मंगेतर केतन के मर्डर की मास्टरमाइंड सिया गोयल के पिता को आया हार्ट अटैक! भावुक मां ने बेटी को लेकर कही ये बात

Ketan Agarwal Murder Case: पुणे के बिजनेसमैन केतन अग्रवाल की लोहगढ़ किले में हुई कथित हत्या के हाई-प्रोफाइल मामले में एक और बड़ी खबर सामने आई है। मर्डर केस की मुख्य आरोपी केतन की मंगेतर सिया गोयल के पिता प्रवीण गोयल को हार्ट अटैक आया है। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच आरोपी सिया गोयल की मां पूजा गोयल ने अपनी बेटी को लेकर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि अगर उनकी बेटी दोषी है तो उसे फांसी पर लटका दिया जाए।

सदमे में पिता: अस्पताल से बयां किया अपना दर्द

हमारी सहयोगी न्यूज 18 की एक रिपोर्ट में पुणे के एक स्थानीय न्यूज प्लेटफॉर्म न्यूजडॉटज के हवाले से बताया गया है कि अस्पताल में बातचीत करते हुए सिया के पिता प्रवीण गोयल ने कहा कि केतन अग्रवाल की मौत से उनका पूरा परिवार पूरी तरह टूट चुका है। उन्होंने केतन की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उनका परिवार केतन को अपने बेटे की तरह मानता था।

प्रवीण गोयल ने भावुक होते हुए कहा कि ‘जो कुछ भी हुआ, वह एक बेहद दुखद घटना है। हम अभी भी इस पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने (केतन के माता-पिता) अपना बेटा खोया है और उनका बेटा हमारा भी था। हम उससे बहुत प्यार करते थे। मुझे उससे इतना लगाव हो गया था कि ऐसा लगता था जैसे वह हमारा अपना ही बेटा हो। हमने एक बेहद प्यार करने वाला, होनहार और अच्छा लड़का खो दिया है। हम इससे गहरे सदमे में हैं। इससे ज्यादा दुखद कुछ नहीं हो सकता। हमने भविष्य के लिए बहुत सारे अच्छे सपने देखे थे।’

उदयपुर में महंगी शादी की खबरों को किया खारिज

प्रवीण गोयल ने उन मीडिया रिपोर्ट्स और अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें दावा किया जा रहा था कि उदयपुर में सिया और केतन की बेहद भव्य और खर्चीली शादी की प्लानिंग चल रही थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वहां कोई एयरक्राफ्ट बुकिंग नहीं की गई थी। उदयपुर में होटल बुकिंग सहित पूरी शादी में लगभग 3 से 5 करोड़ रुपये का खर्च आता।

‘शादी से खुश थी सिया, कभी नहीं जताई कोई आपत्ति’

पुलिस पूछताछ में जहां यह बात सामने आ रही थी कि सिया इस रिश्ते से नाखुश थी, वहीं उसके पिता प्रवीण गोयल ने इस बात का खंडन किया है। उनका दावा है कि सिया ने कभी भी केतन से शादी को लेकर कोई आपत्ति या हिचकिचाहट नहीं जताई थी। पिता के अनुसार जब से रिश्ता तय हुआ था, वह हमेशा खुश रहती थी। वह हमेशा केतन के बारे में ही बातें करती थी। अगर उनके (केतन के माता-पिता) पास थोड़ी सी भी ऐसी जानकारी होती कि कुछ गलत चल रहा है और वे हमें सूचित करते तो हम उनसे इस बारे में जरूर बात करते।

मां बोली- दोषी है तो फांसी दे दो

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला और बड़ा बयान सिया की मां पूजा गोयल का आया है। उन्होंने एक मां होने के नाते अपनी बेटी का पक्ष लेने के बजाय कानून और न्याय का समर्थन किया है। पूजा गोयल ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि अगर अदालत में उनकी बेटी के खिलाफ आरोप साबित हो जाते हैं तो उसे सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर वह दोषी है, तो उसे सबसे सख्त सजा मिलनी चाहिए। अगर वह दोषी है तो उसे फांसी दे दो, यह बात एक मां कह रही है।

क्या है पूरा मामला?

कुछ ही दिन पहले पुणे ग्रामीण पुलिस ने बिजनेसमैन केतन अग्रवाल की मौत के मामले में उनकी मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया है। जांचकर्ताओं और पुलिस का आरोप है कि सिया और चेतन ने मिलकर केतन अग्रवाल को रास्ते से हटाने की आपराधिक साजिश रची थी। इसी साजिश के तहत बीते 18 जून को दोनों ने पुणे के पास स्थित लोहगढ़ किले की एक ऊंची पहाड़ी से केतन को कथित तौर पर नीचे खाई में धक्का दे दिया था। इससे उसकी मौत हो गई। फिलहाल दोनों आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और मामले की जांच जारी है।

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Ketan Agarwal Murder: ‘मर्डर इसने किया, मैंने नहीं…’; मंगेतर मर्डर केस में सिया गोयल पुलिस के सामने अलग ही कहानी सुनाने लगी

Ketan Agarwal Murder Case: पुणे के लोहगढ़ किले के पास हुए 25 वर्षीय कारोबारी केतन अग्रवाल की मर्डर मिस्ट्री ने पूरे देश को चौंका दिया है। शुरुआती जांच में जिसे महज एक हादसा समझा जा रहा था, वह अब सोची-समझी साजिश के तहत किया गया मर्डर का मामला बन चुका है। पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसका बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी अब एक-दूसरे पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा रहे हैं। पुलिस के सामने दोनों आरोपी अलग-अलग कहानियां सुनाकर खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

मंगेतर और बॉयफ्रेंड का ब्लेम गेम!

केतन अग्रवाल की कथित हत्या के बाद से सिया गोयल और चेतन चौधरी दोनों ही सलाखों के पीछे हैं। लेकिन पूछताछ के दौरान दोनों का रवैया एक-दूसरे पर दोष मढ़ने का है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक चेतन ने जांचकर्ताओं के सामने दावा किया है कि वह सिया के साथ भाग जाना चाहता था। उसका आरोप है कि सिया गोयल ने ही केतन अग्रवाल को रास्ते से हटाने यानी उसकी हत्या करने पर जोर दिया था।

दूसरी तरफ सिया गोयल ने पुलिस को एक बिल्कुल अलग कहानी सुनाई है। सिया का दावा है कि हत्या की पूरी योजना चेतन चौधरी के दिमाग की उपज थी। सिया ने यह भी बताया कि इससे पहले 14 जून को भी केतन को मारने की एक कोशिश की गई थी लेकिन जब वह योजना विफल हो गई तो चेतन उसके सामने भावुक होकर रोने लगा था।

पुलिस का दावा- यह दोनों की डिफेंस स्ट्रेटेजी

दोनों आरोपियों द्वारा एक-दूसरे पर मढ़ जा रहे आरोपों को लेकर जांच टीम का हिस्सा रहे एक पुलिस अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया है कि वे साजिश का जिम्मा एक-दूसरे पर डालने की कोशिश कर रहे हैं। यह स्पष्ट रूप से उनकी डिफेंस स्ट्रेटेजी लग रही है। हालांकि उनका यह भी कहना है कि मौजूदा सूबत साफ कर रहे हैं कि इस साजिश में दोनों की बराबर की हिस्सेदारी रही है।

पुणे के कैफे में हुई मुलाकात और सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस

पुलिस इस मामले में डिजिटल और फिजिकल सबूतों को पुख्ता करने में जुटी है। जांच में पुलिस को पता चला है कि सिया और चेतन के बीच 31 मई से 4 जून के बीच पुणे के एक कैफे में मुलाकात हुई थी। पुलिस अब इस बैठक की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह स्थापित किया जा सके कि क्या यह मुलाकात भी उसी मर्डर की साजिश का हिस्सा थी। जांचकर्ताओं ने सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल रिकॉर्ड और आरोपियों के बीच हुए कम्युनिकेशन को खंगाला है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि यह मर्डर पूरी तरह से प्री-प्लान्ड था।

शादी की तैयारी और अनचाहा रिश्ता: क्या थी मर्डर की वजह?

मृतक केतन अग्रवाल एक बड़े रियल एस्टेट व्यवसायी का बेटा था और अपनी पारिवारिक फर्म में निदेशक के पद पर काम कर रहा था। वह बोस्टन से अपनी मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद हाल ही में भारत लौटा था। केतन और सिया के परिवार एक-दूसरे को 1990 के दशक से जानते थे। इसी साल गुलबर्गा में एक शादी के दौरान दोनों की मुलाकात हुई, जिसके बाद शादी की बातचीत तेजी से आगे बढ़ी और महज एक सप्ताह के भीतर दोनों की सगाई हो गई।

पुलिस के मुताबिक सिया पहले से ही चेतन चौधरी के साथ रिलेशनशिप में थी और वह केतन से शादी नहीं करना चाहती थी। इसके बावजूद दोनों परिवारों की ओर से इस साल के अंत में राजस्थान में एक भव्य और विस्तृत शादी समारोह आयोजित करने की तैयारियां चल रही थीं।

हादसे की मनगढ़ंत कहानी से ऐसे उठा पर्दा

बीती 18 जून को पुणे के लोहगढ़ किले के पास एक गहरी खाई में गिरने के कारण केतन अग्रवाल की मौत हो गई थी। घटना के तुरंत बाद सिया ने केतन के परिवार और पुलिस को सूचित करते हुए दावा किया था कि केतन का पैर अनजाने में फिसल गया और यह एक हादसा था। पुलिस को सिया के बयानों में कई विसंगतियां नजर आईं।

इसके बाद जब पुलिस ने घटना स्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो वहां एक संदिग्ध शख्स दिखाई दिया, जिसकी पहचान बाद में सिया के बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी के रूप में हुई। इसी सुराग ने पुलिस को गहरी जांच के लिए प्रेरित किया और यह साफ हो गया कि केतन फिसला नहीं था बल्कि उसे सिया और चेतन ने कथित तौर पर धक्का दिया था।

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जांच के बाद पुलिस ने 23 जून को सिया गोयल और चेतन चौधरी को गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपी फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं और जांचकर्ता इस बात का पता लगा रहे हैं कि क्या इस पूरी आपराधिक साजिश में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था।

Ketan Murder Update: पुणे के कैफै में चेतन और सिया ने इस तरह रची थी केतन अग्रवाल की हत्या की साजिश, पहली बार सामने आया CCTV फुटेज

Ketan Agarwal Murder Update: पुणे के 26 वर्षीय रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या मामले में एक नया खुलासा हुआ है। केतन अग्रवाल की कथित हत्या से एक दिन पहले सिया गोयल और उसका प्रेमी चेतन चौधरी पुणे के एक कैफै में मिले थे। यह CCTV फ़ुटेज अब जांच का एक अहम हिस्सा बन गया है। बताया जा रहा है कि 17 जून को पुणे में सिया गोयल और उनके बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी के बीच एक कॉफी डेट हुई थी। इस दौरान कथित तौर पर सिया के मंगेतर केतन अग्रवाल की हत्या की साज़िश रची गई थी।

पुलिस के मुताबिक, यह घटना अग्रवाल को पुणे के लोहागढ़ किले में एक खाई में धकेले जाने से एक दिन पहले हुई थी। शुरुआती जांच के अनुसार, दोनों ने कैफै में बैठकर हत्या के बारे में बातचीत की और योजना बनाई। पुलिस ने बताया कि सिया ने चेतन के साथ लोहागढ़ किले के बारे में जानकारी शेयर की थी। इसके बाद YouTube वीडियो की मदद से उससे उस जगह के बारे में चर्चा की थी।

मारने का आइडिया कैसे आया?

पुलिस के मुताबिक, 31 मई को सिया और केतन लोहागढ़ किले गए थे। वहां केतन एक खतरनाक जगह बैठा था। तभी सिया के दिमाग में उसे मारने का आइडिया आया। बताया जा रहा है कि 14 जून को भी केतन को किले से धक्का देने की कोशिश की गई थी। उस वक्त सिया ने सांप दिखने का बहाना बनाकर घटना को हादसा बताने की साजिश रची थी, लेकिन केतन बच गया था। इसके बाद सिया ने अपने प्रेमी चेतन चौधरी से पुणे के एक कैफे में मिली। वहां दोनों ने लोहागढ़ किले पर केतन को खाई में धक्का देने की योजना पर डिटेल्स चर्चा की थी।

बैकअप प्लान भी था तैयार 

‘दैनिक भास्कर’ के मुताबिक, इस दौरान दोनों ने वह पॉइंट भी ढूंढ लिया, जहां से केतन को धक्का देना था। यदि केतन इससे भी बच जाता तो 20 जून के बाद सड़क हादसे में मारने का बैकअप प्लान तैयार था। ‘इंडिया टुडे’ को मिले CCTV फुटेज में वे दोनों हत्या के एक दिन पहले शाम करीब 4:35 बजे कैफ़े में आते और लगभग 5:30 बजे वहां से निकलते हुए दिखाई दे रहे हैं।

पुणे के पास लोहागढ़ किले में अपनी मंगेतर सिया गोयल के साथ ट्रेकिंग के दौरान 18 जून को खाई में गिरने से केतन अग्रवाल की मौत हो गई। केतन अपने परिवार की रियल एस्टेट कंपनी, सक्सेस ग्रुप के डायरेक्टर और चीफ मार्केटिंग ऑफिसर थे। कपल की सगाई इसी साल हुई थी और नवंबर में उनकी शादी होने वाली थी। पुलिस के मुताबिक, दोनों परिवारों ने राजस्थान के उदयपुर में एक भव्य शादी की योजना बनाई थी।

SIT गठित करने का निर्देश

इस बीच, महाराष्ट्र विधानसभा के पीठासीन अधिकारी राजू खरे ने सरकार को पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का निर्देश दिया है। पुलिस ने मंगलवार को बताया कि 26 वर्षीय अग्रवाल की मंगेतर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी ने 18 जून को पुणे में लोहागढ़ किले के निकट एक घाटी में उन्हें कथित तौर पर धक्का दे दिया था।

सिया गोयल (20) और चौधरी (22) को गिरफ्तार कर लिया गया है। अग्रवाल और गोयल की शादी नवंबर में राजस्थान के उदयपुर स्थित एक महल में होने वाली थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) सदस्य सुनील शेलके ने राज्य विधानसभा में यह मुद्दा उठाया और मांग की थी कि हत्या के मामले में गोयल के परिवार को भी आरोपी बनाया जाए।

उन्होंने दावा किया कि गोयल परिवार ने अग्रवाल परिवार से उसके (सिया) किसी अन्य व्यक्ति के साथ संबंध होने की जानकारी छिपाई थी। उन्होंने कहा कि हत्या का मुकदमा फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाना चाहिए। खरे ने सरकार को हत्या की जांच के लिए एक एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया।

शेलके ने राज्य सरकार से पीड़ित के परिवार को न्याय सुनिश्चित करने की अपील की। विधायक ने कहा कि केतन अग्रवाल के परिवार को शुरुआत में बताया गया था कि उसकी मौत एक हादसे में हुई है। हालांकि, पुलिस की विस्तृत जांच में बाद में यह सामने आया कि यह हत्या का मामला था।

उन्होंने आरोपियों सिया गोयल और उसके प्रेमी के बीच कथित संबंधों का भी उल्लेख किया और दावा किया कि जांच के दौरान फोन कॉल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य सामने आए हैं। शेलके ने अधिकारियों से मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच करने की अपील की और मांग की कि इस मामले की सुनवाई जल्द से जल्द अदालत में की जाए।

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Nandani Bosmiya: 23 साल की नंदनी बोसमिया की मौत कैसे हुई, इस केस में जिस असलम का जिक्र आ रहा वो कौन?

Nandani Bosmiya Death New: गुजरात के राजकोट में 23 वर्षीय पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) उम्मीदवार नंदनी बोसमिया की संदिग्ध मौत ने नया मोड़ ले लिया है। 22 जून को नंदिनी अपने अपार्टमेंट में फंदे से लटकी हुई मिली थीं। शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का लगा। लेकिन अब उनके परिवार ने इसे हत्या बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का दावा है कि नंदिनी की मौत को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई है।

परिजनों का कहना है कि इसके पीछे उनके लिव-इन पार्टनर असलम सामा (Aslam Sama) का हाथ हो सकता है। पीड़ित परिवार का दावा है कि असलम पहले से शादीशुदा था। दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था। राजकोट पुलिस ने आकस्मिक मौत का मामला दर्ज कर फोरेंसिक जांच शुरू कर दी है।

लिव-इन रिश्ते को लेकर बढ़ रहा था तनाव

परिवार ने दावा किया है कि नंदिनी पिछले कुछ समय से असलम सामा के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थीं। आरोप है कि असलम पहले से शादीशुदा था। वह नंदिनी के अलावा जूनागढ़ में अपनी पत्नी से भी संबंध बनाए हुए था। रिश्तेदारों का कहना है कि इसी वजह से दोनों के बीच पिछले कुछ महीनों में लगातार विवाद होने लगे थे। नंदिनी कथित तौर पर मानसिक तनाव, भावनात्मक प्रताड़ना और परेशानियों का सामना कर रही थीं।

धमकी और उत्पीड़न के आरोप

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, नंदिनी के परिवार ने आरोप लगाया है कि असलम सामा उसे लगातार प्रताड़ित कर रहा था। नंदिनी को वह धमकियां भी देता था। उनका कहना है कि नंदिनी ने कई बार अपने करीबियों को रिश्ते में चल रही समस्याओं और तनाव के बारे में बताया था। परिजनों का आरोप है कि इन परिस्थितियों ने उनकी मौत को संदिग्ध बना दिया है। इसलिए मामले की गहन जांच की जानी चाहिए।

नंदनी के पिता आनंद बोस्मिया ने आरोप लगाया है कि असलम कई बार उनकी बेटी के साथ मारपीट भी किया था। यही वजह है कि मौत के बाद परिवार सीधे तौर पर असलम की भूमिका पर सवाल उठा रहा है। फिलहाल पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 194 के तहत आकस्मिक मौत का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

न्यूज 18 के मुताबिक, विवाद के बाद नंदनी कुछ समय के लिए एक ऐसे शख्स के पास चली गई थीं जिसे वह अपना भाई मानती थीं। हालांकि बाद में वह दोबारा उसी फ्लैट में लौट आई। परिवार का दावा है कि इसके बाद भी हालात सामान्य नहीं थे। दोनों के बीच तनाव बना हुआ था।

पुलिस ने शुरू की डिटेल्स जांच

पुलिस का कहना है कि शुरुआती सबूतों से मौत फांसी लगने की प्रतीत होती है। लेकिन अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच एजेंसियां सभी संभावित पहलुओं (जिनमें हत्या की आशंका भी शामिल है) की जांच कर रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक, घटनास्थल से मिले साक्ष्य, डिजिटल रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और अन्य परिस्थितिजन्य तथ्यों की जांच की जा रही है।

घटना वाले दिन नंदनी का फोन लगातार बंद मिला। परिवार का उनसे संपर्क नहीं हो पाया। इसके बाद परिवार को चिंता हुई। फिर एक परिचित को फ्लैट पर भेजा गया। उन्हें बताया गया कि फ्लैट के अंदर नंदनी फंदे से लटकी हुई मिलीं। इसकी जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी।

फोरेंसिक और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मौत का वास्तविक कारण फोरेंसिक और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। जांच पूरी होने तक किसी भी संभावना को खारिज नहीं किया गया है। फिलहाल मामला जांच के अधीन है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह आत्महत्या थी या इसके पीछे किसी आपराधिक साजिश का हाथ था। वहीं, नंदिनी के परिवार ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। एक अधिकारी ने कहा कि मौत की असली वजह फोरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगी।

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Emergency in NCERT textbook: एनसीईआरटी की कक्षा 9 की किताब में पहली बार शामिल हुआ आपातकाल, भारतीय नदियों के नाम भी शामिल

Emergency in NCERT textbook: भारत में इमरजेंसी लागू होने के पांच दशक से भी ज्यादा समय बाद राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने पहली बार क्लास 9 की किताब में इस ऐतिहासिक टॉपिक को शामिल किया है। इसे ‘बड़ी चुनौतियों में से एक’ के तौर पर पेश किया गया है, क्योंकि उस दौरान ज्यादातर मौलिक अधिकार सस्पेंड कर दिए गए थे। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, इमरजेंसी का जिक्र नई बनी सोशल साइंस की किताब ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में है।

इसमें भारतीय लोकतंत्र की खूबियों और चुनौतियों पर चर्चा करने वाले चैप्टर में इमरजेंसी को शामिल किया गया है। ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में 1975-77 के आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। NCERT के एक अधिकारी ने कंफर्म किया है कि यह पहली बार है जब क्लास 9 की किताब में इमरजेंसी पर कोई सेक्शन जोड़ा गया है।

स्कूल के सिलेबस में बदलाव

स्कूल के सिलेबस में यह एक अहम बदलाव है, क्योंकि हाल ही में देश ने 1975 में इमरजेंसी की घोषणा के 50 साल पूरे किए हैं। इस सेक्शन में लिखा है, “भारत में लोकतंत्र के सामने एक बड़ी चुनौती तब आई जब 1975-77 में इमरजेंसी लागू की गई। 1970 के दशक की शुरुआत में इंदिरा गांधी की सरकार के प्रति लोगों में असंतोष बढ़ रहा था। बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और कुशासन के आरोपों के कारण बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए।”

इसमें आगे कहा गया है, “जून 1975 में सरकार ने आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय इमरजेंसी लागू की। इस दौरान, ज्यादातर मौलिक अधिकार सस्पेंड कर दिए गए थे। प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं और एक्टिविस्टों को अरेस्ट किया गया। लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भारी दबाव पड़ा और नागरिकों की आजादी सीमित कर दी गई।”

जयप्रकाश नारायण की भूमिका पर भी जोर

किताब में इमरजेंसी के ख़िलाफ आंदोलन में जयप्रकाश नारायण की भूमिका पर भी जोर दिया गया है। किताब के एक हिस्से में लिखा है, “जयप्रकाश नारायण एक राजनीतिक नेता और समाजवादी विचारक थे और जिन्हें ‘लोक नायक’ के नाम से जाना जाता है। उनके नेतृत्व में चले जन-आंदोलनों ने छात्रों और नागरिकों, खासकर बिहार और गुजरात में लामबंद किया। 1977 में इमरजेंसी हटा ली गई और आम चुनाव हुए, जिससे लोगों को वोट के जरिए अपनी इच्छा जाहिर करने का मौका मिला। सत्ताधारी सरकार की हार ने भारतीय लोकतंत्र की ताकत को दिखाया और लोकतंत्र के महत्व को उजागर किया।”

इमरजेंसी वाला यह सेक्शन लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर व्यापक चर्चा का हिस्सा है। इमरजेंसी के अलावा, यह किताब लोकतांत्रिक कामकाज के सामने आने वाली चुनौतियों जैसे कि फेक न्यूज, गलत जानकारी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान, सार्वजनिक नियमों का उल्लंघन, गरीबी, क्षेत्रीयता, सामाजिक भेदभाव और लैंगिक असमानता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा करती है।

‘लोकतंत्र और आप’

इस चैप्टर में “लोकतंत्र और आप” नाम का एक नया सेक्शन भी जोड़ा गया है। NCERT का कहना है कि इसे पहली बार इसलिए शामिल किया गया है ताकि छात्र क्लासरूम में सीखी गई बातों को एक नागरिक और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भागीदार के तौर पर अपनी भूमिका से जोड़ सकें। इमरजेंसी के अलावा, नई किताब में भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और संस्थाओं पर भी काफी जोर दिया गया है। इसमें भारत में लोकतांत्रिक कामकाज की शुरुआत शुरुआती ऐतिहासिक दौर से ही बताई गई है और आज के शासन-प्रशासन में उनकी अहमियत को भी समझाती है।

लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका

इस किताब में लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका पर भी एक खास सेक्शन है, जिसमें मीडिया को “लोकतंत्र का चौथा स्तंभ” बताया गया है। लोगों की चिंताओं को उठाने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने में इसकी भूमिका पर जोर दिया गया है। भारत के लोकतांत्रिक सिस्टम के बड़े पैमाने को दिखाने के लिए, किताब में वोटरों की भागीदारी, वोटिंग से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े तथ्य और आंकड़े शामिल किए गए हैं। इसमें बताया गया है कि 2024 में भारत में 96.8 करोड़ से ज़्यादा रजिस्टर्ड वोटर थे और पूरे देश में फैले वोटिंग सेंटर्स के बड़े नेटवर्क का भी ज़िक्र किया गया है।

यह चैप्टर शासन-प्रशासन में नागरिकों की भागीदारी दिखाने के लिए जमीनी स्तर के लोकतंत्र के उदाहरणों का भी इस्तेमाल करता है, जैसे गुजरात की एक पंचायत और त्रिपुरा की महिलाओं के अनुकूल पंचायत। महिलाओं के वोटिंग अधिकारों और स्थानीय निकायों में आरक्षण के लिए भी एक अलग सेक्शन दिया गया है।

भारत की नदियों के नाम भी शामिल

ANI के मुताबिक, NCERT ने अपनी भाषा की टेक्स्टबुक्स का नाम भारत की नदियों के नाम पर रखा है। ‘कृष्णा’ नाम कृष्णा नदी के नाम पर रखा गया है। हिंदी टेक्स्टबुक का नाम ‘गंगा’ रखा गया है, इंग्लिश टेक्स्टबुक का नाम ‘कावेरी’ रखा गया है, और उर्दू टेक्स्टबुक का नाम ‘जमुना’ रखा गया है। इसी तरह, कन्नड़ टेक्स्टबुक का नाम ‘कृष्णा’ रखा गया है क्योंकि यह कर्नाटक में बहने वाली मुख्य नदियों में से एक है।

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इस टेक्स्टबुक के चैप्टर 6 में बैलेंस्ड डाइट के बारे में बताया गया है। इसे पेज 63 पर एक अलग हेडिंग, ‘बैलेंस्ड डाइट’ के तहत भी कवर किया गया है। पेज 63 पर दी गई तस्वीर में वेजिटेरियन और नॉन-वेजिटेरियन दोनों तरह के खाने की चीज़ें शामिल हैं। टेक्स्टबुक में कहीं भी वेजिटेरियनिज़्म के बारे में बताया या उसे सही नहीं ठहराया गया है, न ही नॉन-वेजिटेरियन खाने का विरोध किया गया है।

Ketan Agarwal Murder: मंगेतर सिया गोयल के प्रेमी के पिता ने तो अलग ही दावा कर दिया, बोले- असली सच कुछ और!

महाराष्ट्र के पुणे में बिजनेसमैन केतन अग्रवाल की लोहगढ़ किले में हुई कथित हत्या के मामले में अब एक नया और चौंकाने वाला मोड़ आ गया है। जहां एक तरफ पुलिस का दावा है कि केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी ने मिलकर केतन को खाई में धकेला था, वहीं अब इस मामले के दूसरे मुख्य आरोपी चेतन चौधरी के परिवार ने सामने आकर एक बेहद अलग और बड़ा दावा कर दिया है। चेतन के पिता बाबूलाल चौधरी का कहना है कि उनके बेटे को इस पूरे मामले में जबरन फंसाया जा रहा है और असली सच्चाई वह नहीं है जो सामने आ रही है। आइए जानते हैं आरोपी चेतन के पिता और उसके रिश्तेदारों ने इस पूरे कांड को लेकर क्या बड़े दावे किए हैं।

पिता बाबूलाल चौधरी का दावा – बेटे ने केतन को धक्का नहीं दिया

बिजनेसमैन केतन अग्रवाल हत्याकांड में गिरफ्तार आरोपी चेतन चौधरी के पिता बाबूलाल चौधरी ने अपने बेटे को पूरी तरह निर्दोष बताया है। बाबूलाल चौधरी का दावा है कि उनके बेटे ने खुद परिवार को इस घटना के बारे में जो बताया है, वह पुलिस की कहानी से बिल्कुल अलग है। बाबूलाल चौधरी के मुताबिक, ‘चेतन ने हमें साफ तौर पर बताया है कि उसने उस लड़के (केतन) को लोहगढ़ किले से धक्का नहीं दिया था। घटना के वक्त वह केतन से काफी दूर खड़ा था। जब केतन अग्रवाल खाई में गिरा, तो उस समय वह लड़की (सिया गोयल) ही बिल्कुल उसके पास खड़ी थी।’ हमारे सहयोगी न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक बाबूलाल चौधरी ने आगे कहा कि मैं यह नहीं जानता कि लड़की ने उसे धक्का दिया या नहीं, लेकिन चेतन ने हमसे यही कहा था कि वह खुद उस वक्त थोड़ा पीछे की तरफ दूर खड़ा हुआ था।

‘हम तो सिया गोयल को जानते तक नहीं, कल ही सुना नाम’

आरोपी चेतन के पिता ने सिया गोयल के साथ किसी भी तरह के पारिवारिक संबंध या जानकारी होने से पूरी तरह इनकार किया है। बाबूलाल चौधरी का कहना है कि उनके परिवार को इस घटना से पहले सिया गोयल के बारे में कोई भनक तक नहीं थी। उन्होंने बताया कि घटना वाले दिन सुबह चेतन ने अपनी मां और मुझसे सिर्फ इतना कहा था कि उसकी एक मीटिंग है और वह उसी के लिए जा रहा है। घर से निकलने से पहले उसने हमें इसके अलावा कोई और जानकारी नहीं दी थी। बाबूलाल ने आगे का कि हमने उस लड़की को कभी नहीं देखा और हम उसके बारे में बिल्कुल कुछ नहीं जानते। सच तो यह है कि मुझे कल ही उस लड़की का नाम सिया पता चला है, इससे पहले मैंने उसे कभी नहीं देखा था। पिता ने साफ तौर पर कहा कि उनके बेटे को इस पूरे मामले में गलत तरीके से फंसाया जा रहा है और इस मामले में उसकी कोई संलिप्तता नहीं है।

रिश्तेदार बोले- चेतन स्पोर्ट्समैन है, मीडिया एकतरफा कहानी दिखा रहा है

चेतन चौधरी के एक रिश्तेदार उदाराम चौधरी ने भी चेतन का बचाव करते हुए उसे पूरी तरह बेकसूर बताया है। उनका कहना है कि मीडिया इस पूरे मामले को काफी बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है। उदाराम चौधरी ने कहा कि, ‘इस मामले में चेतन पूरी तरह से निर्दोष है। मीडिया इस मुद्दे को बहुत ज्यादा हवा दे रहा है और सिर्फ एकतरफा नजरिया ही दिखा रहा है, जबकि चेतन इसमें शामिल नहीं है। चेतन एक स्पोर्ट्समैन है और बेहद सीधा-साधा इंसान है। आज तक बाजार में किसी भी व्यक्ति की तरफ से उसके खिलाफ एक भी शिकायत सामने नहीं आई है।’ सिया के साथ रिश्ते को लेकर उन्होंने कहा कि हमारे परिवार के किसी भी सदस्य को चेतन और उस लड़की के बीच के किसी भी तरह के संबंध के बारे में कोई अंदाजा नहीं था।

पुलिस की थ्योरी: दोनों ने मिलकर की हत्या

चेतन चौधरी के परिवार के इन दावों के उलट पुलिस की जांच और थ्योरी कुछ और ही कहती है। पुणे पुलिस के अनुसार 18 जून को लोहगढ़ किले में केतन अग्रवाल की मौत कोई हादसा नहीं थी बल्कि उनकी मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने मिलकर केतन को पहाड़ी से नीचे धकेला था। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों सिया गोयल और चेतन चौधरी को गिरफ्तार कर लिया है और फिलहाल दोनों पुलिस कस्टडी में हैं।

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Ketan Agarwal: हत्या से पहले गूगल पर क्या खोजा गया? पुणे केस में पुलिस का चौंकाने वाला दावा!

पुणे के कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या मामले में जांच ने अब एक नया और चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। पुलिस की शुरुआती जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि यह घटना अचानक हुई नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित साजिश रची गई थी। आरोप है कि मृतक की मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने वारदात से पहले इंटरनेट पर हत्या के तरीकों से जुड़ी जानकारी भी खोजी थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, डिजिटल सबूतों और कॉल रिकॉर्ड्स से यह संकेत मिलता है कि दोनों के बीच लंबे समय से लगातार संपर्क बना हुआ था।

इस मामले ने स्थानीय स्तर पर सनसनी फैला दी है और लोग इस रिश्ते, विश्वासघात और कथित साजिश को लेकर हैरान हैं। फिलहाल पुलिस सभी तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों की गहराई से जांच कर रही है और मामले की परतें धीरे-धीरे सामने आ रही हैं।

लोणावला के लोहेगढ़ फोर्ट पर रची गई मौत की पटकथा

जांच के अनुसार, 18 जून को लोहेगढ़ फोर्ट पर केतन को कथित तौर पर धक्का देकर गहरी खाई में गिराया गया। पुलिस का कहना है कि यह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि पहले से तैयार किया गया एक सुनियोजित प्लान था, जिसे फोर्ट की सुनसान लोकेशन पर अंजाम दिया गया।

डिजिटल ट्रेल से खुला राज

पुलिस जांच में सामने आया कि सिया और चेतन के बीच महीनों तक बेहद गहन संपर्क था। जनवरी से जून के बीच दोनों के बीच 2004 से अधिक कॉल्स रिकॉर्ड हुए, जिनमें घंटों लंबी बातचीत शामिल थी। व्हाट्सऐप और फेसटाइम कॉल्स ने उनके रिश्ते और कथित साजिश की परतें खोल दीं।

हत्या से पहले की तैयारी

जांचकर्ताओं के मुताबिक, दोनों ने घटना से पहले हत्या के तरीकों की ऑनलाइन खोज की थी। बताया गया कि वारदात वाले दिन दोनों पहले एक कैफे में मिले और फिर लोहेगढ़ फोर्ट के लिए रवाना हुए, जहां कथित योजना को अंतिम रूप दिया गया।

संदेह बढ़ाने वाली हरकतें

पुलिस ने यह भी खुलासा किया कि चेतन ने 18 जून को अपना फोन कई घंटों तक बंद रखा और लोकेशन से बचने के लिए कर्मचारी का मोबाइल इस्तेमाल किया। इससे जांच एजेंसियों को शक और गहरा हो गया।

CCTV ने खोला बड़ा सुराग

फोर्ट इलाके की CCTV फुटेज में एक हुडी पहना व्यक्ति केतन और सिया का पीछा करता नजर आया। सोशल मीडिया और तस्वीरों के मिलान के बाद पुलिस ने इस व्यक्ति की पहचान चेतन चौधरी के रूप में की।

रिश्ता, असमंजस और परिवार की मर्यादा

पुलिस के अनुसार, सिया और चेतन के बीच रिश्ते थे, जबकि सिया की सगाई केतन से हो चुकी थी। बताया जा रहा है कि शादी से बचने और रिश्ते को छिपाने की वजह से यह कथित साजिश रची गई। हालांकि, सिया परिवार की बदनामी के डर से भागने के पक्ष में नहीं थी।

गिरफ्तारी और आगे की जांच जारी

पुलिस ने डिजिटल सबूतों, कॉल रिकॉर्ड्स और CCTV फुटेज के आधार पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जांच अभी जारी है और और भी खुलासों की संभावना जताई जा रही है।

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Ketan Agarwal Murder Case: सिया गोयल ने मंगेतर को लेकर दिया ये आखिरी सिग्नल, सिर्फ 50 मिनट में रचा गया पूरा कांड, केस में हुआ नया खुलासा

पुणे केतन अग्रवाल मर्डर केस (Ketan Agarwal Murder Case): महाराष्ट्र के पुणे में मंगेतर सिया गोयल द्वारा रची गई रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या की इनसाइड स्टोरी में हर दिन चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। जिस मामले को पहले ट्रेकिंग के दौरान हुआ एक दर्दनाक हादसा माना जा रहा था, वह दरअसल बेहद ठंडे दिमाग से तैयार की गई एक खौफनाक मर्डर प्लानिंग थी। पुलिस जांच में अब यह साफ हो गया है कि इस पूरे कांड को अंजाम देने के लिए सिया गोयल ने अपने प्रेमी को आखिरी सिग्नल दिया था। ये भी सामने आया है कि महज 50 मिनट के भीतर पूरी वारदात को अंजाम देकर आरोपी मौके से फरार हो गया था।

मंगेतर सिया का वह आखिरी सिग्नल और 50 मिनट का पूरा टाइमलाइन

हमारे सहयोगी न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक पुणे ग्रामीण पुलिस के मुताबिककेतन अग्रवाल की मंगेतर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी ने पहले से ही हत्या का पूरा प्लान तय कर रखा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DySP) गजानन तोमपे ने बताया कि दोनों के बीच पहले से सहमति थी कि जैसे ही वे सही जगह पहुंचेंगे, सिया गोयल जमीन पर बैठ जाएगी। यह बैठना ही प्रेमी चेतन चौधरी के लिए हमला करने का अलर्ट सिग्नल था। 18 जून को जैसे ही सिया पहाड़ी किले के एक सुनसान हिस्से में केतन के साथ पहुंची, वह तय प्लान के मुताबिक बैठ गई। इशारा मिलते ही पीछे से आ रहे चेतन चौधरी ने केतन अग्रवाल को चट्टान से नीचे गहरी खाई में धकेल दिया और वहां से भाग निकला। लोनावला ग्रामीण पुलिस के इंस्पेक्टर दिनेश तायड़े के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज और जांच से पता चला है कि हुडी पहने हुए आरोपी चेतन चौधरी किले के टॉप पर 10 मिनट से भी कम समय तक रुका था। उसने किले पर चढ़ने और नीचे उतरने की पूरी प्रक्रिया को महज 50 मिनट के भीतर पूरा कर लिया था। जब एक सुरक्षा गार्ड ने चेतन की एंट्री और हुडी को लेकर पूछताछ की, तो उसने बहुत ही शातिराना ढंग से झूठ बोलते हुए दावा किया कि वह वहां सिर्फ एक्सरसाइज करने के लिए आया है।

वारदात के लिए क्यों चुना गया लोहगढ़ किले का विंचू काटा?

जांचकर्ताओं के मुताबिक आरोपियों ने केतन की हत्या के लिए लोहगढ़ किले के विंचू काटा रिज के पास वाले हिस्से को बहुत ही सोच-समझकर चुना था। ये पवन बांध की तरफ खुलता है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि किले के अन्य हिस्सों की तुलना में यह स्थान बेहद अलग-थलग और सुनसान था। आरोपी जानते थे कि वीक डेज में इस जगह पर बहुत कम संख्या में पर्यटक या विजिटर्स आते हैं। इससे पकड़े जाने का खतरा न के बराबर था। पुलिस को अंदेशा है कि इस योजना को अंजाम देने से पहले दोनों आरोपियों ने इस जगह की बकायदा रेकी भी की थी।

सिया के बयानों का विरोधाभास और फोन से खुली पोल

लोनावला ग्रामीण पुलिस के इंस्पेक्टर दिनेश तायड़े ने बताया कि इस मामले में पहला शक तब गहराया जब सिया गोयल ने पुलिस को लगातार विरोधाभासी और बदलते हुए बयान दिए। सिया ने पहले दावा किया था कि केतन एक तस्वीर के लिए पोज दे रहा था और उसी दौरान उसका पैर फिसल गया। बाद में उसने अपना बयान बदलते हुए कहा कि केतन उसे पानी की बोतल पकड़ा रहा था और तभी वह नीचे गिर गया। जब पुलिस ने सिया का मोबाइल फोन चेक किया तो उस पूरे दिन की एक भी तस्वीर फोन में मौजूद नहीं थी। इस बात ने पुलिस के शक को पुख्ता कर दिया। जब जांचकर्ताओं ने दोनों के कॉल रिकॉर्ड्स खंगाले, तो हैरान करने वाला डेटा सामने आया। केतन से सगाई होने के बावजूद सिया और चेतन पिछले कई महीनों से रिलेशनशिप में थे। इस साल जनवरी से जून के बीच दोनों ने एक-दूसरे से 2000 से अधिक बार फोन पर 238 घंटे बात की थी। पुलिस के मुताबिक प्रेमी चेतन चौधरी ने अपनी लोकेशन छुपाने के लिए ट्रिप के दौरान अपना खुद का मोबाइल फोन घर छोड़ दिया था और ट्रैकिंग के समय वह अपने एक कर्मचारी के हैंडसेट का इस्तेमाल कर रहा था।

अंतिम संस्कार के बाद केतन की बहन को हुआ था शक

इस मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने और जांच में तेजी लाने का एक बड़ा श्रेय केतन अग्रवाल की बहन को भी जाता है। अंतिम संस्कार के कुछ दिनों बाद जब सिया गोयल केतन के परिवार से मिलने उसके घर आई हुई थी, तब केतन की बहन को सिया के हाव-भाव और बातों पर संदेह हुआ। बातचीत के दौरान केतन की बहन ने सिया से उस हादसे और पहाड़ी से गिरने से ठीक पहले की कड़ियों को लेकर सिलसिलेवार तरीके से कई सवाल पूछे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक सिया के जवाब इतने संदिग्ध थे कि बहन को भांपते देर नहीं लगी कि कुछ तो गड़बड़ है। परिवार ने तुरंत इसकी सूचना जांचकर्ताओं को दी। इसके बाद पुलिस ने कड़ाई से तफ्तीश शुरू की और यह पूरी साजिश बेनकाब हो गई।

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पश्चिम बंगाल में अब अंडों को लेकर बवाल, मिड डे मील से इसके हटने की सुगबुगाहट और इस्कॉन से जोड़ा जा रहा पूरा विवाद क्या है? समझिए

पश्चिम बंगाल मिड-डे मील विवाद (West Bengal Mid-Day Meal Controversy): पश्चिम बंगाल में स्कूलों के मिड-डे मील (स्कूली भोजन) के मेनू से अंडों को हटाए जाने की सुगबुगाहट को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस पूरे मामले को धार्मिक संस्था इस्कॉन (ISKCON) और राज्य की नई भाजपा सरकार से जोड़कर देखा जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया है कि राज्य में शाकाहार थोपने की कोशिश की जा रही है और इससे बच्चों के पोषण पर असर पड़ेगा। आइए समझते हैं कि आखिर यह पूरा विवाद क्या है और इस पर अलग-अलग पक्षों का क्या कहना है।

विवाद की शुरुआत: बजट में इस्कॉन को शामिल करने का प्रस्ताव

इस पूरे विवाद की जड़ पश्चिम बंगाल सरकार के नए बजट से जुड़ी है। सोमवार को राज्य का पहला बजट पेश करते हुए पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता ने घोषणा की थी कि मिड-डे मील योजना के तहत भोजन तैयार करने और उसके वितरण में इस्कॉन की सहायता लेने की उम्मीद है। इसके बाद ऐसी खबरें और सोशल मीडिया पर दावे सामने आने लगे कि कोलकाता नगर निगम क्षेत्र के तहत आने वाले स्कूलों में जहां राज्य सरकार पके हुए भोजन की जिम्मेदारी इस्कॉन को सौंपने पर विचार कर रही है, वहां के मेनू से अंडों को पूरी तरह हटा दिया जाएगा। चर्चा यह भी चली कि इस्कॉन के नए मेनू में अंडों की जगह पौधों से मिलने वाले प्रोटीन जैसे कि पनीर और सोयाबीन को शामिल किया जा सकता है।

टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने जताई चिंता, सरकार से पुनर्विचार की मांग की

तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष ने सरकार के इन संकेतों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि वर्तमान में अंडे मिड-डे मील योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और बच्चों के पोषण में इनका बड़ा योगदान है। उन्होंने राज्य सरकार से ऐसे किसी भी कदम पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है जिससे अंडे मेनू से बाहर हो जाएं।

कुणाल घोष ने कहा कि, ‘इस्कॉन एक बेहद सम्मानित धार्मिक संस्था है, लेकिन समस्या यह है कि बच्चों को खाना खिलाना एक बड़ी चुनौती है। अंडा एक ऐसी चीज है जिसे बच्चे बहुत पसंद करते हैं। यह न केवल उनके पोषण और स्वास्थ्य के लिए अच्छा है, बल्कि बच्चों को काफी आकर्षित भी करता है। चूंकि इस्कॉन एक धार्मिक संगठन है, इसलिए यदि वे मिड-डे मील तैयार करेंगे तो उन्हें भोजन को पूरी तरह से शाकाहारी रखना होगा। ऐसे में बच्चों का मेनू नॉन-वेजिटेरियन से वेजिटेरियन हो जाएगा और अंडे पूरी तरह से खत्म हो जाएंगे। इसलिए हम सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध करते हैं।’

डेरेक ओ’ब्रायन का भाजपा सरकार पर तीखा हमला, ‘बंगाल में शाकाहार थोपने की कोशिश’

तृणमूल कांग्रेस के संयुक्त सचिव और राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने भी इस मुद्दे को लेकर भाजपा पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल की नई भाजपा सरकार बच्चों को पोषण से वंचित कर रही है और राज्य में जबरन शाकाहार थोपने की कोशिश कर रही है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में ओ’ब्रायन ने इस विवाद को चुनाव प्रचार के दौरान खान-पान की आदतों पर हुई राजनीतिक बहस से जोड़ते हुए लिखा कि चुनाव अभियान के दौरान ‘मछली खाने’ के तमाशे के बाद, आखिरकार गुजरात जिमखाना का असली रूप सामने आ गया है। बंगाल में नई भाजपा सरकार काम पर लग गई है। विरोधियों पर अंडे फेंको, लेकिन मिड-डे मील से अंडे हटाकर बच्चों को पोषण से वंचित कर दो। शाकाहार थोपा जा रहा है। बंगाल इसे खारिज करता है।’

अफवाहों पर इस्कॉन का स्पष्टीकरण- अभी कोई मेनू फाइनल नहीं हुआ

विवाद और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों के बीच इस्कॉन कोलकाता के उपाध्यक्ष राधारमण दास ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने वायरल हो रहे कथित मेनू को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि अभी भोजन सूची को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। राधारमण दास ने X पर पोस्ट में कहा कि, ‘मेरे संज्ञान में आया है कि कुछ लोग कोलकाता में मिड-डे मील के लिए एक प्रस्तावित मेनू साझा कर रहे हैं। हालांकि, मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि ऐसा कोई भी मेनू अभी फाइनल नहीं किया गया है और न ही यह सूची हमारी ओर से जारी की गई है। एक बार मेनू फाइनल हो जाने के बाद, हम इसकी आधिकारिक घोषणा करेंगे। कृपया इस तरह की गलत जानकारी साझा करने से बचें।’

क्या हैं मिड-डे मील (PM POSHAN) के नियम?

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, ‘पीएम पोषण’ (प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण) योजना के तहत सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में बालवाटिका और कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को गर्म पका हुआ भोजन दिया जाता है। इस योजना के नियम कुछ इस तरह हैं-

स्थानीय मेनू की छूट: केंद्र सरकार के नियमों के तहत, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह छूट दी गई है कि वे निर्धारित पोषण मानकों का पालन करते हुए स्थानीय परिस्थितियों और प्राथमिकताओं के अनुरूप अपना मेनू खुद तय कर सकते हैं।

गुणवत्ता और स्वच्छता गाइडलाइंस: केंद्र सरकार ने भोजन की गुणवत्ता, सुरक्षा और स्वच्छता को लेकर कड़े दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसमें प्रमाणित सामग्री का उपयोग, रसोइयों का प्रशिक्षण और बच्चों को परोसे जाने से पहले स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों व शिक्षकों द्वारा भोजन को अनिवार्य रूप से चखना शामिल है।

मुख्य जिम्मेदारी: इस योजना को जमीनी स्तर पर लागू करने और बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की पूरी जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन की होती है।

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Ketan Agarwal Murder Case: पुणे के पास स्थित लोहागढ़ किले पर घूमने गए  युवा कारोबारी केतन अग्रवाल की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस जांच ने नया मोड़ ले लिया है। पुलिस का दावा है कि केतन की मंगेतर सिया गोयल शादी के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं थी। वह अपने परिवार के दबाव में यह रिश्ता स्वीकार की थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि यही तनाव इस कथित साजिश की एक अहम वजह हो सकता है।

पहले हादसा माना गया था मामला

जांच में सामने आया कि 18 जून को ‘ट्रेकिंग’ के दौरान सिया (20) और उसके प्रेमी चेतन (22) ने 26 वर्षीय केतन को खाई में कथित तौर पर धक्का देकर मार डाला। वह लोहागढ़ किले में एक चट्टान से गिर गए थे। उस समय दुर्घटनावश हुई मौत मानकर मामला दर्ज किया गया था। सिया ने भी केतन के परिजनों को बताया था कि ट्रेकिंग के दौरान उनका पैर फिसल गया था, जिससे वह खाई में जा गिरे।

शुरुआत में इसे एक दुर्घटना माना गया था। सिया ने परिजनों को बताया था कि ट्रेकिंग के दौरान केतन का पैर फिसल गया और वह खाई में गिर गया। हालांकि बाद में पुलिस जांच में कई संदिग्ध तथ्य सामने आए, जिसके बाद मामले को हत्या के एंगल से देखा जाने लगा।

पुलिस का दावा- शादी नहीं करना चाहती थी सिया

ANI के मुताबिक पुलिस सूत्रों के अनुसार पूछताछ, डिजिटल सबूतों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से संकेत मिले हैं कि सिया गोयल इस शादी को लेकर सहज नहीं थी। उसने पहले भी विवाह को एक साल के लिए टालने की इच्छा जताई थी। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, सिया खुद को शादी के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं मानती थी। लेकिन परिवार की अपेक्षाओं और दबाव के कारण वह रिश्ते को आगे बढ़ा रही थी।

CCTV फुटेज से खुला राज

जांच में बड़ा सुराग किले परिसर के सीसीटीवी कैमरों से मिला। पुलिस ने फुटेज में देखा कि केतन और सिया के पीछे कुछ दूरी पर एक संदिग्ध व्यक्ति चल रहा था। बाद में उसकी पहचान चेतन चौधरी (Chetan Chaudhary) के रूप में हुई, जिसे पुलिस सिया का कथित प्रेमी बता रही है।

गर्मी में हूडी पहनकर घूम रहा था युवक

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, संदिग्ध युवक ने शॉर्ट्स और हूडी पहन रखी थी। उसने हूडी को इस तरह नीचे खींच रखा था कि उसका चेहरा दिखाई न दे। उसके ऊपर हेडसेट भी लगा हुआ था। जांचकर्ताओं के मुताबिक, एक अन्य फुटेज में सिया अचानक पीछे मुड़कर देखती है। उसी समय हूडी पहने युवक नीचे बैठ जाता है। इस गतिविधि ने पुलिस का संदेह और बढ़ा दिया।

फरवरी में हुई थी सगाई, नवंबर में होनी थी शादी

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि केतन और सिया की सगाई फरवरी में हुई थी। दोनों की शादी नवंबर में राजस्थान के उदयपुर में एक भव्य समारोह में होने वाली थी। इसके लिए पैलेस वेन्यू भी बुक किया जा चुका था।

तीन बार कर चुकी थी मारने की कोशिश

पुलिस का दावा है कि सिया लगातार केतन को लोहागढ़ किले ले जाने के लिए दबाव डाल रही थी। जांच के अनुसार वह उसे 31 मई, 4 जून, 14 जून और 18 जून को वहां लेकर गई थी। अधिकारियों का आरोप है कि 14 जून को भी केतन को खाई में धक्का देने की कोशिश की गई थी। लेकिन वह एक झाड़ी पकड़कर बच गया था। इसके बाद 18 जून को कथित तौर पर दोबारा साजिश को अंजाम दिया गया।

जांच जारी, पुलिस जुटा रही सबूत

फिलहाल पुलिस सिया गोयल और चेतन चौधरी से पूछताछ कर रही है। दोनों का मोबाइल डेटा, सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल सबूतों  की जांच में जुटी हुई है। हालांकि मामले में अंतिम निष्कर्ष अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

मामले ने खड़े किए कई सवाल

इस चर्चित मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पारिवारिक दबाव में होने वाली शादियां युवाओं पर मानसिक तनाव बढ़ा रही हैं। वहीं, पुलिस का दावा है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला एक सुनियोजित हत्या की साजिश का उदाहरण बन सकता है।

मामले की जांच से जुड़े एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “जांच के दौरान कुछ ऐसे तथ्य और परिस्थितियां सामने आईं जिन्होंने इस कथित हादसे पर सवाल खड़े कर दिए। इसके बाद हमने मामले की गहन पड़ताल शुरू की। जब किले के टिकट काउंटर पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की गई तो उसमें केतन और सिया एक साथ किले की ओर जाते दिखाई दिए जिससे जांच को एक महत्वपूर्ण दिशा मिली।” फुटेज को बारीकी से खंगालने पर पुलिस की नजर एक ऐसे शख्स पर पड़ी, जो केतन और सिया से कुछ मीटर पीछे चल रहा था।

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अधिकारी ने कहा, “उस व्यक्ति ने शॉर्ट्स और ‘हुडी’ पहन रखी थी। हुडी’ का अगला हिस्सा इतना नीचे कर रखा था कि उसका चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था। इसके अलावा उसने हुडी के ऊपर हेडसेट भी लगा रखा था। एक अन्य फुटेज में हमने देखा कि सिया अचानक पीछे मुड़कर देखती है और उसी समय हुडी पहने वह व्यक्ति भी अचानक बैठ जाता है। यह संयोग बेहद संदिग्ध लगा। अधिकारी ने बताया कि बाद में पुलिस ने 18 जून को उस समय के तापमान का पता लगाया जो करीब 33 डिग्री सेल्सियस था और यह बात खटकी कि इतनी गर्मी में कोई व्यक्ति आखिर ‘हुडी’ पहनकर क्यों घूम रहा था।