश्चित हो: मुख्यमंत्री

CM Yogi Barabanki Speech

अनियमित वर्षा की दोहरी चुनौती, सूखा और बाढ़ दोनों से निपटने के लिए मुख्यमंत्री ने दिए व्यापक निर्देश

 

कम वर्षा वाले क्षेत्रों में खेती प्रभावित न हो, रियल टाइम निगरानी और सिंचाई संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करें: मुख्यमंत्री

 

तीन दिन में सभी राहत शिविर तैयार हों, बच्चों को डेयरी से दूध और ताजा, पौष्टिक भोजन मिले: मुख्यमंत्री

 

जहां आवश्यकता हो वहां बड़ी नौकाओं की व्यवस्था करें, आपदा मित्रों की सेवाएं लें, जिलाधिकारी स्वयं करें राहत कार्यों की मॉनीटरिंग: मुख्यमंत्री

 

तटबंधों की चौबीसों घंटे पेट्रोलिंग हो, अराजक तत्वों से भी सतर्क रहें, राहत आयुक्त कार्यालय का कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय रहे: मुख्यमंत्री

 

हर घंटे मुख्यमंत्री कार्यालय, डीजीपी कार्यालय और राहत एजेंसियों को मिले अपडेट, राज्य स्तरीय डैशबोर्ड पर प्रत्येक जिले की स्थिति हो अद्यतन: मुख्यमंत्री

 

बाढ़ प्रभावित 44 जनपदों में व्यापक तैयारियां पूरी, राहत शरणालय, मेडिकल टीमें, पशु शरणालय और बचाव बल पूरी तरह सक्रिय

 

लखनऊ, 20 जुलाई:- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि बाढ़ हो या सूखा, प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा, किसानों की फसल और आमजन की आजीविका की रक्षा करना प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राहत एवं बचाव कार्यों में पूरी संवेदनशीलता, तत्परता और समन्वय के साथ कार्य करते हुए प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति तक समयबद्ध सहायता पहुंचाई जाए।

 

मुख्यमंत्री सोमवार को प्रदेश में अनियमित वर्षा से उत्पन्न दोहरी चुनौती, एक ओर कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सूखे की आशंका और दूसरी ओर अतिवृष्टि वाले क्षेत्रों में संभावित बाढ़, के दृष्टिगत आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में प्रत्येक जनपद की स्थिति अलग है, इसलिए राहत एवं बचाव की रणनीति भी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार की जाए। 

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन जनपदों में सामान्य से कम वर्षा हुई है, वहां कृषि गतिविधियां प्रभावित नहीं होनी चाहिए। नहरों, जलाशयों, राजकीय नलकूपों तथा अन्य उपलब्ध सिंचाई संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए। बोआई एवं सिंचाई के रियल टाइम आंकड़ों की नियमित समीक्षा कर किसानों को समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराई जाए। जहां वर्षा की कमी के कारण बोआई प्रभावित होने की आशंका है, वहां कृषि एवं सिंचाई विभाग संयुक्त कार्ययोजना बनाकर तत्काल राहत उपलब्ध कराएं। 

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि कम वर्षा वाले क्षेत्रों में किसानों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के साथ ही अधिक वर्षा वाले जिलों में बाढ़ राहत एवं बचाव की तैयारियां पूरी सतर्कता के साथ संचालित की जाएं। राहत आयुक्त कार्यालय का कंट्रोल रूम चौबीसों घंटे सक्रिय रहे तथा प्रत्येक घंटे की अद्यतन जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय, पुलिस महानिदेशक कार्यालय और संबंधित राहत एजेंसियों को उपलब्ध कराई जाए। राज्य स्तरीय डैशबोर्ड पर प्रत्येक जनपद की स्थिति नियमित रूप से अद्यतन की जाए।

 

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि बाढ़ प्रभावित एवं संवेदनशील जनपदों में अगले तीन दिनों के भीतर सभी राहत शिविर पूरी तरह तैयार कर लिए जाएं। राहत शिविरों में ताजा एवं पौष्टिक भोजन, स्वच्छ पेयजल, चिकित्सा सुविधा, स्वच्छता तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। बच्चों के लिए डेयरी के माध्यम से दूध उपलब्ध कराया जाए। महिलाओं, बच्चों, वृद्धजनों, दिव्यांगजनों तथा गर्भवती महिलाओं की आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा जाए। राहत सामग्री किट गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक हो। 

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां आवश्यकता हो वहां सामान्य नावों के साथ बड़ी नौकाओं की भी व्यवस्था की जाए। प्रशिक्षित 'आपदा मित्रों' की सेवाएं व्यापक रूप से ली जाएं तथा प्रत्येक जिलाधिकारी स्वयं राहत एवं बचाव कार्यों की नियमित मॉनीटरिंग करें। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पीएसी, पुलिस, राजस्व, सिंचाई, स्वास्थ्य, पशुपालन एवं स्थानीय प्रशासन पूर्ण समन्वय के साथ कार्य करें। आकाशीय बिजली, अतिवृष्टि, जनहानि आदि के संबंध में मौसम विभाग, केंद्रीय जल आयोग तथा नेपाल से प्राप्त जलस्तर संबंधी सूचनाओं का सतत विश्लेषण करते हुए समय रहते आवश्यक निर्णय लिए जाएं तथा संभावित खतरे की स्थिति में प्रभावित आबादी को पूर्व सूचना देकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए।

मुख्यमंत्री ने तटबंधों की सुरक्षा पर विशेष बल देते हुए निर्देश दिए कि उनकी चौबीसों घंटे निगरानी एवं नियमित पेट्रोलिंग कराई जाए। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक कारणों के साथ अराजक तत्वों द्वारा भी तटबंधों को नुकसान पहुंचाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, इसलिए संवेदनशील स्थलों पर विशेष सतर्कता बरती जाए। जहां कटान अथवा रिसाव की आशंका हो, वहां तत्काल सुरक्षात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। राहत सामग्री, नाव, मोटरबोट तथा अन्य आवश्यक संसाधनों से संबंधित सभी टेंडर एवं प्रशासनिक औपचारिकताएं तत्काल पूरी कर ली जाएं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में राहत कार्य प्रभावित न हों।

 

मुख्यमंत्री ने पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि पशुओं को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए तथा उन्हें जलभराव वाले क्षेत्रों में न रहने दिया जाए। मौसम के अनुरूप संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए पशुओं का समयबद्ध टीकाकरण भी सुनिश्चित किया जाए।

 

बैठक में बताया गया कि वर्तमान में प्रदेश के चार जनपदों की चार तहसीलों के 42 गांव प्रभावित हैं, जहां 332 लोग प्रभावित हुए हैं। वर्तमान में बलिया, गौतमबुद्ध नगर, लखीमपुर खीरी तथा मुजफ्फरनगर प्रभावित जनपद हैं। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए 1,412 बाढ़ चौकियां सक्रिय हैं। 549 मेडिकल टीमों का गठन किया गया है, 55 नाव एवं मोटरबोट राहत कार्यों में लगाई गई हैं तथा 1,096 बाढ़ शरणालय संचालित हैं। प्रभावित परिवारों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

 

बैठक में यह भी बताया गया कि बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील 44 जनपदों में व्यापक पूर्व तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 1,694 राहत शरणालय चिन्हित किए गए हैं, जिनमें लगभग 5.14 लाख लोगों को आश्रय देने की क्षमता है। सभी जनपदों में कंट्रोल रूम सक्रिय हैं तथा एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी की टीमें संवेदनशील क्षेत्रों में पूर्व से तैनात कर दी गई हैं। पशुधन की सुरक्षा के लिए 910 पशु शरणालय स्थापित किए गए हैं तथा आवश्यक टीमें भी तैनात हैं।

 

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि बाढ़ प्रबंधन को और प्रभावी बनाने के लिए नदियों का चैनेलाइजेशन कार्य निरंतर जारी रखा जाए, जिससे जल प्रवाह सुचारु रहे और कटान व जलभराव की स्थिति न्यूनतम हो। उन्होंने यह भी कहा कि अग्नि दुर्घटना में यदि किसी गरीब परिवार का आवास नष्ट होता है तो उसे प्राथमिकता के आधार पर मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत तत्काल आवास उपलब्ध कराया जाए। नगर क्षेत्रों में खुले मैनहोल को तत्काल ढकने तथा जनसुरक्षा से जुड़े सभी एहतियाती उपाय सुनिश्चित किए जाएं।

छात्रों के बाद किसान आंदोलन की तैयारी, शंभु और खनौरी बॉर्डर बंद, भारी सुरक्षा बल तैनात

farmers protest

जंतर मंतर पर छात्रों के आंदोलन के बीच पंजाब और हरियाणा के किसान भी 'भारत-US ट्रेड डील' का विरोध करने के लिए किसान घाट पहुंचेंगे। किसानों के प्रदर्शन के मद्देनजर पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। शंभू बॉर्डर के साथ ही खनौरी बॉर्डर को भी पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। ALSO READ: CJP का दावा- अभिजीत दिपके, गीतांजलि, शबाना आजमी और प्रकाश राज वाले ट्रक पर पुलिस ने किया हमला

 

सुबह 5.30 बजे के करीब पुलिस ने दोनों रास्ते बंद कर दिए। किसानों को समझाने की कोशिश भी की गई थी लेकिन जब सहमति नहीं बनी तो बैरिकेडिंग कर दी गई। किसानों को शंभू बॉर्डर पर रोकने के लिए हरियाणा पुलिस की ओर से भी तैयारी की गई है।

 

किसान नेताओं का कहना है कि भारत-अमेरिका के बीच चल रहे व्यापार सौदे में उनसे कोई राय नहीं ली गई है। किसानों का मानना है कि इस समझौते के बाद अमेरिका से सस्ते सोयाबीन, सूखे मेवे, डेयरी उत्पाद और अनाज भारतीय बाजारों में भरे जाएंगे, जिससे छोटे किसानों, मजदूरों और स्थानीय व्यापारियों को भारी नुकसान होगा।

 

किसान नेता सरवन सिंह पंधेर का कहना है कि भारत-अमरीका डील रद्द होनी चाहिए। हमें सूचना मिल रही है कि शंभू बॉर्डर बंद कर दिया गया है। हमें लगता है कि सरकार किसानों से बातचीत करके मसला हल करने की जगह टकराव की नीति अपना रही है, दमन की नीति अपना रही है। देश के युवाओं की बात नहीं सुनी जा रही है। किसानों और मजदूरों की बात भी नहीं सुनी जा रही है। पंधेर ने दावा किया कि उन्हें केवल चार घंटे के लिए जाना था। किसान घाट किसानों का है लेकिन वहां भी नहीं जाने दे रहे हैं। ALSO READ: सोनम वांगचुक के समर्थन में उतरे कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा, सांसदी छोड़ने की दी चेतावनी, जंतर-मंतर लाठीचार्ज का भी विरोध

 

FTA पर क्या बोले पीएम मोदी?

पीएम मोदी ने आज एनडीए सांसदों की बैठक में अलग-अलग देशों के साथ हुए FTA के बारे में बात की। इन समझौतों को लेकर प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी, उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि उन्हें कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी देश के साथ होने वाले FTA में किसानों का कल्याण सबसे अहम होता है, ताकि ये समझौते किसानों और देश, दोनों के ही सर्वोत्तम हितों को पूरा कर सकें। ALSO READ: NDA बैठक में PM मोदी का बड़ा संदेश: NEET पेपर लीक पर सख्त एक्शन, FTA में किसानों को नुकसान नहीं होगा

NDA बैठक में PM मोदी का बड़ा संदेश: NEET पेपर लीक पर सख्त एक्शन, FTA में किसानों को नुकसान नहीं होगा

PM Modi in NDA meeting mangal milan

संसद के मानसून सत्र के बीच मंगलवार को एनडीए संसदीय दल की बैठक 'मंगल मिलन' संसद पुस्तकालय भवन के जी.एम.सी. बालयोगी ऑडिटोरियम में आयोजित की गई। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में सरकार ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि FTA से किसानों का नुकसान नहीं होगा।

 

बैठक के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री ने सभी को मार्गदर्शन दिया। यह बैठक बहुत सार्थक रही। प्रधानमंत्री ने कई अहम मुद्दों पर बात की और अपना मार्गदर्शन दिया। ALSO READ: सोनम वांगचुक के समर्थन में उतरे कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा, सांसदी छोड़ने की दी चेतावनी, जंतर-मंतर लाठीचार्ज का भी विरोध

 

NEET परीक्षा के बारे में क्या बोले पीएम मोदी?

रिजिजू ने कहा कि NEET परीक्षा के बारे में प्रधानमंत्री ने बताया कि गड़बड़ी की खबरें मिलने पर सरकार ने तुरंत कार्रवाई की, तेरह लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इसके अलावा, छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए, बिना किसी देरी के दोबारा परीक्षा कराई गई और नतीजे घोषित किए गए। उन्होंने भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए जा रहे कड़े कदमों के बारे में भी बताया। उन्होंने दोषियों को सज़ा देने और मिलकर एक ऐसी व्यवस्था बनाने पर ज़ोर दिया जिसमें कोई कमी न हो। ALSO READ: जब Gen-Z सड़कों पर उतरी, हिल गईं सरकारें! 5 साल में 5 देशों में गिरी सरकारें, कहीं राष्ट्रपति भागे तो कहीं PM ने छोड़ी कुर्सी

FTA से किसानों का कल्याण

पीएम मोदी ने हाल के महीनों में देश की कामयाबियों का ज़िक्र किया और अलग-अलग देशों के साथ हुए FTA के बारे में बात की। इन समझौतों को लेकर प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी, उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि उन्हें कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी देश के साथ होने वाले FTA में किसानों का कल्याण सबसे अहम होता है, ताकि ये समझौते किसानों और देश, दोनों के ही सर्वोत्तम हितों को पूरा कर सकें। ALSO READ: अभिजीत दिपके ने छात्रों से मांगी माफी, बोले- आपको पुलिस की हिंसा से नहीं बचा सका

 

पीएम मोदी की विपक्ष से अपील

उन्होंने आगे कहा कि NDA चल रहे मॉनसून सत्र के दौरान सकारात्मक भूमिका निभाएगा। देश के हित में लाए जाने वाले बिलों को पारित कराने के हमारे संकल्प में हम एकजुट हैं। हम विपक्ष से भी आग्रह करते हैं कि भले ही अलग-अलग पार्टियों की राय अलग-अलग हो, लेकिन वे देश, उसके भविष्य और युवाओं के लिए मिलकर काम करें।

 

इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एनडीए के सभी प्रमुख दलों के सांसद और वरिष्ठ नेता शामिल हुए। इस बैठक के दौरान संसद के मानसून सत्र की रणनीति, सरकार के विधायी एजेंडे और विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा की गई। साथ ही एनडीए के सभी सहयोगी दलों के बीच बेहतर समन्वय और सदन में एकजुट होकर सरकार का पक्ष रखने पर भी जोर दिया गया।