Lawrence Bishnoi: क्या गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को FBI को सौंपेगा भारत? निज्जर हत्याकांड मामले में अमेरिका ने की प्रत्यर्पण की मांग

Lawrence Bishnoi Extradition: कनाडा के खालिस्तानी अलगाववादी एवं आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या समेत कई अपराधों में शामिल गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई पर आरोप लगाने के कुछ दिनों बाद यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस (DoJ) ने कंफर्म किया है कि वह भारत से उसके प्रत्यर्पण यानी एक्सट्रैडिशन की मांग करेगा। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने कंफर्म किया है कि वह जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के भारत से एक्सट्रैडिशन की कोशिश करना चाहता है।

कुछ दिन पहले ही एक फेडरल चार्जशीट में उस पर कनाडा के खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या समेत कई अपराधों की साजिश रचने का आरोप लगाया गया था। रिपोर्ट में कैलिफोर्निया के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के US अटॉर्नी ऑफिस में पब्लिक अफेयर्स ऑफिसर सियारन मैकएवॉय के हवाले से कहा गया है कि बिश्नोई को अमेरिका लाने की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। हालांकि इसमें समय लगने की उम्मीद है।

मैकएवॉय ने एक ईमेल में कहा, “बिश्नोई खुद भारत में जेल में बंद है। हम उसे अमेरिका में एक्सट्रैडिशन करने की कोशिश करना चाहते हैं। (एक्सट्रैडिशन एक लंबी कानूनी प्रक्रिया है और इसे पूरा होने में अक्सर सालों लग जाते हैं)।” बिश्नोई 2015 से भारत में जेल में बंद है। अभी वहगुजरात की एक जेल में बंद है। इस सप्ताह की शुरुआत में लॉस एंजिल्स में खुले एक फेडरल चार्जशीट में नामजद मुख्य आरोपियों में से एक था।

चार्जशीट के मुताबिक, बिश्नोई ने हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आदेश दिया था, जो एक कनाडाई नागरिक था। उसकी 18 जून, 2023 को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में एक गुरुद्वारे के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मैकएवॉय ने साफ किया कि बिश्नोई गैंग के सदस्यों को अभी तक US कोर्ट के सामने पेश नहीं किया गया है क्योंकि वे अभी उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं हैं।

बिश्नोई और उसके करीबी साथी सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ के अलावा चार्जशीट में जग्गू भगवानपुरिया और कनाडा में रहने वाले रविंदर सिंह ढांडा का भी नाम कथित गैंग लीडर के तौर पर है। मैकएवॉय ने कहा कि ढांडा गैंग के सदस्यों का ट्रायल लॉस एंजिल्स की एक कोर्ट में 31 अगस्त को तय किया गया है। जबकि भगवानपुरिया गैंग के सदस्यों से जुड़ी कार्यवाही 1 सितंबर को लिस्ट की गई है।

आरोपित किए जाने के बाद फिर सुर्खियों में लारेंस बिश्नोई

हरदीप सिंह निज्जर की हत्या करने का कथित तौर पर आदेश देने के मामले में अमेरिका द्वारा आरोपित किया गया लॉरेंस बिश्नोई लंबे समय से भारतीय एजेंसियों की जांच का सामना कर रहा है। गुजरात में उच्च सुरक्षा वाली जेल में शिफ्ट होने से पहले 33 वर्षीय बिश्नोई को मकोका के तहत एक मामले के सिलसिले में राष्ट्रीय राजधानी लाए जाने के बाद दिल्ली की तिहाड़ जेल में रखा गया था।

साल 2023 में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत दायर एक आरोप पत्र में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने आरोप लगाया कि बिश्नोई के गिरोह के कई राज्यों में लगभग 700 गुर्गे हैं। उन्होंने विदेशों में भी संबंध बनाए रखे हैं।

कौन है लारेंस बिश्नोई?

पंजाब विश्वविद्यालय से कानून की ग्रेजुएट डिग्री हासिल करने वाला बिश्नोई हत्या के प्रयास, हमले, लूट और रंगदारी के कई मामलों का सामना कर रहा है। वह विश्वविद्यालय परिसर की राजनीति के माध्यम से अपराध की दुनिया में आया। जांचकर्ताओं का आरोप है कि बाद में उसने अपने गिरोह का विस्तार सुपारी लेकर हत्या करने, हथियारों की तस्करी, ड्रग्स की तस्करी और रंगदारी वसूलने में किया। उसने एन्क्रिप्टेड और इंटरनेट-आधारित संचार के माध्यम से जेल से सहयोगियों को निर्देशित करना जारी रखा।

अमेरिका ने बिश्नोई और उसके करीबी सहयोगी, सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ पर कनाडा में निज्जर की हत्या का आदेश देने का आरोप लगाया है, जिससे दिल्ली से जुड़े अंतरराष्ट्रीय अपराध गिरोह पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित हो गया है। जांचकर्ताओं का कहना है कि बिश्नोई जेल में बंद रहने के बावजूद सक्रिय है।

निज्जर हत्याकांड में भी आया नाम

अमेरिकी शहर लॉस एंजिलिस की एक संघीय अदालत में मंगलवार को पेश आरोपपत्र के अनुसार, लॉरेंस बिश्नोई ने निज्जर (45) की हत्या की साजिश रची थी। अदालत के दस्तावेजों में निज्जर का उल्लेख ‘एच एस एन’ के रूप में किया गया है।

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‘ऑपरेशन हार्डबॉल’ के तहत इन आरोपों की घोषणा की गई। यह अमेरिका, कनाडा और यूरोप की कानून प्रवर्तन एजेंसियों की समन्वित कार्रवाई है, जिसके तहत भारत स्थित तीन संगठित अपराध गिरोहों से जुड़े 24 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। अभियोग में बराड़ का भी नाम है, जो अब भी फरार है।

‘आमिर खान Love Jihad के ब्रांड एंबेसडर बन रहे हैं’; अभिनेता की तीसरी शादी पर भड़के महाराष्ट्र के मंत्री

Nitesh Rane on Aamir Khan: महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सीनियर नेता नितेश राणे ने बॉलीवुड सुपरस्टार आमिर खान की तीसरी शादी को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह तय करना उनका काम नहीं है कि किसकी शादी में कौन जाए। लेकिन अब समय आ गया है कि हिंदू युवा, जो आमिर खान को अपना आदर्श मानते हैं, इस पर विचार करें कि उन्हें उनसे कैसी प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि आमिर खान ‘लव जिहाद’ के ब्रांड एंबेसडर बनते जा रहे हैं।

न्यूज एजेंसी IANS के मुताबिक, शिरडी में आमिर खान की तीसरी शादी पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में मंत्री नितेश राणे ने कहा, “यह तय करना मेरा काम नहीं है कि कौन किसकी शादी में शामिल होगा। लेकिन, अब समय आ गया है कि हिंदू युवा, जो उन्हें एक सेलिब्रिटी मानते हैं, इस पर सोचें कि उन्हें इससे किस तरह की प्रेरणा लेनी चाहिए। मेरा मानना ​​है कि जब सेलिब्रिटी अपनी निजी जिंदगी के बारे में ऐसे फैसले लेते हैं, तो हिंदू समाज को इस पर सोचना चाहिए। आमिर खान असल में ‘लव जिहाद’ के ब्रांड एंबेसडर बन रहे हैं।”

राणे के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है। हालांकि, आमिर खान की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मंत्री का कहना है कि ‘लव जिहाद’ संबंधी आरोप उनका व्यक्तिगत राजनीतिक बयान है। आमिर खान ने इसी महीने गौरी स्प्रैट के साथ तीसरी शादी की थी। रीना दत्ता और किरण राव के बाद यह आमिर खान की तीसरी शादी है।

आमिर खान ने 1986 में रीना दत्ता से शादी की थी। दोनों के दो बच्चे अभिनेता जुनैद खान और इरा खान हैं। साल 2002 में दोनों अलग हो गए। इसके बाद आमिर ने 2005 में किरण राव से दूसरी शादी की। इस शादी से उनके बेटे आजाद राव खान का जन्म सरोगेसी के जरिए हुआ। हालांकि, साल 2021 में दोनों ने अलग होने का ऐलान कर दिया। अब आमिर ने तीसरी शादी की है।

मुस्लिम विरोधी बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं नितेश राणे

नितेश राणे पहले भी कई ऐसे सार्वजनिक बयान दे चुके हैं जिन्हें आलोचकों, विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों ने मुस्लिम विरोधी या सांप्रदायिक बताया है। इनमें मुस्लिम समुदाय, मस्जिदों, हलाल, लव जिहाद और धार्मिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर उनकी तीखी टिप्पणियां शामिल रही हैं। दूसरी ओर, राणे और उनके समर्थकों का कहना है कि वे हिंदू हितों की बात करते हैं और उनके बयान कानून या सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर आधारित हैं।

Love Jihad क्या होता है?

‘लव जिहाद’ एक बेहद संवेदनशील और विवादित शब्द है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से भारत में राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी बहसों में किया जाता है। इस शब्द का उपयोग उन मामलों को परिभाषित करने के लिए किया जाता है, जहां कथित तौर पर कोई मुस्लिम पुरुष किसी गैर-मुस्लिम महिला (आमतौर पर हिंदू या ईसाई) को शादी के माध्यम से इस्लाम में परिवर्तित करने के इरादे से प्रेम जाल में फंसाता है।

इस विषय से जुड़े विभिन्न दृष्टिकोण और मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:-

1. आरोप और चिंताएं (दावा करने वालों का पक्ष)

धर्मांतरण का आरोप: दक्षिणपंथी संगठनों और कुछ सामाजिक समूहों का आरोप है कि यह एक संगठित प्रयास है, जिसके तहत पहचान छिपाकर (जैसे गलत नाम बताकर) या शादी का झांसा देकर महिलाओं का जबरन या धोखाधड़ी से धर्म परिवर्तन कराया जाता है।

पारिवारिक और सांस्कृतिक चिंताएं: इन समूहों का मानना है कि इसके पीछे जनसांख्यिकीय (demographic) बदलाव या सांस्कृतिक पहचान को प्रभावित करने का इरादा होता है।

2. आलोचकों और कानूनी विशेषज्ञों का दृष्टिकोण

आरोप निराधार: आलोचकों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और कई विपक्षी दलों का कहना है कि ‘लव जिहाद’ जैसी कोई संगठित साजिश नहीं है। उनका मानना है कि इस शब्द का इस्तेमाल सांप्रदायिक विभाजन पैदा करने और वयस्कों की अपनी मर्जी से की जाने वाली अंतरधार्मिक (interfaith) शादियों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है।

व्यक्तिगत स्वतंत्रता: आलोचकों का तर्क है कि भारतीय संविधान के आर्टिकल 21 के तहत हर वयस्क नागरिक को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने का अधिकार है, चाहे वह किसी भी धर्म का हो।

3. अदालतों और जांच एजेंसियों का रुख

एनआईए (NIA) और पुलिस जांच: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और विभिन्न राज्यों की पुलिस ने कुछ मामलों की जांच की है। जांच रिपोर्टों के अनुसार, व्यक्तिगत स्तर पर धोखाधड़ी या जबरन धर्मांतरण के मामले तो सामने आए हैं। लेकिन किसी केंद्रीयकृत या संगठित ‘लव जिहाद’ नेटवर्क या साजिश के पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं।

संसद में बयान: भारत सरकार ने भी संसद में एक लिखित जवाब में स्पष्ट किया था कि मौजूदा कानूनों में ‘लव जिहाद’ जैसी कोई परिभाषा नहीं है और केंद्रीय एजेंसियों द्वारा ऐसा कोई संगठित मामला दर्ज नहीं किया गया है।

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4. राज्यों के कानून

पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तराखंड जैसे कई राज्यों ने ‘गैर-कानूनी धर्मांतरण निषेध कानून’ (Anti-Conversion Laws) पारित किए हैं। हालांकि, इन कानूनों में सीधे तौर पर ‘लव जिहाद’ शब्द का इस्तेमाल नहीं है। लेकिन इनमें शादी के लिए धोखाधड़ी, लालच या जबरन किए जाने वाले धर्म परिवर्तन को रोकने और इसके लिए सजा के कड़े प्रावधान किए गए हैं।

LPG Price Today: घरेलू गैस सिलेंडर और कमर्शियल एलपीजी ग्राहकों को बड़ी राहत, जानिए देश के प्रमुख शहरों में नई कीमतें

LPG Price Today: देशभर में घरेलू और कमर्शियल रसोई गैस (LPG) उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। सरकारी तेल कंपनियों (इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम) ने जुलाई 2026 के लिए 14.2 किलो घरेलू LPG सिलेंडर के दामों में कोई नई बढ़ोतरी नहीं की है। जून में हुई ₹29 प्रति सिलेंडर की वृद्धि के बाद कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं। तेल कंपनियों ने जुलाई महीने में घरेलू 14.2 किलोग्राम गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई नया बदलाव नहीं किया है।

हालांकि, इस महीने की शुरुआत में कमर्शियल 19 किलोग्राम LPG सिलेंडर की कीमत में 183.50 रुपये की कटौती की गई थी, जिससे होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बड़ी राहत मिली है। कमर्शियल सिलेंडर की इन कीमतों में 1 जुलाई को ₹183.50 की कटौती शामिल है। वहीं, जून के महीने में तेल कंपनियों द्वारा की गई ₹29 की बढ़ोतरी के बाद घरेलू गैस के दाम फिलहाल स्थिर बने हुए हैं।

उपभोक्ताओं को राहत

फिलहाल घरेलू और कमर्शियल LPG उपभोक्ताओं को राहत मिली हुई है क्योंकि सिलेंडर की कीमतों में कोई नई बढ़ोतरी नहीं हुई है। कमर्शियल LPG सस्ता होने से होटल, ढाबों और रेस्तरां कारोबार को लाभ मिलेगा। हालांकि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और पश्चिम एशिया की स्थिति आने वाले महीनों में LPG कीमतों की दिशा तय कर सकती है।

घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतें स्थिर

ताजा दरों के अनुसार, दिल्ली में 14.2 किलोग्राम घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत 942 रुपये है। जून में 29 रुपये की बढ़ोतरी के बाद से कीमतों में कोई नया बदलाव नहीं किया गया है। आम घरेलू उपभोक्ताओं के लिए यह स्थिरता राहत लेकर आई है।

प्रमुख महानगरों में घरेलू LPG के दाम

शहर                                                                                          14.2 किग्रा घरेलू LPG (रुपये)

दिल्ली                                                                                          942

मुंबई                                                                                            941.50

कोलकाता                                                                                     लगभग 939

चेन्नई                                                                                            लगभग 928.50

(ये दरें 1 जुलाई 2026 से प्रभावी हैं और इनमें आज तक कोई बदलाव नहीं हुआ है।)

कमर्शियल LPG सिलेंडर हुआ सस्ता

तेल कंपनियों ने हाल ही में 19 किलोग्राम कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम में 183.50 रुपये की कटौती की थी। नई दरों के बाद दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर 2,930 रुपये में उपलब्ध है। यह कटौती वर्ष 2026 की पहली बड़ी कमी मानी जा रही है।

प्रमुख शहरों में 19 किग्रा कमर्शियल LPG की कीमत

शहर                                                                                          कमर्शियल LPG (रुपये)

दिल्ली                                                                                         2,930

मुंबई                                                                                           2,885.50

कोलकाता                                                                                    3,072

चेन्नई                                                                                             3,100

पश्चिम एशिया संकट पर नजर

घरेलू LPG की कीमतें फिलहाल स्थिर हैं। लेकिन पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ऊर्जा बाजारों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। भारत अपनी LPG आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए अमेरिका सहित वैकल्पिक स्रोतों से आयात बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।

थाली पर भी पड़ा असर

हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार टमाटर, प्याज और LPG की बढ़ी हुई लागत के कारण जून में घरेलू थाली की लागत में 5 से 6 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई। इससे साफ है कि रसोई गैस की कीमतों का सीधा असर आम परिवारों के मासिक बजट पर पड़ता है।

क्यों स्थिर हैं घरेलू दाम?

तेल कंपनियों ने जून में अंतरराष्ट्रीय LPG कीमतों और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण घरेलू सिलेंडर महंगा किया था। फिलहाल सरकार और कंपनियों ने घरेलू उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालने का फैसला किया है। इसलिए जुलाई संशोधन में कोई नई बढ़ोतरी नहीं की गई।

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US-Iran War News: ईरान-अमेरिका युद्ध फिर भड़का! IRGC ने होर्मुज स्ट्रेट को किया बंद, अमेरिकी सेना ने शुरू किया घातक हमला

US-Iran War News: पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। शनिवार (11 जुलाई) देर रात ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को दोबारा बंद करने की घोषणा कर दी। इसके कुछ ही घंटों बाद अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर तीसरे दौर की हवाई और मिसाइल कार्रवाई शुरू कर दी। इन घटनाओं ने पिछले महीने हुए अस्थायी युद्धविराम (सीजफायर) के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य फिर बंद

ईरान का कहना है कि एक कमर्शियल जहाज ने उसकी ओर से निर्धारित रूट्स का पालन नहीं किया। इसके बाद ईरानी सेना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जहाज की ओर चेतावनी स्वरूप गोलियां चलाईं। ईरान ने इसे अपनी समुद्री सुरक्षा का उल्लंघन बताते हुए घोषणा की है कि होर्मुज अगले आदेश तक बंद रहेगा।

रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने जहाजों को चेतावनी दी है कि वे ईरानी अधिकारियों द्वारा मंजूरी न किए गए किसी भी रास्ते से इसे पार करने की कोशिश न करें। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब ओमान की मध्यस्थता में समुद्री रूट्स को सुरक्षित रखने और युद्धविराम बनाए रखने की कोशिशें जारी थीं।

अमेरिका का तीसरा सैन्य हमला

ईरान की इस घोषणा के कुछ ही समय बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर तीसरे दौर की कार्रवाई शुरू कर दी है। अमेरिका का दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की क्षमताओं को कमजोर करना है। जिनके जरिए वह अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों और नागरिक समुद्री ट्रैफिक को निशाना बना सकता है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरानी कार्रवाई में क्षतिग्रस्त हुए साइप्रस के झंडे वाले एक कंटेनर जहाज के इंजन रूम को भारी नुकसान पहुंचा है। उसका एक चालक दल का सदस्य अब भी लापता है।

सीजफायर पर मंडराया खतरा

अमेरिकी प्रशासन पहले ही स्पष्ट कर चुका था कि जब तक होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह सुरक्षित नहीं रहेगा, तब तक युद्धविराम को आगे बढ़ाने या नए समझौते पर बातचीत संभव नहीं होगी। वॉशिंगटन को उम्मीद थी कि ईरान सार्वजनिक रूप से सभी जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की गारंटी देगा। लेकिन इसके उलट तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की घोषणा कर दी।

ओमान की मध्यस्थता जारी

तनाव के बीच ईरान और ओमान के विदेश मंत्रियों की शनिवार को बैठक हुई। दोनों देशों ने समुद्री रूट्स की सुरक्षा और भविष्य की व्यवस्था पर तकनीकी और राजनीतिक स्तर पर बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि बैठक में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त तंत्र पर चर्चा हुई। इस बीच, ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद पहली बार सार्वजनिक बयान जारी किया है।

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US-Iran War: अमेरिका ने भीषण बमबारी से ईरान के कई शहरों को फिर दहलाया, जहाज पर IRGC की फायरिंग के बाद बिगड़े हालात; होर्मुज हुआ बंद

मिडिल ईस्ट में हालात एक बार फिर बिगड़ते जा रहे हैं। अमेरिका ने ईरान पर एक बार फिर हवाई हमले किए हैं। ईरान ने होर्मुज पर एक जहाज पर हमला किया, जिसके जवाब में अमेरिका सेना ने तेहरान के केश्म द्वीप समते कई शहरों में भीषण बमबारी शुरू कर दी। दोनों देशों ने ताजा हमलों की पुष्टि की है।

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अमेरिका ने ईरान पर एयरस्ट्राइक की:न्यूक्लियर सिटी बुशहर को निशाना बनाया; ईरान की जवाबी कार्रवाई की धमकी, होर्मुज बंद का ऐलान

अमेरिका ने शनिवार देर रात ईरान पर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, न्यूक्लियर सिटी बुशहर समेत असालुयेह, बंदर-ए-देयर, जास्क और चाबहार के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। ईरानी मीडिया ने इन इलाकों में धमाकों की पुष्टि की है। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट में साइप्रस के झंडे वाले कंटेनर जहाज पर हमले के जवाब में की गई। CENTCOM के मुताबिक, हमले में जहाज में आग लग गई, इंजन क्षतिग्रस्त हुआ और चालक दल का एक सदस्य लापता है। वहीं, ईरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। विदेश मंत्रालय के सलाहकार अली सफारी ने कहा कि अमेरिकी हमलों का जवाब दिया जाएगा। साथ ही ईरान ने ऐलान किया कि अमेरिकी दखल खत्म होने तक होर्मुज स्ट्रेट बंद रहेगा। मिडिल ईस्ट के हालात से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लाग से गुजर जाइए…

“हजारों मिसाइलें तैयार, पूरे इलाकों को तबाह कर देंगे”, Donald Trump ने फिर दी ईरान को धमकी

ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (Ali Khamenei) के अंतिम संस्कार के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की खुलेआम मांग की गई। इसके बाद ट्रंप ने ईरान को गंभीर चेतावनी दी है। इससे मध्य पूर्व में पहले से ही बढ़े तनाव और बढ़ गए हैं।  अमेरिकी राष्ट्रपति डो

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Gold Price Outlook: सोना अभी खरीदे या थोड़ा और रुकें? एक्सपर्ट्स ने बताया दिवाली तक का ये टारगेट

Gold Price Diwali Target Outlook: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितता और महंगाई का डर एक बार फिर बढ़ गया है। इस तनाव के बीच सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की चमक एक बार फिर बढ़ गई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना $4,000 प्रति औंस के करीब पहुंच गया है, वहीं घरेलू बाजार में सोने की कीमतें फिलहाल ₹1.40 लाख से ₹1.42 लाख प्रति 10 ग्राम के बीच बनी हुई हैं। ऐसे में निवेशक और आम खरीदार असमंजस में हैं कि अभी सोना खरीदना चाहिए या नहीं। आइए समझते हैं कि दिवाली तक सोने की चाल कैसी रह सकती है।

क्या सोने की कीमतों में आएगी बड़ी गिरावट?

बाजार के जानकारों और एक्सपर्ट्स का मानना है कि हालिया उतार-चढ़ाव के बावजूद सोने की कीमतों में किसी बड़ी या भारी गिरावट की उम्मीद बहुत कम है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोना मौजूदा स्तरों पर अपना एक मजबूत आधार बना चुका है। अगर यहां से कीमतों में कोई गिरावट आती भी है, तो वह महज 5% तक ही सीमित रहने की संभावना है। घरेलू बाजार में सोने को ₹1.35 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बेहद मजबूत सपोर्ट पर है। इसलिए ग्राहकों को बहुत ज्यादा दाम गिरने की उम्मीद में अपनी खरीदारी को टालना नहीं चाहिए।

क्यों बढ़ रही हैं सोने की कीमतें?

सोने की मौजूदा तेजी के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण काम कर रहे हैं:

भू-राजनीतिक तनाव: अमेरिका और ईरान के बीच गहराते विवाद ने निवेशकों को शेयर बाजार जैसी जोखिम भरी जगहों से निकालकर सोने की तरफ आकर्षित किया है।

कच्चा तेल और महंगाई: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने दुनिया भर में महंगाई की चिंता को दोबारा हवा दे दी है, जिससे हेजिंग के लिए सोने की मांग बढ़ी है।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व: अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता भी निवेशकों के सेंटिमेंट को प्रभावित कर रही है।

दिवाली तक कहां पहुंच सकता है सोना?

दिवाली पर सोने के भाव को लेकर विश्लेषकों ने दो तरह की संभावनाएं जताई हैं:

पहली स्थिति: अगर वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होता है और स्थितियां सामान्य होती हैं, तो घरेलू बाजार में सोने की कीमतें छलांग लगाते हुए ₹1.60 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर तक जा सकती हैं।

दूसरी स्थिति: अगर तनाव और अनिश्चितता का माहौल आगे भी बरकरार रहता है, तो सोने के दाम ₹1.35 लाख से ₹1.45 लाख के सीमित दायरे में ही बने रहेंगे।

ग्लोबल टारगेट: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने को $3,800 पर मजबूत सपोर्ट है, जबकि लंबी अवधि के लिए $5,100 का स्तर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ज्वैलरी मार्केट में लौटी रौनक, खरीदारी का अच्छा मौका

सोने की कीमतों में आई हालिया मामूली गिरावट ने ज्वैलरी बाजार में ग्राहकों की डिमांड को फिर से जिंदा कर दिया है। जब कीमतें अपने रिकॉर्ड हाई पर थीं, तब बिक्री में भारी गिरावट देखी गई थी, लेकिन अब इसमें सुधार हो रहा है। अगस्त और सितंबर से शुरू होने वाले आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए सर्राफा कारोबारियों को उम्मीद है कि इस साल दिवाली पर सोने की मांग पिछले साल के मुकाबले बेहतर या उसके बराबर रह सकती है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

अमेरिकी नागरिकता के पक्ष में फैसले से क्यों खुश हैं भारतीय

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मुरली कृष्णन

जन्म के आधार पर नागरिकता के मामले में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने अमेरिका में रह रहे भारतीय परिवारों की चिंताएं घटाई हैं। आखिर इस फैसले से प्रवासी भारतीयों को क्या फायदा होगा? ALSO READ: खमेनेई के बाद ईरान: कितनी बदल जाएगी मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था

 

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया फैसले में जन्म के आधार पर नागरिकता को बरकरार रखा है। इस फैसले से हजारों भारतीय परिवारों को राहत मिली है। हालांकि, इस बात पर राजनीतिक लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है कि कौन व्यक्ति अमेरिकी कहलाने का हकदार है। जब 30 जून को सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आया, तब सिएटल में रहने वाले एक भारतीय जोड़े, राजेश और नेहा ने काम पर निकलने से पहले नाश्ते की मेज पर इस खबर को पढ़ा।

 

सॉफ्टवेयर इंजीनियर राजेश 2016 में एच-1बी वीजा पर दक्षिण भारतीय शहर बेंगलुरु से अमेरिका आए थे। एक साल बाद नेहा भी उनके साथ आ गईं। उनकी छह साल की बेटी आन्या का जन्म अमेरिका में ही हुआ था। नेहा ने डीडब्ल्यू को बताया, “यह राहत की बात थी। महीनों तक हम सोचते रहे कि क्या इतनी बुनियादी चीज सच में बदल सकती है।”

 

इस फैसले के बाद उनकी बेटी तो अमेरिकी नागरिक बनी रहेगी, लेकिन उनके लिए कुछ खास नहीं बदला है। अमेरिका में रह रहे हजारों अन्य भारतीय पेशेवरों की तरह, वे भी सालों से लाइन में लगे हुए हैं और नौकरी के आधार पर मिलने वाले ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं। राजेश ने कहा, “हम खुश हैं कि हमारी बेटी का भविष्य सुरक्षित हो गया है, लेकिन हमारी अपनी जिंदगी अब भी हर बार वीजा रिन्यू होने की चिंता के साथ गुजर रही है।” ALSO READ: जर्मनी में गर्मी की वजह से इस साल 5,100 लोगों की मौत

 

राहत की सांस

जून के आखिर में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जन्म के आधार पर नागरिकता को बरकरार रखा। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि अमेरिकी धरती पर पैदा होने वाले बच्चे अमेरिकी नागरिक बने रहेंगे, चाहे उनके माता-पिता का इमिग्रेशन स्टेटस कुछ भी हो।

 

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने पिछले साल एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किया था, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका में गैर-कानूनी तरीके से या अस्थायी वीजा पर रह रहे माता-पिता के बच्चे अपने-आप अमेरिकी नागरिक नहीं बनेंगे। उस आदेश पर फिलहाल रोक लगी हुई है और उस पर अदालत में कानूनी सुनवाई चल रही है।

 

सामाजिक और राजनीतिक संस्था ‘इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट' के कार्यकारी निदेशक चिंतन पटेल ने कहा, “यह फैसला इस बात की बेहतर तरीके से पुष्टि करता है कि अमेरिका में किसे रहने और नागरिक कहलाने का अधिकार है।” पटेल ने एक बयान में कहा, “ट्रंप के कार्यकारी आदेश से जिन लोगों को सबसे सीधा खतरा था, उनमें भारतीय और दक्षिण एशियाई मूल के प्रवासी परिवार शामिल हैं। ये समुदाय वर्षों से वीजा बैकलॉग और अनिश्चित आव्रजन प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं। ऐसे में अक्सर उनके बच्चों का जन्म अमेरिका में हो जाता है, जबकि माता-पिता के पास स्थायी रूप से वहां रहने का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं होता।”

 

‘प्यू रिसर्च सेंटर' की मई 2025 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में चीनी-अमेरिकियों के बाद भारतीय मूल के लोग एशिया के दूसरे सबसे बड़े प्रवासी समूह हैं। 2023 में अमेरिका में भारतीय मूल के लगभग 52 लाख लोग रहते थे, जो देश की एशियाई मूल की आबादी का लगभग 21 फीसदी है। अमेरिकी कंपनियों को कुशल विदेशी कर्मचारियों को नौकरी पर रखने की सुविधा देने वाले ‘एच-1बी वीजा' को पाने में भारतीय सबसे आगे हैं। लेकिन, हर देश के लिए तय सीमा होने की वजह से, नौकरी के आधार पर मिलने वाले ग्रीन कार्ड के लिए सबसे लंबा इंतजार भी इन्हीं भारतीयों को करना पड़ता है।

 

सामुदायिक संगठनों का अनुमान है कि अमेरिका में अस्थायी वर्क वीजा पर रह रहे भारतीय माता-पिता के यहां लाखों बच्चे पैदा हुए हैं। कोर्ट के इस फैसले से अब उनकी नागरिकता और उससे जुड़े अधिकार सुरक्षित रहेंगे, जिनमें अमेरिकी पासपोर्ट और सोशल सिक्योरिटी नंबर भी शामिल हैं।

 

कर्मचारी अपना स्टेटस (कानूनी दर्जा) खराब होने के डर से नौकरी बदलने में हिचकिचाते हैं। वहीं दूसरी तरफ, उनके जीवनसाथी (पति या पत्नी) को भी काम करने को लेकर कई तरह की पाबंदियों का सामना करना पड़ सकता है।

 

जो बच्चे अपने माता-पिता के सहारे यानी डिपेंडेंट के तौर पर अमेरिका आए थे, वे 21 साल के होते ही अपना कानूनी दर्जा खो सकते हैं, बशर्ते उनके माता-पिता को तब तक पक्का ग्रीन कार्ड न मिला हो। इस गंभीर समस्या को ‘एजिंग आउट' कहा जाता है। इस तरह के कठिन हालात के बीच, जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता ही उन कुछ चुनिंदा भरोसेमंद चीजों में से एक रही है, जिस पर ये परिवार पक्के तौर पर यकीन कर सकते हैं।

 

रोजगार और परिवार-आधारित इमिग्रेशन के विशेषज्ञ और अमेरिकी इमिग्रेशन अटॉर्नी राजकृष्ण एस। अय्यर ने डीडब्ल्यू से कहा, “यह अदालती फैसला इस पुराने संवैधानिक नियम को और मजबूत करता है कि जो कोई भी अमेरिका में पैदा हुआ है, वह वहां का नागरिक है। भले ही, उसके माता-पिता का इमिग्रेशन स्टेटस कुछ भी हो। भारतीय एच-1बी परिवारों के लिए इसका मतलब है कि उनके बच्चों को जन्म के समय ही अमेरिकी नागरिकता मिल जाएगी।” ALSO READ: फ्रांस की धुर दक्षिणपंथी नेता की सजा घटी लेकिन चुनौतियां नहीं

 

समाज को बांटने वाले मुद्दा

यह अदालती फैसला अमेरिकी राजनीति के सबसे ज्यादा विवादित और समाज को बांटने वाले सवालों में से एक को दोबारा चर्चा के केंद्र में ले आया है। दरअसल, सालों से ट्रंप और कई रूढ़िवादी नेता यह तर्क देते आ रहे हैं कि बिना किसी शर्त के मिलने वाली जन्म आधारित नागरिकता इमिग्रेशन सिस्टम के गलत इस्तेमाल को बढ़ावा देती है। अमेरिकी नागरिकता हासिल करने के लिए मौजूदा इमिग्रेशन सिस्टम का इस तरह जानबूझकर इस्तेमाल करना ही रूढ़िवादी नेताओं और इमिग्रेशन का विरोध करने वालों की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक है।

 

ट्रंप के रूख का समर्थन करने वालों का कहना है कि जन्म के आधार पर नागरिकता मिलने से ‘बर्थ टूरिज्म' को बढ़ावा मिलता है। इसमें विदेशी नागरिक खास तौर पर बच्चे को जन्म देने के लिए अमेरिका आते हैं, ताकि उनके बच्चों को अमेरिकी नागरिकता मिल सके।

 

अय्यर ने कहा कि यह आपत्ति आम तौर पर एच-1बी वीजा रखने वाले लोगों के लिए नहीं जताई जाती है। उन्होंने बताया, “खास बात यह है कि रूढ़िवादी लोगों ने अमेरिका में कानूनी तौर पर आए प्रवासी कामगारों के बच्चों के जन्म पर बहुत कम आपत्ति जताई है।”

 

अय्यर के मुताबिक, एच-1बी वीजा रखने वाले लोग कानूनी तौर पर आए कामगार होते हैं। ये लोग टैक्स देते हैं और आम तौर पर इन्हें सरकारी संसाधनों पर बोझ नहीं माना जाता। उन्होंने कहा, “इसलिए, ऐसा लगता है कि उनका असली विरोध सिर्फ प्रवासियों के कानूनी दर्जे (इमिग्रेशन स्टेटस) को लेकर नहीं है। उनका गुस्सा इस बात पर ज्यादा है कि लोग कानूनी व्यवस्था को दरकिनार कर रहे हैं, देश में अवैध रूप से दाखिल हो रहे हैं या फिर ‘बर्थ टूरिज्म' (सिर्फ बच्चे को नागरिकता दिलाने के लिए यात्रा करना) के लिए वैध वीजा का इस तरह फायदा उठा रहे हैं जिसके लिए वह वीजा बनाया ही नहीं गया था।”

 

अय्यर कहते हैं कि जन्म के आधार पर नागरिकता के नियम को लेकर अक्सर लोगों के बीच कई तरह की गलतफहमियां होती हैं। अमेरिका में पैदा हुए बच्चे 21 साल की उम्र से पहले अपने माता-पिता के परमानेंट रेजिडेंसी के लिए आवेदन नहीं कर सकते। इसका मतलब यह है कि बच्चे को जन्म से मिलने वाली नागरिकता, पूरे परिवार को तुरंत कानूनी दर्जा दिलाने का कोई सीधा रास्ता नहीं खोलती। वे संगठित रूप से होने वाले ‘ऑर्गनाइज्ड बर्थ टूरिज्म' के इक्का-दुक्का मामलों और उन परिवारों के बीच एक साफ अंतर देखते हैं, जो कंपनी के वीजा पर सालों से कानूनी तौर पर अमेरिका में रह रहे हैं और काम कर रहे हैं।

 

यह फर्क खासकर भारतीय एच-1बी परिवारों के लिए अहम है। बिना दस्तावेजों वाले (अवैध) प्रवासियों के उलट, ज्यादातर भारतीय पेशेवर कानूनी तौर पर अमेरिका में दाखिल होते हैं, वहां ईमानदारी से टैक्स भरते हैं और नौकरी-आधारित दुनिया की सबसे लंबी इमिग्रेशन लिस्ट (बैकलॉग) का सामना करते हुए भी हमेशा अपना कानूनी दर्जा बनाए रखते हैं।

 

नई दिल्ली के एक वकील करन ठुकराल ने कहा कि भारतीय पेशेवरों को जबरदस्ती एक ऐसी बहस में घसीटा जा रहा है, जो असल में अवैध प्रवासियों को ध्यान में रखकर शुरू की गई थी। उन्होंने डीडब्ल्यू को बताया, “इस फैसले से भारतीय एच-1बी वीजा वाले परिवारों के सामने बनी एक बड़ी अनिश्चितता दूर हो गई है। यह फैसला ग्रीन कार्ड के लिए दशकों लंबे इंतजार या अस्थाई वीजा पर जीने की कड़वी हकीकत को नहीं बदलता। वे कानूनी तौर पर आए हुए पेशेवर हैं। सिस्टम के गलत इस्तेमाल की चिंताओं की कीमत अमेरिका में पैदा हुए बच्चों के संवैधानिक अधिकारों को छीनकर नहीं चुकाई जानी चाहिए।” ALSO READ: ब्रिटेन का शाही परिवार कहां से और कैसे धन कमाता है

 

जन्म के आधार पर नागरिकता को लेकर खत्म नहीं हुई है लड़ाई

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से जन्म के आधार पर नागरिकता को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई खत्म नहीं हुई है। इसके बजाय, इस फैसले ने उन परिस्थितियों को सीमित कर दिया है, जिनमें निचली अदालतें राष्ट्रपति की नीतियों को पूरे देश में लागू होने से रोक सकती हैं। जब तक इस संवैधानिक सवाल का कोई पक्का समाधान नहीं निकल जाता, तब तक ट्रंप के कार्यकारी आदेश को देश भर की अदालतों में चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

 

अमेरिका में भारत की पूर्व राजदूत मीरा शंकर इस फैसले को किसी पक्के समाधान के बजाय एक तरह का भरोसा दिलाना मानती हैं। उन्होंने डीडब्ल्यू से कहा, “यह फैसला कई भारतीय परिवारों के लिए राहत की बात है, क्योंकि इससे अमेरिका में पैदा हुए बच्चों को अमेरिकी नागरिक के रूप में एक मजबूत कानूनी आधार (सुरक्षा) मिलता है।”

 

उन्होंने आगे कहा, “लेकिन ट्रंप प्रशासन के आने के बाद से, अमेरिका अब प्रवासियों का पहले की तरह स्वागत नहीं कर रहा है। इसलिए कई प्रतिभाशाली भारतीय, जो पहले अमेरिका जाना अपना सबसे अच्छा विकल्प मानते थे, अब शायद अपना फैसला बदलने पर विचार कर सकते हैं।”

 

अनिश्चितता के बीच कैसी होती है जिंदगी

कई भारतीय पेशेवरों के लिए, अदालत का यह फैसला एक बहुत बड़ी समस्या के सिर्फ एक हिस्से को ही हल करता है।

 

नौकरी के आधार पर मिलने वाले ग्रीन कार्ड के लिए हर साल अलग-अलग देशों का एक तय कोटा होता है। इसकी वजह से भारतीय आवेदकों के लिए बहुत बड़ा बैकलॉग बन गया है, यानी उनके लिए इंतजार की अवधि काफी बढ़ गई है। अलग-अलग अनुमानों के मुताबिक, 10 लाख से भी ज्यादा भारतीय यहां स्थायी तौर पर बसने के लिए लाइन में लगे हैं और इनमें से कुछ तो दशकों से इंतजार कर रहे हैं।

पाकिस्तान में पेट्रोल 13.18 और पेट्रोल 13.80 रुपया महंगा:पेट्रोल 310.71 और हाई-स्पीड डीजल 323.30 रुपया लीटर मिल रहा, नई कीमतें 11 जुलाई से लागू

पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल के दाम में 13.18 रुपया (पाकिस्तानी रुपया) प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल में 13.80 रुपया प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तान में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 310.71 रुपया और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 323.30 रुपया लीटर हो गई है। नई कीमतें 11 जुलाई से लागू हो गई हैं। फरवरी से शुरू हुआ था बढ़ने का सिलसिला हालिया बढ़ोतरी के बावजूद दोनों ईंधन अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई (पीक लेवल) से नीचे बने हुए हैं। 3 अप्रैल को डीजल की कीमत 520.35 रुपया प्रति लीटर के ऑल-टाइम हाई स्तर पर पहुंच गई थी। ईंधन की कीमतों में यह तेजी 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद देखने को मिली थी, जब डीजल 281 रुपया प्रति लीटर के स्तर पर था। वहीं दूसरी ओर, पेट्रोल की कीमत भी 3 अप्रैल को 458.41 रुपया के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी, जिसकी शुरुआत मार्च के पहले हफ्ते में 266 रुपया प्रति लीटर से हुई थी। IMF की शर्तों के कारण बढ़ा टैक्स, डीजल पर 80 रुपया तो पेट्रोल पर 70 रुपया लेवी ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की कड़ी शर्तें भी शामिल हैं। सरकार ने 1 जुलाई से ‘क्लाइमेट सपोर्ट लेवी’ को दोगुना करके 5 रुपया प्रति लीटर कर दिया है, जबकि इसके बदले पेट्रोलियम लेवी में मामूली कटौती की गई है। इस बदलाव के बाद वर्तमान में डीजल पर पेट्रोलियम लेवी करीब 80 रुपया प्रति लीटर है। वहीं, पेट्रोल पर पेट्रोलियम लेवी 70 रुपया प्रति लीटर के साथ 5 रुपया की क्लाइमेट सपोर्ट लेवी अलग से वसूली जा रही है। एक लीटर ईंधन पर 100 रुपया तक टैक्स, कस्टम ड्यूटी भी शामिल सरकार वर्तमान में हाई-स्पीड डीजल (HSD) पर कुल 101 रुपया प्रति लीटर का टैक्स वसूल रही है। इसमें 16 रुपया प्रति लीटर कस्टम ड्यूटी, पेट्रोलियम लेवी, क्लाइमेट सपोर्ट लेवी और इनलैंड फ्रेट इक्वलाइजेशन मार्जिन शामिल हैं। पेट्रोल की बात करें तो इस पर कुल टैक्स 95 रुपया प्रति लीटर बैठता है, जिसमें 20 रुपया प्रति लीटर कस्टम ड्यूटी के साथ-साथ पेट्रोलियम और क्लाइमेट लेवी जोड़ी गई है। इसके अलावा, सरकार केरोसिन पर 21 रुपया प्रति लीटर और लाइट डीजल ऑयल पर 16 रुपया प्रति लीटर पेट्रोलियम लेवी वसूल रही है।