रामलला के दरबार में महाप्रायश्चित, चढ़ावा चोरी के पाप से मुक्ति के लिए 10 दिवसीय क्षमा-याचना अनुष्ठान

ayodhya ram mandir trust meeting

Ram Mandir Ayodhya Atonement Ritual: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामधन (दान और चढ़ावा) गबन का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस महापाप का पूर्ण रूप से खुलासा होना अभी बाकी है। चोरी कितनी बड़ी है, क्या-क्या गायब हुआ है और इस घिनौने कृत्य में कौन-कौन से सफेदपोश शामिल हैं इन तमाम कड़ियों को जोड़ने में जांच एजेंसियां जुटी हुई हैं। इसी बीच, इस कृत्य से आहत राममंदिर ट्रस्ट ने प्रभु श्रीराम से क्षमा मांगने और मंदिर परिसर की पवित्रता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए एक 10 दिवसीय महाअनुष्ठान की शुरुआत की है।

​70 वैदिक आचार्यों ने संभाला जिम्मा

​रामलला के दरबार में शुरू हुए इस 10 दिवसीय अनुष्ठान को अत्यंत गुप्त और पवित्र तरीके से संपन्न कराया जा रहा है। इसके लिए देश के 70 शीर्ष वैदिक आचार्यों को आमंत्रित किया गया है। ये आचार्य राम मंदिर के मुख्य गर्भगृह से लेकर परकोटे (परिसर की बाहरी सीमा) तक विभिन्न स्थानों पर बैठकर विशेष मंत्रोच्चार, जप और आहुतियां दे रहे हैं। एक वैदिक आचार्य के मुताबिक प्रभु के धन पर डाका डालने वालों को कानून सजा देगा, लेकिन मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा और पवित्रता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए यह प्रायश्चित पूजन अनिवार्य था।

​बड़े खुलासे की उम्मीद

​एक तरफ जहां मंदिर परिसर में मंत्रों के उच्चारण से माहौल को शुद्ध किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक और जांच स्तर पर भी कार्रवाई तेज है। सूत्रों के मुताबिक, यह गबन एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा हो सकता है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, राम भक्तों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर रामलला के खजाने पर नजर डालने वाले वो 'अपराधी' कौन हैं।

मुख्यमंत्री योगी ने भीड़ में खड़े युवक को मंच पर बुलाया, पीठ थपथपाकर दिया आशीर्वाद

Chief Minister Yogi called young man standing in crowd onto stage and blessed him

– जनसभा स्थल पर मंच के सामने सीएम योगी का हाथ से बनाया चित्र लिए खड़ा था युवक

– मुख्यमंत्री योगी ने नवनियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को दिया नियुक्ति पत्र 

– सीएम योगी ने कैराना में निर्माणाधीन पीएसी परिसर का भी किया निरीक्षण

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हाथ से बनाया गया चित्र लेकर एक युवक शामली की जनसभा में पहुंचा। वह पंडाल में खड़ा होकर यह चित्र मंच की ओर दिखा रहा था। संबोधन समाप्त होने के पश्चात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नजर जब उस पर गई तो उन्होंने सुरक्षाकर्मियों से कहकर उस युवक को मंच पर बुला लिया। वह युवक मंच पर पहुंचा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का चित्र उन्हें भेंट किया। मुख्यमंत्री ने उससे बातचीत भी की। युवक ने सीएम का पैर छुआ तो सीएम ने आशीर्वाद देते हुए उसकी पीठ भी थपथपाई। 

सीएम योगी ने कैराना में निर्माणाधीन पीएसी परिसर का भी किया निरीक्षण

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम से पहले कैराना में बन रहे निर्माणाधीन पीएसी परिसर का भी निरीक्षण किया। उन्होंने यहां हो रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी ली, फिर प्रशासनिक अधिकारियों व निर्माणाधीन एजेंसी को समयसीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण कार्य करने का निर्देश दिया।  

 

चयनित आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को दिया नियुक्ति पत्र 

मुख्यमंत्री ने जनसभा स्थल पर चयनित आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को नियुक्ति पत्र दिया। उन्होंने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र, चाबी, चेक आदि भी वितरित किया।  

 

सीएम योगी के हाथों सम्मानित लाभार्थी 

रूबी- आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री को नियुक्ति पत्र 

 निगम- आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री को नियुक्ति पत्र
जय सिंह- कृषि यंत्र की योजना के तहत ट्रैक्टर की चाबी 

 राजपाल- प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत स्वीकृति पत्र

सुनीता- प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत स्वीकृति पत्र

ब्रजेश- प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत चाबी 

गीता- ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 5.83 करोड़ से अधिक का चेक  

सरिता व अनिता- ई-रिक्शा की चाबी

निशांत जैन- मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत 25 लाख का चेक 

नाजिम- मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत 3.31 लाख का चेक 

नौशिदा- निराश्रित महिला पेंशन के तहत स्वीकृति पत्र

अक्षिता जैन- मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत स्वीकृति पत्र 

निकिता चौधरी- मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत स्वीकृति पत्र।

Balochistan Attack : बलूचिस्तान में सुरक्षा काफिले पर घात लगाकर हमला, 45 पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने का दावा, BLA ने ली जिम्मेदारी

pakitan army

पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में गुरुवार को सुरक्षा बलों के एक काफिले पर हुए बड़े हमले में 45 पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने का दावा किया गया है। यह दावा बलूचिस्तान पोस्ट की एक रिपोर्ट में किया गया है। प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। हालांकि, पाकिस्तान सेना ने हमले की पुष्टि तो की है, लेकिन अब तक आधिकारिक तौर पर हताहतों की संख्या जारी नहीं की है।

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रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला मस्तुंग के पास सुरक्षा बलों के काफिले पर घात लगाकर किया गया। BLA के प्रवक्ता जीयंद बलोच ने दावा किया कि संगठन के लड़ाकों ने न केवल सुरक्षा काफिले बल्कि उसके एस्कॉर्ट और बाद में पहुंची अतिरिक्त सैन्य टुकड़ियों को भी निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि इस समन्वित अभियान को संगठन की 'फतेह स्क्वाड' ने अंजाम दिया।

 

प्रवक्ता ने यह भी दावा किया कि बयान जारी किए जाने तक BLA लड़ाकों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ जारी थी और मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

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ऑपरेशन शबान के बीच हुआ हमला

 

यह हमला ऐसे समय हुआ है जब पाकिस्तान सेना ने हालिया आतंकी हमलों के बाद 'ऑपरेशन शबान' शुरू किया है। हाल के दिनों में जियारत जिले के मंगी डैम क्षेत्र में हुए हमलों में 27 पुलिसकर्मियों और लसबेला में 11 सैनिकों की मौत हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार, इस अभियान में पाकिस्तान सेना, फ्रंटियर कॉर्प्स, बलूचिस्तान पुलिस, खुफिया एजेंसियां और वायुसेना संयुक्त रूप से शामिल हैं।

सेना की चेतावनी

 

पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कहा कि हमले के जिम्मेदार लोगों का हर हाल में पीछा किया जाएगा और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि जवाबी कार्रवाई में “तर्कसंगतता और अनुपात” की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए।

क्यों संवेदनशील है बलूचिस्तान?

 

बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा लेकिन सबसे कम आबादी वाला प्रांत है। यह क्षेत्र लंबे समय से अलगाववादी आंदोलन का केंद्र रहा है। यहां के कई संगठन अधिक राजनीतिक स्वायत्तता और प्राकृतिक संसाधनों में बड़े हिस्से की मांग करते रहे हैं। यह प्रांत ईरान और अफगानिस्तान की सीमा से लगा हुआ है और यहां स्थित ग्वादर बंदरगाह चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) परियोजना का अहम हिस्सा माना जाता है। खनिज संपदा और सामरिक महत्व के कारण यह इलाका पाकिस्तान की सुरक्षा और आर्थिक रणनीति के केंद्र में बना हुआ है।

 

जांच के लिए समिति गठित

पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, सरकार ने चार सदस्यीय समिति गठित की है, जो हमले की पूरी घटनाक्रम की जांच करेगी। समिति सुरक्षा व्यवस्था, कमांड स्तर की संभावित चूक और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय में कमी की भी पड़ताल करेगी। इससे पहले 6 से 9 जुलाई के बीच हुए तीन बड़े हमलों में एक की जिम्मेदारी BLA और दो की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) पर डाली गई थी। इन घटनाओं ने बलूचिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

UP के शिकोहाबाद में पुलिस से मुठभेड़, 2 इनामी बदमाश ढेर, SOG के 2 जवान घायल

Encounter with police in Shikohabad Firozabad district Uttar Pradesh

उत्‍तर प्रदेश में फिरोजाबाद जिले के शिकोहाबाद थाना क्षेत्र में शुक्रवार को पुलिस और 2 इनामी बदमाशों के बीच बिल्कुल फिल्मी स्टाइल में मुठभेड़ हो गई। इस मुठभेड़ में दोनों अपराधी मारे गए, जबकि एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) के 2 जवान गोली लगने से घायल हो गए। घायलों का अस्पताल में उपचार जारी है, जिनमें एक की हालत गंभीर बताई जा रही है।

 

पुलिस के अनुसार, मारे गए बदमाश इटावा में हाल ही में एक डॉक्टर से हुई लूट की वारदात में वांछित थे। दोनों पर करीब एक दर्जन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे और उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार तलाश कर रही थी।

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एडीजी एसके भगत ने मीडिया को बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि इटावा के फ्रेंड्स कॉलोनी क्षेत्र में डॉक्टर से लूट करने वाले दोनों आरोपी गाजियाबाद से झारखंड जा रही संबलपुर एक्सप्रेस में सफर कर रहे हैं। सूचना मिलते ही इटावा एसओजी ने शिकोहाबाद रेलवे स्टेशन पर ट्रेन की घेराबंदी कर दी।

 

पुलिस की मौजूदगी का आभास होते ही दोनों बदमाश ट्रेन से उतरकर नीम खेरिया गांव की ओर भाग निकले। भागते समय उन्होंने एक बच्चे को बंधक बना लिया और पुलिस को चेतावनी दी कि पीछा करने पर बच्चे की हत्या कर देंगे। कुछ दूरी पर उन्होंने एक मोटरसाइकल छीनी, बच्चे को छोड़ दिया और तेजी से फरार होने का प्रयास किया।

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पुलिस ने बदमाशों का पीछा जारी रखा। इस दौरान बदमाशों ने एसओजी टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने उन्हें गांव के एक स्कूल के पास घेर लिया। दोनों ओर से कई राउंड फायरिंग हुई, जिसमें पुलिस की जवाबी कार्रवाई में अंकित उर्फ सीपू और सुमित नामक दोनों बदमाश मारे गए।

 

मुठभेड़ के दौरान बदमाशों की गोली एसओजी के सिपाही डेविड चौहान के पेट और सिपाही पुष्पेंद्र के कंधे में लगी। दोनों को तत्काल फिरोजाबाद के सरकारी अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्सकों ने पुष्पेंद्र की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें आगरा रेफर कर दिया, जहां उनका इलाज जारी है।

 

घटना की जानकारी मिलते ही फिरोजाबाद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए। एसएसपी आदित्य लांग्हे ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। आसपास के खेतों और गांवों में पुलिस द्वारा सघन सर्च ऑपरेशन भी चलाया गया।

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पुलिस का कहना है कि मारे गए दोनों बदमाश इटावा के चर्चित डॉक्टर लूटकांड में वांछित थे। इस मामले में एक आरोपी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था, जबकि अंकित उर्फ सीपू और सुमित की तलाश जारी थी। शुक्रवार को हुई मुठभेड़ में दोनों का अंत हो गया।

Who is Neha Bora : कौन हैं नेहा बोरा? CJP प्रोटेस्ट के बाद क्यों हैं चर्चा में, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो

दिल्ली के जंतर-मंतर में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठे हुए है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर वे अनशन पर हैं। सीजेपी प्रोटेस्ट में सोनम वांगचुक ही नहीं कई छात्र नेता भी भूख हड़ताल पर बैठे है। इसमें ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के 4 नेता शामिल हैं। इनमें वामपंथी छात्र संगठन 'आइसा' (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा (Neha Bora) भी शामिल हैं। 

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नेहा बोरा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की एक शोधार्थी (PhD scholar) हैं। वे इस समय सोशल मीडिया पर लगाकार चर्चाओं में हैं। नेहा को अक्सर शिक्षा के निजीकरण, मॉब लिंचिंग, बिलकिस बानो के न्याय और गाजा में नागरिकों की स्थिति जैसे मुद्दों पर मुखर होकर अपनी बात रखते देखा गया है।
 

जानकारी के मुताबिक उत्तरप्रदेश के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मी नेहा ने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली पब्लिक स्कूल, सिलीगुड़ी से पूरी की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में ग्रेजुएशन किया और फिर अंबेडकर विश्वविद्यालय से पढ़ाई की। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा JNU से जारी रखी। नेहा जेएनयू में छात्र राजनीति से जुड़ीं और बाद में AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं।

ब्राह्मणवाद और जातीय भेदभाव पर विचार

रिपोर्ट के अनुसार, नेहा बोरा अपने सोशल मीडिया पोस्ट में 'ब्राह्मणवाद' को समाज में मौजूद विभिन्न प्रकार के भेदभाव का प्रतीक बताती रही हैं। उनके अनुसार, ब्राह्मणवाद का अर्थ समाज के एक वर्ग द्वारा दूसरे वर्ग का ऐतिहासिक दमन है। उनके आलोचकों के मुताबिक उनके विचारों में ब्राह्मण समुदाय के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण दिखाई देता है और वे इसे सामाजिक समानता स्थापित करने के तर्क से उचित ठहराती हैं।

 

हिन्दू एकता और मुस्लिम समुदाय पर बयान

एक पॉडकास्ट में नेहा बोरा ने कहा था कि हिन्दू समाज को जातिगत आधार से ऊपर उठाकर एकजुट करने की अपील से मुस्लिम समुदाय में असुरक्षा की भावना पैदा होती है। उन्होंने कथित लव जिहाद के मुद्दे को भी गंभीरता से नहीं लिया और हिन्दू समाज में महिलाओं की स्थिति पर टिप्पणी की। उनके इन बयानों को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ था।

फिलिस्तीन के समर्थन में रुख

नेहा बोरा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर फिलिस्तीन के समर्थन में कई पोस्ट कर चुकी हैं। उन्होंने इजरायल की आलोचना करते हुए Free Palestine अभियान का समर्थन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर कई पोस्ट के जरिए इजराइल की निंदा की और फिलिस्तीन की आजादी (Free Palestine) की मांग की है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि छात्र संगठनों के माध्यम से वैचारिक और राजनीतिक एजेंडा आगे बढ़ाने की रणनीति लंबे समय से अपनाई जाती रही है। वहीं, AISA और अन्य वामपंथी छात्र संगठन इन आरोपों को खारिज करते हुए स्वयं को छात्रों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाला संगठन बताते रहे हैं।

Who is Neha Bora : कौन हैं नेहा बोरा? CJP प्रोटेस्ट के बाद क्यों हैं चर्चा में, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो

दिल्ली के जंतर-मंतर में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठे हुए है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर वे अनशन पर हैं। सीजेपी प्रोटेस्ट में सोनम वांगचुक ही नहीं कई छात्र नेता भी भूख हड़ताल पर बैठे है। इसमें ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के 4 नेता शामिल हैं। इनमें वामपंथी छात्र संगठन 'आइसा' (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा (Neha Bora) भी शामिल हैं। 

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नेहा बोरा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की एक शोधार्थी (PhD scholar) हैं। वे इस समय सोशल मीडिया पर लगाकार चर्चाओं में हैं। नेहा को अक्सर शिक्षा के निजीकरण, मॉब लिंचिंग, बिलकिस बानो के न्याय और गाजा में नागरिकों की स्थिति जैसे मुद्दों पर मुखर होकर अपनी बात रखते देखा गया है।
 

जानकारी के मुताबिक उत्तरप्रदेश के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मी नेहा ने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली पब्लिक स्कूल, सिलीगुड़ी से पूरी की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में ग्रेजुएशन किया और फिर अंबेडकर विश्वविद्यालय से पढ़ाई की। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा JNU से जारी रखी। नेहा जेएनयू में छात्र राजनीति से जुड़ीं और बाद में AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं।

ब्राह्मणवाद और जातीय भेदभाव पर विचार

रिपोर्ट के अनुसार, नेहा बोरा अपने सोशल मीडिया पोस्ट में 'ब्राह्मणवाद' को समाज में मौजूद विभिन्न प्रकार के भेदभाव का प्रतीक बताती रही हैं। उनके अनुसार, ब्राह्मणवाद का अर्थ समाज के एक वर्ग द्वारा दूसरे वर्ग का ऐतिहासिक दमन है। उनके आलोचकों के मुताबिक उनके विचारों में ब्राह्मण समुदाय के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण दिखाई देता है और वे इसे सामाजिक समानता स्थापित करने के तर्क से उचित ठहराती हैं।

 

हिन्दू एकता और मुस्लिम समुदाय पर बयान

एक पॉडकास्ट में नेहा बोरा ने कहा था कि हिन्दू समाज को जातिगत आधार से ऊपर उठाकर एकजुट करने की अपील से मुस्लिम समुदाय में असुरक्षा की भावना पैदा होती है। उन्होंने कथित लव जिहाद के मुद्दे को भी गंभीरता से नहीं लिया और हिन्दू समाज में महिलाओं की स्थिति पर टिप्पणी की। उनके इन बयानों को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ था।

फिलिस्तीन के समर्थन में रुख

नेहा बोरा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर फिलिस्तीन के समर्थन में कई पोस्ट कर चुकी हैं। उन्होंने इजरायल की आलोचना करते हुए Free Palestine अभियान का समर्थन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर कई पोस्ट के जरिए इजराइल की निंदा की और फिलिस्तीन की आजादी (Free Palestine) की मांग की है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि छात्र संगठनों के माध्यम से वैचारिक और राजनीतिक एजेंडा आगे बढ़ाने की रणनीति लंबे समय से अपनाई जाती रही है। वहीं, AISA और अन्य वामपंथी छात्र संगठन इन आरोपों को खारिज करते हुए स्वयं को छात्रों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाला संगठन बताते रहे हैं।

Share Bazaar में बंपर उछाल, Sensex 965 अंक उछला, Nifty भी 24300 के पार

Indian stock market closed with record gains on Friday

Share Market Update News : भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को यानी आज रिकॉर्ड बढ़त के साथ बंद हुआ। कारोबार के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 964.58 अंक यानी 1.25 फीसदी की भारी बढ़त के साथ 78151.45 के स्तर पर बंद हुआ, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 261.55 अंक यानी 1.09 फीसदी चढ़कर 24334.30 के स्तर पर आ गया। आज की तेजी में सबसे बड़ा योगदान बैंकिंग शेयरों का रहा। बाजार में सबसे ज्यादा खरीदारी आईटी, बैंकिंग और ऑटो शेयरों में देखने को मिली। आईटी और बैंकिंग के अलावा, Nifty Auto और Nifty Realty इंडेक्स में 1.27 प्रतिशत की बढ़त रही।

 

भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को यानी आज रिकॉर्ड बढ़त के साथ बंद हुआ। कारोबार के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 964.58 अंक यानी 1.25 फीसदी की भारी बढ़त के साथ 78151.45 के स्तर पर बंद हुआ, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 261.55 अंक यानी 1.09 फीसदी चढ़कर 24334.30 के स्तर पर आ गया।

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आज की तेजी में सबसे बड़ा योगदान बैंकिंग शेयरों का रहा। बाजार में सबसे ज्यादा खरीदारी आईटी, बैंकिंग और ऑटो शेयरों में देखने को मिली। आईटी और बैंकिंग के अलावा, Nifty Auto और Nifty Realty इंडेक्स में 1.27 प्रतिशत की बढ़त रही। शुक्रवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूती के साथ बंद हुआ। सन फार्मा, ट्रेंट, भारती एयरटेल और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयरों में आज बिकवाली का दबाव देखा गया।

एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई, शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग गिरावट के साथ बंद हुए। यूरोपीय शेयर बाजार भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1.79 फीसदी बढ़कर 85.52 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

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इससे पहले यानी गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार भारी उतार-चढ़ाव के बाद लगभग सपाट स्तर पर बंद हुए। कारोबार के अंत में बीएसई का सेंसेक्स मात्र 1.44 अंक की मामूली बढ़त के साथ 77186.87 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई का निफ्टी भी सीमित दायरे में कारोबार करने के बाद 5.75 अंक या 0.02 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 24072.75 के स्तर पर रहा।

राहुल गांधी के ‘धुरंधर’ पवन खेड़ा पहुंचे सोनम वांगचुक से मिलने, मोदी सरकार पर साधा निशाना

Pawan Khera meets Sonam Wangchuk: कांग्रेस के मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के प्रमुख और राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे सोनम वांगचुक से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने वांगचुक का हालचाल जाना और अन्य प्रदर्शनकारियों से भी मुलाकात की। उल्लेखनीय है कि नीट पेपर लीक को लेकर वांगचुक करीब 20 दिन से अनशन कर रहे हैं। इस दौरान उनकी हालत काफी खराब हो चुकी है। 

 

खेड़ा ने एक्स पर एक पोस्ट कर कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध करना एक संवैधानिक अधिकार है। जब नागरिक अपनी बात रखने के लिए उपवास करते हैं, तो सरकार का फर्ज है कि वह उनकी बात सुने न कि नज़रअंदाज करे। यही 'राज धर्म' है। श्रीमती इंदिरा गांधी ने 1984 में यही किया था। डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने 2011 में यही किया था। वे समझते थे कि सरकार की पहली ज़िम्मेदारी बातचीत करना है, भले ही असहमति हो। लेकिन, इस सरकार ने उदासीनता का रास्ता चुना है।ALSO READ: 'आपने देश की अंतरात्मा जगा दी, अब अनशन खत्म कीजिए'— शशि थरूर की सोनम वांगचुक से भावुक अपील

उदासीन और संवेदनहीन सरकार 

उन्होंने कहा- वर्तमान सरकार ने शिक्षा सुधारों की मांग पर बातचीत करने से इनकार कर दिया है, चाहे यह मांग राहुल गांधी और देश भर में NSUI और IYC कार्यकर्ताओं ने उठाई हो या जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों ने। ऐसी उदासीनता सिर्फ़ अहंकार नहीं है, यह संवेदनहीनता है और लोकतंत्र के लिए बिल्कुल भी उचित नहीं है। 

 

आज, कांग्रेस पार्टी की ओर से, मैं श्री सोनम वांगचुक और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों से मिला और उनसे आग्रह किया कि वे अपनी बिगड़ती सेहत को देखते हुए अपना उपवास समाप्त करें। अपने लोगों को खोने से कोई आंदोलन मजबूत नहीं होता। हम आगे भी लड़ने के लिए जीवित रहते हैं।

क्यों भूख हड़ताल कर रहे हैं सोनम वांगचुक? 

सोनम वांगचुक की इस भूख हड़ताल का सबसे बड़ा और मुख्य कारण राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर NEET (UG) 2026 परीक्षा में हुई कथित धांधली, पेपर लीक और अनियमितताएं हैं। वांगचुक 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के आंदोलन के समर्थन में 28 जून से अनशन पर हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि परीक्षा प्रणाली में हुए इस बड़े खिलवाड़ की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें।

 

उनका कहना है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक और परीक्षा प्रणालियों में कमियों के कारण देश के लाखों युवाओं का भविष्य अंधकार में जा रहा है और कई छात्र मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं। लंबे समय से लद्दाख में वैकल्पिक और व्यावहारिक शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने वाले वांगचुक देश की शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधारों की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि भारत की मौजूदा परीक्षा और शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की भारी कमी है, जिसे सुधारा जाना बेहद जरूरी है।

केन-बेतवा संघर्ष का 11वां दिन: टूटती सांसें, सुलगते सवाल, मुआवजे और पुनर्वास पर कब जागेगा प्रशासन?

Ken Betwa

छतरपुर (मध्य प्रदेश): विकास परियोजनाओं में विस्थापितों की अनदेखी और कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ बुंदेलखंड की धरती पर आक्रोश की आग सुलग उठी है। केन-बेतवा लिंक, मझगांव, रूंज, नैगुवा और एनटीपीसी जैसी बड़ी परियोजनाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर 'जय किसान संगठन' का 'चिता आंदोलन' अब और तेज हो गया है।

इस बीच, विस्थापितों के हक की आवाज बुलंद कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर का आमरण अनशन आज 11वें दिन भी जारी है, जिससे शासन-प्रशासन की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। लेकिन प्रशासन जागने को तैयार नहीं है। वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं।

500 बच्चे, महिलाएं व बुजुर्ग भूखे: आंदोलनकारियों के अनुसार अनशन के दौरान उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा है और अब तक करीब 6 किलो वजन कम हो चुका है। वहीं आंदोलन के समर्थन में बुधवार को भी आंदोलन स्थल पर चूल्हा नहीं जला, जिससे करीब 500 बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भूखे रहे।

पुनर्वास की मांग की तेज हुई : आंदोलनकारी पिछले चार वर्षों से वे ग्राम सभाओं के आयोजन, पारदर्शी सर्वे, जनसुनवाई, आपत्तियों के निराकरण और उचित पुनर्वास की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। विरोध कर रहे लोगों का आरोप है कि पात्र परिवारों को पर्याप्त मुआवजा नहीं मिला, जबकि कई अपात्र लोगों को अधिक राशि दी गई। साथ ही बिचौलियों के खातों में मुआवजा पहुंचने और पुनर्वास प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के भी आरोप लगाए गए हैं।

परियोजना में कथित भ्रष्टाचार का आरोप : आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में प्रत्येक विस्थापित परिवार को तीन एकड़ जमीन, कट-ऑफ डेट वर्ष 2026 तक बढ़ाना, परियोजना में कथित भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच तथा केन-बेतवा लिंक परियोजना के लाभ-हानि पर सार्वजनिक चर्चा और कानून के अनुरूप कार्रवाई शामिल है।

उमंग सिंघार ने लगाए आरोप : मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भोपाल में पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने दावा किया कि हाल ही में उन्होंने परियोजना प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया, जहां की स्थिति बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि छतरपुर और पन्ना जिले के 14 गांवों के लोग लंबे समय से जमीन अधिग्रहण के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय प्रशासन बल प्रयोग कर रहा है

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लाठियां मारकर धरना स्थल से हटाया : उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि आंदोलन कर रहे महिलाओं और बुजुर्गों को लाठियां मारकर धरना स्थल से हटाया जा रहा है। उनका कहना है कि परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने दावा किया कि कई स्थानों पर बिना ग्रामसभा की वैधानिक अनुमति के किसानों की जमीन अधिग्रहित कर ली गई। जिन ग्रामसभा प्रस्तावों का हवाला दिया जा रहा है, उनमें वर्तमान सरपंच के हस्ताक्षर तक नहीं हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया की वैधता पर सवाल खड़े होते हैं।

केन बेतवा विस्‍थापन आंदोलन : अब तक क्‍या क्‍या हुआ?
असंतोष और शिकायतें (4 वर्ष पहले से): प्रभावित ग्रामीण पिछले चार सालों से पारदर्शी भूमि सर्वेक्षण, ग्राम सभाओं के आयोजन, सार्वजनिक सुनवाई और आपत्तियों के सही निपटारे की मांग कर रहे थे। उनका आरोप था कि पात्र परिवारों को कम मुआवजा मिला या छोड़ दिया गया, जबकि अपात्रों और बिचौलियों ने मोटी रकमें ऐंठ लीं।

प्रशासनिक आश्वासन और विफलता: प्रशासन द्वारा बार-बार सूची में सुधार करने और मुआवजा देने के वादे किए गए। प्रशासन ने दावा किया कि 638 छूटे हुए परिवारों को सूची में जोड़ा गया है, लेकिन ग्रामीणों का कहना था कि 'मैनारी' जैसे कई गांवों के नाम अब भी पूरी तरह गायब हैं।

गिरफ्तारियां और झड़पें (फरवरी 2026): आंदोलन की अगुवाई कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता अमित भटनागर को पुलिस ने शांति भंग की आशंका में गिरफ्तार कर लिया। इस गिरफ्तारी के बाद बिजावर तहसील में ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा। प्रदर्शन हिंसक हुआ, पथराव की घटनाएं हुईं और तत्कालीन एसडीएम व अन्य अधिकारी अंदर ही फंस गए, जिसके बाद पुलिस ने कई मामले दर्ज किए।

पदयात्रा और पीएम को खून से पत्र (मार्च 2026): जेल से रिहा होने के बाद आंदोलन ने फिर जोर पकड़ा। 23 मार्च से पन्ना से छतरपुर के गांवों तक 'न्याय अधिकार पदयात्रा' निकाली गई। 28 मार्च को आंदोलनकारियों ने अपने खून से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।

चिता आंदोलन (अप्रैल और जुलाई 2026): आंदोलनकारियों ने “न्याय दो या मार दो” का नारा दिया। 'चिता आंदोलन' के तहत विस्थापित ग्रामीण और विशेषकर आदिवासी महिलाएं प्रतीक के तौर पर बनाई गई चिताओं पर लेट गईं। उनका कहना था कि ज़मीन और जंगल छिन जाने के बाद वे जीते जी मर चुके हैं।

जल सत्याग्रह और सूली आंदोलन (जुलाई 2026): चिता आंदोलन के बाद ग्रामीणों ने जल सत्याग्रह शुरू किया, जहां महिलाएं और पुरुष घंटो बराना नदी के ठंडे पानी में खड़े रहे। इसके तुरंत बाद आंदोलन 'सूली आंदोलन' (फांसी सत्याग्रह) में बदल गया, जिसमें ग्रामीणों ने अपने गले में फांसी के फंदे डाले और प्रतीकात्मक फांसी के तख्तों पर खड़े होकर प्रदर्शन किया।

11 दिनों का आमरण अनशन (ताजा स्थिति): विस्थापितों की मांगों को लेकर अमित भटनागर और पूना नाम की एक आदिवासी महिला अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठ गए। लगातार 11 दिनों तक भूखे रहने के कारण अमित भटनागर का वजन करीब 6 किलो तक घट चुका है और उनकी तबीयत बेहद नाजुक हो गई है। आंदोलन के समर्थन में प्रदर्शन स्थल पर एक दिन खाना तक नहीं पकाया गया। राजनीतिक मोड़: आंदोलन के लगातार खींचने पर मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित कई विपक्षी नेताओं ने आंदोलन स्थल का दौरा किया और सरकार पर विस्थापित आदिवासियों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया।

विस्थापितों की मुख्य मांगें : भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन अधिनियम 2013 का पूरी तरह पालन हो।  प्रत्येक विस्थापित परिवार को कम से कम 3 एकड़ कृषि भूमि दी जाए।  पुनर्वास के लिए पात्रता की कट-ऑफ तारीख को बढ़ाकर 2026 किया जाए। केन-बेतवा लिंक परियोजना के सामाजिक-आर्थिक लाभों और नुकसानों पर एक खुली सार्वजनिक बहस (Public Debate) कराई जाए।

सीएम यादव को पत्र लिखेंगे सिंघार : नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वह पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखेंगे। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाती है तो जमीन अधिग्रहण, मुआवजा वितरण और परियोजना की प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं की सच्चाई सामने आ जाएगी।

CM योगी की कांवड़ियों से अपील, अनुशासन बनाए रखें, हुड़दंग से बचें

CM Yogi Adityanath appeal to all Kanwar Yatra pilgrims

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांवड़ यात्रा के दौरान कांवड़ियों से अनुशासन, धैर्य और मर्यादा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह के हुड़दंग से विरोधी यात्रा को बदनाम करने की कोशिश कर सकते हैं। ALSO READ: MSP पर रिकॉर्ड खरीद से UP के किसानों को मिल रहा बड़ा लाभ, अनाज की खरीद में बना कीर्तिमान

 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिमला में कांवड़ संघों से कहा कि जीवन में धैर्य, अनुशासन हमारी सबसे बड़ी पूंजी होनी चाहिए, छोटी छोटी बातों को लेकर कहीं हुड़दंगी नहीं होनी चाहिए। अगर कहीं कोई हुड़दंगी, या अनुशासन हीनता होगी तो इस प्रकार के दृश्य को विरोधी नोट करके रखेंगे और फिर कांवड़ यात्रा को पूर्व की भांति येन-केन-प्रकारेण अन्य जगहों से दबाव बनाने का प्रयास करेंगे।

मर्यादा को समझना होगा

उन्होंने कहा कि कांवड़ के लिए सरकार उनकी सुरक्षा, सुविधा और उनकी भक्ति को साकार करने के लिए हर प्रकार का सहयोग कर रही है। यही डबल इंजन की सरकार है जो आस्था का सम्मान कर रही है, पुष्प वर्षा करती है, लेकिन हम लोगों को मर्यादा को समझना होगा। ALSO READ: रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीप टेक का अग्रणी केंद्र बनेगा यूपी : योगी

 

पहले जय श्री राम बोलने पर लाठियां-गोलियां चलती थीं 

सीएम ने कहा कि पहले जय श्री राम बोलने पर लाठियां-गोलियां चलती थीं और जन्माष्टमी व कांवड़ यात्रा रोकी जाती थी, लेकिन आज सब सेवा में खड़े हैं। उन्होंने कांवड़ियों से अपील की कि वे राम के वंशज और भोलेनाथ के भक्त हैं, इसलिए छोटी बातों पर हुड़दंग न करें। कोई गलत तत्व यात्रा को नुकसान पहुंचाए तो उसे कान पकड़कर बाहर कर दें।

 

इस अवसर पर मुख्‍यमंत्री योगी ने शामली को 589 करोड़ की विकास परियोजनाओं की बड़ी सौगात दी।