पेरू में टूरिस्ट प्लेन क्रैश, क्रू समेत 13 की मौत:2000 साल पुरानी नाज्का लाइन्स देखने गए थे; मरने वालों की पहचान नहीं हो सकी

पेरू के नाज्का शहर के बाहर शनिवार को पर्यटकों को ले जा रहा एक छोटा प्लेन क्रैश हो गया। इस हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई है। एजेंसी रिपोर्ट्स के मुताबिक प्लेन ने पास के इका शहर से उड़ान भरी थी। नाज्का लाइन्स के पास पहुंचने के बाद प्लेन खेत में जाकर गिरा। इसमें आग लग गई। प्लेन में 2 पायलट्स के अलावा 11 पर्यटक थे। हादसे के बाद प्लेन के मलबे के पास जले हुए शव बिखरे पड़े थे। दरअसल, 2000 साल पुरानी नाज्का लाइन्स को पूरी तरह से केवल प्लेन या व्यूइंग टावर से ही देखा जा सकता है। इसलिए प्लेन पर्यटकों को लेकर निकला था। मरने वाले कहां से थे, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। पेरू प्लेन हादसे के बाद खेत में बिखरे शव… 14 साल से सीनिक फ्लाइट्स ऑर्गनाइज कर रही थी कपंनी जो प्लेन हादसे का शिकार हुआ, उसे पेरू की कंपनी ‘एरोडियाना’ ऑपरेट कर रही थी। एयरलाइन की वेबसाइट के मुताबिक, वह पिछले 14 साल से सेसना ग्रैंड कारवां प्लेन का इस्तेमाल करके नाज्का लाइन्स के ऊपर सीनिक फ्लाइट्स (नजारे दिखाने वाली उड़ानें) की सुविधा दे रहे हैं। हादसे की जांच की जा रही है। एरोडियाना ने कोई कमेंट नहीं दिया। पेरू के मूल निवासियों ने बनाईं थीं नाज्का लाइन्स पेरू की राजधानी लीमा से लगभग 400 किमी दक्षिण में पेरू के नाज्का और पाल्पा रेगिस्तान में कुछ आकृतियां बनी हैं। माना जाता है कि इन्हें 200 ईसा पूर्व से 600 ईस्वी के बीच नाज्का सभ्यता के लोगों ने बनाया। रेगिस्तान की गहरे रंग की पत्थरीली सतह हटाकर नीचे की हल्की मिट्टी को दिखाया गया, जिससे ये आकृतियां बन गईं। कई आकृतियां 100 से 300 मीटर और उससे भी बड़ी हैं। कुछ सीधी रेखाएं कई किलोमीटर तक जाती हैं। इन्हें क्यों बनाया गया, यह आज भी रहस्य है। वैज्ञानिकों के अनुसार ये धार्मिक अनुष्ठान, वॉटर सोर्स, अंतरिक्ष की गणनाओं या फिर संस्कृति से जुड़ी हो सकती हैं। यहां बहुत कम बारिश और शुष्क जलवायु होने के कारण ये आकृतियां करीब 2,000 साल से सुरक्षित बनी हुई हैं। नाज्का में पहले भी हो चुके हैं हादसे पिछले कुछ दशकों में इस मशहूर हैरिटेज साइट पर विमान दुर्घटना का यह पहला मामला नहीं है।

वर्ल्ड अपडेट्स:रूस की राजधानी मास्को के रेस्टोरेंट में धमाका, 3 की मौत, 15 घायल; एंटी टेरेरिस्ट कमेटी का दावा- यह बम ब्लास्ट था

मास्को के एक रेस्टोरेंट में हुए धमाके में कम से कम 3 लोगों की मौत हो गई है। इस घटना में 15 लोग घायल हुए हैं। रूसी सरकारी मीडिया ने शनिवार को यह जानकारी दी। घटना मास्को के कुद्रिन्सकाया स्क्वायर इलाके की है। धमाके के बाद फॉरेंसिक एक्सपर्ट और इमरजेंसी सर्विस के लोग पहुंच गए और रेस्क्यू शुरू किया। धमाके के बाद इलाके की घेराबंदी कर दी गई। जांच कर रही एंटी टेरेरिस्ट कमेटी का दावा है कि यह धमाका बम ब्लास्ट था। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… ट्रेडर्स अब पैसे देकर पहले देख सकेंगे ट्रम्प के पोस्ट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सोशल मीडिया कंपनी ट्रुथ सोशल ने वॉल स्ट्रीट के हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स के लिए ट्रुथ एपीआई नाम की पेड सर्विस शुरू की है। इसके तहत कस्टमर मंथली फीस देकर ट्रम्प और दूसरे अकाउंट्स के पोस्ट तक तेज तकनीकी पहुंच हासिल कर सकेंगे, ताकि वे बाजार में तेजी से ट्रेड कर सकें। आलोचकों का कहना है कि ट्रम्प के टैरिफ, युद्ध, ब्याज दर और दूसरे नीतिगत फैसलों से शेयर, बॉन्ड और मुद्रा बाजार प्रभावित होते हैं, ऐसे में यह व्यवस्था इनसाइडर ट्रेडिंग और सार्वजनिक पद के निजी लाभ के लिए इस्तेमाल जैसे गंभीर सवाल खड़े करती है। वहीं ट्रम्प मीडिया का कहना है कि पोस्ट सभी के लिए एक ही समय पर जारी किए जाएंगे और सर्विस में कोई अनुचित लाभ नहीं है।

वर्ल्ड अपडेट्स:रूस की राजधानी मास्को के रेस्टोरेंट में धमाका, 3 की मौत, 21 घायल; एंटी टेरेरिस्ट कमेटी का दावा- यह बम ब्लास्ट था

रूस की राजधानी मॉस्को में शनिवार को एक रेस्टोरेंट में प्राइवेट कार्यक्रम के दौरान जोरदार धमाका हुआ। नेशनल एंटी-टेररिज्म कमेटी ने सरकारी समाचार एजेंसी RIA नोवोस्ती को बताया कि यह धमाका घर पर बने बम में हुआ। जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में धमाका करने वाली महिला संदिग्ध भी शामिल थी। हादसे में घायलों की संख्या 15 से बढ़कर 21 हो गई है। कमेटी ने बताया कि एक अनजान महिला कुद्रिन्स्काया स्क्वायर पर बने ‘बाल्जी रॉसी’ रेस्टोरेंट में घुसने की कोशिश कर रही थी। उसके पास एक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) था। यह डिवाइस समय से पहले रेस्टोरेंट के बाहर ही फट गया, जिससे उसे रोकने वाले सुरक्षा गार्ड और रेस्टोरेंट के एक ग्राहक की मौत हो गई। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… ट्रेडर्स अब पैसे देकर पहले देख सकेंगे ट्रम्प के पोस्ट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सोशल मीडिया कंपनी ट्रुथ सोशल ने वॉल स्ट्रीट के हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स के लिए ट्रुथ एपीआई नाम की पेड सर्विस शुरू की है। इसके तहत कस्टमर मंथली फीस देकर ट्रम्प और दूसरे अकाउंट्स के पोस्ट तक तेज तकनीकी पहुंच हासिल कर सकेंगे, ताकि वे बाजार में तेजी से ट्रेड कर सकें। आलोचकों का कहना है कि ट्रम्प के टैरिफ, युद्ध, ब्याज दर और दूसरे नीतिगत फैसलों से शेयर, बॉन्ड और मुद्रा बाजार प्रभावित होते हैं, ऐसे में यह व्यवस्था इनसाइडर ट्रेडिंग और सार्वजनिक पद के निजी लाभ के लिए इस्तेमाल जैसे गंभीर सवाल खड़े करती है। वहीं ट्रम्प मीडिया का कहना है कि पोस्ट सभी के लिए एक ही समय पर जारी किए जाएंगे और सर्विस में कोई अनुचित लाभ नहीं है।

ईरान में कुछ बड़ा होने वाला है! अमेरिकी नागरिकों को मिडिल ईस्ट छोड़ने का आदेश, US स्टेट डिपार्मेंट ने कहा- वहां से तुरंत निकलो

अमेरिकी विदेश विभाग ने मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकियों को चेतावनी दी है कि वे वहां से निकलने पर विचार करें या हालात बिगड़ने पर निकलने के लिए तैयार रहें।यह नई ट्रैवल वॉर्निंग ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, वॉशिंगटन इस वीकेंड ईरान पर नए हमले करने पर विचार कर रह

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नेपाल के मशहूर पर्वतारोही निर्मल पुर्जा की पाकिस्तान में मौत:8 हजार मीटर ऊंची ब्रॉड पीक पर चढ़ रहे थे, हिमस्खलन में गई जान

नेपाल के मशहूर पर्वतारोही निर्मल पुर्जा पाकिस्तान में हिमस्खलन यानी एवलांच की चपेट में आने के बाद मौत हो गई। उनके निधन की पुष्टि उनकी स्थापित पर्वतारोहण कंपनी एलीट एक्सपेड ने की है। निर्मल पुर्जा 30 जुलाई को काराकोरम इलाके में 8,051 मीटर ऊंचे ब्रॉड पीक की चोटी पर चढ़ाई कर रहे थे। इस दौरान करीब 7,000 मीटर की ऊंचाई पर यह हादसा हुआ। हिमस्खलन के बाद निर्मल पुर्जा समेत 10 पर्वतारोही लापता हो गए थे। लापता पर्वतारोहियों में छह नेपाली पर्वतारोही भी शामिल थे। मैप के जरिए समझिए ब्रॉड पीक की लोकेशन…

गाजा से इजराइली सेना हटाने पर क्यों फंसे नेतन्याहू:इजराइली PM पर ट्रम्प को खुश करने के साथ चुनाव जीतने की चुनौती

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 30 जुलाई को दावा किया कि गाजा को लेकर ऐतिहासिक समझौता हो गया है। हमास हथियार छोड़ने के लिए तैयार हो गया है। इसके साथ ही इजराइली सेना भी गाजा से पीछे हट जाएगी। ट्रम्प के ऐलान के बाद से सवाल पूछे जाने लगे हैं कि क्या इजराइल सच में गाजा से अपनी सेना हटा लेगा? यही शर्त अब इजराइल की राजनीति में सबसे बड़े विवाद की वजह बन गई है। इजराइल में कई नेता और वहां का मीडिया इस समझौते को लेकर नाराज हैं।

एक तरफ ट्रम्प दावा कर रहे हैं कि इजराइल इस समझौते से बेहद खुश है। दूसरी तरफ इजराइल ने अब तक इसे लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक इजराइली सरकार के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि जब तक हमास के पूरी तरह हथियार छोड़ने का पक्का भरोसा नहीं हो जाता, तब तक गाजा से सेना हटाने का सवाल ही नहीं उठता। गाजा से सेना हटाने का इजराइल में इतना विरोध क्यों? 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इजराइल ने गाजा में बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया। तब से अब तक 73 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं और गाजा का बड़ा हिस्सा तबाह हो चुका है। इसके बावजूद इजराइल में बड़ी संख्या में लोग अब भी गाजा के खिलाफ सख्त सैन्य कार्रवाई के पक्ष में हैं। मई में हुए एक सर्वे में 82% यहूदी इजराइलियों ने गाजा के फिलिस्तीनियों को उनके घरों से हटाने का समर्थन किया। 56% लोगों ने इजराइल के भीतर रहने वाले फिलिस्तीनी नागरिकों को भी हटाने की बात कही। जाहिर है कि गाजा से सेना हटाने और वहां दोबारा फिलिस्तीनी सरकार बहाल करने का विचार इजराइल में कई लोगों को पसंद नहीं है। उन्हें डर है कि अगर सेना हट गई तो हमास फिर से मजबूत होकर 7 अक्टूबर जैसा हमला कर सकता है। यही वजह है कि सरकार के कई मंत्री गाजा में भी वेस्ट बैंक की तरह यहूदी बस्तियां बसाने की वकालत कर चुके हैं। ऐसे में गाजा से सेना की वापसी और पुनर्निर्माण की योजना का विरोध होना स्वाभाविक माना जा रहा है।

किन नेताओं ने सबसे ज्यादा विरोध किया? बेजलेल स्मोट्रिच: वित्त मंत्री
नेतन्याहू सरकार में वित्त मंत्री रहे स्मोट्रिच ने कहा कि गाजा से इजराइली सेना नहीं हटनी चाहिए। हमास के लोगों से हथियार छीनना ही पहली शर्त है। आखिरकार इजराइल पूरे गाजा पर नियंत्रण करेगा और वहां फिर से यहूदी बस्तियां बसाई जाएंगी। इतमार बेन ग्विर: राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री बेन ग्विर ट्रम्प के प्लान को बुरा बताते हुए कहा कि अगर हमास के लड़ाकों को निशाना बनाना बंद कर दिया गया, तो उन्हें अगला हमला करने का मौका मिल जाएगा। गाजा में सैन्य कार्रवाई जारी रहनी चाहिए और वहां से लोगों के पलायन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। गादी आइजनकोट:
ट्रम्प के ऐलान का विरोध सिर्फ कट्टर दक्षिणपंथी नेता ही नहीं कर रहे। पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट भी इसके खिलाफ माने जा रहे हैं। इस साल अक्टूबर में होने वाले चुनाव में गादी को नेतन्याहू का सबसे बड़ा विरोधी माना जा रहा है। गादी ने कहा कि अगर हमास की सैन्य और राजनीतिक ताकत पूरी तरह खत्म नहीं होती, तो यह इजराइल की बड़ी नाकामी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि हमास पहले जितना ही मजबूत हो चुका है।

नेतन्याहू सबसे मुश्किल स्थिति में क्यों हैं? प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अभी तक इस समझौते पर सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शायद उनकी चुप्पी ही बताती है कि वे कितनी मुश्किल स्थिति में हैं। एक तरफ ट्रम्प हैं, जो इस समझौते को अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत मान रहे हैं। दूसरी तरफ नेतन्याहू के अपने कट्टर दक्षिणपंथी सहयोगी हैं, जो गाजा से सेना हटाने के सख्त खिलाफ हैं। अगर नेतन्याहू गाजा से सेना हटाने पर सहमत होते हैं, तो चुनाव से पहले उनके कट्टर दक्षिणपंथी सहयोगी और वोटर उनसे दूर हो सकते हैं। दूसरी तरफ अगर वे समझौते को पूरी तरह ठुकरा देते हैं, तो ट्रम्प और अमेरिका नाराज हो सकते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि नेतन्याहू शायद बीच का रास्ता अपनाएं। यानी कुछ इलाकों से सेना पीछे हटाने का दिखावा करें, लेकिन गाजा से पूरी तरह न निकलें। ट्रम्प को नाराज करना नेतन्याहू के लिए बहुत मुश्किल

नेतन्याहू पर दबाव सिर्फ इजराइल के भीतर से नहीं, बल्कि अमेरिका से भी है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डोव वैक्समैन के मुताबिक, चुनाव से ठीक पहले नेतन्याहू ट्रम्प से रिश्ते खराब करने का जोखिम नहीं उठाना चाहेंगे।

हाल के समय में इजराइल में यह चर्चा बढ़ी है कि ट्रम्प सरकार का रुख पहले जैसा नहीं रहा। लेकिन इस पर लगभग सभी की राय एक है कि अमेरिका का सैन्य और सुरक्षा समर्थन इजराइल के लिए जरूरी है। इसीलिए विपक्ष नेतन्याहू को लगातार चेतावनी देता रहा है कि अगर अमेरिका के साथ रिश्ते बिगड़े, तो इसका राजनीतिक नुकसान उन्हें ही उठाना पड़ेगा। इसके अलावा भ्रष्टाचार के मामलों से जूझ रहे नेतन्याहू को ट्रम्प से राजनीतिक और नैतिक समर्थन की उम्मीद है। नेतन्याहू यह भी चाहते होंगे कि ट्रम्प चुनावी माहौल में उनके लिए कोई बड़ा कूटनीतिक या राजनीतिक फायदा दिला सकते हैं। इसमें सऊदी अरब और इजराइल के बीच संबंध सामान्य कराने जैसा बड़ा समझौता या उनके खिलाफ चल रहे कानूनी मामलों पर समर्थन जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं।

क्या सच में इजराइल गाजा से निकल जाएगा? इस सवाल का जवाब फिलहाल ‘नहीं’ मिलता दिख रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि गाजा से इजराइली सेना की पूरी वापसी की संभावना लगभग नामुमकिन है। नेतन्याहू ट्रम्प को यह दिखा सकते हैं कि समझौता आगे बढ़ रहा है। इसके लिए वे समझौते की घोषणा, हस्ताक्षर समारोह या कुछ और करने का नाटक कर सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इजराइल गाजा से सेना हटा लेगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, गाजा से सेना न हटाना सिर्फ चुनावी या राजनीतिक मजबूरी नहीं है। यह नेतन्याहू की सुरक्षा नीति का भी अहम हिस्सा है। उनका हमेशा से मानना रहा है कि खतरों को रोकने के लिए इजराइल को अपनी सीमाओं के बाहर भी सैन्य मौजूदगी बनाए रखनी चाहिए। ऐसे में चुनाव नजदीक आने के साथ नेतन्याहू गाजा से पीछे हटने के बजाय और सख्त रुख अपना सकते हैं।

पहली बार बिना सामान के चीन पहुंचे भारतीय व्यापारी:6 साल बाद भारत-तिब्बत ट्रेड शुरू; 2019 से तकलाकोट में छूटा है करोड़ों का माल

उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से 6 साल बाद भारत-तिब्बत परंपरागत व्यापार शनिवार से फिर शुरू हो गया है। पहले दल में 16 भारतीय व्यापारी और 4 हेल्पर तिब्बत के तकलाकोट मंडी पहुंचे। खास बात यह रही कि इतिहास में पहली बार भारतीय व्यापारी बिना सामान के चीन गए। सीमा पर चीनी प्रशासन ने उनके दस्तावेजों की जांच के बाद प्रवेश दिया, जबकि व्यापारियों का सामान अब भी पिथौरागढ़ के गुंजी में रखा हुआ है। वहीं, वर्ष 2019 से भारतीय व्यापारियों का करोड़ों रुपए का माल भी तकलाकोट में छूटा हुआ है। जून से जुलाई तक टलता रहा व्यापार कोरोना महामारी और भारत-चीन संबंधों में आई तल्खी के कारण वर्ष 2020 से दोनों देशों के बीच परंपरागत व्यापार पूरी तरह बंद था। इस साल जून में व्यापार शुरू होना था, लेकिन औपचारिकताओं और चीन की ओर से लगातार बदलते नियमों के कारण प्रक्रिया टलती रही। 8 जुलाई को व्यापारी सामान लेकर गुंजी तक पहुंच गए थे। उन्हें ट्रेड पास भी जारी कर दिए गए थे, लेकिन रवाना होने से ठीक एक दिन पहले चीन के पुरांग काउंटी प्रशासन ने व्यवस्थाएं पूरी न होने का हवाला देकर व्यापारियों की एंट्री रोक दी। इसके बाद व्यापारी अपना सामान गुंजी में छोड़कर वापस धारचूला लौट आए। फिलहाल सिर्फ 20 लोगों को मंजूरी व्यापार शुरू होने को लेकर सीमांत क्षेत्र के व्यापारियों में काफी उत्साह था। प्रशासन ने 134 व्यापारियों और सहायकों के ट्रेड पास जारी किए थे। हालांकि बाद में चीन की ओर से नया आदेश जारी कर फिलहाल केवल 20 लोगों को तकलाकोट जाने की अनुमति दी गई। चीनी प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पहले चरण में केवल उन्हीं व्यापारियों को प्रवेश मिलेगा, जो वर्ष 2019 में तकलाकोट गए थे और जिनका सामान वहां छूट गया था। SDM बोले- भारत-चीन व्यापार विधिवत शुरू हुआ धारचूला के एसडीएम एवं ट्रेड अधिकारी आशीष जोशी ने बताया कि 1 अगस्त को सुबह करीब 10:15 बजे लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन परंपरागत व्यापार की औपचारिक शुरुआत हो गई। पहले दल में 16 व्यापारी और 4 हेल्पर, कुल 20 लोग तकलाकोट मंडी पहुंचे हैं। वहां वे व्यापारिक गतिविधियां शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि अगले बैचों को भेजने की तारीख तय करने के लिए चीनी प्रशासन से लगातार ईमेल के माध्यम से पत्राचार किया जा रहा है। अभी गुंजी में रखा है गुड़, मिश्री और बर्तन व्यापारियों का गुड़, मिश्री, बर्तन समेत अन्य व्यापारिक सामान अभी भी गुंजी में रखा हुआ है। बताया जा रहा है कि तकलाकोट में व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद व्यापारी दोबारा सामान लेकर जाएंगे। यदि सब कुछ सामान्य रहा तो अगले कुछ दिनों में 20-20 व्यापारियों के अन्य दल भी चीन रवाना किए जाएंगे। तकलाकोट में आज भी पड़ा है करोड़ों का सामान वर्ष 2019 में कई भारतीय व्यापारी अपना माल तकलाकोट मंडी में ही छोड़कर लौटे थे। अगले ही वर्ष व्यापार बंद हो गया, जिससे करोड़ों रुपए का सामान वहीं फंस गया। व्यापारियों का कहना है कि धातु के बर्तन तो उपयोग में आ सकते हैं, लेकिन खाद्य सामग्री और अन्य सामान खराब होने की आशंका है। तकलाकोट में भारतीय व्यापारियों के लिए नए स्थान पर मंडी विकसित की गई है। अब व्यापारियों को इसी नई मंडी में किराये पर दुकानें उपलब्ध कराई जाएंगी, जहां से परंपरागत भारत-तिब्बत व्यापार संचालित होगा। भारतीय व्यापारी अब पुरानी नहीं, नई मंडी में करेंगे कारोबार छह साल के लंबे अंतराल में तकलाकोट की तस्वीर भी बदल गई है। पहले भारतीय व्यापारी पुरानी मंडी में किराए पर दुकानें लेकर कारोबार करते थे, लेकिन व्यापार बंद रहने के दौरान वहां की कई दुकानें नेपाली और अन्य व्यापारियों को आवंटित कर दी गईं। अब चीन ने भारतीय और नेपाली व्यापारियों के लिए नई ट्रेड मंडी विकसित की है। इस बार भारतीय व्यापारियों को इसी नई मंडी में दुकानें मिलेंगी। व्यापार समिति का कहना है कि नई मंडी पहले से ज्यादा व्यवस्थित है और वहां सामान रखने के लिए अधिक जगह उपलब्ध होगी। समिति ने भारतीय व्यापारियों के लिए रियायती किराए की भी मांग की है। पहली बार बदल जाएगा सदियों पुराना ढुलाई मॉडल इस बार सिर्फ मंडी ही नहीं, व्यापार का पूरा ढांचा बदल जाएगा। अब तक व्यापारी धारचूला से गुंजी, कालापानी और नाभीढांग होते हुए कई दिन की कठिन यात्रा के बाद लिपुलेख दर्रे तक पहुंचते थे। सामान घोड़े-खच्चरों और पोर्टरों के सहारे ढोया जाता था। खराब मौसम और भूस्खलन कई बार व्यापार रोक देते थे। अब सड़क बनने के बाद करीब 100 किलोमीटर तक वाहन सीधे सीमा के करीब पहुंच सकेंगे। सिर्फ अंतिम करीब 200 मीटर तक ही सामान पारंपरिक तरीके से ले जाना होगा। चीन की सीमा में प्रवेश करने के बाद सड़क पहले से उपलब्ध है, जहां से व्यापारी करीब 18 किलोमीटर दूर तकलाकोट मंडी तक आसानी से पहुंच सकेंगे। इससे परिवहन लागत और समय दोनों कम होने की उम्मीद है। 2019 में 3 करोड़ से ज्यादा का कारोबार भारत-चीन व्यापार समिति के अनुसार 2019 में करीब 250 भारतीय व्यापारी तकलाकोट पहुंचे थे। उस वर्ष करीब 3 करोड़ रुपए से अधिक का व्यापार हुआ था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार लगभग 1.25 करोड़ रुपए का निर्यात और करीब 1.90 करोड़ रुपए का आयात हुआ था। इस बार सड़क, नई मंडी और बेहतर लॉजिस्टिक व्यवस्था के कारण कारोबार बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि व्यापारियों का कहना है कि भारतीय पक्ष को देरी से अनुमति मिलने के कारण इस साल शुरुआती कारोबारी अवसर काफी हद तक निकल चुके हैं। ——————- ये खबर भी पढ़ें : भारत-चीन व्यापार पर चाइना की टेढ़ी चाल: 1 अगस्त को बिना सामान के बुलाए 20 व्यापारी, नेपाल जून से कर रहा व्यापार करीब 6 साल बाद 1 अगस्त से लिपुलेख दर्रे के जरिए भारत-चीन सीमा व्यापार फिर शुरू होने जा रहा है, लेकिन इस व्यापार पर एक बार फिर चीन ने टेढ़ी चाल चली है। दरअसल, चीन ने पहले बैच में सिर्फ उन्हीं व्यापारियों को तकलाकोट मंडी जाने की अनुमति दी है, जिनकी दुकानें या सामान 2019 से वहां फंसा हुआ है। पढ़ें पूरी खबर…

वर्ल्ड अपडेट्स:अमेरिका में F-35B फाइटर जेट क्रैश; पायलट सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब

अमेरिका के सैन डिएगो में शुक्रवार सुबह मरीन कॉर्प्स का F-35B फाइटर जेट मिरामार एयर बेस के पास क्रैश हो गया। हादसे के बाद विमान में आग लग गई, जिसे दमकलकर्मियों ने बुझा दिया। मरीन कॉर्प्स के मुताबिक, पायलट समय रहते इजेक्ट कर सुरक्षित बाहर निकल आया। उसे मामूली चोटें आई हैं और इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों ने इस हादसे को ‘क्लास A मिसहैप’ घोषित किया है। यह सैन्य विमान हादसों की सबसे गंभीर श्रेणी होती है। इसमें विमान पूरी तरह नष्ट हो जाए, 20 लाख डॉलर (करीब 17 करोड़ रुपये) से ज्यादा का नुकसान हो या किसी सैनिक की मौत हो जाए। एक F-35B फाइटर जेट की कीमत करीब 109 मिलियन डॉलर (करीब 950 करोड़ रुपये) बताई जाती है। क्यों खास है F-35B? F-35B अमेरिका का एडवांस्ड स्टील्थ फाइटर जेट है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम दूरी से उड़ान भर सकता है और हेलीकॉप्टर की तरह सीधा उतर (वर्टिकल लैंडिंग) भी सकता है। इसका इस्तेमाल अमेरिकी मरीन कॉर्प्स, नेवी और एयर फोर्स करती हैं। यह पिछले एक महीने में अमेरिकी मरीन कॉर्प्स के F-35B से जुड़ा दूसरा बड़ा हादसा है। इससे पहले वॉशिंगटन में भी एक F-35B जेट दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। अब इस नए हादसे की जांच शुरू कर दी गई है।

वर्ल्ड अपडेट्स:अमेरिका में F-35B फाइटर जेट क्रैश; पायलट सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब

अमेरिका के सैन डिएगो में शुक्रवार सुबह मरीन कॉर्प्स का F-35B फाइटर जेट मिरामार एयर बेस के पास क्रैश हो गया। हादसे के बाद विमान में आग लग गई, जिसे दमकलकर्मियों ने बुझा दिया। मरीन कॉर्प्स के मुताबिक, पायलट समय रहते इजेक्ट कर सुरक्षित बाहर निकल आया। उसे मामूली चोटें आई हैं और इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों ने इस हादसे को ‘क्लास A मिसहैप’ घोषित किया है। यह सैन्य विमान हादसों की सबसे गंभीर श्रेणी होती है। इसमें विमान पूरी तरह नष्ट हो जाए, 20 लाख डॉलर (करीब 17 करोड़ रुपये) से ज्यादा का नुकसान हो या किसी सैनिक की मौत हो जाए। एक F-35B फाइटर जेट की कीमत करीब 109 मिलियन डॉलर (करीब 950 करोड़ रुपये) बताई जाती है। क्यों खास है F-35B? F-35B अमेरिका का एडवांस्ड स्टील्थ फाइटर जेट है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम दूरी से उड़ान भर सकता है और हेलीकॉप्टर की तरह सीधा उतर (वर्टिकल लैंडिंग) भी सकता है। इसका इस्तेमाल अमेरिकी मरीन कॉर्प्स, नेवी और एयर फोर्स करती हैं। यह पिछले एक महीने में अमेरिकी मरीन कॉर्प्स के F-35B से जुड़ा दूसरा बड़ा हादसा है। इससे पहले वॉशिंगटन में भी एक F-35B जेट दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। अब इस नए हादसे की जांच शुरू कर दी गई है।

ट्रम्प बोले- ईरान पर भरोसा खत्म हो रहा:वे झूठ बोलते हैं, लेकिन बातचीत जारी है

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अब उन्हें ईरान पर भरोसा नहीं रहा। कैंप डेविड में कैबिनेट बैठक के दौरान उन्होंने कहा, ईरान झूठ बोलता है, गलत जानकारी देता है। बातचीत की बात तो करता है, लेकिन बार-बार अपने वादे से मुकर जाता है। हालांकि, ट्रम्प ने साफ किया कि दोनों देशों के बीच बातचीत अभी भी चल रही है। उन्होंने बताया कि अमेरिका की ओर से स्टीव विटकॉफ, जेडी वेंस, मार्को रुबियो और जेरेड कुशनर बातचीत संभाल रहे हैं। ट्रम्प ने कहा कि बातचीत चल ही रही थी, तभी उन्हें खबर मिली कि जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर पांच मिसाइलें दागी गई हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में हमेशा सतर्क रहना पड़ता है और आगे भी हमलों की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ईरान की ताकत पर ट्रम्प ने कहा कि अभी वह आक्रामक नजर आ सकता है, लेकिन धीरे-धीरे उसकी ताकत कमजोर पड़ जाएगी। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स: 1. ईरान ने दूसरे दूसरे समुद्री रास्ते भी बंद करने की धमकी दी: ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने कहा कि अगर अमेरिका की नौसैनिक घेराबंदी जारी रही तो होर्मुज पर नियंत्रण और सख्त किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर दूसरे अहम समुद्री रास्ते भी बंद किए जा सकते हैं। 2. पेंटागन ने ईरान पर संभावित हमलों की रिपोर्ट पर चुप्पी साधी: अमेरिकी रक्षा विभाग ने उन रिपोर्टों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जिनमें अमेरिका और इजराइल के ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमले की योजना बनाने का दावा किया गया है। पेंटागन ने कहा कि राष्ट्रपति के निर्देश मिलते ही कार्रवाई के लिए सेना तैयार है। 3. जयशंकर ने ईरान से कहा- कारोबारी जहाजों को निशाना न बनाया जाए: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बात कर कारोबारी जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। सरकार ने बताया कि पश्चिम एशिया संघर्ष में अब तक 16 भारतीयों की मौत और 75 घायल हुए हैं। 4. अमेरिका-इजराइल ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की तैयारी में: रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल ने ईरान की जमीनी सीमाओं को सख्ती से नियंत्रित कर उसकी सप्लाई और व्यापार प्रभावित करने के विकल्प पर चर्चा की है। हालांकि इसे लागू करना आसान नहीं माना जा रहा। 5. ईरान का दावा- कुवैत में अमेरिकी एयरबेस पर ड्रोन हमला किया: ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने कुवैत के अहमद अल-जाबेर एयरबेस पर मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को ड्रोन से निशाना बनाया। अमेरिका की ओर से इस दावे पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…