सोनम वांगचुक का बड़ा संदेश, संसद मार्च में साथ चलने की अपील, आज जंतर-मंतर पहुंचेंगे केजरीवाल

sonam wangchuk hunger strike

Sonam Wangchuk Protest : जंतर मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन का आज 19वां दिन है। इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के जगन्नाथ रथयात्रा संबंधी ट्वीट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उनसे एक बार दिल्ली के जंतर मंतर पर आने की अपील की। ALSO READ: 'आपने देश की अंतरात्मा जगा दी, अब अनशन खत्म कीजिए'— शशि थरूर की सोनम वांगचुक से भावुक अपील

 

कॉकरोच जनता पार्टी ने गुरुवार को सोशल मीडिया साइट एक्स पर धर्मेंद्र प्रधान का जगन्नाथ रथयात्रा में शामिल होने संबंधी पोस्ट को शेयर करते हुए कहा कि महोदय, एक बार दिल्ली जंतर मंतर भी चले आइए। अन्यथा इस्तीफा दे दीजिए।

सीजेपी ने दावा किया कि सोनम वांगचुक की तबियत लगातार बिगड़ती जा रही है, पर सरकार में बैठे लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। पार्टी ने 20 जुलाई को संसद मार्च का भी आह्वान किया है।

 

वांगचुक की संसद मार्च में शामिल होने की अपील

सोनम वांगचुक NEET अनियमितताओं के खिलाफ शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनशन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं पूरी तरह स्वस्थ नहीं हूं, लेकिन मेरी हालत इतनी भी खराब नहीं है।

 मुझसे अपना अनशन तोड़ने की अपील करने के बजाय, कृपया 20 जुलाई को संसद तक होने वाले शांतिपूर्ण मार्च में मेरे साथ शामिल हों। 
 

वांगचुक से मिलेंगे केजरीवाल

दिल्ली के पूर्व मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल आज जंतर मंतर जाकर सोनम वांगचुक से मुलाकात करेंगे। केजरीवाल के दौरे से पहले जंतर-मंतर और उसके आस-पास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। आम आदमी पार्टी सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तुरंत इस्तीफे की उसकी मांग का समर्थन करती है।

 

149वीं अहमदाबाद रथयात्रा विशेष : क्यों 15 दिनों तक बीमार रहते हैं भगवान और क्या है सरसपुर का नाता?

Lord Jagannath Rath Yatra Ahmedabad

Lord Jagannath Rath Yatra : जगन्नाथपुरी के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी भगवान जगन्नाथ की 149वीं ऐतिहासिक और पौराणिक रथयात्रा आज 16 जुलाई, गुरुवार को अहमदाबाद में संपन्न हुई। सुबह 4 बजे भगवान जगन्नाथ की मंगला आरती हुई, जिसमें केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह परिवार सहित शामिल हुए। मंगला आरती के बाद भगवान को विशेष खिचड़ा का भोग लगाया गया।

 

भगवान जगन्नाथ, भाई बलराम और बहन सुभद्राजी को रथ में विराजमान कराने के बाद मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने पारंपरिक 'पहिंद' विधि कर रथयात्रा को प्रस्थान कराया। ‘नंदीघोष’ रथ में विराजकर भगवान जगन्नाथजी नगरचर्या के लिए निकले हैं। उनके साथ ‘दर्पदलन’ रथ में बहन सुभद्राजी और ‘तालध्वज’ रथ में भाई बलभद्रजी भी हैं। भगवान भक्तों के द्वार तक पहुंच रहे हैं और भक्त भी भगवान के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में उमड़ पड़े हैं।

 

विभिन्न थीम पर तैयार की गई हैं झांकियां

अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथजी की 149वीं रथयात्रा भव्य रूप से आगे बढ़ रही है। शहर के विभिन्न इलाकों में भक्त भगवान के दर्शन के लिए उमड़ रहे हैं और पूरा शहर भक्तिमय माहौल में रंग गया है। इस साल रथयात्रा में विभिन्न थीम पर तैयार किए गए झांकियों ने सबका विशेष ध्यान खींचा है। धार्मिक और सांस्कृतिक संदेश देने वाले ये झांकियां भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हैं।

 

द्वारका मंदिर की थीम पर तैयार झांकियां

रथयात्रा में खास तौर पर द्वारका मंदिर की थीम पर तैयार किया गया झांकी लोगों को बहुत पसंद आ रहा है। इस झांकी में भगवान श्रीकृष्ण का रूप धारण किए हुए कलाकार भक्तों को प्रसादी का वितरण करते नजर आए। भगवान श्रीकृष्ण के वेश में कलाकारों ने भक्तों के साथ संवाद स्थापित कर पूरे माहौल को और भी भक्तिमय बना दिया। रास्ते के दोनों तरफ खड़े भक्तों ने भी इस अनोखे झांकी का हर्षोल्लास से स्वागत किया।

कॉर्पोरेशन द्वारा आवश्यक सभी तैयारियां

मेयर हितेश बारोट ने आगे बताया कि भगवान के नगरचर्या के लिए कॉर्पोरेशन द्वारा आवश्यक सभी तैयारियां की गई हैं। रथयात्रा मार्ग पर भक्तों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए सुनियोजित व्यवस्था की गई है। विभिन्न विभागों की टीमें लगातार काम कर रही हैं ताकि भगवान के रथ आसानी से आगे बढ़ सकें और लाखों भक्तों को बिना किसी असुविधा के दर्शन का लाभ मिल सके।

 

भक्तिमय माहौल, विभिन्न थीम के आकर्षक झांकियां, द्वारका मंदिर की झांकी, भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप में प्रसादी का वितरण और AMC पर भगवान के भव्य स्वागत की तैयारियों के बीच अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथजी की 149वीं रथयात्रा श्रद्धा, परंपरा और उत्साह के साथ आगे बढ़ रही है।

 

रथयात्रा की शोभा बढ़ाएंगे

सजे हुए हाथी: 18

101 थीम आधारित ट्रक

अखाड़ा: 30

भजन मंडली: 18

बैंडबाजा वाले: 3

देश भर से साधु-संत: 2500

खलासी भाई, जो रथ खींचेंगे: 1000 से 1200

रथयात्रा में इस प्रसादी का वितरण होगा

45 हजार किलो मूंग

500 किलो जामुन

500 किलो आम

400 किलो ककड़ी-अनार

2 लाख उपेरणां

रथयात्रा की अभेद्य सुरक्षा

10 IG DIG

30000 पुलिस जवान

26 पुलिस रेंज

1397 पुलिस पॉइंट्स

100 ड्रोन

42 DCP

88 ACP

800 PI

 

यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि आस्था, परंपरा, इतिहास और मानव समानता का जीवंत प्रतीक है। हर साल लाखों भक्त न सिर्फ भगवान के दर्शन करने, बल्कि रथ की  रस्सी खींचने का पुण्य पाने के लिए भी पुरी पहुंचते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर साल नए रथ ही क्यों बनाए जाते हैं? भगवान 15 दिनों तक दर्शन क्यों नहीं देते? पत्नी लक्ष्मीजी क्यों नाराज हो जाती हैं? और आखिरकार पुरी की रथयात्रा ही विश्वभर में सबसे खास क्यों मानी जाती है?

 

भगवान हर साल मौसी के घर क्यों जाते हैं?

सबसे प्रचलित मान्यता के अनुसार, भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा हर साल नौ दिनों के लिए अपनी मौसी के घर यानी सरसपुर स्थित मौसी के घर जाते हैं। कुछ धार्मिक ग्रंथों में सरसपुर को भगवान का जन्मस्थान भी माना जाता है। भगवान वहां सात दिन रुकते हैं और मौसी के हाथों बने भोजन का प्रसाद ग्रहण करते हैं।

 

भगवान खुद भक्तों तक आते हैं

जगन्नाथ मंदिर की एक विशेषता यह है कि यहां गैर-हिंदुओं को प्रवेश नहीं मिलता है। इसलिए रथयात्रा का सबसे बड़ा महत्व यह है कि भगवान खुद अपने गर्भगृह से बाहर आकर हर भक्त को दर्शन देते हैं। यह यात्रा यह संदेश देती है कि भगवान के लिए कोई जाति, वर्ण या समाज का भेदभाव नहीं है।

 

रथ के दर्शन से क्या मिलता है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान के रथ के सिर्फ दर्शन करने से भी पापों का नाश होता है। 'वामदेव संहिता' के मुताबिक, जो भक्त एक सप्ताह तक भगवान के दर्शन करता है, उसे अपने पूर्वजों के साथ वैकुंठ में स्थान मिलता है।

 

भगवान 15 दिनों तक बीमार क्यों पड़ते हैं?

रथयात्रा से पहले स्नान पूर्णिमा के दिन भगवान का 108 कलश के पवित्र जल से अभिषेक किया जाता है। मान्यता के अनुसार, इसके बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं और लगभग 14 से 15 दिनों तक 'अणसर घर' में आराम करते हैं। इस दौरान भक्तों को भगवान के दर्शन नहीं होते हैं। जब भगवान पूरी तरह स्वस्थ होते हैं तो भक्तों को दर्शन देने निकलते हैं।

कैसे पारदर्शी होगा मंदिरों के चढ़ावे का प्रबंधन

temple donation

प्रभाकर मणि तिवारी

भारत के कई मंदिरों के चढ़ावे में कथित हेराफेरी के आरोपों के बीच हिमाचल और कर्नाटक सरकार ने मंदिरों में दान के सुरक्षित और पारदर्शी प्रबंधन के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की है। क्या इससे चोरी रुकेगी? ALSO READ: भारत में इंजीनियर बनने का सपना फीका क्यों पड़ रहा है?

 

अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मामल में कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और मंदिर ट्रस्ट में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। यह घटना भारत की राजनीति में भी कई दिनों तक मुद्दा बनी रही। इसके बाद उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम के चढ़ावे में कथित हेराफेरी का मामला सामने आया है। सरकार ने इसकी उच्चस्तरीय जांच का आदेश दिया है। इस मामले में भी मंदिर समिति के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है।

 

इन मामलों के बाद अब देश के कुछ राज्य मंदिरों के चढ़ावे पर निगरानी बढ़ाने और पारदर्शिता के साथ इसके प्रबंधन की दिशा में पहल कर रहे हैं। इस सप्ताह हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक ने इसके लिए कदम उठाए हैं।

 

पारदर्शिता के लिए एसओपी

कर्नाटक में लागू मानक संचालन प्रक्रिया के तहत मुजरई यानी हिन्दू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के तहत आने वाले मंदिरों में दान पेटियों की सीसीटीवी कैमरे से चौबीसों घंटे निगरानी अनिवार्य कर दी गई है। सरकार मंदिरों में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाएगी।

 

कर्नाटक में राजस्व सचिव राजेंद्र कुमार कटारिया की ओर से जारी आदेश में कहा गया है, “दान के लिए मंदिरों में जगह-जगह क्यूआर कोड लगाए जाएंगे। वहां लगे सीसीटीवी कैमरों की फीड को मुजरई विभाग और स्थानीय पुलिस थाने से जोड़ा जाएगा।”

 

सरकार ने कहा है कि दानपात्र से चढ़ावे की रकम या वस्तुएं निकालने से लेकर उनकी गिनती पूरी होने और उसे वापस रखने तक की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकार्डिंग की जाएगी। चढ़ावे की रकम की गिनती के लिए सिर्फ सरकारी और बैंक कर्मचारियों के अलावा होमगार्ड की जवानों को ही काम पर लगाया जाएगा। चोरी की किसी भी घटना के लिए संबंधित मंदिरों और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

 

एसओपी के मुताबिक, संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक और जिला शासक हर महीने विभागीय सचिव और पुलिस महानिदेशक को निगरानी की रिपोर्ट भेजेंगे।

 

सरकारी आदेश में कहा गया है कि तहसीलदारों और राजस्व विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में नियमित रूप से दान पात्र में जमा रकम की गिनती की जाएगी। बड़े मंदिरों में यह गिनती साप्ताहिक होगी जबकि छोटे मंदिरों में पंद्रह दिनों में। इसके अलावा सोना, चांदी और दूसरी कीमती वस्तुओं का मूल्यांकन करने के बाद उनको उसी दिन सरकारी खजाने या इलाके की ट्रेजरी में जमा करना अनिवार्य होगा। ALSO READ: एआई प्रेमियों से बिछड़ने के गम में डूबे चीन के यूजर

 

एसओपी की जरूरत क्यों?

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद किया गया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पिछले सप्ताह ही अधिकारियों को हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती (मुजरई) विभाग के सभी बड़े मंदिरों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश दिया था। 

 

राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर डीडब्ल्यू बताया, “मंदिरों में हुंडी के पैसों और आभूषणों की गिनती के दौरान हेराफेरी या चोरी की शिकायतें पहले से मिलती रही हैं। अब अयोध्या और बद्रीनाथ धाम के मामले सामने आने के बाद सरकार ने कई स्तर की बैठक के बाद यह एसओपी तय किया है। इसे तुरंत प्रभाव से ही लागू किया जा रहा है।”

 

कर्नाटक में मुजरई विभाग के प्रबंध वाले 35 हजार से ज्यादा मंदिरों को उनकी सालाना आय के मुताबिक तीन वर्गो में बांटा गया है। इनमें से 25 लाख या उससे ज्यादा आय वाले मंदिर 'ए' वर्ग में हैं। पांच से 25 लाख की आय वाले मंदिर 'बी' वर्ग में है और पांच लाख से कम वाले 'सी' वर्ग में। राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राज्य के 11 प्रमुख मंदिरों को हर साल चढ़ावे से छह सौ करोड़ से ज्यादा की कमाई होती है। इनमें से अकेले कुक्के सुब्रह्मण्यम मंदिर में ही सालाना डेढ़ सौ करोड़ से ज्यादा का चढ़ावा आता है। ALSO READ: पर्यावरण संरक्षण में क्यों पिछड़ रहा है भारत

 

हिमाचल सरकार ने भी बनाए नियम

इससे एक दिन पहले हिमाचल सरकार ने भी ऐसी ही एसओपी जारी की थी। इसके तहत तमाम मंदिरों में रखे जाने वाले नए दान पात्रों से कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सकेगी। हर दान पात्र की पहचान के लिए एक खास नंबर आवंटित किए जाएंगे। उनको खोलने के लिए एक से ज्यादा चाबियों की जरूरत होगी जो अलग-अलग लोगों के पास रहेंगी।

 

सरकार के मुताबिक, यह दानपात्र पहले से तय तारीख को ही खोले जा सकेंगे। उस दौरान मंदिर प्रबंधन के अलावा जिला प्रशासन के प्रतिनिधि और स्वतंत्र गवाह मौजूद रहेंगे। चढ़ावे की रकम की गिनती की पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी की निगरानी में होगी और इसकी वीडियो रिकार्डिंग की जाएगी। ALSO READ: चीन के मिसाइल परीक्षण से किन देशों की चिंता सबसे ज्यादा बढ़ी

 

एसओपी से लगेगा हेराफेरी पर अंकुश?

क्या सरकार की ओर से तय इस नए एसओपी से चढ़ावे में हेराफेरी और चोरी पर अंकुश लगाया जा सकेगा? जानकारों का कहना है कि कागज पर तो यह नियम बेहद प्रभावी नजर आते हैं। लेकिन इसके लागू होने के कम से कम छह महीने बाद ही इसके असर का पता चलेगा।

 

राजधानी बेंगलुरु के एक मंदिर के पुजारी मुरली देव डीडब्ल्यू से कहते हैं, “राज्य के मंदिरों में चढ़ावे की रकम में हेराफेरी या चोरी के आरोप लंबे समय से सामने आते रहे हैं। लेकिन अब अयोध्या की घटना के बाद सरकार ने नई एसओपी तय की है। इसमें पारदर्शिता और जवाबदेही तय की गई है। शायद इसे लागू करने के बाद ऐसी शिकायतों पर अंकुश लग सकेगा।”

 

बेंगलुरु के मशहूर गली अंजनेय मंदिर में पूजा के लिए आने वाली एक महिला श्रद्धालु एम। विजयलक्ष्मी ने डीडब्ल्यू से कहा, “यह अच्छा है।चढ़ावे की रकम की चोरी से हमारी आस्था को ठेस पहुंचती है। इसे पूरी तरह रोका जाना चाहिए। अब नए नियम से शायद इसमें कामयाबी मिलेगी।”

 

हालांकि कुछ लोग शंकित भी हैं। राज्य के वरिष्ठ पत्रकार एम गुरुस्वामी डीडब्ल्यू से कहते हैं, “देखते हैं आगे क्या होता है? नियम हमेशा सही होते हैं। लेकिन उसे लागू करने वाली की मंशा भी सही होनी चाहिए। उसी स्थिति में अपेक्षित नतीजे सामने आएंगे।”

LIVE: अहमदाबाद, पुरी समेत देशभर में जगन्नाथ रथ यात्रा का उत्साह

Jagannath Mandir Rath Yatra 2026

Latest News Today Live Updates in Hindi : अहमदाबाद, पुरी समेत देशभर में जगन्नाथ रथ यात्रा का उत्साह दिखा। गृहमंत्री अमित शाह ने मंगला आरती की। पल पल की जानकारी… 

-जंतर मंतर पर सोनम वांगचुक के अनशन का आज 19वां दिन है। 'फोर्स फीडिंग' की याचिका पर आज दिल्ली हाईकोर्ट में होगी सुनवाई।
-लियोनल मैसी की अगुवाई में अर्जेंटीना ने इंग्लैंड को 2-1 से हराकर लगातार दूसरी बार फीफा विश्व कप के फाइनल में प्रवेश किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को जींद और सोनीपत के बीच भारत की पहली हाइड्रोजन-पावर्ड ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। यह रेलवे सेक्टर में साफ़-सुथरी और टिकाऊ मोबिलिटी को अपनाने की दिशा में एक अहम कदम होगा।

-ओडिशा के पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा के लिए उमड़ी भीड़।| भारी बारिश के बीच रथ यात्रा के मौके पर कलाकारों ने नृत्य प्रस्तुत किया।

-अहमदाबाद तक जगन्नाथ रथयात्रा का उत्साह दिखाई दे रहा है। कड़ी सुरक्षा के बीच रथयात्रा में उमड़े श्रद्धालु। गृहमंत्री अमित शाह ने मंगला आरती की।

-अहमदाबाद में गुजरात पुलिस इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से भगवान जगन्नाथ की 149वीं सालाना रथ यात्रा के लिए सुरक्षा इंतजामों की निगरानी कर रही है।

कच्चे तेल में उछाल के बीच मोदी सरकार का बड़ा फैसला, डीजल-ATF पर एक्सपोर्ट टैक्स बढ़ाया, पेट्रोल पर दी राहत

windfall tax

अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बीच मोदी सरकार ने पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बड़ा बदलाव किया है। डीजल और जेट फ्यूल पर लगने वाले एक्सपोर्ट टैक्स को बढ़ा दिया गया है जबकि पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर लगने वाले टैक्स को कम किया गया है। ALSO READ: WhatsApp और Telegram के Username Feature पर सरकार सख्त, 20 दिनों में आ सकता है बड़ा फैसला

 

वित्त मंत्रालय की एक अधिसूचना के मुताबिक पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 4 रुपए प्रति लीटर से घटाकर 2.5 रुपए प्रति लीटर कर दी गई है। डीजल के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स 8.5 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर 15.5 रुपए प्रति लीटर हो गया। ATF के निर्यात पर लेवी 7.5 रुपए प्रति लीटर से बढ़ाकर 14.5 रुपए प्रति लीटर कर दी गई है।

 

ईरान के पास अमेरिकी नाकेबंदी से कच्चे तेल की कीमतों में काफी तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड 85.25 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 80.6 डॉलर प्रति बैरल है। इंडियन बास्केट में भी कच्चा तेल बढ़कर 82.69 डॉलर प्रति बैरल हो गया। ALSO READ: One Nation, One Election : एक देश-एक चुनाव पर बड़ा अपडेट, 2029 में साथ हो सकते हैं लोकसभा और विधानसभा चुनाव

 

क्यों लगाया विंडफॉल टैक्स?

एनर्जी कंपनियों के सामान्य से अधिक मुनाफे पर विंडफॉल टैक्स लगाया जाता है। पश्चिमी एशिया में चल रहे युद्ध के चलते घरेलू मार्केट में तेल की उपलब्धता बनाए रखने के लिए पेट्रोलियम उत्पादों के एक्‍सपोर्ट पर विंडफाल टैक्स लगाया गया था। यह टैक्स इसलिए लगाया गया था ताकि डीजल और एटीएफ का निर्यात करने वाली कंपनियां घरेलू और विदेशी बाजारों में कीमतों में फर्क से अनुचित फायदा न उठा सके। तब से हर पखवाड़े इसकी समीक्षा की जा रही है।

Top News 16 July: जगन्नाथ रथयात्रा में उमड़ा जनसैलाब, सोनम वांगचुक का अनशन जारी

top news 16 july

Top News 16 July : देशभर में आज जगन्नाथ रथयात्रा का उत्साह। अमेरिका ने ब्लॉकेड तोड़ ईरान की ओर जा रहे जहाज पर हमला किया। सोनम वांगचुक का अनशन 19वें दिन भी जारी। मोदी सरकार ने डीजल और जेट फ्यूल पर एक्सपोर्ट टैक्स बढ़ाया। फीफा विश्व कप के फाइनल में स्पेन का मुकाबला अर्जेंटीना से होगा। 16 जुलाई की बड़ी खबरें : 

 

पूरी से अहमदाबाद तक जगन्नाथ रथयात्रा का उत्साह

पूरी से अहमदाबाद तक जगन्नाथ रथयात्रा का उत्साह दिखाई दे रहा है। कड़ी सुरक्षा के बीच रथयात्रा में उमड़े श्रद्धालु। अहमदाबाद में अमित शाह ने की मंगला आरती के बाद शुरू हुई रथयात्रा। राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भक्तों को दी शुभकामनाएं। ALSO READ: श्री जगन्नाथ रथयात्रा से जुड़े 12 ऐसे रोचक तथ्य, जिन्हें जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान

 

ब्लॉकेड तोड़ रहे जहाज पर हमला

अमेरिका ने लगातार 5वें दिन ईरान पर भीषण हमले किए। अमेरिकी सेना ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के बंदरगाहों पर लगाए गए नौसैनिक ब्लॉकेड को तोड़ने की कोशिश कर रहे एक खाली ऑयल टैंकर को निष्क्रिय कर दिया। बंदर अब्बास, अहवाज, चाबहार धमाकों से दहले।

 

सोनम वांगचुक का अनशन 19वें दिन भी जारी

जंतर मंतर पर सोनम वांगचुक के अनशन का आज 19वां दिन है। 'फोर्स फीडिंग' की याचिका पर आज दिल्ली हाईकोर्ट में होगी सुनवाई।  NEET अनियमितताओं के खिलाफ शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनशन कर रहे हैं सोनम वांगचुक।

 

डीजल और जेट फ्यूल पर एक्सपोर्ट टैक्स बढ़ा

अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने पर मोदी सरकार ने डीजल और जेट फ्यूल पर एक्सपोर्ट टैक्स 7 रुपए प्रति लीटर बढ़ा दिया है। पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर लगने वाले टैक्स को 4 रुपए प्रति लीटर से घटाकर 2.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया है।

 

अर्जेंटीना फीफा विश्व कप के फाइनल में

अर्जेंटीना ने इंग्लैंड को 2-1 से हराकर लगातार दूसरी बार फीफा विश्व कप के फाइनल में प्रवेश किया। इंग्लैंड ने दूसरे हाफ में गॉर्डन के गोल की मदद से बढ़त ली थी, लेकिन अर्जेंटीना ने 7 मिनट में 2 गोल कर मैच अपने नाम कर लिया। फाइनल में अर्जेंटीना का मुकाबला स्पेन से होगा।

 

Uttarakhand : विपक्ष के विधायक भी हुए CM धामी के मुरीद, कांग्रेस विधायक ने मंच से की खुलकर तारीफ

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चमोली में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यक्रम ने राजनीतिक हलकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इसकी सबसे बड़ी वजह रही बदरीनाथ से कांग्रेस विधायक लखपत बुटोला का मंच से मुख्यमंत्री की खुलकर तारीफ करना। ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम में मौजूद कांग्रेस विधायक लखपत बुटोला ने कहा कि अक्सर यह आरोप लगाया जाता है कि विपक्ष के विधायकों के साथ भेदभाव होता है, लेकिन उनकी विधानसभा में सबसे ज्यादा विकास कार्य हुए हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए वह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का धन्यवाद करते हैं।

 

कांग्रेस विधायक का यह बयान ऐसे समय आया है, जब प्रदेश में विकास कार्यों को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच लगातार सियासी बयानबाजी चल रही है। ऐसे में सार्वजनिक मंच से मुख्यमंत्री की तारीफ को राजनीतिक तौर पर अहम माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री की सभा में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। सुबह से ही आसपास के क्षेत्रों से लोग गोपेश्वर के पुलिस मैदान पहुंचने लगे थे। कार्यक्रम स्थल पर लोगों की अच्छी-खासी भीड़ रही और मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान पूरा मैदान श्रोताओं से भरा नजर आया।

 

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने चमोली जिले के लिए 155.36 करोड़ रुपये की 63 विकास योजनाओं की सौगात दी। इनमें 113.99 करोड़ रुपये की 36 योजनाओं का शिलान्यास और 41.37 करोड़ रुपये की 27 योजनाओं का लोकार्पण शामिल है। सड़क, पुल, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई, बाढ़ सुरक्षा, पर्यटन और खेल से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं इन योजनाओं में शामिल हैं।

 

कार्यक्रम के बाद कांग्रेस विधायक के बयान और सभा में उमड़ी भीड़ को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि विकास के मुद्दे पर विपक्ष के विधायक की यह टिप्पणी आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बनी रह सकती है।

बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री के भाई शालिग्राम गर्ग गिरफ्तार, हत्या के प्रयास का आरोप

मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में जमीन विवाद के दौरान हुई गोलीबारी के मामले में पुलिस ने बागेश्वर धाम के प्रमुख पुजारी धीरेंद्र शास्त्री के भाई शालिग्राम गर्ग को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, उन पर कथित तौर पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि राजनगर थाना क्षेत्र में किसान पर गोली चलाने की घटना के बाद शालिग्राम गर्ग और एक अन्य आरोपी अंकित मिश्रा को गिरफ्तार किया गया है। गोली लगने से घायल किसान का इलाज ग्वालियर मेडिकल कॉलेज में चल रहा है।

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जमीन कब्जे को लेकर हमले का आरोप

पुलिस के मुताबिक, यह पूरा मामला जमीन विवाद से जुड़ा है। राजनगर थाना क्षेत्र के कोड़ा गांव निवासी किसान मोतीलाल कुशवाहा ने आरोप लगाया है कि शालिग्राम गर्ग उनकी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे। किसान के बयान के अनुसार, शालिग्राम गर्ग अपने कुछ साथियों के साथ उनके घर पहुंचे और उन्हें बाहर खींचकर लाठी-डंडों से हमला किया। इसके बाद गोली चलाने का आरोप लगाया गया, जिसमें एक गोली किसान के सीने में लगी।

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घायल किसान की हालत गंभीर

गोली लगने के बाद किसान को पहले छतरपुर जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने पसलियों के पास फंसी गोली निकालने के लिए ऑपरेशन किया। इसके बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए ग्वालियर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

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पुलिस कर रही मामले की जांच

पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़ित के बयान के आधार पर कई लोगों के नाम सामने आए हैं। पुलिस घटना की पूरी कड़ी और सभी आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है। पुलिस ने पुष्टि की है कि शालिग्राम गर्ग और अंकित मिश्रा को मामले में गिरफ्तार किया गया है।

One Nation, One Election : एक देश-एक चुनाव पर बड़ा अपडेट, 2029 में साथ हो सकते हैं लोकसभा और विधानसभा चुनाव

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संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष एवं भाजपा सांसद पीपी चौधरी ने कहा कि वन नेशन-वन इलेक्शन की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। हमारा लक्ष्य है कि वर्ष 2029 में पूरे देश में लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ हों। इसके लिए आवश्यक संवैधानिक व कानूनी संशोधन किए जाएंगे। यह किसी राजनीतिक दल का एजेंडा नहीं, बल्कि राष्ट्रहित से जुड़ा व्यापक चुनावी सुधार है, जिससे लोकतंत्र और शासन व्यवस्था दोनों मजबूत होंगे। श्री चौधरी बुधवार को लखनऊ में प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे।

 

पीपी चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंबे समय से एक देश-एक चुनाव की अवधारणा का समर्थन करते रहे हैं। बार-बार होने वाले चुनाव देश के विकास, प्रशासनिक कार्यों और अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। लगातार चुनावी प्रक्रिया के कारण बार-बार आदर्श आचार संहिता लागू होती है, जिससे विकास परियोजनाएं प्रभावित होती हैं और सरकारी मशीनरी का बड़ा हिस्सा चुनावी कार्यों में व्यस्त हो जाता है। यदि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होंगे तो समय, संसाधनों और सरकारी धन की बचत होगी तथा शासन अधिक प्रभावी ढंग से चल सकेगा।

1952 से 1967 तक साथ हुए चुनाव

जेपीसी अध्यक्ष ने कहा कि देश में एक साथ चुनाव कोई नई व्यवस्था नहीं है। स्वतंत्रता के बाद 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा तथा अधिकांश राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ हुए थे। उस समय न ईवीएम थीं और न ही आज जैसी तकनीकी सुविधाएं। मतदान बैलेट पेपर से कराया जाता था, फिर भी चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न होते थे। बाद में विभिन्न कारणों से यह चुनावी चक्र टूट गया। कुछ राज्यों में राष्ट्रपति शासन लागू हुआ, कुछ विधानसभाएं समय से पहले भंग हो गईं और नए राज्यों के गठन के कारण चुनावों का समय अलग-अलग हो गया। इसके बाद आपातकाल के दौरान लोकसभा का कार्यकाल बढ़ाया गया, जिससे चुनावों का कैलेंडर पूरी तरह प्रभावित हो गया।

 

सफलता का सबसे बड़ा आधार मतदाताओं की समझ

पीपी चौधरी ने कहा कि भारतीय मतदाता बेहद जागरूक और राजनीतिक रूप से परिपक्व है। लोकतंत्र की सफलता का सबसे बड़ा आधार मतदाताओं की समझ है। कई बार राजनीतिक दल और विश्लेषक चुनाव परिणामों का अनुमान लगाते हैं, लेकिन नतीजे अलग आते हैं क्योंकि भारतीय मतदाता स्वतंत्र रूप से सोचकर मतदान करता है। यह तर्क देना उचित नहीं है कि यदि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होंगे तो मतदाता भ्रमित हो जाएगा। 1952 से 1967 तक करोड़ों मतदाताओं ने एक साथ दोनों चुनावों में मतदान किया था। आज जब देश तकनीकी रूप से कहीं अधिक सक्षम है और मतदाता पहले से ज्यादा जागरूक है, तब इस तरह की आशंका का कोई ठोस आधार नहीं है।

 

लोकतंत्र और संघीय ढांचे पर सवाल बेबुनियाद

पीपी चौधरी ने उन आपत्तियों का भी जवाब दिया जिनमें कहा जाता है कि एक देश-एक चुनाव संविधान के मूल ढांचे, संघीय व्यवस्था या लोकतंत्र के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यदि 1952 से 1967 तक एक साथ चुनाव होने पर लोकतंत्र या संघीय ढांचे का उल्लंघन नहीं हुआ था, तो आज ऐसा तर्क देना केवल राजनीतिक बहस का हिस्सा है। कई वर्षों तक 1967 के बाद भी कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनावों के साथ होते रहे। इसलिए यह कहना कि एक साथ चुनाव भारतीय लोकतंत्र की भावना के विपरीत हैं, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।

 

कई आयोगों और समितियों ने की सिफारिश

पीपी चौधरी ने कहा कि एक देश-एक चुनाव का विचार किसी एक सरकार की देन नहीं है। कई संवैधानिक संस्थाओं और विशेषज्ञ समितियों ने समय-समय पर इसकी सिफारिश की है। वर्ष 1983 में चुनाव आयोग ने अपनी रिपोर्ट में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की अनुशंसा की थी। इसके बाद 1999 में विधि आयोग ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया। वर्ष 2002 में संविधान के कामकाज की समीक्षा के लिए गठित आयोग ने भी इसे उपयुक्त सुधार माना। 2015 में संसद की विधि एवं कार्मिक संबंधी स्थायी समिति, जिसकी अध्यक्षता कांग्रेस के राज्यसभा सांसद कर रहे थे, ने भी अपनी रिपोर्ट में एक साथ चुनाव कराने का समर्थन किया था। इसके अलावा नीति आयोग ने 2018 में अपनी रिपोर्ट में इस दिशा में कदम बढ़ाने की सिफारिश की।

 

18 हजार पेज से अधिक की रिपोर्ट सरकार को सौंपी गई

जेपीसी अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2020 में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति गठित की थी। इस समिति में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राज्य सभा सांसद गुलाम नबी आजाद सहित कई विशेषज्ञ और संवैधानिक मामलों के जानकार शामिल थे। समिति ने विभिन्न राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों, चुनाव आयोग, संवैधानिक संस्थाओं और अन्य हितधारकों से व्यापक चर्चा की। करीब 18 हजार पेज से अधिक की रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपी गई। समिति ने अपनी रिपोर्ट में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की सिफारिश की और स्थानीय निकायों के चुनाव भी निर्धारित समयसीमा में कराने का सुझाव दिया।

 

संसद से जेपीसी तक पहुंचा विधेयक

पीपी चौधरी ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति की अध्यक्षता में गठित समिति की सिफारिशों पर विचार करने के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संबंधित विधेयकों को मंजूरी दी। इसके बाद इन्हें संसद में पेश किया गया। संसद में विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने-अपने विचार रखे और व्यापक चर्चा के बाद विधेयकों को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेज दिया गया ताकि सभी पक्षों की राय लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा सके। समिति का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में रिपोर्ट देना नहीं है, बल्कि सभी हितधारकों से सुझाव लेकर देशहित में ठोस अनुशंसाएं करना है।

 

10 राज्यों का दौरा कर चुकी है समिति

जेपीसी अध्यक्ष ने बताया कि समिति देशभर में विभिन्न राज्यों का दौरा कर रही है। अब तक उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, गोवा और उत्तर प्रदेश समेत करीब 10 राज्यों का दौरा किया जा चुका है। इन दौरों के दौरान मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, राजनीतिक दलों, विधि विशेषज्ञों और विभिन्न संगठनों से सुझाव लिए गए हैं। उत्तर प्रदेश के दौरे में भी कई महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए हैं। समिति अभी केवल सभी पक्षों की बात सुन रही है और किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। प्राप्त सुझावों का अध्ययन करने के बाद अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

 

बार-बार चुनाव होने से विकास कार्य प्रभावित होते

पीपी चौधरी ने कहा कि समिति के सामने सबसे बड़ा प्रश्न किसी राजनीतिक दल का हित नहीं, बल्कि राष्ट्रहित है। यदि बार-बार चुनाव होने से विकास कार्य प्रभावित होते हैं, निवेश का माहौल कमजोर पड़ता है। 

योगी सरकार की टेक्सटाइल नीति से यूपी को मिली नई पहचान, भारत टेक्स-2026 में गूंजा यूपी का विकास मॉडल

Yogi adityanath

Yogi Government Textile Policy: भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित भारत टेक्स-2026 के दौरान उत्तर प्रदेश के वस्त्र उद्योग, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पारंपरिक बुनकरी की समृद्ध विरासत को आधुनिक औद्योगिक विकास से जोड़ते हुए देश के अग्रणी टेक्सटाइल हब के रूप में तेजी से उभर रहा है। 

 

भारत टेक्स-2026 के मंच से उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 5एफ विजन (फार्म टू फाइबर, फाइबर टू फैक्ट्री, फैक्ट्री टू फैशन और फैशन टू फॉरेन) को आधार बनाकर प्रदेश सरकार निवेश, रोजगार, नवाचार और निर्यात को नई गति दे रही है। योगी सरकार की टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग नीति और बुनकर कल्याण की योजनाओं ने उत्तर प्रदेश को वैश्विक टेक्सटाइल मानचित्र पर नई पहचान दिलाई है।

 

राकेश सचान ने कहा कि उत्तर प्रदेश सदियों से समृद्ध हथकरघा परंपरा का केंद्र रहा है। प्रदेश के लगभग 1.91 लाख हथकरघा बुनकर अपनी कला और कौशल से देश-विदेश में पहचान बना रहे हैं। बनारसी साड़ी, लखनऊ की चिकनकारी, भदोही के कालीन, सीतापुर की दरी, मेरठ और बागपत के होम टेक्सटाइल उत्पाद आज वैश्विक बाजार में उत्तर प्रदेश की पहचान बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि पारंपरिक उत्पादों के साथ तकनीकी वस्त्रों और आधुनिक गारमेंटिंग क्षेत्र में भी प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है।

 

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग पॉलिसी-2022 के माध्यम से निवेशकों को आकर्षक प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। भूमि लागत में सहायता, स्टांप शुल्क में छूट, पूंजीगत अनुदान, ब्याज अनुदान और अन्य सुविधाओं के माध्यम से प्रदेश में निवेश का अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। इसी का परिणाम है कि टेक्सटाइल क्षेत्र में नए निवेश और रोजगार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं।

 

मंत्री ने कहा कि सरकार बुनकरों के आर्थिक और सामाजिक सशक्तीकरण के लिए भी निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश के हजारों हथकरघा बुनकरों को बिजली बिल पर सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है। उत्कृष्ट बुनकरों को संत कबीर राज्य हथकरघा पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएचटी), वाराणसी के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। अनुसूचित जाति के बुनकरों के लिए विशेष योजनाएं तथा मुख्यमंत्री हैंडलूम एवं पावरलूम उद्योग विकास योजना के माध्यम से आधुनिक तकनीक और वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।

 

राकेश सचान ने कहा कि प्रदेश में पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क की स्थापना से वस्त्र उद्योग को नई गति मिलेगी। इसके साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में उत्तर प्रदेश के बुनकरों, स्वयं सहायता समूहों, सहकारी समितियों और उद्यमियों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। सरकार स्टॉल, यात्रा, परिवहन और अन्य व्ययों पर सहायता उपलब्ध कराकर प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार का लक्ष्य केवल पारंपरिक बुनकरी को संरक्षित करना नहीं, बल्कि उसे आधुनिक तकनीक, वैश्विक बाजार और निवेश से जोड़कर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।