Trump vs Netanyahu: ‘यहूदी भी आपसे तंग आ चुके हैं…’; ट्रंप ने गाजा सीजफायर को लेकर नेतन्याहू को लगाई फटकार, नई किताब में बड़ा दावा

Trump vs Netanyahu: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच सितंबर 2025 में फोन पर हुई एक कथित तीखी बातचीत को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। यह दावा ‘रेजीम चेंज: इनसाइड द इंपीरियल प्रेसिडेंसी ऑफ डोनाल्ड ट्रंप (Regime Change: Inside The Imperial Presidency Of Donald Trump)’ नामक नई किताब में किया गया है। इस किताब को ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के रिपोर्टर मैगी हैबरमैन और जोनाथन स्वान (Maggie Haberman और Jonathan Swan) ने लिखा है।

नई किताब में किए गए ये दावे अमेरिका और इज़राइल के शीर्ष नेतृत्व के बीच पर्दे के पीछे मौजूद तनाव की तस्वीर पेश करते हैं। यदि ये दावे सही साबित होते हैं, तो यह दिखाता है कि गाजा सीजफायर को लेकर ट्रंप प्रशासन ने नेतन्याहू पर काफी दबाव बनाया था, भले ही दोनों नेताओं की सार्वजनिक छवि लंबे समय तक मजबूत सहयोगियों की रही हो।

किताब के अनुसार, गाजा में सीजफायर को लेकर ट्रंप और नेतन्याहू के बीच गंभीर मतभेद पैदा हो गए थे। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रंप ने फोन पर नेतन्याहू से नाराजगी जताते हुए कहा, “सब लोग तुमसे तंग आ चुके हैं, बिबी। सभी यहूदी भी तुमसे परेशान हैं। यहां तक कि इस कॉल पर मौजूद दो यहूदी भी तुमसे तंग आ चुके हैं।”

गाजा सीजफायर को लेकर बढ़ा था तनाव

किताब के मुताबिक, ट्रंप-नेतन्याहू के बीच यह बातचीत सितंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) के दौरान हुई थी। उस समय ट्रंप प्रशासन गाजा युद्ध को समाप्त करने के लिए 20 सूत्रीय शांति योजना पर काम कर रहा था।

बताया जा है कि ट्रंप को आशंका थी कि नेतन्याहू अमेरिकी मध्यस्थों द्वारा तैयार किए गए सीजफायर समझौते से पीछे हट सकते हैं। इसी वजह से उन्होंने कथित तौर पर नेतन्याहू पर समझौते को स्वीकार करने का दबाव बनाया। रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप ने नेतन्याहू से कहा कि युद्ध बहुत लंबा खिंच चुका है और अब समझौते को आगे बढ़ाना जरूरी है।

कॉल में मौजूद थे विटकॉफ और कुशनर

किताब में दावा किया गया है कि इस फोन कॉल में ट्रंप के मध्य पूर्व दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद दामाद जेरेड कुशनर भी शामिल थे। दोनों को डर था कि महीनों की बातचीत के बाद तैयार किया गया शांति प्रस्ताव इजरायल की अनिच्छा के कारण विफल हो सकता है। इसी वजह से अमेरिकी पक्ष नेतन्याहू से स्पष्ट प्रतिबद्धता चाहता था।

कतर में हमले के बाद बढ़ी नाराजगी

किताब के अनुसार, सितंबर 2025 की शुरुआत में इजरायल ने कतर की राजधानी दोहा में हमास नेताओं को निशाना बनाकर एक हवाई हमला किया था। उस समय सीजफायर को लेकर बातचीत जारी थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कार्रवाई से कतर नाराज हो गया।

इतना ही नहीं कतर ने मध्यस्थता की प्रक्रिया जारी रखने पर आपत्ति जताई। इससे युद्धविराम प्रयासों को झटका लगा। किताब का दावा है कि विटकॉफ और कुशनर को लगा कि उन्हें इजरायल की योजनाओं के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी गई थी। इससे अमेरिकी टीम के भीतर भी असंतोष पैदा हुआ।

ट्रंप ने नेतन्याहू को बताया ‘कॉन मैन’

किताब के लेखकों के अनुसार ट्रंप ने निजी बातचीत में नेतन्याहू को ‘कॉन मैन’ (धोखेबाज या चालाक व्यक्ति) भी कहा था। किताब का दावा है कि ट्रंप की राजनीतिक शब्दावली में यह सबसे कठोर टिप्पणियों में से एक मानी जाती है। यह खुलासा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सार्वजनिक तौर पर ट्रंप और नेतन्याहू को लंबे समय तक करीबी सहयोगी के रूप में देखा जाता रहा है।

आखिरकार नेतन्याहू ने माना प्रस्ताव

किताब के मुताबिक, शुरुआती विरोध और तनाव के बावजूद नेतन्याहू ने आखिरकार अमेरिकी सीजफायर को स्वीकार कर लिया। किताब में दावा किया गया है कि दोहा हमले के लगभग 18 दिन बाद इजरायल इस समझौते पर सहमत हुआ। बाद में नेतन्याहू ने अपनी ओर से खेद भी जताया।

हालांकि, ये सभी दावे पत्रकारों की किताब में प्रकाशित डिटेल्स पर आधारित हैं। कथित फोन कॉल की कोई आधिकारिक रिकॉर्डिंग या सार्वजनिक ट्रांसक्रिप्ट सामने नहीं आई है। इसलिए इन आरोपों और दावों को फिलहाल किताब में किए गए दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।

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24000 के पार Nifty बंद, Sensex में 790 प्वाइंट्स का उछाल, डेढ़ लाख करोड़ रुपये बढ़ी निवेशकों की दौलत

Share Market Rally: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिकी सीनेट में एक ऐतिहासिक प्रस्ताव से झटका लगा जिससे अब ईरान पर हमला करने उनके लिए मुश्किल हो गया तो इसने मार्केट में काफी रौनक बढ़ा दी। ट्रंप को इस करंट से घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 900 प्वाइंट्स अधिक उछल पड़ा तो निफ्टी 50 भी 24100 के काफी करीब पहुंच गया। ब्रोडर लेवल पर भी मार्केट में अच्छी रिकवरी आई और शुरुआती गिरावट से उबरते हुए निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 ग्रीन हो गए।

सेक्टरवाइज मेटल शेयरों ने जोरदार वापसी की कोशिश की और निफ्टी मेटल करीब 1% की गिरावट से रिकवर करते हुए ग्रीन हुआ लेकिन मुनाफावसूली के चलते यह फिर 0.40% की गिरावट के साथ बंद हुआ। आईटी सेक्टर और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर ने मिलकर मार्केट में शानदार रौनक बिखेरी और इनके निफ्टी इंडेक्स करीब 2% मजबूत हुए। शुरुआती कारोबार में गिरावट के बाद पीएसयू बैंक में भी रिकवरी हुई और अब इसके निफ्टी इंडेक्स करीब आधे फीसदी की बढ़त है तो निफ्टी रियल्टी 2% से अधिक मजबूत हुआ।

ओवरऑल आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप डेढ़ लाख करोड़ रुपये से अधिक बढ़ गया यानी निवेशकों की दौलत में डेढ़ लाख करोड़ रुपये से अधिक का इजाफा हुआ है। इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो आज सेंसेक्स (Sensex) 790.54 प्वाइंट्स यानी 1.04% के उछाल के साथ 76,991.22 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 197.55 प्वाइंट्स यानी 0.83% की बढ़त के साथ 24,021.65 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 989.69 प्वाइंट्स उछलकर 77,190.37 और निफ्टी 265.95 प्वाइंट्स चढ़कर 24,090.05 तक पहुंच गया था।

₹1.86 लाख करोड़ बढ़ी निवेशकों की दौलत

एक कारोबारी दिन पहले यानी 23 जून 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,74,59,448.771 करोड़ था। आज यानी 23 जून 2026 को यह बढ़कर ₹4,76,45,817.53 करोड़ पर पहुंच गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹1,86,368.759 करोड़ का इजाफा हुआ है।

Sensex के 23 स्टॉक्स ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें आज 23 स्टॉक्स ग्रीन जोन में बंद हुए हैं। सबसे अधिक तेजी आज इंडिगो, ट्रेंट और टेक महिंद्रा में रही। वहीं दूसरी तरफ आज सेंसेक्स पर सबसे अधिक गिरावट एनटीपीसी, टाटा स्टील और मारुति में रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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147 शेयर एक साल के हाई पर

बीएसई पर आज 4430 शेयरों की ट्रेडिंग हुई। इसमें 2215 शेयर आज मजबूत हुए तो 2034 में गिरावट रही जबकि 181 में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके अलावा 147 शेयर एक साल के हाई और 63 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए।

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अब ईरान पर हमला नहीं कर पाएंगे ट्रंप! अमेरिकी सीनेट ने दिया बड़ा झटका, इस प्रस्ताव के बाद क्या पंगु हो गए राष्ट्रपति?

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ईरान की ‘फटकार’ के बाद घुटनों पर आए शहबाज शरीफ! ‘बड़बोलेपन’ पर यू-टर्न लेकर अब ट्रंप को ही सिखा रहे पाठ

Pakistan PM Shehbaz Sharif: पड़ोसी देश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अपनी ‘इंटरनेशनल बेइज्जती’ कराने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं देते। इस बार उन्होंने कुछ ऐसा ही तीर हवा में चलाया, जो सीधा घूमकर उन्हीं को लग गया। हाल ही उन्होंने अपनी संसद में खड़े होकर सीना ठोकते हुए दावा कर दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच तेहरान के ‘बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम’ को लेकर बातचीत चल रही है।

बस फिर क्या था, ईरान को शहबाज शरीफ का यह ‘ज्ञान’ कतई रास नहीं आया। ईरान ने सरेआम पाकिस्तान को ऐसी फटकार लगाई कि शहबाज शरीफ को तुरंत ‘यू-टर्न’ लेना पड़ा। अब वह कल तक जिस मिसाइल प्रोग्राम पर अमेरिका-ईरान की पंचायत करा रहे थे, आज उसी मिसाइल प्रोग्राम के सबसे बड़े रक्षक बन गए हैं! आइए समझते हैं पाकिस्तान के इस नए कूटनीतिक ब्लंडर की पूरी कहानी।

जब ईरान के राष्ट्रपति के सामने ही खुल गई शहबाज की ‘ज्ञान की पोटली’

ये पूरा ड्रामा तब शुरू हुआ जब ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान खुद इस्लामाबाद के दौरे पर थे। मेहमान घर में बैठा था और शहबाज शरीफ ने पाकिस्तानी संसद में खड़े होकर अपनी कूटनीतिक समझ का ढिंढोरा पीट दिया। उन्होंने कह डाला कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच ईरान की मिसाइलों को लेकर गुपचुप चर्चा चल रही है।

ईरान का करारा जवाब

ईरान के वार्ताकारों और अधिकारियों को जैसे ही इस ‘अफवाह’ की भनक लगी, उन्होंने तुरंत शहबाज शरीफ के बयान को सरेआम खारिज कर दिया। ईरानी टीम ने दो टूक कहा, ‘पाकिस्तानी पीएम को चल रही राजनयिक प्रक्रियाओं के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है, उनका यह दावा पूरी तरह गलत है।’ ईरान ने साफ कर दिया कि उनकी मिसाइलें उनका संप्रभु रक्षा मामला हैं और यह किसी भी टेबल पर बातचीत का हिस्सा नहीं हैं।

फटकार पड़ते ही पलटे शहबाज

अंतरराष्ट्रीय मंच पर ‘नो-इंफॉर्मेशन’ का तमगा मिलने के बाद शहबाज शरीफ ने जो यू-टर्न लिया, उसे देखकर गिरगिट भी शरमा जाए। एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में अचानक शहबाज शरीफ के सुर बदल गए। अब वह ईरान के मिसाइल कार्यक्रम का खुलकर बचाव करने लगे।

शहबाज शरीफ ने उलटे दुनिया से ही सवाल पूछ लिया कि आखिर सिर्फ तेहरान के बैलिस्टिक मिसाइल जखीरे की ही आलोचना क्यों की जा रही है? उन्होंने यह ज्ञान भी दे डाला कि इस मुद्दे को विवाद बनाना क्षेत्रीय तनाव को कम करने के प्रयासों को और उलझा सकता है।

एक तरफ ट्रंप, दूसरी तरफ ईरान; ‘सैंडविच’ बन गया पाकिस्तान!

इस पूरे वाकये ने इस्लामाबाद को सांप-छछूंदर वाली स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हैं, जो ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को लेकर लगातार आंखें लाल किए रहते हैं। दूसरी तरफ पड़ोसी देश ईरान है, जिससे पाकिस्तान को अपनी सीमाएं और संबंध बचाकर रखने हैं।

अब ईरान पर हमला नहीं कर पाएंगे ट्रंप! अमेरिकी सीनेट ने दिया बड़ा झटका, इस प्रस्ताव के बाद क्या पंगु हो गए राष्ट्रपति?

शहबाज शरीफ का यह यू-टर्न अब कूटनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारों का कहना है कि तेहरान से मिली सीधी और तीखी सार्वजनिक प्रतिक्रिया के बाद शहबाज शरीफ केवल अपनी गलती को सुधारने और ईरान के गुस्से को शांत करने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं।

अब ईरान पर हमला नहीं कर पाएंगे ट्रंप! अमेरिकी सीनेट ने दिया बड़ा झटका, इस प्रस्ताव के बाद क्या पंगु हो गए राष्ट्रपति?

US Iran Conflict: मिडिल ईस्ट में कुछ दिनों से थोड़ी शांति है। हालांकि, सीजफायर समझौते के बाद कई ऐसे मौके हुए जब ऐसा लगा है कि कभी भी युद्ध भड़क सकता है। अब इस पर एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन यानी सीनेट ने एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पास किया है, जिसमें राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ईरान के साथ युद्ध करने के अधिकार को चुनौती दी गई है। यह प्रस्ताव व्हाइट हाउस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

सीनेट में यह प्रस्ताव 50-48 के मामूली अंतर से पास हुआ। इस प्रस्ताव के आने के बाद अब ईरान पर हमला करना मुश्किल हो गया है। यह प्रस्ताव ट्रंप को निर्देश देता है कि जब तक अमेरिकी संसद सैन्य कार्रवाई की स्पष्ट अनुमति नहीं देती, तब तक वे ईरान के साथ चल रहे इस युद्ध से अमेरिकी सेना को दूर रखें।

क्या है इस प्रस्ताव का मतलब?

चूंकि यह एक ‘कनकरेंट रेजोल्यूशन’ है, इसलिए इसे राष्ट्रपति ट्रंप के पास हस्ताक्षर या वीटो के लिए नहीं भेजा जाएगा। कानूनी रूप से इसकी बाध्यता को लेकर भले ही विवाद हो, लेकिन इस वोटिंग ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिकी संसद के दोनों सदन अब इस युद्ध के खिलाफ खड़े हैं।

फरवरी 2026 के अंत में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद यह युद्ध शुरू हुआ था, जिसने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को हिलाकर रख दिया था। यह अमेरिकी इतिहास में साल 1973 के ‘वॉर पावर्स रेजोल्यूशन’ के बाद पहला मौका है जब संसद के दोनों सदनों ने राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई रोकने का निर्देश देने वाला ऐसा प्रस्ताव पारित किया है।

शांति समझौते के बीच क्यों बढ़ी ट्रंप की टेंशन?

यह वोटिंग ऐसे समय में हुई है जब ट्रम्प प्रशासन ईरान के साथ हुए शुरुआती शांति समझौते (MoU) को 60 दिनों के भीतर एक अंतिम समझौते में बदलने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। इस समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में ढील और होर्मुज जलडमरूमध्य का विवाद शामिल है।

सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता चक शूमर ने इस वोटिंग के जरिए रिपब्लिकन सांसदों को भी घेर लिया। उन्होंने कहा, ‘रिपब्लिकन बंद दरवाजों के पीछे ट्रंप के युद्ध, उनकी गोपनीयता और ईरान के साथ उनके खराब सौदे की जितनी चाहें उतनी शिकायत कर सकते हैं, लेकिन इस युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने का एकमात्र तरीका यह है कि रिपब्लिकन खुलकर सामने आएं और कार्रवाई करें।’

नवंबर चुनाव और महंगाई का डर

अमेरिकी सांसदों के बीच इस युद्ध को लेकर बढ़ती बेचैनी की एक बड़ी वजह आगामी नवंबर में होने वाले मिडिल-टर्म इलेक्शन हैं। युद्ध के कारण वैश्विक व्यापारिक मार्ग ठप हो गए हैं, जिससे ऊर्जा और तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। इससे अमेरिकी जनता महंगाई से बेहाल है और चुनाव से ठीक पहले यह ट्रम्प सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक मुसीबत बन चुका है।

शांति वार्ता के बीच ईरान ने फिर दिखाए कड़े तेवर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच शुरुआती बातचीत के बाद भी कई बड़े विवाद सुलझने का नाम नहीं ले रहे हैं:

परमाणु ठिकानों की जांच से इनकार: ईरान ने साफ कर दिया है कि संयुक्त राष्ट्र (UN) की परमाणु एजेंसी को उन ठिकानों का निरीक्षण करने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिन पर पिछले साल अमेरिका और इजरायल ने बमबारी की थी। हालांकि, ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि ईरान ‘सर्वोच्च स्तर’ की जांच के लिए मान गया है।

होर्मुज जलमार्ग पर पाबंदी: ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बगेर गालिबाफ ने दोटूक कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब कभी भी युद्ध से पहले वाले ‘फ्री पैसेज’ के दिनों में नहीं लौटेगा। यानी इस अहम समुद्री तेल मार्ग पर पाबंदियां बनी रहेंगी।

Trump On Iran: ‘अगर ईरान ने परमाणु निरीक्षण…’, ट्रंप ने फिर तेहरान को दी धमकी, संकट में शांति समझौता; तनाव के बीच होर्मुज से निकला रिकॉर्ड तेल

मिडिल ईस्ट में जारी महीनों से तनाव को उस समय विराम लगा, जब ईरान-अमेरिका ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। दोनों देशों ने कई शर्तों पर सहमति भी जताई थी। मगर एक बार फिर परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि अगर ईर

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GIFT Nifty बाजार के फ्लैट खुलने के दे रहा संकेत, ग्लोबल बाजार में मिला-जुला ट्रेड, क्रूड की कीमतों में दबाव

सेंसेक्स और निफ्टी बुधवार को फ्लैट खुल सकते हैं, जिसे GIFT Nifty से पॉजिटिव संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों में कमी और चल रही US-ईरान शांति बातचीत को लेकर बेहतर सेंटीमेंट से सपोर्ट मिलेगा। ग्लोबल टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में कमजोरी और US फेडरल रिजर्व के ज्यादा सख्त रुख को लेकर चिंताओं के बावजूद भारतीय बेंचमार्क इक्विटी इंडेक्स में बढ़त की संभावना है, जो रिस्क लेने की क्षमता पर असर डाल रही है।

GIFT Nifty सुबह करीब 8.22 बजे 23,820.00 पर ट्रेड कर रहा था, जो 1.50 पॉइंट्स या 0.01 परसेंट नीचे था, जो मंगलवार की तेज सेल-ऑफ के बाद घरेलू इक्विटी के लिए पॉजिटिव शुरुआत का संकेत है।

यह संकेत 23 जून को भारतीय बाज़ारों में लगभग दो हफ़्तों की सबसे बड़ी गिरावट के बाद आया है। सेंसेक्स 893.39 पॉइंट्स या 1.16 प्रतिशत गिरकर 76,200.68 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 278.80 पॉइंट्स या 1.16 प्रतिशत गिरकर 23,824.10 पर बंद हुआ। कमज़ोर ग्लोबल संकेतों और US-ईरान शांति बातचीत को लेकर अनिश्चितता ने सेंटिमेंट पर असर डाला, जबकि निवेशकों ने टेक्नोलॉजी शेयरों में निवेश कम करना जारी रखा।

ओपनिंग बेल से पहले ग्लोबल बाज़ार मिले-जुले रहे

टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर शेयरों में बिकवाली के एक और दौर से वॉल स्ट्रीट रात भर तेज़ी से नीचे बंद हुआ। नैस्डैक कंपोजिट 2.21 प्रतिशत गिरा, जबकि S&P 500 1.44 प्रतिशत गिरकर एक हफ़्ते से ज़्यादा के निचले स्तर पर आ गया। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज काफ़ी मज़बूत था, जो सिर्फ़ 0.09 प्रतिशत गिरा।

इन्वेस्टर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते डेट-फंडेड खर्च और इस बात की संभावना को लेकर चिंतित थे कि US फेडरल रिजर्व इस साल के आखिर में और सख्त रुख अपना सकता है। सेमीकंडक्टर स्टॉक्स में बिकवाली का सबसे ज़्यादा असर पड़ा क्योंकि इन्वेस्टर्स ने महीनों की अच्छी बढ़त के बाद वैल्यूएशन का फिर से आकलन किया।

हालांकि, बुधवार को एशियाई मार्केट्स में स्थिरता के संकेत दिखे। जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे बड़ा इंडेक्स थोड़ा बदला, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी मंगलवार की 10 परसेंट की तेज गिरावट के बाद 2.2 परसेंट उछला। जापान का निक्केई बढ़त और गिरावट के बीच ऊपर-नीचे होता रहा और आखिरी बार थोड़ा नीचे ट्रेड कर रहा था।

कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट जारी रही, जिससे भारत जैसी तेल इंपोर्ट करने वाली अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक बड़ी पॉजिटिव बात सामने आई। ब्रेंट क्रूड $76.7 प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा था, जबकि US क्रूड $73 प्रति बैरल से नीचे था। दोनों बेंचमार्क अब चार महीने के सबसे निचले स्तर के करीब ट्रेड कर रहे हैं क्योंकि US-ईरान बातचीत में प्रगति और होर्मुज स्ट्रेट के ज़रिए टैंकर ट्रैफिक फिर से शुरू होने से सप्लाई में रुकावटों की चिंता कम हो गई है। क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज़ गिरावट भारतीय इक्विटीज़ के लिए सबसे मज़बूत सपोर्ट में से एक बनकर उभरी है।

निफ्टी के लिए 24,000 पर सबसे बड़ी रुकावट 

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर के मुताबिक, घरेलू मार्केट ग्लोबल इक्विटीज़ में कमज़ोरी के मुकाबले पॉज़िटिव जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट को बैलेंस कर रहा है। उन्होंने कहा, “US-ईरान शांति बातचीत में प्रोग्रेस से सुधर रहे सेंटिमेंट को ग्लोबल टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में कमज़ोरी और US फेडरल रिज़र्व के ज़्यादा सख्त रुख को लेकर चिंताओं से बैलेंस किया जा रहा है।” US-ईरान शांति बातचीत में लगातार प्रोग्रेस हो रही है, जिससे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में संभावित रुकावटों को लेकर चिंताओं को कम करने में मदद मिल रही है। हालांकि, उन्होंने आगे कहा कि जब तक कोई फॉर्मल एग्रीमेंट फाइनल और लागू नहीं हो जाता, तब तक इन्वेस्टर्स के सावधान रहने की संभावना है।

ग्लोबल डेवलपमेंट के अलावा, मार्केट पार्टिसिपेंट्स मॉनसून की प्रोग्रेस पर भी करीब से नज़र रख रहे हैं। कई इलाकों में बारिश की कमी ने एग्रीकल्चरल आउटपुट, फ़ूड इन्फ्लेशन और रूरल डिमांड को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिससे आने वाले हफ़्तों में मॉनसून ट्रेंड्स मार्केट के लिए एक ज़रूरी वेरिएबल बन गए हैं।

मंगलवार के तेज़ करेक्शन के बावजूद इंस्टीट्यूशनल फ्लो सपोर्टिव रहे। फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) 23 जून को मार्जिनल नेट बायर्स बने, उन्होंने 17 करोड़ रुपये के इक्विटी खरीदे, जबकि डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने 680 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

टेक्निकल नज़रिए से, पोनमुडी ने कहा कि 24,000 के निशान से नीचे जाने के बाद निफ्टी पर दबाव बना हुआ है। अभी सबसे बड़ी रुकावट 24,000 पर है, और इस लेवल से ऊपर लगातार बढ़ने से बुलिश मोमेंटम फिर से आ सकता है और 24,100-24,200 ज़ोन की ओर रिकवरी का रास्ता खुल सकता है। नीचे की तरफ, 23,800 एक ज़रूरी सपोर्ट लेवल बना हुआ है। इस ज़ोन से नीचे एक बड़ा ब्रेक नया सेलिंग प्रेशर पैदा कर सकता है और इंडेक्स को 23,600 के लेवल पर ले जा सकता है।

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मिडिल ईस्ट में जारी महीनों से तनाव को उस समय विराम लगा, जब ईरान-अमेरिका ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। दोनों देशों ने कई शर्तों पर सहमति भी जताई थी। मगर एक बार फिर परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि अगर ईर

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अमेरिकी और ईरान के बीच हुए समझौते पर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की कड़ी प्रतिक्रिया के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा शुरू हो गई। नेतन्याहू ने साफ-साफ कहा था कि शांति समझौते हो ना हो मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, मैं ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने दूंगा। अब ने

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