DDA Dwarka Commercial Hub Plan: दिल्ली का अगला ‘गुड़गांव’ बनेगा द्वारका! डीडीए बनाएगा मेगा इकोनॉमिक हब, जानिए क्या है पूरा प्लान

DDA Dwarka Plan: दिल्ली का द्वारका उप-शहर आने वाले समय में राजधानी का सबसे बड़ा बिजनेस और कमर्शियल हॉटस्पॉट बनने जा रहा है। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने द्वारका को एक प्रमुख आर्थिक और वाणिज्यिक केंद्र के रूप में मजबूत करने के लिए उद्योग जगत के टॉप रिप्रेजेंटेटिव के साथ एक इंटरैक्टिव बैठक की अध्यक्षता की है। इस बैठक के दौरान उपराज्यपाल ने साफ किया कि दिल्ली के दीर्घकालिक आर्थिक विकास को बनाए रखने के लिए शहरी पुनर्विकास, बुनियादी ढांचे के अपग्रेडेशन और योजना सुधारों को लागू करना बेहद जरूरी है। उन्होंने द्वारका में एक स्वच्छ, प्रदूषण मुक्त और लेबर सेंट्रिक इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम की वकालत की है। ऐसा सिस्टम जो लोकल के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा कर सके।

एयरपोर्ट से नजदीकी और बेहतरीन कनेक्टिविटी बनेगी ताकत

एलजी ने कहा रि एशिया की सबसे बड़ी प्लांड सब सिटी में से एक होने की वजह से द्वारका इन्वेस्टमेंट के लिए एक टॉप डेस्टिनेशन के रूप में उभरने के लिए सही स्थिति में है। इसकी कनेक्टिविटी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से काफी आसान है। यहां मजबूत ट्रांसपोर्ट सिस्टम है। एलजी ने स्पष्ट किया कि द्वारका पूरी तरह विकसित हो चुकी है। इस लिहाज से ये कॉमर्स, हॉस्पिटैलिटी, हेल्थकेयर और टेक्नोलॉजी जैसे अलग अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश पाने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

प्रदूषण मुक्त उद्योगों और रोजगार पर रहेगा मुख्य फोकस

उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने विशेष रूप से जोर दिया कि द्वारका का औद्योगिक विकास पूरी तरह से स्वच्छ, टिकाऊ और गैर-प्रदूषणकारी होना चाहिए। यहां ऐसे उद्योगों से पूरी तरह दूरी बनाई जाएगी जो उप-शहर की पर्यावरणीय गुणवत्ता से समझौता करते हों।

एफएआर (FAR) मानदंडों की होगी समीक्षा, सिंगल-विंडो सिस्टम पर जोर

इस उच्च स्तरीय बैठक में रीयल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, हॉस्पिटैलिटी और हेल्थकेयर सेक्टर के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ-साथ डीडीए के उपाध्यक्ष, दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और आईटीपीओ (ITPO) के प्रबंध निदेशक ने हिस्सा लिया। उपराज्यपाल ने उद्योग जगत के रचनात्मक सुझावों की सराहना की और कहा कि उभरती शहरी आवश्यकताओं के अनुरूप फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) सहित योजना और विकास मानदंडों की समीक्षा और उन्हें तर्कसंगत बनाने की आवश्यकता है। उद्योग प्रतिनिधियों ने द्वारका और दिल्ली में निवेश के अनुकूल माहौल बनाने के लिए बुनियादी ढांचे में सुधार, अनुसंधान एवं नवाचार सुविधाएं, एक सुव्यवस्थित सिंगल-विंडो क्लीयरेंस मैकेनिज्म और सिंप्लिफाई अप्रूवल्स की व्यवस्था करने का सुझाव दिया।

इसके अलावा नॉलेज-बेस्ड इंडस्ट्रीज, आईटी, आईटीईएस और जीसीसी को प्रोत्साहित करने के साथ यशोभूमि और भारत मंडपम जैसे प्रमुख कन्वेंशन और एग्जीबिशन इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ उठाने पर जोर दिया गया।

TOD पॉलिसी और 5-स्टार होटल

निवेश और विकास को रफ्तार देने के लिए विभिन्न विभागों ने अपनी तैयारियों की जानकारी साझा की। डीडीए के उपाध्यक्ष ने बताया कि भविष्य के निवेश के लिए जमीन उपलब्ध करा दी गई है। हाल ही में उपराज्यपाल के मार्गदर्शन में तैयार की गई ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) पॉलिसी के तह टीओडी समिति पात्र परियोजनाओं के लिए सिंगल-पॉइंट और समयबद्ध मंजूरी की सुविधा प्रदान कर रही है। दिल्ली सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग) ने आश्वासन दिया कि द्वारका और दिल्ली में निवेश के लिए बड़ा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार चल रहा है।

इसके तहत एक नई औद्योगिक नीति तैयार की जा रही है और विभागों के बीच मंजूरी प्रक्रियाओं को इंटिग्रेट किया जा रहा है। दिल्ली सरकार के पर्यटन सचिव ने बताया कि दिल्ली की इवनिंग इकोनॉमी को बढ़ावा देने और पर्यटन को आकर्षित करने के लिए अर्बन डेस्टिनेशन डेवलप किए जा रहे हैं। आईटीपीओ (ITPO) के प्रबंध निदेशक ने कहा कि दिल्ली के हॉस्पिटैलिटी इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए फाइव-स्टार होटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर विचार किया जा रहा है।

विकसित दिल्ली की ओर बढ़ते कदम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए उपराज्यपाल ने अंत में दोहराया कि प्रशासन एक पारदर्शी, कुशल और निवेशक-अनुकूल इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह केंद्रित है। यह पहल सतत विकास को गति देगी, बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करेगी और दिल्ली के विकसित दिल्ली बनने के सफर को और मजबूत करेगी।

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दिल्ली में DDA ने TOD प्रोजेक्ट्स के लिए खोला ऑनलाइन सिंगल-विंडो, अब इस 207 Sq Km क्षेत्र में मेट्रो-रैपिड रेल रूट के पास बनेंगे टावर्स और सस्ते घर

Delhi: दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने अपनी ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीति के तहत जमीन विकसित करने की योजना को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक डीडीए ने इसके लिए डेवलपर संस्थाओं को आमंत्रित करने की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू कर दी है। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के मार्गदर्शन में तैयार की गई संशोधित टीओडी नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए डीडीए ने ऑनलाइन बिल्डिंग परमिट सिस्टम (OBPS) के जरिए आवेदन प्रक्रिया को खोल दिया है। इस नीति के जरिए दिल्ली के एक बड़े हिस्से का कायाकल्प होगा और किफायती आवास के साथ-साथ आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास होगा।

दिल्ली का 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र होगा विकसित

DDA के मुताबिक इस नीति के लागू होने से दिल्ली का 207 वर्ग किलोमीटर का एक विशाल क्षेत्र विकास के लिए खुल जाएगा। इस दायरे में मिक्स्ड लैंड यूज एरिया, ऑफिस स्पेस, गेस्ट हाउस और स्टूडियो अपार्टमेंट्स जैसे इंफ्रा डेवलप किए जा सकेंगे।

मेट्रो और रैपिड रेल रूट के पास क्या है योजना?

टीओडी नीति के तहत दिल्ली में परिवहन गलियारों के आसपास के क्षेत्रों को योजनाबद्ध विकास और पुनर्विकास के लिए चिन्हित किया गया है। मेट्रो कॉरिडोर की बात करें तो मेट्रो लाइनों के दोनों तरफ 500 मीटर का दायरा इसके लिए तय किया गया है। इसी तरह रैपिड रेल स्टेशनों के चारों तरफ 500 मीटर के रेडियस को नियोजित विकास के लिए चिन्हित किया गया है। इसका उद्देश्य है कि इन क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से किफायती आवास और उससे जुड़े बुनियादी ढांचे को तैयार किया जाए। अधिकारियों का मानना है कि इससे न सिर्फ लोगों के रहने की स्थिति बेहतर होगी बल्कि मेट्रो की राइडरशिप भी बढ़ेगी।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: अब सिंगल-विंडो क्लीयरेंस

डीडीए ने बताया कि यह नीति ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देती है। इसके तहत परियोजनाओं की मंजूरी के लिए एक बेहद सरल और सिंगल-विंडो क्लीयरेंस व्यवस्था बनाई गई है। जमीन विकसित करने के इच्छुक किसी भी व्यक्ति या डेवलपर इकाई को शुल्क के साथ सिर्फ एक पॉइंट पर मंजूरी के लिए आवेदन करना होगा। डेवलपर्स को अब दिल्ली नगर निगम, दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली फायर सर्विस जैसी अलग अलग एजेंसियों के पास अलग से चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी।

TOD कमेटी करेगी फैसला

डेवलपर्स को सबसे पहले डीडीए के ऑनलाइन बिल्डिंग परमिट सिस्टम के माध्यम से आवेदन करना होगा ताकि टीओडी समिति द्वारा टीओडी प्लॉटों को मंजूरी दी जा सके। यह समिति डीडीए के उपाध्यक्ष के तहत काम करती है। टीओडी समिति द्वारा स्वीकृत परियोजनाओं के बिल्डिंग प्लान को अंतिम मंजूरी के लिए ओबीपीएस के माध्यम से डीडीए के पास जमा करना होगा।

मौजूदा और प्रस्तावित दोनों रूटों पर मिलेगी छूट

डीडीए के बयान के मुताबिक इस नीति में काफी फ्लेक्सिबिलिटी दी गई है। यह नीति अभी चालू मेट्रो कॉरिडोर और रेलवे स्टेशनों के साथ-साथ भविष्य में प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर के आसपास भी टीओडी विकास की अनुमति देती है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि नए मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण के साथ-साथ ही इन क्षेत्रों में रियल एस्टेट और बुनियादी ढांचे का विकास भी साथ के साथ हो सकेगा।

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DDA Housing Scheme: दिल्ली में अपना घर खरीदने का सुनहरा मौका! DDA दे रहा है बंपर डिस्काउंट पर फ्लैट्स, 30 जून से पहले ऐसे करें अप्लाई

DDA Housing Scheme 2026: अगर आप भी देश की राजधानी दिल्ली में अपना घर खरीदने का सपना देख रहे हैं, लेकिन महंगी कीमतों की वजह से कदम पीछे खींच रहे थे, तो आपके लिए एक बेहतरीन मौका है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की दो जबरदस्त हाउसिंग स्कीम्स इस समय चालू हैं, जिनमें फ्लैट्स पर भारी छूट मिल रही है।

दोनों ही स्कीम्स में फ्लैट्स का अलॉटमेंट ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर किया जा रहा है। यानी जो जितनी जल्दी आवेदन करेगा, उसकी घर पाने की उम्मीद उतनी ही ज्यादा होगी। इन दोनों स्कीम्स में अप्लाई करने की आखरी तारीख 30 जून 2026 है। आइए जानते हैं इन स्कीम्स की पूरी डिटेल और बुकिंग का तरीका।

स्कीम 1: डीडीए नागरिक आवास योजना 2026 (25% का फ्लैट डिस्काउंट)

यह स्कीम उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो किफायती दामों में फ्लैट चाहते हैं। इस योजना के तहत नरेला और सिरसपुर में फ्लैट्स पर सीधे 25% की भारी छूट दी जा रही है।

कहां और कितने फ्लैट्स हैं?: नरेला में कुल 3,245 फ्लैट्स उपलब्ध हैं, जो सभी चार इनकम कैटेगरी- हायर इनकम ग्रुप(HIG), मिडल इनकम ग्रुप(MIG), लोअर इनकम ग्रुप(LIG) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग(EWS) के लिए हैं। इसके अलावा सिरसपुर में 411 LIG फ्लैट्स भी बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।

रजिस्ट्रेशन फीस: अप्लाई करने के लिए आपको DDA के आवास पोर्टल पर जाना होगा और 2,500 रुपये की नॉन-रिफंडेबल रजिस्ट्रेशन फीस देनी होगी।

कैटेगरी के हिसाब से बुकिंग अमाउंट

स्कीम 2: डीडीए टावरिंग हाइट्स कड़कड़डूमा 2026 (प्रीमियम लोकेशन)

यह स्कीम उन खरीदारों के लिए है जो पूर्वी दिल्ली में एक शानदार और कनेक्टेड लोकेशन पर घर चाहते हैं। कड़कड़डूमा में व्यक्तिगत खरीदारों के लिए 741 टू-बीएचके (2 BHK) फ्लैट्स उपलब्ध हैं। यह प्रोजेक्ट दिल्ली के पहले ‘ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट’ (TOD) प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसका सीधा मतलब है कि आपको मजबूत मेट्रो और बेहतरीन रोड कनेक्टिविटी सीधे आपके दरवाजे पर मिलेगी।

पैसा देने का फॉर्मूला: इस स्कीम के लिए बुकिंग अमाउंट 4 लाख रुपये है। अलॉटमेंट के समय खरीदारों को फ्लैट की कुल कीमत का 75% हिस्सा एडवांस देना होगा और बाकी बचा 25% हिस्सा पजेशन के समय देना होगा।

स्कीम 1: डीडीए नागरिक आवास योजना 2026 (25% का फ्लैट डिस्काउंट)

DDA फ्लैट्स के लिए ऑनलाइन अप्लाई कैसे करें?

आवेदन करने की प्रक्रिया बेहद आसान और पूरी तरह डिजिटल है:

  1. सबसे पहले दिल्ली विकास प्राधिकरण के आधिकारिक DDA Awaas Portal पर जाएं।
  2. पोर्टल पर खुद को रजिस्टर करें और अपनी पसंद की स्कीम को चुनें।
  3. अपनी कैटेगरी के हिसाब से तय बुकिंग अमाउंट का ऑनलाइन भुगतान (Net Banking/UPI/Card) करें।
  4. मांगे गए जरूरी दस्तावेज जैसे- आधार कार्ड, पैन कार्ड, इनकम प्रूफ आदि अपलोड करें और फॉर्म सबमिट कर दें।

काम की सलाह: चूंकि दोनों ही योजनाएं ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर चल रही हैं, इसलिए 30 जून की आखिरी तारीख का इंतजार बिल्कुल न करें। अपनी पसंद का फ्लैट लॉक करने के लिए तुरंत आवेदन करें।

Indian Citizenship Proof: ‘मेरे भारतीय होने का आखिर सबूत क्या है?’; पासपोर्ट को लेकर MEA के बयान से छिड़ी बहस, सोशल मीडिया पर उठे सवाल

Indian Citizenship Proof: पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर विदेश मंत्रालय (MEA) की ओर से दिए गए एक बयान ने सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छेड़ दी है। MEA ने कहा है पासपोर्ट का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुगम बनाना है। यह एक यात्रा दस्तावेज (Travel Document) है, न कि नागरिकता का अंतिम प्रमाण…। फिलहाल MEA के बयान ने एक बार फिर यह सवाल राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है कि आखिर भारतीय नागरिकता का सबसे मजबूत और निर्विवाद सबूत क्या माना जाना चाहिए।

इस बयान के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि यदि पासपोर्ट, आधार कार्ड और वोटर आईडी भी नागरिकता का प्रमाण नहीं हैं, तो आखिर भारतीय नागरिक होने का सबूत क्या माना जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में पहचान (Identity), निवास (Residence) और नागरिकता (Citizenship) तीन अलग-अलग कानूनी अवधारणाएं हैं।

लेकिन आम लोगों के लिए ये अक्सर एक-दूसरे से जुड़ी हुई दिखाई देती हैं। यही कारण है कि जब आधार, वोटर आईडी और पासपोर्ट जैसे डॉक्यूमेंट की कानूनी स्थिति पर चर्चा होती है, तो नागरिकता को लेकर भ्रम और बहस पैदा हो जाती है।

सोशल मीडिया यूजर्स के रिएक्शन

MEA के बयान के बाद कई यूजर्स ने इसे विरोधाभासी बताते हुए कहा कि भारतीय पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है। पासपोर्ट जारी करने से पहले दस्तावेजों की जांच और पुलिस सत्यापन भी किया जाता है। ऐसे में यदि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो नागरिकता साबित करने के लिए कौन-सा दस्तावेज पर्याप्त माना जाएगा?

एक यूजर ने X पर लिखा, “अगर पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, आधार नहीं है और वोटर आईडी भी नहीं है, तो फिर भारतीय होने का सबूत आखिर क्या है?” वहीं, एक अन्य यूजर ने तंज कसते हुए कहा, “लगता है अब नागरिकता साबित करने के लिए माथे पर अपनी मातृभाषा में टैटू बनवाना पड़ेगा।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “MEA के मुताबिक पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाणपत्र नहीं है और सिर्फ यात्रा करने के लिए जारी किया गया डॉक्यूमेंट है। तो भाई, इतनी जांच के बाद पासपोर्ट जारी करते वक्त उसमें नेशनैलिटी के आगे जो इंडियन लिखा होता है वो फिर क्या देख के या चेक करके लिखा होता है? गजबे है।”

वहीं, एक अन्य यूजर ने भी मजाकिया अंदाज में लिखा, “आधार नागरिकता के लिए पहचान पत्र नहीं है। पासपोर्ट नागरिकता के लिए पहचान पत्र नहीं है…। लेकिन इन दोनों के माध्यम से देश में हर दस्तावेज बना सकते है। हर दस्तावेज…। अजब सिस्टम की गजब कहानी!”

आधार और वोटर आईडी पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल

पासपोर्ट को लेकर बहस ऐसे समय में सामने आई है जब अदालतें भी कई बार स्पष्ट कर चुकी हैं कि कुछ दस्तावेज पहचान और निवास का प्रमाण तो हो सकते हैं। लेकिन नागरिकता का नहीं…। सुप्रीम कोर्ट ने पहले आधार कार्ड को केवल पहचान का दस्तावेज माना था, लेकिन नागरिकता का नहीं। इसी तरह 2025 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक कथित बांग्लादेशी नागरिक की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि आधार कार्ड और वोटर आईडी अपने आप में भारतीय नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं हैं।

पासपोर्ट पर क्या लिखा होता है?

बहस के दौरान कई लोगों ने यह भी याद दिलाया कि भारतीय पासपोर्ट पर स्पष्ट रूप से लिखा होता है कि यह भारत सरकार की संपत्ति (Property of the Government of India) है। सरकार के निर्देश पर इसे वापस लिया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पासपोर्ट जारी करने के लिए नागरिकता की जांच की जाती है। लेकिन इसका कानूनी उद्देश्य मुख्य रूप से यात्रा और अंतरराष्ट्रीय पहचान सुनिश्चित करना है।

फिर नागरिकता कैसे साबित होती है?

भारत में नागरिकता साबित करने के लिए कोई एक आधिकारिक ‘सिटिजनशिप कार्ड’ नहीं है। नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 और उससे संबंधित नियमों के आधार पर किया जाता है। परिस्थिति के अनुसार नीचे दिए गए निम्न दस्तावेज नागरिकता संबंधी दावे को मजबूत कर सकते हैं:-

  • जन्म प्रमाण पत्र
  • माता-पिता की नागरिकता संबंधी दस्तावेज
  • नागरिकता प्रमाण पत्र (यदि रजिस्ट्रेशन या प्राकृतिककरण के माध्यम से नागरिकता प्राप्त हुई हो)
  • सरकारी रिकॉर्ड और अन्य वैधानिक दस्तावेज
  • अंतिम फैसला संबंधित प्राधिकरण या अदालत उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर करता है।

E-पासपोर्ट पर सरकार का जोर

इस बीच, भारतीय विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट सर्विस के आधुनिकीकरण की दिशा में उठाए गए कदमों की भी जानकारी दी है। मंत्रालय के अनुसार, चिप से लैस ई-पासपोर्ट (e-Passport) का विस्तार तेजी से किया जा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं।

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इन ई-पासपोर्ट में सुरक्षा तकनीक, बेहतर प्रमाणीकरण सिस्टम और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे DigiLocker के साथ इंटीग्रेशन की सुविधा दी गई है। सरकार का दावा है कि इससे पासपोर्ट आवेदन प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनेगी।

DDA Housing Scheme 2026: दिल्‍ली की सस्ता फ्लैट लेने का सुनहरा मौका! पाएं 25% का विशेष डिस्काउंट, आज ही अपना ड्रीम होम बुक करें!

DDA Housing Scheme 2026: देश की राजधानी दिल्ली में अपना घर खरीदने का सपना देख रहे लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने नागरिक आवास योजना 2026 के तहत रेडी-टू-मूव फ्लैट्स पर 25 प्रतिशत तक का स्पेशल डिस्काउंट देने की घोषणा की है। इच्छुक खरीदार ऑनलाइन बुकिंग के जरिए ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं। योजना के तहत आवासों का आवंटन ‘फर्स्ट कम, फर्स्ट सर्व’ (FCFS) आधार पर किया जाएगा। आवेदन की आखिरी तारीख 30 जून 2026 निर्धारित की गई है।

दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने राजधानी में किफायती और तैयार आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नागरिक आवास योजना 2026 को आकर्षक ऑफर के साथ पेश किया है। योजना के तहत पात्र खरीदारों को चयनित रेडी-टू-मूव फ्लैट्स पर 25 प्रतिशत तक की विशेष छूट दी जा रही है, जिससे घर खरीदने की लागत में बड़ी कमी आएगी।

DDA के अनुसार, योजना में शामिल सभी आवास तत्काल रहने योग्य हैं और खरीदारों को निर्माण पूरा होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। ऑनलाइन अप्लाई और बुकिंग की सुविधा के कारण लोग घर बैठे ही अपनी पसंद के फ्लैट का चयन कर सकते हैं। यह योजना दिल्ली में घर खरीदने की इच्छा रखने वाले हजारों परिवारों के लिए एक बड़ा अवसर मानी जा रही है।

तुरंत करें अप्लाई

योजना के तहत आवासों का आवंटन ‘फर्स्ट कम, फर्स्ट सर्व’ (FCFS) सिस्टम के माध्यम से किया जाएगा। इसका मतलब है कि जो आवेदक पहले आवेदन और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करेंगे, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर आवास आवंटित किए जाएंगे। ऐसे में इच्छुक लोगों को जल्द आवेदन करने की सलाह दी गई है। DDA का कहना है कि सीमित संख्या में आवास उपलब्ध हैं। विशेष छूट का लाभ भी निर्धारित अवधि तक ही मिलेगा। नरेला और सिरसपुर में स्थित इन फ्लैट्स के लिए ऑनलाइन बुकिंग शुरू हो चुकी है। आवंटन ‘फर्स्ट कम, फर्स्ट सर्व’ (FCFS) आधार पर किया जाएगा।

मीडियम क्लास के लोगों को लिए शानदार मौका

DDA की यह योजना खास तौर पर मध्यम वर्गीय परिवारों, नौकरीपेशा लोगों और पहली बार घर खरीदने वालों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है। प्राधिकरण ने नागरिकों से अपील की है कि वे योजना की अंतिम तिथि 30 जून 2026 से पहले आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें, ताकि वे रियायती दरों पर अपना घर खरीदने के अवसर का लाभ उठा सकें। सीमित संख्या में आवास उपलब्ध हैं। अपने सपनों का घर पाने का यह सुनहरा अवसर हाथ से न जाने दें।

हाउसिंग स्कीम की बड़ी बातें

फ्लैट पर 25% तक का विशेष डिस्काउंट

रेडी-टू-मूव फ्लैट्स उपलब्ध

ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा

FCFS आधार पर आवंटन

सीमित संख्या में आवास

आवेदन की आखिरी तारीख: 30 जून 2026

कितने फ्लैट्स हैं?

DDA की हाउसिंग स्कीम 2026 के तहत राजधानी में विभिन्न आय वर्गों के लिए कुल 1,712 फ्लैट्स उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें नरेला में 1,301 और सिरसपुर में 411 फ्लैट्स शामिल हैं। फ्लैट्स की कैटेगरी संख्या देखें तो हाई इनकम ग्रुप (HIG) के 298, मिडिल इनकम ग्रुप (MIG) के 459, लो इनकम ग्रुप (LIG) के 892 और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के 63 फ्लैट्स उपलब्ध हैं।

कीमत

कीमतों की बात करें तो EWS कैटेगरी के फ्लैट 9.60 लाख रुपये से शुरू होते हैं। LIG फ्लैट्स की कीमत 11.5 लाख से 15.3 लाख रुपये के बीच है। वहीं, MIG फ्लैट्स 66 लाख से 82 लाख रुपये और HIG फ्लैट्स 95 लाख रुपये से 1.13 करोड़ रुपये तक उपलब्ध हैं। बुकिंग के लिए आवेदकों को कैटेगरी के अनुसार एडवांस राशि जमा करनी होगी।

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HIG फ्लैट के लिए 10 लाख रुपये, MIG के लिए 4 लाख रुपये, LIG के लिए 1 लाख रुपये और EWS कैटेगरी के लिए 50 हजार रुपये बुकिंग अमाउंट निर्धारित किया गया है। इसके अलावा सभी आवेदकों को DDA आवास पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के लिए 2,500 रुपये की एकमुश्त और गैर-वापसी योग्य (नॉन-रिफंडेबल) फीस भी जमा करनी होगी। इच्छुक खरीदारों को लास्ट डेट से पहले आवेदन करने की सलाह दी गई है।