कच्चे तेल की नरमी और जियोपॉलिटिकल जोखिम कम होने से इन सेक्टर्स को होगा फायदा, इन पर रहे नजर

अमर सिंह

दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक देश के तौर पर,भारत अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा तेल आयात करता है। इसलिए,कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से उसे फायदा होता है। ब्रेंट क्रूड की कीमत में प्रति बैरल $1 की गिरावट से देश के सालाना आयात बिल में आम तौर पर लगभग 10,000 से 13,000 करोड़ रुपये की बचत होती है।

इसके साथ ही जियोपॉलिटिकल जोखिम कम हो रहे हैं। मिडिल ईस्ट में तनाव का घटना,ईरान-इजरायल युद्ध का समाधान,होर्मुज जलडमरूमध्य से आवाजाही का शुरू होना भी भारत के लिए फायदेमंद है। इससे देश को महंगाई कम होने,करंट अकाउंट घाटा घटने,रुपये को सहारा मिलने और RBI व सरकार के लिए पॉलिसी बनाने की बेहतर गुंजाइश मिलने जैसे फायदे होंगे।

इतिहास गवाह है कि तेल की कीमतों में भारी गिरावट (जैसे 2014-16 के दौरान) ने कुछ खास सेक्टर को काफी फायदा पहुंचाया है,भले ही ग्लोबल ग्रोथ की रफ्तार धीमी रही हो। मौजूदा हालात से फायदे में रहने वाले सेक्टर एक जैसे नहीं हैं। ये फायदे उन इंडस्ट्रीज़ तक सीमित हैं जहां फ्यूल या कच्चे तेल से जुड़े कच्चे माल की लागत का हिस्सा बहुत ज्यादा होता है,या जहां कम महंगाई और ज्यादा डिस्पोजेबल इनकम से बिक्री की मात्रा(वॉल्यूम)सीधे तौर पर बढ़ती है।

कच्चे तेल के भाव कम होने से एविएशन सेक्टर को सीधा और बड़ा फायदा मिलता है। भारतीय एयरलाइंस के ऑपरेटिंग खर्च में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF)का हिस्सा लगभग 40 प्रतिशत होता है। कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट से ATF की कीमतें तुरंत कम हो जाती हैं,जिससे इंडिगो,एयर इंडिया और स्पाइसजेट के ऑपरेटिंग मार्जिन में सीधे तौर पर बढ़ोतरी होती है।

तेल के भाव घटने से एयरलाइंस या तो अपने मार्जिन को सुरक्षित रख सकती हैं या कम किराए के जरिए डिमांड बढ़ा सकती हैं। ये दोनों ही बातें इस सेक्टर के लिए अच्छी हैं। कीमतों में उतार-चढ़ाव कम होने से हेजिंग की लागत भी कम हो जाती है। पहले के दौर में,तेल की कीमतों में बदलाव पर एयरलाइन शेयरों ने अच्छी तेजी दिखाई है। घरेलू हवाई ट्रैफिक में अभी भी मजबूत बढ़त बनी हुई है,इसलिए ईंधन की कम लागत इनके मुनाफे और क्षमता बढ़ाने में आने वाली एक बड़ी रुकावट को दूर कर सकती है।

इसके बाद डाउनस्ट्रीम ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs)और कच्चे तेल से जुड़े मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का नंबर आता है। इंडियन ऑयल,BPCL और HPCL जैसी कंपनियों को कच्चा तेल खरीदने की कम लागत का फायदा मिलता है। जब रिटेल फ्यूल की कीमतों में बदलाव में देरी होती है या टैक्स की वजह से कीमतों में आई गिरावट का कुछ हिस्सा एडजस्ट हो जाता है। ऐसे में इनका मार्केटिंग मार्जिन बढ़ जाता है। इनको इन्वेंट्री से होने वाला फायदा भी मिल सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों में कमी से पेंट सेक्टर को फायदा होता है। इनके कच्चे माल की लागत (जैसे सॉल्वैंट्स,रेजिन और कुछ एडिटिव्स)का 35-50 प्रतिशत हिस्सा कच्चे तेल से जुड़ा होता है। ऐसे में कच्चे तेल में नरमी से एशियन पेंट्स,बर्जर पेंट्स और ऐसी दूसरी कंपनियों को अच्छे मार्जिन या कीमतें तय करने में लचीलेपन का फायदा मिलता है।

टायर बनाने वाली कंपनियों (अपोलो टायर्स,MRF,सिएट,JK टायर)को सिंथेटिक रबर और कार्बन ब्लैक की लागत में कमी से राहत मिल रही है। लुब्रिकेंट्स और कुछ खास केमिकल सेगमेंट को भी इसका फायदा हो रहा है। जब कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है तो इन कंपनियों के लिए लागत कम,मार्जिन ज्यादा वाली क्लासिक स्थितियां बनती हैं।

तेल की कीमतों में कमी से ऑटोमोबाइल और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को लागत और मांग,दोनों ही फ्रंट पर फायदा होता है। टू-व्हीलर और पैसेंजर गाड़ियों के मामले में,पेट्रोल और डीजल की कम कीमतें गाड़ियों की कुल ओनरशिप लागत (टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप)को बेहतर बनाती हैं। कीमत को लेकर संवेदनशील बाजार में यह खरीदारी का एक अहम कारण होता है। पहले भी देखा गया है कि जब ईंधन की कीमतें कम रही हैं,तब एंट्री-लेवल और मास-मार्केट सेगमेंट में रिटेल बिक्री में तेजी आई है।

इसके अलावा क्रूड की कीमतों में कमी से कमर्शियल गाड़ियों और बड़े लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम (ट्रकिंग,लास्ट-माइल डिलीवरी)को डीजल खर्च पर सीधे बचत होती है,जो वेरिएबल कॉस्ट का एक बड़ा हिस्सा होता है। इससे लॉजिस्टिक्स कंपनियों की ऑपरेटिंग लेवरेज बेहतर होती है और ज्यादा ब्याज दरों वाले माहौल में वॉल्यूम रिकवरी में मदद मिल सकती है। भारत में सामान की ढुलाई के लिए सड़क परिवहन ही मुख्य जरिया (70%) है,इसलिए सप्लाई चेन पर इसका मल्टीप्लायर असर काफी अहम है।

कच्चे तेल में नरमी से कंज्यूमर-फेसिंग सेक्टर और फाइनेंशियल सेक्टर को मैक्रो-लेवल पर दूसरे दौर के फायदे मिलते हैं। फ्यूल और ट्रांसपोर्ट की लागत कम होने से महंगाई कम होती है। इससे RBI को पॉलिसी रेट्स को मैनेज करने के लिए ज्यादा गुंजाइश मिलती है। इससे क्रेडिट ग्रोथ और एसेट क्वालिटी में सुधार होता है। जिन बैंकों और NBFCs का रिटेल और SME पोर्टफोलियो मज़बूत है,उन्हें कम महंगाई,स्थिर या कम रेट्स और बेहतर होते कॉर्पोरेट कैश फ्लो के अच्छे चक्र से फायदा होता है।

इसके अलावा ईंधन और ट्रांसपोर्ट पर खर्च कम होने से’कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी’और कुछ खास FMCG कैटेगरी में खर्च करने लायक आय(डिस्पोजेबल इनकम)में थोड़ी लेकिन वास्तविक बढ़ोतरी देखने को मिलती है। अगर कम महंगाई और बेहतर फिस्कल हेडरूम (ईंधन सब्सिडी का दबाव कम होने से)से बेहतर कैपेक्स(पूंजीगत व्यय)माहौल बनता है या ब्याज दरों पर निर्भर मांग में सुधार होता है,तो रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा हो सकता है।

भू-राजनीतिक जोखिम कम होने से इन प्रभावों का असर सिर्फ तेल के गणित से कहीं ज्यादा बढ़ जाता है। ग्लोबलअनिश्चितता कम होने से इक्विटी रिस्क प्रीमियम घटता है,FII निवेश को बढ़ावा मिलता है और कुल मिलाकर जोखिम लेने की क्षमता बेहतर होती है। ग्लोबल ट्रेड और कैपिटल एक्सपेंडिचर से जुड़े सेक्टर जैसे कुछ कैपिटल गुड्स,चुनिंदा मैन्युफैक्चरिंग और टूरिज़्म/हॉस्पिटैलिटी शेयरों के लिए अनुकूल माहौल बनता है। सप्लाई-चेन में स्थिरता से आयात पर निर्भर असेंबली इंडस्ट्रीज को भी मदद मिलता है।

सस्ती एनर्जी और शांत भू-राजनीतिक स्थिति का मेल वोलैटिलिटी के उन मुख्य कारणों में से एक को घटाता है,जिन्होंने समय-समय पर भारत की विकास गाथा में बाधा डाली है।

एक बार होने वाले इन्वेंट्री या मार्जिन से मिलने वाले फायदे और लगातार होने वाली कमाई में बढ़ोतरी के बीच फ़र्क करना जरूरी है। ग्राहकों को कितना फायदा होगा और कंपनियां कितना फायदा अपने पास रखेंगी,यह टैक्स पॉलिसी,कॉम्पिटिशन की तीव्रता और प्राइसिंग डिसिप्लिन पर निर्भर करेगा। फायदा पाने वाले सेक्टर की हर कंपनी को एक जैसा फायदा नहीं होगा। बैलेंस-शीट की मजबूती,प्राइसिंग पावर और ऑपरेशनल क्षमता के आधार पर बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियां ज्यादा बेहतर स्थिति में रहेंगी।

बुनियादी नज़रिए से देखें तो,कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और कम होते जियोपॉलिटिकल तनाव का मेल भारत के लिए एक अच्छा संकेत है। इससे बाहरी फैक्टर का दबाव कम होता है,महंगाई पर लगाम लगती है और ज्यादा कर्ज वाले सेक्टर में कंपनियों का मुनाफा बढ़ता है। जब तेल की कीमतें गिरती हैं और तो बाजार अक्सर तुरंत सकारात्मक प्रतिक्रिया देता है।

इस स्थिति में निवेशकों को ऐसी कंपनियों पर फोकस करना चाहिए जिनका ऑपरेटिंग लेवरेज ज़्यादा हो (खासकर ईंधन या कच्चे तेल से जुड़े इनपुट के मामले में),जिनकी बैलेंस शीट मज़बूत हो (ताकि वे किसी भी तरह के उतार-चढ़ाव का सामना कर सकें) और जिनकी वॉल्यूम ग्रोथ भरोसेमंद हो। ऐसे माहौल में, एविएशन,OMCs,पेंट,टायर,ऑटोमोबाइल,लॉजिस्टिक्स और ब्याज दरों से प्रभावित होने वाले फाइनेंशियल सेक्टर में चुनिंदा निवेश करना,भारत की जारी स्ट्रक्चरल ग्रोथ स्टोरी में शामिल होने का एक भरोसेमंद तरीका है।

अमर सिंह एंजेल वन में रिसर्च के सीनियर VP हैं.

 

Market View : गिरते बाजार में वोलैटिलिटी को खतरा नहीं,मौका मानें, डेट से पैसा निकालकर इक्विटी निवेश बढ़ाने का अच्छा मौका

 

डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market View : गिरते बाजार में वोलैटिलिटी को खतरा नहीं,मौका मानें, डेट से पैसा निकालकर इक्विटी निवेश बढ़ाने का अच्छा मौका

Market View : गुरुवार को पिछले कारोबारी सत्र में आखिरी घंटे में बाजार में ऊपरी स्तर से मुनाफावसूली आई थी। सेंसेक्स-निफ्टी ऊपरी स्तर से फिसलकर बंद हुए थे। हालांकि सेंसेक्स 109 प्वाइंट चढ़कर 77,100 पर बंद हुआ था। वहीं, निफ्टी 34 प्वाइंट चढ़कर 24,056 पर बंद हुआ था। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए थे। ऑटो और FMCG शेयरों में खरीदारी आई थी। मेटल,PSE और तेल-गैस इंडेक्स गिरावट पर बंद हुए थे। IT और एनर्जी शेयरों में दबाव देखने को मिला था। बैंक निफ्टी 27 प्वाइंट चढ़कर 58,177 पर बंद हुआ था। मिडकैप 400 प्वाइंट गिरकर 61,796 पर बंद हुआ था।

निफ्टी के 50 में से 26 शेयरों में बिकवाली देखने को मिली थी। सेंसेक्स के 30 में से 19 शेयरों में बिकवाली रही थी। बैंक निफ्टी के 14 में से 8 शेयरों में गिरावट आई थी। डॉलर के मुकाबले रुपया 27 पैसे मजबूत होकर 94.40/$ पर बंद हुआ था।

बंधन AMC में VP-इक्विटीज,प्रतीक पोद्दार ने बाजार पर बात करते हुए कहा कि गिरते बाजार में वोलैटिलिटी को खतरा नहीं,मौका मानें। यह डेट से पैसा निकालकर इक्विटी निवेश बढ़ाने का मौका है। गिरावट में अच्छे स्टॉक्स सस्ते दाम पर मिलते हैं। मिड और स्मॉलकैप में भी अवसर मिलने पर एग्रेसिव खरीदारी की जा सकती है। ऑटोमैटिक रीबैलेंसिंग से रिस्क कंट्रोल में रहता है। इस समय पैनिक सेलिंग नहीं,डिसिप्लिन्ड एलोकेशन पर जोर होना चाहिए।

डेट पोर्टफोलियो की रणनीति

प्रतीक पोद्दार ने बताया कि उनके फंड का डेट हिस्से का लगभग पूरा पैसा निवेशित है। कैश होल्डिंग बहुत सीमित। सिर्फ हाई क्वालिटी डेट इंस्ट्रूमेंट्स पर फोकस है। AAA रेटेड बॉन्ड्स में बड़ा एक्सपोजर है। इसका ड्यूरेशन करीब 4 साल के आसपास है। बाजार गिरने पर डेट से पैसा निकालकर इक्विटी में शिफ्ट करने पर फोकस है।

रीबैलेंसिंग की स्ट्रैटेजी

रीबैलेंसिंग का सबसे बड़ा आधार है वैल्यूएशन। जहां रिस्क-रिवॉर्ड बेहतर दिखता है,वहां निवेश बढ़ाते हैं। सेक्टर और स्टॉक दोनों का लगातार रिव्यू करते रहना चाहिए। महंगे पॉकेट्स से निकलकर सस्ते अवसरों की तलाश की सलाह होगी।

बाजार की गिरावट में डेट का रोल?

डेट का अहम काम वोलैटिलिटी कम करना है। डेट रिटर्न्स को ज्यादा स्थिर बनाए रखता है। यह पश्चिम एशिया संकट और टैरिफ वॉर जैसे इवेंट्स में सुरक्षा कवच का काम करता है। बाजार गिरते ही इक्विटी वेट घटता है और डेट वेट बढ़ता है।

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बंधन एग्रेसिव हाइब्रिड फंड

बंधन एग्रेसिव हाइब्रिड फंड (Bandhan Aggressive Hybrid Fund) के बारे में बताते हुए प्रतीक पोद्दार ने कहा कि यह फंड सिर्फ हाई-रिस्क निवेशकों के लिए नहीं है। मॉडरेट रिस्क प्रोफाइल वाले भी इसे चुन सकते हैं। इसमें इक्विटी-डेट का बैलेंस कॉम्बिनेशन है। इसमें सिर्फ रिटर्न नहीं,रिस्क मैनेजमेंट पर भी फोकस है। निवेशकों को बार-बार रीबैलेंसिंग की जरूरत नहीं होती। यह 3-5 साल के नजरिया के लिए बेहतर है।

 

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Market Trend : आज के सेशन में निफ्टी के लिए 24200 के ऊपर टिकना बहुत जरूरी, इन दो शेयरों में देखने को मिल सकती है रैली

Market Trend : भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स आज बढ़त साथ खुले और निफ्टी 24250 के ऊपर ट्रेड कर रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में ईरान-संघर्ष से पहले के स्तर तक आई भारी गिरावट से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.3% और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.2% ऊपर है। निफ्टी पर बढ़त बनाने वाले प्रमुख शेयरों में इंटरग्लोब एविएशन,श्रीराम फाइनेंस,M&M,मारुति सुजुकी और आयशर मोटर्स शामिल हैं। जबकि गिरावट वाले शेयरों में हिंडाल्को,एटरनल,ONGC, टाइटन कंपनी और JSW स्टील शामिल हैं। एनर्जी,कंज्यूमर ड्यूरेबल्स,मीडिया और मेटल सेक्टर को छोड़कर बाकी सभी सेक्टर इंडेक्स बढ़त के साथ ट्रेड कर रहे हैं,जिसमें ऑटो इंडेक्स 2% से ज्यादा ऊपर है।

ऐसे में बाजार के आगे के ट्रेंड पर बात करते हुए ग्लोबल कैपिटल (Globe Capital) के गौरव शर्मा ने कहा कि कल का कारोबारी सत्र काफी इंटरेस्टिंग था। बाजार के अंदर परसों जियोपॉलिटिकल टेंशन और साउथ कोरिया से जुड़े इश्यूज की वजह से जितनी गिरावट देखने को मिली थी उसकी कल के सेशन में लगभग पूरा भरपाई हो गई। बाजार एक क्लियर यूटर्न लेकर पीक पर जाकर बंद हुआ है। यह एक बहुत अच्छा संकेत है। एक और अच्छी बात यह हुई कि कल के सेशन में आई तेजी को बैंक निफ्टी ने लीड जो वास्तव में कल के मूव के लिए एक बड़ कैटलिस्ट रहा। जिस प्रकार से बैंक निफ्टी की फॉर्मेशन बनी हुई है उसे देखते हुए लगता है कि आगे और तेजी आ सकती है।

अब निफ्टी को अपनी तेजी जारी रखने के लिए 24200 के ऊपर जाकर मजबूती दिखानी होगी। अगर ऐसा नहीं होता है तो इसको इन स्तरों के आसपास फिर से रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ेगा। आज के सेशन के लिए 24200 का लेवल बहुत अहम बन गया है। ऐसा लगता है कि आज यह लेवल पार हो सकता है क्योंकि बाजार को बैंक निफ्टी से अच्छा सपोर्ट मिल रहा है। बैंक्स की पोजीशन काफी ज्यादा स्ट्रांग नजर आ रही है। ब्रेकउ बहुत मजबूत है। कल इसने आउटपरफॉर्म भी किया है। बैंक निफ्टी में 58168 के लेवल के ऊपर की क्लोजिंग आई है। अब बैंक निफ्टी में 58,800 और उसके हायर लेवल्स की उम्मीद दिख रही है।

Market View : कच्चे तेल में नरमी और रुपये की मजबूती ने बाजार में भरा जोश, आज इन दो शेयरों में हो सकती है बंपर कमाई

गौरव शर्मा की टॉप पिक्स

गौरव शर्मा ने कहा कि उनको आज के लिए दो शेयर बहुत पसंद आ रहे है। इनमें दोनों लॉन्ग साइड से है। पहला शेयर है LTF (एल एंड टी फाइनेंस)। इसमें 297 रुपए के आसपास, 290 रुपए के स्टॉपलॉस के साथ 310/315 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है। इनका दूसरा शेयर है सीमेंट सेक्टर से श्री सीमेंट। इसमें 26105 रुपए के आसपास, 25200 रुपए के स्टॉप-लॉस के साथ 27000/27500 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है।

 

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Market View : कच्चे तेल में नरमी और रुपये की मजबूती ने बाजार में भरा जोश, आज इन दो शेयरों में हो सकती है बंपर कमाई

Market View : कच्चे तेल में तेज गिरावट और रुपये की मजबूती से बाजार में जोश देखने को मिल रहा है। निफ्टी 150 प्वाइंट से ज्यादा चढ़कर 24150 के ऊपर कारोबार कर रहा है। बैंक निफ्टी में भी 350 प्वाइंट से ज्यादा की तेजी है। मिडकैप में भी रौनक है। INDIA VIX 4% फिसलकर 13 के नीचे आय गया है। सेंसेक्स की मंथली एक्सपायरी के दिन भारतीय बाजारों के लिए अच्छे संकेत हैं। कच्चे तेल का भाव 73 डॉलर के नीचे फिसल गया है। इसका भाव US-ईरान वॉर से पहले वाले स्तर पर लौट आया है। इधर गिफ्ट-निफ्टी में हल्की बढ़त है। एशियाई बाजारों में रौनक है। निक्कई में 2.5 तो कॉस्पी में 5 फीसदी का उछाल देखने को मिल रहा है। ऐसे में आइए देखते है आज निफ्टी-बैंक निफ्टी में क्या हो कमाई की रणनीति और किन शेयरों में मिल सकता है अच्छा रिटर्न।

निफ्टी पर रणनीति

सीएनबीसी-आवाज़ के वीरेंद्र कुमार ने इंडेक्स पर आज के लिए अपनी रणनीति साझा करते हुए कहा कि निफ्टी के लिए पहला रजिस्टेंस 24123-24167 पर और बड़ा रजिस्टेंस 24223-24289/24364 पर है। इसके लिए पहला बेस 23909-23961 पर और बड़ा बेस 23789/23817-23851 पर है। जैसा कल कहा था,23755 बचते ही बाजार में रिकवरी आई। फिर रिवर्सल में ऊपर की ओर 23968-24041 हासिल हुआ। FII की कैश में बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी फ्यूचर्स में हल्के शॉर्ट्स बनें। FIIs का नेट शॉर्ट बढ़कर अब 2.29 लाख हो गया है। कच्चा तेल 73-74 डॉलर पर आ गया है। यह बाजार के लिए बड़ा पॉजिटिव है। इससे रेट सेंसिटिव शेयरों को सहारा मिल सकता है।

लॉन्ग पोजिशन में बने रहें,बेस-1 तक गिरावट में खरीदारी करें पहली रुकावट रजिस्टेंस-1 (100 DEMA)पर होगी। 100 DEMA पार होते ही 24400-24500 तक रुकावट नहीं है। इसके बाद 24400-24500 तक तेजी का रास्ता खुल सकता है। 24000-24200 पर ज्यादातर कॉल राइटर्स निकले हैं।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

वीरेंद्र कुमार ने कहा कि बैंक निफ्टी के लिए पहला रजिस्टेंस 58478-58641 पर और बड़ा रजिस्टेंस 58888-59032/59241 पर है। इसके लिए पहला बेस 57641-57810 पर और बड़ा बेस 57317-57410 पर है। कल जैसा कहा था,10 DEMA तक गिरावट आई। 57100-57000 पर शानदार खरीदारी का मौका मिला। 58000 की बड़ी बाधा पार हुई। वीकली और डेली दोनों स्तरों पर ब्रेकआउट देखने को मिला। कॉल राइटर्स अब 59000 पर शिफ्ट हो गए हैं।

क्रूड में नरमी बैंक निफ्टी के लिए बड़ा पॉजिटिव है। पहली रुकावट 58478-58641 पर है। इसके ऊपर रजिस्टेंस-2 का रास्ता खुलेगा। बेस-1 तक गिरावट में खरीदारी कारगर रहेगी।

Trading Plan : टेक्निकल इंडिकेटर्स से मिल रहे तेजी जारी रहने के संकेत, निफ्टी में जल्द ही छू सकता है 24500 का लेवल

चकाचक चार्ट वाले शेयर

चकाचक चार्ट वाले शेयर बताने के लिए हमारे साथ जुड़े हैं इक्विनॉक्स रिसर्च एंड एडवाइजर्स (EQUINOX Research & Advisors)के पंकज रांदड़। इनकी एयू बैंक के फ्यूचर्स में 1067-1068 रुपए के आसपास,1055 रुपए के स्टॉप-लॉस के साथ 1099 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है। वही,अंबुजा सीमेंट फ्यूचर्स में इनकी 428.10 रुपए के आसपास,423.40 रुपए के स्टॉप-लॉस के साथ 436.80 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है।

 

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