World Population Day 2026: विश्व जनसंख्या दिवस क्यों मनाया जाता है, जानें इतिहास, महत्व और इस साल की थीम

The image conveys a message about realizing the hopes and aspirations of the youth on World Population Day- for both today and the future

World Population Day: हर वर्ष 11 जुलाई को पूरी दुनिया में विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य बढ़ती जनसंख्या, प्रजनन स्वास्थ्य, लैंगिक समानता, परिवार नियोजन, शिक्षा और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों के प्रति लोगों को जागरूक करना है। तेजी से बढ़ती आबादी का प्रभाव प्राकृतिक संसाधनों, पर्यावरण, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, रोजगार और जीवन की गुणवत्ता पर पड़ता है। ऐसे में विश्व जनसंख्या दिवस लोगों को जनसंख्या से जुड़े अवसरों और चुनौतियों पर विचार करने का अवसर प्रदान करता है।

 

इस दिवस से जुड़ी तारीख, इतिहास, महत्व और इस साल की खास थीम की पूरी जानकारी यहां नीचे जानें…

 

विश्व जनसंख्या दिवस 2026 की थीम

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) द्वारा हर साल इस दिन के लिए एक विशेष थीम तय की जाती है। वर्ष 2026 के लिए विश्व जनसंख्या दिवस की आधिकारिक थीम 'युवाओं की आशाओं और आकांक्षाओं को साकार करना – आज और भविष्य के लिए' (Realizing the hopes and aspirations of young people – today and for the future) तय की गई है।

 

थीम का मायने: इस साल की थीम पूरी तरह से युवा पीढ़ी पर केंद्रित है। यह इस बात पर जोर देती है कि दुनिया भर के युवाओं को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, रोजगार के अवसर और सही निर्णय लेने के अधिकार दिए जाएं। जब देश की युवा आबादी सशक्त होगी, तभी वैश्विक स्तर पर सतत विकास और जनसंख्या संतुलन की चुनौतियों से निपटा जा सकेगा।

 

क्यों मनाया जाता है यह दिवस?

तेजी से बढ़ती आबादी के कारण दुनिया के सामने कई गंभीर चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। इस दिवस को मनाने के पीछे मुख्य उद्देश्य हैं:

 

जागरूकता बढ़ाना: लोगों को परिवार नियोजन, लैंगिक समानता, मानवाधिकार और मातृ स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना।

 

संसाधनों पर दबाव: बढ़ती जनसंख्या का पर्यावरण, भुखमरी, गरीबी, स्वास्थ्य सेवाओं और पानी व भोजन जैसे प्राकृतिक संसाधनों पर क्या असर पड़ रहा है, इस ओर सरकारों और आम जनता का ध्यान आकर्षित करना।

 

अधिकारों की रक्षा: विशेष रूप से महिलाओं और लड़कियों को उनके प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े फैसले खुद लेने के अधिकार के प्रति सशक्त बनाना।

 

विश्व जनसंख्या दिवस का इतिहास

शुरुआत कब हुई: विश्व जनसंख्या दिवस की स्थापना 1989 में 'संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम' (UNDP) की तत्कालीन गवर्निंग काउंसिल द्वारा की गई थी। इस बार विश्व जनसंख्या दिवस 2026 11 जुलाई, शनिवार को मनाया जाएगा।

 

11 जुलाई को ही क्यों चुना गया: इसके पीछे एक ऐतिहासिक घटना है। 11 जुलाई 1987 को दुनिया की कुल आबादी का आंकड़ा 5 अरब (5 Billion) को पार कर गया था। इस दिन को 'फाइव बिलियन डे' (Five Billion Day) कहा गया। दुनिया की इतनी तेज रफ्तार से बढ़ती आबादी को देखते हुए लोगों को जागरूक करने की जरूरत महसूस हुई और तय किया गया कि हर साल 11 जुलाई को 'विश्व जनसंख्या दिवस' मनाया जाएगा। तथा आधिकारिक तौर पर पहला विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई 1990 को 90 से अधिक देशों में मनाया गया था।

 

विश्व जनसंख्या दिवस मनाने का महत्व

वर्तमान में दुनिया की आबादी 8 अरब के आंकड़े को पार कर चुकी है, जिसमें भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बना हुआ है। ऐसे समय में इस दिन का महत्व और अधिक बढ़ जाता है:

 

सतत विकास: यह दिन याद दिलाता है कि यदि जनसंख्या अनियंत्रित ढंग से बढ़ती रही, तो गरीबी उन्मूलन, भुखमरी और जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करना नामुमकिन हो जाएगा।

 

नीति निर्धारण: यह सरकारों और नीति निर्माताओं को डेटा के आधार पर स्वास्थ्य, रोजगार और शहरीकरण की बेहतर योजनाएं बनाने के लिए एक मंच प्रदान करता है।

 

स्वास्थ्य और सुरक्षा: अवांछित गर्भधारण को रोकने और सुरक्षित मातृत्व के माध्यम से मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम करने में यह वैश्विक अभियान बड़ी भूमिका निभाता है।

 

विश्व जनसंख्या दिवस- FAQs

 

1. विश्व जनसंख्या दिवस कब मनाया जाता है?

हर वर्ष 11 जुलाई को।

 

2. विश्व जनसंख्या दिवस की शुरुआत कब हुई?

सन् 1989 में इस दिन की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा की गई थी।

 

3. विश्व जनसंख्या दिवस का मुख्य उद्देश्य क्या है?

जनसंख्या से जुड़ी चुनौतियों का समाधान खोजते हुए प्रत्येक व्यक्ति के अधिकार, स्वास्थ्य और बेहतर जीवन की दिशा में जागरूकता फैलाना।

 

4. विश्व जनसंख्या दिवस क्यों मनाया जाता है?

परिवार नियोजन, जनसंख्या, प्रजनन स्वास्थ्य, शिक्षा और सतत विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए।

 

5. विश्व जनसंख्या दिवस 2026 की थीम क्या है?

युवाओं की आशाओं और आकांक्षाओं को साकार करना – आज और भविष्य के लिए। (Realizing the hopes and aspirations of young people – today and for the future) है। 

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

सूखी जड़ों से लौटती हरियाली

Greenery returning from dry roots

अप्रैल का महीना था। मौसम पूरी तरह से नए पौधे लगाने के अनुकूल नहीं था, फिर भी घूमने के दौरान एक सुंदर सा पौधा मन को इतना भा गया कि उसे अपने साथ घर ले आए। घर पहुँचते ही उसे एक बड़े गमले में सावधानी से लगा दिया। यह जानते हुए भी कि समय शायद सही नहीं है, मन में एक छोटी-सी आशा थी- “शायद यह यहाँ भी खिल उठे।”

 

उसके बाद शुरू हुआ देखभाल का एक शांत सिलसिला। पौधे को कड़ी धूप से बचाकर छाँव में रख दिया, उसे रोज़ पानी देने लगे और उसकी मिट्टी को सँभालने लगे। लेकिन कुछ ही समय बाद महसूस हुआ कि पौधा धीरे-धीरे सूख रहा है; पत्तियाँ मुरझाने लगी हैं और उसकी हरियाली खोने लगी है। मन के लिए यह स्वीकार करना कठिन था कि इतनी देखभाल के बाद भी वह बच नहीं पा रहा। फिर भी, हमने पानी देना बंद नहीं किया; शायद भीतर कहीं एक उम्मीद बाकी थी।

 

धीरे-धीरे वह पौधा पूरी तरह सूख गया। उसके सूखे हुए हिस्सों को काट कर निकाल दिया गया, लेकिन उसकी जड़ें मिट्टी में वैसे ही रहने दीं। गमला भी उसी स्थान पर रखा रहा। समय बीतता गया; बाकी पौधों को पानी देते समय उस सूखे गमले में भी थोड़ी-सी नमी डाल देते। यह कोई नियम नहीं था, बस उस पौधे से मन का एक रिश्ता था, और शायद विश्वास भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ था।

 

करीब डेढ़-दो महीने बाद, एक सुबह जब रोज़ की तरह पौधों में पानी डाल रहे थे, तभी अचानक नज़र उस गमले पर पड़ी। मिट्टी के भीतर से, जड़ के पास से एक नन्ही-सी हरी पत्ती बाहर झाँक रही थी! वह दृश्य साधारण होते हुए भी भीतर तक छू लेने वाला था। मन में एक साथ आनंद, संतोष और आश्चर्य की भावनाएँ उमड़ पड़ीं। ऐसा लगा जैसे सूखी मिट्टी के भीतर जीवन चुपचाप अपना रास्ता बना रहा था।

 

और उसी क्षण मन में एक प्रश्न कौंधा… “अगर मैंने पानी देना बंद कर दिया होता तो?”

 

शायद हमारा जीवन भी कुछ ऐसा ही है। कई बार हमारे सपने, रिश्ते, प्रयास या परिस्थितियाँ बिल्कुल उसी सूखे पौधे की तरह दिखाई देने लगती हैं; बाहर से सब समाप्त-सा लगता है। हम मेहनत करते हैं, इंतज़ार करते हैं, फिर भी परिणाम नज़र नहीं आते। ऐसे समय में मन हार मानने लगता है; लगता है कि अब कुछ नहीं बदलेगा।

 

लेकिन सच यह है कि हर परिवर्तन तुरंत दिखाई नहीं देता। कुछ प्रक्रियाएँ मिट्टी के भीतर चलती रहती हैं, बिल्कुल जड़ों की तरह। बाहर भले ही सूखापन हो, भीतर जीवन अपनी तैयारी कर रहा होता है। ज़रूरत केवल इतनी होती है कि हम अपना विश्वास और प्रयास बनाए रखें।

 

सकारात्मकता का अर्थ हमेशा खुश रहना नहीं होता, बल्कि कठिन समय में भी उम्मीद का एक छोटा-सा दीपक जलाए रखना होता है। कई बार सफलता, नया आरंभ या जीवन की हरियाली ठीक उसी क्षण जन्म ले रही होती है, जब हम हार मानने वाले होते हैं।

 

उस छोटे से पौधे ने सिखाया कि हर सूखापन अंत नहीं होता, और हर प्रतीक्षा व्यर्थ नहीं जाती। कभी-कभी जीवन बस यह देख रहा होता है कि हम अपनी उम्मीदों को कितनी देर तक पानी देते रह सकते हैं।

लेखिका:- प्रीता गडकरी

 

Avatar Meher Baba: अवतार मेहेर बाबा कौन थे, कब और क्यों मनाया जाता है मौन पर्व?

The picture shows Avatar Meher Baba, who observed silence continuously for 44 years

Spiritual Guru Merwan Sheriar Irani: अवतार मेहेर बाबा 20वीं शताब्दी के प्रसिद्ध आध्यात्मिक संत और गुरु थे। उनका वास्तविक नाम मेरवान शेरियार ईरानी था। वे प्रेम, करुणा, सेवा और मानव एकता का संदेश देने के लिए जाने जाते हैं। मेहेर बाबा का सबसे अनूठा संकल्प था कि उन्होंने 10 जुलाई 1925 से आजीवन मौन धारण किया और फिर कभी बोलकर संवाद नहीं किया। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में हर वर्ष 10 जुलाई को मौन पर्व/ Silence Day मनाया जाता है।ALSO READ: कब है गुरु पूर्णिमा 2026 में? जानें तिथि, मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि

 

अवतार मेहेर बाबा कौन थे?

जन्म और मूल नाम: उनका जन्म 25 फरवरी 1894 को पुणे में एक पारसी (ईरानी) परिवार में हुआ था। उनका बचपन का नाम मेरवान शेरियर इरानी था। 'मेहेर बाबा' नाम उन्हें उनके शुरुआती शिष्यों ने दिया, जिसका अर्थ है 'दयालु पिता'।

 

आध्यात्मिक यात्रा: जब वे 19 वर्ष के थे, तब उनकी मुलाकात एक प्रसिद्ध सूफी संत हजरत बाबाजान से हुई, जिन्होंने मेरवान के भीतर आध्यात्मिक चेतना जागृत की। इसके बाद वे शिरडी के साईं बाबा, उपासना महाराज, नारायण महाराज और ताजुद्दीन बाबा जैसे महान आध्यात्मिक गुरुओं के संपर्क में आए।ALSO READ: Devshayani Ekadashi 2026: देवशयनी एकादशी से शुरू होंगे चातुर्मास, 4 महीने के लिए लग जाएगी मंगल कार्यों पर रोक

 

कार्य: उन्होंने महाराष्ट्र के अहमदनगर के पास 'मेहेराबाद' को अपना मुख्य केंद्र बनाया। उन्होंने कुष्ठ रोगियों, गरीबों और मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों, जिन्हें वे 'मस्त' कहते थे की सेवा के लिए कई औषधालय, स्कूल और आश्रम खोले।

 

प्रसिद्ध संदेश: उनका सबसे प्रसिद्ध कथन है: 'I have come not to teach, but to awaken' (उन्होंने अपने प्रसिद्ध 'यूनिवर्सल मैसेज'/ Universal Message में कहा था, मैं यहां सिखाने नहीं, बल्कि जगाने आया हूं) और उनका एक सार्वभौमिक नारा है— 'Don't worry, be happy' (चिंता मत करो, खुश रहो)। 31 जनवरी 1969 को मेहराबाद, अहमदनगर (महाराष्ट्र) में उन्होंने महासमाधि ली। 

 

मौन पर्व (Silence Day) कब मनाया जाता है?

मेहेर बाबा के अनुयायियों और प्रेमियों द्वारा हर साल 10 जुलाई को 'मौन पर्व' के रूप में मनाया जाता है। आध्यात्मिक गुरु मेहेर बाबा के अनुयायियों के लिए आज का दिन बेहद खास है। मेहेर बाबा ने 10 जुलाई 1925 से आजीवन मौन धारण किया था, इसलिए उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए प्रतिवर्ष 10 जुलाई को 'मौन दिवस' मनाया जाता है।

 

मौन पर्व क्यों मनाया जाता है?

मेहेर बाबा ने 10 जुलाई 1925 को मौन धारण किया था, जो उनके जीवन के अंत (1969 में देहत्याग) तक यानी 44 वर्षों तक लगातार जारी रहा। इसी ऐतिहासिक दिन की याद में हर साल 10 जुलाई को मौन पर्व मनाया जाता है। 

 

बाबा के मौन रहने और इस पर्व को मनाए जाने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

 

शब्दों से परे संवाद: मेहेर बाबा का मानना था कि ईश्वर अनादि काल से मौन रहकर काम कर रहा है। इंसानों ने ईश्वर की वाणी यानी शब्दों को समझने के बजाय उन पर विवाद करना शुरू कर दिया। इसलिए उन्होंने कहा कि वे वाणी से नहीं, बल्कि सीधे लोगों के 'हृदय' से संवाद करेंगे।

 

आध्यात्मिक अनुशासन: जब बाबा मौन थे, तो वे शुरू में एक 'अल्फाबेट बोर्ड'/ अक्षर पट्टिका की मदद से और बाद में केवल हाथ के इशारों से बात करते थे। उन्होंने अपने शिष्यों को सिखाया कि जीभ का मौन दरअसल मन को शांत करने और आंतरिक ऊर्जा को संचित करने की पहली सीढ़ी है।

 

प्रेम की गहराई: बाबा के शिष्यों के अनुसार, बाबा का कहना था कि जब दो लोग गुस्से में होते हैं तो उनके दिलों की दूरी बढ़ जाती है, इसलिए वे चिल्लाते हैं। लेकिन जब दो लोग गहरे प्रेम में होते हैं, तो वे बहुत धीरे बोलते हैं, और जब प्रेम पराकाष्ठा पर होता है, तो शब्दों की जरूरत ही नहीं पड़ती; केवल मौन ही काफी होता है।

 

मौन पर्व कैसे मनाया जाता है?

हर साल 10 जुलाई को मेहेर बाबा के अनुयायी स्वेच्छा से 24 घंटे (9 जुलाई की आधी रात से 10 जुलाई की आधी रात तक) का पूर्ण मौन व्रत रखते हैं। आज भी इस दिन वे अपनी सामान्य दिनचर्या के काम करते हुए भी किसी शब्द का उच्चारण नहीं करते और ईश्वर के नाम का मानसिक स्मरण करते हैं। उनका प्रमुख आश्रम मेहराबाद (अहमदनगर, महाराष्ट्र) में स्थित है, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं। उनके अनुयायी भारत के अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और अन्य देशों में भी बड़ी संख्या में हैं। 

 

अवतार मेहेर बाबा मौन पर्व- FAQs

 

1. अवतार मेहेर बाबा कौन थे?

वे 20वीं शताब्दी के प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु थे, जिन्होंने प्रेम, सेवा और मानव एकता का संदेश दिया।

 

2. मौन पर्व कब मनाया जाता है?

हर वर्ष 10 जुलाई को मौन पर्व मनाया जाता है।

 

3. मेहेर बाबा ने मौन कब धारण किया था?

उन्होंने 10 जुलाई 1925 को मौन धारण किया था।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: देवशयनी एकादशी से चातुर्मास क्यों शुरू होता है? जानें धार्मिक मान्यता और आध्यात्मिक महत्व

Trip To London : लंदन में न सड़क पर धरने-प्रदर्शन, न चक्का जाम

Trip To London

Trip To London: जानकर अजीब-सा लगता है ना? लेकिन यह हकीकत है। ऐसा नहीं है कि ऐसा मैंने नहीं देखा, बल्कि वास्तविकता में भी है। होते हैं, लेकिन पूर्व सूचना के आधार पर, निर्धारित जगह पर, निश्चित समय पर। चारों तरफ पुलिस घेरे रहेगी, हेलिकॉप्टर से निगरानी होगी, लेकिन हुड़दंगलीला न प्रदर्शनकारियों की चलेगी, न पुलिस की। यह और बात है कि फ्रांस में फुटबाल के दीवानों ने जो किया, उसने तो सारी हदें पार कर दी। लेकिन, ये अपवाद हैं। हां, कोई अकेला व्यक्ति भी सड़क के बीच के फुटपाथ जितने ऊंचे डिवाइडर पर तख्ती लेकर चुपचाप या कुछ बोलते हुए भी प्रदर्शन कर सकता है, जिसे पुलिस जवान अपने घेरे में रखेंगे, लेकिन करेंगे कुछ नहीं, जब तक कि वह कुछ गैर कानूनी हरकत न करे। कितना अटपटा लगता है ना?

 

लंदन की छोटी-छोटी लेकिन कुछ महत्वपूर्ण बातों पर चर्चा करते हैं। हमारे इंदौर की तरह एक दिन छोड़कर पानी नहीं आता,न पानी के लिये टैंकर या बोरिंग के भरोसे हैं। वहां पानी 24 घंटे आता है और दो-तीन मंजिल तक आसानी से पहुंच जाए, इतना प्रेशर रहता है। सिंक के या बाथरूम के नल से लेकर पानी पी सकते हैं। आप यदि आशंकित हो तो आरओ या वाटर फिल्टर लगा सकते हो। फूड या किसी भी सामान की डिलेवरी के लिए ज्यादातर साइकिल, बैटरी साइकिल या कोई बाइक का उपयोग करता है। ये चौराहों पर सिग्नल जंप करते, लेफ्ट टर्न से राइट जाते हुए कभी नहीं दिखेंगे। वहां एटीएम के काउंटर के अलग कैबिन नहीं, बल्कि किसी भी भवन की दीवार में फिट रहते हैं, जिन्हें तोड़कर कैश लूटने की संभावना न्यूनतम होती है।

 

सड़क, मोहल्ले, मेट्रो, सिटी बस, मॉल, रेस्टारेंट या बगीचे में कुत्ते नजर आएंगे, लेकिन वे स्ट्रीट डॉग नहीं होते, बल्कि पालतू होते हैं। मालिक हाथ या बैग में पोट्‌टी पॉलिथिन लेकर चलता है। चूंकि सभी फुटपाथ पर चलते हैं तो कहीं-कहीं टकराने जैसी नौबत आए तो तत्काल वे रुककर सामने वाले को संकेत दे देते हैं। किसी को जल्दी हो तो एक्सक्यूज मी कहकर रास्ता मांगेंगे। अरे भिया, जरा छेटी होना-ऐसा नहीं बोलते। यह शिष्टाचार जबरदस्त है। एक दिन में बीसियों बार ऐसा मौका आता है। इंदौर में तो हम फुटपाथ पर चलते नहीं और चलें तो टक्कर देकर निकल जाएं।

 

हर छोटी-बड़ी दुकान, मॉल, शॉपिंग सेंटर, रेस्टारेंट हो, ज्यादातर जगह नो कैश के बोर्ड टंगे होते हैं। हम भारतीयों की मुश्किल हो जाती है, जो रुपए के बदले पाउंड ले जाने की याद तो रखते हैं, लेकिन क्रेडिट, डेबिट कार्ड नहीं रखते। वे 90 प्रतिशत तक कैशलेस इकॉनॉमी को अपना चुके हैं। मेट्रो, सिटी बस, कार टैक्सी, शॉपिंग सभी कुछ कार्ड से। इसलिए भारत से कोई जा रहा हो तो ट्रेवल एजेंट आपको यहां पर एक कार्ड दे देगा, जो विदेश में कहीं भी भुगतान के काम आएगा। इसमें फायदा यह भी है कि वहां बैलेंस खत्म होने पर एजेंट को फोन करने पर वह यहां से रकम उसमें डिपॉजिट कर सकता है या आपका कोई रिश्तेदार भी जमा कर सकता है।

Trip To London

भारतीय वैसे तो कोशिश करते हैं कि खाने का कुछ सामान यहां से ले जाएं। जैसे थेपले, खाखरे, दूध के पराठे, नमकीन, अचार, जीरावन, रेडी टू इट वाले सब्जियों के पैकेट, रेडिमेड चाय-कॉफी के पाउच आदि। वहां कोई भी सामग्री इसलिए बजट के बाहर हो जाती है कि एक पाउंड 125 से 130 रुपए का होता है। तब आप दिमाग लगाते हैं कि पौने दो पाउंड की चाय 450 में और मसाला डोसा 1300 रुपए का आता है। तब आप अनावश्यक रूप से खाने-पीने से बचते हैं, जो कि गलत होता है। पानी की बोतल ही 80 रुपए की आती है। इस गणित से आप विदेश में कहीं घूम नहीं सकते। खासकर, यूरोप, ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, रूस या किसी भी विकसित पश्चिमी देश में।

 

अब एक चलन और बढ रहा है कि यदि 4-6 लोग या परिवार जा रहा है तो वे होटल की बजाय अपार्टमेंट में रुकना पसंद करते हैं। वह एक, दो, तीन बेडरूम का मिल जाता है, जिसमें 6-7 व्यक्ति रुक सकते हैं। वहां खाना बनाने की सामग्री के अलावा सब मिलेगा। जैसे, गैस, इलेक्ट्रिक चूल्हा, इंडक्शन, हॉट वाटर पॉट, क्रॉकरी, रसोई बनाने के नॉन स्टीक कूकवेयर, फ्रीज, माइक्रोवेव ओवन, कॉफी मशीन, वॉशिंग मशीन वगैरह सब कुछ। बाथरूम के लिए पर्याप्त टॉवेल, नेपकीन, टॉयलेट पेपर, सोप भी। बस कहीं-कहीं एक बड़ी गड़बड़ होती है- न तो बेडरूम में अंदर से चिटकनी या लॉक होता है, न बाथरूम में कपड़े टांगने की खूंटी। और तो और टॉयलेट के साथ हैंड शॉवर भी नहीं होता, न ही मग होता है। टॉयलेट पेपर से ही सफाई करना होता है। ये अपार्टमेंट होटल से सस्ते पड़ते हैं और पसंद का खाना मिल जाता है। दाल, चावल, आटा, मसाले, सब्जियां वगैरह वहां आसानी से मिलता है।

 

आज जब भारत में पोस्टल सर्विस काफी कमजोर हो चुकी है, ब्रिटेन में रॉयल पोस्ट काफी लोकप्रिय और प्रामाणिक है। वहां बहुतायत से लाल रंग के लैटर बॉक्स भी मिलेंगे और रॉयल पोस्ट की वैन कूरियर सेवा के तहत घर पहुंच सेवा भी देती है। जिसके तहत आप भारत के निजी कूरियर वाले की तरह कोई भी छोटा-बड़ा सामान कहीं भी भेज सकते हैं। (क्रमश:) 
-लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं। 

 

राजनीति और धर्म का मूल जीवन का अध्यात्म हैं!

डॉक्टर राममनोहर लोहिया ने कहा था राजनीति अल्पकालीन धर्म है और धर्म दीर्घकालीन राजनीति। राजनीति और धर्म ने काल के प्रवाह में जीवन को गहराई से सजाया संवारा और सतत मानव जीवन के समक्ष प्रस्तुत चुनौतियां का समाधान निकाला है। राजनीति और धर्म ने कमजोर से कमजोर परिस्थिति वाले नागरिक को भी बेहतरी के सपने देखने और अपने सपनों को साकार करने का आनंदमयी साधन प्रदान किया है।

 

आज का अधिकांश राजनीतिक नेतृत्व और धार्मिक समूह भांति भांति के रंग रूप की पताकाएं फहराकर धर्म-कर्म की इतिश्री समझने लगा है। इस तरह की ताकतें एकजुट होकर समूची दुनिया में राजनीति और धर्म के मूल स्वरूप को ही एक तरह से बदलने में लगे हैं। देश और दुनिया भर में राजनैतिक और धार्मिक नेतृत्व करने वाले अधिकांश समूहों ने राजनीति और धर्म की गहराई और मर्म को अपने मूल स्वरूप से उलट एकदम भिन्न पर लगभग पूरी तरह एक ऐसी उथली मन:स्थिति के करीब पहुंचा दिया हैं, जिससे बाहर निकलना आज की दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती है। राजनीति यानि एक तरह से सत्ता की जोड़-तोड़ का अंधा एवं यंत्रवत खेल और धर्म यानी अध्यात्म से दूर अशांति और अकारण लोभ-लालच मय असहिष्णुता की पराकाष्ठा का अविवेकी हल्ला हो गया है। यह स्थिति या परिस्थिति तो राजनीति और धर्म की मूल अवधारणा किसी भी तरह से नहीं मानी जा सकती है। ALSO READ: आभासी दुनिया और वास्तविक दुनिया!

 

राजनीति और धर्म दोनों ही अपने मूल स्वरूप से उलट एक भिन्न स्थिति में लगभग पहुंच गए हैं। दोनों की मूल भूमिका लोक समाज की चेतना और वैचारिक सम्पन्नता को निरन्तर आगे बढ़ाने वाली होना चाहिए। पर आज के कालखंड में दोनों ही लोकसमाज मे एक तरह से प्रायः आपसी मनमुटाव, वैमनस्य और नाहक वितंडावाद के पोषक बनते हुए आभासित होते या दिखाई पड़ते है। इसीलिए आज राजनीति और धर्म दोनों ने देश और दुनिया में जो रूप धारण कर लिया है, उससे लोक समाज एक अत्यंत जटिल यांत्रिक भूलभुलैया में निरंतर उलझता जा रहा है। ALSO READ: सृष्टि का आनंद बनाम आनंद की सृष्टि!

 

राजनीति एक तरह से यंत्रवत, अकारण उत्तेजित तथा ऊलजलूल बयानबाजी करने वाले अविचारशील व्यक्तिओं का एक बड़ा हिस्सा या जमावड़ा बनती जा रही है। जिसका कुल नतीजा निष्क्रिय भीड़भाड़ वाली या अकारण उत्तेजित भीड़ की मनोदशाग्रस्त  अधिकांश मनुष्य वर्तमान समय में लगातार उलझते ही जा रहे हैं। लोकसमाज में सामान्य सहज विचार और विवेक का आग्रह लगातार क्षीण हो रहा है। मनुष्य जीवन को विवेक सम्मत तरिके से समस्या सुलझाने की प्रेरणा देना राजनीति का मूल काम है जिसे सत्ता की अंधी दौड़ में निरंतर दौड़ती हुई राजनीतिक जमातों ने पूरी तरह उलट दिया है। धर्म पताका हवा में लहराते रहने मात्र से धर्म की आध्यात्मिक भूमिका मनुष्य के मन में स्वत: ही विकसित नहीं हो सकती। ALSO READ: मानवीय सवालों की सुनामी में बढ़ती समाधान शून्यता!

 

धर्म मनुष्य के प्राकृतिक स्वरूप और मूल चेतना का जीवंत विस्तार है और आध्यात्मिक भूमिका की बुनियाद या आधारशिला है। धर्म मनुष्य जीवन की आध्यात्मिक भूमिका का निर्धारण और विस्तार करता है। धर्म एक तरह से मानव जीवन की आचार संहिता और मनुष्य मात्र के प्राकृतिक स्वरूप को व्यवस्थित रूप में जीवन के दर्शन और आचरण में उतारने का व्यवहारिक रूप स्वरूप हैं। एक सवाल मन में यह भी उठता है कि धर्म का धर्म क्या है? क्या धर्म मनुष्य मात्र तक ही सीमित है या धर्म समूचे जगत के लिए है। जैसे हवा का धर्म निरंतर हर कहीं मौजूद रहना है। जल का धर्म भी किसी न किसी रूप में हर कहीं भूमि और भुवन में बने रहना है। वायु और जल किसी न किसी रूप में इस धरती पर मौजूद वातावरण और जीवन के विभिन्न रूपों में चाहे वह जीव जगत हो या वनस्पति जगत हो दोनों का अस्तित्व वायु और जल के अभाव में संभव ही नहीं है।

 

इसी तरह एकता और अनेकता एक दूसरे से वायु और जल की तरह ही आपस में रची-बसी है, उसको एक दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता है। मनुष्य अपने आप में एक ही रूप स्वरूप में होते हुए भी अनेक रूप-स्वरूप में जगत में बना रहता है। मनुष्य और वनस्पति का धर्म एक ही है जीवन की निरंतरता को कायम रखना। क्या मनुष्य या जीव और वनस्पति के अभाव में जीवन संभव हो सकता है? अनेक जीव जंतुओं और वनस्पति जगत के जीवन के प्रवाह से ही जीवन या जीवन की निरंतरता बनी रहती है। तो इस तरह से सहजता से समझा जा सकता है कि अनेकता और एकता दोनों ही जीवन की निरंतरता या प्रवाह का ही मूल रूप है। हम इस अर्थ में एक और अनेक को एक दूसरे से अलग नहीं कर सकते।

 

राजनीति और धर्म को हम खंडित रुप में देखने परखने और अनुभूत करने के कारण दोनों को मूलतः एक दूसरे से अलग ही समझने लगे हैं। दोनों ही मूलत: जीवन के मूल प्रवाह से ही जन्मे हैं और कालक्रम अनुसार एक दूसरे से लिपटकर अपने गुण-धर्म को सदैव मूल रूप में कायम रखते हैं और कालक्रम में विरोधाभासी रूप से अपने मूल गुण धर्म से विचलित होते हुए आभासित होते दिखाई पड़ते हैं। राजनीति और धर्म इस जगत में जीवन की ऐसी अनोखी मानवीय गतिविधियां हैं जो जीवन काल में शांति और अशांति से परे रहकर जीवन को आध्यात्मिक साधना की दुनिया में निरंतर लेजाने का मार्ग प्रशस्त करती है।

 

राजनीति और धर्म हमारे जीवन का क्षणिक तमाशा या कोरी हलचल न होकर इस जगत में जीवन का गहरा सनातन अध्यात्म है। जैसे जल की एक बूंद और वायु या धूल का एक कण की ताकत हमें दिखाई नहीं देती पर जगत और जीवन में जो भी कुछ घटता है वह पंचतत्व के सूक्ष्म स्वरूप के विराट साकार स्वरूप में आ जाने और पुनः मूल स्वरूप में विलीन हो जाने का अंतहीन सिलसिला ही है। राजनीति और धर्म अध्यात्म के विस्तार और संकुचित होते रहने की अनंत लहरें हैं। लहरों का आना जाना आभासी दुनिया का एक एक क्षण या कण है जिसमें जीव और जीवन रचा बसा है। यही वह मूल विचार हैं जिसे हम जीवन और जगत का अध्यात्म मान सकते हैं।

Monsoon Glow Secrets: उमस भरे मौसम में भी चेहरे पर रहेगा पार्लर जैसा निखार, नोट कर लें ये नेचुरल स्किन केयर टिप्स

A photo providing information on keeping the skin healthy and glowing during the rainy season

baarish ke mausam mein khubsurti ke tips: बदलते मौसम में आपकी त्वचा को खास देखभाल की जरूरत होती है। अपनी स्किन को हेल्दी और ग्लोइंग बनाए रखने के लिए इस आसान रूटीन को फॉलो करें:ALSO READ: घर पर BP चेक करते समय न करें ये गलतियां, जानें ब्लड प्रेशर नापने का सही तरीका

 

1. डीप क्लींजिंग है सबसे पहला कदम

उमस के कारण चेहरे पर पसीना, धूल और गंदगी जल्दी जम जाती है, जिससे रोमछिद्र (pores) बंद हो जाते हैं। तो दिन में कम से कम दो बार यानी सुबह और रात को सोने से पहले एक माइल्ड यानी हल्के फेस वॉश से चेहरा साफ करें।

 

ऑयली स्किन के लिए: अगर चेहरा बार-बार तैलीय हो जाता है, तो मुल्तानी मिट्टी या नींबू और शहद का होममेड फेस पैक लगाएं। यह त्वचा से एक्स्ट्रा ऑयल को सोख लेता है।

 

2. जेंटल एक्सफोलिएशन (सौम्य स्क्रब)

हफ्ते में 1 या 2 बार त्वचा से डेड स्किन सेल्स यानी मृत कोशिकाओं को हटाना जरूरी है, लेकिन ध्यान रहे कि स्क्रब बहुत ज्यादा हार्ड न हो।

 

नेचुरल उपाय: बेसन, हल्दी और ओटमील/ जई का आटा को मिलाकर घर पर ही एक बेहतरीन नेचुरल स्क्रब तैयार कर सकते हैं। यह बिना किसी नुकसान के त्वचा को साफ करता है।

 

3. हाइड्रेशन को न करें नजरअंदाज

अक्सर लोग सोचते हैं कि मानसून में हवा में पहले से नमी है, तो मॉइस्चराइजर की क्या जरूरत? यहीं पर सबसे बड़ी गलती होती है।

 

अंदर से हाइड्रेशन: दिन में 8 से 10 ग्लास पानी जरूर पिएं ताकि शरीर के टॉक्सिन्स/ विषाक्त पदार्थ बाहर निकल सकें।

 

सही मॉइस्चराइजर चुनें: भारी क्रीम की जगह वॉटर-बेस्ड या जेल-बेस्ड लाइट मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करें। हयालूरोनिक एसिड (Hyaluronic Acid) और ग्लिसरीन वाले प्रोडक्ट्स त्वचा की नमी को बिना चिपचिपाहट के लॉक रखते हैं।

 

4. धूप न हो, फिर भी सनस्क्रीन है जरूरी

बादल होने का मतलब यह नहीं है कि आपकी त्वचा सुरक्षित है। सूरज की हानिकारक यूवी किरणें बादलों को पार करके भी आपकी स्किन को नुकसान पहुंचा सकती हैं और वक्त से पहले झुर्रियां ला सकती हैं।

 

टिप: घर से बाहर निकलते समय कम से कम SPF 30 या उससे ज्यादा वाली नॉन-कॉमेडोजेनिक यानी जो रोमछिद्रों को बंद न करे, यह सनस्क्रीन जरूर लगाएं।

 

5. लाइट मेकअप और पर्सनल हाइजीन

वॉटरप्रूफ मेकअप: इस मौसम में हैवी फाउंडेशन या थिक मेकअप से बचें। अगर मेकअप करना जरूरी हो, तो केवल लाइट और वॉटरप्रूफ प्रोडक्ट्स का ही इस्तेमाल करें।

 

इन्फेक्शन से बचाव: यदि आप बारिश में भीग जाते हैं, तो तुरंत साफ पानी से नहाएं और खुद को अच्छी तरह सुखाएं। शरीर के मोड़ वाले हिस्सों- जैसे उंगलियों के बीच, गर्दन, अंडरआर्म्स को सूखा रखें ताकि फंगल इन्फेक्शन और खुजली की समस्या न हो।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

आगे तो बढ़ रहे हैं… पर किस दिशा में? कहीं ऐसा तो नहीं कि जीवन बेहतर बनाने की दौड़ में हम जीना ही भूलते जा रहे हैं?

The image depicts a disconnect between relationships and self-distance in the pursuit of a better life.

सुबह आंख खुलते ही हमारी दौड़ शुरू हो जाती है। काम, जिम्मेदारियां, बढ़ते खर्च, बच्चों का भविष्य और जीवन में कुछ बेहतर कर दिखाने की बेचैनी। एक काम पूरा नहीं होता कि दूसरा सामने खड़ा हो जाता है। हम चलते रहते हैं—कभी अपनों के लिए, कभी अपने सपनों के लिए और कभी केवल इसलिए कि रुककर यह सोचने का समय ही नहीं मिलता कि हम जा कहां रहे हैं।

 

धीरे-धीरे यही दौड़ हमारा जीवन बन जाती है। हम कमाते हैं, आगे बढ़ते हैं, नई उपलब्धियां प्राप्त करते हैं। बाहर से देखने पर लगता है कि सब कुछ ठीक चल रहा है। लेकिन कभी रात के शांत माहौल में मन पूछता है— 'मैं इतना कुछ कर रहा हूं… लेकिन क्या सचमुच उस जीवन के करीब पहुंच रहा हूं, जिसे जीना चाहता हूं?'

शायद यह प्रश्न हम सभी को समय-समय पर स्वयं से पूछना चाहिए।

 

आज हमारे पास सुविधाएं अधिक हैं, लेकिन मन की शांति कम होती जा रही है। संपर्क बहुत हैं, लेकिन मन की बात कहने वाले लोग कम हैं। घर बड़े हो रहे हैं, पर साथ बैठने का समय घट रहा है। कमाई बढ़ रही है, लेकिन चिंताएं भी साथ-साथ बढ़ती जा रही हैं। समस्या आगे बढ़ने में नहीं है। चिंता तब शुरू होती है, जब गति बढ़ती जाए और दिशा पीछे छूट जाए; जब हम यह देखना भूल जाएं कि हम जा कहां रहे हैं और जो पा रहे हैं, उसके बदले क्या खोते जा रहे हैं।

 

हम सोचते हैं— थोड़ा और कमा लें, फिर परिवार को समय देंगे। थोड़ा और सफल हो जाएं, फिर स्वास्थ्य पर ध्यान देंगे। जिम्मेदारियां कम हो जाएं, फिर अपने मन की सुनेंगे। लेकिन जिम्मेदारियां कभी पूरी तरह समाप्त नहीं होतीं। एक लक्ष्य पूरा होता है, दूसरा सामने आ जाता है। वर्ष बीतते जाते हैं। बच्चे बड़े हो जाते हैं, माता-पिता बूढ़े हो जाते हैं, शरीर अपनी थकान बताने लगता है और कुछ रिश्ते केवल इसलिए दूर हो जाते हैं, क्योंकि हमने उनके लिए समय निकालना बंद कर दिया था।

 

फिर कभी एक दिन मनुष्य के पास वह सब कुछ हो सकता है, जिसे पाने के लिए उसने वर्षों मेहनत की थी। लेकिन उसी समय उसे यह भी महसूस हो सकता है कि जिन लोगों के लिए वह इतना कुछ जुटा रहा था, उनके साथ बिताने वाला समय कहीं पीछे छूट गया। जीवन की सबसे बड़ी विडंबना शायद यही है— हम भविष्य को बेहतर बनाने में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि वर्तमान को जीना भूल जाते हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि सपने देखना, धन कमाना या सफल होना गलत है। बड़ा सपना देखिए। खूब मेहनत कीजिए। अपना भविष्य संवारिए। अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाइए। अपने परिवार को बेहतर जीवन दीजिए। लेकिन समय-समय पर यह भी देखिए कि सफलता पाने की कीमत क्या चुका रहे हैं।

 

यदि अधिक कमाने के लिए स्वास्थ्य खो रहे हैं, परिवार का भविष्य बनाने के लिए परिवार से ही दूर होते जा रहे हैं या दुनिया की नजरों में सफल बनने के बाद भी भीतर संतोष नहीं है, तो शायद आपको मेहनत कम करने की नहीं, अपनी दिशा सुधारने की आवश्यकता है। कभी शांत मन से अपने जीवन का हिसाब कीजिए। केवल यह मत देखिए कि पिछले वर्ष आपकी आय कितनी बढ़ी। यह भी देखिए कि आपके संबंध कितने मजबूत हुए, स्वास्थ्य कितना बेहतर हुआ, आपने अपने किसी सपने की ओर कितने कदम बढ़ाए और क्या आज आप एक वर्ष पहले की तुलना में अधिक संतुष्ट मनुष्य हैं। क्योंकि कई बार जीवन के खाते में उपलब्धियां बढ़ती रहती हैं, लेकिन जिन चीजों से जीवन सचमुच समृद्ध होता है, उनका संतुलन धीरे-धीरे घटता जाता है।

 

यदि इन प्रश्नों के उत्तर मन के अनुकूल नहीं हैं, तो स्वयं को असफल मत मानिए। आत्ममूल्यांकन का उद्देश्य स्वयं को दोष देना नहीं, समय रहते अपनी दिशा सुधारना है। आज हमारी एक बड़ी समस्या यह भी है कि हम दूसरों के जीवन को देखकर अपनी सफलता का मूल्य तय करने लगे हैं। किसी की बड़ी नौकरी देखकर अपनी नौकरी छोटी लगती है। किसी का बड़ा घर देखकर अपना घर छोटा लगने लगता है। किसी की उपलब्धियां देखकर अपना जीवन साधारण लगने लगता है। हम भूल जाते हैं कि हर व्यक्ति की यात्रा अलग होती है। यदि खुशी का आधार दूसरों से आगे निकलना है, तो यह दौड़ कभी समाप्त नहीं होगी। आप कितना भी पा लें, कोई न कोई आपसे आगे दिखाई देगा। उपलब्धियां बढ़ती रहेंगी, लेकिन संतोष हमेशा कुछ कदम आगे खड़ा रहेगा।

 

इसलिए दूसरों से आगे निकलने के बजाय स्वयं से आगे बढ़ने का प्रयास कीजिए। कल की तुलना में आज थोड़ा अधिक समझदार हों, स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें, अपनों के लिए उपस्थित रहें और अपने काम में बेहतर बनने का प्रयास करें। वास्तविक प्रगति वही है, जो उपलब्धियों के साथ मनुष्य के भीतर संतोष भी बढ़ाए। जीवन में असफल होना सबसे बड़ी हार नहीं है। मनुष्य असफल होकर सीख सकता है, फिर उठ सकता है और नया रास्ता चुन सकता है।

 

सबसे बड़ी भूल तब होती है, जब मनुष्य वर्षों तक केवल इसलिए चलता रहता है, क्योंकि वह चल रहा था— बिना यह देखे कि जिस मंजिल की ओर जा रहा है, वह उसकी अपनी मंजिल है भी या नहीं। यदि आज आपको लगता है कि जीवन की दिशा में कुछ बदलना चाहिए, तो सब कुछ एक साथ बदलने की कोशिश मत कीजिए।

एक छोटा परिवर्तन चुनिए।

 

अपने स्वास्थ्य के लिए प्रतिदिन थोड़ा समय निकालिए। किसी अपने से खुलकर बात कीजिए। लंबे समय से टाले गए काम की शुरुआत कीजिए। कोई नया कौशल सीखिए। अपने समय का कुछ हिस्सा उस सपने को दीजिए, जिसे जिम्मेदारियों के कारण वर्षों से पीछे छोड़ते आए हैं। छोटे कदम साधारण दिखाई देते हैं, लेकिन लगातार सही दिशा में उठाए गए छोटे कदम ही एक दिन जीवन की बड़ी तस्वीर बदल देते हैं। काम कीजिए, लेकिन स्वयं को समाप्त करके नहीं। पैसा कमाइए, लेकिन अपने संबंधों को गरीब बनाकर नहीं। सफलता प्राप्त कीजिए, लेकिन अपनी शांति खोकर नहीं। आगे बढ़िए, लेकिन इतना भी नहीं कि पीछे मुड़कर देखने पर अपने ही लोग बहुत दूर छूट गए हों।

 

याद रखिए, आप केवल जिम्मेदारियां निभाने के लिए पैदा नहीं हुए हैं। आप स्वयं भी एक मनुष्य हैं। आपके अपने सपने हैं। कुछ लोग हैं, जिन्हें आपकी उपलब्धियों से अधिक आपकी उपस्थिति की आवश्यकता है। कुछ इच्छाएं हैं, जिन्हें हमेशा 'किसी दिन' के लिए नहीं छोड़ा जा सकता। और आपके पास एक जीवन है—जिसका बीता हुआ समय वापस नहीं आएगा। इसलिए यदि आपको लगता है कि आप गलत दिशा में कुछ दूर निकल आए हैं, तो निराश मत होइए। कमजोर हुए संबंध फिर मजबूत किए जा सकते हैं। स्वास्थ्य की देखभाल आज से शुरू की जा सकती है। वर्षों से अधूरा सपना फिर उठाया जा सकता है। गलत निर्णयों से सीखा जा सकता है। और जीवन की दिशा किसी भी उम्र में बदली जा सकती है। जब तक जीवन शेष है, तब तक एक बेहतर जीवन बनाने की संभावना भी शेष है।

 

आपको सब कुछ छोड़ने की आवश्यकता नहीं है। केवल यह पहचानने की आवश्यकता है कि क्या महत्वपूर्ण है, क्या बदलना है और पहला कदम किस दिशा में उठाना है।

इसलिए आगे बढ़ते रहिए। बड़े सपने देखिए। खूब मेहनत कीजिए। सार्थक सफलता प्राप्त कीजिए। लेकिन समय-समय पर स्वयं से यह अवश्य पूछिए— क्या मैं केवल अधिक कमा रहा हूं, या भीतर से भी समृद्ध हो रहा हूं? क्या जिन लोगों के लिए मैं मेहनत कर रहा हूं, उनके लिए मेरे पास समय भी है? क्या मैं हर वर्ष केवल उम्र में बढ़ रहा हूं, या एक बेहतर मनुष्य भी बन रहा हूं?

 

और सबसे महत्वपूर्ण—मैं जिस जीवन को बेहतर बनाने के लिए दिन-रात दौड़ रहा हूं… क्या उसे सचमुच जी भी रहा हूं? यदि इन प्रश्नों में आपको अपना जीवन दिखाई देता है, तो स्वयं से निराश मत होइए। बीता हुआ समय वापस नहीं आएगा, लेकिन बचा हुआ समय अभी भी आपका है। जीवन की दिशा बदलने के लिए हमेशा किसी बड़े अवसर की आवश्यकता नहीं होती। कई बार एक ईमानदार आत्ममूल्यांकन, एक सही निर्णय और सही दिशा में उठाया गया छोटा-सा कदम ही पर्याप्त होता है।

 

इसलिए आगे बढ़िए, लेकिन केवल इसलिए नहीं कि दुनिया आगे बढ़ रही है। अपनी मंजिल पहचानिए, अपनों को साथ रखिए और समय-समय पर यह अवश्य देखिए कि आपकी मेहनत आपको उस जीवन के करीब ले जा रही है या नहीं, जिसे आप सचमुच जीना चाहते हैं। क्योंकि जीवन में सबसे महत्वपूर्ण यह नहीं कि हम कितनी दूर पहुंचे। महत्वपूर्ण यह है कि सही दिशा में चलते हुए हमने अपने लोगों को कितना समय दिया, अपने सपनों को कितना जिया और स्वयं को कितना बचाए रखा।

 

जीवन के अंत में शायद सबसे बड़ा संतोष यही होगा कि हम यह कह सकें— मैंने केवल जीवन बिताया नहीं… उसे सचमुच जिया।

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बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

An image featuring delicious dishes to prepare during the rainy season, accompanied by a caption about monsoon-special snack recipes

Easy Snack Recipes: बारिश की बूंदें गिर रही हों और किचन से अदरक वाली चाय की खुशबू आ रही हो, तो पैर अपने आप स्नैक्स की तलाश में बढ़ जाते हैं। चाय का असली मजा तभी आता है जब साथ में कुछ बेहद कुरकुरा और चटपटा हो।ALSO READ: Monsoon Special Recipes: मानसून की 5 बेहतरीन रेसिपीज, देखते ही मुंह में आ जाएगा पानी

 

इस मानसून अपनी शाम की चाय का स्वाद दोगुना करने के लिए बनाएं ये 5 सुपर क्रिस्पी स्नैक्स, जिन्हें खाकर हर कोई आपकी कुकिंग की तारीफ करेगा:

 

1. कुरकुरे 'चावल के आटे के रिंग्स'

यह एक ऐसा स्नैक है जो चाय के साथ सबसे ज्यादा क्रिस्पी लगता है और इसे आप बनाकर कुछ दिनों के लिए स्टोर भी कर सकते हैं।

 

कैसे बनाएं: एक कप पानी में थोड़ा सा घी, नमक, अजवाइन, जीरा और तिल डालकर उबालें। पानी उबलने पर इसमें एक कप चावल का आटा मिलाकर गैस बंद कर दें और ढक दें। हल्का ठंडा होने पर इसे आटे की तरह गूंथ लें। अब छोटी-छोटी लोइयां लेकर पतली रस्सी जैसी बेलें और दोनों छोर जोड़कर रिंग्स यानी छल्ले बना लें। इन्हें मध्यम आंच पर सुनहरा और क्रिस्पी होने तक तलें।

 

2. कैफ़े स्टाइल 'क्रिस्पी कॉर्न फ्रिटर्स' 

बारिश के मौसम में ताजे भुट्टे के दानों से बना यह स्नैक चाय के साथ एक परफेक्ट कॉम्बिनेशन है।

 

कैसे बनाएं: उबले हुए स्वीट कॉर्न के दानों में बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, हरा धनिया, थोड़ा सा बेसन और कुरकुरेपन के लिए बराबर मात्रा में चावल का आटा मिलाएं। इसमें चाट मसाला, लाल मिर्च पाउडर और हल्का सा पानी छिड़क कर एक गाढ़ा मिश्रण तैयार करें। चम्मच की मदद से इन्हें गरम तेल में डालें और एकदम क्रिस्पी होने तक डीप फ्राई करें।

 

3. लच्छा आलू पकौड़ा

अगर घर में कोई खास सब्जी नहीं है, तो सिर्फ आलू और प्याज से यह बेहद क्रिस्पी स्नैक मिनटों में बन जाता है।

 

कैसे बनाएं: कच्चे आलुओं को कद्दूकस कर लें और पानी से अच्छी तरह धोकर पूरा पानी निचोड़ लें। अब इन आलू के लच्छों में लंबा कटा प्याज, बारीक कटी हरी मिर्च, थोड़ा सा कॉर्नफ्लोर या अरारोट, मैदा, नमक और काली मिर्च मिलाएं। इसमें पानी बिल्कुल नहीं डालना है। इसके छोटे-छोटे लच्छेदार पकौड़े बनाकर तेज आंच पर तलें। यह बाजार के चिप्स से भी ज्यादा क्रिस्पी बनते हैं।

 

4. गार्लिक ब्रेड स्टिक्स

अगर आप चाय के साथ कुछ वेस्टर्न और क्रिस्पी ट्राई करना चाहते हैं, तो यह झटपट बनने वाली रेसिपी आपके लिए ही है।

 

कैसे बनाएं: कमरे के तापमान पर रखे मक्खन में बारीक कद्दूकस किया हुआ लहसुन, ऑरेगैनो, चिली फ्लेक्स और हरा धनिया मिलाकर एक गार्लिक बटर तैयार करें। अब रेगुलर ब्रेड स्लाइस को लंबे स्टिक्स के आकार में काट लें। इन स्टिक्स पर दोनों तरफ यह बटर लगाएं और तवे पर धीमी आंच पर दोनों तरफ से एकदम क्रिस्पी टोस्ट होने तक सेकें।

 

5. क्रिस्पी मूंग दाल भजिया 

रिमझिम बारिश में मूंग की दाल के मंगौड़े या भजिए मिल जाएं, तो शाम बन जाती है। यह ऊपर से बहुत कुरकुरे और अंदर से जालीदार होते हैं।

 

कैसे बनाएं: धुली मूंग की दाल को 2-3 घंटे के लिए भिगो दें। फिर इसे बिना पानी डाले या सिर्फ 1 चम्मच पानी के साथ दरदरा पीस लें। इस बैटर को 5 मिनट तक हाथ से अच्छे से फेंटें ताकि यह हल्का हो जाए। अब इसमें कुटा हुआ खड़ा धनिया, सौंफ, हींग, हरी मिर्च, अदरक का पेस्ट और ढेर सारा बारीक कटा प्याज और कढ़ी पत्ता मिलाएं। छोटे-छोटे भजिए गरम तेल में डालकर गोल्डन ब्राउन होने तक तलें।

 

चाय-स्नैक स्पेशल टिप: इन सभी क्रिस्पी स्नैक्स के साथ पुदीने-धनिया की तीखी हरी चटनी और लहसुन-टमाटर की चटपटी चटनी परोसें। और हां, चाय में अदरक के साथ थोड़ा सा दालचीनी का टुकड़ा या लौंग जरूर डालें, यह मानसून में गले को भी राहत देगा और स्वाद भी बढ़ाएगा।

 

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Monsoon Health Tips: बारिश के मौसम के लिए जानें खास 7 डाइट प्लान और इम्युनिटी बढ़ाने वाले घरेलू उपाय

A photo providing information on a diet plan for staying healthy during the rainy season

Monsoon and Health: स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून में संतुलित आहार, पर्याप्त पानी का सेवन, नियमित व्यायाम, व्यक्तिगत स्वच्छता और मच्छरों से बचाव जैसी आदतें अपनाकर कई मौसमी बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। साथ ही यदि तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, जोड़ों में दर्द, त्वचा पर चकत्ते, लगातार कमजोरी या उल्टी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें सामान्य वायरल बुखार समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय रहते डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।ALSO READ: Monsoon health tips: सावधान! बारिश में बीमारियों के खतरे से कैसे बचाएं खुद को, ये लक्षण दिखें तो ना करें नजरअंदाज

 

अगर आप जानना चाहते हैं कि मानसून में क्या खाएं, किन बातों का ध्यान रखें, इम्यूनिटी कैसे मजबूत करें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के आसान उपाय क्या हैं, तो यह लेख आपके लिए उपयोगी साबित होगा। यहां आपको मानसून में स्वस्थ और सक्रिय रहने के लिए जरूरी स्वास्थ्य टिप्स, सावधानियां और विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए महत्वपूर्ण उपाय विस्तार से बताए गए हैं।

 

यहां जानें मानसून डाइट प्लान

 

* सुबह की शुरुआत

गुनगुना पानी पिएं।

नाश्ते में पोहा, दलिया, ओट्स, मूंग दाल चीला या इडली जैसी हल्की और पौष्टिक चीजें लें।

मौसमी फलों का सेवन करें, लेकिन उन्हें अच्छी तरह धोकर खाएं।

 

* दोपहर का भोजन

दाल, रोटी, चावल और मौसमी सब्जियों का संतुलित भोजन करें।

दही की जगह यदि मौसम या स्वास्थ्य के अनुसार उपयुक्त लगे तो छाछ या अन्य हल्के विकल्प लें।

अधिक तला-भुना और मसालेदार भोजन सीमित रखें।

 

* शाम का नाश्ता

भुना चना, मखाना, स्प्राउट्स या सूप जैसे हल्के विकल्प चुनें।

चाय के साथ तले हुए स्नैक्स की बजाय पौष्टिक नाश्ता लें।

 

* रात का खाना

हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन करें।

रात में बहुत देर से भोजन करने से बचें।

 

* इम्युनिटी बढ़ाने वाले घरेलू उपाय

1. हल्दी वाला दूध

हल्दी में मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा का समर्थन करने में सहायक माने जाते हैं।

 

2. अदरक और तुलसी की चाय

अदरक और तुलसी से बनी गर्म चाय गले को आराम पहुंचा सकती है और मौसम बदलने के दौरान आरामदायक महसूस कराने में मदद कर सकती है।

 

3. विटामिन C युक्त खाद्य पदार्थ

आंवला, अमरूद, संतरा और नींबू जैसे खाद्य पदार्थ विटामिन C के अच्छे स्रोत हैं, जो प्रतिरक्षा प्रणाली के सामान्य कार्य में भूमिका निभाते हैं।

 

4. पर्याप्त पानी पिएं

प्यास कम लगने पर भी दिनभर पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी पीते रहें।

 

5. पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम

रोज 7–8 घंटे की नींद लें और कम से कम 30 मिनट योग, वॉक या हल्की एक्सरसाइज करें।

 

6. प्रोटीन युक्त आहार लें

दालें, पनीर, अंडे (यदि आप खाते हों), सोया और अन्य प्रोटीन स्रोत शरीर के संतुलित पोषण में मदद करते हैं।ALSO READ: Health Benefits of Banana: कच्चे और पके केले में कौन कौनसे विटामिन होते हैं?

 

स्वच्छता का रखें ध्यान

बाहर से आने के बाद हाथ धोएं।

गीले कपड़े तुरंत बदलें।

घर के आसपास पानी जमा न होने दें, ताकि मच्छरों का प्रजनन कम हो।

 

* किन चीजों से बचें?

 

* बासी या खुले में रखा भोजन।

* अस्वच्छ स्थानों का स्ट्रीट फूड।

*  बहुत अधिक तला-भुना और अत्यधिक मीठा भोजन।

* बिना आवश्यकता के एंटीबायोटिक या अन्य दवाओं का सेवन।

 

संक्षेप में कहा जाए तो मानसून में फिट रहने के लिए कोई एक 'जादुई' खाद्य पदार्थ या घरेलू नुस्खा पर्याप्त नहीं होता। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, अच्छी स्वच्छता और मच्छरों से बचाव-इन सभी का संयोजन बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि तेज बुखार, लगातार उल्टी, सांस लेने में तकलीफ, गंभीर कमजोरी या डेंगू, मलेरिया अथवा चिकनगुनिया जैसे संक्रमण के लक्षण दिखाई दें, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Monsoon Health Tips: बारिश में फिट कैसे रहें?

 

बाल कविता: अकड़म बकड़म

Illustrations related to entertaining poems for young children

अकड़म बकड़म दही चटाकन

चिड़िया चूज़े चूं चूं चहकन।

 

नन्हा गोलू दौड़ा आंगन

हंसी बिखेरे प्यारी चुनमुन।

 

गुड़िया रानी पहनें पायल

छम छम छम छम छन छन छन छन।

 

बिल्ली मौसी दुबकी आई

दूध देख कर मन में लपकन।

 

चंदा मामा झांकें खिड़की

तारे गिनती प्यारी गुनगुन।

 

अकड़म बकड़म हंसी ठिठोली

बिट्टू रोता ठन ठन ठन ठन।

 

इंद्रधनुष के सात रंग में

खेल रहा है देखो बचपन।