Share Market New Timing: एक-दो नहीं, तीन क्लोजिंग टाइम; आज 3 अगस्त से बदल रही पूरी ट्रेडिंग

Share Market New Timing: आज तीन अगस्त है और आज से शेयर मार्केट की टाइमिंग पूरी तरह से बदल रही है। अब शाम 03:30 PM पर ही इक्विटी मार्केट में शेयरों का लेन-देन बंद नहीं होगा बल्कि 10 मिनट और मिलेंगे। हालांकि यह सुविधा सभी स्टॉक्स के लिए नहीं होगी। बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने मार्केट की एफिसिएंसी और ट्रांसपैरेंसी बढ़ाने और लिक्विडिटी को बेहतर करने के साथ-साथ भारतीय शेयर मार्केट को वैश्विक मानकों के हिसाब से बनाने के लिए नया ट्रेडिंग फ्रेमवर्क लागू किया है। इसके तहत एफएंडओ (F&O) डेरिवेटिव्स सेगमेंट का समय बढ़ाकर 3:40 PM तक कर दिया गया है। हालांकि मॉर्निंग टाइम में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इस नए बदलाव से निवेशकों से लेकर ट्रे़डर्स तक सभी पर असर पड़ेगा।

Share Market New Timing: क्या हुआ है बदलाव

नए नियमों के तहत सेबी ने F&O (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) सेगमेंट के ट्रेडिंग टाइम को 10 मिनट के लिए बढ़ा दिया है। स्टॉक और इंडेक्स डेरिवेटिव्स यानी एफएंडओ सेगमेंट में अब सुबह 9:15 AM से 3:40 PM तक ट्रेडिंग की जा सकेगी। हालांकि जो स्टॉक्स एफएंडओ सेगमेंट में नहीं हैं, उनकी ट्रेडिंग का समय पहले की तरह ही रहेगा और उनका लेन-देन 3:30 PM तक ही हो सकेगा। नए नियमों के तहत F&O वाली कंपनियों के शेयरों का आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस सिर्फ आखिरी 30 मिनट के औसत भाव से तय नहीं होगा, बल्कि एक नीलामी प्रक्रिया के जरिए तय होगा।

अब ये है नियम

मार्केट में सबसे बड़ा बदलाव तो ये है कि अब एक नहीं बल्कि तीन क्लोजिंग टाइम होगा।

जो स्टॉक्स एफएंडओ सेगमेंट से बाहर हैं, उनकी सामान्य ट्रे़डिंग 03:30 तक होगी। इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।

F&O स्टॉक्स (कैश मार्केट) 03:15 PM तक जारी रहेगी और उसके बाद 03:35 PM तक CAS (क्लोजिंग ऑक्शन सेशन) चलेगा।

स्टॉक और इंडेक्स एफएंडओ ट्रे़डिंग 03:40 PM तक चालू रहेगी।

क्लोजिंग प्राइस तय करने के लिए क्यों पड़ी CAS की जरूरत

ब्रोकरेज फर्म जीरोधा के मुताबिक किसी शेयर का क्लोजिंग प्राइस और उसका आखरी ट्रेड प्राइस (LTP) एक नहीं होता। मान लीजिए एक शेयर पूरे दिन ₹1,000 से ₹1,010 के बीच ट्रेड हो रहा था लेकिन 3:29 PM पर किसी ने जल्दबाजी में 10 शेयर ₹980 में बेच दिए। अगर ₹980 को ही क्लोजिंग प्राइस मान लिया जाए, तो यह उस शेयर की असली वैल्यू नहीं दिखाएगा। अब तक इससे बचने के लिए VWAP (वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस) मेथड का इस्तेमाल किया जाता था लेकिन अब आज 3 अगस्त 2026 से सेबी इसे और ज्यादा पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) लाया है।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

2 और कंपनियों के IPO को SEBI से मंजूरी, BSE और NSE पर होंगे लिस्ट

2 और कंपनियों को अपना पब्लिक इश्यू लाने के लिए कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी से मंजूरी मिल गई है। ये कंपनियां हैं- नित्यास जेम्स एंड ज्वेलरी लिमिटेड और इंटेलियस रिकोड लिमिटेड। दोनों IPO को BSE और NSE पर लिस्ट कराने की तैयारी है। नित्यास जेम्स एंड ज्वेलरी सूरत, गुजरात की कंपनी है। इसने मार्च में IPO के ड्राफ्ट पेपर जमा किए थे और उसे 23 जुलाई को सेबी की मंजूरी मिली। इसके ड्राफ्ट के अनुसार, कंपनी के प्रस्तावित IPO में 1.44 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे। प्रमोटर्स या मौजूदा निवेशकों की ओर से ऑफर फॉर सेल (OFS) नहीं होगा।

कंपनी अपने IPO से हासिल पैसों का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करने और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी। इस पब्लिक इश्यू के लिए चॉइस कैपिटल एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड, बुक रनिंग लीड मैनेजर है। रजिस्ट्रार Bigshare Services Private Limited है।

Intellius Recode IPO

वहीं, इंटेलियस रिकोड ने मार्च में IPO के लिए ड्राफ्ट पेपर जमा किए थे। उसे 24 जुलाई को सेबी से मंजूरी मिली। ड्राफ्ट के अनुसार, कंपनी के प्रस्तावित IPO में 117 करोड़ रुपये तक के नए शेयर जारी होंगे। साथ ही 12.9 लाख शेयरों का OFS रहेगा। इस IPO के लिए Inga Ventures Pvt.Ltd. बुक रनिंग लीड मैनेजर है। रजिस्ट्रार MUFG Intime India Pvt.Ltd. है।

नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल कंपनी के डिजिटल वर्कर्स के डेवलपमेंट, इससे जुड़ी सब-कॉन्ट्रैक्टिंग फीस के पेमेंट और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।इंटेलियस रिकोड एक टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस प्रोवाइडर है। यह कॉरपोरेट ग्राहकों के डिजिटल ट्रांसफॉरमेशन में मदद करती है। कंपनी टेक्नोलॉजी कंसल्टिंग और आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस बेस्ड सॉल्यूशंस की पेशकश करती है। इनमें प्रोपराइटरी एजेंटिक AI बेस्ड डिजिटल वर्कर भी शामिल हैं।

Manipal Health IPO: ₹9275 करोड़ का इश्यू 29 जुलाई से, ₹560-₹590 है प्राइस बैंड; रहेंगे ₹8000 करोड़ के नए शेयर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Mutual Fund SIF: म्यूचुअल फंड बेचने वालों के लिए आएगी नई परीक्षा, SEBI और NISM कर रहे तैयारी

Mutual Fund SIF: सेबी (SEBI) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सिक्योरिटीज मार्केट्स (NISM) मिलकर नई परीक्षा लाने की तैयारी कर रहे हैं। यह परीक्षा म्यूचुअल फंड और स्पेशलाइज्ड इनवेस्टमेंट फंड (SIF) बेचने वाले डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए होगी।

यह जानकारी सेबी के होल टाइम मेंबर अमरजीत सिंह ने नई दिल्ली में ASSOCHAM के 17वें म्यूचुअल फंड समिट में दी।

नई परीक्षा क्यों लाई जा रही है?

अमरजीत सिंह ने कहा कि इस परीक्षा का मकसद डिस्ट्रीब्यूटर्स की समझ को और बेहतर बनाना है।

उनका कहना है कि जो लोग म्यूचुअल फंड और SIF बेचते हैं, उन्हें इन प्रोडक्ट्स की पूरी जानकारी होनी चाहिए। नई परीक्षा इसी बात को सुनिश्चित करेगी।

SIF को मिला अच्छा रिस्पॉन्स

अमरजीत सिंह ने बताया कि पिछले साल शुरू स्पेशलाइज्ड इनवेस्टमेंट फंड (SIF) को निवेशकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला है।

31 मई 2026 तक SIF का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 13,500 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया। इस दौरान 56,000 से ज्यादा फोलियो खुले।

21 नई इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजी लॉन्च

SIF के तहत अब तक 21 इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजी लॉन्च की जा चुकी हैं।

इनमें Hybrid Long Short Strategy में सबसे ज्यादा निवेश आया है। इससे पता चलता है कि निवेशकों की दिलचस्पी नए तरह के निवेश विकल्पों में बढ़ रही है।

Life Cycle Fund पर भी जोर

अमरजीत सिंह ने सेबी के नए Life Cycle Fund फ्रेमवर्क का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन फंड्स में समय के साथ निवेश का बंटवारा अपने-आप बदलता रहता है। जैसे-जैसे आपका लक्ष्य करीब आता है, वैसे-वैसे जोखिम कम होता जाता है।

उनका कहना है कि ऐसे फंड लोगों को लंबे समय तक लक्ष्य के हिसाब से निवेश करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

सोशल मीडिया देखकर निवेश न करें

अमरजीत सिंह ने कहा कि सिर्फ सोशल मीडिया पर चल रहे ट्रेंड देखकर निवेश नहीं करना चाहिए।

उन्होंने सलाह दी कि निवेश हमेशा अपने वित्तीय लक्ष्य, जोखिम उठाने की क्षमता और कितने समय के लिए निवेश करना है, इन बातों को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए।

Kusumgar IPO: 8 जुलाई से खुलेगा ₹650 करोड़ का आईपीओ, 40% के पार पहुंचा GMP

पुनरोद्धार की उम्मीदों के बीच कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज के शेयरों में तेजी,लेकिन एक्सपर्ट्स को इसकी सफलता को लेकर शक, जानिए क्यों

Calcutta Stock Exchange Revival : वेस्ट बंगाल सरकार ने एक सदी पुराने कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज (CSE) को फिर से शुरू करने का इरादा ज़ाहिर किया है। इसके बाद अनलिस्टेड शेयर प्लेटफॉर्म्स पर कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज के शेयरों में ज़बरदस्त तेज़ी आई है। हालांकि,मार्केट एक्सपर्ट्स को इस एक्सचेंज के फिर से चालू होने की संभावना पर अभी भी शक है। एक्सचेंज के अनलिस्टेड शेयरों की कीमत 21 जून को लगभग 1,500 रुपये थी। 30 जून तक बढ़कर यह लगभग 1,800 रुपये पर पहुंच गई। कुछ प्लेटफॉर्म पर इस शेयर की कीमत 2,000 रुपये के करीब भी बताई जा रही है। हालांकि,इसका ट्रेडिंग वॉल्यूम बहुत कम है।

एक्सचेंज की प्रति शेयर बुक वैल्यू 3,000 रुपये से ज़्यादा है। बता दें कि 22 जून को पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री डॉ. स्वपन दासगुप्ता ने राज्य के बजट में CSE को फिर से शुरू करने की घोषणा की थी।

उम्मीद है कि राज्य सरकार के प्रस्ताव के बाद,CSE के अधिकारी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (SEBI)के पास जमा किए गए एक्सचेंज के वॉलंटरी एग्जिट (स्वेच्छा से बाहर निकलने) के आवेदन को वापस ले लेंगे। एक्सचेंज ने फरवरी 2025 में वॉलंटरी एग्जिट के लिए आवेदन किया था,जिसके बाद SEBI ने एग्जिट प्रोसेस के तहत एक वैल्यूअर नियुक्त किया था। हालांकि,इस आवेदन पर अभी कोई अंतिम आदेश जारी नहीं किया गया है।

यह तेजी सरकार के रिवाइवल प्रपोजल को लेकर बनी उम्मीद दिखाती है। हालांकि,बाजार के जानकारों का कहना है कि किसी भी रिवाइवल के लिए SEBI की मंज़ूरी और बड़ी रेगुलेटरी,टेक्नोलॉजिकल और कमर्शियल दिक्कतों से पार पाने की जरूरत होगी।

क्या हैं बड़ी चुनौतियां?

बाजार जानकारों का कहना है कि आज किसी स्टॉक एक्सचेंज को फिर से शुरू करने के लिए सिर्फ़ रेगुलेटरी मंज़ूरी से कहीं ज्यादा की ज़रूरत होती है। कम से कम 100 करोड़ रुपये की नेट वर्थ की शर्त पूरी करने के अलावा,एक आधुनिक एक्सचेंज के लिए एडवांस्ड टेक्नोलॉजी प्लेटफ़ॉर्म,सर्विलांस सिस्टम, साइबर सिक्योरिटी क्षमताएं,क्लियरिंग और सेटलमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर और खास तौर पर ट्रेंड स्टाफ़ की ज़रूरत होती है।

हालांकि कम से कम पूंजी की शर्त को पूरा करना शायद सबसे बड़ी बाधा न हो,लेकिन क्लियरिंग कॉरपोरेशन बनाना या क्लियरिंग की व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती है। मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार,CSE ने पहले देश के प्रमुख क्लियरिंग कॉरपोरेशन के साथ क्लियरिंग व्यवस्थाओं पर करार करने का प्रयास किया था,लेकिन वह कोशिश सफल नहीं हो पाई।

हालांकि,सबसे बड़ी बाधा लिक्विडिटी यानी अलग-अलग प्राइस लेवल पर पर्याप्त खरीदारों और विक्रेताओं की मौजूदगी है,ताकि आसानी से और कुशलता से ट्रेडिंग हो सके।

बाजार जानकारों का कहना है कि मजबूत टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर होने के बावजूद,कुछ मौजूदा एक्सचेंज भी ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बड़े इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर और ब्रोकर आम तौर पर ऐसे एक्सचेंज को पसंद करते हैं जहां लिक्विडिटी सबसे ज़्यादा होती है। इसके चलते किसी दोबारा शुरू किए गए एक्सचेंज के लिए बड़ी ट्रेडिंग एक्टिविटी को आकर्षित करना मुश्किल हो सकता है।

ANMI के नेशनल प्रेसिडेंट कमलेश श्रॉफ का कहना है कि भारत के कैपिटल मार्केट अब टेक्नोलॉजी और लिक्विडिटी पर आधारित इकोसिस्टम बन गए हैं। भले ही कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज की विरासत सम्मान के काबिल है,लेकिन इसे फिर से शुरू करने का आधार पुरानी शान के बजाय भविष्य की ज़रूरतें होनी चाहिए। अगर यह SME फाइनेंसिंग,रीजनल एंटरप्रेन्योरशिप,नए एसेट क्लास या मार्केट इनोवेशन के क्षेत्र में अपनी खास जगह बना पाता है,तो यह भारत की विकास यात्रा में अहम योगदान दे सकता है।

CSE के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO माधव रेड्डी कहते हैं कि इस एक्सचेंज को फिर से सफल बनाने के लिए,उसे एक ऐसा आकर्षक वैल्यू प्रपोज़िशन देना होगा जो अनोखा हो,किफायती हो और मौजूदा प्लेयर्स से काफी अलग हो। अगर इसमें साफ़ तौर पर कोई अलग औक खास बात नहीं होगी,तो इसके सफल पुनरुद्धार की संभावनाएं सीमित ही रहेंगी।

इसे बंद करना भी साबित हुआ मुश्किल

अजीब बात यह है कि इस एक्सचेंज को बंद करना भी उसे फिर से शुरू करने जितना ही मुश्किल साबित हुआ है। CSE ने इस साल की शुरुआत में SEBI की एग्जिट पॉलिसी के तहत स्वेच्छा से बाहर निकलने(वॉलंटरी एग्जिट)के लिए आवेदन किया था और इसके बाद रेगुलेटर ने एक वैल्यूअर नियुक्त किया। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि SEBI की 2012 की एग्जिट पॉलिसी के तहत,जो स्टॉक एक्सचेंज स्वेच्छा से बाहर निकलना चाहता है,उसे एग्जिट प्रोसेस पूरी होने से पहले ब्रोकर्स की ओर से आए दावों और देनदारियों का निपटारा करना होगा। मार्केट एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि ये देनदारियां कुछ सौ करोड़ रुपये तक हो सकती हैं।

एक्सर्ट्स आगे कहते हैं कि हालांकि SEBI कुछ रेगुलेटरी बकाया राशि माफ़ कर सकता है,लेकिन कानूनी जुर्माने सरकारी बकाया राशि के दायरे में आते हैं और उन्हें अकेले SEBI माफ़ नहीं कर सकता। इससे एग्ज़िट की प्रक्रिया और भी जटिल हो जाती है।

फिलहाल,CSE के अनलिस्टेड शेयरों में तेजी राज्य के रिवाइवल प्रपोज़ल को लेकर बनी उम्मीद दिखाती है,लेकिन जानकारों का कहना है कि एक्सचेंज का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या वह NSE और BSE के दबदबे वाले बाजार में लिक्विडिटी लाने में सक्षम एक अलग बिजनेस प्लेटफ़ॉर्म बना पाता है या नहीं।

क्यों बंद हुआ CSE?

1923 में स्थापित कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज में अप्रैल 2013 के बाद से इक्विटी ट्रेडिंग नहीं हुई है। SEBI ने मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों के लिए ज़रूरी नियमों का पालन न करने के कारण इस एक्सचेंज पर ट्रेडिंग रोक दी थी। रेगुलेटर ने इसका कारण ऑपरेशनल और रेगुलेटरी नियमों का पालन न करना बताया था। साथ ही,CSE काट्रेडिंग वॉल्यूम धीरे-धीरे NSE और BSE की ओर शिफ्ट हो गया,क्योंकि ये दोनों एक्सचेंज बेहतर टेक्नोलॉजी,देश भर में कनेक्टिविटी और काफी ज़्यादा लिक्विडिटी की सुविधा देते हैं।

जब ब्रोकर्स और इन्वेस्टर्स ने ऐसे एक्सचेंज को प्राथमिकता दी जहां बेहतर मार्केट और कीमतों का सही पता लगाने की सुविधा थी,तो CSE में ट्रेडिंग लगभग खत्म हो गई। हालांकि एक्सचेंज ने कानूनी रास्ते अपनाए और बाद में SEBI के एग्जिट फ्रेमवर्क के तहत स्वेच्छा से बाहर निकलने की कोशिश की। एक दशक से भी ज़्यादा समय से यहां कोई एक्टिव इक्विटी ट्रेडिंग नहीं हुई है।

 

 

 

Market Outlook : लाल निशान में बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 1 जुलाई को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Upcoming IPOs: AGS Health समेत 4 और कंपनियों के IPO कतार में, SEBI ने दिया ग्रीन सिग्नल

कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI ने 4 और कंपनियों के IPO को मंजूरी दे दी है। ये कंपनियां हैं- एजीएस हेल्थ, पीजीपी ग्लास, श्रेणी शेयर्स और SRIT इंडिया। एजीएस हेल्थ और पीजीपी ग्लास ने मार्च 2026 में सेबी के पास कॉन्फिडेंशियल तरीके से IPO का ड्राफ्ट जमा किया था। कॉन्फिडेंशियल रूट कंपनियों को लिस्टिंग पर अंतिम फैसले पर पहुंचने तक गोपनीयता की सुविधा देता है। अगर जरूरी हो तो वे बाद में बाजार की स्थितियों के आधार पर महत्वपूर्ण जानकारी का खुलासा किए बिना ड्राफ्ट को वापस भी ले सकती हैं।

कॉन्फिडेंशियल प्री-फाइलिंग कंपनियों को सेंसिटिव बिजनेस डिटेल्स या फाइनेंशियल मेट्रिक्स और रिस्क्स को गोपनीय रखने की इजाजत देती है, खासकर कॉम्पिटीटर्स से। दूसरी ओर स्टैंडर्ड DRHP (ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस) फाइलिंग के बाद एक पब्लिक डॉक्युमेंट बन जाता है।

एजीएस हेल्थ 4500 करोड़ रुपये और पीजीपी ग्लास 4,100 करोड़ रुपये का पब्लिक इश्यू लाना चाहती है। इस तरह ये दोनों कंपनियां कुल मिलाकर 8600 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में हैं।

बाकी दोनों कंपनियों का क्या प्लान

ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) के अनुसार, स्टॉक ब्रोकिंग फर्म श्रेणी शेयर्स के प्रस्तावित पब्लिक इश्यू में 69 लाख तक नए शेयर जारी होंगे। साथ ही मौजूदा शेयरधारकों की ओर से 82 लाख तक शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा। कंपनी नए शेयर जारी कर हासिल होने वाली रकम का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करने, कुछ कर्ज चुकाने और सामान्य कॉर्पोरेट कामों के लिए करने की योजना बना रही है।

ड्राफ्ट पेपर के अनुसार, SRIT इंडिया के IPO में 1.68 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी होंगे। ऑफर फॉर सेल नहीं होगा। IPO से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल मौजूदा प्रोडक्ट्स को आधुनिक बनाने और उनके रीडेवलपमेंट, वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करने, पहले से न पता अधिग्रहणों (Acquisitions) के जरिए इनऑर्गेनिक ग्रोथ हासिल करने और सामान्य कॉर्पोरेट कामों के लिए किया जाएगा।

IPOs This Week: 22 जून से शुरू हफ्ते में खुलेंगे 8 नए इश्यू, 6 कंपनियां होंगी लिस्ट

जियो प्लेटफॉर्म्स ने भी जमा किया IPO ड्राफ्ट

जियो प्लेटफॉर्म्स ने भी अपने पब्लिक इश्यू के लिए ड्राफ्ट सेबी के पास जमा कर दिया है। यह देश का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू साबित हो सकता है। कंपनी करीब 4 अरब डॉलर (लगभग 37,700 करोड़ रुपये) जुटाने की योजना बना रही है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SEBI ने ओपन मार्केट बायबैक फिर से शुरू करने की इजाजत दी, 1 अगस्त से नए नियम लागू

सेबी ने स्टॉक एक्सचेंजों के जरिए ओपन मार्केट शेयर बायबैक दोबारा शुरी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। शेयर बायबैक के इस तरीके को अप्रैल 2025 में बंद कर दिया था। टैक्स के नियमों में बदलाव के बाद ऐसा किया गया था। 1 अगस्त से शेयर बायबैक का यह तरीका फिर से शुरू हो जाएगा।

ओपन मार्केट बायबैक एक अतिरिक्त विकल्प होगा

ओपन मार्केट बायबैक को 66 दिनों में पूरा करना होता है। बायबैक के लिए एलॉटेड कम से कम 40 फीसदी फंड का इस्तेमाल होना जरूरी है। सेबी ने कहा है कि स्टॉक एक्सचेंजों के जरिए ओपन मार्केट बायबैक पहले से मौजूद बायबैक फ्रेमवर्क के तहत एक अतिरिक्त विकल्प होगा।

टैक्स को लेकर अब बायबैक के तरीकों में फर्क नहीं रह गया है

रेगुलेटर ने यह भी कहा है कि बायबैक के अलग-अलग तरीकों के बीच टैक्स को लेकर फर्क अब खत्म हो गया है। टैक्स के संसोधित नियमों में इस फर्क को दूर कर दिया गया है। इससे उन कंपनियों को शेयर बायबैक का ऐलान करने में आसानी होगी, जिनके पास पर्याप्त कैश है। वे अपने शेयरहोल्डर्स को बायबैक ऑफर कर सकती हैं।

बायबैक के वैकल्पिक तरीके का दुरूपयोग नहीं होने देगा सेबी

रेगुलेटर यह सुनिश्चित करेगा कि बायबैक के वैकल्पिक तरीके का दुरूपयोग नहीं किया जाए। इसके लिए बायबैक पीरियड के दौरान ISIN लेवल पर प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप की होल्डिंग्स फ्रिज कर दी जाएगी। हालांकि, टेंडर ऑफर के जरिए बायबैक में प्रमोटर्स को पार्टिसिपेट करने की इजाजत होगी। सेबी ने यह भी फैसला किया है कि शेयर बायबैक करने वाली कंपनी को पब्लिक अनाउंसमेंट के एक वर्किंग दिन के अंदर शेयरहोल्डर्स को इलेक्ट्रॉनिक तरीके से नोटिफाय करना होगा।

बायबैक के लिए अलग ट्रेडिंग विंडों की भी नहीं पड़ेगी जरूरत

सेबी ने स्टॉक एक्सचेंजों के जरिए होने वाले शेयर बायबैक के लिए अलग से ट्रेडिंग विंडो की जरूरत खत्म करने का भी फैसला किया है। पहले टैक्स के मामले में फर्क होने की वजह से अलग विंडो की शुरुआत की गई थी। सेबी का मानना है कि अब इसकी जरूरत नहीं रह गई है। अब बायबैक के ट्रांजेक्शंस स्टॉक एक्सचेंजों के रेगुलर ट्रेडिंग मैकेनिज्म के तहत पूरे होंगे।

मर्चेंट बैंकर्स की अनिवार्य नियुक्ति की जरूरत भी खत्म

रेगुलेटर ने बायबैक ट्रांजेक्शंस के लिए मर्चेंट बैंकर्स की अनिवार्य नियुक्ति की जरूरत भी खत्म कर दी है। अब प्रोसिजर से संबंधित कई जिम्मेदारियां लिस्टेड कंपनियों, स्टॉक एक्सचेंजों, कंप्लायंस ऑफिसर्स और सेक्रेटेरियल ऑडिटर्स पर डाल दी गई है।

NSE ने 10 साल बाद IPO के लिए दाखिल किया DRHP; ₹30000 करोड़ का हो सकता है इश्यू; SBI बेचेगा सबसे ज्यादा हिस्सेदारी

NSE IPO: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का IPO आखिरकार 10 साल के लंबे इंतजार के बाद आगे बढ़ गया है। देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज ने बुधवार को SEBI और BSE के पास 607 पेज का ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर दिया। NSE के शेयर सिर्फ BSE पर लिस्ट होंगे, ठीक वैसे ही जैसे BSE के शेयर सिर्फ NSE पर लिस्टेड हैं।

यह IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। यानी एक्सचेंज को कोई नया पैसा नहीं मिलेगा, बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। प्रस्तावित योजना के तहत शेयरधारक मिलकर NSE की करीब 6% इक्विटी बेचेंगे।

कितना होगा NSE का वैल्यूएशन

अनलिस्टेड मार्केट में NSE का वैल्यूएशन करीब 5 लाख करोड़ रुपये माना जा रहा है। इस आधार पर मार्केट एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि IPO का आकार लगभग 30,000 करोड़ रुपये हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह 2024 में आए Hyundai Motor India के करीब 27,000 करोड़ रुपये के IPO के बाद सबसे बड़ा IPO होगा।

दिलचस्प बात यह है कि NSE की प्रमुख शेयरधारक और देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) इस OFS में अपनी हिस्सेदारी नहीं बेच रही है।

SBI सबसे बड़ा सेलिंग शेयरधारक

ड्राफ्ट दस्तावेज के मुताबिक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) सबसे बड़ा सेलिंग शेयरधारक होगा। बैंक 2.47 करोड़ शेयर बेचने की योजना बना रहा है। इसके अलावा मॉरीशस स्थित MS Strategic (Mauritius) Limited 1.60 करोड़ शेयर बेच सकती है। वहीं, कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड करीब 1.19 करोड़ शेयरों की बिक्री करेगी।

अन्य प्रमुख विक्रेताओं में Aranda Investments (Mauritius) Pte. Ltd., बैंक ऑफ बड़ौदा और स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन शामिल हैं। ये सभी करीब 1.1 करोड़ शेयर तक बेच सकते हैं।

बीमा कंपनियां भी बेचेंगी हिस्सेदारी

सरकारी बीमा कंपनियां भी इस IPO में अपनी हिस्सेदारी घटाएंगी।

  • जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GIC Re) करीब 1.06 करोड़ शेयर बेचेगी।
  • द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड करीब 1.05 करोड़ शेयर बेचेगी।
  • नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड लगभग 60-60 लाख शेयर बेचेंगी।

IPO फाइलिंग से पहले NSE की IPO कमेटी ने बुधवार को बैठक कर प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया। NSE के बोर्ड ने सोमवार को DRHP को मंजूरी दी थी।

जनवरी में मिली थी SEBI की मंजूरी

NSE के बोर्ड ने 6 फरवरी 2026 को IPO प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इससे पहले जनवरी 2026 में SEBI ने एक्सचेंज को ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) दिया था। इसी के बाद लिस्टिंग का रास्ता साफ हुआ।

SEBI की यह मंजूरी इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इसे को-लोकेशन मामले से जुड़े कुछ पुराने मामलों के अंतिम निपटारे से अलग रखा गया था।

2016 से अटका हुआ था IPO

NSE की लिस्टिंग करीब 10 साल से अटकी हुई थी। इसकी सबसे बड़ी वजह को-लोकेशन विवाद था, जिसमें कुछ ब्रोकरों को ट्रेडिंग सिस्टम तक दूसरों के मुकाबले तेज और प्राथमिक पहुंच मिलने के आरोप लगे थे।

NSE ने 2016 में करीब 10,000 करोड़ रुपये के OFS के लिए पहली बार ड्राफ्ट पेपर दाखिल किए थे। लेकिन SEBI ने गवर्नेंस संबंधी चिंताओं के चलते प्रस्ताव वापस लेने की सलाह दी थी। इसके बाद NSE ने गवर्नेंस और कंप्लायंस में कई सुधार किए। IPO की तैयारी के लिए एक्सचेंज ने 20 मर्चेंट बैंकर समेत कई सलाहकार भी नियुक्त किए। फिलहाल NSE के करीब 1.8 लाख शेयरधारक हैं।

को-लोकेशन केस में सेटलमेंट की कोशिश

NSE ने जून 2025 में को-लोकेशन मामले में सेटलमेंट एप्लिकेशन दाखिल की थी। इसमें केस निपटाने के लिए 1,387.39 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव रखा था।

इससे पहले SEBI की हाई-पावर्ड एडवाइजरी कमेटी (HPAC) करीब 1,880 करोड़ रुपये के सेटलमेंट की सिफारिश कर चुकी थी। यह मामला अभी भी SEBI के विचाराधीन है।

Stocks to Watch: 18 जून को इन 10 स्टॉक्स पर रखें नजर, दिख सकती है बड़ी हलचल

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।