LIVE: पश्चिम बंगाल के बहरामपुर में ट्रेन से टकराई स्कूल वैन, 3 की मौत

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Latest News Today Live Updates in Hindi : पश्चिम बंगाल के बहरामपुर में शुक्रवार को एक बड़ा हादसा हुआ। ट्रेन से स्कूल वैन की टक्कर में 2 बच्चों समेत 3 लोगों की मौत हो गई। पल पल की जानकारी…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज हरियाणा के जींद में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे।कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक से मुलाकात की। वांगचुक जंतर-मंतर पर लगातार 20वें दिन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के बरहमपुर में एक बड़ा हादसा हुआ है। बच्चों को लेकर जा रही स्कूल वैन से ट्रेन टकरा गई। हादसे में 2 बच्चों समेत 3 लोगों की मौत हो गई।IPS अनुराग कुमार को दिल्ली पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया गया है। वे IPS सतीश गोलचा की जगह लेंगे।

विंध्य के लिए ‘भगीरथ’ बने सीएम डॉ. मोहन यादव, जानें कैसे धरातल पर उतारा इंजीनियरिंग का चमत्कार?

भोपाल। मध्यप्रदेश के सिंचाई इतिहास की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल स्लीमनाबाद जल-सुरंग अब पूर्णता के अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आजकटनी जिले में देश की सबसे लंबी और तकनीकी रूप से सबसे जटिल जल-सुरंग का निरीक्षण करेंगे। 11.952 किलोमीटर लंबी यह सुरंग विंध्य पर्वतमाला के भीतर से नर्मदा के जल को गुरुत्वाकर्षण के आधार पर सोन नदी के कछार तक पहुंचाने वाली देश की अनूठी इंजीनियरिंग उपलब्धि है। इसके पूरा होने के साथ ही जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना के करीब 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी, जिससे विंध्य और महाकौशल क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होगा।

 

मध्यप्रदेश के विकास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ने और विंध्य की सदियों प्यासी धरती को  सींचने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वयं भगीरथ बनकर मैदान में उतर आए हैं। कटनी जिले में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा निर्मित की जा रही देश की सबसे लंबी और सबसे जटिल जल-सुरंग , यानी स्लीमनाबाद टनल, अब अपनी पूर्णता की ओर है। इसका जमीनी जायजा लेने मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्लीमनाबाद पहुंच रहे हैं। उनका यह संवेदनशील और उच्च-स्तरीय दौरा केवल एक प्रशासनिक निरीक्षण भर नहीं है, बल्कि यह विंध्य और महाकौशल के लाखों किसानों के आंगन में समृद्धि, खुशहाली और लहलहाती फसलों के नए युग का शंखनाद है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के इसी संकल्प और अटूट इच्छाशक्ति के बल पर सत्रह वर्षों की भू-गर्भीय जंग को जीतकर आज नर्मदा मैया का विंध्य की धरा पर उतरने का स्वप्न साकार होने जा रहा है।

भागीरथी संकल्प का उदय-यह जल-सुरंग केवल कंक्रीट और पत्थरों को जोड़कर बनाई गई कोई यांत्रिक संरचना नहीं है, बल्कि यह सदियों पुराने एक पौराणिक विरह को मिटाने वाला पवित्र महासेतु है। लोक मान्यताओं के अनुसार, अमरकंटक के मैकल पर्वतों से निकलने वाली मां नर्मदा और सोनभद्र विपरीत दिशाओं में बहकर हमेशा के लिए एक-दूसरे से दूर चले गए थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसी प्राचीन विरह को मिटाने और विंध्य के सूखे खेतों को पानी देने के लिए इस टनल परियोजना को अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बनाया। आज उन्हीं के भगीरथ प्रयासों से विंध्य पर्वतमाला से अमृत-धारा सीधे सोन नदी के कछार में मिलने के लिए आतुर खड़ी है।

इस महा-परियोजना को इसकी मंजिल तक पहुंचाने का पूरा श्रेय मुख्यमंत्री डॉ. यादव के दूरदर्शी नेतृत्व और अभूतपूर्व प्रशासनिक निर्णयों को जाता है। उन्होंने पदभार ग्रहण करते ही इस परियोजना के महत्व को समझा और लगातार की गई व्यक्तिगत समीक्षाओं, त्वरित ऑन-द-स्पॉट फैसलों और निरंतर दिए गए कम बजट समर्थन ने इस बेहद जटिल कार्य को एक जादुई रफ्तार दे दी। अब इस 11.952 किलोमीटर लंबी महा-सुरंग का काम लगभग पूरा हो चुका है। 

 

असंभव को कर दिखाया संभव-तकनीकी रूप से विंध्य की 40 मीटर ऊंची रिज लाइन को भेदना पूरी दुनिया के इंजीनियरों के लिए एक स्वप्न जैसा था। जमीन से लगभग 30 मीटर नीचे चल रहे इस महा-अभियान में मार्बल-लाइमस्टोन की चमकती कठोरता, डोलोमाइट की दृढ़ता और पानी में घुली चूने की विशालकाय भूमिगत गुफाओं ने हर कदम पर रास्ता रोका। टनल के भीतर प्रति मिनट 25 हजार लीटर तक उफनते पानी के रिसाव और अचानक धंसने वाली मिट्टी जैसी विकट परिस्थितियों में जब पूर्व में काम कर रही अमेरिकी मशीन भी टूटकर पस्त हो गई, तब मुख्यमंत्री के दृढ़ संकल्प के चलते त्वरित निर्णय लेकर अत्याधुनिक जर्मन हेरेनकनेक्ट मशीन और विशेष टेम ग्राउटिंग तकनीक को युद्धस्तर पर उतारा गया। यह मध्यप्रदेश सरकार की संवेदनशीलता ही थी कि घनी आबादी, राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे ट्रैक के ठीक नीचे से गुजरने के बावजूद इस टनल को बिना किसी क्षति के पूरी सुरक्षा के साथ पूर्ण कर लिया गया।

विश्व स्तरीय निर्माण तकनीक-इस टर्न-की (Turn-key) आधार पर स्वीकृत महा-परियोजना को धरातल पर उतारने का जिम्मा हैदराबाद की निर्माण एजेंसी मेसर्स पटेल-एस.ई.डब्ल्यू. (संयुक्त उपक्रम) को सौंपा गया था। वर्ष 2008 में जब इस विशाल परियोजना का अनुबंध हुआ था, तब इसकी शुरुआती लागत 799 करोड़ रुपये थी। हालांकि, विंध्य के भू-गर्भ की अप्रत्याशित और असाधारण भौगोलिक बाधाओं, अभूतपूर्व जल रिसाव को रोकने के लिए किए गए विशेष प्रयासों और वैश्विक तकनीक के समावेश के कारण इस पर अब तक कुल 1610.47 करोड़ रुपये का व्यय किया जा चुका है। इस कुल व्यय में जहां मूल कार्यमद पर 772.33 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, वहीं समय के साथ हुए मूल्य समायोजन पर 573.71 करोड़ रुपये, उच्च क्षमता के आधुनिक डीवॉटरिंग सिस्टम पर 123.99 करोड़ रुपये, वर्टिकल शाफ्ट के निर्माण पर 19.36 करोड़ रुपये और चट्टानों के स्थिरीकरण के लिए की गई केमिकल ग्राउटिंग पर 121.08 करोड़ रुपये की राशि व्यय की गई है।

 

भौतिक प्रगति के नए कीर्तमान और शत-प्रतिशत पूर्णता-सरकार की इसी अनवरत वित्तीय और तकनीकी मदद का सुखद परिणाम है कि आज इस पूरे अनुबंध का 96.66 प्रतिशत भौतिक कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है। परियोजना के तहत आने वाली 12.135 किलोमीटर लंबी ओपन कट नहर और 11.952 किलोमीटर लंबी मुख्य ऐतिहासिक जल-सुरंग का भौतिक निर्माण शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है। वहीं, कट एंड कवर तकनीक से बनाई जा रही 0.913 किलोमीटर नहर का भी 0.725 किलोमीटर हिस्सा पूरा कर लिया गया है और अब केवल नाममात्र का 0.188 किलोमीटर का काम शेष है, जिसे अंतिम लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ाया जा रहा है।

 

विंध्य और महाकौशल के 5 जिलों में समृद्धि-यह विशाल जल-सुरंग देश की पहली ऐसी इंजीनियरिंग मिसाल बनने जा रही है, जहां 10.14 मीटर व्यास की टनल से लाखों क्यूसेक नर्मदा जल बिना किसी बिजली या भारी पंपों के, केवल प्राकृतिक गुरुत्वाकर्षण यानी ग्रेविटी फ्लो के सहारे बहेगा। बरगी दायीं तट मुख्य नहर के माध्यम से जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर, रीवा और पन्ना जिलों के लगभग 1450 गांवों की 2 लाख 45 हजार हैक्टेयर भूमि हमेशा के लिए सिंचित हो जाएगी। टनल के क्रियाशील होते ही इसके सीधे कमांड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कटनी जिले की 21 हजार 823 हैक्टेयर, मैहर जिले की 54 हजार 227 हैक्टेयर, सतना जिले की 1 लाख 4 हजार 970 हैक्टेयर, रीवा जिले की 3 हजार 84 हैक्टेयर और पन्ना जिले की 448 हैक्टेयर सूखी भूमि को हरा-भरा जीवन मिल जाएगा।

 

किसान हो रहे लाभांवित-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में टनल के बाद के सभी आठ ग्रुपों का काम इस समय पूरी ताकत से चल रहा है। इस सजग मॉनिटरिंग के चलते मार्च 2026 तक ही 44 हजार 160 हेक्टेयर की सिंचाई क्षमता को धरातल पर उतारकर किसानों को लाभान्वित करना शुरू कर दिया गया है। राज्य सरकार ने इसके बाद का भी पूरा रोडमैप तैयार कर लिया है, जिसके तहत दिसंबर 2026 तक 87 हजार 433 हेक्टेयर और दिसंबर 2027 तक कुल 1 लाख 54 हजार 693 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की पूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित कर ली जाएगी।

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन आज से शुरू: PM मोदी दिखाएंगे हरी झंडी, जानिए किराया, रूट, स्पीड और इसकी खासियत

hydrogen train

Hydrogen Train : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज जींद-सोनीपत के बीच हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। 82 करोड़ में बनी 10 कोच वाली इस ट्रेन में जींद से सोनीपत के बीच 89 किमी का किराया 25 रुपए होगा। इस ट्रेन का न्यूनतम किराया मात्र 5 रुपए हैं। ALSO READ: भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन आज से शुरू: PM मोदी दिखाएंगे हरी झंडी, जानिए किराया, रूट, स्पीड और इसकी खासियत

 

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि शुक्रवार को जींद से भारत की पहली हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन को हरी झंडी दिखाई जाएगी, जो जींद और सोनीपत को जोड़ेगी। भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है जिनके पास ऐसी ट्रेनें हैं। यह रेलवे क्षेत्र में भारत द्वारा स्वच्छ तकनीक अपनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।

पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित इस हाईड्रोजन ट्रेन को भारत में ही डिजाइन किया गया और भारत में ही बनाया गया है। इस ट्रेन में 2 हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार (DPC) और 8 ट्रेलर कोच लगे हैं। यह पहल भारतीय रेलवे को 'नेट जीरो' उत्सर्जन के लक्ष्य की ओर ले जाएगी।

 

जींद-सोनीपत रेलखंड पर चलने वाली इस ट्रेन में करीब 2600 यात्री पैसेंजर ट्रेनों की तरह सामान्य किराया देकर यात्रा कर सकेंगे। ये ट्रेन 14 स्टेशनों का सफर कराएगी। ट्रेन प्रतिदिन सुबह 7:40 बजे जींद से रवाना होकर 9:40 बजे सोनीपत पहुंचेगी। वापसी में सुबह 10:30 बजे सोनीपत से चलकर दोपहर एक बजे जींद पहुंचेगी। ट्रेन की अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी।

जींद में सबसे बड़ा हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग सेंटर 

इस ट्रेन के लिए रेलवे ने जींद में भारत का सबसे बड़ा हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग सेंटर स्थापित किया है। यहीं पर कंप्रेस्ड हाइड्रोजन गैस को सुरक्षित रखा जाएगा और ट्रेन में भरा जाएगा। रिफ्यूलिंग के लिए हाइड्रोजन कंप्रेशन सिस्टम लगाया गया है।

 

कैसे हैं सुरक्षा के इंतजाम?

रेलवे ने हाइड्रोजन गैस के सुरक्षित उपयोग के लिए कई सुरक्षा उपाय किए हैं। हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण और रिफ्यूलिंग स्टेशन पर हाइड्रोजन लीक डिटेक्टर और फ्लेम डिटेक्टर लगाए गए हैं। हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग सिस्टम की 24 घंटे निगरानी की जाएगी।

टैक्स चोरी रोक कर अरबों यूरो कमाना चाहती है जर्मन सरकार

Germany Tax Rules

निखिल रंजन

टैक्स चोरी और वित्तीय गड़बड़ी करने वालों पर नकेल कस कर जर्मन सरकार अरबों यूरो का राजस्व हासिल करना चाहती है। इसे रोकने के लिए नए नियम बनाए गए हैं। ALSO READ: एआई प्रेमियों से बिछड़ने के गम में डूबे चीन के यूजर

 

टैक्स चोरी और वित्तीय गड़बड़ियां रोकने के लिए लिए सरकार ने 26 बिंदुओं वाला एक पैकेज तैयार किया है। इसमें जुर्माना बढ़ाने से लेकर जालसाजी रोकने में मदद के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल तक की योजना है।

 

टैक्स चोरी की सजा 15 साल की कैद

इन उपायों से कितना अतिरिक्त राजस्व हासिल होगा इसका पूरा ब्यौरा जर्मनी के वित्त मंत्रालय ने नहीं दिया है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इससे अरबों यूरो हासिल होंगे। जर्मन वित्त मंत्री लार्स क्लिंगबाइल का कहना है, “ईमानदार लोगों को बेवकूफ नहीं समझा जाना चाहिए। यही वजह है कि हम जालसाजी के खिलाफ मुहिम में जांच का दबाव बढ़ा रहे हैं।”

 

इस पैकेज में अघोषित काम पर लगाम कसने के लिए ज्यादा चेकिंग, टैक्स से जुड़े अपराधों के लिए अधिकतम सजा की अवधि को 10 साल से बढ़ा कर 15 साल करने और टैक्स से बचने को चूक की बजाय अपराध माना जाना शामिल है।

 

सरकार ने इसके साथ ही कस्टम सेवाओं के पूल को और मजबूत बनाने की भी योजना बनाई है। फिलहाल इस विभाग में लगभग 49,000 लोग काम करते हैं। अब कर्मचारियों की संख्या में 1,500 की वृद्धि करने की तैयारी है। जर्मन सरकार एक डाटा एनालिसिस सेंटर भी बनाएगी और जर्मनी के संघीय राज्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर केंद्र राज्य के बीच सहयोग को मजबूत करेंगे। ALSO READ: सूरज के मरने पर पृथ्वी का क्या होगा?

 

15 साल तक रखना होगा खातों का रिकॉर्ड

जर्मनी की न्याय मंत्री स्टेफानी ह्यूबिष का कहना है, “कर अपराध हम सबको नुकसान पहुंचाते हैं। यह हमारे संवैधानिक राष्ट्र की निष्पक्षता में भरोसे को कमजोर करते हैं। यह स्पष्ट हो जाना चाहिए कि कर अपराध से फायदा नहीं है।”

 

नई व्यवस्था में कंपनियों को भी नए इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के तहत वैल्यू ऐडेड टैक्स की रिपोर्ट ज्यादा मुस्तैदी से देनी होगी। इसके साथ ही खातों के रिकॉर्ड को 15 साल तक रखना होगा। पहले यह समय सीमा दस साल थी। इसकी मदद से अभियजकों के पास सबूत जुटाने के लिए ज्यादा समय होगा। मंत्रालय का कहना है कि नगदी के ज्यादा इस्तेमाल वाले कारोबार में इलेक्ट्रॉनिक कैश रजिस्टर के नियम को अनिवार्य किया जा रहा है।

 

सरकार ने नई व्यवस्था में स्वैच्छिक घोषणा के मौजूदा तरीके को भी हटाने का फैसला किया है। इसमें टैक्स चोरी करने वाले बाद में चोरी किए टैक्स और सरचार्ज का भुगतान कर अभियोग से बच जाते थे। अधिकारियों को संदिग्ध संपत्तियों की पहचान और उसे जब्त करने के लिए ज्यादा अधिकार मिलेंगे। इतना ही नहीं टैक्स से बचने में शामिल कंपनियों पर जुर्माना भी बढ़ाया जा रहा है। ALSO READ: ईरान और अमेरिका समझौते के रास्ते से क्यों भटक गए?

 

1 अरब यूरो का अतिरिक्त कर राजस्व

सरकार व्हिसलब्लोअर की कानूनी सुरक्षा मजबूत करने के लिए भी योजना बना रही है। इसके साथ ही टैक्स से जुड़े आंकड़ों की व्यवस्थित खरीदारी को भी बढ़ाया जाएगा। कंपनियां कर व्यवस्था की जिन कमियों के जरिए टैक्स बचाती हैं उन कमियों को भी दूर करने की तैयारी है। क्लिंगबाइल ने 2027 में कर जालसाजी पर लगाम लगा कर 1 अरब यूरो के अतिरिक्त राजस्व का अनुमान लगाया है। जर्मन सरकार के अगले साल के लिए 555.4 अरब यूरो के खर्च का प्रस्तावित बजट तैयार किया है। 

 

जर्मनी के संघीय सांख्यिकी कार्यालय के मुताबिक यहां 4.3 करोड़ लोग टैक्स देते हैं। देश की आबादी आठ करोड़ से थोड़ी ज्यादा है। 2025 में जर्मन सरकार को टैक्स से हासिल हुआ राजस्व करीब 989.8 अरब यूरो था। यह आंकड़ा संघ, राज्य और नगरपालिकाओं की हिस्सेदारी अलग करने से पहले का है। इसके एक साल पहले यानी 2024 में यह राशि 861.1 अरब यूरो थी। क्लिंगबाइल ने जो एक अरब यूरो अतिरिक्त राजस्व का अनुमान लगाया है, वो जर्मनी के कुल कर राजस्व का लगभग 0.1 प्रतिशत है।

Top News 17 July: PM मोदी की हाइड्रोजन ट्रेन, ट्रंप का चीन पर बड़ा आरोप

Top News 17 July

Top News 17 July :  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज हाईड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। अमेरिकी राष्‍ट्रपति ट्रंप ने चीन पर 22 करोड़ अमेरिकी वोटर्स का डाटा चुराने का आरोप लगाया। ट्रंप प्रशासन ने वीजा नियम बदले। ईरान में बच्चों के कैंसर अस्पताल पर हमला किया। इंग्लैंड ने भारत को 4 विकेट से हराया। 17 जुलाई की बड़ी खबरें : 

 

हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज जींद-सोनीपत के बीच हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। 82 करोड़ में बनी 10 कोच वाली इस ट्रेन में जींद से सोनीपत के बीच 89 किमी का किराया 25 रुपए होगा।

 

22 करोड़ अमेरिकी वोटर्स का डाटा चोरी

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर 2020 के चुनाव के दौरान 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं का डाटा चुराने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। ट्रंप इन आरोपों से जुड़े खुफिया दस्तावेज जल्द सार्वजनिक करने वाले हैं। उन्होंने इसे इतिहास की सबसे बड़ी चुनावी डाटा सेंधमारी कहा है। 

 

ट्रंप प्रशासन ने बदले वीजा नियम

ट्रंप प्रशासन ने विदेशी छात्रों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों के तहत आने वाले लोगों और विदेशी पत्रकारों के लिए वीजा नियमों को और सख्त करने का फैसला किया है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग की ओर से जारी अंतिम नियम के तहत अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए एफ वीजा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों के तहत अमेरिका में काम करने की अनुमति देने वाले जे वीजा और मीडिया कर्मियों के लिए आई वीजा की अब एक तय अवधि होगी। अभी तक ये वीजा संबंधित कार्यक्रम या अमेरिका में रोजगार की अवधि तक वैध रहते थे।

 

ईरान में बच्चों के कैंसर अस्पताल पर हमला

ईरान ने गुरुवार को अमेरिका पर एक कैंसर अस्पताल के पास हवाई हमले करने का आरोप लगाया है, जिसके बाद अस्पताल को खाली कराना पड़ा। ईरान ने इसे एक बर्बर हमला करार दिया है। तेहरान ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वाशिंगटन ने ईरानी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया, तो जवाब में ईरान पूरे क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को तबाह कर देगा।

 

रूट ने इंग्लैंड को दिलाई शानदार जीत

जो रूट की शानदार नाबाद 99 रन की पारी के दम पर इंग्लैंड ने दूसरे वनडे में भारत को चार विकेट से हरा दिया। इस जीत के साथ तीन मैचों की वनडे सीरीज 1-1 से बराबर हो गई। अब सीरीज का फैसला रविवार को लॉर्ड्स में खेले जाने वाले तीसरे और अंतिम मुकाबले में होगा। 

NEET UG 2026 Result : 11.21 लाख अभ्यर्थी सफल, 58% से ज्यादा बेटियां पास, NTA ने जारी किया रिजल्ट

NEET re exam

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (स्नातक) यानी NEET UG 2026 का परिणाम घोषित कर दिया है। एजेंसी ने तय समय के भीतर रिजल्ट जारी किया है, ताकि मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश और काउंसलिंग की प्रक्रिया निर्धारित शेड्यूल के अनुसार पूरी की जा सके।  इस वर्ष NEET UG 2026 में 11.21 लाख उम्मीदवारों ने क्वालिफाई किया है। 

 

खास बात यह है कि सफल अभ्यर्थियों में 58 प्रतिशत से अधिक छात्राएं हैं, जो मेडिकल शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।  NTA ने इस परीक्षा का आयोजन देशभर में 13 भाषाओं में किया था, जिससे विभिन्न राज्यों के अभ्यर्थियों को अपनी पसंदीदा भाषा में परीक्षा देने का अवसर मिला। अब परिणाम घोषित होने के बाद मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में दाखिले के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया जल्द शुरू होने की उम्मीद है।

रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीप टेक का अग्रणी केंद्र बनेगा यूपी : योगी

Yogi Adityanath: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश को रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर तथा अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों का राष्ट्रीय नेतृत्वकर्ता बनाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। गुरुवार को सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग की समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि नोएडा में विकसित होने वाली 'प्रगति' (PRAGATI) परियोजना प्रदेश को विश्वस्तरीय रोबोटिक्स एवं एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग का आधार प्रदान करेगी, जबकि लखनऊ और नोएडा में स्थापित किए जा रहे यू हब अनुसंधान, नवाचार, स्टार्टअप, उद्योग, निवेशकों और शिक्षण संस्थानों को एक मंच पर जोड़ते हुए डीप टेक नवाचार के प्रमुख केंद्र बनेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को नई तकनीकों का केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि अनुसंधान, नवाचार और उच्च प्रौद्योगिकी आधारित विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने के लक्ष्य के साथ कार्य किया जाए।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स आने वाली औद्योगिक क्रांति के प्रमुख आधार हैं। इसलिए एक ओर विश्वस्तरीय विनिर्माण अवसंरचना विकसित की जाए तो दूसरी ओर अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने वाला मजबूत डीप टेक इकोसिस्टम तैयार किया जाए। उद्योग, शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप, निवेशकों और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित कर ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जहां नई तकनीकें तेजी से प्रयोगशाला से उद्योग तक पहुंच सकें और उत्तर प्रदेश वैश्विक प्रौद्योगिकी निवेश का प्रमुख केंद्र बनकर उभरे।

 

बैठक में बताया गया कि इसी उद्देश्य से नोएडा में लगभग 75 एकड़ क्षेत्रफल में 'प्रगति' अर्थात 'पार्क फॉर रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जीपीयू क्लस्टर्स एंड एडवांस्ड टेक्निकल इनोवेशन' विकसित किया जाएगा। यह भारत का पहला एकीकृत रोबोटिक्स एवं एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर होगा, जहां रोबोटिक्स परीक्षण एवं प्रमाणन केंद्र, रैपिड प्रोटोटाइपिंग एवं विनिर्माण सुविधा, एआई कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर, मोशन कैप्चर लैब, फिजिकल एआई डेटा सेंटर, स्टार्टअप इनक्यूबेशन तथा को वर्किंग स्पेस जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके साथ ही वैश्विक विनिर्माण कंपनियों, कंपोनेंट निर्माताओं, अनुसंधान एवं विकास केंद्रों तथा विशेषीकृत सेवा प्रदाताओं का समग्र औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र भी विकसित किया जाएगा।

नोएडा परियोजना के लिए उपयुक्त स्थान

बैठक में यह भी बताया गया कि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, उत्कृष्ट कनेक्टिविटी, जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, रक्षा औद्योगिक गलियारा तथा मजबूत औद्योगिक एवं शैक्षणिक आधार के कारण नोएडा इस परियोजना के लिए सर्वाधिक उपयुक्त स्थान है। परियोजना का उद्देश्य प्रदेश को रोबोटिक्स एवं उच्च प्रौद्योगिकी आधारित विनिर्माण का राष्ट्रीय केंद्र बनाना, आयात पर निर्भरता कम करना, एक लाख से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करना तथा अगले पांच वर्षों में लगभग दो हजार करोड़ रुपये से अधिक का सकल मूल्य संवर्धन सुनिश्चित करना है।

 

मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित यू हब को केवल स्टार्टअप के लिए कार्यस्थल नहीं, बल्कि अनुसंधान, नवाचार, उद्योग, निवेश, शिक्षण संस्थानों और प्रतिभाओं को जोड़ने वाले विश्वस्तरीय उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसा सशक्त मंच तैयार किया जाए, जहां शोध प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकों का व्यावसायीकरण हो, नवाचार को निवेश मिले और युवाओं को अनुसंधान से उद्यमिता तक आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त हों। इसका संचालन पूरी तरह पेशेवर, परिणामोन्मुख और वैश्विक सर्वोत्तम मानकों के अनुरूप किया जाए।

अंतरराष्ट्रीय डीप टेक इकोसिस्टम का अध्ययन 

बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में लखनऊ और नोएडा में दो यू हब स्थापित करने के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। आईआईटी कानपुर के निदेशक की अध्यक्षता में गठित विशेषज्ञ समिति ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय डीप टेक इकोसिस्टम का अध्ययन कर इसकी अवधारणा, संरचना और संचालन मॉडल तैयार किया है। नोएडा यू हब को क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर डिजाइन, फिजिकल एआई, रोबोटिक्स, रक्षा प्रौद्योगिकी तथा उन्नत जैव प्रौद्योगिकी का केंद्र बनाया जाएगा, जबकि लखनऊ यू हब में एप्लाइड एआई, गवटेक, औद्योगिक एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के एआई समाधान, बायोसाइंस तथा एग्री बायोटेक्नोलॉजी पर विशेष फोकस रहेगा। यू हब के माध्यम से प्रदेश में डीप टेक स्टार्टअप, अनुसंधान आधारित नवाचार, प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण तथा उच्च मूल्य के निवेश को नई गति मिलेगी।

 

बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के युवाओं को भविष्य की तकनीकों के अनुरूप कौशल उपलब्ध कराना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, साइबर सुरक्षा, क्लाउड कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, डेटा साइंस तथा अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों में विश्वस्तरीय प्रशिक्षण एवं प्रमाणन की व्यवस्था विकसित की जाए। उद्योगों की मांग के अनुरूप कौशल विकास कार्यक्रम तैयार किए जाएं तथा तकनीकी शिक्षा, उच्च शिक्षा, उद्योग जगत और कौशल विकास संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए।

 

मुख्यमंत्री ने सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग को निर्देश दिए कि उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी आईटी, डिजिटल सेवाओं और नवाचार केंद्र बनाने के लक्ष्य के साथ कार्य किया जाए। सूचना प्रौद्योगिकी नीति को बदलती वैश्विक आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक व्यावहारिक, निवेशक अनुकूल और रोजगारोन्मुख बनाया जाए। आईटी उद्योग का विस्तार केवल गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद तक सीमित न रहकर टियर 2 और टियर 3 शहरों तक हो। इसके लिए आधुनिक आईटी अधोसंरचना विकसित की जाए तथा वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी), स्टार्टअप, नवाचार आधारित कंपनियों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम आईटी उद्यमों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जाए।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति का मूल उद्देश्य प्रदेश के युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अधिकाधिक अवसर सृजित करना होना चाहिए। स्थानीय युवाओं के कौशल विकास, इंटर्नशिप, अनुसंधान, नवाचार और पेटेंट को प्रोत्साहन दिया जाए। साथ ही निवेशकों को भूमि, अधोसंरचना और अन्य अनुमतियों से जुड़ी प्रक्रियाएं सरल, पारदर्शी और समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराई जाएं। उत्तर प्रदेश की बेहतर कानून व्यवस्था, मजबूत कनेक्टिविटी और विकसित औद्योगिक आधार का लाभ उठाकर राज्य को वैश्विक डिजिटल निवेश का पसंदीदा गंतव्य बनाया जाए।

गुरु पूर्णिमा से पहले यूपी में तैयार होंगे 4 खास वन, किसानों से लेकर मानव-वानर संघर्ष तक का होगा समाधान

पौधरोपण महायज्ञ-2026 के अंतर्गत वन विभाग कई विशिष्ट वन स्थापित कर रहा है। इसी क्रम में आषाढ़ मास यानी गुरुपूर्णिमा (29 जुलाई) से पहले कई विशिष्ट वन स्थापित करेगा। 18 जुलाई से 27 जुलाई के मध्य पूरे प्रदेश में कई विशिष्ट वन स्थापित किए जाएंगे। 18 जुलाई को समृद्धि वन, 21 जुलाई को कपि वन, 23 जुलाई को ऊर्जा वन और 27 जुलाई को समरस वन स्थापित कर ‘एक पेड़ मां के नाम’ लगाए जाएंगे। 

 

18 जुलाई को हर विकास खंड में स्थापित होगा समृद्धि वन

18 जुलाई को समृद्धि वन स्थापित किया जाएगा। प्रत्येक विकास खंड में इसकी स्थापना होगी। समृद्धि वन लगाने का उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि के लिए कृषि वानिकी- कार्बन क्रेडिट का अतिरिक्त लाभ दिलाना है। साथ ही अतिरिक्त आय के दृष्टिगत किसानों को समुचित प्रोत्साहन देना है। प्रत्येक जनपद में कृषि भूमि पर न्यूतनम एक स्थल इसके लिए चिह्नित किया गया है। इस वन की स्थापना में कृषि विभाग की भी सक्रिय सहभागिता रहेगी। यह वन न्यूनतम एक हेक्टेयर में बसाया जाएगा। 

 

नगर निगमों, पालिकाओं व पंचायतों में 21 जुलाई को कपि वन की होगी स्थापना

प्रदेश के सभी 17 नगर निगमों, पालिकाओं व पंचायतों के अंतर्गत 21 जुलाई को महत्वपूर्ण स्थल पर कपि वन स्थापित होगा। इस वन का उद्देश्य विभिन्न शहरों में मानव-वानर द्वंद्व के न्यूनीकरण के दृष्टिगत शहर की आबादी के बाहर फलदार प्रजातियों का रोपण करना है। कपि वन भी न्यूनतम एक हेक्टेयर में स्थापित होगा। इसमें बड़हल, आम, जामुन, अमरूद, बेल, गुलर, कटहल, बेर, शहतूत, पीपल, अंजीर प्रजाति के पौधे लगेंगे। 

 

 

ग्राम्य विकास व पंचायती राज विभाग के सहयोग से 23 जुलाई को स्थापित होगा ऊर्जा वन 

23 जुलाई को प्रत्येक विकास खंड में ऊर्जा वन की स्थापना होगी। एक रिपोर्ट के अनुसार वनों के निकटवर्ती ग्रामीणों द्वारा औसतन प्रतिवर्ष 226 किलो जलौनी लकड़ी का उपयोग किया जाता है। इस वन के तहत वैश्विक ऊर्जा संकट के दृष्टिगत जलौनी लकड़ी की अनवरत उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए तीव्र गति से बढ़ने वाली प्रजाति का रोपण होगा। इसके तहत सिरस, बबूल, सुबबूल, गुटेल, पापुलर व कदंब आदि पौधों का रोपण होगा। वन विभाग इसे स्थापित करने में ग्राम्य विकास व पंचायती राज विभाग का भी सहयोग लेगा।  

 

27 जुलाई को वन विभाग स्थापित करेगा समरस वन

27 जुलाई को समस्त वन प्रभागों की देखरेख में समरस वन की स्थापना होगी। विविधता में एकता के भाव के साथ इस वन को स्थापित किया जाएगा। इसका उद्देश्य सामाजिक न्याय, समानता तथा संवैधानिक अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता के लिए समाज के हर वर्ग को एकजुट कर एक स्थल पर पौधरोपण कार्यक्रम किया जाएगा। जनपद/तहसील मुख्यालय व विकास खंड में पौधरोपण व संगोष्ठी भी होगी। इसमें समाज कल्याण विभाग की भी सक्रिय सहभागिता रहेगी। 

 

मुख्य वन संरक्षक (प्रचार/प्रसार) अदिति शर्मा ने कहा कि वन विभाग विशिष्ट वन स्थापित कर रहा है। इसके तहत आषाढ़ में चार विशिष्ट वन स्थापित होंगे। इसके लिए ग्राम्य विकास, समाज कल्याण, पंचायती राज आदि विभागों का भी सहयोग लिया जाएगा। इन वनों की स्थापना का उद्देश्य आमजन से जुड़ा है। आमजन द्वारा आमजन के सहयोग से इसे स्थापित किया जाएगा। वन विभाग इन विशिष्ट वनों की स्थापना के लिए सारी तैयारी कर चुका है। 

गुरु पूर्णिमा से पहले यूपी में तैयार होंगे 4 खास वन, किसानों से लेकर मानव-वानर संघर्ष तक का होगा समाधान

पौधरोपण महायज्ञ-2026 के अंतर्गत वन विभाग कई विशिष्ट वन स्थापित कर रहा है। इसी क्रम में आषाढ़ मास यानी गुरुपूर्णिमा (29 जुलाई) से पहले कई विशिष्ट वन स्थापित करेगा। 18 जुलाई से 27 जुलाई के मध्य पूरे प्रदेश में कई विशिष्ट वन स्थापित किए जाएंगे। 18 जुलाई को समृद्धि वन, 21 जुलाई को कपि वन, 23 जुलाई को ऊर्जा वन और 27 जुलाई को समरस वन स्थापित कर ‘एक पेड़ मां के नाम’ लगाए जाएंगे। 

 

18 जुलाई को हर विकास खंड में स्थापित होगा समृद्धि वन

18 जुलाई को समृद्धि वन स्थापित किया जाएगा। प्रत्येक विकास खंड में इसकी स्थापना होगी। समृद्धि वन लगाने का उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि के लिए कृषि वानिकी- कार्बन क्रेडिट का अतिरिक्त लाभ दिलाना है। साथ ही अतिरिक्त आय के दृष्टिगत किसानों को समुचित प्रोत्साहन देना है। प्रत्येक जनपद में कृषि भूमि पर न्यूतनम एक स्थल इसके लिए चिह्नित किया गया है। इस वन की स्थापना में कृषि विभाग की भी सक्रिय सहभागिता रहेगी। यह वन न्यूनतम एक हेक्टेयर में बसाया जाएगा। 

 

नगर निगमों, पालिकाओं व पंचायतों में 21 जुलाई को कपि वन की होगी स्थापना

प्रदेश के सभी 17 नगर निगमों, पालिकाओं व पंचायतों के अंतर्गत 21 जुलाई को महत्वपूर्ण स्थल पर कपि वन स्थापित होगा। इस वन का उद्देश्य विभिन्न शहरों में मानव-वानर द्वंद्व के न्यूनीकरण के दृष्टिगत शहर की आबादी के बाहर फलदार प्रजातियों का रोपण करना है। कपि वन भी न्यूनतम एक हेक्टेयर में स्थापित होगा। इसमें बड़हल, आम, जामुन, अमरूद, बेल, गुलर, कटहल, बेर, शहतूत, पीपल, अंजीर प्रजाति के पौधे लगेंगे। 

 

 

ग्राम्य विकास व पंचायती राज विभाग के सहयोग से 23 जुलाई को स्थापित होगा ऊर्जा वन 

23 जुलाई को प्रत्येक विकास खंड में ऊर्जा वन की स्थापना होगी। एक रिपोर्ट के अनुसार वनों के निकटवर्ती ग्रामीणों द्वारा औसतन प्रतिवर्ष 226 किलो जलौनी लकड़ी का उपयोग किया जाता है। इस वन के तहत वैश्विक ऊर्जा संकट के दृष्टिगत जलौनी लकड़ी की अनवरत उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए तीव्र गति से बढ़ने वाली प्रजाति का रोपण होगा। इसके तहत सिरस, बबूल, सुबबूल, गुटेल, पापुलर व कदंब आदि पौधों का रोपण होगा। वन विभाग इसे स्थापित करने में ग्राम्य विकास व पंचायती राज विभाग का भी सहयोग लेगा।  

 

27 जुलाई को वन विभाग स्थापित करेगा समरस वन

27 जुलाई को समस्त वन प्रभागों की देखरेख में समरस वन की स्थापना होगी। विविधता में एकता के भाव के साथ इस वन को स्थापित किया जाएगा। इसका उद्देश्य सामाजिक न्याय, समानता तथा संवैधानिक अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता के लिए समाज के हर वर्ग को एकजुट कर एक स्थल पर पौधरोपण कार्यक्रम किया जाएगा। जनपद/तहसील मुख्यालय व विकास खंड में पौधरोपण व संगोष्ठी भी होगी। इसमें समाज कल्याण विभाग की भी सक्रिय सहभागिता रहेगी। 

 

मुख्य वन संरक्षक (प्रचार/प्रसार) अदिति शर्मा ने कहा कि वन विभाग विशिष्ट वन स्थापित कर रहा है। इसके तहत आषाढ़ में चार विशिष्ट वन स्थापित होंगे। इसके लिए ग्राम्य विकास, समाज कल्याण, पंचायती राज आदि विभागों का भी सहयोग लिया जाएगा। इन वनों की स्थापना का उद्देश्य आमजन से जुड़ा है। आमजन द्वारा आमजन के सहयोग से इसे स्थापित किया जाएगा। वन विभाग इन विशिष्ट वनों की स्थापना के लिए सारी तैयारी कर चुका है। 

मेरठ साइबर सेल को मिली बड़ी सफलता, 2026 में 365 पीड़ितों को लौटाए 1.90 करोड़, 40 अभियोग दर्ज, 40 अपराधी कानून के शिकंजे में

Meerut Police achieved big success regarding cybersecurity

Meerut Cyber ​​Cell : वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मेरठ के निर्देशन एवं पुलिस अधीक्षक अपराध के कुशल नेतृत्व में जनपदीय साइबर सेल तथा सभी थाना स्तर पर संचालित साइबर हेल्प डेस्क ने वर्ष 2026 में साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने, पीड़ितों की धनराशि वापस दिलाने, अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने तथा आमजन को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की है।

 

मेरठ जिले की साइबर टीम ने विभिन्न साइबर ठगी के मामलों में त्वरित तकनीकी कार्रवाई करते हुए पीड़ितों की फंसी धनराशि होल्ड एवं रिफंड कराई। साथ ही संदिग्ध बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, आईएमईआई, आईपी एड्रेस और सोशल मीडिया अकाउंट्स का विश्लेषण कर साइबर अपराधियों तक पहुंच बनाई। अन्य राज्यों की पुलिस एवं जांच एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर भी कई मामलों में प्रभावी कार्रवाई भी की गई है।

Meerut Police achieved big success regarding cybersecurity

प्रमुख उपलब्धियां

– 365 साइबर पीड़ितों को कुल 1,90,26,490 रुपए की धनराशि वापस दिलाई गई। इसमें एमआरएम पोर्टल के माध्यम से 136 पीड़ितों को 11,44,409 रुपएतथा बैंकों के समन्वय से 229 पीड़ितों को 1,78,82,081 रुपए वापस कराए गए।

– जीआरएम पोर्टल के माध्यम से 29 बैंक खातों को अनफ्रीज कराया गया।

– एनसीआरपी पोर्टल पर प्राप्त 3203 साइबर शिकायतों का सफल निस्तारण किया गया।

– महिलाओं एवं बच्चों से जुड़े मामलों में ओसीडब्ल्यूसी पोर्टल के माध्यम से 3 मुकदमे दर्ज कर अभियुक्तों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की गई तथा 113 शिकायतों का निस्तारण करते हुए 4.16 लाख रुपए की बरामदगी कराई गई।

– एनसीएमईसी पोर्टल पर प्राप्त नाबालिग बच्चों से संबंधित 122 शिकायतों का निस्तारण किया गया।

– प्रतिबिंब पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के आधार पर 30 अभियोग दर्ज कर 31 अभियुक्तों के विरुद्ध कार्रवाई की गई। इन मामलों में 5.20 लाख नकद, एक मोटरसाइकिल, 24 मोबाइल फोन, 25 सिम कार्ड, एक राउटर, पांच एटीएम कार्ड, 16 पासबुक, एक बिलबुक तथा अन्य सामान बरामद किया गया।

– म्यूल बैंक खातों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए 8 मुकदमे दर्ज कर 9 अभियुक्तों पर कानूनी कार्रवाई की गई।

– सोशल मीडिया पर प्रसारित आपत्तिजनक एवं भ्रामक पोस्टों को सहयोग पोर्टल के माध्यम से हटवाया गया।

– साइबर अपराध में प्रयुक्त 1382 मोबाइल नंबर और 2179 आईएमईआई ब्लॉक कराए गए।

– अन्य राज्यों की पुलिस एवं जांच एजेंसियों के साथ समन्वय करते हुए 257 नोटिस तामील कराए गए तथा 707 नोटिस प्रेषित किए गए।

– अन्य राज्यों के सहयोग से डायरेक्ट एवं आईएमईआई लिंकेज के आधार पर एक अभियोग दर्ज कर 11 मामलों का निस्तारण किया गया।

– समन्वय पोर्टल पर 42 अभियुक्तों का डेटा अपलोड किया गया।

 

मेरठ पुलिस का कहना है कि हमारी साइबर टीम भविष्य में भी इसी तरह आमजनों और पीड़ितों को सहायता देने के लिए तत्परता के साथ साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए काम करती रहेगी, वहीं अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

 

आमजन से अपील

यदि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी का शिकार हों तो बिना समय गंवाए 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें अथवा www.cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही अपने नजदीकी थाना स्थित साइबर हेल्प डेस्क से संपर्क करें। समय पर शिकायत दर्ज कराने से धनराशि वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।