8th Pay Commission: फिटमेंट फैक्टर पर एक्सपर्ट्स का बड़ा खुलासा, सिर्फ भत्ते बढ़ने से नहीं चलेगा काम; जानिए सैलरी बढ़ाने का असली गणित

8th CPC Fitment Factor Calculator: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। ओडिशा के भुवनेश्वर में चल रही दो दिवसीय क्षेत्रीय बैठकों (6-7 जुलाई) के बाद अब पूरा फोकस इस बात पर टिक गया है कि इस बार कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने के लिए कौन सा फॉर्मूला अपनाया जाएगा। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा पेंच फंसा है ‘फिटमेंट फैक्टर’ पर, जिसे लेकर कर्मचारी यूनियनों और सरकार के बीच अंदरखाने बहस जारी है।

आसान भाषा में कहें तो फिटमेंट फैक्टर ही वह ‘जादुई नंबर’ है जो तय करता है कि आने वाले 10 सालों में सरकारी कर्मचारियों की जेब में कितनी सैलरी आएगी। आइए समझते हैं कि एक्सपर्ट्स इस बार किस नंबर की उम्मीद कर रहे हैं और क्यों केवल भत्तों के भरोसे रहने से कर्मचारियों का बड़ा नुकसान हो सकता है।

क्या है यह फिटमेंट फैक्टर और क्यों अड़े हैं कर्मचारी?

इसे बहुत ही सरल तरीके से समझें तो फिटमेंट फैक्टर एक ‘सैलरी मल्टीप्लायर’ है। पुराने वेतन आयोग की बेसिक सैलरी को इस नंबर से गुणा करके नए वेतन आयोग की न्यूनतम बेसिक सैलरी तय की जाती है।

7वें वेतन आयोग का उदाहरण: पिछले वेतन आयोग में सरकार ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया था। इसके कारण कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹7000 से बढ़कर सीधे ₹18000 हो गई थी।

8वें वेतन आयोग की स्थिति: आयोग का गठन हुए 8 महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन सरकार ने अभी तक इस नंबर को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं। जूनियर लेवल के कर्मचारियों की मांग है कि इस मल्टीप्लायर को इस बार और बड़ा रखा जाए ताकि महंगाई के इस दौर में उन्हें एक बेहतर सैलरी हाइक मिल सके।

एक्सपर्ट्स की दो राय: 1.90 से लेकर 2.86 तक का अनुमान

8वें वेतन आयोग में यह नंबर कितना तय होगा, इसे लेकर देश के बड़े फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के बीच दो अलग-अलग गणित चल रहे हैं:

बैंकबाजार के एक्सपर्ट के मुताबिक, फिलहाल फिटमेंट फैक्टर की रेंज 2.28 से 2.86 के बीच रहने की उम्मीद है। अंतिम फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार बढ़ती महंगाई और कर्मचारियों की उम्मीदों के बीच कैसे तालमेल बैठाती है।

एक और एक्सपर्ट का मानना है कि देश की वित्तीय स्थिति और बजटीय सीमाओं को देखते हुए सरकार इस नंबर को 1.90 से 2.10 के दायरे में सीमित रख सकती है। उनके अनुसार, वित्तीय दबाव के कारण इस नंबर का 2.3 से पार जाना थोड़ा मुश्किल लग रहा है।

सिर्फ भत्ते बढ़ने से क्यों नहीं बनेगी बात?

आम तौर पर यह माना जाता है कि अगर सरकार फिटमेंट फैक्टर को थोड़ा कम भी रखती है, तो वह हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस या डियरनेस अलाउंस (DA) बढ़ाकर कर्मचारियों को खुश कर सकती है। लेकिन एक्सपर्ट्स ने इस सोच के पीछे का एक बड़ा कड़वा सच उजागर किया है।

गणित बहुत सीधा है आपका मिलने वाला HRA, महंगाई भत्ता (DA) या रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन ये सभी चीजें आपकी रिवाइज्ड बेसिक सैलरी के आधार पर तय होती हैं। अगर फिटमेंट फैक्टर कम रहेगा, तो आपकी बेसिक सैलरी की नींव ही कमजोर रह जाएगी। जब बुनियादी सैलरी ही कम बढ़ेगी, तो उस पर कैलकुलेट होने वाले भत्तों की रकम भी आनुपातिक रूप से छोटी ही रहेगी। इसलिए, भत्ते कभी भी एक कमजोर फिटमेंट फैक्टर की भरपाई नहीं कर सकते।

सैलरी का पूरा स्ट्रक्चर: किस पर कितना असर?

अगर आप सोच रहे हैं कि इस फैसले से आपकी टेक-होम सैलरी पर क्या असर पड़ेगा। समझे सैलरी कंपोनेंट 8वें वेतन आयोग में इसका गणित

फिटमेंट फैक्टर- नए वेतन ढांचे की नींव है; यह तय करेगा कि न्यूनतम बेसिक पे कितनी बढ़ेगी।

हाउस रेंट अलाउंस (HRA)- नए बेसिक पे पर ही कैलकुलेट होगा, यानी फिटमेंट फैक्टर अच्छा तो HRA भी तगड़ा।

पेंशन लाभ- रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन भी बेसिक पे के रिवीजन से लिंक है, पेंशनर्स के लिए भी यह नंबर अहम है।

सरकारी खजाना- आयोग को कर्मचारियों की खुशहाली के साथ-साथ देश के वित्तीय बजट का भी ध्यान रखना होगा।

अब आगे क्या होने वाला है?

भुवनेश्वर की दो दिवसीय बैठक खत्म होने के बाद, अब 8वें वेतन आयोग की टीम 9-10 जुलाई को कोलकाता में राज्य और केंद्र के कर्मचारी संगठनों व पेंशनर्स के साथ सीधा संवाद करेगी। आने वाले महीनों में देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसी ही क्षेत्रीय बैठकें होंगी। आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट मध्य-2027 तक सरकार को सौंपनी है, जिसके बाद ही कर्मचारियों की अंतिम सैलरी और पेंशनर्स के भाग्य का फैसला होगा।

सोना खरीदने की क्या जरूरत? इन 5 सरकारी और प्राइवेट Gold ETF ने 3 साल में दिया 34% तक का छप्परफाड़ रिटर्न

Top Performing Gold ETFs in India: भारतीय बाजारों में सोने को हमेशा से निवेश का सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद जरिया माना गया है। लेकिन अब लोग फिजिकल सोना यानी गहने या सिक्के खरीदने के बजाय गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) में पैसा लगाना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इसमें न तो मेकिंग चार्ज की टेंशन होती है, न चोरी होने का डर और रिटर्न भी दमदार मिलता है।

हाल ही में आए म्यूचुअल फंड डेटा (ACE MF) के मुताबिक, देश के बड़े गोल्ड ईटीएफ ने पिछले 3 सालों में निवेशकों को 34% तक का सालाना कंपाउंडेड रिटर्न (CAGR) दिया है। इस लिस्ट में UTI Gold ETF सबसे आगे रहा है। आइए जानते हैं कि गोल्ड ईटीएफ क्या है और इस समय रिटर्न के मामले में कौन से टॉप 5 फंड्स धमाल मचा रहे हैं।

क्या होता है Gold ETF?

गोल्ड ईटीएफ एक तरह का म्यूचुअल फंड प्रोडक्ट ही होता है, जो शेयर बाजार में लिस्टेड होता है। इसे आप अपने डीमैट अकाउंट के जरिए ठीक वैसे ही खरीद और बेच सकते हैं, जैसे किसी कंपनी के शेयर को।

12 लाख रुपये सालाना सैलरी से ₹5 करोड़ का रिटायरमेंट फंड जुटाने का पूरा गणित, ये बिल्कुल पॉसिबल है!

इसका प्रदर्शन सीधे तौर पर घरेलू बाजार में सोने की वास्तविक कीमतों को ट्रैक करता है। जब सोने के दाम बढ़ते हैं, तो आपके गोल्ड ईटीएफ की वैल्यू भी बढ़ जाती है। इसमें निवेश करने के लिए आपको लिक्विडिटी यानी आसानी से बेचने की सुविधा और कम ट्रैकिंग डिफरेंस का फायदा मिलता है।

3 साल के रिटर्न में UTI Gold ETF रहा नंबर-1

2 जुलाई के लेटेस्ट डेटा के मुताबिक, कम से कम ₹1500 करोड़ से अधिक के एसेट अंडर मैनेजमेंट वाले फंड्स की कैटेगरी में UTI Gold ETF ने सबसे शानदार प्रदर्शन किया है।

बेंचमार्क को पछाड़ा: 3 साल की अवधि में जहां इसके बेंचमार्क ने महज 1.7% का रिटर्न दिया, वहीं यूटीआई गोल्ड ईटीएफ ने 34% का सालाना रिटर्न (CAGR) देकर अपने बेंचमार्क को 32.2% से मात दी।

1 साल का रिटर्न: 1 साल की अवधि में भी यह फंड टॉप पर रहा, जिसने निवेशकों को 45.6% का बंपर रिटर्न दिया, जबकि इसका बेंचमार्क 10.1% ही बढ़ सका।

सबसे बड़ा फंड: हालांकि, साइज (फंड साइज) के मामले में ICICI Pru Gold ETF सबसे बड़ा है, जिसका कुल कॉर्पस ₹27578.2 करोड़ है।

Top 5 Gold ETFs: रिटर्न और फंड साइज का पूरा रिपोर्ट कार्ड

अगर आप भी सोने में डिजिटल तरीके से निवेश करने की सोच रहे हैं, तो इन टॉप 5 स्कीम्स के प्रदर्शन पर नजर डाल सकते हैं:

Top 5 Gold ETFs: रिटर्न और फंड साइज का पूरा रिपोर्ट कार्ड

(नोट: इस रैंकिंग में केवल उन्हीं स्कीमों को शामिल किया गया है जिनका AUM ₹1500 करोड़ से ज्यादा है। 1 महीने और 3 महीने की छोटी अवधि में मीरा एसेट गोल्ड ईटीएफ का प्रदर्शन अन्य के मुकाबले थोड़ा बेहतर रहा है, जहां गिरावट क्रमशः -8.6% और -2.5% तक सीमित रही।)

निवेशकों के लिए काम की सलाह

म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए कि अलग-अलग टाइम फ्रेम में फंड्स की रैंकिंग बदल सकती है। इसलिए हेडलाइन या 3 साल के लंबे रिटर्न को देखने के साथ-साथ शॉर्ट-टर्म (1 महीना, 3 महीना) और मीडियम-टर्म के प्रदर्शन को भी समझना जरूरी है। सोने में निवेश हमेशा पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करने और महंगाई से सुरक्षा पाने के लिए एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Govt Cooperative Insurance Company: देश में जल्द लॉन्च होगी सरकारी सहकारी जीवन बीमा कंपनी, जानिए किसे होगा फायदा

Cooperative Life Insurance Company Explainer: देश के करोड़ों आम लोगों, किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए इंश्योरेंस सेक्टर से जुड़ा एक बहुत बड़ा अपडेट आया है। केंद्र सरकार जल्द ही सहकारी क्षेत्र में एक नई लाइफ इंश्योरेंस कंपनी शुरू करने जा रही है।

इस ऐतिहासिक कदम का उद्देश्य देश के सुदूर इलाकों, छोटे शहरों और गांवों तक किफायती जीवन बीमा की पहुंच को बढ़ाना है। आइए आपको बताते हैं कि सरकार की इस नई पहल कैसे काम करेगी और इससे सीधे आपको या आम पॉलिसीधारकों को क्या-क्या फायदे होने वाले हैं।

सहकारी जीवन बीमा कंपनी क्या है और इसकी घोषणा क्यों हुई?

केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस के मौके पर इस बड़ी योजना का ऐलान किया। अभी तक देश के सहकारिता आंदोलन का दायरा मुख्य रूप से डेयरी, चीनी, बीज और खाद जैसे पारंपरिक क्षेत्रों तक ही सीमित था।

अब सरकार इस पूरे इकोसिस्टम को वित्तीय सेवाओं से जोड़ने जा रही है। सरकार का मानना है कि सहकारी मॉडल के जरिए इंश्योरेंस बिजनेस में उतरने से देश के आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी जीवन बीमा सुरक्षा चक्र के दायरे में लाया जा सकेगा, वह भी बेहद किफायती प्रीमियम पर।

फर्टिलाइजर सेक्टर की दिग्गज सहकारी संस्था ‘इफको’ (IFFCO) पहले से ही एक जापानी पार्टनर के साथ मिलकर जनरल इंश्योरेंस के क्षेत्र में काम कर रही है। अब इसी सफलता को दोहराते हुए ‘लाइफ इंश्योरेंस’ के लिए एक पूरी तरह से नई सहकारी कंपनी खड़ी की जाएगी।

किसे और कैसे होगा इसका सीधा फायदा?

भारत में इस समय लगभग 8.5 लाख सहकारी समितियां हैं, जिनसे 30 करोड़ से अधिक सदस्य जुड़े हुए हैं। यह दुनिया का सबसे बड़ा सहकारी नेटवर्क है। नई बीमा कंपनी से इन लोगों को निम्नलिखित फायदे मिलेंगे:

कम प्रीमियम पर लाइफ इंश्योरेंस: सहकारी कंपनियों का मुख्य उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि अपने सदस्यों को सेवा देना होता है। इसलिए, प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियों के मुकाबले यहां लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम काफी कम होने की उम्मीद है।

गांवों और किसानों को सीधा लाभ: देश के करोड़ों किसान जो प्राइमरी एग्रीकल्चर कोऑपरेटिव सोसाइटीज (PACS) से जुड़े हैं, वे अब सीधे अपने नजदीकी सहकारी केंद्र से ही जीवन बीमा पॉलिसी खरीद और क्लेम कर सकेंगे। उन्हें बड़े शहरों या बैंकों के चक्कर नहीं काटने होंगे।

भरोसा और पारदर्शिता: सरकारी देखरेख और राष्ट्रीय डेटाबेस के जरिए संचालित होने के कारण इस कंपनी में आम लोगों का भरोसा निजी कंपनियों से कहीं ज्यादा मजबूत होगा।

डिजिटल बदलाव: अब 50,000 ई-पैक से मिलेगी मदद

इस वित्तीय समावेशन को जमीन पर उतारने के लिए सरकार बुनियादी ढांचे को पूरी तरह डिजिटल बना रही है। इसके तहत देश की 50,000 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) को अपग्रेड करके e-PACS में बदल दिया गया है।

भविष्य में ये डिजिटल e-PACS केंद्र केवल खाद-बीज देने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) की तरह काम करेंगे, जहां से ग्रामीण लोग अपनी जीवन बीमा पॉलिसी का प्रीमियम जमा कर सकेंगे और क्लेम की प्रक्रिया भी पूरी कर सकेंगे।

सहकारी क्षेत्र से जुड़े कुछ अन्य बड़े ऐलान

बीमा कंपनी के अलावा, सरकार ने इस सेक्टर को मजबूत करने के लिए कई और बड़ी घोषणाएं की हैं:

  1. भरत टैक्सी: सहकारी क्षेत्र की इस टैक्सी पहल को अगले दो वर्षों में देश के 500 शहरों तक बढ़ाया जाएगा।
  2. त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी: सहकारिता के क्षेत्र में प्रोफेशनल्स और मैनपावर की कमी को दूर करने के लिए आनंद (गुजरात) में ‘Tribhuvan Sahkari University’ की स्थापना की जा रही है।
  3. अनाज भंडारण क्षमता: देश में अनाज की बर्बादी रोकने के लिए 75,000 टन क्षमता वाले 135 गोदामों को ट्रांसफर किया गया है और 85 नए गोदामों का उद्घाटन हुआ है।
  4. सहकार वन प्रोजेक्ट: अमूल और NCCF मिलकर पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए ‘सहकार वन’ परियोजनाओं पर काम शुरू कर रहे हैं।

कुल मिलाकर साल 2047 तक भारत को ‘विकसित भारत’ बनाने के लक्ष्य में यह नई सहकारी जीवन बीमा कंपनी मील का पत्थर साबित हो सकती है। आम आदमी के लिहाज से देखें तो आने वाले समय में आपको लाइफ इंश्योरेंस के लिए एक नया, सुरक्षित और बेहद सस्ता सरकारी विकल्प मिलने जा रहा है।

8th Pay Commission: पेंशनर्स के लिए बड़ी खुशखबरी! न्यूनतम पेंशन 67% और उम्र के साथ 100% हाइक की मांग, देखें पूरी लिस्ट

8th Pay Commission Pension Revision Demands: केंद्र सरकार के कर्मचारियों के साथ-साथ देश के करीब 65 लाख रिटायर्ड पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी एक बेहद महत्वपूर्ण खबर आ रही है। आयोग इस समय विभिन्न राज्यों का दौरा करके कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और हितधारकों से मुलाकात कर सुझाव जुटा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले इस आयोग के कार्यक्षेत्र में 31 दिसंबर 2025 या उससे पहले रिटायर होने वाले पेंशनर्स की पेंशन की समीक्षा करना भी शामिल है। अलग-अलग कर्मचारी संगठनों ने आयोग के सामने पेंशन को लेकर कई बड़ी और क्रांतिकारी मांगें रखी हैं। आइए समझते हैं कि पेंशनर्स के लिए क्या-क्या मुख्य मांगें की गई हैं और इन्हें कब तक लागू किया जा सकता है।

प्रमुख कर्मचारी संगठनों की क्या हैं मांगें?

नेशनल काउंसिल फॉर जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM), महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गनाइजेशन और ऑल इंडिया डिफेंस एंप्लॉयीज फेडरेशन (AIDEF) जैसे बड़े संगठनों ने आयोग को अपनी विस्तृत मांगें सौंपी हैं:

NC-JCM: संशोधित वेतन के साथ पेंशन का स्ट्रक्चरल अलाइनमेंट किया जाए।

महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गनाइजेशन: पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली, यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) में सुधार और इसे DA से जोड़ा जाए।

AIDEF: नए रिवाइज्ड पे-स्ट्रक्चर के आधार पर सभी पेंशनर्स के लिए एक समान पेंशन लागू की जाए।

पेंशन रिवीजन से जुड़ी 5 सबसे बड़ी मांगें

हितधारकों और कर्मचारी यूनियनों द्वारा उठाई गई प्रमुख मांगें नीचे दी गई हैं:

  1. न्यूनतम पेंशन में बंपर बढ़ोतरी: पेंशनर्स के लिए न्यूनतम पेंशन को आखिरी बार मिले वेतन या आखिरी 10 महीनों के औसत वेतन का 67% किया जाए।
  2. फिटमेंट फैक्टर और डीआर में सुधार: पेंशन कैलकुलेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले फिटमेंट फैक्टर को संशोधित किया जाए और डियरनेस रिलीफ (DR) के ढांचे की समीक्षा करके इसे पेंशन लाभों में जोड़ा जाए।
  3. फैमिली पेंशन और ग्रेच्युटी: फैमिली पेंशन के दायरे को बढ़ाया जाए, ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा में बढ़ोतरी हो और पेंशन कम्यूटेशन यानी पेंशन की एकमुश्त रकम के नियमों में सुधार किया जाए।
  4. पेंशन स्कीम चुनने की आजादी: रिटायर्ड कर्मचारियों को उनकी सुविधा के अनुसार पुरानी पेंशन योजना (OPS), नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) या यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) में से किसी एक को चुनने का विकल्प दिया जाए।
  5. उम्र बढ़ने के साथ बढ़ेगी पेंशन: जैसे-जैसे पेंशनभोगी की उम्र बढ़े, उसकी पेंशन में भी आनुपातिक बढ़ोतरी की जाए। 90 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए इसे आखिरी वेतन का 100% करने का प्रस्ताव है।

उम्र के हिसाब से कितनी पेंशन बढ़ाने की है मांग?

संगठनों ने बढ़ती उम्र के साथ पेंशनर्स की चिकित्सा और अन्य जरूरतों को देखते हुए इस प्रकार पेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है:

उम्र के हिसाब से कितनी पेंशन बढ़ाने की है मांग?

आयोग का अगला शेड्यूल और देशव्यापी बैठकें

8वें वेतन आयोग ने अप्रैल, मई और जून में कई राज्यों का दौरा किया है। जुलाई में भी बैठकों का दौर जारी है:

भुवनेश्वर (ओडिशा): 6 और 7 जुलाई को आयोग यहां हितधारकों के साथ अहम चर्चा कर रहा है। इसके लिए रजिस्ट्रेशन 15 जून को ही बंद हो चुके थे।

कोलकाता (पश्चिम बंगाल): इसके बाद आयोग 9 और 10 जुलाई को कोलकाता का दौरा करेगा।

मुंबई दौरा: आयोग ने मुंबई में सेंट्रल रेलवे जोन के तहत विभिन्न रेलवे विभागों का दौरा करने की इच्छा भी जताई है, ताकि कर्मचारियों की कामकाजी परिस्थितियों को करीब से समझा जा सके।

कब तक लागू होंगी 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें?

आमतौर पर वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने में गठन के बाद से करीब 18 महीने का समय लगता है, जो मध्य-2027 (फरवरी या अप्रैल 2027) के आसपास पूरा होगा।

रिपोर्ट सौंपने के बाद, पिछले ट्रेंड्स बताते हैं कि केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने और इसे पूरी तरह लागू होने में 2 से 3 साल का समय लग जाता है। इसका मतलब है कि 2027 में घोषित होने वाली वेतन और पेंशन बढ़ोतरी साल 2029 या 2030 तक पूरी तरह से जमीन पर लागू हो पाएगी।

EPFO Big Update: ईपीएफओ ने पोर्टल पर बंद की UAN एक्टिवेशन की सुविधा, अब इस ऐप से होगा काम, जानें पूरा प्रोसेस

EPFO Discontinues UAN Activation on Portal: नौकरीपेशा लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की तरफ से एक बहुत बड़ा अपडेट आया है। ईपीएफओ ने अपने यूनिफाइड मेंबर पोर्टल से यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) को एक्टिवेट करने की सुविधा को पूरी तरह से बंद कर दिया है।

अब ईपीएफओ मेंबर्स को अपना UAN एक्टिवेट करने या नया यूएएन जेनरेट करने के लिए उमंग (UMANG) मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करना होगा। इसके साथ ही अब इस प्रक्रिया के लिए आधार-आधारित फेस ऑथेंटिकेशन को अनिवार्य कर दिया गया है। आइए जानते हैं कि ईपीएफओ ने यह बदलाव क्यों किया है और अब आप उमंग ऐप के जरिए अपना यूएएन कैसे एक्टिवेट कर सकते हैं।

क्यों बंद हुई पोर्टल पर यह सुविधा?

ईपीएफओ ने सुरक्षा, विश्वसनीयता और यूजर्स के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए 3 जुलाई को अपने यूनिफाइड मेंबर पोर्टल को अपग्रेड किया है। इस अपग्रेड के बाद पोर्टल पर एक नोटिस जारी कर साफ कर दिया गया है कि वेबसाइट के जरिए होने वाला यूएएन एक्टिवेशन और डायरेक्ट यूएएन अलॉटमेंट अब बंद कर दिया गया है।

अब सुरक्षा को मजबूत करने और किसी भी तरह के फ्रॉड को रोकने के लिए सरकार ने आधार फेस ऑथेंटिकेशन का रास्ता चुना है, जो सिर्फ उमंग ऐप पर उपलब्ध है।

UMANG App से UAN कैसे एक्टिवेट करें?

ईपीएफओ द्वारा जारी गाइडलाइंस के मुताबिक, अब आपको अपने स्मार्टफोन के जरिए नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करना होगा:

  1. ऐप डाउनलोड और लॉग-इन: सबसे पहले अपने फोन में उमंग ऐप डाउनलोड करें और अपने मोबाइल नंबर के जरिए रजिस्टर या लॉग-इन करें।
  2. EPFO सर्विस चुनें: ऐप के होमपेज पर जाकर ‘EPFO Services’ के विकल्प को खोजें और उस पर क्लिक करें।
  3. फेस ऑथेंटिकेशन विकल्प: इसके बाद आपको ‘UAN Services Through Face Authentication’ का विकल्प चुनना होगा।
  4. यूएएन एक्टिवेशन: अब ‘UAN Activation’ पर टैप करें।
  5. डिटेल्स दर्ज करें: यहां अपना 12-डिजिट का UAN नंबर, अपना आधार नंबर और आधार से लिंक मोबाइल नंबर दर्ज करें।
  6. सहमति दें: आधार ऑथेंटिकेशन के लिए नियम और शर्तों को स्वीकार करें।
  7. फेस स्कैन करें: अब स्क्रीन पर दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए अपने फोन के फ्रंट कैमरे से अपना चेहरा स्कैन करें।
  8. कन्फर्मेशन: वेरिफिकेशन सफल होते ही आपका UAN एक्टिवेट हो जाएगा और आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर इसका कन्फर्मेशन मैसेज आ जाएगा।

बच्चे को बनाना है डॉक्टर? मेडिकल की पढ़ाई के लिए हर महीने इतने की SIP से 12 साल में बनाए ₹1 करोड़ का फंड

इन बातों का रखें ध्यान

इस नए तरीके से यूएएन एक्टिवेट करने से पहले कुछ बातों का खास ख्याल रखें:

  • आपका आधार कार्ड एक एक्टिव मोबाइल नंबर से लिंक होना चाहिए।
  • आपके आधार की डिटेल्स जैसे- नाम, जन्मतिथि ईपीएफओ के रिकॉर्ड से पूरी तरह मैच होनी चाहिए।
  • आपके पास एक ऐसा स्मार्टफोन होना चाहिए जिसका कैमरा और इंटरनेट कनेक्शन ठीक से काम कर रहा हो, ताकि फेस स्कैनिंग में कोई दिक्कत न आए।

अपग्रेड पोर्टल पर अब कौन सी सुविधाएं मिलेंगी?

भले ही पोर्टल से यूएएन एक्टिवेशन की सुविधा हटा दी गई हो, लेकिन वेबसाइट पर कई अन्य जरूरी सेवाएं पहले की तरह जारी रहेंगी। मेंबर्स अभी भी पोर्टल पर जाकर ‘Know Your UAN’ सेवा का लाभ उठा सकते हैं। इसके अलावा, डेथ क्लेम फाइल करने की सुविधा भी वेबसाइट पर चालू रहेगी। साथ ही, अगर कोई अपना यूएएन भूल गया है, तो उसे मोबाइल नंबर और पहचान वेरिफिकेशन के जरिए रिकवर करने की प्रक्रिया को और आसान बना दिया गया है।

Mumbai Heavy Rain Red Alert: मुंबई-पुणे में बारिश ने मचाई तबाही! ‘रेड अलर्ट’ के बीच स्कूल बंद, ये सारी ट्रेनें हुई कैंसिल

Mumbai Weather Update: महाराष्ट्र में मानसून ने अपना सबसे रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। मुंबई, पुणे, ठाणे और पालघर सहित राज्य के कई हिस्सों में हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) मुंबई ने मुंबई, पालघर, रायगढ़ और ठाणे जिलों के लिए चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि इन इलाकों में 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं के साथ अत्यंत भारी बारिश होने की आशंका है।

मौसम विभाग ने लोगों को बेहद सतर्क रहने और सुरक्षात्मक उपाय अपनाने की सलाह दी है। भारी बारिश और सुरक्षा के मद्देनजर मुंबई, पुणे, ठाणे और नवी मुंबई में 6 जुलाई को सभी स्कूलों और कॉलेजों को बंद रखने का फैसला किया गया है। मुंबई-पुणे रेल रूट पर भूस्खलन होने से ट्रेनों का परिचालन ठप हो गया है।

कर्जत-लोनावला रूट पर लैंडस्लाइड, मुंबई-पुणे ट्रेन सेवाएं ठप

लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण मुंबई-पुणे रेल मार्ग के बेहद संवेदनशील कर्जत-लोनावला भोर घाट (खंडाला घाट) सेक्शन में कई जगहों पर भूस्खलन हुआ है। इसके चलते सोमवार तड़के से ही इस रूट पर ट्रेनों की आवाजाही को पूरी तरह से निलंबित कर दिया गया है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक सेंट्रल रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी स्वप्निल नीला ने बताया कि घाट सेक्शन में ठाकुरवाड़ी के पास भारी लैंडस्लाइड हुआ है। इसके अलावा तड़के करीब 3:05 बजे खंडाला और मंकी हिल के बीच मिडिल लाइन पर भी एक और लैंडस्लाइड की रिपोर्ट मिली है।

भोर घाट सेक्शन में तीन रेलवे लाइनें हैं अप लाइन (मुंबई की तरफ), डाउन लाइन (पुणे की तरफ) और मिडिल लाइन। लगातार हो रही बारिश और मलबे के कारण ये तीनों ही लाइनें पूरी तरह प्रभावित हुई हैं। इससे सेंट्रल रेलवे को कई लंबी दूरी की ट्रेनों को कैंसिल, डायवर्ट या शॉर्ट-टर्मिनेट करना पड़ा है।

कैंसिल की गई प्रमुख ट्रेनों की लिस्ट

सीएसएमटी-पुणे इंद्रायणी एक्सप्रेस

इंटरसिटी एक्सप्रेस

डेक्कन एक्सप्रेस

डेक्कन क्वीन

प्रगति एक्सप्रेस

धुले एक्सप्रेस

पुणे-सीएसएमटी सिंहगढ़ एक्सप्रेस

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि युद्धस्तर पर मलबा हटाने और ट्रैक बहाली का काम जारी है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे घर से निकलने से पहले अपनी ट्रेन का स्टेटस जरूर चेक कर लें। यात्रियों की मदद और रीयल-टाइम अपडेट के लिए मध्य रेलवे ने प्रमुख स्टेशनों पर हेल्पलाइन नंबर स्थापित किए हैं-

CSMT: 022-22694040

ठाणे: 9321336747

दादर: 9136452387

लोनावला: 8356854238

पुणे में रेड अलर्ट: सभी स्कूल बंद, नदियों से दूर रहने की अपील

पुणे जिले के लिए मौसम विभाग द्वारा ‘रेड अलर्ट’ जारी किए जाने के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुणे के जिलाधिकारी श्री जितेंद्र डुडी ने सोमवार को जिले के सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी है। पुणे नगर निगम (PMC) ने नागरिकों से अपील की है कि वे बेहद जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकलें। प्रशासन ने सख्त हिदायत दी है कि लोग नदियों, नालों और अन्य खतरनाक या जलजमाव वाले स्थानों से दूर रहें और स्थानीय प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों का कड़ाई से पालन करें।

मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई में भी बंद रहेंगे स्कूल-कॉलेज

मुंबई: BMC ने भारी बारिश और तेज हवाओं के ‘ऑरेंज अलर्ट’ को देखते हुए मुंबई के सभी सरकारी, निजी और नगर निगम द्वारा संचालित स्कूलों और कॉलेजों में सोमवार को छुट्टी घोषित की है। बीएमसी ने साफ किया है कि सरकारी और निजी दफ्तर हमेशा की तरह सामान्य रूप से काम करते रहेंगे।

ठाणे: ठाणे के जिला कलेक्टर श्रीकृष्णनाथ पांचाल ने भी सुरक्षा के मद्देनजर जिले की सभी आंगनबाड़ियों, बालवाड़ियों, प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को आज बंद रखने का आदेश दिया है।

नवी मुंबई: नवी मुंबई नगर निगम ने भी सभी स्कूलों को बंद रखने का फैसला किया है। नवी मुंबई की मेयर सुजाता पाटिल और एनएमएमसी कमिश्नर कैलास शिंदे ने नागरिकों से बिना वजह घरों से बाहर न निकलने की भावुक अपील की है।

ये भी पढ़ें- Mumbai Rains: मुंबई में आसमान से बरसी आफत! 6 लोगों की मौत

Investment Tips: ज्यादा रिटर्न के चक्कर में कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती? जानिए निवेश का वो सच जो कोई नहीं बताता

Right Investment Fund vs High Savings Rate: जब लोग निवेश करने का मन बनाते हैं, तो वे अपनी पूरी ऊर्जा और समय कुछ खास सवालों के जवाब ढूंढने में लगा देते हैं। ‘लार्ज कैप फंड बेहतर रहेगा या फ्लेक्सी कैप?’, ‘डायरेक्ट प्लान चुनें या रेगुलर?’, ‘किस म्यूचुअल फंड का 3 साल का रिकॉर्ड सबसे शानदार है?’ लोग घंटों रिसर्च और बहस करते हैं।

लेकिन, वे अक्सर उस इकलौते सवाल को पूरी तरह भूल जाते हैं जो असल में उनकी अमीरी का फैसला करने वाला है ‘आप हर महीने कितना पैसा बचाकर निवेश करने वाले हैं?’

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स इसे ‘होशियारी के भेष में काम टालना’ कहते हैं। सही फंड चुनना मजेदार और अंतहीन बहस का विषय हो सकता है, लेकिन हर महीने जेब से ज्यादा पैसा निकालकर निवेश करना थोड़ा दर्दनाक और उबाऊ होता है। इसलिए दिमाग बड़े और जरूरी सवाल को छोड़कर छोटे सवालों में उलझ जाता है। आइए समझते हैं कि निवेश में ‘फंड’ से ज्यादा ‘रकम’ क्यों मायने रखती है।

इस गणित से समझें: बेहतर रिटर्न या ज्यादा बचत, कौन जीतेगा?

मान लेते हैं दो दोस्त हैं- इन्वेस्टर ‘A’ और इन्वेस्टर ‘B’है। दोनों बिल्कुल शुरुआत से 10 साल के लिए निवेश करना शुरू करते हैं:

इन्वेस्टर ‘A’ (ज्यादा बचत, साधारण रिटर्न): यह हर महीने ₹20000 की बड़ी बचत करता है और किसी बहुत ही साधारण या सुरक्षित फंड में निवेश करता है, जहां इसे सालाना 8% का रिटर्न मिलता है।

इन्वेस्टर ‘B’ (कम बचत, बेहतरीन रिटर्न): यह बाजार की पूरी समझ रखता है, बेहतरीन रिसर्च करके बेस्ट फंड चुनता है और सालाना 14% का शानदार रिटर्न कमाता है। लेकिन अपनी इस काबिलियत के घमंड में वह हर महीने सिर्फ ₹12000 ही निवेश करता है।

10 साल बाद का नतीजा

10 साल पूरे होने पर साधारण रिटर्न (8%) वाले इन्वेस्टर ‘A’ के पास कुल ₹36 लाख का फंड जमा होगा। वहीं, अपनी काबिलियत से 14% का बंपर रिटर्न कमाने के बावजूद इन्वेस्टर ‘B’ के पास केवल ₹32 लाख ही जमा हो पाएंगे।

कम रिटर्न के बावजूद क्यों जीत गई ‘ज्यादा बचत’?

अगर आंकड़ों को करीब से देखें, तो इन्वेस्टर ‘B’ इस बात में सही था कि उसने मार्केट से ज्यादा मुनाफा कमाया। मार्केट ने उसे ₹17 लाख का रिटर्न दिया, जबकि इन्वेस्टर ‘A’ को सिर्फ ₹13 लाख का रिटर्न मिला। इन्वेस्टर ‘B’ निवेश की रेस में तो जीत गया, लेकिन उसने अपनी जेब से इतना कम पैसा लगाया था कि उसका 6% का एक्स्ट्रा रिटर्न भी ₹8000 प्रति माह की कम बचत के नुकसान की भरपाई नहीं कर पाया।

शुरुआती 10 सालों में आपकी जेब का पैसा करता है ‘हेवी लिफ्टिंग’

शुरुआत के सालों में ऐसा क्यों होता है? वजह साफ है शुरुआत में आपका कुल फंड छोटा होता है। जब फंड छोटा होगा, तो उस पर मिलने वाला रिटर्न रुपयों के मामले में हमेशा कम ही रहेगा, भले ही आपका रिटर्न प्रतिशत कितना भी ऊंचा क्यों न हो।शुरुआती दशक में आपके फंड को बड़ा बनाने का असली काम वह पैसा करता है जो आप हर महीने अपनी जेब से जोड़ रहे हैं।

PPF for Children: रोज ₹166 बचाकर बच्चे को बनाएं करोड़पति! सरकारी PPF स्कीम का यह कैलकुलेशन कर देगा हैरान

रिटर्न का असली खेल तो बहुत बाद में शुरू होता है, जब आपका बेस बहुत बड़ा हो जाता है। लेकिन तब तक ज्यादा बचत करने वाले का फंड इतना आगे निकल चुका होता है कि बेस्ट फंड चुनने वाला कभी उसकी बराबरी नहीं कर पाता।

विडंबना यही है कि ज्यादातर लोग फंड चुनने पर तब सबसे ज्यादा सिर खपाते हैं जब उसकी अहमियत सबसे कम होती है (शुरुआत में), और जब इसकी असल जरूरत होती है, तब तक वे निवेश में दिलचस्पी खो देते हैं।

नए निवेशकों के लिए क्या है सही तरीका?

अगर आप निवेश की शुरुआत कर रहे हैं, तो एक्सपर्ट्स के मुताबिक आपको इस क्रम का पालन करना चाहिए:

  1. अपनी बचत की क्षमता तय करें: पहले यह देखें कि आप हर महीने कितना बचा सकते हैं। फिर उस रकम को अपनी आरामदायक स्थिति से थोड़ा और ऊपर खींचें यानी जितना हो सके ज्यादा बचाएं।
  2. फंड चुनने पर बाद में सोचें: जब निवेश की रकम तय हो जाए, तब फंड्स पर ध्यान दें। निवेश को बहुत सीधा, साधारण और उबाऊ रखें। जैसे- किसी अच्छे इंडेक्स या फ्लेक्सी कैप फंड में डाल दें।
  3. समय को अपना काम करने दें: एक बार निवेश शुरू करने के बाद बार-बार पोर्टफोलियो को न छुएं, कंपाउंडिंग को अपना जादू दिखाने दें।

वैसे इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप कहीं भी लापरवाही से पैसा लगा दें। अगर आप पैसा सिर्फ सेविंग्स अकाउंट में छोड़ देंगे, तो महंगाई आपके पैसे को खा जाएगी। वहीं अगर आप बिना सोचे-समझे क्रिप्टो या F&O जैसे सट्टेबाजी वाले जुए में पड़ गए, तो कोई भी बचत दर आपको बर्बाद होने से नहीं बचा सकती।

लेकिन अगर आपके विकल्प समझदारी भरे और सुरक्षित हैं, तो इस बात पर माथापच्ची करना बंद कर दीजिए कि कौन सा फंड बेस्ट है। ज्यादा से ज्यादा बचाएं, साधारण फंड चुनें और बार-बार चिंता करना छोड़ दें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Instagram Ad Row: क्या भारत में बैन होगा इंस्टाग्राम? सरकार ने Meta को भेजा नोटिस, जानिए क्या है विवाद

Instagram Ad Row: केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर ‘पेड’ विज्ञापनों में बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े वीडियो और अन्य विवादित कंटेंट को लेकर मेटा (Meta) को कड़े शब्दों में नोटिस जारी किया है। सूत्रों ने कहा कि सरकार ने यह नोटिस शनिवार 4 जुलाई की शाम को जारी किया। इस नोटिस में दिग्गज अमेरिकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कंपनी को बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को बढ़ावा देने वाले इंस्टाग्राम विज्ञापनों को तुरंत हटाने का आदेश दिया है। आपको बता दें कि मेटा, इंस्टाग्राम और फेसबुक की पैरेंट कंपनी है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने Meta को निर्देश दिया है कि ऐसे सभी विज्ञापन और कंटेंट, जो बच्चों के यौन शोषण संबंधी कंटेंट तक पहुंच उपलब्ध कराते हैं या उसे बढ़ावा देते हैं, उन्हें तत्काल हटाया जाए। साथ ही कंपनी से 7 दिनों के भीतर डिटेल्स जवाब भी मांगा गया है। सूत्रों ने पीटीआई को बताया, “इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इंस्टाग्राम को उन सभी विज्ञापनों और सामाग्रियों को हटाने का आदेश दिया है जो बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार को बढ़ावा देते हैं या उन तक पहुंच आसान बनाते हैं।”

क्या है आरोप?

यह कदम सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के निर्देश के एक दिन बाद उठाया गया है। इसमें उन्होंने मंत्रालय के अधिकारियों से मेटा को तलब करने को कहा था। यह मामला इंस्टाग्राम विज्ञापनों से जुड़ा है, जिन पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को बढ़ावा देने का आरोप है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि मंत्रालय ने मेटा को भेजे नोटिस में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट के विज्ञापनों के आरोपों पर स्पष्टीकरण और मामले में की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी है।

7 दिन में देना होगा जवाब

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मेटा से सात दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण भी मांगा है। कैलिफोर्निया मुख्यालय वाली दिग्गज टेक कंपनी मेटा के पास फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप जैसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का स्वामित्व है। मंत्रालय का यह ताजा कदम BBC की एक रिपोर्ट के बाद आया है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि मेटा का ‘रिकमेंडेशन एल्गोरिदम’ बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट वाले वीडियो को बढ़ावा दे रहा था। इससे सुरक्षा उपायों में गंभीर कमियां उजागर हुईं।

BBC की जांच में फेसबुक और इंस्टाग्राम पर इस तरह के विज्ञापन भी देखे गए। जबकि मेटा की विज्ञापन नीतियां स्पष्ट रूप से अश्लील कंटेंट पर रोक लगाती हैं। यह आरोप है कि इंस्टाग्राम ने ‘रेप वीडियो’ और ‘चाइल्ड वीडियो’ जैसे शब्दों वाले ‘पेड’ विज्ञापन दिखाए। ये यूजर्स को टेलीग्राम चैनलों पर ले जाते थे, जहां कथित तौर पर ऐसा कंटेंट बेचा जा रहा था।

सरकार क्या चाहती है?

मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति के अनुसार, सरकार यह जानना चाहेगी कि ऐसे विज्ञापनों को कैसे मंजूरी दी गई आरोपों के सामने आने के बाद मेटा ने क्या सुधारात्मक कदम उठाए हैं। साथ ही कंपनी भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए वह क्या सुरक्षा उपाय करने की योजना बना रही है। सूत्रों ने कहा कि अगर आरोप बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को बढ़ावा देने वाले ‘पेड’ विज्ञापनों से संबंधित हैं, तो एक मध्यस्थ होने के बावजूद मेटा किसी तीसरे पक्ष के कंटेंट के तर्क या बचाव का सहारा नहीं ले सकती।

सूत्रों में से एक ने कहा, “अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो उन्हें उन विज्ञापनों के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा जिनसे प्लेटफॉर्म को रेवेन्यू मिलता है।” उसने कहा कि जहां मंत्रालय मामले के तकनीकी और नियामक पहलुओं की समीक्षा करेगा। वहीं, अगर किसी एजेंसी, प्राधिकरण या व्यक्ति को लगता है कि कानून के तहत अपराध हुआ है, तो वे विज्ञापनदाता या प्लेटफॉर्म के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

सरकार ने ‘बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करने’ की नीति अपनाई

भारत सरकार ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े ऑनलाइन कंटेंट के मामले में ‘बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करने’ की नीति अपनाई है। इसके तहत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को ऐसे कंटेंट का तुरंत पता लगाने, उसे हटाने और उसकी रिपोर्ट करने के साथ-साथ डिजिटल परिवेश में बच्चों की सुरक्षा के लिए मजबूत उपाय करने की जरूरत है। सरकार ने समय-समय पर उन वेबसाइट को भी ब्लॉक किया है जिनमें बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट होते हैं। यह कार्रवाई इंटरपोल से मिली लिस्ट के आधार पर की गई है, जो भारत की नेशनल नोडल एजेंसी CBI को मिलती है।

Meta पर बढ़ा दबाव

सरकार के इस नोटिस के बाद Meta पर अपने कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम को और मजबूत करने का दबाव बढ़ गया है। यदि कंपनी तय समय के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं देती या निर्देशों का पालन नहीं करती, तो उसके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

क्या है CSEAM?

Child Sexual Exploitation and Abuse Material (CSEAM) वह अवैध कंटेंट होता है। इनमें बच्चों के यौन शोषण या उत्पीड़न से जुड़ी तस्वीरें, वीडियो या अन्य डिजिटल कंटेंट शामिल होते हैं। भारत में ऐसे कंटेंट का निर्माण, प्रसार, प्रचार या शेयर करना गंभीर अपराध है। केंद्र सरकार ने साफ संकेत दिया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सरकार चाहती है कि सभी डिजिटल कंपनियां अपनी जिम्मेदारी निभाएं। ऐसे कंटेंट को तुरंत हटाने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करें।

मेटा को दूसरी बार भेजा गया है नोटिस

इस सप्ताह दूसरी बार मेटा जांच के दायरे में आया है। इससे पहले बुधवार को भारत सरकार ने मेटा को एक नोटिस जारी करके व्हाट्सऐप पर प्रस्तावित ‘यूजरनेम फीचर’ के बारे में सवाल पूछा था। सरकार को चिंता है कि इससे ऑनलाइन धोखाधड़ी, ‘फिशिंग’ डिजिटल अरेस्ट घोटाला और किसी और का रूप धारण किए जाने वाले हमले काफी बढ़ सकते हैं।

ये भी पढ़ें- Khamenei Funeral News: ‘मुझे लगा था लोग उनसे नफरत करते हैं…’; खामेनेई के अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़ देख ट्रंप के उड़े होश

सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया है कि जब तक इस मुद्दे पर सरकार की संतुष्टि के अनुसार बातचीत पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस फीचर को रोक दिया जाए। सूत्रों का कहना है कि व्हाट्सऐप ‘यूजरनेम फीचर’ को पेश करने में देरी करेगा।

100 साल बाद खुला अंटार्कटिका के ‘खूनी झरने’ का राज! बर्फ की गहराइयों में छिपे उस खौफनाक सच से वैज्ञानिकों ने उठाया पर्दा

Antarctica Blood Falls Red Water Mystery: अंटार्कटिका महाद्वीप की जमी हुई सुन्न कर देने वाली बर्फ के बीच एक ऐसी जगह भी है, जहां से पानी नहीं, बल्कि खौफनाक ‘खून’ जैसी लाल धार बहती है। दूर से देखने पर ऐसा लगता है मानो सफेद बर्फ का सीना चीरकर कोई गहरा जख्म उबल रहा हो। साल 1911 में जब इंसानों ने पहली बार इस रहस्यमयी ‘खूनी झरने’ को देखा, तो उनके होश उड़ गए।

आखिर माइनस डिग्री तापमान में  जहां सब कुछ जम जाता है, वहां यह लाल खौफनाक पानी कैसे और क्यों बह रहा है? 100 से भी ज्यादा सालों तक वैज्ञानिक इस डरावने राज को सुलझाने के लिए भटकते रहे, लेकिन अब जाकर बर्फ की गहराइयों में छिपा वो असली सच सामने आ गया है जिसने सबको चौंका दिया है।

‘अंटार्कटिक साइंस’ जर्नल में छपी एक बेहद चौंकाने वाली नई रिसर्च ने इस खूनी पहेली के आखिरी हिस्से को बेपर्दा कर दिया है। वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला है कि टेलर ग्लेशियर के नीचे सदियों से कैद यह हैरान करने वाला लाल पानी आखिर किस अदृश्य ताकत के दबाव में आकर अचानक सतह पर उबलने लगता है। क्या यह कुदरत का कोई खौफनाक करिश्मा है या इसके पीछे कोई गहरा वैज्ञानिक खेल? आइए इस रहस्य की परतों को खोलते हुए समझते हैं इस अद्भुत घटना के पीछे की पूरी कहानी।

क्या है अंटार्कटिका का ‘खूनी झरना’?

यह अनोखा झरना पूर्वी अंटार्कटिका के मैकमर्डो ड्राई वैली (McMurdo Dry Valleys) में टेलर ग्लेशियर के किनारे पर स्थित है, जो पृथ्वी के सबसे ठंडे और सूखे क्षेत्रों में से एक है। इस रहस्यमयी झरने को सबसे पहले साल 1911 में ब्रिटिश टेरा नोवा अभियान के दौरान ऑस्ट्रेलियाई भूवैज्ञानिक थॉमस ग्रिफ़िथ टेलर ने देखा था, जिनके नाम पर इस ग्लेशियर का नाम रखा गया।

शुरुआती दौर में खोजकर्ताओं का मानना था कि पानी का यह गाढ़ा लाल रंग किसी खास तरह के लाल शैवाल के कारण है। लेकिन दशकों के वैज्ञानिक शोध के बाद यह साफ हो गया कि यह रंग ग्लेशियर के नीचे बहने वाले आयरन-युक्त नमकीन पानी की वजह से है।

क्यों लाल होता है इस झरने का पानी?

ग्लेशियर के नीचे छिपा यह पानी आम पानी नहीं है, बल्कि यह एक प्राचीन और अत्यधिक नमकीन घोल। करीब 15 लाख साल पहले जब ग्लेशियर आगे बढ़ रहे थे, तब समुद्र का यह पानी लगभग 400 मीटर गहरी बर्फ के नीचे कैद हो गया था।

जमने से रोकता है नमक: पानी में नमक की भारी मात्रा होने के कारण यह बेहद कम तापमान (-10°C से भी नीचे) में भी बर्फ नहीं बनता और लिक्विड फॉर्म में रहता है।

ऑक्सीजन से रिएक्शन: इस प्राचीन पानी में आयरन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। जैसे ही यह आयरन-युक्त पानी ग्लेशियर की दरारों से बाहर निकलकर हवा के संपर्क में आता है, तो हवा में मौजूद ऑक्सीजन के साथ इसका रिएक्शन हो जाता है। आसान भाषा में कहें तो जैसे लोहे में जंग लगने पर वह लाल-भूरा हो जाता है, ठीक वैसे ही यह पानी हवा लगते ही गहरे लाल रंग में बदल जाता है।

नई रिसर्च में क्या आया सामने?

अब तक वैज्ञानिक यह तो जानते थे कि पानी लाल क्यों है, लेकिन यह पानी इतनी भारी बर्फ को चीरकर अचानक बाहर कैसे आता है, यह एक पहेली थी। इस नई स्टडी ने पहेली के इसी आखिरी हिस्से को सुलझाया है।

वैज्ञानिकों ने साल 2018 में इस झरने से पानी निकलने की घटना का मिलान ग्लेशियर में हुए बदलावों से किया। उन्होंने पाया कि जब झरने से लाल पानी बाहर निकला, ठीक उसी समय ग्लेशियर की सतह में लगभग 15 मिलीमीटर की मामूली गिरावट आई थी और ग्लेशियर की रफ्तार भी कुछ समय के लिए धीमी हो गई थी। इससे यह साबित होता है कि ग्लेशियर की बर्फ में होने वाली मामूली हलचल से नीचे का दबाव कम होता है और वह दबा हुआ पानी नेटवर्क चैनलों के जरिए ऊपर चढ़कर सतह पर आ जाता है।

क्यों खास है यह नई खोज?

इससे पहले किए गए रडार सर्वे में टेलर ग्लेशियर के नीचे दबाव वाले चैनलों का पता चला था, जिससे यह समझना आसान हुआ था कि दुनिया के सबसे ठंडे ग्लेशियर के अंदर पानी तरल रूप में कैसे बह सकता है। अब यह नई खोज सीधे तौर पर ग्लेशियर की मूवमेंट और पानी के बाहर आने के संबंध को प्रमाणित करती है। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि ग्लेशियरों के नीचे पानी कैसे व्यवहार करता है।