रूस का Tu-22M3 बॉम्बर विमान सोमवार को साइबेरिया के इरकुत्स्क क्षेत्र में ट्रेनिंग उड़ान के दौरान क्रैश हो गया। रूस के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, विमान जमीन की ओर तेजी से गिरा, जिससे घटनास्थल पर धुएं का बड़ा गुबार उठ गया। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि विमान में सवार चारों क्रू मेंबर समय रहते इजेक्ट (पैराशूट के जरिए बाहर निकल) हो गए और उनकी जान को कोई खतरा नहीं है। सभी को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसे में जमीन पर भी किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ। इरकुत्स्क क्षेत्र के गवर्नर इगोर कोबजेव ने बताया कि विमान कामेंका गांव के पास दुर्घटनाग्रस्त हुआ। शुरुआती जांच में इंजन फेल होना हादसे की वजह माना जा रहा है। Tu-22, जिसे NATO ने Backfire कोडनेम दिया है, सोवियत काल का एक सुपरसोनिक बॉम्बर विमान है। रूस इसका इस्तेमाल सीरिया और यूक्रेन में सैन्य अभियानों के दौरान कर चुका है। Tu-22M3 इसका आधुनिक संस्करण है, जो Kh-22 क्रूज मिसाइलों और हवा से लॉन्च होने वाली हाइपरसोनिक किंझाल मिसाइलों को ले जाने में सक्षम है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… ब्रिटेन में 16 साल की उम्र से पहले बच्चे नहीं चला सकेंगे सोशल मीडिया, प्रस्ताव से 10 में से 9 अभिभावक खुश ब्रिटेन में 16 साल से छोटे बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बैन लगेगा। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को इसकी घोषणा की। संबंधित नियम इस साल दिसंबर तक बन जाएंगे और 2027 मार्च- अप्रैल तक लागू होने की उम्मीद है। सरकार का तर्क है कि एल्गोरिदम आधारित प्लेटफॉर्म बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई और सामाजिक विकास पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं। प्रस्ताव के तहत सोशल मीडिया के उपयोग से पहले उम्र सत्यापन सख्ती से लागू होगा और नियम पालन कराने की जिम्मेदारी कंपनियों पर होगी। बैन एप में स्नैपचैट, टिकटॉक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म शामिल होंगे। वॉट्सएप और सिग्नल जैसी मैसेजिंग सेवाएं फिलहाल प्रतिबंध में शामिल नहीं होंगी। ब्रिटिश सरकार के एक सर्वे में 10 में से 9 अभिभावकों ने इस प्रतिबंध का स्वागत किया है। ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी फॉर पब्लिक हेल्थ द्वारा 14-24 वर्ष के युवाओं के बीच किए सर्वे के मुताबिक स्नैपचैट, फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम से डिप्रेशन, चिंता, अपने शरीर को लेकर हीन भावना और अकेलेपन में बढ़ोतरी होती है। अमेरिकी सर्जन जर्नल के मुताबिक रोज 3 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया पर बिताने वाले किशोरों में मानसिक समस्याओं का खतरा दोगुना होता है। अमेरिका में एक परीक्षण में पाया गया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बंद करने से युवाओं में खुशी, जीवन से संतुष्टि बढ़ी, डिप्रेशन-एंग्जाइटी में सुधार हुआ। 25 से ज्यादा देश किशोरों-बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने की पहल कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में साल भर पहले प्रतिबंध लागू किया गया था। मलेशिया, इंडोनेशिया और ब्राजील में भी इस साल की शुरुआत से प्रतिबंध लागू हो चुके हैं। नॉर्वे, फ्रांस, अमेरिका, चीन जैसे कई देशों में बच्चों के लिए सोशल मीडिया से जुड़े नियम सख्त किए जा रहे हैं। इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप में 6.7 तीव्रता का भूकंप, जानमाल के नुकसान की जानकारी नहीं इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप के पास मंगलवार को 6.7 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप का केंद्र पालू शहर से लगभग 42 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित था। भूकंप की गहराई जमीन से 10 किलोमीटर नीचे दर्ज की गई। फिलहाल जान-माल के नुकसान या सुनामी की कोई अलर्ट नहीं । नॉर्वे की क्राउन प्रिंसेस के बेटे को रेप केस में 4 साल की जेल
नॉर्वे की क्राउन प्रिंसेस मेटे-मैरिट के बेटे मारियस बोर्ग होइबी (29) को ओस्लो डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने रेप, घरेलू हिंसा और अन्य अपराधों में दोषी ठहराते हुए 4 साल की जेल की सजा सुनाई है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब मेटे-मैरिट भी दिवंगत अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से अपने पुराने संबंधों को लेकर विवादों में हैं। अदालत ने होइबी को दो रेप मामलों में दोषी ठहराया, जबकि दो अन्य रेप आरोपों से बरी कर दिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 2018 से 2024 के बीच उन्होंने कई महिलाओं का यौन शोषण किया, जिनमें कुछ महिलाएं सो रही थीं या प्रतिरोध करने की स्थिति में नहीं थीं। होइबी, क्राउन प्रिंसेस मेटे-मैरिट और क्राउन प्रिंस हाकोन के साथ शाही माहौल में बड़े हुए हैं। हालांकि, उनके पास कोई शाही उपाधि नहीं है और वे राजपरिवार की ओर से कोई आधिकारिक भूमिका नहीं निभाते। अदालत ने उन्हें अपनी पूर्व प्रेमिका के साथ दुर्व्यवहार, दूसरी साथी पर हमला, ड्रग्स से जुड़े अपराध और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के मामलों में भी दोषी पाया। होइबी ने रेप के आरोपों से इनकार किया था, लेकिन कोकीन के इस्तेमाल और मारपीट की बात स्वीकार की थी। भारत दौरे के बाद चीन पहुंचे नेपाल के विदेश मंत्री
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत दौरे के कुछ दिनों बाद चीन पहुंचकर शीर्ष चीनी राजनयिक वांग यी से मुलाकात की। मार्च में सत्ता में आई नई सरकार के गठन के बाद यह उनका पहला चीन दौरा है। चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, वांग यी ने कहा कि चीन हमेशा नेपाल को अपनी पड़ोसी कूटनीति में प्राथमिकता देता है और उसकी संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के प्रयासों का समर्थन करेगा। विश्लेषकों का मानना है कि नेपाल भारत और चीन के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है। हाल ही में नई दिल्ली दौरे के दौरान खनाल ने कहा था कि नई सरकार अतीत के राजनीतिक बोझ से मुक्त है और भारत के साथ रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए तैयार है। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, चीन नेपाल को लगभग 31 करोड़ डॉलर का कर्ज दे चुका है। वहीं चीनी कंपनियों ने ऊर्जा और रियल एस्टेट क्षेत्रों में 1.12 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है। विश्लेषकों का कहना है कि नेपाल के हालिया राजनीतिक बदलावों ने चीन के लिए नई चुनौती पैदा की है। ऐसे में बीजिंग नेपाल के साथ अपने संबंधों को मजबूत बनाए रखने और क्षेत्र में अपना प्रभाव कायम रखने की कोशिश कर रहा है। इजराइली मंत्री बेन-गवीर पर EU में नहीं बनी सहमति: प्रतिबंध प्रस्ताव अटका
यूरोपीय संघ (EU) इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव पर सहमति बनाने में विफल रहा। EU की विदेश नीति प्रमुख काजा कालास ने सोमवार को कहा कि कई सदस्य देशों ने आर्थिक प्रतिबंध लगाने की मांग की थी, लेकिन सर्वसम्मति नहीं बनने के कारण प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। बेन-गवीर हाल ही में गाजा की ओर जा रहे ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला के कार्यकर्ताओं के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर विवादों में रहे हैं। फ्लोटिला को इजराइली सैनिकों ने रोककर कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था। बाद में एक वीडियो सामने आया, जिसमें बेन-गवीर कथित तौर पर हाथ बंधे हुए और जमीन पर बैठे कार्यकर्ताओं का मजाक उड़ाते दिखाई दिए। इस घटना के बाद कई यूरोपीय देशों में उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठी। हालांकि EU स्तर पर प्रतिबंध लगाने के लिए सभी सदस्य देशों की सहमति जरूरी होती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जर्मनी, ऑस्ट्रिया और चेक गणराज्य उन देशों में शामिल हैं जिन्होंने प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया। यूरोपीय संघ इजराइल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और पिछले वर्ष इजराइल के कुल वस्तु व्यापार में उसकी हिस्सेदारी 30% से अधिक रही थी। थाईलैंड ने परमाणु अप्रसार का दोहराया समर्थन
थाईलैंड ने वियना में आयोजित व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि संगठन (CTBTO) के 66वें सत्र में परमाणु हथियारों के परीक्षण और परमाणु तकनीक के सैन्य इस्तेमाल का विरोध दोहराया। देश ने परमाणु अप्रसार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए परमाणु तकनीक के शांतिपूर्ण उपयोग का समर्थन किया। थाईलैंड के ऑफिस ऑफ एटम्स फॉर पीस (OAP) ने कहा कि देश CTBTO की वैश्विक निगरानी और सत्यापन प्रणाली का सक्रिय समर्थक है। OAP के अनुसार, CTBTO नेटवर्क से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग भूकंप निगरानी, सुनामी चेतावनी, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, पर्यावरण निगरानी और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे कई क्षेत्रों में किया जाता है। सत्र में थाईलैंड ने परमाणु अप्रसार के समर्थन को दोहराते हुए कहा कि परमाणु तकनीक का इस्तेमाल केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए होना चाहिए। देश ने चिकित्सा, ऊर्जा और उद्योग जैसे क्षेत्रों में इसके सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। पोलैंड में रूसी कलाकार और पुतिन आलोचक की हत्या: पार्किंग में मारीं 5 गोलियां
पोलैंड में रूसी कलाकार और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के मुखर आलोचक सेम्योन स्क्रेपेत्स्की की गोली मारकर हत्या कर दी गई। बियाला पोडलास्का शहर में सोमवार सुबह हुई इस वारदात के बाद पुलिस और अभियोजन एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है। मामले में दो बेलारूसी नागरिकों को हिरासत में लिया गया है। ल्यूबलिन जिला अभियोजन कार्यालय के अनुसार, स्क्रेपेत्स्की का वास्तविक नाम रॉबर्ट कुजोवकोव था। 44 वर्षीय कलाकार पर एक अज्ञात हमलावर ने पार्किंग क्षेत्र में हमला किया। आरोपी ने पहले दो गोलियां चलाईं और पीड़ित के गिरने के बाद उसके पास जाकर तीन और गोलियां दाग दीं। कलाकार को सिर, सीने और पीठ में गोलियां लगीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटनास्थल बेलारूस के वाणिज्य दूतावास से करीब 600 मीटर की दूरी पर स्थित है। जांचकर्ताओं को वहां से पांच खोखे और 9 मिमी की एक गोली बरामद हुई है। स्क्रेपेत्स्की अपने राजनीतिक व्यंग्यचित्रों के लिए जाने जाते थे। उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको और चेचन नेता रमजान कादिरोव पर कई आलोचनात्मक चित्र बनाए थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, वे सार्वजनिक रूप से रूस की वर्तमान नीतियों की आलोचना भी करते थे। स्थानीय मीडिया के अनुसार, स्क्रेपेत्स्की 2021 में पोलैंड आकर बस गए थे। अधिकारियों ने बताया कि पोस्टमॉर्टम बुधवार को किया जाएगा और हत्या के पीछे की वजहों की जांच जारी है। चीन में 6.3 तीव्रता का भूकंप: 1 की मौत, 4 घायल; कोयला खदानों से सभी मजदूरों को निकाला गया
चीन के उत्तर-पश्चिमी प्रांत चिंगहाई में मंगलवार शाम 6.3 तीव्रता का भूकंप आया। सरकारी मीडिया के मुताबिक हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि चार लोग घायल हुए हैं। भूकंप के बाद राहत और बचाव दल मौके पर पहुंच गए हैं। चीन भूकंप नेटवर्क केंद्र (CENC) के मुताबिक, भूकंप स्थानीय समयानुसार शाम 5:06 बजे हाइक्सी प्रीफेक्चर के ऊंचाई वाले इलाके में आया। इसका केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर नीचे था। सरकारी मीडिया ने बताया कि भूकंप के केंद्र के पास मौजूद कोयला खदानों से सभी कर्मचारियों को एहतियात के तौर पर बाहर निकाल लिया गया है। अधिकारी अभी जनहानि और संपत्ति के नुकसान का आकलन कर रहे हैं। समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, राहत और बचाव दल फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं। साथ ही भूकंप के बाद संभावित द्वितीयक आपदाओं के खतरे का भी आकलन किया जा रहा है। चीन के भूकंप प्रशासन ने इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्मट एक्टिव कर दिया है। मुख्य झटके के बाद कई आफ्टरशॉक भी महसूस किए गए, जिनमें एक की तीव्रता 4.9 मापी गई।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में अल्टीमेट फाइटिंग चैम्पियनशिप यानी UFC मुकाबलों के साथ अपना 80वां जन्मदिन मनाया। UFC ने इस आयोजन पर करीब 6 करोड़ डॉलर (567 करोड़ रुपए) खर्च किए। ये अब तक का सबसे महंगा UFC आयोजन माना जा रहा है। इस फाइट कार्ड में कुल 7 मुकाबले हुए। मेन फाइट लाइटवेट चैंपियन रहे इलिया टोपुरिया और जस्टिन गेथजे के बीच हुई। 4 राउंड तक चले मुकाबले में अमेरिकी फाइटर गेथजे ने अपने स्पेनिश विरोधी टोपुरिया को हराकर उलटफेर किया। गेथजे को लाइटवेट टाइटल बेल्ट मिली, जबकि टोपुरिया को अपने करियर की पहली हार मिली। मुकाबले देखने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, उनके कई सीनियर अफसर, खास मेहमान और हजारों सैन्यकर्मी मौजूद थे। पहले मुकाबले में बो निकल ने पहले ही राउंड में काइल डाउकस को नॉकआउट कर दिया। उन्होंने एक जोरदार लेफ्ट हुक और राइट पंच से प्रतिद्वंद्वी को गिराया, जिसके बाद रेफरी ने मुकाबला रोक दिया। जीत के तुरंत बाद बो निकल रिंग से बाहर आए और सीधे राष्ट्रपति ट्रम्प के पास पहुंचे। दोनों ने हाथ मिलाया और कुछ देर बातचीत की। UFC फाइट से जुड़ी 10 तस्वीरें…
ट्रम्प ने कहा- यह धरती का सबसे बड़ा शो राष्ट्रपति ट्रम्प और कई अधिकारियों ने आयोजन की तारीफ की। ट्रम्प ने इसे ‘धरती का सबसे बड़ा शो’ बताया और ‘क्लॉ’ की तुलना पेरिस के एफिल टॉवर से की। वहीं विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने UFC को अमेरिका की सॉफ्ट डिप्लोमैटिक पावर बताया। इस इवेंट में कुल 14 फाइटर ने हिस्सा लिया। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस आयोजन का सबसे बड़ा फायदा UFC ब्रांड को मिल सकता है। एक समय ऐसा था, जब इस खेल को प्रायोजकों और कई आयोजकों ने स्वीकार नहीं किया था। एक अमेरिकी सीनेटर ने इसे कभी ‘मानव मुर्गा लड़ाई’ तक कहा था। 33 साल पहले शुरू हुआ था UFC का सफर अल्टीमेट फाइटिंग चैम्पियनशिप (UFC) आज दुनिया की सबसे बड़ी मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) लीग है। इसकी शुरुआत 1993 में अमेरिका में हुई थी। उस दौर में बॉक्सिंग, कराटे, कुश्ती और ब्राजीलियन जिउ-जित्सु जैसी अलग-अलग फाइटिंग शैलियों के समर्थक अपनी-अपनी तकनीक को सबसे प्रभावी बताते थे। इस पर काफी बहस होती थी कि असली मुकाबले में कौन-सा मार्शल आर्ट सबसे ज्यादा कारगर साबित होगा। इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए UFC का पहला टूर्नामेंट आयोजित किया गया। इसमें ब्राजीलियन जिउ-जित्सु विशेषज्ञ रॉयस ग्रेसी चैंपियन बने। ग्रेसी शारीरिक रूप से कई प्रतिद्वंद्वियों से छोटे और हल्के थे, लेकिन उन्होंने अपनी तकनीक के दम पर बड़े और ताकतवर फाइटर्स को हराकर सबको चौंका दिया। समय के साथ खेल का स्वरूप भी बदल गया। अब फाइटर्स सिर्फ एक शैली पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि बॉक्सिंग, रेसलिंग, जूडो, कराटे, ताइक्वांडो, जिउ-जित्सु और किक बॉक्सिंग जैसी कई तकनीकों को मिलाकर मुकाबला करते हैं। यही वजह है कि इसे आज ‘मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स’ कहा जाता है। अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे हो रहे अमेरिका इस साल अपनी आजादी के 250 साल पूरे करने जा रहा है। अमेरिका जुलाई 1776 में ब्रिटेन से स्वतंत्र हुआ था। आजादी के जश्न की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। पूरे देश में एक साल से ज्यादा समय तक चलने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है। UFC इवेंट भी इसी जश्न का हिस्सा है, जिसे ट्रम्प प्रशासन प्रमुख आकर्षण के तौर पर पेश कर रहा है। अमेरिका की स्थापना का आधार माने जाने वाले ‘डिक्लेरेशन ऑफ इंडिपेंडेंस’ पर 4 जुलाई 1776 को हस्ताक्षर हुए थे। इसी की 250वीं सालगिरह के मौके पर देशभर में परेड, प्रदर्शनी, सांस्कृतिक कार्यक्रम और बड़े सार्वजनिक समारोह आयोजित किए जाएंगे। व्हाइट हाउस ने ‘टास्क फोर्स 250’ बनाई है, जो संघीय सरकार, राज्यों, निजी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर आयोजन कर रही है। ——————————– UFC से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प जन्मदिन पर व्हाइट हाउस में फाइटिंग कराएंगे:मुकाबले के लिए स्टेज तैयार हो रहा, 1 लाख लोग फ्री में मुकाबला देखेंगे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 14 जून को 80 साल के हो जाएंगे। इस मौके पर व्हाइट हाउस में अल्टीमेट फाइटिंग चैंपियनशिप (UFC) के मुकाबले करााए जाएंगे। UFC दुनिया की सबसे बड़ी मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) संस्था है। इसमें अलग-अलग फाइटिंग खेलों के खिलाड़ी एक-दूसरे के खिलाफ मुकाबला करते हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

शरद पवार ने देश की विदेश नीति पर आंतरिक राजनीतिक व्यवहार के संदर्भ में जो कुछ कहा है उस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के बाहर देश की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए काम कर रहे हैं। हमारे राजनीतिक विचार अलग-अलग हो सकते हैं लेकिन जब देश के सम्मान की बात आती है तो राजनीतिक मतभेदों को बीच में नहीं लाना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पांच दिवसीय विदेश यात्रा पर भारत के अंदर राजनीतिक व गैर राजनीतिक मोर्चे पर हो रही टिप्पणियों के संदर्भ में उनका यह मंतव्य सर्वाधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात से आरंभ कर स्वीडन, नीदरलैंड, ज्नॉर्वे और इटली की द्विपक्षीय यात्रा की तथा नार्वे की राजधानी ओस्लो में स्कैंडिनेवियाई भारत शिखर सम्मेलन में शामिल हुए।
प्रधानमंत्री के समक्ष अपने राष्ट्रीय हित को साधने का उद्देश्य था और इन यात्राओं पर विशेषज्ञों का मत यही है कि उसमें उन्हें अधिकतम सफलता मिली। किंतु राजनीतिक और गैर राजनीतिक एक्टिविज्म और सोशल मीडिया पर उनके विदेश में रहते हुए ही हमले शुरू हो गए। सारे हमलों व आलोचनाओं के हल्ला बोल में ऐसा एक तथ्य नहीं आया जिसमें बताया गया हो कि अमुक बिंदु पर प्रधानमंत्री ने अपने राष्ट्रीय हित के अनुकूल काम नहीं किया।
जाहिर है कि विरोध केवल राजनीतिक मतभेदों और असहमतियों के इर्द-गिर्द था। यह चिंताजनक है क्योंकि भारत की भौगोलिक सीमाओं के अंदर की राजनीतिक असहमतियां और मतभेद सीमाओं से बाहर चला जाए तो राष्ट्रीय हित प्रभावित होता है। इसका अर्थ है कि हम देश हित को प्राथमिकता देने की जगह अपने राजनीतिक, व्यक्तिगत हित को प्राथमिकता दे रहे हैं या फिर हमारा वैचारिक दुराग्रह हावी है।
ऐसा नहीं है कि पवार की मोदी से पूरी तरह सहमति है। महाराष्ट्र में आज शरद पवार की राकांपा शक्तिहीन है तो इसी कारण क्योंकि स्वर्गीय अजीत पवार ने विद्रोह कर भाजपा से हाथ मिला लिया। बावजूद हमारी पारंपरिक राजनीति, जिसका प्रतिनिधित्व करने वाले गिने-चुने नेता रह गए हैं, में यही व्यवहार लंबे समय तक रहा है। देश में हमारी असहमति होती है, आरोप – प्रत्यारोप करते हैं लेकिन जब विदेशों की, अंतरराष्ट्रीय मंच की बात आती है तो देश साथ खड़ा होता है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर या विदेश में प्रधानमंत्री किसी राजनीतिक दल का नहीं भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहां केवल राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए। पत्रकारिता में भी अनेक बार प्रधानमंत्री या दूसरे मंत्रियों के विदेश में दिए बयानों से असहमति होती थी लेकिन वरिष्ठ लोग बताते थे कि विदेश नीति पर हमारी आलोचना का स्वर ऐसा नहीं हो सकता। अपवाद हर समय रहे हैं पर पर वह कभी मुख्य धारा नहीं बना।
इसलिए ज्यादातर विदेशी यात्राओं या विदेशी मेहमानों के भारत आगमन पर हुए समझौते आदि पर राजनीतिक दलों व मीडिया की ध्वनि एक समान होती थी। जैसे-जैसे राजनीतिक मतभेद बढ़े, भारत और वैश्विक स्तर पर अलग-अलग राजनीतिक धाराओं, निहित स्वार्थी संगठनों, समूहों के बीच संपर्क संबंध बढ़ा इस स्वाभाविक व्यवहार में अंतर आता गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता शीर्ष पर आने के बाद यह अतिवाद तक चला गया है। इसी का प्रकटीकरण इस समय दिखा है।
एक भारतवासी के नाते इस समय हमारा उद्देश्य क्या होना चाहिए? पश्चिम एशिया संकट यानी ईरान अमेरिका इजरायल टकराव और तनाव ने ईंधन आपूर्ति में उथल-पुथल पैदा कर दिया है। हार्मूज जलडमरूमध्य की खतरनाक नाकेबंदी से निपटना विश्व के लिए मुश्किल हो रहा है।
इसमें पेट्रोल डीजल आदि के लिए आयात पर निर्भर भारत या अन्य देशों के लिए दूरगामी दृष्टि से आपूर्ति की सुनिश्चित व्यवस्था करना, देशों के संबंधों में हो रहे बदलावों के साथ सामंजस्य स्थापित करना या अस्थिरता के काल में उसका आधार बनाते रहना तथा भविष्य में बनने वाले अंतरराष्ट्रीय समीकरणों की दृष्टि से ऐसी स्थिति में होना ताकि देश के रूप में हम कहीं अलग-थलग न पड़ें।
मोटा-मोटी प्रधानमंत्री की यात्रा में यही लक्ष्य समाहित होंगे। इन सबमें यहां विस्तार से जाने की आवश्यकता नहीं। आप चाहे भाजपा के सरकार के विरोधी हों या समर्थक दृष्टि एक ही होनी चाहिए कि प्रधानमंत्री की यात्राओं के दौरान उन देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय और प्रतिनिधिमंडलों की बातचीत, संयुक्त घोषणाओं तथा संपन्न समझौतों में क्या-क्या हुआ? जब आप गहराई से उन सबको देखेंगे तो आपका विचार अपने आप बदल जाएगा। दुर्भाग्य से हम उन पर सरसरी दृष्टि भी डालना नहीं चाहते।
किसी पत्रकार ने नॉर्वे में दोनों प्रधानमंत्रियों के स्वागत वक्तव्य में निर्धारित प्रोटोकॉल के विपरीत जबरन कैमरे घूमाकर भारत के प्रधानमंत्री से मानवाधिकार एवं प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रश्न पूछे और वह हमारे लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण हो गया। नॉर्वे के साथ हमारे समझौते, हमारे यहां पेंशन फंड से 28 अरब डॉलर के निवेश की योजना, ब्लू इकोनामी साझेदारी, हरित साझेदारी आदि पर हमने चर्चा नहीं की।
यही नहीं नॉर्दिक भारत शिखर सम्मेलन में औपचारिक रूप से ट्रस्टेड ग्रीन टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप यानी विश्वसनीय हरित तकनीक एवं अन्वेषण रणनीतिक साझेदारी का दर्जा मिलना और कातिक परिषद में भी पर्यवेक्षक की हैसियत हासिल करना इनके लिए हास्य पर चला गया।
इसी तरह इटली की यात्रा में प्रधानमंत्री ने पार्ले कंपनी के सामान्य मेलोडी ट्रॉफी वहां की प्रधानमंत्री जार्जिया मेलोनी को भेंट करते हुए एक रोचक वीडियो पोस्ट किया। इटली के साथ हमारी ठोस विशेष रणनीतिक साझेदारी कायम हुई, भारत और इटली में निर्माण करो तथा विश्व को आपूर्ति करो का ढांचा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत के स्थान की दृष्टि से महत्वपूर्ण था, अनेक मुद्दों पर हमारे साथ सहमति बनी जिनमें आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष भी है।
इस यात्रा में स्वीडन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया और काम करने वाली पत्रकार और कार्टून छापने वाले अखबार के देश नार्वे ने भी। संयुक्त राष्ट्र संघ की खाद्य और कृषि संगठन ने प्रधानमंत्री को विशेष रूप से सम्मानित किया। इन सब पर चर्चा की जगह हमारे यहां टौफी वीडियो को लेकर ऐसी टिप्पणियां की जा रही है जिनमें कई को देखने सुनने या पढ़ने में शर्म आए। भारत जैसे देश में विमर्श का यह स्तर किसी को भी अंदर से परेशान कर देगा।
क्या हम ऐसा करते समय विचार भी नहीं करते कि एक देश के रूप में विदेश में हमारी कैसी छवि बनेगी? यहीं पर शरद पवार का यह कथन प्रासंगिक हो जाता है कि जब भी राष्ट्रीय हित के लिए सामूहिक रूप से काम करने का मौका मिले तो सभी को एक साझा उद्देश्य के साथ जुड़ना चाहिए और देश की प्रतिष्ठा मजबूत करने में मदद करनी चाहिए। कोई भी प्रधानमंत्री या विदेश मंत्री देश के बाहर होते हैं तो अपने दृष्टिकोण से वह देश के भविष्य और सम्मान को ही केंद्र में रखते हैं। कई बार इनमें गलतियां भी हुई है।
आज के दौर के अनुसार उनकी आलोचना भी अस्वाभाविक नहीं है किंतु आलोचना तथ्यों के आधार पर होगी। अखिर जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी ट्रॉफी भेंट करने से हमारी राष्ट्रीय प्रतिष्ठा को कैसे नुकसान पहुंचा? इटली प्राचीन सभ्यता संस्कृति वाला यूरोप का महत्वपूर्ण और मजबूत देश है।
वर्तमान तनावपूर्ण अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में दो प्रधानमंत्रियों के बीच इस तरह के सहज संबंध, मुस्कान और ठहाके कूटनीति की दुनिया में बहुत बड़ी उपलब्धि है। एक बार दो नेताओं के बीच सहज सामान्य संवाद निर्मित हो गए तो जटिल से जटिल मुद्दों पर भी सहमति बनती है तथा रास्ता निकल जाता है। दूसरे, इससे हमारे देश के एक सामान्य ब्रांड का भी जबरदस्त विपणन हुआ। इस विषय पर स्थापित अंतरराष्ट्रीय मीडिया की टिप्पणियां देखेंगे तो सकारात्मक भाव पैदा होगा।
कूटनीति में एक सामान्य वस्तु का उपयोग कर माहौल बदल देना, दुनिया को संदेश देना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय संबंधों में परस्पर व्यवहार का रास्ता दिखा देना सामान्य बात नहीं है। अभी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का चीन दौरा हुआ और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी बातचीत के सारे तस्वीर और वीडियो देख लीजिए।
इसके बाद रुस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की चीन यात्रा हुई। दोनों नेताओं के सारे तस्वीर और वीडियो देख लीजिए। पुतिन और शी जिनपिंग के बीच सामान्य संबंध हैं। बावजूद उनके व्यवहार में सहज मुस्कान नहीं दिखेगा।
तनावपूर्ण और अनिश्चितताओं की दुनिया में दो महत्वपूर्ण देश के नेताओं के बीच सरल सहज मुस्कान और संबंध कूटनीति के लिए नया मानक है। कायदे से देश में इसकी प्रशंसा होनी चाहिए। भारत ने अपने लक्ष्य के अनुरूप यात्रा से सारी उपलब्धियां हासिल की जिसकी ओर तत्काल दृष्टि थी।
दूसरे देश भी अपने हित के अनुसार काम कर रहे थे और उन्हें भी प्राप्त हुआ। पर मूल बात यह है कि हम एक राष्ट्र के रुप में कैसे प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं? शरद पवार जैसे वरिष्ठ नेता अब ज्यादा उपलब्ध नहीं है कि सामने आकर रास्ता दिखाएं। ज्यादातर जा चुके हैं। हमें ही अपने हर व्यवहार पर राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देकर स्वयं को बदलना होगा।
(इस लेख में व्यक्त विचार/विश्लेषण लेखक के निजी हैं। 'वेबदुनिया' इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेती है।)

दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से बढ़ता प्रभाव अब टेक कंपनियों की कमाई में भी साफ नजर आने लगा है। इसी AI बूम का सबसे बड़ा फायदा दक्षिण कोरियाई टेक दिग्गज सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) के चिप कारोबार को मिला है। AI डाटा सेंटरों की बढ़ती मांग के चलते मेमोरी चिप्स की जरूरत तेजी से बढ़ी है और सैमसंग दुनिया की सबसे बड़ी मेमोरी चिप निर्माता कंपनियों में शामिल है।
इसी वजह से पिछले तिमाही में कंपनी के चिप डिवीजन की आय में 49 गुना तक का जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया। अब कंपनी इस मुनाफे का हिस्सा अपने कर्मचारियों को भी देने जा रही है। बुधवार को सैमसंग के सबसे बड़े कर्मचारी यूनियन ने चिप डिवीजन के कर्मचारियों के लिए भारी-भरकम बोनस पैकेज को मंजूरी दे दी। इस पैकेज के तहत प्रत्येक कर्मचारी को औसतन 3.40 लाख डॉलर (करीब 3.25 करोड़ रुपए) का बोनस मिल सकता है।
यह मंजूरी ऐसे समय में आई है जब कर्मचारियों ने 18 दिनों की हड़ताल की चेतावनी दी थी। इस साल मार्च में सैमसंग ने अपनी फाइलिंग में बताया था कि 2025 में कंपनी के कर्मचारियों की औसत वार्षिक आय 15.8 करोड़ वॉन (करीब 1 करोड़ रुपए) रही थी।
कंपनी और यूनियन के बीच मुनाफे के बंटवारे को लेकर समझौता होने के बाद संभावित हड़ताल टल गई है। इससे वैश्विक मेमोरी चिप सप्लाई पर पड़ने वाला बड़ा संकट भी टल गया। माना जा रहा था कि यदि हड़ताल होती तो न केवल सैमसंग का उत्पादन प्रभावित होता, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन पर भी इसका बड़ा असर पड़ सकता था।
सैमसंग के अनुसार, कंपनी के चिप डिवीजन में करीब 78 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं। ऐसे में केवल बोनस पर कंपनी लगभग 26.5 अरब डॉलर खर्च कर सकती है। यूनियन की ओर से बताया गया कि इस समझौते के पक्ष में 73.7 प्रतिशत सदस्यों ने मतदान किया। करीब 62,600 बैलेट डाले गए, जो पात्र सदस्यों के 95 प्रतिशत से अधिक थे। समझौते को पारित करने के लिए आधे से अधिक मतों की जरूरत थी।
यह बोनस सभी सैमसंग कर्मचारियों के लिए नहीं है, बल्कि केवल चिप निर्माण डिवीजन के कर्मचारियों को मिलेगा। यह डिवीजन प्रोसेसर और मेमोरी चिप्स जैसे RAM का निर्माण करता है, जिनका इस्तेमाल स्मार्टफोन, लैपटॉप, कारों और ChatGPT व Gemini जैसे AI प्लेटफॉर्म को संचालित करने वाले बड़े डाटा सेंटरों में किया जाता है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के ऑपरेटिंग प्रॉफिट के आधार पर कर्मचारियों को औसतन 51.3 करोड़ वॉन यानी लगभग 3.40 लाख डॉलर का बोनस मिल सकता है। Yonhap News की रिपोर्ट के मुताबिक मेमोरी डिवीजन के कर्मचारियों को करीब 60 करोड़ वॉन (लगभग 3.82 करोड़ रुपए) तक मिल सकते हैं। Edited by : Sudhir Sharma

अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल को लागू हुआ युद्धविराम फिलहाल बना हुआ है, लेकिन शाब्दिक नोक-झोंक और पूर्ववत तनावों के बीच उनकी बातचीत में प्रगति के संकेत भी मिल रहे हैं।
अमेरिकी न्यूज़ पोर्टल एक्सिओस (Axios) के अनुसार, सबसे नई प्रगति यह है कि एक 'समझौता ज्ञापन' (मेमोरैंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग) दोनों देशों के बीच विवाद के सभी प्रमुख मुद्दों को संबोधित करता है। वह कथित तौर पर सभी तरह की शत्रुता को अस्थायी रूप से रोकने तथा होर्मुज़ जलडमरूमध्य और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से संबंधित है। ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाना और अमेरिका द्वारा ज़ब्त ईरानी संपत्तियों को मुक्त करना भी कथित तौर पर चर्चा का विषय है।
अमेरिकी के सूत्रों के अनुसार, आशा है कि ईरान युद्धविराम की अवधि के दौरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाज़ों के गुज़रने में मदद करेगा। कोई टोल (शुल्क) नहीं लिया जाएगा। जहाज़ों का यातायात जल्द ही 'युद्ध-पूर्व के स्तर' पर लौट जाएगा। किंतु, यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि यह युद्धविराम कितने समय तक चलेगा। अमेरिकी सूत्रों ने 60 दिनों की अवधि की बात कही है। हालांकि, ईरानी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने सरकारी टेलीविज़न पर '30 से 60 दिनों की अवधि' का ज़िक्र किया।
ईरान बारूदी सुरंगें हटाने के लिए भी तैयार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार, ईरान युद्ध के दौरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बिछाई गई बारूदी सुरंगें हटाने के लिए भी तैयार है। इसके बदले में, अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी अपनी नाकेबंदी हटा सकता है और ईरान को बिना किसी रोक-टोक के तेल निर्यात करने की अनुमति दे सकता है। किंतु, इस बारे में ईरान से आलोचनात्मक प्रतिक्रियाएं भी आई हैं। वहां की समाचार एजेंसी 'फ़ार्स' ने लिखा कि ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर गुज़रने वाले जहाज़ों की संख्या को युद्ध-पूर्व स्तर पर वापस लाने पर सहमति जताई तो है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि युद्ध से पहले जैसी 'मुक्त आवाजाही' की स्थिति फिर से बहाल हो गई है। इसलिए, ट्रंप के बयान को 'अधूरा' माना जा रहा है और कहा जा रहा है कि वह वास्तविकता को नहीं दर्शाता।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम का भविष्य
ईरान ने कथित तौर पर वादा किया है कि वह कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं करेगा। किंतु, उसके यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को निलंबित करने के संबंध में बातचीत अभी होनी है। अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम का भंडार भी चर्चा का विषय है; उसे ईरान से संभवतः हटाया जा सकता है। इसके बदले में, अमेरिका ने ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने और उस की संपत्तियों को मुक्त करने की बात कही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने 'कुछ प्रगति' की बात करते हुए, बहुत सावधानी भरी आशावादिता का स्वर अपनाया। उन्होंने संकेत दिया कि वे संभवतः कुछ ही दिनों के भीतर कोई सही घोषणा कर पाएंगे।
दूसरी ओर, अमेरिका में टेक्सास राज्य के रिपब्लिकन सीनेटर टेड क्रूज़ ने X पर लिखाः अगर इसका नतीजा 'एक ऐसा ईरानी शासन देखने में आता है— जिसका नेतृत्व अभी भी वे इस्लामी कट्टरपंथी ही कर रहे हैं जो ''अमेरिका का नाश हो'' के नारे लगाते हैं— और जिसे अब अरबों डॉलर मिलते हैं, जो यूरेनियम को समृद्ध करने और परमाणु हथियार बनाने में सक्षम है और जो होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर प्रभावी रूप से नियंत्रण रखता है, तो यह एक विनाशकारी ग़लती होगी।'
ईरानी राष्ट्रपति को अमेरिका पर विश्वास नहीं
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने यथासंभव कूटनीतिक समाधान के प्रति अपनी तत्परता दिखाई, लेकिन उन्होंने वाशिंगटन के प्रति तेहरान के गहरे अविश्वास पर ज़ोर भी दिया। उन्होने कहा, 'हम बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन अमेरिका के साथ पिछली वार्ताओं के अनुभवों ने हमें अत्यधिक सावधानी बरतने पर मज़बूर कर दिया है।'
ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के महीनों बाद भी होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) अभी भी बंद है। 'समझौता ज्ञापन' वाला समाचार आने से दो ही दिन पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का कहना था कि ईरान के साथ बातचीत उम्मीद से कहीं ज़्यादा मुश्किल साबित हो रही है। यदि कोई समझौता हो भी जाता है, तब भी होर्मुज़ जलडमरूमध्य को निरापद बनाने के अभियान के समय अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की ज़रूरत पड़ेगी।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य लिए एक 'प्लान B' की वकालत
स्वीडन के हेलसिंगबोर्ग नगर में 22 मई को हुई नाटो (NATO) के विदेश मंत्रियों की बैठक में बोलते हुए, मार्को रूबियो ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए एक 'प्लान B' की वकालत की। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ ऐसे किसी भी समझौते का, जिसमें इस जलडमरूमध्य को — जो वैश्विक तेल और गैस बाज़ार के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण जलमार्ग है— फिर से खोलने का प्रावधान हो, हर कोई स्वागत ही करेगा। लेकिन, ईरान यदि इस जलडमरूमध्य को फिर से खोलने से इनकार कर देता है और उस पर अपना नियंत्रण बनाए रखने तथा वहां से गुज़रने के लिए टोल (शुल्क) लगाने पर अड़ा रहता है— तो एक 'प्लान B' की ज़रूरत पड़ेगी।
अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो ने बताया कि फ्रांस और ब्रिटेन के नेतृत्व वाला एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन, वर्तमान टकराव खत्म होने के बाद के लिए एक संभावित नौसैनिक मिशन की तैयारी कर रहा है। साथ ही उनका कहना था कि 'तब भी हमें एक 'प्लान B' की ज़रूरत है, यदि कोई गोलीबारी शुरू कर दे, तो ऐसी स्थिति में आप जलडमरूमध्य को फिर से कैसे खोलेंगे?' उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि यह ज़रूरी तौर पर नाटो (NATO) का एक मिशन होना चाहिए या नहीं, 'लेकिन इसमें निश्चित रूप से वे नाटो देश शामिल होंगे जो अपना योगदान देने में सक्षम हैं।'
रूबियो ने स्वीडन वाले अपने वक्तव्य में इस बात पर ज़ोर दिया कि अमेरिका अपने सहयोगियों की मदद पर निर्भर नहीं है। उनके शब्दों में, 'संयुक्त राज्य अमेरिका यह कर सकता है, लेकिन कुछ ऐसे देश भी हैं जिन्होंने इस तरह के काम में संभावित रूप से हिस्सा लेने में दिलचस्पी दिखाई — ऐसी नौबत यदि सचमुच आती है।' उन्होंने किसी खास देश का नाम नहीं लिया।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य का खुलना विवाद का विषय
अमेरिका और ईरान के बीच इस समय रुकी हुई बातचीत में होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलना उनके बीच विवाद के मुख्य बिंदुओं में से एक है। युद्ध शुरू होने के बाद, ईरान ने धमकियां देकर और तेलवाही टैंकरों तथा मालवाही जहाज़ों पर गोलाबारी करके इस जलडमरूमध्य से होकर जहाज़ों की आवाजाही को काफी हद तक बंद कर दिया है। इसके जवाब में, अमेरिका ने भी अपनी तरफ से ईरानी बंदरगाहों की तरफ जहाजों की आवाजाही रोक रखी है।
इस दोहरी नाकेबंदी के अलवा, होर्मुज़ जलडमरूमध्य से हो कर जहाज़ों का आना-जाना तब तक इसलिए भी ख़तरे से खाली नहीं होगा, जब तक ईरान द्वारा जलडमरूमध्य की तलहटी में बिछाई गई विस्फोटक सुरंगों को ढूंढ-ढूंढ कर नष्ट नहीं कर दिया जाता। अमेरिका के लिए यह एक बहुत ही संवेदनशील मुद्दा बन गया है। दैनिक 'द टेलीग्राफ़' के अनुसार, अमेरिकी नौसेना, ईरान द्वारा बिछाई गई समुद्री सुरंगों को हटाने में अभी शायद सक्षम नहीं है— न तो तेज़ी से और न ही अकेले। इस काम में यूरोपीय देशों के सहयोग की भी एक प्रमुख भूमिका हो सकती है।
अनगिनत बारूदी सुरंगें, हटाने में छह महीने लग सकते हैं
'द टेलीग्राफ़' के अनुसार, ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य की तलहटी में 'महाम,' 'सदाफ़,' 'MDM,' और 'EM-52' आदि नाम वाली अनगिनत बारूदी सुरंगें फैला रखी हैं। अमेरिकी कांग्रेस (संसद) को बंद दरवाज़े के पीछे दी गई एक ब्रीफ़िंग में, पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय) ने कथित तौर पर कहा कि इन सुरंगों को हटाने के अभियान में छह महीने तक का समय लग सकता है।
'द टेलीग्राफ़' के अनुसार, अमेरिकी नौसेना के पूर्व अधिकारी केविन आयर ने कहा, 'लगभग 518 वर्ग किलोमीटर का इलाका साफ़ करना होगा। यह बहुत बड़ा समुद्री विस्तार है।' इससे पता चलता है कि ऐसा कोई अभियान कितना जटिल और जोखिम भरा होगा। जिन नौसैनिक जहज़ों की सहायता से यह काम करना होगा, उनका अभी तक असली युद्ध की परिस्थितियों में परीक्षण तक नहीं हुआ है। एक अंदरूनी सूत्र ने 'द टेलीग्राफ' को बताया: 'गठबंधन के भीतर क्षमताओं का सबसे बड़ा हिस्सा यूरोपीय देशों के पास है।'
अमेरिका के लिए यूरोपीय समर्थन
अतीत के रूस-अमेरिकी 'शीत युद्ध' वाले समय के बाद के दौर में अमेरिका ने मुख्य रूप से विमान वाहक जहाज़ों, पनडुब्बियों और विध्वंसक जहाज़ों पर ध्यान केंद्रित किया, जबकि कई यूरोपीय देशों ने बारूदी सुरंगों का पता लगाने की अपनी विशेष क्षमताओं को बनाए रखा। 'द टेलीग्राफ' के अनुसार, जर्मनी बारूदी सुरंगों का पता लगाने वाले अपने जहाज़ 'फुल्दा' को पहले ही तैनात कर चुका है। बताया जा रहा है कि ब्रिटेन भी स्वचालित बारूदी सुरंग-खोजी जहाज़ और गोताखोर उपलब्ध करा रहा है, जबकि इटली बारूदी सुरंगें हटाने वाले जहाज़ भेज रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका के दो जहाज— यूएस पायोनियर और यूएस चीफ़— पहले ही फ़ारस की खाड़ी की ओर रवाना हो चुके हैं। हालांकि, वहां पहुंचने के बाद उन्हें काफ़ी मदद की ज़रूरत पड़ सकती है। माना जाता है कि बारूदी सुरंगों संबंधी किसी संभावित सफ़ाई अभियान की स्थिति में अमेरिका अपने यूरोपीय सहयोगी देशों के साथ मिलकर ही कोई कदम उठाएगा।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी IEA की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ उपयोगी बातचीत की आशा में उस पर नए हमलों को फिलहाल रोक रखा है। यदि फिर से युद्ध भड़का तो कच्चे तेल की कीमतों में विस्फोटक बढ़ोतरी होनी तय है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने कहा है कि ज़रूरत पड़ने पर वह और अधिक तेल-भंडारों से तेल जारी करने के लिए तैयार है, लेकिन दीर्घकालिक नुकसान से बचने के लिए हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को जल्द खोलना भी बेहद ज़रूरी है।
ईरान के भौगोलिक नियंत्रण वाले इस 21 किलोमीटर चौड़े जलमार्ग के बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है। IEA ने चेतावनी दी कि यदि हॉर्मुज जलडरूमध्य दोबारा नहीं खुला या ऊर्जा निर्यात के वैकल्पिक रास्ते नहीं बनाए गए, तो दुनिया तेल की आपूर्ति के और भी बड़े संकट में फंस सकती है।
वैश्विक ऊर्जा संकट की सबसे गंभीर चेतावनी
ऐसे में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने वैश्विक ऊर्जा संकट को लेकर अब तक की सबसे गंभीर चेतावनी जारी की है। एजेंसी के प्रमुख फ़ेथ बिरोल ने कहा है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुज़रने वाला यातायात ठप होने से दुनिया के बाजारों से प्रतिदिन करीब 1.4 करोड़ बैरल तेल की आपूर्ति कम हो गई है। वैश्विक तेल भंडार तेजी से घट रहे हैं। मार्च में IEA और उसके 32 सदस्य देशों ने रिकॉर्ड 40 करोड़ बैरल तेल बाज़ार में जारी किया था, लेकिन अब ये भंडार भी लगभग ख़त्म होने की स्थिति में पहुंच गए हैं। फ़ेथ बिरोल ने चेतावनी दी कि हालत यदि सुधरी नहीं, तो जुलाई तक वैश्विक तेल बाज़ार ख़तरे की घंटी वाले ''रेड ज़ोन'' में पहुंच सकता है।
''रेड ज़ोन'' का अर्थ ऐसी स्थिति है, जब वैश्विक तेल आपूर्ति मांग के दबाव को संभालने में असमर्थ हो जाए। यानी, तेल भंडार इतने कम हो जाएं कि कोई भी अतिरिक्त बाधा आपूर्ति संकट और कीमतों में तेज़ उछाल पैदा कर दे। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें फिलहाल 104 से 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी हैं, जबकि ईरान युद्ध शुरू होने से पहले यह क़रीब 72 डॉलर प्रति बैरल थी। बिरोल पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि वर्तमान तेल संकट 1973, 1979 और 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान आए तेल संकटों से भी ज्यादा गंभीर है। उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार से प्रतिदिन 1.4 करोड़ बैरल तेल पहले ही ग़ायब हो चुका है।
दोबारा युद्ध भड़का तो क्या होगा?
मई की शुरुआत में कच्चे तेल की क़ीमतें 114 डॉलर तक पहुंची थीं। यदि युद्ध दोबारा भड़का तो क़ीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। IEA के अनुसार, 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान 18.27 करोड़ बैरल तेल जारी किया गया था, लेकिन इस बार 40 करोड़ बैरल जारी करने के बावजूद संकट काबू में नहीं आ रहा है। बिरोल ने कहा कि इस भयावः स्थिति का सबसे अधिक असर गरीब देशों पर पड़ेगा, ख़ासकर अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में तो खाद्य संकट तक पैदा हो सकता है! कहने की आवश्यकता नहीं कि तब भारत में भी कुहराम मच जायेगा। किंतु, प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक अंध विरोधी तब भी तेल के अकाल के लिए उन्हें ही दोषी ठहराएंगे।

OpenAI के सैकड़ों कर्मचारी अब करोड़पति बन चुके हैं। पिछले साल अक्टूबर में कंपनी ने कर्मचारियों को 3 करोड़ डॉलर तक के शेयर बेचने की अनुमति दी थी, जिससे वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बूम से सबसे पहले बड़ा फायदा उठाने वालों में शामिल हो गए। AI सेक्टर में तेजी से बढ़ती संपत्ति का यह बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। हालांकि, कुछ कर्मचारियों ने अपने बचे हुए शेयर दान संबंधी फंड्स में डाल दिए, ताकि सामाजिक कार्यों में योगदान देने के साथ टैक्स छूट का लाभ भी मिल सके।
रिपोर्ट के अनुसार, करीब 600 वर्तमान और पूर्व कर्मचारियों ने पिछले साल अपने शेयर बेचे। इस सौदे के तहत निवेशकों को कंपनी के शुरुआती कर्मचारियों के पास मौजूद शेयर खरीदने की अनुमति दी गई थी। सामूहिक रूप से इन कर्मचारियों ने करीब 6.6 अरब डॉलर की कमाई की। The Wall Street Journal की रिपोर्ट के मुताबिक, 75 कर्मचारियों ने अधिकतम सीमा तक शेयर बेचकर करीब 3 करोड़ डॉलर प्रति व्यक्ति हासिल किए, जबकि औसत भुगतान लगभग 1.1 करोड़ डॉलर रहा।
ALSO READ: महंगाई की मार, अमूल और मदर डेयरी ने बढ़ाई दूध की कीमतें, 14 मई से होंगी लागू
The Telegraph के अनुसार, OpenAI कर्मचारियों को अपने शेयर नकद कराने से पहले दो साल तक इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में पिछले साल का यह सौदा उन शुरुआती मौकों में से एक था, जब निवेशक कर्मचारियों के शेयर खरीद सके। कंपनी ने 2022 के आखिर में अपना चर्चित AI चैटबॉट ChatGPT लॉन्च किया था।
OpenAI ने 2019 में अपना लाभ कमाने वाला सब्सिडियरी मॉडल शुरू किया था, तब कंपनी का मूल्यांकन करीब 1 अरब डॉलर था। बाद में Microsoft के निवेश और ChatGPT की सफलता के बाद 2023 में कंपनी की वैल्यू 29 अरब डॉलर तक पहुंच गई। रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2025 में निजी शेयरों की बिक्री के समय कंपनी का मूल्यांकन 500 अरब डॉलर था। वहीं इस साल मार्च में 122 अरब डॉलर का निवेश जुटाने के बाद OpenAI की वैल्यू 852 अरब डॉलर से ज्यादा आंकी गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सिर्फ शुरुआत है और आने वाले समय में अमेरिका के बे एरिया समेत कई टेक शहरों में बड़ी संपत्ति बनने की लहर देखने को मिल सकती है। The Wall Street Journal के अनुसार, OpenAI और Anthropic इतिहास के दो सबसे बड़े IPO की तैयारी कर रहे हैं। इससे इन कंपनियों के कर्मचारियों को अपने शेयर बेचने का मौका मिलेगा और बड़ी संख्या में लोग मल्टीमिलियनेयर बन सकते हैं।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि AI बूम से पैदा हो रही यह संपत्ति अभूतपूर्व है। डॉट-कॉम दौर में कई कर्मचारियों को IPO के बाद तक इंतजार करना पड़ता था और कई मामलों में बाजार गिरने से उन्हें लाभ नहीं मिल पाया। हालांकि Google और Facebook के शुरुआती कर्मचारियों ने भी भारी कमाई की थी, लेकिन AI स्टार्टअप्स में इस बार कहीं ज्यादा कर्मचारियों को फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। Edited by : Sudhir Sharma

भारतीय फुटबॉल प्रेमियों के लिए फीफा विश्वकप 2026 से जुड़ी अच्छी और बुरी दोनों खबर है। बुरी खबर यह कि अमेरिका में होने वाले फीफा विश्वकप 2026 के लिए किसी भी निजी भारतीय प्रसारक ने बोली नहीं लगाई है। अच्छी खबर यह कि फीफा विश्वकप 2026 का प्रसारण अब सरकारी प्रसारक दूरदर्शन करेगा, जिसे खेल प्रेमी मुफ्त में देख सकेंगें।
गौरतलब है कि फुटबॉल की वैश्विक संस्थआ फीफा ने पिछले साल प्रसारणकर्ताओं से निविदा आमंत्रित की थी। लेकिन किसी भी निजी प्रसारणकर्ता ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। इस कारण फीफा $100 मिलियन डॉलर के अनुबंध को 35 मिलियन में बेचने को राजी हो गया लेकिन फिर भी किसी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई।
Doordarshan to live telecast FIFA World Cup matches in India after no private broadcaster submitted bids for rights. pic.twitter.com/8blfAzdGZe
— Indian Tech & Infra (@IndianTechGuide) May 11, 2026
इस कारण भारत में दूरदर्श फुटबॉल विश्वकप का प्रसारण करेगा। दिलचस्पी ना दिखाने का प्रमुख कारण समय क्षेत्र है। अमेरिका में होने वाले विश्वकप भारतीय समयानुसार देर रात शुरु होंगे जिससे राजस्व ना मिलने की उम्मीद है।उल्लेखनीय है कि फीफा वर्ल्ड कप 2026, 11 जून को शुरू होगा और इसका फाइनल 19 जुलाई को अमेरिका के न्यूयॉर्क में होगा। इस विश्वकप की अमेरिका मैक्सिको और कनाडा मेजबानी कर रहे हैं।
पहली बार टूर्नामेंट में 32 नहीं, बल्कि 48 टीमें ट्रॉफी की जंग लड़ेंगी।कुल 39 दिनों तक चलने वाले इस विश्व कप में 104 मुकाबले खेले जाएंगे, जो इसे अब तक का सबसे बड़ा और सबसे लंबा विश्व कप बनाते हैं।
FIFA World Cup on Doordarshan, Free for 1.4 billion people.
DD Sports just became the most important sports channel in India.
→ No private broadcaster wanted the rights
→ Government steps in by default
→ 500M+ households get World Cup for freeSometimes the “boring”…
— Prafull Billore (@_prafullbillore) May 11, 2026
ग्रुप स्टेज: 12 ग्रुप और 48 टीमें
वर्ल्ड कप 2026 में 12 ग्रुप (A से L तक) होंगे, हर ग्रुप में 4 टीमें होंगी. सभी टीम अपने ग्रुप में 3-3 मैच खेलेंगी।
इस प्रकार हैं कुछ महत्वपूर्ण ग्रुप:
ग्रुप A: मेक्सिको, दक्षिण कोरिया, दक्षिण अफ्रीका, डेनमार्क / मैसिडोनिया / चेकिया / आयरलैंड
ग्रुप B: कनाडा, स्विट्जरलैंड, कतर, इटली / नॉर्दर्न आयरलैंड / वेल्स / बोस्निया
ग्रुप C: ब्राजील, मोरक्को, स्कॉटलैंड, हैती
ग्रुप D: USA (अमेरिका), ऑस्ट्रेलिया, पराग्वे, तुर्किये / रोमानिया / स्लोवाकिया / कोसोवो
ग्रुप E: जर्मनी, इक्वाडोर, आइवरी कोस्ट (कोट डी’वोआर), कुरासाओ
ग्रुप F: नीदरलैंड्स, जापान, ट्यूनीशिया, यूक्रेन / स्वीडन / पोलैंड / अल्बानिया
ग्रुप G: बेल्जियम, ईरान, मिस्र, न्यूजीलैंड
ग्रुप H: स्पेन, उरुग्वे, सऊदी अरब, केप वर्डे
ग्रुप I: फ्रांस, सेनेगल, नॉर्वे, इराक / बोलिविया / सूरीनाम
ग्रुप J: अर्जेंटीना, ऑस्ट्रिया, अल्जीरिया, जॉर्डन
ग्रुप K: पुर्तगाल, कोलंबिया, उज्बेकिस्तान, DRC (डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो) / जमैका / न्यू कैलेडोनिया
ग्रुप L: इंग्लैंड, क्रोएशिया, घाना, पनामा
इस बार केप वर्डे, क्युरासाओ, जॉर्डन और उज्बेकिस्तान पहली बार विश्व कप खेलेंगे।
टूर्नामेंट का पूरा शेड्यूल
ग्रुप स्टेज: 11 जून – 27 जून
राउंड ऑफ 32: 28 जून – 3 जुलाई
राउंड ऑफ 16: 4 – 7 जुलाई
क्वार्टरफाइनल: 9 – 11 जुलाई
सेमीफाइनल: 14 – 15 जुलाई
थर्ड-प्लेस मैच: 18 जुलाई
फाइनल: 19 जुलाई

विश्व वॉलीबॉल महासंघ (FIVB) ने ‘कानूनी और प्रशासनिक मानकों’ के उल्लंघन का हवाला देते हुए भारतीय वॉलीबॉल महासंघ की मान्यता तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी।यह फैसला ऐसे समय आया है, जब कुछ दिन पहले ही दो अनुभवी खिलाड़ियों ने ‘खराब सुविधाओं’ तथा चयन में ‘राजनीति’ का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय शिविर छोड़ दिया था।FIVB ने बयान में कहा कि उसके नियमों के अनुरूप आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक शर्तों का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण भारतीय संघ की अंतरिम मान्यता वापस ले ली गई है।
FIVB ने देश में खेल की निरंतरता और खिलाड़ियों के हितों की रक्षा के लिए एक संचालन समिति गठित की है, जिसमें विश्व संस्था और भारतीय ओलंपिक संघ के प्रतिनिधि शामिल हैं।संचालन समिति का मुख्य उद्देश्य बदलाव के इस दौर में खेल संचालन में स्थिरता, पारदर्शिता और सुशासन सुनिश्चित करना है। इसके तहत खिलाड़ियों के हितों की सुरक्षा, एथलीट आयोग का गठन, राज्य संघों के चुनाव और संविधान को कानूनी मानकों के अनुरूप बनाना शामिल है।
इसके अलावा, समिति पारदर्शी और योग्यता-आधारित राष्ट्रीय टीम चयन प्रक्रिया लागू करेगी, आगामी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का समन्वय करेगी तथा तकनीकी और उच्च प्रदर्शन सहायता उपलब्ध कराएगी।FIVB के वॉलीबॉल सशक्तिकरण कार्यक्रम के तहत भारत को 2026 में 2.58 लाख डॉलर की सहायता जारी रहेगी।
“…the FIVB Board of Administration has determined that the legal and administrative requirements established by the #FIVB have not been respected by the interim leadership of the #Volleyball Federation of India (#VFI),” the world body said in a statement.…
— News9 (@News9Tweets) April 22, 2026
दिलचस्प बात यह है कि भारतीय संघ का कामकाज पहले से ही एक अंतरिम संचालन समिति देख रही थी, जिसे प्रशासनिक सुधारों की शर्त पर सीमित अवधि के लिए मान्यता दी गई थी।विश्व निकाय ने एक बयान में कहा, “एफआईवीबी के सामान्य विनियमों के अनुच्छेद 1.5.3 और 1.9.1 के अनुसार, एफआईवीबी प्रशासनिक बोर्ड ने यह निर्धारित किया है कि भारतीय वॉलीबॉल महासंघ (वीएफआई) के अंतरिम नेतृत्व द्वारा एफआईवीबी द्वारा स्थापित कानूनी और प्रशासनिक आवश्यकताओं का पालन नहीं किया गया है।”
इसमें कहा गया, “इसलिए, वीएफआई की अस्थायी मान्यता तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई है और भारत में वॉलीबॉल गतिविधियों की निर्बाध निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए एफआईवीबी और भारतीय ओलंपिक संघ के प्रतिनिधियों से बनी एक संचालन समिति को अस्थायी प्रशासनिक क्षमता प्रदान की गई है।”इस बीच, अहमदाबाद में 20 से 28 जून तक एशियाई वॉलीबॉल परिसंघ पुरुष कप का आयोजन होना है, जिसमें 12 देशों के भाग लेने की संभावना है।

एप्पल के CEO टिम कुक सितंबर में अपने मौजूदा पद से इस्तीफा दे देंगे और एप्पल के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर नई भूमिका शुरू करेंगे। एप्पल के हार्डवेयर इंजीनियरिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट जॉन टर्नस, CEO की भूमिका संभालेंगे।
15 साल से टिम कुक इस अहम जिम्मेदारी को निभा रहे थे। 65 वर्षीय कुक इस्तीफे के बाद भी वे कंपनी से जुड़े रहेंगे। वे एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर नई पारी की शुरुआत करेंगे।
टिम कुक 1998 में वर्ल्डवाइड ऑपरेशंस के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट के रूप में Apple में शामिल हुए थे। साल 2005 से 2011 तक उन्होंने कंपनी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर के रूप में काम किया।
साल 2011 में एपल के को-फाउंडर स्टीव जाब्स के जाने के बाद टिम कुक कंपनी के सीईओ बने थे। उनके कार्यकाल के दौरान एप्पल कंपनी ने आसमान की बुलंदियों को छुआ और कंपनी का मार्केट वैल्यूएशन 4 ट्रिलियन डॉलर तक जा पहुंचा। उन्होंने चीन पर निर्भरता कम करते हुए भारत पर फोकस किया। इससे कंपनी को काफी फायदा हुआ।
edited by : Nrapendra Gupta

सैम ऑल्टमैन की कंपनी OpenAI ने एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए Sora को बंद करने की घोषणा कर दी। यह ऐलान उसी समय हुआ जब Disney ने भी OpenAI के साथ अपनी बड़ी पार्टनरशिप खत्म कर दी। घोषणा के तरीके से ऐसा लगा कि OpenAI के भीतर चीजें तेजी से बदल रही हैं। हालांकि Sora को पूरी तरह कब बंद किया जाएगा और इससे यूजर्स के बनाए गए वीडियो पर क्या असर पड़ेगा- इस बारे में अभी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
We’re saying goodbye to the Sora app. To everyone who created with Sora, shared it, and built community around it: thank you. What you made with Sora mattered, and we know this news is disappointing.
We’ll share more soon, including timelines for the app and API and details on…
— Sora (@soraofficialapp) March 24, 2026
X पर Sora अकाउंट ने कहा कि हम जल्द ही और जानकारी साझा करेंगे, जिसमें ऐप और API की टाइमलाइन और आपके काम को सुरक्षित रखने से जुड़ी डिटेल्स शामिल होंगी। ये वीडियो एआई टूल्स आपके लिए बेस्ट ऑप्शन बन सकते हैं।
पहले क्या खास था Sora में?
यह बहुत ही आसान था। इसमें टेक्स्ट लिखते ही वीडियो बना जाते, जो सिनेमेटिक और रियलिस्टिक क्लिप्स
की तरह होते थे। यह बिलकुल सोशल मीडिया जैसा वीडियो प्लेटफॉर्म था। लेकिन महंगा, रिस्की और विवादों में भी यह आया। लॉन्च होने के बाद यह काफी वायरल हुआ, लेकिन इसके बंद होने के पीछे कॉपीराइट विवाद, डीपफेक और गलत कंटेंट और बहुत ज्यादा खर्च बताया जा रहा है।
Google Veo 3
Google का Veo 3 मॉडल सबसे लोकप्रिय ऑप्शन्स में से एक माना जा रहा है। लॉन्च के समय इसे 'बेहद रियलिस्टिक' बताया गया था। इस टूल से हाई-क्वालिटी वीडियो बनाए जा सकते हैं , लेकिन इसके लिए Google का पेड AI प्लान लेना होगा। इसकी कीमत लगभग 7.99 डॉलर प्रति माह से शुरू होती है। इन प्लान्स के साथ Gemini जैसे एडवांस AI फीचर्स भी मिलते हैं।
Luma Ray3
Ray3 भी एक पावरफुल AI वीडियो जनरेशन टूल है। 1080p वीडियो आउटपुट के साथ एडवांस एडिटिंग फीचर्स मिलते हैं। साथ ही प्रोफेशनल क्वालिटी वीडियो भी बनाए जा सकते हैं, लेकिन इसकी कीमत ज्यादा होने के कारण यह हर यूज़र के लिए किफायती नहीं है। Edited by : Sudhir Sharma

