लगातार दूसरे दिन सोने की चमक पड़ी फीकी, चांदी में भी छाई सुस्ती

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सोने और चांदी की कीमत में शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट देखने को मिली। इससे सोने का दाम 1.45 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी का दाम 2.32 लाख रुपए प्रति किलो से नीचे आ गया है। 

इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम 3,123 रुपए कम होकर 1,44,970 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,48,093 रुपए प्रति 10 ग्राम था।

22 कैरेट सोने का दाम 1,35,653 रुपए प्रति 10 ग्राम से कम होकर 1,32,793 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है। 18 कैरेट सोने की कीमत कम होकर 1,08,728 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है, जो कि पहले 1,11,070 रुपए प्रति 10 ग्राम थी।

सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है।

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चांदी का दाम 8,218 रुपए कम होकर 2,31,93 रुपए प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 2,40,191 रुपए प्रति किलो था।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। कॉमेक्स पर सोना 1.68 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,174.47 डॉलर प्रति औंस और चांदी 2.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 64.91 डॉलर प्रति औंस पर थी।

एलकेपी सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी ने कहा कि फेडरल रिजर्व की ओर से 2026 में ब्याज दरें एक बार बढ़ाने के संकेत के बाद सोने की कीमतों पर दबाव देखने को मिल रहा है। इससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ और सोने जैसी बिना रिटर्न वाली संपत्तियों का आकर्षण कम हो गया। फेड के सख्त रुख के कारण बुलियन बाजारों में बड़े पैमाने पर प्रॉफिट बुकिंग देखी गई।

उन्होंने आगे कहा कि फेड की पॉलिसी के ऐलान के बाद पिछले कुछ सेशन में कॉमेक्स गोल्ड की कीमत लगभग 4375 डॉलर प्रति औंस से गिरकर 4150 डॉलर प्रति औंस हो गई है, जबकि एमसीएक्स गोल्ड का दाम लगभग 1,54,000 रुपए से घटकर 1,47,200 रुपए पर आ गया। डॉलर के मजबूत होने की संभावना और ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदों का असर मार्केट सेंटीमेंट पर पड़ रहा है।

Pic Credit : ANI

Stock Market Fall: 5 दिन बाद गिरावट की दस्तक, सेंसेक्स 607 अंक फिसला; लेकिन निवेशकों की दौलत ₹49543 करोड़ बढ़ी

5 दिन तेजी दर्ज करने के बाद शुक्रवार, 19 जून को शेयर बाजार में ​गिरावट रही। सेंसेक्स 607.08 अंक टूटकर 76,802.90 पर और निफ्टी 154.90 अंकों की गिरावट के साथ 24,013.10 पर बंद हुआ। हालांकि इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 49543 करोड़ रुपये से ज्यादा बढ़ गया। दिन में सेंसेक्स पिछली क्लोजिंग से 940.26 अंक तक टूटा और 76,469.72 का लो देखा। निफ्टी 266.1 अंक तक लुढ़ककर 23,901.90 के लो तक गया।

गुरुवार, 18 जून को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,77,04,016.033 करोड़ रुपये रहा था। शुक्रवार को मार्केट बंद होने पर यह 4,77,53,559.57 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। यानि कि 49543.537 करोड़ रुपये का इजाफा।

एक दिन पहले गुरुवार को शेयर बाजारों में लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में तेजी रही थी। सेंसेक्स 254.36 अंक चढ़कर 77,409.98 पर बंद हुआ था। निफ्टी 82.30 अंक चढ़कर 24,168 पर बंद हुआ था। 5 कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स में कुल 3,577.43 अंकों और निफ्टी में 1,006.4 अंकों की बढ़त दर्ज की गई।

क्यों गिरा बाजार

शेयर बाजार में गिरावट की एक वजह यह रही कि IT शेयरों में बिकवाली का भारी दबाव दिखा। Nifty IT इंडेक्स 3 प्रतिशत से ज्यादा टूटा। इंफोसिस में 6.5 प्रतिशत और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में 3 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की सेलिंग, प्रॉफिट बुकिंग, दूसरे एशियाई बाजारों की कमजोरी की वजह से भी घरेलू शेयर बाजार लाल निशान में आ गए।

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रुपये की चाल

रुपया 19 जून को 6 पैसे मजबूत होकर 94.34 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। एक दिन पहले अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 10 पैसे की मजबूती के साथ 94.40 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

दूसरे एशियाई बाजारों की चाल

अन्य एशियाई बाजारों में हेंग सेंग 1.6 प्रतिशत गिरा है। सेट कंपोजिट में लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट है। शंघाई कंपोजिट और कॉस्पी भी नीचे आया है। वहीं निक्केई 225 फ्लैट है। हालांकि अमेरिकी बाजार हरे निशान में बंद हुए हैं। यूरोपीय बाजारों में भी तेजी है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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5 दिन तेजी दर्ज करने के बाद शुक्रवार, 19 जून को शेयर बाजार में ​गिरावट रही। सेंसेक्स 607.08 अंक टूटकर 76,802.90 पर और निफ्टी 154.90 अंकों की गिरावट के साथ 24,013.10 पर बंद हुआ। हालांकि इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 49543 करोड़ रुपये से ज्यादा बढ़ गया। दिन में सेंसेक्स पिछली क्लोजिंग से 940.26 अंक तक टूटा और 76,469.72 का लो देखा। निफ्टी 266.1 अंक तक लुढ़ककर 23,901.90 के लो तक गया।

गुरुवार, 18 जून को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,77,04,016.033 करोड़ रुपये रहा था। शुक्रवार को मार्केट बंद होने पर यह 4,77,53,559.57 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। यानि कि 49543.537 करोड़ रुपये का इजाफा।

एक दिन पहले गुरुवार को शेयर बाजारों में लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में तेजी रही थी। सेंसेक्स 254.36 अंक चढ़कर 77,409.98 पर बंद हुआ था। निफ्टी 82.30 अंक चढ़कर 24,168 पर बंद हुआ था। 5 कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स में कुल 3,577.43 अंकों और निफ्टी में 1,006.4 अंकों की बढ़त दर्ज की गई।

क्यों गिरा बाजार

शेयर बाजार में गिरावट की एक वजह यह रही कि IT शेयरों में बिकवाली का भारी दबाव दिखा। Nifty IT इंडेक्स 3 प्रतिशत से ज्यादा टूटा। इंफोसिस में 6.5 प्रतिशत और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में 3 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की सेलिंग, प्रॉफिट बुकिंग, दूसरे एशियाई बाजारों की कमजोरी की वजह से भी घरेलू शेयर बाजार लाल निशान में आ गए।

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रुपये की चाल

रुपया 19 जून को 6 पैसे मजबूत होकर 94.34 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। एक दिन पहले अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 10 पैसे की मजबूती के साथ 94.40 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

दूसरे एशियाई बाजारों की चाल

अन्य एशियाई बाजारों में हेंग सेंग 1.6 प्रतिशत गिरा है। सेट कंपोजिट में लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट है। शंघाई कंपोजिट और कॉस्पी भी नीचे आया है। वहीं निक्केई 225 फ्लैट है। हालांकि अमेरिकी बाजार हरे निशान में बंद हुए हैं। यूरोपीय बाजारों में भी तेजी है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Jio Platforms का आएगा मेगा आईपीओ, कंपनी आज सेबी के पास डीआरएचपी फाइल करेगी

रिलायंस इंडस्ट्रीज चेयरमैन एवं एमडी मुकेश अंबानी ने 19 जून को बड़ा ऐलान किया। उन्होंने आरआईएल की 49वी एजीएम में कहा कि जियो प्लेटफॉर्म्स के बोर्ड ने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्ट्स (DRHP) को मंजूरी दे दी है। इसे आज यानी 19 जून को सेबी के पास फाइल कर दिया जाएगा।

आकाश, ईशा और अनंत जियो प्रोसेस को आगे बढ़ा रहे

अंबानी ने 19 जून को RIL के एजीएम को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने शेयर्ड ग्रोथ यानी साझा विकास के धीरूभाई अंबानी की विरासत को आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा, “आकाश, ईशा और अनंत जियो के आईपीओ के प्रोसेस को आगे बढ़ा रहे हैं। इससे भविष्य में अगली पीढी की वैल्यू क्रिएशन के मौके बनेंगे।”

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जियो ने वॉयसेज को ग्राहकों के लिए फ्री किया

अंबानी ने कहा कि 10 साल पहले जियो ने भारत में डिजिटल असमानता खत्म करने के मकसद के साथ शुरुआत की थी। तब वॉयसेज बहुत महंगे थे। डेटा के लिए बड़ी कीमत चुकानी पड़ती थी और स्पीड और क्वाविलीट काफी खराब थी। जियो ने वॉयस को फ्री कर दिया। हाई स्पीड डेटा को सस्ता बना दिया।

जियो प्लेटफॉर्म्स अगली पीढ़ी के मिशन की तैयारी में

आरआईएल के चेयरमैन ने कहा कि जियो ने जियो ने हर भारतीय के लिए डिजिटल लाइफ को मुमकिन बनाया है। अब कंपनी अगली पीढी के बड़े मिशन की तैयारी कर रही है। जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ का काफी समय से इंतजार हो रहा था। 19 जून को यह इंतजार खत्म हो गया।

जियो प्लेटफॉर्म्स देश का सबसे बड़ा आईपीओ हो सकता है

जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ देश के सबसे बड़े आईपीओ में से एक होगा। इस मेगा आईपीओ को इनवेस्टर्स का जबर्दस्त रिस्पॉन्स मिल सकता है। रायटर्स ने इस साल जनवरी में कहा था कि यह आईपीओ 4 अरब डॉलर का हो सकता है। इसका मतलब है कि यह 36,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का होगा। इस तरह यह देश का सबसे बड़ा आईपीओ बन सकता है।

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अमेरिका में करोड़ों की कंपनी चलाने वाली हिमाक्षी की दादी को उनके काम से ज्यादा शादी की चिंता! गजब का वीडियो शेयर किया

न्यूयॉर्क में रहने वाली एक सीनियर बिज़नेस एग्जीक्यूटिव का परिवार से जुड़ा एक ऐसा अनुभव सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिससे शादी, सफलता और महिलाओं से जुड़ी पीढ़ियों की उम्मीदों पर एक बड़ी बहस छिड़ गई है।

‘प्रिया ग्रोन डायमंड्स’ की प्रेसिडेंट हेमाक्षी मोटका ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया। इसमें उन्होंने बताया कि भारत में उनकी दादी हाल ही में एक कम्युनिटी इवेंट से निराश होकर लौटीं। इस इवेंट में शहर की सिर्फ़ शादीशुदा बेटियों को ही कंबल बांटे गए थे। चूंकि मोटका की शादी नहीं हुई है, इसलिए उनकी दादी उनके लिए कंबल नहीं ले पाईं।

अब वायरल हो रहे वीडियो में घटना के बारे में बताते हुए मोटका ने कहा- “मेरी दादी इसलिए दुखी हैं क्योंकि वह एक कार्यक्रम में गई थीं, जहां शहर की सभी शादीशुदा बेटियों को कंबल दिए जा रहे थे, और उन्हें कंबल नहीं मिल पाया क्योंकि मेरी शादी नहीं हुई है।”

इंटरनेट को यकीन नहीं हो रहा था कि उनकी दादी की निराशा की वजह यही थी, लेकिन अलग-अलग पीढ़ियां चीज़ों को अलग-अलग नज़रिए से देखती हैं। उन्होंने कहा, “तो मैं यहां न्यूयॉर्क शहर में सचमुच एक मल्टी-मिलियन डॉलर की कंपनी चला रही हूं। मैंने मैराथन भी दौड़ी है – 42 किलोमीटर की। फिर भी, एक कंबल के सामने मेरी ये सारी उपलब्धियां फीकी पड़ गईं।”

हालांकि कई दर्शकों को इस स्थिति की विडंबना पर हंसी आई, लेकिन मोटका ने कहा कि इस घटना ने उन्हें इस बारे में गहराई से सोचने पर मजबूर किया कि कैसे अक्सर महिलाओं को अपनी खुशी और आज़ादी के बजाय दूसरों की मंज़ूरी और पारंपरिक पड़ावों को ज़्यादा अहमियत देने के लिए तैयार किया जाता है।

वीडियो के साथ लिखे कैप्शन में उन्होंने कहा- “और भले ही मुझे हंसी आई, लेकिन इसने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया। महिलाओं के तौर पर, हमें अक्सर उन पलों का जश्न मनाना सिखाया जाता है जब हमें चुना जाता है। जैसे प्रपोज़ल, शादी या मंज़ूरी मिलना। लेकिन आपका असली दम खुद को चुनने में है। यह करियर बनाने, जोखिम उठाने, खुद पैसे कमाने और ऐसी ज़िंदगी बनाने का आत्मविश्वास है जिस पर आपको गर्व हो। क्योंकि पद और दूसरों की राय बदल सकती है। खुद के साथ आपका रिश्ता हमेशा बना रहता है। कंबल अच्छा होता है, लेकिन आत्मविश्वास हर जगह आपके साथ रहता है। अपने आत्मविश्वास को अपनाएं।”

उनकी बातों ने सोशल मीडिया यूज़र्स का दिल जीत लिया। कई लोगों ने शादी को लेकर परिवार की उम्मीदों और समाज के दबाव से जुड़े अपने अनुभव भी शेयर किए। कुछ यूज़र्स ने उन्हें इस परंपरा को पूरी तरह से चुनौती देने के लिए प्रोत्साहित किया। एक व्यक्ति ने सुझाव दिया- “एक ऐसा कार्यक्रम आयोजित करें, जिसमें आप अविवाहित बेटियों को कंबल बांटें – कुछ अलग करके दिखाएं।”

वहीं, कुछ लोगों ने दादी के नज़रिए का बचाव करते हुए कहा कि बड़ी उम्र की और युवा महिलाओं की सोच और संस्कृति में बहुत अंतर होता है। एक कमेंट करने वाले ने लिखा, “मैं आपकी दादी को दोष नहीं देता, क्योंकि वे बिल्कुल अलग दौर और पीढ़ी से ताल्लुक रखती हैं… लेकिन मैं आपकी तारीफ़ करता हूं कि आप वही कर रही हैं जो आप चाहती हैं और अपने तरीके से कर रही हैं।”

एक और यूज़र ने कहा कि ऐसी सोच अक्सर निजी फ़ैसले के बजाय सामाजिक माहौल की वजह से बनती है। “आपकी दादी को उनके आस-पास के माहौल ने ऐसा सोचने के लिए तैयार किया था। इसमें उनकी कोई ग़लती नहीं है। अफ़सोस की बात है कि कई महिलाओं को पता ही नहीं होता या उन्हें ज़िंदगी में आगे बढ़ने के मौके नहीं मिलते।”

हालांकि, कुछ प्रतिक्रियाएं मज़ाकिया भी थीं। एक यूज़र ने मज़ाक में कहा- “यह दादी का आपको अगले इवेंट से पहले शादी करने के लिए प्रेरित करने का तरीका है, ताकि उन्हें मुफ़्त में ‘कंबल’ (DHAABLO) मिल सके।”

Accenture Q3 Results: एक्सेंचर के कमजोर नतीजों ने तोड़ी आईटी शेयरों की कमर, अब इस सेक्टर में क्या हो निवेश रणनीति?

Accenture Q3 Results: एक्सेंचर(Accenture) के कमजोर नतीजे और गाइडेंस ने आज आईटी सेक्टर की कमर तोड़ दी है। निफ्टी का आईटी इंडेक्स करीब 6 फीसदी फिसला है। आज निफ्टी और वायदा के सभी टॉप लूजर्स IT शेयर हैं। टेक महिंद्रा,इंफोसिस,TCS और एम्फैसिस 5-8 फीसदी तक लुढ़के हैं। कंपनी के तीसरी तिमाही के नतीजे काफी खराब रहे हैं। इसने अपना आगे का अनुमान भी घटा दिया है।

Accenture Q3 नतीजे (YoY)

तीसरी तिमाही में EPS 3.49 डॉलर से बढ़कर 3.80 डॉलर रहा है। रेवेन्यू 5.6% बढ़कर 18.76 अरब डॉलर रही है। Q3 में आय अनुमान से कम रही है। नई बुकिंग्स 1.9% घटकर 19.32 अरब डॉलर रही हैं। कंसल्टिंग बुकिंग्स 13% बढ़ी हैं। ऑपरेटिंग कैश फ्लो 3.79 अरब डॉलर रहा है। वहीं, मैनेज्ड सर्विसेज बुकिंग्स 15% घटी है। बड़े AI ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम्स बढ़ने की उम्मीद है।

Accenture Q4 गाइडेंस

रेवेन्यू 17.75-18.4 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। रेवेन्यू ग्रोथ 1 से 5% रहने का अनुमान है। रेवेन्यू गाइडेंस 18.47 अरब डॉलर के अनुमान से कम रहा है। Accenture के FY26 आउटलुक की बात करें तो FY26 के लिए आय ग्रोथ अनुमान घटाकर 3-4% कर दिया गया है, जो पहले 3-5% था। फेडरल असर को छोड़कर रेवेन्यू ग्रोथ 4-5% रहने का अनुमान (पहले 4-6% था)हैं। वहीं, Adj EPS आउटलुक बढ़ाकर 13.78-13.90 डॉलर किया गया है। ऑपरेटिंग और फ्री कैश फ्लो आउटलुक बकररार रखा गया है। वेस्ट एशिया युद्ध से रेवेन्यू पर 10 करोड़ डॉलर और सेल्स पर 40 करोड़ डॉलर का असर पड़ा है।

Accenture के नतीजों का असर

गुरुवार को Accenture का शेयर 18 फीसदी गिरा। यह इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट है। Accenture के नतीजों के बाद Cognizant में 10.5 फीसदी, Capgemini में 9 फीसदी, Infosys ADR में 10 फीसदी और Wipro ADR में 4 फीसदी की गिरावट हुई।

IT Stocks : एक्सेंचर के कमजोर गाइडेंस ने मचाया तहलका, निफ्टी IT 6% टूटा, इन्फोसिस और TCS के शेयर में 8% तक फिसले

IT शेयरों में अब क्या हो रणनीति?

सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल में कहा है कि निफ्टी IT मार्च में 28,500 तक गिरा था। वहां से 31,800 की रैली हुई जिसमें हमने फंसने से बचाया। कई लोग उस रैली में बुरी तरह फंस गए थे। उसके बाद वहां से फिर वन-वे गिरावट आई और 14 मई का क्लोज 27,360 था। फिर वहां से 31,116 तक की एक बड़ी रैली हुई जिसमें फिर हमने फंसने से बचाया, फिर भी कुछ लोग उस रैली में बुरे फंस गए। इसके बाद 16 जून तक वाली गिरावट में 27,800 की क्लोजिंग मिली। इस बार ये नजरिया लिया गया कि शायद एक डबल बॉटम बना है। अब जब तक 27,500 के ऊपर हैं,बहुत बड़ी गिरावट शायद ना हो। मगर लार्ज कैप IT से CNBC-आवाज ने हमेशा सतर्क ही किया है।

Accenture के नतीजे से एक बात साफ है कि ट्रेडिशनल IT बिजनेस पर दबाव है। अब IT कंपनियों को कुछ बोल्ड कदम उठाने होंगे। जैसे HCLTech ने Sarvam में निवेश किया और Coforge ने कुछ बड़े अधिग्रहण किए। मगर अब आज की गिरावट के बाद शॉर्ट करना थोड़ा रिस्की होगा। आज की क्लोजिंग साफ कर देगी कि IT में डबल बॉटम बना या नहीं।

 

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INR vs USD: डॉलर के मुकाबले रुपया 94.35 पर खुला, क्रूड में नरमी से मिल रहा सपोर्ट, आगे कैसा रहेगा आउटलुक

INR vs USD:  शुक्रवार, 19 जून को रुपया US डॉलर के मुकाबले 2 पैसे की मामूली गिरावट के साथ 94.35 पर खुला, क्योंकि US फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के बाद घरेलू फ्लो और सेंटिमेंट में सुधार से मजबूत डॉलर के असर को कम करने में मदद मिली।

मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने बताया कि हाल के सेशंस में कैपिटल फ्लो भारतीय करेंसी के लिए तेजी से सपोर्टिव हो गया है। घरेलू डेट मार्केट में मजबूत इनफ्लो, इक्विटी से विदेशी पोर्टफोलियो आउटफ्लो में कमी और इंपोर्टर्स और एक्सपोर्टर्स की बैलेंस्ड भागीदारी ने फॉरेक्स मार्केट में डिमांड-सप्लाई डायनामिक्स को बेहतर बनाने में मदद की है।

बैंकर्स ने बताया कि इंपोर्टर हेजिंग एक्टिविटी अभी भी ऊंची बनी हुई है, लेकिन मार्केट में एकतरफा डॉलर डिमांड से एक साफ बदलाव देखा गया है, जिसने हाल के हफ्तों में रुपये पर दबाव डाला था। इससे पहले, इंपोर्टर्स की तेज खरीदारी और लगातार विदेशी फंड आउटफ्लो ने लोकल करेंसी पर दबाव बनाए रखा था।

रुपये को विदेशी कैपिटल को आकर्षित करने और डॉलर इनफ्लो को बढ़ाने के मकसद से पॉलिसी उपायों से भी फायदा हुआ है। इसके अलावा, US-ईरान शांति समझौते के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट से भारत के इंपोर्ट बिल को लेकर चिंता कम हुई है, जिससे करेंसी को लेकर ओवरऑल सेंटिमेंट बेहतर हुआ है।

मज़बूत इनफ्लो, तेल की कम कीमतों और मार्केट में बढ़ते भरोसे के मेल से US डॉलर में नई मज़बूती के बावजूद रुपया मज़बूत बना हुआ है।

क्रूड में नरमी से मिला रुपये को मजबूत सपोर्ट

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कच्चा तेल अभी भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये के लिए सबसे बड़ा पॉज़िटिव फ़ैक्टर बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड अभी $75–78 प्रति बैरल की रेंज में ट्रेड कर रहा है, जो इस साल की शुरुआत में ईरान संघर्ष से पहले के लेवल पर वापस आ गया है। हालांकि हाल ही में हुए US-ईरान शांति समझौते ने तुरंत सप्लाई की चिंताओं को कम किया है, लेकिन एनालिस्ट एक बड़े स्ट्रक्चरल ट्रेंड की ओर इशारा करते हैं जो तेल की कीमतों को कम रख सकता है।

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) को उम्मीद है कि 2027 तक ग्लोबल तेल सप्लाई लगभग 8 मिलियन बैरल प्रति दिन बढ़ जाएगी, जबकि डिमांड ग्रोथ केवल लगभग 2 मिलियन बैरल प्रति दिन रहने का अनुमान है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सप्लाई-डिमांड के इस बढ़ते अंतर से तेल की कीमतों पर एक नैचुरल लिमिट लग सकती है, जिससे भारत जैसी तेल इंपोर्ट करने वाली इकॉनमी को सपोर्ट मिल सकता है।

पॉजिटिव सेंटिमेंट में यह भी शामिल है कि गल्फ के रास्ते तेल शिपमेंट नॉर्मल हो गए हैं, सऊदी अरब और UAE के टैंकर महीनों की रुकावटों के बाद रेगुलर ऑपरेशन फिर से शुरू कर रहे हैं, जिससे सप्लाई में रुकावटों को लेकर चिंता और कम हो गई है।

बेहतर फंडामेंटल्स के बीच रुपये में रिकवरी जारी

करेंसी स्ट्रैटेजिस्ट्स का कहना है कि तेल की कीमतों में गिरावट पर रुपये ने पॉजिटिव रिस्पॉन्स दिया है, लगातार पांच सेशन तक मजबूत हुआ है और 94.30–94.60 प्रति डॉलर की रेंज में आराम से ट्रेड कर रहा है। यह कुछ हफ्ते पहले देखे गए दबाव से एक बड़ी रिकवरी है, जब क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतों और विदेशी आउटफ्लो ने करेंसी पर दबाव डाला था।

एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि कैपिटल फ्लो में सुधार, इंपोर्ट से जुड़ी डॉलर की कम डिमांड और जियोपॉलिटिकल रिस्क में कमी, इन सभी ने रुपये की हालिया मजबूती में योगदान दिया है।

फेड के सख्त रवैये से डॉलर को मिला सपोर्ट

हालांकि रुपया मजबूत हुआ है, लेकिन एनालिस्ट चेतावनी दे रहे हैं कि फेडरल रिजर्व के पॉलिसी रुख से US डॉलर को सपोर्ट मिलता रहेगा।

US सेंट्रल बैंक ने इंटरेस्ट रेट को 3.50%-3.75% पर बिना किसी बदलाव के रखा, लेकिन पॉलिसी बनाने वालों ने तुलनात्मक रूप से सख्त रुख बनाए रखा, जिसमें कमिटी के लगभग आधे सदस्य अभी भी इस साल कम से कम एक और रेट बढ़ने की उम्मीद कर रहे हैं।

हाल के US इकोनॉमिक डेटा ने भी डॉलर की मजबूती को और मजबूत किया है। शुरुआती बेरोजगारी के दावे कम होकर 226,000 हो गए, जबकि छंटनी अब भी ऐतिहासिक रूप से कम है। हालांकि लगातार दावे बढ़े हैं, एक्सपर्ट्स का कहना है कि लेबर मार्केट तेजी से कमजोर होने के बजाय धीरे-धीरे ठंडा होता दिख रहा है।

इस वजह से, डॉलर को जल्द ही सपोर्ट मिल सकता है, हालांकि मार्केट यह देखना जारी रखेंगे कि क्या महंगाई कम होने और एनर्जी की कीमतों में नरमी से फेड आखिरकार ज्यादा न्यूट्रल रुख अपना पाएगा।

एक्सपर्ट्स का यह भी मानना ​​है कि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया अपने बाहरी बफ़र्स को मज़बूत करने के लिए अच्छे मार्केट हालात का फ़ायदा उठा रहा है। कच्चे तेल की कम कीमतों और बेहतर विदेशी करेंसी इनफ़्लो से रुपये को सपोर्ट मिलने के साथ, RBI से उम्मीद है कि वह फ़ॉरेक्स रिज़र्व को फिर से भरने के लिए एक्टिव रूप से डॉलर खरीदेगा और धीरे-धीरे अपनी बड़ी फ़ॉरवर्ड डॉलर पोज़िशन को कम करेगा, जिसका अनुमान लगभग $110 बिलियन है।

मार्केट पार्टिसिपेंट्स का अनुमान है कि सेंट्रल बैंक ने पिछले कुछ सेशन में मार्केट से $3-5 बिलियन एब्ज़ॉर्ब किए होंगे। एनालिस्ट्स ज़ोर देते हैं कि इस तरह का दखल करेंसी के ट्रैजेक्टरी को लेकर किसी चिंता के बजाय समझदारी भरे रिज़र्व मैनेजमेंट को दिखाता है।

हालांकि ये खरीदारी रुपये की बढ़त की रफ़्तार को कम कर सकती हैं, एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनसे करेंसी की रिकवरी ज़्यादा टिकाऊ होगी और भविष्य के बाहरी झटकों से कम कमज़ोर होगी।

रुपये का आउटलुक

CR फ़ॉरेक्स एडवाइज़र्स के MD, अमित पाबारी के अनुसार, तेल की कीमतें सपोर्टिव बनी हुई हैं, विदेशी इनफ़्लो बेहतर हो रहे हैं, और डॉलर की मज़बूती नए सवालों का सामना कर रही है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

होर्मुज खुला, लेकिन सिर्फ 60 दिन फ्री रहेगा:अमेरिका ₹28 लाख करोड़ देगा, बदले में ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा; समझौते के 14 पॉइंट की पूरी डिटेल

अमेरिका और ईरान ने जंग खत्म करने के समझौते के मसौदे पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने बुधवार देर रात डिजिटल हस्ताक्षर किए, जिसके साथ ही यह समझौता लागू हो गया। इस डील से जुड़े एक अमेरिकी अधिकारी ने बुधवार को रिपोर्टरों के साथ हुई एक कॉन्फ्रेंस कॉल में 14 पॉइंट्स वाली डील की पूरी जानकारी दी है। 800 शब्दों वाले डेढ़ पन्ने के इस दस्तावेज में होर्मुज को सिर्फ 60 दिनों के लिए मुफ्त खोले जाने की बात कही गई है। डील में ईरान ने परमाणु हथियार नहीं बनाने का भरोसा दिया है, जबकि ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर (28 लाख करोड़ रुपए) के फंड की योजना पर भी सहमति बनी है। अधिकारी ने अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर यह जानकारी दी। समझौते के मसौदे में शामिल 14 पॉइंट्स की पूरी डिटेल (क्रम बदल सकते हैं) पॉइंट-1: होर्मुज स्ट्रेट फिर से खोला जाएगा ईरान ने वादा किया है कि वह होर्मुज स्ट्रेट फिर से खोल देगा। यह व्यवस्था 60 दिनों तक लागू रहेगी। इस दौरान जहाजों से एक्स्ट्रा टैक्स नहीं लिया जाएगा। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक इस समझौते की सबसे अहम लाइन है- सिर्फ 60 दिनों तक बिना किसी फीस के। इसका मतलब है कि 60 दिन पूरे होने के बाद ईरान जहाजों पर शुल्क या फीस लगा सकता है। युद्ध से पहले ईरान आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय जहाजों से इस तरह का पैसा नहीं लेता था। अब टैक्स लगाने से वैश्विक समुद्री व्यापार की लागत बढ़ सकती है। पॉइंट-2: ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा समझौते में ईरान ने एक बार फिर भरोसा दिया है कि वह कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और न ही उन्हें हासिल करने की कोशिश करेगा। दस्तावेज में कहा गया है कि ईरान के पास पहले से मौजूद संवर्धित यूरेनियम (एनरिच्ड यूरेनियम) के भंडार का क्या किया जाएगा, इस पर दोनों देश मिलकर फैसला करेंगे। इसके लिए एक अलग व्यवस्था बनाई जाएगी, जिस पर आगे की बातचीत में सहमति बनेगी। फिलहाल न्यूनतम सहमति यह है कि इस संवर्धित सामग्री को ईरान के भीतर ही इस तरह बदला जाएगा कि उससे परमाणु हथियार बनाना संभव न रहे। यह पूरी प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में होगी। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक यह समझौते का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि इसमें पहली बार सीधे ईरान के परमाणु कार्यक्रम की बात की गई है। यही मुद्दा अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और युद्ध की सबसे बड़ी वजह रहा है। हालांकि इस पॉइंट में सबसे विवादित मुद्दों पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है। दस्तावेज में ईरान ने फिर से कहा है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, लेकिन यह कोई नई बात नहीं है। ईरान ने 1970 में परमाणु अप्रसार संधि में शामिल होने के समय भी यही वादा किया था। बाद में 2015 के परमाणु समझौते में भी उसने यही कहा था कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। समझौते में ईरान से कहा गया है कि वह अपने पास मौजूद लगभग 11 टन संवर्धित परमाणु सामग्री को कम घनत्व वाला बनाए। इसे डाउन-ब्लेंडिंग कहा जाता है। इसका मतलब है कि यूरेनियम को इतना पतला कर दिया जाए कि उसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में न हो सके। इन 11 टन सामग्री में करीब 440 किलो ऐसा यूरेनियम भी शामिल है, जिसे 60% तक एनरिच्ड किया जा चुका है। यह स्तर परमाणु बम बनाने के लिए जरूरी स्तर के काफी करीब माना जाता है। लेकिन समझौते में यह नहीं कहा गया है कि ईरान को यह सामग्री देश से बाहर भेजनी होगी। ईरान लंबे समय से अपने यूरेनियम भंडार को विदेश भेजने का विरोध करता रहा है। हालांकि, 2015 के परमाणु समझौते में ईरान ने अपने उस समय के लगभग 97 प्रतिशत एनरिच्ड यूरेनियम भंडार को रूस भेज दिया था। यही कारण है कि अभी कई बड़े सवाल अनसुलझे हैं। जैसे… पॉइंट-3: ईरान को ₹28 लाख करोड़ का हर्जाना अमेरिका ने अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण और विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर, यानी 28 लाख करोड़ रुपए की योजना तैयार करने का वादा किया है। हालांकि, यह पैसा तुरंत नहीं दिया जाएगा। पहले अमेरिका और ईरान को 60 दिनों में अंतिम समझौते पर पहुंचना होगा। इससे ही तय होगा कि 300 अरब डॉलर का फंड कैसे बनाया जाएगा, पैसा कहां से आएगा और उसे किस तरह खर्च किया जाएगा। राष्ट्रपति ट्रम्प पहले ही कह चुके हैं कि इस फंड में अमेरिका सीधे पैसा नहीं लगाएगा। हालांकि, उन्होंने यह संभावना जरूर खुली छोड़ी कि खाड़ी देश, जैसे सऊदी अरब, कतर और UAE इस फंड के लिए पैसा उपलब्ध करा सकते हैं। पॉइंट-4: ईरानी तेल के निर्यात पर छूट समझौते के बाद अमेरिका ईरानी तेल के निर्यात पर राहत देना शुरू कर देगा। इसके लिए अमेरिकी वित्त मंत्रालय जरूरी छूट और मंजूरियां जारी करेगा, ताकि ईरान अपना तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेच सके। यह राहत सिर्फ तेल बेचने तक सीमित नहीं होगी। इसमें बैंकिंग लेन-देन, बीमा, जहाजरानी, माल ढुलाई और अन्य वित्तीय सेवाओं से जुड़ी बाधाओं को भी कम किया जाएगा, जो ईरान के तेल निर्यात में रुकावट बनती रही हैं। यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी, जब तक ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक समझौते का यह हिस्सा ईरान के खिलाफ सख्त रुख रखने वाले नेताओं और विशेषज्ञों के बीच सबसे ज्यादा चिंता का कारण बना हुआ है। उनका मानना है कि तेल निर्यात पर लगी रोक अमेरिका का सबसे प्रभावी दबाव का साधन थी। इसी के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव बना हुआ था। पॉइंट-5: ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटेंगे अमेरिका ने ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को एक-एक करके खत्म करने का वादा किया है। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, अमेरिका ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देकर उसे अपने परमाणु कार्यक्रम पर सख्त शर्तें मानने के लिए तैयार करना चाहता है। माना जा रहा है कि प्रतिबंधों में छूट ही वह सबसे बड़ा फायदा है, जो अमेरिका ईरान को समझौते के बदले दे सकता है। यही व्यवस्था 2015 के परमाणु समझौते में भी अपनाई गई थी। उस समझौते के तहत ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर कई प्रतिबंध स्वीकार किए थे और बदले में उसे आर्थिक प्रतिबंधों से राहत मिली थी। हालांकि उस समझौते में लगी पाबंदियों की अवधि अधिकतम 15 साल थी। लेकिन ट्रम्प का कहना है कि वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर हमेशा के लिए प्रतिबंध चाहते हैं। पॉइंट-6: ईरान की फ्रीज्ड संपत्तियां रिलीज होंगी समझौते के तहत अमेरिका ने वादा किया है कि वह ईरान की फ्रीज्ड संपत्तियों को छोड़ देगा। हालांकि, यह पैसा कब और कैसे जारी होगा, यह दोनों देश बातचीत से तय करेंगे। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक इसका मतलब यह हो सकता है कि अंतिम समझौता होने का इंतजार किए बिना ही ईरान के लिए अरबों डॉलर की रकम जारी होना शुरू हो जाए। अनुमान है कि यह राशि 24 अरब डॉलर या उससे भी अधिक हो सकती है। पॉइंट-7: अमेरिका समुद्री नाकेबंदी हटाएगा ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिका नौसैनिक नाकेबंदी 30 दिन के भीतर पूरी तरह खत्म करेगा। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक नाकेबंद हटने से ईरान फिर से अपने बंदरगाहों से तेल और अन्य सामान खरीद-बेच सकेगा। यह ईरान के लिए बहुत बड़ी और तत्काल राहत होगी, क्योंकि उसके ज्यादातर निर्यात चीन को जाते हैं। जैसे ही निर्यात दोबारा शुरू होगा, ईरान के पास विदेशी मुद्रा आनी शुरू हो जाएगी। पॉइंट-8: एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे अमेरिका-ईरान एक-दूसरे की आजादी, सीमाओं और संप्रभुता का सम्मान करेंगे। घरेलू मामलों में दखल नहीं देंगे। समझौते का यह हिस्सा ईरान के सरकार विरोधी गुटों को पसंद नहीं आ सकता। इन्हें उम्मीद थी कि अमेरिका भविष्य में भी ईरान में राजनीतिक बदलाव या लोकतंत्र समर्थक आंदोलनों का खुलकर समर्थन करेगा। दरअसल, इसी साल ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान ट्रम्प ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए कहा था कि उनकी मदद की जाएगी। लेकिन नए समझौते के मुताबिक माना जा रहा है कि ईरान के अंदरूनी मुद्दों को लेकर अमेरिका का रुख पहले की तुलना में नरम हुआ है। पॉइंट-9: लेबनान समेत सभी मोर्चों पर संघर्ष खत्म होगा अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी देशों के बीच सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तुरंत और स्थायी रूप से बंद की जाएगी। इसमें लेबनान भी शामिल है। अमेरिका के लिए यह मुद्दा इसलिए अहम है, क्योंकि ट्रम्प को चिंता थी कि हिजबुल्लाह के खिलाफ इजराइल की सैन्य कार्रवाई पीस डील को कमजोर कर सकती है। पहला पॉइंट इजराइल के खिलाफ माना जा रहा है। इजराइल पहले ही कह चुका है कि वह अमेरिका-ईरान बातचीत में लेबनान को लेकर हुई किसी भी सहमति को नहीं मानेगा। पॉइंट-10: दोनों पक्ष मौजूदा स्थिति में बदलाव नहीं करेंगे समझौते में कहा गया है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता नहीं हो जाता, तब तक दोनों पक्ष मौजूदा स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं करेंगे। इसका मतलब है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को अभी जिस स्तर पर चला रहा है, उससे आगे नहीं बढ़ाएगा। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि अंतिम समझौते तक दोनों पक्ष कोई नया दबाव न बनाएं। ईरान परमाणु कार्यक्रम नहीं बढ़ाएगा और अमेरिका नए प्रतिबंध या अतिरिक्त सैन्य तैनाती नहीं करेगा। पॉइंट-11: दोनों देश मिलकर निगरानी व्यवस्था बनाएंगे अमेरिका और ईरान मिलकर एक विशेष निगरानी व्यवस्था बनाएंगे, जो यह देखेगी कि MoU की सभी शर्तों का सही तरीके से पालन हो रहा है या नहीं। यह सिस्टम इस बात की जांच करेगा कि: न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका यह तय करना चाहता है कि ईरान के हर वादे की स्वतंत्र रूप से जांच और पुष्टि की जा सके। यानी केवल ईरान के वादे करना पर्याप्त नहीं होगा। पॉइंट-12: तुरंत सभी मुद्दों पर बातचीत शुरू नहीं होगी दोनों देशों को समझौते के कुछ अहम बिंदुओं को लागू करना होगा। इनमें युद्धविराम बनाए रखना, होर्मुज को खोलना, नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, तेल निर्यात पर राहत देना और ईरान की फ्रीज्ड संपत्तियों तक पहुंच बहाल करना जैसे कदम शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इससे पता चलता है कि आगे सबसे बड़ा और सबसे अहम विषय ईरान का परमाणु कार्यक्रम ही होगा। परमाणु गतिविधियों की सीमा क्या होगी, एनरिच्ड यूरेनियम का क्या होगा, मॉनीटरिंग कैसे होगी और प्रतिबंध किस तरह हटाए जाएंगे, जैसे सवाल अभी पूरी तरह तय नहीं हुए हैं। पॉइंट-13: 60 दिनों में अंतिम समझौते का टारगेट अमेरिका-ईरान ने अधिकतम 60 दिनों में समझौता लागू करने का टारगेट रखा है। हालांकि, दोनों देश सहमति से इसे आगे भी बढ़ा सकते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक अमेरिकी अधिकारी मानते हैं कि इतने कम समय में अंतिम समझौते तक पहुंचना आसान नहीं होगा। खासकर इसलिए क्योंकि ईरान के साथ पहले हुई परमाणु बातचीत में कई साल लग चुके हैं। हालांकि, ट्रम्प सरकार ने जानबूझकर यह समय सीमा तय की है। अगर तय समय में यह समझौता हो जाता है, तो अमेरिका में नवंबर में होने वाले मिडटर्म इलेक्शन में राष्ट्रपति ट्रम्प को फायदा हो सकता है। पॉइंट-14: अंतिम समझौते को UNSC मंजूरी देगी जब अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता हो जाएगा, तो उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के एक प्रस्ताव के जरिए मंजूरी दी जाएगी। इसका मतलब है कि अंतिम समझौता केवल अमेरिका और ईरान के बीच का राजनीतिक समझौता नहीं रहेगा, बल्कि उसे अंतरराष्ट्रीय कानूनी मान्यता भी मिल जाएगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे समझौते को मजबूती मिलेगी, जैसा कि पिछले वर्ष गाजा से जुड़े समझौते के मामले में हुआ था, जिसे भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का समर्थन मिला था। हालांकि कई एक्सपर्ट्स को शक है कि यह चरण वास्तव में आएगा भी या नहीं। —————————————- अमेरिका- ईरान से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें अमेरिका-ईरान युद्ध खत्म, ट्रम्प चिल्लाकर बोले- डील साइन:ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान ने डिजिटल दस्तखत किए, पेरिस के वर्साय पैलेस में समझौता अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए अंतरिम समझौते (MoU) पर दस्तखत हो गए हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ने बुधवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बैठक के दौरान पेरिस के वर्साय पैलेस में इस दस्तावेज पर साइन किए। पूरी खबर पढ़ें

वर्ल्ड अपडेट्स:भारत के बेने मेनाशे समुदाय को इजराइल लाएगी नेतन्याहू सरकार

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने घोषणा की है कि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों मिजोरम और मणिपुर में रहने वाले बेने मेनाशे समुदाय के सभी शेष सदस्यों को अगले चार वर्षों में इजराइल लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह समुदाय यहूदी लोगों का अभिन्न हिस्सा है और इजराइल उनका घर है। हाल ही में इजराइल के नोफ हा-गलील शहर में बसे भारतीय मूल के यहूदी प्रवासियों को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मजबूत संबंधों के कारण दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष की शुरुआत से अब तक समुदाय के करीब 600 सदस्य इजराइल पहुंच चुके हैं। वर्ष 2026 के अंत तक लगभग 600 और लोगों के आने की उम्मीद है। बेने मेनाशे का अर्थ है “मनश्शे के पुत्र”। यह समुदाय मुख्य रूप से मिजोरम और मणिपुर में रहता है। समुदाय के लोग सबाथ का पालन, यहूदी त्योहारों का आयोजन, कोषेर भोजन परंपरा और अन्य यहूदी रीति-रिवाजों का पालन करते हैं। वे स्वयं को इजराइल की “दस खोई हुई जनजातियों” में से एक मनश्शे जनजाति का वंशज मानते हैं, जिसे लगभग 2,700 वर्ष पहले असीरियाई साम्राज्य ने निर्वासित कर दिया था। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… पाकिस्तान में सैनिटरी पैड और गर्भनिरोधक प्रोडक्ट्स पर 18% टैक्स खत्म करेगा पाकिस्तान सरकार सैनिटरी पैड और गर्भनिरोधक प्रोडक्ट्स पर लगने वाला 18% सेल्स टैक्स खत्म करने की तैयारी कर रही है। पिछले हफ्ते पेश किए गए बजट में सरकार ने टैक्स हटाने का प्रस्ताव रखा था। पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने कहा कि सैनिटरी प्रोडक्ट्स महिलाओं के स्वास्थ्य, सम्मान और सामाजिक जीवन में उनकी भागीदारी के लिए बेहद जरूरी हैं। इसके पीछे उन्होंने देश की तेजी से बढ़ती आबादी को वजह बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आबादी के मामले में दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा देश है और परिवार नियोजन सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। यूनिसेफ के अनुसार पाकिस्तान में केवल 12% महिलाएं और लड़कियां ही बाजार में मिलने वाले सैनिटरी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करती हैं। बाकी महिलाएं कपड़े या घर में तैयार किए गए अन्य विकल्पों का सहारा लेती हैं। यूनिसेफ के मुताबिक स्थानीय और अन्य टैक्स को जोड़ने के बाद पाकिस्तान में महिलाओं को सैनिटरी प्रोडक्ट्स खरीदने के लिए करीब 40% अतिरिक्त टैक्स चुकाना पड़ता है। इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और कमजोर वर्ग की महिलाओं पर पड़ता है। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार 2025 के मध्य तक पाकिस्तान की लगभग 45% आबादी प्रतिदिन 4.20 डॉलर (करीब 1,175 पाकिस्तानी रुपए) की आय वाली निम्न-मध्यम आय गरीबी रेखा से नीचे जीवन बिता रही थी।
वहीं एक पैकेट में मिलने वाले 10 सैनिटरी पैड की कीमत औसतन एक दिन की कमाई के एक-तिहाई से भी ज्यादा होती है। कई मामलों में एक पैकेट पूरे महीने के लिए पर्याप्त भी नहीं होता। अमेरिका में स्काइडाइविंग विमान हादसा: भारतीय टेक प्रोफेशनल समेत 12 की मौत
अमेरिका के मिसौरी राज्य में स्काइडाइविंग के लिए इस्तेमाल होने वाला एक विमान रविवार सुबह टेकऑफ के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में 24 वर्षीय भारतीय टेक प्रोफेशनल साई कार्तिक वर्मा दतला समेत सभी 12 लोगों की मौत हो गई। यह दुर्घटना बेट्स काउंटी स्थित बटलर मेमोरियल एयरपोर्ट के पास हुई। अधिकारियों के मुताबिक, स्काइडाइव कैनसस सिटी द्वारा संचालित पैसिफिक एयरोस्पेस P750XL विमान उड़ान भरने के कुछ देर बाद वापस लौटने की कोशिश करता दिखाई दिया। इसके बाद विमान एयरपोर्ट के नजदीक एक खेत में गिर गया और टक्कर के साथ उसमें आग लग गई। हादसे में विमान में सवार सभी लोगों की मौत हो गई। साई कार्तिक वर्मा दतला कैनसस सिटी क्षेत्र में कार्यरत भारतीय टेक प्रोफेशनल थे। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट्रल मिसौरी से पढ़ाई की थी और हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी सेक्टर में काम कर रहे थे। उनकी विशेषज्ञता क्लाउड कंप्यूटिंग, डेवऑप्स इंजीनियरिंग और आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर में थी। हादसे में यूनाइटेड स्टेट्स पैराशूट एसोसिएशन की टेक्नोलॉजी डायरेक्टर जेन शार्प, संगीत शिक्षक डेव हर्शबर्गर, कैंसर सर्वाइवर और अनुभवी स्काइडाइवर मैथ्यू स्वोप, वीडियोग्राफर डस्टिन मैककिनी, प्रशिक्षक बनने की तैयारी कर रहे विल फिशर समेत कई अनुभवी स्काइडाइवर्स और प्रशिक्षकों की भी मौत हुई। वियतनाम में बिल्ली तस्करी गिरोह का भंडाफोड़: कैट-मीट बाजार में बेचने की थी तैयारी
वियतनाम के हो ची मिन्ह सिटी में पुलिस ने पालतू बिल्लियों की चोरी और तस्करी करने वाले बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई में 400 से ज्यादा जिंदा बिल्लियों को बचाया गया, जिन्हें अवैध कैट-मीट बाजार में बेचने के लिए वधशालाओं तक पहुंचाने की तैयारी थी। मामले में नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वे पिछले तीन वर्षों से इस नेटवर्क का संचालन कर रहे थे। पालतू जानवरों की चोरी की लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर पुलिस ने गिरोह के सप्लाई नेटवर्क का पता लगाया और एक वितरण केंद्र पर छापा मारा। छापेमारी के दौरान 400 से अधिक जिंदा बिल्लियां बरामद की गईं। वहीं, बर्फ में संरक्षित 80 मृत बिल्लियां भी मिलीं, जिन्हें कथित तौर पर खाद्य प्रसंस्करण के लिए तैयार रखा गया था। पशु अधिकार संगठनों ने इस कार्रवाई को वियतनाम के इतिहास में सबसे बड़े पशु बचाव अभियानों में से एक बताया है।

दुनिया के 16 नेताओं से छोटे हैं ट्रम्प:91% नेताओं से ज्यादा उम्रदराज, उनसे 10 साल ज्यादा सऊदी किंग की उम्र

डोनाल्ड ट्रम्प इस हफ्ते 14 जून को 80 साल के हो गए। राष्ट्रपति पद पर रहते हुए 80 साल की उम्र देखने वाले वे अमेरिका के दूसरे राष्ट्रपति हैं। उनसे पहले राष्ट्रपति जो बाइडेन ने नवंबर 2022 में अपना 80वां जन्मदिन मनाया था। ट्रम्प दुनिया के सबसे उम्रदराज नेताओं में जरूर शामिल हो गए हैं, लेकिन वे दुनिया के सबसे बुजुर्ग शासक नहीं हैं। प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र के 186 देशों के नेताओं में 16 नेता ऐसे हैं जो ट्रम्प से भी ज्यादा उम्र के हैं। रिपोर्ट के अनुसार ट्रम्प दुनिया के लगभग 91% राष्ट्रीय नेताओं से बड़े हैं। वहीं दुनिया के राष्ट्रीय नेताओं की औसत उम्र 63 साल है। दुनिया के सबसे उम्रदराज मौजूदा राष्ट्रीय नेता कैमरून के राष्ट्रपति पॉल बिया हैं। उनकी उम्र 93 साल है और वे 1982 से सत्ता में बने हुए हैं। उनके बाद सऊदी अरब के राजा सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सऊद आते है, जिनकी उम्र 90 साल है और वे 2015 से देश के शासक हैं। अफ्रीकी देशों के नेताओं की सबसे ज्यादा उम्र रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि दुनिया के सबसे ज्यादा उम्र वाले नेताओं में बड़ी संख्या अफ्रीकी देशों की है। इनमें युगांडा, इक्वेटोरियल गिनी, मलावी, आइवरी कोस्ट, जिम्बाब्वे और रिपब्लिक ऑफ कांगो के नेता शामिल हैं। युगांडा के राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी की उम्र अब 82 साल है और वे करीब 40 साल से सत्ता में बने हुए हैं। वहीं इक्वेटोरियल गिनी के राष्ट्रपति तेओदोरो ओबियांग न्गुएमा म्बासोगो भी दुनिया के सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले नेताओं में गिने जाते हैं। वे 1979 से देश पर शासन कर रहे हैं। 10 सबसे उम्रदराज नेताओं में 7 गैर-स्वतंत्र देशों के प्रमुख दुनिया के दस सबसे उम्रदराज नेताओं में से 7 ऐसे देशों का नेतृत्व कर रहे हैं जिन्हें फ्रीडम हाउस ने नॉट फ्री यानी स्वतंत्र नहीं की श्रेणी में रखा है। दूसरे शब्दों में कहें तो इन देशों में लोकतांत्रिक स्वतंत्रता और राजनीतिक अधिकार सीमित माने जाते हैं। ट्रम्प से ज्यादा उम्र वाले 16 नेताओं में से लगभग आधे ऐसे देशों का नेतृत्व कर रहे हैं जिन्हें इसी श्रेणी में रखा गया है। इस वजह से फिर से यह सवाल उठने लगा है कि क्या लंबे समय तक सत्ता में बने रहना लोकतांत्रिक जवाबदेही को प्रभावित करता है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने जन्मदिन पर व्हाइट हाउस में UFC फाइट कराई:अब तक का सबसे महंगा शो, ₹567 करोड़ खर्च; जीत के बाद विजेता राष्ट्रपति से मिला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में अल्टीमेट फाइटिंग चैम्पियनशिप यानी UFC मुकाबलों के साथ अपना 80वां जन्मदिन मनाया। UFC ने इस आयोजन पर करीब 6 करोड़ डॉलर (567 करोड़ रुपए) खर्च किए। ये अब तक का सबसे महंगा UFC आयोजन माना जा रहा है। पूरी खबर पढ़ें