क्या आप बहुत ज्यादा फंड में निवेश कर रहे हैं? जानिए इसके नुकसान

मेरे एक दोस्त ने एक दिन अपने म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि वह हर साल म्यूचु्अल फंड में निवेश बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही उनके पोर्टफोलियो में फंड्स यानी स्कीम की संख्या भी बढ़ रही है। क्या ऐसा करना सही है? जब मैंने उनसे पूछा कि उनके पोर्टफोलियो में कितनी स्कीमें हैं तो वह गिनती करने लगे। दरअसल यह समस्या सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं है।

डायवर्सिफिकेशन का सही मतलब कम लोग समझते हैं

ज्यादातर निवेशकों को लगता है कि डायवर्सिफिकेशन के लिए ज्यादा स्कीमों में निवेश करना जरूरी है। लेकिन, कम लोग यह समझते हैं कि डायवर्सिफिकेशन का मतलब ज्यादा फंडों में निवेश करना नहीं है। डायवर्सिफिकेशन का मतलब यह है कि आपके पोर्टफोलियो में अलग-अलग तरह के एसेट्स और स्कीमें होनी चाहिए। उन स्कीमों का पोर्टफोलियो एक जैसे शेयरों का नहीं होना चाहिए। उदाहरण के लिए एक से ज्यादा लार्जकैप फंड में निवेश करने का कोई मतलब नहीं है।

एक जैसी कई स्कीम में निवेश करना डायवर्सिफिकेशन नहीं है 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर कोई इनवेस्टर डायवर्सिफिकेशन करना चाहता है तो वह अपने पोर्टफोलियो में एक लार्जकैप फंड, एक मिडकैप फंड, एक स्मॉलकैप फंड को शामिल कर सकता है। लार्जकैप, मिडकैप या स्मॉलकैप के एक से ज्यादा फंड में निवेश करने से डायवर्सिफिकेशन का मकसद पूरा नहीं होता है।

अलग-अलग एसेट में निवेश करने से रिस्क कम हो जाता है

डायवर्सिफिकेशन का मतलब अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश करना है। इसका मतलब है कि पोर्टफोलियो में इक्विटी शामिल होना चाहिए। इक्विटी की हर कैटेगरी के फंड होने चाहिए। डेट यानी बॉन्ड्स जैसे फिक्स्ड रिटर्न इंस्ट्रूमेंट्स भी पोर्टफोलियो का हिस्सा होना चाहिए। साथ ही बुलियन भी होना चाहिए। बुलियन का मतलब सोने और चांदी से है। एक्सपर्ट्स गोल्ड ईटीएफ और सिल्वर ईटीएफ में निवेश की सलाह देते हैं।

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एक साथ सभी एसेट क्लास में नहीं आती है गिरावट 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि डायवर्सिफिकेशन का मकसद यह है कि किसी एसेट क्लास में गिरावट का असर पोर्टफोलियो पर कम से कम पड़े। आम तौर पर यह देखा जाता है कि सभी एसेट क्लास में एक साथ गिरावट नहीं आती है। कई बार इक्विटी में गिरावट आने पर गोल्ड में तेजी होती है। डेट में निवेश आपके पोर्टफोलियो को शेयरों में तेज गिरावट की स्थिति में नुकसान से बचाता है। इसलिए एक्सपर्ट्स पोर्टफोलियो में डेट को शामिल करने सलाह देते हैं।

Gold Rate Today: सोने की गिरावट पर ब्रेक, 24 और 22 कैरेट दोनों के चढ़े भाव; चेक करें नई कीमत

देश में सोने की कीमत में गिरावट थम गई है। 27 जून की सुबह ज्यादातर शहरों में भाव बढ़ा है। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत बढ़कर 142960 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। मुंबई में भाव 142760 रुपये प्रति 10 ग्राम है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भाव 4000 डॉलर के मार्क को फिर से पार कर गया है। हाजिर सोना अब 4,077.64 डॉलर प्रति औंस पर है।

दरअसल अमेरिका में महंगाई पर अपडेट सामने आने के बाद डॉलर कमजोर हुआ। साथ ही अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें थोड़ी कम हुईं। अमेरिका में मई तक के 12 महीनों में U.S. पर्सनल कंजंप्शन एक्सपेंडिचर्स प्राइस इंडेक्स 4.1 प्रतिशत बढ़ गया।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमत: दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 142960 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 131060 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 130860 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 142760 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 145100 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 133010 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 142760 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 130860 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली131060142960
मुंबई130860142760
अहमदाबाद130960142860
चेन्नई133010145100
कोलकाता130860142760
हैदराबाद130860142760
जयपुर131060142960
भोपाल130960142860
लखनऊ131060142960
चंडीगढ़131060142960

चांदी की कीमत

सोने की तरह दूसरी कीमती धातु चांदी में भी तेजी आई है। 27 जून की सुबह कीमत बढ़कर 240100 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 59.12 डॉलर प्रति औंस पर है।

दोस्त से उधार लिया पोल और तोड़ डाला नेशनल रिकॉर्ड! मृत पिता की पासपोर्ट साइज फोटो हाथों में ले सिंधुश्री ने सुनाई रुला देने वाली कहानी

खेलों की दुनिया से अक्सर ऐसी कहानियां सामने आती हैं जो न सिर्फ आपको हैरान करती हैं बल्कि आपकी आंखों में आंसू भी ले आती हैं। ऐसा ही एक भावुक कर देने वाली सफलता पाई है कर्नाटक की 25 वर्षीय एथलीट जी सिंधुश्री ने। राष्ट्रीय अंतर-राज्यीय चैंपियनशिप में सिंधुश्री ने न केवल महिलाओं के पोल वॉल्ट में एक नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड कायम किया बल्कि गोल्ड मेडल जीतकर एशियाई खेलों का टिकट भी पक्का कर लिया है। इस ऐतिहासिक कामयाबी के पीछे छिपी है बेहद तंगहाली, संघर्ष और एक बेटी के आंसुओं की वह कहानी जिसने वहां मौजूद हर शख्स को रुला दिया।

दोस्त से उधार लिया पोल और रच दिया इतिहास

सिंधुश्री के पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वह प्रतियोगिता के लिए एक सही पोल खरीद सकें। वित्तीय संकट के कारण वह अब तक छोटे पोल के साथ प्रतिस्पर्धा करने को मजबूर थीं। उन्होंने छोटे पोल के साथ ही अभ्यास किया और अपनी तकनीक सीखी, जिसके कारण फेडरेशन कप जैसे पिछले टूर्नामेंटों में उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था क्योंकि ये पोल ढीले हो चुके थे। राष्ट्रीय अंतर-राज्यीय चैंपियनशिप से ठीक दो हफ्ते पहले सिंधुश्री को उनके एक दोस्त से उधार में बड़ा पोल मिला। दोस्त से उधार मिले इसी पोल के सहारे कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले के भद्रावती की रहने वाली इस अनजान खिलाड़ी ने वह कर दिखाया जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी।

सिंधुश्री ने 4.25 मीटर की ऊंचाई पार कर तमिलनाडु की एथलीट बारनिका इलांगोवन के एक महीने पुराने 4.20 मीटर के राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ दिया और इतिहास रच दिया। उन्होंने चेन्नई में मई के महीने में ‘इंडियन एथलेटिक्स सीरीज 6’ के दौरान बनाए गए अपने पिछले व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (4 मीटर) में पूरे 25 सेंटीमीटर का सुधार किया।

हाथों में मृत पिता की तस्वीर थामे भावुक हो गईं सिंधुश्री

जीत के बाद जब सिंधुश्री मीडिया के सामने आईं, तो उनके हाथों में उनके दिवंगत पिता आर गणेश की एक तस्वीर थी। भावुक सिंधुश्री ने बताया कि ‘साल 2022 में मेरे पिता का हार्ट अटैक के कारण निधन हो गया था। मैंने आज जो कुछ भी हासिल किया है, वह सब मेरे पिता की बदौलत है। हर सुबह वह मुझे दौड़ने के लिए ले जाते थे और वह चाहते थे कि मैं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के लिए खेलूं। मैं एशियाई खेलों में हिस्सा लेकर उनके इस सपने को पूरा करने जा रही हूं।’ उन्होंने आगे कहा कि मेरा चयन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स के लिए भी हुआ था, लेकिन तब मेरे पिता मेरा खेल देखने के लिए वहां नहीं थे। यह सब एक सपने जैसा लग रहा है और यह केवल मेरे पिता की वजह से मुमकिन हो पाया है।

परिवार के खिलाफ जाकर पिता ने दिलाया था दाखिला

सिंधुश्री ने बताया कि उनके परिवार में दूर-दूर तक कोई भी खेलों में नहीं था। परिवार के बाकी सदस्य एक लड़की को खेलों में भेजने के बिल्कुल खिलाफ थे। लेकिन उनके पिता ने समाज और परिवार के सभी लोगों से लड़ाई लड़ी और उन्हीं की जिद के कारण साल 2016 में सिंधुश्री बेंगलुरु के साई हॉस्टल में शामिल हो सकीं, जहां से उनके खेल के सफर की शुरुआत हुई।

 

बेहद तंगहाली में जी रहा है परिवार, नौकरी की तलाश

इस एथलीट का जीवन भारी आर्थिक तंगहाली में बीत रहा है। उनके पिता आर गणेश एक इलेक्ट्रिशियन थे और उनकी मां सिलाई का काम करती हैं। चूंकि मां की कमाई छोटी बहन की पढ़ाई में खर्च हो जाती है इसलिए सिंधुश्री के दादाजी उन्हें वित्तीय रूप से थोड़ा बहुत सहयोग कर रहे हैं। सिंधुश्री ने बताया कि मेरे पास कोई स्पॉन्सर नहीं है, कोई नौकरी नहीं है और गुजारा करना बेहद मुश्किल हो रहा है। मैं नौकरी की तलाश कर रही थी, लेकिन प्रदर्शन अच्छा न होने के कारण नौकरी नहीं मिल पा रही थी। मुझे उम्मीद है कि इस रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन के बाद मुझे नौकरी मिल जाएगी ताकि मैं अपने परिवार की मदद कर सकूं।

इससे पहले सिंधुश्री ने घरेलू स्तर पर सिर्फ एक बड़ा पदक जीता था, जब उन्होंने साल 2023 के नेशनल इंटर-स्टेट चैंपियनशिप में इसी मैदान पर 3।80 मीटर के प्रदर्शन के साथ सिल्वर मेडल जीता था।

400 मीटर की रनर से पोल वॉल्टर बनने का सफर

सिंधुश्री ने शुरुआत एक 400 मीटर धावक के रूप में की थी। लेकिन साल 2017 में एक स्थानीय कोच ने उन्हें पोल वॉल्ट में शिफ्ट होने की सलाह दी क्योंकि कोच का मानना था कि वह पोल वॉल्ट में बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। सिंधुश्री के कोच विजीश एमएम ने उनकी इस सफलता पर कहा कि धैर्य ही सिंधुश्री की सबसे बड़ी ताकत है। कई सालों तक सही पोल न होने और आर्थिक दिक्कतों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। कोच को पूरा भरोसा है कि सही पोल और सही पोषण मिलने पर वह एशियाई खेलों में 4.30 मीटर से ऊपर कूदकर देश के लिए पदक ला सकती हैं। गौरतलब है कि साल 2022 के एशियाई खेलों में ब्रॉन्ज मेडल का मार्क 4.30 मीटर था।

Gold Silver Ratio: सोने के मुकाबले और ज्यादा गिर सकती है चांदी, चार्ट दे रहा बड़े संकेत; जानिए अब क्या करें निवेशक

Gold Silver Ratio: जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद से चांदी की कीमत में करीब 50% की गिरावट आ चुकी है। सिर्फ कीमत ही नहीं, बल्कि सोने के मुकाबले भी चांदी एक-तिहाई से ज्यादा कमजोर हो गई है। अब टेक्निकल चार्ट इशारा कर रहे हैं कि यह गिरावट अभी थमने वाली नहीं है। ऐसे में सोने के मुकाबले चांदी और कमजोर पड़ सकती है।

जनवरी के बाद क्यों बदला माहौल?

रॉयटर्स के मुताबिक, 30 जनवरी के बाद से सोना और चांदी दोनों में दबाव बढ़ने लगा। इसकी सबसे बड़ी वजह यह रही कि बाजार को लगने लगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अब ब्याज दरों में कटौती करने के मूड में नहीं है। इसके उलट, अगर महंगाई बढ़ती रही तो ब्याज दरें बढ़ाने की नौबत भी आ सकती है।

इस बीच ईरान युद्ध के बाद महंगाई को लेकर चिंताएं और बढ़ गईं। इससे निवेशकों ने ब्याज दरों को लेकर अपने अनुमान बदलने शुरू कर दिए और कीमती धातुओं में बिकवाली तेज हो गई।

चांदी पर ज्यादा दबाव क्यों आया?

सोने की तुलना में चांदी पर असर ज्यादा पड़ा। इसकी वजह सिर्फ निवेशकों की बिकवाली नहीं है। दरअसल, चांदी केवल एक कीमती धातु नहीं, बल्कि औद्योगिक धातु भी है। इसका इस्तेमाल सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और कई उद्योगों में होता है।

इसलिए जब अर्थव्यवस्था या निवेशकों के जोखिम लेने के रुख को लेकर चिंता बढ़ती है तो चांदी पर दबाव भी ज्यादा आता है। एक वजह यह भी रही कि इससे पहले चांदी में सोने के मुकाबले कहीं ज्यादा तेजी आई थी। ऐसे में मुनाफावसूली शुरू होने पर इसमें गिरावट भी ज्यादा देखने को मिली।

टेक्निकल चार्ट क्या कह रहा है?

एनालिस्टों के मुताबिक, गोल्ड टु सिल्वर रेशियो यानी सोने और चांदी के भाव का अनुपात लगातार ऊपर जा रहा है। हाल ही में यह 200-डे मूविंग एवरेज (66.76) के ऊपर निकल गया है।

टेक्निकल एनालिसिस में 200-डे मूविंग एवरेज को लंबे समय के ट्रेंड का अहम पैमाना माना जाता है। किसी भी एसेट का इसके ऊपर या नीचे जाना अक्सर बाजार की दिशा का बड़ा संकेत देता है।

अब 70 के स्तर पर रहेगी नजर

अब इस अनुपात का अगला बड़ा लक्ष्य 70 माना जा रहा है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि बाजार के लिए महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर भी है। ट्रेडर्स अक्सर ऐसे गोल आंकड़ों पर खास नजर रखते हैं।

अगर गोल्ड टु सिल्वर रेशियो मजबूती से 70 के ऊपर निकल जाता है, तो इसके बाद 6 फरवरी के 72.74 के स्तर तक पहुंचने की संभावना बढ़ जाएगी। इसके बाद अगला लक्ष्य 75.25 हो सकता है। यह अप्रैल 2025 के बाद सोने के मुकाबले चांदी की गिरावट के दायरे का लगभग आधा स्तर है।

अगर चांदी वापसी करती है तो क्या होगा?

हालांकि, चांदी के लिए उम्मीद पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अगर चांदी में फिर से खरीदारी लौटती है, तो सबसे पहले गोल्ड टु सिल्वर रेशियो को 200-डे मूविंग एवरेज (66.76) के नीचे आना होगा। इसके बाद यह 22 जून के 62.68 के स्तर तक फिसल सकता है।

अगर यह अनुपात 60.56 से भी नीचे चला जाता है, तो इसे चांदी के पक्ष में मजबूत संकेत माना जाएगा। ऐसे में बाजार में चांदी की तेजी को नई ताकत मिल सकती है।

निवेशकों के लिए क्या है इसका मतलब

अभी के संकेत बताते हैं कि निवेशकों का झुकाव चांदी की बजाय सोने की ओर ज्यादा है। जब तक गोल्ड टु सिल्वर रेशियो ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तब तक माना जाएगा कि सोना, चांदी से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।

लेकिन अगर यह अनुपात नीचे आने लगता है, तो इसका मतलब होगा कि चांदी फिर से मजबूत होने लगी है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, उस वक्त चांदी में दोबारा खरीदारी दिख सकती है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

4% टूट गया Silver ETF, फीकी पड़ी Gold ETF की चमक, इस कारण फिसल रहा सोना-चांदी

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Asian Market Today: एशियाई बाजारों में बढ़त, माइक्रोन की मजबूत कमाई के बाद कोस्पी 5% उछला, निक्केई 1% ऊपर

Asian Market Today: US चिपमेकर माइक्रोन की अच्छी कमाई के बाद गुरुवार को एशियाई स्टॉक मार्केट में मोटे तौर पर बढ़त देखी गई। जापान का निक्केई 225 1.28% बढ़ा, जबकि टॉपिक्स 0.76% बढ़ा। साउथ कोरिया का कोस्पी 5% से ज़्यादा उछला, जबकि कोस्डैक 1.32% चढ़ा। हांगकांग के हैंग सेंग इंडेक्स फ्यूचर्स ने कम ओपनिंग का संकेत दिया।

गिफ्ट निफ्टी 24,114 के लेवल के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले क्लोज से लगभग 62 पॉइंट्स का प्रीमियम था, जो भारतीय स्टॉक मार्केट इंडेक्स के लिए पॉजिटिव शुरुआत का संकेत देता है।

वॉल स्ट्रीट

US स्टॉक मार्केट बुधवार को मिला-जुला रहा, जिसमें नैस्डैक और S&P 500 मेगाकैप टेक स्टॉक्स में बिकवाली के कारण नीचे बंद हुए।

डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 182.06 पॉइंट्स या 0.35% बढ़कर 51,848.90 पर पहुंच गया, जबकि S&P 500 7.24 पॉइंट्स या 0.10% गिरकर 7,358.22 पर आ गया। नैस्डैक कंपोजिट 110.40 पॉइंट्स या 0.43% गिरकर 25,476.64 पर बंद हुआ।

एनवीडिया का स्टॉक प्राइस 0.54% गिरा, माइक्रोसॉफ्ट के शेयर 2.27% गिरे, माइक्रोन टेक्नोलॉजी का शेयर 0.37% गिरा, एप्पल का स्टॉक 0.38% गिरा, टेस्ला का स्टॉक 1.61% गिरा, और स्पेसएक्स का शेयर 1.13% गिरा।

US-ईरान शांति वार्ता

जबकि होर्मुज स्ट्रेट में ट्रैफिक नॉर्मल होने की ओर बढ़ रहा है, US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने बंद कमरे में हुई मीटिंग में रिपब्लिकन कांग्रेसियों को उनके ईरान युद्ध को रोकने के लिए वोट की इजाज़त देने के लिए फटकार लगाई है। US सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट मार्को रुबियो का कहना है कि अगले हफ़्ते स्विट्जरलैंड में ईरान के साथ बातचीत तय है।

माइक्रोन टेक्नोलॉजी Q3 की कमाई

माइक्रोन टेक्नोलॉजी Q3 की कमाई और Q4 के अनुमान ने वॉल स्ट्रीट के अनुमानों को पीछे छोड़ दिया, जिससे इसके शेयर आफ्टर-आवर्स ट्रेडिंग में 15% बढ़ गए। माइक्रोन ने Q3 में $41.46 बिलियन का रेवेन्यू बताया, जो $35.85 बिलियन के अनुमान से ज़्यादा है। कंपनी ने $25.11 प्रति शेयर का एडजस्टेड प्रॉफ़िट बताया, जबकि अनुमान $20.78 प्रति शेयर था।

इसे Q4 में प्रति शेयर $31 की एडजस्टेड कमाई की उम्मीद है, जो $1 ज़्यादा या कम हो सकती है, जबकि अनुमान $25.84 प्रति शेयर था। कंपनी को चौथी तिमाही में लगभग $10 बिलियन के कैपिटल खर्च की उम्मीद है, जबकि एनालिस्ट्स को $8.89 बिलियन की उम्मीद थी।

बिटकॉइन की कीमतें

बिटकॉइन की कीमतें वापस $60,000 से नीचे आ गईं। टोकन 5.4% तक गिरकर $59,023 पर आ गया, जो अक्टूबर 2024 के बाद सबसे कम है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, CoinGlass के इकट्ठा किए गए डेटा के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में क्रिप्टो लॉन्ग पोजीशन में लगभग $800 मिलियन लिक्विडेट किए गए हैं। डेरिबिट के डेटा से पता चलता है कि यह गिरावट शुक्रवार को बिटकॉइन ऑप्शंस में लगभग $10 बिलियन की तिमाही एक्सपायरी से पहले हुई है।

आज सोने का रेट

US डॉलर में तेज़ी और US फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी की संभावना के बीच, सोने की कीमतों में गिरावट जारी रही, जो एक दिन पहले सात महीने से ज़्यादा के निचले स्तर के पास रही। स्पॉट गोल्ड की कीमत 0.4% गिरकर $3,985.89 प्रति औंस हो गई, जबकि अगस्त डिलीवरी के लिए US गोल्ड फ्यूचर्स 0.2% गिरकर $4,001.60 पर आ गया। स्पॉट सिल्वर की कीमतें 0.2% गिरकर $57.33 प्रति औंस हो गईं।

US ट्रेजरी यील्ड

तेल की कीमतें चार महीने के सबसे निचले स्तर पर आने से US ट्रेजरी यील्ड गिर गई। 2-साल के नोट की यील्ड 4.137% पर आ गई, जो 17 जून के बाद सबसे कम है। बेंचमार्क US 10-साल के नोट पर यील्ड 4.398% पर पहुंच गई, जो 11 मई के बाद सबसे कम है। तीस-साल के ट्रेजरी यील्ड 4.849% पर आ गए, जो 8 अप्रैल के बाद सबसे कम है।

कच्चे तेल की कीमतें

US-ईरान के बीच शुरुआती शांति समझौते के बाद, होर्मुज स्ट्रेट से फंसे हुए टैंकरों के निकलने से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही, जिससे सप्लाई की चिंता कम हुई। अगस्त डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.54% गिरकर $73.34 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.38% गिरकर $70.07 प्रति बैरल पर आ गया।

डॉलर

US डॉलर मजबूत हुआ है और लगभग एक साल में अपनी सबसे तेज मासिक बढ़त की ओर बढ़ रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख करेंसी के मुकाबले करेंसी को मापता है, रातों-रात 101.8 के 13 महीने के पीक पर पहुंचने के बाद 101.6 के आसपास स्थिर है। यूरो लगभग $1.1353 था, और स्टर्लिंग सात महीने के सबसे निचले स्तर $1.314 पर था। 161.73 येन पर, डॉलर चार दशकों से कुछ ज़्यादा समय में अपने सबसे ऊंचे स्तर से बस थोड़ा ही दूर था।

 

Silver Demand: सोना महंगा होने से चांदी खरीद रहे ग्राहक? इंडस्ट्री बोली- त्योहार और शादी सीजन में बढ़ सकती है डिमांड

Silver Demand: चांदी की मांग में आने वाले महीनों में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। Silver Emporium के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल मेहता का कहना है कि अगस्त से अक्टूबर के बीच आने वाला त्योहार और शादी का सीजन देश की सालाना चांदी खरीद का करीब आधा हिस्सा तय करता है।

उनके मुताबिक, पिछले कुछ समय की कमजोरी के बाद मांग में सुधार के संकेत मिलने लगे हैं। हालांकि यह रिकवरी कितनी मजबूत होगी, यह काफी हद तक चांदी की कीमतों में स्थिरता पर निर्भर करेगा। हाल के महीनों में चांदी की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव रहा है, जिसकी वजह से कई ग्राहक नई खरीदारी को लेकर सतर्क बने हुए हैं।

बढ़ी है रिटेल मांग

हाल के हफ्तों में चांदी के डिनर सेट, गिफ्टिंग आइटम और शादी-ब्याह से जुड़े प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ी है। हालांकि इस खरीदारी का बड़ा हिस्सा पूरी तरह नई मांग नहीं है। कई ग्राहक अपनी पुरानी चांदी देकर नए सामान खरीद रहे हैं।

मेहता के मुताबिक, पिछले दो महीनों की तुलना में बिक्री की मात्रा करीब 30% बढ़ी है। इसके बावजूद कुल कारोबार अभी भी पिछले साल के मुकाबले 25-30% कम बना हुआ है।

महंगे सोने से चांदी को फायदा

सोने की रिकॉर्ड ऊंची कीमतों का फायदा अब चांदी को मिलता दिख रहा है। कई ग्राहक सोने की बजाय चांदी के गहनों की तरफ रुख कर रहे हैं क्योंकि यह सस्ता विकल्प है। यही वजह है कि कई गोल्ड ज्वेलर्स भी अब चांदी के कारोबार में तेजी से विस्तार कर रहे हैं।

राहुल मेहता के मुताबिक, पिछले छह महीनों में नए सिल्वर स्टोर खोलने की दिलचस्पी 300% से 400% तक बढ़ी है। इनमें से कई नए स्टोर ऐसे ग्राहकों को ध्यान में रखकर खोले जा रहे हैं, जो महंगे सोने की वजह से चांदी की ओर शिफ्ट हो सकते हैं।

सप्लाई को लेकर चिंता नहीं

चांदी की सप्लाई को लेकर फिलहाल कोई बड़ी चिंता नहीं है। राहुल मेहता का कहना है कि आयात पर कुछ प्रतिबंधों के बावजूद बाजार में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

इसके अलावा रिसाइक्लिंग भी बढ़ी है। बड़ी संख्या में ग्राहक पुरानी चांदी एक्सचेंज कर रहे हैं, जिससे बाजार में सप्लाई बनी हुई है। उनके मुताबिक, बाजार में चांदी की कोई कमी नहीं है और जरूरत हिसाब से कच्चा माल मौजूद है।

निवेशकों का रुख अभी भी कमजोर

हालांकि निवेशकों की तरफ से मांग अभी कमजोर बनी हुई है। यही वजह है कि बाजार में प्रीमियम में कोई बड़ी तेजी नहीं दिख रही है।

कई निवेशक अभी भी चांदी की कीमतों की दिशा को लेकर असमंजस में हैं। वे कीमतों में ज्यादा स्थिरता आने का इंतजार कर रहे हैं। इसके बाद ही निवेश मांग में मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

Gold Silver Price Outlook: ‘गिरावट पर खरीदें सोना-चांदी, नया रिकॉर्ड हाई कर रहा इंतजार’, स्विस एशिया कैपिटल की सलाह

Gold Silver Price Outlook: ‘गिरावट पर खरीदें सोना-चांदी, नया रिकॉर्ड हाई कर रहा इंतजार’, स्विस एशिया कैपिटल की सलाह

Gold Silver Price Outlook: हाल में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई है। इससे बहुत से निवेशक घबरा गए हैं। हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि इसे खतरे की घंटी नहीं, बल्कि खरीदारी का मौका मानना चाहिए। Swiss Asia Capital के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर (CIO) जुएर्ग कीनर का मानना है कि मौजूदा कमजोरी के बावजूद दोनों कीमती धातुएं आगे चलकर नए रिकॉर्ड स्तर छू सकती हैं।

पिछले कुछ समय से सोना और चांदी दबाव में रहे हैं। इसकी बड़ी वजह ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका और वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद है। हालांकि कीनर का कहना है कि लॉन्ग टर्म में सोना और चांदी में तेजी आने के कई कारण हैं। उन्होंने कहा, ‘आमतौर पर ऐसी गिरावट खरीदारी का अच्छा मौका होती है। हम हमेशा गिरावट के दौरान धीरे-धीरे खरीदारी बढ़ाने में भरोसा रखते हैं।’

चांदी की सप्लाई अब भी तंग

कीनर के मुताबिक, कीमती धातुओं का भंडार अभी भी काफी कम है। खासकर चांदी में सप्लाई की समस्या बनी हुई है। उन्होंने कहा कि एशियाई और पश्चिमी बाजारों के बीच कीमतों का बड़ा अंतर इस बात का संकेत है कि फिजिकल सप्लाई अभी भी तंग बनी हुई है।

उनका कहना है कि बाजार फिलहाल ओवरसोल्ड स्थिति में है और सप्लाई भी सीमित है। ऐसे में कीमतों को लंबे समय तक नीचे बनाए रखना आसान नहीं होगा।

महंगाई फिर बन सकती है बड़ा फैक्टर

हाल के महीनों में निवेशकों का ध्यान ब्याज दरों पर ज्यादा रहा है। लेकिन कीनर का मानना है कि आने वाले समय में महंगाई फिर से बाजार का बड़ा मुद्दा बन सकती है। अगर महंगाई उम्मीद से ज्यादा बढ़ती है, तो सोना और चांदी जैसे ऐसे एसेट्स की मांग बढ़ सकती है। इन पर भले ही ब्याज नहीं मिलता, लेकिन इन्हें सुरक्षित निवेश माना जाता है।

उनका यह भी मानना है कि दुनिया भर की सरकारें और केंद्रीय बैंक कमजोर आर्थिक वृद्धि से जूझ रही अर्थव्यवस्थाओं को सहारा देते रहेंगे। इससे भी कीमती धातुओं को फायदा मिल सकता है। कीनर ने कहा कि यही अगली बड़ी तेजी की वजह बन सकती है और कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर तक जा सकती हैं।

माइनिंग-इंडस्ट्रियल मेटल्स पर भी बुलिश

कीनर सिर्फ सोने-चांदी पर ही नहीं, बल्कि माइनिंग कंपनियों के शेयरों को लेकर भी सकारात्मक हैं। उनका कहना है कि मजबूत कैश फ्लो होने के बावजूद कई माइनिंग शेयरों में बड़ी गिरावट आई है, जिससे निवेशकों के लिए अवसर बने हैं।

उन्होंने कॉपर, एल्युमीनियम और जिंक जैसी इंडस्ट्रियल मेटल्स पर भी भरोसा जताया। उनके मुताबिक, इन धातुओं में भी सप्लाई और मांग का संतुलन बिगड़ा हुआ है और भंडार कम हैं। इसलिए बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल कम नजर आती है।

कच्चे तेल पर क्या है राय?

कीनर का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों को 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास मजबूत सपोर्ट मिल रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से बाजार को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन वैश्विक भंडार अभी भी कम हैं।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इन भंडारों को फिर से भरने की जरूरत होगी, जिससे तेल की कीमतों को सहारा मिल सकता है।

Gold-Silver Ratio: गोल्ड-सिल्वर रेशियो बढ़ा, क्या अब सोने में निवेश करना चाहिए? जानिए एक्सपर्ट से

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold-Silver Ratio: गोल्ड-सिल्वर रेशियो बढ़ा, क्या अब सोने में निवेश करना चाहिए? जानिए एक्सपर्ट से

Gold-Silver Ratio: पिछले कुछ हफ्तों में गोल्ड-सिल्वर रेशियो (Gold-Silver Ratio या GSR) तेजी से बढ़ा है। इसका मतलब है कि निवेशक चांदी की तुलना में सोने को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लगातार बनी महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दर बढ़ने की आशंका ने चांदी पर ज्यादा दबाव डाला है।

Augmont Research के मुताबिक, जून में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,000 से 4,060 डॉलर प्रति औंस के दायरे में रहा। वहीं चांदी 60-61 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करती रही। इससे गोल्ड-सिल्वर रेशियो बढ़कर 67:1 तक पहुंच गया।

यह मई में 55:1 था, जबकि जनवरी में यह करीब 50:1 के निचले स्तर पर था। यानी कुछ ही महीनों में यह रेशियो 11 से 17 अंक तक बढ़ गया है। आसान शब्दों में कहें तो अब 1 औंस सोना खरीदने के लिए करीब 66-67 औंस चांदी की जरूरत पड़ रही है।

चांदी क्यों पिछड़ रही है?

Augmont की रिसर्च हेड रेनिशा चैनानी के मुताबिक, जून में फेडरल रिजर्व के संकेतों ने बाजार का रुख बदल दिया। अब दिसंबर तक ब्याज दर बढ़ने की संभावना करीब 86% मानी जा रही है। साथ ही महंगाई दर 4.2% बनी हुई है।

इन वजहों से चांदी की निवेश मांग कमजोर हुई है और हाल के हफ्तों में उसका प्रदर्शन सोने से कमजोर रहा है।

अब क्या करें निवेशक?

एनालिस्टों का मानना है कि मौजूदा कीमतों पर नए रिटेल इनवेस्टर्स के लिए 70:30 का गोल्ड-सिल्वर पोर्टफोलियो बेहतर हो सकता है। फिलहाल सोना करीब ₹1.45 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी करीब ₹2.25 लाख प्रति किलो के आसपास है। पिछले 50 वर्षों में गोल्ड-सिल्वर रेशियो का औसत 65:1 से 70:1 के बीच रहा है। इसलिए मौजूदा स्तर पर चांदी को बहुत सस्ता नहीं माना जा रहा।

रेनिशा चैनानी के मुताबिक, अगर यह रेशियो 75-80 तक पहुंचता है तो निवेशक चांदी में हिस्सेदारी बढ़ाकर 60:40 या 55:45 का अनुपात अपना सकते हैं। वहीं अगर रेशियो 60 से नीचे आ जाता है तो फिर पोर्टफोलियो को दोबारा सोना-केंद्रित बनाना बेहतर होगा।

सोना और चांदी में निवेश कैसे करें?

निवेशक Gold ETF और Silver ETF के जरिए निवेश कर सकते हैं। अगर मकसद सिर्फ कीमतों में बढ़त का फायदा उठाना है, तो ETF अच्छा विकल्प हो सकता है।

वहीं भविष्य में वास्तविक डिलीवरी या उपयोग के लिए डिजिटल गोल्ड और डिजिटल सिल्वर पर भी विचार किया जा सकता है।

आगे क्या रह सकता है रुख?

सोने को आमतौर पर सुरक्षित निवेश माना जाता है। खासकर तब, जब अमेरिकी डॉलर मजबूत हो और फेडरल रिजर्व सख्त मौद्रिक नीति अपना रहा हो।

रेनिशा चैनानी का अनुमान है कि निकट अवधि में गोल्ड-सिल्वर रेशियो स्थिर रह सकता है या थोड़ा और बढ़ सकता है। हालांकि 2026 में चांदी की सप्लाई में लगातार छठे साल कमी रहने का अनुमान है। करीब 4.63 करोड़ औंस की सप्लाई कमी चांदी को मजबूत आधार दे सकती है।

अगर आगे चलकर फेड ब्याज दरों में नरमी दिखाता है, डॉलर कमजोर पड़ता है या सोलर और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर से चांदी की मांग बढ़ती है, तो साल के अंत तक गोल्ड-सिल्वर रेशियो घटकर 55-60 तक आ सकता है।

गोल्ड-सिल्वर रेशियो कैसे निकालें?

24 जून 2026 को घरेलू बाजार में सोना ₹1,43,399 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,26,891 प्रति किलो थी। गोल्ड-सिल्वर रेशियो निकालने का फॉर्मूला है:

10 ग्राम सोने की कीमत ÷ 10 ग्राम चांदी की कीमत

इस हिसाब से:

₹1,43,399 ÷ ₹2,268.91 = 63.2

यानी फिलहाल 1 ग्राम सोना खरीदने के लिए करीब 63.2 ग्राम चांदी की जरूरत है। सिर्फ 40 दिनों में यह रेशियो 7.58 अंक बढ़ चुका है।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver Rates Today: सोने की चमक पड़ी फीकी, चांदी भी 4000 रुपये लुढ़की

दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने और चांदी में 24 जून को गिरावट आई। सोना 1,200 रुपये गिरकर 1.48 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया। चांदी 4000 रुपये फिसली। सोने में गिरावट की वजह डॉलर में मजबूती और शेयर बाजारों में बेहतर हो रहा सेंटिमेंट है। ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, सिल्वर में लगातार दूसरे दिन कमजोरी दिखी। यह 4000 रुपये गिरकर 2,31,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ।

चांदी का भाव अप्रैल के शुरुआती लेवल पर पहुंचा

एनालिस्ट्स का कहना है कि इस गिरावट से चांदी की कीमतें अप्रैल की शुरुआत के अपने लेवल के करीब पहुंच गई हैं। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के कमोडिटीज के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि सोने में कमजोरी बुधवार को भी जारी रही। इसकी वजह अमेरिकी डॉलर में मजबूती है। अमेरिका में मॉनेटरी पॉलिसी सख्त होने की उम्मीद जताई जा रही है। इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में बड़ी गिरावट 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में नरमी देखने को मिली। यह 1.3 फीसदी यानी 52 डॉलर गिरकर 4,050 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। अमेरिका में डॉलर इंडेक्स 101 लेवल के पार पहुंच गया है। डॉलर में मजबूती आने पर सोने की चमक फीकी पड़ जाती है। इसकी वजह यह है कि डॉलर मजबूत होने से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। डॉलर इंडेक्स मई 2025 के बाद अपने सबसे हाई लेवल पर पहुंच गया है।

सोने पर शॉर्ट टर्म में दबाव जारी रह सकता है

कमोडिटी के जानकारों का मानना है कि सोने पर अभी दबाव दिख सकता है। अगर बीच में कीमतों में तेजी आती है तो मुनाफावसूली की वजह से वह जारी नहीं रह पाएगी। हालांकि, अमेरिका-ईरान में डील की खबर से बुलियन में रिकवरी दिख सकती है। फरवरी के अंत में अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव देखने को मिला था।

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फाइनेंशियल मार्केट्स में दिख रहा एडजस्टमेंट

एलकेपी सिक्योरिटीज के वीपी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी ने कहा कि जियोपॉलिटिकल टेंशन कम होने से फाइनेंशियल मार्केट्स में लिक्विडिटी आधारित एडजस्टमेंट दिख रहा है। ग्लोबल एआई और टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में मुनाफावसूली देखने को मिली है। उधर, फेडरल रिजर्व का रुख भी बदला दिख रहा है।

Silver Price Today: आज कितना सस्ता हुआ चांदी? देखें 1 ग्राम से 1 किलो तक का नया भाव

Silver Price Today: अगर आप भी चांदी खरीदने या उसमें निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी हो सकता है। दरअसल, पिछले कुछ दिनों से चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। कभी भाव तेजी से बढ़ रहे हैं तो कभी अचानक गिरावट दर्ज हो रही है, जिससे खरीदार और निवेशक दोनों असमंजस में हैं। आज 1 किलो चांदी का भाव करीब 2.45 लाख रुपये के आसपास बना हुआ है, जबकि कई शहरों में इसकी कीमतों में अच्छी-खासी गिरावट भी देखने को मिली है।

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ रहा है। यही वजह है कि भारतीय सर्राफा बाजार में भी चांदी के भाव लगातार बदल रहे हैं। ऐसे में खरीदारी या निवेश करने से पहले ताजा रेट जरूर चेक करें।

आज का चांदी का भाव (भारतीय बाजार)

वजनआज का भावकल का भावबदलाव
1 ग्राम₹244.90₹245.00-₹0.10
8 ग्राम₹1,959.20₹1,960.00-₹0.80
10 ग्राम₹2,449.00₹2,450.00-₹1.00
100 ग्राम₹24,490.00₹24,500.00-₹10.00
1 किलोग्राम₹2,44,900.00₹2,45,000.00-₹100.00

आज प्रमुख शहरों में चांदी का भाव

शहर10 ग्राम100 ग्राम1 किलोग्राम
चेन्नई₹2,499₹24,990₹2,49,900
मुंबई₹2,449₹24,490₹2,44,900
दिल्ली₹2,449₹24,490₹2,44,900
कोलकाता₹2,449₹24,490₹2,44,900
बेंगलुरु₹2,449₹24,490₹2,44,900
हैदराबाद₹2,499₹24,990₹2,49,900
केरल₹2,499₹24,990₹2,49,900
पुणे₹2,449₹24,490₹2,44,900
वडोदरा₹2,449₹24,490₹2,44,900
अहमदाबाद₹2,449₹24,490₹2,44,900
जयपुर₹2,449₹24,490₹2,44,900
लखनऊ₹2,449₹24,490₹2,44,900
कोयंबटूर₹2,499₹24,990₹2,49,900
मदुरै₹2,499₹24,990₹2,49,900
विजयवाड़ा₹2,499₹24,990₹2,49,900
पटना₹2,449₹24,490₹2,44,900
नागपुर₹2,449₹24,490₹2,44,900
चंडीगढ़₹2,449₹24,490₹2,44,900
सूरत₹2,449₹24,490₹2,44,900
भुवनेश्वर₹2,499₹24,990₹2,49,900

कौन-सी चांदी होती है सबसे ज्यादा शुद्ध?

अगर चांदी की शुद्धता की बात करें, तो सबसे ज्यादा प्योर चांदी 999.9 ग्रेड की मानी जाती है, जिसे कई बार 9999 सिल्वर भी कहा जाता है। इसमें 99.99% शुद्ध चांदी होती है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से चांदी के सिक्के, बुलियन बार, मेडिकल उपकरण और वैज्ञानिक उपकरण बनाने में किया जाता है।

वहीं, बाजार में सबसे ज्यादा बिकने वाला ग्रेड 999 सिल्वर है, जिसे फाइन सिल्वर भी कहा जाता है। इसमें 99.9% चांदी होती है, जबकि केवल 0.1% अन्य धातुएं जैसे कॉपर, आयरन या लेड मिलाई जाती हैं। यह काफी मुलायम होती है, इसलिए इससे सिक्के, सिल्वर बार, बिस्किट और कुछ तरह की ज्वैलरी आसानी से बनाई जाती है। अगर आप निवेश या गिफ्ट देने के लिए चांदी खरीदना चाहते हैं, तो 999 सिल्वर एक अच्छा विकल्प माना जाता है।

इसके अलावा बाजार में 990 और 970 ग्रेड की चांदी भी मिलती है, जिनकी शुद्धता क्रमशः 99% और 97% होती है। इनका इस्तेमाल ज्वैलरी के अलावा कटलरी और सजावटी सामान बनाने में किया जाता है।

925 सिल्वर, जिसे स्टर्लिंग सिल्वर भी कहा जाता है, दुनिया भर में सबसे लोकप्रिय ज्वैलरी ग्रेड है। इसमें 92.5% शुद्ध चांदी और 7.5% दूसरी धातुएं होती हैं, जिससे इसकी मजबूती बढ़ जाती है। यही कारण है कि इससे अंगूठियां, चेन, कंगन, गिफ्ट आइटम, पेन और कई तरह के आर्टिफैक्ट तैयार किए जाते हैं।

इसके नीचे 900, 835 और 800 ग्रेड की चांदी आती है, जिनमें क्रमशः 90%, 83.5% और 80% चांदी होती है। इनमें दूसरी धातुओं की मात्रा ज्यादा होने से ये अधिक मजबूत होती हैं, इसलिए रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले बर्तन, सजावटी सामान और अन्य उपयोगी वस्तुएं बनाने के लिए इनका व्यापक इस्तेमाल किया जाता है।

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