बाल कविता: अकड़म बकड़म

Illustrations related to entertaining poems for young children

अकड़म बकड़म दही चटाकन

चिड़िया चूज़े चूं चूं चहकन।

 

नन्हा गोलू दौड़ा आंगन

हंसी बिखेरे प्यारी चुनमुन।

 

गुड़िया रानी पहनें पायल

छम छम छम छम छन छन छन छन।

 

बिल्ली मौसी दुबकी आई

दूध देख कर मन में लपकन।

 

चंदा मामा झांकें खिड़की

तारे गिनती प्यारी गुनगुन।

 

अकड़म बकड़म हंसी ठिठोली

बिट्टू रोता ठन ठन ठन ठन।

 

इंद्रधनुष के सात रंग में

खेल रहा है देखो बचपन।

Monsoon Health Tips: बारिश में फिट कैसे रहें?

An image providing information on staying healthy during the rainy season

Monsoon Immunity Tips: बारिश का मौसम जहां एक ओर भीषण गर्मी से राहत देता है, वहीं दूसरी ओर यह कई मौसमी बीमारियों और संक्रमणों का खतरा भी बढ़ा देता है। विशेष रूप से मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी मच्छरजनित बीमारियां मानसून के दौरान तेजी से फैल सकती हैं। बारिश के कारण जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण बन जाता है, जिससे संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है। ऐसे में केवल स्वादिष्ट मानसूनी व्यंजनों का आनंद लेना ही नहीं, बल्कि अपनी सेहत और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है।ALSO READ: बरसात के मौसम में ये 5 आसान योगासन कर सकते हैं आपकी इम्युनिटी की रक्षा

 

अगर आप भी इस मानूसन में बीमार पड़ने के बजाय रिमझिम फुहारों का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो इन 5 आसान टिप्स को अपनाकर आप खुद को बिल्कुल फिट रख सकते हैं:

 

1. डाइट में करें थोड़ा बदलाव यानी खान-पान पर कंट्रोल

बारिश के मौसम में पकौड़े और चाट-पकौड़ी खाने का मन सबसे ज्यादा करता है, लेकिन यही सबसे बड़ी गलती होती है।

 

स्ट्रीट फूड से तौबा: इस मौसम में बाहर का खुला खाना, कटी हुई सब्जियां, फल और गंदा पानी 'टायफायड' और 'डायरिया' जैसी बीमारियों का कारण बनते हैं। इसलिए बाहर खाने से बचें।

 

हरी पत्तेदार सब्जियों को कहें 'ना': बारिश में पालक, मेथी, बंदगोभी जैसी पत्तेदार सब्जियों में कीड़े और बैक्टीरिया पनपने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। अगर खाएं भी, तो उन्हें गुनगुने पानी और नमक से अच्छी तरह धोकर, उबालकर ही खाएं।

 

इम्यूनिटी बूस्टर अपनाएं: अपनी चाय या काढ़े में अदरक, तुलसी, काली मिर्च, लौंग और हल्दी का इस्तेमाल बढ़ा दें।

 

2. पानी उबालकर ही पीएं

मानसून में जल जनित रोग बहुत तेजी से फैलते हैं क्योंकि इस मौसम में पीने के पानी के सोर्स जल्दी दूषित हो जाते हैं। हमेशा पानी को उबालकर और छानकर पीएं। अगर आप ट्रेवल कर रहे हैं, तो केवल सीलबंद भरोसेमंद ब्रांड का ही पानी पीएं। शरीर को हाइड्रेटेड रखना इस मौसम में भी उतना ही जरूरी है जितना गर्मी में।

 

3. पर्सनल हाइजीन/ व्यक्तिगत स्वच्छता का रखें खास ध्यान

नमी के कारण इस मौसम में फंगल इन्फेक्शन और स्किन एलर्जी बहुत आम हो जाती है।

 

भीगने पर तुरंत नहाएं: अगर आप बारिश के पानी में भीग गए हैं, तो घर आकर साफ पानी और एंटी-बैक्टीरियल साबुन से तुरंत नहाएं और खुद को अच्छी तरह सुखाएं।

 

गीले कपड़े और जूते न पहनें: कपड़ों या जूतों में थोड़ी भी नमी हो, तो उन्हें न पहनें। फंगल इन्फेक्शन से बचने के लिए पैरों को साफ और सूखा रखें।

 

एक छोटा सा मंत्र: इस मौसम में 'ताजा खाएं, उबला पानी पीएं और एक्टिव रहें'। मानसून का मजा तभी है जब आपकी सेहत एकदम चकाचक हो!

 

4. घर के अंदर ही करें वर्कआउट

बारिश की वजह से अक्सर मॉर्निंग वॉक या जिम जाना छूट जाता है, जिससे लोग सुस्त महसूस करने लगते हैं। लेकिन फिटनेस से नो कॉम्प्रोमाइज! अगर बाहर बारिश हो रही है, तो घर के अंदर ही योग, स्ट्रेचिंग, जुम्बा या स्किपिंग/ रस्सी कूदना जैसे कार्य करें। आप 20-30 मिनट का कोई भी होम वर्कआउट यूट्यूब की मदद से कर सकते हैं। इससे आपका मेटाबॉलिज्म सही रहेगा और वजन भी कंट्रोल में रहेगा।

 

5. मच्छरों से रहें सावधान

मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी खतरनाक बीमारियां मानसून की ही देन हैं क्योंकि जमा पानी में मच्छर तेजी से अंडे देते हैं। अपने घर के आसपास, कूलरों में, गमलों या टायरों में पानी जमा न होने दें। सोते समय मच्छरदानी या मॉस्किटो रिपेलेंटका इस्तेमाल जरूर करें। पूरी आस्तीनके कपड़े पहनें।ALSO READ: Monsoon Special Recipes: मानसून की 5 बेहतरीन रेसिपीज, देखते ही मुंह में आ जाएगा पानी

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

Vastu Shastra: वास्तु के ये 10 नियम बदल सकते हैं घर का माहौल, बनी रहेगी सुख-समृद्धि

A photo illustrating essential Vastu rules for happiness, prosperity, and a positive atmosphere at home

Home Vastu Rule: भारतीय परंपरा में वास्तु शास्त्र को जीवन और स्थान की ऊर्जा को संतुलित करने का विज्ञान माना गया है। माना जाता है कि यदि घर या कार्यस्थल वास्तु नियमों के अनुसार बनाया और व्यवस्थित किया जाए, तो वहां सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और सफलता बनी रहती है। वहीं, गलत दिशा या असंतुलित ऊर्जा से घर में तनाव, आर्थिक समस्याएं और मानसिक अशांति उत्पन्न हो सकती है।ALSO READ: Vastu Tips for Plantation: सही दिशा में लगाया गया पौधा बदल सकता है आपकी किस्मत

 

इसलिए वास्तु नियमों का पालन घर के वातावरण को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यहां जानिए वास्तु शास्त्र के महत्वपूर्ण नियम, घर का सही माहौल बनाने के उपाय और सुख-समृद्धि बढ़ाने के सरल वास्तु टिप्स, जो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाते हैं।

 

यहां वास्तु के ऐसे 10 अचूक नियम दिए गए हैं, जो आपके घर का माहौल पूरी तरह बदल सकते हैं:

 

1. ईशान कोण को रखें खाली

घर का उत्तर-पूर्वी कोना ईश्वर का स्थान माना जाता है। इस कोने को हमेशा बिल्कुल साफ, हल्का और खुला रखें। यहां कभी भी भारी अलमारी, कबाड़ या जूता-चप्पल का रैक न रखें। इस दिशा में मंदिर बनाना सबसे उत्तम होता है।

 

2. पूजा घर के नियम

घर में सुख-शांति के लिए पूजा घर का सही होना बहुत जरूरी है। मंदिर में कभी भी एक ही देवी-देवता की आमने-सामने दो तस्वीरें न रखें। मृत परिजनों की तस्वीरें पूजा घर में रखने की बजाय घर की दक्षिण दिशा में लगाएं।

 

3. मुख्य द्वारपर मांगलिक चिन्ह

घर का मुख्य द्वार खुशियों और लक्ष्मी के प्रवेश का रास्ता है। इसे हमेशा साफ-सुथरा रखें। मुख्य द्वार पर सिंदूर से स्वास्तिक, ॐ या शुभ-लाभ का चिन्ह बनाएं। इसके अलावा, प्रवेश द्वार पर बंदनवार (तोरण) लगाना भी बेहद शुभ माना जाता है।

 

4. रसोई घर की सही दिशा

रसोई घर में अग्नि का वास होता है, जो सेहत और समृद्धि से जुड़ा है। वास्तु के अनुसार, रसोई हमेशा अग्नि कोण (South-East) में होनी चाहिए। खाना बनाते समय आपका मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। ध्यान रखें कि सिंक (पानी) और चूल्हा (आग) कभी भी एक सीध में या बिल्कुल पास-पास न हों।ALSO READ: Vastu Tips: घर से वास्तु दोष मिटाने के 3 आसान उपाय, सुख-समृद्धि से भर जाएगा जीवन

 

5. तिजोरी और धन रखने का स्थान

यदि आप चाहते हैं कि घर में धन टिके और बरकत हो, तो अलमारी या तिजोरी को घर के दक्षिण या पश्चिम कोने में इस तरह रखें कि उसका मुख खुलते समय उत्तर दिशा की ओर हो। उत्तर दिशा को कुबेर की दिशा माना जाता है।

 

6. दर्पण लगाने की सही जगह

गलत दिशा में लगा शीशा घर में नकारात्मकता और बीमारियां बढ़ा सकता है। दर्पण को हमेशा घर की उत्तर या पूर्व दीवार पर लगाएं। ध्यान रखें कि बेडरूम में शीशा इस तरह न लगा हो जिसमें सोते समय आपका शरीर दिखाई दे, इससे स्वास्थ्य खराब होता है।

 

7. शाम के समय कपूर का धुआं और रोशनी

शाम के वक्त (सूर्यास्त के समय) घर के सभी कमरों की लाइटें कुछ देर के लिए जरूर जलाएं, विशेषकर मुख्य द्वार और पूजा घर में। इस समय घर में कपूर या लोबान का धुआं करने से दिनभर की एकत्रित हुई नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकल जाती है और लक्ष्मी का आगमन होता है।

 

8. सोते समय सिर की दिशा

अक्सर लोग इस बात पर ध्यान नहीं देते, लेकिन गलत दिशा में सोने से मानसिक तनाव और अनिद्रा की समस्या होती है। सोते समय आपका सिर हमेशा दक्षिण  या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। उत्तर दिशा की तरफ सिर करके कभी न सोएं।

 

9. बाथरूम के दरवाजे रखें बंद

बाथरूम और टॉयलेट में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव सबसे ज्यादा होता है। इसलिए इस्तेमाल के बाद हमेशा बाथरूम का दरवाजा बंद रखें। बाथरूम के अंदर एक कांच की कटोरी में सेंधा नमक भरकर रखने से वहां की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है।

 

10. बंद घड़ियां और टूटी चीजें हटाना

वास्तु में बंद घड़ी को दुर्भाग्य का सूचक माना जाता है। यदि घर में कोई घड़ी बंद पड़ी है या खराब है, तो उसे तुरंत ठीक करवाएं या हटा दें। इसी तरह टूटे हुए बर्तन, चटका हुआ कांच और बंद पड़े इलेक्ट्रॉनिक सामान घर में आर्थिक तंगी लाते हैं।

 

विशेष टिप: घर में पोंछा लगाते समय पानी में थोड़ा सा समुद्री नमक (खड़ा नमक) मिलाना शुरू करें। यह एक छोटा सा बदलाव घर के कलह-कलेश को शांत कर खुशहाली का माहौल बनाता है।ALSO READ: Flat Vastu Tips: फ्लैट में रह रहे लोगों के लिए वास्तु के 5 टिप्स

डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन के बारे में 10 रोचक तथ्य

A photograph of Dr. Syama Prasad Mookerjee, a renowned educationist and the founder of the Bharatiya Jana Sangh

Dr Syama Prasad Mukherjee History: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी आधुनिक भारत के उन प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं जिन्होंने शिक्षा, राष्ट्रनिर्माण और राजनीति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे एक प्रख्यात शिक्षाविद, विधिवेत्ता, सांसद और दूरदर्शी राजनीतिक नेता थे। कम आयु में विश्वविद्यालय के कुलपति बनने से लेकर स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में कार्य करने तक, उनका सार्वजनिक जीवन अनेक उल्लेखनीय उपलब्धियों से भरा रहा। 

 

वर्ष 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना कर उन्होंने भारतीय राजनीति को एक नई वैचारिक दिशा देने का प्रयास किया, जिसका प्रभाव आगे के दशकों में भी दिखाई दिया। आज भी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनके राष्ट्रसेवा के संकल्प, शिक्षा के प्रति समर्पण, प्रशासनिक क्षमता और राजनीतिक योगदान के लिए याद किया जाता है। 

 

1. सबसे कम उम्र के कुलपति

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी मेधावी छात्र थे। उन्होंने केवल 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता (कोलकाता) विश्वविद्यालय के कुलपति का पद संभाला था। वह इस पद पर बैठने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति थे।

 

2. स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग और आपूर्ति मंत्री

जब 1947 में भारत आजाद हुआ, तो प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया। वे देश के पहले उद्योग और आपूर्ति मंत्री (Minister for Industry and Supply) बने। सन् 1943 से 1946 तक वे अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के अध्यक्ष भी रहे थे।

 

3. नेहरू मंत्रिमंडल से इस्तीफा

जब नेहरू सरकार ने 1950 में पाकिस्तान के साथ 'नेहरू-लियाकत समझौते' पर हस्ताक्षर किए, तो डॉ. मुखर्जी इसके सख्त खिलाफ थे। पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के विरोध में उन्होंने केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया।

 

4. भारतीय जनसंघ की स्थापना

मंत्रिमंडल से हटने के बाद, उन्होंने 21 अक्टूबर 1951 को भारतीय जनसंघ (BJS) की स्थापना की। यही संगठन आगे चलकर 1980 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के रूप में पुनर्गठित हुआ।

 

5. एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे

वे जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाली धारा 370 के घोर विरोधी थे। उन्होंने कश्मीर में अलग झंडे, अलग संविधान और वहां जाने के लिए परमिट (Permit) की व्यवस्था का कड़ा विरोध किया और 'एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे' का यह प्रसिद्ध नारा दिया।

 

6. बिना परमिट कश्मीर में प्रवेश और गिरफ्तारी

उस समय भारत के नागरिकों को भी कश्मीर जाने के लिए परमिट की जरूरत होती थी। डॉ. मुखर्जी ने इस कानून को चुनौती देने के लिए मई 1953 में बिना परमिट के कश्मीर में प्रवेश किया, जिसके बाद उन्हें वहां की सरकार द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया।

 

7. बैरिस्टर की उपाधि और राजनीति में प्रवेश

उन्होंने इंग्लैंड (लंदन) के 'द ऑनरेबल सोसाइटी ऑफ लिंक्न्स इन' से कानून की पढ़ाई की और 1927 में बैरिस्टर बने। भारत लौटने के बाद वे राजनीति में सक्रिय हुए।

 

8. बंगाल विभाजन में अहम भूमिका

जब 1947 में भारत का विभाजन हो रहा था, तब उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए कड़ा संघर्ष किया कि मुस्लिम लीग पूरे बंगाल को पाकिस्तान में शामिल न कर पाए। उन्हीं के प्रयासों के कारण हिंदू बहुल पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा बना रहा।

 

9. 'महाबोधि सोसाइटी' के अध्यक्ष

वे केवल राजनीति तक सीमित नहीं थे। वे बौद्ध धर्म और संस्कृति के प्रति गहरा सम्मान रखते थे। वे महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भी रहे और उन्होंने सांची में बौद्ध अवशेषों को सुरक्षित रखने और एशियाई देशों में इसके प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 

 

10. रहस्यमयी परिस्थितियों में निधन

23 जून 1953 को कश्मीर में नजरबंदी के दौरान ही अस्पताल में उनका निधन हो गया। उनकी मृत्यु आज भी एक रहस्य बनी हुई है, क्योंकि उनकी मां और कई बड़े नेताओं ने इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की थी, जिसे तत्कालीन सरकार ने स्वीकार नहीं किया था। उन्हें 'महान देशभक्त और शहीद' के रूप में याद किया जाता है।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: डॉ. श्याम प्रसाद मुखर्जी पुण्यतिथि, जानें 5 अनसुने तथ्य

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

4th Bronchopulmonary World Congress 2026

इंदौर, 04 जुलाई 2026। ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में शनिवार से चौथी ब्रोंकोपल्मोनरी वर्ल्ड कांग्रेस 2026 की मुख्य कॉन्फ्रेंस की शुरुआत हुई। इस कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश से आए पल्मोनोलॉजिस्ट, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ, थोरासिक सर्जन, मेडिकल रिसर्चर और युवा चिकित्सक शामिल हुए। पहले दिन विशेषज्ञों ने फेफड़ों की बीमारियों के आधुनिक उपचार, नई रिसर्च और उन्नत तकनीकों पर अपने अनुभव साझा किए। इस कॉन्फ्रेंस में 700 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कराया है।

 

पहले दिन पल्मोनरी मेडिसिन, इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी, क्रिटिकल केयर, स्लीप मेडिसिन, पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन, थोरासिक सर्जरी और रेस्पिरेटरी रिसर्च जैसे विषयों पर वैज्ञानिक सत्र (साइंटिफिक सेशंस) आयोजित किए गए। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने फेफड़ों की जटिल बीमारियों के निदान व उपचार में हो रहे नए बदलावों, आधुनिक तकनीकों और क्लिनिकल अनुभवों को प्रतिभागियों के साथ साझा किया। कॉन्फ्रेंस का औपचारिक उद्घाटन पहले दिन शाम 07 बजे इंडेक्स ग्रुप के चेयरमैन श्री सुरेश सिंह भदोरिया, डॉ. राजेंद्र प्रसाद एवं डॉ. अतुल सी. मेहता द्वारा किया गया।

 

कॉन्फ्रेंस में देश के विभिन्न राज्यों से आए श्वसन रोग विभाग के 100 से अधिक पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थियों ने अपने रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए। वहीं, 30 से अधिक टीमों ने पोस्ट ग्रेजुएट क्विज़ प्रतियोगिता में भाग लेकर अपनी एकेडमिक और क्लिनिकल जानकारी का प्रदर्शन किया। रिसर्च पेपर और पोस्टर प्रेजेंटेशन, क्लिनिकल केस डिस्कशन तथा वैज्ञानिक संवाद के ज़रिए युवा चिकित्सकों को वरिष्ठ विशेषज्ञों से सीखने और अपने शोध प्रस्तुत करने का बेहतरीन अवसर मिला।

 

कॉन्फ्रेंस में भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ अमेरिका, ब्रिटेन, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, मालदीव एवं अन्य देशों की अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी, पद्मश्री से सम्मानित विशेषज्ञों और देश के वरिष्ठ चिकित्सकों ने विभिन्न वैज्ञानिक सत्रों को संबोधित किया। इस दौरान अमेरिका (यूएस) में चिकित्सा के क्षेत्र में अपना लोहा मनवा चुके डॉ. अतुल सी. मेहता को 'लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड' से सम्मानित किया गया। विशेषज्ञों ने फेफड़ों की बीमारियों के इलाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों, इंटरवेंशनल प्रक्रियाओं और मरीज-केंद्रित उपचार पद्धतियों की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की।

 

कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी प्रो. डॉ. रवि डोसी ने कहा कि “बदलती जीवनशैली, बढ़ता वायु प्रदूषण, धूम्रपान, संक्रमण और एलर्जी फेफड़ों की बीमारियों के प्रमुख कारण बन रहे हैं। यही वजह है कि अस्थमा, सीओपीडी, फेफड़ों के संक्रमण और लंग कैंसर जैसी बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। समय पर जांच, शुरुआती पहचान और आधुनिक उपचार से इन बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। अगर लक्षणों की पहचान कर समय पर इलाज शुरू हो जाए, तो कैंसर जैसी घातक बीमारियों को भी हराना संभव है। धूम्रपान से दूरी, स्वच्छ वातावरण, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, टीकाकरण और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए बेहद जरूरी है।”

 

डॉ. डोसी ने आगे बताया कि “कॉन्फ्रेंस के पहले दिन के वैज्ञानिक सत्रों में विशेषज्ञों और प्रतिभागियों की उत्साहजनक भागीदारी रही। विभिन्न विषयों पर हुए गहन विचार-विमर्श से चिकित्सकों को नवीनतम वैज्ञानिक जानकारियों और आधुनिक उपचार पद्धतियों को समझने का अवसर मिला। कोविड के बाद उत्पन्न होने वाली श्वसन संबंधी जटिलताओं, टीबी के बाद फेफड़ों पर पड़ने वाले प्रभावों तथा पल्मोनरी हाइपरटेंशन जैसी गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान और वैज्ञानिक उपचार आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। वहीं, ब्रोंकोस्कोपी एवं नेविगेशन तकनीकों में हो रहे नवाचार फेफड़ों की बीमारियों के सटीक निदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।”

 

उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे आयोजन चिकित्सा शिक्षा, शोध और मरीजों की बेहतर देखभाल को एक नई दिशा देते हैं। कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन भी वैज्ञानिक सत्र, क्लिनिकल केस डिस्कशन, विशेषज्ञ व्याख्यान और रिसर्च प्रेजेंटेशन जारी रहेंगे, जिनमें देश-विदेश के विशेषज्ञ फेफड़ों की बीमारियों के उपचार से जुड़े नवीनतम शोध और अनुभव साझा करेंगे।

घर की ‘एनर्जी’ बदल देंगी ये खास धूप, जानें किस धुएं में छिपा है क्या राज

Incense that purifies the home and fosters positivity. An image showing the traditional practice of burning incense

Burning incense at home: हिंदू परंपरा में घर के भीतर धूप और दीप प्रज्वलित करना केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि एक गहरा विज्ञान है। हमारे पूर्वज जानते थे कि खास जड़ी-बूटियों को जलाने से निकलने वाला धुआं घर की नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर सकारात्मकता का संचार करता है। वास्तु दोष, पितृ दोष और गृह-कलह जैसी समस्याओं को जड़ से खत्म करने के लिए 'धूप' देना सबसे सरल और असरदार तरीका है।

 

1. गुग्गुल और लोबान: पारलौकिक और दैवीय कृपा

2. कपूर: दोषों का काल

3. गुड़-घी का देसी नुस्खा: ऑक्सीजन और शांति का स्रोत

4. षोडशांग और दशांग धूप: रोगों से सुरक्षा का कवच

5. धूप देने से क्या-क्या मिलेंगे फायदे?

6. धूप देने के खास नियम (न करें ये गलतियां):

 

आइए जानते हैं, घर को स्वर्ग बनाने वाली धूप के अलग-अलग प्रकार और उनके लाभ:

 

1. गुग्गुल और लोबान: पारलौकिक और दैवीय कृपा

गुग्गुल: इसकी मीठी सुगंध तनाव को कम करती है। अक्सर इसे गुरुवार और रविवार को जलाया जाता है ताकि घर की वायु शुद्ध रहे।

 

लोबान: इसे जलाने से मानसिक शक्ति बढ़ती है, लेकिन इसके नियम कड़े होते हैं। माना जाता है कि यह सूक्ष्म शक्तियों को आकर्षित करता है, इसलिए इसे विशेषज्ञों की सलाह पर ही जलाएं।

 

2. कपूर: दोषों का काल

कपूर जलाना अक्षय पुण्य का काम माना गया है। वैज्ञानिक रूप से इसकी गंध बैक्टीरिया और वायरस का नाश करती है। जिस घर में नियमित कपूर जलता है, वहां पितृ दोष या वास्तु दोष टिक नहीं पाते।

 

3. षोडशांग और दशांग धूप: रोगों से सुरक्षा का कवच

षोडशांग धूप: यह सबसे खास मानी गई है। इसमें चंदन, कपूर, जटामांसी और गुग्गुल जैसी 16 आयुर्वेदिक वस्तुओं का मिश्रण होता है। इसे उपले पर जलाने से घर में आकस्मिक दुर्घटनाओं और बीमारियों का भय कम होता है।

 

दशांग धूप: यह 10 विशेष सामग्रियों (जैसे गुड़, राल, जटामांसी) से बनती है। इसकी खुशबू घर के सदस्यों के बीच शांति और सामंजस्य बनाए रखती है।

 

4. गुड़-घी का देसी नुस्खा: ऑक्सीजन और शांति का स्रोत

अगर आप कुछ खास नहीं कर सकते, तो जलते हुए कंडे (उपले) पर बराबर मात्रा में गुड़ और घी रखें। यह मिश्रण वातावरण में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाता है और आपके दिमाग के तनाव को तुरंत शांत कर देता है।

 

5. धूप देने से क्या-क्या मिलेंगे फायदे?

वास्तु सुधार: घर के कोनों में दबी नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकल जाती है।

 

मानसिक सेहत: घर के सदस्यों का मन शांत रहता है और बीमारियां दूर रहती हैं।

 

दैवीय आशीर्वाद: धूप से देवता और पितृ प्रसन्न होते हैं, जिससे जीवन की बाधाएं स्वतः समाप्त होने लगती हैं।

 

6. धूप देने के खास नियम (न करें ये गलतियां):

कब दें धूप? यदि रोजाना संभव न हो, तो अमावस्या, पूर्णिमा, तेरस और चौदस को सुबह-शाम धूप जरूर दें। याद रखें, सुबह की धूप देवताओं के लिए और शाम की पितरों के लिए होती है।

 

सही दिशा: धूप देने का सबसे श्रेष्ठ स्थान ईशान कोण (North-East) है। कोशिश करें कि इसका धुआं घर के हर कमरे में पहुंचे।

 

शांति का माहौल: जब धूप का धुआं घर में फैल रहा हो, तब तेज संगीत न बजाएं और कम से कम बात करें। यह समय आत्म-चिंतन और शांति का है।

 

पवित्रता: हमेशा स्नान के बाद और घर की साफ-सफाई करने के बाद ही धूप प्रज्वलित करें।

 

संक्षेप में कहा जाए तो 'धूप' केवल धुआं नहीं, बल्कि आपके घर की 'एनर्जी' को रिचार्ज करने का प्राचीन माध्यम है। आज ही अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार धूप का चयन करें और घर में खुशहाली का अनुभव करें।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

 

Swami Vivekananda Quotes: स्वामी विवेकानंद के 11 अनमोल कथन, जो हमें ऊर्जा, आत्मविश्वास और सकारात्मकता से भर देंगे

A photograph of Swami Vivekananda- a great spiritual guru, social reformer, and source of inspiration for the youth of modern India

Swami Vivekananda 4 July quotes: आज 4 जुलाई को स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि मनाई जा रही है। उनका जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। वे बचपन से ही प्रखर बुद्धि के थे और उनके मन में ईश्वर को जानने की तीव्र जिज्ञासा रहती थी। स्वामी विवेकानंद ने मात्र 39 वर्ष की आयु में 4 जुलाई 1902 को देह त्याग दी, लेकिन उनके विचार आज भी करोड़ों लोगों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।ALSO READ: स्वामी विवेकानंद पुण्यतिथि विशेष: एक ज्योति जो आज भी भारत का पथ आलोकित कर रही है

 

Swami Vivekananda के विचार आज भी युवाओं, विद्यार्थियों और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। यहां उनके कुछ सबसे प्रसिद्ध और प्रेरणादायक कथन दिए गए हैं:

 

आत्मविश्वास और शक्ति पर विचार

1. 'उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।'

 

2. 'ब्रह्मांड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं। वो हमीं हैं जो अपनी आंखों पर हाथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अंधकार है।'

 

3. 'लकीर के फकीर मत बनो। जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते, तब तक आप भगवान पर विश्वास नहीं कर सकते।'

 

4. 'खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है।'

 

5. 'तुम्हें अंदर से बाहर की तरफ विकसित होना है। कोई तुम्हें पढ़ा नहीं सकता, कोई तुम्हें आध्यात्मिक नहीं बना सकता। तुम्हारी आत्मा के अलावा तुम्हारा कोई दूसरा गुरु नहीं है।'

 

मन और स्वभाव पर विचार

1. 'जो तुम सोचते हो, वो तुम हो जाओगे। यदि तुम खुद को कमजोर सोचते हो, तुम कमजोर हो जाओगे; अगर तुम खुद को ताकतवर सोचते हो, तुम ताकतवर हो जाओगे।'

 

2. 'दिल और दिमाग के टकराव में हमेशा अपने दिल की सुनो।'

 

3. 'संगति आप जैसी रखते हैं, वैसे ही आपके विचार हो जाते हैं। इसलिए हमेशा महान और सकारात्मक लोगों के संपर्क में रहें।'

 

4. 'सत्य को हजार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य ही होगा।'

 

कर्म और सफलता पर विचार

1. 'एक विचार लो। उस विचार को अपना जीवन बना लो- उसके बारे में सोचो, उसके सपने देखो, उस विचार को जियो।' अपने मस्तिष्क, मांसपेशियों, नसों, शरीर के हर हिस्से को उस विचार में डूब जाने दो, और बाकी सभी विचारों को किनारे रख दो। यही सफल होने का तरीका है।

 

2. 'एक समय में एक काम करो, और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमें डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ।'

 

3. 'जितना बड़ा संघर्ष होगा, जीत उतनी ही शानदार होगी।'

 

विवेकानंद जी ने भारत को हीनभावना से बाहर निकाला और विश्व पटल पर उसे 'विश्वगुरु' के रूप में स्थापित किया। उनका जीवन हमें साहस, संयम और परोपकार की सीख देता है।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: पुण्यतिथि विशेष: स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय और खास बातें

 

International Plastic Bag Free Day: इंटरनेशनल प्लास्टिक बैग फ्री डे कब और क्यों मनाया जाता है?

Image caption: A photo conveying the message of International Plastic Bag Free Day and providing information on tackling the serious issue of plastic pollution

antarrashtriya plastic bag mukt divas kab manaya jata hai: प्रत्येक वर्ष 3 जुलाई को दुनिया भर में 'इंटरनेशनल प्लास्टिक बैग फ्री डे' यानी अंतरराष्ट्रीय प्लास्टिक बैग मुक्त दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मकसद बहुत सीधा और साफ है, सिंगल-यूज़ (एक बार इस्तेमाल होने वाले) प्लास्टिक बैग के हानिकारक प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक करना और उन्हें कपड़े या जूट के थैलों जैसे सुरक्षित विकल्पों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

  • कब और कैसे हुई इसकी शुरुआत?
  • यह दिन क्यों मनाया जाता है? जानें इसके पीछे की बड़ी वजहें…
  • पर्यावरण को प्लास्टिक प्रदूषण से बचाना
  • समुद्री और वन्य जीवों की सुरक्षा
  • मानव स्वास्थ्य की रक्षा
  • ड्रेनेज सिस्टम का ब्लॉक होना
  • हम इस मुहिम में क्या योगदान दे सकते हैं?

 

 

आइए जानते हैं कि इस खास दिन की शुरुआत कब हुई और इसे मनाने की ज़रूरत क्यों पड़ी:

 

कब और कैसे हुई इसकी शुरुआत?

इंटरनेशनल प्लास्टिक बैग फ्री डे की शुरुआत साल 2008 में हुई थी। इसे 'ज़ीरो वेस्ट यूरोप' (Zero Waste Europe) के एक सदस्य 'रीज़ेरो' (Rezero) द्वारा शुरू किया गया था। शुरुआत में यह अभियान सिर्फ यूरोप के कुछ देशों तक सीमित था। लेकिन धीरे-धीरे, जैसे-जैसे दुनिया को प्लास्टिक से होने वाले नुकसान का अहसास हुआ, यह एक वैश्विक (Global) आंदोलन बन गया। अब हर साल 3 जुलाई को दुनिया के दर्जनों देश मिलकर इस मुहिम का हिस्सा बनते हैं।

 

यह दिन क्यों मनाया जाता है? जानें इसके पीछे की बड़ी वजहें…

प्लास्टिक बैग हमारे लिए कुछ मिनटों की सुविधा तो लाते हैं, लेकिन यह हमारी धरती के लिए सैकड़ों सालों का सिरदर्द बन जाते हैं। इस दिन को मनाने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

 

1. पर्यावरण को प्लास्टिक प्रदूषण से बचाना

प्लास्टिक बैग 'नॉन-बायोडिग्रेडेबल' (Non-biodegradable) होते हैं, यानी ये प्राकृतिक रूप से कभी नष्ट नहीं होते। एक साधारण प्लास्टिक बैग को पूरी तरह से टूटने या गलने में 100 से 500 साल का समय लग सकता है। तब तक यह मिट्टी और पानी में मिलकर जहरीले सूक्ष्म कणों (Microplastics) में बदल जाता है, जो प्रकृति को नुकसान पहुंचाते हैं।

 

2. समुद्री और वन्य जीवों की सुरक्षा

हर साल लाखों टन प्लास्टिक कचरा समुद्र में पहुंचता है। समुद्री जीव- जैसे कछुए, मछलियां और व्हेल्स अक्सर प्लास्टिक बैग को खाना समझकर निगल लेते हैं, जिससे उनके पेट में ब्लॉक हो जाता है और दम घुटने से उनकी मौत हो जाती है। ठीक इसी तरह, शहरों में लावारिस घूमने वाले पशु- जैसे गाय कचरे के ढेर से प्लास्टिक बैग खा लेते हैं, जो उनके लिए जानलेवा साबित होता है।

 

3. मानव स्वास्थ्य की रक्षा

जब प्लास्टिक बैग मिट्टी में दबे रहते हैं, तो इनसे निकलने वाले हानिकारक केमिकल्स जमीन के अंदर के पानी (Groundwater) में मिल जाते हैं। जब पशु या मछलियां इसे अनजाने में खाते हैं, तो यह फूड चेन (खाद्य श्रृंखला) के जरिए इंसानों के शरीर तक पहुंच जाता है, जिससे कैंसर और हार्मोनल असंतुलन जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।

 

4. ड्रेनेज सिस्टम का ब्लॉक होना

शहरी इलाकों में प्लास्टिक बैग्स का सबसे बड़ा साइड-इफेक्ट यह दिखता है कि ये नालियों और सीवर पाइपों में फंस जाते हैं। बारिश के मौसम में इसकी वजह से सड़कों पर पानी भर जाता है और बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो जाती है।

 

हम इस मुहिम में क्या योगदान दे सकते हैं?

बदलाव हमेशा घर से शुरू होता है। इस दिन को सार्थक बनाने के लिए हम अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ये छोटे बदलाव कर सकते हैं:

 

'नो' कहना सीखें: जब भी आप सब्जी या राशन लेने जाएं, तो दुकानदार से प्लास्टिक बैग लेने से साफ मना करें।

 

विकल्प अपनाएं: हमेशा अपनी गाड़ी में या जेब में एक कपड़े या जूट का थैला साथ रखें।

 

जागरूकता फैलाएं: अपने परिवार और दोस्तों को भी प्लास्टिक के नुकसान बताएं और उन्हें भी थैला इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करें।

 

एक कड़वा सच: एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में हर मिनट लगभग 20 लाख प्लास्टिक बैग्स का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि उनका औसत उपयोग समय सिर्फ 12 मिनट होता है। इस 12 मिनट की सुविधा के लिए हम अपनी धरती को सदियों का नुकसान पहुंचा रहे हैं।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

घर पर BP चेक करते समय न करें ये गलतियां, जानें ब्लड प्रेशर नापने का सही तरीका

A visual providing information on measuring blood pressure

Blood Pressure Measurement: ब्लड प्रेशर/Blood Pressure हमारे हृदय और रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण संकेतक है। यह बताता है कि हृदय द्वारा पंप किए जाने वाले रक्त का दबाव धमनियों की दीवारों पर कितना पड़ रहा है। आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, तनाव, असंतुलित खान-पान, मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) और लो ब्लड प्रेशर (Hypotension) जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसलिए समय-समय पर ब्लड प्रेशर की जांच करना बेहद जरूरी माना जाता है।ALSO READ: Health Benefits of Banana: कच्चे और पके केले में कौन कौनसे विटामिन होते हैं?

 

हालांकि, बहुत से लोग घर पर डिजिटल BP मशीन से रक्तचाप मापते समय कुछ सामान्य गलतियां कर बैठते हैं, जैसे तुरंत चलकर BP चेक करना, गलत आकार का कफ (Cuff) इस्तेमाल करना, बात करते हुए BP मापना या गलत मुद्रा में बैठना। इन कारणों से रीडिंग वास्तविक स्थिति से अलग आ सकती है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी निर्णय प्रभावित हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सही समय, सही मुद्रा और सही तकनीक अपनाकर ही ब्लड प्रेशर की सटीक रीडिंग प्राप्त की जा सकती है।

 

आइए यहां जानते हैं ब्लड प्रेशर नापने का सही तरीका क्या है?

 

1. जांच से पहले की तैयारी (30 मिनट पहले)

कैफीन और स्मोकिंग से बचें: बीपी नापने से आधा घंटा पहले चाय, कॉफी, एनर्जी ड्रिंक या सिगरेट का सेवन न करें।

 

व्यायाम न करें: भारी काम या एक्सरसाइज करने के तुरंत बाद रीडिंग न लें।

 

यूरिन पास कर लें: मूत्राशय (Bladder) भरा होने से भी ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ आ सकता है।

 

2. सही पोजीशन (बैठने का तरीका)

शांत बैठें: रीडिंग लेने से पहले कम से कम 5 मिनट तक आराम से शांत बैठें।

 

पीठ और पैर: किसी आरामदायक कुर्सी पर पीठ टिकाकर बैठें। आपके दोनों पैर जमीन पर सीधे फ्लैट होने चाहिए यानी क्रॉस करके न बैठें।

 

हाथ की पोजीशन: अपने हाथ को किसी मेज या सपोर्ट पर इस तरह रखें कि आपका कफ (Cuff) आपके दिल (Heart) के लेवल पर हो।ALSO READ: Cashew health effects: प्रतिदिन 5 काजू खाने से क्या होगा सेहत पर असर

 

3. कफ बांधने का सही तरीका

कफ को हमेशा सीधे त्वचा यानी नंगे हाथ पर बांधें, कपड़ों के ऊपर नहीं।

 

कफ न तो बहुत ढीला होना चाहिए और न ही बहुत ज्यादा टाइट अर्थात् इतना गैप हो कि दो उंगलियां अंदर जा सकें।

 

कफ की निचली कोहनी के जोड़ से लगभग 1 इंच ऊपर होनी चाहिए।

 

4. रीडिंग लेते समय

पूरी तरह शांत रहें: जब मशीन चल रही हो, तो न तो खुद बोलें और न ही दूसरों की बात का जवाब दें।

 

दो बार नापें: सटीक नतीजे के लिए 1-2 मिनट के गैप पर दो रीडिंग्स लें और उनका औसत (Average) निकालें।

 

एक जरूरी बात: अपने बीपी की रीडिंग्स को एक डायरी में तारीख और समय के साथ नोट करते रहें, ताकि आप अपने डॉक्टर को सही रिपोर्ट दिखा सकें।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: BP Control Tips: हाई ब्लडप्रेशर कम करने के घरेलू उपाय

 

स्वामी विवेकानंद पुण्यतिथि विशेष: एक ज्योति जो आज भी भारत का पथ आलोकित कर रही है

The image shows a young ascetic and a photograph of Swami Vivekananda in saffron robes

Vivekananda Mahasamadhi Diwas: कुछ तिथियां केवल इतिहास का हिस्सा नहीं होतीं, वे राष्ट्र की चेतना को झकझोरने वाली स्मृतियां बन जाती हैं। 4 जुलाई ऐसी ही एक तिथि है। वर्ष 1902 के इसी दिन बेलूर मठ में एक युवा संन्यासी ने ध्यानावस्था में अपनी अंतिम सांस ली और महासमाधि को प्राप्त हुए।ALSO READ: पुण्यतिथि विशेष: स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय और खास बातें

उनकी आयु मात्र उन्तालीस वर्ष थी, किंतु उस अल्प जीवन में उन्होंने जो वैचारिक ज्योति प्रज्वलित की, वह आज भी भारत के पथ को आलोकित कर रही है। इसलिए स्वामी विवेकानंद जी की पुण्यतिथि केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन का दिवस है।

 

यह स्वयं से पूछने का दिन है कि क्या हम उस भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जिसका स्वप्न स्वामी जी ने देखा था। महापुरुषों का जाना शून्य अवश्य छोड़ता है, किंतु यदि उनके विचार जीवित रहें तो वह शून्य निराशा नहीं बनता, प्रेरणा बन जाता है। स्वामी विवेकानंद भी ऐसे ही युगपुरुष थे।

उनका शरीर 4 जुलाई 1902 को शांत हुआ, पर उनकी वाणी, उनका आत्मविश्वास और उनका राष्ट्रदर्शन आज भी करोड़ों भारतीयों के मन में धड़कता है। यही कारण है कि उनकी पुण्यतिथि दुःख का नहीं, संकल्प का दिवस है।

 

अपने जीवन के अंतिम दिन भी उन्होंने विश्राम को नहीं, बल्कि कर्म को चुना। उन्होंने शिष्यों के साथ वेद, संस्कृत और शिक्षा पर चर्चा की, मठ के भावी कार्यों पर विचार किया और भारत के उज्ज्वल भविष्य के प्रति अपना अटूट विश्वास व्यक्त किया। इसके बाद संध्या के समय ध्यान में लीन होकर उन्होंने महासमाधि ग्रहण की। यह दृश्य केवल एक संन्यासी के जीवन का अंत नहीं था, यह कर्म, ज्ञान और अध्यात्म के अद्भुत समन्वय का अंतिम संदेश था। 

 

उन्होंने अपने जीवन से मानो यह कह दिया कि मनुष्य का मूल्य उसके जीवन की अवधि से नहीं, बल्कि उसके जीवन की दिशा से निर्धारित होता है। आज जब उनकी पुण्यतिथि पर हम उन्हें स्मरण करते हैं, तो सबसे पहले उनके उस आग्रह को याद करना चाहिए कि भारत का पुनर्निर्माण केवल भवनों, उद्योगों और योजनाओं से नहीं होगा, वह जागृत मनुष्य से होगा।

उनका विश्वास था कि यदि प्रत्येक भारतीय अपने भीतर निहित शक्ति को पहचान ले, तो भारत को विश्वगुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने बार-बार कहा कि प्रत्येक आत्मा दिव्य है। यही विचार भारतीय आत्मविश्वास का सबसे बड़ा आधार है।

 

आज का भारत निस्संदेह अनेक उपलब्धियों के साथ आगे बढ़ रहा है। विज्ञान, अंतरिक्ष, डिजिटल तकनीक, चिकित्सा, नवाचार और वैश्विक कूटनीति के क्षेत्र में देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है।

यह गर्व का विषय है। किंतु स्वामी विवेकानंद शायद आज भी यही प्रश्न पूछते, क्या हमारी संवेदनाएं भी उतनी ही विकसित हुई हैं, जितनी हमारी तकनीक? क्या हमारी प्रगति के केंद्र में मनुष्य है? क्या समाज में बढ़ती कटुता, वैमनस्य और असहिष्णुता उस भारत की पहचान हो सकती है जिसकी कल्पना उन्होंने की थी?

 

विवेकानंद ने धर्म को कभी विभाजन का माध्यम नहीं माना। उनके लिए धर्म का अर्थ था मनुष्य के भीतर निहित श्रेष्ठता का जागरण। उन्होंने सेवा को साधना बनाया और करुणा को आध्यात्मिकता का सर्वोच्च रूप बताया। वे कहते थे कि जिस समाज में भूख, अशिक्षा और अभाव हो, वहां सबसे बड़ी पूजा पीड़ित मनुष्य की सेवा है।

इसलिए उनकी पुण्यतिथि पर यदि हम केवल औपचारिक श्रद्धांजलि तक सीमित रह जाएं और समाज के कमजोर वर्गों के प्रति अपने दायित्व को भूल जाएं, तो यह उनके विचारों के साथ न्याय नहीं होगा। उनके अंतिम वर्षों में एक चिंता बार-बार दिखाई देती है।

 

भारत का भविष्य उसके युवाओं के हाथों में है। वे चाहते थे कि युवा केवल रोजगार की तलाश करने वाले न बनें, बल्कि राष्ट्र के चरित्र- निर्माता बनें आत्मविश्वास, अनुशासन, निःस्वार्थ सेवा और निर्भीकता यही उनके संदेश का सार था। आज जब युवा पीढ़ी अभूतपूर्व अवसरों और जटिल चुनौतियों के बीच खड़ी है, तब विवेकानंद जी की वाणी पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक प्रतीत होती है। उनका विश्वास था कि शक्तिशाली राष्ट्र वही बनता है, जिसके नागरिक चरित्रवान हों। 

 

पुण्यतिथि का वास्तविक अर्थ यही है कि हम महापुरुष के अधूरे कार्यों को अपना दायित्व मानें। यदि हम केवल पुष्प अर्पित कर लौट आएं, तो स्मरण अधूरा रह जाएगा। किंतु यदि हम अपने जीवन में ईमानदारी, सेवा, आत्मानुशासन और राष्ट्रहित को स्थान दें, तो वही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। महापुरुषों को सबसे अधिक सम्मान शब्दों से नहीं, आचरण से मिलता है।

 

आज समाज अनेक प्रकार के विभाजनों, स्वार्थों और तात्कालिक हितों से जूझ रहा है। ऐसे समय में विवेकानंद का संदेश हमें याद दिलाता है कि राष्ट्र केवल संविधान या सीमाओं से नहीं बनता, वह अपने नागरिकों के चरित्र, विश्वास और पारस्परिक सम्मान से बनता है

 

यदि समाज का नैतिक आधार कमजोर पड़ जाए, तो आर्थिक समृद्धि भी लंबे समय तक टिक नहीं सकती। इसलिए उन्होंने शक्ति और करुणा, आधुनिकता और आध्यात्मिकता, विज्ञान और संस्कार इन सभी के संतुलन पर बल दिया। 4 जुलाई हमें यह भी सिखाती है कि मृत्यु महापुरुषों की यात्रा का अंत नहीं होती।

दीपक बुझ सकता है, पर उसकी लौ असंख्य दीपों में जीवित रहती है। स्वामी विवेकानंद की लौ आज भी हर उस शिक्षक में जलती है जो शिक्षा को संस्कार से जोड़ता है, हर उस युवा में जो विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानता, हर उस सैनिक, किसान, वैज्ञानिक, चिकित्सक और श्रमिक में जो अपने कर्म को राष्ट्रसेवा का माध्यम मानता है। वे हर उस भारतीय में जीवित हैं जो अपने अधिकारों से पहले अपने कर्तव्यों का स्मरण करता है।

 

स्वामी विवेकानंद जी की पुण्यतिथि हमें शोकाकुल नहीं, उत्तरदायी बनाती है। यह हमें स्मरण कराती है कि भारत का भविष्य केवल सरकारों या नीतियों से नहीं बनेगा, वह तब बनेगा जब प्रत्येक भारतीय अपने भीतर सोई हुई चेतना को जगाएगा। जिस दिन सेवा हमारे स्वभाव का हिस्सा होगी, चरित्र हमारी पहचान होगा और राष्ट्रहित हमारे निर्णयों का आधार बनेगा, उसी दिन विवेकानंद के स्वप्नों का भारत साकार होने लगेगा। 

 

4 जुलाई इसलिए केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक मौन प्रश्न है, जो हर भारतीय से पूछती है, क्या हमने उस ज्योति से कुछ प्रकाश लिया, जिसे स्वामी विवेकानंद अपने पीछे छोड़ गए थे? यदि इस प्रश्न का उत्तर हमारे कर्मों में दिखाई दे, तभी उनकी पुण्यतिथि का वास्तविक अर्थ सिद्ध होगा और वही उनके प्रति हमारी सबसे सच्ची श्रद्धांजलि होगी।ALSO READ: Vivekananda Quotes: दुनिया को एक नई दिशा दे सकते हैं स्वामी विवेकानंद के ये 10 अनमोल विचार

(इस लेख में व्यक्त विचार/विश्लेषण लेखक के निजी हैं। 'वेबदुनिया' इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेती है।)