Banyan Tree Benefits: शीघ्रपतन और वीर्य के पतलेपन से हैं परेशान? आयुर्वेद में छिपा है बरगद के फल और दूध का यह पारंपरिक नुस्खा

The image shows a banyan tree and a glass full of milk; the caption reads:

Banyan Tree Sex Health Benefits: आयुर्वेद में बरगद (वट वृक्ष) के फल और दूध को पुरुषों के यौन स्वास्थ्य जैसे शीघ्रपतन और शुक्राणुओं की कमी को दूर करने में बेहद गुणकारी माना गया है। जानिए इसके इस्तेमाल का सही तरीका।

 

बरगद का महत्व:

भारतीय संस्कृति में बरगद (Banyan Tree या वट वृक्ष) को न केवल एक पवित्र और पूजनीय पेड़ माना गया है, बल्कि आयुर्वेद में इसे औषधीय गुणों का खजाना भी कहा गया है। हिंदू धर्म में ब्रह्मा के समान पूजे जाने वाले इस विशालकाय वृक्ष के पत्ते, छाल, फल और इससे निकलने वाले औषधीय दूध (लेटेक्स) का इस्तेमाल सदियों से कई तरह की शारीरिक व्याधियों को दूर करने के लिए किया जाता रहा है।

 

विशेष रूप से पुरुषों के यौन स्वास्थ्य (Sexual Health) को बेहतर बनाने, वीर्य के पतलेपन को दूर करने और शीघ्रपतन (Premature Ejaculation) जैसी समस्याओं में बरगद के नुस्खे प्राचीन ग्रंथों में बेहद असरदार बताए गए हैं। आइए जानते हैं बरगद के पेड़ से जुड़े इन पारंपरिक नुस्खों और उनके फायदों के बारे में।

 

पुरुषों के लिए क्यों खास है बरगद? (यौन संबंधी फायदे)

आयुर्वेद के अनुसार, बरगद में प्राकृतिक रूप से 'कामशक्तिवर्धक' (Aphrodisiac) और 'शुक्रवर्धक' (Spermatogenic) गुण पाए जाते हैं। इसके नियमित और सही इस्तेमाल से पुरुषों को निम्नलिखित लाभ मिल सकते हैं:

 

शीघ्रपतन और कमजोरी में राहत: यह शरीर की अंदरूनी कमजोरी को दूर कर स्टैमिना बढ़ाने में मददगार माना जाता है।

 

वीर्य के विकार दूर करना: वीर्य का पतलापन और प्रमेह (Involuntary Semination) जैसी समस्याओं को ठीक करने में इसके तत्वों को गुणकारी माना गया है।

 

शुक्राणुओं (Sperm Count) में वृद्धि: यह शुक्राणुओं की संख्या और उनकी गुणवत्ता में सुधार करने में सहायक है।

 

पहला नुस्खा: बरगद के फल और मिश्री का पाउडर

प्राचीन आयुर्वेदिक पद्धतियों में बरगद के फलों का एक विशेष नुस्खा बताया गया है, जिसे तैयार करने की विधि काफी अनूठी है:

 

कैसे तैयार करें यह मिश्रण?

फल इकट्ठा करें: बरगद के पेड़ पर लगने वाले छोटे, गोलाकार और लाल रंग के पके हुए फलों को सीधे हाथों से तोड़ें। ध्यान रखें कि जमीन पर गिरे हुए फलों का इस्तेमाल नहीं करना है।

छाया में सुखाएं: इन फलों को साफ कपड़े पर फैलाकर सीधे धूप के बजाय छांव में अच्छी तरह सुखा लें।

पत्थर पर पीसें: जब फल पूरी तरह सूख जाएं, तो इन्हें पीसकर पाउडर बना लें। ध्यान रहे कि पीसने के दौरान लोहे के बर्तनों या मिक्सर ग्राइंडर का इस्तेमाल न करें; इसे पत्थर के सिल-बट्टे या खरल में पीसना सबसे उत्तम माना जाता है।

मिश्री मिलाएं: इस पाउडर के वजन के बराबर मात्रा में पत्थर पर पिसी हुई धागे वाली मिश्री (माखन मिश्री) मिला लें।

भंडारण: इस तैयार मिश्रण को कांच या मिट्टी के साफ बर्तन में सुरक्षित रखें।

सेवन की विधि: इस पाउडर की आधा-आधा चम्मच मात्रा सुबह और शाम को हल्के गर्म (गुनगुने) दूध के साथ लेने की सलाह दी जाती है। यह सामान्य स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है।

 

दूसरा नुस्खा: बरगद के पत्तों/डंठल का दूध और बताशा

बरगद के पत्तों, कोमल कलियों या डंठल को तोड़ने पर जो गाढ़ा, सफेद दूध जैसा रस (Latex) निकलता है, उसका भी एक पारंपरिक प्रयोग बहुत प्रचलित है।

 

सेवन का तरीका: सूर्यास्त से ठीक पहले बरगद के पेड़ से ताजी कली या पत्ता तोड़ें। उससे निकलने वाले दूध की 5 बूंदें एक मीठे बताशे पर टपकाकर उसका सेवन करें।

 

20 दिनों का विशेष चक्र:

आयुर्वेद के जानकारों के अनुसार, पहले दिन 5 बूंदों से शुरुआत करें। इसके बाद हर दिन एक-एक बूंद बढ़ाते जाएं (जैसे दूसरे दिन 6 बूंद, तीसरे दिन 7 बूंद) और इसे 10वें दिन तक 14-15 बूंदों तक ले जाएं। 10 दिन पूरे होने के बाद, अगले 10 दिनों तक रोजाना एक-एक बूंद कम करते जाएं (जैसे 11वें दिन 13 बूंद, फिर 12 बूंद)। इस तरह 20 दिनों का यह चक्र वीर्य के पतलेपन और प्रमेह की समस्या को जड़ से खत्म करने में मदद करता है।

 

महत्वपूर्ण चिकित्सकीय परामर्श (Health Disclaimer):

यद्यपि आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में बरगद के इन नुस्खों को बेहद सुरक्षित और प्रभावी बताया गया है, लेकिन हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति (वात, पित्त, कफ) अलग होती है। इसलिए किसी भी नुस्खे को शुरू करने से पहले एक योग्य और प्रमाणित आयुर्वेदिक चिकित्सक (BAMS Doctor) से परामर्श जरूर लें। यदि आपको कोई अन्य गंभीर बीमारी या एलर्जी है, तो बिना डॉक्टरी सलाह के इसका सेवन न करें।

World Emoji Day 2026: विश्व इमोजी दिवस: कब और क्यों मनाया जाता है? जानें इतिहास और रोचक तथ्य

The image depicts a scene reflecting deep love, affection, happiness, and a sense of belonging on World Emoji Day

World Emoji Day: हर साल 17 जुलाई को विश्व इमोजी दिवस मनाया जाता है। आज के डिजिटल दौर में इमोजी/ Emoji हमारी रोजमर्रा की बातचीत का अहम हिस्सा बन चुके हैं। चाहे व्हाट्सएप पर हंसी साझा करनी हो, सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं व्यक्त करनी हों या किसी संदेश को अधिक प्रभावी बनाना हो, इमोजी शब्दों से कहीं अधिक तेजी से भावनाओं को व्यक्त कर देते हैं। इन्हीं छोटे-छोटे प्रतीकों के महत्व को पहचानने के लिए हर वर्ष 17 जुलाई को विश्व इमोजी दिवस मनाया जाता है। यह दिन लोगों को इमोजी के इतिहास, विकास और डिजिटल संचार में उनकी भूमिका के बारे में जागरूक करने का अवसर देता है।

  1. विश्व इमोजी दिवस कब मनाया जाता है?
  2. विश्व इमोजी दिवस क्यों मनाया जाता है?
  3. इमोजी का इतिहास
  4. विश्व इमोजी दिवस की शुरुआत कैसे हुई?
  5. इमोजी से जुड़े रोचक तथ्य
  6. डिजिटल दुनिया में इमोजी का महत्व

 

जानिए इस दिन का इतिहास, महत्व, शुरुआत, इमोजी के रोचक तथ्य और डिजिटल दुनिया में इसकी भूमिका…

 

विश्व इमोजी दिवस कब मनाया जाता है?

विश्व इमोजी दिवस हर साल 17 जुलाई को मनाया जाता है। इस तारीख का चयन इसलिए किया गया क्योंकि कई डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कैलेंडर इमोजी में 17 जुलाई की तारीख दिखाई जाती थी। इसी विशेषता के कारण यह दिन विश्व इमोजी दिवस के रूप में प्रसिद्ध हुआ।

 

विश्व इमोजी दिवस क्यों मनाया जाता है?

इस दिवस को मनाने का उद्देश्य डिजिटल संचार में इमोजी के महत्व को पहचान देना। लोगों को इमोजी के इतिहास और विकास से परिचित कराना तथा तकनीक और संचार के नए तरीकों का उत्सव मनाना। इसके साथ ही रचनात्मकता और अभिव्यक्ति को बढ़ावा देना है। आज इमोजी केवल हंसी या खुशी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शिक्षा, व्यवसाय, मार्केटिंग और सोशल मीडिया में भी प्रभावी संचार का माध्यम बन चुके हैं।

 

इमोजी का इतिहास

इमोजी की शुरुआत 1999 में जापान के डिजाइनर शिगेताका कुरिता ने की थी। उन्होंने मोबाइल इंटरनेट सेवा के लिए 176 छोटे-छोटे प्रतीकों का पहला सेट तैयार किया था। बाद में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग के साथ इमोजी पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो गए। वर्ष 2010 में इमोजी को यूनिकोड (Unicode) मानक में शामिल किया गया, जिसके बाद अलग-अलग कंपनियों और प्लेटफॉर्म पर इन्हें व्यापक रूप से अपनाया जाने लगा।

 

विश्व इमोजी दिवस की शुरुआत कैसे हुई?

विश्व इमोजी दिवस की शुरुआत 2014 में जेरेमी बर्ज ने की थी। उन्होंने इमोजी संस्कृति को बढ़ावा देने और लोगों को इसके महत्व से जोड़ने के उद्देश्य से इस दिन की शुरुआत की।

 

इमोजी से जुड़े रोचक तथ्य

– वर्तमान समय में दुनिया में हजारों इमोजी उपलब्ध हैं और समय-समय पर नए इमोजी जोड़े जाते हैं। 

– लाल दिल (❤/ Red Heart) सबसे लोकप्रिय इमोजी में से एक है। 

– इमोजी के उपयोग का तरीका और पसंद अलग-अलग देशों में अलग हो सकती है। 

– लगभग सभी प्रमुख स्मार्टफोन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इमोजी का समर्थन करते हैं। 

– 'Face with Tears of Joy' लंबे समय तक दुनिया के सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले इमोजी में शामिल रहा। 

 

डिजिटल दुनिया में इमोजी का महत्व

आज इमोजी केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं। इनका उपयोग सोशल मीडिया पोस्ट को आकर्षक बनाने में, ऑनलाइन मार्केटिंग में, ग्राहकों से बेहतर संवाद स्थापित करने में, शिक्षा और डिजिटल प्रेजेंटेशन में, व्यक्तिगत बातचीत को अधिक प्रभावशाली बनाने में किया जाता है। 

 

संक्षेप में कहें तो विश्व इमोजी दिवस हमें याद दिलाता है कि छोटे-से इमोजी भी संचार को अधिक सहज, भावनात्मक और प्रभावशाली बना सकते हैं। डिजिटल युग में इमोजी भाषा की सीमाओं को कम करते हुए लोगों को जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं। इसी यही कारण है कि हर वर्ष 17 जुलाई को दुनिया भर में विश्व इमोजी दिवस उत्साह के साथ मनाया जाता है।

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London Trip: सड़कें संकरी, फुटपाथ चौड़े, फिर भी जाम नहीं लगता

London Trip

London Traffic Rules: बात चुभने वाली है, लेकिन है सोलह आने सच। हमने पाश्चात्य तौर-तरीके (खान-पान, कपड़े, फैशन, भाषा) तो बखूबी अपना लिए, लेकिन वहां के नियम-कायदे, शिष्टाचार को छू भी नहीं पाए। हम अब बात करते हैं परिवहन मसले की। आप हैरत करेंगे कि वहां आधी रात को भी कोई ट्रेफिक सिग्नल का उल्लंघन नहीं करता, जबकि हम तो दिन में चौराहे पर जवान के तैनात रहते फर्राटे से गाड़ी भगा लेते हैं।

 

मेरा यह मानना है कि हम कभी भी लंदन जैसे शहर या यूरोप, अमेरिका, चीन या किसी भी विकसित देश के जैसे यातायात नियमों का पालन नहीं कर पाएंगे। ये आता है संस्कार, शिक्षा, मौलिक स्वभाव और कानून के डर से। जिस देश में मंत्री-नेता अपने पट्‌ठों को छुड़ाने के लिए मामूली जवान को धमका देते हैं, जहां अधिकारी अपने ओहदे का गाड़ी पर उल्लेख कर बिना रोक-टोक निकल जाता है, जहां आम जनता भी मौका मिलते ही चाहे जहां से आड़े-तिरछे तरीके से अपने वाहन निकाल लेते हैं, वहां अभी दो पीढ़ियों तक किसी चमत्कार की आशा करना बेमानी है। ALSO READ: Trip To London : लंदन में न सड़क पर धरने-प्रदर्शन, न चक्का जाम

 

आइए देखते हैं कि वहां यातायात की कैसी व्यवस्था है। वहां बीच शहर और मोटर-वे, हाई-वे को छोड़कर कहीं पर रोड डिवाइडर नहीं हैं। सड़कें उतनी चौड़ी नहीं हैं, जितनी हमारे यहां इंदौर जैसे शहर में भी रहती हैं। बीआरटीएस व एमजी रोड, सपना संगीता रोड जितनी चौड़ी सड़कें कम ही है। वहां बीच शहर में भी दो-तीन लेन सड़क ज्यादा हैं। इसी में सिटी बस, आरटीओ पंजीकृत काली टैक्सी कारें, निजी कारें, निजी टैक्सी कारें व बाइक व साइकिल चलती हैं। इसके बावजूद कभी जाम नहीं लगता, क्योंकि वहां प्रत्येक वाहन एक के पीछे एक चलता है। कोई अपनी लेन को नहीं छोड़ता। ALSO READ: Trip To London: पाउंड को रुपए में गिनेंगे तो चाय भी नहीं पी सकेंगे

 

यह तब होता है, जब आम तौर पर चौराहे पर यातायात जवान हमारे यहां जैसे नहीं होते हैं। वे इक्का-दुक्का कहीं नजर आ जाएंगे अलबत्ता, तकनीक के सहारे वे चालान जरूर बना देते हैं। लेन या सिग्नल से निकल जाने पर 100 से 160 पाउंड तक का जुर्माना है। इसे वहां के 100 से 160 रुपए मत समझिएगा। ये वहां के आय अनुपात के हिसाब से बेहद बड़ी रकम है। वहां रोजाना की औसत आय अधिकतम 200 पाउंड होती है। ऐसे में यदि आपको किसी दिन 100 से 160 पाउंड के बीच जुर्माना देना पड़ जाए तो सोचिए क्या हाल होंगे? ALSO READ: London Trip: प्रधानमंत्री से पब्लिक तक मेट्रो, सिटी बस में सफर करते हैं

 

वहां दरअसल फुटपाथ सड़क से दोगुने चौड़े होते हैं। यदि सड़क 30-40 फीट चौड़ी है तो मानकर चलिए कि दोनों तरफ मिलाकर फुटपाथ 50 से 60 फीट चौड़े होंगे। उसकी वजह यह है कि लोक परिवहन के कारण लोगों को पैदल काफी चलना होता है। वहां सड़क पर वाहनों से अधिक भीड़ फुटपाथ पर दिखती है। पैदल चलने वालों का काफी सम्मान किया जाता है और पैदल का सिग्नल न होने पर भी कोई निकल रहा है तो बस, कार सब रुक जाएंगी। इसी तरह सिग्नल पर साइकिल वालों के स्टॉप पर यदि कोई दूसरा वाहन खड़ा हो गया तो उसका जुर्माना भी 100 पाउंड होता है। अब आप ही बताइए, हम ऐसा कुछ कर सकते हैं? 

 

लंदन, समूचे ब्रिटेन व यूरोप में सड़क पर दो पहिया वाहन तो न्यूनतम ही दिखते हैं। ऑटो रिक्शा, ई-रिक्शा, नगर सेवा जैसे कोई वाहन वहां नहीं होते। निश्चित ही इसलिए वहां न तो यातायात जाम होता है, न सिग्नल उल्लंघन के मामले होते हैं। बेशक, नियम-कायदों के पालन के संस्कार व अनुशासन जीवन का अनिवार्य तत्व होना बडा कारण तो है ही।

 

सड़कों की एक खासियत यह है कि सड़क के हर क्रॉसिंग पर फुटपाथ जहां खत्म होता है, वहां हल्की-सी ढलान देकर उस पर जो पैवर्स लगाए जाते हैं, उनमें गोल-गोल घेरे उठे हुए होते हैं, जिन पर नेत्रहीन व्यक्ति अपनी छड़ी रखने से समझ जाता है कि यहां सड़क पार की जा सकती है। फिर भले ही सिग्नल न हुआ हो, वह निकल सकता है और पूरा ट्रैफिक रुका रहेगा। हम तो एंबुलेंस के दूर से सायरन देते हुए आने के बाद भी उसके आगे से कट मारकर निकलने ही जुगत करते हैं।

 

सिटी बस में सफर करने के लिए नकदी नहीं चलती, न कंडक्टर होता है। ड्राइवर कैबिन के पास पीले रंग का कार्ड रीडर लगा होता है। उससे डेबिट, क्रेडिट कार्ड, मोबाइल पैमेंट डिवाइस या आयस्टर कार्ड (एक तरह का क्रेडिट कार्ड) से भुगतान कर ही बस में बैठ सकते हैं। वहां सड़कों पर स्पीड ब्रेकर भी नहीं होते। फिर भी वाहन निर्धारित सीमित गति से चलाए जाते हैं और एक-दूसरे वाहन के बीच 5 से 10 फीट तक की दूरी बनाकर रखते हैं। गली-मोहल्ले से निकलने वाला वाहन पहले मुख्य मार्ग के वाहन को जाने देगा। इतना ही नहीं तो बस में पंक्ति बनाकर ही चढ़ते हैं व मेट्रो में भी ज्यादा भीड़ है तो जो यात्री आगे की पंक्ति में पहले से खड़े हैं, उनके बैठ जाने पर ही पीछे वाले अंदर जाएंगे। ऑटोमैटिक दरवाजे बिप-बिप की आवाज के साथ बंद होने लगते हैं तो कोई भागकर चढ़ने की कोशिश नहीं करता।

 

इतने अनुशासन के साथ पेश आने की स्थिति भारत में साठ से नब्बे के दशक तक पैदा हुई पीढ़ी तो नहीं देख पाएगी। एक और बात, सिटी बस व कार टैक्सी बड़ी तादाद में महिलाएं भी चलाते हुए दिख जाएंगी,आधी रात में भी। दूसरा, हर टैक्सी ट्राइवर चालक हो जरूरी नहीं। वहां अतिरिक्त आय के लिए नौकरीपेशा महिला-पुरुष बड़े शौक से टैक्सी कार चलाते हैं, जो उनकी खुद की रहती है। इनमें 50 वर्ष तक की महिलाएं भी मिल जाएंगी। (क्रमश:)

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

An image showing the allergic reaction in the skin caused by a mosquito bite

Mosquito Bite Scientific Reason: मच्छर का काटना केवल एक छोटी सी सुई चुभने जैसा होता है, लेकिन उसके कुछ ही सेकंड बाद होने वाली तेज खुजली और लाल निशान हमें परेशान कर देते हैं। अधिकांश मामलों में यह समस्या कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाती है, लेकिन यदि गंभीर एलर्जी, संक्रमण या बुखार जैसे लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।ALSO READ: Monsoon health tips: सावधान! बारिश में बीमारियों के खतरे से कैसे बचाएं खुद को, ये लक्षण दिखें तो ना करें नजरअंदाज

 

आइए इसके पीछे छिपे बेहद दिलचस्प वैज्ञानिक कारण और इससे राहत पाने के आसान घरेलू व डॉक्टरी उपचारों को समझते हैं।

 

मच्छर का काटना, वैज्ञानिक कारण

जब कोई मादा मच्छर (सिर्फ मादा मच्छर ही खून पीती हैं) हमारी त्वचा पर बैठती है, तो वह खून चूसने के लिए अपनी सूंड (Proboscis) को त्वचा में डालती है। इस प्रक्रिया के दौरान असली कारण शुरू होता है:

 

लार का प्रवेश (Saliva Injection): मच्छर की लार में विशेष प्रकार के प्रोटीन और थक्कारोधी (Anticoagulants) तत्व होते हैं। यह लार खून को जमने से रोकती है ताकि मच्छर बिना किसी रुकावट के आसानी से खून चूस सके। जैसे ही यह बाहरी लार हमारे शरीर में प्रवेश करती है, हमारा इम्यून सिस्टम इसे एक हमलावर मानकर तुरंत सक्रिय हो जाता है। इस लार से लड़ने के लिए हमारा शरीर 'हिस्टामाइन' नाम का एक रसायन छोड़ता है।

 

सूजन और खुजली: हिस्टामाइन के कारण प्रभावित हिस्से के आसपास की रक्त वाहिकाएं फैल जाती हैं। इससे वहां खून का प्रवाह बढ़ जाता है, जिससे त्वचा लाल हो जाती है, सूज जाती है और वहां की नसें मस्तिष्क को खुजली का संकेत भेजने लगती हैं।

 

मच्छर के काटने पर क्या करें और क्या न करें?

सबसे जरूरी नियम: मच्छर के काटने वाली जगह को कभी भी जोर से न खुजलाएं। खुजलाने से त्वचा की ऊपरी परत छिल सकती है, जिससे बैक्टीरिया का संक्रमण यानी इंफेक्शन (Infection) होने का खतरा बढ़ जाता है और निशान भी गहरा हो जाता है।ALSO READ: Health Benefits of Banana: कच्चे और पके केले में कौन कौनसे विटामिन होते हैं?

 

* खुजली और सूजन दूर करने के आसान उपचार

यदि मच्छर ने काट लिया है और तेज खुजली हो रही है, तो आप नीचे दिए गए तरीकों से तुरंत राहत पा सकते हैं:

 

1. घरेलू उपचार

* बर्फ की सिकाई: प्रभावित जगह पर बर्फ का टुकड़ा कपड़े में लपेटकर 5 से 10 मिनट रखें। ठंडा तापमान नसों को सुन्न कर देता है, जिससे हिस्टामाइन का असर कम होता है और सूजन व खुजली तुरंत शांत हो जाती है।

 

एलोवेरा जेल: एलोवेरा में प्राकृतिक एंटी-इन्फ्लेमेटरी यानी सूजन रोधी गुण होते हैं। इसे काटने वाली जगह पर लगाने से ठंडक मिलती है।

 

शहद: शहद में प्राकृतिक एंटी-सेप्टिक गुण होते हैं। इसकी एक बूंद प्रभावित जगह पर लगाने से खुजली कम होती है।

 

बेकिंग सोडा पेस्ट: एक चम्मच बेकिंग सोडा में थोड़ा सा पानी मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें। इसे 10 मिनट के लिए लगाएं और फिर धो लें। यह त्वचा के pH स्तर को संतुलित कर आराम देता है।

 

2. मेडिकल उपचार

कैलामाइन लोशन: Calamine Lotion इसे लगाने से त्वचा को ठंडक मिलती है और खुजली तुरंत बंद हो जाती है।

 

एंटीहिस्टामाइन क्रीम: यदि खुजली बहुत ज्यादा हो, तो डॉक्टर की सलाह से ओटीसी हाइड्रोकार्टिसोन (Hydrocortisone) या कोई हल्की एंटीहिस्टामाइन क्रीम  (Antihistamine Cream) लगाई जा सकती है जो हिस्टामाइन के प्रभाव को सीधे रोक देती है।

 

डॉक्टर के पास कब जाएं?

आमतौर पर मच्छर के काटने के निशान 2 से 3 दिनों में खुद ही ठीक हो जाते हैं। लेकिन यदि आपको काटने वाली जगह पर अत्यधिक दर्द, मवाद/ पस, लगातार बढ़ता लाल घेरा, या फिर बुखार, सिरदर्द और ठंड लगने जैसे लक्षण महसूस हों, तो यह डेंगू, मलेरिया या चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

 

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Chaturmas Fasting Rules: चातुर्मास में क्या खाएं और क्या नहीं, अपना लिए ये नियम तो होंगे 5 फायदे

An image providing information regarding the rules of Chaturmas 2026, as well as what to eat and what to avoid

Chaturmas Food Guide: सनातन धर्म में चातुर्मास का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। चातुर्मास यानी देवशयनी एकादशी/ आषाढ़ शुक्ल एकादशी से शुरू होकर देवप्रबोधनी एकादशी/ कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चलने वाले 4 महीने का आध्यात्मिक समय। यह आषाढ़ शुक्ल एकादशी/ देवशयनी एकादशी से लेकर कार्तिक शुक्ल एकादशी/ देवउठनी एकादशी तक के चार महीने चातुर्मास कहलाते हैं। मान्यता है कि इस अवधि में भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं और भक्त पूजा, जप, तप, दान तथा सात्विक जीवन अपनाकर पुण्य अर्जित करते हैं।ALSO READ: Chaturmas 2026: वर्ष 2026 में चातुर्मास कब से कब तक रहेगा?

 

चातुर्मास केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्षा ऋतु में पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, इसलिए इस समय सात्विक और हल्का भोजन करने की सलाह दी जाती है। चूंकि इन 4 महीनों में वर्षा ऋतु/मानसून अपने चरम पर होती है, जिससे हमारा पाचन तंत्र यानी डाइजेशन सिस्टम काफी कमजोर हो जाता है। इसीलिए सनातन धर्म में इस दौरान खान-पान के कुछ कड़े और वैज्ञानिक नियम बनाए गए हैं।

 

यहां जानें महीने के अनुसार नियम, जो आपको जानकारी देंगे कि चातुर्मास में क्या खाएं, क्या न खाएं?

 

चातुर्मास में हर महीने के हिसाब से कुछ विशेष चीजों को छोड़ने का नियम है, क्योंकि उस मौसम में उन चीजों में बैक्टीरिया या कीड़े लगने का खतरा सबसे ज्यादा होता है:

 

1. क्या बिल्कुल न खाएं?

पहला महीना श्रावण मास: हरी पत्तेदार सब्जियां, साग, पालक, आदि खाना पूरी तरह वर्जित है। बारिश के कारण इनमें कीड़े-मकोड़े और बैक्टीरिया पनपने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है।

 

दूसरा महीना भाद्रपद मास: दही और मट्ठा/ छाछ का सेवन बंद कर देना चाहिए। इस मौसम में पेट में इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है।

 

तीसरा महीना आश्विन मास: दूध का सेवन नहीं करना चाहिए या इसे बहुत कम कर देना चाहिए।

 

चौथा महीना कार्तिक मास: द्विदलन यानी दालें- जैसे चना, उड़द, मसूर, अरहर और बैंगन, मूली आदि खाने की मनाही होती है।

 

चारों महीने सामान्य परहेज: प्याज, लहसुन, तामसिक भोजन, मांस, मदिरा और बासी भोजन से पूरी तरह दूरी बनाकर रखनी चाहिए।ALSO READ: चातुर्मास 2026: सिद्धि की कामना है तो इन 4 कार्यों को न भूलें

 

2. क्या खाना सेहत के लिए अच्छा है?

हल्का और सुपाच्य भोजन: खिचड़ी, दलिया, मूंग की छिलके वाली दाल, लौकी, तोरई, कद्दू जैसी मौसमी सब्जियां अच्छी तरह धोकर और पकाकर खाई जा सकती हैं।

 

गुनगुना पानी: इस मौसम में उबला हुआ या गुनगुना पानी पीना पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है।

 

सेंधा नमक: साधारण नमक की जगह भोजन में सेंधा नमक का प्रयोग करना अधिक फायदेमंद होता है।

 

चातुर्मास के नियम अपनाने के 5 बड़े फायदे

यदि आप इन 4 महीनों में अपनी जीभ पर नियंत्रण रखकर सात्विक भोजन अपनाते हैं, तो आपको ये 5 बड़े लाभ मिलते हैं:

 

1. मजबूत पाचन तंत्र

बारिश के मौसम में हमारी जठराग्नि यानी पाचन की शक्ति मंद हो जाती है। जब आप गरिष्ठ/ भारी, मांसाहारी या पत्तेदार भोजन नहीं खाते हैं, तो आपके पेट को आराम मिलता है। इससे गैस, अपच, और एसिडिटी जैसी समस्याएं कोसों दूर रहती हैं।

 

2. इंफेक्शन और बीमारियों से बचाव

मानसून में हवा और पानी के जरिए बैक्टीरिया बहुत तेजी से फैलते हैं। हरी पत्तेदार सब्जियों और डेयरी प्रोडक्ट्स को सही समय पर डाइट से हटाने से आप फूड पॉइजनिंग, डायरिया, टायफायड और पेट के कीड़ों से सुरक्षित रहते हैं।

 

3. बॉडी डिटॉक्सिफिकेशन

चातुर्मास में केवल एक समय भोजन करने या सात्विक डाइट लेने से शरीर की सफाई होती है, यह भोजन शरीर के टॉक्सिंस अर्थात् विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। यह आपकी त्वचा पर चमक लाता है और वजन को नियंत्रित करने में मदद करता है।

 

4. मानसिक शांति और एकाग्रता 

आपने यह कहावत तो सुनी ही होगी- 'जैसा अन्न, वैसा मन'। यानी तामसिक भोजन, जैसे- लहसुन, प्याज, मांस के छोड़ने से आपके शरीर में वात, पित्त और कफ का संतुलन सुधरता है। इससे आलस्य दूर होता है, गुस्सा कम आता है और मन शांत तथा केंद्रित रहता है।

 

5. रोग प्रतिरोधक क्षमता

चातुर्मास के समय में लिया गया हल्का भोजन और गुनगुना पानी आपके मेटाबॉलिज्म को तेज करता है। इससे मौसम बदलने पर होने वाले सर्दी-खांसी, जुकाम और मौसमी बुखार से लड़ने की आपकी शारीरिक क्षमता मजबूत होती है।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Chaturmas 2026: चातुर्मास में क्या करना चाहिए? जानें पुण्य कमाने के तरीके

सावन मास पर एक भावपूर्ण और मौलिक हिंदी कविता

A beautiful photo for Shravan, the month dear to Lord Shiva


यह रही सावन मास पर एक भावपूर्ण और मौलिक हिंदी कविता:

 

सावन की सरगम

 

जब सावन की पहली बूंदें,

धरती का आंचल छू जाती हैं।

सूखी डालों पर हरियाली,

जीवन की धुन गुनगुनाती हैं।

 

काले-काले मेघ घिर आए,

रिमझिम वर्षा गीत सुनाए।

मोर पंख फैलाकर नाचे,

प्रकृति खुशियों के दीप जलाए।

 

शिवालय में गूंजे “हर-हर”,

बजे घंटियों की मधुर पुकार।

बेलपत्र, गंगाजल लेकर,

भक्त करें भोले का श्रृंगार।

 

सावन केवल ऋतु नहीं है,

श्रद्धा का यह पावन द्वार।

मन में प्रेम, हृदय में सेवा,

यही है इसका सच्चा सार।

 

झूले पड़ते पीपल डाली,

कजरी गाती हर इक नारी।

मिट्टी की सौंधी-सी खुशबू,

भर देती है दुनिया सारी।

 

हरियाली का संदेश लिए,

सावन खुशियों का उपहार।

प्रेम, दया, विश्वास जगाए,

जीवन हो उज्ज्वल हर बार।

 

आओ मिलकर प्रण यह लें हम,

पेड़ लगाएँ, प्रकृति सँवारें।

भोलेनाथ का नाम जपें हम,

प्रेम और सद्भाव निखारें।

 

सावन आया, सुख बरसाया,

मन-मंदिर में दीप जलाए।

हर घर में मंगल ही मंगल,

शिव कृपा से जीवन मुस्काए।

 

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सावन मास पर हिन्दी में बेहतरीन कविता

sawan maas par kavita

सावन के पावन महीने, शिव भक्ति और प्रकृति के अद्भुत सौंदर्य को समेटती एक विशेष कविता जो सावन के दोनों रूपों को दर्शाती है-पहला, जब बारिश की बूंदें सूखी धरती को हरा-भरा कर देती हैं और चारों तरफ लोकगीतों की गूंज होती है; और दूसरा, जब कांवड़िए और शिवभक्त महादेव की आराधना में लीन होकर पूरे माहौल को आध्यात्मिक बना देते हैं।

 

रिमझिम बरसा सावन आया

लो रिमझिम बरसा सावन आया,

धरती पर हरी चुनरिया लाया।

तपती धूप का अंत हुआ अब,

अंबर ने ठंडी बूंदों को बरसाया।

 

बागों में देखो झूले सज गए,

कजरी और मल्हार के सुर जग गए।

मेहंदी रची हथेलियों ने शर्माकर,

खुशियों के नए गीत गुनगुनाया।

 

कंठ में विष, जटा में गंगा,

भोले की भक्ति में डूबा जग सारा।

कांवड़ियों ने थामी है राहें,

गूंज उठा 'बम-बम' का जयकारा।

 

पीपल चूमे बूंदों की बौछारें,

नदियां गातीं कल-कल के तराने।

प्रकृति का यह रूप सलोना,

हर मन को शिवमय करने आया।

 

लो रिमझिम बरसा सावन आया,

भक्ति और हरियाली का उत्सव लाया।

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Shravan Essay: आस्था, प्रकृति और पवित्रता का उत्सव श्रावण मास, पढ़ें रोचक निबंध

Images and photographs related to the sacred festival of the Shravan month, featuring Lord Shiva, devotees performing worship, and the Kanwar Yatra, a procession that unites religion, nature, and human life

Shravan Festival Essay: श्रावण मास के दौरान देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। श्रद्धालु प्रातःकाल स्नान करके शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग और पुष्प अर्पित करते हैं। 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप और रुद्राभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है। इस महीने के प्रत्येक सोमवार को पड़ने वाले सावन सोमवार व्रत को अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक भगवान शिव की उपासना करने से मनोकामनाओं की पूर्ति और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

यहां श्रावण मास पर एक रोचक, सरल और ज्ञानवर्धक हिन्दी निबंध प्रस्तुत है।
 

प्रस्तावना

हिंदू कैलेंडर में 'श्रावण मास' यानी सावन को सभी महीनों में सबसे पवित्र और आनंददायक माना गया है। यह केवल एक महीना नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आत्मा का उत्सव है। ग्रीष्म ऋतु की तपती गर्मी के बाद जब सावन की फुहारें धरती पर गिरती हैं, तो न केवल प्रकृति का श्रृंगार होता है, बल्कि इंसानी मन भी भक्ति और उत्साह से सराबोर हो उठता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो सावन में वर्षा ऋतु के कारण हमारी पाचन शक्ति यानी जठराग्नि मंद हो जाती है। इसलिए आयुर्वेद और शास्त्रों में इस महीने के दौरान हल्का, सुपाच्य और सात्विक भोजन करने की सलाह दी गई है।

 

सावन का धार्मिक महत्व और शिव भक्ति

श्रावण मास पूरी तरह से देवाधिदेव महादेव भगवान शिव को समर्पित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी महीने में समुद्र मंथन हुआ था। मंथन से निकले हलाहल विष को ब्रह्मांड की रक्षा के लिए भगवान शिव ने अपने कंठ में समाहित कर लिया था, जिससे उनका नाम 'नीलकंठ' पड़ा। विष की तीव्र जलन को शांत करने के लिए सभी देवताओं ने शिव जी पर शीतल जल वर्षण किया था। यही कारण है कि सावन में शिव जी का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने की अनूठी परंपरा है।

 

प्रकृति का अनुपम श्रृंगार

सावन का महीना अध्यात्म के साथ-साथ पर्यावरण के उत्सव का भी समय है। रिमझिम बारिश के कारण सूखी धरती पर मखमली हरी घास उग आती है, पेड़ों पर नए पत्ते आ जाते हैं और नदियां-झरने कल-कल कर बहने लगते हैं।

 

कांवड़ यात्रा

सावन के दौरान देश भर में भक्ति का एक अद्भुत रंग देखने को मिलता है। लाखों 'कांवड़िए' केसरिया वस्त्र धारण कर, नंगे पैर पवित्र नदियों से जल भरकर लाते हैं और मीलों पैदल चलकर अपने स्थानीय शिवलिंगों का अभिषेक करते हैं। 'बम-बम भोले' के जयकारों से पूरा माहौल शिवमय हो जाता है।

 

सावन के सोमवार

इस महीने में आने वाले सोमवार के व्रत का विशेष महत्व है। कुमारी कन्याएं अच्छे वर के लिए और विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत रखती हैं। इस महीने में हरे रंग का विशेष महत्व है। प्रकृति की इस हरियाली से तालमेल बिठाते हुए महिलाएं हरे रंग के वस्त्र और चूड़ियां पहनती हैं। यह रंग समृद्धि, खुशहाली और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

 

सावन के लोक-रंग और परंपराएं

सावन का महीना भारतीय लोक संस्कृति को जीवंत कर देता है। गांवों से लेकर शहरों तक, बागों में पेड़ों पर झूले डाल दिए जाते हैं। मल्हार और कजरी जैसे पारंपरिक लोकगीत हवाओं में गूंजने लगते हैं।

 

रसोई के लिहाज से भी यह महीना बेहद स्वादिष्ट होता है। बारिश की फुहारों के बीच घरों में गरमा-गरम घेवर, मालपुआ, खीर और पकोड़े बनाए जाते हैं। इस महीने में सात्विक जीवनशैली का पालन किया जाता है, जिससे तन और मन दोनों शुद्ध रहते हैं।

 

सावन के प्रमुख त्योहार में हरियाली तीज, नाग पंचमी और रक्षाबंधन पर्व मनाया जाता है।

 

क्या है खास?

हरियाली तीज- महिलाएं सुहाग की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और पारंपरिक झूले झूलती हैं।

नाग पंचमी- नाग देवताओं की पूजा की जाती है, जो जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान को दर्शाता है।

रक्षाबंधन- श्रावण पूर्णिमा के दिन भाई-बहन के पवित्र प्रेम का यह त्योहार मनाया जाता है।

 

उपसंहार

श्रावण मास हमें सिखाता है कि कैसे ईश्वर की भक्ति, प्रकृति के सौंदर्य और मानवीय रिश्तों को एक सूत्र में पिरोया जाता है। यह महीना हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है और जीवन को नए उत्साह से जीने की प्रेरणा देता है। सावन की हर बूंद धरती को जीवन देती है और इसकी भक्ति इंसानी जीवन को धन्य बनाती है। यह महीना केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि प्रकृति की हरियाली, वर्षा की फुहारों और आध्यात्मिक चेतना का भी संदेश देता है। 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

London Trip: प्रधानमंत्री से पब्लिक तक मेट्रो, सिटी बस में सफर करते हैं

London Trip

London Trip 3: लंदन की यातायात व्यवस्था पर नजर डालते हैं। वहां मेट्रो और सिटी बसों की बात करते हैं। मेट्रो को वहां अंडरग्राउंड व ट्यूब कहते हैं। लंदन शहर की आबादी 91 लाख है तो उपनगरों को मिलाकर डेढ़ करोड़ लोग रहते हैं। वहां यातायात का प्रमुख साधन लोक परिवहन ही है। याने मेट्रो व सिटी बस। 543 मेट्रो में रोजाना 32 लाख लोग यात्रा करते हैं। इनमें कुल 4 हजार डिब्बे लगे होते हैं। ये शुक्रवार, शनिवार को 24 घंटे चलती हैं, जबकि अन्य दिनों में सुबह 5 से रात 12 बजे तक। दूसरी तरफ करीब 9 हजार डबल डेकर सिटी बस में 50 लाख लोग सफर करते हैं।

यहां की मेट्रो दुनिया की पहली सेवा है, जो 1863 में प्रारंभ हुई थी, जब और कहीं सोचा भी नहीं जा रहा होगा। 272 स्टेशन के साथ 402 किमी लंबे मार्ग पर यह यात्रा होती है। इसे मुंबई के साथ देखें तो यहां आबादी शहर की 2 करोड़ है और उपनगर सहित 2.35 करोड़ है। 2342 लोकल ट्रेन चलती हैं, जिनमें रोजाना 75 लाख लोग यात्रा करते हैं। वहीं 2600 सिटी बसों में 25 लाख लोग सफर करते हैं। ALSO READ: Trip To London : लंदन में न सड़क पर धरने-प्रदर्शन, न चक्का जाम

 

चूंकि इन दिनों इंदौर में मेट्रो का काम चल रहा है और आंशिक रूप से शुरू भी हुई है तो इस पर बात करते हैं। इंदौर की आबादी करीब 35 लाख है। मेट्रो को पूरी तरह से शुरू होने में न्यूनतम 5 वर्ष तो लगेंगे ही। तब तक लोक परिवहन के तौर पर सिटी बस,ऑटो रिक्शा, ई-रिक्शा, नगर सेवा पर निर्भरता है। इंदौर में 35 लाख की आबादी पर 16.33 लाख दो पहिया व 3.38 लाख चार पहिया वाहन पंजीकृत हैं। इनमें कुछ आसपास के इलाकों के भी होंगे। यहां 5.88 लाख आवास हैं। इसका मतलब प्रत्येक दूसरे घर में कार है और प्रत्येक घर में औसत तीन दो पहिया वाहन है। जबकि लंदन की 90 लाख आबादी 37 लाख घरों में रहती है। यहां 80 प्रतिशत लोग मेट्रो व सिटी बस में सफर करते हैं। ALSO READ: Trip To London: पाउंड को रुपए में गिनेंगे तो चाय भी नहीं पी सकेंगे

 

वहां 26.3 लाख कारें व 1.30 लाख दोपहिया वाहन पंजीकृत हैं। वहां अत्यधिक धनी व्यक्ति ही कार में आना-जाना करता है, क्योंकि शहर में पार्किंग बहुत मंहगी है। सेंट्रल लंदन में दिन भर के लिए 15 से 50 पाउंड (एक पाउंड 130 रुपए का है) तक चार्ज हैं, भले ही एक घंटे में वापस चले जाएं। मोहल्लों में भी बाहरी व्यक्ति को सड़क के दोनों ओर कार पार्क करने की अनुमति तो मिलती है, लेकिन उसके भी चार्ज हैं, जो 4.90 से 7.20 पाउंड (529 से 760 रुपए) तक है। रहवासी के लिए मासिक शुल्क है। याने वहां फ्री फोकट में कुछ नहीं है। मेट्रो में एक रूट के 6 पाउंड लगते हैं, लेकिन 16 पाउंड में दिन भर किसी भी रूट पर आ-जा सकते हैं।

 

इंदौर में लोक परिवहन की दयनीय स्थिति किसी से छुपी नहीं है, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि हम लोक परिवहन का उपयोग करना भी नहीं चाहते। हमें ठेठ दुकान व घर तक अपने ही वाहन से जाना है। मेट्रो को तो अभी गिनें ही नहीं। तब लोक परिवहन में केवल 350 सिटी बसें हैं। 20 हजार ऑटो रिक्शा व 8 हजार ई-रिक्शा हैं। 20 लाख पंजीकृत कार-दोपहिया में से यदि 5 लाख भी इंदौर की सड़क पर चलते होंगे तो कल्पना कर लीजिए कि शहर में यातायात का किस कदर सत्यानाश होता रहेगा। वैसे, लोक परिवहन का उपयोग एक आदत होती है, जो हमारी अभी तो नहीं है। हम स्वयं के वाहन से ही आना-जाना अपनी शान समझते हैं, जबकि लंदन या यूरोप में प्रधानमंत्री, मंत्री, मेयर, अधिकारी, करोड़पति, सेलिब्रिटी भी मेट्रो में सफर कर लेते हैं। (क्रमश:)। लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।  

Trip To London: पाउंड को रुपए में गिनेंगे तो चाय भी नहीं पी सकेंगे

Trip To London

Trip To London: जब भी पर्यटन के लिए विदेश जाएं तो भारतीय रुपए में मूल्य आंकना मुसीबत खड़ी करेगा। वजह साफ है कि विश्व की अधिकांश लेन-देन की मुद्रा का मूल्य रुपए से कई गुना ज्यादा है। प्रमुख तौर पर डॉलर 95 रुपए का, पाउंड 130 रुपए का, यूरो 111 का, कुवैती दीनार सबसे महंगा 310 का और दुबई का दिरहम 26 रुपए का। इसलिए ब्रिटेन में चाय जब 450 रुपए की आती है तो हम लोग एक खाली गिलास मांगकर कट मार लेते हैं।

 

लंदन चूंकि विश्व के पहले पांच महंगे शहर में है तो आपका बजट तो गड़बड़ाएगा ही। सर्वाधिक महंगा सिंगापुर है। इसलिए पहले से मानसिक और आर्थिक तैयारी जरूरी है। वहां यदि आपका कोई परिजन है तो पहले चर्चा कर तय कर लें कि कौन-सी खाद्य सामग्री ले जाना है और कौन-सी वहां से खरीदना है। विशेष तौर पर दाल, सब्जी, राजमा, पोहे, उपमा, चाय का रेडी टू इट वाला सामान साथ लिया जा सकता है। यदि एकाध हफ्ता रुकना है तो 15 किलो की एक अटैची में खाने का सामान रखना समझदारी होगी। यदि बजट की चिंता नहीं है तो कोई बात नहीं। मैं आपको मोटे पर लगने वाली सामग्री की लंदन की दरें बता देता हूं, जो मई 2026 में वहां थीं।

ये मध्यम बजट की दरें हैं

रेस्टारेंट में एक व्यक्ति का खाना 2,500 का, दो का करीब 10 हजार का। याने 20 से 80 पाउंड तक। कैपेचिनो कॉफी 530 रुपए की, मसाला डोसा 1300 रुपए का, छोले-भटूरे 1500 रुपए के, पानी की बोतल 80 से 200 तक की, दूध 182 रुपए लीटर, ब्रेड 212 की, जो हमें 40 में मिल जाती है। चावल एक किलो 235 का, 12 अंडे 500 के। इसी तरह से मोबाइल का 10 जीबी डाटा 1755 रुपए का, जो यहां 400 में मिलता है। ब्रॉडबैंड 4,000 का जो यहां 775 में मिलता है। पेट्रोल-डीजल 150-170 रुपए लीटर है।

 

सब्जियों के भाव सुनकर दहशत में आ सकते हैं। खीरा 3 नग 130 रुपए के, गाजर करीब 600 रुपए किलो, पत्ता गोभी एक नग 90 रुपए की, नींबू 120 रुपए का। केले 155 के एक किलो (जिसमें 6-7 आएंगे), आलू 165 रुपए किलो, प्याज 150 रुपए किलो। भाव का यह अंतर रुपए और पाउंड के मूल्य में फर्क का नतीजा तो है ही, वहां महंगाई का स्तर भी ऊंचा है।

एक विश्लेषण के अनुसार यदि इंदौर व लंदन का तुलनात्मक अध्ययन करें तो लंदन की बजाय इंदौर में जीवन स्तर 79.6 प्रतिशत सस्ता है। मकान, दुकान, ऑफिस का किराया 94.3 प्रतिशत सस्ता है। इंदौर में रेस्टारेंट 84.4 प्रतिशत, किराना 71.3 प्रतिशत सस्ता है। हमारी क्रय शक्ति लंदन वालों की बजाय 50.6 प्रतिशत अधिक है। यदि इंदौर में रहने के लिए 1011 पाउंड (एक लाख 30 हजार 460 रुपए) चाहिए तो लंदन वाले को 6900 पाउंड (8 लाख 90 हजार 100 रुपए) चाहिए। स्वाभाविक रूप से प्रॉपर्टी भी मंहगी है। मध्यमवर्गीय इलाके में 2 बेडरूम का फ्लैट औसत सवा चार करोड़ रुपए से पौने सात करोड़ रुपए का आएगा। याने 4 लाख से साढ़े 6 लाख पाउंड में। इतनी रकम में इंदौर में शानदार 3-4 हजार वर्गफीट का बंगला मिल जाएगा। 

 

इसे एक दूसरे तरीके से भी समझ सकते हैं। लंदन में औसत प्रति व्यक्ति मासिक खर्च 1500 पाउंड याने 18 हजार पाउंड वार्षिक (23 लाख 32 हजार रुपए है) होता है। इंदौर में औसत खर्च 15 हजार से 25 हजार रुपए याने अधिकतम 3 लाख रुपए वार्षिक होता है। इस तरह लंदन हमसे करीब 8 गुना अधिक महंगा है। यह विश्लेषण ग्लोबल वेल्थ एंड लाइफस्टाइल का है, जो बताता है कि सिंगापुर व लंदन काफी महंगे शहर हैं। लंदन में जहां 4 व्यक्तियों के रुकने लायक जो अपार्टमेंट औसत 20-25 हजार रुपए रोज वाले मिलेंगे, वे एडिनबरा (स्कॉटलैंड) में 35 हजार रुपए रोज के रहेंगे। यहां अपेक्षाकृत सीमित सुविधा व अत्यधिक पर्यटकों की वजह से मंहगाई अधिक है, क्योंकि यह लंदन से प्राकृतिक रूप से अधिक खूबसूरत है।

अपार्टमेंट में रूम सर्विस या रोजाना सफाई जैसी कोई सुविधा नहीं होती। वहां हफ्ते में तय दिन सफाई के लिये कोई आएगा। अपार्टमेंट व कमरे के लॉक डिजिटल होते हैं, जो आपको बुकिंग होने पर बता दिए जाएंगे। एडिनबरा में तो मेन गेट के बाहर एक बॉक्स होता है, जिसका नंबर आपको दे देंगे। वह सही हुआ तो बॉक्स खोलकर कमरे की चाबी मिल जाएगी। यदि कुछ गड़बड़ हो तो पचते रहो, कोई मदद नहीं मिलेगी, क्योंकि कोई सुरक्षा गार्ड नहीं होता।

 

ब्रिटेन व यूरोप में भी ज्यादातर मकानों के दरवाजे-खिड़कियां कांच के होते हैं, जिनमें सरियों की ग्रिल नहीं होती। इसका आशय यही है कि वहां ग्रिल उखाड़कर या दरवाजे तोड़कर चोरियां नहीं होतीं। ऐसा भी नहीं है कि चोरियां नहीं होतीं। लंदन के व्यस्त इलाकों में विशेष तौर पर आई फोन की लूट काफी होती हैं। ये काम ई-बाइक गिरोह व नकाबपोश करते हैं, जो राह चलते उन लोगों के फोन उड़ा लेते हैं, जो बात करते हुए चलते हैं।

 

2024-25 में एक लाख 6 हजार आई फोन चोरी हुए थे। ये फोन चीन में बेच दिए जाते हैं। वहां इन्हें नए सिरे से असेंबल कर विश्व बाजार में फिर बेच देते हैं। यह करीब एक हजार करोड़ रुपए का चोरी के आई फोन का कारोबार है। अधिकांश फोन हांगकांग व चीन भेज दिए जाते हैं, जहां रि-सेट, रि-प्रोग्रामिंग कर फिर से बेच दिए हैं। (क्रमश:) -लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।