रूस की मुख्य सुरक्षा एजेंसी ‘फेडरल सिक्योरिटी सर्विस’ (FSS) ने मैसेजिंग एप टेलीग्राम के फाउंडर पावेल दुरोव के खिलाफ ‘आतंकवाद को बढ़ावा देने’ के आरोप तय किए हैं। इसके साथ ही रूस ने उन्हें इंटरनेशनल वॉन्टेड लिस्ट में भी डाल दिया है। FSS ने आरोप लगाया है कि टेलीग्राम का एडमिनिस्ट्रेशन उन चैनल्स, चैट्स और बोट्स को हटाने में नाकाम रहा है, जिनका इस्तेमाल यूक्रेनी इंटेलिजेंस एजेंसियां और चरमपंथी संगठन रूस में तोड़फोड़, साइबर फ्रॉड और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि बार-बार चेतावनी के बावजूद टेलीग्राम प्रशासन ने इन्हें हटाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। पावेल दुरोव पर नया केस दर्ज होने के बाद अब रूस में टेलीग्राम के भविष्य और इसकी सेवाओं पर पूरी तरह बैन लगने की आशंका बढ़ गई है। इंटरनेशनल वॉन्टेड लिस्ट में नाम शामिल FSS ने कानूनी कार्रवाई करते हुए पावेल दुरोव को अंतरराष्ट्रीय भगोड़ा घोषित किया है। उनका नाम इंटरनेशनल वॉन्टेड लिस्ट में डाल दिया गया है। पावेल दुरोव का जन्म रूस में ही हुआ था, लेकिन वे लंबे समय से देश से बाहर रह रहे हैं। उन्होंने 2021 में फ्रांस की नागरिकता हासिल की थी और इस समय वे दुबई से अपनी कंपनी और एप का संचालन कर रहे हैं। टेलीग्राम पर पहले से पाबंदियां, फिर भी लोकप्रिय रूस में टेलीग्राम सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग एप्स में से एक है। रूसी सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए एप पर पहले ही कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं। इसके बावजूद आम लोगों से लेकर सरकारी और मिलिट्री से जुड़े लोग भी इस एप का उपयोग करते हैं। नॉलेज बॉक्स क्या है फेडरल सिक्योरिटी सर्विस? FSS रूस की मुख्य आंतरिक सुरक्षा और खुफिया एजेंसी है। यह पूर्ववर्ती सोवियत संघ की एजेंसी KGB की उत्तराधिकारी मानी जाती है। इसका मुख्य काम देश के भीतर आतंकवाद रोकना, सीमाओं की सुरक्षा करना और साइबर सुरक्षा की निगरानी करना है। कौन हैं पावेल दुरोव? 1984 में रूस में जन्मे दुरोव को ‘रूस का मार्क जुकरबर्ग’ कहा जाता है। उन्होंने टेलीग्राम से पहले रूस का सबसे बड़ा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म VK बनाया था। डेटा प्राइवेसी और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर रूसी सरकार से हुए विवाद के बाद उन्होंने 2014 में रूस छोड़ दिया था।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि PoK में सरकार विरोधी प्रदर्शन कर रहे लोगों को वह भारत की तरह पाकिस्तान का दुश्मन मानते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों से किसी तरह की बातचीत नहीं की जाएगी आसिफ का यह बयान उस समय आया है, जब PoK में चुनाव के विरोध में निकाले गए जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के मार्च पर सुरक्षा बलों की फायरिंग में 30 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई और 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए। प्रदर्शनकारी PoK विधानसभा की 12 शरणार्थी सीटों को खत्म करने की मांग कर रहे हैं। हिंसा के बाद पाकिस्तान ने पूरे PoK में अतिरिक्त सेना, पैरा मिलिट्री और आर्म्ड कॉन्स्टेबुलरी तैनात कर दी है। पूरे क्षेत्र में धारा-144 लागू कर इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं। ख्वाजा आसिफ का बयान यहां सुनिए… 5 हजार लोगों के मार्च पर चली गोलियां मंगलवार को जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के बैनर तले करीब 5 हजार लोग रावलाकोट से मुजफ्फराबाद की ओर मार्च निकाल रहे थे। संगठन का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने बिना किसी उकसावे के फायरिंग कर दी। 30 से ज्यादा लोग मारे गए, जबकि 50 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। वहीं पाकिस्तान सरकार का दावा है कि प्रदर्शनकारी आधुनिक हथियारों से लैस थे और उन्होंने पहले सुरक्षाबलों पर हमला किया, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई। किस बात पर भड़का है आंदोलन? प्रदर्शन की अगुआई कर रही जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) की मांग है कि POK विधानसभा में कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटें खत्म की जाएं। संगठन का कहना है कि इन सीटों की वजह से इस्लामाबाद की राजनीतिक पार्टियां स्थानीय सरकार के गठन को प्रभावित करती हैं। उनका तर्क है कि विधानसभा चुनने का अधिकार सिर्फ POK में रहने वाले लोगों के पास होना चाहिए। POK की 12 शरणार्थी सीटों का विवाद क्या है? POK विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं। इनमें 45 सीटों पर सीधे POK के लोग मतदान करते हैं, जबकि 12 सीटें उन कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं, जो 1947 और उसके बाद जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान चले गए थे। इन सीटों के मतदाता POK में नहीं, बल्कि पाकिस्तान के पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा और अन्य हिस्सों में रहते हैं। इस बार इन 12 सीटों पर करीब 6 लाख मतदाता वोट डालने वाले हैं। JAAC का आरोप है कि इन सीटों के जरिए इस्लामाबाद की राजनीतिक पार्टियां POK की सरकार के गठन में दखल देती हैं। कई बार इन सीटों के नतीजे विधानसभा में बहुमत का समीकरण बदल देते हैं। यही वजह है कि JAAC की मांग है कि विधानसभा चुनने का अधिकार सिर्फ POK में रहने वाले लोगों के पास होना चाहिए और 12 शरणार्थी सीटों की व्यवस्था खत्म की जाए। विपक्षी दलों का भी आरोप है कि इन सीटों का इस्तेमाल चुनावी नतीजों को प्रभावित करने के लिए किया जाता है। इसी कारण पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) समेत कई दल चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा चुके हैं। भारत ने PoK में चुनाव को दिखावटी बताया भारत ने POK में हो रहे चुनाव को खारिज करते हुए इसे दिखावटी कवायद बताया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान इस प्रक्रिया के जरिए अपने अवैध कब्जे और मानवाधिकार उल्लंघनों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा क्षेत्र, जिसमें POK भी शामिल है, भारत का अभिन्न हिस्सा है।
US Tariff: रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अमेरिकी संसद के उच्च सदन (सीनेट) ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने से जुड़े एक अहम विधेयक को आगे बढ़ा दिया है। इस फैसले के साथ ही सीनेट में इस बिल पर औपचारिक बहस और अंतिम वोटिंग का रास्ता साफ हो गया है। अगर यह ब
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) को फिर से शुरू करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मालदीव सदस्य देशों के बीच बातचीत कराने और SAARC को दोबारा सक्रिय करने में हरसंभव मदद करेगा। स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुइज्जू ने कहा कि SAARC ने दक्षिण एशिया के देशों को कई फायदे दिए हैं, लेकिन पिछले करीब नौ साल से यह लगभग ठप पड़ा है। उनका कहना था कि देशों के बीच मतभेद बातचीत से सुलझाए जाने चाहिए और इसी रास्ते से संगठन को फिर से आगे बढ़ाया जा सकता है। मुइज्जू ने कहा कि SAARC का दोबारा सक्रिय होना दक्षिण एशिया में शांति, सुरक्षा और सहयोग के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि मालदीव इस दिशा में मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी सेना के मुताबिक, इन ठिकानों से अमेरिकी सैनिकों और सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों पर हमलों की तैयारी की जा रही थी। हमलों के कुछ घंटे बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि ये मिसाइलें जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे की ओर दागी गई थीं, लेकिन सभी को रास्ते में ही इंटरसेप्ट कर दिया गया। सऊदी अरब ने अपने पूर्वी प्रांत के तेल ठिकानों की ओर बढ़ रहे कई ड्रोन मार गिराए। वहीं, यमन के हुती विद्रोहियों ने लाल सागर में एक सऊदी तेल टैंकर पर बैलिस्टिक मिसाइल दागने की बात कही। यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस एजेंसी ने भी एक टैंकर के पास विस्फोट की सूचना दी है। इराक में US-सऊदी के हमलों से जुड़े फुटेज… पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ट्रम्प-नेतन्याहू की मुलाकात, ईरान पर बनी सहमति: व्हाइट हाउस में हुई बैठक के बाद नेतन्याहू ने इसे अपनी सबसे अच्छी बैठकों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेता इस बात पर सहमत हैं कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे। 2. जेलेंस्की ने ट्रम्प से एयर डिफेंस और युद्ध पर की चर्चा: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने ट्रम्प से मुलाकात में पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम, रक्षा सहयोग और रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर कूटनीतिक प्रयास तेज करने पर चर्चा की। 3. होर्मुज स्ट्रेट पर ओमान का नया फॉर्मूला: ईरान-अमेरिका तनाव के बीच ओमान ने प्रस्ताव दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट का नियंत्रण सिर्फ ईरान के पास न होकर क्षेत्र के सभी देशों की साझेदारी में हो। इस प्रस्ताव को खाड़ी के कई देशों का समर्थन भी मिला है। 4. अमेरिका-ईरान बातचीत की खबरों से कच्चा तेल सस्ता: दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई। ब्रेंट और WTI क्रूड दोनों पिछले कई दिनों के निचले स्तर पर कारोबार करते दिखे। 5. मिडिल ईस्ट में बढ़े ड्रोन हमले, कई देशों में अलर्ट: पिछले दो दिनों में इराक, जॉर्डन और सऊदी अरब में ड्रोन हमलों की कई घटनाएं सामने आई हैं। कुछ हमलों की जिम्मेदारी हूतियों ने ली है, जबकि कई मामलों में हमलावरों की पहचान अब तक नहीं हो सकी है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
अमेरिका में यूनिवर्सिटीज को मिलने वाली विदेशी फंडिंग पर सवालों के बीच नया खुलासा हुआ है। इससे यूनिवर्सिटीज और ट्रम्प प्रशासन के बीच टकराव बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। शिक्षा विभाग के पोर्टल के मुताबिक, हार्वर्ड को विदेशी स्रोतों से रिकॉर्ड 43,100 करोड़ रु. मिले हैं, जो देश में सबसे ज्यादा है। इसमें से छह हजार करोड़ चीन से आए हैं। ट्रम्प प्रशासन की वीसा नीतियों और प्रवासियों पर सख्ती के बीच अमेरिकी विश्वविद्यालयों पर विदेशी नागरिकों और पैसे पर अत्यधिक निर्भरता का आरोप लग रहा है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौते की बात कही जा रही है। ट्रम्प प्रशासन से जांच शुरू करने की मांग उठी है। अन्य अमेरिकी यूनिवर्सिटीज भी राडार पर यह विवाद सिर्फ हार्वर्ड तक सीमित नहीं है। अमेरिका के वॉच-लिस्ट में शामिल शीर्ष पांच चीनी कंपनियों (जैसे हुआवेई और एयर चाइना) ने देश के अलग-अलग कॉलेजों को करीब 1,140 करोड़ रु. दिए हैं। इन्हें भी राडार पर लेकर जांच हो सकती है। लैब की जासूसी और सैन्य तकनीक चोरी का खतरा अमेरिकी विश्वविद्यालयों में आ रहा विदेशी पैसा सिर्फ दान नहीं, बल्कि रणनीतिक घुसपैठ का जरिया बन चुका है। फंड के इस खेल से अमेरिका के सामने कई बड़े खतरे खड़े हो गए हैं। यूनिवर्सिटी लैब्स में विदेशी फंड के जरिए गोपनीय रिसर्च और डेटा चुराए जाने की आशंका जताई जा रही है। आरोप हैं कि चीनी सेना से जुड़ी संस्थाएं फंडिंग देकर अमेरिकी तकनीक का इस्तेमाल अपने हथियारों को तैयार करने में कर सकती हैं। हार्वर्ड और विदेशी संस्थाओं में 7,089 वित्तीय सौदे हुए हार्वर्ड ने विदेशी संस्थाओं के साथ 7,089 अलग-अलग वित्तीय सौदे किए हैं। इस रिकॉर्ड वित्तीय सौदे के कारण हार्वर्ड अमेरिका में विदेशी फंडिंग हासिल करने वाला शीर्ष संस्थान बना है। हार्वर्ड को चीनी सैन्य विकास से जुड़ी संस्थाओं से करीब 4 करोड़ रुपए और विदेशी टैलेंट प्रोग्राम से 4 करोड़ रु. मिले हैं। ट्रम्प ने कहा था- यह यूनिवर्सिटी एक मजाक है हार्वर्ड यूनिवर्सिटी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निशाने पर रहती है। पिछले साल (16 अप्रैल, 205) उन्होंने एक बयान में कहा था कि यह यूनिवर्सिटी एक मजाक है और यह सिर्फ वोक कर्मचारियों की भर्ती कर रहा है। अब हार्वर्ड को दुनिया की सबसे बेहतर यूनिवर्सिटी या कॉलेजों की किसी भी लिस्ट में नहीं गिना जाना चाहिए। हार्वर्ड एक मजाक है जो नफरत और मूर्खता सिखाता है। इसे अब सरकारी पैसा नहीं मिलना चाहिए। ट्रम्प ने इस बयान के एक दिन पहले ही हार्वर्ड की 18 हजार करोड़ रुपए की फंडिंग रोकी थी और उसका टैक्स फ्री दर्जा खत्म करने की बात कही थी। ————-
ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की टैक्स छूट खत्म कर सकते हैं:₹18 हजार करोड़ की फंडिंग भी रोकी; ट्रम्प यूनिवर्सिटी पर कंट्रोल चाहते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को दी गई टैक्स छूट खत्म करने की बात कही। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यूनिवर्सिटी को दी गई टैक्ट छूट पर फिर से विचार किया जा सकता है। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिका में यूनिवर्सिटीज को मिलने वाली विदेशी फंडिंग पर सवालों के बीच नया खुलासा हुआ है। इससे यूनिवर्सिटीज और ट्रम्प प्रशासन के बीच टकराव बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। शिक्षा विभाग के पोर्टल के मुताबिक, हार्वर्ड को विदेशी स्रोतों से रिकॉर्ड 43,100 करोड़ रु. मिले हैं, जो देश में सबसे ज्यादा है। इसमें से छह हजार करोड़ चीन से आए हैं। ट्रम्प प्रशासन की वीसा नीतियों और प्रवासियों पर सख्ती के बीच अमेरिकी विश्वविद्यालयों पर विदेशी नागरिकों और पैसे पर अत्यधिक निर्भरता का आरोप लग रहा है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौते की बात कही जा रही है। ट्रम्प प्रशासन से जांच शुरू करने की मांग उठी है। अन्य अमेरिकी यूनिवर्सिटीज भी राडार पर यह विवाद सिर्फ हार्वर्ड तक सीमित नहीं है। अमेरिका के वॉच-लिस्ट में शामिल शीर्ष पांच चीनी कंपनियों (जैसे हुआवेई और एयर चाइना) ने देश के अलग-अलग कॉलेजों को करीब 1,140 करोड़ रु. दिए हैं। इन्हें भी राडार पर लेकर जांच हो सकती है। लैब की जासूसी और सैन्य तकनीक चोरी का खतरा अमेरिकी विश्वविद्यालयों में आ रहा विदेशी पैसा सिर्फ दान नहीं, बल्कि रणनीतिक घुसपैठ का जरिया बन चुका है। फंड के इस खेल से अमेरिका के सामने कई बड़े खतरे खड़े हो गए हैं। यूनिवर्सिटी लैब्स में विदेशी फंड के जरिए गोपनीय रिसर्च और डेटा चुराए जाने की आशंका जताई जा रही है। आरोप हैं कि चीनी सेना से जुड़ी संस्थाएं फंडिंग देकर अमेरिकी तकनीक का इस्तेमाल अपने हथियारों को तैयार करने में कर सकती हैं। हार्वर्ड और विदेशी संस्थाओं में 7,089 वित्तीय सौदे हुए हार्वर्ड ने विदेशी संस्थाओं के साथ 7,089 अलग-अलग वित्तीय सौदे किए हैं। इस रिकॉर्ड वित्तीय सौदे के कारण हार्वर्ड अमेरिका में विदेशी फंडिंग हासिल करने वाला शीर्ष संस्थान बना है। हार्वर्ड को चीनी सैन्य विकास से जुड़ी संस्थाओं से करीब 4 करोड़ रुपए और विदेशी टैलेंट प्रोग्राम से 4 करोड़ रु. मिले हैं। ट्रम्प ने कहा था- यह यूनिवर्सिटी एक मजाक है हार्वर्ड यूनिवर्सिटी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निशाने पर रहती है। पिछले साल (16 अप्रैल, 205) उन्होंने एक बयान में कहा था कि यह यूनिवर्सिटी एक मजाक है और यह सिर्फ वोक कर्मचारियों की भर्ती कर रहा है। अब हार्वर्ड को दुनिया की सबसे बेहतर यूनिवर्सिटी या कॉलेजों की किसी भी लिस्ट में नहीं गिना जाना चाहिए। हार्वर्ड एक मजाक है जो नफरत और मूर्खता सिखाता है। इसे अब सरकारी पैसा नहीं मिलना चाहिए। ट्रम्प ने इस बयान के एक दिन पहले ही हार्वर्ड की 18 हजार करोड़ रुपए की फंडिंग रोकी थी और उसका टैक्स फ्री दर्जा खत्म करने की बात कही थी। ————-
ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की टैक्स छूट खत्म कर सकते हैं:₹18 हजार करोड़ की फंडिंग भी रोकी; ट्रम्प यूनिवर्सिटी पर कंट्रोल चाहते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को दी गई टैक्स छूट खत्म करने की बात कही। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यूनिवर्सिटी को दी गई टैक्ट छूट पर फिर से विचार किया जा सकता है। पूरी खबर पढ़ें…
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बैठक लगभग डेढ़ घंटे तक चली और अब खत्म हो गई है। नेतन्याहू को स्थानीय समयानुसार दोपहर 12:25 बजे व्हाइट हाउस से बाहर निकलते देखा गया।व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट का कहना है कि नेतन्याहू और ट्
यूक्रेन में चोर्नोमोर्स्क बंदरगाह पर जहाज के पास हमले में 13 भारतीय फंस गए हैं। ‘एमवी अमीर 1’ नाम का जहाज लगातार हो रहे ड्रोन और मिसाइल हमलों के बीच फंस गया है। इसके बाद इंडियन सीमेन यूनियन ने इस मामले में तुरंत मदद की अपील की है। यूनियन के मुताबिक, जहाज पर कुल 15 क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें 13 भारतीय नाविक शामिल हैं। जहाज बेहद खतरनाक हालात में फंसा हुआ है। उसके आसपास लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों की कोशिश हो रही है, जिससे चालक दल के सदस्य हर पल सीधे हमले की आशंका में जी रहे हैं। यूनियन ने भारत सरकार, जहाज के मालिक, फ्लैग स्टेट और सभी संबंधित अधिकारियों से अपील की है कि नाविकों की सुरक्षा तुरंत सुनिश्चित की जाए और उन्हें जल्द से जल्द सुरक्षित भारत वापस लाया जाए। यूनियन ने कहा कि भारतीय नाविकों को युद्ध वाले इलाके में निशाना बनने के लिए नहीं छोड़ा जाना चाहिए और इस मामले में तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए। जहाज के पास हमले की लोकेशन इंडियन सीमेन यूनियन के बारे में जानिए इंडियन सीमेन यूनियन भारत के समुद्री कर्मचारियों का एक संगठन है। यह जहाजों पर काम करने वाले भारतीय नाविकों और समुद्री कर्मियों के अधिकारों, सुरक्षा, वेतन और कामकाजी परिस्थितियों से जुड़े मुद्दे उठाता है। इसका काम मुख्य रूप से: यूक्रेन में 4 बड़े भारतीय क्रू वाले जहाजों पर हमले ब्लैक सी में बढ़ता तनाव, कारोबार पर असर यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब रूस और यूक्रेन के बीच ब्लैक सी और सी ऑफ एजोव में सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। इससे कारोबारी जहाजों और अनाज के निर्यात पर खतरा बढ़ गया है। 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद ब्लैक सी दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री इलाकों में शामिल हो गया। कुछ अंतरराष्ट्रीय समझौतों से अनाज का निर्यात फिर शुरू हुआ था, लेकिन हाल के महीनों में बढ़े हमलों से यह व्यवस्था फिर प्रभावित हुई है। यूक्रेन लगातार रूस के ऊर्जा ढांचे और तेल टैंकरों को निशाना बना रहा है। वहीं रूस ने यूक्रेन के बंदरगाहों, ईंधन भंडारण केंद्रों और कार्गो जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। रूस के रक्षा मंत्रालय ने भी दावा किया है कि उसकी सेना ने ओडेसा बंदरगाह पर ईंधन भंडारण केंद्रों पर हमला किया। वैश्विक अनाज कारोबार पर भी असर यूक्रेन दुनिया के कुल गेहूं निर्यात का करीब 6% और मक्का निर्यात का लगभग 11% हिस्सा देता है। लेकिन लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण ब्लैक सी के जरिए होने वाला यूक्रेन का अनाज निर्यात करीब एक-तिहाई तक प्रभावित हुआ है। दूसरी तरफ यूक्रेनी हमलों का असर रूस के अनाज कारोबार पर भी पड़ा है। रॉयटर्स के मुताबिक, यूक्रेन के हमलों के कारण रूस को सी ऑफ एजोव के रास्ते होने वाली जहाजों की आवाजाही सीमित करनी पड़ी है। इसी रास्ते से रूस के करीब एक-चौथाई अनाज का निर्यात होता है। —————- यह खबर भी पढ़ें… भारत ने यूक्रेन के राजदूत को तलब किया:भारतीय क्रू मेंबर की मौत पर जवाब मांगा, ब्लैक सी में जहाज पर हुए हमले का मामला भारत ने ब्लैक सी में एक जहाज पर हुए हमले में भारतीय नाविक की मौत के मामले में यूक्रेन के राजदूत डॉ. ओलेक्सांद्र पोलिशचुक को तलब किया है। भारतीय नाविकों की यूनियनों ने हमले के लिए यूक्रेनी ड्रोन को जिम्मेदार बताया है। विदेश मंत्रालय ने इस मामले को यूक्रेन के सामने मजबूती से उठाया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, जहाज एमवी ओमोर्फी पर 18 जुलाई को ब्लैक सी से गुजरते समय हमला हुआ था। मंत्रालय ने पिछले हफ्ते जारी एक बयान में कहा था कि यह हमला कथित तौर पर रूसी क्षेत्रीय जलक्षेत्र में हुआ। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मंगलवार को व्हाइट हाउस में महत्वपूर्ण मुलाकात हो रही है। 28 फरवरी से शुरू हुए ईरान के खिलाफ युद्ध के बाद दोनों नेताओं की यह पहली आमने-सामने की बैठक है।यह बैठक दोनों नेताओं के बीच बढ़ते मतभेदों की ख

