1 जुलाई से बदल जाएंगे ये 5 बड़े नियम; सैलरी, टैक्स, PF और क्रेडिट कार्ड यूजर्स पर पड़ेगा असर

जुलाई 2026 से कई बड़े वित्तीय बदलाव होने जा रहे हैं। इनका असर नौकरीपेशा लोगों, टैक्सपेयर्स, पेंशनर्स और क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वालों पर पड़ेगा।

इनमें EPFO की UPI से PF निकासी, ITR फाइलिंग की डेडलाइन, महंगाई भत्ता (DA) और क्रेडिट कार्ड के नए नियम शामिल हैं। अगर समय रहते इन बदलावों की जानकारी नहीं होगी, तो टैक्स फाइलिंग, बैंकिंग और दूसरे वित्तीय कामों में परेशानी हो सकती है।

ITR फाइल करने की डेडलाइन का रखें ध्यान

जुलाई में इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने वालों के लिए सबसे जरूरी काम रिटर्न दाखिल करना है। ITR-1 और ITR-2 भरने वाले टैक्सपेयर्स के लिए वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) का रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है।

वहीं, ITR-3 और ITR-4 भरने वाले ऐसे टैक्सपेयर्स, जिनका टैक्स ऑडिट नहीं होता, वे 31 अगस्त 2026 तक रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। अगर तय समय तक ITR नहीं भरा गया, तो जुर्माना लग सकता है। कुछ टैक्स बेनिफिट्स भी नहीं मिलेंगे। साथ ही कुछ तरह के नुकसान (Loss) को अगले साल कैरी फॉरवर्ड करने का फायदा भी नहीं मिलेगा।

UPI से PF निकालना हो सकता है आसान

जुलाई में EPFO 3.0 प्लेटफॉर्म लॉन्च होने की उम्मीद है। इसका मकसद EPFO की डिजिटल सेवाओं को पहले से ज्यादा आसान बनाना है।

नए सिस्टम के तहत EPF खाताधारकों को UPI के जरिए तुरंत PF निकालने की सुविधा मिल सकती है। अगर ऐसा होता है, तो PF निकालने की प्रक्रिया पहले के मुकाबले काफी तेज और आसान हो जाएगी।

DA बढ़ने का इंतजार

जुलाई में लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर महंगाई भत्ते (DA) पर भी रहेगी। सरकार हर साल जनवरी और जुलाई में DA की समीक्षा करती है।

इसलिए इस बार भी जुलाई में DA में बढ़ोतरी की घोषणा का इंतजार रहेगा। इसका फायदा केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनर्स और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों को मिल सकता है।

HDFC Bank क्रेडिट कार्ड के नियम

HDFC Bank ने अपने Regalia Gold और Diners Club Privilege क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। रिवॉर्ड पॉइंट्स से जुड़े कुछ बदलाव पहले ही लागू हो चुके हैं। अब 1 जुलाई 2026 से एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस के नए नियम लागू होंगे।

नए नियम के मुताबिक, Regalia Gold कार्डधारकों को मुफ्त घरेलू एयरपोर्ट लाउंज की सुविधा पाने के लिए पिछली तिमाही में कम से कम ₹60,000 खर्च करना होगा।

SBI Card में भी बदलेंगे नियम

SBI Card ने भी PhonePe SBI Card Purple और PhonePe SBI Card Select Black के नियमों में बदलाव किया है। नए नियम 1 जुलाई 2026 से लागू होंगे। इसके बाद हर महीने मिलने वाले रिवॉर्ड पॉइंट्स की अधिकतम सीमा तय कर दी जाएगी।

बीमा प्रीमियम पर होने वाले खर्च और दूसरी कैटेगरी के खर्च के लिए अलग-अलग लिमिट होगी। इसके अलावा ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर मिलने वाले अधिकतम रिवॉर्ड पॉइंट्स भी पहले के मुकाबले कम कर दिए गए हैं।

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Gold Silver Ratio: सोने के मुकाबले और ज्यादा गिर सकती है चांदी, चार्ट दे रहा बड़े संकेत; जानिए अब क्या करें निवेशक

Gold Silver Ratio: जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद से चांदी की कीमत में करीब 50% की गिरावट आ चुकी है। सिर्फ कीमत ही नहीं, बल्कि सोने के मुकाबले भी चांदी एक-तिहाई से ज्यादा कमजोर हो गई है। अब टेक्निकल चार्ट इशारा कर रहे हैं कि यह गिरावट अभी थमने वाली नहीं है। ऐसे में सोने के मुकाबले चांदी और कमजोर पड़ सकती है।

जनवरी के बाद क्यों बदला माहौल?

रॉयटर्स के मुताबिक, 30 जनवरी के बाद से सोना और चांदी दोनों में दबाव बढ़ने लगा। इसकी सबसे बड़ी वजह यह रही कि बाजार को लगने लगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अब ब्याज दरों में कटौती करने के मूड में नहीं है। इसके उलट, अगर महंगाई बढ़ती रही तो ब्याज दरें बढ़ाने की नौबत भी आ सकती है।

इस बीच ईरान युद्ध के बाद महंगाई को लेकर चिंताएं और बढ़ गईं। इससे निवेशकों ने ब्याज दरों को लेकर अपने अनुमान बदलने शुरू कर दिए और कीमती धातुओं में बिकवाली तेज हो गई।

चांदी पर ज्यादा दबाव क्यों आया?

सोने की तुलना में चांदी पर असर ज्यादा पड़ा। इसकी वजह सिर्फ निवेशकों की बिकवाली नहीं है। दरअसल, चांदी केवल एक कीमती धातु नहीं, बल्कि औद्योगिक धातु भी है। इसका इस्तेमाल सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और कई उद्योगों में होता है।

इसलिए जब अर्थव्यवस्था या निवेशकों के जोखिम लेने के रुख को लेकर चिंता बढ़ती है तो चांदी पर दबाव भी ज्यादा आता है। एक वजह यह भी रही कि इससे पहले चांदी में सोने के मुकाबले कहीं ज्यादा तेजी आई थी। ऐसे में मुनाफावसूली शुरू होने पर इसमें गिरावट भी ज्यादा देखने को मिली।

टेक्निकल चार्ट क्या कह रहा है?

एनालिस्टों के मुताबिक, गोल्ड टु सिल्वर रेशियो यानी सोने और चांदी के भाव का अनुपात लगातार ऊपर जा रहा है। हाल ही में यह 200-डे मूविंग एवरेज (66.76) के ऊपर निकल गया है।

टेक्निकल एनालिसिस में 200-डे मूविंग एवरेज को लंबे समय के ट्रेंड का अहम पैमाना माना जाता है। किसी भी एसेट का इसके ऊपर या नीचे जाना अक्सर बाजार की दिशा का बड़ा संकेत देता है।

अब 70 के स्तर पर रहेगी नजर

अब इस अनुपात का अगला बड़ा लक्ष्य 70 माना जा रहा है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि बाजार के लिए महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर भी है। ट्रेडर्स अक्सर ऐसे गोल आंकड़ों पर खास नजर रखते हैं।

अगर गोल्ड टु सिल्वर रेशियो मजबूती से 70 के ऊपर निकल जाता है, तो इसके बाद 6 फरवरी के 72.74 के स्तर तक पहुंचने की संभावना बढ़ जाएगी। इसके बाद अगला लक्ष्य 75.25 हो सकता है। यह अप्रैल 2025 के बाद सोने के मुकाबले चांदी की गिरावट के दायरे का लगभग आधा स्तर है।

अगर चांदी वापसी करती है तो क्या होगा?

हालांकि, चांदी के लिए उम्मीद पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अगर चांदी में फिर से खरीदारी लौटती है, तो सबसे पहले गोल्ड टु सिल्वर रेशियो को 200-डे मूविंग एवरेज (66.76) के नीचे आना होगा। इसके बाद यह 22 जून के 62.68 के स्तर तक फिसल सकता है।

अगर यह अनुपात 60.56 से भी नीचे चला जाता है, तो इसे चांदी के पक्ष में मजबूत संकेत माना जाएगा। ऐसे में बाजार में चांदी की तेजी को नई ताकत मिल सकती है।

निवेशकों के लिए क्या है इसका मतलब

अभी के संकेत बताते हैं कि निवेशकों का झुकाव चांदी की बजाय सोने की ओर ज्यादा है। जब तक गोल्ड टु सिल्वर रेशियो ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तब तक माना जाएगा कि सोना, चांदी से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।

लेकिन अगर यह अनुपात नीचे आने लगता है, तो इसका मतलब होगा कि चांदी फिर से मजबूत होने लगी है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, उस वक्त चांदी में दोबारा खरीदारी दिख सकती है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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Gold Silver rates Today: गोल्ड में गिरावट जारी, चांदी एक दिन में 5000 रुपये लुढ़की

सोने और चांदी में गिरावट का सिलसिला 25 जून को जारी रहा। दिल्ली सर्राफा बाजार में दोनों कीमती मेटल्स की कीमतों पर दबाव दिखा। सोना 2,800 रुपये गिरकर 1.45 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया। चांदी में 5000 रुपये की गिरावट आई।

चांदी एक दिन में 5000 रुपये फिसली

चांदी में 24 जून को भी बड़ी गिरावट आई थी। आज यह 5000 रुपये गिराकर 2,26,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। विदेशी बाजारों में भी गोल्ड पर दबाव दिखा। लगातार तीसरे दिन गिरावट से सोना की कीमतें सात महीनों के निचले स्तर पर आ गई है।

विदेश में सोना 4000 डॉलर से नीचे आया

स्पॉट गोल्ड 0.5 फीसदी गिरकर 4000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया। यूएस गोल्ड फ्यूचर्स में भी गिरावट दिखी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ने की उम्मीद और डॉलर में मजबूती की वजह से सोने में गिरावट आ रही है। अमेरिकी डॉलर 25 जून को 13 महीनों के सबसे हाई लेवल पर पहुंच गया।

इन दो वजहों से दबाव में आया 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका में इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी और डॉलर में मजबूती दोनों ही सोने के लिए खराब खबर हैं। डॉलर में मजबूती से दुनिया की दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। उधर, इंटरेस्ट रेट घटने के माहौल में सोने की चमक बढ़ती है। इसके उलट इंटरेस्ट बढ़ने के माहौल में सोने की चमक फीकी पड़ जाती है।

फेडरल की पॉलिसी के बाद बुलियन 6 फीसदी गिरे

पिछले हफ्ते अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की पॉलिसी आने के बाद से सोने और चांदी में 6 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। सोना नवंबर 2025 के बाद पहली बार 4000 डॉलर प्रति औंस के नीचे गया है। अगर इस साल की रिकॉर्ड ऊंचाई की बात की जाए तो सोना वहां से 28 फीसदी गिर चुका है। इस साल 29 जनवरी को सोना 5,594.82 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया था, जो इसका सबसे हाई प्राइस है।

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इस साल जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई से लगातर गिरा है सोना

इस साल ऊंचाई पर पहुंचने के बाद से सोने पर दबाव देखने को मिला है। 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान की लड़ाई शुरू होने के बाद सोने और चांदी में गिरावट देखने को मिली। उम्मीद थी कि दोनों देशों में डील होने के बाद बुलियन की चमक लौटेगी। लेकिन, अभी दोनों कीमती मेटल्स पर दबाव बना हुआ है।

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Gold Price Alert: आदित्य बिड़ला ग्रुप के ज्वैलरी ब्रांड ‘इंद्रिया’ (Indriya) के सीईओ संदीप कोहली ने सोने को लेकर एक बड़ी बात कही है। मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि गोल्ड पर कस्टम ड्यूटी बढ़ने के बाद मई महीने में बाजार थोड़ा सुस्त जरूर हुआ था, लेकिन अब ग्राहकों की डिमांड बहुत मजबूती से वापस लौट आई है।

संदीप कोहली ने कहा, ‘कस्टम ड्यूटी में 9 फीसदी की बढ़ोतरी के बाद लोग नए भाव को समझने के लिए थोड़ा रुक गए थे। पूरे ज्वैलरी उद्योग में ग्राहकों की चहल-पहल थोड़ी धीमी हो गई थी, लेकिन पिछले दो हफ्तों में मांग बहुत तेजी से बढ़ी है।’

क्यों आई थी सुस्ती और अब क्यों लौट रही है रौनक?

सरकार ने मई महीने में सोने के इंपोर्ट पर कस्टम ड्यूटी को 6 फीसदी से सीधे बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया था। सरकार का मकसद विदेशों से सोने की खरीद को कम करना और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटाना था। इस 9% की सीधी बढ़ोतरी से अचानक सोना महंगा हो गया था।

वैसे कस्टम ड्यूटी बढ़ने के बाद अब सोने की कीमतों में आ रही हालिया गिरावट भी ग्राहकों को दोबारा शोरूम तक खींच रही है। दिल्ली में 22 कैरेट सोने का भाव ₹13244 प्रति ग्राम और मुंबई में ₹13229 प्रति ग्राम पर आ गया है, जिससे खरीदारों को राहत मिली है।

‘भारतीयों के लिए सोना सिर्फ निवेश नहीं, संस्कृति है’

जब उनसे पूछा गया कि क्या कीमतें बढ़ने से सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की साख कम हुई है? तो कोहली ने साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा, ‘भारत में ज्वैलरी की मांग कभी खत्म नहीं हो सकती क्योंकि यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है। कमोडिटी की कीमतें कैसी भी हों, ग्राहक दूसरे निवेशों के मुकाबले इसके रिटर्न का आकलन जरूर करते हैं, लेकिन मांग हमेशा बनी रहती है।’ उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब ग्राहक खास डिजाइन वाले गहने ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

तेजी से पैर पसार रहा है ‘इंद्रिया’ ब्रांड

साल 2024 में लॉन्च हुआ यह ब्रांड देश का सबसे तेजी से बढ़ता रिटेल ब्रांड बन गया है। फिलहाल 40 से ज्यादा शहरों में इसके 81 स्टोर्स हैं और फाइनेंशियल ईयर 2027 में कंपनी 40 नए स्टोर्स और खोलने की योजना बना रही है। कंपनी ने अपने स्टोर्स में ‘स्पार्कलस्कोप’ नाम की एक नई तकनीक लॉन्च की है। इसके जरिए ग्राहक खुद देख सकेंगे कि उनके हीरे में कितनी चमक है।

नेचुरल डायमंड पर है फोकस

भारत के ₹8,000 करोड़ के ज्वैलरी मार्केट में डायमंड-स्टडेड गहनों की हिस्सेदारी 11 फीसदी है, लेकिन ‘इंद्रिया’ के लिए यह हिस्सेदारी दोगुनी यानी 22 फीसदी है। आजकल बाजार में लैब में तैयार होने वाले हीरे का चलन बढ़ रहा है। जैसे कि टाटा ग्रुप के ‘टाइटैन’ ने पिछले साल दिसंबर में लैब-ग्रोन डायमंड कैटेगरी में कदम रखा है। लेकिन इसके उलट, ‘इंद्रिया’ पूरी तरह से नेचुरल हीरों पर ही फोकस कर रहा है।

संदीप कोहली का मानना है कि ग्राहकों के लिए हीरे की क्वालिटी (4Cs) के साथ-साथ उसकी चमक सबसे पहले मायने रखती है, और उनकी नई तकनीक इसी पर फोकस करती है।

650cc Bikes in India in 2026: RE Twins, Kawasaki, and More

650cc bikes in India including Royal Enfield Interceptor 650, Continental GT 650, Kawasaki Ninja 650 and BSA Gold Star 650

As the mid-capacity motorcycle space continues to evolve in India, the 650cc segment has grown into a highly competitive sweet spot. Moving up from the 300cc-400cc class brings a significant bump in performance, but the choices on offer vary drastically in engine architecture, styling, and intended usage. From simple, retro parallel-twins to fully faired sportbikes, the options available cater to very different riding requirements.

Here are five standout motorcycles in the 650cc segment, each bringing something different to the table for enthusiasts and everyday riders alike.

All prices are ex-showroom, Delhi.

Royal Enfield Interceptor 650

Price: Rs. 3.35 Lakh – Rs. 3.67 Lakh

The Interceptor 650 remains one of the most straightforward motorcycles in this segment. It is powered by Royal Enfield’s 648cc parallel-twin engine that produces 47hp, paired with a 6-speed gearbox. The engine’s strong mid-range and approachable nature have been key reasons behind the bike’s popularity.  It is offered in six colour options with chrome or blacked-out finishes and wire-spoke or alloy wheels, depending on the paint scheme you choose.

The Interceptor combines classic roadster proportions with a relaxed riding position, and its wide handlebars, as well as neutral ergonomics, make it equally comfortable in city traffic and on long highway rides. At 218kg kerb, it is not the lightest motorcycle here, but its predictable handling and friendly nature make it one of the easiest large-capacity motorcycles to live with. For more options from the brand, explore all Royal Enfield bikes in India.

Royal Enfield Continental GT 650

Price: Rs. 3.54 Lakh – Rs. 3.82 Lakh

The Continental GT 650 shares its mechanical foundation with the Interceptor 650 – the same 648cc, air/oil-cooled parallel twin making 47hp – but presents it in a very different package. This is a neo-retro cafe racer, and the ergonomics reflect that: the clip-on handlebars, rear-set footpegs, and the longer, lower stance place the rider in a more committed forward lean compared to the upright Interceptor. For buyers already considering the Interceptor 650, the Continental GT 650 is worth evaluating if a more sporty riding position appeals.

Kawasaki Ninja 650

Price: Rs 7.91 Lakh

The Ninja 650 is the most performance-oriented motorcycle on this list by a considerable margin. It is powered by a 649cc, liquid-cooled, parallel-twin engine producing 68hp – figures that put it in a different performance bracket compared to everything else here. The motor is paired with a 6-speed gearbox, and the bike has a claimed top speed of 210kph.

It is available in a single variant and one colour – Lime Green. At 196kg, it is substantially lighter than the retro roadsters in this displacement bracket, giving it a much higher power-to-weight ratio. Looking for more performance-focused motorcycles? Discover all Kawasaki bikes in India.

BSA Gold Star 650

Price: Rs 3.35 Lakh – Rs 3.60 Lakh

The Gold Star 650 is the most affordable motorcycle on this list and arguably the most distinctive. Unlike every other bike here, it uses a 652cc, liquid-cooled, single-cylinder engine – a configuration chosen deliberately to evoke the BSA Gold Stars of the 1950s and 60s, when large singles dominated the British motorcycle landscape. The motor produces 45hp, which arrives at a notably low point in the rev range, giving the bike a relaxed, torque-led character well suited to unhurried riding.

At 213kg, it is heavy for a single, and the weight does make itself felt at low speeds and in tight spaces. The seat height of 782mm is reasonably low and will suit a wide range of riders. Equipment includes dual-channel ABS, a slipper clutch, USB Type-A and Type-C charging ports, strong Brembo brakes and Pirelli Phantom tyres. The instrumentation is a dual-pod analogue setup with small LCD displays – appropriately retro in its presentation, although reading the information displayed on the digital insets can be tough. For more options from the brand, explore all BSA bikes in India.

अब गोल्ड इंपोर्ट का झंझट होगा कम! भारत की पहली प्राइवेट गोल्ड माइन चालू, अब जमीन से निकलेगा टन भर सोना

India’s First Private Gold Mine: भारतीय माइनिंग सेक्टर में एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। आजादी के बाद देश में पहली बार किसी निजी कंपनी के स्वामित्व वाली सोने की खदान में कमर्शियल यानी व्यावसायिक कामकाज पूरी तरह शुरू हो गया है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कुरनूल जिले के जोंनागिरी में इस महत्वाकांक्षी गोल्ड माइनिंग और प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट का औपचारिक उद्घाटन किया।

इस खास मौके पर मुख्यमंत्री ने न सिर्फ पहली यूनिट की शुरुआत की, बल्कि इस प्रोजेक्ट के दूसरे फेज की आधारशिला भी रखी। इस खदान के शुरू होने से आंध्र प्रदेश और देश की अर्थव्यवस्था को क्या फायदा होगा और यहां से सालाना कितना सोना निकलेगा, आइए इसकी पूरी डिटेल जानते हैं।

405 करोड़ का होगा निवेश

इस ऐतिहासिक गोल्ड माइन को शुरू करने के लिए बड़े पैमाने पर तैयारी और निवेश किया गया है। यह प्रोजेक्ट कुल 405 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। इसे जियोमैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (GMSI) द्वारा डेक्कन गोल्ड माइंस लिमिटेड की साझेदारी में चलाया जा रहा है।

इस ऐतिहासिक शुरुआत को देखते हुए आंध्र प्रदेश कैबिनेट ने उद्घाटन से ठीक पहले ‘जोंनागिरी’ गांव का नाम बदलकर ‘स्वर्णगिरी’ करने को मंजूरी दे दी है।

राज्य सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए कुल 1500 एकड़ जमीन अलॉट की है, जिसके पहले फेज में 600 एकड़ पर माइनिंग शुरू हो चुकी है। खदान के कामकाज के लिए ‘हंद्री नीवा सुजला स्रवंती’ योजना के जरिए 18 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन से पानी की सप्लाई की जा रही है।

कितना निकलेगा सोना? समझिए इसका पूरा गणित

इस खदान से सोने के उत्पादन को लेकर चरणबद्ध तरीके से लक्ष्य तय किए गए हैं:

पहले साल का लक्ष्य (2026-27): कमर्शियल ऑपरेशन के पहले पूरे साल के दौरान यहां से लगभग 400 किलोग्राम सोना निकालने का टारगेट रखा गया है।

आने वाले सालों का प्लान: इसके बाद सालाना उत्पादन को बढ़ाकर 1000 किलो तक ले जाया जाएगा।

दूसरे फेज के बाद धमाका: जिस दूसरी प्रोसेसिंग यूनिट का शिलान्यास किया गया है, उसके पूरी तरह चालू होने के बाद यहाँ से सालाना कुल उत्पादन क्षमता लगभग 2000 किलो सोने तक पहुंच सकती है।

किसे और क्या होगा फायदा?

इस प्राइवेट गोल्ड माइन के शुरू होने से स्थानीय लोगों से लेकर राज्य सरकार तक, सबको बड़ा फायदा होने वाला है:

स्थानीय लोगों को रोजगार: इस माइनिंग प्रोजेक्ट के जरिए सीधे तौर पर लगभग 700 लोगों को रोजगार मिलेगा। सबसे खास बात यह है कि इस वर्कफोर्स (कार्यबल) का लगभग 80% हिस्सा स्थानीय समुदायों से लिया जाएगा।

आंध्र सरकार की बंपर कमाई: सोने के उत्पादन से राज्य सरकार की तिजोरी में रॉयल्टी और वैधानिक शुल्कों के जरिए भारी राजस्व आएगा। 400 किलोग्राम के सालाना उत्पादन पर सरकार को करीब 57 करोड़ रुपये की कमाई होगी। वहीं, जब उत्पादन बढ़कर 900 किलोग्राम सालाना पहुंचेगा, तो यह कमाई 144 करोड़ रुपये प्रति वर्ष हो जाएगी।

क्या होती है प्राइमरी गोल्ड माइन?

यह देश की इकलौती ऑपरेशनल प्राइवेट ‘प्राइमरी गोल्ड माइन’ है। प्राइमरी गोल्ड माइन एक ऐसी ‘हार्ड-रॉक’ माइनिंग प्रक्रिया होती है, जिसमें सोना सीधे उसके मूल स्रोत यानी जमीन के भीतर चट्टानों और क्वार्ट्ज नसों से निकाला जाता है। माइनर्स पहले इन ठोस चट्टानों में ड्रिलिंग और ब्लास्टिंग करते हैं, फिर इस अयस्क को सतह पर लाकर केमिकल और फिजिकल तरीकों से प्रोसेस करके शुद्ध सोना अलग करते हैं।

क्या यह भारत के लिए एक नए ‘कोलार’ (KGF) की शुरुआत है?

भूवैज्ञानिकों का मानना है कि कुरनूल का यह प्रोजेक्ट कोई इकलौता खजाना नहीं है। यह पूरा क्षेत्र एक बड़े खनिज बेल्ट के अंतर्गत आता है, जहां सोने का भारी भंडार होने की उम्मीद है। इसके अलावा अनंतपुर जिले के बोक्समपल्ली, रामागिरी और जवकूला जैसे कई अन्य साइट्स पर भी खोज जारी है।

इन प्राचीन भूवैज्ञानिक संरचनाओं की तुलना कर्नाटक की ऐतिहासिक ‘कोलार’ और ‘हुट्टी’ बेल्ट से की जा रही है, जो कभी दुनिया के सबसे अमीर गोल्ड फील्ड्स में गिने जाते थे। अगर आंध्र प्रदेश के इन क्षेत्रों से भी कर्नाटक जैसे नतीजे मिलते हैं, तो स्वर्णगिरी की यह शुरुआत राज्य को 2047 तक ‘स्वर्णांध्र प्रदेश’ बनाने के दृष्टिकोण में गेम-चेंजर साबित होगी।

Silver Demand: सोना महंगा होने से चांदी खरीद रहे ग्राहक? इंडस्ट्री बोली- त्योहार और शादी सीजन में बढ़ सकती है डिमांड

Silver Demand: चांदी की मांग में आने वाले महीनों में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। Silver Emporium के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल मेहता का कहना है कि अगस्त से अक्टूबर के बीच आने वाला त्योहार और शादी का सीजन देश की सालाना चांदी खरीद का करीब आधा हिस्सा तय करता है।

उनके मुताबिक, पिछले कुछ समय की कमजोरी के बाद मांग में सुधार के संकेत मिलने लगे हैं। हालांकि यह रिकवरी कितनी मजबूत होगी, यह काफी हद तक चांदी की कीमतों में स्थिरता पर निर्भर करेगा। हाल के महीनों में चांदी की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव रहा है, जिसकी वजह से कई ग्राहक नई खरीदारी को लेकर सतर्क बने हुए हैं।

बढ़ी है रिटेल मांग

हाल के हफ्तों में चांदी के डिनर सेट, गिफ्टिंग आइटम और शादी-ब्याह से जुड़े प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ी है। हालांकि इस खरीदारी का बड़ा हिस्सा पूरी तरह नई मांग नहीं है। कई ग्राहक अपनी पुरानी चांदी देकर नए सामान खरीद रहे हैं।

मेहता के मुताबिक, पिछले दो महीनों की तुलना में बिक्री की मात्रा करीब 30% बढ़ी है। इसके बावजूद कुल कारोबार अभी भी पिछले साल के मुकाबले 25-30% कम बना हुआ है।

महंगे सोने से चांदी को फायदा

सोने की रिकॉर्ड ऊंची कीमतों का फायदा अब चांदी को मिलता दिख रहा है। कई ग्राहक सोने की बजाय चांदी के गहनों की तरफ रुख कर रहे हैं क्योंकि यह सस्ता विकल्प है। यही वजह है कि कई गोल्ड ज्वेलर्स भी अब चांदी के कारोबार में तेजी से विस्तार कर रहे हैं।

राहुल मेहता के मुताबिक, पिछले छह महीनों में नए सिल्वर स्टोर खोलने की दिलचस्पी 300% से 400% तक बढ़ी है। इनमें से कई नए स्टोर ऐसे ग्राहकों को ध्यान में रखकर खोले जा रहे हैं, जो महंगे सोने की वजह से चांदी की ओर शिफ्ट हो सकते हैं।

सप्लाई को लेकर चिंता नहीं

चांदी की सप्लाई को लेकर फिलहाल कोई बड़ी चिंता नहीं है। राहुल मेहता का कहना है कि आयात पर कुछ प्रतिबंधों के बावजूद बाजार में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

इसके अलावा रिसाइक्लिंग भी बढ़ी है। बड़ी संख्या में ग्राहक पुरानी चांदी एक्सचेंज कर रहे हैं, जिससे बाजार में सप्लाई बनी हुई है। उनके मुताबिक, बाजार में चांदी की कोई कमी नहीं है और जरूरत हिसाब से कच्चा माल मौजूद है।

निवेशकों का रुख अभी भी कमजोर

हालांकि निवेशकों की तरफ से मांग अभी कमजोर बनी हुई है। यही वजह है कि बाजार में प्रीमियम में कोई बड़ी तेजी नहीं दिख रही है।

कई निवेशक अभी भी चांदी की कीमतों की दिशा को लेकर असमंजस में हैं। वे कीमतों में ज्यादा स्थिरता आने का इंतजार कर रहे हैं। इसके बाद ही निवेश मांग में मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

Gold Silver Price Outlook: ‘गिरावट पर खरीदें सोना-चांदी, नया रिकॉर्ड हाई कर रहा इंतजार’, स्विस एशिया कैपिटल की सलाह

Gold Silver Price Outlook: ‘गिरावट पर खरीदें सोना-चांदी, नया रिकॉर्ड हाई कर रहा इंतजार’, स्विस एशिया कैपिटल की सलाह

Gold Silver Price Outlook: हाल में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई है। इससे बहुत से निवेशक घबरा गए हैं। हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि इसे खतरे की घंटी नहीं, बल्कि खरीदारी का मौका मानना चाहिए। Swiss Asia Capital के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर (CIO) जुएर्ग कीनर का मानना है कि मौजूदा कमजोरी के बावजूद दोनों कीमती धातुएं आगे चलकर नए रिकॉर्ड स्तर छू सकती हैं।

पिछले कुछ समय से सोना और चांदी दबाव में रहे हैं। इसकी बड़ी वजह ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका और वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद है। हालांकि कीनर का कहना है कि लॉन्ग टर्म में सोना और चांदी में तेजी आने के कई कारण हैं। उन्होंने कहा, ‘आमतौर पर ऐसी गिरावट खरीदारी का अच्छा मौका होती है। हम हमेशा गिरावट के दौरान धीरे-धीरे खरीदारी बढ़ाने में भरोसा रखते हैं।’

चांदी की सप्लाई अब भी तंग

कीनर के मुताबिक, कीमती धातुओं का भंडार अभी भी काफी कम है। खासकर चांदी में सप्लाई की समस्या बनी हुई है। उन्होंने कहा कि एशियाई और पश्चिमी बाजारों के बीच कीमतों का बड़ा अंतर इस बात का संकेत है कि फिजिकल सप्लाई अभी भी तंग बनी हुई है।

उनका कहना है कि बाजार फिलहाल ओवरसोल्ड स्थिति में है और सप्लाई भी सीमित है। ऐसे में कीमतों को लंबे समय तक नीचे बनाए रखना आसान नहीं होगा।

महंगाई फिर बन सकती है बड़ा फैक्टर

हाल के महीनों में निवेशकों का ध्यान ब्याज दरों पर ज्यादा रहा है। लेकिन कीनर का मानना है कि आने वाले समय में महंगाई फिर से बाजार का बड़ा मुद्दा बन सकती है। अगर महंगाई उम्मीद से ज्यादा बढ़ती है, तो सोना और चांदी जैसे ऐसे एसेट्स की मांग बढ़ सकती है। इन पर भले ही ब्याज नहीं मिलता, लेकिन इन्हें सुरक्षित निवेश माना जाता है।

उनका यह भी मानना है कि दुनिया भर की सरकारें और केंद्रीय बैंक कमजोर आर्थिक वृद्धि से जूझ रही अर्थव्यवस्थाओं को सहारा देते रहेंगे। इससे भी कीमती धातुओं को फायदा मिल सकता है। कीनर ने कहा कि यही अगली बड़ी तेजी की वजह बन सकती है और कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर तक जा सकती हैं।

माइनिंग-इंडस्ट्रियल मेटल्स पर भी बुलिश

कीनर सिर्फ सोने-चांदी पर ही नहीं, बल्कि माइनिंग कंपनियों के शेयरों को लेकर भी सकारात्मक हैं। उनका कहना है कि मजबूत कैश फ्लो होने के बावजूद कई माइनिंग शेयरों में बड़ी गिरावट आई है, जिससे निवेशकों के लिए अवसर बने हैं।

उन्होंने कॉपर, एल्युमीनियम और जिंक जैसी इंडस्ट्रियल मेटल्स पर भी भरोसा जताया। उनके मुताबिक, इन धातुओं में भी सप्लाई और मांग का संतुलन बिगड़ा हुआ है और भंडार कम हैं। इसलिए बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल कम नजर आती है।

कच्चे तेल पर क्या है राय?

कीनर का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों को 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास मजबूत सपोर्ट मिल रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से बाजार को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन वैश्विक भंडार अभी भी कम हैं।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इन भंडारों को फिर से भरने की जरूरत होगी, जिससे तेल की कीमतों को सहारा मिल सकता है।

Gold-Silver Ratio: गोल्ड-सिल्वर रेशियो बढ़ा, क्या अब सोने में निवेश करना चाहिए? जानिए एक्सपर्ट से

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Gold-Silver Ratio: गोल्ड-सिल्वर रेशियो बढ़ा, क्या अब सोने में निवेश करना चाहिए? जानिए एक्सपर्ट से

Gold-Silver Ratio: पिछले कुछ हफ्तों में गोल्ड-सिल्वर रेशियो (Gold-Silver Ratio या GSR) तेजी से बढ़ा है। इसका मतलब है कि निवेशक चांदी की तुलना में सोने को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लगातार बनी महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दर बढ़ने की आशंका ने चांदी पर ज्यादा दबाव डाला है।

Augmont Research के मुताबिक, जून में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,000 से 4,060 डॉलर प्रति औंस के दायरे में रहा। वहीं चांदी 60-61 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करती रही। इससे गोल्ड-सिल्वर रेशियो बढ़कर 67:1 तक पहुंच गया।

यह मई में 55:1 था, जबकि जनवरी में यह करीब 50:1 के निचले स्तर पर था। यानी कुछ ही महीनों में यह रेशियो 11 से 17 अंक तक बढ़ गया है। आसान शब्दों में कहें तो अब 1 औंस सोना खरीदने के लिए करीब 66-67 औंस चांदी की जरूरत पड़ रही है।

चांदी क्यों पिछड़ रही है?

Augmont की रिसर्च हेड रेनिशा चैनानी के मुताबिक, जून में फेडरल रिजर्व के संकेतों ने बाजार का रुख बदल दिया। अब दिसंबर तक ब्याज दर बढ़ने की संभावना करीब 86% मानी जा रही है। साथ ही महंगाई दर 4.2% बनी हुई है।

इन वजहों से चांदी की निवेश मांग कमजोर हुई है और हाल के हफ्तों में उसका प्रदर्शन सोने से कमजोर रहा है।

अब क्या करें निवेशक?

एनालिस्टों का मानना है कि मौजूदा कीमतों पर नए रिटेल इनवेस्टर्स के लिए 70:30 का गोल्ड-सिल्वर पोर्टफोलियो बेहतर हो सकता है। फिलहाल सोना करीब ₹1.45 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी करीब ₹2.25 लाख प्रति किलो के आसपास है। पिछले 50 वर्षों में गोल्ड-सिल्वर रेशियो का औसत 65:1 से 70:1 के बीच रहा है। इसलिए मौजूदा स्तर पर चांदी को बहुत सस्ता नहीं माना जा रहा।

रेनिशा चैनानी के मुताबिक, अगर यह रेशियो 75-80 तक पहुंचता है तो निवेशक चांदी में हिस्सेदारी बढ़ाकर 60:40 या 55:45 का अनुपात अपना सकते हैं। वहीं अगर रेशियो 60 से नीचे आ जाता है तो फिर पोर्टफोलियो को दोबारा सोना-केंद्रित बनाना बेहतर होगा।

सोना और चांदी में निवेश कैसे करें?

निवेशक Gold ETF और Silver ETF के जरिए निवेश कर सकते हैं। अगर मकसद सिर्फ कीमतों में बढ़त का फायदा उठाना है, तो ETF अच्छा विकल्प हो सकता है।

वहीं भविष्य में वास्तविक डिलीवरी या उपयोग के लिए डिजिटल गोल्ड और डिजिटल सिल्वर पर भी विचार किया जा सकता है।

आगे क्या रह सकता है रुख?

सोने को आमतौर पर सुरक्षित निवेश माना जाता है। खासकर तब, जब अमेरिकी डॉलर मजबूत हो और फेडरल रिजर्व सख्त मौद्रिक नीति अपना रहा हो।

रेनिशा चैनानी का अनुमान है कि निकट अवधि में गोल्ड-सिल्वर रेशियो स्थिर रह सकता है या थोड़ा और बढ़ सकता है। हालांकि 2026 में चांदी की सप्लाई में लगातार छठे साल कमी रहने का अनुमान है। करीब 4.63 करोड़ औंस की सप्लाई कमी चांदी को मजबूत आधार दे सकती है।

अगर आगे चलकर फेड ब्याज दरों में नरमी दिखाता है, डॉलर कमजोर पड़ता है या सोलर और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर से चांदी की मांग बढ़ती है, तो साल के अंत तक गोल्ड-सिल्वर रेशियो घटकर 55-60 तक आ सकता है।

गोल्ड-सिल्वर रेशियो कैसे निकालें?

24 जून 2026 को घरेलू बाजार में सोना ₹1,43,399 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,26,891 प्रति किलो थी। गोल्ड-सिल्वर रेशियो निकालने का फॉर्मूला है:

10 ग्राम सोने की कीमत ÷ 10 ग्राम चांदी की कीमत

इस हिसाब से:

₹1,43,399 ÷ ₹2,268.91 = 63.2

यानी फिलहाल 1 ग्राम सोना खरीदने के लिए करीब 63.2 ग्राम चांदी की जरूरत है। सिर्फ 40 दिनों में यह रेशियो 7.58 अंक बढ़ चुका है।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver Rates Today: सोने की चमक पड़ी फीकी, चांदी भी 4000 रुपये लुढ़की

दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने और चांदी में 24 जून को गिरावट आई। सोना 1,200 रुपये गिरकर 1.48 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया। चांदी 4000 रुपये फिसली। सोने में गिरावट की वजह डॉलर में मजबूती और शेयर बाजारों में बेहतर हो रहा सेंटिमेंट है। ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, सिल्वर में लगातार दूसरे दिन कमजोरी दिखी। यह 4000 रुपये गिरकर 2,31,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ।

चांदी का भाव अप्रैल के शुरुआती लेवल पर पहुंचा

एनालिस्ट्स का कहना है कि इस गिरावट से चांदी की कीमतें अप्रैल की शुरुआत के अपने लेवल के करीब पहुंच गई हैं। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के कमोडिटीज के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि सोने में कमजोरी बुधवार को भी जारी रही। इसकी वजह अमेरिकी डॉलर में मजबूती है। अमेरिका में मॉनेटरी पॉलिसी सख्त होने की उम्मीद जताई जा रही है। इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में बड़ी गिरावट 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में नरमी देखने को मिली। यह 1.3 फीसदी यानी 52 डॉलर गिरकर 4,050 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। अमेरिका में डॉलर इंडेक्स 101 लेवल के पार पहुंच गया है। डॉलर में मजबूती आने पर सोने की चमक फीकी पड़ जाती है। इसकी वजह यह है कि डॉलर मजबूत होने से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। डॉलर इंडेक्स मई 2025 के बाद अपने सबसे हाई लेवल पर पहुंच गया है।

सोने पर शॉर्ट टर्म में दबाव जारी रह सकता है

कमोडिटी के जानकारों का मानना है कि सोने पर अभी दबाव दिख सकता है। अगर बीच में कीमतों में तेजी आती है तो मुनाफावसूली की वजह से वह जारी नहीं रह पाएगी। हालांकि, अमेरिका-ईरान में डील की खबर से बुलियन में रिकवरी दिख सकती है। फरवरी के अंत में अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव देखने को मिला था।

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फाइनेंशियल मार्केट्स में दिख रहा एडजस्टमेंट

एलकेपी सिक्योरिटीज के वीपी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी ने कहा कि जियोपॉलिटिकल टेंशन कम होने से फाइनेंशियल मार्केट्स में लिक्विडिटी आधारित एडजस्टमेंट दिख रहा है। ग्लोबल एआई और टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में मुनाफावसूली देखने को मिली है। उधर, फेडरल रिजर्व का रुख भी बदला दिख रहा है।