पाकिस्तान में गैंगस्टर उजैर बलोच के भाई पर हमला:ल्यारी में अज्ञात हमलावरों ने घर के बाहर गोली मारी, हालत गंभीर

पाकिस्तान के कराची में जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर उजैर बलोच के भाई जुबैर बलोच पर गुरुवार शाम जानलेवा हमला हुआ। कराची के ल्यारी इलाके में उनके घर के बाहर बाइक सवार अज्ञात हमलावरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। हमले में 40 साल जुबैर गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि गोलीबारी की चपेट में आए दो राहगीर भी जख्मी हुए हैं। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जुबैर के सीने और पेट में गोलियां लगी हैं और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक, हमलावर वारदात को अंजाम देने के बाद मौके से फरार हो गए। घायलों को तुरंत कराची के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां जुबैर की सर्जरी की गई। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, घायल राहगीरों में से एक की हालत भी गंभीर है। अपराधियों को पकड़ने के लिए चेकिंग तेज पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है ताकि हमलावरों के भागने के रूट का पता लगाया जा सके। मौके से गोलियों के खोल बरामद किए गए हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है ताकि इस्तेमाल किए गए हथियार के प्रकार का पता चल सके। हमले के बाद ल्यारी में स्थिति तनावपूर्ण है, जिसके चलते वहां अतिरिक्त पुलिस बल और रेंजरों की तैनाती कर दी गई है। संदिग्धों को पकड़ने के लिए कराची के एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स पर चेकिंग तेज कर दी गई है। गैंगवार और पुरानी रंजिश की जांच साउथ के डीआईजी सैयद असद रजा ने बताया कि पुलिस हर एंगल से मामले की जांच कर रही है। अभी यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हमला गैंगवार की वजह से हुआ, पुरानी दुश्मनी के चलते हुआ या इसके पीछे कोई और कारण है। फिलहाल पुलिस ने किसी एक वजह की पुष्टि नहीं की है। पुलिस के मुताबिक, जुबैर बलोच को 2012 में सात आपराधिक मामलों में गिरफ्तार किया गया था। वह जनवरी 2025 में जेल से बाहर आया था। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि उसकी पुरानी आपराधिक रंजिशों का इस हमले से कोई संबंध है या नहीं। इलाके में गैंगवार फिर से शुरू होने की चर्चा इस घटना के बाद ल्यारी में एक बार फिर गैंगवार की आशंकाएं तेज हो गई हैं। इलाके के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जुबैर ने हाल ही में एक राजनीतिक पार्टी जॉइन की थी और कुछ महीने पहले इलाके में पार्टी के झंडे भी लगाए थे। हालांकि, इलाके में जारी तनाव के चलते उस राजनीतिक दल के नाम का खुलासा नहीं किया गया है, और न ही पार्टी की ओर से इस जानलेवा हमले पर अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है। उनका दावा है कि कराची ऑपरेशन के दौरान दुबई और ईरान भागे कई गैंगस्टरों के दोबारा लौटने की चर्चाएं हैं, जिससे स्थानीय लोगों में गैंगवार फिर शुरू होने का डर बढ़ गया है। उजैर बलोच पर कई गंभीर मामले दर्ज उजैर बलोच कभी कराची के सबसे ताकतवर गैंग लीडरों में गिना जाता था। उसे ल्यारी का कुख्यात गैंगस्टर अब्दुल रहमान उर्फ रहमान डकैत का दाहिना हाथ माना जाता था। पुलिस मुठभेड़ में रहमान डकैत के मारे जाने के बाद उजैर ने ल्यारी के अपराध जगत की कमान संभाल ली और धीरे-धीरे इलाके का सबसे प्रभावशाली गैंगस्टर बन गया। फिलहाल उजैर बलोच पाकिस्तान की जेल में बंद है। इसी साल मार्च में आतंकवाद विरोधी अदालत ने हत्या, पुलिस पर हमले और विस्फोटक रखने समेत सात मामलों में उसकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। उस पर 2012 में कलाकोट थाना क्षेत्र में सुरक्षा बलों पर हथियारों और विस्फोटकों से हमला करने का भी आरोप है। इससे पहले अप्रैल 2020 में एक सैन्य अदालत ने उसे जासूसी का दोषी ठहराते हुए 12 साल की सजा सुनाई थी। धुरंधर फिल्म की वजह से चर्चा में आया उजैर हाल के दिनों में उजैर बलोच का नाम भारतीय स्पाई-थ्रिलर फिल्म ‘धुरंधर’ की वजह से भी चर्चा में रहा है। फिल्म में उसके किरदार को अभिनेता दानिश पंडोर ने निभाया है।

हिमस्खलन- नेपाल के मशहूर पर्वतारोही निर्मल पुर्जा पाकिस्तान में लापता:10 मेंबर्स के साथ ब्रॉड पीक पर चढ़ाई कर रहे थे; 4 शव बरामद, रेस्क्यू जारी

नेपाल के मशहूर पर्वतारोही निर्मल पुर्जा पाकिस्तान में हिमस्खलन यानी एवलांच की चपेट में आने के बाद लापता हो गए हैं। अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान (ACP) के अनुसार, काराकोरम इलाके में 8,051 मीटर ऊंचे ब्रॉड पीक पर चढ़ाई के दौरान करीब 7,000 मीटर की ऊंचाई पर यह हादसा हुआ। न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार, पुर्जा के साथ 9 मेंबर थे। शिखर पर चढ़ने की कोशिश के दौरान बर्फीले तूफान ने 10 सदस्यीय टीम को अपनी चपेट में ले लिया। लापता होने वालों में नेपाल के 6, पाकिस्तान, ओमान, अमेरिका और चीन का एक-एक पर्वतारोही शामिल है। इनमें से 4 के शव बरामद कर लिए गए हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है, लेकिन खराब मौसम के कारण बचाव कार्य में बाधा आ रही है। GPS ट्रैकर में हलचल के संकेत एवरेस्ट क्रॉनिकल की रिपोर्ट के मुताबिक निर्मल पुर्जा के GPS ट्रैकर में हल्की हलचल देखी गई है। हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि यह तकनीकी खराबी भी हो सकती है। ट्रैकिंग डेटा के अनुसार गुरुवार सुबह 9:38 बजे पुर्जा 6,659 मीटर की ऊंचाई पर थे। इसके बाद सुबह 10:18 बजे 800 मीटर की तेजी से गिरावट दर्ज की गई, जो एवलांच के समय से मेल खाती है। रेस्क्यू हेलिकॉप्टर पहाड़ी इलाकों में नहीं पहुंच पा रहे नेपाल पर्वतारोहण संघ के पूर्व अध्यक्ष आंग शेरिंग शेरपा ने बताया कि खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर पहाड़ी इलाके में उतर नहीं पा रहे हैं, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन प्रभावित हुआ है। पाकिस्तान सरकार के संपर्क में नेपाल नेपाल के संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा कि वे पाकिस्तान में स्थित नेपाली दूतावास के जरिए पाकिस्तानी सरकार के साथ लगातार संपर्क में हैं। नेपाल के पर्यटन मंत्री खड़क प्रसाद पौडेल ने सोशल मीडिया पर कहा कि वे स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और पर्वतारोहियों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद कर रहे हैं। अल्पाइन क्लब कर रहा समन्वय अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान के उपाध्यक्ष करार हैदरी ने बताया कि हिमस्खलन के बाद से पूरी टीम से संपर्क टूट गया है। क्लब ने कहा कि वे सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर हर संभव संसाधन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। ———————————————————-

स्पेन में मोरक्को के 18 प्रवासी मारे गए:यूरोप में एंट्री के लिए हजारों लोग तैरकर पहुंचे थे, सेना ने रोका तो भगदड़ मची

अफ्रीकी देश मोरक्को की तरफ से स्पेन में जबरन घुसने की कोशिश के दौरान गुरुवार सुबह भीषण भगदड़ मच गई। इसमें कम से कम 18 अफ्रीकी प्रवासियों की मौत हो गई, जबकि स्पेनिश और मोरक्को के 100 से ज्यादा सैनिक घायल हो गए। दरअसल बेहतर जीवन की तलाश में अफ्रीकी और एशियाई देशों के प्रवासी यूरोपीय देशों में घुसना चाहते हैं। सिउटा मोरक्को के उत्तरी तट पर स्थित एक स्पेनिश शहर है। यहां घुसने के बाद प्रवासियों को यूरोपीय संघ के क्षेत्र में एंट्री मिल जाती है। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक सीमा पर तैनात फोर्स को चकमा देने के लिए करीब 3,000 प्रवासियों ने सुबह का वक्त चुना। तब सैनिकों की चौकसी कम होती है। सीमा पर पुलिस की घेराबंदी और बाड़ के संकरे रास्तों के कारण अफरा-तफरी मच गई। लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े, जिससे दबने, दम घुटने और समुद्र में डूबने के कारण यह हादसा हुआ। हादसे के बाद की 5 फोटोज… स्यूटा से ही यूरोप में घुसने की सबसे ज्यादा कोशिश क्यों होती है? स्यूटा भले ही भौगोलिक तौर पर अफ्रीका में है, लेकिन यह स्पेन और यूरोपीय संघ (EU) का हिस्सा है। यानी अगर कोई प्रवासी स्यूटा में घुस जाता है, तो वह यूरोप की सीमा तक पहुंच जाता है। यही वजह है कि हजारों लोग हर साल यहां से यूरोप में दाखिल होने की कोशिश करते हैं। स्यूटा और इसके करीब मेलिला ऐसे दो शहर हैं, जहां अफ्रीका और यूरोप की सीधी जमीनी सीमा मिलती है। इसलिए बेहतर नौकरी और अच्छी जिंदगी की तलाश में मोरक्को समेत कई अफ्रीकी देशों के लोग सबसे ज्यादा इन्हीं रास्तों को चुनते हैं। इस सप्ताह की शुरुआत में ही करीब 1,500 प्रवासी स्यूटा में प्रवेश कर चुके थे। इसके बाद गुरुवार को हालात अचानक बिगड़ गए। स्यूटा में घुसने के लिए कुछ लोग समुद्र में तैरकर सीमा पार करते हैं, कुछ छोटी नावों का सहारा लेते हैं। वहीं बड़ी संख्या में लोग सीमा पर लगी ऊंची बाड़ पर चढ़कर या उसे काटकर अंदर जाने की कोशिश करते हैं। हालांकि, सीमा पर लगे सेंसर, निगरानी टावर और स्पेनिश सुरक्षाबल अक्सर उन्हें पकड़ लेते हैं। सेना और गोताखोरों की तैनाती स्पेन सरकार ने एक बयान जारी कर बताया कि सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सैन्य टुकड़ियों को भेजा गया है। इसके अलावा हवाई और नौसैनिक सहायता बढ़ाई गई है और पानी में गश्त के लिए गोताखोरों की टीमें तैनात की गई हैं। यूरोपीय संघ ने भी स्पेन को सीमा और तटरक्षक एजेंसी फ्रोंटेक्स के जरिए मदद देने की पेशकश की है ताकि वहां व्यवस्था बहाल की जा सके। स्यूटा और मेलिला को लेकर स्पेन-मोरक्को में विवाद मोरक्को को 1956 में स्पेन से आजादी मिली थी। हालांकि स्पेन ने स्यूटा और मेलिला को आजाद नहीं किया। मोरक्को का कहना है कि स्यूटा और मेलिला भी उसे वापस मिलने चाहिए। ये दोनों शहर अफ्रीकी महाद्वीप में हैं और मोरक्को का हिस्सा हैं। स्पेन का कहना है कि स्यूटा पर उसका कब्जा 350 साल से है। तब मोरक्को भी नहीं बना था। स्यूटा पर पुर्तगाल ने 1415 में कब्जा किया था। 1668 में पुर्तगाल में इसे स्पेन को दे दिया। स्पेन ने स्यूटा छोड़ा क्यों नहीं? 1. रणनीतिक वजह स्यूटा जिब्राल्टर स्ट्रेट के पास है। यहां से भूमध्य सागर और अटलांटिक महासागर के बीच आने-जाने वाले जहाजों पर नजर रखी जा सकती है। 2. राजनीतिक वजह यदि स्पेन स्यूटा छोड़ देता है, तो दूसरे शहर मेलिला पर भी दबाव बढ़ सकता है। इससे स्पेन के लिए बड़ा राजनीतिक और सुरक्षा संकट पैदा हो सकता है। 3. स्थानीय लोगों की इच्छा स्यूटा के अधिकांश निवासी खुद को स्पेनिश मानते हैं। वे समृद्ध देश स्पेन के साथ ही रहना चाहते हैं।

वर्ल्ड अपडेट्स:पाकिस्तान की कोयला खदान में मीथेन गैस विस्फोट: बलूचिस्तान में 34 खनिकों की मौत

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में एक कोयला खदान में मीथेन गैस विस्फोट होने से 34 खनिकों की मौत हो गई। हादसा क्वेटा के बाहरी इलाके में स्थित खदान में गुरुवार को हुआ। रातभर चले बचाव अभियान के बाद सभी शव बरामद कर लिए गए हैं। प्रांतीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (PDMA) के अनुसार, शुरुआती जानकारी में खदान के भीतर 42 लोगों के मौजूद होने की आशंका थी। बचाव दल ने सभी मृतकों के शव निकाल लिए हैं। बलूचिस्तान के खान एवं खनिज मंत्री शोएब नोशेरवानी ने हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए प्रत्येक मृतक के परिवार को 5 लाख पाकिस्तानी रुपये मुआवजा देने की घोषणा की। बलूचिस्तान में कोयला खदानों में होने वाले हादसे आम हैं। कई खदानों में पर्याप्त वेंटिलेशन, मीथेन गैस की निगरानी प्रणाली और अन्य बुनियादी सुरक्षा इंतजामों का अभाव रहता है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… भारत भूटान को ₹4,000 करोड़ की रियायती ऋण सुविधा देगा
भारत और भूटान ने गुरुवार को पांचवीं भारत-भूटान विकास सहयोग वार्ता में द्विपक्षीय विकास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान भारत ने भूटान को 4,000 करोड़ रुपये की रियायती ऋण (Line of Credit) सुविधा देने पर सहमति जताई। दोनों देशों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में नई साझेदारी और ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनाई। बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री और भूटान के विदेश सचिव दाशो पेमा लेक्टुप दोर्जी ने की। वार्ता में भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के तहत भारत समर्थित विभिन्न विकास परियोजनाओं की प्रगति और क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। भारत ने भूटान के विकास कार्यों के लिए 4,000 करोड़ रुपये की रियायती ऋण सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा की। इसके साथ ही दोनों देशों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। भारत ने भूटान की ग्रीन मोबिलिटी पहल के तहत 45 इलेक्ट्रिक वाहन भी भूटान की शाही सरकार को सौंपे। बैठक के दौरान दोनों विदेश सचिवों ने भारत की सहायता से विकसित थिम्फू इकोलॉजिकल पार्क और ओलाखा पार्क का वर्चुअल उद्घाटन किया।

वर्ल्ड अपडेट्स:पाकिस्तान की कोयला खदान में मीथेन गैस विस्फोट: बलूचिस्तान में 34 खनिकों की मौत

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में एक कोयला खदान में मीथेन गैस विस्फोट होने से 34 खनिकों की मौत हो गई। हादसा क्वेटा के बाहरी इलाके में स्थित खदान में गुरुवार को हुआ। रातभर चले बचाव अभियान के बाद सभी शव बरामद कर लिए गए हैं। प्रांतीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (PDMA) के अनुसार, शुरुआती जानकारी में खदान के भीतर 42 लोगों के मौजूद होने की आशंका थी। बचाव दल ने सभी मृतकों के शव निकाल लिए हैं। बलूचिस्तान के खान एवं खनिज मंत्री शोएब नोशेरवानी ने हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए प्रत्येक मृतक के परिवार को 5 लाख पाकिस्तानी रुपये मुआवजा देने की घोषणा की। बलूचिस्तान में कोयला खदानों में होने वाले हादसे आम हैं। कई खदानों में पर्याप्त वेंटिलेशन, मीथेन गैस की निगरानी प्रणाली और अन्य बुनियादी सुरक्षा इंतजामों का अभाव रहता है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… भारत भूटान को ₹4,000 करोड़ की रियायती ऋण सुविधा देगा
भारत और भूटान ने गुरुवार को पांचवीं भारत-भूटान विकास सहयोग वार्ता में द्विपक्षीय विकास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान भारत ने भूटान को 4,000 करोड़ रुपये की रियायती ऋण (Line of Credit) सुविधा देने पर सहमति जताई। दोनों देशों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में नई साझेदारी और ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनाई। बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री और भूटान के विदेश सचिव दाशो पेमा लेक्टुप दोर्जी ने की। वार्ता में भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के तहत भारत समर्थित विभिन्न विकास परियोजनाओं की प्रगति और क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। भारत ने भूटान के विकास कार्यों के लिए 4,000 करोड़ रुपये की रियायती ऋण सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा की। इसके साथ ही दोनों देशों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। भारत ने भूटान की ग्रीन मोबिलिटी पहल के तहत 45 इलेक्ट्रिक वाहन भी भूटान की शाही सरकार को सौंपे। बैठक के दौरान दोनों विदेश सचिवों ने भारत की सहायता से विकसित थिम्फू इकोलॉजिकल पार्क और ओलाखा पार्क का वर्चुअल उद्घाटन किया।

मलेशिया में पंजाबी लड़की पाकिस्तानी युवक साथ पकड़ी, थप्पड़ जड़े-VIDEO:मोगा के युवकों ने घेरा, रोड पर जोर-जोर से रोने लगी, बोली-मेरे परिवार को सब पता

मलेशिया के एक हाईवे पर पंजाबी युवती को बीच सड़क थप्पड़ मारे गए। दावा है कि मोगा की रहने वाली युवती को कुछ पंजाबी युवकों ने पाकिस्तानी युवक के साथ पकड़ा। इसके बाद बीच सड़क पर युवती से बहस हुई, उसे थप्पड़ मारे गए और पाकिस्तानी युवक के साथ भी धक्का-मुक्की की गई। पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया गया, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है। 30 जुलाई को शेयर किए वीडियो में युवकों ने खुद को मोगा का रहने वाला बताते हुए दावा किया कि युवती पाकिस्तान के युवक के साथ मलेशिया में रह रही है। उन्होंने इसे पंजाब की बदनामी बताते हुए युवती को डिपोर्ट कराने की मांग की। पंजाब की लड़कियां जब ऐसा करती हैं तो हमारी बेइज्जती होती है। वहीं, वीडियो में यह भी दावा किया गया कि कुछ निहंग जत्थेबंदियां भी युवती को भारत वापस भेजने की मांग कर रही हैं। हालांकि, इन दावों और वीडियो की दैनिक भास्कर पुष्टि नहीं करता। युवती से बहस के PHOTOS… पढ़िए वीडियो में क्या दिख रहा… युवती बोली-परिवार को जानकारी, फोन नहीं लग पाया वीडियो में पाकिस्तानी युवक दावा करता है कि युवती के परिवार को उनके साथ रहने की जानकारी है और वह रोजाना उनसे बात करता है। इस पर मौजूद पंजाबी युवक उसे मौके पर ही युवती के माता-पिता से फोन मिलाने के लिए कहते हैं, लेकिन कॉल नहीं लग पाती। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बहस तेज हो जाती है। डिपोर्ट कराने की मांग, निहंग जत्थेबंदियों का भी सपोर्ट बहस के दौरान कुछ युवक किसी ‘रूबी मैम’ को फोन कर युवती को डिपोर्ट कराने की मांग करते हैं। वीडियो में वे यह भी दावा करते हैं कि कई निहंग जत्थेबंदियां भी युवती को भारत वापस भेजने की मांग कर रही हैं। इसी दौरान कुछ युवक पाकिस्तानियों के साथ युवती के रहने पर आपत्ति जताते हुए अपनी नाराजगी भी व्यक्त करते हैं। बहस के बाद धक्का-मुक्की वीडियो में आगे बहस बढ़ने पर पंजाबी युवक युवती से पाकिस्तानी युवक का साथ छोड़ने के लिए कहते हैं। इसी दौरान पाकिस्तानी युवक के साथ धक्का-मुक्की होती है। युवती बीच में आकर उसे बचाने की कोशिश करती दिखाई देती है। पैसों के विवाद का भी हुआ जिक्र बातचीत के दौरान कुछ युवक पाकिस्तानी युवक से कहते हैं कि उसका ‘हैप्पी’ नाम के व्यक्ति के साथ पैसों का विवाद है और उसे पहले वही मामला सुलझाना चाहिए। इस दौरान ‘रूबीना’ नाम की एक युवती का भी जिक्र होता है, जिसे वीडियो कॉल कर पूरी घटना बताने का दावा किया जाता है। युवती परिवार से बात नहीं करवा सकी वीडियो के अंत में युवती से उसके घर का पता और परिवार से बात कराने के लिए कहा जाता है। युवती कहती है कि उसके परिजनों को सब पता है, लेकिन वह मौके पर अपने माता-पिता से फोन पर बात नहीं करवा पाती।

इजराइल गाजा से पीछे हटेगा:हमास ने हथियार छोड़ने पर दी सहमती; ट्रम्प बोले- ये ऐतिहासिक समझौता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को बताया कि गाजा में हमास और इजराइल के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है। ट्रम्प के मुताबिक, हमास और दूसरे सभी हथियारबंद संगठनों ने हथियार छोड़ने पर सहमति जताई है। इसके बाद इजराइली सेना भी चरणबद्ध तरीके से गाजा से पीछे हटेगी। हालांकि, अब तक न तो इजराइल और न ही हमास ने आधिकारिक तौर पर इस समझौते को मंजूरी दी है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि यह उनके 20-पॉइंट गाजा प्लान का सबसे अहम हिस्सा है और गाजा में स्थायी शांति व सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि उनकी टीम की कई महीनों की कोशिशों के बाद यह समझौता हो सका। फिलिस्तीन में नई तकनीकी सरकार बनेगी गाजा का प्रशासन नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (NCAG) नाम की नई संस्था को सौंपा जाएगा। यह संस्था हमास और फिलिस्तीनी अथॉरिटी से अलग होगी। इसका काम गाजा में नागरिक सेवाएं, प्रशासन और कानून-व्यवस्था संभालना होगा। इस योजना का मकसद गाजा में एक ही सरकार, कानून और सुरक्षा व्यवस्था लागू करना है। ट्रम्प के मुताबिक समझौता कई चरणों में लागू होगा। जैसे-जैसे हमास अपने हथियार छोड़ेगा, वैसे-वैसे इजराइली सेना गाजा से हटेगी। इसके बाद एक इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स और नई फिलिस्तीनी पुलिस गाजा की सुरक्षा संभालेंगे। योजना के मुताबिक गाजा का प्रशासन संभालने वाली नई तकनीकी फिलिस्तीनी सरकार ट्रम्प के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के साथ मिलकर काम करेगी। ट्रम्प का कहना है कि इससे गाजा फिर कभी इजराइल पर हमलों का अड्डा नहीं बन पाएगा। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इसे पूरी तरह लागू करना अभी आसान नहीं होगा। हमास और दूसरे संगठनों के हथियार छोड़ने, इजराइली सेना की वापसी और नई व्यवस्था लागू होने में कई महीने लग सकते हैं। बोर्ड ऑफ पीस क्या है? ट्रम्प ने पहली बार पिछले साल सितंबर 2025 में गाजा युद्ध खत्म करने की योजना पेश करते हुए इस बोर्ड का प्रस्ताव रखा था। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका ने करीब 60 देशों को इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा है। पिछले हफ्ते दुनिया के नेताओं को भेजे गए न्योते में बताया गया कि इस बोर्ड की भूमिका सिर्फ गाजा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर संघर्षों को सुलझाने में भी काम करेगा। भेजे गए एक मसौदा (चार्टर) में कहा है कि जो देश तीन साल से ज्यादा समय तक इस बोर्ड का सदस्य बनना चाहते हैं, उन्हें 1 अरब डॉलर का योगदान देना होगा। कैसे होगा हमास का निरस्त्रीकरण? योजना के तहत पहले हमास की सिविल पुलिस अपने हथियार नई फिलिस्तीनी पुलिस को सौंपेगी। इसके बाद भारी हथियार सुरक्षित जगहों पर रखे जाएंगे। हथियार बनाने वाली फैक्ट्रियां और सुरंगों को नष्ट किया जाएगा। छोटे हथियार भी फिलिस्तीनी कानून के तहत जमा कराए जाएंगे। गाजा में सक्रिय दूसरे हथियारबंद गुटों और युद्ध के दौरान बने एंटी-हमास मिलिशिया को भी हथियार छोड़ने होंगे। अमेरिकी और Board of Peace अधिकारियों के मुताबिक पूरी प्रक्रिया करीब 200 से 350 दिन तक चल सकती है। हर चरण पूरा होने के बाद स्वतंत्र निगरानी एजेंसियां इसकी पुष्टि करेंगी। तभी अगला चरण शुरू होगा। इजराइल कब हटेगा? समझौते के मुताबिक इजराइल की सेना उसी अनुपात में पीछे हटेगी, जिस अनुपात में हमास हथियार छोड़ेगा। साथ ही इजराइल को गाजा में सैन्य अभियान और हवाई हमले रोकने होंगे। हालांकि, अगर कोई तत्काल सुरक्षा खतरा हुआ तो कार्रवाई की गुंजाइश रहेगी। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि बातचीत के हर चरण में इजराइल को शामिल रखा गया और उससे वही करने को कहा गया है, जिस पर वह पहले ही ट्रम्प के 20-पॉइंट प्लान के तहत सहमत हो चुका है। हमास ने पूरी तरह हामी नहीं भरी ट्रम्प के दावे के बावजूद हमास की ओर से अलग संकेत मिले हैं। हमास के वरिष्ठ नेता गाजी हमद ने अल जजीरा से कहा कि बातचीत सकारात्मक रही है, लेकिन जब तक इजराइली सेना पूरी तरह गाजा से नहीं हटती, तब तक संगठन हथियार छोड़ने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाएगा। हमास का कहना है कि निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया नई फिलिस्तीनी प्रशासनिक व्यवस्था के तहत होगी और उसमें इजराइल की कोई भूमिका नहीं होगी। यह रुख ट्रम्प के बताए गए चरणबद्ध मॉडल से अलग नजर आता है। मध्यस्थ देशों की बड़ी भूमिका अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक मिस्र, कतर और तुर्किये ने कई महीनों तक बातचीत कराई। मिस्र की खुफिया एजेंसी के प्रमुख हसन रशीद ने मध्यस्थता में अहम भूमिका निभाई। अधिकारियों का दावा है कि ईरान ने हमास को यह प्रस्ताव ठुकराने की सलाह दी थी, लेकिन आखिरकार संगठन बातचीत जारी रखने पर राजी हुआ।

ईरान पर हमले रोकने वाला प्रस्ताव अमेरिकी सीनेट में फेल:49-50 वोट से खारिज, ट्रम्प की पार्टी के एक सांसद ने वोटिंग नहीं की

अमेरिकी सीनेट में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई सीमित करने वाला प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। इसके लिए गुरुवार को वोटिंग हुई, जिसमें यह 49-50 के अंतर से खारिज हो गया। पेन्सिलवेनिया से रिपब्लिकन सीनेटर डेव मैककॉर्मिक वोटिंग में शामिल नहीं हुए। अभी यह विधेयक सीनेट की विदेश मामलों से जुड़ी समिति में अटका हुआ है। प्रस्ताव लाने वाले सांसद चाहते थे कि इसे पूरे सीनेट में चर्चा और वोटिंग के लिए पेश किया जाए। अब इसे पूरे सीनेट में लाने के लिए सांसदों को दोबारा कोशिश करनी होगी। अगर यह प्रस्ताव आगे बढ़ जाता, तो ईरान के खिलाफ हमले शुरू करने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए संसद की मंजूरी लेना जरूरी हो जाता। यानी राष्ट्रपति अकेले ऐसा फैसला नहीं ले सकते थे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हालिया ईरान हमलों के बाद विपक्षी सांसद लगातार मांग कर रहे हैं कि ऐसे किसी भी सैन्य अभियान पर अंतिम फैसला संसद की मंजूरी से ही हो। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. जंग में पहली बार मिस्र पर हमला: मिस्र के बंदरगाह पर ड्रोन हमले में दो जहाजों में आग लगी। ईरान को इस हमले का जिम्मेदार माना जा रहा है। 2. अमेरिका का 10 ईरानी शहरों पर हमला: अमेरिकी सेना ने ईरान पर बड़े हवाई हमले किए। बंदर अब्बास, किश और क़ेश्म द्वीप में धमाकों की खबर है। 3. ईरान का जवाबी हमला: रिवोल्यूशनरी फोर्स ने कहा कि अमेरिकी हमले के बाद उन्होंने कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। 4. कुवैत में चीनी कंपनी की बिल्डिंग पर हमला: ईरानी हमले में उत्तरी कुवैत में एक चीनी कंपनी की इमारत पर हमला हुआ, एक कर्मचारी की मौत। 5. रेड सी की सुरक्षा के लिए गठबंधन बना रहा सऊदी: रेड सी (लाल सागर) में जहाजों की सुरक्षा के लिए सऊदी एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने जा रहा है। अब तक 14 देशों ने इससे जुड़ने में इच्छा जताई है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

कनाडा में 500 पंजाबी स्टूडेंट्स पर डिपोर्टेशन का खतरा:आंधी-बारिश में सड़कों पर डटे; लड़कियां डिप्रेशन में, बोलीं- पढ़ाई में ₹20 लाख खर्च

कनाडा में पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) के आवेदन खारिज होने के बाद करीब 500 पंजाबी छात्रों पर डिपोर्टेशन का खतरा मंडरा रहा है। इसके विरोध में करीब 1,000 भारतीय छात्र पिछले तीन हफ्तों से प्रदर्शन कर रहे हैं। बारिश, तेज धूप और खराब मौसम के बावजूद छात्र अल्बर्टा के कैलगरी में सड़कों पर डटे हुए हैं। कनाडाई इमिग्रेशन अधिकारियों से जवाब मांगने के लिए कुछ छात्रों ने 29 जुलाई से भूख हड़ताल भी शुरू कर दी है। छात्रों का कहना है कि जिन नियमों और भरोसे के आधार पर उन्होंने कॉलेज में दाखिला लिया, लाखों रुपए खर्च कर पढ़ाई पूरी की, अब उसी पढ़ाई को नॉन-क्रेडिटेबल बताकर वर्क परमिट से इनकार किया जा रहा है। इससे कई लड़कियां डिप्रेशन में हैं, सिर पर परिवार का कर्ज है। उन्होंने कनाडा में पढ़ाई की है, इसलिए उन्हें वहां काम करने का मौका मिलना चाहिए। वे चाहते हैं कि कनाडाई अधिकारी उनके मामलों की दोबारा समीक्षा करें। इधर, कनाडा सरकार और अल्बर्टा की प्रीमियर डेनियल स्मिथ ने कहा कि वह पोर्टेज कॉलेज को सीधे तौर पर फर्जी डिग्री देने वाला संस्थान नहीं कहेंगी, लेकिन उनका मानना है कि संस्थान ने स्थायी निवास (PR) को लेकर बढ़ा-चढ़ाकर जानकारी दी हो सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन अंतरराष्ट्रीय छात्रों का वीजा खत्म हो जाएगा और जिनके पास स्थायी निवास (PR) नहीं होगा, उन्हें अपने देश वापस लौटना होगा। छात्र प्रदर्शन क्यों कर रहे, 4 पॉइंट में जानिए… गुरुद्वारा कमेटी आई आगे, कहा- लंगर की फिक्र न करें, हिम्मत रखें
कैलगरी के लोकल गुरुद्वारा साहिब ने छात्रों के लिए दरवाजे खोले हैं। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह समय बहुत कठिन है, लेकिन कोई भी बच्चा पैनिक होकर गलत कदम न उठाए। परिवार से कोई बात न छुपाएं। गुरु घर के दरवाजे सबके लिए खुले हैं। किसी को राशन, लंगर या रहने की दिक्कत हो तो निसंकोच आएं, पूरी मदद की जाएगी। लीगल एक्सपर्ट्स बोले- री-अप्लाई न करें, कोर्ट जाएं
बैठक में पहुंचे कानूनी सलाहकार रमन चहल और हरवीर सिद्धू ने छात्रों को कानूनी रास्ते समझाए। वकीलों ने बताया कि इमिग्रेशन विभाग को तुरंत वेब-फॉर्म के जरिए री-कंसीडरेशन की रिक्वेस्ट भेजी जाए। CS इमिग्रेशन ने ऐलान किया है कि वे सभी छात्रों के लिए यह काम मुफ्त करेंगे। रिफ्यूजल मिलने के 15 दिनों के अंदर छात्रों को फेडरल कोर्ट में मामले को चुनौती देनी होगी। एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी कि छात्र दोबारा वर्क परमिट के लिए री-अप्लाई न करें। अगर फाइल दोबारा रिजेक्ट हुई, तो तुरंत देश छोड़ने का नोटिस आ सकता है। 90 दिनों में नए कॉलेज में एडमिशन से बचा सकते स्टेटस
कानूनी सलाहकार रमन चहल और हरवीर सिद्धू ने कहा कि छात्रों को सलाह दी गई है कि कानूनी लड़ाई के साथ-साथ 90 दिनों के भीतर किसी मान्यता प्राप्त पब्लिक कॉलेज में नया कोर्स लेकर अपना स्टूडेंट स्टेटस रीस्टोर करें, ताकि वे कनाडा में लीगल रह सकें। **************** ये खबर भी पढ़ें: कनाडा में 9 हजार पंजाबियों पर डिपोर्टेशन की तलवार लटकी: नए इमिग्रेशन कानून से शरणार्थी की मान्यता खत्म, 30 हजार स्टूडेंट्स को मिला नोटिस कनाडा में नया इमिग्रेशन बिल पास होने के बाद 9 हजार पंजाबियों पर डिपोर्टेशन की तलवार लटक गई है। इमिग्रेशन डिपार्टमेंट ने C-12 बिल पास होने के बाद 30 हजार शरणार्थियों को नोटिस जारी किए हैं। नए बिल में शरणार्थियों की मान्यता खत्म कर दी गई है। (पढ़ें पूरी खबर)

भारत सीमा के पास चीन की सैन्य गतिविधि तेज:LAC से सटे दो एयरबेस पर 12 J-20 स्टील्थ फाइटर तैनात होने का दावा

व्यावसायिक सैटेलाइट तस्वीरों में दावा किया गया है कि चीन ने भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के निकट स्थित दो एयरबेस पर अपने सबसे आधुनिक J-20 स्टील्थ लड़ाकू विमान तैनात किए हैं। तस्वीरों के अनुसार, शिनजियांग के होतान और तिब्बत के डामशुंग एयरबेस पर कुल 12 J-20 विमान मौजूद हैं। हाल के वर्षों में LAC के पास इस श्रेणी के विमानों की यह सबसे बड़ी तैनातियों में से एक मानी जा रही है। सैटेलाइट तस्वीरों में क्या दिखा रिपोर्ट के अनुसार, व्यावसायिक सैटेलाइट कंपनी Vantor की तस्वीरों में 9 जुलाई को शिनजियांग के होतान एयरबेस पर आठ J-20 ‘माइटी ड्रैगन’ स्टील्थ फाइटर विमान दिखाई दिए। वहीं, 25 जून की तस्वीरों में तिब्बत के डामशुंग एयरबेस पर चार J-20 विमान सुरक्षात्मक शेल्टर के नीचे खड़े नजर आए। भारत की सीमा के कितने करीब हैं एयरबेस होतान एयरबेस भारतीय वायुसेना के दौलत बेग ओल्डी एयरबेस से करीब 245 किमी और लेह से लगभग 389 किमी दूर है। यह चीन के शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र में स्थित पीएलए एयर फोर्स (PLAAF) का प्रमुख फॉरवर्ड एयरबेस है। यह नागरिक और सैन्य, दोनों उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल होता है और भारत-चीन सीमा के निकट चीन का महत्वपूर्ण फॉरवर्ड ऑपरेशनल बेस माना जाता है। इस बेस पर करीब 3,700 मीटर लंबा विस्तारित रनवे है, जिससे बड़े और भारी सैन्य विमान भी आसानी से उड़ान भर सकते हैं। यहां मजबूत एयरक्राफ्ट शेल्टर, नए एप्रन और आधुनिक ऑपरेशन सपोर्ट सुविधाएं विकसित की गई हैं। इस बेस पर J-20 पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान, KJ-500 एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEWC) विमान, इंटरसेप्टर फाइटर जेट और CH-4 जैसे निगरानी और स्ट्राइक ड्रोन (UAV) तैनात रहते हैं। क्षेत्रीय सैन्य अभ्यास और सीमा पर तनाव के दौरान यहां H-6 रणनीतिक बमवर्षक विमानों की भी तैनाती की जाती है। डामशुंग एयरबेस चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के ल्हासा प्रीफेक्चर में स्थित एक उच्च ऊंचाई वाला सैन्य एयरबेस है। यह अरुणाचल प्रदेश के तवांग से करीब 344 किमी उत्तर-पश्चिम में स्थित है और LAC के पूर्वी सेक्टर पर चीन की सैन्य रणनीति का अहम केंद्र माना जाता है। तिब्बती पठार की ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यह पीएलए एयर फोर्स (PLAAF) के लिए महत्वपूर्ण फॉरवर्ड स्टेजिंग बेस है। यहां से उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लड़ाकू विमानों की तैनाती, प्रशिक्षण और ऑपरेशन संचालित किए जाते हैं। एयरक्रू को कठिन भौगोलिक और मौसम संबंधी परिस्थितियों में उड़ान संचालन का अभ्यास कराया जाता है। एयरबेस में एक प्रमुख रनवे है, जहां से लड़ाकू और सैन्य विमान नियमित रूप से ऑपरेट कर सकते हैं। डामशुंग एयरबेस चीन की पश्चिमी थिएटर कमांड के लिए पूर्वी LAC पर वायु शक्ति बढ़ाने का प्रमुख केंद्र है। यहां से अरुणाचल प्रदेश की दिशा में निगरानी, त्वरित सैन्य प्रतिक्रिया और उच्च ऊंचाई वाले अभियानों का संचालन आसान हो जाता है। तैनाती क्यों मानी जा रही है अहम रिपोर्ट में रक्षा सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि ऊंचाई वाले एयरबेस पर J-20 की लगातार मौजूदगी इस बात का संकेत है कि चीन अब ऐसी तैनाती को नियमित सैन्य रणनीति का हिस्सा बना रहा है, न कि किसी अस्थायी सैन्य अभ्यास का। J-20 चीन का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है, जिसे रडार से बचने और आधुनिक हवाई अभियानों के लिए विकसित किया गया है। इसे चीनी वायुसेना के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में गिना जाता है। भारत-चीन सीमा पर लगातार सैन्य गतिविधियां रिपोर्ट के मुताबिक, यह तैनाती ऐसे समय हुई है जब भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी विवादित सीमा पर सैन्य तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद दोनों देशों ने कई दौर की सैन्य और राजनयिक वार्ता की है तथा कुछ क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी भी हुई है। इसके बावजूद दोनों पक्ष LAC पर बड़ी संख्या में सैनिकों, बख्तरबंद वाहनों और आधुनिक वायु संसाधनों की तैनाती बनाए हुए हैं। भारतीय वायुसेना के सामने चुनौतियां रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय वायुसेना फिलहाल लड़ाकू विमानों की संख्या में कमी की चुनौती का सामना कर रही है। स्वदेशी LCA तेजस Mk1A कार्यक्रम में देरी हुई है, जबकि 114 बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमानों की प्रस्तावित खरीद प्रक्रिया अभी जारी है।