डेमोक्रेटिक पार्टी के पूर्व सांसद जो मैनचिन उन राजनेताओं में हैं, जिनका अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखने में ज्यादा यकीन है। वे अमेरिका की दो ध्रुवीय राजनीति को अलग रास्ते पर ले जाने की नई पहल से सुर्खियों में हैं। राजनीति में कुछ हस्तियां हमेशा मुख्य धारा से अलग हटकर चलने की कोशिश करती हैं। दो बार सांसद रह चुके जो मैनचिन ऐसे ही हैं। वे अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए कुछ नया करते रहते हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी में रहते हुए उन्होंने कई बार पार्टी लाइन का विरोध किया था। उन्होंने मतभेदों के कारण 2024 में पार्टी छोड़ दी। अब वे नए रास्ते पर निकल पड़े हैं। उन्होंने स्वतंत्र लीडरशिप काउंसिल लॉन्च की है। 78 साल के मैनचिन अमेरिकी संसद के एक सदन-कांग्रेस के लिए चुनाव लड़ने वाले निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन करेंगे। 23 जुलाई को जब उन्होंंने एक समारोह में काउंसिल के गठन का ऐलान किया तो कैलिफोर्निया के सांसद केविन किली सहित कई उम्मीदवार मौजूद थे। मैनचिन का कहना है, हम एक अन्य पार्टी नहीं बना रहे हैं। हम उन लोगों का साथ देंगे जो किसी पार्टी के नहीं हैं, स्वतंत्र हैं। अमेरिका की दो दलीय राजनीति में तीसरी राजनीतिक ताकत बनाने के प्रयास बहुत कम हुए हैं। इसलिए उनकी पहल अहम है। अपने राजनीतिक करियर में मैनचिन मध्यमार्गी रहे हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी छोड़ने से पहले उन्होंने 2020-2024 के बीच जलवायु परिवर्तन और अमीरों पर टैक्स सहित कई मुद्दों पर संसद में पार्टी लाइन का विरोध किया था। जो मैनचिन का सफर वेस्ट वर्जीनिया के कोयला खदान क्षेत्र फार्मिंगटन से शुरू हुआ। उनके पिता शहर के मेयर थे। किराना दुकान संचालक उनके दादा जरूरतमंदों की मदद करते थे। उनसे प्रेरित होकर मैनचिन ने भी लोगों का हाल जानना और उनकी सहायता करना शुरू किया। इससे स्थानीय प्रभाव बढ़ता गया। वेस्ट वर्जीनिया यूनिवर्सिटी में छात्रों की एक पार्टी के दौरान उनकी मुलाकात गेल कोनेली से हुई, जो बाद में उनकी पत्नी बनीं। राजनीति में उनकी शुरुआत राज्य विधानसभा से हुई। 2004 में वे वेस्ट वर्जीनिया के गवर्नर बने और 2010 में पहली बार अमेरिकी सीनेट पहुंचे। वे कोयला उद्योग के समर्थक रहे हैं। 2021-22 में सीनेट में डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकंस के 50-50 सदस्य होने से जो मैनचिन का वोट निर्णायक बन गया। उनके दबाव में राष्ट्रपति जो बाइडेन को कई विधेयकों में बदलाव करने पड़े। मैनचिन का कहना है कि डेमोक्रेटिक पार्टी में अब उनके जैसे अनुदारवादी नेताओं के लिए जगह नहीं है। वे राजनीतिक ध्रुवीकरण के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। गैलप के अनुसार अधिकांश अमेरिकी दोनों प्रमुख दलों के प्रति अनुकूल राय नहीं रखते, जबकि एक सर्वे में 45% लोगों ने खुद को निर्दलीय बताया। रिपब्लिकन प्रभाव वाले वेस्ट वर्जीनिया से उनका दो बार सीनेट जीतना उल्लेखनीय रहा, हालांकि 2024 में वे चुनाव हार गए थे।
कनाडा के टोरंटो शहर में पंजाबी युवती नवनीत कौर(26) की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में एक युवक को गिरफ्तार किया है। जिस पर फर्स्ट डिग्री मर्डर और कोर्ट की अंडरटेकिंग का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस के मुताबिक दोनों के बीच कुछ देर बातचीत हुई। उसके बाद युवक ने युवती पर गोली चला दी। फिर वह मौके से फरार हो गया। हालांकि बाद में पुलिस ने उसे अरेस्ट कर लिया। पुलिस ने इसे टारगेट किलिंग करार दिया है। वहीं परिजनों का आरोप है कि युवक शादीशुदा होने के बावजूद युवती पर जबरन शादी का दबाव बना रहा था। इसी वजह से वह कुछ महीने पहले पंजाब भी लौट आई थी। इनकार करने पर उसने युवती की हत्या कर दी। कत्ल को लेकर कनाडा पुलिस की 3 अहम बातें… परिवार का दावा- शादी के लिए बना रहा था दबाव
जर्मनी में रह रहे मृतका के अमृतसर निवासी चचेरे भाई मलकीत सिंह ने बताया कि नवनीत और आरोपी पहले एक ही जगह काम करते थे और एक-दूसरे को जानते थे। हालांकि, दोनों के बीच किसी तरह का प्रेम संबंध नहीं था। परिवार के मुताबिक, आरोपी पहले से शादीशुदा है और उसके बच्चे भी हैं। इसके बावजूद वह लगातार अपनी पत्नी को तलाक देकर नवनीत से शादी करने का दबाव बना रहा था। युवती द्वारा इनकार करने पर उसने उसे परेशान करना शुरू कर दिया। कनाडा पुलिस और आरोपी के परिवार से भी की थी शिकायत
परिजनों का दावा है कि नवनीत ने आरोपी की हरकतों की शिकायत कनाडा पुलिस से भी की थी। इसके अलावा भारत में आरोपी के परिवार से संपर्क कर बताया गया था कि उनका बेटा युवती को लगातार परेशान कर रहा है। परिवार के अनुसार, आरोपी के परिजनों ने भी माना था कि वे खुद उसके व्यवहार से परेशान हैं। उनका कहना है कि यदि शिकायत को समय रहते गंभीरता से लिया जाता और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होती, तो शायद इस घटना को रोका जा सकता था। डर के कारण दो-तीन महीने पहले भारत आई थी
परिजनों के मुताबिक, आरोपी की लगातार हरकतों से परेशान होकर नवनीत करीब दो-तीन महीने पहले भारत आई थी। उसने कुछ समय पंजाब में अपने परिवार के साथ डर के माहौल में बिताया और बाद में वापस कनाडा लौट गई थी। परिवार का कहना है कि वह अच्छी नौकरी कर रही थी और अपने करियर पर ध्यान दे रही थी। पुलिस ने लोगों से मांगी मदद
टोरंटो पुलिस ने घटना से संबंधित किसी भी तरह की जानकारी रखने वाले लोगों से आगे आने की अपील की है। पुलिस ने आसपास के इलाके की CCTV और डैशकैम फुटेज रखने वाले लोगों से भी जांच में सहयोग करने को कहा है। इसके अलावा, क्राइम स्टॉपर्स के जरिए भी सूचना देने की अपील की गई है। टोरंटो पुलिस के मुताबिक, यह वर्ष 2026 में शहर का 22वां हत्या का मामला है। ******************** ये खबर भी पढ़ें… इंग्लैंड में पंजाबी लड़की की हत्या, पेट-छाती पर 5 वार
पंजाब के तरनतारन की युवती की इंग्लैंड में हत्या कर दी गई। उसके पेट-छाती में 5 बार चाकू से वार किए गए। युवती करीब दो साल पहले स्टूडेंट वीजा पर हायर एजुकेशन के लिए गई थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद उसे वर्क परमिट मिल गया था और वह वहीं रहकर नौकरी कर रही थी। युवती की हत्या के बाद आरोपी का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वो चाकू लेकर जाता हुआ दिख रहा है। वीडियो घर के गेट के कैमरे में कैद हुआ(पढ़ें पूरी खबर)
जर्मनी की राजधानी बर्लिन में LGBTQ+ समुदाय की प्राइड परेड के दौरान शनिवार रात एक वैन भीड़ में घुस गई। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 16 लोग घायल हुए हैं। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है। पुलिस के मुताबिक, सफेद वैन टियरगार्टन पार्क के पास उस इलाके में घुसी, जहां से कुछ देर पहले प्राइड परेड निकली थी। कई लोगों को टक्कर मारने के बाद वैन एक पेड़ से टकरा गई। घायलों में कुछ की हालत गंभीर है। घटना के बाद प्राइड कार्यक्रम और कॉन्सर्ट रद्द कर दिए गए। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्च ने मामले की पूरी जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया। वहीं, बर्लिन के मेयर काई वेगनर ने इसे समाज पर हमला बताया।
जर्मनी की राजधानी बर्लिन में LGBTQ+ समुदाय की प्राइड परेड के दौरान शनिवार रात एक वैन भीड़ में घुस गई। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 16 लोग घायल हुए हैं। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है। पुलिस के मुताबिक, सफेद वैन टियरगार्टन पार्क के पास उस इलाके में घुसी, जहां से कुछ देर पहले प्राइड परेड निकली थी। कई लोगों को टक्कर मारने के बाद वैन एक पेड़ से टकरा गई। घायलों में कुछ की हालत गंभीर है। घटना के बाद प्राइड कार्यक्रम और कॉन्सर्ट रद्द कर दिए गए। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्च ने मामले की पूरी जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया। वहीं, बर्लिन के मेयर काई वेगनर ने इसे समाज पर हमला बताया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ सबसे बड़े हमले को फिलहाल टाल दिया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने यह फैसला अपने शीर्ष सलाहकारों और कैबिनेट सदस्यों के साथ शुक्रवार को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद लिया। इस दौरान मुख्य चिंता मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना के पास मौजूद एयर डिफेंस सिस्टम और इंटरसेप्टर मिसाइलों की भारी कमी को लेकर थी। इंटरसेप्टर खत्म होने का डर ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने निजी तौर पर सलाह दी थी कि ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाना संभव तो है, लेकिन इससे सेंट्रल कमांड के पास मौजूद इंटरसेप्टर मिसाइलें खतरनाक स्तर तक खत्म हो सकती हैं। अधिकारियों का कहना है कि अप्रैल के अंत तक रक्षा विभाग 1,200 से ज्यादा पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें खर्च कर चुका है, जिनकी कीमत 4 मिलियन डॉलर प्रति मिसाइल से अधिक है। तब से स्थिति और खराब हुई है। जॉर्डन हमले के बाद बढ़ी चिंता हाल ही में जॉर्डन में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद चिंताएं और बढ़ गई हैं। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमले के दौरान एक बैलिस्टिक मिसाइल अमेरिकी सुरक्षा घेरे को भेदकर निकल गई थी। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अभियान बढ़ाया गया, तो अमेरिकी सैनिक, खाड़ी देशों के सहयोगी और महत्वपूर्ण ठिकाने ईरानी जवाबी हमलों के प्रति असुरक्षित हो जाएंगे। कूटनीति और दबाव की रणनीति व्हाइट हाउस के संचार निदेशक स्टीवन चेउंग ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप हमेशा से कूटनीतिक समाधान के पक्ष में रहे हैं, लेकिन अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य या सहयोगियों के खिलाफ आतंकी गतिविधियां जारी रखता है, तो सभी विकल्प खुले हैं। उन्होंने कहा कि ईरान के लिए यही समझदारी है कि वह बातचीत के जरिए डील करे, वरना उसे अंजाम भुगतना होगा। आर्थिक दबाव और अन्य चुनौतियां ट्रंप के सलाहकारों ने चेतावनी दी है कि व्यापक युद्ध से वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, ऊर्जा संकट और शरणार्थी संकट पैदा हो सकता है। इसके अलावा, प्रशासन के भीतर यह संदेह भी है कि तेज सैन्य अभियान ईरान को बातचीत की मेज पर लाने के बजाय उसे विदेशी खतरे के खिलाफ एकजुट कर सकता है। इसी दबाव को बनाए रखने के लिए शुक्रवार को ट्रेजरी विभाग ने ईरानी व्यवसायी बाबेक जंजानी के वित्तीय नेटवर्क से जुड़े 9 कंपनियों और 4 लोगों पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य हमले की योजना फिलहाल रोक दी है। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने चेतावनी दी कि व्यापक कार्रवाई से अमेरिकी सेना के पास मौजूद पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों का भंडार तेजी से घट सकता है। जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने सलाह दी कि बड़े अभियान से मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों और सहयोगी देशों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल के अंत तक अमेरिका 1,200 से ज्यादा पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें इस्तेमाल कर चुका था। हालांकि ट्रम्प ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर सभी विकल्प खुले हैं। फिलहाल सैन्य कार्रवाई की बजाय अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए कारोबारी बाबेक जंजानी के नेटवर्क से जुड़ी 9 कंपनियों और 4 लोगों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. हूती विद्रोहियों का सऊदी अरब की रिफाइनरी पर हमला: हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने शनिवार को सऊदी अरब के जजान स्थित सऊदी अरामको रिफाइनरी पर 3 बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है। जजान रिफाइनरी को सऊदी अरब की पांचवीं सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी माना जाता है। 2. ईरान की फायरिंग के बाद 4 जहाजों ने बदला रास्ता: ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसकी नौसेना ने पिछले 24 घंटे में होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की कोशिश कर रहे चार जहाजों पर चेतावनी के तौर पर फायरिंग की। इसके बाद चारों जहाजों ने अपना रास्ता बदल लिया। 3. ईरान में पेट्रोल महंगा करने पर विचार: ईरान सरकार पेट्रोल की खपत को कंट्रोल करने के लिए पेट्रोल को महंगा कर सकती है। सरकार के मुताबिक, अभी इस पर विचार कर रही है कि बदलाव कैसे लागू किए जाएं। 4. अमेरिका ने ईरान पर हमला रोका: अमेरिका ने शुक्रवार रात ईरान पर हमला नहीं किया। इससे पहले वह लगातार 13 दिनों तक हर रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला कर रहा था। 5. बहरीन में अमेरिकी ठिकाने पर ईरानी हमला: ईरान ने बहरीन में अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट के नौसैनिक ठिकाने पर हमला किया। यहां ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया गया, जिसके बाद कई बड़े विस्फोट हुए। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
पाकिस्तान की सीनियर पुलिस अधिकारी डॉ. अनूश मसूद चौधरी हरियाणवी गानों की बड़ी फैन हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर ढांडा न्योलीवाला के ‘रशियन बंधाना’, राजू पंजाबी के ‘चौधर पूरी जाट की’, खासा आला चाहर के ‘जय वीरू’ और सुमित गोस्वामी के ‘टोरा’ जैसे गानों पर कई रील्स बनाई हैं। पेशावर की रहने वाली डॉ. अनूश फिलहाल पाकिस्तान के पंजाब एलीट पुलिस में डिप्टी डायरेक्टर (एडमिनिस्ट्रेशन) के पद पर तैनात हैं। वह सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहती हैं। उनके फेसबुक अकाउंट पर करीब 2.5 लाख फॉलोअर्स हैं। डॉ. अनूश साल 2018 में खैबर पख्तूनख्वा की पहली महिला SSP बनी थीं। उस समय उनकी कार्यशैली के साथ-साथ उनकी खूबसूरती की काफी चर्चा हुई थी। इसके बाद वह लाहौर की भी SSP बनीं। डॉ. अनूश इंडियन म्यूजिक को भी खास पसंद करती हैं। उन्होंने पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला, आर-नैत, एमी विर्क और गुर सिद्धू के कई गानों पर भी रील्स अपलोड की हैं। जानिए कौन है डॉ. अनूश मसूद चौधरी… MBBS किया और गोल्ड मेडल हासिल किया डॉ. अनूश मसूद चौधरी ने मेडिकल क्षेत्र छोड़कर पुलिस सेवा को चुना और अपने करियर में कई ऐसे रिकॉर्ड बनाए, जिनकी वजह से वह देश की चर्चित महिला अधिकारियों में शामिल हैं। उन्होंने फातिमा जिन्ना मेडिकल कॉलेज से MBBS की पढ़ाई की और मेडिसिन में गोल्ड मेडल हासिल किया। इसके बाद सिविल सेवा परीक्षा पास कर पुलिस सेवा में शामिल हुईं। लाहौर की बेस्ट क्राइम फाइटर बनी वर्ष 2014 में अनूश मसूद चौधरी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की पहली महिला असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP) बनीं। इसके बाद उन्होंने पंजाब पुलिस में विभिन्न अहम जिम्मेदारियां संभालीं। कसूर में SP (इन्वेस्टिगेशन), लाहौर के मॉडल टाउन में एडिशनल SP और पंजाब पुलिस मुख्यालय में SP के रूप में भी उन्होंने काम किया। वर्ष 2018 में उन्हें लाहौर का ‘बेस्ट क्राइम फाइटर’ चुना गया। इंटरनेशनल वूमेन ऑफ करेज अवॉर्ड मिला मई 2022 में अनूश मसूद चौधरी को लाहौर ऑपरेशंस विंग का सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP) नियुक्त किया गया। वह इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला पुलिस अधिकारी बनीं। इसके अलावा उन्होंने पुलिस विभाग में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, जेंडर-सेंसिटिव पुलिसिंग को बढ़ावा देने और महिला पुलिसकर्मियों की ट्रेनिंग के लिए भी काम किया। वर्ष 2020 में महिलाओं के अधिकारों और पुलिस सेवा में योगदान के लिए उन्हें अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से इंटरनेशनल वूमेन ऑफ करेज अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। पेरेंट्स डॉक्टर बनाना चाहते थे एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में डॉ. अनूश मसूद चौधरी ने बताया था कि पेरेंट्स का सपना था कि मैं डॉक्टर बनूं। मैंने MBBS भी पूरी कर ली थी। मगर, पिता के मौत के बाद सब बदल गया। परिवार वाले चाहते थे कि मैं डॉक्टर बनकर विदेश सैटल हू जाऊं, लेकिन मैं पाकिस्तान में ही रहकर जनता की सेवा करना चाहती थी। इसके मैंने सेंट्रल सुपीरियर सर्विसेज (CSS) का फिल्ड चुना।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो गया है। NEET पेपर लीक केस में उनके इस्तीफे की मांग करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 36 दिन से जंतर-मंतर पर धरना दे रही है। इस्तीफे के बाद BBC ने लिखा कि मोदी सरकार को छात्रों के आगे झुकना पड़ा है। वहीं गार्डियन ने लिखा कि मोदी सरकार के 12 साल में पहली बार जनता के दबाव में किसी मंत्री का इस्तीफा हुआ। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को न्यूयॉर्क टाइम्स, CNN, अल जजीरा और डॉन समेत कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने भी टॉप स्टोरीज में जगह दी है। BBC: सरकार ने छात्रों के गुस्से का सही अंदाजा नहीं लगाया 2014 में सत्ता में आने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी सरकार आम तौर पर विरोध प्रदर्शनों के प्रति सख्त रुख अपनाती रही है और शायद ही कभी किसी बड़े आंदोलन के आगे झुकी हो। इससे पहले मोदी सरकार ने सिर्फ एक बड़े मामले में अपना फैसला वापस लिया था, जब करीब एक साल तक चले किसान आंदोलन के बाद तीनों कृषि कानूनों को रद्द करना पड़ा था। इस बार सरकार को अंदाजा नहीं था कि छात्र आंदोलन इतना बड़ा और लंबा चलेगा। शुरुआत में कई हफ्तों तक आंदोलन को नजरअंदाज किया गया, लेकिन इस सप्ताह संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की सख्ती के बाद देशभर में तीखी प्रतिक्रिया हुई और सरकार पर दबाव काफी बढ़ गया। धर्मेंद्र प्रधान जैसे वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री वास्तव में इस्तीफा देंगे या नहीं, इसे लेकर आखिरी समय तक कुछ पता नहीं चल पा रहा था। उनके इस्तीफे के बाद आंदोलन में शामिल छात्रों, खासकर पहली बार किसी बड़े प्रदर्शन का हिस्सा बने युवाओं को अपनी जीत का अहसास हो रहा है। द गार्डियन: मोदी के सबसे करीबी मंत्रियों में से एक का इस्तीफा भाजपा के 12 साल के शासन में यह पहली बार है, जब प्रधानमंत्री मोदी के सबसे करीबी और भरोसेमंद मंत्रियों में से एक को सार्वजनिक दबाव के कारण इस्तीफा देना पड़ा है। इनका नेतृत्व नए बने युवा राजनीतिक संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने किया। इस सप्ताह यह आंदोलन देशभर में युवाओं के बड़े विरोध प्रदर्शन में बदल गया। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर मिलते ही दिल्ली में जुटे हजारों सीजेपी समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। प्रदर्शनकारियों ने जश्न मनाया और इसे सरकार से जवाबदेही की अपनी मांग की बड़ी जीत बताया। NYT: प्रदर्शनकारियों को ‘आतंकियों की बी-टीम’ कहा था, अब इस्तीफा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। भारत में चल रहा छात्र आंदोलन सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन गया था। इस आंदोलन की अगुआई खुद को ‘कॉकरोच’ कहने वाले छात्र समूह कर रहे थे। यह नाम भारत के चीफ जस्टिस की कथित अपमानजनक टिप्पणी से प्रेरित था। यह संगठन शुरुआत से ही धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा मांग रहा था। इस महीने प्रदर्शनकारियों पर हुए बल प्रयोग ने इस आंदोलन को भारत के कई शहरों तक फैला दिया। धर्मेंद्र प्रधान पहले इन प्रदर्शनों को गंभीरता से नहीं ले रहे थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर विपक्षी दलों पर छात्रों का इस्तेमाल कर अव्यवस्था फैलाने का आरोप लगाया था। जून में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने छात्र प्रदर्शनकारियों को ‘आतंकवादियों की बी-टीम’ तक कह दिया था। अब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्र आंदोलन को और बल मिल सकता है और छात्र अपनी दूसरी मांगों को लेकर भी सरकार पर दबाव बढ़ा सकते हैं। अल जजीरा: भारत में छात्र आंदोलन की बड़ी जीत हुई छात्रों के आंदोलन के दबाव में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को इस्तीफा दे दिया। हाल के वर्षों में यह मोदी सरकार के खिलाफ सबसे बड़े छात्र आंदोलनों में से एक रहा। इस आंदोलन के जरिए युवाओं ने बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दों पर अपना गुस्सा जाहिर किया। CNN- एक मीम से शुरू हुए आंदोलन ने शिक्षा मंत्री की कुर्सी छीनी भारत में लगातार बढ़ते छात्र आंदोलन के दबाव में धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। पिछले कई दिनों से हजारों छात्र उनके इस्तीफे और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। जो आंदोलन शुरुआत में एक मीम के रूप में शुरू हुआ था, वह धीरे-धीरे देशभर में फैल गया। इसने छात्रों और नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को जवाबदेही, बेहतर अवसर और व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर एकजुट कर दिया। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आमतौर पर आंदोलनों के दबाव में फैसले नहीं बदलते। वहीं, विपक्ष और सरकार के आलोचक लंबे समय से आरोप लगाते रहे हैं कि सरकार विरोध प्रदर्शनों पर सख्ती से कार्रवाई करती है। यह आंदोलन देश में बढ़ती युवा बेरोजगारी के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठा रहा है। बेंगलुरु स्थित अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में शामिल है। देश में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के 36 करोड़ से अधिक युवा हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 25 वर्ष या उससे कम उम्र के करीब 40% ग्रेजुएट बेरोजगार हैं। वहीं, 20 से 29 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 20% युवा नौकरी से वंचित हैं। रिपोर्ट में पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार न मिल पाने को देश की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। द डॉन: ‘कॉकरोच’ की जीत, छात्र आंदोलन के दबाव में शिक्षा मंत्री का इस्तीफा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की। परीक्षा पेपर लीक मामलों की जिम्मेदारी तय करने की मांग को लेकर देशभर में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच इसे प्रदर्शनकारियों की बड़ी जीत माना जा रहा है। हाल के वर्षों में यह आंदोलन भारत के सबसे बड़े जनआंदोलनों में शामिल हो गया था। विपक्षी दलों के समर्थन और संसद के भीतर विरोध के कारण यह सरकार के सामने एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया था। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा के बाद जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों में खुशी की लहर दौड़ गई। इसी स्थान पर सोमवार को पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया था। प्रदर्शनकारियों ने जय हिंद के नारे लगाए। मौके पर लाउडस्पीकर पर राष्ट्रीय गान बजाया गया और एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाकर जश्न मनाया गया। ———————————- प्रधान के इस्तीफे से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा:दीपके बोले- वे कहते थे इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते; लेकिन झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। NEET पेपर लीक केस में उनके इस्तीफे की मांग करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 36 दिन से जंतर-मंतर पर धरना दे रही है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
कनाडा के एडमंटन शहर में पंजाब की 23 साल की छात्रा दमनप्रीत कौर की गला घोंटकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में उनके 22 साल के भारतीय लिव-इन पार्टनर रितिश कुमार को गिरफ्तार किया है। दमनप्रीत पंजाब के लुधियाना जिले के समराला की रहने वाली थीं। वह स्टूडेंट वीजा पर करीब 5 साल पहले कनाडा गई थीं। एडमंटन पुलिस के मुताबिक, 9 जुलाई को उन्हें एक घर में गंभीर हालत में पाया गया था। अस्पताल में इलाज के दौरान 12 जुलाई को उनकी मौत हो गई। 14 जुलाई को हुई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह गला घोंटना बताई गई। पुलिस ने 22 जुलाई को रितिश कुमार को गिरफ्तार कर सेकेंड डिग्री मर्डर का आरोप लगाया। अधिकारियों का कहना है कि यह लिव-इन पार्टनर से जुड़ा हत्या का मामला है और फिलहाल किसी अन्य आरोपी की तलाश नहीं की जा रही। परिवार के मुताबिक, दमनप्रीत की पढ़ाई के लिए उनके माता-पिता ने कर्ज लेकर उन्हें कनाडा भेजा था। अब उनका शव भारत लाने के लिए ऑनलाइन फंड जुटाया जा रहा है।
कनाडा के एडमंटन शहर में पंजाब की 23 साल की छात्रा दमनप्रीत कौर की गला घोंटकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में उनके 22 साल के भारतीय लिव-इन पार्टनर रितिश कुमार को गिरफ्तार किया है। दमनप्रीत पंजाब के लुधियाना जिले के समराला की रहने वाली थीं। वह स्टूडेंट वीजा पर करीब 5 साल पहले कनाडा गई थीं। एडमंटन पुलिस के मुताबिक, 9 जुलाई को उन्हें एक घर में गंभीर हालत में पाया गया था। अस्पताल में इलाज के दौरान 12 जुलाई को उनकी मौत हो गई। 14 जुलाई को हुई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह गला घोंटना बताई गई। पुलिस ने 22 जुलाई को रितिश कुमार को गिरफ्तार कर सेकेंड डिग्री मर्डर का आरोप लगाया। अधिकारियों का कहना है कि यह लिव-इन पार्टनर से जुड़ा हत्या का मामला है और फिलहाल किसी अन्य आरोपी की तलाश नहीं की जा रही। परिवार के मुताबिक, दमनप्रीत की पढ़ाई के लिए उनके माता-पिता ने कर्ज लेकर उन्हें कनाडा भेजा था। अब उनका शव भारत लाने के लिए ऑनलाइन फंड जुटाया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के वकील करीम खान पद से हटाए गए, यौन उत्पीड़न का आरोप इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) के वकील करीम खान को यौन उत्पीड़न के आरोपों के बीच पद से हटा दिया गया है। ICC की सदस्य देशों की सभा ने शुक्रवार को इस पर मतदान कर उन्हें हटाने का फैसला लिया। वहीं, करीम खान की कानूनी टीम ने इस फैसले को राजनीतिक बताया है। उनका कहना है कि स्वतंत्र जांच पैनल को उनके खिलाफ गलत व्यवहार के पक्के सबूत नहीं मिले। साथ ही, उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा मौका भी नहीं दिया गया। करीम खान 2024 में इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और तत्कालीन रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने के बाद चर्चा में आए थे। इसके बाद अमेरिका ने करीम खान समेत ICC के कई अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए थे। इस साल जून में एक निगरानी पैनल ने खान पर गलत व्यवहार के आरोप लगाए थे। इसके बाद उन्होंने कुछ समय के लिए अपना पद छोड़ दिया था।

