ट्रंप ने 17 देशों पर फोड़ा टैरिफ का नया बम, पाकिस्तान-बांग्लादेश पर 10% शुल्क लागू, भारत पर कितना लगाया टैक्स?

US Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत 17 देशों पर टैरिफ का नया बम फोड़ा है। जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर सख्ती बरतते हुए अमेरिकी प्रशासन ने विभिन्न देशों से आने वाले सामानों पर 10% से 12.5% तक आयात शुल्क लगाने की घोषणा की है। इस फैसले के तहत भारत से होन

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ईरान पर सबसे बड़े हमले की तैयारी में अमेरिका:ट्रम्प बोले- फैसला लेना बाकी; ईरान ने कहा- इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका ईरान पर सबसे बड़ा हमला करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, “तैयारी पूरी है, अब सिर्फ फैसला लेना बाकी है।” ट्रम्प ने यह भी कहा कि ईरान ने अभी तक पर्याप्त दर्द नहीं झेला है। ट्रम्प के बयान के बाद ईरान ने भी तुरंत जवाब दिया। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अगर अमेरिका ने हमले जारी रखे तो उसे इसकी “और भारी कीमत” चुकानी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि युद्ध खत्म करने का रास्ता बातचीत है, नए हमले नहीं। इधर, ब्रिटेन ने भी अपनी सेना को अलर्ट पर रखा है। ब्रिटिश सरकार का कहना है कि जरूरत पड़ने पर उसकी सेना देश की सुरक्षा के लिए तैयार है। इससे पहले ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिका ने ब्रिटेन के सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल किया तो उन्हें भी निशाना बनाया जा सकता है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. सऊदी के दो जहाजों पर हमला: यमन के हूती विद्रोहियों ने रेड सी में सऊदी अरब के दो तेल टैंकर एन्सेलिया और लैला पर बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया। संगठन का कहना है कि दोनों जहाजों में आग लग गई। 2. हूती विद्रोहियों के डर से 10 जहाजों ने रास्ता बदला: बाब अल-मंदेब स्ट्रेट पार करने की कोशिश कर रहे कम से कम 10 जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा है। अब ये जहाज अफ्रीका के दक्षिणी सिरे केप ऑफ गुड होप के रास्ते लंबा सफर तय कर रहे हैं। 3. ब्रिटेन ने अमेरिका को सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की मंजूरी दी: ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने ईरान के खिलाफ अमेरिका को ब्रिटिश सैन्य अड्डों के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। हिंद महासागर में डिएगो गार्सिया और ग्लॉस्टरशायर का फेयरफोर्ड एयरबेस अमेरिकी विमानों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध रहेंगे। 4. भारत की अब तक 26,000 उड़ानें रद्द: अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण 20 जुलाई तक भारतीय एयरलाइंस को करीब 26 हजार अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। इसके अलावा कई उड़ानों का रास्ता बदला गया और उनमें देरी भी हुई। 5. ट्रम्प का 95 अरब डॉलर का रक्षा बजट पास: ट्रम्प को ईरान युद्ध के बीच बड़ी राजनीतिक जीत मिली है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 95 अरब डॉलर का रक्षा बजट प्रस्ताव 216-214 वोटों से मंजूर कर दिया।अब इसे मंजूरी के लिए सीनेट में जाएगा। इससे ईरान युद्ध और अन्य राष्ट्रीय सुरक्षा जरूरतों के लिए अतिरिक्त फंड मिलेगा। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

ट्रंप ने कर दिया बड़ा खेला! सऊदी को न्यूक्लियर ‘लेमनचूस’ दिखाकर घुमा दी ‘सुई’, कर दिया ऐसा काम; खुशी से झूम उठे नेतन्याहू

एक दिन पहले तक जिस डील को अमेरिका और सऊदी अरब की “ऐतिहासिक साझेदारी” बताया जा रहा था, अगले ही दिन उसी डील की बुनियाद पर डोनाल्ड ट्रंप ने खुद एक नई शर्त टांग दी। बुधवार को अमेरिकी ऊर्जा मंत्री और सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान ने सिविल न्यूक्लियर सहयोग समझौते

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‘ईरान और हूतियों को भयानक मिलिट्री सजा दी जाएगी, अब फिर हमला हुआ तो…’, सऊदी के जहाजों पर अटैक के बाद ट्रंप का फूटा गुस्सा; दे डाली धमकी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरान समर्थित हूतियों के किसी भी भविष्य के हमले के लिए अमेरिका ईरान को जिम्मेदार ठहराएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह समूह फिर से जहाजों को निशाना बनाता है, तो उन्हें बड़ी सैन्य सजा दी जाए

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नेपाली PM बालेन शाह ने अपना ही नियम क्यों तोड़ा:भारत और चीन के राजदूतों से मुलाकात करेंगे; 3 महीने में ही फैसले से पलटे

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन शाह) पहली बार अपने बनाए नियम से हटकर विदेशी राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात करने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने तय किया था कि वह किसी भी विदेशी राजदूत से अकेले मुलाकात नहीं करेंगे। नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बालेन शाह भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव और चीन के राजदूत झांग माओमिंग से अलग-अलग मुलाकात करेंगे। इसे नेपाल की उस नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत वह अपने दोनों सबसे बड़े पड़ोसियों के साथ संतुलित रिश्ते बनाए रखना चाहता है। एक ही दिन दोनों देशों के राजदूतों के साथ मीटिंग बालेन शाह नहीं चाहते थे कि भारत या चीन में से किसी को यह लगे कि दूसरे देश को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। इसी वजह से उन्होंने दोनों देशों के राजदूतों से एक ही दिन अलग-अलग मुलाकात करने का फैसला किया है। दोनों बैठकें एक के बाद एक होंगी, ताकि दोनों देशों के साथ समान व्यवहार का मैसेज जाए। नेपाल सरकार ने पुष्टि की है कि भारत और चीन के राजदूतों के साथ अलग-अलग बैठकें इसी सप्ताह होंगी। हालांकि, दोनों बैठकों की सटीक तारीख अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। नेपाल का विदेश मंत्रालय इन बैठकों की अंतिम तैयारियों में जुटा है। बालेन शाह के पीएम बनने से पहले का नियम क्या था? नेपाल में नई सरकार बनने पर खासकर भारत, चीन और अमेरिका जैसे प्रभावशाली देशों के राजदूत सीधे प्रधानमंत्री के निजी आवास पर जाकर अलग-अलग मुलाकात करते थे। इन बैठकों में विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी मौजूद नहीं होते थे और न ही इनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड रखा जाता था। नेपाल में लंबे समय से यह परंपरा रही थी कि बड़े देशों के राजदूत जब चाहें प्रधानमंत्री से व्यक्तिगत मुलाकात कर लेते थे। इन मुलाकातों का मकसद अक्सर द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने से ज्यादा व्यक्तिगत संपर्क मजबूत करना माना जाता था। कई विशेषज्ञों का मानना है कि इससे हितों का टकराव पैदा होता था और नेपाल के राष्ट्रीय हित प्रभावित होते थे। पीएम बनने के बाद बालेन शाह ने क्या बदलाव किए बालेन शाह ने तय किया कि वह किसी भी विदेशी राजदूत या प्रतिनिधि से अकेले मुलाकात नहीं करेंगे। इसके लिए उन्होंने एक अलग ‘रैंक प्रोटोकॉल’ बनाया था। नए नियम के मुताबिक, वह सिर्फ किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष/प्रधानमंत्री या विदेश मंत्री स्तर के अधिकारी से ही अकेले व्यक्तिगत बैठक करेंगे। निचले स्तर के अधिकारियों, राजदूतों या उप-मंत्रियों से वे अकेले मिलने के बजाय विदेश मंत्रालय के माध्यम से या फिर ग्रुप मीटिंग के जरिए ही मिलेंगे। उनका मानना था कि विदेश नीति व्यक्तिगत मुलाकातों के बजाय सरकार और विदेश मंत्रालय के तय ढांचे के तहत चलनी चाहिए। उनका मानना था कि कई शक्तिशाली देश सरकारी व्यवस्था को दरकिनार कर सीधे नेपाल के टॉप नेताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश करते रहे हैं। इस फैसले के चलते बालने शाह ने कई बड़े विदेशी प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत मुलाकात करने से इनकार कर दिया। कई विदेशी अधिकारियों से नहीं मिले बालेन भारत- बालेन शाह ने भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री से मिलने से इनकार कर दिया। मिस्री प्रधानमंत्री मोदी की ओर से बालेन शाह को भारत आने का औपचारिक न्योता देने काठमांडू आने वाले थे, लेकिन प्रधानमंत्री से मुलाकात का समय नहीं मिलने के कारण उनका प्रस्तावित दौरा रद्द हो गया। इससे भारत में नाराजगी भी देखी गई। अमेरिका- बालेन ने अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री समीर पॉल कपूर और विशेष दूत सर्जियो गोर को भी अलग से मिलने का समय नहीं दिया। गोर नेपाल आने से पहले भूटान के प्रधानमंत्री और राजा तथा श्रीलंका के राष्ट्रपति से मुलाकात कर चुके थे। चीन- बालेन ने चीन के उप वाणिज्य मंत्री और कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता यान डोंग से भी मुलाकात नहीं की। वह इसी महीने व्यापार और निवेश से जुड़े उच्चस्तरीय दौरे पर नेपाल आए थे। नोट- हालांकि इन घटनाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। ये सभी घटनाओं की जानकारी रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से दी गई हैं। बालेन शाह को अपना फैसला क्यों बदलना पड़ा बालेन शाह जब काठमांडू के मेयर थे, तब उन्होंने खुद को पारंपरिक नेताओं से अलग दिखाया था। इसी सोच के तहत उन्होंने नियम बनाया था कि वह किसी विदेशी राजदूत से अकेले मुलाकात नहीं करेंगे। लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद हालात बदल गए हैं। अब उन्हें समझ आ गया है कि सिर्फ अलग छवि बनाना काफी नहीं है। देश चलाने के लिए पड़ोसी देशों के साथ सीधे बातचीत भी जरूरी होती है। इसी वजह से उन्होंने पहली बार अपना पुराना नियम तोड़ा है। भारत और चीन, दोनों नेपाल के सबसे अहम पड़ोसी हैं। ऐसे में दोनों देशों के साथ सीधा संपर्क बनाए रखना उनकी सरकार की जरूरत बन गया है। नेपाल के लिए भारत और चीन दोनों क्यों जरूरी हैं? नेपाल की विदेश नीति हमेशा से भारत और चीन के बीच संतुलन बनाए रखने पर आधारित रही है। भारत, नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच खुली सीमा है, जिससे लाखों नेपाली नागरिक काम, व्यापार और पढ़ाई के लिए आसानी से भारत आते-जाते हैं। दोनों देशों के रिश्ते सिर्फ पड़ोसी होने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से भी जुड़े हैं। दूसरी ओर, चीन ने पिछले कुछ वर्षों में नेपाल में सड़क, रेल, ऊर्जा और दूसरी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। इसलिए नेपाल के लिए चीन भी एक अहम आर्थिक और रणनीतिक साझेदार बन गया है। यही वजह है कि काठमांडू किसी एक देश के करीब दिखने के बजाय भारत और चीन, दोनों के साथ अच्छे रिश्ते बनाए रखने की कोशिश करता है।

ईरान जंग के बीच अमेरिका का सऊदी से परमाणु समझौता:इजराइल के विरोध के बावजूद ट्रम्प की मंजूरी; एक्सपर्ट बोले- परमाणु हथियारों का खतरा बढ़ेगा

सऊदी अरब ने बुधवार को अमेरिका के साथ एक अहम परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके तहत अमेरिका, सऊदी अरब को असैन्य (बिजली बनाने के लिए) परमाणु तकनीक देगा। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब पूरे मिडिल ईस्ट में युद्ध और तनाव का माहौल है। इस समझौते को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है। वह पिछले पांच साल से भी ज्यादा समय से यह समझौता चाह रहे थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक इजराइल समेत अमेरिका के कई अधिकारी और न्यूक्लियर एक्सपर्ट्स इसका विरोध कर रहे थे। उनका कहना था कि यदि सऊदी अरब को यूरेनियम संवर्धन की तकनीक मिल गई, तो भविष्य में वह परमाणु हथियार बनाने की दिशा में भी बढ़ सकता है। इससे पूरे मिडिल ईस्ट में परमाणु हथियारों की नई होड़ शुरू होने का खतरा पैदा हो सकता है। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पहले कई बार कह चुके हैं कि अगर ईरान परमाणु हथियार बना लेता है, तो सऊदी अरब भी परमाणु हथियार हासिल करने की दिशा में कदम उठाएगा। यह समझौता विवादों में क्यों है? ट्रम्प ने समझौते से इजराइल को हटाया इस समझौते की शुरुआत जो बाइडेन के राष्ट्रपति रहते हुई थी। तब अमेरिका चाहता था कि परमाणु समझौते के बदले सऊदी अरब, इजराइल को औपचारिक मान्यता दे और दोनों देश राजनयिक संबंध स्थापित करें। इस प्रस्ताव के तहत अमेरिका, सऊदी अरब को सुरक्षा की गारंटी, आधुनिक हथियार और असैन्य परमाणु कार्यक्रम में सहयोग देने को तैयार था। बदले में सऊदी अरब से उम्मीद थी कि वह इजराइल के साथ दूतावास खोलेगा, राजदूत नियुक्त करेगा और आधिकारिक संबंध शुरू करेगा। हालांकि, 7 अक्टूबर 2023 को हमास के इजराइल पर हमले और उसके बाद गाजा में शुरू हुए युद्ध की वजह से यह प्लान फेल हो गया। सऊदी कहने लगा कि जब तक एक अलग फिलिस्तीन राष्ट्र नहीं बन जाता तब तक वे इजराइल को मान्यता नहीं देंगे। बाद में ट्रम्प ने रणनीति बदली और इजराइल के साथ रिश्तों को इस समझौते से अलग कर दिया। मिडिल ईस्ट में सऊदी का प्रभाव बढ़ेगा परमाणु बिजलीघर (न्यूक्लियर रिएक्टर) बनने में 10 साल या उससे भी ज्यादा समय लग सकता है। इसलिए इस समझौते के बाद सऊदी अरब लंबे समय तक अमेरिका की परमाणु तकनीक और मदद पर निर्भर रहेगा। इससे दोनों देशों के बीच सुरक्षा, कारोबार और आपसी रिश्ते पहले से ज्यादा मजबूत होने की उम्मीद है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑन ग्लोबल एनर्जी पॉलिसी की एक्सपर्ट कैरेन यंग के मुताबिक, सऊदी अरब सिर्फ आज के लिए नहीं, बल्कि भविष्य को ध्यान में रखकर यह कदम उठा रहा है। उनका कहना है कि यह समझौता सिर्फ परमाणु बिजली बनाने तक सीमित नहीं है। इससे सऊदी अरब की राजनीतिक ताकत बढ़ेगी और मिडिल ईस्ट में उसका प्रभाव भी पहले से ज्यादा मजबूत होगा। अमेरिका को क्या फायदा होगा? इस समझौते से अमेरिका को दो बड़े फायदे मिल सकते हैं। 1. अमेरिकी कंपनियों को सऊदी अरब में परमाणु बिजली संयंत्र बनाने के अरबों डॉलर के ठेके मिल सकते हैं। 2. अमेरिका को सऊदी अरब के परमाणु कार्यक्रम पर नजदीकी नजर रखने का मौका मिलेगा, जिससे उसे हथियारों के प्रसार को लेकर अपनी चिंताओं पर नियंत्रण रखने में मदद मिल सकती है। रूस-चीन भी मदद को तैयार थे अगर अमेरिका के साथ यह समझौता किसी वजह से नहीं हो पाता, तो सऊदी अरब के पास दूसरे विकल्प भी हैं। दरअसल, सऊदी कई बार चेतावनी दे चुका था कि अगर उसे अमेरिका इसमें मदद नहीं करेगा तो वे चीन, रूस, फ्रांस या दक्षिण कोरिया जैसे दूसरे देशों से परमाणु तकनीक ले लेंगे। चीन की सरकारी कंपनी चाइना नेशनल न्यूक्लियर कॉर्पोरेशन (CNNC) पहले ही न्यूक्लियर प्लांट बनाने में रुचि दिखा चुकी है। रूस की सरकारी परमाणु कंपनी रोसाटॉम भी सऊदी अरब के साथ शुरुआती समझौते कर चुकी है। इसके अलावा दक्षिण कोरिया और फ्रांस भी संभावित साझेदार माने जा रहे हैं। ट्रम्प का फैसला बदलना संसद के लिए मुश्किल अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में डेमोक्रेटिक पार्टी के कई सांसदों ने इस समझौते का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है न सिर्फ इससे मिडिल ईस्ट में परमाणु हथियारों की होड़ को बढ़ावा मिलेगा बल्कि ईरान के लिए भी अपने परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने की संभावना कम कर देगा। हालांकि इन विरोधों के बावजूद संसद के लिए इस समझौते को रोकना आसान नहीं होगा। आने वाले दिनों में इस समझौते को मंजूरी के लिए संसद में पेश किया जाएगा। लेकिन यदि संसद इसे रोकना चाहती है, तो उसे इस संबंध में संयुक्त प्रस्ताव (जॉइंट रिजोल्यूशन) पारित करना होगा। यदि राष्ट्रपति उस प्रस्ताव पर वीटो लगा देते हैं, तो संसद को उस वीटो को पलटने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जुटाना होगा। यही वजह है कि राजनीतिक विरोध के बावजूद इस समझौते के लागू होने की संभावना अधिक मानी जा रही है।

वर्ल्ड अपडेट्स:UNSC में सिंधु जल संधि पर भारत का पाकिस्तान को जवाब: कहा- सीमा पार आतंकवाद से सहयोग का आधार खत्म

भारत ने UNSC में पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद ने दोनों देशों के बीच सहयोग का आधार खत्म कर दिया है। भारत ने स्पष्ट किया कि आपसी विश्वास और सद्भावना के बिना सिंधु जल संधि के तहत सहयोग की उम्मीद नहीं की जा सकती। प्राकृतिक संसाधन शासन पर UNSC की हाई-लेवल ओपन डिबेट में पाकिस्तान के बयान का जवाब देते हुए राजदूत हरीश पारवतननेनी ने कहा कि पाकिस्तान ने इस मंच का इस्तेमाल “झूठा नैरेटिव” फैलाने के लिए किया। उन्होंने कहा कि भारत का सिंधु जल संधि पर रुख स्पष्ट और लगातार एक जैसा रहा है। सीमा पार आतंकवाद को राज्य की नीति के साधन के रूप में इस्तेमाल किए जाने के बीच आपसी विश्वास और सद्भावना के आधार पर सहयोग की उम्मीद नहीं की जा सकती। भारत ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और रहेगा। राजदूत ने कहा कि पाकिस्तान इस संवैधानिक और कानूनी वास्तविकता को जानबूझकर नजरअंदाज करता है। भारत ने यह भी कहा कि वह मानवीय आधार पर पाकिस्तान को बाढ़ की चेतावनी देता रहेगा और अपने हिस्से के जल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के लिए जलविद्युत परियोजनाओं को तेज करेगा। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… फ्रांस में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन: ऐसा करने वाला पहला EU देश फ्रांस की संसद ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने वाला बिल पास कर दिया है। इसके साथ ही फ्रांस ऐसा कानून बनाने वाला EU का पहला देश बन गया है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बिल का समर्थन किया है और इसे सितंबर से लागू करने की तैयारी है। कानून लागू कराने की जिम्मेदारी डिजिटल रेगुलेटर Arcom की होगी। हालांकि, बच्चों की उम्र की जांच कैसे होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। फ्रांस के बाद ब्रिटेन, स्पेन, ग्रीस और डेनमार्क भी सोशल मीडिया के लिए न्यूनतम उम्र तय करने की तैयारी में हैं। फ्रांस के कई माता-पिता ने फैसले का स्वागत किया है, जबकि कुछ किशोरों को एजुकेशनल कंटेंट और दोस्तों से संपर्क प्रभावित होने की चिंता है। शिक्षा मंत्री और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी कहा है कि सिर्फ बैन काफी नहीं होगा, बच्चों को डिजिटल दुनिया के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में शिक्षित करना भी जरूरी है। चीन का ताइवान स्ट्रेट में 2 दिन का लाइव-फायर ड्रिल: फुजियान के पास समुद्री इलाके में सैन्य अभ्यास
चीन ने गुरुवार से ताइवान स्ट्रेट के कुछ हिस्सों में 2 दिन का लाइव-फायर सैन्य अभ्यास शुरू किया। यह ड्रिल दक्षिण-पूर्वी प्रांत फुजियान के तट के पास हो रही है। समुद्री अधिकारियों के नोटिस के मुताबिक, अभ्यास दोनों दिन सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक डोंगशान द्वीप के आसपास होगा। यह इलाका गुआंगदोंग प्रांत की सीमा के पास है। यह ड्रिल अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई बातचीत के एक दिन बाद शुरू हुई है। दोनों नेताओं के बीच ताइवान समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई थी। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान की सरकार चीन के इस दावे को खारिज करती है। इससे पहले दिसंबर में चीन ने ताइवान को चारों ओर से घेरकर अब तक का सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास किया था। यह अभ्यास अमेरिका की ओर से ताइवान के लिए 11.1 अरब डॉलर के रिकॉर्ड हथियार पैकेज की घोषणा के बाद हुआ था। उस समय चीन की ईस्टर्न थिएटर कमांड ने 10 घंटे के लाइव-फायर अभ्यास के दौरान ताइवान के उत्तर और दक्षिण में समुद्री इलाकों में रॉकेट दागे थे। अफ्रीका में बढ़ती गर्मी से ‘रेगिस्तान के जहाज’ भी बेहाल: हीट स्ट्रेस, पानी की कमी और बीमारियों से बढ़ रही मौतें
अफ्रीका में बढ़ते तापमान का असर अब रेगिस्तान के जहाज कहे जाने वाले ऊंटों पर भी पड़ रहा है। उत्तर-पूर्वी इथियोपिया के अफार क्षेत्र में ऊंट पालक अली उमेर के मुताबिक, तेज गर्मी से ऊंटों के पैरों में छाले पड़ रहे हैं, आंखों से पानी आ रहा है और गर्म रेत से उनकी चमड़ी और बाल प्रभावित हो रहे हैं। पिछले एक महीने में उन्होंने गर्मी के कारण ऊंट के 8 बच्चों को खो दिया। वैज्ञानिकों और पशु चिकित्सकों के मुताबिक, अत्यधिक गर्मी से ऊंटों में हीट स्ट्रेस, थकान, डिहाइड्रेशन और बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। पानी और वनस्पति की कमी के साथ छाया का घटता क्षेत्र भी स्थिति को गंभीर बना रहा है। पड़ोसी देश सोमालिया में सूखे के कारण ऊंटों की मौत का संकट गंभीर है। जून में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, करीब 46% ऊंट पालने वाले परिवारों में सूखे से ऊंटों की मौत हुई। उत्तरी सोमालिया के सूल क्षेत्र में यह दर करीब 73% तक पहुंच गई। उत्तर-पूर्वी केन्या में भी पशु चिकित्सकों ने ऊंटों में अत्यधिक गर्मी से होने वाली बीमारियों और मौतों में बढ़ोतरी दर्ज की है। एक पशु चिकित्सा अधिकारी के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में क्षेत्र में गर्मी के कारण ऊंटों की मौत 15% से ज्यादा बढ़ी है। गर्मी के तनाव से ऊंटों में दूध उत्पादन और प्रजनन क्षमता भी प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऊंट सामान्य तौर पर करीब 40 डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी को शरीर के तापमान में बदलाव, कम पसीना और पानी की कम खपत जैसे तरीकों से सहन कर सकते हैं। लेकिन सहारा के कई हिस्सों में गर्मियों का तापमान अब अक्सर 50 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच रहा है।

अमेरिका ने ईरान पर फिर किया हमला, लगातार 12वीं रात आसमान से बरसी आग! धमाकों से दहला दक्षिणी ईरान

US Attack On Iran: पश्चिम एशिया में युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है। अमेरिका ने बुधवार को ईरान के सैन्य ठिकानों पर लगातार 12वीं रात भी हमले जारी रखे।ईरानी मीडिया प्रेस टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिणी ईरान के सिरिक इलाके में तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं। अमेरिकी सेना इससे पह

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अमेरिका का ईरान के 4 प्रांतों पर हमला:ट्रम्प बोले- वह बुरी तरह पिट रहा; हूती विद्रोहियों का सऊदी के 2 तेल टैंकरों पर अटैक

अमेरिका ने लगातार 12वीं रात ईरान पर हमला किया। इस बार खुजेस्तान, बुशेहर, होर्मोजगान और इलाम प्रांतों में कई जगह मिसाइल और हवाई हमले हुए। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, कई सैन्य ठिकानों और रणनीतिक इलाकों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान बुरी तरह पिट रहा है। दूसरी तरफ, यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के तेल टैंकर एन्सेलिया और लैला को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया है। सऊदी ने दोनों जहाजों पर हमले की पुष्टि की है।ब्रिटेन की UKMTO ने भी सऊदी तट के पास एक जहाज पर हमले की जानकारी दी है। हूती विद्रोहियों के इस कदम से बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट में तनाव पैदा हो गया है और वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

कनाडा में पंजाबी युवती गिरफ्तार:किराए की बेसमेंट के लिए ऑनलाइन बुकिंग कर एडवांस रुपए लेती; शिफ्ट करने पर ठगी का पता चलता

पंजाबी मूल की 27 साल की युवती ने कनाडा में रेंट के नाम पर 17 लोगों से 41 लाख रुपए (60 हजार डॉलर) ठग लिए। युवती ने सोशल मीडया प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग लोकेशन पर मकान दिखाए थे। हर मकान का 1700 डॉलर के करीब रेंट बताया गया। लोगों ने सोशल मीडिया पर ही मकान देख युवती से बात की। उसने लोगों को झांसे में लेकर पेमेंट ले ली। जब लोग दिए गए पतों पर अपना-अपना सामान लेकर पहुंचे तो उन्हें झटका लगा। ठगी का पता चलने पर पील रीजनल पुलिस से संपर्क किया गया। पुलिस ने केस दर्ज कर युवती को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार युवती की पहचान सवरीत कौर के रूप में हुई है। वह कनाडाई नागरिक है और ब्रैम्पटन में ही रह रही है। पुलिस ने युवती की फोटो जारी कर लिखा है कि लोग इसे देख लें और इस ठग से अलर्ट रहें। कैसे उसने लोगों को ठगा, पढ़िए पूरी रिपोर्ट… ​युवती ने कैसे 17 लोगों को ठगा… 13 जुलाई को पुलिस ने गिरफ्तार किया
जांच पूरी होने और ठगी कंफर्म होने पर 13 जुलाई को सवरीत कौर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उसे बेल हियरिंग के लिए ओंटारियो कोर्ट ऑफ जस्टिस की हिरासत में रखा गया है। पील रीजनल पुलिस ने आम जनता, अप्रवासी और नए किराएदारों को चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया पर रेंटल प्रॉपर्टी खोजते समय ज्यादा सावधानी बरतें। पुलिस ने सलाह दी है कि ​पैसे ट्रांसफर करने से पहले प्रॉपर्टी को खुद जाकर देखें। बिना पूरी जांच के किसी भी प्रकार की एडवांस पेमेंट न भेजें। युवती की गिरफ्तारी की जानकारी पुलिस ने 22 जुलाई को मीडिया से साझा की। ———– ये खबर भी पढ़ें… कनाडा सरकार का पंजाबियों को झटका, PR होने पर भी पेरेंट्स, दादा-दादी को साथ नहीं बसा पाएंगे कनाडा में रह रहे लाखों भारतीयों, खासकर पंजाबी समुदाय को बड़ा झटका लगा है। कनाडा सरकार ने 15 जुलाई 2026 से पेरेंट्स एंड ग्रैंडपेरेंट्स प्रोग्राम (PGP) के तहत नई स्पॉन्सरशिप अर्जियाें पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। इससे अब कनाडा में PR हासिल कर चुके नए आवेदक अपने माता-पिता और दादा-दादी को स्थायी निवास (PR) दिलाने के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे। (पढ़ें पूरी खबर)