Stocks to Watch: 25 अगस्त को फोकस में रहेंगे ये 12 स्टॉक्स, मिल सकता है तगड़ी कमाई का मौका

Stocks to Watch: मंगलवार, 25 अगस्त के कारोबारी सत्र में कई कंपनियों के शेयर खबरों की वजह से फोकस में रह सकते हैं। इनमें डील, बड़े ऑर्डर, OFS, फंड जुटाने और मैनेजमेंट बदलाव से जुड़ी खबरें शामिल हैं। आइए जानते हैं किन 12 शेयरों पर खास नजर रहेगी।

Hindustan Copper

सरकारी कॉपर कंपनी Hindustan Copper में सरकार OFS के जरिए 6% तक हिस्सेदारी बेच सकती है। इसमें 3% की बेस हिस्सेदारी और 3% का ग्रीन-शू ऑप्शन शामिल है। OFS का फ्लोर प्राइस ₹514 प्रति शेयर रखा गया है।

TCS

टाटा ग्रुप की आईटी कंपनी TCS ने Porsche AG की 100% हिस्सेदारी वाली MHP को खरीदने की मंजूरी दी है। यह सौदा करीब 320 मिलियन यूरो का है। इसके अलावा Porsche ने TCS और MHP के साथ 5 साल का 1.25 बिलियन यूरो का समझौता किया है।

Suzlon Energy

विंड एनर्जी कंपनी Suzlon Energy आंध्र प्रदेश में 1,325 MW के नए विंड प्रोजेक्ट विकसित करने की योजना बना रही है। ये प्रोजेक्ट अनंतपुर जिले के Rayadurg विधानसभा क्षेत्र में लगाए जाएंगे। इससे राज्य में कंपनी की मौजूदगी और मजबूत हो सकती है।

ICICI Bank

प्राइवेट सेक्टर बैंक ICICI Bank ने अपने IFSC Banking Unit के जरिए 5 साल के $1 बिलियन के सीनियर अनसिक्योर्ड नोट्स की कीमत तय की है। इन डेट सिक्योरिटीज को S&P Global Ratings ने ‘BBB’ रेटिंग दी है।

Ceigall India

इंफ्रास्ट्रक्चर और रोड कंस्ट्रक्शन कंपनी Ceigall India को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से करीब ₹704.70 करोड़ का ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर अरुणाचल प्रदेश में Frontier Highway के निर्माण से जुड़ा है।

Lenskart

आईवियर और रिटेल कंपनी Lenskart में अगले 2-3 दिनों में करीब ₹2,800-2,900 करोड़ की ब्लॉक डील की खबर है। सूत्रों के मुताबिक Alfa अपनी कुछ हिस्सेदारी बेच सकता है। Alfa के पास कंपनी में करीब 3.4% हिस्सेदारी बताई गई है।

UCO Bank

सरकारी बैंक UCO Bank के बोर्ड ने 1 बिलियन डॉलर तक रकम जुटाने की मंजूरी दी है। बैंक इस रकम का इस्तेमाल अपनी जरूरतों और कारोबार को आगे बढ़ाने में कर सकता है।

Afcons Infrastructure

इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Afcons Infrastructure को Uttar Pradesh Expressways Industrial Development Authority से जुड़े मामले में ₹335.50 करोड़ का Arbitral Award मिला है। मध्यस्थता प्रक्रिया के बाद फैसला कंपनी के पक्ष में आया है।

Coal India

सरकारी कोयला कंपनी Coal India ने सिंगापुर में अपनी नई Wholly Owned Subsidiary बनाई है। इसका नाम CIL Global है। यह कंपनी दूसरे देशों में Critical Minerals से जुड़े कारोबारी अवसर तलाशेगी।

Great Eastern Shipping

शिपिंग कंपनी Great Eastern Shipping के बोर्ड की 27 अगस्त को बैठक होगी। इसमें कंपनी के शेयर बायबैक के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। फिलहाल यह सिर्फ प्रस्ताव पर विचार करने की जानकारी है। अंतिम फैसला बोर्ड की बैठक में होगा।

HEG

ग्रेफाइट और इलेक्ट्रिकल कार्बन प्रोडक्ट कंपनी HEG ने मैनेजमेंट में बदलाव किया है। Riju Jhunjhunwala को 1 सितंबर 2026 से CEO बनाया गया है। वहीं Neha Rajvanshi को CFO नियुक्त किया गया है। दोनों नियुक्तियों के कारण शेयर पर नजर रह सकती है।

Brigade Hotel Ventures

हॉस्पिटैलिटी कंपनी Brigade Hotel Ventures ने Vinay Gupta को नया CEO नियुक्त किया है। यह नियुक्ति शेयर बाजार बंद होने के बाद सामने आई। मैनेजमेंट में बदलाव के बाद निवेशकों की नजर कंपनी की आगे की रणनीति पर रहेगी।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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आज के दौर में बेहतर सैलरी, जल्दी प्रमोशन और नई चुनौतियों के लिए नौकरी बदलना काफी सामान्य हो गया है। कई प्रोफेशनल्स मानते हैं कि हर कुछ साल में कंपनी बदलने से करियर तेजी से आगे बढ़ता है। लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है। अगर कोई कंपनी लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही हो और वहां कर्मचारियों को नई जिम्मेदारियां, सीखने के अवसर और आगे बढ़ने के मौके मिलते रहें, तो लंबे समय तक उसी संगठन के साथ बने रहना भी समझदारी भरा फैसला हो सकता है। ऐसी स्थिति में कर्मचारी कंपनी के बिजनेस और कामकाज को गहराई से समझने के साथ-साथ धीरे-धीरे बड़ी जिम्मेदारियों के लिए तैयार होता है।

समय के साथ अनुभव, नेटवर्क और संगठन का भरोसा भी मजबूत होता है। GAIL में 20 साल पूरे करने वाले राकेश शाही का करियर इसी पहलू की एक दिलचस्प मिसाल पेश करता है, जहां लंबें समय तक काम करना लगातार बढ़ती जिम्मेदारियों और पेशेवर विकास के साथ आगे बढ़ा।

वायरल पोस्ट

GAIL (India) Limited में 20 साल पूरे करने वाले राकेश शाही की LinkedIn पोस्ट इसी पहलू को सामने लाती है। जून 2026 में अपने दो दशक पूरे होने पर उन्होंने Executive Trainee से Deputy General Manager तक के सफर को याद किया। उनकी कहानी बताती है कि सही माहौल मिलने पर कंपनी की ग्रोथ के साथ कर्मचारी का करियर भी लगातार आगे बढ़ सकता है।

एक कंपनी में लंबे समय तक काम करने के फायदे

लंबे समय तक एक ही कंपनी में काम करने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि कर्मचारी संगठन के कामकाज और बिजनेस को गहराई से समझने लगता है। समय के साथ उसे ज्यादा जिम्मेदारियां और बड़े प्रोजेक्ट संभालने का मौका मिल सकता है।

राकेश शाही ने अपने करियर के दौरान Project Management, Gas Marketing, Business Development, Pipeline Infrastructure, Policy, Regulation और Compliance जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया। इससे उनकी विशेषज्ञता सिर्फ एक भूमिका तक सीमित नहीं रही।

प्रमोशन के साथ बढ़ती जिम्मेदारी

अगर कंपनी अपने कर्मचारियों की क्षमता को पहचानती है, तो लंबा कार्यकाल Leadership Roles तक पहुंचने का रास्ता भी खोल सकता है। Executive Trainee से DGM तक का सफर इसका उदाहरण है।

हालांकि सिर्फ लंबे समय तक कंपनी में बने रहना प्रमोशन की गारंटी नहीं है। असली फायदा तब होता है, जब संगठन performance को महत्व देता हो और कर्मचारियों को नई जिम्मेदारियां लेने के अवसर देता हो।

Deputation और नए अनुभव का फायदा

राकेश शाही के करियर में PNGRB में deputation भी एक अहम पड़ाव रहा। वहां उन्हें regulatory framework, authorisation, consumer affairs और natural gas sector से जुड़े विषयों पर काम करने का मौका मिला। ऐसे अवसर कर्मचारी के अनुभव को व्यापक बनाते हैं। बड़ी कंपनियों में लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों को अलग-अलग विभागों, प्रोजेक्ट्स और संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिल सकता है।

कब कंपनी के साथ बने रहना चाहिए?

हर कर्मचारी के लिए यह सवाल अहम है कि उसे मौजूदा कंपनी में बने रहना चाहिए या नई नौकरी तलाशनी चाहिए। अगर आपको नए प्रोजेक्ट्स और जिम्मेदारियां मिल रही हैं, नई स्किल्स सीखने का मौका है और आपके प्रदर्शन के आधार पर प्रमोशन या अप्रेजल हो रहा है, तो कंपनी में बने रहना फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा कंपनी का बिजनेस मजबूत होना, सीनियर्स का सपोर्ट मिलना और अच्छा वर्क कल्चर भी महत्वपूर्ण संकेत हैं।

कब समझें कि नौकरी बदलने का समय आ गया है?

दूसरी तरफ, अगर कई सालों से आपका काम एक जैसा है और सीखने के मौके खत्म हो चुके हैं, तो बदलाव के बारे में सोचना चाहिए। लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद प्रमोशन या उचित अप्रेजल न मिलना भी संकेत हो सकता है। अगर कंपनी की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है, भविष्य की संभावनाएं कमजोर हैं या वर्क कल्चर लगातार तनावपूर्ण होता जा रहा है, तो दूसरे अवसर तलाशना बेहतर हो सकता है।

लंबा करियर तभी फायदेमंद जब ग्रोथ जारी रहे

राकेश शाही की कहानी का सबसे बड़ा सबक यही है कि लंबे समय तक एक कंपनी में रहना तभी फायदेमंद है, जब आपकी ग्रोथ भी साथ-साथ हो रही हो। सिर्फ वर्षों की संख्या बढ़ाना करियर की सफलता नहीं है। अगर कंपनी आगे बढ़ रही है, आपको सीखने और जिम्मेदारी लेने के अवसर मिल रहे हैं और आपकी मेहनत को पहचान मिल रही है, तो बार-बार नौकरी बदलने के बजाय उसी संगठन के साथ आगे बढ़ना एक मजबूत करियर रणनीति हो सकती है।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

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Delhi Master Plan 2047: दिल्ली के इन इलाकों में बदल जाएगी तस्वीर, 200 वर्ग किमी में नया शहर बसाने की तैयारी

दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) मास्टर प्लान दिल्ली-2047 (MPD-2047) के तहत राजधानी के बाहरी इलाकों के विकास को लेकर बड़ा प्लान तैयार किया गया है। MPD-2047 के तहत दिल्ली के बाहरी इलाकों में करीब 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को विकसित करने की योजना है। लैंड पूलिंग के जरिए यहां व्यवस्थित तरीके से विकास किया जाएगा। इस इलाके में करीब 600 किलोमीटर लंबी नई सड़कें बनाने की योजना है। 30 मीटर या उससे ज्यादा चौड़ी सड़कों को दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) विकसित करेगा। यह योजना विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है।

जानें इस विकास मॉडल के बारे में

अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-II) के आसपास घने और मिश्रित तरीके से विकास को बढ़ावा देने की योजना है। यहां सस्ते घरों के साथ दुकानों, दफ्तरों, संस्थानों, लॉजिस्टिक्स और गोदामों जैसी सुविधाओं को विकसित किया जा सकेगा। MPD-2047 में अलग-अलग विकास मॉडल रखे गए हैं, जिससे जरूरत के अनुसार इलाकों को विकसित किया जा सकेगा।

MPD-2047 के जरिए होगा विकास

दिल्ली-2047 मास्टर प्लान के तहत राजधानी के बाहरी इलाकों में विकास को गति देने की तैयारी है। इसके लिए करीब 200 वर्ग किलोमीटर के अर्बन एक्सटेंशन क्षेत्र में लैंड पूलिंग व्यवस्था को मजबूत किया गया है। योजना का उद्देश्य इन क्षेत्रों में सड़क और दूसरी जरूरी सुविधाओं के साथ व्यवस्थित विकास करना है। इसके तहत करीब 600 किलोमीटर का नया सड़क नेटवर्क तैयार करने की योजना है, जिससे लैंड पूलिंग वाले इलाकों में बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकेगी। MPD-2047 में जमीन मालिकों की सुविधा के लिए अलग-अलग विकास मॉडल हैं। इससे जमीन के मालिक अपनी सुविधा के अनुसार योजना में शामिल हो सकेंगे और इलाकों में जरूरी सुविधाएं समय पर तैयार करने में मदद मिलेगी। वहीं, DDA सड़क, परिवहन और अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित करेगा।

बेहतर आवास के साथ मिलेगी अच्छी सुविधा

MPD-2047 में शहर के विकास को पहले से ज्यादा व्यवस्थित और सुविधाओं पर आधारित बनाने पर जोर दिया गया है। 30 मीटर या उससे ज्यादा चौड़ी सड़कों को DDA की ओर से विकसित किया जाएगा। नए शहरी क्षेत्रों में सिर्फ घर ही नहीं बनाए जाएंगे, बल्कि स्कूल, अस्पताल, पार्क, हरित क्षेत्र, बाजार और दूसरी जरूरी सार्वजनिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इसका उद्देश्य लोगों को बेहतर आवास के साथ अच्छी और सुविधाजनक जीवनशैली देना है।

20 हेक्टेयर जमीन की जरूरत

दिल्ली के बाहरी इलाकों में निजी जमीन को योजनाबद्ध तरीके से विकसित करने के लिए 2018 में लैंड पूलिंग पॉलिसी शुरू की गई थी। इसमें जमीन मालिक अपनी इच्छा से योजना में शामिल हो सकते हैं और DDA की भूमिका एक मददगार संस्था के तौर पर रहती है। अब MPD-2047 के तहत इस व्यवस्था को और आसान बनाने की तैयारी है। जमीन मालिक कंसोर्टियम के जरिए जमीन को एक साथ लाकर विकास कर सकते हैं। इसके अलावा टाउन प्लानिंग जैसे विकल्प भी दिए गए हैं, जिसमें कम से कम 20 हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी।

नए इलाकों में घरों को किया जाएगा विकसित

MPD-2047 के तहत नए इलाकों में घरों के साथ लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने वाली सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। सड़क की चौड़ाई के अनुसार रिहायशी क्षेत्रों में दुकान, छोटे कारोबार और दूसरी सेवाओं की अनुमति दी जा सकेगी। वहीं, UER-II के आसपास सस्ते घरों के साथ बाजार, संस्थान, लॉजिस्टिक्स और गोदाम बनाने की योजना है। इससे इन क्षेत्रों में रोजगार और कारोबार के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

जुलाई 2026 तक मिले इतने आवेदन

लैंड पूलिंग पॉलिसी को तेजी से लागू करने के लिए दिल्ली डेवलपमेंट एक्ट, 1957 में जरूरी बदलाव किए जाएंगे। यह योजना छह प्लानिंग जोन K-I, L, N, P-II, P-I का हिस्सा और J के 105 गांवों में लागू है, जिन्हें 138 सेक्टर में बांटा गया है। जुलाई 2026 तक इस योजना के तहत 7,615 से ज्यादा आवेदन मिल चुके थे और 7,885 हेक्टेयर से अधिक जमीन पूल की जा चुकी थी। 16 सेक्टर में तय लक्ष्य के 70 फीसदी से ज्यादा जमीन इकट्ठा हो चुकी है, जिसके बाद DDA ने वहां कंसोर्टियम बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

प्लानिंग जोन P-II का सेक्टर 8B लैंड पूलिंग योजना में आगे बढ़ने वाला पहला सेक्टर बन गया है। गाड़ी खसरो और इब्राहिम पुर गांवों में आने वाले इस सेक्टर में 70 फीसदी से ज्यादा जमीन एक साथ पूल हो चुकी है, इसलिए अब यहां विकास कार्य शुरू किए जा सकते हैं। इसके अलावा आठ अन्य सेक्टरों के जमीन मालिकों ने भी DDA को कंसोर्टियम बनाने की जानकारी दी है, जिससे योजना को जमीन पर लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

MPD-2047 के तहत लैंड पूलिंग के जरिए दिल्ली के बाहरी इलाकों को बेहतर तरीके से विकसित करने की योजना है। इन क्षेत्रों में सड़क और दूसरी जरूरी सुविधाओं के साथ घर, रोजगार के अवसर, सार्वजनिक सुविधाएं और हरित क्षेत्र भी तैयार किए जाएंगे।