UP SIR Update: यूपी के CEO ने 10 अप्रैल के बाद के सभी वोटर फॉर्म्स की ऑडिट के दिए आदेश, वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोपों के बाद उठाया ये कदम

UP SIR Update: उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट से जुड़ी कथित अनियमितताओं की खबरों के बीच मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने 10 अप्रैल से कंप्यूटर सहायकों द्वारा संसाधित किए गए फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 की राज्यव्यापी जांच यानी ऑडिट कराने का आदेश दिया है। यह प्रक्रिया स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की अवधि समाप्त होने के बाद सामने आई शिकायतों और वोटर लिस्ट में संभावित गड़बड़ियों की जांच के लिए शुरू की जा रही है।

टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) की खबर के मुताबिक, पीलीभीत और आजमगढ़ समेत कुछ जिलों की वोटर लिस्ट में अनियमितताओं की रिपोर्ट सामने आने के बाद यह फैसला लिया गया। निर्वाचन विभाग अब कंप्यूटर सहायकों द्वारा दर्ज और संसाधित किए गए फॉर्म की जांच करेगा, ताकि किसी भी तरह की गलती या नियमों के उल्लंघन का पता लगाया जा सके।

फॉर्म-6, 7 और 8 की होगी जांच

निर्वाचन विभाग के आदेश के तहत 10 अप्रैल से कंप्यूटर सहायकों द्वारा संसाधित किए गए तीन प्रकार के फॉर्म की जांच की जाएगी:-

– फॉर्म-6: वोटर लिस्ट में नया नाम शामिल कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

– फॉर्म-7: मतदाता सूची में नाम हटाने या किसी प्रविष्टि पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए इस्तेमाल होता है।

– फॉर्म-8: वोटर लिस्ट में दर्ज डिटेल्स में संशोधन, पता बदलने या अन्य निर्धारित सुधारों के लिए उपयोग किया जाता है।

इन फॉर्म की जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, हटाने और डिटेल्स संशोधित करने की प्रक्रिया नियमों के अनुसार हुई या नहीं। ऑडिट के दौरान सामने आने वाली अनियमितताओं के आधार पर संबंधित मामलों में आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

गड़बड़ी मिलने पर अधिकारियों पर भी होगी कार्रवाई

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक अहम वर्चुअल बैठक की। इस दौरान उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जांच में अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। खबरों के अनुसार, जिला निर्वाचन अधिकारियों को भी अपर्याप्त निगरानी के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

इसका मतलब है कि जांच केवल कंप्यूटर सहायकों तक सीमित नहीं रहेगी। बल्कि पर्यवेक्षण और निगरानी की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों की भूमिका भी देखी जा सकती है। इसके अलावा, संभागीय आयुक्तों और वोटर लिस्ट के पर्यवेक्षण के लिए नियुक्त रोल ऑब्जर्वरों को भी निर्वाचन लिस्ट से जुड़े कार्यों की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।

पीलीभीत और आजमगढ़ की शिकायतों के बाद बढ़ी सतर्कता

पीलीभीत और आजमगढ़ में वोटर लिस्ट से जुड़ी कथित अनियमितताओं की रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग की सतर्कता बढ़ गई है। राज्यव्यापी ऑडिट के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि कहीं मतदाता रजिस्ट्रेशन और संशोधन की प्रक्रिया में गलत जानकारी तो नहीं की गईं। हालांकि, अखबार की इस रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि अब तक कितने फॉर्म में गड़बड़ी मिली है या कितने अधिकारियों के खिलाफ औपचारिक कार्रवाई शुरू हुई है।

SIR में इस्तेमाल सॉफ्टवेयर की जानकारी देने से निर्वाचन आयोग का इनकार

SIR से जुड़ा एक दूसरा मुद्दा भी सामने आया है। निर्वाचन आयोग ने वोटर लिस्ट में त्रुटियों और विसंगतियों की पहचान करने के लिए इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर के नाम और वर्जन की जानकारी शेयर करने से इनकार कर दिया है। अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग ने 16 अक्टूबर को दिए गए जवाब में कहा कि मांगी गई जानकारी व्यावसायिक गोपनीयता, व्यापारिक रहस्यों और बौद्धिक संपदा से संबंधित है। इसी आधार पर आयोग ने इसे सूचना का अधिकार (RTI) एक्ट के तहत सार्वजनिक किए जाने से छूट प्राप्त जानकारी बताया। यह जवाब सॉफ्टवेयर के नाम और वर्जन के संबंध में दायर RTI आवेदन के जवाब में दिया गया था।

सॉफ्टवेयर की पारदर्शिता पर उठे सवाल

वोटर लिस्ट की जांच में तकनीक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में इस्तेमाल किए जाने वाले सॉफ्टवेयर के बारे में जानकारी नहीं मिलने से उसकी कार्यप्रणाली और त्रुटियों की पहचान की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ सकते हैं। हालांकि, केवल सॉफ्टवेयर का नाम और वर्जन सार्वजनिक नहीं किए जाने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि वोटर लिस्ट में कोई गड़बड़ी हुई है। इसके लिए स्वतंत्र जांच, उपलब्ध दस्तावेजों और निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया से संबंधित तथ्यों का मूल्यांकन जरूरी होगा।

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Brazil election results 2026: ब्राजील के सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट की ओर से जारी किए गए नतीजों के अनुसार, सत्ताधारी वर्कर्स पार्टी के उम्मीदवार और ब्राजील के मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने रविवार (25 अक्टूबर) को हुए राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर (रनऑफ) में ऐतिहासिक जीत हासिल की है। वोटर गाइड देखें आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 99.89 प्रतिशत वोटों की गिनती पूरी होने पर 80 वर्षीय वामपंथी नेता लूला को कुल वैध वोटों का 51.78 प्रतिशत हिस्सा मिला। वहीं, लिबरल पार्टी से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार और ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे फ्लेवियो बोल्सोनारो को 48.23 प्रतिशत वोट मिले।

चौथी बार बनेंगे राष्ट्रपति

पहले दौर में पूर्व फैक्ट्री वर्कर लूला पिछड़ गए थे। लेकिन इसके बाद उन्होंने शानदार वापसी की। लूला 5 जनवरी 2027 को चार साल के कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे। यह चौथी बार होगा जब वे ब्राजील के राष्ट्रपति बनेंगे। वे पहले दौर में पीछे रह गए थे। उनकी इस जीत ने लैटिन अमेरिका में उस दक्षिणपंथी झुकाव को रोक दिया है, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन हासिल था। लूला 2027 से 2030 तक शासन करेंगे। उनके सामने एक ऐसी कांग्रेस (संसद) होगी, जिसमें बोल्सोनारो की लिबरल पार्टी के पास दशकों में सबसे ज्यादा सीटें हैं।

जनता का जताया आभार

रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लूला ने लिखा: “एक बार फिर, ब्राजील की जनता ने मुझे दिखाया कि जब हम साथ मिलकर चलते हैं, तो कोई भी सपना बहुत बड़ा नहीं होता। हमने इन दिनों खूब मेहनत की। हर कदम, हर काम और हर मार्च, केवल चुनाव प्रचार के पल नहीं थे। ये सपनों के साक्षात होने का प्रमाण थे, जो ठोस उपलब्धियों में बदल गए…जैसे कि 6×1 वर्किंग डे (सप्ताह में 6 दिन काम) का अंत। लोगों के आगे बढ़े हाथ और उनकी मुस्कान ने मुझे याद दिलाया कि मैंने अपना जीवन इस देश के मजदूरों की लड़ाई के लिए क्यों समर्पित किया है।”

वोटर गाइड देखें उन्होंने आगे कहा, “हम इस सफर से और अधिक मजबूत, एकजुट और बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने के लिए तैयार होकर निकले हैं। ब्राजील गले लगाने, हर आंसू, हर मुस्कान और मेरा हाथ कभी न छोड़ने के लिए आपका धन्यवाद। हमारी कहानी के अभी कई खूबसूरत पन्ने लिखे जाने बाकी हैं।” 4 अक्टूबर को हुए मतदान के पहले दौर में बोल्सोनारो 47.03 प्रतिशत वैध वोटों के साथ आगे थे। जबकि लूला को 45.16 प्रतिशत वोट मिले थे। इस नतीजे के बाद, लैटिन अमेरिका के सबसे बड़े देश में तीन सप्ताह तक जोरदार चुनाव प्रचार चला।

मजदूर से राष्ट्रपति बनने तक का सफर

लूला की राजनीतिक यात्रा मजदूर आंदोलन से शुरू हुई। उन्हें ब्राजील के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक नेताओं में गिना जाता है। लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा का जन्म 27 अक्टूबर 1945 को ब्राजील के गारान्यून्‍स में हुआ था। उन्होंने कम उम्र में फैक्टरी में काम किया। फिर बाद में मजदूर यूनियन के नेता बने। वर्ष 1980 में उन्होंने वर्कर्स पार्टी (PT) की स्थापना में अहम भूमिका निभाई।

2002 में पहली बार राष्ट्रपति चुने गए और 2006 में दोबारा जीत हासिल की। लूला वामपंथी विचारधारा के नेता हैं। उनकी राजनीति में गरीबी और भुखमरी कम करना, सामाजिक कल्याण योजनाएं और मजदूरों के अधिकार प्रमुख मुद्दे रहे हैं। वह 2003 से 2010 तक राष्ट्रपति रहे और 2023 में फिर सत्ता में लौटे। 25 अक्टूबर 2026 को उन्होंने फ्लावियो बोल्सोनारो को हराकर चौथी बार राष्ट्रपति चुनाव जीता।

चौथी बार के राष्ट्रपति के लिए चुने गए

ब्राजील के राष्ट्रपति इनासियो लूला डा सिल्वा अब तक दो बार राष्ट्रपति बने हैं (और हालिया अक्टूबर 2026 के चुनाव में जीतकर चौथी बार के लिए चुने गए हैं)। उनके राष्ट्रपतियों के कार्यकाल और चुनाव का डिटेल्स इस प्रकार है:-

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  • लूला डा सिल्वा पहली बार 27 अक्टूबर 2002 को राष्ट्रपति चुने गए थे और उन्होंने 1 जनवरी 2003 को पद संभाला था।
  • वह अक्टूबर 2006 में दोबारा (दूसरे कार्यकाल के लिए) राष्ट्रपति चुने गए और उनका यह कार्यकाल 2011 की शुरुआत तक चला।
  • वे अक्टूबर 2022 का चुनाव जीतकर 1 जनवरी 2023 को तीसरी बार ब्राजील के राष्ट्रपति बने।
  • अक्टूबर 2026 के राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल करने के बाद वह 5 जनवरी 2027 से चौथी बार के लिए अपना राष्ट्रपति कार्यकाल संभालेंगे।