Sensex 544 प्वाइंट्स मजबूत, Nifty 24774 पर बंद, ₹3 लाख करोड़ बढ़ी निवेशकों की दौलत

Sensex-Nifty closes green: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के सबसे बड़े सैन्य हमले को टालने का ऐलान किया तो मार्केट में रौनक छा गई। कच्चे तेल की नरमी से इसे और सपोर्ट मिला। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 800 प्वाइंट्स उछल पड़ा तो निफ्टी 24750 के पार पहुंच गया। ब्रोडर लेवल पर भी मार्केट में अच्छी रौनक रही और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 1% से अधिक की बढ़त रही।

सेक्टरवाइज आईटी सेक्टर ने आज मार्केट को शानदार सपोर्ट दिया और इसका निफ्टी इंडेक्स 3% से अधिक मजबूत हुआ। इंडेक्स के हैवीवेट प्राइवेट बैंकिंग स्टॉक्स ने इसे सपोर्ट किया जिसका निफ्टी इंड़ेक्स करीब 2% मजबूत हुआ। निफ्टी मेटल और निफ्टी एफएमसीजी आज डेढ़-डेढ़ फीसदी से अधिक तो ऑटो, पीएसयू बैंक और रियल्टी सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स 1-1% से अधिक मजबूत हुए।

मार्केट की रौनक में आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप आज करीब ₹3 लाख करोड़ बढ़ गया यानी निवेशकों की दौलत में करीब ₹3 लाख करोड़ का इजाफा हुआ है। आज सेंसेक्स (Sensex) 544.39 प्वाइंट्स यानी 0.70% के उछाल के साथ 78,639.03 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 390.70 प्वाइंट्स यानी 1.60 के उछाल के साथ 24,774.30 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 800.46 प्वाइंट्स चढ़कर 78,895.10 और निफ्टी भी 390.70 प्वाइंट्स उछलकर 24,774.30 तक पहुंचा।

₹2.98 लाख करोड़ बढ़ी निवेशकों की दौलत

एक कारोबारी दिन पहले यानी 31 जुलाई 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,87,42,524.92 करोड़ था। आज यानी 3 अगस्त 2026 को यह बढ़कर ₹4,90,40,595.36 करोड़ पर पहुंच गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹2,98,070.44 करोड़ का इजाफा हुआ है।

Sensex के 21 स्टॉक्स ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें आज 21 स्टॉक्स ग्रीन जोन में बंद हुए हैं। सबसे अधिक तेजी आज इंडिगो, टीसीएस और इंफोसिस में रही। वहीं दूसरी तरफ आज सबसे अधिक गिरावट सन फार्मा, भारती एयरटेल और मारुति में रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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187 शेयर एक साल के हाई पर

बीएसई पर आज 4595 शेयरों की ट्रेडिंग हुई। इसमें 2837 शेयर आज मजबूत हुए तो 1552 में गिरावट रही जबकि 206 में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके अलावा 187 शेयर एक साल के हाई और 67 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए। वहीं 12 शेयर अपर सर्किट पर पहुंच गए तो 12 शेयर लोअर सर्किट पर आ गए।

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Risks of MTF: ₹12000 करोड़ की सीख, दक्षिण कोरिया में हाहाकार के पांच सबक

Risks of MTF: मान लीजिए कि स्टॉक मार्केट में MTF (मार्जिन ट्रे़डिंग फैसिलिटी) चुनने वाले हर 30 में से एक को एक ही हफ्ते में मैसेज आए, ‘मार्जिन काल, फंड डालिए, नहीं तो हम बेच देंगे’, तो क्या होगा, हड़कंप मच जाएगा न। वैसे यह कल्पना नहीं रह गई और पिछले महीने जुलाई में दक्षिण कोरिया में ऐसा ही हुआ। अब सवाल ये है कि क्या भारत में भी ऐसा कुछ हो सकता है। सैमको सिक्योरिटीज के सीईओ और फाउंडर जिमीत मोदी का मानना है कि रिस्क तो बढ़ा है। उनका कहना है कि एनालिसिस में गलती हुई तो मार्केट माफ कर सकता है लेकिन अत्यधिक लेवरेज की गलती शायद माफ न हो। उनका कहना है कि दक्षिण कोरिया के निवेशकों ने यह सबक सीखने के लिए सिर्फ चार हफ्ते में करीब ₹12,000 करोड़ गंवा दिए और भारतीय निवेशकों के पास अभी भी यह मौका है कि वे बिना नुकसान उठाए इस अनुभव से सीख लें।

क्या है मामला

शुरुआत में सब शानदार चल रहा था। चिप से जुड़े स्टॉक में तेजी के चलते दक्षिण कोरिया का कोस्पी (KOSPI) इंडेक्स उछलकर जून में रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया। साथ ही कोरिया का एमटीएफ यानी मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी का लोन बुक रिकॉर्ड 38.6 ट्रिलियन वान (KRW) यानी ₹2.56 लाख करोड़ पर पहुंच गया जोकि एक साल में करीब डबल हो गया। खास बात ये है कि इस उधार लिए गए पैसे का बड़ा हिस्सा सिर्फ दो शेयरों, सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) और एसके हाइनिक्स (SK Hynix), में लगाया गया था जिनका कोस्पी इंडेक्स में आधे से अधिक हिस्सा है।

फिर बाजार ने गोता लगाया और गिरावट इतनी तेज रही कि कोस्पी जून महीने के रिकॉर्ड हाई से करीब 40% टूट गया। इसके बाद करीब 12 लाख रिटेल अकाउंट्स को मार्जिन कॉल मिले और इनमें से 3.20 लाख-3.60 लाख निवेशकों के शेयर जबरन बेच दिए गए। जबरन बिकवाली से शेयरों की कीमतें और नीचे आईं, जिससे और अधिक निवेशकों को मार्जिन कॉल मिले। इससे खुदरा निवेशकों को करीब 2.15 ट्रिलियन वान (KRW) यानी करीब ₹12 हजार करोड़ की दौलत सिर्फ एक महीने में खत्म हो गई। सबसे अधिक नुकसान 20 से 30 साल की उम्र के निवेशकों को हुआ, जिनकी हिस्सेदारी इस पूरे नुकसान में 62% रही।

भारत के लिए क्या है चेतावनी

भारतीय मार्केट में एमटीएफ बुक FY23 में लगभग ₹25,000 करोड़ से बढ़कर अब ₹1.44 लाख करोड़ से अधिक हो गया है यानी तीन साल में लगभग छह गुना बढ़ोतरी। इस पर सेबी की नजर तो है और सेबी ने एमटीएफ पर एक्सपोजर लिमिट और रिस्क से जुड़े नियम का प्रस्ताव पेश किया है, जिन्होंने हमें कोरिया जैसी बुरी स्थितियों से पहले ही बचा लिया है। हालांकि ध्यान दें कि रेगुलेशन सिर्फ नियम बनाता है, सही फैसला लेने की समझ नहीं देता और वह जिम्मेदारी निवेशकों की खुद की है। यहां ऐसे ही कुछ रिस्क के बारे में बताया जा रहा है, जिन पर ध्यान देना चाहिए-

कम लिक्विडिटी वाले शेयरों के लिए भी लेवरेज: ब्रोकर करीब 1,500 शेयरों पर एमटीएफ की फैसिलिटी दे रहे हैं। फिलहाल इंडस्ट्री के एमटीएफ बुक का एक बड़ा हिस्सा एफएंडओ सेगमेंट से बाहर के ऐसे स्मॉल-कैप और मिड-कैप शेयरों में है जो लगातार लोअर सर्किट में जा सकते हैं, जिससे अचानक मुश्किल आने पर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचता। कोरिया के निवेशकों के शेयर कम से कम किसी कीमत पर तो बिके थे, लोअर सर्किट पर तो शेयर बिकेगा भी नहीं।

नया सिस्टम: एटीएफ का चलन सिर्फ 3-4 साल में तेजी से बढ़ा है। कोरोना महामारी के बाद अभी यहां कोस्पी जैसी स्थिति आई नहीं है जिसका मतलब है कि ₹1.44 लाख करोड़ के लेवरेज ने असली आंधी का सामना नहीं किया है।

युवाओं की अधिक संख्या: एटीएफ का इस्तेमाल कोरियाई मार्केट की तरह अधिकतर युवा ही कर रहे हैं जिन्होंने अधिकतर सिर्फ चढ़ता हुआ मार्केट ही देखा है।

पांच बातों का रखें ख्याल

लेवरेज लोन है, स्ट्रैटेजी नहीं: शेयर परफॉर्म करे या नहीं, सालाना 10-15% की दर से ब्याज देना पड़ता है। 50% मार्जिन पर खरीदे गए स्टॉक से फंडिंग कॉस्ट निकालने के लिए ही सालाना 5% से ज़्यादा रिटर्न मिलना ज़रूरी है। उधार के पैसे से कोई खराब निवेश नहीं बन जाता, बल्कि और खराब हो जाता है।

कुछ ही स्टॉक्स में न लें लवरेज: दक्षिण कोरिया की सबसे बड़ी गलती केवल लीवरेज लेना नहीं था, बल्कि सिर्फ दो शेयरों में भारी निवेश करना था। अगर आपके भी एमटीएफ वाले अधिकतर निवेश सिर्फ दो-तीन स्टॉक्स में हैं, जिनमें बाकी लोग भी पैसे डाल रहे हैं तो गिरावट आने पर सभी लोग एक साथ बेचने की कोशिश करेंगे और ऐसी स्थिति में नुकसान अधिक तेजी से बढ़ सकता है।

मार्जिन कॉल आ सकती है खराब समय में: अच्छी कंपनी में भी एमटीएफ निवेश से घाटा हो सकता है। इसकी वजह ये है कि मार्जिन कॉल हमेशा सबसे खराब समय में आती है। लोअर सर्किट में ब्रोकर को भी खरीदार नहीं मिलेगा और मार्केट अगर अनुमान से अधिक समय तक नीचे आया और गिरवी रखा पैसा यानी कोलैटरल उतने समय के लिए पर्याप्त न हो तो दिक्कत हो सकती है।

अधिकतम मुनाफा नहीं, बल्कि लंबे समय तक टिके रहने की योजना: हर मार्केट में कभी न कभी 25% से 30% की गिरावट आती ही है। दक्षिण कोरिया में यह गिरावट सिर्फ चार सप्ताह में आ गई। ऐसे में एमटीएफ का इस्तेमाल से पहले खुद से एक प्रश्न पूछे कि क्या अगर अगले महीने मेरा शेयर 30% गिर जाए, तो क्या मैं बिना किसी अन्य निवेश को बेचे इस स्थिति से निकल सकता हूं? अगर इसका जवाब ना में है तो आपका निवेश बहुत बड़ा है।

खुद से जरूर पूछें एक सवाल: अगर आप किसी शेयर को बिना उधार लिए हुए पैसे के साथ लॉन्ग टर्म तक नहीं रख सकते, तो इसे उधार लेकर भी नहीं खरीदना चाहिए क्योंकि लेवरेज सिर्फ उस भरोसे को बढ़ाना चाहिए जो आपके पास पहले से है। यह उस भरोसे की जगह नहीं ले सकता जो आपके पास है ही नहीं।

Market Outlook: मिडकैप और स्मॉलकैप ने तोड़ा दो हफ्ते की गिरावट का सिलसिला, Nifty के लिए ये है सपोर्ट-रेजिस्टेंस

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Market Outlook: मिडकैप और स्मॉलकैप ने तोड़ा दो हफ्ते की गिरावट का सिलसिला, Nifty के लिए ये है सपोर्ट-रेजिस्टेंस

Market Outlook: दो हफ्ते से जारी गिरावट के सिलसिले को तोड़ते हुए निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 पिछले कारोबारी हफ्ते 2-2% से अधिक मजबूत हुए। इसे कंपनियों की जून तिमाही के उम्मीद से बेहतर नतीजे, वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताओं के कम होने, कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट, बेहतर मॉनसून, आईआईपी के उम्मीद से बेहतर आंकड़े और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली से अधिक खरीदारी से सपोर्ट मिला। पिछले हफ्ते सेंसेक्स 2,034.87 प्वाइंट्स यानी 2.67% मजबूत होकर 78,094.64 तो निफ्टी 616.15 प्वाइंट्स यानी 2.59% चढ़कर 24,383.60 पर बंद हुआ है।

पिछले कारोबारी हफ्ते निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 2% से अधिक चढ़कर अपने 63,183.35 के रिकॉर्ड हाई के करीब पहुंच गया। इस पर कोफोर्ज, लौरस लैब्स, स्विगी, कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) और अशोक लेलैंड टॉप गेनर्स रहे और पिछले हफ्ते इनमें 10% से अधिक की तेजी आई। वहीं दूसरी तरफ सुजलॉन एनर्जी, फीनिक्स मिल्स, बिलियनब्रेन्स गैराज वेंचर्स (ग्रो), बैंक ऑफ इंडिया और एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस टॉप लूजर्स रहे।

पिछले कारोबारी हफ्ते निफ्टी स्मॉलकैप 100 भी 2.6% बढ़कर अपने 52-हफ्ते के हाई 19,470.50 के करीब पहुंच गया। रेडिंगटन, केन्स टेक्नोलॉजी इंडिया, फर्स्टसोर्स सॉल्यूशंस, ब्रिगेड एंटरप्राइजेज, एफ्ल 3i, आईआईएफएल फाइनेंस, केफिन टेक्नोलॉजीज और आईएफसीआई के शेयरों में 24% तक की तेजी आई, जबकि नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट, डेटा पैटर्न्स (इंडिया), ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी और सिटी यूनियन बैंक टॉप लूजर्स रहे।

सेक्टरवाइज पिछले कारोबारी हफ्ते सबसे मजबूत निफ्टी आईटी हुई जिसमें 6.75% की तेजी आई। वहीं इस दौरान निफ्टी मीडिया 5.97%, निफ्टी ऑटो 5.61%, निफ्टी फार्मा 3.86%, निफ्टी हेल्थकेयर 3.20% और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 2.89% मजबूत हुआ। वहीं निफ्टी डिफेंस और निफ्टी एनर्जी रेड जोन में बंद हुआ।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने पिछले कारोबारी हफ्ते ₹5,949.96 करोड़ के नेट शेयर खरीदकर लगातार दो हफ्तों से जारी बिकवाली का सिलसिला तोड़ दिया। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी ₹5,387.66 करोड़ का निवेश किया। इस दौरान बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹10 लाख करोड़ से अधिक बढ़ गया।

किस तरफ बढ़ रहा मार्केट

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च हेड (वेल्थ मैनेजमेंट) सिद्धार्थ खेमका के मुताबिक शेयर मार्केट में तेजी का रुख बने रहने की उम्मीद है क्योंकि घरेलू मैक्रो-इकनॉमिक हालत बेहतर है और जून तिमाही के मजबूत नतीजों से निवेशकों का भरोसा बना हुआ है। अगले कारोबारी हफ्ते मार्केट की नजर आरबीआई की मौद्रिक नीतियों के ऐलान, देश के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज पीएमआई डेटा के साथ-साथ कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिमी एशिया में जियो-पॉलिटिकल टेंशन पर रहेगी। सिद्धार्थ के मुताबिक जून तिमाही का अर्निंग्स सीजन अलग-अलग शेयरों में हलचल बनाए रखेगा।

रेलिगेयर ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अजीत मिश्र का कहना है कि तकनीकी रूप से निफ्टी ने 24,370 के आस-पास 200-दिनों के EMA की अहम रुकावट को पार करके अपने बुलिश स्ट्रक्चर को और मजबूत किया है। अजीत के मुताबिक अब यह 24,600 के लेवल की तरफ बढ़ने की अच्छी स्थिति में दिख रहा है, जो पिछले स्विंग हाई के बराबर है। अजीत के मुताबिक अगर निफ्टी इस जोन के ऊपर मजबूत स्थिति में ब्रेकआउट करता है, तो 24,800-25,000 की तरफ बढ़ने का रास्ता खुल सकता है। वहीं नीचे की तरफ 24,270 का लेवल तत्काल सपोर्ट का काम कर रहा है, और उसके बाद 24,150-24,050 का लेवल मुख्य सपोर्ट जोन है। अजीत का कहना है कि इस सपोर्ट के ऊपर हर गिरावट को खरीदारी के मौके के तौर पर देखा जा सकता है। उनका ऑटो और फार्मा सेक्टर पर भरोसा बना हुआ है।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नागराज शेट्टी का कहना है कि निफ्टी फिलहाल 24350-24400 के लेवल के आसपास अहम रेजिस्टेंस जोन पर है जोकि 8 जुलाई का पिछला ओपनिंग डाउन गैप, 17 जुलाई का पिछला स्विंग हाई और 200-दिनों का EMA है। ऐसे में बड़ा ब्रेकआउट दिखाने से पहले रेजिस्टेंस के आसपास निफ्टी में कंसोलिडेशन या थोड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि निफ्टी का अंडरलाइंग ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है। नागराज का कहना है कि निफ्टी अगर 24400 के ऊपर टिकता है, तो जल्द ही यह 24600-24700 के लेवल तक जा सकता है। इसे 24200 के लेवल पर तत्काल सपोर्ट मिल रहा है।

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