अहमदाबाद में भीषण हादसा, पटाखा फैक्‍टरी में विस्‍फोट, 8 मजदूरों की मौत, PM मोदी ने जताया शोक

Fire breaks out after explosion at firecracker factory in Ahmedabad

Ahmedabad Firecracker Factory Blast : गुजरात में अहमदाबाद के रामोल इलाके में शनिवार को एक पटाखा फैक्‍टरी में विस्‍फोट के बाद भीषण आग लगने की खबर सामने आई है। खबरों के अनुसार, हादसे में 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि 10 से अधिक मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया है। सूचना मिलते ही दमकल की कई गाड़ियां और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव अभियान शुरू किया। इस दर्दनाक हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख जताया है। विस्फोट के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल पाया है।

 

10 से अधिक मजदूर गंभीर रूप से घायल

गुजरात में अहमदाबाद के रामोल इलाके में शनिवार को एक पटाखा फैक्‍टरी में विस्‍फोट के बाद भीषण आग लगने की खबर सामने आई है। खबरों के अनुसार, हादसे में 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि 10 से अधिक मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया है। सूचना मिलते ही दमकल की कई गाड़ियां और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव अभियान शुरू किया।

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राहत और बचाव अभियान जारी

विस्फोट के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल पाया है। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। धमाका इतना जोरदार था कि इसकी आवाज करीब 1 किलोमीटर दूर तक सुनाई दी, जिससे इलाके में अफरातफरी मच गई। मौके पर फायर ब्रिगेड की कई टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने जताया गहरा दुख

इस दर्दनाक हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख जताया है। प्रधानमंत्री मोदी ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों के लिए 2 लाख रुपए और घायलों के लिए 50 हजार रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है।

मलबे में कुछ और लोग फंसे हो सकते हैं

खबरों के अनुसार, फैक्‍टरी में आग इतनी तेजी से फैली कि कई मजदूरों को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला। आशंका जताई जा रही है कि मलबे में कुछ और लोग फंसे हो सकते हैं, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है, जिससे राहत और बचाव कार्य में किसी तरह की बाधा न आए।

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बिना लाइसेंस के चल रही थी फैक्टरी 

यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि फैक्‍टरी में सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं? हालांकि जांच के बाद ही हादसे की असली वजह सामने आ सकेगी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फैक्टरी बिना लाइसेंस के संचालित की जा रही थी। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105 के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है।

वांगचुक की हालत बेहद नाजुक! सोनम ने अस्पताल में दवा और ड्रिप लेने से किया इनकार

Sonam Wangchuk Health Update

Sonam Wangchuk Health Update: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से अनशन पर बैठे लद्दाख के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। शनिवार तड़के दिल्ली पुलिस द्वारा जबरन सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद वांगचुक ने डॉक्टरों के इलाज को पूरी तरह ठुकरा दिया है। गंभीर डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) और चयापचय संबंधी समस्याओं के बावजूद उन्होंने नसों के माध्यम से दिए जाने वाले तरल पदार्थ (IV Fluids) और किसी भी तरह की दवा लेने से साफ इनकार कर दिया है। इस बीच, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने देश की जनता से छात्रों के इस आंदोलन में कूदने का बड़ा आह्वान किया है।

सफदरजंग अस्पताल में डॉक्टरों की बढ़ी चिंता

अस्पताल प्रशासन से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, सोनम वांगचुक को इस वक्त सख्त चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। 21 दिनों की भूख हड़ताल के कारण उनके शरीर के कई महत्वपूर्ण पैरामीटर्स बिगड़ चुके हैं। डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनके स्वास्थ्य पर लगातार नजर बनाए हुए है। इस बीच, डॉक्टरों ने वांगचुक के परिवार और उनके सहयोगियों को गंभीर चेतावनी दी है कि यदि बिना किसी देरी के तुरंत इलाज शुरू नहीं करने दिया गया तो स्थिति हाथ से बाहर निकल सकती है और अंगों पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। ALSO READ: जंतर-मंतर पर अभिजीत दीपके पर स्याही फेंकी गई, सोनम वांगचुक को अस्पताल भेजे जाने के बाद भूख हड़ताल पर बैठे CJP प्रमुख

 

अस्पताल के सूत्रों का कहना है कि वांगचुक अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक छात्रों के भविष्य और नीट परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठाती, उनका यह सत्याग्रह अस्पताल के भीतर भी जारी रहेगा। दूसरी ओर, सीजेपी नेता अभिजीत दीपके पर स्याही फेंके जाने की घटना के बाद अनशन स्थल पर बवाल खड़ा हो गया। 

अब चुप रहने का वक्त नहीं

वांगचुक को नाटकीय ढंग से धरना स्थल से उठाए जाने और उनकी बिगड़ती सेहत की खबर मिलते ही सियासत पूरी तरह गरमा गई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को देश की जनता और छात्रों से एक भावुक और आक्रामक अपील की।

 

केजरीवाल ने सोशल मीडिया और प्रेस के माध्यम से कहा कि देश की परीक्षा प्रणाली (NEET) में आमूलचूल सुधार की मांग को लेकर हमारे देश के देशभक्त और छात्र जंतर-मंतर पर 21 दिनों से भूखे बैठे हैं। सोनम वांगचुक की स्थिति गंभीर है। यह समय घरों में बैठने का नहीं है। मैं देश के हर नागरिक, हर माता-पिता और युवाओं से अपील करता हूं कि वे जंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन में शामिल हों और तानाशाही के खिलाफ इन प्रदर्शनकारियों का हाथ मजबूत करें। ALSO READ: सोनम वांगचुक सफदरगंज अस्पताल में भर्ती, क्या कहती है उनकी मेडिकल रिपोर्ट?

20 जुलाई का संसद मार्च

सोनम वांगचुक को भले ही पुलिस ने शारीरिक रूप से जंतर-मंतर से हटाकर अस्पताल भेज दिया हो, लेकिन आंदोलनकारियों का हौसला कम नहीं हुआ है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और अन्य छात्र संगठनों ने ऐलान किया है कि वांगचुक की अनुपस्थिति में विरोध प्रदर्शन और तेज होगा। पार्टी ने आगामी 20 जुलाई को प्रस्तावित 'संसद मार्च' को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। दिल्ली पुलिस ने भी इस मार्च को देखते हुए नई दिल्ली और संसद भवन के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया है। वांगचुक की ओर से भी कहा गया है कि वे भी 20 जुलाई के संसद मार्च में शामिल होंगे। 

 

रविवार को जगदीशपुर में होगी मोहन कैबिनेट की अहम बैठक, UCC समेेत कई अहम फैसलों पर टिकी नजर

भोपाल। 20 जुलाई से शुरु हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र से पहले रविवार को मोहन कैबिनेट की अहम बैठक जगदीशपुर में होगी। कैबिनेट की बैठक में UCC समेत कई अहम मसौदों को मंजूरी दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जगदीशपुर में कैबिनेट की बैठक लेकर कहा कि भोपाल के पास जगदीशपुर का नाम विदेशी आक्रांताओं ने बदलकर इस्लामनगर कर दिया था। विधानसभा के वर्षाकालीन सत्र से पहले जगदीशपुर में मंत्रिपरिषद की बैठक कर समान नागरिक संहिता के ड्राफ्ट को अनुमोदन प्रदान किया जाएगा।
 

शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में एक उच्च स्तरीय बैठक ली। बैठक में मुख्यमंत्री ग्राम जगदीशपुर के पुरातात्विक धरोहर स्थल में होने वाली कैबिनेट की बैठक और 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र की सभी तैयारियों की गहन समीक्षा की। उन्होंने कैबिनेट बैठक में अनुमोदन के लिए लाए जाने वाले सभी विधेयक प्रस्तावों की विस्तार से जानकारी प्राप्त की तथा संबंधित विभागाधिकारियों को समुचित दिशा-निर्देश भी दिए। 
 
 

ये हमारी कहानी नहीं हैं, हमारी कहानी कुछ और है, जिसे हमें खोजना है

vikas sanvad fellowship

जैसे-जैसे हम में संविधान के मूल्‍य और अधिकारों की समझ बढ़ने लगती है, हम अधिक बेहतर इंसान और बेहतर भारतीय नागरिक बनने की तरफ बढ़ने लगते हैं। एक व्‍यक्‍ति अगर अपने अधिकार और खासतौर से संवैधानिक मूल्‍यों के प्रति जागरूक होगा तो वो बेहतर इंसान भी होगा। बेहतर इंसान और बेहतर नागरिक होना हर धर्म, संप्रदाय, जाति, वर्ग, लिंग सबसे से पहले आता है। इसके लिए हमें अपने नागरिक बोध के मूल में जाना होगा, जिन स्‍तंभों पर हमारे देश का निर्माण हुआ उसकी जड़ में जाना होगा— और इसके लिए संविधान से बेहतर दस्‍तावेज कुछ नहीं है।

अगर यह काम और इस बात को ठीक तरह से समझेंगे तो हमारी कहानियां बदलती जाएंगी। क्‍योंकि हमारी कहानी वो नहीं है, जो हम जानते है, अभी हमारे होने की काफी संभावनाएं शेष हैं। अब तक हमारे जीवन और हमारी पहचान की जो कहानियां रहीं हैं वो हमारी पुरानी मान्‍यताओं, हमारी रीतियों, परंपराओं  और धारणाओं से बनी कहानियां हैं। जिस दिन हम अपनी मान्‍यताओं, परंपराओं और धारणाओं से छुटकारा पा लेंगे, उस दिन हमारी कहानी बदल जाएगी और हम अपने अब तक के बने हुए पैटर्न को भी तोड़ सकेंगे।

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हम ये नहीं हैं जो दिख रहे हैं : विकास संवाद की पिछले नौ महीने की फैलोशिप की यात्रा में मुझे इस बात का अनुभव बखूबी हो रहा है। हालांकि यह बस यात्रा की शुरुआतभर है। लेकिन इतने समय की संवैधानिक मूल्‍यों को समझने, जानने और अपनाने की प्रैक्‍टिस में यह यकीन होने लगा है कि हम अपनी धारणाओं, पूर्वाग्रहों और मान्‍यताओं के आधार पर अब तक जो बन चुके हैं, असल में हम वो नहीं है। इस बात की अनुभूति ही अपने आप में एक उपलब्‍धि है। हालांकि यह कुल जमा नहीं है, बदलाव की यह प्रक्रिया सतत जारी है।

मान्‍यताओं और धारणाओं की जडों को खंगालना होगा : अभी इस प्रक्रिया में हमें कई चरणों से गुजरने की जरूरत है। क्‍योंकि हमने अब तक कि बनी हमारी भ्रमित करने वाली पहचान को ही अपना फायनल आउटकम मान लिया है। हम खुद को और दूसरों को भी इसी तय दायरे में रखकर पहचानते हैं। इसे बदलना होगा। इसी परिवर्तन के लिए हमें अपनी मान्‍यताओं, धारणाओं और पूर्वाग्रहों की जड़ों को खंगालना होगा।

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कैसे आएगा यह परिवर्तन : हमारी अब तक स्‍थापित हो चुकी पहचान को बदलने के लिए हमें अपने पूर्वाग्रह, धारणाओं और मान्‍यताओं की पड़ताल कर यह देखना होगा कि क्‍या यही हम हैं, जो हमारे पूर्वज और परिजनों ने हमें बनाया है। विकास संवाद के प्रमुख सचिन कुमार जैन इस पड़ताल को आसान करने के कुछ उपाय बताते हैं। संवाद सत्र में उन्‍होंने बताया कि जब हमें किसी अंधेरे कमरे में जाने से डर लगता है तो हमारे परिजन हमें कहते हैं हनुमान चालीसा का पाठ करोगे तो भय नहीं होगा, हम पाठ करते हुए अंधेरे में जाते हैं और हमें कोई नुकसान नहीं होता। यहीं से हम मान लेते हैं कि हनुमान चालीसा की वजह से हमारी रक्षा हुई। लेकिन क्‍या यह असल में सच है? क्‍या हम उतने भी वैज्ञानिक नहीं हो सके कि अंधेरे में डरने से बचने के लिए किसी श्‍लोक या मंत्र का सहारा लेंगे। वे बताते हैं कि ठीक इसी तरह हमारे कई पैटर्न बने हुए हैं।

इसी तरह हमारे पैटर्न बन गए : दरअसल, हमारे पाप- पून्‍य के पैटर्न भी इसी तरह गढ़े गए। हमारे नैतिक और अनैतिक दृष्‍टिकोण भी इसी तरह आए। हमारी प्राथमिकताएं और हमारे लक्ष्‍य भी इन्‍हीं आधारों पर तय हुए। और नतीजा यह हुआ कि हमें वैज्ञानिक दृष्‍टिकोण और संवैधानिक आधार पर क्‍या बनना था और क्‍या बन गए। हम अपनी पहचान भूले नहीं, बल्‍कि असल पहचान कर ही नहीं पाए।

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मूल्‍य परक समाज कैसे बने : हमें अपनी पहचान की खोज के लिए, उस सच्‍चे नागरिक को पहचानने के लिए और अपनी कहानी को बदलने के लिए मूल्‍य परक समाज की स्‍थापना करना होगी। यह समाज समता, समानता, बंधुता, गरिमा, न्‍याय और स्‍वतंत्रता से बनेगा। जब हम अपने नागरिक होने की शर्तों में इन तत्‍वों को शामिल करेंगे तो एक मूल्‍य परक समाज की स्‍थापना की शुरुआत होगी। इसके लिए हमें अपनी भाषा, आचार, विचार, धारणा आदि में बदलाव करना होगा। हम अपनों के साथ, दूसरों के साथ, साथ वालों के साथ और अजनबियों के साथ क्‍या और कैसा बर्ताव करते हैं यह देखना होगा। चाहे वे किसी भी धर्म, जाति और संप्रदाय या लिंग के हों। पिछड़े को आगे बढ़ाना, वंचितों और कम क्षमता वालों को न्‍याय दिलाना, पिछली या अंतिम कतार में खड़े नागरिकों के साथ गरिमापूर्ण बर्ताव करना, अवसरों की समानता का ख्‍याल रखना और बंधुता का भाव रखने की प्रक्रिया को अनिवार्य रूप से अपनाना होगा। इस बात का ध्‍यान रखकर हमें अपने भीतर बदलाव लाने होंगे कि यह परिवर्तन पूरे समाज को दिशा देने वाला होगा और यह बदलाव व्‍यक्‍तिगत नहीं, बल्‍कि पूरे समाज के लिए होगा। हर नागरिक अपने-अपने स्‍थान पर परिवर्तन लाएगा तो इसका व्‍यापक असर होगा।

भाषा से लेकर बाजारवाद की गुलामी तक ‘सुदर्शन दृष्‍टि’ : ख्‍यात गांधी चिंतक और अर्थशास्‍त्री सुदर्शन आयंगर इस संविधान सत्र में न सिर्फ भाषा की उपयोगिता पर बल्‍कि बाजारवाद और इसकी गुलामी से आजाद होने की भी बेहद समृद्ध दृष्‍टि को उजागर करते हैं। हिंदी भाषा के उचित इस्‍तेमाल को लेकर सुदर्शन जी कहते हैं— हमारी भाषा को क्‍या हो गया है। हम यह नहीं कर पा रहे हैं कि हमें हिंदी बोलना है या अंग्रेजी। जब तक हम भाषा तय नहीं करेंगे, किसी नागरिक के साथ ही उचित व्‍यवहार नहीं कर पाएंगे। वे कहते हैं— कोई शब्‍द कठिन या सरल नहीं होता, शब्‍द परिचित या अपरिचित होता है। हिंदी में अंग्रेजी का इस्‍तेमाल हमारी मानसिक गुलामी को बयां करता है, हमें इससे बचना चाहिए। जब हमारी हिंदी इतनी समृद्ध है तो फिर दूसरी भाषा का इस्‍तेमाल क्‍यों होना चाहिए।

गांधी और उनका ग्राम स्‍वराज्‍य : गांधी और उनके ग्राम स्‍वराज्‍य पर सुदर्शन जी बहुत गहरी दृष्‍टि डालते हैं। वे ग्राम संस्‍कृति को असल संस्‍कृति मानते हैं। सच भी है, शहरों ने तो अपनी संस्‍कृति खो दी है। गांव में आज भी बंधुता का भाव है, सभी लोग एक दूसरे से परिचित हैं। शहरों में वो बात नहीं। यहां पडोसी भी नाम नहीं जानता। ऐसे में बंधुता का भाव कितना अहम हो जाता है। सुदर्शन जी ने वर्तमान शिक्षा, राजनीति, अच्‍छे नागरिक के तत्‍व, गांधी और अंबेडकर पर भी बात की। वे कहते हैं कि हमें कर काले रंग से सफेद रंग की तरफ जाना होगा, तभी हम बेहतर समाज निर्माण कर सकेंगे।

बाजारवाद और उसकी गुलामी : आज हम अपने चारों तरफ देखें तो पाएंगे कि बाजारवाद कितना ज्‍यादा हावी हो गया है। हमारे देश में Soil इकॉनोमी होना चाहिए थी तो उसकी जगह आज हम Oil इकॉनोमी हो गए हैं। हमारा पूरा जीवन तेल पर निर्भर है। बाजार हमें कंट्रोल कर रहा है। ब्रश-पेस्‍ट से लेकर कपड़े और कार तक सबकुछ कंट्रोल हो रहा है। इसमें मूल्‍यपरक समाज कहां बचा हुआ है। जो देश जितना ज्‍यादा कचरा पैदा कर रहा है, उसे उतना ज्‍यादा विकसित माना जा रहा है। सुदर्शन आयंगर इसे हिंसक अर्थव्‍यवस्‍था मानते हैं। महात्‍मा गांधी ने बाजार की इस साजिश को बहुत पहले भांप लिया था, इसलिए उन्‍होंने तात्‍विक बनने की बात कही। यानी रोटी, कपड़ा और मकान के अलावा एक नागरिक को और क्‍या चाहिए। गांधी ने इसीलिए ग्राम स्‍वराज की बात की। सुदर्शन जी गांधी की बात को आगे बढ़ाते हुए कहते हैं कि बाजार का इस्‍तेमाल होना बंद कर दीजिए, कंपनियां अपने आप बंद हो जाएगीं। नहीं तो हमें स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भर रहना पड़ेगा। इसके लिए हमें हमारे अधिकारों, मूल्‍यों के प्रति जागरूक होकर इसके खिलाफ खड़ा होना पड़ेगा, नहीं तो हमारी सरकारों ने तो सिगरेट के पैकेट पर डिस्‍क्‍लैमर लिखकर अपनी जिम्‍मेदारी पूरी कर ली है। अब अगर हम सिगरेट पीते हैं तो इसकी जिम्‍मेदारी हमारी खुद की है।

बदलाव की कहानियां शुरू हुईं : विकास संवाद के आयोजन में फैलो साथी ने जिस तरह से अपने अपने क्षेत्र में बदलाव की कहानियां सुनाई उससे उम्‍मीद जगती है कि हम कोशिश करें तो अपने स्‍तर पर परिवर्तन ला सकते हैं। फैलो साथी हिमालया सिंह, आदित्य श्रीवास्तव, पूनम मसीह, पूजा चौधरी, निदा, चक्रेश महोबिया और शिशिर आदि साथियों ने अपने क्षेत्र में काम कर के कई जगह धारणाओं को बदला है, परिवर्तन की बयार की उम्‍मीद जगाई है, यह परिवर्तन की कहानियां उत्‍साहित करने वाली है। बदलाव की इन कहानियों में सामने आया कि कैसे छोटी- छोटी कोशिशों से आदिवासी, वंचित वर्ग के लिए काम किया जा रहा है और वहां चीजें बदल रही हैं। कुपोषण हो, नशा मुक्ति, बाल विवाह, गर्भवती महिलाओं की समस्याएं, ग्रामसभा की स्‍थापनाएं या ग्रामसभा के माध्यम से स्थानीय समस्याओं के समाधान की बात हो या तलाक ए बिद्दत और तलाक़ ए सुन्नत जैसे मुद्दों की बात हो। यह जानकर उम्‍मीद जागी है कि कैसे संवैधानिक मूल्य और अधिकार के प्रति जागरूक होकर, उन्‍हें अपनाकर बदलाव लाया जा सकता है और कहानियों को बदला जा सकता है। भोपाल में आयोजित इस तीन दिवसीय आयोजन में गांधीवादी चितंक चिन्‍मय मिश्र, लेखक- पत्रकार और विकास संवाद के संयोजक पंकज शुक्‍ला, विकास संवाद की पूजा सिंह, पत्रकार और अभिभाषक फैलो साथी और मेंटर्स की गरिमामय उपस्‍थिति थी।

CM योगी ने श्री दूधेश्वरनाथ महादेव मठ मंदिर में किया जलाभिषेक, प्रदेश में सुख-समृद्धि एवं लोकमंगल की कामना की

 CM Yogi performed Jalabhishek at Shri Dudheshwarnath Mahadev Math Temple

– मुख्यमंत्री योगी ने कहा- संस्कृत केवल भाषा नहीं, भारत की सनातन ज्ञानधारा की वाहिका

– श्री दूधेश्वरनाथ धाम में मुख्यमंत्री ने बटुकों व साधु-संतों से किया संवाद

– वैदिक मंत्रोच्चार एवं शिव स्तुति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय कर दिया

Chief Minister Yogi Adityanath : जनपद भ्रमण कार्यक्रम के अंतर्गत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार प्रातः ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व के श्री दूधेश्वरनाथ महादेव मठ मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का विधि-विधानपूर्वक जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक एवं विशेष पूजन-अर्चन किया। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, आरोग्य एवं लोककल्याण की कामना करते हुए भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना की। उल्लेखनीय है कि श्री दूधेश्वरनाथ महादेव मठ मंदिर गाजियाबाद का एक प्राचीन एवं ऐतिहासिक शिवधाम है, जो सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक साधना एवं वैदिक परंपरा का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

 

मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में स्थित शिवलिंगों पर भी पुष्प अर्पित किए और नंदी महाराज के दर्शन कर श्रद्धापूर्वक पुष्प अर्पित किए तथा मठ परिसर में विराजमान संत-महात्माओं का कुशलक्षेम पूछा। इस अवसर पर मंदिर के पीठाधीश्वर, संत समाज एवं श्रद्धालुजन उपस्थित रहे। वैदिक मंत्रोच्चार एवं शिव स्तुति के मध्य संपन्न हुए पूजन कार्यक्रम ने पूरे वातावरण को भक्तिमय एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत कर दिया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंदिर परिसर में वेदाध्ययन कर रहे वेदपाठी बटुकों एवं संस्कृत शिक्षार्थियों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक संस्कृति एवं संस्कृत भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन को राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण आधार बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्कृत केवल भाषा नहीं, बल्कि भारत की सनातन ज्ञानधारा की वाहिका है, जिसके माध्यम से हमारी सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक विरासत पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित होती आई है।

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इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मठ एवं मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया तथा उपस्थित श्रद्धालुओं का अभिवादन स्वीकार किया। मंदिर आगमन पर वेदपाठी बटुकों द्वारा वैदिक स्वस्तिवाचन एवं पुष्पवर्षा के साथ उनका स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री ने संत समाज के साथ प्रदेश में शांति, सद्भाव, सांस्कृतिक उत्थान एवं जनकल्याण से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी चर्चा की।

दतिया उपचुनाव में अटकलों पर लगा विराम, अवधेश नायक ने किया कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह का समर्थन, चुनाव प्रचार के लिए उतरे

दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा और कांग्रेस ‌में टिकट वितरण के बाद उठे घमासान के बाद अब दोनों ही सियासी दलों में डैमेज कंट्रोल होता दिख रहा है। कांग्रेस में घनश्याम ‌सिंह का टिकट होने के बाद टिकट के प्रबल दावेदार रहे अवधेश नायक की नाराजगी‌ और उनको लेकर लगाई जा रही तमाम सियासी अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया है। लंबे समय से नाराज चल रहे कांग्रेस नेता अवधेश नायक ने आखिरकार कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह का समर्थन करने का आधिकारिक एलान कर दिया है। बीजेपी में वापसी की अफवाहों के बीच अवधेश नायक ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर एक भावुक पोस्ट साझा की है, जिसने दतिया के चुनावी समीकरणों को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है।
 

अवधेश नायक ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर अपने समर्थकों और जनता के नाम एक संदेश जारी करते हुए लिखा कि “आप सभी का स्नेह, विश्वास और निरंतर साथ ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है। मैं हृदय की गहराइयों से आप सभी का धन्यवाद करता हूँ कि हर परिस्थिति में आपने मेरा साथ दिया। आपका यह विश्वास और समर्पण मुझे हमेशा जनसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा। मैं विश्वास दिलाता हूँ कि आपके सम्मान, आपके विश्वास और जनता की सेवा के लिए सदैव पूरी निष्ठा और ईमानदारी से कार्य करता रहूँगा”।


अवधेश नायक क्यों महत्त्वपूर्ण?-दतिया विधानसभा में अवधेश नायक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। अवधेश नायक लंबे समय तक भारतीय जनता पार्टी में रहे थे, लेकिन पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा से राजनीतिक मतभेदों के चलते उन्होंने 2023 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस का हाथ थाम लिया था। 
 

साल 2023 के विधानसभा चुनाव में अवधेश नायक को कांग्रेस से टिकट दिया गया था लेकिन राजेंद्र भारती समर्थकों के बड़े विरोध के बाद उनका टिकट काट दिया ‌गया और राजेंद्र भारती चुनाव लड़े और जीते थे। अवधेश नायक ने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह के इशारे पर उनका टिकट काटा गया वहीं अभी हो रहे उपचुनाव के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मंच से सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि 2023 में नायक का टिकट कटवाने में उनकी भूमिका थी और इसके लिए उन्होंने नायक से माफी भी मांगी थी।

 

उपचुनाव में टिकट न मिलने से थे नाराज-वर्तमान उपचुनाव में कांग्रेस द्वारा पूर्व विधायक घनश्याम सिंह को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद अवधेश नायक और उनके समर्थक एक बार फिर आहत महसूस कर रहे थे। अवधेश नायक की नाराजगी की खबर मिलते ही भाजपा खेमे में हलचल तेज हो गई थी। भाजपा के घोषित उम्मीदवार आशुतोष तिवारी और पार्टी के कई बड़े नेताओं ने अवधेश नायक के घर जाकर बंद कमरे में उनसे मुलाकात की थी, जिससे उनके दोबारा भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई थीं। तमाम कयासों को धता बताते हुए अवधेश नायक ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी की मौजूदगी में आयोजित जनसभा में हिस्सा लिया और मंच साझा कर कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह को जिताने का संकल्प लिया। 
 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अवधेश नायक के इस फैसले से दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की स्थिति  मजबूत हो गई है, जहां एक तरफ भाजपा पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उतारे जाने के बाद आंतरिक गुटबाजी से जूझ रही है, वहीं अवधेश नायक का कांग्रेस के पाले में मजबूती से डटे रहना घनश्याम सिंह के लिए संजीवनी साबित हो सकता है।

दलित छात्रा ललिता गौतम के परिजनों से मिले CM योगी, घटना पर जताया गहरा शोक, कहा- एक भी दोषी बचेगा नहीं

Chief Minister Yogi met family members of Lalita Gautam Dalit student from Meerut

– ललिता गौतम प्रकरण में मुख्यमंत्री योगी सख्त, विवेचना में लापरवाही पर कार्रवाई और दोषियों को कठोरतम दंड दिलाने के दिए निर्देश

– पीड़ित परिवार को 5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता, आवास तथा सभी पात्र सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के निर्देश

– पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री योगी पर जताया भरोसा, बोले पिता और भाई- पूरा विश्वास है कोई अपराधी बच नहीं पाएगा

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को मेरठ की दिवंगत दलित छात्रा ललिता गौतम के परिजनों से गाजियाबाद स्थित पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में मुलाकात कर घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देते हुए भरोसा दिलाया कि इस जघन्य अपराध में शामिल किसी भी दोषी को किसी भी परिस्थिति में बख्शा नहीं जाएगा और सभी अपराधियों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पीड़ित परिवार के साथ पूरी संवेदनशीलता और दृढ़ता के साथ खड़ी है तथा उन्हें न्याय दिलाने में कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी।

 

मुख्यमंत्री ने प्रकरण की विवेचना में किसी भी स्तर पर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को अभियोजन की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करते हुए दोषियों को कठोरतम दंड दिलाने के लिए सभी आवश्यक विधिक उपाय करने के भी निर्देश दिए।

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मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार को तत्काल राहत प्रदान करते हुए मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से 5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने मृतका के पिता तथा परिवार के एक अन्य पात्र सदस्य को मुख्यमंत्री आवास उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए। साथ ही आयुष्मान भारत योजना, राशन कार्ड सहित सभी पात्र लाभार्थीपरक सरकारी योजनाओं का लाभ प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि परिवार को हरसंभव सहयोग मिल सके।

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मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद मृतका के पिता वेदप्रकाश तथा भाई प्रशांत ने न्याय मिलने का विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने पूरे धैर्य और आत्मीयता के साथ उनकी पीड़ा सुनी तथा आश्वस्त किया कि इस जघन्य अपराध में शामिल एक भी अपराधी बच नहीं पाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से हुई मुलाकात ने परिवार को न्याय मिलने का भरोसा और मजबूत किया है।

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इस अवसर पर समाज कल्याण मंत्री एवं मेरठ के जिला प्रभारी मंत्री असीम अरुण सहित वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

नींव से निपुणता तक : योगी सरकार ने जारी किया बुनियादी शिक्षा का नया रोडमैप

Nipun Bharat UP

Nipun Bharat Mission Uttar Pradesh: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने बुनियादी शिक्षा को अधिक गुणवत्तापूर्ण, परिणामोन्मुख और दक्षता आधारित बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। निपुण भारत मिशन का विस्तार करते हुए बालवाटिका से कक्षा-5 तक के लिए व्यापक कार्ययोजना लागू की गई है।

इसके अन्तर्गत कक्षा-3 से 5 तक के विद्यार्थियों के लिए विषयवार और कक्षावार सीखने के लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। साथ ही बच्चों के सीखने के स्तर का नियमित आकलन, लर्निंग गैप की पहचान, सुधारात्मक शिक्षण तथा शिक्षक क्षमता संवर्धन को मिशन का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव (बेसिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश जारी किए हैं। 

 

नई कार्ययोजना के माध्यम से योगी सरकार ने बुनियादी शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित न रखकर प्रत्येक बच्चे के वास्तविक सीखने के स्तर पर केंद्रित करने की रणनीति अपनाई है। बालवाटिका से कक्षा-5 तक सीखने की सतत श्रृंखला विकसित कर प्रत्येक विद्यार्थी को उसकी आयु और कक्षा के अनुरूप आवश्यक ज्ञान, कौशल और दक्षताओं से सशक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इससे राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप आधारभूत शिक्षा की गुणवत्ता मजबूत होगी और आगे की कक्षाओं के लिए विद्यार्थियों की शैक्षणिक नींव और सुदृढ़ बनेगी। 

हर कक्षा के लिए तय हुए सीखने के लक्ष्य

कार्ययोजना के अन्तर्गत कक्षा-3 से 5 तक हिंदी, अंग्रेजी, गणित और पर्यावरण अध्ययन के लिए विषयवार एवं कक्षावार सीखने के लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। इनका निर्धारण राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ), एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों तथा परख के मानकों के अनुरूप किया जाएगा। एससीईआरटी, डायट, विशेषज्ञों और शिक्षकों की सहभागिता से इन लक्ष्यों को अंतिम रूप देकर पूरे प्रदेश में समान गुणवत्ता वाली शिक्षण व्यवस्था विकसित की जाएगी। 

अब हर बच्चे की सीखने की प्रगति पर रहेगी नजर

योगी सरकार की नई कार्ययोजना में प्रत्येक विद्यार्थी की सीखने की प्रगति का नियमित आकलन करने पर विशेष जोर दिया गया है। विद्यालयों में फॉर्मेटिव असेसमेंट और अन्य शैक्षणिक मूल्यांकन के माध्यम से बच्चों की प्रगति का निरंतर परीक्षण किया जाएगा। जिन विद्यार्थियों में लर्निंग गैप की पहचान होगी, उनके लिए कैच-अप शिक्षण और अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग की व्यवस्था की गई है, ताकि कोई भी बच्चा सीखने के निर्धारित लक्ष्यों से पीछे न रह जाए। 

शिक्षकों की क्षमता वृद्धि बनेगी बदलाव का आधार

कार्ययोजना में शिक्षकों के क्षमता संवर्धन को विशेष महत्व दिया गया है। गतिविधि आधारित शिक्षण, दक्षता आधारित शिक्षा, शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम), डिजिटल संसाधनों तथा दीक्षा प्लेटफॉर्म के माध्यम से चरणबद्ध प्रशिक्षण दिया जाएगा। निपुण संकल्प कार्यशालाओं के जरिए शिक्षकों को नई व्यवस्था के अनुरूप तैयार किया जाएगा, जिससे कक्षा कक्ष में सीखने की गुणवत्ता और प्रभावशीलता बढ़ सके। 

स्कूल रेडीनेस से मॉनिटरिंग तक समग्र व्यवस्था

कार्ययोजना में बालवाटिका स्तर पर स्कूल रेडीनेस कार्यक्रम को मजबूत बनाने, विद्यालय पुस्तकालयों के प्रभावी उपयोग, पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने तथा अभिभावकों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया है। इसके साथ ही राज्य, जिला, विकासखंड और विद्यालय स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग एवं समीक्षा की व्यवस्था की गई है, ताकि मिशन का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो और प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ पहुंचे।

जंतर-मंतर पर अभिजीत दीपके पर स्याही फेंकी गई, सोनम वांगचुक को अस्पताल भेजे जाने के बाद भूख हड़ताल पर बैठे CJP प्रमुख

woman throws ink on abhijeet dipke face

दिल्ली पुलिस द्वारा सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी प्रमुख अभिजीत दीपके आज से भूख हड़ताल पर बैठ गए। जब वे अनशनस्‍थल पर कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे तभी एक महिला ने उन पर स्याही फेंक दी। इससे वहां अफरातफरी मच गई। दिल्ली पुलिस ने आरोपी महिला को हिरासत में ले लिया है। ALSO READ: सोनम वांगचुक सफदरगंज अस्पताल में भर्ती, क्या कहती है उनकी मेडिकल रिपोर्ट?

 

घटना के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे अभिजीत दिपके पर एक महिला ने हमला कर दिया, जिसने उनके चेहरे पर स्याही फेंक दी। यह घटना तब हुई जब वे प्रदर्शनकारियों को संबोधित कर रहे थे। पार्टी का कहना है कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना हर किसी का अधिकार है, लेकिन वे कौन लोग हैं जो बार-बार ऐसी हरकतों को अंजाम दे रहे हैं?

सोनम का अनशन जारी

अभिजीत दिपके ने कहा कि नीट मामले में अब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही CJP अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस्तीफे की मांग कर रही है। पार्टी 20 जुलाई को संसद तक मार्च करेगी। सोनम की पत्नी गीतांजली ने कहा कि अगर सोनम यात्रा में शामिल नहीं भी हुए तो मैं उनको रिप्रेजेंट करते हुए उस यात्रा को लीड करूंगी। उन्होंने साफ कहा कि सोनम का अनशन अभी खत्म नहीं हुआ है।

 

सोनम को राहुल का समर्थन

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, मोदी सरकार के मूल सिद्धांत 'असत्य' और 'हिंसा' हैं। सोनम वांगचुक जी जब अहिंसक भूख हड़ताल पर थे, तब उन्हें जंतर-मंतर से हटाना गलत है। पेपर लीक, शिक्षा की बढ़ती लागत और छात्रों की आत्महत्याएं भारत के भविष्य के लिए बेहद गंभीर मुद्दे हैं। कोई भी ताकत भारत के छात्रों को और हममें से जो लोग उनसे प्यार करते हैं और उन पर विश्वास करते हैं, उन्हें इन मुद्दों को उठाने से नहीं रोक सकती।

गौरतलब है कि 20 दिन से जंतर मं‍तर पर अनशन कर रहे सोनम वांगचुक को पुलिस ने आज दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल में भर्ती करा दिया है। पार्टी ने प्रदर्शनकारियों से जल्द ही जंतर मंतर खाली करने को कहा है। हालांकि वहां अभी भी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी डटे हुए हैं।

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

Liver Disease Symptoms

Liver Disease Symptoms: क्या आपने कभी अपनी हथेलियों के रंग या अपनी आंखों के सफेद हिस्से (स्केलेरा) पर बारीकी से गौर किया है? अक्सर हम हलकी लालिमा या आंखों के पीलेपन को थकान समझकर टाल देते हैं। लेकिन शरीर के ये छोटे-छोटे बदलाव असल में एक बहुत बड़ी चेतावनी हो सकते हैं।

 

इपोक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक हमारा लिवर (यकृत) एक ऐसा 'साइलेंट वॉरियर' है जो 80% तक डैमेज होने के बाद भी बिना कोई बड़ा लक्षण दिखाए चुपचाप काम करता रहता है। यही वजह है कि फैटी लिवर, हेपेटाइटिस और सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारियां शुरुआती दौर में बिल्कुल शांत रहती हैं। लेकिन अगर आप अपने हाथों और आंखों के संकेतों को पढ़ना सीख लें, तो लिवर की गंभीर बीमारी को समय रहते पकड़ा जा सकता है।

क्या आपके हाथ दे रहे हैं लिवर डैमेज का संकेत?

पारंपरिक चीनी चिकित्सा (TCM) में हाथों को शरीर के आंतरिक स्वास्थ्य का दर्पण माना जाता है। टीसीएम के अनुसार, हथेली के बीच में या अनामिका (Ring Finger) के नीचे की त्वचा का रंग गहरा या असामान्य होना शरीर में ऊर्जा (Qi) के खराब प्रवाह और लिवर की कमजोरी को दर्शाता है। वहीं, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी इस बात की पुष्टि करता है। इसे मेडिकल भाषा में 'पामर एरीथेमा' (Palmar Erythema) या आम बोलचाल में 'लिवर पाम्स' (Liver Palms) कहा जाता है।

पामर एरीथेमा के मुख्य लक्षण

  • अंगूठे और कनिष्ठिका (Little Finger) के निचले हिस्से की गद्दीदार त्वचा पर गहरी लालिमा आ जाती है।
  • जब आप इस लाल हिस्से को दबाते हैं, तो यह कुछ पल के लिए सफेद हो जाता है और दबाव हटाते ही तुरंत फिर से लाल हो जाता है।
  • त्वचा पर लाल रंग के छोटे-छोटे धब्बे दिखाई देने लगते हैं, जिनसे बारीक खून की नसें मकड़ी के पैरों की तरह बाहर निकलती दिखती हैं।

दरअसल, जब लिवर कमजोर या बीमार होता है, तो वह शरीर में मौजूद एस्ट्रोजन हार्मोन को सही तरीके से मेटाबोलाइज (पचा) नहीं पाता। खून में एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ने के कारण त्वचा की छोटी रक्त वाहिकाएं (ब्लड वेसल्स) फैल जाती हैं, जिससे हथेलियों में लालिमा आ जाती है। एक शोध के अनुसार, लिवर सिरोसिस से पीड़ित लगभग दो-तिहाई (66%) मरीजों में यह लक्षण देखा जाता है। हालांकि हथेलियों का लाल होना गर्भावस्था, रूमेटाइड अर्थराइटिस, थायराइड या भारी कसरत के कारण भी हो सकता है। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के खुद किसी नतीजे पर न पहुंचें।

Liver Disease Symptoms

चेहरा और आंखें : जब पीलापन बयां करे लिवर का दर्द

लिवर की सेहत का सीधा असर आपके चेहरे और आंखों की चमक पर पड़ता है। टीसीएम के अनुसार, जब लिवर की कार्यप्रणाली सुस्त पड़ती है, तो चेहरे की प्राकृतिक चमक गायब हो जाती है और रंगत बेजान या हल्की काली/धूसर होने लगती है। यह शरीर में रक्त और ऊर्जा के खराब सर्कुलेशन का नतीजा होता है।

  • आधुनिक विज्ञान में आंखों के सफेद हिस्से (Sclera) का पीला होना लिवर की बीमारी का सबसे पहला और स्पष्ट संकेत माना जाता है।
  • जब लिवर की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होती हैं या पित्त नली (Bile Duct) में कोई रुकावट आती है, तो शरीर में बिलीरुबिन (Bilirubin) नाम का पीला पिगमेंट जमा होने लगता है।
  • यह पीलापन त्वचा पर दिखने से पहले आंखों के सफेद हिस्से में दिखाई देता है। अक्सर लोग खुद को स्वस्थ महसूस करते हैं, लेकिन जब उनके दोस्त या परिवार वाले उनकी आंखों में पीलापन देखते हैं, तब जाकर बीमारी का पता चलता है।

मानसिक तनाव और लिवर का गहरा कनेक्शन

क्या गुस्सा और तनाव आपके लिवर को बीमार कर सकते हैं? पारंपरिक चिकित्सा मानती है कि अत्यधिक गुस्सा, चिंता और मानसिक तनाव लिवर की ऊर्जा (Qi) को अवरुद्ध कर देते हैं, जिससे पसलियों में दर्द, अपच, अनिद्रा और चिड़चिड़ापन होने लगता है।

 

हालांकि आधुनिक चिकित्सा सीधे तौर पर तनाव को सिरोसिस का कारण नहीं मानती, लेकिन शोध दर्शाते हैं कि क्रोनिक स्ट्रेस (लगातार तनाव) शरीर में सूजन बढ़ाता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है। तनाव के कारण लोग अक्सर ओवरईटिंग (ज्यादा खाना), शराब का अत्यधिक सेवन और खराब जीवनशैली अपना लेते हैं, जो सीधे तौर पर लिवर को तबाह कर देती है।

एक्यूप्रेशर: 'मड इन्फ्लेमेशन' (Mu Yan) पॉइंट से लिवर की देखभाल

  • तनाव और लिवर की सुस्ती को दूर करने के लिए पारंपरिक चिकित्सा में 'मड इन्फ्लेमेशन' (Wood Inflammation Points) पर दबाव बनाने की सलाह दी जाती है।
  • अपनी हथेली को ऊपर की ओर रखें। अनामिका उंगली (Ring Finger) के बीच वाले हिस्से (Second Segment) में छोटी उंगली की तरफ थोड़ा बगल में तीन बिंदु ऊपर से नीचे की तरफ होते हैं।
  • सुबह और शाम को 3 से 5 मिनट के लिए अपने अंगूठे से इन तीनों बिंदुओं पर हल्का दबाव दें। आप किसी पेन के पिछले गोल हिस्से से भी इन पर धीरे-धीरे रोल कर सकते हैं, जिससे हल्का मीठा दर्द महसूस हो।

क्या है लिवर-फ्रेंडली डाइट और किससे बचें? 

डाइटिशियन डोना चेन के अनुसार, लिवर एकमात्र ऐसा अंग है जो खुद को दोबारा ठीक (Regenerate) कर सकता है, बशर्ते उसे सही पोषक तत्व मिलें। लिवर को फैटी होने और सूजन से बचाने के लिए इन आदतों को अपनाएं-

  • फंगस या फफूंद (Mold) लगा हुआ पुराना खाना तुरंत फेंक दें।
  • डिब्बाबंद और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड, कृत्रिम चीनी और मीठे ड्रिंक्स से दूरी बनाएं।
  • ज्यादा वसायुक्त (फैटी) और सीधे आग पर झुलसाया हुआ भोजन न करें।
  • अत्यधिक शराब का सेवन न करें।

लिवर को सुरक्षित रखने के 4 नियम

  • थाली में अधिक से अधिक रंग-बिरंगे फल-सब्जियां और विटामिन B युक्त चीजें शामिल करें।
  • रोजाना योग, ध्यान, ताई-ची या कम से कम 30 मिनट वॉक करें।
  • यदि आपको डायबिटीज, मोटापा है या परिवार में लिवर की बीमारी का इतिहास है, तो नियमित रूप से LFT (लिवर फंक्शन टेस्ट) कराएं।
  • शराब और प्रोसेस्ड फूड के सेवन को बेहद सीमित या पूरी तरह बंद करें।